Category: Entertainment

  • Vaani Kapoor का जलवा, फिल्मों से लेकर स्टाइल तक हर जगह छाई एक्ट्रेस

    Vaani Kapoor का जलवा, फिल्मों से लेकर स्टाइल तक हर जगह छाई एक्ट्रेस

    नई दिल्ली । बॉलीवुड की ग्लैमरस और टैलेंटेड अभिनेत्रियों में शुमार वाणी कपूर ने अपनी खूबसूरती, स्टाइल और आत्मविश्वास से इंडस्ट्री में खास पहचान बनाई है। उनकी आकर्षक पर्सनैलिटी और फैशन सेंस उन्हें युवा दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाते हैं।

    वाणी कपूर ने अपने करियर की शुरुआत यशराज फिल्म्स की फिल्म “Shuddh Desi Romance” से की थी, जहां उनकी सहज अभिनय शैली को काफी सराहा गया। इसके बाद उन्होंने “Befikre”, “War”, “Bell Bottom”, “Chandigarh Kare Aashiqui” और “Khel Khel Mein” जैसी फिल्मों में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई। उन्होंने साबित किया कि वह सिर्फ ग्लैमर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में भी खुद को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकती हैं।

    फैशन इंडस्ट्री में भी मजबूत पकड़
    वाणी कपूर सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फैशन इंडस्ट्री में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। कई बड़े फैशन ब्रांड्स के लिए रैंप वॉक करने के साथ-साथ वह ग्लोबल फैशन इवेंट्स और मैगजीन कवर पर भी नजर आ चुकी हैं। उनका एलिगेंट लुक, सादगी और कॉन्फिडेंस उन्हें एक स्टाइल आइकन बनाता है। फैशन विशेषज्ञ उन्हें उन चुनिंदा भारतीय अभिनेत्रियों में शामिल करते हैं जो ग्लोबल ट्रेंड्स को बेहद सहजता से अपनाती हैं और उन्हें अपने अंदाज में पेश करती हैं।

    स्टाइल और पर्सनैलिटी बनी पहचान
    वाणी कपूर का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट उनका मॉडर्न और एलिगेंट फैशन सेंस है। उनका स्टाइल कम्फर्ट और ग्लैमर का संतुलन पेश करता है, जो आज की युवा पीढ़ी के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। वे अक्सर हल्के रंगों, मिनिमल ज्वेलरी और नैचुरल मेकअप लुक में नजर आती हैं, जो उनकी सादगी और आत्मविश्वास को और भी निखारता है। उनका यह स्टाइल उन्हें बॉलीवुड की सबसे फैशनेबल अभिनेत्रियों में शामिल करता है।

    कैरियर का अगला पड़ाव
    वर्तमान में वाणी कपूर कई नए फिल्म और डिजिटल प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं। उनके करियर का यह चरण और भी रोमांचक माना जा रहा है क्योंकि वे लगातार अपनी अभिनय क्षमता और स्क्रीन प्रेजेंस को निखार रही हैं। फिटनेस के प्रति उनका समर्पण और लगातार बदलता फैशन स्टेटमेंट उन्हें नई पीढ़ी की प्रभावशाली अभिनेत्रियों में मजबूत स्थान दिलाता है।

    समर फैशन में वाणी कपूर का असर
    इस समर सीजन में वाणी कपूर के स्टाइल से प्रेरित फैशन ट्रेंड्स में पेस्टल को-ऑर्ड सेट्स, फ्लोई मैक्सी ड्रेसेज़, लिनेन आउटफिट्स, मिनिमल ज्वेलरी और न्यूड मेकअप शामिल हैं। उनका सॉफ्ट और एफ़र्टलेस लुक आधुनिक महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। उनका यह फैशन एप्रोच 2026 के समर ट्रेंड्स में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है, जो सादगी के साथ ग्लैमर को जोड़ता है।

    वाणी कपूर ने अपने अभिनय, स्टाइल और आत्मविश्वास के दम पर बॉलीवुड और फैशन इंडस्ट्री दोनों में एक मजबूत पहचान बनाई है। उनका बढ़ता स्टारडम उन्हें आने वाले वर्षों में और भी ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।

  • दिलीप कुमार के सामने बोला पहला डायलॉग और खुल गए किस्मत के दरवाजे, अरुणा ईरानी ने साझा की यादगार कहानी

    दिलीप कुमार के सामने बोला पहला डायलॉग और खुल गए किस्मत के दरवाजे, अरुणा ईरानी ने साझा की यादगार कहानी

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा में पांच दशक से अधिक समय तक अपनी अभिनय प्रतिभा का प्रभाव छोड़ने वाली वरिष्ठ अभिनेत्री अरुणा ईरानी ने अपने करियर की शुरुआत से जुड़ा एक दिलचस्प और प्रेरणादायक किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे बचपन में एक साधारण ऑडिशन ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और उन्हें फिल्मी दुनिया तक पहुंचाने का रास्ता तैयार किया।

    अरुणा ईरानी ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उस समय वह काफी छोटी थीं और अपने परिवार के साथ एक रिहायशी इमारत में रहती थीं। एक दिन वहां एक कास्टिंग टीम बच्चों की तलाश में पहुंची। टीम ने इमारत में रहने वाले बच्चों को अभिनय के लिए ऑडिशन देने का निमंत्रण दिया। बच्चों को आकर्षित करने के लिए वहां वेफर्स और कोल्ड ड्रिंक की भी व्यवस्था की गई थी, जिससे माहौल उत्साहपूर्ण बन गया था।

    उन्होंने बताया कि यह सुनकर वह भी अपने दोस्तों के साथ ऑडिशन स्थल पर पहुंच गईं। उस समय उन्हें अभिनय की दुनिया के बारे में बहुत अधिक जानकारी नहीं थी और वह अन्य बच्चों की तरह वहां मौजूद माहौल का आनंद ले रही थीं। ऑडिशन के दौरान वह एक कोने में खड़ी होकर आराम से वेफर्स खा रही थीं और कोल्ड ड्रिंक पी रही थीं। तभी वहां मौजूद लोगों में से किसी की नजर उन पर पड़ी और उन्हें सामने बुलाया गया।

    अरुणा ने बताया कि जब वह आगे बढ़ीं तो उन्हें पता चला कि सामने हिंदी सिनेमा के महान अभिनेता दिलीप कुमार बैठे हुए हैं। यह उनके लिए बेहद अप्रत्याशित और यादगार क्षण था। उन्होंने कहा कि दिलीप कुमार ने उनसे पूछा कि क्या वह संवाद बोल सकती हैं। इसके बाद उन्हें एक छोटा-सा संवाद दिया गया और उसे डर के भाव के साथ बोलने के लिए कहा गया।

    अभिनेत्री के अनुसार उन्होंने बिना घबराए पूरे आत्मविश्वास के साथ संवाद प्रस्तुत किया। उनके प्रदर्शन से वहां मौजूद लोग प्रभावित हुए और उन्हें ऑडिशन के लिए चुन लिया गया। यही वह पल था जिसने उनके अभिनय करियर की नींव रखी और फिल्मी दुनिया में प्रवेश का रास्ता खोल दिया।

    अरुणा ईरानी ने कहा कि उस दिन का अनुभव आज भी उनकी स्मृतियों में ताजा है। उनके अनुसार जीवन में कई बार ऐसे अवसर अचानक सामने आते हैं, जो भविष्य को पूरी तरह बदल देते हैं। यदि वह उस दिन ऑडिशन में नहीं जातीं, तो शायद उनका जीवन किसी दूसरी दिशा में आगे बढ़ता।

    उन्होंने यह भी बताया कि अभिनय के प्रति उनका रुझान पारिवारिक माहौल से भी प्रभावित था। उनके पिता नाट्य गतिविधियों से जुड़े हुए थे, जबकि उनकी मां भी अभिनय क्षेत्र में सक्रिय थीं। यही कारण था कि परिवार ने उनके अभिनय करियर का समर्थन किया और उन्हें अपनी प्रतिभा को निखारने का अवसर मिला।

    अरुणा ईरानी का फिल्मी सफर भारतीय सिनेमा के सबसे सफल और लंबे करियरों में गिना जाता है। उन्होंने अपने अभिनय से विभिन्न पीढ़ियों के दर्शकों का मनोरंजन किया और कई यादगार भूमिकाओं के जरिए इंडस्ट्री में एक अलग पहचान बनाई। उनका यह अनुभव न केवल संघर्ष और अवसर की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रतिभा और सही मौके का मेल किसी भी व्यक्ति की जिंदगी को नई दिशा दे सकता है।

  • फिल्म ‘मां बहन’ की रिलीज के बीच तृप्ति डिमरी का खुलासा, बोलीं- बचपन में खूब डांट और मार पड़ी है

    फिल्म ‘मां बहन’ की रिलीज के बीच तृप्ति डिमरी का खुलासा, बोलीं- बचपन में खूब डांट और मार पड़ी है

    नई दिल्ली । अपनी नई फिल्म मां बहन की रिलीज को लेकर उत्साहित अभिनेत्री तृप्ति डिमरी इन दिनों लगातार चर्चा में हैं। फिल्म के प्रमोशन के दौरान उन्होंने अपने बचपन से जुड़ी कई दिलचस्प यादें साझा कीं, जिन्होंने बातचीत को हल्के-फुल्के और भावनात्मक रंग से भर दिया। अपने पुराने दिनों को याद करते हुए अभिनेत्री ने बताया कि बचपन में उन्हें अक्सर डांट और सजा का सामना करना पड़ता था, लेकिन आज वे उन अनुभवों को मुस्कुराते हुए याद करती हैं।

    एक बातचीत में तृप्ति ने कहा कि लगभग हर बच्चे की तरह उन्हें भी अपने माता-पिता से कभी न कभी डांट या मार पड़ी होगी। उन्होंने हंसते हुए बताया कि उनके बचपन में यह इतना सामान्य था कि कभी-कभी बिना किसी बड़ी वजह के भी उन्हें डांट पड़ जाती थी। मजाकिया अंदाज में उन्होंने कहा कि जिस दिन उन्हें मार नहीं पड़ती थी, उस दिन भी किसी न किसी कारण से डांट सुनने को मिल जाती थी। उनकी यह बात सुनकर मौजूद लोग भी मुस्कुरा उठे।

    अभिनेत्री ने कहा कि बचपन की ये घटनाएं उस समय भले ही कठिन लगती थीं, लेकिन समय बीतने के साथ वे जीवन की प्यारी यादों का हिस्सा बन जाती हैं। उनका मानना है कि परिवार और परवरिश से जुड़े ऐसे अनुभव व्यक्ति के व्यक्तित्व को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि आज वे उन दिनों को किसी शिकायत के बजाय स्नेह और अपनत्व के साथ याद करती हैं।

    अपनी फिल्म के बारे में बात करते हुए तृप्ति ने बताया कि कहानी में मौजूद तीनों प्रमुख किरदार अलग-अलग परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना करते हैं। उनके अनुसार, फिल्म का परिवार पूरी तरह व्यवस्थित नहीं है, बल्कि उसमें कई तरह की उलझनें और विसंगतियां हैं। हालांकि यही अव्यवस्था कहानी को रोचक बनाती है और दर्शकों को किरदारों से जोड़ती है।

    उन्होंने कहा कि फिल्म में ऐसे कई मौके आते हैं जब मुख्य पात्रों को अचानक पैदा हुई मुश्किल परिस्थितियों से निपटने के लिए नए रास्ते खोजने पड़ते हैं। यही संघर्ष और हास्य का मिश्रण फिल्म को मनोरंजक बनाता है। कहानी केवल कॉमेडी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें रिश्तों, पारिवारिक बंधनों और कठिन समय में एक-दूसरे का साथ देने की भावना को भी प्रमुखता से दिखाया गया है।

    निर्देशक सुरेश त्रिवेणी के निर्देशन में बनी यह फिल्म अब दर्शकों के लिए उपलब्ध है। फिल्म में तृप्ति के साथ माधुरी दीक्षित नेने, रवि किशन, धारणा दुर्गा, गीतांजलि कुलकर्णी, अरुणोदय सिंह और शार्दुल भारद्वाज जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं।

    फिल्म की कहानी एक ऐसे परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है जिसकी जिंदगी तब अचानक बदल जाती है जब घर की रसोई में एक लाश मिलती है। इसके बाद घटनाओं का सिलसिला शुरू होता है और परिवार के सदस्यों को कई अप्रत्याशित चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कॉमेडी, रहस्य और पारिवारिक भावनाओं के संतुलन के साथ फिल्म दर्शकों को एक अलग अनुभव देने का प्रयास करती है।

  • आईपीएल फाइनल वीडियो विवाद पर नुसरत भरूचा की सफाई, बोलीं- अफवाहों पर नहीं, तथ्यों पर करें भरोसा

    आईपीएल फाइनल वीडियो विवाद पर नुसरत भरूचा की सफाई, बोलीं- अफवाहों पर नहीं, तथ्यों पर करें भरोसा

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री Nushrratt Bharuccha ने आईपीएल फाइनल से जुड़ी एक वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों और दावों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। हाल के दिनों में एक वीडियो को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं, जिसमें सुनाई देने वाली कुछ आवाजों को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के अनुमान लगाए जा रहे थे। अब अभिनेत्री ने स्वयं सामने आकर पूरे मामले की वास्तविकता स्पष्ट करने की कोशिश की है।

    नुसरत भरूचा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से कई तस्वीरें और स्क्रीनशॉट साझा करते हुए कहा कि एक साधारण घटना को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। उन्होंने बताया कि वीडियो में सुनाई देने वाली आवाजों को लेकर कई तरह की भ्रामक कहानियां बनाई गईं, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग थी। अभिनेत्री ने यह भी कहा कि उनके नाम से कुछ ऐसे बयान भी प्रसारित किए गए, जिनका उनसे कोई संबंध नहीं था।

    अपने स्पष्टीकरण में अभिनेत्री ने बताया कि जिस दिन संबंधित वीडियो रिकॉर्ड की गई थी, उस समय वह अपने दोस्तों के घर पर आईपीएल फाइनल मुकाबला देख रही थीं। उसी दौरान घर में मौजूद एक पालतू पपी रोने जैसी आवाजें निकाल रहा था। वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान वही आवाजें भी कैद हो गईं। उनके अनुसार, यह पूरी घटना बेहद सामान्य थी, लेकिन बाद में सोशल मीडिया पर इसे अलग-अलग संदर्भों में प्रस्तुत किया जाने लगा।

    नुसरत ने यह भी बताया कि उनके एक मित्र ने उसी समय दूसरे एंगल से एक और वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसमें वही आवाजें स्पष्ट रूप से सुनी जा सकती हैं। अभिनेत्री का कहना है कि यह अतिरिक्त वीडियो इस बात का प्रमाण है कि रिकॉर्डिंग में सुनाई देने वाली आवाजें वास्तव में पालतू पपी की थीं और उनका किसी अन्य दावे या अटकल से कोई संबंध नहीं था।

    विवाद बढ़ने के बाद अभिनेत्री ने एक और वीडियो साझा किया, जिसमें वह घर के भीतर दिखाई दे रही हैं और साथ ही पालतू पपी भी नजर आ रहा है। उन्होंने बताया कि यह वीडियो उसी रात बाद में रिकॉर्ड किया गया था। नुसरत के अनुसार, उन्हें पहले ही कुछ लोगों ने सलाह दी थी कि वह अपनी मूल वीडियो हटा दें क्योंकि उसके गलत अर्थ निकाले जा सकते हैं। इसी आशंका के चलते उन्होंने वीडियो को हटा भी दिया था, लेकिन बाद में वही स्थिति उत्पन्न हो गई जिसका डर था।

    अभिनेत्री ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी सामग्री को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत करना आसान हो गया है, जिससे गलतफहमियां तेजी से फैलती हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी वायरल सामग्री पर प्रतिक्रिया देने से पहले तथ्यों की जांच अवश्य करें और बिना पुष्टि के किसी निष्कर्ष पर न पहुंचें।

    नुसरत भरूचा ने यह भी कहा कि मोबाइल फोन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि किसी भी व्यक्ति के बारे में अधूरी जानकारी के आधार पर अफवाहें फैलाने या उसे परेशान करने से बचें। अभिनेत्री का मानना है कि डिजिटल माध्यमों पर जागरूकता और जिम्मेदारी आज पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गई है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट जानकारियों और अफवाहों के प्रभाव को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। नुसरत भरूचा की सफाई के बाद अब यह मामला तथ्यों और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार के महत्व की ओर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है।

  • सात असफल IVF प्रयासों के बाद मिली खुशियों की सौगात, संभावना सेठ और अविनाश द्विवेदी बने जुड़वां बच्चों के माता-पिता

    सात असफल IVF प्रयासों के बाद मिली खुशियों की सौगात, संभावना सेठ और अविनाश द्विवेदी बने जुड़वां बच्चों के माता-पिता

    नई दिल्ली । टीवी और मनोरंजन जगत की चर्चित अभिनेत्री संभावना सेठ के जीवन में आखिरकार वह खुशी आ गई है जिसका उन्हें और उनके परिवार को वर्षों से इंतजार था। करीब दस वर्षों तक मातृत्व की राह में लगातार चुनौतियों और असफलताओं का सामना करने के बाद संभावना सेठ और उनके पति अविनाश द्विवेदी जुड़वां बच्चों के माता-पिता बन गए हैं। सरोगेसी के माध्यम से मिले इस सुखद उपहार ने न केवल उनके परिवार को नई खुशियां दी हैं, बल्कि उनके लाखों प्रशंसकों को भी भावुक कर दिया है।

    इस खुशखबरी की जानकारी कपल ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की। अस्पताल से साझा की गई तस्वीरों में दोनों के चेहरे पर लंबे संघर्ष के बाद मिली सफलता और संतोष साफ दिखाई दे रहा था। तस्वीरों में संभावना की आंखों में खुशी के आंसू नजर आए, जबकि अविनाश उनके साथ खड़े होकर इस विशेष पल को महसूस करते दिखाई दिए। सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेश में कपल ने इस खुशी की तुलना समय से पहले आई दीपावली से करते हुए बताया कि उनके घर लक्ष्मी और गणेश के रूप में दो नई खुशियों का आगमन हुआ है।

    संभावना सेठ का मातृत्व का सफर आसान नहीं रहा। अभिनेत्री ने पहले भी कई अवसरों पर खुलकर बताया था कि मां बनने की उनकी इच्छा ने उन्हें वर्षों तक मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक संघर्षों से गुजरने पर मजबूर किया। उन्होंने लगातार चिकित्सा उपचार कराए और सात बार आईवीएफ प्रक्रिया का सहारा लिया, लेकिन हर बार उन्हें निराशा का सामना करना पड़ा। कई बार गर्भधारण के बाद गर्भपात जैसी पीड़ादायक परिस्थितियों ने भी उनके जीवन को प्रभावित किया। इन असफलताओं के बावजूद उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी और अपने लक्ष्य की ओर लगातार प्रयास करती रहीं।

    लगातार असफल चिकित्सा प्रयासों के बाद संभावना और अविनाश ने सरोगेसी का विकल्प चुना। यह निर्णय उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। लंबे इंतजार और धैर्य के बाद आखिरकार उनके घर जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ, जिसने उनके वर्षों पुराने सपने को साकार कर दिया। इस उपलब्धि को कपल ने भगवान की कृपा और अपने संघर्ष की जीत बताया है।

    उनकी इस खुशी में मनोरंजन जगत की कई हस्तियां भी शामिल हुईं। गौहर खान ने परिवार और नवजात बच्चों के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके सुखद भविष्य की कामना की। वहीं उर्फी जावेद, देबिना बनर्जी, किश्वर मर्चेंट और रोहित पुरोहित सहित कई कलाकारों ने उन्हें बधाई संदेश भेजे। सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने भी इस नए अध्याय के लिए कपल को शुभकामनाएं दीं।

    संभावना सेठ की यह कहानी केवल एक सेलिब्रिटी के माता-पिता बनने की खबर नहीं है, बल्कि उन हजारों दंपतियों के लिए प्रेरणा भी है जो लंबे समय तक संतान सुख के लिए संघर्ष करते हैं। उनका सफर यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों, असफलताओं और निराशाओं के बावजूद धैर्य, विश्वास और सही निर्णय जीवन में नई उम्मीदों के द्वार खोल सकते हैं। जुड़वां बच्चों के आगमन के साथ संभावना और अविनाश के जीवन में खुशियों का नया अध्याय शुरू हो गया है, जिसका इंतजार उन्होंने पूरे दस वर्षों तक किया था।

  • जब गोविंदा को देखकर आश्वस्त नहीं थे पहलाज निहलानी, लेकिन डांस टैलेंट ने दिलाया बॉलीवुड में पहला बड़ा मौका

    जब गोविंदा को देखकर आश्वस्त नहीं थे पहलाज निहलानी, लेकिन डांस टैलेंट ने दिलाया बॉलीवुड में पहला बड़ा मौका


    नई दिल्ली/ मुंबई । हिंदी सिनेमा के जाने-माने फिल्म निर्माता और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी के निधन के बाद फिल्म जगत उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहा है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने कई सफल फिल्मों का निर्माण किया और अनेक कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया। उनके जीवन से जुड़े कई यादगार प्रसंग इन दिनों चर्चा में हैं, जिनमें अभिनेता Govinda के करियर की शुरुआत से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी शामिल है।

    पहलाज निहलानी उन निर्माताओं में गिने जाते थे, जो नए कलाकारों की क्षमता को पहचानने में विश्वास रखते थे। फिल्म निर्माण के क्षेत्र में उन्होंने 1980 के दशक में कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी फिल्मों में मनोरंजन, पारिवारिक भावनाएं और व्यावसायिक सफलता का संतुलित मेल देखने को मिलता था। इसी दौर में उन्होंने एक ऐसे युवा कलाकार को मौका दिया, जो आगे चलकर हिंदी सिनेमा का बड़ा सितारा बना।

    यह कहानी उस समय की है जब गोविंदा अपने करियर की शुरुआत करने की कोशिश कर रहे थे। पहलाज निहलानी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब गोविंदा पहली बार उनसे मिलने पहुंचे तो उनका व्यक्तित्व और लुक उन्हें बहुत प्रभावशाली नहीं लगा। निर्माता के मन में यह संदेह था कि क्या यह युवा अभिनेता बड़े पर्दे पर दर्शकों को प्रभावित कर पाएगा। पहली मुलाकात के बाद वह पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे और किसी निर्णय पर पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था।

    हालांकि अगले ही दिन परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं। गोविंदा अपने डांस का एक वीडियो लेकर निहलानी के पास पहुंचे। जैसे ही निर्माता ने वह वीडियो देखा, उनकी राय बदल गई। गोविंदा की ऊर्जा, आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति और शानदार नृत्य कौशल ने उन्हें प्रभावित कर दिया। निहलानी को महसूस हुआ कि इस युवा कलाकार में वह क्षमता मौजूद है जो उसे भीड़ से अलग बनाती है। इसके बाद उन्होंने गोविंदा को अपनी फिल्म में मुख्य भूमिका देने का फैसला कर लिया।

    यह फैसला आगे चलकर हिंदी फिल्म उद्योग के सबसे सफल निर्णयों में शामिल माना गया। वर्ष 1986 में रिलीज हुई Ilzaam से गोविंदा ने बतौर हीरो बॉलीवुड में कदम रखा। फिल्म को अच्छी प्रतिक्रिया मिली और अभिनेता को दर्शकों के बीच पहचान मिलने लगी। इसके बाद गोविंदा और पहलाज निहलानी की जोड़ी ने कई सफल फिल्मों में साथ काम किया।

    उनकी साझेदारी ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार फिल्में दीं। Shola Aur Shabnam और Aankhen जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। इन फिल्मों की सफलता ने गोविंदा को उस दौर के सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में शामिल कर दिया। उनकी कॉमिक टाइमिंग, डांस और मनोरंजक अभिनय शैली दर्शकों की पहली पसंद बन गई।

    पहलाज निहलानी का योगदान केवल सफल फिल्में बनाने तक सीमित नहीं था। उन्होंने कई कलाकारों को अवसर देकर उनके करियर को नई दिशा दी। निर्माता के रूप में उनकी पहचान ऐसे फिल्मकार की रही, जो दर्शकों की पसंद को अच्छी तरह समझते थे। बाद में उन्होंने फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई और फिल्म उद्योग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई।

    उनके निधन के साथ हिंदी सिनेमा ने एक ऐसे निर्माता को खो दिया है, जिसने न केवल कई सफल फिल्मों का निर्माण किया बल्कि नए कलाकारों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। गोविंदा से जुड़ा यह किस्सा उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण और प्रतिभा पहचानने की क्षमता का एक यादगार उदाहरण माना जाता है।

  • अधूरा सच और सुर्खियां: रणवीर सिंह से बैन हटने के बाद फेडरेशन ने कंगना रनौत के दावों को बताया बेबुनियाद

    अधूरा सच और सुर्खियां: रणवीर सिंह से बैन हटने के बाद फेडरेशन ने कंगना रनौत के दावों को बताया बेबुनियाद


    नई दिल्ली। फिल्म ‘डॉन 3’ को लेकर अभिनेता रणवीर सिंह और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) के बीच उपजा गतिरोध भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन इस विवाद ने मनोरंजन उद्योग के भीतर एक नई वैचारिक जंग को जन्म दे दिया है। फेडरेशन द्वारा रणवीर सिंह पर से प्रतिबंध हटाने की घोषणा के तुरंत बाद ही अभिनेत्री और राजनेता कंगना रनौत तथा FWICE के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। पूरा मामला उस समय गरमा गया जब कंगना रनौत ने एक सार्वजनिक मंच से इस पूरे विवाद पर टिप्पणी की, जिसके जवाब में अशोक पंडित ने उन पर तथ्यों को जाने बिना केवल सुर्खियां बटोरने के लिए बयान देने का गंभीर आरोप लगाया है।

    दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ जब कंगना रनौत अपनी आगामी फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ के ट्रेलर लॉन्च कार्यक्रम में शामिल हुईं। वहां जब मीडिया ने उनसे रणवीर सिंह पर लगे प्रतिबंध को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने रणवीर का खुलकर समर्थन किया। कंगना ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा कि जब किसी व्यक्ति का कद और हैसियत बढ़ती है, तो उसके दुश्मनों की संख्या भी स्वतः ही बढ़ जाती है। सफलता के मार्ग में विरोधियों का आना स्वाभाविक है। इसके साथ ही उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए दावा किया कि उन्हें भी फिल्म उद्योग के कई धड़ों द्वारा प्रतिबंधित किया जा चुका है। कंगना ने रणवीर सिंह को सांत्वना देते हुए कहा था कि उन्हें इस बात से खुश होना चाहिए कि उनका कद अब इतना बड़ा हो चुका है कि लोग उनके खिलाफ खड़े हो रहे हैं।

    कंगना रनौत के इस बयान पर फिल्म उद्योग के कामगारों और तकनीशियनों की सबसे बड़ी संस्था FWICE के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने एक साक्षात्कार के दौरान कंगना को सीधे तौर पर आड़े हाथों लेते हुए कहा कि फिल्म बिरादरी के कुछ लोग बिना सोचे-समझे और बिना जमीनी सच्चाई को जाने केवल समाचारों में बने रहने के लिए गैर-जिम्मेदाराना प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कंगना के दावों का खंडन करते हुए अशोक पंडित ने अत्यंत सख्त शब्दों में कहा कि फेडरेशन किसी दुर्भावना के तहत कार्रवाई नहीं करता। उन्होंने कहा कि यदि कंगना को प्रतिबंधित किया गया था, तो उसकी वजह उनकी बेवजह की बयानबाजी थी, न कि उनका बढ़ता हुआ कद। उन्होंने साफ किया कि संगठन को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्या राय रखता है, क्योंकि फेडरेशन के सामने उद्योग से जुड़े हजारों दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का भविष्य होता है।

    इस दौरान अशोक पंडित ने फेडरेशन के रुख को पूरी तरह से स्पष्ट करते हुए कहा कि संस्था का उद्देश्य कभी भी रणवीर सिंह को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना या प्रताड़ित करना नहीं था। उन्होंने पूरे मामले की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए बताया कि यह विवाद मूल रूप से आगामी फिल्म ‘डॉन 3’ से जुड़ा था, जिसके निर्माता-निर्देशक फरहान अख्तर ने फेडरेशन में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, रणवीर सिंह के अचानक इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट से अलग होने के कारण निर्माताओं को भारी वित्तीय क्षति का सामना करना पड़ा था। इसी शिकायत और आर्थिक नुकसान के तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए FWICE ने अभिनेता के खिलाफ असहयोग निर्देश जारी किया था।

    अशोक पंडित के मुताबिक, ऐसे बड़े विवादों का नकारात्मक असर केवल मुख्य अभिनेताओं पर नहीं पड़ता, बल्कि उस फिल्म से जुड़े सैकड़ों छोटे तकनीशियनों, दैनिक कामगारों और सह-कलाकारों के रोजगार पर भी पड़ता है। इसलिए फेडरेशन का कोई भी कदम किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि संपूर्ण फिल्म उद्योग के व्यावसायिक अनुशासन और सामूहिक हितों की रक्षा के लिए उठाया जाता है। बहरहाल, बुधवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से फेडरेशन ने रणवीर सिंह के खिलाफ जारी अपने सभी निर्देशों को आधिकारिक तौर पर वापस ले लिया है, जिससे ‘डॉन 3’ से जुड़ा विवाद तो सुलझ गया है, लेकिन कंगना और अशोक पंडित के बीच शुरू हुआ यह नया वाकयुद्ध आने वाले दिनों में और गहराने की आशंका है।

  • परदे पर परफेक्ट शॉट के लिए जब पिता ने भुला दिया रिश्ता: 'गदर' के क्लाइमेक्स में अनिल शर्मा ने दांव पर लगा दी थी बेटे उत्कर्ष की जान

    परदे पर परफेक्ट शॉट के लिए जब पिता ने भुला दिया रिश्ता: 'गदर' के क्लाइमेक्स में अनिल शर्मा ने दांव पर लगा दी थी बेटे उत्कर्ष की जान

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जिनके दृश्य दर्शकों के जहन में हमेशा के लिए दर्ज हो जाते हैं, लेकिन उन दृश्यों को परदे पर जीवंत करने के लिए पर्दे के पीछे जो खतरे उठाए जाते हैं, वे अक्सर हैरान करने वाले होते हैं। ऐसा ही एक बेहद भावुक और खौफनाक किस्सा साल २००१ में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘गदर: एक प्रेम कथा’ के सेट से सामने आया है। फिल्म के निर्देशक अनिल शर्मा ने खुद इस बात का खुलासा किया है कि फिल्म के एक मुख्य और बेहद खतरनाक स्टंट सीन को फिल्माते समय उन्होंने निर्देशक के दायित्व को पूरा करने के लिए अपने ही सगे बेटे उत्कर्ष शर्मा की जान को दांव पर लगा दिया था। उत्कर्ष ने इस फिल्म में सनी देओल और अमीषा पटेल के बेटे ‘चरणजीत’ की भूमिका निभाई थी।

    यह पूरा घटनाक्रम फिल्म के उस मशहूर क्लाइमेक्स सीन की शूटिंग के दौरान का है, जिसमें मुख्य किरदार तारा सिंह अपने परिवार की रक्षा करते हुए पाकिस्तान से भारत की सीमा की तरफ भाग रहा होता है। इस पूरे दृश्य को किसी स्टूडियो में नहीं, बल्कि वास्तव में एक चलती हुई ट्रेन के ऊपर फिल्माया जा रहा था। सीन की मांग यह थी कि जब ट्रेन लगभग ४० किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही हो, तब अभिनेता सनी देओल अपने पांच वर्षीय बाल कलाकार बेटे उत्कर्ष शर्मा को अपने मजबूत कंधों पर बैठाकर ट्रेन की एक बोगी से दूसरी बोगी पर छलांग लगाएंगे। एक पिता होने के नाते अनिल शर्मा के लिए यह निर्णय बेहद आत्मघाती और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाला था, परंतु फिल्म को वास्तविक और प्रभावशाली बनाने के चक्कर में उन्होंने यह बड़ा जोखिम मोल ले लिया।

    शूटिंग के उन खौफनाक पलों को याद करते हुए अनिल शर्मा ने बताया कि जब यह शॉट चल रहा था, तब उनके भीतर का पिता इतना डर गया था कि उन्होंने डर के मारे अपनी आंखें पूरी तरह बंद कर ली थीं। उनके दिमाग में लगातार अनहोनी की आशंकाएं तैर रही थीं और वह सिर्फ भगवान से अपने बच्चे की सलामती की प्रार्थना कर रहे थे। जब तक ट्रेन के रुकने की आवाज उनके कानों में नहीं पड़ती थी, वह अपनी आंखें खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे। निर्देशक ने इसे अपने पूरे फिल्मी सफर का सबसे मुश्किल और तनावपूर्ण शॉट करार दिया। उन्होंने आत्मग्लानि भरे स्वर में कहा कि आज भी जब वह पीछे मुड़कर देखते हैं, तो खुद से यही सवाल पूछते हैं कि यदि उस वक्त कोई छोटी सी चूक हो जाती या संतुलन बिगड़ जाता, तो क्या होता। उन्होंने माना कि सब कुछ सनी देओल के भरोसे छोड़कर उन्होंने बहुत बड़ा जुआ खेला था।

    इस जानलेवा रिस्क और कलाकारों की कड़ी मेहनत का नतीजा यह हुआ कि फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए। मात्र १८ करोड़ रुपये के सीमित बजट में बनी ‘गदर’ ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर ७७ करोड़ रुपये और वैश्विक स्तर पर १३३ करोड़ रुपये की ऐतिहासिक कमाई की थी। इस फिल्म की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके ५.६ करोड़ से अधिक टिकट बिके थे, जो भारतीय सिनेमा में एक रिकॉर्ड है। मध्य प्रदेश सहित पूरे देश के सिनेमाघरों में इस फिल्म को देखने के लिए ट्रकों में भरकर लोग आए थे। इसी ऐतिहासिक सफलता को दोहराने के लिए २२ साल बाद साल २०२३ में अनिल शर्मा इसका सीक्वल ‘गदर २’ लेकर आए, जिसमें अब बड़े हो चुके उत्कर्ष शर्मा मुख्य भूमिका में नजर आए और इस सीक्वल ने भी दुनिया भर में ६९१ करोड़ रुपये कमाकर इतिहास रच दिया, लेकिन इस सफलता की नींव में पिता का वो खौफनाक समझौता हमेशा छिपा रहेगा।

  • आयकर विभाग की कार्रवाई और अभिनेत्री माला सिन्हा के विवादित अदालती कबूलनामे की इनसाइड स्टोरी

    आयकर विभाग की कार्रवाई और अभिनेत्री माला सिन्हा के विवादित अदालती कबूलनामे की इनसाइड स्टोरी

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर में अपनी बेहतरीन अदाकारी और सुरीले गीतों से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली शीर्ष अभिनेत्री माला सिन्हा का फिल्मी सफर जितना चमकदार रहा, उनके जीवन का एक कानूनी विवाद उतना ही अंधकारमय और चौंकाने वाला साबित हुआ। ‘प्यासा’ और ‘नया जमाना’ जैसी कल्ट क्लासिक फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाने वाली माला सिन्हा को साल १९७८ में एक ऐसे प्रशासनिक और कानूनी संकट का सामना करना पड़ा, जिसने उनके पूरे करियर की दिशा ही बदल दी। तत्कालीन समय में जब वह सफलता के शिखर पर थीं, तब आयकर विभाग की एक औचक कार्रवाई ने मनोरंजन जगत सहित पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था। विभाग को अभिनेत्री द्वारा बड़े पैमाने पर कर चोरी और अवैध धन संचय की गुप्त सूचना मिली थी।

    आयकर विभाग की टीम ने जब माला सिन्हा के मुंबई स्थित निवास स्थान पर व्यापक छापेमारी की, तो तलाशी के दौरान घर के बाथरूम से १२ लाख रुपये की भारी-भरकम नकदी बरामद की गई। आज के दौर में यह रकम भले ही सामान्य लगे, परंतु सत्तर के दशक के उत्तरार्ध में यह एक बेहद विशाल धनराशि मानी जाती थी, जिसे छुपा कर रखा गया था। इस काली कमाई की बरामदगी के बाद विभाग ने कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू की और यह मामला अंततः देश की प्रतिष्ठित अदालत के समक्ष पहुंच गया। अभिनेत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस बात की थी कि वह इतनी बड़ी नकदी के वैध स्रोत को साबित करें, अन्यथा सरकार द्वारा इस पूरी संपत्ति को हमेशा के लिए जब्त कर लिया जाता।

    अदालती कार्यवाही के दौरान एक ऐसा मोड़ आया जिसने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर लीं। कानूनी विशेषज्ञों और अपने पिता अल्बर्ट सिन्हा की रणनीतिक सलाह के जाल में फंसकर अभिनेत्री ने अपनी संपत्ति को जब्ती से बचाने के लिए अदालत के सामने एक बेहद विवादास्पद और आत्मघाती बयान दे दिया। उन्होंने धन के स्रोत को न्यायसंगत ठहराने के लिए अदालत में कहा कि यह पूरी धनराशि उन्होंने वेश्यावृत्ति के माध्यम से अर्जित की है। इस अप्रत्याशित और सनसनीखेज बयान के आते ही समाज और सिनेमाई गलियारों में भूचाल आ गया। कल तक जिस अभिनेत्री की शालीनता और अभिनय के लोग कसीदे पढ़ते थे, वह अचानक ही देश भर की नजरों में एक नकारात्मक छवि के रूप में स्थापित हो गईं।

    यद्यपि कानूनी दांवपेंच के तहत दिए गए इस बयान के पीछे का मुख्य उद्देश्य केवल अपनी धनराशि को वापस पाना और सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराना था, परंतु इसका सामाजिक और व्यावसायिक परिणाम बेहद घातक सिद्ध हुआ। बाद में माला सिन्हा ने सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण भी दिया कि उन्होंने अदालत में केवल पैसा बचाने के लिए अपने वकील के कहे अनुसार झूठ बोला था, लेकिन तब तक तीर कमान से छूट चुका था। इस एक घटना ने उनकी छवि को इतनी गहरी ठेस पहुंचाई कि फिल्म निर्माताओं ने उनसे दूरी बना ली और उनका स्थापित करियर पूरी तरह से ढलान पर आ गया।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में आज भी सिनेमा के इतिहास को जानने वाले इस घटनाक्रम को एक सबक के रूप में याद करते हैं कि कैसे एक गलत कानूनी परामर्श और वित्तीय अनियमितता किसी भी बड़े सितारे के पूरे जीवन की मेहनत को पल भर में मटियामेट कर सकती है। माला सिन्हा वर्तमान में ८९ वर्ष की आयु में एकाकी जीवन व्यतीत कर रही हैं, जबकि उनके पति चिदंबर प्रसाद लोहानी का साल २०२४ में निधन हो चुका है। उनकी बेटी प्रतिभा सिन्हा ने भी नब्बे के दशक में ‘राजा हिंदुस्तानी’ के प्रसिद्ध गीत ‘परदेसी जाना नहीं’ से लोकप्रियता हासिल करने के बाद फिल्म उद्योग से पूरी तरह दूरी बना ली थी। यह ऐतिहासिक घटना आज भी बॉलीवुड के इतिहास में वित्तीय जांच और सेलिब्रिटी साख के पतन का सबसे बड़ा उदाहरण मानी जाती है।

  • शिल्पा शिंदे के खुलासे पर हिना खान ने गरिमा और न्याय प्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

    शिल्पा शिंदे के खुलासे पर हिना खान ने गरिमा और न्याय प्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली। टेलीविजन उद्योग में उस वक्त एक नया विवाद खड़ा हो गया जब अभिनेत्री शिल्पा शिंदे ने सालों पुराने अपने एक गंभीर आरोप को महज एक पैंतरा स्वीकार कर लिया। शिल्पा शिंदे ने हाल ही में यह चौंकाने वाला खुलासा किया कि सुपरहिट धारावाहिक ‘भाभी जी घर पर हैं’ के निर्माता संजय कोहली पर उनके द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठे थे। इस अप्रत्याशित कबूलनामे के बाद मनोरंजन जगत में नैतिकता और न्याय प्रणाली को लेकर नई बहस छिड़ गई है। शिल्पा के इस बयान पर उनकी समकालीन अभिनेत्री और ‘बिग बॉस’ में सह-प्रतिभागी रहीं हिना खान ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। हिना खान ने इस पूरे मामले को बेहद शर्मनाक और संवेदनशील मुद्दों का मजाक उड़ाने वाला बताया है।

    हिना खान ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी गहरी नाराजगी और असहमति व्यक्त करते हुए कहा कि यद्यपि वह आमतौर पर उन मामलों में हस्तक्षेप करने से बचती हैं जिनसे उनका सीधा सरोकार नहीं होता, परंतु इस संवेदनशील विषय पर चुप रहना उन्हें स्वीकार्य नहीं लगा। हिना ने अपने वक्तव्य में साफ किया कि किसी विवाद या आपसी मतभेद को जीतने के लिए महिला होने का अनुचित लाभ उठाना और किसी व्यक्ति की सामाजिक छवि को धूमिल करना बेहद घृणास्पद कृत्य है। उन्होंने कहा कि वास्तविक मामलों में न्याय की गुहार लगाना हर पीड़ित का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन व्यक्तिगत लाभ या सौदेबाजी के लिए गंभीर कानूनी धाराओं का दुरुपयोग करना उन वास्तविक पीड़ितों के संघर्ष को कमजोर करता है जो न्याय के लिए सालों-साल कानूनी लड़ाई लड़ते हैं।

    इस पूरे प्रकरण में हिना खान ने आरोपी बनाए गए निर्माता संजय कोहली और उनके परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। हिना के अनुसार, असली पीड़ित वह प्रतिष्ठित निर्माता और उनका परिवार है, जिसने सालों तक समाज में इस झूठे आरोप का दंश झेला है। उन्होंने संजय कोहली को एक बेहद कर्मठ और सम्मानित निर्माता बताया जो उद्योग में लंबे समय से सक्रिय हैं। हिना ने चिंता जताते हुए कहा कि जिस व्यक्ति पर एक महिला ने इतना बड़ा और झूठा लांछन लगाया, अंततः उसी कानून और व्यवस्था की कमियों का फायदा उठाकर मामले को कोर्ट के बाहर रफा-दफा कर दिया गया।

    हिना खान ने मनोरंजन उद्योग के कुछ फैसलों पर भी हैरानी जताई कि इस प्रकार के गंभीर और बेबुनियाद आरोप लगाने के बाद भी उसी अभिनेत्री को दोबारा काम के अवसर और पहचान के नए मंच दिए गए। हिना ने इसे पूरी व्यवस्था और उद्योग के आत्मसम्मान पर एक बड़ा सवालिया निशान बताया है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होती है, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा। उल्लेखनीय है कि हिना खान और शिल्पा शिंदे का इतिहास पुराना रहा है और दोनों ‘बिग बॉस 11’ के ग्रैंड फिनाले में एक-दूसरे के कड़े प्रतिद्वंद्वी के रूप में नजर आई थीं, जहां शिल्पा विजेता चुनी गई थीं। वर्तमान में शिल्पा शिंदे के इस कबूलनामे और हिना खान के इस तीखे विरोध ने कॉर्पोरेट जगत और मनोरंजन उद्योग में कार्यस्थल की सुरक्षा और आंतरिक अनुशासन समिति की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।