Loksatta
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नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार गुरुवार रात पुणे के डोंजे स्थित उनके फार्महाउस पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उनके अंतिम दर्शन के लिए परिवार के सदस्यों के साथ फिल्म जगत की कई हस्तियां और प्रशंसक पहुंचे। अभिनेता के बेटे मल्हार पाटेकर ने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि नाना साहेब जैसे लोग वास्तव में कभी दूर नहीं होते। उनके काम और उपलब्धियां उन्हें हमेशा लोगों के बीच जीवित रखेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पिता की सोच और उनके सपनों को आगे बढ़ाना ही परिवार के लिए भविष्य की दिशा तय करेगा। मल्हार के शब्दों से पिता के प्रति उनका गहरा लगाव और सम्मान साफ झलकता है।
नाना पाटेकर के निधन पर अभिनेता शाहरुख खान ने भी भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नाना के साथ अपनी पुरानी तस्वीर साझा करते हुए उन्हें अपना गुरु शिक्षक आलोचक और दोस्त बताया। शाहरुख ने नाना के साथ पहली मुलाकात का किस्सा याद किया। उन्होंने बताया कि नाना के सामने वह काफी प्रभावित हो गए थे और अपने बालों से खेलने लगे थे। इस पर नाना ने उन्हें टोकते हुए कहा था कि हीरो की तरह बाल मत बना तू एक्टर है। शाहरुख के लिए यह सिर्फ एक मजाकिया घटना नहीं थी बल्कि अभिनय की असली पहचान समझाने वाला सबक था।
शाहरुख ने अपने संदेश में बताया कि नाना पाटेकर का स्वभाव बेहद सीधा और बेबाक था। वह सामने वाले को खुश करने के लिए झूठी तारीफ नहीं करते थे बल्कि वही बात कहते थे जो उनके अनुसार जरूरी होती थी। उनका प्यार जताने का तरीका भी अलग था। कभी डांटकर तो कभी तीखी बात कहकर वह अपनेपन का एहसास करा देते थे। शाहरुख ने याद किया कि नाना उनके साथ कैरम खेलने के बेहद शौकीन थे और अक्सर उन्हें हरा देते थे। उनके बीच की यह दोस्ती फिल्मी दुनिया के रिश्तों से कहीं आगे बढ़कर आपसी सम्मान और स्नेह का उदाहरण थी।
नाना को याद करते हुए शाहरुख ने इस बात का अफसोस जताया कि उन्हें उनके साथ और वक्त बिताने का मौका नहीं मिला। उन्होंने कहा कि काश दोनों के बीच कुछ और बातचीत होती और कुछ बहसों के साथ चाय पीने तथा कैरम खेलने के और अवसर मिलते। शाहरुख ने नाना की उस सीख को भी याद किया जो उनके दिल में हमेशा रहेगी। नाना ने उनसे कहा था कि हीरो बनने के चक्कर में एक्टर मत खोना। इस बात का अर्थ है कि लोकप्रियता और पर्दे पर बड़ी छवि बनाने की कोशिश में कलाकार को अपने अभिनय की असली पहचान नहीं खोनी चाहिए।
नाना पाटेकर का करियर कई दशकों तक फैला रहा। उन्होंने हिंदी और मराठी फिल्मों में गंभीर किरदारों से लेकर यादगार व्यावसायिक भूमिकाओं तक अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी तीखी संवाद अदायगी और प्रभावशाली अभिनय ने उन्हें दर्शकों के बीच खास स्थान दिलाया। उनके निधन से भारतीय सिनेमा ने एक विशिष्ट कलाकार को खो दिया है। उनकी फिल्में उनके किरदार और शाहरुख जैसे कलाकारों को दी गई उनकी सीख आने वाली पीढ़ियों के लिए उनकी विरासत बनी रहेगी।









