Category: Entertainment

  • इंडस्ट्री की चमक के पीछे का कड़वा सच कैरेक्टर आर्टिस्ट्स के साथ होता है भेदभाव

    इंडस्ट्री की चमक के पीछे का कड़वा सच कैरेक्टर आर्टिस्ट्स के साथ होता है भेदभाव


    नई दिल्ली  । बॉलीवुड और टेलीविजन इंडस्ट्री की चमक दमक दूर से जितनी आकर्षक दिखाई देती है वास्तविकता उतनी ही अलग और कई बार चौंकाने वाली होती है। पर्दे पर अपनी दमदार अदाकारी से दर्शकों का दिल जीतने वाले कई कलाकारों को पर्दे के पीछे सम्मान और सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है। हाल ही में वेब सीरीज पंचायत में क्रांति देवी का किरदार निभाकर लोकप्रिय हुईं अभिनेत्री सुनीता राजवार और अभिनेता जतिन नेगी ने इंडस्ट्री के इसी कड़वे सच को सामने रखा है।

    एक बातचीत के दौरान दोनों कलाकारों ने बताया कि फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में कलाकारों के साथ उनकी भूमिका और लोकप्रियता के आधार पर व्यवहार किया जाता है। जतिन नेगी का कहना है कि कैरेक्टर आर्टिस्ट्स को तब तक पूरा सम्मान नहीं मिलता जब तक वे परेश रावल या अनुपम खेर जैसे बड़े नाम न बन जाएं। उन्होंने बताया कि बड़े कलाकारों को कई वैनिटी वैन और पूरा स्टाफ उपलब्ध कराया जाता है जबकि कैरेक्टर आर्टिस्ट्स को सीमित सुविधाएं मिलती हैं। कई बार उन्हें अन्य कलाकारों के साथ वैनिटी वैन साझा करनी पड़ती है।

    जतिन ने कहा कि छोटे और बैकग्राउंड कलाकारों की स्थिति और भी मुश्किल होती है। उन्हें कई कलाकारों के साथ एक ही वैन शेयर करनी पड़ती है और अक्सर बुनियादी सुविधाओं के लिए भी इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार कलाकारों को उनके काम का भुगतान 90 दिनों बाद मिलता है जिससे आर्थिक परेशानियां बढ़ जाती हैं।

    अभिनेत्री सुनीता राजवार ने भी सेट पर होने वाले भेदभाव को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि यदि कोई कलाकार लीड रोल में होता है तो पूरा सेट उसी के इर्द गिर्द घूमता है। उसे बेहतर कमरे बेहतर सुविधाएं और पूरा सहयोग मिलता है। वहीं छोटे किरदार निभाने वाले कलाकारों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। कई बार स्पॉटबॉय तक उन्हें महत्व नहीं देते।

    जतिन नेगी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक समय ऐसा भी था जब वह बैकग्राउंड रोल कर रहे थे और सेट पर उन्हें खाने तक के लिए संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में कलाकारों को ए बी और सी कैटेगरी में बांट दिया जाता है। वरिष्ठ और लोकप्रिय कलाकारों के लिए अलग भोजन व्यवस्था होती है जबकि जूनियर और बैकग्राउंड कलाकारों को अलग सेक्शन में खाना दिया जाता है।

    उन्होंने एक पुराना अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक शूटिंग के दौरान उन्हें उनके गेटअप की वजह से खाने के सेक्शन में प्रवेश नहीं दिया गया। काफी देर तक समझाने और प्रोडक्शन टीम से संपर्क करने के बाद उन्हें खाना मिला। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे उन्हें समाज से अलग कर दिया गया हो। इतना ही नहीं अलग-अलग कैटेगरी के कलाकारों को दिए जाने वाले खाने की गुणवत्ता में भी बड़ा अंतर होता है।

    दोनों कलाकारों का मानना है कि इंडस्ट्री में यह भेदभाव केवल सुविधाओं तक सीमित नहीं है बल्कि सम्मान और व्यवहार में भी साफ दिखाई देता है। उनका कहना है कि प्रतिभा और मेहनत के आधार पर सभी कलाकारों को बराबरी का सम्मान मिलना चाहिए क्योंकि किसी भी फिल्म या शो की सफलता में हर कलाकार का योगदान महत्वपूर्ण होता है।

    इन खुलासों ने एक बार फिर मनोरंजन जगत की उस सच्चाई को सामने ला दिया है जिस पर अक्सर चर्चा कम होती है। दर्शकों के लिए पर्दे पर दिखने वाली भव्य दुनिया के पीछे कई ऐसे कलाकार हैं जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष के साथ-साथ असमानता का भी सामना कर रहे हैं।

  • 19 साल की दीया मिर्जा से सलमान खान ने कही थी ऐसी बात, आज भी नहीं भूलीं एक्ट्रेस

    19 साल की दीया मिर्जा से सलमान खान ने कही थी ऐसी बात, आज भी नहीं भूलीं एक्ट्रेस


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा ने हाल ही में फिल्म निर्माता और कोरियोग्राफर फराह खान के व्लॉग में अपने करियर के शुरुआती दिनों से जुड़ा एक दिलचस्प और मजेदार किस्सा साझा किया। बातचीत के दौरान दीया ने न सिर्फ अपने घर और करियर की यादें ताजा कीं बल्कि सलमान खान के साथ फिल्म तुमको न भूल पाएंगे की शूटिंग के दौरान हुई एक मजेदार घटना का भी जिक्र किया।

    फराह खान अपने कुक दिलीप के साथ दीया मिर्जा के घर पहुंचीं थीं। बातचीत के दौरान दीया ने बताया कि उन्होंने यह घर अपनी शुरुआती फिल्म तुमको न भूल पाएंगे से मिली फीस से खरीदा था। उन्होंने कहा कि यह जगह उनके लिए बेहद खास है और शहर की भागदौड़ से दूर उन्हें यहां सुकून मिलता है।

    बातचीत के दौरान दोनों ने फिल्म की शूटिंग से जुड़ी पुरानी यादों को भी साझा किया। दीया ने फराह से पूछा कि क्या उन्हें वह गाना याद है जिसकी शूटिंग के दौरान लाखों लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। इस पर फराह ने बताया कि उस दौर में कलाकारों के पास आज जैसी सुविधाएं नहीं होती थीं। कई बार कलाकारों को पेड़ों के पीछे या अस्थायी जगहों पर कपड़े बदलने पड़ते थे। फराह ने हंसते हुए कहा कि सलमान खान भी बिना किसी झिझक के वहीं कपड़े बदल लिया करते थे।

    इसके बाद बातचीत का सबसे दिलचस्प हिस्सा सामने आया। जब फराह ने दीया से कहा कि उन्हें दोबारा सलमान खान के साथ काम करना चाहिए तो दीया ने एक पुराना किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि जब वह महज 19 साल की थीं तब एक शूटिंग के दौरान उन्होंने फिल्म में सलमान खान की मां का किरदार निभा रही अभिनेत्री को देखा। दीया को लगा कि वह अभिनेत्री उम्र में काफी युवा थीं और उन्होंने इस बात का जिक्र सलमान से कर दिया।

    दीया के मुताबिक उनकी बात सुनकर सलमान खान ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि चिंता मत करो एक दिन तुम भी मेरी मां का रोल करोगी। सलमान की यह बात सुनकर उस समय सभी हंस पड़े थे। सालों बाद भी यह मजेदार टिप्पणी दीया को याद है और उन्होंने इसे बड़े ही हल्के अंदाज में साझा किया।

    बात को आगे बढ़ाते हुए फराह खान ने भी मजाक किया और अपने कुक दिलीप से पूछा कि क्या दीया सलमान खान की मां जैसी लगती हैं। इस पर दिलीप ने जवाब दिया कि नहीं वह तो उनकी छोटी बहन जैसी लगती हैं। दिलीप का जवाब सुनकर वहां मौजूद सभी लोग हंस पड़े।

    यह पूरा किस्सा न सिर्फ बॉलीवुड के पुराने दिनों की झलक दिखाता है बल्कि यह भी बताता है कि सेट पर कलाकारों के बीच किस तरह का दोस्ताना माहौल हुआ करता था। सलमान खान की मजाकिया शैली और दीया मिर्जा की सादगी ने इस यादगार घटना को एक बार फिर चर्चा में ला दिया।

  • राज कुमार की बेबाकी के आगे क्यों टिक गए ओम पुरी जानिए दिलचस्प किस्सा

    राज कुमार की बेबाकी के आगे क्यों टिक गए ओम पुरी जानिए दिलचस्प किस्सा


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में कई कलाकार अपनी मजबूत पर्सनैलिटी और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते रहे हैं और राज कुमार उनमें सबसे अलग माने जाते थे। उनकी छवि ऐसे अभिनेता की थी जो सेट पर किसी से भी बिना झिझक अपनी बात कह देते थे और कई बार यह बात सीधे तौर पर किसी की बेइज्जती जैसी लगती थी। लेकिन इसी इंडस्ट्री में एक ऐसा भी किस्सा सामने आता है जिसमें उनके सामने एक ऐसे अभिनेता आए जिनके बारे में कहा जाता है कि राज कुमार भी उनके सामने कुछ कहने से बच गए।

    यह कहानी जुड़ी है ओम पुरी से जिनका शुरुआती फिल्मी सफर काफी संघर्षों से भरा रहा। ओम पुरी जब इंडस्ट्री में आए तो उन्हें अपने लुक्स और साधारण पृष्ठभूमि के कारण कई तरह की टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। उस दौर में शबाना आजमी ने भी उनके लुक्स को लेकर हल्का सा कमेंट किया था जिससे उन्हें यह अहसास हुआ कि फिल्म इंडस्ट्री में स्वीकार किए जाना आसान नहीं होता।

    इसी माहौल में ओम पुरी के मन में यह डर भी बैठ गया था कि जब वे राज कुमार जैसे सख्त और बेबाक अभिनेता के साथ काम करेंगे तो शायद उन्हें भी किसी तरह की तीखी टिप्पणी सुननी पड़ सकती है। इस डर की वजह से उन्होंने मन ही मन यह तय कर लिया था कि अगर शूटिंग के दौरान कुछ अपमानजनक हुआ तो वह फिल्म बीच में ही छोड़ देंगे।

    लेकिन वास्तविकता उनके डर से बिल्कुल अलग साबित हुई। ओम पुरी की एक्स वाइफ सीमा कपूर ने एक इंटरव्यू में बताया कि इंडस्ट्री में नए कलाकारों को कई बार उनके सीनियर्स द्वारा टारगेट किया जाता था और उन्हें मानसिक रूप से परेशान करने की कोशिश भी होती थी। लेकिन ओम पुरी ने अपने करियर में आगे बढ़ते हुए कभी भी किसी जूनियर के साथ वैसा व्यवहार नहीं किया।

    सीमा कपूर के अनुसार जब ओम पुरी ने राज कुमार के साथ काम किया तो एक अलग ही स्थिति देखने को मिली। राज कुमार की पर्सनैलिटी और उनके अभिनय का स्तर इतना मजबूत था कि वह सामने वाले को अपने आप सम्मान देने पर मजबूर कर देता था। ओम पुरी को पूरा डर था कि शायद उनके साथ भी कुछ अपमानजनक व्यवहार होगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

    बताया जाता है कि राज कुमार ने ओम पुरी के साथ किसी तरह की बेइज्जती या तंज जैसी बात नहीं की। इसका कारण यह माना जाता है कि ओम पुरी का अभिनय और उनका गंभीर रवैया इतना प्रभावशाली था कि राज कुमार ने उनके प्रति एक अलग सम्मान बनाए रखा। यह वही दौर था जब ओम पुरी अपने काम को लेकर पूरी तरह समर्पित थे और उनकी एक्टिंग इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना रही थी।

    सीमा कपूर ने यह भी बताया कि उस समय फिल्म इंडस्ट्री में नए कलाकारों को कई तरह की मानसिक चुनौतियों से गुजरना पड़ता था लेकिन टैलेंट और आत्मविश्वास धीरे धीरे उन्हें मजबूत बनाता था। ओम पुरी ने भी इसी संघर्ष से सीखकर अपने करियर में आगे बढ़ते हुए कभी किसी के साथ गलत व्यवहार नहीं किया।

    यह किस्सा आज भी फिल्म इंडस्ट्री के उस दौर की झलक दिखाता है जब पर्सनैलिटी और टैलेंट दोनों ही किसी भी कलाकार के लिए सबसे बड़ी ताकत होते थे।

  • फिल्मफेयर 1962 की वह रात जब दिलीप कुमार रह गए पीछे राज कपूर ने मारी बाजी

    फिल्मफेयर 1962 की वह रात जब दिलीप कुमार रह गए पीछे राज कपूर ने मारी बाजी


    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर में कई ऐसे मौके आए जब दर्शकों की पसंद और अवॉर्ड के फैसलों में अंतर देखने को मिला। ऐसा ही एक यादगार किस्सा साल 1962 के फिल्मफेयर अवॉर्ड से जुड़ा है। उस समय दिलीप कुमार और राज कपूर दोनों ही अपने करियर के शिखर पर थे और दोनों की फिल्मों ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी थी। यह मुकाबला केवल दो कलाकारों के बीच नहीं था बल्कि दो अलग अलग तरह की फिल्मों और सोच के बीच भी था।

    साल 1961 में दिलीप कुमार की फिल्म गंगा जमुना ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की। इस फिल्म में उन्होंने न सिर्फ मुख्य भूमिका निभाई बल्कि इसकी कहानी और पटकथा में भी योगदान दिया। यह फिल्म ग्रामीण पृष्ठभूमि पर आधारित थी और इसमें भाईचारे सामाजिक संघर्ष और पारिवारिक भावनाओं को गहराई से दिखाया गया था। दिलीप कुमार ने गंगा नाम के किरदार में ऐसा अभिनय किया जिसे आज भी उनके सबसे मजबूत प्रदर्शनों में गिना जाता है। वैजयंती माला ने भी इस फिल्म में अहम भूमिका निभाई और कहानी को और प्रभावशाली बनाया। यह फिल्म उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल रही और इसे आलोचकों की भी खूब सराहना मिली।

    इसी दौरान राज कपूर की फिल्म जिस देश में गंगा बहती है भी चर्चा में थी। इस फिल्म में राज कपूर ने राजू नाम के एक ऐसे युवक का किरदार निभाया था जो अनाथ होता है और बाद में डाकुओं के समूह में पहुंच जाता है। कहानी में वह देखता है कि यह समूह अमीरों से लूटकर गरीबों की मदद करता है। धीरे धीरे उसका नजरिया बदलता है और वह अहिंसा और सुधार की राह पर चलता है। इस फिल्म का सामाजिक संदेश बहुत मजबूत था और यह आम जनता के बीच बेहद लोकप्रिय हुई।

    जब फिल्मफेयर अवॉर्ड 1962 में घोषणा हुई तो सभी को उम्मीद थी कि बेस्ट एक्टर का पुरस्कार दिलीप कुमार को मिलेगा क्योंकि गंगा जमुना को एक मास्टरपीस माना जा रहा था। लेकिन नतीजा चौंकाने वाला रहा और यह अवॉर्ड राज कपूर को मिल गया। उनके किरदार की सामाजिक न्याय की भावना और बदलाव की कहानी को निर्णायक माना गया। उस समय जूरी ने माना कि राज कपूर का किरदार समाज में सकारात्मक संदेश देने वाला था और यही उन्हें बढ़त दिला गया।

    इस फैसले ने फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय तक चर्चा पैदा की। एक तरफ दिलीप कुमार की गहरी भावनात्मक अभिनय शैली थी और दूसरी तरफ राज कपूर का सामाजिक संदेश से भरा चरित्र था। अंत में पुरस्कार उस किरदार को मिला जिसने सामाजिक बदलाव की सोच को दर्शाया।

    यह घटना आज भी बॉलीवुड इतिहास में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में याद की जाती है जब कला की श्रेष्ठता केवल अभिनय से नहीं बल्कि उसके सामाजिक प्रभाव से भी तय हुई।

  • वेलकम टू द जंगल में सेंसर की बड़ी कार्रवाई, अक्षय कुमार की फिल्म में लगे 18 कट, बना अनोखा रिकॉर्ड

    वेलकम टू द जंगल में सेंसर की बड़ी कार्रवाई, अक्षय कुमार की फिल्म में लगे 18 कट, बना अनोखा रिकॉर्ड


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार की आगामी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ रिलीज से पहले ही चर्चा में आ गई है। इस फिल्म में सेंसर बोर्ड ने कुल 18 बदलाव किए हैं, जिसके बाद यह अक्षय कुमार के करियर की अब तक की सबसे ज्यादा सेंसर की गई फैमिली कॉमेडी फिल्म बन गई है। फिल्म में किए गए ये बदलाव डायलॉग्स से लेकर कुछ दृश्यों तक फैले हुए हैं।

    रिपोर्ट्स के अनुसार सेंसर बोर्ड ने फिल्म में मौजूद कई डबल मीनिंग डायलॉग्स को हटाने या बदलने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा कुछ संवेदनशील संदर्भ, जिनमें कश्मीर से जुड़े जिक्र भी शामिल बताए जा रहे हैं, उन्हें भी संशोधित किया गया है। फिल्म के कुछ हिस्सों में अभिनेत्री दिशा पाटनी और जैकलीन फर्नांडिस के बिकिनी सीन्स पर भी सेंसर की नजर पड़ी है, जहां क्लोजअप शॉट्स को हटाया गया या एडिट किया गया है।

    यह पहली बार नहीं है जब अक्षय कुमार की फिल्मों पर सेंसर बोर्ड की कैंची चली हो। इससे पहले उनकी फिल्म ‘ओह माय गॉड 2’ में भी 27 कट लगाए गए थे। उस फिल्म को ए सर्टिफिकेट मिला था और बाद में यह बॉक्स ऑफिस पर सफल रही थी। वहीं ‘भूत बंगला’ में भी 5 कट किए गए थे, जिनमें कुछ एडल्ट या डबल मीनिंग कंटेंट शामिल थे।

    इसके अलावा ‘बच्चन पांडे’ और ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ जैसी फिल्मों में भी मामूली स्तर पर कट्स किए गए थे, लेकिन ‘वेलकम टू द जंगल’ इस मामले में खास इसलिए बन गई है क्योंकि इसमें सबसे ज्यादा 18 बदलाव दर्ज किए गए हैं।

    फिल्म के निर्देशक अहमद खान हैं और यह फिल्म 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। पहले ही फ्रेंचाइजी की लोकप्रियता को देखते हुए फिल्म से काफी उम्मीदें जुड़ी हैं। हालांकि सेंसर बोर्ड द्वारा किए गए इन बदलावों का असर फिल्म की कहानी और प्रस्तुति पर कितना पड़ेगा, यह रिलीज के बाद ही साफ हो सकेगा।

    फिलहाल यह फिल्म सिर्फ अपनी स्टारकास्ट या कॉमेडी के लिए नहीं, बल्कि सेंसर रिकॉर्ड के कारण भी सुर्खियों में बनी हुई है।

  • ट्रेजेडी क्वीन की असली कहानी पिता ने बचपन छीना कमाई ली और फिर उसी बेटी के लिए बंद कर दिया घर का दरवाजा

    ट्रेजेडी क्वीन की असली कहानी पिता ने बचपन छीना कमाई ली और फिर उसी बेटी के लिए बंद कर दिया घर का दरवाजा


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की दुनिया में ट्रेजेडी क्वीन के नाम से मशहूर मीना कुमारी ने अपनी अदाकारी से करोड़ों दिलों पर राज किया। पर्दे पर उनके आंसुओं ने दर्शकों को भावुक किया लेकिन उनकी असली जिंदगी का दर्द किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। जिस बेटी ने अपने परिवार को गरीबी से निकालकर सम्मान और सुख सुविधाओं से भरी जिंदगी दी उसी बेटी को एक दिन उसके पिता ने अपने ही घर से बेघर कर दिया था।

    साल 1933 में मुंबई के दादर इलाके की एक साधारण चाल में जन्मी माहजबीन बानो का बचपन अभावों और संघर्षों के बीच बीता। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल था। कहा जाता है कि जन्म के बाद हालात इतने कठिन थे कि उनके पिता ने उन्हें एक अनाथालय के बाहर छोड़ दिया था हालांकि बाद में वे उन्हें वापस घर ले आए। लेकिन गरीबी का दबाव लगातार परिवार पर बना रहा।

    जब माहजबीन मात्र चार साल की थीं तब उनके पिता ने उन्हें फिल्मों में काम करने के लिए भेज दिया। वह स्कूल जाना चाहती थीं और सामान्य बच्चों की तरह खेलना कूदना चाहती थीं लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था। निर्देशक विजय भट्ट की फिल्म लेदर फेस से उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत की और पहली बार 25 रुपये की कमाई की। यही वह शुरुआत थी जिसने आगे चलकर पूरे परिवार की तस्वीर बदल दी।

    समय के साथ माहजबीन फिल्मों की दुनिया में पहचान बनाने लगीं। उनकी कमाई बढ़ी और परिवार की आर्थिक परेशानियां दूर होने लगीं। धीरे धीरे उनकी बहनें भी फिल्मों में काम करने लगीं और परिवार चाल से निकलकर बांद्रा के एक बेहतर घर में रहने लगा। हालांकि आर्थिक स्थिति बदलने के बावजूद घर का माहौल नहीं बदला। बेटियों की जिंदगी के फैसले लेने का अधिकार अब भी परिवार के मुखिया के पास ही था।

    यही वह दौर था जब माहजबीन की जिंदगी में निर्देशक कमाल अमरोही आए। दोनों एक दूसरे के करीब आए और उन्होंने चुपचाप शादी कर ली। माहजबीन जानती थीं कि उनके पिता इस रिश्ते को कभी स्वीकार नहीं करेंगे इसलिए उन्होंने इस विवाह को लंबे समय तक छिपाकर रखा। लेकिन जब यह राज खुला तो परिवार में बड़ा विवाद खड़ा हो गया।

    हालात उस समय और बिगड़ गए जब मीना कुमारी ने अपने पिता की इच्छा के विरुद्ध कमाल अमरोही की फिल्म में काम करने का फैसला किया। पिता को यह मंजूर नहीं था। नतीजा यह हुआ कि उन्होंने अपनी ही बेटी के लिए घर के दरवाजे बंद कर दिए। विडंबना यह थी कि जिस घर से उन्हें निकाला गया था वह उनकी मेहनत और कमाई से ही खरीदा गया था।

    घर छोड़ते समय मीना कुमारी ने अपने पिता को एक भावुक पत्र लिखा। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें घर से अपने कपड़ों और किताबों के अलावा कुछ नहीं चाहिए। यहां तक कि अपनी कार भी वापस भेजने की बात कही। यह पत्र उनकी संवेदनशीलता और परिवार के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

    मीना कुमारी ने अपने पूरे जीवन में परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं लेकिन जब उनकी अपनी जिंदगी कठिन दौर से गुजरी तो वह काफी हद तक अकेली रहीं। शायद यही वजह थी कि पर्दे पर उनका दर्द इतना वास्तविक लगता था। बैजू बावरा परिणीता साहिब बीबी और गुलाम तथा पाकीजा जैसी कालजयी फिल्मों में उनका अभिनय आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित है। उनकी कहानी सिर्फ एक अभिनेत्री की नहीं बल्कि त्याग संघर्ष और दर्द से भरे उस जीवन की कहानी है जिसने भारतीय सिनेमा को अमूल्य विरासत दी।

  • बिग बॉस हाउस के अंदर के चौंकाने वाले सच ,सामने आए दिव्या अग्रवाल ने खोले कई राज

    बिग बॉस हाउस के अंदर के चौंकाने वाले सच ,सामने आए दिव्या अग्रवाल ने खोले कई राज


    नई दिल्ली । बिग बॉस रियलिटी शो हमेशा से दर्शकों के बीच उत्सुकता और विवाद का केंद्र रहा है जहां कैमरों की निगरानी में रहने वाले कंटेस्टेंट्स की निजी जिंदगी को लेकर कई तरह की चर्चाएं होती रहती हैं अब बिग बॉस ओटीटी के पहले सीजन की विनर दिव्या अग्रवाल ने शो को लेकर कई ऐसे खुलासे किए हैं जिन्होंने एक बार फिर इस शो की सच्चाइयों पर बहस छेड़ दी है

    दिव्या अग्रवाल हाल ही में एक पॉडकास्ट में शामिल हुईं जहां उन्होंने बिग बॉस हाउस के अंदर के नियमों अनुभवों और आमतौर पर फैलने वाली अफवाहों पर खुलकर बात की उन्होंने बताया कि घर के अंदर कई चीजें बाहर से दिखने से बिल्कुल अलग होती हैं और कई बार दर्शकों की कल्पनाएं वास्तविकता से काफी दूर होती हैं

    उन्होंने खाने पीने और राशन से जुड़े नियमों का जिक्र करते हुए कहा कि घर के अंदर सामान्य चीजें भी लग्जरी बन जाती हैं जैसे कॉफी और केचअप जैसी साधारण चीजें भी आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं कंटेस्टेंट्स को सीमित राशन में ही अपना गुजारा करना पड़ता है और कई बार उन्हें जुगाड़ के सहारे काम चलाना पड़ता है

    इसी बातचीत में दिव्या ने सिगरेट को लेकर भी एक अहम बात साझा की उनके अनुसार सिगरेट को बिग बॉस हाउस में अलग तरह से देखा जाता है और यह कंटेस्टेंट्स को नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाती है उन्होंने यह भी कहा कि कंटेस्टेंट्स से उनकी पसंद के ब्रांड तक पूछे जाते हैं ताकि उन्हें वही दिया जा सके

    शराब को लेकर सबसे ज्यादा फैली अफवाहों पर दिव्या ने साफ कहा कि बिग बॉस हाउस के अंदर किसी भी तरह की शराब या अल्कोहल की अनुमति नहीं होती उन्होंने इन सभी दावों को गलत बताया और कहा कि यह सिर्फ बाहर की कल्पनाएं हैं जबकि वास्तविकता इससे अलग है

    शो के अंदर रिश्तों और निजी व्यवहार को लेकर पूछे जाने वाले सवालों पर भी दिव्या ने बेबाकी से जवाब दिया उन्होंने इशारों में कहा कि कैमरों के बावजूद घर के अंदर कई तरह की निजी स्थितियां बनती हैं लेकिन हर चीज को दिखाया या प्रसारित नहीं किया जाता इस पर शो के फॉर्मेट और नियमों की सीमाएं लागू होती हैं

    इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि दर्शक और लोग उनसे कई अजीब सवाल पूछते हैं जैसे घर के अंदर क्या क्या चीजें संभव हैं और क्या वहां ऐसी सुविधाएं होती हैं जिनकी लोग कल्पना करते हैं उन्होंने इन सवालों को मनोरंजक लेकिन अक्सर गलतफहमी पर आधारित बताया

    कुल मिलाकर दिव्या अग्रवाल के इन खुलासों ने एक बार फिर बिग बॉस हाउस के अंदर की जिंदगी को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है और यह चर्चा तेज कर दी है कि असलियत और टीवी पर दिखने वाली कहानी के बीच कितना बड़ा अंतर होता है

  • दिलीप कुमार जीते लेकिन अनारकली हार गई 1961 के अवॉर्ड्स में बीना राय ने रचा था इतिहास

    दिलीप कुमार जीते लेकिन अनारकली हार गई 1961 के अवॉर्ड्स में बीना राय ने रचा था इतिहास

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ किरदार ऐसे हैं जो समय की सीमाओं को पार कर अमर हो जाते हैं। ऐसा ही एक किरदार था मुगल ए आजम की अनारकली जिसे मधुबाला ने अपने अभिनय से जीवंत कर दिया था। आज भी जब भारतीय सिनेमा की महान अभिनेत्रियों का जिक्र होता है तो मधुबाला और उनका अनारकली का किरदार सबसे पहले याद किया जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि जिस भूमिका ने उन्हें दुनिया भर में पहचान दिलाई उसी किरदार के लिए वह फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतने से चूक गई थीं।

    साल 1960 हिंदी सिनेमा के लिए स्वर्णिम दौर माना जाता है। इसी वर्ष मुगल ए आजम चौदहवीं का चांद बरसात की रात और कई अन्य शानदार फिल्में रिलीज हुई थीं। इन फिल्मों ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की बल्कि अभिनय संगीत और कहानी के स्तर पर भी नए मानक स्थापित किए। इनमें मुगल ए आजम सबसे बड़ी और चर्चित फिल्म बनकर उभरी। फिल्म की भव्यता कलाकारों के अभिनय और संगीत ने इसे भारतीय सिनेमा की कालजयी कृति बना दिया।

    फिल्म में सलीम के किरदार में दिलीप कुमार और अनारकली के रूप में मधुबाला की जोड़ी को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। खासतौर पर मधुबाला का अभिनय इतना प्रभावशाली था कि लोगों ने उन्हें अनारकली के रूप में हमेशा के लिए अपने दिलों में बसा लिया। यही कारण था कि 1961 के फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का प्रबल दावेदार माना जा रहा था।

    जब पुरस्कार समारोह का आयोजन हुआ तो मुगल ए आजम को कुल 11 नामांकन मिले। फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार अपने नाम किया और दिलीप कुमार को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया। लेकिन सबसे बड़ा आश्चर्य उस समय हुआ जब सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के विजेता के नाम की घोषणा की गई। सभी को उम्मीद थी कि यह सम्मान मधुबाला को मिलेगा लेकिन पुरस्कार अभिनेत्री बीना राय के नाम रहा।

    बीना राय को यह सम्मान फिल्म घूंघट में उनके शानदार अभिनय के लिए दिया गया था। उस वर्ष सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री की दौड़ में मधुबाला के अलावा नूतन जैसी प्रतिभाशाली अभिनेत्री भी शामिल थीं लेकिन बीना राय ने सभी को पीछे छोड़ते हुए यह प्रतिष्ठित पुरस्कार अपने नाम कर लिया। यह परिणाम उस दौर में काफी चर्चा का विषय बना था क्योंकि अधिकांश लोग मधुबाला को ही विजेता मान रहे थे।

    बीना राय अपने समय की बेहद लोकप्रिय और सम्मानित अभिनेत्री थीं। उन्होंने कई यादगार फिल्मों में काम किया और अपनी सशक्त अदाकारी से दर्शकों का दिल जीता। वर्ष 1953 में आई फिल्म अनारकली में भी उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी और इस किरदार के लिए खूब सराहना बटोरी थी। बाद में ताज महल जैसी फिल्मों में भी उनका अभिनय चर्चा में रहा।

    बीना राय का संबंध कपूर खानदान से भी जुड़ा हुआ था। उन्होंने अभिनेता प्रेमनाथ से विवाह किया था। प्रेमनाथ की बहन कृष्णा राज कपूर थीं जो महान अभिनेता और फिल्मकार राज कपूर की पत्नी थीं। इस रिश्ते से बीना राय कपूर परिवार का हिस्सा बन गई थीं। यही कारण है कि उनका नाम हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित फिल्मी परिवारों से भी जुड़ा रहा।

    1961 का फिल्मफेयर अवॉर्ड समारोह कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। इस समारोह ने यह संदेश दिया कि पुरस्कार केवल लोकप्रियता के आधार पर नहीं बल्कि कलाकारों के अभिनय और काम की गुणवत्ता के आधार पर दिए जाते हैं। यही वजह है कि उस वर्ष मधुबाला जैसी दिग्गज अभिनेत्री भी पुरस्कार से चूक गईं और बीना राय ने अपने शानदार अभिनय के दम पर इतिहास रच दिया।

  • मुन्ना भाई एमबीबीएस में नहीं दिखा वह सीन जिसने बाद में 3 इडियट्स के क्लाइमैक्स को यादगार बना दिया

    मुन्ना भाई एमबीबीएस में नहीं दिखा वह सीन जिसने बाद में 3 इडियट्स के क्लाइमैक्स को यादगार बना दिया


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय फिल्मों में शामिल मुन्ना भाई एमबीबीएस और 3 इडियट्स के बीच एक दिलचस्प कड़ी सामने आई है। मशहूर निर्देशक राजकुमार हिरानी ने खुलासा किया है कि 3 इडियट्स का एक बेहद चर्चित और भावुक दृश्य दरअसल पहले मुन्ना भाई एमबीबीएस की स्क्रिप्ट का हिस्सा था। हालांकि उस समय इसे फिल्म से हटा दिया गया लेकिन वर्षों बाद यही विचार नए रूप में 3 इडियट्स में नजर आया और दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरने में सफल रहा।

    साल 2003 में रिलीज हुई मुन्ना भाई एमबीबीएस ने भारतीय सिनेमा में एक नया अध्याय लिखा था। संजय दत्त और अरशद वारसी की जोड़ी ने दर्शकों को हंसाया भी और भावुक भी किया। फिल्म की कहानी और उसके किरदार आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस फिल्म की स्क्रिप्ट में कई ऐसे दृश्य भी लिखे गए थे जो बाद में अंतिम संस्करण का हिस्सा नहीं बन पाए।

    राजकुमार हिरानी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने मुन्ना भाई एमबीबीएस के लिए एक खास दृश्य लिखा था जो मुख्य किरदार मुन्ना के जीवन में बड़ा बदलाव लाने वाला था। कहानी के अनुसार एक रात मुन्ना और सर्किट शराब पीकर सड़क पर घूम रहे होते हैं। शहर में कर्फ्यू लगा होता है और सन्नाटा पसरा होता है। तभी एक छोटा बच्चा घबराया हुआ उनके पास आता है और बताता है कि उसकी मां को प्रसव पीड़ा हो रही है लेकिन कोई एम्बुलेंस या डॉक्टर मदद के लिए उपलब्ध नहीं है।

    जब बच्चे को पता चलता है कि मुन्ना डॉक्टर बनने की पढ़ाई कर रहा है तो वह उसे अपने साथ चलने के लिए मजबूर कर देता है। मुन्ना के पास कोई वास्तविक चिकित्सकीय अनुभव नहीं होता लेकिन वह फिल्मों में देखी गई बातों के आधार पर मदद करने की कोशिश करता है। वह लोगों से गर्म पानी और जरूरी सामान लाने को कहता है और हालात को संभालने का प्रयास करता है।

    कहानी के अनुसार अंततः बच्चे का जन्म हो जाता है और जब मुन्ना पहली बार नवजात को अपनी गोद में उठाता है तब उसके भीतर एक बड़ा भावनात्मक परिवर्तन आता है। उसी पल उसे जीवन की कीमत और अपने पेशे की जिम्मेदारी का एहसास होता है। यही दृश्य उसके किरदार के विकास में महत्वपूर्ण मोड़ बनने वाला था।

    हालांकि बाद में यह पूरा दृश्य फिल्म से हटा दिया गया। लेकिन राजकुमार हिरानी को इस विचार की ताकत पर पूरा भरोसा था। इसलिए वर्षों बाद जब उन्होंने 3 इडियट्स बनाई तो इसी भावनात्मक आधार को नए अंदाज में इस्तेमाल किया। फिल्म में रैंचो आपात स्थिति में पिया की बहन की डिलीवरी करवाता है। यह दृश्य न सिर्फ फिल्म के सबसे यादगार पलों में शामिल हुआ बल्कि इसके जरिए वायरस के किरदार का हृदय परिवर्तन भी दिखाया गया।

    3 इडियट्स में यह दृश्य दर्शकों के लिए रोमांच भावनाओं और प्रेरणा का अनूठा मिश्रण साबित हुआ। शायद यही वजह है कि आज भी यह सीन फिल्म के सबसे चर्चित हिस्सों में गिना जाता है।

    राजकुमार हिरानी का यह खुलासा बताता है कि कई बार फिल्म निर्माण के दौरान हटाए गए विचार भी वर्षों बाद नई कहानी में जगह पाकर इतिहास रच देते हैं। मुन्ना भाई एमबीबीएस से निकलकर 3 इडियट्स तक पहुंचा यह दृश्य इसका बेहतरीन उदाहरण है।

  • 37 साल बाद टूटी चुप्पी ओए ओए गर्ल सोनम खान ने अफेयर की अफवाहों पर बताया पूरा सच

    37 साल बाद टूटी चुप्पी ओए ओए गर्ल सोनम खान ने अफेयर की अफवाहों पर बताया पूरा सच


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की चर्चित फिल्म त्रिदेव का सुपरहिट गाना ओए ओए आज भी लोगों की जुबान पर है। इस गाने ने जहां फिल्म को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया वहीं अभिनेत्री सोनम खान को भी रातोंरात लोकप्रिय बना दिया। हालांकि इस सफलता के साथ एक ऐसी अफवाह भी जुड़ गई जो वर्षों तक उनका पीछा करती रही। दावा किया जाता था कि सोनम खान को यह गाना और फिल्म में विशेष महत्व इसलिए मिला क्योंकि उनका फिल्म के निर्देशक राजीव राय के साथ अफेयर चल रहा था। अब करीब 37 साल बाद अभिनेत्री ने खुद सामने आकर इस पूरे मामले की सच्चाई बताई है।

    सोनम खान ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए उन सभी चर्चाओं और अफवाहों पर विराम लगाने की कोशिश की जो दशकों से उनके नाम के साथ जुड़ी हुई थीं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब त्रिदेव की शूटिंग शुरू हुई थी तब वह और राजीव राय किसी भी तरह के प्रेम संबंध में नहीं थे। इतना ही नहीं दोनों उस समय अलग अलग लोगों के साथ रिश्ते में थे।

    सोनम ने बताया कि त्रिदेव के पहले दिन की शूटिंग और उनके पहले बड़े गाने के साथ ही पहली बड़ी अफवाह ने जन्म लिया था। फिल्म की रिलीज के बाद यह धारणा बना दी गई कि निर्देशक के साथ करीबी रिश्तों के कारण उन्हें फिल्म में बाकी अभिनेत्रियों से ज्यादा महत्व मिला। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग थी।

    अभिनेत्री ने अपने पोस्ट में खुलासा किया कि राजीव राय उन्हें फिल्म में लेने के पक्ष में भी नहीं थे। उन्होंने पहले किसी दूसरी अभिनेत्री को फिल्म में लेने की योजना बनाई थी और लगभग बातचीत भी पूरी कर ली थी। सोनम के अनुसार निर्देशक ने उनकी पिछली फिल्म के कुछ दृश्य देखे थे और वह उनसे प्रभावित नहीं हुए थे। ऐसे में उन्हें फिल्म में लेना राजीव राय की पहली पसंद नहीं बल्कि मजबूरी बन गया था क्योंकि अन्य विकल्प उपलब्ध नहीं थे।

    सोनम ने यह भी कहा कि उस समय राजीव राय अपनी गर्लफ्रेंड के साथ थे जबकि उनका अपना बॉयफ्रेंड भी शूटिंग स्थल के आसपास मौजूद रहता था। ऐसे में दोनों के बीच किसी तरह के गुप्त रिश्ते या रोमांस की बात पूरी तरह निराधार थी। उन्होंने कहा कि न तो कोई सीक्रेट मुलाकात होती थी और न ही कोई छिपा हुआ प्रेम प्रसंग था।

    दिलचस्प बात यह है कि बाद में परिस्थितियां बदलीं और त्रिदेव की रिलीज के काफी समय बाद सोनम खान और राजीव राय एक दूसरे के करीब आए। उस समय दोनों अपने अपने पुराने रिश्तों से बाहर निकल चुके थे और सिंगल थे। इसके बाद दोनों ने एक दूसरे को डेट करना शुरू किया और उनका रिश्ता आगे बढ़ता गया। आखिरकार वर्ष 1991 में दोनों ने शादी कर ली। हालांकि यह रिश्ता भी हमेशा कायम नहीं रह सका और साल 2016 में दोनों अलग हो गए।

    त्रिदेव की बात करें तो यह फिल्म अपने दौर की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में सनी देओल जैकी श्रॉफ नसीरुद्दीन शाह माधुरी दीक्षित और अमरीश पुरी जैसे दिग्गज कलाकार नजर आए थे। वहीं ओए ओए गाना आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय गीतों में गिना जाता है।

    सोनम खान का यह खुलासा न केवल एक पुरानी अफवाह का अंत करता है बल्कि यह भी दिखाता है कि फिल्मी दुनिया में कई बार बिना सच्चाई जाने बनाई गई धारणाएं कलाकारों का वर्षों तक पीछा करती रहती हैं।