Category: Entertainment

  • ‘किसी को बैन करने का अधिकार नहीं’, प्रोड्यूसर ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

    ‘किसी को बैन करने का अधिकार नहीं’, प्रोड्यूसर ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया


    नई दिल्ली । अभिनेता Ranveer Singh और फिल्म Don 3 को लेकर चल रहा विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। वरिष्ठ फिल्म निर्माता T.P. Aggarwal ने Federation of Western India Cine Employees द्वारा रणवीर सिंह के खिलाफ घोषित गैर-सहयोग (नॉन-कोऑपरेशन) के फैसले को चुनौती देते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

    क्या है मामला?
    रिपोर्ट्स के अनुसार, रणवीर सिंह के डॉन 3 से अलग होने के बाद FWICE ने उनके खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन की घोषणा की थी। संगठन का कहना था कि मामला सुलझने तक उससे जुड़े सदस्य अभिनेता के साथ काम नहीं करेंगे।

    टीपी अग्रवाल ने क्या कहा?
    पूर्व Film Federation of India अध्यक्ष टीपी अग्रवाल ने मुंबई की दिंडोशी सिविल कोर्ट में FWICE और Indian Motion Picture Producers Association के खिलाफ याचिका दायर की है।

    उनका तर्क है कि किसी भी फिल्म संगठन या ट्रेड बॉडी को किसी कलाकार को काम करने से रोकने का कानूनी अधिकार नहीं है। उनके अनुसार, ऐसे फैसले कलाकारों की आजीविका, काम करने की स्वतंत्रता और रचनात्मक अभिव्यक्ति पर सीधा असर डालते हैं।

    विवाद की जड़
    साल 2023 में रणवीर सिंह को डॉन 3 में नए डॉन के रूप में कास्ट किया गया था। फिल्म के निर्देशक Farhan Akhtar ने इसका टीजर भी जारी किया था, जिसे दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला था। बाद में खबरें आईं कि रचनात्मक मतभेदों के चलते रणवीर इस प्रोजेक्ट से दूर हो गए।

    अब आगे क्या?
    मामला अब अदालत में पहुंच चुका है, इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट फिल्म संगठनों की शक्तियों और कलाकारों के काम करने के अधिकार को लेकर क्या रुख अपनाती है। इस फैसले का असर भविष्य में फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों और संगठनों के बीच होने वाले विवादों पर भी पड़ सकता है।

    यह मामला केवल रणवीर सिंह तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि फिल्म उद्योग में ट्रेड बॉडी की भूमिका और उनके अधिकारों पर भी एक बड़ी बहस छेड़ सकता है।

  • 11 साल बाद शिल्पा शिंदे का बड़ा बयान, केस पर किया चौंकाने वाला खुलासा

    11 साल बाद शिल्पा शिंदे का बड़ा बयान, केस पर किया चौंकाने वाला खुलासा


    नई दिल्ली । टीवी एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे ने ‘भाबीजी घर पर हैं’ छोड़ने और उस दौरान हुए विवाद पर 11 साल बाद अपनी बात रखते हुए कई बड़े दावे किए हैं। भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि उस समय प्रोड्यूसर के खिलाफ लगाया गया सेक्शुअल हैरेसमेंट का केस उन्होंने “मजबूरी में” किया था और अब वे मानती हैं कि वह आरोप पूरी तरह सच नहीं था।

    क्या कहा शिल्पा शिंदे ने?
    शिल्पा शिंदे ने बातचीत में बताया कि शो छोड़ने के बाद उनके और प्रोडक्शन हाउस के बीच तनाव बढ़ गया था। उनके अनुसार, उन पर एक्सक्लूसिव कॉन्ट्रैक्ट साइन करने का दबाव बनाया जा रहा था, जिससे वे दूसरे प्रोजेक्ट्स में काम न कर सकें। जब उन्होंने इनकार किया, तो उनके मुताबिक उन्हें काम से हटाने और करियर खत्म करने जैसी स्थिति बनाई गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि अचानक उन्हें शो से हटा दिया गया, शूटिंग रोक दी गई और मीडिया में उनके बाहर होने की खबरें चलने लगीं।

    लीगल विवाद और दबाव के आरोप
    शिल्पा ने कहा कि विवाद के दौरान उन्हें भारी-भरकम लीगल नोटिस (12 से 20 करोड़ रुपये तक) मिले, जिससे वे मानसिक दबाव में आ गई थीं। उनके अनुसार, उस समय उन्हें लगा कि उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा था।

    “झूठा था केस” वाला बयान
    सबसे बड़ा खुलासा यही रहा कि उन्होंने कहा- उन्होंने प्रोड्यूसर पर जो सेक्शुअल हैरेसमेंट का केस किया था, वह “पूरी तरह सच नहीं था” और उन्होंने वह कदम उस समय की परिस्थितियों और दबाव में उठाया था। यह बयान सामने आने के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है, क्योंकि उस समय यह टीवी इंडस्ट्री के सबसे बड़े विवादों में से एक माना गया था।

    आगे क्या कहा?
    शिल्पा शिंदे ने यह भी कहा कि उस पूरे विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच बाद में समझौता हो गया और अब उनके रिश्ते सामान्य हैं। उन्होंने इसे अपने करियर का सबसे मुश्किल दौर बताया।

  • रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ पर फिर गरमाया मामला: कराची के पूर्व मेयर के दावे ने आलोचकों को दिया करारा जवाब

    रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ पर फिर गरमाया मामला: कराची के पूर्व मेयर के दावे ने आलोचकों को दिया करारा जवाब

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा जगत की ब्लॉकबस्टर एक्शन-थ्रिलर फिल्म ‘धुरंधर’ और उसके सीक्वल को लेकर चल रहा वैचारिक विवाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अभिनेता रणवीर सिंह और निर्देशक आदित्य धर की इस बेहद चर्चित फिल्म को लेकर जहां भारत के भीतर ही कुछ बुद्धिजीवियों, समीक्षकों और सोशल मीडिया विश्लेषकों द्वारा इसे एक ‘प्रोपेगैंडा फिल्म’ करार दिया जा रहा था, वहीं अब इस पूरे मामले में सरहद पार से आए एक बड़े बयान ने आलोचकों को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया है। पाकिस्तान के कराची शहर के पूर्व मेयर और वरिष्ठ पत्रकार आरिफ अजाकिया ने फिल्म के समर्थन में खुलकर अपनी बात रखी है।

    उन्होंने एक प्रतिष्ठित वैश्विक पत्रकारिता कार्यक्रम ‘टॉक जर्नलिज्म’ के दौरान यह सनसनीखेज दावा किया कि फिल्म में दिखाई गई पाकिस्तान के ल्यारी इलाके की जमीनी हकीकत और आतंकी नेटवर्क को खत्म करने की जो कहानी पर्दे पर उतारी गई है, वह पूरी तरह से सच पर आधारित है। इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद से ही फिल्म की आलोचना करने वाले धड़ों के बीच सन्नाटा पसर गया है।

    आरिफ अजाकिया ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों और अपनी पुरानी राजनीतिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए कहा कि जिस दौर की घटनाओं और मिशन को फिल्म ‘धुरंधर’ में फिल्माया गया है, उस समय वह स्वयं कराची के उस विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के मेयर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उनका जन्म और पालन-पोषण कराची के उसी विवादित ल्यारी इलाके में हुआ है, जहां बलूच गैंग और विभिन्न आतंकी संगठनों का एक समय पर भारी वर्चस्व हुआ करता था।

    पूर्व मेयर के अनुसार, वह उस दौर के सुरक्षा हालातों और पर्दे के पीछे चलने वाली गतिविधियों के प्रत्यक्षदर्शी रहे हैं, इसलिए वह पूरी जिम्मेदारी के साथ यह स्वीकार करते हैं कि फिल्म के भीतर जो कुछ भी दिखाया गया है, उसमें रत्ती भर भी झूठ नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने मंच से अपनी जड़ों के बारे में बात करते हुए यह भी स्वीकार किया कि भले ही उनका जन्म कराची में हुआ हो, लेकिन उनके माता-पिता अविभाजित भारत के जूनागढ़, गुजरात से ताल्लुक रखते थे, इसलिए वह स्वयं को पाकिस्तानी मानने की बजाय भारतीय मूल का नागरिक कहलाना अधिक पसंद करते हैं।

    मध्य प्रदेश सहित देशभर के सिनेमाघरों में धूम मचाने वाली इस फिल्म की कहानी की बात करें तो ‘धुरंधर’ और इसका हालिया सीक्वल दर्शकों को एक बेहद संजीदा और खतरनाक खुफिया मिशन पर ले जाता है। फिल्म की पटकथा में दिखाया गया है कि किस प्रकार भारतीय खुफिया एजेंसी का एक जांबाज अधिकारी जसकीरत, विषम परिस्थितियों के बीच अपना नाम और पहचान बदलकर हमजा बन जाता है और पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील इलाके ल्यारी के एक खतरनाक बलूच गैंग में सफलतापूर्वक घुसपैठ करता है।

    वहां रहते हुए वह न केवल स्थानीय अपराधियों के तंत्र को ध्वस्त करता है बल्कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन के मंसूबों को भी नेस्तनाबूद कर देता है। रणवीर सिंह के दमदार अभिनय से सजी इस फिल्म में सारा अर्जुन, अर्जुन रामपाल और आर. माधवन जैसे स्थापित कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। जहाँ एक तरफ इस फिल्म की आलोचना करने वाले इसे केवल एक काल्पनिक और अतिशयोक्तिपूर्ण कहानी बता रहे थे, वहीं अब खुद कराची की कमान संभाल चुके एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी द्वारा इसे सच का आईना बताए जाने के बाद इस फिल्म की प्रामाणिकता पर उठ रहे तमाम सवालों पर पूरी तरह से विराम लग गया है।

  • पर्दे पर रहे विरोधी, असल जिंदगी में निकले बेहद करीबी रिश्तेदार: जानिए रेखा और अभिनेता तेज सप्रू का अनोखा फैमिली कनेक्शन

    पर्दे पर रहे विरोधी, असल जिंदगी में निकले बेहद करीबी रिश्तेदार: जानिए रेखा और अभिनेता तेज सप्रू का अनोखा फैमिली कनेक्शन

    नई दिल्ली। बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री की सबसे रहस्यमयी और सदाबहार अभिनेत्रियां में शुमार रेखा के पेशेवर जीवन और उनकी व्यक्तिगत प्रेम कहानी से तो दुनिया भली-भांति वाकिफ है, परंतु उनके पारिवारिक ताने-बाने को लेकर आज भी कई ऐसे अनसुने पहलू हैं जिनसे आम जनमानस पूरी तरह अनजान है। साठ के दशक से सिल्वर स्क्रीन पर राज करने वाली रेखा का हिंदी सिनेमा के एक बेहद लोकप्रिय और खूंखार विलेन का किरदार निभाने वाले अभिनेता तेज सप्रू के साथ बेहद करीबी और सगा पारिवारिक संबंध है।
    गुजरे जमाने के इस मशहूर खलनायक और रेखा के बीच का यह रिश्ता बेहद गहरा और आत्मीय है, जिसके चलते असल जिंदगी में ये दोनों एक-दूसरे के बेहद खास रिश्तेदार माने जाते हैं। पर्दे पर एक-दूसरे के विपरीत भूमिकाओं में नजर आने वाले इन दोनों उम्दा कलाकारों के बीच जीजा और साली का एक मजबूत पारिवारिक पवित्र रिश्ता है, जिसकी जड़ें रेखा की माता के वैवाहिक जीवन के इतिहास से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं।

    इस पारिवारिक जुड़ाव की पेचीदगियों को समझने के लिए रेखा की माता पुष्पावली के जीवन चक्र को जानना बेहद आवश्यक है। अपने दौर की प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय अभिनेत्री पुष्पावली ने चालीस और पचास के दशक में कई फिल्मों में काम कर अपने बच्चों का भरण-पोषण किया था। वर्ष 1940 में आई. वी. रंगाचारी से विवाह के बाद वर्ष 1946 में उनका अलगाव हो गया, जिसके बाद उनकी नजदीकियां तमिल सिनेमा के दिग्गज अभिनेता जेमिनी गणेशन के साथ बढ़ीं। इस गहरे रिश्ते के चलते रेखा और उनकी बहन राधा का जन्म हुआ, हालांकि जेमिनी गणेशन ने सार्वजनिक तौर पर कभी इस रिश्ते को पूर्ण स्वीकृति नहीं दी।

    जेमिनी गणेशन से अलग होने के पश्चात पुष्पावली ने अकेले ही अपनी बेटियों की परवरिश की जिम्मेदारी उठाई और इसी संघर्षपूर्ण दौर में उनकी जिंदगी में विख्यात सिनेमेटोग्राफर के. प्रकाश की एंट्री हुई। के. प्रकाश और पुष्पावली के विवाह के बाद उनके घर दो बच्चों का जन्म हुआ, जिनमें एक बेटा सेशू और एक बेटी धनलक्ष्मी शामिल थीं। रेखा अपनी सभी बहनों और भाई के साथ एक ही छत के नीचे बड़ी हुईं और अपनी सौतेली बहन धनलक्ष्मी के साथ भी उनका बेहद गहरा और अटूट स्नेह रहा है।

    देशभर के सिनेमा प्रेमियों के लिए यह बेहद दिलचस्प तथ्य है कि रेखा की यही छोटी सौतेली बहन धनलक्ष्मी आगे चलकर मशहूर अभिनेता तेज सप्रू की जीवनसंगिनी बनीं। धनलक्ष्मी और तेज सप्रू के इस विवाह के बाद से ही तकनीकी और पारिवारिक रूप से तेज सप्रू रिश्ते में रेखा के सगे जीजा बन गए।
    रेखा और तेज सप्रू के इस बेहद करीबी पारिवारिक रिश्ते के बारे में फिल्म इंडस्ट्री और प्रशंसकों के बीच बहुत ही सीमित लोगों को जानकारी है। इन दोनों कलाकारों ने न केवल पारिवारिक स्तर पर बल्कि पेशेवर मोर्चे पर भी एक-दूसरे का साथ निभाया है और ‘जाल’ तथा ‘इंसाफ का तराजू’ जैसी करीब तीन सुपरहिट फिल्मों में सह-कलाकार के रूप में एक साथ स्क्रीन भी साझा की है।
    रेखा अपने सभी भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं और आज भी अपनी बहनों के बेहद करीब मानी जाती हैं, जहां उनकी सगी बहन राधा विवाह के बाद अमेरिका में बस चुकी हैं, वहीं सौतेली बहन धनलक्ष्मी और जीजा तेज सप्रू के साथ उन्हें अक्सर पारिवारिक समारोहों में बेहद आत्मीयता के साथ वक्त बिताते हुए देखा जाता है।
  • तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल: 'बिग बॉस' फेम तमिल अभिनेत्री का बड़ा दावा, मुख्यमंत्री विजय समर्थकों की ट्रोलिंग से हुआ मिसकैरेज

    तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल: 'बिग बॉस' फेम तमिल अभिनेत्री का बड़ा दावा, मुख्यमंत्री विजय समर्थकों की ट्रोलिंग से हुआ मिसकैरेज

    नई दिल्ली। दक्षिण भारतीय सिनेमा और तमिलनाडु के राजनीतिक गलियारों में एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने पूरी इंडस्ट्री में सनसनी फैला दी है। ‘बिग बॉस तमिल’ से राष्ट्रव्यापी लोकप्रियता हासिल करने वाली अभिनेत्री जूली, जिन्हें मारिया जूलियाना के नाम से भी जाना जाता है, ने तमिलनाडु के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री और तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलपति जोसेफ विजय पर बेहद संगीन और गंभीर आरोप लगाए हैं।

    चेन्नई में आयोजित एक भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिनेत्री ने फूट-फूटकर रोते हुए दावा किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री थलपति विजय की पार्टी के समर्थकों द्वारा किए गए अनवरत मानसिक उत्पीड़न और सोशल मीडिया ट्रोलिंग के कारण अपने होने वाले पहले बच्चे को खो दिया है।

    अभिनेत्री का आरोप है कि उन्हें इंटरनेट मीडिया पर इस कदर निशाना बनाया गया और उनके चरित्र पर कीचड़ उछाला गया कि वह अत्यधिक मानसिक तनाव का शिकार हो गईं, जिसके परिणामस्वरूप उनका गर्भपात यानी मिसकैरेज हो गया। इस बयान के सामने आने के बाद से ही राज्य की राजनीति और सिनेमाई हलकों में आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर तेज हो गया है।

    अभिनेत्री जूली ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब उन्होंने राजनीतिक रूप से थलपति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ के खिलाफ अपनी आवाज उठाई। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मार्च महीने में उन्होंने अपने खिलाफ हो रहे लगातार ऑनलाइन उत्पीड़न को लेकर चेन्नई पुलिस में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें कुल आठ लोगों को नामजद किया गया था। हालांकि, बाद में उन्हें पुलिस विभाग की ओर से एक नोटिस प्राप्त हुआ, जिसमें इस मामले को आपराधिक श्रेणी में न रखकर दीवानी मानहानि के अंतर्गत दर्शाया गया था।

    जूली ने आरोप लगाया कि राज्य की सत्ता में हुए परिवर्तन के बाद इस मामले को जानबूझकर कमजोर करने का प्रयास किया गया। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके द्वारा आवाज उठाने के बाद उनके ऊपर पंद्रह लाख रुपए के एक फर्जी किडनी घोटाले में शामिल होने के मनगढ़ंत आरोप मढ़ दिए गए। अभिनेत्री का सीधा आरोप है कि इस पूरी साजिश के पीछे मुख्यमंत्री की पार्टी के कुछ कट्टर समर्थक और एक कानूनी सलाहकार शामिल हैं, जिन्होंने उनके और उनके पति के खिलाफ बेहद भद्दी और अपमानजनक बातें सोशल मीडिया पर फैलाई हैं।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब मीडिया कर्मियों ने उनसे यह सवाल पूछा कि वह इन गुमनाम सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न को सीधे तौर पर मुख्यमंत्री से कैसे जोड़ सकती हैं, तो उन्होंने बेहद तीखा जवाब दिया। जूली ने स्पष्ट किया कि वह इस दर्दनाक घटना का इस्तेमाल किसी भी तरह की जन-सहानुभूति बटोरने के लिए नहीं कर रही हैं, बल्कि वह उस कड़वे सच को सामने ला रही हैं जिससे कई महिलाएं गुजर रही हैं। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि केवल सोशल मीडिया की लोकप्रियता के दम पर सत्ता के शीर्ष तक पहुंच जाना काफी नहीं है, बल्कि एक मुख्यमंत्री के रूप में जनता के प्रति उनकी बड़ी जिम्मेदारी बनती है।

    जूली ने कहा कि भले ही मुख्यमंत्री ने प्रत्यक्ष रूप से उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाया हो, लेकिन जब उनकी पार्टी के लोग एक महिला का नाम बिना किसी संकोच के खराब कर रहे थे, तब उन्होंने अपने समर्थकों को पीछे हटने के लिए एक शब्द भी नहीं कहा। मुख्यमंत्री की इस चुप्पी को ही उन्होंने अपनी इस व्यक्तिगत क्षति का सबसे बड़ा कारण माना है। इस बेहद संवेदनशील और विवादित बयान के बाद जहां थलपति विजय के प्रशंसक और पार्टी कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर अभिनेत्री के दावों का कड़ा विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस घटना ने तमिलनाडु की नई सरकार के सामने एक बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

  • भोजपुरी सिनेमा के महामुकाबले में फिर गरमाया पुराना विवाद, मनोज तिवारी ने रवि किशन की पुरानी फीस को लेकर कसा तीखा तंज

    भोजपुरी सिनेमा के महामुकाबले में फिर गरमाया पुराना विवाद, मनोज तिवारी ने रवि किशन की पुरानी फीस को लेकर कसा तीखा तंज

    नई दिल्ली। क्षेत्रीय सिनेमा के इतिहास में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले भोजपुरी फिल्म जगत के दो सबसे बड़े सूरमाओं के बीच की पुरानी अदावत एक बार फिर से खुलकर सार्वजनिक मंच पर आ गई है। लंबे समय तक एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे मनोज तिवारी और रवि किशन के बीच की खाई राजनीतिक रूप से भले ही पट गई हो, लेकिन अतीत के व्यावसायिक मतभेद आज भी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं।

    हाल ही में दिए गए एक बेबाक साक्षात्कार के दौरान मनोज तिवारी ने भोजपुरी सिनेमा के उत्थान और उसकी वैश्विक लोकप्रियता को लेकर कई ऐसे दावे किए हैं, जिससे दोनों कलाकारों के प्रशंसकों के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इस बातचीत के दौरान जब उनसे यह पूछा गया कि इस फिल्म जगत को पुनर्जीवित करने और एक-दूसरे को मुख्यधारा में लाने का असल श्रेय किसे जाता है, तो मनोज तिवारी ने बिना किसी हिचकिचाहट के खुद को भोजपुरी के तीसरे दौर का मार्गदर्शक घोषित कर दिया।

    उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके आने से पहले रवि किशन सहित कई अन्य कलाकार इस फिल्म जगत में सक्रिय तो थे, लेकिन वे कोई खास प्रभाव छोड़ने या इस सिनेमा को एक मुनाफे वाले उद्योग में बदलने में पूरी तरह से असफल साबित हो रहे थे।

    इस वैचारिक जंग में अपने पक्ष को मजबूती से रखने के लिए मनोज तिवारी ने अपनी ऐतिहासिक फिल्म के बॉक्स ऑफिस आंकड़ों का भी खुलकर हवाला दिया। उन्होंने बताया कि उनकी बेहद चर्चित फिल्म ने मात्र तीस लाख रुपए के अत्यंत सीमित बजट में बनकर रिकॉर्ड तोड़ कमाई का इतिहास रचा था, जिसने न केवल पूरे देश का ध्यान इस क्षेत्रीय सिनेमा की तरफ आकर्षित किया बल्कि इसी एकलौती फिल्म की ऐतिहासिक सफलता के बाद से भोजपुरी में लगभग दो हजार नई फिल्मों के निर्माण का रास्ता साफ हुआ। अपनी बात को और अधिक आक्रामक मोड़ देते हुए उन्होंने समकालीन कलाकारों की उस दौर की आर्थिक स्थिति पर भी टिप्पणी की।

    उन्होंने दावा किया कि जब वे सफलता के शिखर पर थे और बतौर मुख्य अभिनेता फिल्मों के लिए प्रतिदिन के हिसाब से एक से डेढ़ लाख रुपए तक की भारी-भरकम फीस ले रहे थे, उस दौर में रवि किशन को पूरी फिल्म के काम के एवज में केवल पच्चीस हजार रुपए ही मिलते थे। उन्होंने कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि उन्होंने ही इन सभी कलाकारों को यह सिखाया कि किस प्रकार फिल्म उद्योग में अपनी कड़ी मेहनत के लिए सही और बड़ा पारिश्रमिक मांगा जाता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके।

    हालांकि, वर्तमान परिदृश्य की बात करते हुए मनोज तिवारी ने यह भी साफ किया कि समय के साथ अब उनके आपसी संबंधों में काफी बदलाव आ चुका है। वर्तमान में दोनों ही दिग्गज कलाकार भारतीय जनता पार्टी के बैनर तले सक्रिय राजनीति का हिस्सा हैं और एक ही दल में होने के कारण अब उनके बीच पहले जैसी सीधे तौर पर कोई व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता नहीं बची है। वे दोनों अब अच्छे मित्र के रूप में एक-दूसरे के साथ खड़े दिखाई देते हैं और राजनीतिक रैलियों तथा सार्वजनिक कार्यक्रमों में एक मंच भी साझा करते हैं।

    परंतु, जब बात भोजपुरी सिनेमा को देश-दुनिया में असली पहचान दिलाने और उसकी रीढ़ बनने की आती है, तो दोनों के बीच की यह वैचारिक जंग और खुद को श्रेष्ठ साबित करने की होड़ आज भी वैसी ही बनी हुई है जैसी सालों पहले फिल्मों के बॉक्स ऑफिस क्लैश के दौरान हुआ करती थी। इस ताजा बयानबाजी ने यह साफ कर दिया है कि भले ही समय बदल गया हो और दोनों के रास्ते राजनीति में आकर मिल गए हों, लेकिन भोजपुरी सिनेमा के इतिहास में अपना नाम सबसे ऊपर दर्ज कराने की यह लड़ाई इतनी जल्दी शांत होने वाली नहीं है।

  • तमिल फिल्म जगत में शोक की लहर, अजित कुमार के घर पहुंचे कई सितारे, विजय–तृषा की मौजूदगी चर्चा में

    तमिल फिल्म जगत में शोक की लहर, अजित कुमार के घर पहुंचे कई सितारे, विजय–तृषा की मौजूदगी चर्चा में

    नई दिल्ली । तमिल फिल्म इंडस्ट्री के लोकप्रिय अभिनेता अजित कुमार की मां मोहिनी मणि के निधन के बाद पूरे सिनेमा जगत में शोक का माहौल है। चेन्नई में उनका निधन लंबे समय से चल रही उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के बाद हुआ, जिसके बाद परिवार और करीबी लोगों के बीच गहरा दुख व्याप्त हो गया। इस कठिन समय में फिल्म जगत की कई प्रमुख हस्तियां और करीबी मित्र अजित कुमार के घर पहुंचकर उन्हें सांत्वना देने पहुंचे।

    सूत्रों के अनुसार, मां के निधन की खबर मिलते ही अजित कुमार तुरंत दुबई से चेन्नई लौट आए और परिवार के साथ इस दुख की घड़ी में शामिल हुए। घर पर लगातार रिश्तेदारों, दोस्तों और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का आना-जाना जारी रहा, जहां सभी ने परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। पूरे माहौल में शांति और गहरा भावनात्मक तनाव देखा गया।

    इस बीच अभिनेता और राजनीतिक व्यक्तित्व विजय भी अजित कुमार के आवास पर पहुंचे। वे सुरक्षा व्यवस्था के बीच घर पहुंचे और उन्होंने अजित से मुलाकात कर उन्हें गले लगाकर सांत्वना दी। यह दृश्य बेहद भावुक था, जिसने वहां मौजूद लोगों को भी प्रभावित किया। दोनों के बीच लंबे समय तक व्यक्तिगत रूप से बातचीत भी हुई, जिसमें विजय ने परिवार को इस कठिन समय में हिम्मत बनाए रखने की बात कही।

    इसी दौरान अभिनेत्री तृषा कृष्णन भी अजित कुमार के घर पहुंचीं और उन्होंने परिवार के सदस्यों से मिलकर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। पारंपरिक परिधान में नजर आईं तृषा ने शांत वातावरण में परिवार के साथ कुछ समय बिताया और उन्हें सांत्वना दी। उनकी उपस्थिति ने इस दुखद माहौल में एक भावनात्मक जुड़ाव और सहानुभूति का भाव और मजबूत किया।

    घटना के बाद सोशल मीडिया पर इन मुलाकातों से जुड़े कई दृश्य सामने आए, जिनमें विजय और तृषा को अलग-अलग समय पर घर पहुंचते देखा गया। हालांकि इस बात को लेकर अलग-अलग चर्चाएं भी सामने आईं कि दोनों एक साथ पहुंचे थे या अलग-अलग समय पर, लेकिन आधिकारिक रूप से इस पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

    फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई अन्य कलाकारों और सहयोगियों ने भी अजित कुमार के परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं। यह पूरा घटनाक्रम इस बात का प्रतीक बन गया कि फिल्म जगत में व्यक्तिगत संबंध और मानवीय संवेदनाएं कितनी गहरी होती हैं।

    फिलहाल अजित कुमार और उनका परिवार इस कठिन समय से गुजर रहा है और लगातार उन्हें समर्थन और संवेदनाएं मिल रही हैं। इंडस्ट्री के लोग उम्मीद जता रहे हैं कि समय के साथ यह दुख थोड़ा कम होगा, लेकिन मां के निधन से उत्पन्न खालीपन को भर पाना आसान नहीं होगा।

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  • सुशांत सिंह राजपूत को याद कर भावुक हुए शिशिर शर्मा, बोले-‘सच मानना आज भी मुश्किल है’

    सुशांत सिंह राजपूत को याद कर भावुक हुए शिशिर शर्मा, बोले-‘सच मानना आज भी मुश्किल है’

    नई दिल्ली । दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का माहौल गर्म हो गया है, जब उनके साथ फिल्म ‘छिछोरे’ में काम कर चुके अभिनेता शिशिर शर्मा ने सालों बाद उनके निधन पर अपनी भावनाएं साझा कीं। एक हालिया बातचीत में शिशिर शर्मा ने कहा कि उन्हें आज भी यह स्वीकार करना बेहद कठिन लगता है कि सुशांत जैसा प्रतिभाशाली और शांत स्वभाव का व्यक्ति आत्महत्या जैसा कदम उठा सकता है। उनके इस बयान ने एक बार फिर सुशांत के चाहने वालों की भावनाओं को ताजा कर दिया है।

    मध्य प्रदेश सहित देशभर में सुशांत सिंह राजपूत की लोकप्रियता केवल फिल्मों तक सीमित नहीं थी, बल्कि टीवी धारावाहिकों से लेकर बड़े पर्दे तक उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। शिशिर शर्मा ने बताया कि उनकी और सुशांत की पहचान टीवी इंडस्ट्री के दिनों से ही थी, जहां दोनों की कई बार मुलाकात और साथ में काम करने का अवसर मिला था। इस दौरान उनके बीच एक सहज और दोस्ताना रिश्ता विकसित हुआ था, जो बाद में भी कायम रहा।

    शिशिर शर्मा ने आगे बताया कि जब उन्हें फिल्म ‘छिछोरे’ में काम करने का अवसर मिला और यह पता चला कि उसमें सुशांत सिंह राजपूत भी हैं, तो वह बेहद उत्साहित हो गए थे। शूटिंग के दौरान दोनों ने एक बार फिर पुराने दिनों की यादें साझा कीं और सेट पर एक अच्छा माहौल रहा। उन्होंने सुशांत को एक बेहद समर्पित, मेहनती और अपने काम के प्रति गंभीर कलाकार बताया।

    14 जून 2020 का दिन उनके जीवन में एक ऐसा पल लेकर आया जिसे वह आज भी भूल नहीं पाए हैं। शिशिर शर्मा ने कहा कि जब उन्हें सुशांत के निधन की खबर मिली, तो वह पूरी तरह से स्तब्ध रह गए थे। उनके अनुसार यह खबर किसी बड़े सदमे से कम नहीं थी और वह समझ नहीं पा रहे थे कि इतना ऊर्जावान और प्रतिभाशाली व्यक्ति अचानक इस तरह दुनिया को अलविदा कैसे कह सकता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें यह मानना मुश्किल लगता है कि सुशांत ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया होगा। उनके अनुसार सुशांत एक सुलझे हुए और समझदार व्यक्ति थे, जिनका व्यवहार और सोच काफी सकारात्मक थी। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह उनकी निजी राय है और वह किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहते, लेकिन भावनात्मक रूप से वह आज भी इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पाए हैं।

    सुशांत सिंह राजपूत ने अपने करियर में टीवी से शुरुआत कर बॉलीवुड में बड़ा मुकाम हासिल किया था। ‘पवित्र रिश्ता’ से लेकर ‘काई पो चे’, ‘एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ और ‘छिछोरे’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। आज भी उनके प्रशंसक उन्हें याद करते हैं और सोशल मीडिया पर उनकी यादों को साझा करते रहते हैं, जिससे यह साफ है कि उनकी लोकप्रियता और प्रभाव आज भी बरकरार है।

  • तलाक के चार साल बाद फिर चर्चा में नागा चैतन्य, ऑनलाइन अफवाहों के खिलाफ कोर्ट से मिली अंतरिम राहत

    तलाक के चार साल बाद फिर चर्चा में नागा चैतन्य, ऑनलाइन अफवाहों के खिलाफ कोर्ट से मिली अंतरिम राहत

    नई दिल्ली । साउथ फिल्म इंडस्ट्री के लोकप्रिय अभिनेता नागा चैतन्य एक बार फिर सुर्खियों में हैं, हालांकि इस बार वजह उनकी निजी जिंदगी नहीं बल्कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया और विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर फैल रही कथित भ्रामक और मानहानिकारक सामग्री है। अभिनेता ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है और अपनी छवि को नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट पर रोक लगाने की मांग की है।

    जानकारी के अनुसार नागा चैतन्य ने अपनी याचिका में कहा है कि कई वेबसाइट्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, तस्वीर और पहचान का उपयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही उनके बारे में ऐसे दावे किए जा रहे हैं जो न केवल झूठे हैं बल्कि उनकी व्यक्तिगत और पेशेवर प्रतिष्ठा को भी प्रभावित करते हैं। अभिनेता का कहना है कि यह पूरा मामला उनकी डिजिटल पहचान और सम्मान से जुड़ा हुआ है, जिसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।

    याचिका में विशेष रूप से उन ऑनलाइन पोस्ट और वीडियो का उल्लेख किया गया है जिनमें यह दावा किया गया था कि नागा चैतन्य ने अपनी पूर्व पत्नी सामंथा रूथ प्रभु को धोखा दिया था या उनके करियर को प्रभावित किया था। अभिनेता ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह आधारहीन और भ्रामक बताया है और कहा है कि इस तरह की सामग्री से जनता के बीच गलत धारणा बन रही है।

    मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने प्राथमिक स्तर पर अभिनेता को अंतरिम राहत प्रदान की है। अदालत ने ऐसे सभी ऑनलाइन कंटेंट को हटाने के निर्देश दिए हैं, जो उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने एआई और डीपफेक तकनीक के माध्यम से बनाए जा रहे आपत्तिजनक कंटेंट पर भी चिंता जताई है और इस तरह के मामलों में सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

    गौरतलब है कि नागा चैतन्य और अभिनेत्री सामंथा रूथ प्रभु ने वर्ष 2021 में आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लिया था। तलाक के बाद दोनों को लेकर कई तरह की अटकलें और अफवाहें सामने आती रही हैं, जिन्हें दोनों कलाकारों ने समय-समय पर खारिज भी किया है। नागा चैतन्य पहले भी एक इंटरव्यू में यह स्पष्ट कर चुके हैं कि वे और सामंथा एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और अपने-अपने जीवन में आगे बढ़ चुके हैं।

    इस ताजा कानूनी कदम को अभिनेता की छवि संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैल रही गलत सूचनाओं के खिलाफ यह मामला आने वाले समय में एक उदाहरण बन सकता है, जहां सार्वजनिक हस्तियां अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए न्यायिक प्रणाली का सहारा ले रही हैं।

  • तनीषा मुखर्जी ने फराह खान को कराया अपने आलीशान घर का टूर, काजोल की मदद से खरीदे गए आशियाने का किया खुलासा

    तनीषा मुखर्जी ने फराह खान को कराया अपने आलीशान घर का टूर, काजोल की मदद से खरीदे गए आशियाने का किया खुलासा

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री तनीषा मुखर्जी हाल ही में फिल्ममेकर फराह खान के व्लॉग में नजर आईं, जहां उन्होंने अपने मुंबई स्थित आलीशान और बेहद खास घर का टूर कराया। इस दौरान तनीषा ने न सिर्फ अपने घर की खूबसूरती और डिजाइन के बारे में बात की, बल्कि उससे जुड़ी निजी और पारिवारिक यादों को भी साझा किया, जिसने इस बातचीत को और भी दिलचस्प बना दिया।

    तनीषा मुखर्जी का यह घर अपने क्लासिक और पुराने दौर की झलक के लिए जाना जाता है। घर के अंदर लकड़ी का पारंपरिक फर्नीचर, पुरानी शैली की सजावट और विशाल सीढ़ियां इसे एक अलग पहचान देती हैं। घर का हर कोना किसी न किसी कहानी को अपने अंदर समेटे हुए दिखाई देता है, जहां आधुनिकता और विरासत का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है। फराह खान ने भी घर के माहौल की सराहना करते हुए कहा कि मुंबई जैसे शहर में इस तरह की शांति और पुरानी शैली का वातावरण बहुत कम देखने को मिलता है।

    बातचीत के दौरान तनीषा मुखर्जी ने अपने घर की खरीद और उससे जुड़ी आर्थिक परिस्थितियों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि इस घर को लेने में उनकी बहन काजोल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और आर्थिक रूप से उनकी मदद की थी। तनीषा ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि घर से जुड़े कई बड़े फैसलों में काजोल का योगदान काफी अहम रहा है। उनकी यह बात सुनकर फराह खान भी मुस्कुरा उठीं और माहौल बेहद सहज और पारिवारिक बन गया।

    तनीषा ने यह भी साझा किया कि यह घर केवल एक संपत्ति नहीं है, बल्कि उनकी मां तनुजा और पूरे परिवार की कई पुरानी यादों से जुड़ा हुआ एक भावनात्मक स्थान है। घर में रखे कई सामान पुराने घर से लाए गए हैं, जिन्हें आज भी उसी तरह संभालकर रखा गया है। यह घर परिवार की विरासत और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन चुका है, जहां हर वस्तु किसी न किसी याद को जीवित रखती है।

    व्लॉग के दौरान तनीषा और काजोल के रिश्ते की भी एक झलक सामने आई, जिससे यह साफ दिखाई दिया कि दोनों के बीच मजबूत पारिवारिक बंधन मौजूद है। तनीषा ने जिस सहजता से अपनी बहन के योगदान का उल्लेख किया, उससे उनके रिश्ते की गहराई और आपसी विश्वास का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है, जहां दर्शक उनकी पारिवारिक बॉन्डिंग और घर की खूबसूरती की सराहना कर रहे हैं।