Category: Entertainment
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‘धुरंधर 2’ का बॉक्स ऑफिस धमाका, फिर भी ‘कांतारा’ का रिकॉर्ड बरकरार
नई दिल्ली। बॉक्स ऑफिस पर इन दिनों रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर 2’ और ऋषभ शेट्टी की ‘कांतारा’ को लेकर जबरदस्त चर्चा हो रही है। जहां ‘धुरंधर 2’ ने कमाई के मामले में कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं, वहीं मुनाफे और रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट यानी ROI के मामले में ‘कांतारा’ अब भी सबसे आगे बनी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘कांतारा’ ने ‘धुरंधर 2’ की तुलना में करीब 130 प्रतिशत ज्यादा रिटर्न दिया है, जिसने फिल्म इंडस्ट्री में एक नई बहस छेड़ दी है।ऋषभ शेट्टी की ‘कांतारा’ को बेहद सीमित बजट में तैयार किया गया था, लेकिन रिलीज के बाद फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा धमाका किया कि सभी हैरान रह गए। खासतौर पर हिंदी वर्जन ने अकेले करीब 81 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। कम लागत में बनी इस फिल्म ने लगभग 981 प्रतिशत ROI हासिल किया, जो भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे शानदार रिटर्न में गिना जा रहा है। यही वजह है कि ‘कांतारा’ आज भी कंटेंट और प्रॉफिट दोनों के मामले में मिसाल मानी जाती है।दूसरी तरफ रणवीर सिंह स्टारर ‘धुरंधर 2’ बड़े बजट और हाई-ऑक्टेन एक्शन के साथ सिनेमाघरों में उतरी थी। फिल्म ने दुनियाभर में शानदार प्रदर्शन करते हुए करीब 950 करोड़ रुपये का प्रॉफिट कमाया। रिपोर्ट्स के अनुसार फिल्म का ROI लगभग 400 प्रतिशत के आसपास रहा। कमाई के लिहाज से यह एक बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई, लेकिन प्रतिशत के हिसाब से ‘कांतारा’ ने इसे काफी पीछे छोड़ दिया।हालांकि, जब दोनों फिल्मों की पूरी फ्रेंचाइजी की तुलना की जाती है, तो मुकाबला थोड़ा दिलचस्प हो जाता है। ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ की कुल कमाई और रिटर्न को मिलाकर देखा जाए तो रणवीर सिंह की फ्रेंचाइजी ने ‘कांतारा’ सीरीज को मामूली अंतर से पीछे छोड़ दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘धुरंधर’ फ्रेंचाइजी का कुल ROI करीब 360 प्रतिशत रहा, जबकि ‘कांतारा’ फ्रेंचाइजी लगभग 353 प्रतिशत तक पहुंची।सोशल मीडिया पर भी दोनों फिल्मों को लेकर जबरदस्त बहस देखने को मिल रही है। कई यूजर्स का कहना है कि ‘कांतारा’ ने यह साबित कर दिया कि मजबूत कंटेंट और दमदार कहानी बड़े बजट से ज्यादा असरदार हो सकती है। वहीं रणवीर सिंह के फैंस ‘धुरंधर 2’ को भारत की सबसे बड़ी एक्शन फ्रेंचाइजी बता रहे हैं।फिलहाल बॉक्स ऑफिस की इस जंग में एक बात साफ है कि कम बजट की फिल्में भी सही कंटेंट के दम पर बड़े रिकॉर्ड बना सकती हैं। ‘कांतारा’ और ‘धुरंधर 2’ दोनों ने अपने-अपने अंदाज में दर्शकों का दिल जीता है और भारतीय सिनेमा में नई मिसाल कायम की है। -

धमाकेदार एक्शन और गहरे इमोशंस के साथ वापसी करेगा ‘इंस्पेक्टर अविनाश’, नया सीजन होगा पहले से ज्यादा खतरनाक
नई दिल्ली। रणदीप हुड्डा एक बार फिर अपने चर्चित किरदार इंस्पेक्टर अविनाश के रूप में वापसी करने जा रहे हैं। क्राइम, एक्शन और इमोशंस से भरपूर ‘इंस्पेक्टर अविनाश सीजन 2’ को लेकर दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। इस बार कहानी पहले से ज्यादा गहरी और रोमांचक बताई जा रही है।नए सीजन में इंस्पेक्टर अविनाश सिर्फ अपराधियों से ही नहीं, बल्कि अपनी निजी जिंदगी के संघर्षों से भी जूझते नजर आएंगे। कहानी में भावनात्मक उतार-चढ़ाव के साथ हाई-वोल्टेज एक्शन और सस्पेंस का तड़का देखने को मिलेगा। रणदीप हुड्डा ने संकेत दिया है कि इस बार किरदार का सफर पहले से कहीं ज्यादा कठिन और चुनौतीपूर्ण होगा।
सीरीज की कहानी 90 के दशक के उत्तर प्रदेश की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहां अपराध, राजनीति और व्यक्तिगत संघर्ष एक साथ टकराते दिखाई देंगे। इंस्पेक्टर अविनाश एक ऐसे दौर से गुजरते हैं जहां उनका परिवार, करियर और व्यक्तिगत जीवन सभी मुश्किलों में घिर जाता है।
सीजन 2 में एक्शन सीक्वेंस को पहले से ज्यादा बड़ा और रियलिस्टिक बनाया गया है। साथ ही कहानी में इमोशनल एंगल को भी काफी मजबूत रखा गया है ताकि दर्शकों को हर मोड़ पर रोमांच और भावनात्मक जुड़ाव दोनों महसूस हो सके।
इस सीजन में उर्वशी रौतेला भी अहम भूमिका में नजर आएंगी। उनके किरदार को लेकर भी काफी चर्चा हो रही है। इसके अलावा कई दमदार कलाकार कहानी को और मजबूत बनाते दिखाई देंगे। मेकर्स का दावा है कि नया सीजन दर्शकों को पहले से ज्यादा थ्रिल और ड्रामा देने वाला है।
निर्देशन और लेखन में भी इस बार कहानी को अधिक परतों और संघर्षों के साथ पेश किया गया है। सीरीज में सिर्फ बाहरी लड़ाई ही नहीं बल्कि इंस्पेक्टर अविनाश की अंदरूनी जंग को भी प्रमुखता से दिखाया जाएगा।
क्राइम थ्रिलर पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह सीजन खास होने वाला है। दमदार डायलॉग, तेज रफ्तार कहानी और इमोशनल ड्रामा इसे और ज्यादा दिलचस्प बनाने वाले हैं। जल्द रिलीज होने जा रही यह सीरीज दर्शकों के बीच पहले से ही काफी चर्चा में बनी हुई है।
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बॉलीवुड के सबसे अनुशासित अभिनेता अक्षय कुमार ने कराई आई सर्जरी, फिल्म की शूटिंग खत्म होते ही सेहत पर दिया ध्यान।
नई दिल्ली। बॉलीवुड में अनुशासन और समय की पाबंदी के प्रतीक माने जाने वाले अक्षय कुमार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनके लिए काम और कर्तव्य सर्वोपरि है। ताजा जानकारी के अनुसार, फिल्म जगत के इस ‘खिलाड़ी’ ने अपनी आगामी फिल्म के एक कठिन और लंबे शेड्यूल को सफलतापूर्वक पूरा करने के तुरंत बाद अपनी आँखों की सर्जरी कराई है। सूत्रों का कहना है कि वे पिछले काफी समय से आँखों से संबंधित किसी समस्या से जूझ रहे थे, लेकिन उन्होंने इस परेशानी को अपने काम के आड़े नहीं आने दिया। जैसे ही फिल्म के निर्देशक ने आखिरी शॉट के बाद ‘कट’ बोला, अक्षय ने तुरंत चिकित्सीय सलाह ली और सर्जरी की प्रक्रिया को अंजाम दिया।एक कलाकार के तौर पर अक्षय कुमार की यह निष्ठा नई नहीं है, लेकिन आँखों जैसी संवेदनशील समस्या के साथ घंटों तेज लाइट और कैमरों के सामने काम करना उनकी सहनशक्ति को दर्शाता है। शूटिंग के दौरान सेट पर मौजूद किसी भी व्यक्ति को इस बात का आभास तक नहीं हुआ कि अभिनेता किसी शारीरिक कष्ट से गुजर रहे हैं। जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई, फिल्म बिरादरी और प्रशंसकों के बीच उनकी इस कार्यक्षमता की चर्चा होने लगी। डॉक्टरों के अनुसार, यह एक आवश्यक प्रक्रिया थी जिसे और अधिक समय तक टाला नहीं जा सकता था। सर्जरी सफल रही है और वर्तमान में अभिनेता को पूरी तरह से आराम करने और तेज रोशनी से दूर रहने की हिदायत दी गई है।
अक्षय कुमार की जीवनशैली हमेशा से ही प्रेरणादायक रही है। वे अपनी सुबह की शुरुआत और रात के आराम के लिए जाने जाते हैं, और शायद यही कारण है कि उनकी रिकवरी बहुत तेजी से हो रही है। इस सर्जरी के चलते उनके आने वाले कुछ प्रोजेक्ट्स के शेड्यूल में मामूली बदलाव किए जा सकते हैं, ताकि उन्हें पूरी तरह से ठीक होने का समय मिल सके। उनके करीबियों का कहना है कि वे इस ब्रेक का उपयोग अपने परिवार के साथ समय बिताने और अपनी सेहत को पुनर्जीवित करने में कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनके चाहने वालों ने संदेशों की झड़ी लगा दी है, जिसमें उनके जल्द से जल्द पर्दे पर वापसी की कामना की जा रही है।
फिल्मी पर्दे पर एक्शन और स्टंट करने वाले अक्षय असल जिंदगी में भी अपनी समस्याओं का सामना उतनी ही मजबूती से करते हैं। इस घटना ने एक बार फिर सिनेमाई दुनिया के उस सच को उजागर किया है, जहाँ सितारे अक्सर अपनी तकलीफों को छिपाकर दर्शकों का मनोरंजन करते रहते हैं। यह सर्जरी महज एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि उनकी पेशेवर ईमानदारी का प्रमाण है। उम्मीद है कि कुछ ही दिनों के विश्राम के बाद, वे फिर से उसी ऊर्जा और चमक के साथ सेट पर लौटेंगे जिसके लिए उन्हें जाना जाता है। फिलहाल, पूरा फिल्म उद्योग और उनके करोड़ों प्रशंसक उनकी आँखों की नई रोशनी और बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
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सुरों के सरताज मोहम्मद रफी का वो कालजयी गीत, जिसे गाने के लिए महमूद ने बुलावाया था असली किन्नरों को, आज भी ताजा हैं यादें।
नई दिल्ली। भारतीय संगीत के स्वर्ण युग में जब भी सादगी और प्रतिभा के संगम की बात होती है, तो मोहम्मद रफी का नाम सबसे ऊपर आता है। संगीत जगत के इस महान गायक से जुड़े अनगिनत किस्से आज भी लोगों की आँखों में चमक और दिल में सम्मान भर देते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प और भावुक कर देने वाला वाकया मशहूर कॉमेडियन और अभिनेता महमूद की एक फिल्म के दौरान घटित हुआ था। उस दौर में महमूद अपनी फिल्मों में नवीनता लाने के लिए जाने जाते थे, और उन्होंने एक गीत के फिल्मांकन के लिए कुछ ऐसा करने का निर्णय लिया जो उस समय के सिनेमा के लिए बेहद अनूठा था। उन्होंने तय किया कि एक विशेष गीत के चित्रण में किसी कलाकार के बजाय असली किन्नरों को शामिल किया जाएगा, ताकि उस दृश्य की संवेदनशीलता और वास्तविकता को पर्दे पर जीवंत किया जा सके।जब इस गीत की रिकॉर्डिंग की बात आई, तो सुरों के सम्राट मोहम्मद रफी ने अपनी जादुई आवाज से उसे इस तरह सजाया कि हर कोई मंत्रमुग्ध रह गया। रिकॉर्डिंग स्टूडियो से लेकर फिल्म के सेट तक, रफी साहब का व्यवहार उन सभी लोगों के प्रति इतना सहज और सम्मानजनक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति उनकी विनम्रता का कायल हो गया। सेट पर जब असली किन्नरों ने रफी साहब के गाये उस गीत पर अपनी प्रस्तुति दी, तो माहौल पूरी तरह से भावनात्मक हो गया। उस समय के चश्मदीदों का कहना है कि रफी साहब ने न केवल अपनी आवाज का जादू बिखेरा, बल्कि उन कलाकारों के साथ बेहद आत्मीयता से बातचीत भी की, जिससे उन्हें कभी यह महसूस नहीं हुआ कि वे सिनेमा की चकाचौंध वाली दुनिया से अलग हैं।
यह किस्सा न केवल मोहम्मद रफी की महान गायकी को दर्शाता है, बल्कि उनके उस व्यक्तित्व को भी उजागर करता है जहाँ ऊंच-नीच या सामाजिक भेदभाव की कोई जगह नहीं थी। महमूद, जो खुद एक मंझे हुए कलाकार थे, रफी साहब के इस समर्पण और व्यवहार को देखकर दंग रह गए थे। इस गीत के माध्यम से समाज के एक ऐसे वर्ग को मुख्यधारा के सिनेमा में सम्मान के साथ पेश किया गया, जिन्हें अक्सर हाशिये पर रखा जाता था। रफी साहब की आवाज में जो दर्द और रूहानियत थी, उसने उस गीत को कालजयी बना दिया। आज दशकों बाद भी जब इस गाने की चर्चा होती है, तो लोग केवल उसकी धुन को ही नहीं, बल्कि उसके पीछे की इस मानवीय कहानी को भी याद करते हैं।
फिल्मी गलियारों में यह बात आज भी मिसाल के तौर पर दी जाती है कि कैसे एक महान कलाकार अपनी कला के जरिए सामाजिक दूरियों को मिटा सकता है। मोहम्मद रफी ने अपनी पूरी जिंदगी में हजारों गाने गाए, लेकिन कुछ चुनिंदा काम ऐसे थे जिन्होंने उन्हें ‘फरिश्ता’ इंसान की छवि दी। इस विशेष अनुभव ने साबित किया कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती और जब इसे सच्चे दिल से गाया जाए, तो यह हर आत्मा को छू लेता है। महमूद और रफी साहब की इस जुगलबंदी ने सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा अध्याय जोड़ दिया, जो आज की पीढ़ी के कलाकारों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। सादगी, सम्मान और सुरों का यह अद्भुत मेल भारतीय सिनेमा की उन धरोहरों में से एक है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
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प्रभास की फिल्म 'फौजी' के सेट पर बड़ा हादसा: एक क्रू मेंबर की मौत और कई घायल, शूटिंग पर लगा अनिश्चितकालीन ब्रेक।
नई दिल्ली। सिनेमाई पर्दे पर भव्यता बिखेरने की तैयारियों के बीच फिल्म उद्योग से एक अत्यंत दुखद खबर आई है। सुपरस्टार प्रभास की आगामी फिल्म ‘फौजी’ के सेट पर एक भीषण दुर्घटना ने पूरी फिल्म बिरादरी को स्तब्ध कर दिया है। बताया जा रहा है कि फिल्म के एक महत्वपूर्ण शेड्यूल की शूटिंग के दौरान हुए इस दर्दनाक हादसे में चालक दल के एक सक्रिय सदस्य की मृत्यु हो गई है, जबकि पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इस हृदयविदारक घटना के तुरंत बाद फिल्म के निर्माण कार्य को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा इतना अचानक और भयानक था कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। सेट पर मौजूद सुरक्षा और तकनीकी इंतजामों के बावजूद यह अनहोनी घटित हो गई, जिसने पूरे प्रोडक्शन हाउस को गहरे शोक में डाल दिया है।दुर्घटना के तुरंत बाद फिल्म की टीम ने राहत कार्य शुरू किया और सभी घायलों को तत्काल अस्पताल पहुँचाया। डॉक्टरों ने एक सदस्य को मृत घोषित कर दिया, जो कि फिल्म की यूनिट के लिए एक अपूरणीय क्षति है। बाकी घायल सदस्यों का इलाज चल रहा है, जिनमें से कुछ की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। इस घटना ने एक बार फिर फिल्म निर्माण के दौरान बरती जाने वाली सुरक्षा व्यवस्थाओं और तकनीकी खामियों पर सवालिया निशान लगा दिया है। बड़े बजट और बड़े सितारों वाली फिल्मों के सेट पर जहाँ हर कदम पर सावधानी बरती जाती है, वहाँ ऐसी जानलेवा चूक होना बेहद चिंताजनक है। फिल्म के मुख्य अभिनेता प्रभास और पूरी कास्ट ने इस दुखद घड़ी में मृतक के प्रति संवेदना व्यक्त की है और शूटिंग को पूरी तरह रोक देने का निर्णय लिया है।
वर्तमान में फिल्म का सेट पूरी तरह शांत है और वहाँ केवल जांच दल की हलचल देखी जा रही है। हादसे के सही कारणों का पता लगाने के लिए गहन छानबीन की जा रही है कि क्या यह कोई यांत्रिक विफलता थी या फिर मानवीय चूक। फिल्म के निर्माण से जुड़ी संस्थाओं का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता घायलों का उचित उपचार सुनिश्चित करना और पीड़ित परिवार की हर संभव मदद करना है। इस तरह के हादसों से न केवल फिल्म का शेड्यूल प्रभावित होता है, बल्कि वहां काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा आघात पहुँचता है। मनोरंजन जगत के कई दिग्गजों ने इस घटना पर शोक जताया है और मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए फिल्म सेट पर सुरक्षा प्रोटोकॉल को और अधिक सख्त बनाया जाए।
प्रभास की ‘फौजी’ एक बड़े पैमाने पर बनाई जा रही फिल्म है, जिससे दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं, लेकिन इस त्रासदी ने फिलहाल फिल्म के उत्साह को गम में बदल दिया है। जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती और सुरक्षा के सभी मानकों को फिर से सुनिश्चित नहीं कर लिया जाता, तब तक कैमरे दोबारा शुरू होने की संभावना कम ही नजर आती है। फिल्म जगत इस समय एकजुट होकर उस परिवार के साथ खड़ा है जिसने अपने सदस्य को खोया है। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि फिल्म की टीम इस सदमे से उबरकर दोबारा काम पर कब लौटती है, लेकिन फिलहाल पूरा फोकस केवल मानवीय संवेदनाओं और घायलों की सुरक्षा पर टिका हुआ है।
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शोहरत मिली, लेकिन सुकून नहीं: 34 साल में खत्म हुआ एक्ट्रेस विमी का दुखद सफर
नई दिल्ली। कभी-कभी फिल्मी दुनिया की सबसे चमकदार कहानियों के पीछे ऐसे अंधेरे छिपे होते हैं, जिनकी कोई कल्पना भी नहीं करता। ऐसी ही एक कहानी थी अभिनेत्री विमी की, जिनका सफर उम्मीदों, सफलता और दर्द के बीच कहीं खो गया।विमी ने फिल्मी दुनिया में कदम रखते ही अपनी पहचान बना ली थी। उनकी पहली ही फिल्म ने उन्हें दर्शकों के बीच एक नया चेहरा बना दिया था। स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी, आत्मविश्वास और अभिनय ने उन्हें जल्दी ही चर्चित बना दिया। बहुत कम समय में वह बड़े कलाकारों के साथ काम करने लगीं और फिल्म इंडस्ट्री में उनका नाम तेजी से आगे बढ़ने लगा।
लेकिन यह सफलता जितनी तेजी से आई, उतनी ही तेजी से उनके जीवन में दबाव भी बढ़ने लगा। करियर के शुरुआती दौर में मिले एक बड़े कॉन्ट्रैक्ट ने उन्हें कई अवसरों से दूर कर दिया। इसी कारण उनका करियर सीमित दायरे में बंधता चला गया। जब तक परिस्थितियां बदलीं, तब तक इंडस्ट्री का रुख भी बदल चुका था और उनके लिए नए मौके कम होते चले गए।
इसी बीच उनका निजी जीवन भी प्रभावित होने लगा। शादीशुदा जीवन में तनाव बढ़ता गया और आर्थिक जिम्मेदारियां भी उनके ऊपर आ गईं। घर और करियर के बीच संतुलन बनाना उनके लिए मुश्किल होता गया। धीरे-धीरे यह दबाव उनके जीवन को तोड़ने लगा।
फिल्मी दुनिया से दूरी बढ़ने के बाद उनके जीवन में संघर्ष और अधिक गहरा गया। काम की कमी और आर्थिक परेशानियों ने उनकी स्थिति को कमजोर कर दिया। इसी दौर में वह शहर बदलकर नए जीवन की तलाश में आगे बढ़ीं, लेकिन वहां भी स्थिरता नहीं मिल सकी।
जीवन के इस मोड़ पर उनके आसपास के रिश्ते भी बदलने लगे। अकेलापन बढ़ता गया और परिस्थितियां और कठिन होती गईं। इसी दौरान उनकी जीवनशैली पर भी इसका असर पड़ा और स्वास्थ्य लगातार गिरता चला गया।
समय के साथ उनका फिल्मी करियर पूरी तरह खत्म हो गया। जिस इंडस्ट्री ने उन्हें पहचान दी थी, वही धीरे-धीरे उनसे दूर हो गई। आर्थिक समस्याएं, मानसिक दबाव और अकेलापन उनके जीवन का हिस्सा बन गए।
अंततः बहुत कम उम्र में उनकी जिंदगी समाप्त हो गई। यह अंत जितना अचानक था, उतना ही दुखद भी था। उनके अंतिम समय में उनके साथ बहुत कम लोग थे, जिससे उनकी कहानी और भी भावनात्मक बन जाती है।
विमी की कहानी केवल एक अभिनेत्री की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस दुनिया का सच भी दिखाती है जहां सफलता जितनी जल्दी मिलती है, उतनी ही जल्दी छिन भी सकती है। उनकी जिंदगी यह याद दिलाती है कि चमकदार पर्दे के पीछे कई अनदेखे संघर्ष छिपे होते हैं, जिन्हें अक्सर कोई नहीं देख पाता।
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तलाक की अर्जी ने खोले कई राज, संगीता सोरनालिंगम ने विजय पर लगाए गंभीर आरोप
नई दिल्ली। तमिल फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार थलपति विजय इन दिनों जहां एक तरफ अपने राजनीतिक सफर और सार्वजनिक जीवन को लेकर सुर्खियों में हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है। उनकी पत्नी संगीता सोरनालिंगम द्वारा दायर तलाक की अर्जी ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है और इससे जुड़े आरोपों ने फिल्म और राजनीतिक दोनों ही हलकों में चर्चा तेज कर दी है।मिली जानकारी के अनुसार, संगीता सोरनालिंगम ने अदालत में दायर याचिका में अपने वैवाहिक जीवन से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि पिछले कुछ वर्षों से उनके और विजय के रिश्तों में लगातार दूरी बढ़ती गई, जिससे उनका वैवाहिक जीवन केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस दौरान उन्हें मानसिक तनाव और भावनात्मक पीड़ा का सामना करना पड़ा।
इस पूरे मामले में सबसे अधिक ध्यान उन आरोपों पर गया है जिनमें कथित बेवफाई और वैवाहिक विश्वास टूटने की बात कही गई है। याचिका में यह दावा किया गया है कि कुछ घटनाओं और परिस्थितियों के चलते उन्हें ऐसे संबंधों की जानकारी मिली, जिनसे उनके निजी जीवन पर गहरा असर पड़ा। इसके बाद उन्होंने स्थिति को सुधारने की कोशिश की, लेकिन परिणाम नहीं बदले।
इसके अलावा संगीता ने यह भी उल्लेख किया है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़ी कुछ गतिविधियों और सोशल मीडिया पर सामने आने वाली चर्चाओं ने स्थिति को और जटिल बना दिया। उनके अनुसार, इन बातों के कारण उन्हें और उनके परिवार को कई बार मानसिक दबाव और सामाजिक असहजता का सामना करना पड़ा।
याचिका में आर्थिक और घरेलू स्थिति को लेकर भी गंभीर बातें कही गई हैं। संगीता का कहना है कि उन्हें कई प्रकार की व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और उन्होंने अदालत से वैवाहिक घर में रहने का अधिकार और उचित वित्तीय सहायता की मांग की है। उनका यह भी कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में उनके पास कोई स्थायी विकल्प नहीं है, जिससे उनकी स्थिति और कठिन हो गई है।
अर्जी में यह भी कहा गया है कि यह रिश्ता अब केवल नाममात्र का रह गया है और वास्तविक जीवन में इसका कोई अस्तित्व नहीं बचा है। संगीता के अनुसार, लगातार तनाव और भावनात्मक संघर्ष ने उन्हें इस स्थिति तक पहुंचाया है जहां आगे साथ रहना संभव नहीं दिखता।
दूसरी ओर, थलपति विजय की तरफ से अब तक इस पूरे मामले पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनकी चुप्पी ने इस विवाद को और अधिक चर्चित बना दिया है। उनके फैंस और फिल्म जगत के लोग इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं।
इस बीच, यह मामला न सिर्फ व्यक्तिगत जीवन तक सीमित रह गया है, बल्कि इसका असर उनके सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन पर भी देखा जा रहा है। विजय के करियर और उनकी छवि को लेकर भी विभिन्न तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत में आगे क्या रुख सामने आता है और दोनों पक्ष इस मामले में किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। यह विवाद आने वाले दिनों में और भी स्पष्ट तस्वीर पेश कर सकता है।
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थलपति विजय से मुलाकात के बाद चर्चा में तृषा कृष्णन, जाति और धर्म को लेकर सोशल मीडिया पर गर्म बहस
नई दिल्ली। साउथ फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री तृषा कृष्णन एक बार फिर सुर्खियों में आ गई हैं। वजह इस बार उनकी कोई नई फिल्म नहीं, बल्कि सुपरस्टार थलपति विजय के साथ उनकी पुरानी दोस्ती और निजी पृष्ठभूमि को लेकर उठ रही चर्चाएं हैं। हाल ही में तमिलनाडु में राजनीतिक हलचलों के बीच जब विजय के घर कई लोग पहुंचे, उसी दौरान तृषा कृष्णन की मौजूदगी ने लोगों का ध्यान खींच लिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर दोनों के रिश्ते और उनकी बॉन्डिंग को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।थलपति विजय और तृषा कृष्णन की जोड़ी साउथ सिनेमा की सबसे चर्चित जोड़ियों में से एक मानी जाती है। दोनों ने पहली बार साल 2004 में फिल्म ‘घिल्ली’ में साथ काम किया था, जो बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई। इस फिल्म ने न सिर्फ दोनों कलाकारों को नई पहचान दी, बल्कि उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को भी दर्शकों ने खूब सराहा। इसके बाद दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया और हर बार उनकी जोड़ी को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला।
‘थिरुपाची’, ‘आथी’, ‘कुरुवी’ और बाद में ‘लियो’ जैसी फिल्मों में साथ नजर आने के बाद दोनों के बीच एक मजबूत प्रोफेशनल रिश्ता बना। कई इंटरव्यू में तृषा कृष्णन ने थलपति विजय के शांत और अनुशासित स्वभाव की तारीफ की है। उन्होंने कहा था कि विजय अपने काम को लेकर बेहद गंभीर रहते हैं और सेट पर उनका व्यवहार हमेशा प्रोफेशनल होता है।
इसी बीच तृषा कृष्णन की निजी पृष्ठभूमि को लेकर भी सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। तृषा एक तमिल पलक्काड अय्यर ब्राह्मण परिवार से आती हैं। उनका जन्म चेन्नई में हुआ और वे एक हिंदू तमिल भाषी परिवार से संबंध रखती हैं। उनका समुदाय केरल और तमिलनाडु की सांस्कृतिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ माना जाता है, जहां तमिल और मलयालम संस्कृति का मिश्रण देखने को मिलता है।
धार्मिक रूप से तृषा कृष्णन हिंदू धर्म का पालन करती हैं और आध्यात्मिक गतिविधियों में उनकी रुचि भी रही है। वे अक्सर मंदिरों के दर्शन करती नजर आती हैं और अपनी निजी आस्था को लेकर हमेशा सहज रही हैं। हालांकि, वे अपनी निजी जिंदगी को मीडिया से दूर रखना पसंद करती हैं और इस विषय पर ज्यादा सार्वजनिक बयान नहीं देतीं।
थलपति विजय के साथ उनकी पुरानी दोस्ती एक बार फिर चर्चा में तब आई जब हाल के राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रमों के बाद उनके पुराने बयान और इंटरव्यू सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। फैंस दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को लेकर उत्साहित हैं और उनकी पुरानी फिल्मों को फिर से याद कर रहे हैं।
हालांकि, दोनों कलाकारों ने हमेशा अपने रिश्ते को केवल दोस्ती और प्रोफेशनल सम्मान तक सीमित बताया है। वे निजी जीवन को लेकर सार्वजनिक बहसों से दूर रहते हैं और अपने करियर पर फोकस बनाए रखते हैं। इसके बावजूद, तृषा कृष्णन और थलपति विजय की जोड़ी को लेकर लोगों की दिलचस्पी समय-समय पर फिर से चर्चा में आ जाती है।
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थलापति विजय की राजनीति में बड़ी हलचल: सुपरस्टार से सीएम तक का सफर और तृषा कृष्णन की एंट्री की चर्चा तेज
नई दिल्ली। तमिल फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े सितारों में शुमार थलापति विजय ने राजनीति में कदम रखकर सबको चौंका दिया है। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीत ली हैं।234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है, ऐसे में पार्टी बहुमत से थोड़ी दूर रह गई है, लेकिन विपक्षी और सत्ता दोनों खेमों में इस नतीजे ने हलचल मचा दी है।
दो सीटों पर जीत, अब एक छोड़ना तय
विजय ने इस चुनाव में दो सीटों चेन्नई की पेरंबूर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट से जीत हासिल की है। लेकिन नियम के अनुसार कोई भी उम्मीदवार एक ही सीट रख सकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि विजय पेरंबूर सीट अपने पास रखेंगे, जबकि तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट से इस्तीफा दिया जा सकता है। इसी सीट पर अब उपचुनाव की स्थिति बन सकती है।क्या तृषा कृष्णन राजनीति में आएंगी?
इसी राजनीतिक हलचल के बीच सबसे बड़ा नाम सामने आया है अभिनेत्री तृषा कृष्णन का। चर्चा है कि TVK उन्हें उपचुनाव में तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट से उम्मीदवार बनाना चाहती है। पार्टी का मानना है कि उनकी लोकप्रियता वोट बैंक को मजबूत कर सकती है।हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक तृषा अभी राजनीति में आने को लेकर पूरी तरह तैयार नहीं हैं और इस प्रस्ताव पर विचार कर रही हैं। उनका अब तक किसी राजनीतिक दल से सीधा जुड़ाव नहीं रहा है।गठबंधन की तलाश में TVK
सरकार बनाने के लिए TVK को किसी बड़ी पार्टी का समर्थन चाहिए। इसी वजह से तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी का झुकाव या तो DMK या AIADMK की ओर हो सकता है, हालांकि अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।क्या विजय बनेंगे मुख्यमंत्री?
सूत्रों के मुताबिक विजय ने राज्यपाल को पत्र लिखकर सरकार बनाने का अवसर देने की मांग की है। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।तमिलनाडु की राजनीति में नया मोड़
थलापति विजय की एंट्री ने तमिलनाडु की राजनीति को पूरी तरह रोमांचक बना दिया है। एक तरफ गठबंधन की सियासत, दूसरी तरफ उपचुनाव की तैयारी और तीसरी तरफ तृषा कृष्णन की संभावित एंट्री—इन सबने राज्य की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में विजय किस दिशा में कदम बढ़ाते हैं और क्या वाकई सिनेमा की एक और बड़ी स्टार राजनीति में उतरती हैं।
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केपटाउन में दीपिका पादुकोण की 'किंग' साइज शूटिंग, तो मुंबई में नन्ही दुआ के साथ 'सुपर डैड' की भूमिका निभा रहे रणवीर सिंह।
नई दिल्ली।
भारतीय सिनेमा के सबसे ऊर्जावान और बहुमुखी अभिनेताओं में शुमार रणवीर सिंह इन दिनों पर्दे के पीछे एक बिल्कुल अलग और सराहनीय भूमिका में नजर आ रहे हैं। ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर-2’ जैसी लगातार दो ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद रणवीर ने अपनी पेशेवर प्राथमिकताओं को पूरी तरह से बदल लिया है। जहाँ पहले वह अपनी फिल्मों के प्रचार और कार्यक्रमों की चकाचौंध में डूबे रहते थे, वहीं अब वह एक समर्पित पिता और सहायक पति की जिम्मेदारी निभाने को सर्वोच्च महत्व दे रहे हैं। वर्तमान में दीपिका पादुकोण दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में शाहरुख खान के साथ अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘किंग’ की शूटिंग में व्यस्त हैं। ऐसी स्थिति में रणवीर सिंह ने घर पर रहकर अपनी नन्ही बेटी दुआ पादुकोण का पूरा ख्याल रखने का फैसला किया है, ताकि दीपिका बिना किसी चिंता के अपना काम पूरा कर सकें।फिल्म जगत के जानकारों के अनुसार, रणवीर और दीपिका का एक-दूसरे के प्रति यह सहयोग और समझदारी वाकई मिसाल पेश करने वाली है। रणवीर ने ‘धुरंधर-2’ की अपार सफलता के बाद अपनी अगली बड़ी फिल्म ‘प्रलय’ पर काम शुरू करने से पहले परिवार के साथ समय बिताने का निर्णय लिया। उनकी बेटी दुआ के जन्म के बाद से ही रणवीर सिंह ने लाइमलाइट और सार्वजनिक कार्यक्रमों से थोड़ी दूरी बना ली है। उनके करीबी लोगों का कहना है कि पिता बनने के बाद रणवीर के व्यक्तित्व में काफी ठहराव और सकारात्मक बदलाव आए हैं। वे अब अपनी शूटिंग के व्यस्त शेड्यूल के बीच भी समय निकालकर अपने परिवार के पास लौटने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते। उनके लिए उनकी बेटी दुआ एक ‘लकी चार्म’ की तरह है, जिसके आने के बाद से उनकी फिल्मों ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।
अगर उनके वर्क फ्रंट की बात करें, तो रणवीर सिंह अब किसी अन्य बड़े प्रोजेक्ट के बजाय अपना पूरा ध्यान फिल्म ‘प्रलय’ की तैयारी पर लगा रहे हैं। उन्होंने रचनात्मक मतभेदों के चलते कुछ पुराने प्रोजेक्ट्स से दूरी बना ली है और अब वह एक धमाकेदार अवतार में पर्दे पर लौटने की तैयारी में हैं। दूसरी ओर, दीपिका पादुकोण केपटाउन के खूबसूरत लोकेशन्स पर ‘किंग’ के जरिए एक बार फिर दर्शकों को रोमांचित करने के लिए तैयार हैं। इन दोनों सितारों का आपसी तालमेल यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वे न केवल बड़े पर्दे पर एक सफल जोड़ी हैं, बल्कि अपनी निजी जिंदगी में भी एक-दूसरे के करियर और सपनों का पूरा सम्मान करते हैं। रणवीर का यह ‘सुपर डैड’ अवतार उनके प्रशंसकों के बीच काफी चर्चा और प्रशंसा बटोर रहा है।