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  • स्पाइडर-मैन की आंधी में फीकी पड़ी राघव जुयाल की फिल्म, छह दिनों में सिर्फ 1 करोड़ का आंकड़ा पार कर पाई

    स्पाइडर-मैन की आंधी में फीकी पड़ी राघव जुयाल की फिल्म, छह दिनों में सिर्फ 1 करोड़ का आंकड़ा पार कर पाई


    नई दिल्ली ।
    बॉलीवुड अभिनेता राघव जुयाल की फिल्म ‘भाई तेरा स्टार है’ बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों को आकर्षित करने में संघर्ष करती नजर आ रही है। फिल्म की शुरुआत बेहद कमजोर रही और रिलीज के पहले दिन ही यह महज 25 लाख रुपये की कमाई कर सकी। इसके बाद भी फिल्म के कलेक्शन में कोई बड़ा सुधार देखने को नहीं मिला। छह दिनों के भीतर फिल्म की कुल कमाई करीब 1.02 करोड़ रुपये तक ही पहुंच पाई है। दूसरी ओर हॉलीवुड फिल्म ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है, जिसका असर भारतीय फिल्म के प्रदर्शन पर भी दिखाई दे रहा है।

    राघव जुयाल की यह पहली सोलो लीड फिल्म बताई जा रही है, जिससे काफी उम्मीदें जुड़ी थीं। हालांकि, रिलीज के बाद मिले कमजोर रिव्यू और दर्शकों की कम प्रतिक्रिया के कारण फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। फिल्म के कलेक्शन में शुरुआती दिनों से ही गिरावट दर्ज की गई। पहले दिन जहां फिल्म ने 25 लाख रुपये कमाए, वहीं दूसरे दिन भी कमाई लगभग इतनी ही रही। तीसरे दिन कलेक्शन घटकर 20 लाख रुपये और चौथे दिन करीब 21 लाख रुपये रहा।

    वीकेंड के बाद फिल्म की कमाई में भारी गिरावट देखने को मिली। पांचवें दिन फिल्म सिर्फ 6 लाख रुपये का कारोबार कर सकी, जबकि छठे दिन यह आंकड़ा और गिरकर करीब 5 लाख रुपये रह गया। लगातार कम होते कलेक्शन के कारण फिल्म की स्क्रीन संख्या भी घटकर लगभग 300 के आसपास रह गई है। इससे आने वाले दिनों में फिल्म की कमाई बढ़ने की संभावनाएं और कम हो गई हैं।

    ‘भाई तेरा स्टार है’ का बजट करीब 20 से 25 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। मौजूदा रफ्तार को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि फिल्म का पहला हफ्ता भी 1.2 करोड़ रुपये से कम के कलेक्शन पर खत्म हो सकता है। अगर यही स्थिति आगे भी बनी रही तो फिल्म की कुल कमाई 1.5 करोड़ रुपये के आसपास ही सीमित रह सकती है। ऐसे में फिल्म के लिए अपनी लागत निकालना बेहद मुश्किल दिखाई दे रहा है।

    फिल्म की कमजोर कमाई के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण दर्शकों की ओर से मिली सीमित प्रतिक्रिया और बड़े स्तर पर रिलीज हुई हॉलीवुड फिल्म से मिली चुनौती है। ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ के प्रति दर्शकों में उत्साह देखने को मिल रहा है, जिसके कारण कई सिनेमाघरों में शो की प्राथमिकता भी बदल गई है। इसका सीधा असर छोटे बजट और सीमित प्रचार वाली फिल्मों पर पड़ता है।

    ‘भाई तेरा स्टार है’ का निर्देशन और निर्माण विवेक बी अग्रवाल ने किया है। फिल्म में राघव जुयाल के अलावा निकी वालिया, संजय कपूर, निहारिका एनएम, विवान भटेना और टीना देसाई जैसे कलाकार नजर आए हैं। फिल्म की कहानी और कलाकारों की मौजूदगी के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर इसे मजबूत शुरुआत नहीं मिल सकी।

    फिल्म इंडस्ट्री में किसी भी फिल्म की सफलता के लिए शुरुआती दिनों की कमाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। राघव जुयाल की फिल्म के मामले में शुरुआती प्रदर्शन कमजोर रहने के बाद अब दूसरे सप्ताह में स्क्रीन संख्या बनाए रखना भी चुनौती बन सकता है। आने वाले दिनों में फिल्म की कमाई में कितना सुधार होता है, यह दर्शकों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।

  • मोहम्मद रफी की आवाज का ऐसा जादू, बिना इंटरनेट के 26 भाषाओं में गूंजे गीत और बनी विश्व पहचान

    मोहम्मद रफी की आवाज का ऐसा जादू, बिना इंटरनेट के 26 भाषाओं में गूंजे गीत और बनी विश्व पहचान

    नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत के महानतम पार्श्वगायकों में शामिल मोहम्मद रफी की आवाज का जादू आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में कायम है। जिस दौर में न इंटरनेट था, न सोशल मीडिया और न ही डिजिटल प्लेटफॉर्म, उस समय रफी साहब की आवाज सीमाओं को पार करते हुए दुनिया के कई हिस्सों तक पहुंच चुकी थी। 1940 के दशक में अपने गायन सफर की शुरुआत करने वाले मोहम्मद रफी ने कई दशकों तक भारतीय सिनेमा को अपनी सुरीली आवाज से समृद्ध किया और हर तरह के गीतों को अपनी गायकी से यादगार बना दिया।

    मोहम्मद रफी की खासियत यह थी कि वह हर भावना को अपनी आवाज में पूरी गहराई के साथ उतार देते थे। रोमांटिक गीतों से लेकर दर्द भरे नगमों, भजनों, कव्वालियों और देशभक्ति गीतों तक उन्होंने अपनी गायकी की अलग पहचान बनाई। उनकी आवाज में ऐसी मिठास और भावनात्मक प्रभाव था कि हर उम्र के श्रोता उनसे जुड़ जाते थे। यही वजह है कि कई दशक गुजर जाने के बाद भी उनके गीतों की लोकप्रियता कम नहीं हुई है।

    रफी साहब की गायकी केवल हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने अपने करियर में करीब 26 भाषाओं में गीत रिकॉर्ड किए। इनमें हिंदी, उर्दू, पंजाबी, बंगाली, मराठी, गुजराती, भोजपुरी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओड़िया जैसी भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेजी, फारसी, स्पेनिश, डच और क्रियोल जैसी विदेशी भाषाएं भी शामिल थीं। यह उपलब्धि उस समय और भी बड़ी मानी जाती है, जब तकनीक और संचार के साधन आज की तरह विकसित नहीं थे।

    उनकी विदेशी भाषाओं में रिकॉर्ड की गई कुछ प्रस्तुतियां हिंदी फिल्मों के लोकप्रिय गीतों की धुनों पर आधारित थीं। फिल्म ‘गुमनाम’ के चर्चित गीत ‘हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं’ की धुन पर उन्होंने अंग्रेजी गीत भी रिकॉर्ड किया था। इसी तरह फिल्म ‘सूरज’ के सदाबहार गीत ‘बहारों फूल बरसाओ’ की धुन पर भी उन्होंने अंग्रेजी में गीत गाया था। यह दिखाता है कि उनकी आवाज की पहुंच केवल भारतीय श्रोताओं तक नहीं थी।

    मोहम्मद रफी से जुड़ा एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि उन्होंने फिल्मों के अलावा विज्ञापनों के लिए भी अपनी आवाज दी थी। 1950 के दशक में उन्होंने बर्मा शेल ऑयल कंपनी के लिए एक जिंगल रिकॉर्ड किया था, जिसका इस्तेमाल रेडियो विज्ञापन के रूप में किया जाता था। उस समय रेडियो ही लोगों तक पहुंचने का सबसे बड़ा माध्यम था और रफी साहब की आवाज ने उस विज्ञापन को भी खास बना दिया था।

    इसके अलावा उन्होंने कुछ सरकारी अभियानों और अन्य विशेष परियोजनाओं के लिए भी अपनी आवाज का योगदान दिया। हालांकि, उनकी सबसे बड़ी पहचान हमेशा भारतीय फिल्मों के उन हजारों गीतों से रही, जो आज भी संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं।

    मोहम्मद रफी केवल एक गायक नहीं थे, बल्कि भारतीय संगीत की ऐसी विरासत हैं, जिसने भाषा और भौगोलिक सीमाओं को पार किया। उनकी आवाज में मौजूद भावनाओं और सुरों की गहराई ने उन्हें दुनिया भर में सम्मान दिलाया। आज भी उनकी गायकी नई पीढ़ी को प्रेरित करती है और उनके गीत भारतीय संगीत इतिहास की अमूल्य धरोहर बने हुए हैं।

  • कोयला माफिया और अपराध की कहानी ने रचा इतिहास, गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 के कलाकारों को मिली नई पहचान

    कोयला माफिया और अपराध की कहानी ने रचा इतिहास, गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 के कलाकारों को मिली नई पहचान

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो रिलीज के लंबे समय बाद भी दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाए रखती हैं। अनुराग कश्यप की फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 भी ऐसी ही फिल्मों में शामिल है, जिसने अपराध, राजनीति और कोयला माफिया की पृष्ठभूमि पर बनी कहानी से हिंदी सिनेमा में एक अलग पहचान बनाई। करीब 14 साल बाद भी यह फिल्म अपने किरदारों, संवादों और अनोखे अंदाज के कारण दर्शकों के बीच चर्चा में बनी हुई है।

    फिल्म का सबसे चर्चित किरदार फैजल खान रहा, जिसे अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने निभाया था। यह किरदार उनके करियर का ऐसा मोड़ साबित हुआ जिसने उन्हें एक प्रतिभाशाली कलाकार से आगे बढ़ाकर देश के सबसे भरोसेमंद अभिनेताओं में शामिल कर दिया। फैजल खान की शांत लेकिन प्रभावशाली शैली, उनकी नजरों का आत्मविश्वास और संवाद बोलने का अलग अंदाज दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ।

    गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 की खासियत यह थी कि फिल्म ने अपराध की दुनिया को केवल हिंसा के रूप में नहीं दिखाया, बल्कि उसके पीछे की सामाजिक परिस्थितियों, पारिवारिक संघर्षों और सत्ता की राजनीति को भी सामने रखा। कोयला खदानों, स्थानीय वर्चस्व और पीढ़ियों से चले आ रहे संघर्षों की कहानी ने फिल्म को आम अपराध आधारित फिल्मों से अलग पहचान दी।

    नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने फैजल खान के किरदार में जिस तरह की सहजता दिखाई, उसने अभिनय की नई मिसाल पेश की। उनके चेहरे के भाव, संवादों के बीच ठहराव और छोटे-छोटे हावभाव ने किरदार को बेहद वास्तविक बना दिया। फिल्म में उनका अभिनय इतना प्रभावशाली रहा कि फैजल खान आज भी हिंदी सिनेमा के यादगार किरदारों में गिना जाता है।

    इस फिल्म ने न सिर्फ नवाजुद्दीन सिद्दीकी को नई पहचान दी, बल्कि इसमें काम करने वाले कई कलाकारों के करियर को भी मजबूती मिली। फिल्म की कहानी, निर्देशन, अभिनय और प्रस्तुति की खूब प्रशंसा हुई। गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 ने फिल्मफेयर समेत कई पुरस्कारों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और इसे आधुनिक भारतीय सिनेमा की महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल किया गया।

    फिल्म की सफलता के बाद नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी अभिनय क्षमता साबित की। उन्होंने द लंचबॉक्स, बदलापुर, मंटो, सीरियस मेन जैसी फिल्मों और कई वेब सीरीज में अपनी अलग छाप छोड़ी। उनकी सबसे बड़ी ताकत यह रही कि उन्होंने खुद को किसी एक तरह के किरदार तक सीमित नहीं रखा और हर भूमिका में नई ऊर्जा दिखाई।

    एक ऐसे दौर में जब हिंदी सिनेमा में बड़े सितारों और भव्य प्रस्तुतियों का दबदबा था, गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 ने साबित किया कि मजबूत कहानी और दमदार अभिनय भी दर्शकों को आकर्षित कर सकते हैं। फिल्म ने छोटे शहरों की कहानियों और स्थानीय किरदारों को मुख्यधारा में जगह दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    14 साल बाद भी गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 का प्रभाव कम नहीं हुआ है। फैजल खान का किरदार आज भी सोशल मीडिया और दर्शकों के बीच चर्चा में रहता है। नवाजुद्दीन सिद्दीकी की यह भूमिका उनके अभिनय सफर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जाती है।

    भारतीय सिनेमा में ऐसी फिल्में कम बनती हैं जो समय बीतने के बाद भी अपनी प्रासंगिकता बनाए रखें। गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 ने न केवल अपराध और समाज की जटिलताओं को दिखाया, बल्कि यह भी साबित किया कि एक मजबूत किरदार किसी कलाकार के पूरे करियर की दिशा बदल सकता है।

  • असम बाढ़ त्रासदी में मदद के लिए आगे आए अनुपम खेर, मुख्यमंत्री राहत कोष में दान किए 5 लाख रुपये

    असम बाढ़ त्रासदी में मदद के लिए आगे आए अनुपम खेर, मुख्यमंत्री राहत कोष में दान किए 5 लाख रुपये

    नई दिल्ली । असम में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर आगे आए हैं। उन्होंने प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे परिवारों की सहायता के लिए असम मुख्यमंत्री राहत कोष में 5 लाख रुपये का योगदान दिया है। अभिनेता ने यह राशि आरटीजीएस के माध्यम से राहत कोष में भेजी, ताकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे बचाव, राहत और पुनर्वास कार्यों को मजबूती मिल सके। अनुपम खेर का यह कदम आपदा के समय जरूरतमंद लोगों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।

    असम इन दिनों भीषण बाढ़ की समस्या से जूझ रहा है, जिसके कारण कई जिलों में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। लगातार बारिश और नदियों के जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है। ऐसे समय में सामाजिक संस्थाओं, आम नागरिकों और सार्वजनिक हस्तियों की ओर से मिल रही मदद प्रभावित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

    अनुपम खेर ने बाढ़ प्रभावित लोगों के प्रति अपनी चिंता जताते हुए कुछ दिन पहले लोगों से असम की सहायता के लिए आगे आने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि आपदा के समय छोटी से छोटी मदद भी प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी राहत बन सकती है। इसके बाद उन्होंने स्वयं पहल करते हुए मुख्यमंत्री राहत कोष में आर्थिक सहायता प्रदान की।

    अभिनेता का यह योगदान अनुपम खेर फाउंडेशन के माध्यम से किए जा रहे सामाजिक कार्यों की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अनुपम खेर समय-समय पर जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए विभिन्न अभियानों से जुड़े रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में भी वह अपनी भागीदारी निभाते रहे हैं।

    असम में बाढ़ से प्रभावित लोगों को भोजन, चिकित्सा सुविधा, रहने की व्यवस्था और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के लिए सरकार और विभिन्न संगठन लगातार काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री राहत कोष के जरिए जुटाई जा रही राशि का इस्तेमाल प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाने और पुनर्वास कार्यों को गति देने में किया जा रहा है।

    अनुपम खेर ने अपने योगदान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि प्राकृतिक आपदा के समय समाज के हर वर्ग को एकजुट होकर प्रभावित लोगों की सहायता करनी चाहिए। उनका कहना है कि सामूहिक प्रयासों से ही बड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। असम में जारी राहत अभियान के बीच अभिनेता की यह पहल कई लोगों को मदद के लिए प्रेरित कर सकती है।

    असम में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए लगातार राहत कार्य जारी हैं और देश के विभिन्न हिस्सों से लोग सहायता के लिए आगे आ रहे हैं। सरकार, स्वयंसेवी संगठन और आम नागरिक मिलकर प्रभावित परिवारों को इस कठिन समय से बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं।

  • थलापति विजय और संगीता के तलाक मामले में नया मोड़, पत्नी ने वापस ली अलगाव की अर्जी

    थलापति विजय और संगीता के तलाक मामले में नया मोड़, पत्नी ने वापस ली अलगाव की अर्जी

    नई दिल्ली । तमिल फिल्म जगत और तमिलनाडु की राजनीति से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। अभिनेता और नेता थलापति विजय के वैवाहिक जीवन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब नया अपडेट सामने आया है। उनकी पत्नी संगीता ने तलाक के लिए दायर की गई अर्जी वापस ले ली है। इसके बाद अदालत ने इस मामले को बंद कर दिया है। इस फैसले के साथ ही विजय और संगीता के अलग होने की अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है।

    विजय और संगीता के रिश्ते को लेकर पिछले कुछ समय से कई तरह की खबरें सामने आ रही थीं। दोनों के बीच कथित मतभेद और अलगाव की चर्चाओं ने उनके प्रशंसकों का ध्यान खींचा था। अब तलाक की अर्जी वापस लिए जाने के बाद दोनों के रिश्ते को लेकर स्थिति बदलती नजर आ रही है।

    जानकारी के अनुसार, संगीता ने विजय से अलग होने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी, जिसे बाद में उन्होंने वापस ले लिया। इसके बाद संबंधित अदालत ने तलाक की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय मामले को समाप्त कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद विजय के समर्थकों ने भी राहत महसूस की।

    इससे पहले दोनों के रिश्ते को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि वैवाहिक विवाद की वजह से दोनों के बीच दूरी बढ़ी थी। विजय का नाम अभिनेत्री तृषा कृष्णन के साथ भी जोड़ा गया था, हालांकि इन चर्चाओं को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी।

    विजय और संगीता की शादी वर्ष 1999 में हुई थी। दोनों करीब 27 वर्षों से साथ हैं। इस दौरान उनके दो बच्चे भी हुए। उनके बेटे का नाम जेसन संजय और बेटी का नाम दिव्या साशा है। परिवार और निजी जीवन को लेकर विजय हमेशा काफी निजी रवैया रखते रहे हैं।

    थलापति विजय ने अभिनय के क्षेत्र में लंबा सफर तय करने के बाद राजनीति में भी कदम रखा है। तमिलनाडु की राजनीति में उनकी सक्रियता बढ़ने के बाद उनके निजी जीवन से जुड़ी खबरों पर भी लोगों की नजर बनी हुई थी।

    तलाक की अर्जी वापस लिए जाने के बाद अब विजय और संगीता के रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाएं एक नए मोड़ पर पहुंच गई हैं। हालांकि दोनों की ओर से इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

    विजय और संगीता की जोड़ी दक्षिण भारतीय सिनेमा जगत की चर्चित जोड़ियों में रही है। लंबे समय तक साथ रहने के बाद उनके अलग होने की खबरों ने प्रशंसकों को चिंता में डाल दिया था। अब अदालत में मामला खत्म होने के बाद उनके समर्थकों के बीच सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

    फिलहाल यह मामला कानूनी रूप से समाप्त हो चुका है और विजय-संगीता के वैवाहिक संबंधों को लेकर आगे की स्थिति उनके व्यक्तिगत फैसलों पर निर्भर करेगी। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखाया है कि फिल्मी सितारों के निजी जीवन से जुड़ी खबरें किस तरह लोगों की दिलचस्पी का केंद्र बन जाती हैं।

  • अस्पताल में मिथुन चक्रवर्ती से मिले सुवेंदु अधिकारी, बोले- छोटा ऑपरेशन हुआ, अब पूरी तरह ठीक हैं अभिनेता

    अस्पताल में मिथुन चक्रवर्ती से मिले सुवेंदु अधिकारी, बोले- छोटा ऑपरेशन हुआ, अब पूरी तरह ठीक हैं अभिनेता

    नई दिल्ली । अभिनेता और भारतीय जनता पार्टी के नेता मिथुन चक्रवर्ती के स्वास्थ्य को लेकर सामने आई खबर के बाद उनके प्रशंसकों और फिल्म जगत में चिंता का माहौल बन गया था। इसी बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कोलकाता के एक निजी अस्पताल पहुंचकर मिथुन चक्रवर्ती से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य का हाल जाना। मुलाकात के बाद सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि मिथुन चक्रवर्ती का पिछली रात एक छोटा ऑपरेशन हुआ था। उन्होंने कहा कि अभिनेता ने खुद उन्हें और पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद सामिक भट्टाचार्य को ऑपरेशन के बारे में जानकारी दी थी। हालांकि, मिथुन चक्रवर्ती नहीं चाहते थे कि उनके स्वास्थ्य से जुड़ी यह जानकारी सार्वजनिक की जाए।

    सुवेंदु अधिकारी के मुताबिक मिथुन चक्रवर्ती अब पूरी तरह ठीक हैं और उनकी हालत सामान्य है। उन्होंने अभिनेता के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की। मिथुन चक्रवर्ती के अस्पताल में भर्ती होने की खबर सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों के बीच चिंता बढ़ गई थी। हालांकि, अब सामने आई जानकारी के बाद उन्हें राहत मिली है। बताया गया है कि ऑपरेशन छोटा था और इसके बाद उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है। अस्पताल में डॉक्टर उनकी लगातार निगरानी कर रहे हैं।

    मिथुन चक्रवर्ती भारतीय सिनेमा के उन अभिनेताओं में शामिल हैं जिन्होंने हिंदी और बंगाली फिल्मों में लंबे समय तक अपनी अलग पहचान बनाए रखी है। उन्होंने वर्ष 1976 में मशहूर निर्देशक मृणाल सेन की फिल्म ‘मृगया’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। पहली ही फिल्म में उनके अभिनय को व्यापक सराहना मिली और उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके बाद उन्होंने बंगाली और हिंदी सिनेमा में लगातार काम किया और अलग-अलग तरह के किरदारों के जरिए दर्शकों के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाई।

    वर्ष 1978 में आई बंगाली फिल्म ‘नदी थेके सागरे’ से उन्हें लोकप्रियता मिली। इसके बाद ‘सुरक्षा’, ‘तराना’, ‘हम पांच’ और ‘हम से बढ़कर कौन’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अभिनय किया। हालांकि वर्ष 1982 में रिलीज हुई ‘डिस्को डांसर’ उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। फिल्म की सफलता ने मिथुन को देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोकप्रिय बना दिया। उनके डांस और अभिनय की अलग शैली ने उन्हें दर्शकों के बीच खास पहचान दिलाई।

    इसके बाद मिथुन चक्रवर्ती ने ‘शौकीन’, ‘अशांति’, ‘कसम पैदा करने वाले की’, ‘प्यार झुकता नहीं’, ‘गुलामी’, ‘स्वर्ग से सुंदर’, ‘डांस डांस’, ‘प्यार का मंदिर’, ‘स्वामी विवेकानंद’, ‘गुरु’, ‘गोलमाल 3’, ‘हाउसफुल 2’, ‘ओएमजी-ओह माय गॉड!’, ‘किक’, ‘द ताशकंद फाइल्स’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ समेत कई फिल्मों में काम किया। अपने लंबे फिल्मी करियर के दौरान उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले। उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। वर्ष 2024 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। फिलहाल उनके छोटे ऑपरेशन के बाद स्वास्थ्य सामान्य बताए जाने से प्रशंसकों को राहत मिली है और सभी उनके जल्द पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

  • 50 हजार स्क्रीन पर रिलीज होगी ‘रामायण’! CM का बड़ा बयान- ऑस्कर नहीं मिला तो होगी निराशा

    50 हजार स्क्रीन पर रिलीज होगी ‘रामायण’! CM का बड़ा बयान- ऑस्कर नहीं मिला तो होगी निराशा


    नई दिल्ली।  रणबीर कपूर स्टारर फिल्म रामायण रिलीज से पहले ही लगातार सुर्खियां बटोर रही है। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है और अब इसके ग्लोबल रिलीज प्लान ने इसकी चर्चा को और तेज कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक रामायण को दुनियाभर में करीब 50 हजार स्क्रीन पर रिलीज करने की तैयारी की जा रही है। अगर यह योजना तय रूप में अमल में आती है तो यह किसी भारतीय फिल्म के लिए सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय रिलीज प्लान में से एक होगी। फिल्म के निर्माताओं की कोशिश साफ तौर पर रामायण की कहानी को भारतीय दर्शकों के साथ साथ दुनियाभर के सिनेमा प्रेमियों तक पहुंचाने की है।

    फिल्म के अंतरराष्ट्रीय वितरण की जिम्मेदारी सोनी पिक्चर्स के पास होने की जानकारी सामने आई है। दुनिया के अलग अलग बाजारों में फिल्म को बड़े स्तर पर रिलीज करने की तैयारी की जा रही है। मेकर्स ने विदेशी दर्शकों को ध्यान में रखते हुए फिल्म का अंग्रेजी लिप सिंक्ड ट्रेलर भी जारी किया है। इससे संकेत मिलता है कि फिल्म को केवल भारतीय दर्शकों तक सीमित रखने के बजाय वैश्विक स्तर पर पेश करने की व्यापक योजना बनाई गई है।

    रामायण को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बयान भी काफी चर्चा में है। मुंबई के फिल्म सिटी में नमित मल्होत्रा की प्राइम फोकस फैसिलिटी के उद्घाटन के दौरान उन्होंने फिल्म की तारीफ करते हुए इसके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने की उम्मीद जताई। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर रामायण को ऑस्कर नहीं मिला तो उन्हें निराशा होगी। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा और तेज हो गई है।

    रामायण की सबसे बड़ी खासियत इसकी विशाल स्टारकास्ट और भव्य प्रस्तुति है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में नजर आएंगे जबकि साई पल्लवी माता सीता का किरदार निभा रही हैं। यश को रावण के रूप में पेश किया गया है वहीं सनी देओल भगवान हनुमान की भूमिका में दिखाई देंगे। रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म का निर्देशन नितेश तिवारी ने किया है जबकि नमित मल्होत्रा इसके निर्माण से जुड़े हैं।

    फिल्म का ट्रेलर सामने आने के बाद इसके विजुअल इफेक्ट्स और बड़े स्तर पर तैयार किए गए सेट और किरदारों की खूब चर्चा हुई है। खास तौर पर रणबीर कपूर के राम और यश के रावण वाले लुक ने दर्शकों का ध्यान खींचा है। मेकर्स ने फिल्म के निर्माण में बड़े पैमाने पर तकनीक और विजुअल इफेक्ट्स का इस्तेमाल किया है ताकि रामायण की पौराणिक दुनिया को बड़े पर्दे पर भव्य रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

    रामायण का पहला भाग दिवाली 2026 के मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज होने की तैयारी में है। फिल्म की रिलीज डेट 6 नवंबर बताई गई है। ऐसे में अब दर्शकों की नजर इसके अगले अपडेट पर बनी हुई है। 50 हजार स्क्रीन का ग्लोबल प्लान और ऑस्कर को लेकर मुख्यमंत्री का बयान फिल्म की महत्वाकांक्षा को दिखाता है। अगर फिल्म उम्मीद के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंच बनाने में सफल होती है तो यह भारतीय सिनेमा के लिए भी एक बड़ा वैश्विक पड़ाव साबित हो सकती है।

  • ‘काश PM तानाशाह होते’, नाबालिग के वायरल वीडियो पर रुपाली गांगुली का फूटा गुस्सा, कमेंट पर मचा घमासान

    ‘काश PM तानाशाह होते’, नाबालिग के वायरल वीडियो पर रुपाली गांगुली का फूटा गुस्सा, कमेंट पर मचा घमासान


    नई दिल्ली। अनुपमा फेम अभिनेत्री और बीजेपी की सदस्य रुपाली गांगुली एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर वायरल हुए एक वीडियो पर प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक नाबालिग लड़की प्रधानमंत्री के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करती नजर आ रही है। वीडियो को लेकर एक यूजर ने बच्ची के माता पिता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए रुपाली गांगुली ने प्रधानमंत्री के अपमान पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और ऐसी टिप्पणी कर दी जिसके बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई।

    रुपाली गांगुली ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि प्रधानमंत्री का इस तरह अपमान करने के नतीजे होने चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि कभी कभी उन्हें लगता है कि काश प्रधानमंत्री तानाशाह होते। अभिनेत्री की यह टिप्पणी सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स के बीच अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलने लगीं। कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री के लिए आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल की आलोचना करते हुए रुपाली का समर्थन किया तो कई यूजर्स ने उनके तानाशाह वाले बयान को लेकर सवाल खड़े किए।

    इस पूरे विवाद की शुरुआत उस वायरल वीडियो से हुई जिसमें एक नाबालिग लड़की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करती दिखाई दी। वीडियो को साझा करने वाले यूजर ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल और उनके आसपास के माहौल को लेकर भी सवाल उठाए। साथ ही बच्ची के माता पिता की जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई। इसी मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए रुपाली ने प्रधानमंत्री के सम्मान और सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

    रुपाली गांगुली की टिप्पणी पर कई यूजर्स ने उनका समर्थन किया लेकिन बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें ट्रोल भी किया। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके चर्चित टीवी किरदारों का जिक्र करते हुए तंज कसा। कुछ ने उन्हें अनुपमा के किरदार से जोड़कर प्रतिक्रिया दी तो कुछ ने उनके बयान को लोकतांत्रिक व्यवस्था के संदर्भ में गलत बताया। इस तरह एक सोशल मीडिया कमेंट देखते ही देखते अभिनेत्री के लिए विवाद का कारण बन गया।

    हालांकि यह पहली बार नहीं है जब रुपाली गांगुली ने राजनीतिक या सामाजिक मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी हो। इससे पहले भी वह छात्रों के विरोध प्रदर्शन और आंदोलन को लेकर अपनी बात सामने रख चुकी हैं। उन्होंने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने को जरूरी बताया था। उनका कहना था कि छात्रों की जायज मांगों को उठाना जरूरी है लेकिन हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से किसी आंदोलन की गंभीरता कम हो जाती है।

    रुपाली ने पहले यह भी कहा था कि पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है लेकिन विरोध का रास्ता शांतिपूर्ण होना चाहिए। इसी वजह से उनके ताजा बयान को उनके पहले के सार्वजनिक बयानों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि इस बार उनकी टिप्पणी का एक खास हिस्सा सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गया है।

    विवाद के बीच अभिनेत्री के वर्कफ्रंट की बात करें तो रुपाली गांगुली लंबे समय से टीवी के लोकप्रिय शो अनुपमा में मुख्य भूमिका निभा रही हैं। इस शो ने उन्हें घर घर में पहचान दिलाई है और उनके किरदार को दर्शकों के बीच काफी लोकप्रियता मिली है। अभिनय के साथ सोशल मीडिया पर अपनी बेबाक राय रखने के कारण भी रुपाली अक्सर सुर्खियों में रहती हैं।

    फिलहाल प्रधानमंत्री के अपमान से जुड़े वायरल वीडियो पर रुपाली गांगुली की टिप्पणी ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ लोग सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के सम्मान और भाषा की मर्यादा की बात कर रहे हैं तो दूसरी तरफ अभिनेत्री के तानाशाह वाले बयान को लेकर लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यही वजह है कि उनका यह पोस्ट सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • सनी देओल के गुस्से से डरते थे करण? बेटे ने बताया पिता की सख्ती का सच, सुनकर नहीं रुकेगी हंसी

    सनी देओल के गुस्से से डरते थे करण? बेटे ने बताया पिता की सख्ती का सच, सुनकर नहीं रुकेगी हंसी


    नई दिल्ली। सनी देओल इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म बंटवारा 1947 को लेकर लगातार चर्चा में हैं। फिल्म में उनके साथ प्रीति जिंटा और उनके बेटे करण देओल भी नजर आएंगे। सनी और करण की यह साथ में दूसरी फिल्म है और तीनों कलाकार फिल्म के प्रमोशन में व्यस्त हैं। इसी दौरान एक प्रमोशनल इवेंट में करण देओल से उनके पिता सनी देओल को लेकर ऐसा सवाल पूछ लिया गया जिसका जवाब सुनकर वहां मौजूद लोग जोर से हंस पड़े। करण से पूछा गया कि क्या बचपन में कभी घर पर सनी देओल ने उनकी पिटाई की थी।

    सवाल का जवाब करण ने बेहद सहज और मजेदार अंदाज में दिया। उन्होंने कहा कि पिटाई तो कभी नहीं हुई लेकिन सनी देओल का इशारा ही काफी होता था। करण के इस जवाब के बाद वहां मौजूद दर्शक हंसने लगे। खुद सनी देओल और प्रीति जिंटा भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। करण के छोटे से जवाब ने यह जरूर बता दिया कि घर में पिता की मौजूदगी और उनका सख्त अंदाज बच्चों के लिए कितना प्रभावशाली रहा होगा।

    देओल परिवार में पिता धर्मेंद्र को लेकर सनी और बॉबी देओल पहले भी कई बार बता चुके हैं कि वह अपने बच्चों के लिए काफी सख्त थे। दोनों भाइयों ने अलग अलग मौकों पर बताया है कि बचपन में वे अपने पिता से काफी डरते थे। हालांकि समय के साथ सनी और बॉबी ने अपने बच्चों के साथ दोस्ताना रिश्ता बनाए रखने की कोशिश की। करण का जवाब भी इसी पारिवारिक माहौल की एक मजेदार झलक देता है।

    अब बात सनी देओल की नई फिल्म बंटवारा 1947 की करें तो इसका निर्देशन राजकुमार संतोषी कर रहे हैं। फिल्म का निर्माण आमिर खान अपने प्रोडक्शन हाउस आमिर खान प्रोडक्शन्स के तहत कर रहे हैं। फिल्म को लेकर शुरुआत से ही दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है क्योंकि इसमें सनी देओल और प्रीति जिंटा की जोड़ी लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर नजर आने वाली है। इसके साथ ही करण देओल भी फिल्म का अहम हिस्सा हैं।

    फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों की तरफ से अच्छा रिस्पॉन्स मिलने की बात सामने आई है। कहानी भारत विभाजन के दौर की पृष्ठभूमि में बुनी गई है। ट्रेलर में एक मुस्लिम परिवार के नए घर में पहुंचने और वहां पहले से मौजूद एक हिंदू महिला के बीच बने हालात को दिखाया गया है। कहानी में सनी देओल का किरदार उस महिला की रक्षा के लिए अपने ही समुदाय के लोगों के सामने खड़ा होता दिखाई देता है। फिल्म में शबाना आजमी अली फजल और अभिमन्यु सिंह जैसे कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।

    बंटवारा 1947 प्रीति जिंटा के लिए भी खास फिल्म है क्योंकि इसके जरिए वह लंबे अंतराल के बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं। वह इससे पहले भैयाजी सुपरहिट में नजर आई थीं। सनी देओल के साथ प्रीति जिंटा ने द हीरो अ लव स्टोरी ऑफ ए स्पाई हीरोज और भैयाजी सुपरहिट जैसी फिल्मों में काम किया है। ऐसे में दोनों की जोड़ी को दोबारा पर्दे पर देखने के लिए फैंस काफी उत्साहित हैं।

    वहीं करण देओल की बात करें तो उन्होंने 2019 में फिल्म पल पल दिल के पास से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद वह वेल्ले में नजर आए। अब बंटवारा 1947 के जरिए वह लंबे अंतराल के बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहे हैं। फिल्म के प्रमोशन के दौरान पिता और बेटे की केमिस्ट्री भी दर्शकों का ध्यान खींच रही है और करण का पिटाई वाला मजेदार जवाब इसी की एक दिलचस्प झलक बन गया है।

  • शादी के लिए नहीं किया था धर्म परिवर्तन? दीपिका कक्कड़ को लेकर जयति भाटिया के बयान से मची चर्चा

    शादी के लिए नहीं किया था धर्म परिवर्तन? दीपिका कक्कड़ को लेकर जयति भाटिया के बयान से मची चर्चा


    नई दिल्ली। टीवी की लोकप्रिय अभिनेत्री दीपिका कक्कड़ की निजी जिंदगी हमेशा से प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय रही है। खासतौर पर अभिनेता शोएब इब्राहिम के साथ उनकी शादी और धर्म परिवर्तन को लेकर लंबे समय से अलग अलग तरह की बातें सामने आती रही हैं। अब उनकी को स्टार और करीबी दोस्त जयति भाटिया ने दीपिका के धर्म परिवर्तन को लेकर एक अहम बात बताई है। उनके मुताबिक दीपिका ने शोएब से निकाह करने के लिए धर्म परिवर्तन नहीं किया था बल्कि यह उनका निजी फैसला था जो उनके जीवन के एक मुश्किल दौर के दौरान सामने आया।

    सिद्धार्थ कनन के साथ बातचीत में जयति भाटिया ने दीपिका के बारे में बात करते हुए कहा कि दीपिका अपने जीवन में जिस भी चीज को अपनाती हैं उसमें पूरी तरह समर्पित रहती हैं। उनके मुताबिक जब दीपिका शोएब इब्राहिम के साथ रिश्ते में आईं तो उन्होंने उस रिश्ते को भी पूरी गंभीरता और ईमानदारी से निभाने की कोशिश की। इसी संदर्भ में जब जयति ने खुद दीपिका से पूछा था कि क्या उन्होंने शादी की वजह से अपना धर्म बदला है तो दीपिका ने इससे इनकार किया था।

    जयति के अनुसार दीपिका उस समय अपनी जिंदगी के एक कठिन दौर से गुजर रही थीं। इसी दौरान वह अजमेर शरीफ गई थीं। वहां धार्मिक और आध्यात्मिक अनुभव के बाद उनके मन में इस्लाम को अपनाने का विचार आया। जयति ने बताया कि दीपिका का यह फैसला किसी दबाव या केवल शादी की वजह से नहीं था बल्कि उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत इच्छा के तौर पर लिया था। हालांकि यह दीपिका की निजी आस्था और उनके अपने अनुभव से जुड़ा विषय है।

    जयति ने यह भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति को प्रार्थना और आस्था से मानसिक मजबूती मिलती है तो उसके लिए वह रास्ता अपनाना उसका व्यक्तिगत निर्णय है। उनके मुताबिक दीपिका को भी इस्लाम से जुड़ने के बाद एक तरह की ताकत महसूस हुई और उन्होंने अपनी इच्छा से इसे स्वीकार किया।

    दीपिका और शोएब की प्रेम कहानी की शुरुआत टीवी शो ससुराल सिमर का के सेट से हुई थी। दोनों की मुलाकात 2011 में इस शो के दौरान हुई थी। शुरुआत में उनके बीच दोस्ती हुई और समय के साथ यह रिश्ता प्यार में बदल गया। दोनों ने लंबे समय तक एक दूसरे को डेट किया और इसके बाद 2018 में शादी कर ली। उनकी शादी में परिवार और करीबी लोग ही शामिल हुए थे।

    शादी के बाद दोनों ने अपनी निजी जिंदगी को लेकर कई बार सोशल मीडिया पर झलकियां साझा की हैं। समय के साथ उनकी जिंदगी में परिवार भी बढ़ा और दोनों अब अपने बेटे के साथ पैरेंटहुड का आनंद ले रहे हैं। दीपिका और शोएब की जोड़ी को उनके प्रशंसक सोशल मीडिया पर भी काफी पसंद करते हैं।

    हाल ही में दीपिका के जन्मदिन के मौके पर शोएब ने उनके लिए एक भावुक पोस्ट शेयर किया था। उन्होंने दीपिका को फाइटर बताते हुए उनकी हिम्मत की तारीफ की और उनके स्वस्थ एवं लंबे जीवन की दुआ की। शोएब ने यह भी लिखा कि दीपिका को खुश रखने की जिम्मेदारी उनकी है। इस पोस्ट के बाद दोनों के प्रशंसकों ने भी सोशल मीडिया पर जमकर प्यार बरसाया।

    दीपिका के धर्म परिवर्तन को लेकर अब जयति भाटिया का बयान एक बार फिर इस पुराने विषय को चर्चा में ले आया है। हालांकि धर्म और आस्था किसी भी व्यक्ति का बेहद निजी विषय है और दीपिका के बारे में सामने आई यह जानकारी उनकी करीबी दोस्त के बयान पर आधारित है। इससे इतना जरूर स्पष्ट होता है कि इस फैसले को लेकर दीपिका की अपनी व्यक्तिगत सोच और आध्यात्मिक अनुभव को महत्वपूर्ण बताया गया है।