Category: Entertainment

  • अक्षय कुमार से अरशद वारसी तक, ‘वेलकम टू द जंगल’ की स्टारकास्ट की नेटवर्थ ने खींचा ध्यान; करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं कलाकार

    अक्षय कुमार से अरशद वारसी तक, ‘वेलकम टू द जंगल’ की स्टारकास्ट की नेटवर्थ ने खींचा ध्यान; करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं कलाकार

    नई दिल्ली । बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ इन दिनों अपनी भव्य स्टारकास्ट और बड़े पैमाने पर तैयार किए गए मनोरंजन पैकेज को लेकर चर्चा में है। फिल्म में 30 से अधिक कलाकारों को शामिल किया गया है, जिनमें हिंदी सिनेमा के कई दिग्गज और लोकप्रिय चेहरे मौजूद हैं। ट्रेलर रिलीज होने के बाद दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है। हालांकि फिल्म की कहानी और कलाकारों के किरदारों के साथ-साथ उनकी आर्थिक हैसियत भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

    फिल्म का नेतृत्व अभिनेता Akshay Kumar कर रहे हैं, जो लंबे समय से हिंदी सिनेमा के सबसे सफल और व्यस्त सितारों में गिने जाते हैं। तीन दशक से अधिक समय के करियर में उन्होंने अनेक सुपरहिट फिल्मों के जरिए न केवल लोकप्रियता हासिल की है बल्कि बड़ी संपत्ति भी अर्जित की है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार उनकी कुल संपत्ति हजारों करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच चुकी है, जिससे वे फिल्म की स्टारकास्ट में सबसे प्रभावशाली आर्थिक स्थिति रखने वाले कलाकारों में शामिल हैं।

    फिल्म में Suniel Shetty भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अभिनय के साथ-साथ होटल, फिटनेस और अन्य व्यवसायों में निवेश के कारण उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। वर्षों से मनोरंजन उद्योग में सक्रिय रहने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत मानी जाती है। इसी तरह Raveena Tandon भी लंबे समय से फिल्म उद्योग का हिस्सा रही हैं और सफल अभिनय करियर के दम पर उल्लेखनीय संपत्ति अर्जित कर चुकी हैं।

    दिग्गज अभिनेता Jackie Shroff भी इस मल्टीस्टारर परियोजना का हिस्सा हैं। कई दशकों से सक्रिय जैकी श्रॉफ ने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई है। फिल्मों, विज्ञापनों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के जरिए उन्होंने भी मजबूत आर्थिक आधार तैयार किया है। उनकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है और नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी उनकी अच्छी पहचान है।

    फिल्म में हास्य का प्रमुख आकर्षण बनने जा रहे Johnny Lever को हिंदी सिनेमा के सबसे सफल कॉमेडियनों में गिना जाता है। दशकों तक दर्शकों को हंसाने वाले जॉनी लीवर ने अपनी प्रतिभा और निरंतर सक्रियता के बल पर उल्लेखनीय संपत्ति अर्जित की है। कॉमेडी जगत में उनकी स्थिति आज भी बेहद मजबूत मानी जाती है और वे देश के सबसे समृद्ध हास्य कलाकारों में शामिल हैं।

    इसके अलावा Disha Patani और Jacqueline Fernandez जैसी अभिनेत्रियां भी फिल्म का हिस्सा हैं। फिल्मों, ब्रांड एंडोर्समेंट और सोशल मीडिया लोकप्रियता के कारण दोनों कलाकारों ने मनोरंजन उद्योग में मजबूत आर्थिक स्थिति बनाई है। युवा दर्शकों के बीच उनकी लोकप्रियता फिल्म को अतिरिक्त आकर्षण प्रदान करती है।

    फिल्म की स्टारकास्ट में Tusshar Kapoor और Arshad Warsi भी शामिल हैं। विशेष रूप से अरशद वारसी ने कॉमेडी और चरित्र भूमिकाओं के जरिए वर्षों में मजबूत पहचान बनाई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उनकी संपत्ति भी सैकड़ों करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच चुकी है, जिससे वे फिल्म के सबसे संपन्न कलाकारों में गिने जाते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ‘वेलकम टू द जंगल’ केवल अपनी कहानी या हास्य तत्वों के कारण ही नहीं, बल्कि एक साथ इतने बड़े और प्रभावशाली सितारों की मौजूदगी के कारण भी चर्चा में है। फिल्म में शामिल कलाकारों की सामूहिक लोकप्रियता और आर्थिक हैसियत इसे वर्ष की सबसे चर्चित मल्टीस्टारर फिल्मों में शामिल कर रही है। दर्शकों को उम्मीद है कि यह फिल्म मनोरंजन, कॉमेडी और स्टारपावर का शानदार मिश्रण साबित होगी।

  • सिनेमाघरों के बाद अब ओटीटी पर छाएगी ‘दृश्यम 3’, मोहनलाल की सस्पेंस थ्रिलर की रिलीज डेट का हुआ ऐलान

    सिनेमाघरों के बाद अब ओटीटी पर छाएगी ‘दृश्यम 3’, मोहनलाल की सस्पेंस थ्रिलर की रिलीज डेट का हुआ ऐलान

    नई दिल्ली । मलयालम सिनेमा की सबसे चर्चित और सफल फ्रेंचाइजी में शामिल ‘दृश्यम’ का तीसरा भाग अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार है। सिनेमाघरों में शानदार प्रदर्शन के बाद मोहनलाल अभिनीत ‘दृश्यम 3’ की ओटीटी रिलीज डेट आधिकारिक रूप से घोषित कर दी गई है। लंबे समय से फिल्म के डिजिटल प्रीमियर का इंतजार कर रहे दर्शकों के लिए यह बड़ी खबर मानी जा रही है।

    क्राइम और सस्पेंस से भरपूर इस फिल्म ने रिलीज के बाद बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया था। दर्शकों और समीक्षकों दोनों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद अब फिल्म को डिजिटल माध्यम से और व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। फिल्म के निर्माताओं का मानना है कि ओटीटी रिलीज के जरिए देश और विदेश के करोड़ों दर्शक इस कहानी का आनंद ले सकेंगे।

    ‘दृश्यम 3’ का निर्देशन एक बार फिर जीतू जोसेफ ने किया है, जिन्होंने इस लोकप्रिय फ्रेंचाइजी के पिछले दोनों भागों को भी निर्देशित किया था। फिल्म की कहानी जॉर्जकुट्टी और उसके परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। तीसरे भाग में भी रहस्य, तनाव और अप्रत्याशित घटनाओं का ऐसा ताना-बाना बुना गया है जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखता है।

    फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी कहानी और मोहनलाल का दमदार अभिनय माना जा रहा है। जॉर्जकुट्टी के किरदार ने वर्षों से दर्शकों के बीच विशेष पहचान बनाई है। यही वजह है कि तीसरे भाग को लेकर भी काफी उत्साह देखने को मिला। फिल्म ने अपनी रिलीज के साथ ही सस्पेंस थ्रिलर पसंद करने वाले दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया था।

    अब यह फिल्म 18 जून से ओटीटी प्लेटफॉर्म प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम की जाएगी। डिजिटल रिलीज के साथ दर्शक अपने घरों में आराम से इस बहुप्रतीक्षित फिल्म का आनंद ले सकेंगे। खास बात यह है कि फिल्म केवल एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी, जिससे इसके डिजिटल प्रीमियर को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है।

    निर्माताओं ने यह भी सुनिश्चित किया है कि फिल्म अधिक से अधिक दर्शकों तक पहुंचे। इसी उद्देश्य से इसे मलयालम के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराया जाएगा। दर्शक फिल्म को तेलुगु, तमिल और कन्नड़ डब संस्करणों में भी देख सकेंगे। इससे दक्षिण भारतीय सिनेमा के प्रशंसकों को अपनी पसंदीदा भाषा में फिल्म देखने का अवसर मिलेगा।

    फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि ‘दृश्यम 3’ की ओटीटी रिलीज को शानदार प्रतिक्रिया मिल सकती है। पिछले दो भागों की लोकप्रियता और तीसरे भाग को मिले सकारात्मक प्रतिसाद को देखते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी इसके अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में जो दर्शक किसी कारणवश इसे सिनेमाघरों में नहीं देख पाए थे, उनके लिए यह फिल्म अब आसानी से उपलब्ध होगी।

    सस्पेंस, रहस्य और पारिवारिक ड्रामा के अनोखे मिश्रण से सजी ‘दृश्यम 3’ एक बार फिर जॉर्जकुट्टी की कहानी को नए मोड़ पर लेकर आती है। ओटीटी रिलीज के साथ यह फिल्म एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आने के लिए तैयार है।

  • फिल्म 'काला हिरण' की रिलीज और प्रमोशन पर रोक लगाने की मांग, दिल्ली उच्च न्यायालय में अब 19 जून को होगी अगली सुनवाई

    फिल्म 'काला हिरण' की रिलीज और प्रमोशन पर रोक लगाने की मांग, दिल्ली उच्च न्यायालय में अब 19 जून को होगी अगली सुनवाई

    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान द्वारा फिल्म ‘काला हिरण : द बैटल फॉर लेगेसी’ की रिलीज और इसके प्रचार पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की एकल पीठ ने फिल्म के निर्माता अमित जानी, जानी फायरफॉक्स फिल्म्स और अन्य संबंधित पक्षों को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने इस संवेदनशील कानूनी विवाद की अगली सुनवाई के लिए 19 जून की तारीख तय की है। सलमान खान ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि फिल्म के जरिए उनके व्यक्तित्व अधिकारों (पर्सनैलिटी राइट्स) का व्यावसायिक लाभ के लिए खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।

    अदालती कार्यवाही के दौरान सलमान खान का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता निजाम पाशा ने दलील दी कि अभिनेता के व्यक्तित्व अधिकार पहले से ही उच्च न्यायालय द्वारा संरक्षित हैं। इन विधिक अधिकारों के दायरे में सलमान खान की छवि, उनकी सार्वजनिक पहचान, उनके जैसा दिखने वाला स्वरूप और उनसे जुड़ी अन्य विशिष्ट व्यक्तिगत विशेषताएं शामिल हैं। याचिका में मुख्य रूप से 29 मई को जारी किए गए फिल्म के एक पोस्टर पर आपत्ति जताई गई है। वकील ने अदालत को बताया कि इस पोस्टर में एक व्यक्ति को हूबहू सलमान खान जैसा दिखाया गया है, जिसने कलाई में वही खास फिरोजा ब्रेसलेट पहना हुआ है, जो लंबे समय से सलमान खान की अनूठी पहचान रहा है। याचिकाकर्ता का दावा है कि फिल्म के प्रचार-प्रसार में उनकी इस पहचान का इस्तेमाल बिना किसी पूर्व अनुमति के किया जा रहा है।

    कानूनी टीम ने अदालत को यह भी अवगत कराया कि साल 1998 के बहुचर्चित काला हिरण शिकार मामले से जुड़े कुल चार मुकदमों में से तीन में सलमान खान को कानूनी रूप से राहत मिल चुकी है, जबकि केवल एक मामला वर्तमान में अपील के साथ अदालत में लंबित है। इसके बावजूद फिल्म और उससे जुड़े प्रचार प्रसार की सामग्रियों के माध्यम से अभिनेता के नाम को लगातार विवादों के साथ घसीटा जा रहा है। सार्वजनिक रूप से ऐसे बयान दिए जा रहे हैं जो उनकी सामाजिक छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।

    अभिनेता ने अपनी इस याचिका में निर्माता अमित जानी के साथ-साथ निर्देशक भरत एस. श्रीनाते, अक्षय पांडेय और अन्य संबंधित सहयोगियों को मुख्य पक्षकार बनाया है। सलमान खान की मांग है कि अदालत इस फिल्म के निर्माण, वितरण, डिजिटल या सैटेलाइट रिलीज और किसी भी प्रकार के विज्ञापन पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाए। उनका तर्क है कि उनकी सार्वजनिक छवि का इस तरह उपयोग करना कानूनी और नैतिक रूप से गलत है।

    उल्लेखनीय है कि फिल्म ‘काला हिरण : द बैटल फॉर लेगेसी’ साल 1998 के चर्चित शिकार मामले और उसके बाद के घटनाक्रमों पर आधारित बताई जा रही है, जिसका फर्स्ट लुक और ट्रेलर हाल ही में जारी किया गया था। इस कंटेंट के सामने आने के बाद सलमान खान की कानूनी टीम ने पहले ही निर्माताओं को एक कानूनी नोटिस भेजा था और अब यह मामला पूरी तरह से दिल्ली हाईकोर्ट के विचाराधीन है, जहां 19 जून को होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

  • उदय शेट्टी और मजनू भाई के ऑरा पर नाना पाटेकर के बयान का सच; अक्षय कुमार की बड़ी स्टारकास्ट वाली फिल्म को लेकर हुआ बड़ा खुलासा

    उदय शेट्टी और मजनू भाई के ऑरा पर नाना पाटेकर के बयान का सच; अक्षय कुमार की बड़ी स्टारकास्ट वाली फिल्म को लेकर हुआ बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार की बहुप्रतीक्षित कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ का आधिकारिक ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। फिल्म की विशाल स्टारकास्ट के बीच दर्शकों और प्रशंसकों ने पहले दो भागों के मुख्य आकर्षण रहे उदय शेट्टी यानी नाना पाटेकर और मजनू भाई यानी अनिल कपूर को काफी मिस किया। इसी बीच इंटरनेट पर एक स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल होने लगा, जिसमें दावा किया गया कि नाना पाटेकर ने इस तीसरी किस्त में अपनी अनुपस्थिति को लेकर फिल्म मेकर्स पर तीखा तंज कसा है। वायरल पोस्ट में लिखा था कि आप 25 एक्टर्स को तो फिल्म में ले लोगे, लेकिन उदय शेट्टी और मजनू भाई जैसा ऑरा कहां से लाओगे। इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई, लेकिन अब इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आ चुकी है।

    तथ्यों की जांच करने पर पता चला है कि इंटरनेट पर घूम रहा यह विवादित पोस्ट पूरी तरह से फर्जी और एआई जनरेटेड है। अभिनेता नाना पाटेकर ने ‘वेलकम टू द जंगल’ या उसकी स्टारकास्ट को लेकर ऐसा कोई भी कमेंट या पोस्ट अपने किसी भी सोशल मीडिया हैंडल पर साझा नहीं किया है। तकनीकी उपकरणों की मदद से तैयार किए गए इस झूठे स्क्रीनशॉट ने कुछ ही घंटों में प्रशंसकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी थी, जिसे अब पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। फिल्म के ट्रेलर लॉन्च कार्यक्रम के दौरान खुद मुख्य अभिनेता अक्षय कुमार ने इस विषय पर बात की और स्वीकार किया कि टीम ने नाना पाटेकर और अनिल कपूर को बहुत मिस किया। अक्षय कुमार ने स्पष्ट किया कि इस बार स्क्रिप्ट की मांग के अनुसार कहानी में बदलाव किए गए हैं।

    फिल्म की नई पटकथा के अनुसार, इस बार उदय और मजनू भाई के भाइयों की एंट्री कहानी में दिखाई गई है। इन नए किरदारों को बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी और अरशद वारसी निभा रहे हैं। सुनील शेट्टी जहां उदय के भाई की भूमिका में नजर आएंगे, वहीं अरशद वारसी ने मजनू के भाई का किरदार निभाया है। फिल्म की विशाल स्टारकास्ट में सुनील शेट्टी, दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडिस, अरशद वारसी, जैकी श्रॉफ, परेश रावल, रवीना टंडन, लारा दत्ता, फरीदा जलाल, जॉनी लीवर, श्रेयस तलपड़े, तुषार कपूर, राजपाल यादव और कृष्णा अभिषेक जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं।

    रिलीज हुए ट्रेलर की कहानी की बात करें तो इसमें दिखाया गया है कि एक फ्लॉप एक्टर अपने डूबते करियर को बचाने के लिए एक सुपरहिट एक्ट्रेस के साथ फिल्म साइन करता है। इस काल्पनिक फिल्म की पूरी कास्ट और क्रू शूटिंग के सिलसिले में एक सुदूर गांव में जाती है। कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब गांव वाले इस फिल्मी क्रू को सचमुच की भारतीय सेना समझ बैठते हैं और उनसे गुंडा गैंग के लीडर जैकी श्रॉफ से अपनी सुरक्षा करने की गुहार लगाते हैं। ट्रेलर के अनुसार, इस नकली फिल्म का बजट 2000 करोड़ रुपये दिखाया गया है, जो पूरी कहानी में हास्य और भ्रम की स्थितियां पैदा करता है।

    यह फिल्म सुपरहिट फ्रेंचाइजी ‘वेलकम’ का तीसरा पार्ट है। इस सिलसिले की पहली फिल्म साल 2007 में आई थी, जिसमें अक्षय कुमार, कटरीना कैफ, नाना पाटेकर, अनिल कपूर और परेश रावल मुख्य भूमिकाओं में थे। इसके बाद साल 2015 में इसका दूसरा भाग ‘वेलकम बैक’ रिलीज हुआ, जिसमें जॉन अब्राहम और श्रुति हासन के साथ नाना पाटेकर और अनिल कपूर की जोड़ी बरकरार रही थी। अब इस फ्रेंचाइजी का यह तीसरा भाग नए किरदारों और नए ट्विस्ट के साथ 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसके प्रति दर्शकों में भारी उत्सुकता बनी हुई है।

  • 'द फैमिली मैन' के फैंस के लिए ओटीटी पर थ्रिलर और सस्पेंस का नया धमाका, इस वीकेंड को रोमांचक बनाएंगी ये 6 बेहतरीन वेब सीरीज

    'द फैमिली मैन' के फैंस के लिए ओटीटी पर थ्रिलर और सस्पेंस का नया धमाका, इस वीकेंड को रोमांचक बनाएंगी ये 6 बेहतरीन वेब सीरीज

    नई दिल्ली। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर इस वीकेंड दर्शकों के लिए मनोरंजन का एक बड़ा और बेहद रोमांचक बुके तैयार है। अगर आप ‘द फैमिली मैन’ जैसी थ्रिलर, क्राइम, सस्पेंस और देशभक्ति से ओत-प्रोत कहानियां देखने के शौकीन हैं, तो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इस समय कई बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं। जी5, सोनी लिव और अमेजन प्राइम वीडियो जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स पर इस समय ऐसी कई सीरीज ट्रेंड कर रही हैं, जो अपनी कसी हुई पटकथा और शानदार अभिनय के दम पर दर्शकों को पलक झपकने का मौका भी नहीं दे रही हैं। इन सीरीज में देश के लिए जान जोखिम में डालने वाले जासूसों की अनसुनी कहानियों से लेकर असल जिंदगी के घोटालों पर बने तीखे व्यंग्य तक शामिल हैं।

    इसी कड़ी में जी5 पर उपलब्ध ‘मुखबिर – द स्टोरी ऑफ अ स्पाई’ एक बेहतरीन जासूसी थ्रिलर के रूप में उभरी है। इस सीरीज की कहानी एक अनाथ और शातिर चोर हरफान बुखारी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे भारतीय खुफिया एजेंसी के अधिकारी देशहित में जासूसी करने के लिए चुनते हैं। हरफान को कड़ी ट्रेनिंग देकर और एक नई पहचान के साथ पाकिस्तान भेजा जाता है। यह सीरीज एक जासूस के अकेलेपन, उसके आंतरिक संघर्ष और देश के लिए दिए जाने वाले सर्वोच्च बलिदान को बेहद संजीदगी और यथार्थ के साथ परदे पर उतारती है।

    दूसरी तरफ, अमेजन प्राइम वीडियो पर हाल ही में रिलीज हुई सीरीज ‘राख’ दर्शकों के बीच भारी चर्चा बटोर रही है। यह सीरीज साल 1978 के दिल्ली के मशहूर रंगा-बिल्ला कांड जैसी वास्तविक घटना से प्रेरित है। इस क्राइम ड्रामा में अभिनेता अली फजल एक बेहद जिद्दी सब-इंस्पेक्टर की भूमिका में हैं, जबकि सोनाली बेंद्रे एक पीड़ित स्कूल शिक्षिका का किरदार निभा रही हैं। कहानी दो किशोरों के अचानक गायब होने और उसके बाद पूरे शहर में फैले खौफ के इर्द-गिर्द घूमती है। इस जांच के दौरान जो चौंकाने वाले सच सामने आते हैं, वे दर्शकों को अंदर तक हिलाकर रख देते हैं।

    सस्पेंस के शौकीनों के लिए सोनी लिव पर ‘तनाव’ सीरीज भी एक शानदार विकल्प है। यह मशहूर इजरायली थ्रिलर सीरीज ‘फौदा’ का आधिकारिक भारतीय रूपांतरण है। इस सीरीज की पृष्ठभूमि कश्मीर पर आधारित है, जहां एक स्पेशल टास्क फोर्स यूनिट को एक ऐसे खतरनाक और अंडरग्राउंड हो चुके विद्रोही कमांडर को पकड़ने के लिए दोबारा सक्रिय किया जाता है, जिसे पहले मृत मान लिया गया था। यह सीरीज भारत के सुरक्षा बलों के ऑपरेशन्स और उनके व्यक्तिगत जीवन के तनाव को बेहद करीब से दिखाती है।

    इसके अलावा जी5 पर ही उपलब्ध ‘ब्राउन’ एक अलग तरह की डार्क और कसी हुई कॉप थ्रिलर है। इसकी मुख्य किरदार रीता कोलकाता पुलिस की एक बेहद तेज-तर्रार लेकिन व्यक्तिगत जीवन में डिप्रेशन और शराब की लत से जूझ रही डिटेक्टिव है। जब शहर का एक बेहद हाई-प्रोफाइल मर्डर केस उसके पास आता है, तो उसे न सिर्फ व्यवस्था के भीतर फैले झूठ और भ्रष्टाचार से लड़ना पड़ता है, बल्कि वह अपने आंतरिक विकारों से भी मुकाबला करती है। इस सीरीज को अपनी सस्पेंस भरी कहानी के लिए अच्छी रेटिंग मिली है।

    आधुनिक समय के अपराधों और समाज पर केंद्रित ‘द पिरामिड स्कीम’ अमेजन प्राइम वीडियो पर एक अनूठा प्रयोग है। परमवीर चीमा और रणवीर शौरी के अभिनय से सजी यह सीरीज आज के दौर के लालच और मल्टी-लेवल मार्केटिंग स्कैम्स पर एक करारा और मनोरंजक सटायर है। यह गोल्डी नाम के एक ऐसे युवक की कहानी है, जो शॉर्टकट से अमीर बनने के सपने देखते हुए एक नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी के जाल में फंस जाता है, जिसके बाद धोखे और कॉमेडी की एक जबरदस्त रोलरकोस्टर राइड शुरू होती है। अंत में, देशप्रेम के जज्बे से भरी ‘द टेस्ट केस’ जी5 पर एक और शानदार मिलिट्री ड्रामा है, जो भारतीय सेना की स्पेशल फोर्सेज में कॉम्बैट ट्रेनिंग लेने वाली पहली महिला कैप्टन शिखा शर्मा के संघर्ष, साहस और दृढ़ संकल्प की कहानी को बयां करती है।

  • 20 साल बाद इस्माइल दरबार का दमदार कमबैक, बेटे जैद ने लौटाई खोई पहचान; इंडियन आइडल के मंच पर छलके आंसू

    20 साल बाद इस्माइल दरबार का दमदार कमबैक, बेटे जैद ने लौटाई खोई पहचान; इंडियन आइडल के मंच पर छलके आंसू


    नई दिल्ली। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर संगीतकार Ismail Darbar एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अपने मधुर संगीत और यादगार धुनों से लाखों दिलों पर राज करने वाले इस्माइल दरबार ने करीब 20 साल बाद संगीत की दुनिया में शानदार वापसी की है। इस खास वापसी के पीछे किसी निर्माता, निर्देशक या बड़ी म्यूजिक कंपनी का हाथ नहीं, बल्कि उनके बेटे Zaid Darbar का अटूट विश्वास और मेहनत है।

    बीते कई वर्षों से इस्माइल दरबार फिल्मी दुनिया और संगीत के मुख्यधारा मंचों से दूर थे। हालांकि उनके प्रशंसक आज भी उनकी रचनाओं को उतना ही पसंद करते हैं, लेकिन निजी कारणों और फिल्म निर्माताओं के साथ रचनात्मक मतभेदों के चलते उन्होंने धीरे-धीरे काम करना कम कर दिया था। ऐसे में उनके करियर का यह नया अध्याय न सिर्फ उनके लिए बल्कि उनके चाहने वालों के लिए भी बेहद खास बन गया है।

    हाल ही में लोकप्रिय टीवी शो Indian Idol के मंच पर इस्माइल दरबार और उनके बेटे जैद दरबार ने इस खुशखबरी को साझा किया। इस दौरान इस्माइल दरबार ने खुलकर बताया कि लंबे समय से जैद उन्हें फिर से संगीत की दुनिया में सक्रिय होने के लिए प्रेरित कर रहे थे।

    उन्होंने कहा कि जैद अक्सर उनसे पूछते थे कि वे काम क्यों नहीं कर रहे हैं। इस्माइल ने बताया कि उन्हें लगता था कि वे जिस तरह का संगीत बनाना चाहते हैं, उसे वह स्वतंत्र रूप से नहीं कर पा रहे थे। इसी वजह से उन्होंने खुद को काम से दूर कर लिया था। लेकिन बेटे ने हार नहीं मानी।

    इस्माइल दरबार के अनुसार, जैद ने उनके नाम से एक यूट्यूब चैनल तैयार किया और उनसे कहा कि अब वे किसी के दबाव या नियंत्रण के बिना अपनी पसंद का संगीत बना सकते हैं। यही बात उन्हें दोबारा संगीत रचना के लिए प्रेरित कर गई। अब इस प्लेटफॉर्म के जरिए इस्माइल दरबार अपना स्वतंत्र संगीत सीधे दर्शकों तक पहुंचा रहे हैं।

    कार्यक्रम के दौरान इस्माइल दरबार ने अपने बेटे की जमकर तारीफ की। उन्होंने भावुक होकर कहा कि जिस तरह एक पिता अपने बेटे के लिए मेहनत करता है, वैसा ही काम यहां बेटा अपने पिता के लिए कर रहा है। यह सुनकर जैद दरबार भावुक हो गए और मंच पर ही उनकी आंखें नम हो गईं।

    पिता-पुत्र के इस भावनात्मक पल ने दर्शकों और सोशल मीडिया यूजर्स का दिल जीत लिया। फैंस जैद दरबार की सराहना करते हुए उन्हें एक आदर्श बेटे का उदाहरण बता रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि आज के दौर में जहां रिश्तों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं, वहां जैद ने अपने पिता के सपनों को फिर से जीवित कर एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है।

    इस्माइल दरबार की वापसी संगीत प्रेमियों के लिए किसी खुशखबरी से कम नहीं है। अब उनके प्रशंसक उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले समय में वे एक बार फिर अपनी जादुई धुनों से संगीत जगत में नया इतिहास रचेंगे।

  • जब सलमान खान ने बोनी कपूर के लिए मुफ्त में किया था काम, ‘सिर्फ तुम’ के कैमियो से जुड़ा दिलचस्प किस्सा आया सामने

    जब सलमान खान ने बोनी कपूर के लिए मुफ्त में किया था काम, ‘सिर्फ तुम’ के कैमियो से जुड़ा दिलचस्प किस्सा आया सामने


    नई दिल्ली। बॉलीवुड में सलमान खान और फिल्म निर्माता बोनी कपूर के रिश्ते कभी बेहद मजबूत और दोस्ताना रहे हैं। दोनों के बीच की यही गहरी दोस्ती कई मौकों पर देखने को मिली और इसका एक दिलचस्प उदाहरण फिल्म ‘सिर्फ तुम’ से जुड़ा है। हाल ही में यह पुराना किस्सा एक बार फिर चर्चा में आ गया है, जिसमें सलमान खान ने दोस्ती निभाने के लिए बोनी कपूर की फिल्म में बिना फीस लिए काम करने का फैसला किया था।

    यह घटना 1990 के दशक की बताई जाती है। उस समय बोनी कपूर अपनी फिल्म ‘जुदाई’ की शूटिंग के सिलसिले में हैदराबाद में थे। संयोग से सलमान खान भी उसी दौरान अपनी फिल्म ‘जुड़वा’ की शूटिंग के लिए हैदराबाद में मौजूद थे। दोनों एक ही होटल में ठहरे हुए थे। एक शाम सलमान खान, बोनी कपूर और अनिल कपूर के साथ बैठकर लंबी पार्टी में शामिल हुए। बोनी कपूर ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि वह सामान्य तौर पर बहुत कम शराब पीते थे, लेकिन उस रात सलमान के आग्रह पर पार्टी देर रात से लेकर सुबह तक चलती रही।

    बताया जाता है कि सुबह करीब सात बजे तक पार्टी का दौर चलता रहा। इसके बाद सलमान थोड़ी देर आराम करके अपनी शूटिंग पर निकल गए, जबकि बोनी कपूर पूरे दिन हैंगओवर से परेशान रहे। हालांकि इसी दौरान दोनों के बीच दोस्ती और मजबूत हो गई।

    बोनी कपूर के अनुसार, अगले दिन सलमान खान को यह महसूस हुआ कि उन्होंने सिर्फ उनके कहने पर पूरी रात पार्टी में साथ दिया था। तब सलमान ने उनसे कहा कि यदि भविष्य में कभी किसी काम की जरूरत पड़े तो वह जरूर मदद करेंगे। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह बात आगे चलकर एक फिल्मी किस्से का हिस्सा बन जाएगी।

    कुछ वर्षों बाद जब बोनी कपूर फिल्म ‘सिर्फ तुम’ का निर्माण कर रहे थे, तब उन्हें एक विशेष कैमियो रोल के लिए सलमान खान की जरूरत महसूस हुई। उन्होंने सलमान को फोन कर फिल्म में छोटी लेकिन अहम भूमिका निभाने का प्रस्ताव दिया। सलमान ने बिना देर किए प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, लेकिन इसके साथ एक शर्त भी रख दी।

    सलमान खान ने बोनी कपूर से कहा कि वह यह रोल जरूर करेंगे, लेकिन इसके लिए कोई फीस नहीं लेंगे। अभिनेता का मानना था कि यह उनकी दोस्ती और पुराने वादे को निभाने का अवसर है। सलमान की इस बात ने बोनी कपूर को हैरान भी किया और भावुक भी।

    फिल्म ‘सिर्फ तुम’ में सलमान खान का कैमियो भले ही छोटा था, लेकिन दर्शकों ने उसे खूब पसंद किया। फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और सलमान का यह विशेष किरदार लंबे समय तक याद किया गया। यह किस्सा आज भी बॉलीवुड में दोस्ती, भरोसे और रिश्तों की अहमियत का एक खूबसूरत उदाहरण माना जाता है।

  • ‘ऐसा लगा जैसे फिर से 26/11 देख रहे हों’: कंगना रनौत की ‘भारत भाग्य विधाता’ को दर्शकों ने बताया दिल छू लेने वाली फिल्म

    ‘ऐसा लगा जैसे फिर से 26/11 देख रहे हों’: कंगना रनौत की ‘भारत भाग्य विधाता’ को दर्शकों ने बताया दिल छू लेने वाली फिल्म

    नई दिल्ली । 26 नवंबर 2008 की भयावह रात को केंद्र में रखकर बनाई गई फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ ने रिलीज के साथ ही दर्शकों के बीच गहरी चर्चा छेड़ दी है। कंगना रनौत की मुख्य भूमिका वाली यह फिल्म केवल एक आतंकी हमले की कहानी नहीं कहती, बल्कि उन अनदेखे और अक्सर उपेक्षित नायकों को सामने लाती है, जिन्होंने संकट की घड़ी में असाधारण साहस का परिचय दिया था। फिल्म देखने के बाद बड़ी संख्या में दर्शकों ने इसकी कहानी, भावनात्मक प्रभाव और कलाकारों के अभिनय की सराहना की है।

    फिल्म का केंद्र बिंदु कामा अस्पताल की एक नर्स है, जो 26/11 हमलों के दौरान अचानक ऐसी परिस्थिति में पहुंच जाती है, जहां हर निर्णय जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बन जाता है। कंगना रनौत ने इस किरदार को संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ निभाया है। दर्शकों का मानना है कि उनका अभिनय कहानी की भावनात्मक गहराई को और अधिक प्रभावशाली बनाता है।

    सिनेमाघरों से बाहर निकलने वाले कई दर्शकों ने कहा कि फिल्म देखते समय उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वे उस दौर की घटनाओं को दोबारा जी रहे हों। अस्पताल के भीतर फैला तनाव, मरीजों की सुरक्षा की चिंता और लगातार मंडराता खतरा दर्शकों को कहानी से जोड़े रखता है। फिल्म की सबसे बड़ी विशेषता यह बताई जा रही है कि इसमें आतंकवादी हमलों को नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों के नजरिए से प्रस्तुत किया गया है, जो हिंदी सिनेमा में अपेक्षाकृत कम देखने को मिलता है।

    दर्शकों के एक वर्ग ने फिल्म के उस संदेश की भी सराहना की, जिसमें समाज में सामान्य कर्मचारियों की भूमिका और महत्व को रेखांकित किया गया है। फिल्म यह दिखाने का प्रयास करती है कि संकट के समय केवल नेतृत्वकारी पदों पर बैठे लोग ही नहीं, बल्कि अस्पतालों, आपात सेवाओं और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े साधारण कर्मचारी भी समाज की सुरक्षा और स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

    कई दर्शकों ने विशेष रूप से नर्सिंग पेशे के प्रति सम्मान व्यक्त किया। उनका कहना था कि फिल्म उन परिस्थितियों को सामने लाती है, जिनका सामना स्वास्थ्यकर्मी अक्सर चुपचाप करते हैं। मरीजों की देखभाल, आपातकालीन स्थितियों में त्वरित निर्णय और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण को फिल्म में प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया है। यही कारण है कि फिल्म केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि दर्शकों को सोचने पर भी मजबूर करती है।

    हालांकि कुछ दर्शकों ने यह भी माना कि 26/11 हमलों से जुड़े कुछ दृश्यों को और अधिक वास्तविकता के साथ प्रस्तुत किया जा सकता था। वहीं कुछ लोगों ने फिल्म के अंतिम हिस्से को अपेक्षाकृत कमजोर बताया। इसके बावजूद अधिकांश प्रतिक्रियाएं सकारात्मक रही हैं और दर्शकों ने फिल्म की गंभीर विषयवस्तु तथा प्रस्तुति की प्रशंसा की है।

    फिल्म का पहला भाग अस्पताल की सामान्य दिनचर्या, नर्सों के संघर्ष और उनके व्यक्तिगत जीवन की झलक प्रस्तुत करता है। इसके बाद कहानी धीरे-धीरे उस भयावह रात की ओर बढ़ती है, जब मुंबई आतंकी हमलों से दहल उठता है। दूसरे भाग में घटनाओं की तीव्रता बढ़ती है और नर्सों के साहस, जिम्मेदारी तथा मानवता की भावना को केंद्र में रखा जाता है।

    ‘भारत भाग्य विधाता’ उन वास्तविक नायकों को श्रद्धांजलि देने का प्रयास करती है, जिन्होंने कठिनतम परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखा। यही कारण है कि फिल्म दर्शकों को केवल एक ऐतिहासिक घटना की याद नहीं दिलाती, बल्कि साहस, सेवा और मानवता के महत्व को भी मजबूती से सामने लाती है।

  • रणवीर सिंह कंट्रोवर्सी पर आईएफटीडीए अध्यक्ष अशोक पंडित मुखर: कहा- फिल्म उद्योग भरोसे पर टिका, स्टारडम में प्रतिबद्धता भी जरूरी

    रणवीर सिंह कंट्रोवर्सी पर आईएफटीडीए अध्यक्ष अशोक पंडित मुखर: कहा- फिल्म उद्योग भरोसे पर टिका, स्टारडम में प्रतिबद्धता भी जरूरी

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत के प्रमुख संगठन इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन (IFTDA) के अध्यक्ष और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज (FWICE) के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने फिल्म ‘डॉन 3’ को लेकर चल रहे मौजूदा विवाद पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। अभिनेता रणवीर सिंह के फिल्म ‘डॉन 3’ को अचानक छोड़ने के बाद मनोरंजन उद्योग में शुरू हुई तीखी बहस के बीच अशोक पंडित ने साफ किया है कि किसी भी कलाकार की व्यावसायिक सफलता और उसके कानूनी अनुबंधों को अलग-अलग चश्मे से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि फेडरेशन का मकसद केवल फिल्म उद्योग के पेशेवर ताने-बाने की रक्षा करना है।

    हाल ही में वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज फेडरेशन द्वारा रणवीर सिंह के खिलाफ जारी किए गए असहयोग निर्देश (नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव) को वापस लिए जाने के बाद इस पूरे मामले ने एक नया मोड़ ले लिया था। इस संवेदनशील मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करते हुए अशोक पंडित ने एक मीडिया बातचीत में बताया कि प्रोडक्शन हाउस एक्सेल एंटरटेनमेंट ने रणवीर सिंह को उस दौर में अपनी आगामी फिल्म के लिए साइन किया था, जब उनका हालिया स्टारडम वापस नहीं आया था। उन्होंने याद दिलाया कि जब अभिनेता की लगातार चार फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल साबित हुई थीं, तब मेकर्स ने उन पर भरोसा जताते हुए ‘डॉन 3’ के लिए बहुत पहले ही अनुबंधित कर लिया था।

    अशोक पंडित के अनुसार, सिनेमाई दुनिया में जब किसी भी कलाकार का करियर ऊंचाइयों को छूने लगता है, तब भी उसे उद्योग के पुराने रिश्तों और मुश्किल समय में साथ खड़े रहने वाले निर्माताओं को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह बेहद सुखद बात है कि अभिनेता की हालिया फिल्म सफल रही है और वे वर्तमान में एक बेहद मजबूत स्थिति में काम कर रहे हैं, लेकिन नैतिकता का तकाजा यही कहता है कि विपरीत परिस्थितियों में हाथ थामने वाले लोगों के प्रति प्रतिबद्धता बनी रहनी चाहिए। फिल्म उद्योग पूरी तरह से आपसी विश्वास, लिखित वादों और समय पर किए गए कमिटमेंट के बलबूते ही संचालित होता है।

    बॉलीवुड में स्टारडम के बदलते स्वरूप पर बेहद बेबाकी से टिप्पणी करते हुए फिल्म समीक्षक और संगठन प्रमुख ने कहा कि इस फिल्म नगरी ने समय-समय पर कई ऐतिहासिक और विशाल स्टारडम देखे हैं। उन्होंने महान अभिनेता राजेश खन्ना, शाहरुख खान और सलमान खान के दौर के अभूतपूर्व स्टारडम का उदाहरण देते हुए कहा कि दर्शकों का असीम प्यार निश्चित रूप से अनमोल और सर्वोपरि होता है, परंतु व्यावसायिक प्रोफेशनलिज्म ही इस पूरी इंडस्ट्री की असली और मजबूत बुनियाद है। जनता फिल्मों के लिए तालियां बजाती है और सफलता का जश्न मनाती है, लेकिन फिल्म निर्माण के पर्दे के पीछे आपसी भरोसा सबसे ज्यादा मायने रखता है।

    इसके साथ ही अशोक पंडित ने फिल्म निर्देशक आदित्य धर और उनकी हालिया रिलीज फिल्म ‘धुरंधर’ की जमकर तारीफ की। उनका मानना है कि इस फिल्म की बड़ी कामयाबी ने हिंदी फिल्म उद्योग को एक बहुत ही जरूरी और नया जीवनदान दिया है। उन्होंने ‘धुरंधर’ को बिजनेस के लिहाज से एक बेहतरीन ऑक्सीजन बताते हुए कहा कि यह एक ऐसी शानदार फिल्म है जिसने दर्शकों को दोबारा भारी तादाद में सिनेमाघरों तक खींचने का काम किया है। हालांकि, फिल्म की इस शानदार कामयाबी का जश्न मनाने के साथ ही उन्होंने पुरजोर तरीके से यह स्पष्ट किया कि ‘धुरंधर’ की सफलता को ‘डॉन 3’ के विवाद के साथ मिलाकर बिल्कुल नहीं देखा जाना चाहिए।

    अपनी बात को विराम देते हुए आईएफटीडीए के अध्यक्ष ने कहा कि दो अलग-अलग मामलों को आपस में मिलाने से केवल भ्रम और जटिलताएं पैदा होती हैं। फेडरेशन का एकमात्र और व्यापक उद्देश्य फिल्म उद्योग के पूरे इकोसिस्टम को सुरक्षित रखना और छोटे-बड़े सभी हितधारकों के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने एक बार फिर इस बात को दोहराया कि संस्था का किसी भी अभिनेता या निर्माता से कोई व्यक्तिगत झगड़ा या शिकायत नहीं है, बल्कि उनकी एकमात्र चिंता यह सुनिश्चित करना है कि देश की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री के भीतर काम करने का एक पारदर्शी, पेशेवर और भरोसेमंद माहौल हमेशा कायम रहे।

  • जब मोहम्मद रफी ने बिना फीस गाईं सिर्फ 4 लाइनें, अमिताभ बच्चन की मौत वाले सीन ने रुला दिया था पूरा देश

    जब मोहम्मद रफी ने बिना फीस गाईं सिर्फ 4 लाइनें, अमिताभ बच्चन की मौत वाले सीन ने रुला दिया था पूरा देश


    नई दिल्ली। हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में कुछ ऐसे गीत और कुछ ऐसे क्षण हैं, जो समय बीतने के बावजूद लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहते हैं। महान पार्श्वगायक मोहम्मद रफी की आवाज भी ऐसी ही एक विरासत है, जिसने पीढ़ियों को भावनाओं से जोड़ने का काम किया है। रफी साहब ने अपने करियर में हजारों गीत गाए, लेकिन एक फिल्म में उन्होंने केवल चार लाइनें गाकर ऐसा जादू पैदा किया कि वह दृश्य और वह गीत आज भी लोगों की आंखें नम कर देता है।

    यह किस्सा जुड़ा है साल 1978 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ से। निर्देशक प्रकाश मेहरा की इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए रिकॉर्ड बनाए थे। फिल्म में अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना, रेखा और राखी जैसे सितारों ने अभिनय किया था। कहानी, संवाद, संगीत और अभिनय के साथ-साथ इसका भावनात्मक क्लाइमेक्स भी दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए बस गया।

    फिल्म का संगीत मशहूर संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी ने तैयार किया था, जबकि गीतकार अंजान ने इसके गीत लिखे थे। फिल्म के अधिकांश लोकप्रिय गीत किशोर कुमार की आवाज में रिकॉर्ड किए गए थे। ‘ओ साथी रे’, ‘रोते हुए आते हैं सब’ और टाइटल ट्रैक जैसे गीत उस दौर के सुपरहिट गानों में शामिल रहे। हालांकि फिल्म के अंतिम और सबसे भावनात्मक दृश्य के लिए संगीतकारों को कुछ अलग चाहिए था।

    कहा जाता है कि जब फिल्म के क्लाइमेक्स में सिकंदर की मौत का दृश्य फिल्माया गया, तब संगीतकार आनंदजी को लगा कि इस दृश्य में जिस दर्द, विरह और भावनात्मक गहराई की जरूरत है, उसे मोहम्मद रफी की आवाज से बेहतर कोई नहीं दे सकता। इसके लिए केवल चार लाइनों की आवश्यकता थी, लेकिन वे चार लाइनें पूरे दृश्य का भाव बदलने वाली थीं।

    संगीतकारों के सामने एक चुनौती भी थी। फिल्म के लगभग सभी गीत किशोर कुमार गा चुके थे और ऐसे में सिर्फ चार लाइनों के लिए मोहम्मद रफी से अनुरोध करना उन्हें थोड़ा असहज लग रहा था। आखिरकार आनंदजी ने रफी साहब से संपर्क किया और अपनी बात रखी। बताया जाता है कि रफी ने पहले पूछा कि जब पूरी फिल्म के गाने किशोर कुमार गा रहे हैं तो यह हिस्सा भी उनसे ही क्यों नहीं गवाया जाता। तब आनंदजी ने उन्हें समझाया कि इस दृश्य के लिए जिस दर्द और आत्मीयता की जरूरत है, वह उनकी आवाज में ही संभव है।

    रफी साहब ने इस अनुरोध को सहर्ष स्वीकार कर लिया। उन्होंने जिन चार पंक्तियों को अपनी आवाज दी, वे थीं- “जिंदगी तो बेवफा है, एक दिन ठुकराएगी, मौत महबूबा है अपने साथ लेकर जाएगी…”। इन पंक्तियों ने फिल्म के क्लाइमेक्स को एक अलग ही ऊंचाई पर पहुंचा दिया। दर्शकों ने न सिर्फ अमिताभ बच्चन के अभिनय को सराहा, बल्कि रफी की दर्दभरी आवाज ने भी उस दृश्य को अमर बना दिया।

    फिल्मी गलियारों में प्रचलित किस्सों के अनुसार, मोहम्मद रफी ने इन चार पंक्तियों के लिए कोई पारिश्रमिक नहीं लिया था। व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद उन्होंने यह रिकॉर्डिंग की और अपनी संवेदनशील गायकी से दृश्य में ऐसी जान डाल दी कि यह हिंदी सिनेमा के सबसे भावुक क्षणों में शामिल हो गया।

    आज, दशकों बाद भी जब ‘मुकद्दर का सिकंदर’ का यह दृश्य या यह गीत सुनाई देता है, तो दर्शकों की भावनाएं उसी तरह उमड़ पड़ती हैं। यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि मोहम्मद रफी की कला, संवेदनशीलता और संगीत के प्रति उनके समर्पण का जीवंत उदाहरण माना जाता है।