Category: Economy

  • 1 अप्रैल से बदलेगा इनकम टैक्स सिस्टम, जानिए आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

    1 अप्रैल से बदलेगा इनकम टैक्स सिस्टम, जानिए आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर


    नई दिल्ली  1 अप्रैल 2026 से देश में नया सीआरएचआर सिस्टम लागू होने जा रहा है, जो 64 साल पुराने सीआरएचआर एक्ट 1961 की जगह है। सेंट्रल कर बोर्ड (सीबीडीटी) द्वारा अधिसूचित नए जोखिम नियम 2026 का उद्देश्य प्रणाली को सबसे सरल, संयमित और विवाद-मुक्त बनाना है। हालांकि टैक्स ढांचे और नामांकन में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन पुराने में कई बड़े बदलाव किए गए हैं, एकसमान प्रभाव वाली नौकरी पेशा, स्नातक और छूट पर।

    ‘टैक्स वर्ष’ समाप्त हो जाएगा

    नए सिस्टम में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ‘फाइनेंशियल ईयर’ और ‘एसेसमेंट ईयर’ की जगह सिर्फ एक ही “टैक्स ईयर” होगा। इस टैक्स रिटर्न की प्रक्रिया आसान होगी और लोगों को अलग-अलग टर्म सिग्नल की जरूरत नहीं होगी।

    साथ ही, रिटर्न्स फाइलिंग की नई समयसीमा भी तय कर दी गई है

    सामान्य करदाता: 31 जुलाई
    व्यवसाय/प्रोफेशन: 31 अगस्त
    इंजेक्शन केस: 31 अक्टूबर (विशेष मामला 30 नवंबर तक)
    अब कर वर्ष समाप्त होने के 12 महीने बाद तक संवैधानिक रिटर्न का भी भुगतान किया जा रहा है।

    एचआरए और नई पीढ़ी पर ध्यान

    हाउस रेंटलाउंस (एचआरए) को लेकर नियम सख्त किए गए हैं। अब छूट पाने के लिए मकान मालिक और किरायेदार के बिजनेस की जानकारी देना जरूरी होगा।

    राहत की बात यह है कि मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई के साथ अब रेजिडेंट, पुणे, पुणे और सुपरमार्केट जैसे शहरों में रहने वालों को 50% तक HRA की छूट मिलेगी। अन्य शहरों में यह सीमा 40% ही रहेगी।

    यदि एलएलसी व्यवसाय 1 लाख रुपये से अधिक है तो मकान मालिक के लिए पैन कार्ड अनिवार्य होगा।

    जॉबपेशा को राहत: परक्विजिट और अलाउंस में बदलाव

    होम होम (परक्विजिट) के टैक्स वैल्यू में कटौती की गई है, जिससे कर्मचारियों को दी गई कंपनी को छूट मिल जाएगी।

    बड़ा शहर: 10% दर
    मध्यम शहर: 7.5%
    छोटा शहर: 5%

    कंपनी की कार पर टैक्स भी तय किया गया है:

    1.6 लीटर तक: ₹5,000/माह
    इससे अधिक: ₹7,000/माह
    ड्राइवर होने पर: ₹3,000 अतिरिक्त

    इसके अलावा-

    फ़ार्सी: ₹200 प्रति मील (पहले ₹50)
    उपहार/वाउचर: ₹15,000 तक कर-मुक्त
    शिक्षा अलाउंस: ₹3,000/माह (2 बच्चे तक)
    कॉर्पोरेट अलाउंस: ₹9,000/मह
    बड़ी राहत के लिए

    नए के तहत 10 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले को विस्तृत विवरण पुस्तिका और रेटिंग से छूट दी जा सकती है (कुछ प्रतिशत के साथ)। इससे छोटे बच्चों का सामान खर्च कम होगा और बिजनेस करना आसान होगा।

    नवजात शिशु के लिए साफ नियम

    अब यह साफ हो गया है कि किसी निवेश की अवधि कितनी होगी। विशेष रूप से कन्वर्टिबल नताशा (जैसे बॉन्ड से शेयर) में पुराने स्टॉक अवधि भी जोड़ी जाएगी। इससे शॉर्ट टर्म और लार्गे टर्म कैपिटल को हासिल करना आसान होगा। नए सिस्टम को कम करना, जगह देना और टैक्सपेयर्स को राहत की दिशा में बड़ा कदम देना है। जहां कुछ नियम सख्त किए गए हैं, वहीं कई जगहों पर राहत भी दी गई है, जिससे टैक्सिंग और स्टाफ स्टाफ आसान हो जाएगा।

  • भारत की फार्मा इंडस्ट्री का जलवा, उत्पादन में दुनिया में तीसरे और मूल्य में 11वें स्थान पर

    भारत की फार्मा इंडस्ट्री का जलवा, उत्पादन में दुनिया में तीसरे और मूल्य में 11वें स्थान पर


    नई दिल्ली भारत की मेडिसिनल इंडस्ट्री आज वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और भरोसेमंद पहचान बनी है। प्रोडक्ट (वॉल्यूम) के आधार पर भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादन उत्पादक देश है, जबकि मूल्य (वॉल्यूम) के खाते से 11वें स्थान पर है। देश में 3,000 से ज्यादा दवा निर्माता और 10,500 से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां काम कर रही हैं, जो इस सेक्टर की विशालता और कारोबार को खत्म कर रही हैं। तेजी से मजबूत मांग, मजबूत उत्पादन क्षमता और कम्युनिस्ट पार्टी में उछाल ने भारत को “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” के रूप में स्थापित किया है।

    तेजी से बढ़ता घरेलू बाज़ार और भागीदार

    भारत का घरेलू दवा बाजार करीब 60 अरब डॉलर का है और अनुमान है कि 2030 तक यह उछाल 130 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में इस सेक्टर का कुल कारोबार 4.72 करोड़ लाख रुपये तक पहुंच गया। पिछले एक दशक में दवाओं में सामान्यतः 7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। खास बात यह है कि भारत का ड्रग कंट्रोलर 2000-01 के 1.9 अरब डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 30.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो लगभग 16 गुना बढ़ गया है।

    जेनेरिक औषधियों में भारत का बाज़ार

    भारत दुनिया में जेनेरिक केरीज़ का सबसे बड़ा सप्लायर है और ग्लोबल स्टॉकहोम में उसका स्टॉक 20 प्रतिशत के करीब है। देश में करीब 60 अलग-अलग मेडिकल स्टोर्स में 60,000 से ज्यादा जेनेरिक दवाइयां बनाई जाती हैं। न केवल भारत में स्वास्थ्य सेवाएँ बेहतर हैं, बल्कि दुनिया भर के देशों के लिए भी भारत एक प्रतिष्ठित बाज़ार बन गया है।

    मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और गुणवत्ता पर भरोसा

    भारत में अमेरिका के सबसे अधिक ऐसे मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं, जिनमें अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (यूएसएफडीए) के अनुमोदन शामिल हैं। यह भारतीय औषधियों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर वैश्विक मान्यता का बड़ा प्रमाण है। देश में करीब 500 एक्टिवेशन प्रोडक्शन रॉ माल (एपीआई) का उत्पादन होता है, जो ग्लोबल ग्लोबल मार्केट का करीब 8 प्रतिशत हिस्सा है।

    वैक्सीन पॉडकास्ट में भी भारत अग्रणी

    भारत वैक्सीन उत्पादन में दुनिया के प्रमुख देशों में भी शामिल है। डिप्थीरिया, टिटनस, काली खांसी (डीपीटी), बीसीजी और खसरा जैस वैक्सीन की भारत में बड़ी भूमिका है। यूनिसेफ भारत को लगभग 60 प्रतिशत वैक्सीन पोस्ट करता है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की खसरा वैक्सीन की मांग का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा भारत पूरा करता है। यह वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली में भारत की अहम भूमिका शामिल है।

    व्यापार घटनाक्रम और भविष्य की डेट

    यूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम और न्यूजीलैंड जैसे देशों के प्रस्तावित और औद्योगिक व्यापार भारतीय दवा सेक्टर को और प्लेसमेंट देंगे। इससे बाजार नए खुलेंगे, निवेश बढ़ेगा और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। सरकार की शुरूआत, विदेशी निवेश और इनोवेशन पर बड़ा फोकस इस सेक्टर को नई ऊंचाई तक ले जा रहा है।

    भारत की औषधि उद्योग न केवल देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बन गया है, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आने वाले वर्षों में इसका विस्तार और प्रभाव और भी बढ़ने की पूरी संभावना है।

  • सोना सस्ता, पेट्रोल-डीजल हुआ महंगा: आम आदमी पर दोहरी मार, जानिए आज का पूरा अपडेट

    सोना सस्ता, पेट्रोल-डीजल हुआ महंगा: आम आदमी पर दोहरी मार, जानिए आज का पूरा अपडेट


    नई दिल्ली। देश में आज आर्थिक मोर्चे पर मिली-जुली तस्वीर देखने को मिली है। जहां एक तरफ सोने की कीमतों में गिरावट आई है, वहीं दूसरी तरफ इंडस्ट्रियल डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी ने चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय हालात, खासकर इजरायल-ईरान संघर्ष का असर अब भारत के बाजार में साफ दिखाई दे रहा है।

    सोने के दाम में गिरावट
    21 मार्च 2026 को सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना ₹650 सस्ता होकर ₹1,52,650 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। पिछले कारोबारी दिन यह ₹1,53,300 पर बंद हुआ था। हालांकि, वायदा बाजार MCX पर सोने में हल्की तेजी देखी गई और कीमत ₹1,44,825 प्रति 10 ग्राम पहुंच गई। इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 24 कैरेट: ₹1,47,218, 23 कैरेट: ₹1,46,628, 22 कैरेट: ₹1,34,852, 18 कैरेट: ₹1,10,41, 14 कैरेट: ₹86,123, देश के प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और पटना में 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.50 लाख के आसपास बना हुआ है।

    इंडस्ट्रियल डीजल के दाम में बड़ा उछाल
    तेल कंपनियों ने इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में एक साथ ₹22 प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। अब इसकी कीमत बढ़कर ₹109.59 प्रति लीटर हो गई है, जो पहले ₹87.67 थी। इस बढ़ोतरी की जानकारी Indian Oil Corporation ने दी है। नई कीमतें 20 मार्च 2026 से लागू कर दी गई हैं। डीजल के दाम बढ़ने के पीछे मुख्य कारण हैं मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, खासकर इजरायल-ईरान संघर्ष कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें सप्लाई चेन में बाधा इंडस्ट्रियल डीजल सीधे आम वाहनों में इस्तेमाल नहीं होता, लेकिन इसका असर हर किसी की जेब पर पड़ता है, ट्रांसपोर्ट महंगा होगा फैक्ट्रियों की लागत बढ़ेगी बिजली उत्पादन महंगा होगा रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं जहां सोने की कीमतों में गिरावट से खरीदारों को थोड़ी राहत मिली है, वहीं डीजल के बढ़ते दाम आने वाले समय में महंगाई को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में आम आदमी को एक तरफ राहत और दूसरी तरफ महंगाई की मार दोनों का सामना करना पड़ सकता है।

  • लगातार चौथे हफ्ते बाजार में गिरावट, मिडिल ईस्ट संकट से Nifty 50-BSE Sensex पर दबाव

    लगातार चौथे हफ्ते बाजार में गिरावट, मिडिल ईस्ट संकट से Nifty 50-BSE Sensex पर दबाव


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आ रहा है। लगातार चौथे हफ्ते बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। वैश्विक अनिश्चितता, महंगे कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार की दिशा पर दबाव बनाए रखा।

    निफ्टी-सेंसेक्स का प्रदर्शन

    सप्ताह के दौरान निफ्टी 50 में 0.16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, हालांकि आखिरी कारोबारी दिन यह 0.49 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,114.50 पर बंद हुआ। वहीं बीएसई सेंसेक्स हफ्ते के आखिर में 325.72 अंकों (0.44%) की तेजी के साथ 74,532.96 पर बंद हुआ, लेकिन पूरे हफ्ते में इसमें 0.04 प्रतिशत की हल्की गिरावट रही।

    तेल की कीमतों से बढ़ती चिंता

    वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिससे महंगाई और भारत के व्यापार घाटे को लेकर चिंता बढ़ गई है। यही वजह है कि जींस का रुख सतर्क बना हुआ है और बाजार पर दबाव बना हुआ है।

    सेक्टर आधारित प्रदर्शन

    इस हफ्ते सेक्टरों में मिलाजुला रुख देखने को मिला। आईटी और पीएसयू बैंकिंग सर्विसेज ने अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि मेटल सेक्टर में भी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मेटल इंडेक्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई।
    हालांकि, व्यापक बाजार में कमजोरी नजर आई-मिडकैप में मामूली बढ़त और स्मॉलकैप में गिरावट देखने को मिली।

    रुपये में गिरावट और FII की बिकवाली

    भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.49 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इसके पीछे डॉलर की मजबूत मांग और विदेशी जींस (FII) की लगातार बिकवाली प्रमुख कारण रहे। पिछले 13 ट्रेडिंग सत्रों में एफआईआई करीब 81,263 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं।

    निफ्टी की राय

    मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका के अनुसार, निकट अवधि में बाजार का रुख सतर्क ही रहेगा। निफ्टी कच्चे तेल के दाम और पश्चिम एशिया का तनाव जींस की भावना को प्रभावित कर रहा है।

    विश्लेषकों के अनुसार:

    निफ्टी के लिए 23,850 तत्काल रेजिस्टेंस है
    इसके बाद 24,000 और 24,150 अहम स्तर होंगे
    नीचे की ओर 22,950 और 22,700 मजबूत सपोर्ट हैं

    वहीं बैंक निफ्टी के लिए 52,000–53,000 का फाइलरा सपोर्ट और 54,000–55,000 रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

    पश्चिम एशिया के हालात, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की रिकवरी आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करें। यदि निवेशकों को सतर्क रहकर सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव के चलते रुपये में भारी गिरावट… पहली बार ₹93 प्रति डॉलर के पार

    मिडिल ईस्ट तनाव के चलते रुपये में भारी गिरावट… पहली बार ₹93 प्रति डॉलर के पार


    नई दिल्ली।
    भारतीय रुपया (Indian Rupee.) शुक्रवार, 20 मार्च को पहली बार 93 प्रति अमेरिकी डॉलर (93 Per US Dollar) के स्तर को पार गया। शुरुआती कारोबार (Initial business) में रुपया 3 पैसे गिरकर 92.92 पर खुला और बाद में 93.08 तक फिसल गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले 18 मार्च को रुपया 92.63 के स्तर तक गिरा था, जिसे अब पार कर लिया गया है।


    क्यों टूट रहा है रुपया?

    1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड करीब $120 प्रति बैरल तक पहुंच गया। हालांकि शुक्रवार को यह घटकर $107 के आसपास आ गया, लेकिन अभी भी ऊंचे स्तर पर है। तेल महंगा होने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है।


    2. डॉलर की बढ़ती मांग:
    ऊंचे इंपोर्ट बिल के कारण कंपनियां ज्यादा डॉलर खरीद रही हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है।


    3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली:
    मार्च में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से $8 अरब से ज्यादा निकाल लिए हैं। यह जनवरी 2025 के बाद सबसे बड़ा आउटफ्लो है।

    4. मजबूत होता अमेरिकी डॉलर: वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर डॉलर की ओर जा रहे हैं, जिससे डॉलर मजबूत हो रहा है और अन्य मुद्राएं कमजोर।


    डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट: आपकी जेब पर कैसे पड़ता है असर?

    डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि आम लोगों की मुश्किलें भी बढ़ा देती है। जब रुपया कमजोर होता है, तो इसका सीधा असर महंगाई और आपके महीने के बजट पर पड़ता है। आइए समझते हैं कि रुपये में गिरावट क्यों होती है और इसका असर आप पर कैसे पड़ता है।


    महंगाई बढ़ती है

    भारत अपनी जरूरत का 75% से 80% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। जब रुपया कमजोर होता है, तो तेल आयात महंगा हो जाता है। अनुमान के मुताबिक, डॉलर के मुकाबले रुपये में 1 रुपये की गिरावट से तेल कंपनियों पर करीब 8,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इस वजह से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ जाते हैं, जिससे महंगाई बढ़ती है। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में 10% बढ़ोतरी से महंगाई लगभग 0.8% तक बढ़ सकती है। इसका असर खाने-पीने की चीजों और ट्रांसपोर्ट खर्च पर साफ दिखता है।


    दवाएं और पढ़ाई महंगी

    कई जरूरी दवाएं भारत में विदेशों से आती हैं। रुपये के कमजोर होने से इन दवाओं की कीमत बढ़ जाती है। इसके अलावा विदेश में पढ़ाई महंगी हो जाती है। विदेश यात्रा का खर्च बढ़ जाता है। होटल और खाने-पीने पर ज्यादा खर्च करना पड़ता है।


    विकास योजनाओं पर असर

    सरकार तेल कंपनियों को सब्सिडी देती है ताकि जनता को राहत मिल सके, लेकिन जब डॉलर महंगा होता है, तो सरकार का खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार को विकास योजनाओं (जैसे सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा) पर खर्च कम करना पड़ सकता है। इसका असर आम लोगों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ता है।


    सरकारी खजाने पर दबाव

    देश में आने और जाने वाली विदेशी मुद्रा के अंतर को चालू खाता घाटा (CAD) कहते हैं। जब आयात ज्यादा होता है, तो देश से ज्यादा डॉलर बाहर जाता है और CAD बढ़ जाता है। भारत में सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा तेल और सोने के आयात पर खर्च होती है।

    गिरावट थामने के लिए RBI क्या कर रहा है?
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मार्च में अब तक 15 अरब डॉलर से ज्यादा बेचकर रुपये को संभालने की कोशिश की है। वित्तीय वर्ष के अंत (मार्च) में RBI का हस्तक्षेप आमतौर पर बढ़ जाता है, जिससे थोड़ी राहत मिल सकती है।


    आगे क्या?

    विश्लेषकों के अनुसार जब तक तेल कीमतें ऊंची रहेंगी, रुपये पर दबाव बना रहेगा, विदेशी निवेश का आउटफ्लो जारी रह सकता है। RBI का हस्तक्षेप ही फिलहाल बड़ा सपोर्ट है। शॉर्ट टर्म में रुपया कमजोर रह सकता है।

  • New इनकम टैक्स एक्ट.. बायबैक से लेकर HRA तक… 1st April से बदल जाएंगे ये 8 बड़े नियम

    New इनकम टैक्स एक्ट.. बायबैक से लेकर HRA तक… 1st April से बदल जाएंगे ये 8 बड़े नियम


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय वित्त मंत्रालय (Union Finance Ministry) ने 20 मार्च 2026 को इनकम टैक्स नियम-2026 (New Income-Tax Rules 2026) के ड्राफ्ट को ई-गजट में नोटिफाई (Notified in e-Gazette) और पब्लिश कर दिया है। 1 अप्रैल 2026 से यह इनकम टैक्स एक्ट लागू हो जाएगा। नया नियम 1961 के नियमावली की जगह लेगा। आइए जानते हैं कि 1 अप्रैल से क्या कुछ बदल रहा है?


    1-HRA में हो रहा है बड़ा बदलाव

    आयकर नियम वेतनभोगी करदाताओं पर लागू होने वाले एचआरए (HRA) छूट के लिए प्रस्तावित ढांचे को बरकरार रखते हैं। नए नियमों के तहत आठ शहर – मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु – वेतन के 50 प्रतिशत की उच्च छूट सीमा के लिए पात्र होंगे। पहले इस दायरे में मात्र तीन ही शहर थे। अन्य सभी स्थान पर छूट की सीमा 40 प्रतिशत पर बनी रहेगी। बता दें, यह छूट ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत ही मिलेगी।


    2- बच्चों की शिक्षा से जुड़े खर्च

    बच्चों की शिक्षा पर मिलने वाले प्रति माह छूट को 100 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये कर दिया गया है। वहीं, एक बच्चे पर हॉस्टल खर्च को भी 300 रुपये से बढ़ाकर 9000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। यह छूट भी ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत मिलेगी।


    3- कॉरपोरेट/कंपनी की गाड़ी

    ऑफिस कार्य या व्यक्तिगत कार्य के लिए कंपनी की तरफ से मिली 1.6 लीटर के इंजन वाली कार पर 8000 रुपये प्रति माह टैक्स लगेगा। वहीं, 1.6 लीटर इंजन से अधिक के वाहनों पर 10,000 महीने का टैक्स लगेगा। यह नियम नए और पुराने दोनों टैक्स कानून में है।


    4- मील कार्ड्स

    नए नियमों में मील कार्ड्स की लिमिट को भी 50 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये कर दिया गया है। अब 200 रुपये तक के कॉरपोरेट मील कार्ड्स कोई टैक्स नहीं लगेगा। हालांकि, यह छूट ओल्ड टैक्स रिजीम में ही है।


    5- कूपन और गिफ्ट कार्ड्स

    ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत प्रत्येक वर्ष 15000 रुपये तक के कॉरपोरेट गिफ्ट्स कार्ड्स, गिफ्ट सर्टीफिकेट और कूपंस पर छूट मिलेगी।


    6- सेक्टर भत्ता

    किसी भी ट्रांसपोर्ट सिस्टम में काम करने वाले कर्मचारियों को मिलने वाले भत्ते की लिमिट को 10,000 रुपये या भत्ते का 70 प्रतिशत से बढ़ाकर 25000 रुपये या भत्ते का 70 प्रतिशत कर दिया गया है।


    7- सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स में इजाफा

    फ्यूचर्स पर एसटीटी को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं, ऑप्शंस ट्रांजैक्शन पर 0.1 प्रतिशत बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया है। यह टैक्स हर एक खरीद और बिक्री पर लागू होगा।


    8- बायबैक पर लगेगा टैक्स

    बायबैक के जरिए मिले हर एक राशि पर टैक्स 1 अप्रैल 2026 से लगेगा। अगले महीने की पहली तारीख से कॉरपोरेट प्रमोटर्स को ‘differential buyback tax’ के तहत 22 प्रतिशत और नॉन कॉरपोरेट प्रमोटर्स को 30 प्रतिशत टैक्स देना होगा।

  • गुजरात का आर्थिक लक्ष्य बड़ा, 2030 तक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का सपना: CM भूपेंद्र पटेल

    गुजरात का आर्थिक लक्ष्य बड़ा, 2030 तक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का सपना: CM भूपेंद्र पटेल


    नई दिल्ली।  गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने शुक्रवार को कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) के राज्य वार्षिक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य 2030 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह पर उद्योग है। उन्होंने उद्योग जगत को इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार द्वारा सभी के समर्थन और अनुमोदित प्रस्ताव की आवश्यकता बताई।

    प्रधानमंत्री की परिकल्पना और गुजरात का विकास

    सीएम पटेल ने कहा कि गुजरात के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकास पथ की परिकल्पना कर रहे हैं। उन्होंने बताया, “इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार उद्योग उद्यमियों के साथ मिलकर सभी को सहयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है।”

    उन्होंने गुजरात के औद्योगिक विकास के प्रारंभिक चरण का भी ज़िक्र किया। एक समय था जब विकास केवल वापी और वडोदरा तक ही सीमित था। लेकिन समग्र विकास की दृष्टि से पानी, बिजली और सौंदर्य प्रसाधनों को मजबूत किया गया और पूरे राज्य में निवेश आकर्षित किया गया।

    वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन और वैश्विक निवेश

    सीएम ने 2003 में शुरू हुए वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए कहा था कि अन्य कलाकारों का विश्वास हासिल करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने माइक्रोन टेक्नोलॉजी द्वारा संचालित बौद्ध निवेशों को गुजरात में उन्नत उद्यमों के प्रवेश का उदाहरण बताया।

    पटेल ने कहा, “प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वैश्विक स्तर पर विश्वास मजबूत हुआ है, जिससे सेमीकंडक्टर और अन्य हाई-टेक उद्योग गुजरात में आ रहे हैं। कभी-कभी जो प्रभावशाली लगता था, वह अब राज्य में वास्तविकता बना रहा है।”

    गुजरात के आर्थिक नामांकन

    मुख्यमंत्री ने प्रमुख आर्थिक आँकड़ों का मूल्यांकन करते हुए बताया कि राज्य की जनसंख्या भारत की कुल जनसंख्या लगभग 5 प्रतिशत है, जबकि सांख्यिकी में योगदान लगभग 8 प्रतिशत है। इस सहायक को 10 प्रतिशत से अधिक करना लक्ष्य है।

    देश के उत्पादन उत्पादन में 17 प्रतिशत, कुल मिलाकर 33 प्रतिशत, और देश के 40 प्रतिशत माल का प्रबंधन राज्य है। उन्होंने अलग-अलग भूमिका के योगदान का भी उल्लेख किया:

    रसायन उद्योग में 33 प्रतिशत

    दवा में 19.2 प्रतिशत

    किसानों के बाज़ार में 80 प्रतिशत

    एमएसएमई और नीति-संचालन राज्य

    पटेल ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) की संख्या 2001-02 में 1.85 लाख से बढ़कर अब 27.9 लाख हो गई है। उन्होंने गुजरात को नीति-संचालन राज्य के बारे में बताया और कहा कि उद्योग उद्यमियों के लिए हर स्तर पर पुष्टि की जा रही है। भूपेन्द्र पटेल ने कहा कि राज्य में ‘2047 तक विकसित भारत’ के लक्ष्य के लिए एक रोडमैप तैयार किया गया है, जिसे लागू करना शुरू कर दिया गया है।

  • ईंधन की कीमतें स्थिर, LPG की आपूर्ति बनाए रखने के लिए सरकार के सभी प्रयास जारी

    ईंधन की कीमतें स्थिर, LPG की आपूर्ति बनाए रखने के लिए सरकार के सभी प्रयास जारी


    नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को साफ किया कि आम आदमी के लिए इस्तेमाल होने वाले आम पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की गई है। सिर्फ प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़ाए गए हैं, जो कुल बिक्री का सिर्फ 3-4 परसेंट हिस्सा बनता है।

    सरकार की ब्रीफिंग

    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने डेली ब्रीफिंग में बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें कंट्रोल फ्री (डीरेगुलेटेड) हैं और इन्हें तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) द्वारा तय किया जाता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल के दाम 2 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा बढ़ा दिए हैं।

    एलपीजी सप्लाई बनी रहेगी

    सुश्री शर्मा ने कहा कि देश में एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और कहीं भी गैस खत्म होने की स्थिति नहीं है। उत्पादन बढ़ाया गया है ताकि सप्लाई बेकार बनी रहे। हालांकि, उन्होंने माना कि भारत पूरी तरह ऊर्जा आत्मनिर्भर नहीं है और अभी भी आयात पर निर्भर है।

    स्थिति संभालने के लिए 13,700 से ज़्यादा पन्नों के कनेक्शन दिए गए हैं, ताकि एलपीजी पर दबाव कम हो सके। पिछले एक हफ़्ते में 11,300 टन कोयले की सप्लाई एलपीजी की सप्लाई की गई है। इसके अलावा, करीब 7,500 कंज्यूमर एलपीजी से पन्नों की ओर शिफ्ट हो चुके हैं।

    उन्होंने बताया कि घबराहट में गैस बुकिंग में कमी आई है और एक दिन में लगभग 55 लाख रीफिल बुकिंग हुई हैं। सरकार लगातार सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए नए सोर्स तलाश रही है और राज्यों से सख्त निगरानी और डिस्ट्रीब्यूशन में बाधा न आने की अपील की गई है।

    ईरान से तेल खरीद और समुद्री सुरक्षा

    सुश्री शर्मा ने ईरान से तेल खरीदने के सवाल पर कहा कि इस पर इंतज़ार कुछ भी कहना मुश्किल है। वहीं, पट्टन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि पिछले 24 घंटे में कोई समुद्री घटना नहीं हुई है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास मौजूद 22 भारतीय जहाज और सभी नाविक सुरक्षित हैं।

    अंतरराष्ट्रीय तनाव और घरेलू स्थिति

    पश्चिम एशिया में तनाव और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच सरकार ने यह संदेश दिया है कि साधारण पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखीं। वहीं, प्रीमियम पेट्रोल पर हुई मामूली बढ़ोतरी केवल उच्च ऑक्टेन वाले महंगाई पर असर डाल सकती है। सरकार के प्रयास यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि ऊर्जा आपूर्ति लगातार बनी रहे और घरेलू बाजार में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी न आए।

  • जोमैटो यूज़र्स के लिए अपडेट, प्रति ऑर्डर शुल्क हुआ बढ़कर लगभग 15 रुपए

    जोमैटो यूज़र्स के लिए अपडेट, प्रति ऑर्डर शुल्क हुआ बढ़कर लगभग 15 रुपए


    नई दिल्ली। ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो ने अपने प्लेटफॉर्म फीस में 19.2 प्रतिशत यानी 2.40 रुपये प्रति ऑर्डर की बढ़ोतरी कर दी है। ऐप के लेटेस्ट बिलिंग डेटा के अनुसार, अब प्लेटफॉर्म फीस 14.90 रुपये प्रति ऑर्डर होगी, जो पहले 12.50 रुपये थी।

    फीस बढ़ोतरी के पीछे कारण

    प्लेटफॉर्म फीस में यह बदलाव ऐसे समय पर हुआ है जब एलपीजी की प्लेटफॉर्म में पहुंचा हुआ है, जिससे रेस्टोरेंट और फूड डिलीवरी कंपनियों की लागत बढ़ेगी है। जोमैटो ने यह कदम यूनिट इकोनॉमिक्स और मार्जिन सुधार के उद्देश्य से उठाया है, ताकि बढ़ती परिचालन लागतों के बीच संचालन को स्थिर रखा जा सके।

    फीस बढ़ोतरी का इतिहास

    जोमैटो ने प्लेटफॉर्म फीस में आखिरी बार सितंबर 2025 में बदलाव किया था। इससे पहले, फरवरी 2025 में त्योहारी सीजन के दौरान यह फीस 6 रुपये प्रति ऑर्डर से बढ़कर 10 रुपये कर दिया गया था। अगस्त 2023 में कंपनी ने प्रति ऑर्डर 2 रुपये का प्लेटफॉर्म फीस लागू किया था, जिसे बाद में प्रमुख बाजारों में धीरे-धीरे बढ़ाया गया।

    प्रतिस्पर्धी कंपनियों की तुलना

    प्रतिद्वंद्वी कंपनी स्विगी वर्तमान में कर सहित 14.99 रुपए प्रति ऑर्डर प्लेटफॉर्म फीस ले रही है। इसका मतलब है कि जोमैटो और स्विगी की प्लेटफॉर्म फीस अब लगभग बराबर हो गई है।

    शेयर बाजार में असर

    जोमैटो की पेरेंट कंपनी इटरनल के शेयर शुक्रवार को 1.55 प्रतिशत यानी 3.55 रुपए की तेजी के साथ 232.29 रुपए पर बंद हुए। दिन के दौरान शेयर ने 236.70 रुपए का सर्वोच्च स्तर और 230.10 रुपए का न्यूनतम स्तर जारी किया।

    वित्तीय प्रदर्शन

    दिसंबर तिमाही के बढ़ोतरी में कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रेशर इंडेक्स आधार पर 72.88 प्रतिशत बढ़कर 102 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले साल समान अवधि में 59 करोड़ रुपए था। इसी दौरान कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू करीब तीन गुना बढ़कर 16,315 करोड़ रुपए हो गया, जो कि एक साल पहले समान अवधि में 5,405 करोड़ रुपए था।

    ब्रांडिंग और भविष्य की योजना

    मार्च 2025 में जोमैटो ने अपने आपको इटरनल के नाम से रीब्रांड किया था। प्लेटफॉर्म फीस में यह बढ़ोतरी कंपनी की लॉन्ग-टर्म बढ़ोतरी और स्टेबिलिटी सुनिश्चित करने की स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। बढ़ती ऑपरेटिंग कॉस्ट और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए, फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म भविष्य में भी अपनी प्राइस स्ट्रक्चर और फीस मॉडल में बदलाव कर सकते हैं।

  • फ्लिपकार्ट के वित्तीय नेतृत्व में हड़कंप, सीएफओ श्रीराम वेंकटरमन का इस्तीफा

    फ्लिपकार्ट के वित्तीय नेतृत्व में हड़कंप, सीएफओ श्रीराम वेंकटरमन का इस्तीफा


    नई दिल्ली दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी इलेक्ट्रॉनिक्स ने शुक्रवार को घोषणा की कि उनके मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) श्रीराम वेंकटरमैन कंपनी छोड़ देंगे। वेंकटरमैन ने कंपनी में एक दशक से अधिक समय तक सेवा दी है। हालाँकि, उन्होंने अगले कुछ महीनों तक अपनी भूमिका नहीं छोड़ी, ताकि बदलाव की प्रक्रिया क्रमिक रूप से पूरी तरह से हो सके।

    वित्त विभाग में अंतरिम व्यवस्था

    कंपनी ने बताया कि यह कदम फाइनेंशियल ऑपरेशन की स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। इस दौरान रवि अभिनव अंतरिम रूप से कंपनी के वित्त विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगे, जब तक नए सीएफओ की नियुक्ति नहीं हो जाती।

    आई मंडल की तैयारी के बीच बदलाव

    यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब भारत में अपनी आई.आई.वी. की तैयारी कर रही है। लीडरशिप में बदलावों की नज़रों में महत्वपूर्ण घटनाएँ होती हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उसकी डिजाइन योजना तय समय पर आगे बढ़ रही है। साथ ही, बेकर ने अपनी लीडरशिप टीम को मजबूत करते हुए निशांत वर्मा को सचिवालय और मैड्रिडशिप के लिए सीनियर वाइस प्रेसिडेंट नियुक्त किया है। यह संकेत बताता है कि कंपनी अपने अगले पैमाने के चरणों के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स का नवीनीकरण कर रही है।

    वित्तीय प्रदर्शन: राजस्व में वृद्धि, घाटा बढ़ा

    मार्च 2025 में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में कंपनी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का समेकित घाटा 5,189 करोड़ रुपये तक बढ़ गया। पिछले वित्तीय वर्ष 2024 में यह घाटा 4,248.3 करोड़ रुपये था।

    हालाँकि, कुल राजस्व 17.3 प्रतिशत प्रतिशत 82,787.3 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 70,541.9 करोड़ रुपये था। कंपनी का कुल खर्च भी इसी तरह बढ़ा, 17.4 प्रतिशत उछाल 88,121.4 करोड़ रुपये हो गया।

    स्टॉक-इन-ट्रेड और फाइनेंस कॉस्ट पर खर्च

    सबसे बड़ा खर्च स्टॉक-इन-ट्रेड की खरीद पर हुआ, जो 87,737.8 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह 74,271.2 करोड़ रुपये था। इसके अलावा, फाइनेंस कॉस्ट में 57 फीसदी की तेजी आई और यह 454 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

    भविष्य की दिशा

    इन बदलावों और वित्तीय प्रदर्शनों के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि जल्द ही आई फिल्में और सार्वजनिक बाजार में विस्तार की तैयारी की जा रही है। कंपनी का लक्ष्य मजबूत सुदृढ़ीकरण और सुव्यवस्थित वित्तीय संरचना के साथ वृद्धि और उद्यमियों का विश्वास सुनिश्चित करना है।