Category: Entertainment

  • काला हिरण फिल्म पर दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी सलमान खान के पक्ष में आया बड़ा फैसला मेकर्स को मिली कड़ी फटकार

    काला हिरण फिल्म पर दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी सलमान खान के पक्ष में आया बड़ा फैसला मेकर्स को मिली कड़ी फटकार


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने विवादों में घिरी फिल्म काला हिरण द बैटल फॉर लेगेसी को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए फिल्म से जुड़े सभी प्रचार सामग्री और सोशल मीडिया लिंक तत्काल हटाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के इस फैसले को सलमान खान के पक्ष में एक महत्वपूर्ण जीत माना जा रहा है क्योंकि अभिनेता ने फिल्म पर उनके व्यक्तित्व अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की थी।

    सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म के निर्माता अमित जानी के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे निर्माता स्वयं को कानून से ऊपर समझ रहे हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि पिछली सुनवाई में किसी प्रकार का कठोर आदेश नहीं दिया गया था जिसका गलत संदेश लिया गया और अब उनका व्यवहार लगातार अस्वीकार्य होता जा रहा है। अदालत ने टिप्पणी की कि किसी भी नागरिक के साथ इस प्रकार का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    सलमान खान की ओर से पेश वकील ने अदालत में दलील दी कि काले हिरण शिकार मामले से जुड़े चार मामलों में से तीन में अभिनेता को पहले ही बरी किया जा चुका है जबकि चौथे मामले में सजा पर रोक लगी हुई है। ऐसे में इस फिल्म के जरिए पुराने विवाद को दोबारा उछालकर अभिनेता की छवि को नुकसान पहुंचाने और एक पूरे समुदाय को उनके खिलाफ प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। वकील ने इसे सलमान खान के व्यक्तित्व अधिकारों का सीधा उल्लंघन बताया।

    वहीं फिल्म निर्माता की ओर से अदालत में कहा गया कि फिल्म के टीजर में कहीं भी सलमान खान का प्रत्यक्ष रूप से नाम नहीं लिया गया है। बचाव पक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रचार सामग्री तैयार करने में किसी प्रकार की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया गया है और फिल्म सार्वजनिक रूप से उपलब्ध घटनाओं पर आधारित है।

    दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया कि फिल्म से जुड़े सभी संबंधित लिंक और प्रचार सामग्री हटाई जाए ताकि किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी का प्रसार रोका जा सके। अदालत का मानना था कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक ऐसे कंटेंट का सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहना उचित नहीं है।

    गौरतलब है कि काला हिरण द बैटल फॉर लेगेसी की घोषणा के बाद से ही यह फिल्म लगातार विवादों में रही है। सलमान खान ने अदालत में कहा था कि फिल्म की कहानी और उसके प्रचार का तरीका लोगों की धारणा को प्रभावित कर सकता है और इससे उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंच सकता है। इसी आधार पर उन्होंने फिल्म के प्रदर्शन और प्रचार पर रोक लगाने की मांग की थी।

    दिल्ली हाईकोर्ट के इस ताजा आदेश के बाद फिल्म की रिलीज और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यह मामला केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं है बल्कि कलाकारों के व्यक्तित्व अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कानूनी उदाहरण भी माना जा रहा है। आने वाले दिनों में अदालत की अगली सुनवाई इस विवाद की दिशा तय करेगी।

  • आवाज के जादूगर ही नहीं बड़े दिल वाले इंसान भी थे किशोर कुमार फीस लेने के बाद जो किया उसने जीत लिया हर किसी का दिल

    आवाज के जादूगर ही नहीं बड़े दिल वाले इंसान भी थे किशोर कुमार फीस लेने के बाद जो किया उसने जीत लिया हर किसी का दिल


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के महान गायक और अभिनेता किशोर कुमार अपनी अनोखी गायकी बेहतरीन अभिनय और मस्तमौला स्वभाव के लिए हमेशा याद किए जाते हैं। उनकी जिंदगी से जुड़े कई ऐसे किस्से हैं जो आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं। ऐसा ही एक किस्सा उनकी दरियादिली और बड़े दिल का है जिसने यह साबित कर दिया कि उनके लिए रिश्ते और इंसानियत पैसों से कहीं ज्यादा मायने रखते थे।

    यह घटना उस समय की है जब निर्देशक सुधाकर शर्मा अपनी फिल्म का निर्माण कर रहे थे। वह चाहते थे कि फिल्म का एक खास गीत किशोर कुमार अपनी आवाज में गाएं। सुधाकर शर्मा पहले कई वर्षों तक किशोर कुमार के साथ सहायक के रूप में काम कर चुके थे इसलिए उन्हें उम्मीद थी कि पुराने संबंधों को देखते हुए किशोर कुमार आसानी से तैयार हो जाएंगे।

    जब उन्होंने किशोर कुमार से फिल्म में गाना गाने का अनुरोध किया तो किशोर कुमार ने मुस्कुराते हुए कहा कि वह गीत जरूर गाएंगे लेकिन इसके लिए उन्हें पूरे 17 हजार रुपये फीस चाहिए और एक रुपया भी कम स्वीकार नहीं करेंगे। उस दौर में यह रकम काफी बड़ी मानी जाती थी। यह सुनकर सुधाकर शर्मा हैरान रह गए क्योंकि उन्हें लगा था कि वर्षों पुराने रिश्ते की वजह से फीस में रियायत मिल सकती है।

    इसके बावजूद उन्होंने किसी तरह रकम की व्यवस्था की और रिकॉर्डिंग की तैयारी पूरी की। तय समय पर किशोर कुमार स्टूडियो पहुंचे और पूरे मन से गीत रिकॉर्ड किया। बताया जाता है कि गीत की रिकॉर्डिंग पूरी होने के बाद उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि जब इतने पैसे लिए हैं तो एक अंतरा और रिकॉर्ड करवा लो। स्टूडियो में मौजूद सभी लोग उनकी बात सुनकर मुस्कुरा उठे।

    रिकॉर्डिंग खत्म होने के बाद सुधाकर शर्मा ने 17 हजार रुपये किशोर कुमार को सौंप दिए। किशोर कुमार ने पैसे अपने पास रख लिए लेकिन जैसे ही वह स्टूडियो से निकलने लगे उन्होंने चुपचाप पूरी रकम वापस सुधाकर शर्मा को लौटा दी। इतना ही नहीं उन्होंने उनसे कहा कि किसी को भी यह मत बताना कि मैंने पैसे वापस कर दिए हैं। घर जाकर यह रकम अपनी पत्नी को दे देना क्योंकि फिल्म बनाना आसान काम नहीं होता और परिवार की जिम्मेदारियां भी साथ चलती हैं।

    किशोर कुमार का यह व्यवहार देखकर सुधाकर शर्मा भावुक हो गए। उन्हें समझ आ गया कि फीस मांगना शायद केवल उनकी आर्थिक स्थिति को समझने और उनकी मदद करने का एक तरीका था। बिना किसी दिखावे के सहायता करना किशोर कुमार की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक थी।

    किशोर कुमार ने अपने करियर में हजारों गीत गाए और राजेश खन्ना अमिताभ बच्चन देव आनंद ऋषि कपूर जैसे कई बड़े सितारों की आवाज बने। उन्हें आठ फिल्मफेयर पुरस्कार मिले और आज भी उनके गीत हर पीढ़ी के लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। लेकिन उनकी महानता केवल उनकी गायकी तक सीमित नहीं थी बल्कि उनके व्यक्तित्व में छिपी संवेदनशीलता और उदारता भी उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती है।

    आज भी जब किशोर कुमार का नाम लिया जाता है तो उनकी अमर आवाज के साथ ऐसे प्रेरणादायक किस्से भी याद आते हैं जो बताते हैं कि असली महानता केवल सफलता से नहीं बल्कि बड़े दिल और नेक इंसानियत से हासिल होती है।

  • मां की एक सलाह ने बदल दी जिंदगी धर्मेंद्र नहीं चाहते थे कि हेमा मालिनी राजनीति में जाएं एक्ट्रेस ने सुनाया दिलचस्प किस्सा

    मां की एक सलाह ने बदल दी जिंदगी धर्मेंद्र नहीं चाहते थे कि हेमा मालिनी राजनीति में जाएं एक्ट्रेस ने सुनाया दिलचस्प किस्सा


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की ड्रीम गर्ल और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता हेमा मालिनी ने अपने राजनीतिक सफर को लेकर एक दिलचस्प खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया था तब उनके पति और दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र इसके पक्ष में नहीं थे। इसका कारण किसी राजनीतिक मतभेद से ज्यादा उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता थी। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में हेमा मालिनी ने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान होने वाली भारी भीड़ और लगातार हेलिकॉप्टर से यात्रा करना धर्मेंद्र को हमेशा परेशान करता था।

    हेमा मालिनी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से उन्हें अलग अलग राज्यों में चुनाव प्रचार के लिए भेजा जाता था जहां हजारों लोगों की भीड़ उमड़ती थी। ऐसी परिस्थितियों को देखकर धर्मेंद्र हमेशा चिंतित रहते थे। वह बार बार उनसे सुरक्षित रहने की सलाह देते और पूछते कि क्या इतना जोखिम उठाना वास्तव में जरूरी है। चुनाव प्रचार के दौरान हेलिकॉप्टर से लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने पर भी उन्हें काफी चिंता रहती थी। हालांकि हेमा मालिनी का कहना है कि पार्टी की जिम्मेदारी होने के कारण उन्हें अपना दायित्व निभाना पड़ता था।

    उन्होंने बताया कि राजनीति की ओर उनका झुकाव वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव के दौरान शुरू हुआ जब उन्होंने अभिनेता और भाजपा नेता विनोद खन्ना के लिए चुनाव प्रचार किया था। उसी दौरान उन्होंने पहली बार इतनी बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन और स्नेह देखा। उन्होंने कहा कि जब भी चुनावी सभाओं में विशाल भीड़ उमड़ती थी तो उन्हें विश्वास ही नहीं होता था कि इतने लोग उन्हें देखने और सुनने आए हैं। लोगों का यह प्रेम उनके लिए बेहद भावुक और प्रेरणादायक अनुभव था।

    हेमा मालिनी ने यह भी बताया कि शुरुआत में उन्होंने राजनीति में आने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था। लेकिन उनकी मां ने उन्हें समझाया कि अब केवल अभिनय तक सीमित रहने के बजाय देश के लिए भी योगदान देने का समय आ गया है। उनकी मां ने उन्हें बताया कि भाजपा में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे बड़े और सम्मानित नेता हैं तथा यह अवसर देश सेवा का माध्यम बन सकता है। मां की यह बात उनके मन को छू गई और उन्होंने राजनीति में सक्रिय होने का निर्णय ले लिया।

    एक्ट्रेस ने अपने पहले चुनाव से जुड़ा एक और रोचक प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने पार्टी के सामने स्पष्ट शर्त रखी थी कि यदि वह चुनाव लड़ेंगी तो केवल मथुरा लोकसभा सीट से ही लड़ेंगी क्योंकि वह भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त हैं और मथुरा से उनका विशेष आध्यात्मिक जुड़ाव है। बाद में पार्टी ने उनकी इच्छा का सम्मान किया और उन्हें मथुरा से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने इस दौरान दिवंगत नेताओं सुषमा स्वराज और अरुण जेटली के सहयोग को भी याद करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया।

    फिल्मी दुनिया में दशकों तक अपनी अभिनय प्रतिभा से दर्शकों का दिल जीतने वाली हेमा मालिनी आज राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में मनोरंजन और जनसेवा दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनका यह अनुभव बताता है कि परिवार की चिंताओं और व्यक्तिगत दुविधाओं के बावजूद यदि उद्देश्य स्पष्ट हो तो जीवन में नए रास्ते अपनाए जा सकते हैं।

  • शीजान खान ने अपनाई शाकाहारी डाइट, बोले- सही पोषण से बिना नॉनवेज भी बनाए रखी जा सकती है फिटनेस

    शीजान खान ने अपनाई शाकाहारी डाइट, बोले- सही पोषण से बिना नॉनवेज भी बनाए रखी जा सकती है फिटनेस

    नई दिल्ली । टेलीविजन अभिनेता शीजान खान ने अपनी फिटनेस और खान-पान से जुड़ा एक अहम बदलाव साझा करते हुए बताया है कि उन्होंने पूरी तरह शाकाहारी जीवनशैली अपना ली है। उनका कहना है कि लंबे समय से प्रचलित इस धारणा को उन्होंने अपने अनुभव से गलत साबित किया है कि बेहतर फिटनेस और मसल्स बनाने के लिए नॉनवेज भोजन अनिवार्य होता है। अभिनेता के अनुसार, संतुलित पोषण और सही डाइट प्लानिंग के जरिए शाकाहारी भोजन के साथ भी शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिल सकते हैं।

    इन दिनों अपने टीवी शो ‘गंगा मैया की बेटियां’ में नजर आ रहे शीजान खान ने बताया कि शूटिंग के दौरान लंबे और व्यस्त कार्य घंटे होने के कारण ऊर्जा बनाए रखना उनके लिए बेहद जरूरी होता है। इसी वजह से वह अपनी डाइट को लेकर विशेष सतर्क रहते हैं और हर भोजन में पोषण का संतुलन बनाए रखने की कोशिश करते हैं। उनका मानना है कि फिटनेस केवल अधिक भोजन करने से नहीं, बल्कि सही पोषक तत्वों का उचित मात्रा में सेवन करने से हासिल होती है।

    अभिनेता ने बताया कि वह अपनी रोजमर्रा की डाइट में प्रोटीन और फाइबर पर विशेष ध्यान देते हैं। उनके अनुसार, पनीर शाकाहारी भोजन में प्रोटीन का अच्छा स्रोत है, जबकि प्रोटीन शेक उनकी दैनिक पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है। उनका कहना है कि संतुलित भोजन और नियमित दिनचर्या ही फिटनेस बनाए रखने का सबसे प्रभावी तरीका है।

    शीजान खान ने यह भी स्वीकार किया कि पहले उन्हें लगता था कि यदि वह चिकन और अंडे जैसे खाद्य पदार्थ छोड़ देंगे तो उनकी मांसपेशियों की मजबूती और फिटनेस प्रभावित होगी। हालांकि, शाकाहारी जीवनशैली अपनाने के बाद उनका अनुभव इससे बिल्कुल अलग रहा। उन्होंने बताया कि उचित योजना के साथ तैयार की गई डाइट ने उन्हें यह महसूस कराया कि शरीर को आवश्यक पोषण केवल नॉनवेज से ही नहीं, बल्कि शाकाहारी स्रोतों से भी मिल सकता है।

    उन्होंने कहा कि उन्हें पूरी तरह शाकाहारी बने लगभग छह महीने हो चुके हैं और यह पहली बार है जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपने इस बदलाव के बारे में विस्तार से बात की है। उनके अनुसार, इस दौरान उन्होंने अपनी फिटनेस, ऊर्जा और मसल्स में कोई नकारात्मक बदलाव महसूस नहीं किया। इसके विपरीत, सही खान-पान और अनुशासित जीवनशैली ने उन्हें पहले की तरह सक्रिय बनाए रखा है।

    डाइट और फिटनेस के अलावा शीजान खान ने अपने एक अन्य शौक का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्हें खाना बनाना बेहद पसंद है। हालांकि, व्यस्त शूटिंग शेड्यूल के कारण उन्हें रसोई में अधिक समय बिताने का अवसर नहीं मिल पाता, लेकिन जब भी समय मिलता है, वह अपने लिए और दोस्तों के लिए खाना बनाना पसंद करते हैं। उनका मानना है कि घर का संतुलित और पौष्टिक भोजन स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    शीजान खान का कहना है कि फिटनेस का मूल आधार केवल किसी एक प्रकार के भोजन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि संतुलित पोषण, नियमित व्यायाम और अनुशासित दिनचर्या पर आधारित होता है। उनका अनुभव उन लोगों के लिए भी प्रेरणादायक हो सकता है, जो शाकाहारी भोजन अपनाने के बाद फिटनेस को लेकर संदेह रखते हैं। अभिनेता का मानना है कि यदि भोजन की योजना वैज्ञानिक और संतुलित तरीके से बनाई जाए, तो शाकाहारी आहार के साथ भी बेहतर स्वास्थ्य और मजबूत फिटनेस हासिल की जा सकती है।

  • 'लवयात्री' के बाद करियर में आया ठहराव, आयुष शर्मा ने संघर्ष और एक्टिंग स्कूल लौटने का किया खुलासा

    'लवयात्री' के बाद करियर में आया ठहराव, आयुष शर्मा ने संघर्ष और एक्टिंग स्कूल लौटने का किया खुलासा

    नई दिल्ली । अभिनेता आयुष शर्मा ने अपने फिल्मी करियर के संघर्ष को लेकर खुलकर बात करते हुए बताया है कि पहली फिल्म के बाद उन्हें उम्मीद के अनुरूप काम नहीं मिला। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें विश्वास था कि डेब्यू के बाद नए प्रोजेक्ट्स के प्रस्ताव आएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसी अनुभव ने उन्हें अपने अभिनय पर दोबारा काम करने और खुद को बेहतर बनाने के लिए फिर से एक्टिंग स्कूल जाने के लिए प्रेरित किया।

    आयुष शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत फिल्म ‘लवयात्री’ से की थी। इस फिल्म से उन्हें काफी उम्मीदें थीं और उन्हें लगा था कि इसके बाद उन्हें अलग-अलग तरह की फिल्मों के प्रस्ताव मिलेंगे। हालांकि, उनकी अपेक्षाओं के विपरीत ऐसा नहीं हुआ। उनका कहना है कि पहली फिल्म में उनके अभिनय को वैसी सराहना नहीं मिली, जिसकी उन्होंने उम्मीद की थी। इसके चलते उन्हें अपने करियर की दिशा पर दोबारा गंभीरता से विचार करना पड़ा।

    उन्होंने कहा कि अभिनय के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए केवल पहली फिल्म पर्याप्त नहीं होती, बल्कि लगातार अच्छा प्रदर्शन और दर्शकों की स्वीकृति भी जरूरी होती है। इसी सोच के साथ उन्होंने दोबारा एक्टिंग स्कूल जाकर अपनी कला को और निखारने का फैसला किया। उनका मानना है कि एक कलाकार के लिए सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती और हर अनुभव उसे बेहतर बनने का अवसर देता है।

    आयुष शर्मा ने यह भी बताया कि उनके करियर के शुरुआती दौर में अभिनेता सलमान खान ने उन्हें लगातार मार्गदर्शन दिया। फिल्मों के चयन से लेकर अभिनय से जुड़े कई पहलुओं पर उन्हें सलाह मिलती रही। उन्होंने कहा कि फिल्म उद्योग का अनुभव कम होने के कारण उन्होंने वरिष्ठ कलाकार के रूप में सलमान खान के सुझावों को हमेशा गंभीरता से लिया। बाद में दोनों ने फिल्म ‘अंतिम: द फाइनल ट्रुथ’ में साथ काम किया, जिससे उन्हें उम्मीद थी कि उनके करियर को नई गति मिलेगी।

    उन्होंने स्वीकार किया कि ‘अंतिम’ के बाद भी उन्हें वैसी फिल्में नहीं मिलीं, जैसी वे करना चाहते थे। उनके अनुसार फिल्म उद्योग में अवसर काफी हद तक बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन पर निर्भर करते हैं। यदि किसी कलाकार की फिल्में व्यावसायिक रूप से अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पातीं, तो नए अवसर सीमित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे लगातार अच्छे किरदारों की तलाश में हैं और भविष्य में चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं निभाना चाहते हैं।

    आयुष शर्मा का मानना है कि फिल्मी करियर में संघर्ष हर कलाकार के सफर का हिस्सा होता है। उन्होंने कहा कि कठिन समय के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने कौशल को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया। उनका विश्वास है कि लगातार मेहनत और सही अवसर मिलने पर कलाकार अपनी पहचान बना सकता है। इसी सोच के साथ वे भविष्य की परियोजनाओं का इंतजार कर रहे हैं और अपने अभिनय के माध्यम से दर्शकों का भरोसा जीतना चाहते हैं।

    आयुष शर्मा ने वर्ष 2018 में फिल्म ‘लवयात्री’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने ‘अंतिम: द फाइनल ट्रुथ’ और ‘रुसलान’ जैसी फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाईं। हालांकि अब तक उनका सफर अपेक्षित सफलता तक नहीं पहुंच सका है, लेकिन उनका कहना है कि वे अपने अभिनय को लगातार बेहतर बनाने और नए अवसरों के लिए पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

  • दुबई की कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ अभिनय में आजमाई किस्मत, ट्रांसजेंडर 'कुकू' बनकर रातोंरात मिली अलग पहचान

    दुबई की कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ अभिनय में आजमाई किस्मत, ट्रांसजेंडर 'कुकू' बनकर रातोंरात मिली अलग पहचान

    नई दिल्ली । अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली अभिनेत्री कुब्रा सैत आज अपना जन्मदिन मना रही हैं। फिल्मों, वेब सीरीज और टेलीविजन प्रस्तुति के जरिए दर्शकों के बीच लोकप्रिय हुईं कुब्रा का सफर संघर्ष, मेहनत और लगातार सीखने की मिसाल माना जाता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि मनोरंजन जगत में कदम रखने से पहले वह दुबई में एक निजी कंपनी में अकाउंट मैनेजर के तौर पर काम करती थीं। बाद में उन्होंने स्थिर नौकरी छोड़कर अभिनय की दुनिया में अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया।

    कुब्रा सैत ने कम उम्र से ही मंच संचालन और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेना शुरू कर दिया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वित्त और मार्केटिंग की शिक्षा हासिल की और वर्ष 2005 में दुबई जाकर अकाउंट मैनेजर के रूप में अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की। उन्होंने करीब तीन वर्षों तक कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम किया, लेकिन अभिनय और प्रस्तुति के प्रति उनका लगाव लगातार बना रहा। इसी जुनून ने उन्हें मनोरंजन उद्योग की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

    अभिनय की शुरुआत उन्होंने एक अमीराती फीचर फिल्म में छोटे से किरदार से की। इसके बाद भारत लौटकर उन्होंने मॉडलिंग, एंकरिंग और अभिनय के क्षेत्र में लगातार काम किया। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उनकी एंट्री वर्ष 2009 में हुई, जब उन्हें फिल्म रेडी में एक सहायक भूमिका निभाने का अवसर मिला। इसके बाद वह जोड़ी ब्रेकर्स, आई लव न्यू ईयर, सुल्तान, गली बॉय, देवा और सन ऑफ सरदार 2 जैसी फिल्मों में अलग-अलग भूमिकाओं में दिखाई दीं।

    हालांकि फिल्मों में लगातार काम करने के बावजूद कुब्रा सैत को वह पहचान नहीं मिल सकी जिसकी उन्हें तलाश थी। उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ OTT प्लेटफॉर्म पर आई वेब सीरीज सेक्रेड गेम्स साबित हुई। इस सीरीज में उन्होंने ट्रांसजेंडर ‘कुकू’ का किरदार निभाया, जिसने दर्शकों और समीक्षकों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद उनके अभिनय की व्यापक सराहना हुई और यह भूमिका उनके करियर की सबसे यादगार प्रस्तुतियों में शामिल हो गई।

    ‘कुकू’ के किरदार में कुब्रा सैत ने भावनात्मक गहराई, आत्मविश्वास और संवेदनशीलता का ऐसा संतुलन दिखाया, जिसने इस चरित्र को लंबे समय तक यादगार बना दिया। इस भूमिका ने उन्हें केवल लोकप्रियता ही नहीं दिलाई, बल्कि एक सक्षम और बहुमुखी अभिनेत्री के रूप में भी स्थापित किया। इसके बाद उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म और फिल्मों में लगातार नए और चुनौतीपूर्ण किरदार मिलने लगे।

    कुब्रा सैत ने अपने अभिनय करियर के दौरान यह साबित किया कि सफलता केवल बड़े किरदारों से नहीं, बल्कि प्रभावशाली प्रस्तुति से मिलती है। उन्होंने हर भूमिका में अलग पहचान बनाने की कोशिश की और अपनी अभिनय शैली से दर्शकों का भरोसा जीता। मनोरंजन जगत में उनकी पहचान एक ऐसी कलाकार के रूप में बनी, जो पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़कर चुनौतीपूर्ण किरदार निभाने का साहस रखती हैं।

    आज कुब्रा सैत का सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा माना जाता है, जो अपने सुरक्षित करियर को छोड़कर अपने सपनों को पूरा करने का साहस दिखाते हैं। दुबई की कॉर्पोरेट नौकरी से लेकर भारतीय मनोरंजन जगत में मजबूत पहचान बनाने तक का उनका सफर यह साबित करता है कि प्रतिभा, मेहनत और सही अवसर मिलकर किसी भी कलाकार के जीवन की दिशा बदल सकते हैं।

  • 'जिंदगी कैसी है पहेली' पहले सिर्फ बैकग्राउंड ट्रैक था, राजेश खन्ना की जिद ने बना दिया फिल्म का सबसे यादगार दृश्य

    'जिंदगी कैसी है पहेली' पहले सिर्फ बैकग्राउंड ट्रैक था, राजेश खन्ना की जिद ने बना दिया फिल्म का सबसे यादगार दृश्य


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ गीत ऐसे हैं जो समय के साथ केवल लोकप्रिय नहीं, बल्कि अमर बन जाते हैं। वर्ष 1971 में रिलीज हुई फिल्म आनंद का गीत जिंदगी कैसी है पहेली भी उन्हीं कालजयी गीतों में शामिल है। यह गीत आज भी अपनी गहरी भावनाओं, अर्थपूर्ण बोल और मधुर धुन के लिए याद किया जाता है। हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि शुरुआत में इस गीत को फिल्म का हिस्सा नहीं, बल्कि केवल बैकग्राउंड ट्रैक के रूप में इस्तेमाल करने की योजना थी।

    फिल्म के निर्माण के दौरान निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी ने इस गीत को शुरुआती शीर्षक या बैकग्राउंड संगीत के रूप में रखने का विचार बनाया था। गीतकार योगेश के लिखे शब्द और संगीत की गहराई के बावजूद इसे किसी दृश्य पर फिल्माने की योजना नहीं थी। उस दौर में बैकग्राउंड में इस्तेमाल होने वाले कई गीत दर्शकों तक व्यापक रूप से नहीं पहुंच पाते थे।

    बताया जाता है कि जब राजेश खन्ना ने जिंदगी कैसी है पहेली सुना तो वह इसके भाव और शब्दों से बेहद प्रभावित हुए। उन्हें लगा कि इतना प्रभावशाली गीत केवल बैकग्राउंड में सीमित रह जाएगा तो दर्शक उसकी पूरी खूबसूरती महसूस नहीं कर पाएंगे। उन्होंने निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी से आग्रह किया कि इस गीत के लिए फिल्म में एक उपयुक्त दृश्य तैयार किया जाए, ताकि इसे कहानी का अभिन्न हिस्सा बनाया जा सके।

    राजेश खन्ना के इस सुझाव को स्वीकार किया गया और गीत को फिल्म की कथा के साथ जोड़ा गया। पर्दे पर उनके सहज अभिनय और मन्ना डे की भावपूर्ण आवाज ने इस गीत को ऐसी ऊंचाई दी कि यह हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार गीतों में गिना जाने लगा। जीवन, मृत्यु और मानवीय भावनाओं को सरल शब्दों में व्यक्त करने वाला यह गीत आज भी हर पीढ़ी के दर्शकों को समान रूप से प्रभावित करता है।

    आनंद की कहानी एक ऐसे व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जो गंभीर बीमारी से जूझने के बावजूद जीवन को पूरी सकारात्मकता और मुस्कान के साथ जीने में विश्वास रखता है। फिल्म में राजेश खन्ना ने आनंद का किरदार निभाया, जबकि अमिताभ बच्चन डॉक्टर भास्कर के रूप में दिखाई दिए। दोनों कलाकारों की अभिनय क्षमता और ऋषिकेश मुखर्जी के संवेदनशील निर्देशन ने इस फिल्म को भारतीय सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में स्थान दिलाया।

    फिल्म के संवाद भी उतने ही लोकप्रिय हुए जितने इसके गीत। “बाबूमोशाय, जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं” जैसे संवाद आज भी लोगों की जुबान पर हैं। इसी तरह कहीं दूर जब दिन ढल जाए, मैंने तेरे लिए, ना जिया लगे ना और जिंदगी कैसी है पहेली जैसे गीत समय की कसौटी पर खरे उतरे और आज भी संगीत प्रेमियों की पसंद बने हुए हैं।

    जिंदगी कैसी है पहेली की लोकप्रियता केवल इसकी धुन या गायकी तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह गीत जीवन के दर्शन को सरल और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करने के कारण भी विशेष पहचान रखता है। राजेश खन्ना की दूरदर्शिता और निर्देशक के फैसले ने एक ऐसे गीत को जन्म दिया, जो आज भी भारतीय सिनेमा की अमूल्य धरोहर माना जाता है और नई पीढ़ी के बीच भी उतनी ही श्रद्धा और भावनात्मक जुड़ाव के साथ सुना जाता है।

  • वीकेंड पर क्या देखें यहां है इस हफ्ते रिलीज होने वाली फिल्मों की पूरी लिस्ट एक्शन कॉमेडी रोमांस और फैमिली ड्रामा सब कुछ मिलेगा

    वीकेंड पर क्या देखें यहां है इस हफ्ते रिलीज होने वाली फिल्मों की पूरी लिस्ट एक्शन कॉमेडी रोमांस और फैमिली ड्रामा सब कुछ मिलेगा

    नई दिल्ली । अगर आप वीकेंड पर परिवार या दोस्तों के साथ थिएटर में नई फिल्म देखने की योजना बना रहे हैं तो यह सप्ताह आपके लिए शानदार रहने वाला है। 27 जुलाई से 2 अगस्त के बीच बड़े पर्दे पर एक्शन सुपरहीरो कॉमेडी फैमिली ड्रामा और रोमांस से भरपूर कई फिल्में रिलीज होने जा रही हैं। हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक अलग अलग जॉनर की फिल्मों के साथ दर्शकों को मनोरंजन का भरपूर मौका मिलेगा।

    स्पाइडर मैन ब्रांड न्यू डे
    रिलीज डेट – 30 जुलाई
    इस सप्ताह की सबसे बड़ी रिलीज हॉलीवुड की सुपरहीरो फिल्म स्पाइडर मैन ब्रांड न्यू डे है। फिल्म में पीटर पार्कर अपनी सुपरहीरो पहचान से दूर एक सामान्य कॉलेज छात्र की जिंदगी जीने की कोशिश करता है। लेकिन जब उसके करीबियों पर नया खतरा मंडराता है तो उसे फिर से स्पाइडर मैन बनकर दुनिया की रक्षा के लिए मैदान में उतरना पड़ता है। एक्शन और सुपरहीरो फिल्मों के प्रशंसकों के लिए यह फिल्म खास आकर्षण होगी।

    भाई तेरा स्टार है
    रिलीज डेट – 30 जुलाई
    राघव जुयाल अभिनीत यह फिल्म कॉमेडी और फैमिली ड्रामा का अनोखा मिश्रण है। कहानी एक ऐसे अभिनेता की है जो क्रिकेट सट्टेबाजी के कारण कर्ज में फंस जाता है। मुश्किलों से निकलने की कोशिश में बोला गया एक झूठ उसे और उसके परिवार को हास्यास्पद और रोमांचक घटनाओं के बीच पहुंचा देता है। राघव जुयाल की कॉमिक टाइमिंग इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत मानी जा रही है।

    ओह माय डॉग
    नई रिलीज डेट – 7 अगस्त
    यह फिल्म पहले 31 जुलाई को रिलीज होने वाली थी लेकिन निर्माताओं ने इसकी रिलीज टाल दी है। अब यह 7 अगस्त को सिनेमाघरों में आएगी। फिल्म एक छोटे बच्चे और एक बेघर कुत्ते के बीच बने भावनात्मक रिश्ते की कहानी है। पेट लवर्स और पारिवारिक दर्शकों के लिए यह एक भावुक और प्रेरणादायक फिल्म मानी जा रही है।

    दिल दीवाना हो गया
    रिलीज डेट – 31 जुलाई
    रोमांस और फैमिली ड्रामा से भरपूर यह फिल्म राहुल नैना और राज की जिंदगी के इर्द गिर्द घूमती है। प्यार विश्वास त्याग और रिश्तों की खूबसूरती को दर्शाती यह म्यूजिकल फिल्म पूरे परिवार के साथ देखने के लिए उपयुक्त मानी जा रही है। साफ सुथरी कहानी और पारिवारिक भावनाओं के कारण यह फिल्म हर आयु वर्ग के दर्शकों को पसंद आ सकती है।

    इस सप्ताह सिनेमाघरों में हर वर्ग के दर्शकों के लिए कुछ न कुछ खास मौजूद है। जहां सुपरहीरो फिल्मों के प्रशंसकों के लिए स्पाइडर मैन सबसे बड़ा आकर्षण रहेगा वहीं कॉमेडी पसंद करने वालों के लिए भाई तेरा स्टार है और पारिवारिक दर्शकों के लिए दिल दीवाना हो गया अच्छी पसंद साबित हो सकती है। हालांकि ओह माय डॉग देखने के लिए दर्शकों को अब 7 अगस्त तक इंतजार करना होगा।

  • रावण बनने के लिए यश का अनोखा तरीका बड़े स्पीकर्स पर बजाते थे शिव भक्ति के गाने सेट पर बात करना भी हो जाता था मुश्किल

    रावण बनने के लिए यश का अनोखा तरीका बड़े स्पीकर्स पर बजाते थे शिव भक्ति के गाने सेट पर बात करना भी हो जाता था मुश्किल


    नई दिल्ली । फिल्म रामायण के बहुप्रतीक्षित ट्रेलर लॉन्च के दौरान अभिनेता यश ने शूटिंग से जुड़ा एक दिलचस्प अनुभव साझा किया। रावण का किरदार निभा रहे यश ने बताया कि वह सेट पर बड़े स्पीकर्स लेकर आते थे और तेज आवाज में शिव भक्ति के गीत बजाते थे। उन्होंने हंसते हुए कहा कि उनकी इस आदत से पूरे सेट का माहौल बदल जाता था और कई बार लोगों को बातचीत करने में भी दिक्कत होती थी।

    सैन डिएगो कॉमिक कॉन में फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के दौरान रणबीर कपूर निर्देशक नितेश तिवारी निर्माता नमित मल्होत्रा और यश मौजूद रहे। बातचीत के दौरान जब यश से पूछा गया कि वह हर दिन खुद को रावण के किरदार में कैसे ढालते थे तो उन्होंने बताया कि जैसे ही वह रावण का विशाल मुकुट पहनते थे वह अपने किरदार के भाव में पहुंच जाते थे। इसके साथ ही संगीत भी उनके लिए इस तैयारी का अहम हिस्सा था।

    इसी दौरान निर्देशक नितेश तिवारी ने यश को उनके तेज म्यूजिक की याद दिलाई। इस पर यश ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्होंने एक तरह से पूरे सेट का माहौल बदल दिया था। वह बड़े स्पीकर्स पर पूरी आवाज में गाने चलाते थे ताकि अपने किरदार की मानसिक स्थिति में बने रह सकें।

    यश ने बताया कि वह खास तौर पर भगवान शिव की भक्ति से जुड़े गीत सुनते थे। उनके अनुसार रावण भगवान शिव का परम भक्त था इसलिए वह उसी भक्ति और ऊर्जा को महसूस करना चाहते थे। उनका मानना था कि इस तरह का माहौल उन्हें अपने अभिनय में गहराई लाने में मदद करता था। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि तेज संगीत के कारण सेट पर मौजूद अन्य लोगों को बातचीत करने में परेशानी होती थी।

    रणबीर कपूर ने भी इस दौरान यश की तारीफ करते हुए कहा कि भले ही पहले भाग में उनके और यश के साथ कोई दृश्य नहीं है लेकिन जिन कलाकारों ने यश के साथ काम किया उन्होंने बताया कि उनका व्यक्तित्व और उनकी तैयारी पूरे सेट की ऊर्जा बदल देती थी। रणबीर ने कहा कि यश का प्रभाव इतना मजबूत था कि उनके किरदार की झलक शूटिंग के माहौल में भी महसूस होती थी।

    फिल्म रामायण का पहला भाग इस साल दिवाली पर रिलीज होने वाला है। पहले भाग में राम और रावण आमने सामने नहीं दिखाई देंगे जबकि दोनों के बीच महायुद्ध दूसरे भाग में दिखाया जाएगा जो वर्ष 2027 में रिलीज होगा। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम के रूप में और यश रावण के किरदार में नजर आएंगे। इसके अलावा साई पल्लवी सीता सनी देओल हनुमान काजल अग्रवाल मंदोदरी रवि दुबे लक्ष्मण अरुण गोविल दशरथ और लारा दत्ता कैकेयी सहित कई कलाकार अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे।

  • वाराणसी की आध्यात्मिक यात्रा ने छुआ निवेथा पेथुराज का मन, काशी विश्वनाथ और मां गंगा पर लिखी भावुक बात

    वाराणसी की आध्यात्मिक यात्रा ने छुआ निवेथा पेथुराज का मन, काशी विश्वनाथ और मां गंगा पर लिखी भावुक बात

    नई दिल्ली । दक्षिण भारतीय फिल्म अभिनेत्री निवेथा पेथुराज एक बार फिर अपनी आध्यात्मिक यात्रा को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने वाराणसी स्थित काशी की यात्रा की कुछ झलकियां साझा करते हुए अपने अनुभवों को भावनात्मक शब्दों में व्यक्त किया है। अभिनेत्री ने बताया कि कुछ स्थान केवल घूमने के लिए नहीं होते, बल्कि वे इंसान को अपने भीतर झांकने और ईश्वर से जुड़ने का अवसर देते हैं। उनकी इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया मिल रही है और प्रशंसक उनकी आस्था तथा विचारों की सराहना कर रहे हैं।

    निवेथा पेथुराज ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर काशी यात्रा का एक वीडियो साझा किया, जिसमें घाटों, मंदिरों और आध्यात्मिक वातावरण की झलक दिखाई गई। इसके साथ उन्होंने लिखा कि जब भी वह मणिकर्णिका घाट पर बैठकर मां गंगा के प्रवाह को देखती हैं, तो उन्हें उत्तरों से अधिक नए प्रश्न मिलते हैं। उनके अनुसार, मां गंगा सदियों के इतिहास की साक्षी रही हैं, लेकिन इसके बावजूद बिना किसी रुकावट और शिकायत के निरंतर बहती रहती हैं। यही निरंतरता और धैर्य जीवन के लिए सबसे बड़ी सीख प्रतीत होती है।

    अभिनेत्री ने अपनी पोस्ट में यह भी लिखा कि वह अक्सर सोचती हैं कि क्या मां गंगा हर व्यक्ति को यही संदेश देने का प्रयास करती हैं कि जीवन में परिस्थितियों से उलझने के बजाय निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। उन्होंने इस अनुभव को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आत्मचिंतन से जुड़ा एक गहरा एहसास बताया। उनके शब्दों में काशी का वातावरण व्यक्ति को स्वयं से संवाद करने का अवसर देता है और यही इस शहर की सबसे बड़ी विशेषता है।

    निवेथा ने अपनी यात्रा के दौरान मिले धार्मिक अनुभवों का भी विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उन्हें काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने का सौभाग्य मिला। इसके अलावा उन्होंने महाशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित रुद्री पाठ पूजा में भाग लिया और पवित्र निशिता काल पूजा के दौरान काल भैरव के दर्शन भी किए। उन्होंने इन धार्मिक अनुष्ठानों को अपने जीवन के सबसे यादगार और आध्यात्मिक अनुभवों में शामिल बताया।

    अभिनेत्री ने यह भी कहा कि उन्हें कई बार ऐसा महसूस होता है जैसे भगवान काल भैरव स्वयं उन्हें दोबारा काशी आने के लिए प्रेरित करते हैं। उनके अनुसार, हर बार कोई न कोई ऐसा संयोग बन जाता है, जो उन्हें फिर से इस पवित्र नगरी तक पहुंचा देता है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर काशी उन्हें बार-बार अपनी ओर क्यों आकर्षित करती है, लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार किया कि शायद हर आस्था का उत्तर तर्क से नहीं, बल्कि अनुभूति से मिलता है।

    अपनी पोस्ट के अंतिम हिस्से में निवेथा पेथुराज ने लिखा कि कुछ स्थान केवल यात्रा की मंजिल नहीं होते, बल्कि वे ईश्वर के साथ होने वाली ऐसी मौन बातचीत होते हैं, जिसका प्रभाव वहां से लौटने के बाद भी लंबे समय तक मन में बना रहता है। उनके इस भावनात्मक संदेश को प्रशंसकों ने काफी पसंद किया है। बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए काशी की आध्यात्मिक महिमा और अभिनेत्री की आस्था की सराहना की। निवेथा की यह यात्रा एक बार फिर यह दर्शाती है कि व्यस्त पेशेवर जीवन के बीच भी आध्यात्मिक अनुभव व्यक्ति को आत्मिक शांति और नई ऊर्जा प्रदान कर सकते हैं।