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  • राजामौली की फिल्म के लिए शाहरुख ने खुद बढ़ाया था मदद का हाथ, हिंदी दर्शकों के बीच पहचान बनने से पहले का है किस्सा

    राजामौली की फिल्म के लिए शाहरुख ने खुद बढ़ाया था मदद का हाथ, हिंदी दर्शकों के बीच पहचान बनने से पहले का है किस्सा

    नई दिल्ली । एसएस राजामौली आज भारतीय सिनेमा के उन निर्देशकों में शामिल हैं, जिनकी फिल्मों का इंतजार देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में किया जाता है। उनकी कहानी कहने की शैली और बड़े स्तर पर फिल्म बनाने के तरीके ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है। हालांकि, करियर के एक दौर में हिंदी दर्शकों के बीच उनका नाम आज जितना जाना-पहचाना नहीं था। उसी समय शाहरुख खान से जुड़ी एक घटना राजामौली के लिए बेहद यादगार बन गई थी।

    यह किस्सा उस समय का है, जब राजामौली अपनी फिल्म ‘ईगा’ को हिंदी दर्शकों तक ‘मक्खी’ नाम से पहुंचाने की तैयारी कर रहे थे। फिल्म के प्रचार के सिलसिले में वह कई लोगों से मुलाकात कर रहे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात शाहरुख खान से हुई। शाहरुख उनकी पिछली फिल्म ‘मगधीरा’ देख चुके थे और उन्होंने राजामौली से उनके काम तथा नई फिल्म के बारे में बातचीत की।

    राजामौली ने बताया था कि शाहरुख ने उनसे पूछा कि वह उस समय क्या कर रहे हैं। जब उन्होंने बताया कि वह ‘मक्खी’ के प्रचार में व्यस्त हैं, तो शाहरुख ने बिना किसी आग्रह के फिल्म के बारे में लोगों को बताने का फैसला किया। उन्होंने खुद फिल्म को लेकर संदेश साझा किया और दर्शकों से इसे देखने की अपील की।

    शाहरुख ने ‘मक्खी’ को राजामौली की बनाई एक मौलिक फिल्म बताते हुए उसकी रिलीज की जानकारी दी थी। उन्होंने दर्शकों को परिवार और बच्चों के साथ फिल्म देखने के लिए प्रोत्साहित किया था। साथ ही उन्होंने राजामौली और उनकी पूरी टीम को शुभकामनाएं भी दी थीं।

    राजामौली के लिए यह पहल इसलिए खास थी क्योंकि उस समय वह हिंदी फिल्म दर्शकों के बीच बहुत बड़ा नाम नहीं थे। ऐसे दौर में एक बड़े सितारे का उनकी फिल्म के बारे में खुद आगे आकर बात करना उनके लिए निश्चित तौर पर यादगार अनुभव बना। राजामौली ने इस घटना को शाहरुख के सहज और सहयोगी स्वभाव से जोड़कर याद किया था।

    इस घटना के बाद राजामौली ने शाहरुख के प्रति अपना आभार भी जाहिर किया था। उन्होंने कहा था कि किसी ऐसे व्यक्ति की मदद करना, जिसे उस समय हिंदी दर्शक बहुत ज्यादा नहीं जानते थे, शाहरुख के व्यक्तित्व की खासियत को दिखाता है। राजामौली के मन में इस घटना की याद लंबे समय तक बनी रही।

    राजामौली ने शाहरुख के साथ काम करने की इच्छा को लेकर भी सम्मान जाहिर किया था। उनका मानना था कि देश का कोई भी निर्देशक उनके साथ काम करना चाहेगा। उनके लिए शाहरुख केवल एक बड़े अभिनेता नहीं, बल्कि ऐसा व्यक्ति भी हैं जो दूसरे कलाकारों और फिल्मकारों के काम को पहचानने तथा प्रोत्साहित करने की क्षमता रखते हैं।

    राजामौली के करियर में इसके बाद कई बड़े पड़ाव आए और उनकी फिल्मों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। फिलहाल वह अपनी आगामी फिल्म ‘वाराणसी’ को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म में महेश बाबू मुख्य भूमिका में नजर आएंगे, जबकि प्रियंका फीमेल लीड भूमिका निभा रही हैं।

    राजामौली और शाहरुख से जुड़ा यह पुराना किस्सा बताता है कि किसी कलाकार के करियर के शुरुआती दौर में मिला छोटा सा प्रोत्साहन भी उसके लिए लंबे समय तक यादगार रह सकता है। शाहरुख की वह पहल राजामौली के लिए ऐसी ही एक खास याद बन गई, जिसे वह आज भी सम्मान के साथ याद करते हैं।

  • 2500 रुपये से शुरू हुआ था सफर 91 की उम्र में भी याद किए जाते हैं प्रेम चोपड़ा जानिए खलनायक बनने की दिलचस्प कहानी

    2500 रुपये से शुरू हुआ था सफर 91 की उम्र में भी याद किए जाते हैं प्रेम चोपड़ा जानिए खलनायक बनने की दिलचस्प कहानी


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ कलाकार ऐसे रहे हैं जिनकी पहचान उनके किरदारों से आगे बढ़कर उनकी आवाज और संवादों से भी जुड़ गई। प्रेम चोपड़ा ऐसे ही दिग्गज कलाकार हैं जिन्होंने पर्दे पर खलनायक के किरदारों को एक अलग पहचान दी। 23 सितंबर 1935 को लाहौर में जन्मे प्रेम चोपड़ा अपना 91वां जन्मदिन मना रहे हैं। फिल्मों में उन्होंने भले ही कई तरह के किरदार निभाए लेकिन नकारात्मक भूमिकाओं ने उन्हें दर्शकों के बीच ऐसी पहचान दिलाई जिसे आज भी याद किया जाता है। हालांकि बॉलीवुड तक पहुंचने की उनकी राह आसान नहीं थी। वह मुंबई हीरो बनने का सपना लेकर पहुंचे थे लेकिन शुरुआत एक अखबार की नौकरी से करनी पड़ी।

    प्रेम चोपड़ा का बचपन शिमला में बीता। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। उनके पिता चाहते थे कि बेटा डॉक्टर या आईएएस अधिकारी बने लेकिन प्रेम चोपड़ा का मन अभिनय की दुनिया में था। मुंबई पहुंचने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि फिल्मी दुनिया में जगह बनाना आसान नहीं है। आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने एक अखबार के सर्कुलेशन विभाग में नौकरी शुरू कर दी। इस नौकरी के दौरान उन्हें बंगाल उड़ीसा और बिहार जैसे इलाकों में अखबार के वितरण का काम देखना पड़ता था। उनके काम में लगातार यात्राएं शामिल थीं और महीने के करीब 20 दिन उन्हें दौरे पर रहना पड़ता था।

    अभिनेता बनने का सपना हालांकि उन्होंने नौकरी के बीच भी नहीं छोड़ा। वह अपने दौरे जल्द पूरा करने की कोशिश करते थे ताकि मुंबई लौटकर फिल्म स्टूडियो के चक्कर लगा सकें। इसी संघर्ष के दौरान उनकी किस्मत ने एक दिन नया मोड़ लिया। ट्रेन में सफर करते समय एक पंजाबी फिल्म निर्माता की नजर उन पर पड़ी। निर्माता को प्रेम चोपड़ा का व्यक्तित्व पसंद आया और उन्हें फिल्म चौधरी करनैल सिंह में काम करने का मौका मिल गया। यह उनकी पहली फिल्म थी और बताया जाता है कि इसके लिए उन्हें 2500 रुपये मिले थे। फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला और प्रेम चोपड़ा के अभिनय सफर की शुरुआत हो गई।

    हिंदी फिल्मों में उनका डेब्यू 1960 में मुड़ मुड़ के ना देख से हुआ। शुरुआती दौर में वह मुख्य रूप से अभिनेता के तौर पर अपनी जगह बनाने की कोशिश करते रहे। इसके बाद 1964 में आई फिल्म वो कौन थी में उन्होंने नकारात्मक किरदार निभाया। फिल्म सफल रही और उनके अभिनय पर दर्शकों तथा फिल्म जगत की नजर गई। इसके बाद शहीद तीसरी मंजिल मेरा साया और उपकार जैसी फिल्मों में उनके खलनायक वाले किरदार सामने आए। उपकार के बाद प्रेम चोपड़ा को लगातार काम मिलने लगा और उन्हें महसूस हुआ कि अब वह मुंबई में अपनी जगह बना चुके हैं।

    उनके करियर का सबसे यादगार पड़ाव 1973 में आई राज कपूर की फिल्म बॉबी रही। फिल्म में उनका किरदार बहुत बड़ा नहीं था लेकिन एक छोटा सा संवाद उनकी पहचान का स्थायी हिस्सा बन गया। संवाद था प्रेम नाम है मेरा प्रेम चोपड़ा। फिल्म रिलीज होने के बाद यह संवाद इतना लोकप्रिय हुआ कि प्रेम चोपड़ा का नाम ही इसके साथ जुड़ गया। आगे चलकर यही संवाद उनकी आत्मकथा के शीर्षक का हिस्सा भी बना।

    प्रेम चोपड़ा ने अपने लंबे करियर में सैकड़ों फिल्मों में काम किया और अलग अलग तरह के किरदार निभाए। हालांकि दर्शकों की याद में उनकी खलनायक वाली छवि सबसे ज्यादा मजबूत रही। उनकी खास संवाद अदायगी और पर्दे पर प्रभावशाली मौजूदगी ने उन्हें हिंदी सिनेमा के यादगार कलाकारों में शामिल कर दिया। 91वें जन्मदिन पर उनके जीवन का यह सफर बताता है कि मुंबई में एक नौकरी करते हुए शुरू हुआ संघर्ष कैसे भारतीय सिनेमा की एक स्थायी पहचान में बदल गया।

  • रानी मुखर्जी की मां कृष्णा मुखर्जी का 75 साल की उम्र में निधन, परिवार ने की निजता का सम्मान करने की अपील

    रानी मुखर्जी की मां कृष्णा मुखर्जी का 75 साल की उम्र में निधन, परिवार ने की निजता का सम्मान करने की अपील

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी की मां कृष्णा मुखर्जी का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने मंगलवार दोपहर आखिरी सांस ली। उनके निधन की जानकारी परिवार की ओर से दी गई है। परिवार ने इस मुश्किल समय में लोगों से निजता का सम्मान करने की अपील की है।

    कृष्णा मुखर्जी के निधन की खबर सामने आने के बाद रानी मुखर्जी के प्रशंसकों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों के बीच शोक की लहर है। रानी अपनी मां के बेहद करीब थीं और दोनों के बीच गहरा भावनात्मक रिश्ता था। कृष्णा अक्सर बेटी के साथ सार्वजनिक मौकों पर नजर आती थीं और उनके करियर में भी उनका लगातार साथ रहा।

    कृष्णा मुखर्जी के निधन की पुष्टि रानी मुखर्जी के पति आदित्य चोपड़ा की कंपनी की ओर से की गई। जानकारी के अनुसार, कृष्णा ने मंगलवार दोपहर दुनिया को अलविदा कहा। परिवार ने लोगों से अपील की है कि इस कठिन समय में उन्हें निजी समय दिया जाए। परिवार की ओर से मिले प्यार और प्रार्थनाओं के लिए भी आभार जताया गया है।

    हालांकि, कृष्णा मुखर्जी के निधन की वजह अभी सामने नहीं आई है। परिवार की ओर से भी उनकी मौत के कारण को लेकर कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में फिलहाल उनके निधन की परिस्थितियों के बारे में किसी तरह की पुष्टि नहीं हुई है।

    कृष्णा मुखर्जी का फिल्मों से पुराना जुड़ाव रहा था। उन्होंने फिल्म निर्माता राम मुखर्जी से शादी की थी। कृष्णा ने अभिनय के क्षेत्र में काम नहीं किया, लेकिन बंगाली सिनेमा से उनका नाता रहा। उन्होंने कई बंगाली फिल्मों के लिए प्लेबैक सिंगर के तौर पर अपनी आवाज दी थी।

    रानी मुखर्जी अपने माता-पिता दोनों से बेहद जुड़ी हुई थीं। उनके पिता राम मुखर्जी का निधन वर्ष 2017 में हुआ था। राम मुखर्जी फिल्म निर्माण से जुड़े हुए थे और बंगाली तथा हिंदी सिनेमा में उनका योगदान रहा। पिता के निधन के बाद कृष्णा मुखर्जी परिवार के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी रहीं।

    रानी मुखर्जी के फिल्मी सफर में भी उनकी मां का खास योगदान रहा। रानी ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत बंगाली सिनेमा से की थी। इसके बाद उन्होंने हिंदी फिल्मों में कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई।

    रानी मुखर्जी ने अपने लंबे करियर में कई चर्चित फिल्मों में काम किया है। इनमें कुछ कुछ होता है, गुलाम, साथिया, हम तुम, ब्लैक और मर्दानी जैसी फिल्में शामिल हैं। अलग-अलग तरह के किरदारों के जरिए उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी खास जगह बनाई।

    रानी मुखर्जी के निजी जीवन में उनकी मां कृष्णा मुखर्जी का हमेशा अहम स्थान रहा। मां-बेटी के इस रिश्ते की झलक कई सार्वजनिक मौकों पर भी देखने को मिलती रही है। कृष्णा अपनी बेटी के काम और उपलब्धियों को लेकर हमेशा साथ खड़ी नजर आती थीं।

    रानी मुखर्जी को आखिरी बार मर्दानी 3 में देखा गया था। अब मां कृष्णा मुखर्जी के निधन के बाद अभिनेत्री और उनका परिवार निजी तौर पर शोक के दौर से गुजर रहा है। परिवार की ओर से लोगों से इस कठिन समय में उनकी निजता का सम्मान करने की अपील की गई है।

  • राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की 72 साल की कहानी, सत्यजीत रे के 36 सम्मान से शबाना आजमी के रिकॉर्ड तक

    राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की 72 साल की कहानी, सत्यजीत रे के 36 सम्मान से शबाना आजमी के रिकॉर्ड तक

    नई दिल्ली ।राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भारतीय सिनेमा के सबसे महत्वपूर्ण सम्मानों में शामिल हैं। 1954 में शुरू हुई इस पुरस्कार व्यवस्था ने सात दशकों से अधिक समय में फिल्मों, कलाकारों, निर्देशकों और तकनीकी विशेषज्ञों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी है। 22 सितंबर 2026 को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन गुजरात के एकता नगर में हो रहा है। यह पहली बार है जब यह समारोह दिल्ली से बाहर आयोजित किया जा रहा है।

    राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की शुरुआत 1954 में हुई थी। उस समय 1953 में रिलीज हुई फिल्मों को सम्मान के लिए चुना गया था। देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे और सूचना एवं प्रसारण मंत्री बीवी केसकर थे। शुरुआत में इन पुरस्कारों को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार नहीं, बल्कि स्टेट अवॉर्ड फॉर फिल्म के नाम से जाना जाता था।

    इससे पहले 1949 में भारत सरकार ने फिल्म जांच समिति का गठन किया था। समिति का उद्देश्य भारतीय फिल्म उद्योग की स्थिति, फिल्मों की गुणवत्ता और उनके सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव का अध्ययन करना था। समिति की सिफारिशों के बाद फिल्मों को सरकारी स्तर पर सम्मान देने की व्यवस्था शुरू की गई।

    शुरुआती दौर में पुरस्कार मुख्य रूप से फीचर फिल्म, डॉक्यूमेंट्री और बच्चों की फिल्मों पर केंद्रित थे। उस समय कलाकारों के लिए अलग-अलग पुरस्कार नहीं दिए जाते थे। शुरुआत से ही अलग-अलग भारतीय भाषाओं की फिल्मों को इसमें जगह देने की नीति अपनाई गई। यही व्यवस्था आगे चलकर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की प्रमुख विशेषता बनी।

    पहला पुरस्कार समारोह 10 अक्टूबर 1954 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हुआ था। सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का सम्मान मराठी फिल्म श्यामची आई को मिला था। सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फिल्म का पुरस्कार महाबलीपुरम को दिया गया। दो बीघा जमीन और भगवान श्रीकृष्ण चैतन्य को भी ऑल इंडिया सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट से सम्मानित किया गया था। बच्चों की फिल्म खेला घर को भी सम्मान मिला था।

    कलाकारों और तकनीशियनों के लिए अलग पुरस्कारों की शुरुआत 1967 में रिलीज फिल्मों के लिए हुई और 1968 में विजेताओं को सम्मानित किया गया। उत्तम कुमार पहले सर्वश्रेष्ठ अभिनेता बने, जबकि नरगिस दत्त पहली सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री चुनी गईं। उस समय इन पुरस्कारों को भारत अवॉर्ड और उर्वशी अवॉर्ड कहा जाता था।

    1969 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार शुरू हुआ और देविका रानी इसकी पहली प्राप्तकर्ता बनीं। 1973 से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के प्रशासन की जिम्मेदारी डायरेक्टरेट ऑफ फिल्म फेस्टिवल ने संभाली। 2022 में इसके पुनर्गठन के दौरान इसका राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम में विलय कर दिया गया।

    समय के साथ पुरस्कारों का दायरा भी बढ़ता गया। सिनेमैटोग्राफी, एडिटिंग, संगीत, प्लेबैक सिंगिंग, स्क्रीनप्ले, कॉस्ट्यूम, मेकअप, साउंड, कोरियोग्राफी, स्टंट और विजुअल इफेक्ट्स जैसे क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया गया।

    अभिनय की श्रेणी में शबाना आजमी ने पांच बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीतकर रिकॉर्ड बनाया है। उन्हें अंकुर, अर्थ, खंडहर, पार और गॉडमदर के लिए सम्मान मिला। सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में अमिताभ बच्चन ने चार पुरस्कार जीते हैं, जबकि ममूटी ने ब्रमायुगम के लिए अपना चौथा राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल किया।

    प्लेबैक गायन में के. जे. येसुदास के नाम आठ राष्ट्रीय पुरस्कार हैं। संगीतकार ए. आर. रहमान ने सात राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते हैं। महान फिल्मकार सत्यजीत रे के नाम भी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में 36 सम्मानों का उल्लेख किया जाता है। उनके योगदान ने भारतीय सिनेमा को देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अलग पहचान दिलाई।

    राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का उद्देश्य केवल फिल्मों को सम्मान देना नहीं रहा है। इनका लक्ष्य कलात्मक और तकनीकी उत्कृष्टता वाली फिल्मों को प्रोत्साहित करना तथा भारत की विविध संस्कृतियों और भाषाओं को राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराना भी रहा है।

  • मनोज बाजपेयी पहुंचे दिल्ली हाई कोर्ट, एआई से आवाज और पहचान के इस्तेमाल को लेकर उठाया पर्सनैलिटी राइट्स का मुद्दा

    मनोज बाजपेयी पहुंचे दिल्ली हाई कोर्ट, एआई से आवाज और पहचान के इस्तेमाल को लेकर उठाया पर्सनैलिटी राइट्स का मुद्दा


    नई दिल्ली ।
    अभिनेता मनोज बाजपेयी ने अपनी पहचान, आवाज, छवि और व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। 57 वर्षीय अभिनेता ने सोमवार को अदालत में पर्सनैलिटी राइट्स यानी व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा की मांग की। उनका आरोप है कि उनकी पहचान से जुड़े पहलुओं का उनकी अनुमति के बिना इस्तेमाल किया जा रहा है।

    मामले में अभिनेता की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि उनके जैसे दिखने वाले रूप का इस्तेमाल उत्पादों के प्रचार के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तकनीक के जरिए उनकी आवाज और व्यक्तित्व से जुड़े पहलुओं को दोबारा तैयार किए जाने का आरोप लगाया गया है।

    मामला दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति पुरुशेंद्र कुमार कौरव के सामने सुनवाई के लिए आया। अभिनेता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता स्वाति सुकुमार ने अदालत में पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़े कई पहलुओं पर ध्यान दिया गया।

    मामले में H2PG Designs Private Limited का नाम भी सामने आया। अभिनेता की ओर से आरोप लगाया गया कि कंपनी उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल इस तरह कर रही थी, जिससे यह प्रतीत होता है कि उन्होंने कंपनी द्वारा तैयार किए गए सूट पहने हैं। इस तरह उनकी छवि का व्यावसायिक इस्तेमाल किए जाने पर आपत्ति जताई गई है।

    एक अन्य मामले में कथित तौर पर एआई तकनीक के जरिए अभिनेता की आवाज तैयार किए जाने का मुद्दा उठाया गया। अभिनेता की ओर से कहा गया कि उनकी आवाज और व्यक्तित्व की पहचान से जुड़े पहलुओं को बिना अनुमति दोबारा तैयार कर इस्तेमाल किया जा रहा है।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने क्षेत्राधिकार यानी ज्यूरिस्डिक्शन का सवाल भी उठाया। न्यायमूर्ति कौरव ने पूछा कि जब मनोज बाजपेयी मुख्य रूप से मुंबई में रहते हैं, तो उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख क्यों किया। इस पर उनकी ओर से बताया गया कि मामले में कुछ आरोपी दिल्ली में मौजूद हैं। इसी आधार पर अदालत के समक्ष याचिका लाई गई है।

    पर्सनैलिटी राइट्स का संबंध किसी व्यक्ति की पहचान से जुड़े ऐसे पहलुओं से है, जिनमें उसकी तस्वीर, आवाज, नाम, पहचान और सार्वजनिक छवि शामिल हो सकती है। मशहूर हस्तियों के मामले में इन अधिकारों का व्यावसायिक इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दा बन चुका है।

    दिल्ली हाई कोर्ट पहले भी कई प्रमुख कलाकारों और सार्वजनिक हस्तियों से जुड़े पर्सनैलिटी राइट्स मामलों में आदेश पारित कर चुका है। इनमें तब्बू, पवन कल्याण, अल्लू अर्जुन, मोहनलाल, काजोल, आर. माधवन, जूनियर एनटीआर और गायक जुबिन नौटियाल जैसी हस्तियां शामिल हैं।

    इसके अलावा नागार्जुन, ऐश्वर्या राय बच्चन, अभिषेक बच्चन और फिल्म निर्माता करण जौहर से जुड़े मामलों में भी व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा को लेकर अदालत का रुख सामने आ चुका है। इन मामलों में प्रमुख मुद्दा संबंधित हस्तियों की पहचान और छवि के अनधिकृत इस्तेमाल से जुड़ा रहा है।

    अभिनेता सलमान खान भी पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़े एक मामले में अदालत का रुख कर चुके हैं। इससे स्पष्ट है कि मनोरंजन जगत की हस्तियों के नाम, आवाज, तस्वीर और पहचान के व्यावसायिक या डिजिटल इस्तेमाल को लेकर कानूनी विवाद बढ़ रहे हैं।

    मनोज बाजपेयी के मामले में अब अदालत के सामने यह मुद्दा है कि उनकी पहचान और व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों के कथित इस्तेमाल पर किस तरह की कानूनी सुरक्षा दी जा सकती है। विशेष रूप से एआई के जरिए आवाज और व्यक्तित्व की नकल से जुड़े आरोप इस मामले को तकनीक और सेलिब्रिटी अधिकारों के बीच उभरते कानूनी विवाद से जोड़ते हैं।

  • कटरीना कैफ पर टिप्पणी के बाद बदला एजाज वारिस का रुख, सलमान खान की बात सुनकर मांगी सार्वजनिक माफी

    कटरीना कैफ पर टिप्पणी के बाद बदला एजाज वारिस का रुख, सलमान खान की बात सुनकर मांगी सार्वजनिक माफी

    नई दिल्ली ।पाकिस्तानी रेडियो जॉकी एजाज वारिस ने अभिनेत्री कटरीना कैफ के बढ़े हुए वजन को लेकर की गई अपनी टिप्पणी पर माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि बाद में उन्हें महसूस हुआ कि उनकी बातों से अभिनेत्री और उनके प्रशंसकों को ठेस पहुंची होगी। वारिस ने अपनी टिप्पणी पर खेद जताते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी की बॉडी शेमिंग करना नहीं था।

    यह विवाद कटरीना कैफ के हालिया सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आने के बाद शुरू हुआ। नवंबर 2025 में बेटे विहान को जन्म देने के बाद अभिनेत्री अपने पति विक्की कौशल के साथ मुंबई में आयोजित गणेश चतुर्थी समारोह में शामिल हुई थीं। इस दौरान उनके कुछ वीडियो सामने आए, जिनमें उनका वजन पहले की तुलना में बढ़ा हुआ दिखाई दे रहा था।

    इन वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने कटरीना के लुक और वजन को लेकर टिप्पणियां शुरू कर दी थीं। इसी क्रम में एजाज वारिस ने भी अभिनेत्री के वजन को लेकर टिप्पणी की थी। उनकी बातों को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देखने को मिली।

    इसके बाद सलमान खान ने गर्भावस्था के बाद किसी महिला के वजन को लेकर ट्रोल किए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि गर्भवती होने के बाद वजन बढ़ना स्वाभाविक है और जब अभिनेत्री फिल्मों में वापसी करेंगी तो वह दोबारा फिट हो सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कटरीना इस समय अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहती हैं।

    सलमान खान की टिप्पणी के बाद एजाज वारिस ने अपनी कही बातों पर दोबारा विचार करने की बात कही। उन्होंने सोशल मीडिया पर कटरीना कैफ से सीधे माफी मांगी और कहा कि उन्हें अपनी हालिया टिप्पणियों का अफसोस है।

    वारिस ने कहा कि सलमान खान की बात सुनने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि उनकी टिप्पणी से कटरीना और उनके कई प्रशंसकों को दुख पहुंचा होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इरादा बॉडी शेमिंग करने का नहीं था। उन्होंने अभिनेत्री के साथ-साथ सलमान खान और उन सभी लोगों से भी माफी मांगी, जिन्हें उनकी बातों से बुरा लगा।

    आरजे ने यह भी बताया कि उन्होंने सलमान खान का वह वीडियो देखा था, जिसमें अभिनेत्री को ट्रोल करने वालों पर सवाल उठाया गया था। इसके बाद उन्हें लगा कि उन्हें कटरीना के बारे में इस तरह की टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी।

    एजाज वारिस ने कहा कि वह सलमान खान और कटरीना कैफ दोनों के प्रशंसक हैं। उनका कहना है कि रिकॉर्डिंग के दौरान बातचीत किस दिशा में चली गई, इसका उन्हें अंदाजा नहीं रहा और उन्होंने वीडियो को आकर्षक बनाने के लिए मजाक में कुछ बातें कह दी थीं।

    हालांकि, बाद में उन्हें एहसास हुआ कि उन टिप्पणियों का असर अलग तरीके से हुआ और कई लोगों को उनकी बात पसंद नहीं आई। इसी वजह से उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी।

    इस पूरे मामले में कटरीना कैफ की प्रेग्नेंसी के बाद शरीर में आए बदलाव को लेकर सोशल मीडिया पर होने वाली टिप्पणियों का मुद्दा भी सामने आया। अभिनेत्री के कार्यक्रम में नजर आने के बाद उनके लुक को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई थीं। सलमान खान ने ऐसी टिप्पणियों पर सवाल उठाते हुए गर्भावस्था के बाद होने वाले वजन बढ़ने को सामान्य प्रक्रिया बताया।

    एजाज वारिस की माफी के बाद अब विवाद को लेकर उनका रुख स्पष्ट हो गया है। उन्होंने अपनी टिप्पणी को लेकर अफसोस जताया है और कहा है कि आगे ऐसी बातों को लेकर अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।

  • 2026 के आखिरी 3 महीने होंगे धमाकेदार 13 बड़ी फिल्मों की रिलीज डेट आई सामने 24 दिसंबर को किंग

    2026 के आखिरी 3 महीने होंगे धमाकेदार 13 बड़ी फिल्मों की रिलीज डेट आई सामने 24 दिसंबर को किंग


    नई दिल्ली। साल 2026 अपने आखिरी पड़ाव की ओर बढ़ रहा है और इसके साथ ही सिनेमाघरों में फिल्मों की रिलीज का सिलसिला भी तेज होने वाला है। सितंबर से दिसंबर तक कई ऐसी फिल्में दर्शकों के बीच पहुंचने वाली हैं जिनका लंबे समय से इंतजार किया जा रहा है। अलग अलग भाषाओं और अलग अलग जॉनर की इन फिल्मों में बड़े सितारों से लेकर चर्चित निर्देशकों तक की मौजूदगी है। यही वजह है कि आने वाले महीनों को थिएटर लवर्स के लिए बेहद खास माना जा रहा है।

    सितंबर के आखिरी सप्ताह में ही फिल्मों की बड़ी लाइनअप देखने को मिलेगी। 24 सितंबर को नानी की द पैराडाइज रिलीज होने वाली है। श्रीकांत ओडेला के निर्देशन में बनी यह एक्शन पीरियड ड्रामा है जिसमें नानी के साथ मोहन बाबू और सोनाली कुलकर्णी नजर आएंगे। इसी तारीख को हॉलीवुड फिल्म हार्ट ऑफ द बीस्ट भी रिलीज होगी। डेविड आयर के निर्देशन में बनी इस सर्वाइवल थ्रिलर में ब्रैड पिट एक पूर्व नेवी सील अधिकारी की भूमिका में हैं जो अपने मिलिट्री डॉग के साथ अलास्का के जंगलों में मुश्किल परिस्थितियों का सामना करता है।

    24 सितंबर को ही महाकाव्य श्री रामायण कथा श्री राम की भी सिनेमाघरों में दस्तक देगी। यह पौराणिक और भक्ति से जुड़ी फिल्म है जिसमें अंजलि अरोड़ा और देव शर्मा प्रमुख भूमिकाओं में हैं। इसके अगले दिन 25 सितंबर को डोरोथी और द वन फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट रिलीज होंगी। डोरोथी को कार्तिक सुब्बाराज ने निर्देशित किया है जबकि द वन फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट में सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया अहम भूमिकाओं में हैं।

    अक्टूबर में भी दर्शकों के पास कई विकल्प होंगे। 2 अक्टूबर को दृश्यम द कन्क्लूजन रिलीज होने वाली है जिसमें अजय देवगन के साथ श्रिया सरन और इशिता दत्ता नजर आएंगी। इसके अलावा बेल भी इसी दिन रिलीज होगी। इसके बाद 15 अक्टूबर को जेलर 2 आने वाली है जिसमें ऋतिक रोशन विजय सेतुपति और मोहनलाल जैसे कलाकार नजर आएंगे। 16 अक्टूबर को विश्वंभरा और रणबाली की रिलीज प्रस्तावित है। विश्वंभरा में चिरंजीवी और मौनी रॉय प्रमुख भूमिकाओं में हैं जबकि रणबाली में विजय देवरकोंडा रश्मिका मंदाना और अर्नोल्ड वोस्लो दिखाई देंगे।

    नवंबर में फिल्मों का इंतजार और दिलचस्प होने वाला है। 6 नवंबर को नितेश तिवारी की रामायण रिलीज होगी। फिल्म में रणबीर कपूर श्रीराम साई पल्लवी सीता यश रावण और सनी देओल हनुमान की भूमिका में नजर आएंगे। इसी दिन सीन भी रिलीज होगी जिसमें सूर्या सिलंबरासन टीआर और नस्लेन अहम भूमिकाओं में हैं। इसके बाद 27 नवंबर को रश्मिका मंदाना की माइसा रिलीज होगी जिसमें अभिनेत्री योद्धा के किरदार में दिखाई देंगी।

    दिसंबर में भी बड़ी फिल्मों की मौजूदगी रहेगी। 3 दिसंबर को प्रभास की फौजी रिलीज होगी। हनु राघवपुडी के निर्देशन में बनी यह युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित कहानी है। 4 दिसंबर को ईथा रिलीज होगी जो मराठी तमाशा और प्रसिद्ध लावणी कलाकार विठाबाई नारायणगावकर के जीवन से जुड़ी कहानी पर आधारित है। श्रद्धा कपूर और रणदीप हुड्डा इसमें प्रमुख भूमिकाओं में हैं।

    इन सभी फिल्मों के बीच साल की सबसे चर्चित रिलीज में शाहरुख खान की किंग भी शामिल है। यह फिल्म 24 दिसंबर को सिनेमाघरों में आने वाली है। इसमें शाहरुख खान के साथ सुहाना खान दीपिका पादुकोण और अभिषेक बच्चन जैसे कलाकार नजर आएंगे। सिद्धार्थ आनंद के निर्देशन में बन रही इस फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच पहले से ही काफी उत्सुकता है। इस तरह सितंबर से दिसंबर तक लगातार आने वाली फिल्मों की यह लंबी सूची साल के अंतिम महीनों को सिनेमाघरों के लिहाज से खास बना सकती है।

  • अल्लू अर्जुन और एटली की राका का बड़ा धमाका रिलीज से पहले 37 लोगों के मोशन कैप्चर का बनाया रिकॉर्ड

    अल्लू अर्जुन और एटली की राका का बड़ा धमाका रिलीज से पहले 37 लोगों के मोशन कैप्चर का बनाया रिकॉर्ड


    नई दिल्ली। अल्लू अर्जुन और डायरेक्टर एटली की मच अवेटेड फिल्म राका रिलीज से पहले ही बड़ी उपलब्धि हासिल कर चुकी है। फिल्म को लेकर पहले से ही दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है और अब गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने के बाद इसकी चर्चा और तेज हो गई है। राका ने रियल टाइम में सबसे ज्यादा लोगों के मोशन कैप्चर का रिकॉर्ड बनाया है। इस उपलब्धि के तहत एक साथ 37 परफॉर्मर्स के मोशन को कैप्चर किया गया।

    फिल्म के निर्माताओं सन पिक्चर्स ने सोशल मीडिया के जरिए इस खास उपलब्धि की जानकारी साझा की। पोस्ट में अल्लू अर्जुन गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का सर्टिफिकेट हाथ में लिए नजर आए। मेकर्स ने इस उपलब्धि को भारतीय सिनेमा के लिए वैश्विक स्तर पर बड़ी जीत बताया। खास बात यह है कि यह रिकॉर्ड सिर्फ फिल्म की टीम के लिए ही नहीं बल्कि इसके तकनीकी स्तर और बड़े पैमाने पर तैयार किए जा रहे प्रोजेक्ट की ओर भी इशारा करता है।

    गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक रियल टाइम में सबसे ज्यादा लोगों का मोशन कैप्चर करने का यह रिकॉर्ड 15 सितंबर को मुंबई में बनाया गया। इस दौरान कुल 37 लोगों को एक साथ मोशन कैप्चर तकनीक के जरिए रिकॉर्ड किया गया। यह उपलब्धि सन टीवी नेटवर्क लिमिटेड और अरुणकुमार यानी एटली से जुड़ी है और इसे अल्लू अर्जुन की फिल्म राका के लिए अंजाम दिया गया। रिकॉर्ड बनने के बाद अल्लू अर्जुन और एटली को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का सर्टिफिकेट भी मिला।

    राका को लेकर दर्शकों की उत्सुकता फिल्म की पहली झलक सामने आने के बाद से ही बढ़ गई थी। इसी साल अप्रैल में फिल्म का फर्स्ट लुक सामने आया था जिसमें अल्लू अर्जुन का बिल्कुल अलग अंदाज देखने को मिला। अभिनेता के लुक में उनके चेहरे पर काजल और जानवर जैसे पंजे नजर आए थे। उनका यह रूप सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया था। फिल्म के फर्स्ट लुक ने संकेत दे दिया था कि एटली इस बार दर्शकों के सामने कुछ अलग और बड़े पैमाने का सिनेमाई अनुभव पेश करने की तैयारी में हैं।

    राका एटली के लिए भी बेहद खास प्रोजेक्ट है। निर्देशक ने फिल्म के बारे में बात करते हुए बताया था कि यह उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं है बल्कि उनके जीवन और रचनात्मक सफर का एक हिस्सा है। उनके मुताबिक वह इस विचार को करीब 18 वर्षों से अपने साथ लेकर चल रहे हैं और उन्होंने इसे समय के साथ लगातार संजोकर रखा है। एटली ने यह भी संकेत दिया था कि राका उनके लिए केवल एक कहानी नहीं बल्कि लंबे समय से चले आ रहे एक सपने की शुरुआत है।

    अल्लू अर्जुन और एटली पहली बार साथ काम कर रहे हैं। ऐसे में दोनों की जोड़ी को लेकर पहले से ही काफी उम्मीदें हैं। अब रिलीज से पहले गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड मिलने से फिल्म के प्रति उत्सुकता और बढ़ गई है। फिल्म की कहानी और किरदारों से जुड़ी कई जानकारियां अभी सामने आना बाकी हैं लेकिन तकनीकी स्तर पर यह प्रोजेक्ट लगातार सुर्खियां बटोर रहा है। रिकॉर्ड बनने के बाद अब दर्शकों की नजर फिल्म की रिलीज और इसके अगले अपडेट पर टिकी है।

  • 70 की उम्र में मौसमी चटर्जी की बेटी को खास सलाह, बोलीं- बॉयफ्रेंड रखो लेकिन शादी सोच-समझकर करना

    70 की उम्र में मौसमी चटर्जी की बेटी को खास सलाह, बोलीं- बॉयफ्रेंड रखो लेकिन शादी सोच-समझकर करना


    नई दिल्ली। दिग्गज अभिनेत्री मौसमी चटर्जी ने बेहद कम उम्र में फिल्मी दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते अपनी अलग पहचान बना ली। बंगाली फिल्म बालिका वधू से किशोरावस्था में अभिनय की शुरुआत करने वाली मौसमी ने आगे चलकर हिंदी और बंगाली सिनेमा में कई यादगार फिल्मों में काम किया। हालांकि उनका निजी जीवन भी उनके फिल्मी सफर जितना ही दिलचस्प रहा है। कम उम्र में शादी करने वाली मौसमी अब अपनी बेटी और आज की युवा पीढ़ी को रिश्तों तथा शादी को लेकर जल्दबाजी नहीं करने की सलाह देती हैं

    जागरण फिल्म फेस्टिवल 2026 में बातचीत के दौरान मौसमी ने अपनी बेटी मेघा मुखर्जी को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि वह अपनी बेटी से कहती हैं कि जीवन में किसी को पसंद करना या बॉयफ्रेंड होना अलग बात है लेकिन उससे शादी करना जरूरी नहीं है। मौसमी की इस सलाह में रिश्ते को समझने और अपने फैसले खुद लेने पर जोर दिखाई देता है। उन्होंने युवा महिलाओं को सतर्क रहने और परिस्थितियों के अनुसार अपने विवेक से निर्णय लेने की बात भी कही

    मौसमी ने आज की युवा पीढ़ी के तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि समय के साथ समाज काफी बदला है। उनके मुताबिक लड़कियों को बचपन से घर और ससुराल की जिम्मेदारियों के बारे में बताया जाता है लेकिन लड़कों को भी घरेलू जिम्मेदारियों के लिए तैयार किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि जीवन में अपनी पसंद के काम करने चाहिए लेकिन किसी भी चीज की अति नहीं होनी चाहिए। गलती हो जाए तो उससे सीख लेकर उसे दोबारा नहीं दोहराना चाहिए

    अपनी शादी का किस्सा बताते हुए मौसमी ने एक बेहद भावुक घटना का जिक्र किया था। बालिका वधू की सफलता के बाद उनके लिए कई रिश्ते आने लगे थे। इसी दौरान उनकी एक बीमार बुआ की तबीयत बेहद खराब थी। बताया जाता है कि उनकी बुआ कैंसर की गंभीर अवस्था में थीं और उनकी इच्छा थी कि वह मौसमी की शादी देख सकें। बुआ ने मौसमी के होने वाले ससुर हेमंत कुमार का हाथ पकड़कर अपनी इच्छा जाहिर की थी। इसके बाद परिस्थितियां तेजी से बदलीं और करीब एक महीने के भीतर ही मौसमी की शादी जयंत मुखर्जी से हो गई

    मौसमी ने बहुत कम उम्र में शादी के साथ अपनी फिल्मी यात्रा भी जारी रखी। 1970 के दशक में वह हिंदी सिनेमा की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हुईं। अनुराग रोटी कपड़ा और मकान बेनाम स्वर्ग नरक मंजिल अंगूर और स्वयंवर जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने पसंद किया। उन्होंने अमिताभ बच्चन राजेश खन्ना धर्मेंद्र जितेंद्र विनोद खन्ना और संजीव कुमार जैसे बड़े कलाकारों के साथ भी काम किया

    आज 70 वर्ष की उम्र में मौसमी जब पीछे मुड़कर अपने जीवन को देखती हैं तो उनके अनुभवों में रिश्तों और स्वतंत्रता को लेकर एक अलग नजरिया दिखाई देता है। उनका कहना है कि नई पीढ़ी को अपनी जिंदगी को केवल दूसरों की अपेक्षाओं के हिसाब से नहीं चलाना चाहिए। उन्हें अपने फैसले सोच समझकर लेने चाहिए और हर अनुभव से सीखना चाहिए। मौसमी की बातों में उनकी अपनी जिंदगी के अनुभवों की झलक भी नजर आती है क्योंकि उन्होंने खुद बेहद कम उम्र में शादी और साथ ही लंबे फिल्मी करियर का दौर देखा है

  • करोड़ों की दुनिया से दूर गांव में जिंदगी जी रही हैं कटरीना की मां सुजैन गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए छोड़ी लंदन की जिंदगी

    करोड़ों की दुनिया से दूर गांव में जिंदगी जी रही हैं कटरीना की मां सुजैन गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए छोड़ी लंदन की जिंदगी


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेत्री कटरीना कैफ की जिंदगी फिल्मों की चमक दमक और ग्लैमर से जुड़ी रही है। पिछले करीब दो दशक से ज्यादा समय से वह हिंदी सिनेमा में सक्रिय हैं और अभिनय के साथ अपना कारोबार भी संभाल चुकी हैं। हालांकि कटरीना की मां सुजैन टरक्वोट की जिंदगी इससे बिल्कुल अलग है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह लंदन की आरामदायक जिंदगी छोड़कर कई वर्षों से भारत के तमिलनाडु के मदुरई इलाके में रह रही हैं और अपना समय गरीब तथा जरूरतमंद बच्चों की मदद में लगा रही हैं

    सुजैन के भारत आने और यहां रहने की कहानी भी काफी अलग बताई जाती है। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने वर्ष 2008 में लंदन छोड़ दिया था। इसके बाद वह मदुरई में रहकर बच्चों की शिक्षा और उनके बेहतर भविष्य के लिए काम करने लगीं। शुरुआत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों को मुफ्त ट्यूशन देने से हुई थी। धीरे धीरे उनका काम बढ़ता गया और शिक्षा के साथ स्वास्थ्य तथा बच्चों की सुरक्षा जैसे क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया गया

    सुजैन ने वर्ष 2015 में माउंटेन व्यू स्कूल की शुरुआत की थी। बताया जाता है कि शुरुआती दौर में यह एक छोटे नर्सरी स्कूल की तरह था जिसमें करीब 30 बच्चे पढ़ते थे। इनमें ज्यादातर बच्चे ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते थे। समय के साथ यह पहल आगे बढ़ी और बच्चों की संख्या भी बढ़ती गई। रिपोर्ट के मुताबिक अब करीब 300 बच्चे इस प्राइमरी स्कूल से जुड़े हुए हैं

    कटरीना भी कई मौकों पर अपनी मां के इस काम और समाजसेवा के प्रति उनके समर्पण के बारे में बात कर चुकी हैं। करीब एक दशक पहले अभिनेत्री ने बताया था कि उनकी मां मदुरई में स्कूल चलाती हैं और बच्चों को पढ़ाती हैं। कटरीना के अनुसार उनकी मां के भीतर जरूरतमंद लोगों की मदद करने की भावना कोई नई बात नहीं है बल्कि यह उनके स्वभाव का हिस्सा रही है

    सुजैन जिस जगह रहती हैं वहां सुविधाएं भी सीमित बताई जाती हैं। कटरीना ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि उनकी मां के पास हर समय बिजली की सुविधा नहीं रहती। कई बार इंटरनेट भी उपलब्ध नहीं होता जिसके कारण दोनों के लिए वीडियो कॉल पर बात करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में मां बेटी को सामान्य फोन कॉल के जरिए बातचीत करनी पड़ती है। कटरीना ने यह भी बताया था कि उनकी मां गर्म मौसम में बिना एयर कंडीशनर जैसी सुविधाओं के रहती हैं

    कटरीना के मुताबिक उनकी मां ने लोगों की सेवा को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया है। अभिनेत्री खुद भी अपनी मां के काम में सहयोग करती रही हैं और बताया गया है कि उन्होंने स्कूल के लिए आर्थिक मदद भी की है। यह कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि एक तरफ कटरीना का जीवन फिल्म इंडस्ट्री की चमकदार दुनिया से जुड़ा है तो दूसरी तरफ उनकी मां ने लंबे समय से बेहद साधारण परिस्थितियों में रहकर बच्चों की शिक्षा के लिए काम करने का रास्ता चुना

    कटरीना की मां की यह पहल बताती है कि किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसकी आर्थिक स्थिति या सामाजिक प्रसिद्धि से नहीं होती। सुजैन ने अपने लिए अलग रास्ता चुना और ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा को अपने काम का केंद्र बनाया। उनकी जिंदगी का यह पहलू लंबे समय तक बॉलीवुड की चकाचौंध से दूर रहा लेकिन कटरीना के पुराने बयानों के जरिए समय समय पर सामने आता रहा है