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  • दीपिका पादुकोण की प्रेग्नेंसी को लेकर एटली का खास प्लान, फिल्म में होगा बॉडी डबल का इस्तेमाल

    दीपिका पादुकोण की प्रेग्नेंसी को लेकर एटली का खास प्लान, फिल्म में होगा बॉडी डबल का इस्तेमाल


    नई दिल्ली | दीपिका पादुकोण ने हाल ही में अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की खुशखबरी साझा की थी, जिसके बाद से ही वह लगातार सुर्खियों में हैं। रणवीर सिंह और बेटी दुआ के साथ एक भावुक तस्वीर साझा कर उन्होंने यह खुशखबरी फैंस तक पहुंचाई थी। इसके बावजूद दीपिका अपने प्रोफेशनल कमिटमेंट्स से पीछे नहीं हटी हैं और अब वह निर्देशक एटली की बड़ी एक्शन फिल्म ‘राका’ की शूटिंग में व्यस्त हैं। इस फिल्म में उनके साथ सुपरस्टार अल्लू अर्जुन भी नजर आने वाले हैं, जिससे प्रोजेक्ट को लेकर पहले ही भारी उत्साह बना हुआ है।

    एक्शन सीन्स के लिए बॉडी डबल का इस्तेमाल, सेफ्टी को दी प्राथमिकता

    रिपोर्ट्स के अनुसार फिल्म के मेकर्स ने दीपिका की प्रेग्नेंसी को ध्यान में रखते हुए एक अहम फैसला लिया है। अब फिल्म के हाई-ऑक्टेन एक्शन सीन्स में दीपिका की जगह बॉडी डबल का इस्तेमाल किया जाएगा। यह कदम पूरी तरह उनकी और होने वाले बच्चे की सेहत को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

    मेकर्स का कहना है कि फिल्म की भव्यता और एक्शन में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी, लेकिन किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाया जाएगा। वहीं दीपिका केवल उन हिस्सों की शूटिंग करेंगी, जिनमें फिजिकल स्ट्रेस या जोखिम शामिल नहीं है।

    स्क्रीन स्पेस में कोई कटौती नहीं, किरदार रहेगा उतना ही अहम

    दिलचस्प बात यह है कि इन सभी एडजस्टमेंट्स के बावजूद दीपिका के किरदार की अहमियत में कोई कमी नहीं की गई है। उनके रोल को उतना ही मजबूत रखा गया है जितना पहले तय किया गया था। इतना ही नहीं, फिल्म में उनकी एंट्री को बेहद भव्य और प्रभावशाली तरीके से डिजाइन किया जा रहा है।

    सूत्रों के मुताबिक दीपिका ने पहले ही अपने कई महत्वपूर्ण सीन पूरे कर लिए हैं, और अब केवल कुछ सीमित शूटिंग बची है, जो उनकी प्रेग्नेंसी के अनुकूल है।

    शाहरुख खान के साथ एक और हिट की तैयारी में दीपिका

    वर्कफ्रंट की बात करें तो दीपिका आखिरी बार फिल्म ‘सिंघम अगेन’ में नजर आई थीं, जहां उनका रोल सीमित था। अब वह शाहरुख खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘किंग’ में भी दिखाई देंगी, जिसमें सुहाना खान, अभिषेक बच्चन और रानी मुखर्जी जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं।

    खास बात यह है कि ‘किंग’ दीपिका और शाहरुख की साथ में छठी फिल्म होगी। इससे पहले दोनों ‘ओम शांति ओम’, ‘चेन्नई एक्सप्रेस’, ‘हैप्पी न्यू ईयर’, ‘पठान’ और ‘जवान’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में साथ नजर आ चुके हैं। दिलचस्प यह भी है कि दीपिका ने अपने करियर की शुरुआत ही शाहरुख की फिल्म ‘ओम शांति ओम’ से की थी।

    प्रेग्नेंसी के इस खास दौर में भी दीपिका पादुकोण का काम के प्रति समर्पण उनके प्रोफेशनल रवैये को दर्शाता है। वहीं मेकर्स द्वारा उठाए गए सुरक्षा कदम यह दिखाते हैं कि फिल्म इंडस्ट्री अब कलाकारों की हेल्थ को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क और जिम्मेदार हो रही है। ‘राका’ को लेकर दर्शकों की उत्सुकता अब और भी बढ़ गई है।

  • ‘जी ले जरा’ पर बड़ा अपडेट: प्रियंका-आलिया-कटरीना के बिना फिल्म बनाएंगे फरहान अख्तर?

    ‘जी ले जरा’ पर बड़ा अपडेट: प्रियंका-आलिया-कटरीना के बिना फिल्म बनाएंगे फरहान अख्तर?

    नई दिल्ली | बॉलीवुड के चर्चित निर्देशक और अभिनेता फरहान अख्तर की बहुचर्चित फिल्म ‘जी ले ज़रा’ एक बार फिर सुर्खियों में है। साल 2021 में जब इस फिल्म की घोषणा हुई थी, तब इसमें प्रियंका चोपड़ा, आलिया भट्ट और कटरीना कैफ जैसी बड़ी एक्ट्रेसेस को एक साथ देखने की खबर से फैंस बेहद उत्साहित थे।

    हालांकि समय के साथ फिल्म को लेकर अपडेट्स कम होते गए और प्रोजेक्ट की स्थिति को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगने लगीं कभी इसे बंद बताया गया तो कभी इसमें नई कास्ट के साथ दोबारा शुरू होने की चर्चा हुई।

    अब इन सभी अफवाहों पर खुद फरहान अख्तर ने प्रतिक्रिया दी है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उन्हें अफवाहों या “सीक्रेट्स छुपाने” में भरोसा नहीं है। उनका कहना है कि जब भी कोई प्रोजेक्ट पूरी तरह तैयार होगा, वह खुद इसकी घोषणा करेंगे।

    फरहान ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल वह एक ऐसे चरण में हैं जहां वह बतौर निर्देशक अपने अगले प्रोजेक्ट को लेकर सोच-समझकर निर्णय ले रहे हैं और वह सिर्फ वही काम करना चाहते हैं जो उनके दिल के करीब हो।

    स्टार कास्ट की मौजूदा स्थिति

    फिल्म से जुड़ी मूल स्टार कास्ट को लेकर भी स्थिति बदल चुकी है: प्रियंका चोपड़ा अब लंबे समय बाद भारतीय सिनेमा में वापसी कर रही हैं और वह एसएस राजामौली की फिल्म ‘वाराणसी’ में नजर आएंगी। आलिया भट्ट के पास फिलहाल ‘लव एंड वॉर’ और ‘अल्फा’ जैसी बड़ी फिल्में हैं। कटरीना कैफ फिलहाल मातृत्व अवकाश पर हैं और फिल्मी काम से दूर हैं

    आगे क्या?

    फरहान अख्तर की तरफ से अभी तक यह साफ नहीं है कि ‘जी ले ज़रा’ उसी स्टार कास्ट के साथ बनेगी या नए कलाकारों के साथ इसे दोबारा शुरू किया जाएगा। फिलहाल प्रोजेक्ट अनिश्चितता के दौर में है।

    इसी बीच फरहान ‘डॉन 3’ को लेकर भी चर्चा में हैं, जहां कास्टिंग और कानूनी विवादों ने इस प्रोजेक्ट को भी सुर्खियों में ला दिया है।

  • संघर्ष से सुपरस्टार तक: राजेश खन्ना के घर AC ठीक करने पहुंचे थे इरफान खान

    संघर्ष से सुपरस्टार तक: राजेश खन्ना के घर AC ठीक करने पहुंचे थे इरफान खान


    नई दिल्ली | भारतीय सिनेमा के महान अभिनेता इरफान खान की कहानी केवल सफलता की नहीं, बल्कि संघर्ष और आत्मनिर्माण की एक प्रेरणादायक दास्तान है। 29 अप्रैल 2020 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी यादें और जीवन से जुड़ी कहानियां आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं।

    एक समय ऐसा भी था जब इरफान खान फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने से पहले इलेक्ट्रिशियन का काम करते थे। इसी दौरान उन्हें एक ऐसा मौका मिला, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई। बताया जाता है कि वह सुपरस्टार राजेश खन्ना के घर एयर कंडीशनर (AC) ठीक करने गए थे।

    राजेश खन्ना के घर काम करते हुए इरफान ने पहली बार यह महसूस किया कि फिल्मी दुनिया और स्टारडम कितना अलग और आकर्षक हो सकता है। उसी दौरान उनके मन में यह विचार आया कि अगर वह कोई हुनर सीख लें, तो अपने जीवन में आगे बढ़ सकते हैं।

    इरफान ने अपने शुरुआती दिनों में कई छोटे-मोटे काम किए। जयपुर लौटने के बाद भी उन्होंने मेहनत जारी रखी, लेकिन जीवन आसान नहीं था। उन्होंने यह भी महसूस किया कि केवल पैसा कमाना ही जीवन का लक्ष्य नहीं हो सकता, बल्कि कुछ बड़ा हासिल करना जरूरी है।

    धीरे-धीरे उनका रुझान अभिनय की ओर बढ़ा और उन्होंने दूरदर्शन से अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने कई प्रसिद्ध टीवी सीरियल्स जैसे श्रीकांत, भारत एक खोज, चाणक्य, चंद्रकांता और बनेगी अपनी बात में काम किया।

    बड़े पर्दे पर उन्होंने फिल्म सलाम बॉम्बे से शुरुआत की और धीरे-धीरे अपनी दमदार एक्टिंग से पहचान बनाई। बाद में पान सिंह तोमर जैसी फिल्मों ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई।

    हालांकि, मार्च 2018 में उन्हें एक गंभीर बीमारी न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर का पता चला, जिसके बाद उन्होंने दो साल तक संघर्ष किया। अंततः 2020 में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

    इरफान खान की जिंदगी इस बात का उदाहरण है कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से कोई भी इंसान साधारण जीवन से असाधारण मुकाम तक पहुंच सकता है।

  • फैमिली मोमेंट वायरल: आमिर खान के साथ दिखीं गौरी, आयरा ने बढ़ाया अपनापन

    फैमिली मोमेंट वायरल: आमिर खान के साथ दिखीं गौरी, आयरा ने बढ़ाया अपनापन


    नई दिल्ली | मुंबई में 28 अप्रैल को एक्टर जुनैद खान की अपकमिंग फिल्म ‘एक दिन’ की स्पेशल स्क्रीनिंग रखी गई, जहां पूरा खान परिवार उन्हें सपोर्ट करने पहुंचा। इस मौके पर सबसे ज्यादा चर्चा में रहे आमिर खान, जो अपनी गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट के साथ पहुंचे और दोनों की बॉन्डिंग ने सभी का ध्यान खींच लिया।
    स्क्रीनिंग के दौरान आमिर खान की बेटी आयरा खान और दामाद नुपुर शिखरे भी मौजूद रहे। खास बात यह रही कि आयरा और गौरी स्प्रैट के बीच गर्मजोशी से गले मिलने का पल कैमरे में कैद हो गया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
    इवेंट के कई वीडियो और तस्वीरों में पूरा परिवार एक साथ पोज देता नजर आया। आमिर खान, गौरी स्प्रैट का हाथ थामे हुए दिखाई दिए और दोनों स्क्रीनिंग हॉल तक भी साथ-साथ पहुंचे। परिवार के अन्य सदस्य आयरा, नुपुर और जुनैद भी इस दौरान काफी खुश नजर आए।
    एक और वीडियो में सभी ने मिलकर पैपराजी के सामने ग्रुप फोटो खिंचवाई। इस दौरान आयरा और नुपुर ने भी साथ में तस्वीरें क्लिक कराईं, जबकि आमिर और जुनैद मुस्कुराते हुए कैमरे के सामने पोज देते दिखे।
    फिल्म ‘एक दिन’ को लेकर आमिर खान ने इवेंट में काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साउथ एक्ट्रेस साई पल्लवी के अभिनय की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें देश की बेहतरीन एक्ट्रेस बताया। वहीं जुनैद के काम पर हल्के-फुल्के अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने भी अच्छा काम किया है, लेकिन वह उनके बेटे हैं इसलिए ज्यादा कुछ नहीं कह सकते।
    यह फिल्म One Day का हिंदी रीमेक है और इसका निर्देशन सुनील पांडे ने किया है। इसे आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले मंसूर खान, आमिर खान और अपर्णा पुरोहित ने मिलकर प्रोड्यूस किया है।
    फिल्म की कहानी एक ऐसे शख्स की है जो अपनी ऑफिस कलीग से प्यार करता है लेकिन अपने जज़्बात जाहिर नहीं कर पाता और बस एक दिन उसके साथ बिताने की ख्वाहिश रखता है, जो एक अनोखे मोड़ पर पूरी होती है।
    ‘एक दिन’ 1 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है और इसके लिए एडवांस बुकिंग पहले ही शुरू हो चुकी है।
  • “ये धर्मेंद्र और अमिताभ की नकल कर रहा है…” – पहली फिल्म के सेट पर ऋषि कपूर को मिली कड़ी सीख

    “ये धर्मेंद्र और अमिताभ की नकल कर रहा है…” – पहली फिल्म के सेट पर ऋषि कपूर को मिली कड़ी सीख


    नई दिल्ली | कपूर खानदान ने चार पीढ़ियों से दर्शकों को एंटरटेन किया है और आज भी कर रही है। इसी खानदान ने बहुमुखी प्रतिभा के धनी फिल्म निर्माता और एक्टर निकले, लेकिन ऋषि कपूर अपनी फिल्मों के साथ-साथ अपने बेबाक अंदाज के लिए भी जाने गए।

    बात चाहे निजी जिंदगी से जुड़ी हो या देश से, उन्होंने हर मामले पर खुलकर राय रखी, लेकिन बेबाक राय रखने वाले ऋषि कपूर को पहली ही फिल्म बॉबी में बड़ी सीख मिली थी, लेकिन पहले उनके हाथ और पैर बुरी तरीके से फूल गए थे। बता दें कि 30 अप्रैल को अभिनेता ऋषि कपूर की पुण्यतिथि है।

    ऋषि कपूर ने अपने करियर में कई शानदार और रोमांटिक फिल्में दीं, और जब 70-80 के दशक में अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र जैसे अभिनेता पर्दे पर सिर्फ एक्शन कर रहे थे, तब ऋषि कपूर ने सिनेमा को म्यूजिकल और रोमांस से भरी फिल्में दीं और हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाई, लेकिन पहली फिल्म के दौरान उनके पिता राज कपूर ने उन्हें खुले समंदर में अकेला हाथ- पैर मारने के लिए छोड़ दिया था।

    दरअसल ऋषि कपूर की बतौर मुख्य अभिनेता पहली फिल्म ‘बॉबी’ थी और सेट पर उनके लिए काम करना भी मुश्किल था क्योंकि भले ही वे फिल्मी खानदान से थे, लेकिन सेट पर काम करने का अनुभव नहीं था। सेट पर पिता राज कपूर को पिता कहने की भी इजाजत नहीं थी और वे उन्हें साहब बुलाते थे। इसी फिल्म का पहला गाना शूट होना था और अभिनेता को लगा कि गाना फिल्माने के लिए कोई कोरियोग्राफर बुलाया जाएगा, लेकिन काफी इंतजार करने के बाद सेट पर कोई नहीं आया और राज कपूर ने आदेश दिया कि कोई कोरियोग्राफर नहीं आएगा और जो करना है वो तुम्हें खुद करना है।

    ये सुनकर ऋषि कपूर के हाथ-पैर सुन्न हो गए। पहले तो उन्होंने इनकार किया, लेकिन राज कपूर की एक सीख ने उन्हें जिंदगी की सबसे बड़ी सीख दी। राज कपूर ने कहा कि अगर किसी कोरियोग्राफर को बुलाता तो वो तुम्हें वैसा करने के लिए कहता, जो उसने धर्मेंद्र या अमिताभ ने किया, क्योंकि उसने बहुत सारे लोगों को सिखाया है। ऐसे में लोग कहेंगे कि नया लड़का धर्मेंद्र या अमिताभ की नकल कर रहा है, तो इसलिए जो करना है, वो खुद को करो और पूरी आजादी के साथ करो। उस दिन से लेकर आने वाली फिल्मों में ऋषि कपूर ने गानों की लिप-सिंकिंग, डांस और स्टाइल को खुद से किया और पर्दे पर अपनी अलग पहचान बनाई।

  • खलनायक के सीक्वल से लौटेगा बल्लू बलराम का खौफ; संजय दत्त की जिद पर सुभाष घई ने तैयार की कहानी,

    खलनायक के सीक्वल से लौटेगा बल्लू बलराम का खौफ; संजय दत्त की जिद पर सुभाष घई ने तैयार की कहानी,


    नई दिल्ली।हिंदी सिनेमा के इतिहास में जिस फिल्म ने ‘नायक नहीं खलनायक हूं मैं’ के नारे को घर-घर तक पहुँचाया, उस कल्ट क्लासिक फिल्म के सीक्वल की चर्चा एक बार फिर फिजाओं में तैर रही है। करीब तीन दशक पहले रिलीज हुई ‘खलनायक’ ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़े थे, बल्कि संजय दत्त के करियर को एक ऐसी नई पहचान दी थी जिसने एंटी-हीरो किरदारों की परिभाषा ही बदल दी।
    अब तीस साल के लंबे अंतराल के बाद संजय दत्त ने खुद अपनी इस यादगार फिल्म के सीक्वल का औपचारिक ऐलान कर दिया है। इस खबर के आते ही प्रशंसकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है, लेकिन इसी बीच एक अहम जानकारी सामने आई है कि फिल्म के मूल रचयिता सुभाष घई इस बार निर्देशन की कुर्सी पर नजर नहीं आएंगे।

    इस बड़े फैसले के पीछे की वजहें बेहद भावनात्मक और पेशेवर हैं। बताया जा रहा है कि संजय दत्त इस प्रोजेक्ट को लेकर वर्षों से खासे उत्साहित थे। उनकी यह इच्छा इतनी प्रबल थी कि जेल में रहने के दौरान भी उन्होंने पत्र लिखकर इस कहानी को आगे बढ़ाने की बात कही थी।

    संजय दत्त के प्रति पिता जैसा स्नेह रखने वाले सुभाष घई ने इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी सहमति तो दे दी है और फिल्म की मूल अवधारणा व पटकथा भी तैयार कर ली है, लेकिन वे अब इस विरासत को किसी नई दृष्टि के साथ विकसित होते देखना चाहते हैं। अस्सी वर्ष की आयु में सुभाष घई ने अब निर्देशन के चुनौतीपूर्ण कार्य से दूरी बनाने का फैसला किया है, हालांकि फिल्म के रचनात्मक पक्ष पर उनकी पकड़ पहले की तरह ही बनी रहेगी।

    फिल्म के इस दूसरे भाग में सुभाष घई एक मार्गदर्शक और ‘क्रिएटिव प्रोड्यूसर’ की भूमिका में नजर आएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भले ही वे कैमरे के पीछे निर्देशक के रूप में न हों, लेकिन फिल्म के निर्माण के हर पड़ाव पर वे संजय दत्त के साथ खड़े रहेंगे। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने फिल्म में एक छोटा सा कैमियो करने की इच्छा भी जताई है, जो पुरानी यादों को ताजा करने का काम करेगा।

    1993 में आई पहली फिल्म ने जो बेंचमार्क सेट किया था, उसे पार करना किसी भी नए निर्देशक के लिए बड़ी चुनौती होगी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सुभाष घई की सरपरस्ती में संजय दत्त का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट किस तरह पर्दे पर उतरता है और ‘खलनायक’ की इस विरासत को कौन आगे ले जाता है।
  • सिनेमा का सबसे विशाल सेट: बाहुबली 2: द कॉन्क्लूजन के महिष्मती राज्य ने रचा इतिहास

    सिनेमा का सबसे विशाल सेट: बाहुबली 2: द कॉन्क्लूजन के महिष्मती राज्य ने रचा इतिहास

    नई दिल्ली। भारतीय फिल्म जगत में बाहुबली 2: द कॉन्क्लूजन एक ऐसी ऐतिहासिक फिल्म के रूप में जानी जाती है, जिसने अपने शानदार निर्माण और विशालता से एक नया मानक स्थापित किया। इस फिल्म की सफलता के पीछे केवल कहानी या अभिनय ही नहीं, बल्कि इसकी भव्य प्रस्तुति और विशाल सेट भी बड़ी वजह रहे।

    फिल्म में दिखाया गया महिष्मती साम्राज्य वास्तव में एक कल्पनात्मक दुनिया था, जिसे बेहद वास्तविक रूप देने के लिए विशाल स्तर पर निर्माण कार्य किया गया। हैदराबाद के प्रसिद्ध रामोजी फिल्म सिटी में करीब 100 एकड़ क्षेत्र में इस सेट को तैयार किया गया। इस भव्य सेट को खड़ा करने में लगभग 60 करोड़ रुपये खर्च हुए और 500 से अधिक लोगों ने मिलकर इसे तैयार किया।

    इस विशाल प्रोजेक्ट के पीछे कला निर्देशक साबू सिरिल और उनकी टीम की अहम भूमिका रही। उन्होंने हर एक संरचना, महल और युद्धस्थल को इस तरह डिजाइन किया कि वह पर्दे पर पूरी तरह जीवंत नजर आए। सेट की बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे दर्शकों को एक वास्तविक साम्राज्य का अनुभव मिल सके।

    फिल्म की शूटिंग केवल स्टूडियो तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई महत्वपूर्ण दृश्यों को प्राकृतिक लोकेशनों पर भी फिल्माया गया। केरल के प्रसिद्ध अथिरप्पिल्ली जलप्रपात जैसे स्थानों पर शूट किए गए दृश्य फिल्म की खूबसूरती और भव्यता को और बढ़ाते हैं। खासकर झरनों के आसपास फिल्माए गए सीन दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने।

    एक रोचक तथ्य यह भी है कि फिल्म के पहले भाग की शूटिंग के दौरान ही दूसरे भाग के कुछ हिस्सों को पहले ही शूट कर लिया गया था। इससे फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित किया गया और समय की बचत भी हुई। बाद में शेष हिस्सों को पूरी सावधानी और सुरक्षा के साथ पूरा किया गया।

    फिल्म की लोकप्रियता इतनी अधिक रही कि इससे जुड़ी चीजों को संरक्षित रखने के लिए एक विशेष संग्रहालय भी बनाया गया, जहां फिल्म में इस्तेमाल किए गए हथियार, कवच और सेट के हिस्से आज भी सुरक्षित रखे गए हैं। यहां आने वाले लोग उस भव्य दुनिया को करीब से महसूस कर सकते हैं, जिसे उन्होंने पर्दे पर देखा था।

    इस तरह बाहुबली 2: द कॉन्क्लूजन ने यह साबित कर दिया कि अगर कल्पना, तकनीक और मेहनत का सही तालमेल हो, तो सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक भव्य अनुभव भी बन सकता है।

  • ‘हम तुम्हारे हैं सनम’ की अनोखी कहानी: लंबा इंतजार और बिना फीस शाहरुख का फैसला

    ‘हम तुम्हारे हैं सनम’ की अनोखी कहानी: लंबा इंतजार और बिना फीस शाहरुख का फैसला

    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में कुछ फिल्में सिर्फ अपनी कहानी की वजह से नहीं, बल्कि अपने बनने की प्रक्रिया के कारण भी लंबे समय तक याद रखी जाती हैं। ऐसी ही एक फिल्म रही, जिसमें तीन बड़े सितारे एक साथ नजर आए, लेकिन इसके बनने और रिलीज होने की कहानी उतनी ही दिलचस्प और लंबी रही जितनी इसकी स्टारकास्ट बड़ी थी।
    इस फिल्म की शुरुआत 1990 के दशक के अंत में हुई थी, जब इसे बड़े स्तर पर बनाने की योजना तैयार की गई। इसमें शाहरुख खान, सलमान खान और माधुरी दीक्षित जैसे बड़े नामों को एक साथ जोड़ा गया, जिससे शुरुआत से ही इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी उम्मीदें थीं। लेकिन जैसे-जैसे फिल्म की शूटिंग आगे बढ़ी, वैसे-वैसे कई तकनीकी और रचनात्मक कारणों से इसका काम धीमा होता गया।
    समय के साथ फिल्म के कई हिस्सों में बदलाव करने पड़े। गानों से लेकर कुछ दृश्यों तक को दोबारा तैयार किया गया, क्योंकि बदलते समय के साथ फिल्म को नए अंदाज़ में ढालने की जरूरत महसूस की गई। यही कारण रहा कि यह प्रोजेक्ट अपने तय समय पर पूरा नहीं हो सका और लगातार आगे खिसकता चला गया।
    करीब 6 साल की लंबी प्रक्रिया के बाद आखिरकार यह फिल्म 2002 में दर्शकों के सामने आई। इतने लंबे इंतजार के बावजूद इस फिल्म को लेकर लोगों में उत्साह बना रहा, क्योंकि इसमें उस दौर के तीन बड़े सितारे एक साथ स्क्रीन पर नजर आए थे।
    इस फिल्म में शाहरुख खान ने एक ऐसा किरदार निभाया जो उनके पारंपरिक रोमांटिक रोल्स से काफी अलग था। यह किरदार एक ऐसे व्यक्ति का था जिसमें भावनात्मक संघर्ष और शंका जैसे पहलू दिखाए गए थे। शुरुआत में उन्होंने इस भूमिका को लेकर संकोच भी जताया था, लेकिन बाद में रचनात्मक टीम के समझाने पर उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया।
    सबसे खास बात यह रही कि शाहरुख खान ने इस फिल्म के लिए कोई पारिश्रमिक नहीं लिया। बताया जाता है कि उनका मेहनताना पहले तय किया गया था, लेकिन फिल्म के निर्माण में देरी और बढ़ते खर्च को देखते हुए उन्होंने स्वेच्छा से फीस लेने से इनकार कर दिया। उनका यह निर्णय फिल्म निर्माण टीम के लिए बड़ी मदद साबित हुआ।
    फिल्म से जुड़े लोगों का मानना है कि इतने लंबे समय तक प्रोजेक्ट का अटका रहना आसान नहीं था, लेकिन कलाकारों के सहयोग और उनके आपसी तालमेल ने इसे पूरा करने में अहम भूमिका निभाई। खासकर तीनों प्रमुख कलाकारों की मौजूदगी ने इस फिल्म को किसी तरह अंतिम रूप तक पहुंचाने में मदद की।
    आज भी यह फिल्म उस दौर की उन खास फिल्मों में गिनी जाती है, जिनकी पहचान सिर्फ कहानी से नहीं बल्कि उनके बनने के पीछे की लंबी और संघर्षपूर्ण यात्रा से भी होती है। यह फिल्म यह भी दिखाती है कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए धैर्य, सहयोग और समर्पण कितना जरूरी होता है।
  • हंसाने वाले एक्टर का गंभीर अतीत: राजपाल यादव का सेना से जुड़ा अनोखा सफर..

    हंसाने वाले एक्टर का गंभीर अतीत: राजपाल यादव का सेना से जुड़ा अनोखा सफर..

    नई दिल्ली। कॉमेडी फिल्मों में अपनी बेहतरीन टाइमिंग और सरल अभिनय से दर्शकों को हंसाने वाले राजपाल यादव की असल जिंदगी पर्दे पर दिखने वाली उनकी छवि से कहीं ज्यादा संघर्षपूर्ण रही है। फिल्मों में लोगों को गुदगुदाने वाले यह कलाकार अपने शुरुआती दिनों में एक बिल्कुल अलग और कठिन सफर से गुजरे हैं।

    अपने करियर की शुरुआत में उनका सपना नौसेना में शामिल होने का था, लेकिन शारीरिक कारणों की वजह से यह सपना पूरा नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और नए अवसरों की तलाश शुरू की। इसी दौरान उन्हें एक ऐसी जगह काम करने का मौका मिला, जहां उन्हें सेना के लिए जरूरी वर्दी तैयार करने का काम दिया गया।

    इस काम में उनका सीधा संबंध सेना के जवानों की जरूरतों से था। वे उन कपड़ों और वर्दियों को तैयार करते थे, जिन्हें देश के सैनिक पहनते हैं। यह जिम्मेदारी उनके लिए भले ही अलग थी, लेकिन इसने उन्हें अनुशासन और मेहनत का असली मतलब सिखाया।

    शुरुआत में उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि यह काम उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाएगा, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने समझा कि देश की सेवा सिर्फ हथियार उठाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि हर छोटे योगदान का भी बड़ा महत्व होता है।

    बाद में उनके इस योगदान को पहचान भी मिली और यह अनुभव उनके जीवन में गर्व का कारण बना। यह उनके लिए एक ऐसा पड़ाव था, जिसने उनके सोचने और आगे बढ़ने के तरीके को बदल दिया।

    इसके बाद उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा और अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर खास पहचान बनाई। आज वे भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय कॉमेडी कलाकारों में गिने जाते हैं। उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि जीवन में कोई भी अनुभव छोटा नहीं होता और हर अनुभव आगे बढ़ने की ताकत देता है।

  • 71 की उम्र में भी फिटनेस का जलवा, अनुपम खेर की जिम मेहनत ने सबको चौंकाया..

    71 की उम्र में भी फिटनेस का जलवा, अनुपम खेर की जिम मेहनत ने सबको चौंकाया..


    नई दिल्ली।
    कई लोग 70 की उम्र के बाद जीवन को आराम और सीमित गतिविधियों तक समेट लेते हैं, लेकिन अनुपम खेर इस सोच को पूरी तरह बदलते नजर आते हैं। 71 वर्ष की उम्र में भी वे जिस तरह से खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रखे हुए हैं, वह लोगों के लिए प्रेरणा का विषय बन गया है। हाल ही में उनका एक जिम वीडियो सामने आया, जिसमें उनकी फिटनेस और ऊर्जा ने सभी का ध्यान खींच लिया।

    इस वीडियो में वे पूरी लगन के साथ व्यायाम करते दिखाई देते हैं। उनका अंदाज़ यह दर्शाता है कि वे फिटनेस को केवल एक शौक नहीं, बल्कि जीवन का जरूरी हिस्सा मानते हैं। वर्कआउट के दौरान उनकी एकाग्रता और निरंतरता यह साबित करती है कि उन्होंने अनुशासन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया है।

    अनुपम खेर का मानना है कि शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मानसिक संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। उनके अनुसार नियमित व्यायाम न केवल शरीर को मजबूत करता है, बल्कि मन को भी शांत और स्थिर बनाता है। यही कारण है कि वे हर परिस्थिति में अपनी फिटनेस रूटीन को प्राथमिकता देते हैं।

    कई बार जब सामान्य रूप से मन व्यायाम करने का नहीं होता, तब भी वे खुद को प्रेरित करते हैं और अभ्यास जारी रखते हैं। उनका यह दृष्टिकोण दिखाता है कि असली अनुशासन वही है जो बिना मन के भी जिम्मेदारी को निभाए। इसी वजह से उनकी फिटनेस यात्रा लोगों के लिए एक मजबूत संदेश बन चुकी है।

    उनकी यह सक्रिय जीवनशैली केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक मजबूती और जीवन के प्रति सकारात्मक सोच को भी दर्शाती है। वे अक्सर अपने अनुभवों के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि जीवन में निरंतरता और सकारात्मकता बनाए रखना बेहद जरूरी है।

    उनका यह भी मानना है कि जब कोई व्यक्ति अपने अनुशासन और प्रयासों से दूसरों को प्रेरित करने लगता है, तो उसकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। इसी सोच के साथ वे अपनी फिटनेस यात्रा को साझा करते हैं ताकि लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो सकें।

    फिलहाल अनुपम खेर अपने थिएटर और अन्य रचनात्मक प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं, लेकिन इसके बावजूद वे अपने फिटनेस रूटीन से समझौता नहीं करते। उनकी यह जीवनशैली यह साबित करती है कि उम्र कभी भी सक्रियता और सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती, अगर व्यक्ति में इच्छाशक्ति और अनुशासन मजबूत हो।