Category: Entertainment

  • रणबीर, साई पल्लवी और यश की कास्टिंग पर फिर उठे सवाल, 'रामायण' को लेकर सोशल मीडिया दो धड़ों में बंटा

    रणबीर, साई पल्लवी और यश की कास्टिंग पर फिर उठे सवाल, 'रामायण' को लेकर सोशल मीडिया दो धड़ों में बंटा


    नई दिल्ली । नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण अपनी घोषणा के बाद से लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। फिल्म के भव्य विजुअल्स, स्टारकास्ट और बड़े बजट की चर्चा जहां हर ओर हो रही है वहीं दूसरी तरफ इसके मुख्य कलाकारों रणबीर कपूर साई पल्लवी और यश से जुड़े पुराने विवाद एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए हैं। फिल्म में रणबीर भगवान राम साई पल्लवी माता सीता और यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में इन कलाकारों की कास्टिंग को लेकर समर्थकों और आलोचकों के बीच अलग-अलग राय देखने को मिल रही है।

    रणबीर कपूर को भगवान राम के किरदार में चुने जाने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनकी पिछली फिल्मों और सार्वजनिक बयानों को लेकर हुई। खासतौर पर फिल्म एनिमल में निभाए गए हिंसक और ग्रे शेड वाले किरदार के कारण कुछ लोगों ने सवाल उठाए कि क्या इस तरह की छवि वाले अभिनेता को भगवान राम के रूप में स्वीकार किया जा सकता है। हालांकि बड़ी संख्या में दर्शकों का मानना है कि किसी अभिनेता का मूल्यांकन उसके अभिनय के आधार पर होना चाहिए न कि उसके पुराने किरदारों के आधार पर।

    रणबीर पहले भी अपने एक बयान को लेकर विवादों में आ चुके हैं जब उन्होंने पत्नी आलिया भट्ट की प्रेग्नेंसी के दौरान मजाकिया अंदाज में टिप्पणी की थी। इस बयान की सोशल मीडिया पर आलोचना हुई थी जिसके बाद अभिनेता ने सफाई देते हुए कहा था कि उनका किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था। इसके अलावा सात्विक जीवनशैली अपनाने और खानपान को लेकर भी उनके बारे में कई तरह के दावे और चर्चाएं सोशल मीडिया पर वायरल होती रही हैं लेकिन इन दावों की अलग-अलग व्याख्या सामने आई।

    फिल्म में माता सीता की भूमिका निभा रहीं साई पल्लवी भी पहले अपने एक इंटरव्यू के बयान को लेकर विवादों में आ चुकी हैं। उन्होंने हिंसा के विभिन्न मामलों का जिक्र करते हुए कहा था कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति या जीव के साथ हिंसा गलत है। उनके इस बयान की अलग-अलग तरह से व्याख्या की गई। कुछ लोगों ने इसे गलत तरीके से पेश किया जबकि कई लोगों ने उनके बयान का समर्थन भी किया। अब रामायण में उनकी कास्टिंग को लेकर भी लुक, भाषा और स्क्रीन प्रेजेंस पर बहस जारी है हालांकि उनके अभिनय की तारीफ करने वालों की भी बड़ी संख्या है।

    रावण की भूमिका निभा रहे कन्नड़ सुपरस्टार यश भी समय-समय पर विवादों में रहे हैं। उनके परिवार का नाम कभी कथित जमीन विवाद से जुड़ी खबरों में सामने आया था हालांकि यह कोई बड़ा आपराधिक मामला नहीं बना। इसके अलावा उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर में कहा था कि वह ऐसी फिल्में करना पसंद करते हैं जिन्हें परिवार के साथ बैठकर देखा जा सके और वह अंतरंग दृश्यों से बचना चाहते हैं। बाद में उनकी फिल्मों में कुछ इंटीमेट सीन्स सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस छिड़ गई।

    रामायण की घोषणा के बाद एक ओर फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता लगातार बढ़ रही है तो दूसरी ओर कलाकारों से जुड़े पुराने विवाद भी चर्चा में बने हुए हैं। हालांकि फिल्म जगत के जानकारों का मानना है कि किसी भी अभिनेता की असली परीक्षा पर्दे पर उसके प्रदर्शन से होती है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि रणबीर कपूर साई पल्लवी और यश अपने दमदार अभिनय से दर्शकों की उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं और क्या उनकी परफॉर्मेंस इन सभी बहसों को पीछे छोड़ पाएगी।

  • उर्मिला मातोंडकर और राम गोपाल वर्मा की सीक्रेट शादी को लेकर वरिष्ठ पत्रकार का दावा, बॉलीवुड में मची हलचल

    उर्मिला मातोंडकर और राम गोपाल वर्मा की सीक्रेट शादी को लेकर वरिष्ठ पत्रकार का दावा, बॉलीवुड में मची हलचल

    नई दिल्ली । हिंदी और दक्षिण भारतीय सिनेमा जगत में अपनी अलग पहचान बनाने वाले चर्चित फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा और लोकप्रिय अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। 90 के दशक में दोनों के रिश्तों और डेटिंग को लेकर कई तरह की अफवाहें उड़ती रही हैं, लेकिन हाल ही में एक वरिष्ठ फिल्म पत्रकार के दावे ने इस पुराने मामले को फिर से तरोताजा कर दिया है।

    एक टॉक शो के दौरान वरिष्ठ पत्रकार ने दावा किया कि राम गोपाल वर्मा और उर्मिला मातोंडकर ने एक समय गुप्त रूप से विवाह रचा लिया था। उनके अनुसार, उन्हें इस घटनाक्रम की जानकारी दक्षिण भारतीय फिल्मों के दिग्गज अभिनेता चिरंजीवी के माध्यम से मिली थी। पत्रकार ने बताया कि चिरंजीवी ने उनसे बातचीत के दौरान आंध्र प्रदेश के एक मंदिर में हुई इस गुप्त शादी का जिक्र किया था और इस बात की पुष्टि के लिए प्रमाण भी साझा किए थे।

    पत्रकार के मुताबिक, इस खबर की सच्चाई जानने के लिए उन्होंने उस दौरान अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर और निर्देशक राम गोपाल वर्मा दोनों से संपर्क किया था। हालांकि, उर्मिला ने इन बातों पर अपनी कड़ी आपत्ति जताई थी, जबकि निर्देशक ने इस पूरे विषय पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था। दोनों कलाकारों ने कभी भी सार्वजनिक रूप से इस प्रकार के दावों को स्वीकार नहीं किया।

    इसके अलावा, रिपोर्ट में दोनों के बीच दूरियां आने का कारण भी बताया गया है। कहा गया कि अभिनेत्री इस रिश्ते को कानूनी तौर पर आधिकारिक दर्जा देना चाहती थीं, जबकि निर्देशक इसके लिए तैयार नहीं थे। इसी वैचारिक मतभेद के कारण दोनों ने आखिरकार अपने रास्ते अलग कर लिए और अपने-अपने पेशेवर करियर पर ध्यान केंद्रित किया।

    उर्मिला मातोंडकर और राम गोपाल वर्मा ने 90 के दशक में ‘रंगीला’, ‘सत्या’ और ‘कौन’ जैसी कई सुपरहिट और यादगार फिल्मों में एक साथ काम किया है। इन फिल्मों ने भारतीय सिनेमा में नए कीर्तिमान स्थापित किए थे। सालों बाद सामने आए इस नए दावे ने एक बार फिर बी-टाउन के गलियारों में पुरानी यादों और चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

  • नीरज पांडे के निर्देशन में बनने वाली फिल्म में पांचवीं बार जुड़े अक्षय कुमार, आरडी बर्मन के किरदार में दिखेंगे फरहान

    नीरज पांडे के निर्देशन में बनने वाली फिल्म में पांचवीं बार जुड़े अक्षय कुमार, आरडी बर्मन के किरदार में दिखेंगे फरहान


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा जगत के मशहूर खिलाड़ी अभिनेता अक्षय कुमार और जाने-माने निर्देशक नीरज पांडे एक बार फिर बड़े पर्दे पर एक साथ वापसी करने जा रहे हैं। दोनों दिग्गज कलाकारों की यह जोड़ी लगभग एक दशक बाद एक बेहद खास प्रोजेक्ट के लिए हाथ मिला रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बहुप्रतीक्षित फिल्म महान भारतीय संगीतकार आरडी बर्मन के जीवन पर आधारित एक संगीतमय बायोपिक होगी।

    इस महत्वाकांक्षी फिल्म में बहुमुखी प्रतिभा के धनी अभिनेता और निर्देशक फरहान अख्तर, आरडी बर्मन की मुख्य भूमिका निभाते हुए नजर आएंगे। वहीं, अक्षय कुमार इस फिल्म में एक विशेष और महत्वपूर्ण अतिथि भूमिका (कैमियो) में दिखाई देंगे। यद्यपि फिल्म में अक्षय की भूमिका समय के हिसाब से छोटी होगी, लेकिन कहानी और पटकथा के मोड़ को देखते हुए उनके चरित्र का विशेष महत्व बताया जा रहा है।

    अक्षय कुमार और नीरज पांडे की जोड़ी ने इससे पहले कई सफल और चर्चित फिल्मों में एक साथ काम किया है। यही कारण है कि निर्देशक के केवल एक प्रस्ताव पर ही अभिनेता ने इस विशेष भूमिका को स्वीकार कर लिया। इस बायोपिक का निर्माण नीरज पांडे के साथ फरहान अख्तर की निर्माण संस्था मिलकर कर रही है। वर्तमान में फिल्म अपने प्री-प्रोडक्शन चरण में है और संगीत निर्माण पर जोर-शोर से काम चल रहा है, ताकि कालजयी संगीतमय धुनों को नए रूप में पेश किया जा सके।

    फिल्म की मुख्य फोटोग्राफी और शूटिंग आगामी सितंबर माह से शुरू होने की संभावना है। वहीं, अक्षय कुमार के काम की बात करें तो वे हाल ही में कई बड़े सिनेमा प्रोजेक्ट्स से जुड़े रहे हैं। उनकी आगामी फिल्मों में हॉरर-कॉमेडी और एक्शन से भरपूर फिल्में शामिल हैं, जिनमें वे अपने पुराने सह-कलाकारों के साथ फिर से स्क्रीन शेयर करते दिखेंगे।

    सिनेमा प्रेमियों के लिए यह खबर काफी उत्साहजनक है, क्योंकि नीरज पांडे और अक्षय कुमार के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए इस नई संगीतमय यात्रा से भी बड़ी उम्मीदें लगाई जा रही हैं। आरडी बर्मन के दौर और उनके संगीतमय सफर को बड़े पर्दे पर देखना हिंदी फिल्म दर्शकों के लिए एक बेहद यादगार अनुभव साबित हो सकता है।

  • मुंबई के अंधेरी गुरुद्वारे से जुड़ी है मधुबाला की अनकही कहानी, जानिए हर साल उनके नाम पर क्यों होती है विशेष अरदास

    मुंबई के अंधेरी गुरुद्वारे से जुड़ी है मधुबाला की अनकही कहानी, जानिए हर साल उनके नाम पर क्यों होती है विशेष अरदास

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत की सबसे खूबसूरत और प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में शुमार दिवंगत मधुबाला का जीवन आज भी कई अनसुने किस्सों से भरा हुआ है। अपने अभिनय से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली इस अदाकारा की व्यक्तिगत जिंदगी भले ही तमाम उतार-चढ़ावों से भरी रही, लेकिन उनकी आध्यात्मिक आस्था से जुड़ा एक ऐसा दिलचस्प पहलू सामने आया है जो बहुत कम लोग जानते हैं। मुंबई के अंधेरी स्थित एक प्रसिद्ध गुरुद्वारे में आज भी हर साल गुरु नानक देव जी के जन्मोत्सव पर मधुबाला के नाम से विशेष अरदास की जाती है।

    एक मुस्लिम परिवार में जन्मी मुमताज जहां देहलवी यानी मधुबाला की गुरु नानक देव जी के प्रति अटूट और अगाध श्रद्धा थी। यह आस्था उनके जीवन के उस दौर में शुरू हुई जब वे व्यक्तिगत जीवन की परेशानियों से काफी विचलित थीं। एक परिचित के सुझाव पर जब वे अंधेरी गुरुद्वारे पहुंचीं, तो वहां के ग्रंथि ने उन्हें नियमित रूप से जपजी साहिब का पाठ करने की सलाह दी। गुरमुखी लिपि न आने के कारण उन्होंने फारसी भाषा में छपी जपजी साहिब की प्रति मंगवाई और जीवन के अंतिम समय तक उसका नित्य पाठ करती रहीं।

    संगीत जगत के पुराने दिग्गजों के अनुसार, मधुबाला शूटिंग के दौरान भी खाली समय मिलते ही अपना सिर ढककर इस पवित्र पाठ का अध्ययन किया करती थीं। उनका मानना था कि इस पाठ को करने से उन्हें आंतरिक शांति और संबल मिलता है। गुरु नानक देव जी के प्रति उनकी दीवानगी का आलम यह था कि वे किसी भी फिल्म को साइन करने से पहले निर्माताओं के साथ होने वाले अनुबंध में यह शर्त स्पष्ट रूप से शामिल करवाती थीं कि गुरुपर्व के दिन वे मुंबई के अंधेरी गुरुद्वारे में उपस्थित रहेंगी।

    वर्ष 1969 में अपने निधन से कुछ वर्ष पूर्व मधुबाला ने गुरु पर्व पर लंगर सेवा का संपूर्ण खर्च उठाने की इच्छा व्यक्त की थी। उन्होंने गुरुद्वारा समिति को इसके लिए आवश्यक सहयोग राशि प्रदान की थी। उनके निधन के बाद भी कई वर्षों तक उनके परिवार ने इस परंपरा को जारी रखा। बाद में गुरुद्वारा प्रबंध समिति और श्रद्धालुओं ने फैसला किया कि भले ही अभिनेत्री अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी अटूट श्रद्धा का सम्मान करते हुए हर साल गुरुपर्व पर लंगर सेवा के दौरान उनके नाम की अरदास की जाएगी।

    मध्य प्रदेश और देश भर के सिनेमा प्रेमी मधुबाला को न केवल उनकी अमर फिल्मों और अभिनय के लिए याद करते हैं, बल्कि उनकी इस अनूठी भक्ति भावना की भी सराहना करते हैं। अंधेरी गुरुद्वारे में आज भी हर गुरुपर्व पर अरदास के दौरान यह पंक्तियां दोहराई जाती हैं कि ईश्वर अपनी इस समर्पित बेटी की ओर से लंगर-प्रसाद की सेवा स्वीकार करे और उसे अपने चरणों में स्थान दे।

  • बॉलीवुड के 'सिंघम' अजय देवगन टेलीविजन पर कर सकते हैं धमाकेदार वापसी, क्राइम शो की मेजबानी करने की चर्चा तेज

    बॉलीवुड के 'सिंघम' अजय देवगन टेलीविजन पर कर सकते हैं धमाकेदार वापसी, क्राइम शो की मेजबानी करने की चर्चा तेज

    नई दिल्ली । बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता अजय देवगन के प्रशंसकों के लिए टेलीविजन जगत से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बड़े पर्दे पर अपने अभिनय और दमदार संवाद अदायगी से दर्शकों का दिल जीतने वाले अजय देवगन जल्द ही छोटे पर्दे पर एक नए अवतार में नजर आ सकते हैं। मीडिया गलियारों में चल रही खबरों के अनुसार, अभिनेता एक नए क्राइम शो के जरिए मेजबान यानी होस्ट की भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे हैं।

    मनोरंजन उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, टेलीविजन चैनल और निर्माताओं ने इस विशेष प्रोजेक्ट के लिए अभिनेता से संपर्क किया है। बताया जा रहा है कि प्राथमिक बातचीत सकारात्मक रही है और यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार आगे बढ़ता है, तो वह जल्द ही इस नए शो की शूटिंग शुरू करेंगे। यह शो पूरी तरह से वास्तविक जीवन में घटित अपराध की सच्ची घटनाओं और उनकी जांच प्रक्रिया पर आधारित होगा।

    हिंदी सिनेमा में इससे पहले भी कई शीर्ष अभिनेताओं ने टेलीविजन शोज की मेजबानी कर दर्शकों के बीच अपनी खास पहचान बनाई है। यदि यह प्रोजेक्ट अंतिम रूप लेता है, तो अजय देवगन का नाम भी उन कलाकारों की सूची में शामिल हो जाएगा जो बड़े पर्दे के साथ-साथ छोटे पर्दे पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। फिलहाल इस प्रोजेक्ट से जुड़ी विस्तृत जानकारियों को गोपनीय रखा गया है।

    मध्य प्रदेश और देश भर में अजय देवगन की फिल्मों को काफी पसंद किया जाता है। हाल के दिनों में उनकी बहुप्रतीक्षित कॉमेडी फ्रेंचाइजी की नई फिल्म सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई थी, जिसे दर्शकों से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिलीं। इसके अलावा, अभिनेता के पास आने वाले समय में कई बड़ी फिल्में पाइपलाइन में हैं, जिनमें सस्पेंस थ्रिलर और एक्शन शैली की बहुचर्चित सीक्वल फिल्में शामिल हैं।

    टेलीविजन पर क्राइम शोज का अपना एक बड़ा दर्शक वर्ग रहा है, जहां सच्ची घटनाओं को नाटकीय रूपांतरण के साथ पेश किया जाता है। ऐसे में अजय देवगन जैसी मजबूत छवि वाले अभिनेता का इस तरह के शो से जुड़ना दर्शकों के लिए बेहद आकर्षक हो सकता है। फिलहाल आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही शो के प्रसारण और समय से जुड़ी अन्य जानकारियां स्पष्ट हो सकेंगी।

  • सस्पेंस थ्रिलर से लेकर देशभक्ति के जज्बे तक, जानें इस हफ्ते आपके पसंदीदा प्लेटफॉर्म पर क्या रहेगा खास

    सस्पेंस थ्रिलर से लेकर देशभक्ति के जज्बे तक, जानें इस हफ्ते आपके पसंदीदा प्लेटफॉर्म पर क्या रहेगा खास

    नई दिल्ली । अगस्त महीने के पहले सप्ताह में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों के लिए मनोरंजन का बड़ा खजाना खुलने जा रहा है। सिनेमाघरों के बजाय घर पर ही अपने स्मार्ट टीवी और उपकरणों पर फिल्में तथा सीरीज देखने के शौकीन दर्शकों के लिए यह हफ्ता बेहद रोमांचक रहने वाला है। विभिन्न प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर हर उम्र और वर्ग की पसंद को ध्यान में रखते हुए सस्पेंस थ्रिलर, स्पोर्ट्स कॉमेडी, रोमांटिक ड्रामा और एक्शन से भरपूर सामग्री प्रस्तुत की जा रही है।

    सप्ताह की शुरुआत में रहस्य और रोमांच से भरपूर एक चर्चित दक्षिण भारतीय फिल्म डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दस्तक देने जा रही है। इस फिल्म का कथानक एक प्रोबेशनरी पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसे एक अज्ञात महिला की रहस्यमयी मौत का मामला सौंपा जाता है। शुरुआत में बेहद साधारण लगने वाली यह जांच धीरे-धीरे कई उलझे हुए और अप्रत्याशित मोड़ों से गुजरती है, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखने का वादा करती है।

    खेल और हास्य के अनोखे संगम को पसंद करने वाले दर्शकों के लिए एक प्रसिद्ध स्पोर्ट्स कॉमेडी सीरीज का अगला संस्करण भी इस सप्ताह स्ट्रीम होने जा रहा है। इस नए सीजन में मुख्य किरदार के सामने एक बिल्कुल नई और कठिन चुनौती होगी, जहां उसे निचले स्तर की महिला फुटबॉल टीम को प्रशिक्षित करना होगा। मजेदार घटनाक्रमों और जीवन से जुड़ी सीख के साथ यह शो मनोरंजन की पूरी खुराक देने वाला है।

    रिश्तों की उलझन और भावनात्मक ताने-बाने पर आधारित एक लोकप्रिय ड्रामा शो का नया सीजन भी इस हफ्ते डिजिटल दर्शकों के बीच आ रहा है। दस किस्तों में पेश की जाने वाली यह कहानी युवाओं के बीच खासी लोकप्रिय रही है और इसके नए भाग से भी काफी उम्मीदें जताई जा रही हैं। इसके अलावा, इतिहास और पराक्रम में रुचि रखने वालों के लिए 1999 के कारगिल युद्ध की वास्तविक घटना पर आधारित एक बहुप्रतीक्षित फिल्म मुख्य आकर्षण रहेगी। भारतीय वायु सेना के साहसिक मिशन को दर्शाती यह कहानी देशभक्ति का जज्बा जगाने का काम करेगी।

    मध्य प्रदेश सहित देशभर के सिनेमा प्रेमी जो घर बैठे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सामग्री देखना पसंद करते हैं, उनके लिए यह सप्ताह बेहद व्यस्त रहने वाला है। भारत-पाकिस्तान बंटवारे की पृष्ठभूमि पर बनी एक भावुक प्रेम कहानी, जिसने पहले सिनेमाघरों में सफलता हासिल की थी, अब डिजिटल दर्शकों के लिए उपलब्ध होगी। साथ ही जासूसी और एक्शन शोज के शौकीनों के लिए एक प्रसिद्ध हॉलीवुड सीरीज का तीसरा भाग भी इसी हफ्ते स्ट्रीम होने जा रहा है।

  • दिवंगत अभिनेता ओम पुरी संग अपने असफल रिश्ते पर छलका सीमा कपूर का दर्द, साझा कीं जिंदगी से जुड़ी कड़वी यादें

    दिवंगत अभिनेता ओम पुरी संग अपने असफल रिश्ते पर छलका सीमा कपूर का दर्द, साझा कीं जिंदगी से जुड़ी कड़वी यादें

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत के जाने-माने दिवंगत अभिनेता ओम पुरी का निजी जीवन एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। उनकी पहली पत्नी और अभिनेत्री सीमा कपूर ने हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में अपने वैवाहिक जीवन और अलगाव से जुड़े कई कड़वे अनुभवों को साझा किया है। उन्होंने बताया कि किस तरह शादी की शुरुआत से ही उन्हें कई मानसिक और भावनात्मक उतार-चढ़ावों का सामना करना पड़ा था।

    साक्षात्कार के दौरान सीमा कपूर ने बताया कि विवाह से ठीक एक दिन पहले उन्हें अपने होने वाले पति के निजी जीवन से जुड़े कुछ ऐसे तथ्यों की जानकारी मिली थी, जिससे वे काफी स्तब्ध रह गई थीं। हालांकि, उस समय पारिवारिक प्रतिष्ठा, सामाजिक दबाव और विवाह की तमाम तैयारियों के पूरा हो जाने के कारण अंतिम समय में शादी का फैसला वापस लेना उनके लिए संभव नहीं हो सका।

    विवाह के पश्चात भी दोनों के रिश्तों में दूरियां बनी रहीं और समय के साथ परिस्थितियां अधिक जटिल होती चली गईं। सीमा कपूर के अनुसार, पारिवारिक जीवन में आए गंभीर तनाव और मानसिक आघात का असर उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ा। उन्होंने खुलासा किया कि अलगाव के बेहद कठिन दौर से गुजरते समय और अत्यधिक मानसिक दबाव के कारण उन्होंने अपनी गर्भावस्था के दौरान संतान को भी खो दिया था।

    दोनों के बीच बढ़ते मतभेदों के चलते अंततः कानूनी रूप से अलग होने का निर्णय लिया गया। तलाक की प्रक्रिया के दौरान सहायता राशि और व्यावहारिक बातचीत से जुड़े घटनाक्रमों ने दोनों के बीच के कड़वाहट को और बढ़ा दिया। मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में ओम पुरी की बहुमुखी अदाकारी के प्रशंसक आज भी मौजूद हैं, लेकिन यह साक्षात्कार उनके निजी जीवन के जटिल पहलुओं को सामने लाता है।

    गौरतलब है कि सीमा कपूर से अलग होने के बाद अभिनेता ने दूसरा विवाह किया था, हालांकि उनका वह रिश्ता भी बाद के वर्षों में अलगाव पर समाप्त हुआ। जनवरी 2017 में 66 वर्ष की आयु में ओम पुरी का निधन हो गया था। उनके निधन के वर्षों बाद भी उनके निजी रिश्तों से जुड़ी यह आपबीती मनोरंजन जगत और प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • भूमि पेडनेकर ने पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र नारों पर जताई आपत्ति, युवाओं से शालीन संवाद बनाए रखने की अपील

    भूमि पेडनेकर ने पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र नारों पर जताई आपत्ति, युवाओं से शालीन संवाद बनाए रखने की अपील

    नई दिल्ली । अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने हाल ही में छात्र आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लगाए गए अभद्र नारों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सार्वजनिक संवाद में शालीनता बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना और किसी नीति या फैसले का विरोध करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का प्रयोग मर्यादित भाषा और सम्मानजनक व्यवहार के साथ किया जाना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब छात्र आंदोलन से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से चर्चा का विषय बने हुए हैं।

    भूमि पेडनेकर ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में कहा कि हाल के दिनों में सामने आए कुछ वीडियो देखकर उन्हें निराशा हुई। उनके अनुसार, किसी भी मुद्दे पर असहमति व्यक्त करना स्वाभाविक है, लेकिन देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि विचारों का मतभेद लोकतंत्र की ताकत है, परंतु संवाद की भाषा हमेशा संयमित और सम्मानजनक रहनी चाहिए।

    अभिनेत्री ने अपने संदेश में सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक संस्कारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार लोग अपने घर के बड़े-बुजुर्गों से सम्मानपूर्वक बातचीत करते हैं, उसी तरह सार्वजनिक जीवन में भी भाषा की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है। उनका मानना है कि कटु और अपमानजनक शब्द किसी भी समस्या का समाधान नहीं करते, बल्कि सामाजिक वातावरण को और अधिक तनावपूर्ण बना देते हैं।

    भूमि पेडनेकर ने विशेष रूप से युवाओं से संयम और जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा हमेशा सभ्य संवाद, आपसी सम्मान और विचारों के आदान-प्रदान पर आधारित रही है। यदि नई पीढ़ी भी इसी परंपरा का पालन करेगी तो लोकतांत्रिक विमर्श और अधिक मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि असहमति व्यक्त करते समय भी दूसरों के सम्मान का ध्यान रखना समाज के हित में है।

    यह विवाद उस समय सामने आया जब NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम और छात्र आंदोलन के दौरान कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इन वीडियो में कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा राजनीतिक नेताओं और सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए जाने के दावे किए गए, जिसके बाद इस विषय पर विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। इसी क्रम में भूमि पेडनेकर ने भी सार्वजनिक रूप से अपनी राय व्यक्त की।

    इस मुद्दे पर इससे पहले अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत भी प्रतिक्रिया दे चुकी हैं। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि किसी भी आंदोलन में अभद्र व्यवहार स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध छात्रों के आंदोलन से नहीं, बल्कि प्रदर्शन के दौरान प्रयोग की गई आपत्तिजनक भाषा और आचरण से था।

    भूमि पेडनेकर के बयान के बाद यह चर्चा फिर तेज हो गई है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ संवाद की मर्यादा भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर मतभेद स्वाभाविक हो सकते हैं, लेकिन सम्मानजनक भाषा और जिम्मेदार व्यवहार लोकतांत्रिक संस्कृति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सार्वजनिक जीवन में संयमित संवाद और परस्पर सम्मान को बनाए रखने की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया जा रहा है।

  • डॉक्टर की चेतावनी, परिवार से छुपाया सच और फिर नई शुरुआत, राम कपूर ने सुनाई संघर्ष से वापसी की कहानी

    डॉक्टर की चेतावनी, परिवार से छुपाया सच और फिर नई शुरुआत, राम कपूर ने सुनाई संघर्ष से वापसी की कहानी

    नई दिल्ली ।लोकप्रिय अभिनेता राम कपूर ने रियलिटी शो ‘लॉक अप 2’ में अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने सभी को भावुक कर दिया। उन्होंने बताया कि करियर के शिखर पर पहुंचने के बावजूद वह मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद कठिन दौर से गुजर रहे थे। अभिनेता ने स्वीकार किया कि एक समय उनकी सेहत इतनी खराब हो गई थी कि डॉक्टरों ने उन्हें गंभीर परिणामों की चेतावनी दी थी। सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने इस स्थिति की जानकारी अपनी पत्नी गौतमी कपूर और परिवार के अन्य सदस्यों से भी लंबे समय तक छुपाकर रखी।

    राम कपूर ने कहा कि जिस समय उन्हें टीवी धारावाहिक ‘बड़े अच्छे लगते हैं’ से व्यापक लोकप्रियता मिल रही थी, उसी दौरान उनका निजी जीवन कई चुनौतियों से घिरा हुआ था। बाहर से सब कुछ सामान्य और सफल दिखाई देता था, लेकिन भीतर वह लगातार मानसिक तनाव और अवसाद का सामना कर रहे थे। उन्होंने बताया कि लगातार काम का दबाव, अनियमित दिनचर्या और अपनी सेहत की अनदेखी ने उनकी स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया।

    अभिनेता ने बताया कि समय के साथ उनका वजन लगातार बढ़ता गया और जीवनशैली पूरी तरह असंतुलित हो गई। उन्होंने स्वीकार किया कि उस दौर में उन्होंने अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता नहीं दी। जब चिकित्सकीय जांच कराई गई तो डॉक्टरों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि उन्होंने तुरंत अपनी आदतों में सुधार नहीं किया, तो आने वाले समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनका ब्लड शुगर स्तर कई बार सामान्य सीमा से काफी ऊपर पहुंच जाता था, जिससे जोखिम लगातार बढ़ रहा था।

    राम कपूर ने अपने व्यवहार को याद करते हुए आत्मस्वीकृति भी जताई। उन्होंने कहा कि सफलता और व्यस्तता के बीच वह खुद को खो बैठे थे। उन्होंने माना कि वह शूटिंग पर समय से नहीं पहुंचते थे, कई बार अनुशासन का पालन नहीं करते थे और सहकर्मियों के साथ भी उनका व्यवहार पहले जैसा नहीं रह गया था। उन्होंने स्वीकार किया कि उस समय की अपनी गलतियों को याद करके आज भी उन्हें अफसोस होता है और वह उस दौर को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी सीख मानते हैं।

    उन्होंने यह भी बताया कि अपनी मानसिक और शारीरिक परेशानियों के बारे में उन्होंने परिवार को पूरी सच्चाई नहीं बताई थी। उनका मानना था कि इससे उनके अपने लोग अनावश्यक रूप से चिंतित हो जाएंगे। हालांकि समय के साथ उन्हें यह एहसास हुआ कि मुश्किल परिस्थितियों में परिवार का साथ सबसे बड़ी ताकत होता है। उन्होंने कहा कि उनके बच्चों ने उन्हें जीवन को नए नजरिए से देखने की प्रेरणा दी और आगे बढ़ने का हौसला दिया। उनके अनुसार यदि परिवार का भावनात्मक सहारा नहीं मिलता, तो परिस्थितियां और अधिक कठिन हो सकती थीं।

    राम कपूर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अपने जीवन में कई सकारात्मक बदलाव किए हैं। उन्होंने अपनी दिनचर्या, खानपान और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना शुरू किया तथा मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए भी लगातार प्रयास किए। अभिनेता का कहना है कि अब वह पहले की तुलना में अधिक संतुलित, खुश और स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। उन्होंने अपने अनुभव के माध्यम से यह संदेश भी दिया कि सफलता के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य, अनुशासित जीवनशैली और परिवार का साथ भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यही कठिन समय में व्यक्ति को संभालने की सबसे बड़ी ताकत बनते हैं।

  • भारतीय रेलवे के सहयोग से बनी 'यात्रा' ने 15 एपिसोड में देश की विविध संस्कृति और समाज को दिखाया

    भारतीय रेलवे के सहयोग से बनी 'यात्रा' ने 15 एपिसोड में देश की विविध संस्कृति और समाज को दिखाया

    नई दिल्ली । भारतीय टेलीविजन के स्वर्णिम दौर में दूरदर्शन ने ऐसे कई धारावाहिक दर्शकों को दिए, जिन्होंने केवल मनोरंजन ही नहीं किया बल्कि समाज को नई सोच और संवेदनशील दृष्टिकोण भी प्रदान किया। इन्हीं यादगार कार्यक्रमों में वर्ष 1986 में प्रसारित धारावाहिक ‘यात्रा’ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। प्रसिद्ध फिल्मकार श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी इस श्रृंखला ने भारतीय रेल के लंबे सफर को आधार बनाकर देश के अलग-अलग हिस्सों, संस्कृतियों और आम लोगों की जिंदगी से जुड़ी कहानियों को दर्शकों तक पहुंचाया। करीब चार दशक बाद भी यह धारावाहिक भारतीय टेलीविजन के सबसे अलग और प्रयोगधर्मी कार्यक्रमों में गिना जाता है।

    ‘यात्रा’ कुल 15 एपिसोड की श्रृंखला थी, जिसमें प्रत्येक कड़ी किसी न किसी रेल यात्रा के दौरान मिलने वाले यात्रियों और उनकी परिस्थितियों पर आधारित थी। ट्रेन यहां केवल परिवहन का माध्यम नहीं थी, बल्कि अलग-अलग सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोगों को जोड़ने वाली एक जीवंत कड़ी के रूप में दिखाई गई। प्रत्येक एपिसोड में नई कहानी, नए पात्र और जीवन का अलग अनुभव दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाता था।

    इस धारावाहिक की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसे भारतीय रेलवे के सहयोग से तैयार किया गया था। पूरी टीम को विशेष ट्रेन उपलब्ध कराई गई, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों में वास्तविक स्थानों पर जाकर शूटिंग की जा सकी। इस वजह से दर्शकों को भारत के अनेक शहरों, रेलवे स्टेशनों और प्राकृतिक दृश्यों की वास्तविक झलक देखने का अवसर मिला। कन्याकुमारी से जम्मू तवी और जैसलमेर से पूर्वोत्तर भारत तक फैले लंबे रेल मार्गों को श्रृंखला का हिस्सा बनाया गया, जिससे इसकी प्रस्तुति और भी प्रामाणिक बन गई।

    ‘यात्रा’ में उस दौर के कई प्रतिष्ठित कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। ओम पुरी, नीना गुप्ता, इला अरुण, मोहन गोखले और हरीश पटेल जैसे कलाकारों ने अपने प्रभावशाली अभिनय से साधारण लोगों की असाधारण कहानियों को जीवंत रूप दिया। प्रत्येक पात्र अपने साथ एक नया अनुभव और सामाजिक संदेश लेकर आता था, जिससे दर्शक भावनात्मक रूप से भी कहानी से जुड़ जाते थे।

    धारावाहिक में केवल मनोरंजन पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि समाज के अनेक गंभीर विषयों को भी संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया। लूटपाट, दुर्घटनाएं, महिलाओं की सुरक्षा, आत्महत्या की कोशिश, पारिवारिक संघर्ष, सामाजिक असमानता और मानवीय रिश्तों जैसे विषयों को कहानियों के माध्यम से सहज ढंग से दर्शाया गया। यही कारण था कि यह कार्यक्रम केवल एक रेल यात्रा नहीं, बल्कि समाज का चलता-फिरता आईना बन गया।

    हर एपिसोड की शुरुआत भारतीय रेलवे के इतिहास और उसके महत्व से जुड़े वॉइसओवर से होती थी। इसमें बताया जाता था कि रेलवे किस प्रकार देश के अलग-अलग क्षेत्रों को जोड़ती है और करोड़ों लोगों के लिए सुलभ तथा किफायती यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण साधन बनी हुई है। इस प्रस्तुति ने कार्यक्रम को एक डॉक्यूमेंट्री जैसी गंभीरता और धारावाहिक जैसी रोचकता, दोनों प्रदान की।

    आज जब डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक तकनीक का दौर है, तब भी ‘यात्रा’ जैसे कार्यक्रम भारतीय टेलीविजन की रचनात्मकता और सामाजिक सरोकारों की मिसाल माने जाते हैं। यह धारावाहिक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं था, बल्कि भारत की विविधता, मानवीय संबंधों और रेल यात्रा के अनुभवों को एक साथ प्रस्तुत करने वाला ऐसा प्रयास था, जिसे आज भी दूरदर्शन के सबसे यादगार कार्यक्रमों में शामिल किया जाता है।