Category: Entertainment

  • कंगना रनौत की टिप्पणी के बाद बढ़ी बहस, आशुतोष राणा ने सार्वजनिक जीवन में संयमित भाषा पर दिया जोर

    कंगना रनौत की टिप्पणी के बाद बढ़ी बहस, आशुतोष राणा ने सार्वजनिक जीवन में संयमित भाषा पर दिया जोर

    नई दिल्ली । अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत की जेन-जी को लेकर की गई टिप्पणी के बाद शुरू हुई बहस लगातार तेज होती जा रही है। सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच अभिनेता आशुतोष राणा ने भाषा की गरिमा, संवाद की मर्यादा और सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार अभिव्यक्ति को लेकर अपनी राय साझा की है। उनके बयान को विवाद से इतर संतुलित और विचारशील दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी करने के बजाय भाषा के महत्व पर जोर दिया।

    हाल के दिनों में छात्र विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में कंगना रनौत की जेन-जी से जुड़ी टिप्पणी चर्चा का विषय बनी हुई है। बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर व्यापक बहस छिड़ गई। एक वर्ग ने उनकी भाषा और अभिव्यक्ति पर सवाल उठाए, जबकि कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया। देखते ही देखते यह मुद्दा मनोरंजन जगत से निकलकर सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया।

    इसी क्रम में पटना प्रवास के दौरान मीडिया से बातचीत में आशुतोष राणा ने सार्वजनिक जीवन में शब्दों की भूमिका पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति का व्यक्तित्व केवल उसके कार्यों से नहीं, बल्कि उसकी भाषा और व्यवहार से भी पहचाना जाता है। उनके अनुसार शब्द व्यक्ति के संस्कार, सोच और दृष्टिकोण का परिचय देते हैं, इसलिए बोलते समय संयम और संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

    आशुतोष राणा ने कहा कि भाषा केवल विचार व्यक्त करने का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह समाज में सम्मान और विश्वास का आधार भी बनती है। उन्होंने कहा कि एक ही शब्द किसी संबंध को मजबूत भी कर सकता है और अनावश्यक विवाद का कारण भी बन सकता है। इसलिए सार्वजनिक मंचों पर बोलने वाले लोगों को अपने शब्दों के प्रभाव और सामाजिक जिम्मेदारी का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

    इस विवाद पर मनोरंजन जगत के अन्य कलाकारों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। अभिनेता सोनू सूद ने भी हाल ही में सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को सोच-समझकर अपनी बात रखने की सलाह दी थी। उनका कहना था कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों के बयान समाज के बड़े वर्ग को प्रभावित करते हैं, इसलिए संवाद में संतुलन और संवेदनशीलता बनाए रखना जरूरी है।

    दूसरी ओर कंगना रनौत ने अपने बयान का बचाव करते हुए सोशल मीडिया पर कई पोस्ट साझा किए। उन्होंने छात्र आंदोलन और वायरल वीडियो से जुड़े संदर्भों का उल्लेख करते हुए अपने विचार दोहराए। साथ ही उन्होंने सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर भी अपनी राय रखी, जिसके बाद यह बहस और अधिक व्यापक हो गई। उनके समर्थक और आलोचक लगातार अपने-अपने पक्ष में तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं।

    पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सार्वजनिक जिम्मेदारी और भाषा की मर्यादा जैसे विषयों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन असहमति व्यक्त करते समय संवाद की गरिमा बनाए रखना उतना ही महत्वपूर्ण है। फिलहाल यह मुद्दा सोशल मीडिया, राजनीतिक विमर्श और मनोरंजन जगत में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है तथा आने वाले दिनों में भी इस पर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

  • भारतीय बॉक्स ऑफिस पर ‘स्पाइडर-मैन: ब्रैंड न्यू डे’ की ऐतिहासिक रफ्तार, तीन दिन की रिकॉर्ड कमाई ने बदले हॉलीवुड फिल्मों के मानक

    भारतीय बॉक्स ऑफिस पर ‘स्पाइडर-मैन: ब्रैंड न्यू डे’ की ऐतिहासिक रफ्तार, तीन दिन की रिकॉर्ड कमाई ने बदले हॉलीवुड फिल्मों के मानक

    नई दिल्ली । हॉलीवुड सुपरहीरो फिल्म ‘स्पाइडर-मैन: ब्रैंड न्यू डे’ भारतीय बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। टॉम हॉलैंड की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म ने रिलीज के पहले तीन दिनों में ही ऐसी कमाई दर्ज की है, जिसने भारत में हॉलीवुड फिल्मों के कारोबार का नया अध्याय लिख दिया है। दर्शकों के बीच फिल्म को मिल रहे उत्साह और बड़े पैमाने पर टिकट बिक्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुपरहीरो शैली की फिल्मों का आकर्षण भारतीय बाजार में अब भी मजबूत बना हुआ है।

    फिल्म ने रिलीज के पहले दिन से ही जबरदस्त शुरुआत करते हुए लगभग 60 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन दर्ज किया। इस प्रदर्शन के साथ यह भारत में हॉलीवुड फिल्मों की सबसे बड़ी ओपनिंग करने वाली फिल्मों में शामिल हो गई। शुरुआती दिन की सफलता ने यह संकेत दे दिया था कि फिल्म आगे भी मजबूत रफ्तार बनाए रख सकती है। दूसरे दिन भी टिकट खिड़की पर इसका प्रदर्शन स्थिर रहा और कुल नेट कारोबार 100 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया, जिससे इसकी मजबूत पकड़ और स्पष्ट हो गई।

    तीसरे दिन फिल्म की कमाई में उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला। शनिवार को दर्शकों की बढ़ी हुई संख्या का सीधा असर बॉक्स ऑफिस पर दिखाई दिया और फिल्म ने लगभग 66.75 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन दर्ज किया। इसके साथ ही तीन दिनों में इसका कुल भारतीय नेट संग्रह करीब 176.70 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसी उपलब्धि के साथ ‘स्पाइडर-मैन: ब्रैंड न्यू डे’ भारत में सबसे तेज 150 करोड़ रुपये का नेट बॉक्स ऑफिस आंकड़ा पार करने वाली हॉलीवुड फिल्म बन गई।

    देशभर में फिल्म को बड़े पैमाने पर स्क्रीन और शो उपलब्ध कराए गए हैं। लगभग 17 हजार शो के साथ रिलीज हुई इस फिल्म को महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी दर्शकों का अच्छा समर्थन मिल रहा है। कई प्रमुख मल्टीप्लेक्स और सिनेमाघरों में दर्शक उपस्थिति मजबूत रही, जिससे टिकट बिक्री में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली। प्रीमियम फॉर्मेट स्क्रीन पर भी फिल्म को अच्छी प्रतिक्रिया मिली, जिसने इसके कुल संग्रह को और मजबूती प्रदान की।

    फिल्म की सफलता का असर अन्य फिल्मों के प्रदर्शन पर भी दिखाई दे रहा है। इसी दौरान रिलीज हुई कई फिल्मों की तुलना में ‘स्पाइडर-मैन: ब्रैंड न्यू डे’ ने टिकट खिड़की पर स्पष्ट बढ़त बनाए रखी है। लोकप्रिय किरदार, बड़े स्तर का प्रचार, व्यापक रिलीज और सकारात्मक दर्शक प्रतिक्रिया ने इसकी कमाई को लगातार गति दी है। यही कारण है कि शुरुआती सप्ताहांत में फिल्म ने अपेक्षाओं से बेहतर प्रदर्शन किया।

    मार्वल की यह नई पेशकश भारतीय बाजार में हॉलीवुड फिल्मों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। शुरुआती तीन दिनों के आंकड़े संकेत देते हैं कि फिल्म आने वाले दिनों में कई अन्य रिकॉर्ड भी अपने नाम कर सकती है। यदि सप्ताहांत के शेष दिनों में भी दर्शकों का उत्साह इसी तरह बना रहता है, तो इसका कुल बॉक्स ऑफिस संग्रह और अधिक ऊंचाई तक पहुंच सकता है।

    फिल्म कारोबार से जुड़े जानकारों का मानना है कि भारत में अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के लिए बढ़ती दर्शक संख्या, एडवांस बुकिंग का मजबूत रुझान और प्रीमियम सिनेमाघरों में बेहतर प्रदर्शन ने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई है। फिलहाल ‘स्पाइडर-मैन: ब्रैंड न्यू डे’ भारतीय बॉक्स ऑफिस पर सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल है और इसकी कमाई के आगामी आंकड़ों पर पूरे फिल्म उद्योग की नजर बनी हुई है।

  • पोस्टर ही बेच देता है फिल्म, जानिए दुनिया भर के मूवी पोस्टरों के पीछे छिपे 6 सीक्रेट फॉर्मूले

    पोस्टर ही बेच देता है फिल्म, जानिए दुनिया भर के मूवी पोस्टरों के पीछे छिपे 6 सीक्रेट फॉर्मूले


    नई दिल्ली। किसी भी फिल्म का पोस्टर उसकी पहली पहचान होता है। दर्शक फिल्म देखने जाए या नहीं इसका फैसला कई बार ट्रेलर से पहले पोस्टर ही कर देता है। यही वजह है कि आज फिल्म पोस्टर डिजाइनिंग अपने आप में एक अलग कला और विज्ञान बन चुकी है। आधुनिक तकनीक और एडवांस ग्राफिक्स के दौर में भले ही पोस्टर पहले से कहीं ज्यादा आकर्षक नजर आते हों लेकिन हैरानी की बात यह है कि दुनिया भर में बनने वाले ज्यादातर फिल्म पोस्टर आज भी केवल छह मूल डिजाइन फॉर्मूलों पर आधारित होते हैं।

    एक समय था जब फिल्मी पोस्टर हाथों से बनाए जाते थे। कलाकार कैनवास पर पूरी फिल्म की झलक उकेरते थे और फिर उनमें रंग भरकर उन्हें जीवंत बनाया जाता था। उस दौर में एक पोस्टर तैयार करने में कई दिन लग जाते थे। समय बदला तो कंप्यूटर और डिजाइन सॉफ्टवेयर ने यह काम आसान बना दिया लेकिन पोस्टर बनाने के मूल सिद्धांत आज भी लगभग वही हैं।

    भारत के चर्चित पोस्टर डिजाइनर और मार्चिंग एंट्स एडवर्टाइजिंग के क्रिएटिव हेड राज खत्री के अनुसार दुनिया भर के फिल्म पोस्टरों को मुख्य रूप से छह श्रेणियों में बांटा जा सकता है। उन्होंने बाहुबली उरी द सर्जिकल स्ट्राइक अंधाधुन एमएस धोनी और धुरंधर जैसी फिल्मों के पोस्टर डिजाइन किए हैं।

    पहला और सबसे लोकप्रिय तरीका होता है फिल्म के मुख्य किरदार को पोस्टर का केंद्र बनाना। इसमें पूरी कहानी का प्रतिनिधित्व हीरो या मुख्य पात्र करता है। पोस्टर देखते ही दर्शक उस किरदार से जुड़ जाता है। बाहुबली और एमएस धोनी जैसी फिल्मों में इसी रणनीति का इस्तेमाल किया गया था।

    दूसरा तरीका फिल्म के किसी प्रतीक चिन्ह लोगो या आइकन के जरिए पूरी कहानी का संकेत देना होता है। इस तरह के पोस्टर में कलाकारों की बजाय किसी खास निशान या डिजाइन के जरिए फिल्म का विषय सामने रखा जाता है। कई बार सिर्फ एक प्रतीक ही पूरी फिल्म की पहचान बन जाता है।

    तीसरा तरीका शब्दों या संवादों को पोस्टर का सबसे बड़ा आकर्षण बनाना है। इसमें किसी दमदार डायलॉग किसी खास शब्द या किसी संख्या को इस तरह पेश किया जाता है कि वही दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दे और फिल्म के प्रति दिलचस्पी पैदा कर दे।

    चौथा तरीका जिसे डिजाइन की भाषा में किचन सिंक कहा जाता है भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। इसमें फिल्म के लगभग सभी प्रमुख किरदारों को एक ही पोस्टर में दिखाया जाता है। साथ ही कहानी से जुड़े हथियार लोकेशन या अन्य महत्वपूर्ण तत्व भी शामिल कर दिए जाते हैं ताकि दर्शकों को पूरी फिल्म का व्यापक अंदाजा मिल सके।

    पांचवां तरीका पूरी तरह स्टार पावर पर आधारित होता है। इसमें कहानी या अन्य किरदारों की बजाय सिर्फ बड़े सितारे को सबसे प्रमुख स्थान दिया जाता है। पोस्टर का उद्देश्य केवल अभिनेता की लोकप्रियता के दम पर दर्शकों को सिनेमाघर तक लाना होता है। बड़े सुपरस्टार्स की फिल्मों में यह तरीका अक्सर देखने को मिलता है।

    छठा और अंतिम तरीका फिल्म के किसी यादगार दृश्य को पोस्टर में बदलना होता है। इसमें फिल्म के सबसे प्रभावशाली सीन को इस तरह प्रस्तुत किया जाता है कि वही फिल्म की पहचान बन जाए और दर्शकों के मन में उत्सुकता पैदा करे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि फिल्म का पोस्टर केवल प्रचार का माध्यम नहीं बल्कि पूरी मार्केटिंग रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। एक प्रभावशाली पोस्टर दर्शकों की जिज्ञासा बढ़ाता है सोशल मीडिया पर चर्चा पैदा करता है और कई बार फिल्म की सफलता की मजबूत नींव भी तैयार कर देता है। यही वजह है कि तकनीक बदलने के बावजूद दुनिया भर के पोस्टर डिजाइनर आज भी इन्हीं छह सिद्धांतों को आधार बनाकर नई फिल्मों के लिए आकर्षक और यादगार पोस्टर तैयार करते हैं।

  • दिव्या भारती की अधूरी फिल्म बनी श्रीदेवी के करियर की बड़ी हिट, जानिए 'लाड़ला' की अनसुनी कहानी

    दिव्या भारती की अधूरी फिल्म बनी श्रीदेवी के करियर की बड़ी हिट, जानिए 'लाड़ला' की अनसुनी कहानी


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के इतिहास में कई ऐसी फिल्में हैं जिनकी कहानी जितनी दिलचस्प रही उतनी ही भावुक उनकी मेकिंग भी रही। साल 1994 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म लाड़ला भी ऐसी ही फिल्मों में शामिल है जिसकी शूटिंग के दौरान एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ जिसने पूरी टीम को झकझोर कर रख दिया। फिल्म के क्लाइमेक्स से पहले ही इसकी मूल नायिका दिव्या भारती का निधन हो गया और निर्माताओं को लगभग पूरी फिल्म दोबारा शूट करनी पड़ी। इसके बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफल रही और उस दौर की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हो गई।

    फिल्म लाड़ला में आखिरकार श्रीदेवी अनिल कपूर और रवीना टंडन मुख्य भूमिकाओं में नजर आए लेकिन शुरुआत में श्रीदेवी इस फिल्म का हिस्सा नहीं थीं। निर्माता और निर्देशक ने इस किरदार के लिए दिव्या भारती को चुना था। दिव्या उस समय बॉलीवुड की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शुमार थीं और लगातार सुपरहिट फिल्में दे रही थीं। उनके साथ फिल्म की लगभग 90 से 95 प्रतिशत शूटिंग पूरी भी हो चुकी थी।

    फिल्म के लेखक अनीस बज्मी ने हाल ही में एक बातचीत में उस दौर की यादें साझा करते हुए बताया कि पूरी यूनिट दिव्या भारती के निधन से गहरे सदमे में थी। उन्होंने कहा कि फिल्म लगभग पूरी हो चुकी थी और सिर्फ क्लाइमेक्स सहित कुछ हिस्सों की शूटिंग बाकी थी। लेकिन अचानक दिव्या की मौत ने सब कुछ बदल दिया। पूरी टीम को समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या किया जाए। हादसे के बाद करीब दो महीने तक फिल्म पर कोई काम नहीं हुआ क्योंकि सभी लोग मानसिक रूप से टूट चुके थे।

    अनीस बज्मी ने बताया कि आखिरकार निर्माताओं ने फैसला किया कि फिल्म को नए सिरे से शूट किया जाएगा। इसके बाद श्रीदेवी को इस भूमिका के लिए चुना गया। श्रीदेवी ने फिल्म में शानदार अभिनय किया और पूरी फिल्म दोबारा शूट की गई। यह निर्णय आसान नहीं था क्योंकि पहले से शूट हो चुका अधिकांश हिस्सा दोबारा फिल्माना पड़ा जिससे समय और लागत दोनों में भारी बढ़ोतरी हुई।

    अनीस बज्मी ने दिव्या भारती के आखिरी शूट का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि चेन्नई में फिल्म की शूटिंग चल रही थी और दिव्या ने अपनी मौत से एक दिन पहले एक भावनात्मक दृश्य फिल्माया था। उस दृश्य में उनका किरदार कैमरे से दूर जाता है और एक नकाबपोश व्यक्ति उन्हें खींचकर ले जाता है। उस दौरान उनका आखिरी संवाद था मुझे बचाओ। अगले ही दिन दिव्या भारती के निधन की खबर ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को स्तब्ध कर दिया।

    दिलचस्प बात यह है कि केवल लाड़ला ही नहीं बल्कि फिल्म अंगरक्षक भी दिव्या भारती की मौत के बाद दोबारा शूट करनी पड़ी थी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनके असमय निधन ने बॉलीवुड की कई बड़ी फिल्मों और निर्माताओं को कितना प्रभावित किया था।

    सभी मुश्किलों के बावजूद लाड़ला 1994 में रिलीज हुई और दर्शकों ने इसे भरपूर प्यार दिया। श्रीदेवी और अनिल कपूर की जोड़ी को खूब सराहा गया जबकि फिल्म के संवाद गीत और दमदार कहानी ने इसे बड़ी सफलता दिलाई। आज भी लाड़ला सिर्फ एक सफल फिल्म नहीं बल्कि बॉलीवुड के सबसे भावुक और यादगार फिल्मी सफरों में से एक मानी जाती है जहां एक दर्दनाक हादसे के बाद भी पूरी टीम ने हिम्मत नहीं हारी और एक यादगार फिल्म दर्शकों तक पहुंचाई।

  • पापा ने एक हां में बदल दी किस्मत, सनी देओल ने बताया कैसे धर्मेंद्र के भरोसे बनी सुपरहिट फिल्म घायल

    पापा ने एक हां में बदल दी किस्मत, सनी देओल ने बताया कैसे धर्मेंद्र के भरोसे बनी सुपरहिट फिल्म घायल


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल इन दिनों अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म बंटवारा 1947 को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है और इसके साथ ही सनी देओल लगातार प्रमोशन में जुटे हुए हैं। इसी दौरान उन्होंने अपनी सुपरहिट फिल्म घायल से जुड़ा एक ऐसा भावुक किस्सा साझा किया जिसने उनके प्रशंसकों के साथ फिल्म प्रेमियों का भी दिल जीत लिया। सनी ने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब इस फिल्म पर कोई निर्माता पैसा लगाने को तैयार नहीं था लेकिन उनके पिता और दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र ने उन पर भरोसा जताया और वही भरोसा आगे चलकर भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में से एक की नींव बना।

    सनी देओल ने सोशल मीडिया पर निर्देशक राजकुमार संतोषी के साथ एक वीडियो साझा करते हुए उस दौर को याद किया। उन्होंने बताया कि युवा राजकुमार संतोषी ने घायल की कहानी लिखी थी और उन्हें इस कहानी पर शुरू से पूरा विश्वास था। दोनों कई निर्माताओं के पास गए लेकिन किसी ने भी फिल्म बनाने में रुचि नहीं दिखाई। लगातार निराशा मिलने के बाद सनी ने फैसला किया कि अब इस कहानी को अपने पिता धर्मेंद्र को सुनाया जाए।

    उस समय धर्मेंद्र जयपुर में फिल्म बंटवारा की शूटिंग कर रहे थे और रामबाग पैलेस में ठहरे हुए थे। सनी देओल राजकुमार संतोषी को लेकर उनके पास पहुंचे। संतोषी ने पूरी कहानी सुनाई और कहानी खत्म होते ही धर्मेंद्र ने बिना किसी हिचकिचाहट के फिल्म बनाने के लिए हामी भर दी। सनी ने बताया कि उनके पिता को सिर्फ कहानी ही नहीं बल्कि इस बात पर भी गर्व था कि उनके बेटे ने इतनी दमदार स्क्रिप्ट को पहचाना और उस पर विश्वास बनाए रखा।

    सनी ने कहा कि घायल की सफलता केवल एक फिल्म की सफलता नहीं थी बल्कि यह उनके पिता के भरोसे और विश्वास की जीत थी। उन्होंने कहा कि अगर उस समय धर्मेंद्र उनका साथ नहीं देते तो शायद घायल कभी बड़े पर्दे तक नहीं पहुंच पाती। यही भरोसा उनके जीवन का सबसे बड़ा संबल बना और आगे चलकर घायल ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल करते हुए भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई।

    सनी देओल ने एक और दिलचस्प संयोग का जिक्र करते हुए बताया कि जिस जयपुर शहर में धर्मेंद्र ने बंटवारा की शूटिंग के दौरान घायल के लिए हां कही थी उसी शहर में वर्षों बाद वह अपनी नई फिल्म बंटवारा 1947 का पहला प्रमोशन कर रहे हैं। उनके अनुसार यह महज संयोग नहीं बल्कि जीवन का खूबसूरत चक्र है जो उन्हें पुराने संघर्ष और नई सफलता दोनों की याद दिलाता है।

    बंटवारा 1947 की कहानी भारत विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म में सनी देओल एक मुस्लिम व्यक्ति की भूमिका निभा रहे हैं जो विभाजन के दौरान पाकिस्तान पहुंच जाता है। वहां जिस घर में वह रहता है उसकी ऊपरी मंजिल पर एक हिंदू महिला रहती है जो अपना घर छोड़ने से इनकार कर देती है। सांप्रदायिक तनाव और दंगों के बीच सनी का किरदार उस महिला और अपने परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाता है। फिल्म में मानवीय रिश्तों और इंसानियत के संदेश को प्रमुखता से दिखाया गया है।

    फिल्म में प्रीति जिंटा पांच साल से अधिक समय बाद अभिनय की दुनिया में वापसी कर रही हैं। करण देओल भी अहम भूमिका में नजर आएंगे और फिल्म में सनी देओल के बेटे का किरदार निभा रहे हैं। इसके अलावा अली फजल अभिमन्यु सिंह खुशी हजारे और कनिका कपूर भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। एआर रहमान के संगीत और जावेद अख्तर के गीतों से सजी इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने बिना किसी कट के मंजूरी दी है। आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी यह फिल्म दर्शकों के बीच पहले ही जबरदस्त उत्सुकता पैदा कर चुकी है।

  • सलमान खान का संजय दत्त के लिए खास पोस्ट, 'आई लव यू बाबा' लिख शेयर की इमोशनल फोटो

    सलमान खान का संजय दत्त के लिए खास पोस्ट, 'आई लव यू बाबा' लिख शेयर की इमोशनल फोटो


    नई दिल्ली।  बॉलीवुड में दोस्ती की कई मिसालें देखने को मिलती हैं, लेकिन सलमान खान और संजय दत्त की दोस्ती हमेशा सबसे खास रिश्तों में गिनी जाती है। दोनों सितारे वर्षों से एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी रहे हैं और कई मौकों पर एक-दूसरे के लिए खुलकर अपना सम्मान और स्नेह जाहिर करते रहे हैं। एक बार फिर यही गहरा रिश्ता उस समय चर्चा में आ गया, जब सलमान खान ने सोशल मीडिया पर संजय दत्त के साथ एक भावुक तस्वीर साझा करते हुए दिल छू लेने वाला संदेश लिखा।

    शुक्रवार देर रात साझा की गई इस तस्वीर में सलमान खान और संजय दत्त एक-दूसरे को गले लगाए नजर आ रहे हैं। तस्वीर में दोनों के चेहरे पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहे, लेकिन उनके बीच का अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव साफ महसूस किया जा सकता है। इस तस्वीर के साथ सलमान ने ऐसा संदेश लिखा जिसने उनके प्रशंसकों का दिल जीत लिया।

    सलमान खान ने अपने पोस्ट में लिखा कि “बाबा हमेशा के लिए बाबा हैं। बाबा, बाबा होता है। संजू बाबा हैं। हम सबके बाबा और अब अपने बच्चों के भी बाबा हैं। मेरे बड़े भाई संजय दत्त को अल्लाह, भगवान और जीसस हमेशा खुश रखें। आई लव यू बाबा।” सलमान के इस संदेश में दोस्ती के साथ-साथ सम्मान, अपनापन और दुआओं का भाव भी साफ नजर आया।

    सलमान और संजय दत्त की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। फैंस ने दोनों की दोस्ती की जमकर तारीफ की और कमेंट सेक्शन में उन्हें बॉलीवुड की सबसे मजबूत दोस्ती बताया। कई प्रशंसकों ने लिखा कि फिल्म इंडस्ट्री में बदलते रिश्तों के बीच सलमान और संजय की दोस्ती आज भी पहले जैसी मजबूत बनी हुई है। वहीं कुछ लोगों ने इसे “भाईचारे की सबसे खूबसूरत तस्वीर” करार दिया।

    इस तस्वीर में दोनों कलाकारों का सिंपल लुक भी लोगों को पसंद आया। सलमान खान टी-शर्ट और जींस में नजर आए, जबकि उन्होंने अपनी नई हेयरस्टाइल को कैप से ढक रखा था। दूसरी ओर संजय दत्त भी साधारण शर्ट और जींस में दिखाई दिए। बिना किसी दिखावे के दोनों की यह तस्वीर उनके रिश्ते की सादगी और मजबूती को बयां करती नजर आई।

    सलमान खान और संजय दत्त कई फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं और ऑफ स्क्रीन भी दोनों की अच्छी बॉन्डिंग रही है। दोनों कलाकार अक्सर एक-दूसरे के बारे में सम्मान से बात करते हैं और मुश्किल समय में भी एक-दूसरे के साथ खड़े दिखाई दिए हैं। यही वजह है कि उनकी दोस्ती को बॉलीवुड की सबसे चर्चित और मजबूत दोस्तियों में गिना जाता है।

    वर्क फ्रंट की बात करें तो सलमान खान जल्द ही अपनी आगामी फिल्म ‘मातृभूमि’ में नजर आने वाले हैं। इस फिल्म में वह एक आर्मी ऑफिसर की भूमिका निभाते दिखाई देंगे। फिल्म में उनके साथ अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह मुख्य भूमिका में हैं। वहीं संजय दत्त भी कई बड़े प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं और लगातार अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों में दमदार भूमिकाएं निभा रहे हैं।

    सलमान खान की यह पोस्ट सिर्फ एक तस्वीर नहीं बल्कि दो दिग्गज सितारों की वर्षों पुरानी दोस्ती, भरोसे और सम्मान का खूबसूरत उदाहरण बन गई है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है और फैंस इसे बॉलीवुड की सबसे दिल छू लेने वाली तस्वीरों में से एक बता रहे हैं।

  • 'PR कम कीजिए और शिक्षा सुधारिए', पीएम मोदी के वीडियो पर विशाल ददलानी का बयान वायरल

    'PR कम कीजिए और शिक्षा सुधारिए', पीएम मोदी के वीडियो पर विशाल ददलानी का बयान वायरल


    नई दिल्ली। प्रसिद्ध गायक और संगीतकार विशाल ददलानी एक बार फिर अपने बेबाक बयानों को लेकर चर्चा में हैं। सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने वाले विशाल ने इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक हालिया वीडियो पर प्रतिक्रिया दी है। इस वीडियो में प्रधानमंत्री ने जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी मां के खिलाफ इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा पर चिंता जताई थी। इसके बाद विशाल ददलानी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी और शिक्षा व्यवस्था समेत कई मुद्दों पर सरकार को सलाह दी।

    विशाल ददलानी ने अपने वीडियो में कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान युवाओं में आक्रोश दिखाई दे रहा है तो उसके पीछे मौजूद कारणों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन के दौरान टियर गैस चलने डंडे बरसने और हिंसा जैसी घटनाओं पर अपेक्षित चर्चा नहीं होती लेकिन गाली गलौज के मुद्दे पर अधिक ध्यान दिया जाता है। उनके अनुसार युवाओं के गुस्से की असली वजहों को समझना ज्यादा जरूरी है।

    उन्होंने यह भी कहा कि बहुत से छात्रों और उनके परिवारों ने प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी परेशानियों का सामना किया है। विशाल ने अपने बयान में परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन समस्याओं के समाधान पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक यदि शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और छात्रों को पारदर्शी अवसर मिलेंगे तो स्वाभाविक रूप से उनके भीतर का असंतोष भी कम होगा।

    विशाल ददलानी ने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि जरूरत जनसंपर्क गतिविधियों से अधिक वास्तविक काम करने की है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को शिक्षा क्षेत्र में सुधार पर प्राथमिकता देनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि युवाओं की समस्याओं का समाधान किया जाएगा तो वही छात्र सरकार की उपलब्धियों की सराहना भी करेंगे। उन्होंने अपने वीडियो में यह भी कहा कि लोगों से वास्तविक संवाद और भरोसे का रिश्ता बनाना किसी भी जनसंपर्क अभियान से अधिक प्रभावी होता है।

    अपने सोशल मीडिया पोस्ट में विशाल ने शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए हैशटैग भी साझा किए। उनका यह वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया तो कुछ ने उनके बयान पर असहमति जताई। सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर बहस भी तेज हो गई और विभिन्न पक्षों ने अपनी अपनी राय रखी।

    विशाल ददलानी पहले भी कई सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर खुलकर अपनी बात रखते रहे हैं। उनके बयान अक्सर चर्चा का विषय बनते हैं और सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिलती है। इस बार भी उनका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे लेकर अलग अलग दृष्टिकोण सामने रख रहे हैं।

    हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह स्पष्ट है कि शिक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दे देश में लगातार चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं। परीक्षा प्रणाली पारदर्शिता रोजगार और छात्रों के भविष्य जैसे विषयों पर बहस जारी है। ऐसे में विशाल ददलानी का यह बयान भी उसी व्यापक सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन गया है जहां अलग अलग पक्ष अपनी राय रख रहे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सार्वजनिक हस्तियों और नागरिकों द्वारा व्यक्त विचारों पर स्वस्थ संवाद होना सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है और अंतिम निष्कर्ष तथ्यों तथा नीतिगत निर्णयों के आधार पर ही तय होते हैं।

  • भक्ति और संगीत का अद्भुत संगम, तीन मुस्लिम कलाकारों की रचना 'मन तड़पत हरि दर्शन को' आज भी लोगों की पहली पसंद

    भक्ति और संगीत का अद्भुत संगम, तीन मुस्लिम कलाकारों की रचना 'मन तड़पत हरि दर्शन को' आज भी लोगों की पहली पसंद


    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी खूबसूरती उसकी सांस्कृतिक विविधता और साझा विरासत रही है। हिंदी फिल्मों में ऐसे कई भजन बने हैं जो केवल धार्मिक आस्था का माध्यम नहीं बल्कि संगीत और कला की अमूल्य धरोहर भी बन गए। इन्हीं कालजयी रचनाओं में फिल्म बैजू बावरा का प्रसिद्ध भजन मन तड़पत हरि दर्शन को आज भी विशेष स्थान प्राप्त है। यह भजन दशकों बाद भी उतनी ही श्रद्धा और भावनाओं के साथ सुना जाता है जितना अपनी रिलीज के समय सुना गया था। खास बात यह है कि इस अमर भजन को साकार करने में तीन महान मुस्लिम कलाकारों का योगदान रहा जिनकी कला ने इसे इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज कर दिया।

    इस भजन को अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज मोहम्मद रफी ने दी थी। संगीत की रचना महान संगीतकार नौशाद ने की जबकि इसके शब्द प्रसिद्ध गीतकार शकील बदायूंनी ने लिखे थे। इन तीनों दिग्गजों की प्रतिभा और समर्पण ने भगवान कृष्ण की भक्ति को संगीत के माध्यम से ऐसा रूप दिया जो आज भी करोड़ों लोगों के दिलों को छू लेता है। यह गीत केवल एक फिल्मी भजन नहीं बल्कि भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर माना जाता है।

    फिल्म बैजू बावरा अपने संगीत के कारण हिंदी सिनेमा के इतिहास में विशेष स्थान रखती है। इस फिल्म ने शास्त्रीय संगीत को लोकप्रिय सिनेमा के माध्यम से घर घर तक पहुंचाया। कहा जाता है कि इस फिल्म का संगीत तैयार करते समय नौशाद ने हर धुन को बेहद गंभीरता और समर्पण के साथ तैयार किया था। कई चर्चित किस्सों के अनुसार उन्होंने इस भजन की रिकॉर्डिंग से पहले पूरी टीम से पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ स्टूडियो आने का आग्रह किया था ताकि गीत की भावना पूरी तरह जीवंत हो सके। हालांकि ऐसे प्रसंग लोककथाओं और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में प्रचलित हैं जिनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

    मन तड़पत हरि दर्शन को केवल संगीत प्रेमियों ने ही नहीं बल्कि भक्ति संगीत के श्रोताओं ने भी भरपूर प्यार दिया। मोहम्मद रफी की आवाज में छिपी भावनाएं और शकील बदायूंनी के सरल लेकिन प्रभावशाली शब्द इस भजन को कालजयी बना देते हैं। यही वजह है कि आज भी मंदिरों धार्मिक आयोजनों और संगीत कार्यक्रमों में यह भजन पूरे सम्मान के साथ गाया और सुना जाता है।

    बैजू बावरा में भरत भूषण और मीना कुमारी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। फिल्म को अपने समय की बड़ी सफल फिल्मों में गिना जाता है। इसके गीतों ने न केवल व्यावसायिक सफलता दिलाई बल्कि भारतीय फिल्म संगीत को नई दिशा भी दी। नौशाद को इस फिल्म के संगीत के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला था और इसे उनके करियर की सबसे यादगार उपलब्धियों में शामिल किया जाता है।

    यह भजन भारतीय संस्कृति की उस खूबसूरत परंपरा का प्रतीक भी है जहां कला और संगीत किसी धर्म या समुदाय की सीमाओं में बंधे नहीं रहते। अलग अलग पृष्ठभूमि से आए कलाकारों ने मिलकर ऐसी रचना तैयार की जिसने पीढ़ियों तक लोगों को भक्ति और संगीत से जोड़कर रखा। यही भारतीय सांस्कृतिक विरासत की सबसे बड़ी पहचान है जहां प्रतिभा आस्था और कला मिलकर ऐसी अमर कृतियों को जन्म देती हैं जो समय के साथ और भी अधिक सम्मान प्राप्त करती हैं।

  • 'रामायण' का ट्रेलर बना ग्लोबल सेंसेशन, पाकिस्तानी यूट्यूबर्स बोले- साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर

    'रामायण' का ट्रेलर बना ग्लोबल सेंसेशन, पाकिस्तानी यूट्यूबर्स बोले- साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर


    नई दिल्ली। रणबीर कपूर साई पल्लवी और यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण का ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर छा गया है। भारत में दर्शकों के बीच इसे लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी इस ट्रेलर की खूब चर्चा हो रही है। कई पाकिस्तानी यूट्यूबर्स और कंटेंट क्रिएटर्स ने फिल्म के ट्रेलर पर अपनी प्रतिक्रियाएं साझा की हैं और इसकी भव्यता विजुअल इफेक्ट्स तथा कलाकारों के अभिनय की खुलकर सराहना की है। सोशल मीडिया पर ऐसे कई रिएक्शन वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं जिनमें फिल्म को बड़े पर्दे का शानदार अनुभव बताया जा रहा है।

    पाकिस्तान की चर्चित कंटेंट क्रिएटर माविया उमर फारूकी ने ट्रेलर देखने के बाद कहा कि फिल्म का हर दृश्य बेहद शानदार दिखाई देता है और इसे बनाने में बड़े स्तर पर मेहनत की गई है। उनके अनुसार विजुअल इफेक्ट्स अंतरराष्ट्रीय स्तर के नजर आते हैं और पूरी फिल्म का प्रस्तुतिकरण काफी भव्य महसूस होता है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रेलर देखकर साफ लगता है कि निर्माताओं ने किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया है।

    माविया ने विशेष रूप से रणबीर कपूर और यश की स्क्रीन प्रेजेंस की तारीफ की। उनके अनुसार दोनों कलाकार अपने किरदारों में प्रभावशाली दिखाई देते हैं और ट्रेलर का हर दृश्य दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहता है। उन्होंने कैमरा वर्क बैकग्राउंड डिजाइन और एक्शन सीक्वेंस को भी फिल्म की बड़ी ताकत बताया। उनका मानना है कि बड़े पर्दे पर यह फिल्म दर्शकों के लिए यादगार अनुभव साबित हो सकती है।

    एक अन्य पाकिस्तानी यूट्यूबर हसनात खान ने भी ट्रेलर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने विशेष रूप से रावण के किरदार और उसके प्रस्तुतीकरण की सराहना की। उनके अनुसार फिल्म में दिखाए गए युद्ध दृश्य एक्शन और ग्राफिक्स बेहद प्रभावशाली हैं। ट्रेलर देखते समय उन्होंने कई बार इसकी भव्यता की प्रशंसा की और कहा कि फिल्म तकनीकी रूप से काफी मजबूत दिखाई देती है।

    रिएक्शन बाय सुलेमान नामक यूट्यूब चैनल ने भी फिल्म के ट्रेलर की तारीफ करते हुए कहा कि रणबीर कपूर और यश की स्क्रीन प्रेजेंस दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ती है। उन्होंने साई पल्लवी के सीता रूप की भी सराहना की और कहा कि उनका शांत और गरिमामय व्यक्तित्व इस किरदार के अनुरूप दिखाई देता है। उनका अनुमान है कि फिल्म रिलीज के बाद बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल कर सकती है।

    ईमान मोअज्जम एंटरटेनमेंट नाम के एक अन्य चैनल ने भी फिल्म के बैकग्राउंड म्यूजिक स्पेशल इफेक्ट्स और पारंपरिक प्रस्तुति की प्रशंसा की। उनका कहना था कि पौराणिक कथा को आधुनिक तकनीक के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास आकर्षक लगता है और इससे नई पीढ़ी भी इस कहानी से जुड़ सकती है।

    हालांकि सोशल मीडिया पर सामने आए ये रिएक्शन अलग अलग कंटेंट क्रिएटर्स की व्यक्तिगत राय हैं और इन्हें दर्शकों की व्यापक प्रतिक्रिया नहीं माना जा सकता। फिल्म की वास्तविक सफलता का आकलन इसकी रिलीज के बाद दर्शकों की प्रतिक्रिया और बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन से ही होगा।

    रामायण दिवाली 2026 के अवसर पर सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। भव्य स्टारकास्ट आधुनिक तकनीक और पौराणिक कथा के संयोजन के कारण यह फिल्म पहले ही चर्चा का केंद्र बन चुकी है। अब सभी की नजर इसकी रिलीज और दर्शकों की अंतिम प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

  • 'मैं रावण का वध करूंगा' Ramayana के ट्रेलर में दिखे संवाद पर विवाद, क्या श्रीराम ने लिया था ऐसा प्रण?

    'मैं रावण का वध करूंगा' Ramayana के ट्रेलर में दिखे संवाद पर विवाद, क्या श्रीराम ने लिया था ऐसा प्रण?


    नई दिल्‍ली । रामायण फिल्म (रामायणा) का ट्रेलर आए दो दिन हो चुके है. निर्माता नमित मल्होत्रा और निर्देशक नितेश तिवारी की मच अवेटेड इस फिल्म के फर्स्ट लुक और इंप्रेशन को लेकर पब्लिक डोमेन में काफी बज है. ट्रेलर को मिक्स रेस्पांस मिल रहे हैं और इसमें जितने भी किरदारों की झलकियां दिखाई दे रही हैं, सभी के लुक, उनकी स्क्रीन प्रजेंस, कॉस्ट्यूम, डॉयलॉग डिलिवरी, एक्शन और एक्सप्रेशन पर खूब बातें हो रही हैं.

    इन तमाम चर्चाओं के बीच एक बात पर निगाह जाकर टिक जाती है. ट्रेलर के एक हिस्से में श्रीराम बने रणबीर कपूर बहुत गुस्से में धनुष उठाते हुए प्रण करते हैं कि ‘वह रावण का तीनों लोकों के सामने वध करेंगे.’ इस सीन को देखने के बाद सोशल मीडिया पर इस बात की चर्चा भी चल पड़ी है कि श्रीराम ने कब ऐसा प्रण लिया कि वह रावण का वध करेंगे? क्या उन्होंने कभी बहुत गुस्से में ऐसा कुछ कहा था? क्या पौराणिक ग्रंथों और किताबों में कहीं ऐसा जिक्र मिलता है?

    श्रीराम को रामायण-रामचरित मानस और अन्य पौराणिक ग्रंथों में भी युद्ध में भी स्थिर रहने वाला, कभी विचलित न होने वाला, भुवन मोहिनी मुस्कान वाला, कोमल और सौम्य वाणी बोलने वाला, महावीर और हर कौशल में निपुण होने के बावजूद अतिविनम्र और दीनदयालु बताया गया है. बल्कि बड़े-बड़े निशाचरों का भी वध उन्होंने कभी क्रोध में नहीं किया. उन्हें अंतिम से अंतिम समय तक मौका देने की कोशिश की.

    ताड़का वध में भी नहीं दिखा था श्रीराम का क्रोध
    श्रीराम ने सबसे पहले ताड़का वध किया था. इस वध में भी उनके क्रोध और भुजाओं के फड़कने-गर्जने का कहीं जिक्र नहीं है. रामचरित मानस में तो संत तुलसी लिखते हैं कि वन के मार्ग में जब ताड़का हमला करने के लिए दौड़ी आई तो विश्वामित्र के इशारे पर श्रीराम ने एक ही बाण से उसके प्राण हर लिए और फिर उसे मरने से पहले दीन मानकर अपना देवस्वरूप भी दिखा दिया.

    चले जात मुनि दीन्हि देखाई। सुनि ताड़का क्रोध करि धाई॥
    एकहिं बान प्रान हरि लीन्हा। दीन जानि तेहि निज पद दीन्हा॥3॥ (ताड़का वध, बालकांड)

    महर्षि वाल्मीकि इसी बात को श्लोक में लिखते हैं कि

    स तया ताडितो बाणैर्मर्मज्ञो मर्मभेदिभिः।
    पपात भुवि ताडका सा प्राणैः संपरिवर्जिता।।

    अर्थ: श्रीराम द्वारा मर्मभेदी बाणों से घायल होने पर, ताड़का धरती पर गिर पड़ी और उसके प्राण पखेरू उड़ गए.

    कहने का मतलब है कि श्रीराम ने राक्षसों का वध करते हुए कहीं भी क्रोध, क्षोभ, अनावश्यक बल प्रदर्शन, गर्जना आदि काम नहीं किए. उन्होंने सावधान करने के लिए चेताया जरूर, लेकिन किसी का वध करने जैसा प्रण नहीं लिया और रावण के वध का प्रण उन्होंने लिया हो, ऐसा भी जिक्र नहीं आता है.

    श्रीराम ने प्रण भी करुणा में लिया था, क्रोध में नहीं
    अरण्य कांड में एक जगह जिक्र आता है, जहां श्रीराम राक्षसों और पापियों से धरती की मुक्ति का प्रण लेते हैं. लेकिन यहां भी ‘वध’ शब्द नहीं आता है. जब श्रीराम वन में बिखरे हड्डियों और कंकालों को देखकर पूछते हैं कि ये किसके हैं तो डरे हुए ऋषि-मुनि बताते हैं कि राक्षसों ने जिन मुनियों को खा डाला है यह उनके ही कंकाल हैं. श्रीराम यह सब देखकर करुणा से भर उठते हैं. तब संत तुलसी एक दोहे में उनका प्रण बताते हैं –

    ‘निसिचर हीन करउँ महि भुज उठाइ पन कीन्ह।
    सकल मुनिन्ह के आश्रमन्हि जाइ जाइ सुख दीन्ह॥9॥’ (अरण्य कांड)

    भाव: श्री रामजी ने भुजा उठाकर प्रण किया कि मैं पृथ्वी को राक्षसों से रहित कर दूंगा. फिर समस्त मुनियों के आश्रमों में जा-जाकर उनको (दर्शन एवं सम्भाषण का) सुख दिया.

    इसी तरह वाल्मीकि रामायण में भी ऐसा स्पष्ट जिक्र नहीं मिलता है कि श्रीराम ने सीधे रावण वध की बात की हो. लेकिन उन्होंने शरणागत की हर प्रकार से रक्षा और ऋषि-मुनि व संत समाज की हर प्रकार से रक्षा-सुरक्षा का वचन कई जगह लिया.

    जैसे जब विभीषण के आने की खबर उन्हें लगती है तो वह स्पष्ट कहते हैं कि ‘जो मेरी शरण में आ गया तो मैं उसे अभय देता हूं. यही मेरा व्रत है. फिर अगले श्लोक में वह कहते हैं कि “हे सुग्रीव! उसे यहां ले आओ. वह विभीषण हो या खुद रावण ही क्यों न हो, मैंने उसे अभय दे दिया है.’

    सकृदेव प्रपन्नाय तवास्मीति च याचते।
    अभयं सर्वभूतेभ्यो ददाम्येतद् व्रतं मम॥
    (युद्धकाण्ड, सर्ग 18, श्लोक 33 – गीता प्रेस)

    आनयैनं हरिश्रेष्ठ दत्तमस्याभयं मया।
    विभीषणो वा सुग्रीव यदि वा रावणः स्वयम्॥ (युद्धकाण्ड, सर्ग 18, श्लोक 34 – गीता प्रेस)

    सुग्रीव के आपा खोने और क्रोधित होने का है जिक्र
    मचरित मानस और रामायण दोनों में ही ऐसा जिक्र मिलता है कि सुग्रीव जरूर क्रोध में आकर ऐसा कहते हैं कि वह रावण का वध करेंगे या राक्षस कुल का समूल नाश कर देंगे. बल्कि जब सुग्रीव पहली बार रावण को देखते हैं तो आपा खो देते हैं और बिना युद्ध की घोषणा के ही रावण पर हमला कर देते हैं. तब श्रीराम इसे मर्यादा के विपरीत बताते हैं और भविष्य में कभी भी ऐसा न करने के लिए कहते हैं.

    वाल्मीकि रामायण में सुग्रीव, श्रीराम के साथ मित्रता करते हुए संकल्प लेते हैं और कहते हैं कि हे रघुनन्दन! आपकी कृपा से मैं अपहृत हुई माता सीता को ठीक उसी तरह वापस लेकर आऊंगा, जैसे खोए हुए वेदों को वापस लाया गया था.मैं संपूर्ण लोक को पीड़ित करने वाले उस कांटे रूपी रावण का उसके पूरे दल-बल (वंश) सहित विनाश करने में आपका पूर्ण साथ दूंगा,

    अहं तद् रघुनन्दन।
    आनयिष्यामि तां सीतां नष्टां वेदश्रुतीमिव ॥
    प्रसादात् तव राघव।
    हनिष्यामि सगणं रावणं लोककण्टकम् ॥

    रामचरित मानस के किष्किंधा कांड में यही बात सुग्रीव ऐसे कहते हैं-

    कह सुग्रीव सुनहु रघुबीरा। तजहु सोच मन आनहु धीरा॥
    सब प्रकार करिहउं सेवकाई। जेहि बिधि मिलिहि जानकी आई॥

    भाव- सुग्रीव ने कहा- हे रघुवीर! सुनिए, आप शोक का त्याग कर दीजिए और मन में धैर्य धारण कीजिए. मैं सब प्रकार से आपकी सेवा करूंगा और वह हर उपाय करूंगा जिससे जानकी जी (माता सीता) आपको वापस मिल जाएं.

    कुल मिलाकर बात ये है कि ट्रेलर में रणबीर कपूर श्रीराम के किरदार के रूप में जो प्रण ले रहे हैं, उसका ठीक-ठीक जिक्र या वर्णन प्रचलित ग्रंथ परंपरा में नहीं दिखता है. हालांकि रामकथा के कई तरह के वर्जन हैं. सबमें लेखकों ने अपने-अपने अनुसार रचनात्मक स्वतंत्रता ली है. लेकिन नमित मल्होत्रा और नितेश तिवारी ने किस वर्जन से ये प्रसंग चुना होगा, इसे ठीक-ठीक समझना अभी तो मुश्किल है.