Category: Entertainment

  • गोविंदा और सुनीता आहूजा के तलाक की खबरों पर बेटी टीना का बड़ा खुलासा, शादी में दरार के दावों को बताया महज अफवाह

    गोविंदा और सुनीता आहूजा के तलाक की खबरों पर बेटी टीना का बड़ा खुलासा, शादी में दरार के दावों को बताया महज अफवाह

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत में लंबे समय तक ‘जोड़ी नंबर 1’ के रूप में मशहूर रहे अभिनेता गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के वैवाहिक जीवन को लेकर सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाला दावा तेजी से वायरल हो रहा है। इंटरनेट पर विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर यह अफवाह फैलाई जा रही है कि इस स्टार कपल की 39 साल पुरानी शादी में गंभीर खटपट चल रही है और दोनों जल्द ही तलाक लेकर अलग होने वाले हैं। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में तो यहां तक दावा कर दिया गया कि सुनीता आहूजा ने इशारों-इशारों में पति के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर को लेकर शक जाहिर किया है। इन लगातार बढ़ती और परेशान करने वाली अटकलों के बीच अब गोविंदा की बेटी टीना आहूजा ने सामने आकर इस पूरे विवाद का सच उजागर किया है।

    एक प्रमुख मीडिया संस्थान से विशेष बातचीत के दौरान टीना आहूजा ने माता-पिता के रिश्ते और उनके तलाक को लेकर चल रही खबरों पर खुलकर अपनी बात रखी। टीना ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि वे इस तरह की मनगढ़ंत कहानियां अपने बचपन के दिनों से देखती आ रही हैं। उनके अनुसार, फिल्म इंडस्ट्री में हर दशक में किसी न किसी सेलिब्रिटी को लेकर एक नई और झूठी कहानी गढ़ दी जाती है, जिसका वास्तविकता से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं होता।

    अपनी बात आगे बढ़ाते हुए टीना ने कहा कि पहले के समय में इस तरह की गॉसिप और भ्रामक खबरें केवल फिल्मी पत्रिकाओं और मैगजीन्स में छपती थीं। इसके बाद जब इंटरनेट का दौर आया, तो यह खबरें वेबसाइट्स पर दिखने लगीं और अब वर्तमान समय में इंस्टाग्राम तथा यूट्यूब जैसे डिजिटल माध्यमों पर व्यूज बटोरने के लिए ऐसी अफवाहों को परोसा जा रहा है। उन्होंने दर्द साझा करते हुए कहा कि आखिरकार वे भी एक इंसान हैं और जब कोई उनके परिवार के बारे में इस तरह की आधारहीन और खींची हुई बातें लिखता है, तो वे अंदर से बेहद परेशान हो जाती हैं।

    टीना आहूजा ने कड़े शब्दों में कहा कि आज के डिजिटल युग में केवल ‘क्लिकबेट’ यानी लोगों का ध्यान खींचने और लाइक्स-व्यूज कमाने के लिए ऐसी झूठी खबरें जानबूझकर क्रिएट की जाती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कोई संत नहीं हैं कि उन्हें इन नकारात्मक बातों से फर्क न पड़े, निश्चित रूप से ऐसी झूठी खबरें उन्हें और उनके परिवार को प्रभावित करती हैं। हालांकि, फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा होने के नाते समय के साथ उन्होंने खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाना सीख लिया है।

    पारिवारिक रिश्तों की मजबूती पर भरोसा जताते हुए टीना ने कहा कि जब आपको अपने घर और माता-पिता का असली सच पता होता है, तो ऐसी फालतू की बातों पर प्रतिक्रिया न देना ही सबसे बेहतर विकल्प होता है। उन्होंने साफ कर दिया कि गोविंदा और सुनीता के बीच सब कुछ पूरी तरह ठीक है और उनके अलग होने की बातें महज एक कोरी कल्पना हैं। गौरतलब है कि टीना आहूजा इन दिनों अपने प्रोफेशनल वर्कफ्रंट को लेकर भी चर्चा में हैं। उन्होंने अपनी मां सुनीता आहूजा के साथ टेलीविजन की दुनिया में कदम रखा है, जहां वे जीटीवी के नए रियलिटी शो ‘मां है ना’ में नजर आ रही हैं, जिसे अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी द्वारा होस्ट किया जा रहा है।

  • एक थप्पड़ ने बदल दी थी जिंदगी: खूबसूरत हीरोइन से बॉलीवुड की सबसे मशहूर ‘मंथरा’ बनने तक का सफर

    एक थप्पड़ ने बदल दी थी जिंदगी: खूबसूरत हीरोइन से बॉलीवुड की सबसे मशहूर ‘मंथरा’ बनने तक का सफर


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए सफलता हासिल की, लेकिन अभिनेत्री ललिता पवार की कहानी सबसे अलग और प्रेरणादायक मानी जाती है। एक समय वह हिंदी फिल्मों की बेहद खूबसूरत और लोकप्रिय नायिका थीं, लेकिन एक दुर्घटना ने उनकी पूरी जिंदगी बदलकर रख दी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने अभिनय के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसे आज भी याद किया जाता है।

    यह घटना साल 1942 की है, जब फिल्म ‘जंग-ए-आजादी’ की शूटिंग चल रही थी। फिल्म में ललिता पवार मुख्य अभिनेत्री थीं, जबकि अभिनेता भगवान दादा उनके साथ काम कर रहे थे। एक दृश्य में भगवान दादा को ललिता पवार के गाल पर थप्पड़ मारना था। शूटिंग के दौरान यह थप्पड़ इतना जोरदार पड़ा कि ललिता पवार जमीन पर गिर पड़ीं और उनकी हालत गंभीर हो गई। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उनके चेहरे की नस प्रभावित हो गई है।

    बताया जाता है कि इलाज के दौरान स्थिति और बिगड़ गई। लंबे समय तक अस्पताल में रहने के बाद जब वह सामान्य जीवन में लौटीं तो उनके चेहरे के बाईं ओर लकवे का असर दिखाई देने लगा। उनकी एक आंख सिकुड़ गई थी और चेहरे की बनावट भी पहले जैसी नहीं रही। उस दौर में फिल्म उद्योग में नायिकाओं के लिए सुंदरता को सबसे बड़ी शर्त माना जाता था, इसलिए इस हादसे ने उनके लीड अभिनेत्री बनने के सपनों को लगभग खत्म कर दिया।

    करीब तीन वर्षों तक इलाज और संघर्ष के बाद ललिता पवार ने फिर से फिल्मों में वापसी की कोशिश की। हालांकि अब उन्हें मुख्य नायिका के रोल नहीं मिल रहे थे। लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे घुटने टेकने के बजाय खुद को नए किरदारों के अनुरूप ढाल लिया। उन्होंने मां, बहन, चाची और सास जैसे चरित्र भूमिकाएं निभानी शुरू कीं। धीरे-धीरे उनकी अलग पहचान बनने लगी।

    उनकी सिकुड़ी हुई आंख और सख्त चेहरे के भाव नकारात्मक भूमिकाओं में बेहद प्रभावशाली साबित हुए। देखते ही देखते वह हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय खलनायिका और सास के रूप में मशहूर हो गईं। रामानंद सागर की लोकप्रिय टीवी श्रृंखला ‘रामायण’ में निभाया गया ‘मंथरा’ का किरदार आज भी लोगों की स्मृतियों में जीवित है। इस भूमिका ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई।

    ललिता पवार का निजी जीवन भी संघर्षों से भरा रहा। वैवाहिक जीवन में भी उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके उन्होंने अपने काम और आत्मविश्वास को कभी कमजोर नहीं होने दिया। यही वजह रही कि उन्होंने हिंदी, मराठी और गुजराती भाषाओं की 700 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया

    उनके नाम सबसे लंबे अभिनय करियर का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी दर्ज है, जो उनकी मेहनत और समर्पण का प्रमाण है। एक हादसे ने भले ही उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी, लेकिन उन्होंने उस दर्द को अपनी ताकत बना लिया और अभिनय की दुनिया में अमर हो गईं।

    24 फरवरी 1998 को कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद ललिता पवार ने अंतिम सांस ली। हालांकि वह इस दुनिया को छोड़ गईं, लेकिन उनका संघर्ष, साहस और अभिनय आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ इच्छाशक्ति इंसान को नई पहचान दिला सकती है।

  • मोहम्मद रफी ने अपने बच्चों को क्यों रखा सिंगिंग से दूर? दिग्गज गायक की सोच जानकर रह जाएंगे हैरान

    मोहम्मद रफी ने अपने बच्चों को क्यों रखा सिंगिंग से दूर? दिग्गज गायक की सोच जानकर रह जाएंगे हैरान

    नई दिल्ली । भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास में जब भी महान गायकों का जिक्र होगा, मोहम्मद रफी का नाम सबसे ऊपर लिया जाएगा। अपनी मधुर आवाज और बहुमुखी गायन शैली से उन्होंने दशकों तक संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया। रोमांटिक गीत हों, दर्द भरे नगमे हों या फिर देशभक्ति के गीत, रफी साहब ने हर अंदाज में अपनी अमिट छाप छोड़ी। लेकिन उनके जीवन से जुड़ा एक सवाल हमेशा लोगों के मन में उठता रहा है कि आखिर उनके बच्चों ने गायकी को अपना करियर क्यों नहीं बनाया।

    मोहम्मद रफी के कुल सात बच्चे थे। उनकी पहली शादी बशीरा से हुई थी, जिनसे उनका एक बेटा सईद हुआ। बाद में उन्होंने बिलकिस बानो से निकाह किया, जिनसे उनके तीन बेटे और तीन बेटियां हुईं। इतने बड़े संगीत परिवार से होने के बावजूद उनके किसी भी बच्चे ने प्रोफेशनल सिंगिंग की दुनिया में कदम नहीं रखा। इसके पीछे की वजह खुद रफी साहब की सोच थी।

    मोहम्मद रफी पर लिखी गई किताब ‘मोहम्मद रफी: माय अब्बा’ में उनकी बहू यास्मीन खालिद ने इस विषय पर विस्तार से चर्चा की है। उनके अनुसार रफी साहब कभी नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे केवल उनके नाम और विरासत के सहारे संगीत जगत में उतरें। उनका मानना था कि जिस मुकाम तक वह अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर पहुंचे थे, वहां तक पहुंचना आसान नहीं है। उन्हें डर था कि उनके बच्चों की तुलना हमेशा उनसे की जाएगी और यह दबाव उनके लिए बोझ बन सकता है।

    यास्मीन के मुताबिक, रफी साहब ने अपने बच्चों को शुरू से ही एक सामान्य जीवन देने की कोशिश की। उन्होंने उन्हें बोर्डिंग स्कूलों में पढ़ाया और संगीत की दुनिया की चमक-दमक से दूर रखा। वह चाहते थे कि उनके बच्चे अपनी पसंद और योग्यता के अनुसार जीवन में आगे बढ़ें, न कि पिता की पहचान के दबाव में कोई रास्ता चुनें।

    रफी साहब की सादगी भी उतनी ही मशहूर थी जितनी उनकी गायकी। बताया जाता है कि वह रोज सुबह पांच बजे उठते थे और नियमित रूप से रियाज करते थे। उन्हें साधारण जीवन पसंद था और वह घर का बना खाना ही खाना पसंद करते थे। मीडिया से दूरी बनाए रखना भी उनकी आदतों में शामिल था। उनका मानना था कि वह एक आम इंसान हैं और उनके पास बताने के लिए कोई सनसनीखेज कहानी नहीं है।

    संगीत के इस महान सितारे का जीवन भले ही बेहद सफल रहा, लेकिन उनका व्यक्तिगत जीवन विनम्रता और अनुशासन से भरा हुआ था। यही कारण था कि उन्होंने अपने बच्चों पर कभी अपनी पहचान का बोझ नहीं डाला। उन्होंने उन्हें स्वतंत्र रूप से जीवन जीने और अपनी राह चुनने की आजादी दी।

    31 जुलाई 1980 को मात्र 55 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से मोहम्मद रफी का निधन हो गया था। उनके निधन की खबर ने पूरे देश को शोक में डुबो दिया था। भारी बारिश के बावजूद हजारों लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि रफी साहब केवल एक महान गायक ही नहीं, बल्कि करोड़ों दिलों की धड़कन थे।

    आज भी मोहम्मद रफी के गीत लोगों की जुबान पर हैं और उनकी आवाज संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित है। उनके बच्चों ने भले ही गायकी को पेशा नहीं बनाया, लेकिन रफी साहब की विरासत आज भी भारतीय संगीत जगत की सबसे अनमोल धरोहरों में गिनी जाती है।

  • प्रभास स्टारर महागाथा 'कल्कि 2' की स्टारकास्ट को लेकर सस्पेंस बरकरार, दीपिका को रिप्लेस करने के दावों पर आया फिल्म से जुड़े करीबी सूत्रों का बड़ा बयान

    प्रभास स्टारर महागाथा 'कल्कि 2' की स्टारकास्ट को लेकर सस्पेंस बरकरार, दीपिका को रिप्लेस करने के दावों पर आया फिल्म से जुड़े करीबी सूत्रों का बड़ा बयान

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शुमार ‘क‍ल्कि 2898 AD’ के दूसरे भाग को लेकर फिल्म गलियारों में कयासों और चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। साल 2024 में सुपरस्टार प्रभास और दीपिका पादुकोण अभिनीत इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए थे। फिल्म में दीपिका पादुकोण के किरदार और उनके अभिनय को दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों द्वारा भी काफी सराहा गया था। अब जबकि निर्माता-निर्देशक इस महागाथा के दूसरे हिस्से की तैयारियों और निर्माण में जुटे हैं, तब सोशल मीडिया पर फिल्म की स्टारकास्ट में बड़े बदलाव को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं।

    हालिया रिपोर्ट्स में यह बात तेजी से वायरल हो रही है कि दीपिका पादुकोण अब इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं हैं और वे इस फ्रेंचाइजी से बाहर हो चुकी हैं। इन चर्चाओं को तब और बल मिला जब कुछ समय पहले यह दावा किया गया कि फिल्म निर्माताओं ने दीपिका पादुकोण की जगह दक्षिण भारतीय सिनेमा की बेहतरीन अभिनेत्री साई पल्लवी को इस प्रोजेक्ट में शामिल कर लिया है। इन तमाम खबरों के बीच अब एक नया मोड़ सामने आया है, जिसमें बॉलीवुड की शीर्ष अभिनेत्री आलिया भट्ट का नाम भी इस बहुप्रतीक्षित फिल्म के साथ जोड़ा जा रहा है।

    सोशल मीडिया पर तैर रही विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आलिया भट्ट ने इस मेगा बजट फिल्म के लिए अपनी सहमति दे दी है। कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि आलिया भट्ट फिल्म में दीपिका पादुकोण को पूरी तरह से रिप्लेस कर रही हैं, जबकि उद्योग जगत के कुछ अन्य सूत्रों का मानना है कि आलिया का किरदार पूरी तरह से नया, अनूठा और फिल्म की कहानी को एक नया आयाम देने वाला होगा। इंटरनेट पर चल रही खबरों में यह भी कहा जा रहा है कि इस गुप्त प्रोजेक्ट के लिए आलिया भट्ट ने हैदराबाद का दौरा किया था, जहां उन्होंने फिल्म के कुछ महत्वपूर्ण दृश्यों की शूटिंग भी पूरी कर ली है। यदि इन अटकलों में थोड़ी भी सच्चाई है, तो दर्शकों को पर्दे पर पहली बार साई पल्लवी और आलिया भट्ट की दो दमदार अभिनेत्रियों की जुगलबंदी देखने को मिल सकती है।

    हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम और कास्टिंग को लेकर अभी तक आलिया भट्ट या फिल्म के मुख्य निर्माताओं की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान या पुष्टि सामने नहीं आई है। फिल्म ‘कल्कि 2’ की निर्माण टीम से जुड़े एक विश्वसनीय सूत्र ने इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि सोशल मीडिया पर चल रही ये खबरें पूरी तरह से अपुष्ट हैं। सूत्र के अनुसार, किसी एक सोशल मीडिया हैंडल से इस तरह का भ्रामक दावा किया गया और बिना किसी प्रामाणिक तथ्य के अन्य प्लेटफॉर्म्स पर इसे कॉपी-पेस्ट किया जाने लगा। वर्तमान में आलिया भट्ट की इस प्रोजेक्ट में कास्टिंग को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    यह भी उल्लेखनीय है कि दीपिका पादुकोण को लेकर पिछले कुछ समय से बॉलीवुड में कई तरह की खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं। चर्चा है कि उनके हाथ से एक के बाद एक दो बड़े प्रोजेक्ट्स निकल गए हैं। पहले निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘स्पिरिट’ को लेकर कुछ मतभेदों की खबरें आईं, जिसके बाद तृप्ति डिमरी को कास्ट कर लिया गया। इसके तुरंत बाद निर्देशक नाग अश्विन की ‘कल्कि 2’ से भी उनके अलग होने की अफवाहों ने तूल पकड़ लिया।

    दूसरी तरफ, आलिया भट्ट इस समय अपने कई अन्य बड़े और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं। वे जल्द ही यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की आगामी फिल्म ‘अल्फा’ में मुख्य भूमिका निभाती नजर आएंगी, जिसका निर्देशन शिव रवैल कर रहे हैं और इसमें उनके साथ शरवरी, बॉबी देओल और अनिल कपूर जैसे कलाकार दिखाई देंगे। इसके अतिरिक्त, आलिया भट्ट प्रसिद्ध निर्देशक संजय लीला भंसाली की आगामी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘लव एंड वॉर’ की तैयारियों में भी जुटी हैं, जिसमें वे रणबीर कपूर और विक्की कौशल के साथ स्क्रीन स्पेस साझा करती नजर आएंगी। ‘कल्कि 2’ में उनकी एंट्री केवल एक अफवाह है या इसमें कोई वास्तविक सच्चाई है, यह आने वाले समय में मेकर्स की आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ हो पाएगा।

  • ‘माधुरी के सामने डांस करने से डरती थीं एक्ट्रेसेस’, करिश्मा कपूर ने खोला ‘दिल तो पागल है’ का बड़ा राज

    ‘माधुरी के सामने डांस करने से डरती थीं एक्ट्रेसेस’, करिश्मा कपूर ने खोला ‘दिल तो पागल है’ का बड़ा राज


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की सबसे सफल और यादगार फिल्मों में शामिल ‘दिल तो पागल है’ ने 90 के दशक में रोमांस और डांस आधारित फिल्मों की परिभाषा बदल दी थी। यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में शाहरुख खान, माधुरी दीक्षित और करिश्मा कपूर की तिकड़ी ने दर्शकों का दिल जीत लिया था। खास तौर पर करिश्मा कपूर द्वारा निभाया गया ‘निशा’ का किरदार आज भी बॉलीवुड के सबसे प्रभावशाली महिला किरदारों में गिना जाता है। हालांकि हाल ही में करिश्मा कपूर ने खुलासा किया कि इस भूमिका को करने से पहले कई अभिनेत्रियों ने इसे ठुकरा दिया था।

    एक इंटरव्यू के दौरान करिश्मा कपूर ने बताया कि उस समय इंडस्ट्री में माधुरी दीक्षित का दबदबा इतना अधिक था कि कई अभिनेत्रियां उनके साथ स्क्रीन शेयर करने से भी घबराती थीं। करिश्मा के मुताबिक, जब ‘दिल तो पागल है’ बन रही थी, तब कोई भी अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के सामने डांस करने या उनके साथ डांस फेस-ऑफ करने के लिए तैयार नहीं थी। माधुरी की बेहतरीन नृत्य कला और जबरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस को देखते हुए कई अभिनेत्रियों को लगता था कि उनकी तुलना में वे फीकी पड़ सकती हैं।

    करिश्मा ने कहा कि यही वजह थी कि ‘निशा’ का किरदार कई अभिनेत्रियों ने स्वीकार नहीं किया। लेकिन उन्होंने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और पूरी मेहनत से निभाया। बाद में यही किरदार उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस भूमिका के लिए करिश्मा कपूर को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था और दर्शकों ने उनके अभिनय को खूब सराहा था।

    करिश्मा ने अपने किरदार के भावनात्मक पक्ष पर भी बात की। उन्होंने कहा कि ‘निशा’ एक पारंपरिक बॉलीवुड हीरोइन नहीं थी। वह नायक से प्यार करती है, लेकिन उसे बदले में प्यार नहीं मिलता। आमतौर पर फिल्मों में हीरो और हीरोइन की प्रेम कहानी को केंद्र में रखा जाता है, लेकिन ‘दिल तो पागल है’ में निशा का दर्द और उसका एकतरफा प्रेम दर्शकों को गहराई से छूता है। यही बात इस किरदार को खास बनाती है।

    अभिनेत्री ने बताया कि जब भी वह उस किरदार के बारे में सोचती हैं, आज भी भावुक हो जाती हैं। उनके मुताबिक, निशा की भावनात्मक यात्रा बेहद चुनौतीपूर्ण और यादगार थी। वह एक ऐसी लड़की थी जो अपने प्यार को खोने के बावजूद मजबूती से खड़ी रहती है और यही उसकी सबसे बड़ी खूबी थी।

    हाल ही में करिश्मा कपूर और माधुरी दीक्षित ने रियलिटी शो ‘इंडियाज बेस्ट डांसर 5’ में ‘दिल तो पागल है’ के कुछ यादगार पलों को दोबारा जीवंत किया। इस दौरान दोनों अभिनेत्रियों का रीयूनियन फैंस के लिए किसी सरप्राइज से कम नहीं था। सोशल मीडिया पर भी दोनों की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल हुए।

    वर्कफ्रंट की बात करें तो करिश्मा कपूर लंबे समय बाद वेब सीरीज ‘ब्राउन’ में नजर आई हैं, जिसमें उन्होंने एक एंग्लो-इंडियन डिटेक्टिव की भूमिका निभाई है। वहीं माधुरी दीक्षित अपनी नई फिल्म ‘मां बहन’ को लेकर सुर्खियों में हैं। दोनों अभिनेत्रियां आज भी अपने अभिनय और व्यक्तित्व से दर्शकों का दिल जीत रही हैं।

    करिश्मा कपूर का यह खुलासा एक बार फिर साबित करता है कि बड़े कलाकारों के साथ काम करना जितना चुनौतीपूर्ण होता है, उतना ही सीखने और खुद को साबित करने का अवसर भी देता है। ‘दिल तो पागल है’ इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

  • ‘लगान’ ने मुझे बर्बाद कर दिया…’, आमिर खान की फिल्म के अभिनेता अमीन हाजी का चौंकाने वाला खुलासा

    ‘लगान’ ने मुझे बर्बाद कर दिया…’, आमिर खान की फिल्म के अभिनेता अमीन हाजी का चौंकाने वाला खुलासा


    नई दिल्ली । आमिर खान की सुपरहिट फिल्म ‘लगान’ को रिलीज हुए 25 साल पूरे होने जा रहे हैं। इस ऐतिहासिक फिल्म ने भारतीय सिनेमा को नई पहचान दी और इसके कलाकारों को भी रातोंरात लोकप्रियता मिली। लेकिन फिल्म में ‘बागा’ का यादगार किरदार निभाने वाले अभिनेता अमीन हाजी के लिए यह सफलता एक अलग ही अनुभव लेकर आई। अमीन हाजी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि ‘लगान’ ने उन्हें “बर्बाद” कर दिया था। उनका यह बयान सुनकर फिल्म प्रेमी हैरान रह गए।

    अमीन हाजी ने बताया कि ‘लगान’ उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन यही उपलब्धि उनके लिए आगे बढ़ने में बाधा भी बन गई। उन्होंने कहा कि फिल्म के बाद उन्हें कई ऑफर मिले, लेकिन कोई भी किरदार या कहानी ‘लगान’ के स्तर की नहीं लगी। ऐसे में उन्होंने अभिनय जारी रखने के बजाय खुद को पीछे खींच लिया। अमीन के मुताबिक, वह अपनी मेहनत से कमाई गई प्रतिष्ठा को खोना नहीं चाहते थे और उन्हें लगता था कि अगर कमजोर भूमिकाएं स्वीकार करेंगे तो उनकी पहचान प्रभावित हो सकती है।

    उन्होंने अपनी स्थिति को मशहूर शायरी की पंक्तियों से बयां करते हुए कहा, “हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले, बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर कम निकले।” अमीन ने माना कि ‘लगान’ जैसी फिल्म जीवन में बार-बार नहीं मिलती और उस अनुभव ने उनके लिए अभिनय की कसौटी बहुत ऊंची कर दी थी।

    अमीन हाजी ने यह भी बताया कि एक समय ऐसा आया जब निर्देशक आशुतोष गोवारिकर और उनकी पत्नी ने उनसे पूछा कि आखिर वह आगे क्या करना चाहते हैं। तब उन्होंने साफ कहा कि वह केवल अभिनय के लिए अभिनय नहीं करना चाहते। इसके बाद आशुतोष गोवारिकर ने उन्हें अपनी अगली फिल्म ‘स्वदेश’ के लेखन से जुड़ने का प्रस्ताव दिया। उस समय फिल्म का नाम ‘देश’ था। अमीन ने आश्चर्य जताते हुए पूछा कि इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए उन्हें क्यों चुना जा रहा है, तो आशुतोष ने उनकी ईमानदारी और रचनात्मक सोच की तारीफ करते हुए उन्हें टीम में शामिल कर लिया।

    यहीं से अमीन हाजी के जीवन का नया अध्याय शुरू हुआ। अभिनय से दूरी बनाने वाले अमीन ने लेखन की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे एक सफल लेखक के रूप में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने ‘हॉन्टेड 3डी’ और ‘डेंजरस इश्क’ जैसी फिल्मों में सह-लेखक के रूप में काम किया। बाद में उन्होंने अपनी फिल्म ‘कोई जाने ना’ का निर्देशन भी किया।

    अमीन हाजी ने कहा कि ‘लगान’ उनके लिए किसी विश्वविद्यालय से कम नहीं रही। इस फिल्म ने उन्हें केवल अभिनय ही नहीं, बल्कि सिनेमा की बारीकियां भी सिखाईं। उन्होंने आमिर खान, आशुतोष गोवारिकर और पूरी टीम का आभार जताते हुए कहा कि अगर ‘लगान’ नहीं होती तो शायद उनका फिल्मी सफर इस तरह आकार नहीं ले पाता।

    भले ही अमीन हाजी ने मजाकिया अंदाज में कहा हो कि ‘लगान’ ने उन्हें बर्बाद कर दिया, लेकिन उनके पूरे बयान से साफ है कि यह फिल्म उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण सीख और सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई। यही वजह है कि 25 साल बाद भी ‘लगान’ उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक ऐसी पाठशाला है जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी।

  • सुपरहिट गाने पर तमन्ना का बड़ा खुलासा, 'कावाला' में अपने प्रदर्शन को लेकर जताई कमी, बताया क्यों नहीं थीं पूरी तरह खुश

    सुपरहिट गाने पर तमन्ना का बड़ा खुलासा, 'कावाला' में अपने प्रदर्शन को लेकर जताई कमी, बताया क्यों नहीं थीं पूरी तरह खुश

    मुंबई । फिल्म जगत में अक्सर कलाकारों के काम को दर्शकों और समीक्षकों से भरपूर सराहना मिलती है, लेकिन कई बार स्वयं कलाकार अपने प्रदर्शन को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नहीं होते। ऐसा ही कुछ अभिनेत्री Tamannaah Bhatia के साथ भी हुआ। साउथ सुपरस्टार Rajinikanth की फिल्म Jailer के बेहद लोकप्रिय गाने Kaavaalaa ने उन्हें देशभर में नई पहचान दिलाई, लेकिन अभिनेत्री का कहना है कि वह अपने प्रदर्शन को और बेहतर बना सकती थीं।

    हाल ही में एक बातचीत के दौरान तमन्ना ने अपने करियर, डांस और अभिनय को लेकर खुलकर विचार साझा किए। चर्चा के दौरान जब ‘कावाला’ गाने का जिक्र हुआ तो उन्होंने स्वीकार किया कि शूटिंग पूरी होने के बाद उन्हें महसूस हुआ था कि उनके प्रदर्शन में और सुधार की गुंजाइश थी। अभिनेत्री ने कहा कि उन्हें लगा था कि वह गाने में कुछ और बेहतर कर सकती थीं और शायद अपनी प्रस्तुति को अगले स्तर तक ले जा सकती थीं।

    तमन्ना की इस आत्ममूल्यांकन वाली सोच को लेकर निर्देशक और कोरियोग्राफर Farah Khan ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तमन्ना हमेशा अपने काम को बेहतर बनाने की कोशिश करती हैं और यही उनकी सबसे बड़ी विशेषता है। फराह के अनुसार, अभिनेत्री उन कलाकारों में शामिल हैं जो सफलता के बाद भी खुद को चुनौती देना नहीं छोड़ते और हर बार पिछले प्रदर्शन से बेहतर करने की कोशिश करते हैं।

    बातचीत के दौरान तमन्ना ने यह भी स्पष्ट किया कि वह खुद को स्वाभाविक रूप से प्रशिक्षित डांसर नहीं मानतीं। यही कारण है कि किसी भी डांस नंबर को परफेक्ट बनाने के लिए उन्हें अतिरिक्त मेहनत और अभ्यास करना पड़ता है। उनका मानना है कि रिहर्सल किसी भी प्रस्तुति की सफलता की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है और तैयारी जितनी बेहतर होगी, प्रदर्शन भी उतना ही प्रभावशाली होगा।

    अभिनेत्री ने अपने एक अन्य चर्चित गीत Aaj Ki Raat का उदाहरण देते हुए बताया कि उसके लिए उन्होंने लगभग पंद्रह दिनों तक लगातार अभ्यास किया था। वह चाहती थीं कि गाने का हर स्टेप, हर मूवमेंट और हर भाव पूरी तरह समझने के बाद ही कैमरे के सामने प्रस्तुत किया जाए। उनके अनुसार तैयारी में लगाया गया समय कलाकार के आत्मविश्वास को बढ़ाता है और स्क्रीन पर उसका असर साफ दिखाई देता है।

    ‘कावाला’ गाना रिलीज के बाद सोशल मीडिया से लेकर मनोरंजन जगत तक चर्चा का विषय बन गया था। इसके संगीत, नृत्य और प्रस्तुति को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। बावजूद इसके, तमन्ना का मानना है कि एक कलाकार के रूप में निरंतर सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है। यही सोच उन्हें हर नए प्रोजेक्ट में और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है।

    फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि किसी सफल प्रस्तुति के बाद भी स्वयं का निष्पक्ष मूल्यांकन करने की क्षमता ही कलाकार को लंबे समय तक प्रासंगिक बनाए रखती है। तमन्ना भाटिया का यह नजरिया भी उनके पेशेवर दृष्टिकोण और अपने काम के प्रति गंभीरता को दर्शाता है, जिसने उन्हें भारतीय मनोरंजन उद्योग की प्रमुख अभिनेत्रियों में शामिल किया है।

  • जुबली गर्ल आशा पारेख के त्याग की अनकही दास्तान: शादीशुदा फिल्ममेकर से बेइंतहा मोहब्बत के बाद भी ताउम्र क्यों कुंवारी रहीं दिग्गज अभिनेत्री

    जुबली गर्ल आशा पारेख के त्याग की अनकही दास्तान: शादीशुदा फिल्ममेकर से बेइंतहा मोहब्बत के बाद भी ताउम्र क्यों कुंवारी रहीं दिग्गज अभिनेत्री

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में साठ और सत्तर के दशक में सिल्वर स्क्रीन
     राज करने वाली सदाबहार अभिनेत्री आशा पारेख की पेशेवर जिंदगी जितनी चकाचौंध और सफलताओं से भरी रही, उनकी निजी जिंदगी में उतनी ही खामोशी और त्याग की एक अनूठी कहानी छिपी रही। अपनी बेमिसाल खूबसूरती और बेहतरीन अभिनय के दम पर करोड़ों प्रशंसकों को अपना दीवाना बनाने वाली इस महान अदाकारा ने अपनी असल जिंदगी में प्यार की एक ऐसी गरिमापूर्ण मिसाल पेश की, जिसकी चर्चा आज भी बॉलीवुड के गलियारों में बेहद सम्मान के साथ की जाती है। उन्होंने एक शादीशुदा मर्द से सच्ची मोहब्बत तो की, लेकिन समाज में ‘घर तोड़ने वाली’ कहलाने का कलंक झेलने की बजाय ताउम्र कुंवारी रहने का रास्ता चुना।

    इस निश्छल और मूक प्रेम कहानी की शुरुआत वर्ष उन्नीस सौ उनसठ में हुई थी, जब मशहूर फिल्म निर्माता और निर्देशक नासिर हुसैन ने युवा आशा पारेख की प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें अपनी फिल्म ‘दिल देके देखो’ में मुख्य अभिनेत्री के तौर पर एक बड़ा ब्रेक दिया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई और इसके बाद इस जोड़ी ने एक के बाद एक कई शानदार और जुबली फिल्में सिनेमा जगत को दीं। सेट पर एक साथ लगातार काम करने के दौरान आशा पारेख कब अपने निर्देशक को दिल दे बैठीं, उन्हें खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ और दूसरी तरफ नासिर हुसैन के दिल में भी उनके लिए वही सम्मानजनक भावनाएं थीं।

    नासिर हुसैन के लिए अपने दिल में बेइंतहा मोहब्बत और कशिश होने के बावजूद आशा पारेख ने कभी भी अपने हक के लिए उनके सामने कोई जिद या शर्त नहीं रखी। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यह थी कि नासिर हुसैन पहले से ही शादीशुदा थे और बाल-बच्चों के साथ एक खुशहाल जीवन बिता रहे थे। अभिनेत्री के भीतर के नैतिक मूल्यों ने उन्हें कभी इस बात की इजाजत नहीं दी कि उनके व्यक्तिगत सुख या प्यार की खातिर किसी दूसरी औरत का सुहाग और एक हंसता-खेलता परिवार हमेशा के लिए बिखर जाए। उन्होंने अपने दिल की आवाज को दबाकर दूसरे के आशियाने की हिफाजत करना ज्यादा जरूरी समझा।

    दशकों तक इस खामोश दर्द और मोहब्बत को अपने सीने में दफन रखने के बाद, आशा पारेख ने वर्ष दो हजार सत्रह में प्रकाशित हुई अपनी आत्मकथा ‘द हिट गर्ल’ में इस राज से पर्दा उठाया था। उन्होंने बेहद भावुक शब्दों में स्वीकार किया था कि नासिर हुसैन ही उनकी जिंदगी के एकमात्र ऐसे पुरुष थे जिनसे उन्होंने बेहद शिद्दत से प्यार किया था। लेकिन किसी का घर उजाड़कर अपनी खुशियों का महल खड़ा करना उनके संस्कारों के खिलाफ था, यही वजह थी कि उन्होंने नासिर हुसैन पर शादी का दबाव बनाने की बजाय खुद अकेले जिंदगी काटने का एक बेहद कठिन और साहसिक निर्णय लिया।

    अपनी पूरी जिंदगी तन्हाई और अकेलेपन में गुजारने के बाद भी इस उम्र में पद्मश्री और दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित अभिनेत्री के मन में अपने अतीत के फैसलों को लेकर कोई मलाल, कड़वाहट या शिकायत नहीं है। उनका हमेशा से यह दृढ़ विश्वास रहा है कि किसी दूसरे को दुख देकर हासिल की गई खुशी कभी भी स्थायी और सच्ची नहीं हो सकती। आज बयासी वर्ष से अधिक की उम्र पार कर चुकीं आशा पारेख अपने इस फैसले पर अडिग रहते हुए पूरे आत्मसम्मान, सुकून और गरिमा के साथ अपनी एकाकी जिंदगी का आनंद ले रही हैं, जो आज के दौर के रिश्तों के लिए एक बहुत बड़ी नजीर है।

  • सिनेमाई इतिहास का वो विवादित वाकया: जब फिल्म 'प्रेम धर्म' के इंटीमेट सीन के दौरान बेकाबू हुए विनोद खन्ना, गुस्से में डिंपल कपाड़िया ने उठाया था बड़ा कदम

    सिनेमाई इतिहास का वो विवादित वाकया: जब फिल्म 'प्रेम धर्म' के इंटीमेट सीन के दौरान बेकाबू हुए विनोद खन्ना, गुस्से में डिंपल कपाड़िया ने उठाया था बड़ा कदम


    नई दिल्ली ।
    हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे किस्से दर्ज हैं जो फिल्मों की सफलता से इतर सेट पर घटित विवादित वाकयों के लिए हमेशा चर्चा में रहे। अस्सी के दशक में भी एक ऐसा ही वाकया सामने आया था, जिसने तत्कालीन फिल्म जगत में भारी सनसनी मचा दी थी। यह पूरा मामला हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर के सुपरस्टार विनोद खन्ना और दिग्गज अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया से जुड़ा हुआ है। वर्ष उन्नीस सौ अस्सी में आई फिल्म ‘प्रेम धर्म’ की शूटिंग के दौरान एक बेहद संवेदनशील और अंतरंग दृश्य को फिल्माते समय ऐसा घटनाक्रम हुआ कि सेट पर मौजूद हर व्यक्ति हैरान रह गया।

    इस बहुचर्चित फिल्म का निर्देशन मशहूर फिल्मकार महेश भट्ट कर रहे थे, जो अपनी फिल्मों में दृश्यों को बेहद यथार्थवादी और भावुक बनाने के लिए जाने जाते हैं। फिल्म के एक खास सीक्वेंस के लिए विनोद खन्ना और डिंपल कपाड़िया के बीच एक बेहद इंटीमेट और इमोशनल सीन शूट किया जाना तय हुआ था। इस दृश्य को अधिक वास्तविक रूप देने और कलाकारों की झिझक दूर करने के उद्देश्य से निर्देशक महेश भट्ट ने सेट की सभी लाइटों को काफी धीमा करवा दिया था और मुख्य कैमरा टीम को छोड़कर बाकी पूरी यूनिट को भी उस स्थान से थोड़ा दूर रहने के निर्देश दिए गए थे।

    जैसे ही कैमरे ने रोल करना शुरू किया, विनोद खन्ना ने स्क्रिप्ट की मांग के अनुसार अपनी सह-कलाकार डिंपल कपाड़िया को चूमना शुरू कर दिया। दृश्य के पूरा होते ही निर्देशक महेश भट्ट ने लाउडस्पीकर पर ‘कट’ की घोषणा की, लेकिन विनोद खन्ना दृश्य की भावुकता और तीव्रता में इस कदर खो चुके थे कि उन्होंने निर्देशक की आवाज नहीं सुनी। ‘कट’ बोले जाने के बाद भी वे लगातार डिंपल कपाड़िया को किस करते रहे, जिससे सेट पर असहज स्थिति पैदा हो गई। डिंपल कपाड़िया को शुरुआत में समझ ही नहीं आया कि उनके सह-कलाकार आखिर क्या कर रहे हैं।

    माहौल को अचानक गंभीर और अजीब होते देख निर्देशक महेश भट्ट ने अपनी जगह से उठकर बेहद जोर-जोर से ‘कट’ बोलना शुरू किया, जिसके बाद कहीं जाकर विनोद खन्ना होश में आए और पीछे हटे। इस अप्रत्याशित और अचानक हुई घटना से युवा अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया पूरी तरह स्तब्ध और गहरे सदमे में आ गईं। उन्हें विनोद खन्ना के इस अनपेक्षित व्यवहार पर भारी गुस्सा भी आया और वे तुरंत सेट से भागकर सीधे अपने मेकअप रूम की तरफ चली गईं।

    अपने स्वाभिमान और गरिमा को ठेस पहुंचने से आहत अभिनेत्री ने मेकअप रूम के भीतर पहुंचकर खुद को अंदर से पूरी तरह बंद कर लिया और बाहर आने से साफ मना कर दिया। सेट पर पैदा हुए इस गंभीर तनाव को देखते हुए निर्देशक महेश भट्ट ने तुरंत स्थिति को संभाला और वे स्वयं डिंपल कपाड़िया के कमरे के बाहर पहुंचे। उन्होंने अभिनेत्री से इस पूरी घटना के लिए औपचारिक रूप से माफी मांगी और उन्हें आश्वस्त किया कि यह केवल एक भूल थी। दूसरी तरफ, सुपरस्टार विनोद खन्ना भी अपनी इस अनियंत्रित हरकत के बाद बेहद शर्मिंदा महसूस कर रहे थे।

    बॉलीवुड के गलियारों में आज भी इस किस्से को संवेदनशीलता के साथ याद किया जाता है, जो यह दर्शाता है कि चकाचौंध भरी फिल्मों के निर्माण के दौरान कई बार कलाकारों के लिए स्थितियां कितनी असहज और चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं। हालांकि, बाद में मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे सुलझा लिया गया था, लेकिन सेंसर बोर्ड की कैंची और सेट पर मचे इस बवाल के कारण यह फिल्म और इससे जुड़ा यह विवाद हमेशा-कहमेशा के लिए फिल्मी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया।

  • भाई का आरोप- काम की कमी और मानसिक अपमान झेल रही थीं अभिनेत्री, सुशांत सिंह राजपूत से जुड़ा आखिरी पोस्ट

    भाई का आरोप- काम की कमी और मानसिक अपमान झेल रही थीं अभिनेत्री, सुशांत सिंह राजपूत से जुड़ा आखिरी पोस्ट

    नई दिल्ली । टेलीविजन मनोरंजन उद्योग से आई एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर ने पूरी इंडस्ट्री सहित प्रशंसकों को गहरे सदमे में डाल दिया है। कई लोकप्रिय धारावाहिकों में अपनी अदाकारी का जलवा बिखेर चुकीं बाईस वर्षीय उभरती हुई अभिनेत्री संचिता उगले के अचानक निधन से एक बार फिर चकाचौंध भरी इस दुनिया के पीछे छिपे मानसिक तनाव और दबाव की कड़वी सच्चाई सामने आ गई है। शुरुआती पुलिस जांच में इस घटना को कथित तौर पर आत्महत्या का मामला माना जा रहा है, जिसकी बारीकी से तफ्तीश की जा रही है।

    अभिनेत्री के असमय चले जाने के बाद उनके परिजनों और करीबी सहयोगियों की तरफ से आ रहे बयानों ने इस मामले में दुख और आक्रोश को और बढ़ा दिया है। संचिता की सह-कलाकार और बेहद करीबी दोस्त मेघा शर्मा ने मीडिया से बातचीत में खुलासा किया कि अभिनेत्री पिछले कुछ महीनों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और मानसिक अवसाद के दौर से गुजर रही थीं। जनवरी महीने से ही उनका नियमित इलाज चल रहा था और वे अपनी कुछ निजी उलझनों को लेकर लगातार मानसिक रूप से परेशान चल रही थीं।

    करीबी सूत्रों के मुताबिक, संचिता अक्सर जिंदगी से हार मानने और हताशा से भरी बातें किया करती थीं, जिसके बाद उनके दोस्तों और परिजनों ने हमेशा उन्हें ढांढस बंधाया और सकारात्मक रहने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, बीते कुछ दिनों से उनका फोन लगातार बंद आ रहा था, जिसने उनके करीबियों की चिंता बढ़ा दी थी। अपनी मौत से करीब दस दिन पहले वे एक ऑडिशन के सिलसिले में अपनी दोस्त के साथ गई थीं, जहां वे अपने भविष्य और अभिनय करियर को लेकर काफी आश्वस्त और सकारात्मक नजर आ रही थीं।

    दूसरी तरफ, इस संवेदनशील मामले में पुलिसिया कार्रवाई के बीच संचिता के भाई अविनाश उगले ने मनोरंजन जगत की कार्यशैली पर बेहद गंभीर और तीखे आरोप लगाए हैं। उनके भाई का कहना है कि ग्लैमर की इस दुनिया में लगातार मिलने वाला मानसिक दबाव, काम की अत्यधिक कमी और कार्यस्थल पर वरिष्ठों द्वारा कथित तौर पर किया जाने वाला अपमान उनकी बहन की मानसिक स्थिति बिगड़ने की मुख्य वजह बना। वह लंबे समय से इस बेइज्जती और उपेक्षा को चुपचाप सहन कर रही थीं, जिससे उनका आत्मविश्वास पूरी तरह टूट चुका था।

    मृतक अभिनेत्री के भाई ने इस पूरे घटनाक्रम का संबंध दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की त्रासदी से भी जोड़ा है। उन्होंने बताया कि संचिता का आखिरी सोशल मीडिया पोस्ट भी सुशांत सिंह राजपूत को ही समर्पित था, जिससे यह साफ झलकता है कि वे किस कदर अंदरूनी तौर पर अकेलेपन और मानसिक तनाव से जूझ रही थीं। गौरतलब है कि चौदह जून की शाम को संचिता अपने आवास पर अचेत अवस्था में पाई गई थीं, जिसके बाद अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।

    टेलीविजन शोज के अलावा हाल ही में एक बड़ी फिल्म का हिस्सा रहीं संचिता उगले के इस कदम ने फिल्म सिटी के भीतर कलाकारों की मानसिक सुरक्षा पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। पुलिस प्रशासन ने इस मामले में अप्राकृतिक मृत्यु का मुकदमा दर्ज कर शव को अंत्यपरीक्षण के लिए भेज दिया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आने और अभिनेत्री के कॉल डिटेल्स व सोशल मीडिया अकाउंट्स की गहन पड़ताल के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पूरी तरह खुलासा हो सकेगा।