Category: Entertainment

  • हीरो बनने के चक्कर में एक्टर मत खोना, नाना पाटेकर की सीख याद कर भावुक हुए शाहरुख खान, निधन की खबर से फिल्म जगत में शोक

    हीरो बनने के चक्कर में एक्टर मत खोना, नाना पाटेकर की सीख याद कर भावुक हुए शाहरुख खान, निधन की खबर से फिल्म जगत में शोक


    नई दिल्ली। दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से हिंदी और मराठी सिनेमा में शोक की लहर है। अपनी दमदार अदाकारी और बेबाक अंदाज से करोड़ों दर्शकों के दिलों में जगह बनाने वाले नाना पाटेकर 75 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए। उनके निधन के बाद गोवा की पणजी पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 194 के तहत अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार अभिनेता को गोवा के डोना पाउला स्थित उनके आवास से मणिपाल अस्पताल ले जाया गया था जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मामले की जांच पुलिस सब इंस्पेक्टर नितिन नाइक के नेतृत्व में की जा रही है। हालांकि अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज होना अपने आप में किसी आपराधिक साजिश का प्रमाण नहीं है।
    Loksatta
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    नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार गुरुवार रात पुणे के डोंजे स्थित उनके फार्महाउस पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उनके अंतिम दर्शन के लिए परिवार के सदस्यों के साथ फिल्म जगत की कई हस्तियां और प्रशंसक पहुंचे। अभिनेता के बेटे मल्हार पाटेकर ने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि नाना साहेब जैसे लोग वास्तव में कभी दूर नहीं होते। उनके काम और उपलब्धियां उन्हें हमेशा लोगों के बीच जीवित रखेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पिता की सोच और उनके सपनों को आगे बढ़ाना ही परिवार के लिए भविष्य की दिशा तय करेगा। मल्हार के शब्दों से पिता के प्रति उनका गहरा लगाव और सम्मान साफ झलकता है।

    नाना पाटेकर के निधन पर अभिनेता शाहरुख खान ने भी भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नाना के साथ अपनी पुरानी तस्वीर साझा करते हुए उन्हें अपना गुरु शिक्षक आलोचक और दोस्त बताया। शाहरुख ने नाना के साथ पहली मुलाकात का किस्सा याद किया। उन्होंने बताया कि नाना के सामने वह काफी प्रभावित हो गए थे और अपने बालों से खेलने लगे थे। इस पर नाना ने उन्हें टोकते हुए कहा था कि हीरो की तरह बाल मत बना तू एक्टर है। शाहरुख के लिए यह सिर्फ एक मजाकिया घटना नहीं थी बल्कि अभिनय की असली पहचान समझाने वाला सबक था।

    शाहरुख ने अपने संदेश में बताया कि नाना पाटेकर का स्वभाव बेहद सीधा और बेबाक था। वह सामने वाले को खुश करने के लिए झूठी तारीफ नहीं करते थे बल्कि वही बात कहते थे जो उनके अनुसार जरूरी होती थी। उनका प्यार जताने का तरीका भी अलग था। कभी डांटकर तो कभी तीखी बात कहकर वह अपनेपन का एहसास करा देते थे। शाहरुख ने याद किया कि नाना उनके साथ कैरम खेलने के बेहद शौकीन थे और अक्सर उन्हें हरा देते थे। उनके बीच की यह दोस्ती फिल्मी दुनिया के रिश्तों से कहीं आगे बढ़कर आपसी सम्मान और स्नेह का उदाहरण थी।

    नाना को याद करते हुए शाहरुख ने इस बात का अफसोस जताया कि उन्हें उनके साथ और वक्त बिताने का मौका नहीं मिला। उन्होंने कहा कि काश दोनों के बीच कुछ और बातचीत होती और कुछ बहसों के साथ चाय पीने तथा कैरम खेलने के और अवसर मिलते। शाहरुख ने नाना की उस सीख को भी याद किया जो उनके दिल में हमेशा रहेगी। नाना ने उनसे कहा था कि हीरो बनने के चक्कर में एक्टर मत खोना। इस बात का अर्थ है कि लोकप्रियता और पर्दे पर बड़ी छवि बनाने की कोशिश में कलाकार को अपने अभिनय की असली पहचान नहीं खोनी चाहिए।

    नाना पाटेकर का करियर कई दशकों तक फैला रहा। उन्होंने हिंदी और मराठी फिल्मों में गंभीर किरदारों से लेकर यादगार व्यावसायिक भूमिकाओं तक अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी तीखी संवाद अदायगी और प्रभावशाली अभिनय ने उन्हें दर्शकों के बीच खास स्थान दिलाया। उनके निधन से भारतीय सिनेमा ने एक विशिष्ट कलाकार को खो दिया है। उनकी फिल्में उनके किरदार और शाहरुख जैसे कलाकारों को दी गई उनकी सीख आने वाली पीढ़ियों के लिए उनकी विरासत बनी रहेगी।

  • नाना पाटेकर ने सालों पहले कर ली थी अंतिम संस्कार की तैयारी, 12 मन सूखी लकड़ी को बताया था अपनी ‘फाइनल प्रॉपर्टी’

    नाना पाटेकर ने सालों पहले कर ली थी अंतिम संस्कार की तैयारी, 12 मन सूखी लकड़ी को बताया था अपनी ‘फाइनल प्रॉपर्टी’

    नई दिल्ली: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके घर पर निधन हो गया। वह 75 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है। नाना पाटेकर के निधन के बाद उनके वर्षों पुराने एक बयान की चर्चा भी हो रही है, जिसमें उन्होंने अपने अंतिम संस्कार को लेकर अपनी इच्छा के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें पता है कि एक दिन उन्हें दुनिया से जाना है और उनके अंतिम संस्कार के लिए 12 मन लकड़ी पर्याप्त होगी। अभिनेता ने इसे अपनी आखिरी संपत्ति तक बताया था।

    नाना पाटेकर ने सितंबर 2023 में एक इंटरव्यू के दौरान मौत और अंतिम संस्कार को लेकर खुलकर बात की थी। उन्होंने कहा था कि वह मौत में विश्वास रखते हैं और जानते हैं कि एक दिन उन्हें जाना ही होगा। अपने अंतिम संस्कार के बारे में उन्होंने बेहद साधारण अंदाज में कहा था कि उन्हें 12 मन लकड़ी की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने कहा था कि यही उनकी ‘फाइनल प्रॉपर्टी’ है और इसके साथ ही वह दुनिया से चले जाएंगे। उनके इस बयान से यह स्पष्ट था कि वह जीवन के अंतिम पड़ाव को लेकर व्यावहारिक सोच रखते थे।

    अभिनेता ने यह भी बताया था कि उन्होंने अपने अंतिम संस्कार के लिए 12 मन लकड़ी पहले से ही जमा करके रखी है। उन्होंने खास तौर पर इच्छा जताई थी कि उनके अंतिम संस्कार में सूखी लकड़ी का इस्तेमाल किया जाए। उनका कहना था कि जो लकड़ी उन्होंने जमा कर रखी है, वह सूखी है और उसी से उनका अंतिम संस्कार किया जाए। उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि गीली लकड़ी का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। नाना पाटेकर की यह बात उनके सहज और अलग अंदाज को भी दिखाती है, जिसमें उन्होंने गंभीर विषय को भी अपने खास हास्य के साथ सामने रखा था।

    सूखी लकड़ी के इस्तेमाल को लेकर नाना पाटेकर ने मजाकिया अंदाज में इसकी वजह भी बताई थी। उन्होंने कहा था कि अगर गीली लकड़ी का इस्तेमाल किया गया तो आंखों में आंसू आ सकते हैं। ऐसे में मरते समय यह गलतफहमी हो सकती है कि लोग उनके लिए रो रहे हैं। उन्होंने कहा था कि कम से कम मरते समय ऐसी गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। उनके इस बयान में मौत जैसे गंभीर विषय के बीच उनका चिर-परिचित हास्य नजर आया था।

    नाना पाटेकर के आखिरी समय की बात करें तो गुरुवार सुबह गोवा में उनके घर पर अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। मणिपाल हॉस्पिटल के डॉ. शेखर सालकर के अनुसार, रात करीब 2:30 बजे नाना पाटेकर ने एक दोस्त से कहा था कि उन्हें अच्छा महसूस नहीं हो रहा है और सीने के बाईं ओर दर्द हो रहा है। इसके बाद उनका दोस्त डोना पाउला स्थित घर पहुंचा, जहां उन्हें तकलीफ में पाया गया। इसके बाद केयरटेकर को बुलाया गया और एम्बुलेंस भी बुलाई गई।

    नाना पाटेकर को सुबह करीब 4:20 बजे मणिपाल हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की। हालांकि, सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उनकी मौत कार्डियक अरेस्ट की वजह से होने की बात सामने आई है। मौत की सही वजह का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम किया जाएगा। अभिनेता के निधन के बाद उनके पुराने बयान में कही गई अंतिम संस्कार की इच्छा भी चर्चा में आ गई है।

  • शेफाली बग्गा ने ED को सौंपे 1.20 करोड़ रुपये, महादेव बेटिंग ऐप प्रमोशन से मिली रकम की जांच में बड़ा खुलासा

    शेफाली बग्गा ने ED को सौंपे 1.20 करोड़ रुपये, महादेव बेटिंग ऐप प्रमोशन से मिली रकम की जांच में बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली: टीवी प्रेजेंटर और बिग बॉस की पूर्व कंटेस्टेंट शेफाली बग्गा ने महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप से प्राप्त रकम प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंप दी है। महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप सिंडिकेट मामले की जांच के दौरान सामने आए विवरण के मुताबिक, शेफाली को अवैध बेटिंग ऐप के प्रमोशनल वीडियो बनाने के लिए कुल 1.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। पूछताछ के बाद उन्होंने एजेंसी को 1.20 करोड़ रुपये सौंप दिए। शेफाली ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं थी कि जिस ऐप का वह प्रचार कर रही थीं, वह अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था।

    ED ने महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप सिंडिकेट मामले में छत्तीसगढ़ की रायपुर कोर्ट में चार्जशीट पेश की है। चार्जशीट में शेफाली बग्गा का भी उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि उन्हें महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप सिंडिकेट से जुड़े लोगों से ऐप के प्रचार के बदले रकम मिली थी, जिसे उन्होंने बाद में एजेंसी को सौंप दिया। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जांच के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार, किसी व्यक्ति द्वारा सिंडिकेट से प्राप्त अपराध की आय को खुद एजेंसी के पास लौटाने का यह पहला ऐसा मामला हो सकता है। शेफाली की सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फैन फॉलोइंग भी है।

    इस मामले में ED ने कुल 42 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। इनमें Ebix ग्रुप के चेयरमैन विकास गर्ग भी शामिल हैं। एजेंसी ने विकास गर्ग को पहले गिरफ्तार किया था और उनकी गिरफ्तारी से पहले करीब 940 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की गई थी। आरोप है कि विकास गर्ग महादेव बेटिंग सिंडिकेट से अपराध के जरिए प्राप्त रकम को मास्टरमाइंड हरिशंकर तिब्रेवाल के माध्यम से अपनी कंपनियों तक पहुंचा रहे थे। जांच के मुताबिक, तिब्रेवाल ने FPI और बॉन्ड के जरिए महादेव बेटिंग सिंडिकेट और स्काई एक्सचेंज बेटिंग सिंडिकेट से प्राप्त सैकड़ों करोड़ रुपये की कथित अपराध की आय को विकास गर्ग की कंपनियों में भेजा।

    जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि विकास गर्ग और हरिशंकर तिब्रेवाल ने कुछ अन्य लोगों के जरिए इस रकम का इस्तेमाल गर्ग की कई सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों की कीमतों में हेरफेर करने के लिए किया। विकास गर्ग दिल्ली भाजपा के सदस्य थे, लेकिन गिरफ्तारी सामने आने के बाद उन्हें पार्टी से हटा दिया गया। इसी मामले में EaseMyTrip के प्रमोटर निशांत पिट्टी के खिलाफ भी चार्जशीट दायर की गई है। उन पर हरिशंकर तिब्रेवाल से मिली करीब 59 करोड़ रुपये की कथित अपराध की कमाई को आगे बढ़ाने का आरोप है।

    महादेव बेटिंग सिंडिकेट की जांच के दौरान ED ने कई बॉलीवुड हस्तियों को भी समन भेजे थे। इनमें अभिनेता, अभिनेत्री, परफॉर्मर और गायक शामिल रहे हैं। जांच के अनुसार, कुछ लोगों ने सिंडिकेट के प्रमोटरों या उनके सहयोगियों के निमंत्रण पर विदेशों में आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था, जबकि कुछ पर वीडियो और क्लिप के जरिए महादेव ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट का प्रचार करने का आरोप है। ED की लेटेस्ट चार्जशीट के मुताबिक, सिंडिकेट में अपराध से हुई कुल आय 75,000 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है और एजेंसी को आशंका है कि वास्तविक रकम इससे भी ज्यादा हो सकती है। सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल समेत कई प्रमोटर अब भी फरार हैं। मामले में अब तक ED छह चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।

  • तीसरी शादी और 20 साल का उम्र फासला, मान्यता में संजय दत्त को क्यों दिखी मां नरगिस की झलक, खुद खोला राज

    तीसरी शादी और 20 साल का उम्र फासला, मान्यता में संजय दत्त को क्यों दिखी मां नरगिस की झलक, खुद खोला राज


    नई दिल्ली। संजय दत्त की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही है। फिल्मों में शानदार करियर से लेकर निजी जिंदगी के उतार चढ़ाव तक अभिनेता ने कई मुश्किल दौर देखे हैं। रिश्तों से जुड़े विवाद रहे हों या कानूनी परेशानियां संजय दत्त की जिंदगी का शायद ही कोई ऐसा दौर रहा हो जिसने सुर्खियां न बटोरी हों। हालांकि इन तमाम मुश्किल परिस्थितियों के बीच एक रिश्ता ऐसा रहा जिसने उन्हें लगातार मजबूती दी और वह रिश्ता है उनकी पत्नी मान्यता दत्त के साथ। हाल ही में संजय दत्त ने मान्यता की जमकर तारीफ की और उन्हें अपनी जिंदगी की सबसे मजबूत महिलाओं में से एक बताया।

    शेखर सुमन के साथ बातचीत में संजय दत्त ने मान्यता को लेकर अपने दिल की बात कही। अभिनेता ने बताया कि उन्होंने अपनी जिंदगी में बहुत कम ऐसी महिलाओं को देखा है जो एक मां और पत्नी के तौर पर पूरी तरह समर्पित रही हों। संजय ने मान्यता की तुलना अपनी मां और दिग्गज अभिनेत्री नरगिस दत्त से करते हुए कहा कि उनकी मां के बाद मान्यता ही ऐसी महिला हैं जो हर मुश्किल परिस्थिति में चट्टान की तरह उनके साथ खड़ी रहीं। जेल का दौर हो या जिंदगी की दूसरी परेशानियां मान्यता ने उनका साथ नहीं छोड़ा।

    संजय और मान्यता की प्रेम कहानी भी काफी दिलचस्प रही है। दोनों की उम्र में करीब 20 साल का अंतर है लेकिन उम्र का यह फासला उनके रिश्ते के बीच कभी दीवार नहीं बना। संजय के मुताबिक दोनों की मुलाकात के बाद धीरे धीरे बातचीत बढ़ी और फिर दोनों ने एक दूसरे को डेट करना शुरू किया। रिश्ता आगे बढ़ा तो दोनों ने शादी करने का फैसला लिया। फरवरी 2008 में संजय दत्त और मान्यता दत्त शादी के बंधन में बंध गए। इसके बाद अक्टूबर 2010 में दोनों जुड़वां बच्चों के माता पिता बने।

    संजय दत्त की यह तीसरी शादी थी। इससे पहले उनकी शादी अभिनेत्री ऋचा शर्मा से हुई थी। इस रिश्ते से उनकी बेटी त्रिशाला दत्त हैं। ऋचा के निधन के बाद त्रिशाला का पालन पोषण अमेरिका में उनके नाना नानी के साथ हुआ। संजय और त्रिशाला के रिश्ते में भी एक समय दूरी आई लेकिन बाद में दोनों के बीच संबंध बेहतर हुए। संजय कई मौकों पर अपनी बेटी को लेकर गर्व जाहिर कर चुके हैं।

    मान्यता के साथ संजय दत्त का रिश्ता ऐसे समय में मजबूत हुआ जब अभिनेता अपनी जिंदगी के कई उतार चढ़ाव से गुजर चुके थे। यही वजह है कि संजय के लिए मान्यता सिर्फ जीवनसाथी नहीं बल्कि भरोसेमंद साथी भी हैं। अभिनेता के मुताबिक मान्यता ने परिवार को संभालने के साथ मुश्किल समय में उनका हौसला भी बनाए रखा।

    मान्यता खुद भी फिल्मों से जुड़ी रही हैं और संजय दत्त के साथ शादी के बाद उन्होंने परिवार और बच्चों को प्राथमिकता दी। संजय का हालिया बयान यह बताता है कि उनकी ग्लैमर से भरी जिंदगी के पीछे परिवार की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण रही है। जिस महिला ने मुश्किल वक्त में उनका साथ नहीं छोड़ा आज वही उनके लिए मां नरगिस के बाद सबसे मजबूत सहारा बन चुकी हैं।

  • पितृ पक्ष में क्यों टालते हैं प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री? जानिए राजपाल यादव से जुड़े मामले में क्या आया सामने

    पितृ पक्ष में क्यों टालते हैं प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री? जानिए राजपाल यादव से जुड़े मामले में क्या आया सामने

    नई दिल्ली ।अभिनेता राजपाल यादव से जुड़े एक मामले में पितृ पक्ष के दौरान संपत्ति की रजिस्ट्री रुकने का जिक्र सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके वकील ने अदालत में बताया कि जिस संपत्ति को बेचकर रकम जुटाई जानी है, उसकी रजिस्ट्री पितृ पक्ष के कारण रुकी हुई है और नवरात्र की शुरुआत में सौदा पूरा होने की उम्मीद है। इस बात के बाद पितृ पक्ष के दौरान जमीन, मकान या दूसरी बड़ी संपत्ति की खरीद और रजिस्ट्री को टालने की धार्मिक परंपरा एक बार फिर चर्चा में आ गई है। कई हिंदू परिवार इस अवधि में नई संपत्ति खरीदने या बड़े शुभ कार्य शुरू करने से बचते हैं।

    हिंदू धार्मिक मान्यताओं में पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण, श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के लिए विशेष समय माना जाता है। इस दौरान परिवार अपने पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इन दिनों ध्यान नए उत्सव या सांसारिक शुभ कार्यों की बजाय पूर्वजों से जुड़े धार्मिक कर्मों पर रखा जाता है। इसी वजह से कई परिवार नई जमीन या मकान खरीदने, प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराने और बड़े निवेश की शुरुआत जैसे कामों को आगे के शुभ समय तक टालना पसंद करते हैं।

    पितृ पक्ष में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री रोकने की मान्यता मुख्य रूप से धार्मिक और पारंपरिक विश्वास से जुड़ी है। इस अवधि को आमतौर पर मांगलिक कार्यों के लिए शुभ समय नहीं माना जाता। इसलिए कुछ परिवार नई शुरुआत से जुड़े काम नवरात्र, दीपावली या किसी अन्य शुभ मुहूर्त तक स्थगित कर देते हैं। हालांकि, केवल पितृ पक्ष होने के कारण संपत्ति की खरीद या रजिस्ट्री पर कोई कानूनी रोक नहीं होती। कोई व्यक्ति अपने कानूनी, व्यावहारिक या आर्थिक कारणों के आधार पर इस अवधि में संपत्ति खरीद या रजिस्ट्री करा सकता है। यह फैसला धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत परंपरा से जुड़ा विषय है।

    पितृ पक्ष के दौरान हर तरह की खरीदारी को अशुभ नहीं माना जाता। रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं। भोजन, कपड़े, दवाएं, घर की जरूरी सामग्री और कामकाज से संबंधित सामान की खरीद पर सामान्य रूप से ऐसी रोक नहीं मानी जाती, जो सभी लोगों पर लागू हो। श्राद्ध और पितरों से जुड़े धार्मिक कर्मों के लिए अनाज, फल, सब्जियां, घी, दूध और भोजन सामग्री खरीदना भी इसी अवधि की जरूरतों का हिस्सा हो सकता है। कई परिवार इस दौरान ब्राह्मण भोजन, जरूरतमंदों को दान और पितरों की पसंद की वस्तुओं का दान भी करते हैं।

    वहीं नई जमीन या मकान खरीदने, नई प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री, गृह प्रवेश, विवाह और अन्य बड़े मांगलिक कार्यों को कई परिवार पितृ पक्ष में करने से बचते हैं। कुछ लोग नया वाहन खरीदने, महंगे आभूषण लेने या बड़े निवेश की शुरुआत को भी इस अवधि के बाद करना पसंद करते हैं। इसके पीछे मुख्य आधार धार्मिक मान्यता है, न कि कोई कानूनी नियम। इसलिए अलग-अलग परिवार अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार निर्णय लेते हैं।

    पहले से तय संपत्ति की रजिस्ट्री के मामले में भी परिवारों की प्राथमिकता अलग हो सकती है। यदि संपत्ति का सौदा पहले ही तय हो चुका है और रजिस्ट्री की तारीख पितृ पक्ष में पड़ती है, तो धार्मिक मान्यता मानने वाले लोग तारीख आगे बढ़ाना पसंद कर सकते हैं। दूसरी ओर, जिन लोगों के लिए कानूनी प्रक्रिया, समय या आर्थिक कारण महत्वपूर्ण हैं, वे तय तारीख पर रजिस्ट्री करा सकते हैं। ऐसे में पितृ पक्ष के दौरान प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री को लेकर फैसला धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

  • जिमी शेरगिल और दिव्या दत्ता की ‘तुम रहे ना तुम’ का टोरंटो में वर्ल्ड प्रीमियर, बेटी के भविष्य पर छिड़ेगा परिवार में संघर्ष

    जिमी शेरगिल और दिव्या दत्ता की ‘तुम रहे ना तुम’ का टोरंटो में वर्ल्ड प्रीमियर, बेटी के भविष्य पर छिड़ेगा परिवार में संघर्ष

    नई दिल्ली: जिमी शेरगिल और दिव्या दत्ता की फिल्म ‘तुम रहे ना तुम’ इन दिनों चर्चा में है। साइकोलॉजिकल फैमिली ड्रामा फिल्म का 10 अक्टूबर को टोरंटो में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ साउथ एशिया में वर्ल्ड प्रीमियर होगा। फिल्म को गाला प्रीमियर के तौर पर प्रदर्शित किया जाएगा। यह फिल्म स्वीडिश नाटककार ऑगस्ट स्ट्रिंडबर्ग के मशहूर नाटक ‘द फादर’ पर आधारित है। कहानी के साइकोलॉजिकल और भावनात्मक पहलुओं को आज के भारतीय परिवार के माहौल के अनुसार नए रूप में पेश किया गया है।

    फिल्म की कहानी उत्तराखंड के एक पहाड़ी शहर की पृष्ठभूमि में आगे बढ़ती है। इसमें एक पति-पत्नी के बीच अपनी बेटी के भविष्य को लेकर शुरू हुई बहस धीरे-धीरे गंभीर पारिवारिक संघर्ष में बदल जाती है। बेटी के भविष्य को लेकर दोनों की सोच और फैसले अलग हैं, जिसके कारण परिवार के भीतर तनाव बढ़ता जाता है। फिल्म इसी संघर्ष के जरिए यह सवाल उठाती है कि बच्चे के भविष्य को तय करने का अधिकार किसके पास होना चाहिए और परिवार में शक्ति, अधिकार तथा विरासत जैसे मुद्दे किस तरह रिश्तों को प्रभावित कर सकते हैं।

    ‘तुम रहे ना तुम’ में पारिवारिक रिश्तों के साथ पितृसत्ता, असुरक्षा और भावनात्मक घाव जैसे विषयों को भी प्रमुखता से दिखाया गया है। कहानी यह बताने की कोशिश करती है कि परिवार के भीतर मौजूद असुरक्षा और पुराने भावनात्मक अनुभव किस तरह रिश्तों और फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं। बेटी के भविष्य को लेकर शुरू हुआ विवाद केवल माता-पिता के बीच मतभेद तक सीमित नहीं रहता, बल्कि धीरे-धीरे परिवार के भीतर मौजूद कई गहरे सवालों को सामने लाता है। फिल्म में मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक पहलुओं को कहानी के केंद्र में रखा गया है।

    फिल्म का निर्देशन प्रेम मोदी ने किया है। जिमी शेरगिल और दिव्या दत्ता मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। इनके अलावा तनिष्का तिवारी, हर्ष छाया, जरीना वहाब और राजेश जैस भी महत्वपूर्ण किरदार निभा रहे हैं। फिल्म का निर्माण विन्नी चावला, वृंदा चावला और सोनू कात्याल ने किया है। इसे फैनेटिकली फिल्मी प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले बनाया गया है। फिल्म की पटकथा राकेश कुमार त्रिपाठी ने लिखी है, जबकि विक्रमजीत रॉय इसके एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं।

    दीपांकर ‘जोजो’ चाकी फिल्म के एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर होने के साथ इसके साउंड डिजाइनर भी हैं। फिल्म का टोरंटो में वर्ल्ड प्रीमियर इसके सफर की महत्वपूर्ण शुरुआत माना जा रहा है। जिमी शेरगिल ने फिल्म के प्रीमियर को खास बताते हुए कहा कि कहानी एक भारतीय परिवार पर आधारित है, लेकिन इसकी भावनाएं सभी के लिए समान हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि फिल्म भाषा और भूगोल की सीमाओं से आगे जाकर दर्शकों से जुड़ सकेगी।

    फिल्म की कहानी में परिवार, रिश्तों, अधिकार और बेटी के भविष्य से जुड़े सवालों को मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक नजरिए से पेश किया गया है। उत्तराखंड के पहाड़ी शहर की पृष्ठभूमि में पति-पत्नी के बीच बढ़ता संघर्ष कहानी को आगे ले जाता है। ‘तुम रहे ना तुम’ के जरिए एक भारतीय परिवार के भीतर के तनाव और भावनात्मक जटिलताओं को सामने लाने की कोशिश की गई है। टोरंटो में होने वाला इसका वर्ल्ड प्रीमियर फिल्म को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने पेश करने का पहला बड़ा अवसर होगा।

  • आस्था और धर्म पर जावेद अख्तर का बड़ा सवाल, एलन मस्क के उदाहरण से समझाया क्यों नहीं मानते सभी धर्म समान

    आस्था और धर्म पर जावेद अख्तर का बड़ा सवाल, एलन मस्क के उदाहरण से समझाया क्यों नहीं मानते सभी धर्म समान


    नई दिल्ली। मशहूर लेखक और गीतकार जावेद अख्तर अपनी बेबाक राय के लिए पहचाने जाते हैं। वह अक्सर उन मुद्दों पर खुलकर बात करते हैं जिन पर लोग बिना ज्यादा सवाल किए विश्वास करते हैं। हाल ही में एक बातचीत में उन्होंने धर्म आस्था भगवान और नास्तिकता को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में धर्म और आस्था इंसान को मानसिक सहारा दे सकते हैं लेकिन किसी चीज से सुकून मिलना इस बात का प्रमाण नहीं हो सकता कि वह चीज सच भी है।

    जावेद अख्तर के मुताबिक जब इंसान किसी परेशानी में होता है तो उसे किसी बड़ी शक्ति पर भरोसा करने से भावनात्मक राहत मिल सकती है। उसे लगता है कि कोई ऐसी ताकत मौजूद है जो उसकी देखभाल कर रही है और उसकी मुश्किल दूर कर देगी। उनका सवाल यह है कि केवल इस भरोसे से उस विश्वास को वास्तविक कैसे मान लिया जाए। उनके अनुसार मानसिक शांति और किसी चीज के सच होने के बीच अंतर समझना जरूरी है।

    अपनी बात समझाने के लिए जावेद अख्तर ने कारोबारी एलन मस्क का उदाहरण दिया। उन्होंने एक काल्पनिक स्थिति के जरिए समझाया कि अगर कोई व्यक्ति पूरे विश्वास के साथ यह मान ले कि एलन मस्क उसका भाई है और अगले महीने उसे अरबों रुपये मिलने वाले हैं तो इस सोच से उसे खुशी और सुरक्षा का एहसास हो सकता है। वह लगातार इसी उम्मीद में रह सकता है कि अगले महीने पैसा जरूर आएगा। लेकिन केवल विश्वास करने से यह साबित नहीं हो जाता कि एलन मस्क वास्तव में उसका भाई है या उसे पैसे मिलने वाले हैं। जावेद अख्तर ने इसी उदाहरण के जरिए आस्था और वास्तविकता के बीच अंतर को समझाने की कोशिश की।

    उन्होंने धर्म को लेकर भी एक सवाल उठाया। जावेद अख्तर ने कहा कि दुनिया में बड़ी संख्या में लोग उसी धर्म को मानते हैं जिसमें उनका जन्म हुआ होता है। उन्होंने दावा किया कि करीब 99 फीसदी लोग उसी धर्म में मरते हैं जिसमें उन्होंने जन्म लिया था। उनके मुताबिक यह सवाल खड़ा करता है कि क्या लोगों ने अपने धार्मिक विश्वासों को खुद तर्क और विचार के आधार पर चुना है या फिर उन्हें बचपन से परिवार और समाज के जरिए ये मान्यताएं मिली हैं।

    जावेद अख्तर ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति की बात को सिर्फ इसलिए सही नहीं मान लेना चाहिए क्योंकि हम उस व्यक्ति पर विश्वास करते हैं। उनके अनुसार इंसान समय के साथ अपनी राय बदल सकता है इसलिए जरूरी है कि किसी व्यक्ति की पहचान के बजाय उसके विचार और तर्क को परखा जाए। उनका नजरिया यह है कि कौन बात कह रहा है इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि कही गई बात के पीछे कितना मजबूत तर्क मौजूद है।

    धर्मों की समानता को लेकर भी जावेद अख्तर ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि दुनिया के सभी धर्मों को सिर्फ इसलिए एक जैसा नहीं कहा जा सकता क्योंकि उनमें इंसान को बेहतर बनने की सीख मिलती है। उनके मुताबिक अलग अलग धर्मों की मान्यताएं विचार और सिद्धांत अलग हो सकते हैं। इसलिए सभी धर्म बिल्कुल एक ही बात कहते हैं ऐसा कहना सही नहीं है।

    जावेद अख्तर लंबे समय से धर्म तर्क और आस्था जैसे विषयों पर अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखते रहे हैं। उनके विचारों से जहां कुछ लोग सहमत नजर आते हैं वहीं कई बार उनके बयानों को लेकर असहमति भी सामने आती है। इस बार भी उनका बयान सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में बहस का विषय बना हुआ है।

  • पाप का हिस्सा बनने से बचिए… हाथ जोड़कर शोभिनव सत्य ने की थी अपील अब इसी बयान पर जमकर हो रहे ट्रोल

    पाप का हिस्सा बनने से बचिए… हाथ जोड़कर शोभिनव सत्य ने की थी अपील अब इसी बयान पर जमकर हो रहे ट्रोल


    नई दिल्ली। ‘हनुमान अंश’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन को लेकर लगातार चर्चा में बनी हुई है। महज 2 करोड़ रुपये के बजट में तैयार हुई इस फिल्म की कमाई 300 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुकी है। फिल्म को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है लेकिन इसी बीच फिल्म के लीड एक्टर शोभिनव सत्य का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हो गया है। इस वीडियो में अभिनेता दर्शकों से फिल्म का पाइरेटेड वर्जन ऑनलाइन नहीं देखने की अपील करते नजर आ रहे हैं। हालांकि उनकी इस अपील में इस्तेमाल की गई पाप वाली बात कुछ यूजर्स को पसंद नहीं आई और इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया जाने लगा।

    दरअसल शोभिनव सत्य ने इसी साल अगस्त में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर यह वीडियो शेयर किया था। वीडियो में उन्होंने सबसे पहले फिल्म को मिल रहे प्यार के लिए दर्शकों का शुक्रिया अदा किया। इसके बाद उन्होंने फिल्म की पाइरेसी को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। अभिनेता ने बताया कि फिल्म के पाइरेटेड वर्जन को बड़ी संख्या में लोग मोबाइल फोन और टीवी पर देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेकर्स ने फिल्म को इंटरनेट पर रिलीज नहीं किया है। इसके बावजूद कुछ लोग चोरी छिपे फिल्म को ऑनलाइन उपलब्ध करा रहे हैं और दर्शक उसे देख रहे हैं।

    शोभिनव ने अपनी बात समझाते हुए कहा था कि अगर कोई व्यक्ति इस तरह चोरी से फिल्म देखता है तो वह अनजाने में किसी दूसरे के पाप का हिस्सा बन रहा है। अभिनेता ने हाथ जोड़कर लोगों से पाइरेटेड कॉपी नहीं देखने की अपील की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर किसी ने मोबाइल पर फिल्म देख भी ली है तो उसे यह समझ आ गया होगा कि यह ऐसी फिल्म नहीं है जिसे अकेले मोबाइल की छोटी स्क्रीन पर देखने का वही अनुभव मिले जो थिएटर में मिलता है। उनके मुताबिक फिल्म को पूरे परिवार के साथ सिनेमाघर में देखने का अनुभव अलग है।

    वीडियो में शोभिनव ने यह भी जानकारी दी थी कि फिल्म की टीम अब तक करीब 600 से 700 पाइरेटेड लिंक हटवा चुकी है। रिलीज के बाद से ही मेकर्स ऑनलाइन लीक को रोकने के लिए लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। हालांकि अब जब यह पुराना वीडियो दोबारा वायरल हुआ तो फिल्म की पाइरेसी से ज्यादा अभिनेता के बयान पर चर्चा शुरू हो गई।

    सोशल मीडिया और रेडिट पर कुछ यूजर्स ने शोभिनव के पाप वाले बयान को लेकर सवाल उठाए। एक यूजर ने धार्मिक भावनाओं और फिल्म से जुड़े बिजनेस को लेकर अपनी नाराजगी जताई। वहीं दूसरे यूजर ने कहा कि पाइरेसी के खिलाफ अपील करना सही है लेकिन इसे पाप से जोड़ना उसे समझ नहीं आया। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि फिल्म की पाइरेसी रोकने की बात अपनी जगह ठीक है लेकिन धार्मिक शब्दों के इस्तेमाल से मामला अनावश्यक रूप से विवादित हो गया।

    हालांकि शोभिनव की मूल अपील का केंद्र फिल्म की पाइरेसी रोकना ही था। फिल्म की टीम का कहना है कि ऑनलाइन लीक से फिल्म के आधिकारिक कारोबार पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि टीम लगातार ऐसे लिंक हटाने की कोशिश कर रही है। दूसरी तरफ फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 60 दिनों में ‘हनुमान अंश’ ने भारत में करीब 325.48 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया है जबकि इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन करीब 424.24 करोड़ रुपये बताया गया है। ऐसे में फिल्म की कमाई के साथ अब शोभिनव सत्य का पुराना वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा कारण बन गया है।

  • फिल्म बेचने के लिए डर का ऐसा खेल, प्रमोशन देखकर सहम गए लोग, जानिए सिनेमा के 5 सबसे खौफनाक कैंपेन

    फिल्म बेचने के लिए डर का ऐसा खेल, प्रमोशन देखकर सहम गए लोग, जानिए सिनेमा के 5 सबसे खौफनाक कैंपेन


    नई दिल्ली। फिल्मों की कहानी और कलाकारों के अलावा उनका प्रमोशन भी दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में अहम भूमिका निभाता है। आमतौर पर फिल्म निर्माता पोस्टर ट्रेलर इवेंट और सोशल मीडिया कैंपेन के जरिए अपनी फिल्मों को दर्शकों तक पहुंचाते हैं। लेकिन हॉरर फिल्मों के मेकर्स ने कई बार प्रमोशन का ऐसा तरीका अपनाया जिसने फिल्म देखने से पहले ही लोगों के बीच डर का माहौल बना दिया। कुछ प्रमोशन इतने वास्तविक लगे कि लोगों को समझ ही नहीं आया कि वे किसी फिल्म के प्रचार का हिस्सा हैं या सचमुच किसी खतरनाक घटना के बीच फंस गए हैं। सिनेमा इतिहास में ऐसे कई प्रमोशन दर्ज हैं जिन्हें आज भी बेहद यादगार माना जाता है।

    साल 1960 में रिलीज हुई अल्फ्रेड हिचकॉक की फिल्म साइको के प्रमोशन को इस तरह के प्रयोगों की शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है। फिल्म को लेकर दर्शकों में डर का माहौल बनाने के लिए सिनेमाघरों के बाहर डॉक्टरों और नर्सों जैसी वेशभूषा में लोगों को तैनात किया गया था। दर्शकों को फिल्म की भयावहता को लेकर चेतावनी दी जाती थी। इसके साथ ही फिल्म शुरू होने के बाद देर से आने वाले दर्शकों को प्रवेश नहीं देने का नियम भी प्रचार का हिस्सा बना। इस माहौल ने लोगों की उत्सुकता के साथ डर भी बढ़ा दिया।

    इसके बाद साल 1999 में आई द ब्लेयर विच प्रोजेक्ट ने गुरिल्ला मार्केटिंग का बेहद अलग तरीका अपनाया। फिल्म के निर्माताओं ने इंटरनेट पर ऐसा माहौल तैयार किया जिससे लोगों को लगा कि फिल्म में दिखाई गई घटनाएं वास्तविक हैं। कॉलेज कैंपस और सिनेमाघरों के आसपास फिल्म के कलाकारों के लापता होने वाले पोस्टर लगाए गए। वेबसाइट पर भी कहानी को इस तरह पेश किया गया कि कई लोगों को शुरुआत में यह फिल्म नहीं बल्कि वास्तविक घटना लगी। इस अभियान ने फिल्म को लेकर जबरदस्त चर्चा पैदा की।

    साल 2006 में मिशन इम्पॉसिबल 3 के प्रमोशन के दौरान भी एक ऐसा मामला सामने आया जिसने लोगों को डरा दिया। फिल्म की थीम ट्यून बजाने वाले छोटे डिजिटल म्यूजिक प्लेयर अखबारों के बॉक्स के अंदर लगाए गए थे। बॉक्स खोलते ही अचानक आवाज आने लगी। अंदर दिखाई देने वाले तारों और अचानक बजने वाली धुन से कुछ लोगों को लगा कि वहां कोई संदिग्ध उपकरण रखा गया है। मामला इतना गंभीर हो गया कि कुछ स्थानों पर सुरक्षा एजेंसियों को बुलाना पड़ा और बम निरोधक दस्ते तक को सक्रिय करना पड़ा।

    साल 2013 में आई एक हॉरर फिल्म के प्रमोशन के लिए न्यूयॉर्क की एक कॉफी शॉप में भी डरावना प्रैंक किया गया। वहां छिपे हुए तारों रिमोट से चलने वाली कुर्सियों और नकली दीवारों की मदद से ऐसा माहौल तैयार किया गया कि आम ग्राहक अचानक डर गए। एक अभिनेत्री ने अपनी कथित मानसिक शक्ति से चीजों को हिलाने का अभिनय किया। टेबल और कुर्सियों के अचानक हिलने से वहां मौजूद लोग चीखते हुए बाहर निकल गए।

    इसके बाद स्माइल और स्माइल 2 के प्रमोशन ने भी लोगों का ध्यान खींचा। इन फिल्मों के प्रचार के दौरान लाइव बेसबॉल मैचों और टीवी कार्यक्रमों में डरावनी मुस्कान वाले लोगों को दर्शकों के बीच बैठाया गया। वे लंबे समय तक कैमरे की तरफ बिना पलक झपकाए देखते रहे। टीवी पर यह दृश्य देखकर लोगों को कुछ पल के लिए समझ नहीं आया कि यह किसी फिल्म का प्रमोशन है या वास्तविक घटना। इन सभी उदाहरणों से साफ है कि फिल्म प्रमोशन अब केवल पोस्टर और ट्रेलर तक सीमित नहीं रहा। मेकर्स दर्शकों को कहानी का अनुभव पहले ही कराने के लिए डर और रोमांच को प्रचार का हिस्सा बना चुके हैं।

  • कृति सेनन ने खोला रक्षाबंधन विज्ञापन विवाद का राज, करीना कपूर से बोलीं मेरी चोली पर हुई थी घंटों बहस

    कृति सेनन ने खोला रक्षाबंधन विज्ञापन विवाद का राज, करीना कपूर से बोलीं मेरी चोली पर हुई थी घंटों बहस

    नई दिल्ली। करीना कपूर एक बार फिर अपने चर्चित टॉक शो व्हाट वीमेन वांट के नए सीजन के साथ दर्शकों के बीच लौटने वाली हैं। शो के सीजन 6 का ट्रेलर सामने आ चुका है और इसमें बॉलीवुड की कई चर्चित हस्तियां नजर आ रही हैं। ट्रेलर में कृति सेनन भी करीना कपूर के साथ बातचीत करती दिखाई दे रही हैं। इस दौरान कृति ने रक्षाबंधन के दौरान सामने आए अपने एक विज्ञापन विवाद को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि किस तरह उनके कपड़ों को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि उनकी चोली तक प्राइम टाइम टीवी डिबेट का विषय बन गई।

    करीना कपूर से बातचीत के दौरान कृति सेनन ने कहा कि उन्हें यकीन नहीं हुआ था कि उनके कपड़े इतने बड़े मुद्दे में बदल जाएंगे। उन्होंने मजाकिया लेकिन हैरान करने वाले अंदाज में बताया कि उनकी चोली प्राइम टाइम न्यूज पर छह लोगों के पैनल डिस्कशन का विषय बन गई थी। कृति की बात सुनकर करीना कपूर ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि वह इस बात से परिचित हैं। बातचीत का यह हिस्सा शो के ट्रेलर में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाले हिस्सों में शामिल है।

    दरअसल रक्षाबंधन के दौरान कृति सेनन ने ज्वेलरी ब्रांड जीवा के लिए एक विज्ञापन किया था। विज्ञापन सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनके पहनावे को लेकर काफी विवाद हुआ। कृति इस विज्ञापन में सफेद रंग के इंडो वेस्टर्न लहंगे के साथ डीप नेक ब्रालेट स्टाइल टॉप में नजर आई थीं। कुछ लोगों ने उनके कपड़ों को लेकर आपत्ति जताई और इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर सवाल उठाए। विवाद बढ़ने के बाद विज्ञापन को लेकर कंपनी को भी आलोचना का सामना करना पड़ा और बाद में इसे वापस ले लिया गया।

    इस पूरे मामले पर कृति सेनन ने उस समय सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखी थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि आखिर महिलाओं के कपड़ों को ही उनकी संस्कृति और सम्मान का पैमाना क्यों बनाया जाता है। कृति का कहना था कि पिछले कुछ वर्षों में एथनिक फैशन में काफी बदलाव आया है लेकिन आज भी महिलाओं के पहनावे को लेकर उनकी संस्कृति पर सवाल खड़े कर दिए जाते हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि संस्कृति और परंपराएं किसी महिला के दिल और सोच में होती हैं न कि उसके पहनावे में।

    कृति की इसी बेबाक सोच की झलक अब करीना कपूर के शो के ट्रेलर में भी दिखाई दे रही है। दोनों अभिनेत्रियों के बीच बातचीत के दौरान रक्षाबंधन विज्ञापन विवाद का जिक्र होने से यह एपिसोड पहले ही चर्चा में आ गया है। व्हाट वीमेन वांट के नए सीजन में करीना कपूर एक बार फिर सेलिब्रिटीज से उनकी निजी जिंदगी करियर और समाज से जुड़े मुद्दों पर खुलकर सवाल करती नजर आएंगी।

    शो के ट्रेलर में कृति सेनन के अलावा पंकज त्रिपाठी मीरा राजपूत कपूर अली फजल सुहानी शाह नीतू कपूर नेहा कक्कड़ ताहिरा कश्यप महीप कपूर और गुनीत मोंगा समेत कई चर्चित चेहरे दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर दर्शक खासतौर पर कृति और करीना के एपिसोड को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं।

    कृति सेनन के वर्कफ्रंट की बात करें तो हाल ही में उनकी फिल्म कॉकटेल 2 रिलीज हुई थी। फिल्म में उनके साथ रश्मिका मंदाना और शाहिद कपूर नजर आए थे। यह फिल्म 2012 में आई कॉकटेल का सीक्वल थी। हालांकि बॉक्स ऑफिस पर फिल्म को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिल सकी। अब कृति एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज और आने वाले प्रोजेक्ट्स को लेकर सुर्खियों में हैं।