Category: Entertainment

  • अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय की 8 फिल्मों का रिकॉर्ड, जानें किसने बॉक्स ऑफिस पर मचाया सबसे बड़ा धमाल

    अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय की 8 फिल्मों का रिकॉर्ड, जानें किसने बॉक्स ऑफिस पर मचाया सबसे बड़ा धमाल


    नई दिल्ली। बॉलीवुड में कई जोड़ियां आईं और गईं, लेकिन अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय की जोड़ी को दर्शकों ने हमेशा खास माना है। रील लाइफ में भी इस जोड़ी ने कई फिल्मों में साथ काम करके अपनी केमिस्ट्री से दर्शकों का दिल जीता है। दोनों ने अलग-अलग जॉनर की फिल्मों में काम किया, जिनमें रोमांस, ड्रामा, थ्रिलर और पीरियड फिल्में शामिल हैं।

    इनकी पहली साथ में फिल्म ‘ढाई अक्षर प्रेम के’ (2000) थी, जो एक रोमांटिक ड्रामा थी। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औसत रही, लेकिन दोनों की जोड़ी ने पहली बार पर्दे पर दर्शकों का ध्यान खींचा। इसके बाद 2003 में आई ‘कुछ ना कहो’, जिसमें इनकी केमिस्ट्री को और बेहतर तरीके से दिखाया गया।

    इसके बाद दोनों ने पीरियड ड्रामा ‘उमराव जान’ में भी साथ काम किया, जिसमें ऐश्वर्या ने मुख्य भूमिका निभाई और अभिषेक एक नवाब के किरदार में नजर आए। फिल्म को आलोचकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली लेकिन इसकी भव्यता और संगीत की काफी चर्चा हुई।

    इन दोनों की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक रही ‘धूम 2’ (2006)। इस एक्शन-थ्रिलर फिल्म में ऐश्वर्या राय एक चालाक और ग्लैमरस चोर के किरदार में नजर आईं, जबकि अभिषेक बच्चन पुलिस ऑफिसर जय दीक्षित बने। यह फिल्म उस समय की सुपरहिट फिल्मों में शामिल हुई और लगभग 150 करोड़ रुपये का शानदार बिजनेस किया।

    इसके बाद आई ‘सरकार राज’ (2008), जिसमें अभिषेक, ऐश्वर्या और अमिताभ बच्चन ने साथ काम किया। यह एक राजनीतिक ड्रामा फिल्म थी जिसने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया और लगभग 59.5 करोड़ रुपये की कमाई की।

    मणिरत्नम की फिल्म ‘रावण’ (2010) में भी यह जोड़ी नजर आई। यह फिल्म आधुनिक रामायण पर आधारित थी और इसमें अभिषेक बच्चन ने नेगेटिव किरदार निभाया, जबकि ऐश्वर्या ने मुख्य भूमिका निभाई। फिल्म का प्रदर्शन औसत रहा लेकिन इसकी कहानी और सिनेमैटोग्राफी की चर्चा खूब हुई।

    इसी तरह मणिरत्नम की ही फिल्म ‘गुरु’ (2007) को भी काफी सफलता मिली, जो धीरूभाई अंबानी के जीवन से प्रेरित थी। फिल्म ने लगभग 83.67 करोड़ रुपये का कारोबार किया और इसे दोनों कलाकारों की बेहतरीन फिल्मों में गिना जाता है।

    इसके अलावा ‘बंटी और बबली’ (2005) में ऐश्वर्या ने एक खास गाने ‘कजरारे’ में डांस किया, जबकि अभिषेक और रानी मुखर्जी मुख्य भूमिकाओं में थे। यह गाना उस समय बेहद लोकप्रिय हुआ और आज भी याद किया जाता है।

    कुल मिलाकर, अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय की जोड़ी ने बॉलीवुड को कई यादगार फिल्में दी हैं। जहां कुछ फिल्में औसत रहीं, वहीं ‘धूम 2’ और ‘गुरु’ जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की और इस जोड़ी को दर्शकों के दिलों में खास जगह दिलाई।

  • मैरून बॉडीफिट गाउन में Krystle D’Souza का ग्लैमरस लुक बना चर्चा का विषय, फैंस बोले-“स्टाइल क्वीन”

    मैरून बॉडीफिट गाउन में Krystle D’Souza का ग्लैमरस लुक बना चर्चा का विषय, फैंस बोले-“स्टाइल क्वीन”


    नई दिल्ली । टीवी और फिल्म इंडस्ट्री की लोकप्रिय अभिनेत्री Krystle D’Souza एक बार फिर अपने स्टाइलिश अंदाज को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उनका मैरून बॉडीफिट पार्टी गाउन लुक सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उनका ग्लैमर और कॉन्फिडेंस साफ झलकता है।

     फैशन और एलिगेंस का शानदार मेल
    मैरून रंग के इस बॉडीफिट गाउन में Krystle का लुक बेहद रॉयल और मॉडर्न नजर आ रहा है। डीप नेकलाइन, शिमरी डिटेलिंग और स्ट्रक्चर्ड फिटिंग ने उनके पूरे लुक को रेड कार्पेट वाइब दिया है। मिनिमल ज्वेलरी और स्लीक हेयरस्टाइल के साथ उनका अंदाज और भी आकर्षक बन गया है।

    टीवी से बॉलीवुड तक का सफर
    Krystle D’Souza ने “Ek Hazaaron Mein Meri Behna Hai”, “Brahmarakshas” और “Belan Wali Bahu” जैसे टीवी शोज से घर-घर में पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने फिल्म और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, जिसमें “Chehre”, “Visfot” और वेब सीरीज “Fittrat” शामिल हैं।

    ‘Shararat’ गाने से भी चर्चा में
    इन दिनों Krystle अपने डांस नंबर “Shararat” को लेकर भी सुर्खियों में हैं, जो फिल्म “Dhurandhar” का हिस्सा बताया जा रहा है। इस गाने में उनके डांस मूव्स और स्क्रीन प्रेजेंस को दर्शकों ने खूब सराहा है।

     सोशल मीडिया पर छाया ग्लैमरस लुक
    उनका यह मैरून पार्टी गाउन लुक सोशल मीडिया पर लगातार शेयर किया जा रहा है। फैंस उनकी तस्वीरों पर “स्टाइल आइकन”, “ग्लैम डॉल” जैसे कमेंट कर रहे हैं। उनका यह नया अवतार फैशन प्रेमियों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

    Krystle D’Souza ने एक बार फिर साबित किया है कि वह सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि एक फैशन आइकन भी हैं। उनका यह ग्लैमरस लुक आने वाले समय में भी फैशन और एंटरटेनमेंट जगत में चर्चा में बना रह सकता है।

  • पति और ससुर के कानूनी नोटिस पर सेलिना जेटली का जवाब, ‘अपने बच्चों और अधिकारों के लिए आवाज उठाती रहूंगी’

    पति और ससुर के कानूनी नोटिस पर सेलिना जेटली का जवाब, ‘अपने बच्चों और अधिकारों के लिए आवाज उठाती रहूंगी’


    नई दिल्ली ।  अभिनेत्री Celina Jaitly एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। पति Peter Hag के साथ चल रहे वैवाहिक विवाद और बच्चों की कस्टडी से जुड़े मामले के बीच उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी है। अभिनेत्री ने स्पष्ट कहा है कि वह किसी भी प्रकार की कानूनी धमकी या दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं और अपने बच्चों तथा न्याय के लिए संघर्ष जारी रखेंगी।

    हाल के दिनों में पति और ससुर की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिसों के बाद सेलिना जेटली ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि वर्षों तक उनके परिवार से जुड़ी खबरें, इंटरव्यू और सार्वजनिक प्रस्तुतियां चर्चा का विषय बनी रहीं, लेकिन जब उन्होंने अपने निजी संघर्षों और एक मां के रूप में अपनी चिंताओं को सामने रखा तो उन्हें कानूनी नोटिसों का सामना करना पड़ा। अभिनेत्री का कहना है कि उन्होंने अपने कानूनी प्रतिनिधियों के माध्यम से इन नोटिसों का जवाब भी दे दिया है।

    सेलिना जेटली ने अपने बयान में बच्चों की कस्टडी को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि वह हमेशा संयुक्त अभिरक्षा और आपसी सहमति से समाधान के पक्ष में रही हैं। उनके अनुसार उन्होंने कई बार शांतिपूर्ण तरीके से मामले को सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन परिस्थितियां अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहीं। उन्होंने दावा किया कि अदालत के आदेशों के बावजूद बच्चों से संपर्क स्थापित करने में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

    अभिनेत्री ने यह भी कहा कि एक मां के रूप में बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर उनकी जिम्मेदारी सर्वोपरि है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि बच्चों को उनकी जानकारी या सहमति के बिना विभिन्न न्यायिक क्षेत्रों से बाहर ले जाने की कोशिश की जा सकती है। इसी वजह से उन्होंने अपनी चिंताओं को सार्वजनिक रूप से सामने रखने को आवश्यक बताया।

    दूसरी ओर, पति और उनके परिवार की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिसों में आरोप लगाया गया है कि सार्वजनिक मंचों पर लगाए गए कुछ आरोप उनकी प्रतिष्ठा को प्रभावित कर रहे हैं और इसका असर बच्चों पर भी पड़ सकता है। हालांकि सेलिना का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य उन्हें डराना, दबाव बनाना और सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने से रोकना है।

    फिल्मी दुनिया में लंबे समय तक सक्रिय रहीं सेलिना जेटली सामाजिक मुद्दों और पारिवारिक विषयों पर भी अपनी राय रखती रही हैं। मौजूदा विवाद के बीच उनका यह बयान सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर अंतिम निर्णय अदालत की प्रक्रिया के तहत ही होगा, लेकिन फिलहाल दोनों पक्षों के दावों और प्रतिक्रियाओं ने इस पारिवारिक विवाद को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

    अभिनेत्री ने अपने संदेश में दोहराया कि वह अपने बच्चों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कानूनी और संवैधानिक रास्ता अपनाएंगी। उनके अनुसार यह केवल व्यक्तिगत संघर्ष नहीं बल्कि एक मां के अधिकारों और जिम्मेदारियों से जुड़ा मुद्दा है, जिसके लिए वह अंत तक अपनी आवाज उठाती रहेंगी।

  • 'गुड बॉय' के किरदारों से ऊब चुके हैं ऋतिक रोशन: सोशल मीडिया पर बयां किया अपना दर्द, ग्रे शेड भूमिकाओं में काम करने की जताई इच्छा

    'गुड बॉय' के किरदारों से ऊब चुके हैं ऋतिक रोशन: सोशल मीडिया पर बयां किया अपना दर्द, ग्रे शेड भूमिकाओं में काम करने की जताई इच्छा


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत में पिछले 26 वर्षों से दर्शकों के दिलों पर राज कर रहे अभिनेता ऋतिक रोशन अपनी स्थापित और लोकप्रिय ‘गुड बॉय’ वाली छवि से अब कुछ अलग करने का मन बना रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनकी एक होलिया पोस्ट ने फिल्म गलियारों और प्रशंसकों के बीच कूटनीतिक हलचल पैदा कर दी है। अभिनेता ने सार्वजनिक रूप से इस बात पर निराशा व्यक्त की है कि फिल्म निर्देशक उन्हें लगातार एक आदर्श और सीधे-सादे इंसान के किरदारों में ही देखना चाहते हैं, जबकि वे अब जटिल और नकारात्मक रंगत वाले चरित्रों को पर्दे पर उतारने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब ऋतिक रोशन ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में एफिल टावर के सामने से अपनी एक बेहद आकर्षक तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर साझा की। इस तस्वीर के साथ लिखे गए उनके विस्तृत कैप्शन ने सबका ध्यान आकर्षित किया। अभिनेता ने लिखा कि हाल ही में उनसे जब यह पूछा गया कि वे वर्तमान में किस तरह की भूमिका की तलाश कर रहे हैं, तो उनका अपना ही उत्तर उनके लिए भी अप्रत्याशित था। उन्होंने दर्शकों से फिल्म ‘लक बाय चांस’ के स्वार्थी और घमंडी स्टार ‘जफर’ के किरदार को याद करने को कहा।

    ऋतिक रोशन के अनुसार, वे ‘जफर’ जैसे यथार्थवादी और ग्रे शेड वाले किरदारों को पर्दे पर दोबारा जीने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आज उन्हें ऐसा कोई चुनौतीपूर्ण प्रस्ताव मिलता है, तो वे बिना समय गंवाए उसे तुरंत स्वीकार कर लेंगे। हालांकि, उन्होंने फिल्म उद्योग की वर्तमान प्रशासनिक और रचनात्मक सीमाओं पर तंज कसते हुए कहा कि निर्देशकों की मानसिकता उन्हें केवल एक ‘अच्छे नायक’ के रूप में ही भुनाने की है, जो उनके रचनात्मक विकास के दृष्टिकोण से एक दुखद स्थिति है।

    अभिनेता की इस स्पष्टवादी पोस्ट पर बॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक सिद्धार्थ आनंद ने बेहद संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली टिप्पणी करते हुए लिखा, ‘चलो फिर’। इस प्रतिक्रिया के सामने आते ही सोशल मीडिया और फिल्म समीक्षकों के बीच कयासों का दौर शुरू हो गया है। कूटनीतिक स्तर पर इसे दोनों के बीच आगामी समय में एक बड़े एक्शन या थ्रिलर प्रोजेक्ट के सहयोग के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें संभवतः ऋतिक रोशन एक मुख्य विलेन या डार्क प्रोटागोनिस्ट के रूप में नजर आ सकते हैं। इससे पहले ऋतिक रोशन की फिल्म ‘वॉर 2’ बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक व्यावसायिक प्रदर्शन नहीं कर पाई थी, जिसके बाद वे अपनी अभिनय शैली में बड़े बदलाव के संकेत दे रहे हैं।

    यदि ऋतिक रोशन के आगामी व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स की बात करें, तो वे इस समय अपनी सबसे बड़ी सुपरहीरो फ्रेंचाइजी फिल्म ‘कृष 4’ के निर्माण और लेखन कार्य में व्यस्त हैं। इस बार वे अभिनय के साथ-साथ खुद ही इस महत्वाकांक्षी फिल्म के निर्देशन की कमान भी संभाल रहे हैं, जो उनके करियर का एक बड़ा प्रशासनिक मोड़ है। इसके अतिरिक्त उनके पास ‘स्टोर्म’ नामक एक और बड़ी फिल्म है, जिसे लेकर सिनेमा प्रेमियों के बीच जबरदस्त उत्सुकता बनी हुई है।

    साल 2000 में आई अपनी पहली ही ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘कहो ना… प्यार है’ से रातों-रात सुपरस्टार बनने वाले ऋतिक रोशन ने ‘कोई मिल गया’, ‘धूम 2’, ‘जोधा अकबर’ और ‘वॉर’ जैसी कई मील का पत्थर साबित होने वाली फिल्में दी हैं। यद्यपि उन्होंने ‘धूम 2’ में एक शातिर चोर का किरदार निभाकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय पहले भी दिया है, लेकिन साल 2026 तक के अपने 26 साल लंबे फिल्मी सफर के इस मोड़ पर वे अब पूरी तरह से लीक से हटकर काम करने की योजना बना रहे हैं।

  • शूटिंग के दौरान राजेश खन्ना की हालत हुई खराब, लगातार काम करने से हुए परेशान

    शूटिंग के दौरान राजेश खन्ना की हालत हुई खराब, लगातार काम करने से हुए परेशान

    नई दिल्ली। बॉलीवुड में कई कलाकार अपने किरदार को जीवंत बनाने के लिए कठिन मेहनत करते हैं, लेकिन राजेश खन्ना की पहली फिल्म ‘आखिरी खत’ के दौरान जो हुआ, वह आज भी फिल्मी गलियारों में चर्चा का विषय है। साल 1966 में रिलीज हुई इस फिल्म से राजेश खन्ना ने बड़े पर्दे पर कदम रखा था। फिल्म का निर्देशन चेतन आनंद ने किया था, जो अपने यथार्थवादी और संवेदनशील सिनेमा के लिए जाने जाते थे।

    किरदार में असली थकान दिखाने के लिए नहीं सोने दिया

    फिल्म में राजेश खन्ना का किरदार मानसिक तनाव और भावनात्मक संघर्ष से गुजरता है। निर्देशक चाहते थे कि उनके चेहरे पर थकान बनावटी न लगे, बल्कि वास्तविक दिखाई दे। बताया जाता है कि चेतन आनंद आधी रात को फोन कर-करके राजेश खन्ना को जगा देते थे, जिससे उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती थी। यह सिलसिला कई दिनों तक चला और करीब तीन दिन बाद जब अभिनेता सेट पर पहुंचे तो उनके चेहरे पर वास्तविक थकान और बेचैनी साफ नजर आ रही थी। निर्देशक की यह तकनीक फिल्म के उस दृश्य के लिए कारगर साबित हुई, जहां किरदार को बेहद परेशान और टूटे हुए मनोभाव में दिखाना था।

    ऑस्कर तक पहुंची थी ‘आखिरी खत’

    ‘आखिरी खत’ केवल राजेश खन्ना की पहली फिल्म ही नहीं थी, बल्कि भारतीय सिनेमा के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुई। यह फिल्म भारत की ओर से अकादमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर) में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म श्रेणी के लिए भेजी गई थी। अग्रेजी में ‘द लास्ट लेटर’ नाम से पहचानी जाने वाली इस फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हासिल की थी।

    एक बच्चे की कहानी ने जीता दिल

    फिल्म में राजेश खन्ना के साथ मास्टर बंटी बहल भी नजर आए थे। कहानी गोविंद नाम के युवक और उसकी पत्नी लज्जो के इर्द-गिर्द घूमती है। परिस्थितियों के कारण दोनों अलग हो जाते हैं और एक छोटा बच्चा मुंबई की भीड़ में खो जाता है इसके बाद पिता अपने बेटे की तलाश में भटकता है और कहानी भावनात्मक मोड़ लेती है। फिल्म की सबसे बड़ी चुनौती एक छोटे बच्चे के साथ वास्तविक लोकेशंस पर शूटिंग करना था।

    15 महीने के बच्चे के साथ हुई थी मुश्किल शूटिंगनिर्देशक चेतन आनंद के बेटे Ketan Anand ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता ने 15 महीने के बच्चे के साथ फिल्म की शूटिंग की थी। बच्चे को मुंबई की सड़कों पर स्वाभाविक रूप से चलते हुए कैमरे में कैद करना उस दौर में बेहद कठिन काम था। यही वजह है कि ‘आखिरी खत’ को भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है और यह राजेश खन्ना के शानदार फिल्मी सफर की शुरुआत भी बनी।

  • पेड्डी' में स्क्रीन स्पेस को लेकर बोलीं जाह्नवी कपूर, कहा- मेरे रोल को नहीं मिला पूरा सम्मान

    पेड्डी' में स्क्रीन स्पेस को लेकर बोलीं जाह्नवी कपूर, कहा- मेरे रोल को नहीं मिला पूरा सम्मान


    नई दिल्ली। राम चरण और जाह्नवी कपूर स्टारर फिल्म ‘पेड्डी’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच उत्साह तो था, लेकिन रिलीज के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स फिल्म में जाह्नवी कपूर के किरदार ‘अच्चियम्मा’ के चित्रण को लेकर सवाल उठा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि फिल्म में पुरुष नायक को जहां मजबूत सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि दी गई है, वहीं महिला किरदार को पर्याप्त महत्व नहीं मिला। कुछ दर्शकों ने आरोप लगाया कि अभिनेत्री के किरदार को केवल ग्लैमर तक सीमित कर दिया गया है।

    वायरल पोस्ट ने छेड़ी नई बहस
    एक वायरल इंस्टाग्राम पोस्ट में दावा किया गया कि फिल्म में मुख्य महिला किरदार के साथ न्याय नहीं किया गया। पोस्ट में कहा गया कि कहानी के महत्वपूर्ण हिस्सों में पुरुष किरदार को विकास और उद्देश्य दिया गया, जबकि महिला किरदार को सीमित और सतही तरीके से प्रस्तुत किया गया। पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि फिल्म के अंतिम संस्करण में अभिनेत्री के किरदार की गहराई और प्रभाव को कम कर दिया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर इस विषय पर बहस तेज हो गई है।

    जाह्नवी कपूर के एक ‘लाइक’ ने बढ़ाई अटकलें
    विवाद उस समय और गहरा गया जब लोगों ने नोटिस किया कि जाह्नवी कपूर ने इस आलोचनात्मक पोस्ट को लाइक किया है। अभिनेत्री ने इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है, लेकिन पोस्ट को लाइक करने को कई लोग उनकी अप्रत्यक्ष सहमति के रूप में देख रहे हैं। हालांकि किसी पोस्ट को लाइक करना हमेशा उसके हर दावे का समर्थन माना जाए, यह जरूरी नहीं है। फिर भी सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

    निर्देशक पर भी उठे सवाल
    पोस्ट में फिल्म के निर्देशक Buchi Babu Sana पर भी सवाल उठाए गए हैं। आलोचकों का आरोप है कि महिला किरदार के विकास और प्रस्तुति को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। हालांकि फिल्म की टीम या निर्देशक की ओर से इस विवाद पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    बड़ी स्टारकास्ट, बड़ी उम्मीदें
    ‘पेड्डी’ का निर्देशन बुच्ची बाबू सना ने किया है। फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर के अलावा Shiva Rajkumar और Divyenndu Sharma भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए हैं। फिल्म की रिलीज के बाद जहां एक तरफ इसके तकनीकी पक्ष और प्रदर्शन की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ महिला किरदारों के चित्रण को लेकर उठे सवाल भी सुर्खियां बटोर रहे हैं।

  • शिल्पा शिंदे के बयान से मचा बवाल, बोलीं- मैं अपनी बीमारी का ढिंढोरा नहीं पीटती

    शिल्पा शिंदे के बयान से मचा बवाल, बोलीं- मैं अपनी बीमारी का ढिंढोरा नहीं पीटती


    नई दिल्ली। टीवी जगत में इन दिनों शिल्पा शिंदे और हिना खान के बीच बयानबाजी चर्चा का विषय बनी हुई है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब शिल्पा शिंदे ने हाल ही में स्वीकार किया कि उन्होंने वर्षों पहले लोकप्रिय धारावाहिक ‘भाभी जी घर पर हैं’ के निर्माता पर लगाया गया यौन उत्पीड़न का आरोप झूठा था। इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा और कई कलाकारों ने भी उनके बयान पर नाराजगी जताई।

    इसी क्रम में हिना खान ने भी शिल्पा के बयान को शर्मनाक बताते हुए सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। हिना का कहना था कि इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा नुकसान उस व्यक्ति को हुआ, जिस पर आरोप लगाए गए थे। उनके इस बयान के बाद अब शिल्पा शिंदे ने भी तीखा जवाब दिया है।

    एक बातचीत के दौरान शिल्पा ने कहा कि लोग उनके नाम का इस्तेमाल कर सुर्खियां बटोरना बंद नहीं कर रहे हैं। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ लोग अपनी बीमारी, निजी परेशानियों और परिवार के सदस्यों की मृत्यु जैसे संवेदनशील मुद्दों को भी सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाकर सहानुभूति और पब्लिसिटी हासिल करने की कोशिश करते हैं।

    हालांकि शिल्पा ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को हिना खान की ओर इशारा माना जा रहा है। हाल के वर्षों में हिना खान ने अपनी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों और निजी जीवन के कठिन दौर को लेकर खुलकर बात की है, जिसके चलते शिल्पा की टिप्पणी को सीधे उन्हीं से जोड़कर देखा जा रहा है।

    शिल्पा शिंदे ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने अब जाकर पुराने मामले की सच्चाई इसलिए बताई क्योंकि वह इस बात का बोझ और नहीं उठाना चाहती थीं। उनके मुताबिक, उस समय वह कॉन्ट्रैक्ट और भुगतान से जुड़े विवादों में फंसी हुई थीं और उन्हें लगा था कि उस परिस्थिति से निकलने का यही रास्ता है। उन्होंने कहा कि यदि उस मामले में गलत कानूनी कार्रवाई होती, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

    दूसरी ओर, हिना खान पहले ही शिल्पा के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दे चुकी हैं और इसे बेहद गैर-जिम्मेदाराना बताया था। ऐसे में दोनों अभिनेत्रियों के बीच शुरू हुई यह जुबानी जंग अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का केंद्र बन गई है।

    फिलहाल, इस विवाद ने टीवी इंडस्ट्री में एक नई बहस छेड़ दी है कि सार्वजनिक मंचों पर दिए गए पुराने आरोपों और बाद में उनके खंडन का असर संबंधित लोगों की प्रतिष्ठा और करियर पर कितना गहरा पड़ सकता है।

  • क्यों ऋषिकेश मुखर्जी की 'बावर्ची' के बाद जया बच्चन और राजेश खन्ना की जोड़ी हमेशा के लिए टूट गई

    क्यों ऋषिकेश मुखर्जी की 'बावर्ची' के बाद जया बच्चन और राजेश खन्ना की जोड़ी हमेशा के लिए टूट गई


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में कलाकारों के आपसी संबंध और सेट पर हुए विवाद कई बार बड़े फैसलों की वजह बन जाते हैं। ऐसा ही एक ऐतिहासिक और दिलचस्प किस्सा हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना और मशहूर अभिनेत्री जया बच्चन (तब जया भादुड़ी) से जुड़ा है। साल 1972 में आई ऋषिकेश मुखर्जी की क्लासिक फिल्म ‘बावर्ची’ में एक साथ काम करने के बाद इस जोड़ी ने हमेशा के लिए एक-दूसरे के साथ काम करने से तौबा कर ली थी। इसके पीछे की मुख्य वजह कोई व्यावसायिक मतभेद नहीं, बल्कि महानायक अमिताभ बच्चन से जुड़ा एक वाक्या था।

    उस दौर में राजेश खन्ना भारतीय फिल्म उद्योग के शीर्ष शिखर पर थे और उनकी लगातार हिट फिल्मों के कारण उनका एकछत्र राज था। दूसरी ओर, अमिताभ बच्चन उस समय फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे थे। ‘आनंद’ जैसी सफल फिल्म में साथ काम करने के बावजूद राजेश खन्ना तत्कालीन परिस्थितियों में अमिताभ बच्चन को केवल एक संघर्षरत अभिनेता के रूप में ही देखते थे और उनके प्रति उनका रवैया बहुत सकारात्मक नहीं रहता था।

    ‘बावर्ची’ की शूटिंग के दिनों में जया बच्चन और अमिताभ बच्चन एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। अमिताभ बच्चन अक्सर जया बच्चन से मिलने के लिए फिल्म के सेट पर आया करते थे। दोनों को इस तरह साथ देखना उस समय के सुपरस्टार राजेश खन्ना को रास नहीं आता था। वह अक्सर सेट पर जया बच्चन को टोकते थे और उनसे पूछते थे कि वह इस संघर्षरत अभिनेता के साथ अपना समय क्यों बर्बाद कर रही हैं।

    राजेश खन्ना के जीवन पर आधारित संस्मरणों और वरिष्ठ पत्रकार अली पीटर जॉन के हवाले से सामने आए विवरणों के अनुसार, राजेश खन्ना अक्सर जया से कहते थे कि उन्हें अमिताभ बच्चन के साथ घूमना-फिरना बंद कर देना चाहिए। उनके शब्द इतने कड़े थे कि उन्होंने यहां तक कह दिया था कि इस आदमी के साथ रहने से उनका करियर भी आगे नहीं बढ़ पाएगा। राजेश खन्ना का यह रवैया जया बच्चन को लगातार परेशान कर रहा था।

    विवाद तब और बढ़ गया जब एक दिन अमिताभ बच्चन हमेशा की तरह जया बच्चन से मिलने सेट पर पहुंचे। उस दौरान राजेश खन्ना ने वहां मौजूद अमिताभ बच्चन को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया और उनके प्रति बेहद उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया। अपने होने वाले जीवनसाथी का ऐसा अपमान देखकर जया बच्चन का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने उसी वक्त बेहद आक्रामक अंदाज में राजेश खन्ना को जवाब देते हुए कहा था कि एक दिन वक्त बदलेगा और तब देखा जाएगा कि कौन किस मुकाम पर खड़ा है।

    इस घटना से आहत और नाराज जया बच्चन ने तत्काल यह कड़ा फैसला लिया कि वह अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं करेंगी। उन्होंने फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद साफ कर दिया था कि वह भविष्य में कभी भी राजेश खन्ना के साथ स्क्रीन साझा नहीं करेंगी। उन्होंने कड़े शब्दों में टिप्पणी की थी कि वह ऐसे व्यक्ति के साथ काम करना पसंद नहीं करेंगी जो खुद को बहुत ऊपर समझता हो।

    प्रशासनिक और व्यावसायिक दृष्टि से ‘बावर्ची’ साल 1972 की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक साबित हुई थी। ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने राजेश खन्ना को उनकी पारंपरिक रोमांटिक और गंभीर छवि से निकालकर एक बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग वाले अभिनेता के रूप में स्थापित किया था। आज भी इस फिल्म की आईएमडीबी रेटिंग 8.1 है, लेकिन इस बड़ी सफलता के बावजूद जया बच्चन ने अपने फैसले को कायम रखा और कूटनीतिक रूप से इस सुपरस्टार के साथ दोबारा कभी कोई फिल्म साइन नहीं की।

  • प्रोड्यूसर का दावा- जान से मारने और सिर काटने की धमकी मिली

    प्रोड्यूसर का दावा- जान से मारने और सिर काटने की धमकी मिली


    नई दिल्ली। सलमान खान के चर्चित काला हिरण शिकार मामले पर आधारित फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल ऑफ लीगेसी’ रिलीज से पहले ही बड़े विवाद में घिर गई है। फिल्म के निर्माता अमित जानी ने दावा किया है कि उन्हें सोशल मीडिया पर लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। उनका कहना है कि कुछ लोग उन्हें मुंबई आने पर सिर धड़ से अलग करने तक की धमकी दे रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने फिल्म और उससे जुड़े विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

    दरअसल, हाल ही में सलमान खान की कानूनी टीम ने फिल्म के निर्माताओं को नोटिस भेजकर फिल्म के निर्माण और प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने की मांग की थी। नोटिस में फिल्म से जुड़े पक्षों से लिखित माफी मांगने को भी कहा गया था। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इसके बाद अमित जानी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें वह कथित तौर पर नोटिस को फाड़ते नजर आए। वीडियो में उन्होंने कहा कि लोग उनसे पूछ रहे हैं कि वह नोटिस का क्या जवाब देंगे, लेकिन जब उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं तो वे किसे जवाब दें। उनका कहना है कि हजारों लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां और धमकियां दी जा रही हैं।

    अमित जानी ने आरोप लगाया कि कुछ तथाकथित प्रशंसक और असामाजिक तत्व उनके परिवार को भी निशाना बनाने की बातें कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डराने-धमकाने की कोशिशों के बावजूद वह पीछे हटने वाले नहीं हैं और अपने प्रोजेक्ट पर काम जारी रखेंगे।

    गौरतलब है कि ‘काला हिरण: द बैटल ऑफ लीगेसी’ का कथानक 1998 के बहुचर्चित काला हिरण शिकार मामले से प्रेरित बताया जा रहा है, जिसमें सलमान खान का नाम सामने आया था। इसी वजह से फिल्म की घोषणा के बाद से ही यह परियोजना विवादों के केंद्र में बनी हुई है।

    फिलहाल मामले को लेकर कानूनी और सार्वजनिक बहस दोनों जारी हैं। एक ओर फिल्म के निर्माता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सलमान खान की कानूनी टीम अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कदम उठा रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • “फिल्मों के बड़े बजट सिर्फ PR का हिस्सा हैं” – मनोज बाजपेयी का बड़ा बयान, रामायण और वाराणसी पर फिर छिड़ी बहस

    “फिल्मों के बड़े बजट सिर्फ PR का हिस्सा हैं” – मनोज बाजपेयी का बड़ा बयान, रामायण और वाराणसी पर फिर छिड़ी बहस


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में इन दिनों दो बड़ी फिल्मों-Ranbir Kapoor की ‘रामायण’ और Priyanka Chopra की फिल्म ‘वाराणसी’-को लेकर जबरदस्त चर्चा है। दोनों फिल्मों के कथित बजट को लेकर सोशल मीडिया से लेकर इंडस्ट्री तक लगातार बहस चल रही है। इसी बीच मनोज बाजपेयी ने इन चर्चाओं को लेकर अपनी बेबाक राय रखी है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि फिल्मों के बड़े बजट की बातें अक्सर “पीआर का जरिया” बन जाती हैं और पिछले कई वर्षों से यह ट्रेंड लगातार बढ़ा है। उनका कहना है कि दर्शकों को इस बात से ज्यादा फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि किसी फिल्म का बजट कितना है, बल्कि यह देखना चाहिए कि फिल्म उन्हें पसंद आई या नहीं।

    “दर्शकों को सिर्फ फिल्म से मतलब होना चाहिए”
    मनोज बाजपेयी ने कहा कि आजकल दर्शक एयरपोर्ट या सार्वजनिक जगहों पर उनसे फिल्मों के बॉक्स ऑफिस नंबर तक पूछते हैं। इस पर उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि वे कई बार लोगों को डांट भी देते हैं। उनके अनुसार, “अगर बॉक्स ऑफिस का पैसा दर्शकों के बैंक अकाउंट में नहीं जा रहा, तो उन्हें इसकी चिंता क्यों करनी चाहिए?” उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से प्रोड्यूसर्स और मेकर्स का मामला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दर्शकों का फिल्म से सिर्फ इतना संबंध होना चाहिए कि उन्हें फिल्म पसंद आई या नहीं।

    4000 करोड़ और 1400 करोड़ के बजट पर चर्चा
    इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा ‘रामायण’ के बजट की हो रही है, जिसे लगभग 4000 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है। यह फिल्म दो भागों में बनाई जा रही है और इसे भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है। वहीं ‘वाराणसी’ का बजट करीब 1400 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, जिससे यह भी बड़े पैमाने की फिल्मों की सूची में शामिल हो गई है। इन आंकड़ों ने फिल्म इंडस्ट्री में एक नई बहस को जन्म दे दिया है-क्या इतने बड़े बजट वास्तव में जरूरी हैं या यह सिर्फ प्रचार का हिस्सा हैं?

    फिल्मों के बिजनेस पर भी उठे सवाल
    मनोज बाजपेयी ने यह भी कहा कि 500-600 करोड़ या हजारों करोड़ रुपये के आंकड़ों पर दर्शकों को ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए। उनके अनुसार, फिल्म के बिजनेस का असर केवल प्रोड्यूसर्स और निवेशकों पर पड़ता है, आम दर्शकों पर नहीं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आजकल फिल्मों के बजट और कमाई के आंकड़े कई बार चर्चा बढ़ाने और फिल्म को सुर्खियों में बनाए रखने के लिए भी इस्तेमाल किए जाते हैं।

    दिवाली और 2027 में रिलीज की तैयारी
    ‘रामायण’ का पहला भाग इस साल दिवाली पर रिलीज होने की संभावना है, जिसे डायरेक्टर Nitesh Tiwari निर्देशित कर रहे हैं। वहीं ‘वाराणसी’ फिल्म 2027 में रिलीज होने की उम्मीद है, जिसका निर्देशन S. S. Rajamouli कर रहे हैं। दोनों फिल्मों को लेकर पहले से ही दर्शकों में भारी उत्साह है और अब बजट विवाद ने इन प्रोजेक्ट्स को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है।

    मनोज बाजपेयी का बयान एक बार फिर इस बहस को हवा दे गया है कि क्या भारतीय सिनेमा में बढ़ते बजट वाकई गुणवत्ता का संकेत हैं या सिर्फ मार्केटिंग रणनीति। फिलहाल, दर्शक इन बड़ी फिल्मों की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं।