Category: Entertainment

  • 'झिलमिल सितारों का आंगन होगा' गीत के फिल्मांकन के समय कगार पर थी दो बड़े सितारों की जान, धर्मेंद्र की सूझबूझ से बची अभिनेत्री राखी

    'झिलमिल सितारों का आंगन होगा' गीत के फिल्मांकन के समय कगार पर थी दो बड़े सितारों की जान, धर्मेंद्र की सूझबूझ से बची अभिनेत्री राखी

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर की यादें जितनी दिलचस्प हैं, उतनी ही रोमांचित करने वाली उनकी शूटिंग से जुड़ी कहानियां भी हैं। सत्तर के दशक में तकनीकों और विशेष प्रभावों की कमी के कारण अक्सर निर्देशकों को वास्तविक लोकेशंस पर जाकर ही जोखिम भरे दृश्य फिल्माने पड़ते थे। ऐसा ही एक अविस्मरणीय और डरा देने वाला वाकया अभिनेता धर्मेंद्र और दिग्गज अभिनेत्री राखी के साथ घटित हुआ था। दोनों कलाकार अपनी एक बेहद मशहूर फिल्म के रोमांटिक गीत की शूटिंग कर रहे थे, जहां अचानक प्रकृति के एक अनपेक्षित खतरे से उनका आमना-सामना हो गया और सेट पर मौजूद सभी लोगों की जान हलक में आ गई थी।

    यह पूरी घटना निर्देशक राजश्री प्रोडक्शंस की साल 1970 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म जीवन मृत्यु के फिल्मांकन के समय की है। इस फिल्म का एक बेहद लोकप्रिय और कालजयी गीत झिलमिल सितारों का आंगन होगा दर्शकों के बीच आज भी उतना ही पसंद किया जाता है। आनंद बक्शी के लिखे और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के मधुर संगीत से सजे इस गीत को महान गायक मोहम्मद रफी और स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी। इस बेहद शांत और रोमांटिक मिजाज के गाने को एक खूबसूरत झील के बीच नाव के ऊपर फिल्माया जा रहा था, जहां दोनों मुख्य कलाकार स्क्रिप्ट के अनुसार एक-दूसरे के आकर्षण में पूरी तरह डूबे हुए थे।

    शेड्यूल के मुताबिक जब कैमरे रोल हो रहे थे और धर्मेंद्र व राखी नाव पर सवार होकर रोमांटिक शॉट दे रहे थे, तभी अचानक पानी में कुछ संदिग्ध हलचल शुरू हुई। किनारे पर खड़े क्रू मेंबर्स और कैमरे के पीछे मौजूद टीम ने जब ध्यान से देखा, तो उनके होश उड़ गए क्योंकि एक विशालकाय मगरमच्छ तैरता हुआ सीधे कलाकारों की छोटी सी नाव की तरफ बढ़ रहा था। जंगली जानवर को इतने करीब देखकर सेट पर हड़कंप मच गया और चीख-पुकार मचने की स्थिति पैदा हो गई। नाव बीच पानी में होने के कारण दोनों ही स्टार्स बेहद असुरक्षित स्थिति में थे और जरा सी चूक एक बड़े हादसे में बदल सकती थी।

    ऐसी विपरीत और जानलेवा परिस्थिति में अभिनेता धर्मेंद्र ने गजब के साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। मगरमच्छ को नाव के बिल्कुल करीब पाकर उन्होंने घबराने के बजाय सबसे पहले अभिनेत्री राखी को सुरक्षित करने का प्रयास किया। उन्होंने राखी को पकड़कर धीरे से नाव के उस कोने से हटाया जिसके पास मगरमच्छ मंडरा रहा था और उन्हें सुरक्षित छोर पर ले आए। हालांकि इस भयानक घटना से दोनों ही कलाकार अंदर से काफी डर गए थे, लेकिन पेशेवर प्रतिबद्धता दिखाते हुए उन्होंने स्थिति सामान्य होने के बाद अपना काम जारी रखा और उस खूबसूरत गाने की शूटिंग को सफलतापूर्वक पूरा किया।

    उल्लेखनीय है कि इसी फिल्म जीवन मृत्यु के जरिए अभिनेत्री राखी ने हिंदी सिनेमा में कदम रखा था और धर्मेंद्र के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। बाद में इस जोड़ी ने ब्लैकमेल और क्षत्रिय जैसी कई अन्य यादगार फिल्मों में भी साथ काम किया, जिनके गाने जैसे पल पल दिल के पास आज भी एवरग्रीन माने जाते हैं। धर्मेंद्र ने खुद कई सालों बाद एक टेलीविजन रियलिटी शो के मंच पर इस मगरमच्छ वाली घटना का जिक्र करते हुए पुरानी यादों को ताजा किया था। यह किस्सा साबित करता है कि परदे पर दिखने वाले खूबसूरत नजारों के पीछे कलाकारों को कितनी कठिन और खतरनाक परिस्थितियों से गुजरना पड़ता था।

  • मोहम्मद रफी के एक एवरग्रीन गाने ने पलट दी थी हिंदी सिनेमा की बाजी, धर्मेंद्र को मिला नया मुकाम तो फीका पड़ा राजेश खन्ना का जादू

    मोहम्मद रफी के एक एवरग्रीन गाने ने पलट दी थी हिंदी सिनेमा की बाजी, धर्मेंद्र को मिला नया मुकाम तो फीका पड़ा राजेश खन्ना का जादू

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर में संगीतकारों, गायकों और अभिनेताओं के बीच की आपसी केमिस्ट्री ने कई बड़े सितारों के करियर की दिशा तय की है। सत्तर के दशक की शुरुआत में जब बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना बैक टू बैक 15 ब्लॉकबस्टर फिल्में देकर सफलता के शिखर पर थे, तब उनकी फिल्मों में पार्श्वगायन के लिए किशोर कुमार पहली पसंद बन चुके थे। अधिकांश बड़े संगीत निर्देशकों द्वारा किशोर दा को प्राथमिकता दिए जाने के कारण, उस दौर के दिग्गज गायक मोहम्मद रफी का करियर कुछ समय के लिए डगमगाने लगा था। लेकिन साल 1973 में आई एक फिल्म और उसके एक सदाबहार गीत ने फिल्म इंडस्ट्री के पूरे परिदृश्य को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया।

    यह ऐतिहासिक बदलाव अभिनेता धर्मेंद्र की मुख्य भूमिका वाली फिल्म लोफर के माध्यम से देखने को मिला था। इस फिल्म में संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के निर्देशन में मोहम्मद रफी ने आज मौसम बड़ा बेईमान है गीत को अपनी जादुई आवाज दी थी। धर्मेंद्र और अभिनेत्री मुमताज पर फिल्माया गया यह रोमांटिक गीत रिलीज होते ही देश भर में एक बड़ा कल्ट क्लासिक साबित हुआ। इस एकल गीत की लोकप्रियता ने सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए और यह उस दौर से लेकर आज तक भारतीय सिनेमा के सबसे पसंदीदा सदाबहार रोमांटिक गानों की सूची में शीर्ष पर बना हुआ है।

    इस गाने की अभूतपूर्व सफलता ने मोहम्मद रफी के करियर को एक नई और बेहद मजबूत संजीवनी प्रदान करने का काम किया। इस जबरदस्त वापसी के बाद फिल्म जगत के तमाम दिग्गज संगीतकारों ने एक बार फिर रफी साहब की तरफ रुख करना शुरू कर दिया और उन्हें बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए साइन किया जाने लगा। वहीं दूसरी ओर, इस फिल्म की बड़ी कामयाबी ने अभिनेता धर्मेंद्र के पैर भी इंडस्ट्री में मजबूती से जमा दिए। लोफर की सफलता के बाद धर्मेंद्र को बड़े बैनर्स की फिल्मों के ढेरों ऑफर्स मिलने लगे, जिससे हिंदी सिनेमा में एक्शन और रोमांस का एक नया दौर शुरू हुआ।

    इस संगीत सफर में आए बदलाव का सीधा असर तत्कालीन सुपरस्टार राजेश खन्ना के करियर पर भी देखने को मिला। इसी कालखंड के दौरान फिल्म इंडस्ट्री का झुकाव राजेश खन्ना के रोमांटिक अंदाज से हटकर धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की एंग्री यंग मैन और एक्शन इमेज की तरफ बढ़ने लगा था। साल 1975 में रिलीज हुई निर्देशक रमेश सिप्पी की ऐतिहासिक फिल्म शोले ने इस बदलाव पर अंतिम मुहर लगा दी थी। शोले में धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की जोड़ी ने जो इतिहास रचा, उसने राजेश खन्ना के स्टारडम के दौर को काफी पीछे धकेल दिया और उनके करियर का ग्राफ तेजी से नीचे आने लगा।

    सिनेमाई विश्लेषकों के अनुसार, लोफर फिल्म का वह एक गाना महज एक हिट ट्रैक नहीं था, बल्कि वह बॉलीवुड में दो बड़े युगों के बीच का टर्निंग पॉइंट था। उसने जहां एक तरफ भारतीय संगीत के सबसे सुरीले गायक मोहम्मद रफी को उनका खोया हुआ सिंहासन वापस दिलाया, वहीं दूसरी तरफ धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन जैसे कलाकारों के लिए आगे का रास्ता साफ किया। यही कारण है कि आज भी जब हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली गानों और गानों से बदलने वाली स्टार्स की किस्मत का जिक्र होता है, तो मोहम्मद रफी और धर्मेंद्र के इस जुगलबंदी को सबसे पहले याद किया जाता है।

  • विद्या बालन ने की माधुरी दीक्षित और तृप्ति डिमरी की तारीफ, सोशल मीडिया पर दिया खास रिव्यू

    विद्या बालन ने की माधुरी दीक्षित और तृप्ति डिमरी की तारीफ, सोशल मीडिया पर दिया खास रिव्यू


    नई दिल्ली । नेटफ्लिक्स पर हाल ही में रिलीज हुई डार्क कॉमेडी थ्रिलर फिल्म ‘मां बहन’ लगातार चर्चा में बनी हुई है। फिल्म को दर्शकों के साथ-साथ फिल्म जगत से भी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। इसी कड़ी में बॉलीवुड अभिनेत्री विद्या बालन ने भी फिल्म की सराहना करते हुए इसकी स्टारकास्ट और कहानी की प्रशंसा की है।

    विद्या बालन ने सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा, “आपकी तो मां-बहन एक हो गई नेटफ्लिक्स पर।” इसके साथ ही उन्होंने फिल्म में मुख्य भूमिकाएं निभाने वाली माधुरी दीक्षित, तृप्ति डिमरी और धरना दुर्गा की केमिस्ट्री को बेहद मनोरंजक और प्रभावशाली बताया। विद्या की यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और फिल्म के प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

    फिल्म ‘मां बहन’ की रिलीज से पहले ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि इस प्रोजेक्ट के लिए शुरुआत में विद्या बालन से संपर्क किया गया था। हालांकि बाद में यह भूमिका माधुरी दीक्षित के हिस्से में चली गई। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन विद्या द्वारा फिल्म की खुलकर तारीफ किए जाने को उनके पेशेवर दृष्टिकोण और सहकर्मियों के प्रति सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।

    गौरतलब है कि विद्या बालन और फिल्म के निर्देशक सुरेश त्रिवेणी पहले भी साथ काम कर चुके हैं। दोनों ने चर्चित फिल्म तुम्हारी सुलु में साथ काम किया था, जिसे दर्शकों और समीक्षकों दोनों का अच्छा समर्थन मिला था। इसके बाद वे जलसा में भी साथ नजर आए। ऐसे में विद्या और सुरेश त्रिवेणी के बीच लंबे समय से मजबूत पेशेवर संबंध रहे हैं।

    फिल्म ‘मां बहन’ की कहानी एक ऐसी गायिका मां के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे समाज अक्सर संदेह और पूर्वाग्रह की नजर से देखता है। उसकी जिंदगी तब अप्रत्याशित मोड़ लेती है जब उसके पड़ोसी की मौत उसके घर में हो जाती है। इस मुश्किल परिस्थिति में उसकी दोनों बेटियां उसकी मदद के लिए सामने आती हैं। इसके बाद कहानी रहस्य, हास्य और भावनात्मक उतार-चढ़ाव के साथ आगे बढ़ती है, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखती है।

    फिल्म का निर्देशन सुरेश त्रिवेणी ने किया है, जबकि निर्माण विक्रम मल्होत्रा और सुरेश त्रिवेणी ने संयुक्त रूप से किया है। फिल्म में माधुरी दीक्षित, तृप्ति डिमरी और धरना दुर्गा के अलावा रवि किशन भी महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई देते हैं।

    विशेष बात यह है कि इस फिल्म के माध्यम से पहली बार माधुरी दीक्षित और तृप्ति डिमरी ने एक साथ स्क्रीन साझा की है। फिल्म में माधुरी ने तृप्ति की मां का किरदार निभाया है। एक साक्षात्कार में माधुरी ने बताया था कि उन्होंने यह भूमिका इसलिए स्वीकार की क्योंकि यह पारंपरिक फिल्मी मां के किरदारों से अलग और अधिक जटिल व्यक्तित्व वाला चरित्र है।

    फिल्म की अनूठी कहानी, दमदार अभिनय और हास्य-रोमांच से भरपूर प्रस्तुति को देखते हुए ‘मां बहन’ को ओटीटी दर्शकों से अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह फिल्म लोकप्रियता के नए आयाम स्थापित कर पाती है या नहीं।

  • हिंदी सिनेमा में डबल रोल का अनोखा ट्रेंड: जब बॉलीवुड के इन टॉप एक्टर्स ने एक ही स्क्रीन पर निभाया बाप और बेटे का दमदार रोल

    हिंदी सिनेमा में डबल रोल का अनोखा ट्रेंड: जब बॉलीवुड के इन टॉप एक्टर्स ने एक ही स्क्रीन पर निभाया बाप और बेटे का दमदार रोल


    नई दिल्ली।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में पटकथाओं की मांग और निर्देशकों के प्रयोगों ने समय-समय पर अभिनेताओं को अपनी अभिनय क्षमता की सीमाओं को लांघने का अवसर दिया है। बॉलीवुड में दोहरे किरदारों यानी डबल रोल का चलन दशकों पुराना है, लेकिन इस विधा में सबसे कठिन और प्रभावकारी प्रयोग तब माना जाता है जब एक ही अभिनेता को एक ही फिल्म के भीतर पिता और पुत्र दोनों की भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं। यह प्रयोग न केवल अभिनेता के कौशल की परीक्षा लेता है बल्कि दर्शकों को भी एक ही पर्दे पर दो अलग-अलग पीढ़ियों के दृष्टिकोण को देखने का अवसर देता है। हाल के वर्षों में कई ऐसे बड़े अभिनेताओं ने इस चुनौती को स्वीकार किया और अपने किरदारों से सिनेमाघरों में दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

    इस फेहरिस्त में सबसे पहला और सबसे मजबूत नाम हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन का आता है। उन्होंने अपने लंबे और शानदार करियर में कई बार इस तरह के चुनौतीपूर्ण प्रयोगों को पर्दे पर जीवंत किया है। फिल्म सूर्यवंशम में ठाकुर भानुप्रताप सिंह और उनके सीधे-सादे बेटे हीरा ठाकुर के रूप में उनका अभिनय आज भी टेलीविजन संस्कृति का एक अहम हिस्सा बन चुका है। इसके अलावा उन्होंने अदालत, आखिरी रास्ता और महान जैसी फिल्मों में भी पिता और पुत्र की भूमिकाएं बहुत ही संजीदगी के साथ निभाई थीं। महान फिल्म में तो उन्होंने एक कदम आगे बढ़ते हुए पिता और दो बेटों का ट्रिपल रोल निभाकर सबको हैरत में डाल दिया था।

    वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले अभिनेता शाहरुख खान ने भी इस श्रेणी में अपना नाम दर्ज कराया है। फिल्म इंग्लिश बाबू देसी मैम में बहुआयामी भूमिकाएं निभाने के बाद, उन्होंने हालिया ब्लॉकबस्टर फिल्म जवान में इस कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस फिल्म में उन्होंने कैप्टन विक्रम राठौड़ के रूप में एक निडर पिता और आजाद के रूप में एक न्यायप्रिय बेटे का किरदार निभाया था। दोनों किरदारों के बीच का तालमेल और स्क्रीन प्रेजेंस इतनी दमदार थी कि दर्शकों ने सिनेमाघरों में तालियों और सीटियों के साथ इसका स्वागत किया और फिल्म ने कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।

    इस प्रकार के किरदारों को निभाने में एक्शन और फिक्शन फिल्मों के सुपरस्टार ऋतिक रोशन भी पीछे नहीं रहे हैं। उन्होंने अपनी बेहद लोकप्रिय सुपरहीरो फ्रेंचाइजी कृष और कृष 3 में एक साथ दो पीढ़ियों का प्रतिनिधित्व किया। एक तरफ जहां उन्होंने मानसिक रूप से विशेष और बाद में बुजुर्ग हो चुके वैज्ञानिक पिता रोहित मेहरा का किरदार निभाया, वहीं दूसरी तरफ शक्तिशाली और रक्षक बेटे कृष्णा उर्फ कृष के रूप में भी खुद को स्थापित किया। एक ही फ्रेम में दो अलग उम्र और शारीरिक हाव-भाव वाले किरदारों को एक साथ निभाना ऋतिक रोशन के करियर के सबसे बेहतरीन प्रयोगों में गिना जाता है।

    समकालीन अभिनेताओं में रणबीर कपूर ने भी इस श्रेणी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। उन्होंने बड़े बजट की पीरियड ड्रामा फिल्म शमशेरा में पिता और पुत्र की दोहरी भूमिका निभाई थी। फिल्म में उन्होंने डकैत शमशेरा और उसके विद्रोही बेटे बल्ली के किरदारों को निभाने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से काफी मेहनत की थी। भले ही फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर मिश्रित प्रतिक्रिया मिली हो, लेकिन रणबीर कपूर के इस दोहरे प्रयास और अभिनय की समीक्षकों द्वारा काफी सराहना की गई थी।

    इसी तरह एक्शन स्टार जॉन अब्राहम ने भी अपनी फिल्म सत्यमेव जयते के दूसरे भाग में इसी तरह का प्रयोग दोहराया था, जहां उन्होंने एक किसान पिता और उसके जुड़वां बेटों की तिहरी भूमिका निभाई थी। वहीं अभिनेता सलमान खान की फिल्म वीर में भी एक ऐसी ही कहानी देखने को मिली थी, जिसमें पिता के निधन के बाद बेटे का किरदार कहानी को आगे बढ़ाता है। इसके अतिरिक्त, अक्षय कुमार जैसे कलाकार भी अपनी आने वाली फिल्मों और पिछले कुछ प्रोजेक्ट्स में इस तरह के किरदारों की संभावनाओं को टटोलते नजर आए हैं। कुल मिलाकर, एक ही फिल्म में पिता और बेटे का किरदार निभाना बॉलीवुड एक्टर्स के लिए हमेशा से अपनी बहुमुखी प्रतिभा साबित करने का सबसे बड़ा जरिया रहा है।

  • बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह के समर्थन में उतरे पंजाबी स्टार एमी विर्क, 'डॉन 3' विवाद को लेकर निर्माताओं पर साधा निशाना

    बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह के समर्थन में उतरे पंजाबी स्टार एमी विर्क, 'डॉन 3' विवाद को लेकर निर्माताओं पर साधा निशाना

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत में फिल्मों के हिट और फ्लॉप होने के साथ ही निर्माताओं और कलाकारों के समीकरण किस तरह बदलते हैं, इसका एक बड़ा उदाहरण हालिया विवाद में देखने को मिल रहा है। पंजाबी फिल्म उद्योग के जाने-माने अभिनेता और गायक एमी विर्क ने बॉलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह के पक्ष में खड़े होते हुए फिल्म ‘डॉन 3’ के निर्माताओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक विशेष साक्षात्कार के दौरान उन्होंने खुलकर कहा कि जब अभिनेता का समय खराब चल रहा था और उनकी कुछ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर लगातार असफल हो रही थीं, तब निर्माताओं ने उनके साथ अपनी फिल्म की शूटिंग शुरू करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।

    इस पूरे विवाद की जड़ें फिल्म ‘डॉन 3’ की घोषणा और उसके बाद बदले हालातों से जुड़ी हुई हैं। लगभग तीन साल पहले घोषित हुई इस बहुप्रतीक्षित फिल्म का निर्माण कार्य काफी समय तक अटका रहा। इसी बीच रणवीर सिंह की नई फिल्म ‘धुरंधर’ ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और वह देश की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शुमार हो गई। एमी विर्क का कहना है कि जैसे ही रणवीर की इस फिल्म ने सफलता के नए आयाम छुए, वैसे ही निर्माताओं ने ‘डॉन 3’ पर जल्द से जल्द काम शुरू करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया ताकि वे अभिनेता की नई स्टार वैल्यू का आर्थिक लाभ उठा सकें।

    विवाद तब और गहरा गया जब ‘धुरंधर’ की भारी सफलता के तुरंत बाद रणवीर सिंह ने किन्हीं कारणों से ‘डॉन 3’ परियोजना से खुद को अलग कर लिया। निर्माताओं का दावा है कि उन्होंने फिल्म की आउटडोर लोकेशंस की रेकी, अनुमति और अन्य प्री-प्रोडक्शन कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए थे, जो अभिनेता के हटने से पूरी तरह बर्बाद हो गए। इस नुकसान की भरपाई के लिए निर्माण कंपनी ने अभिनेता से 45 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि की मांग की है। हालांकि रणवीर सिंह ने शुरुआत में इस मांग को खारिज करते हुए आंशिक समझौते के तहत केवल 10 करोड़ रुपये देने की पेशकश की थी, जिसे निर्माताओं ने स्वीकार नहीं किया।

    इस गतिरोध के बीच मनोरंजन उद्योग की प्रमुख संस्था फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज ने भी हस्तक्षेप किया था और अभिनेता के खिलाफ असहयोग का निर्देश जारी किया था, जिसे बाद में हटा लिया गया। मध्य प्रदेश सहित देश भर के फिल्म वितरकों और सिनेमा जगत के विशेषज्ञों की इस पूरे मामले पर पैनी नजर बनी हुई है। एमी विर्क ने इस वित्तीय मांग को पूरी तरह अनुचित बताते हुए कहा कि यदि निर्माताओं को लगता है कि उनका वास्तविक नुकसान हुआ है तो वे मामूली बकाया राशि लेकर मामला सुलझा सकते हैं, न कि इतनी बड़ी रकम का दबाव बनाएं। उन्होंने अभिनेता को कानूनी राह अपनाने और किसी भी दबाव के आगे न झुकने की सलाह दी है।

    साक्षात्कार के दौरान विर्क ने रणवीर सिंह के साथ अपने पुराने संबंधों और उनकी हालिया व्यक्तिगत खुशियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ‘धुरंधर’ की सफलता और रणवीर के घर बेटी के जन्म के बाद उनकी अभिनेता से लंबी बातचीत हुई थी, जिसमें रणवीर ने फिल्म के लिए की गई अपनी कड़ी मेहनत को साझा किया था। विर्क ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सिनेमा इतिहास की सबसे सफल फिल्म का मुख्य हिस्सा उनका एक करीबी दोस्त है। फिलहाल यह विवाद अदालती नोटिसों और कानूनी दांव-पेंच के बीच फंसा हुआ है और आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मनोरंजन जगत का यह बड़ा विवाद किस मोड़ पर जाकर थमता है।

  • बॉलीवुड की नई रिलीज फिल्मों की रफ्तार पड़ी धीमी, 'है जवानी तो इश्क होना है' और 'बंदर' के कलेक्शन में लगातार छठे दिन भारी गिरावट

    बॉलीवुड की नई रिलीज फिल्मों की रफ्तार पड़ी धीमी, 'है जवानी तो इश्क होना है' और 'बंदर' के कलेक्शन में लगातार छठे दिन भारी गिरावट

    नई दिल्ली । देश के सिनेमाघरों में चल रही बॉक्स ऑफिस की जंग में इस समय क्षेत्रीय और हिंदी सिनेमा के बीच एक बड़ा फासला देखने को मिल रहा है। दक्षिण भारतीय फिल्म जगत की नई पेशकश ने अपनी जबरदस्त व्यावसायिक पकड़ का प्रदर्शन करते हुए दो सौ करोड़ रुपये के क्लब में शामिल होने की ओर मजबूत कदम बढ़ा दिए हैं। वहीं दूसरी तरफ भारी-भरकम स्टार कास्ट और बड़े निर्देशकों के मार्गदर्शन में बनी बॉलीवुड की दो प्रमुख फिल्में दर्शकों की कमी के कारण सिनेमाघरों में अपनी पकड़ खोती जा रही हैं। वर्किंग डेज की शुरुआत के साथ ही इन दोनों हिंदी फिल्मों के दैनिक प्रदर्शन ग्राफ में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो फिल्म वितरकों और निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन गई है।

    मेगास्टार राम चरण और जान्हवी कपूर की मुख्य भूमिकाओं से सजी फिल्म ‘पेद्दी’ अपनी रिलीज के पहले दिन से ही बॉक्स ऑफिस पर राज कर रही है। दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ-साथ हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी इस फिल्म की मांग लगातार बनी हुई है। अपनी रिलीज के सातवें दिन भी इस फिल्म ने संतोषजनक कमाई करते हुए बाजार में अपनी निरंतरता साबित की है, जबकि इसके छठे दिन का प्रदर्शन भी काफी मजबूत रहा था। अब तक के कुल संकलन के आंकड़ों को देखा जाए तो यह फिल्म बहुत जल्द एक नया रिकॉर्ड कायम करने की तरफ बढ़ रही है। इस मजबूत व्यावसायिक प्रदर्शन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बेहतर विषय-वस्तु और मजबूत स्टार वैल्यू वाली फिल्मों को दर्शक पूरे देश में हाथों-हाथ ले रहे हैं।

    इसके विपरीत बॉलीवुड के बड़े सितारों से सजी रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ का जादू बॉक्स ऑफिस पर फीका पड़ता दिखाई दे रहा है। नामचीन सितारों की मौजूदगी और अनुभवी निर्देशन के बावजूद फिल्म छठे दिन अपनी रफ्तार को बरकरार रखने में नाकाम रही। पांचवें दिन के मुकाबले छठे दिन इसके कलेक्शन में बड़ी गिरावट देखने को मिली है, जिससे इसका कुल कारोबार अब तक काफी सीमित रह गया है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों के मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों से आ रही रिपोर्ट के अनुसार शाम के शो में दर्शकों की संख्या में काफी कमी आई है, जिसने फिल्म के आगे के सफर को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

    वहीं इसी सप्ताह रिलीज हुई बॉलीवुड की एक अन्य प्रयोगधर्मी और डार्क थ्रिलर फिल्म ‘बंदर’ बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह पस्त नजर आ रही है। गंभीर किरदारों और सस्पेंस से भरपूर होने के बावजूद यह फिल्म शुरुआत से ही दर्शकों को थिएटर्स तक खींचने में नाकाम साबित हुई है। अपनी रिलीज के छठे दिन इस फिल्म का कलेक्शन बेहद निराशाजनक रहा, जो इसकी कुल लागत और उम्मीदों के लिहाज से बहुत मामूली है। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि सीमित प्रचार और मुख्यधारा के दर्शकों से जुड़ाव की कमी के कारण इस फिल्म का कुल संकलन अब तक के सबसे निचले स्तर पर बना हुआ है।

    मौजूदा व्यापारिक आंकड़ों का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताहांत में भी ‘पेद्दी’ का दबदबा इसी तरह जारी रह सकता है क्योंकि दर्शकों के बीच इसकी लोकप्रियता और माउथ पब्लिसिटी काफी मजबूत है। दूसरी तरफ हिंदी बेल्ट की दोनों फिल्मों को अपनी साख बचाने के लिए आने वाले दिनों में असाधारण प्रदर्शन करने की जरूरत होगी, जिसकी संभावना फिलहाल बेहद कम दिखाई दे रही है। सिनेमाघरों के मालिक भी अब अपना पूरा ध्यान उस फिल्म पर केंद्रित कर रहे हैं जो लगातार फुटफॉल दे रही है, जिससे आने वाले दिनों में स्क्रीन्स की संख्या में भी बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।

  • ₹2400 करोड़ निवेश घोटाले की जांच में अभिनेत्री सनी लियोनी को CID का नोटिस, एजेंसी ने मांगी भुगतान संबंधी जानकारी

    ₹2400 करोड़ निवेश घोटाले की जांच में अभिनेत्री सनी लियोनी को CID का नोटिस, एजेंसी ने मांगी भुगतान संबंधी जानकारी


    नई दिल्ली । कर्नाटक में कथित 2,400 करोड़ रुपये के शिवम एसोसिएट्स निवेश घोटाले की जांच के बीच बॉलीवुड अभिनेत्री सनी लियोनी का नाम भी चर्चा में आ गया है। हालांकि जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि अभिनेत्री को भेजा गया नोटिस केवल जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया का हिस्सा है और फिलहाल उनके खिलाफ किसी प्रकार की धोखाधड़ी या आपराधिक गतिविधि का आरोप नहीं लगाया गया है।

    मामले की जांच कर रही कर्नाटक क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) कथित निवेश योजना से जुड़े वित्तीय लेनदेन और धन के प्रवाह की पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि वह यह समझने का प्रयास कर रही है कि निवेशकों से जुटाई गई कथित राशि का उपयोग किन-किन क्षेत्रों में किया गया और उसका अंतिम लाभ किसे प्राप्त हुआ।

    जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, शिवम एसोसिएट्स के प्रमोटर और मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे शिवानंद नीलनवर द्वारा निर्मित एक कन्नड़ फिल्म में अभिनेत्री सनी लियोनी ने विशेष प्रस्तुति दी थी। इसी संदर्भ में एजेंसी ने अभिनेत्री से उस प्रदर्शन के लिए प्राप्त भुगतान और उससे संबंधित दस्तावेजों की जानकारी मांगी है।

    अधिकारियों के मुताबिक, वर्ष 2023 में रिलीज हुई कन्नड़ फिल्म ‘चैंपियन’ के एक गीत में प्रस्तुति देने के लिए अभिनेत्री को भुगतान किया गया था। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि भुगतान का स्रोत क्या था और क्या उसका संबंध कथित निवेश योजना से जुड़ी किसी वित्तीय गतिविधि से था। हालांकि एजेंसी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि केवल भुगतान प्राप्त करना किसी व्यक्ति को स्वतः आरोपी नहीं बनाता और जांच का उद्देश्य तथ्यों की पुष्टि करना है।

    सीआईडी के अनुसार, शिवम एसोसिएट्स और उससे जुड़े लोगों पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर बिना आवश्यक अनुमति के निवेश और जमा योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों से धन एकत्र किया। रिपोर्टों के मुताबिक, इस मामले में हजारों निवेशकों से धन जुटाए जाने के आरोपों की जांच की जा रही है। एजेंसी अब उन सभी वित्तीय लेनदेन की समीक्षा कर रही है जो इस कथित नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।

    कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक अपराधों की जांच में एजेंसियां अक्सर उन सभी व्यक्तियों या संस्थाओं से जानकारी मांगती हैं जिनके साथ संबंधित पक्षों का वित्तीय लेनदेन हुआ हो। ऐसे नोटिस का उद्देश्य तथ्यों का सत्यापन करना होता है और इसे किसी व्यक्ति की संलिप्तता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    फिलहाल जांच जारी है और एजेंसी विभिन्न दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड तथा भुगतान संबंधी सूचनाओं की जांच कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी। वहीं, सनी लियोनी के खिलाफ इस समय किसी प्रकार के अपराध में शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    इस पूरे मामले पर मनोरंजन जगत और निवेशकों की नजर बनी हुई है, जबकि जांच एजेंसियां कथित घोटाले के वित्तीय पहलुओं को खंगालने में जुटी हैं।

  • 30 साल बाद फिर साथ दिखे अक्षय, सुनील और रवीना, ‘वेलकम टू द जंगल’ ने ताजा कर दी ‘मोहरा’ की यादें

    30 साल बाद फिर साथ दिखे अक्षय, सुनील और रवीना, ‘वेलकम टू द जंगल’ ने ताजा कर दी ‘मोहरा’ की यादें


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की यादगार फिल्मों में शुमार ‘मोहरा’ को रिलीज हुए तीन दशक से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन फिल्म की लोकप्रियता आज भी दर्शकों के दिलों में बरकरार है। अब इस फिल्म की चर्चित तिकड़ी एक बार फिर बड़े पर्दे पर साथ दिखाई देने जा रही है। अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और रवीना टंडन आगामी कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ में एक साथ नजर आएंगे। फिल्म की रिलीज से पहले सामने आई कुछ खास तस्वीरों ने दर्शकों के बीच उत्साह बढ़ा दिया है।

    अभिनेत्री रवीना टंडन ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ‘वेलकम टू द जंगल’ के सेट से कई बिहाइंड द सीन्स (बीटीएस) तस्वीरें साझा की हैं। इन तस्वीरों में फिल्म की स्टारकास्ट के साथ बिताए गए यादगार पलों की झलक देखने को मिल रही है। सबसे ज्यादा ध्यान उस तस्वीर ने खींचा जिसमें रवीना, अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी एक साथ नजर आ रहे हैं। इस तस्वीर ने फैंस को सीधे 1994 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘मोहरा’ की याद दिला दी।

    ‘मोहरा’ बॉलीवुड की उन फिल्मों में गिनी जाती है जिसने एक्शन, रोमांस और संगीत के दम पर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। फिल्म का लोकप्रिय गीत ‘तू चीज बड़ी है मस्त मस्त’ आज भी लोगों की पसंदीदा सूची में शामिल है। ऐसे में जब तीनों कलाकारों को एक साथ देखा गया तो सोशल मीडिया पर पुरानी यादों की चर्चा तेज हो गई।

    रवीना टंडन ने तस्वीरें साझा करते हुए पूरी टीम के प्रति अपना स्नेह व्यक्त किया। उन्होंने फिल्म की शूटिंग पूरी होने पर अपने सह-कलाकारों और यूनिट के सदस्यों को यादगार सफर का हिस्सा बताया। उनके पोस्ट पर फैंस ने भी उत्साह दिखाया और ‘मोहरा’ की तिकड़ी को दोबारा साथ देखने की खुशी जाहिर की।

    ‘वेलकम टू द जंगल’ मशहूर ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी की अगली कड़ी है। कॉमेडी, एक्शन और मनोरंजन से भरपूर इस फिल्म का निर्देशन अहमद खान ने किया है, जबकि इसके निर्माता फिरोज नाडियाडवाला हैं। फिल्म को लेकर दर्शकों में पहले से ही काफी उत्सुकता है और अब बीटीएस तस्वीरों ने इस उत्साह को और बढ़ा दिया है।

    फिल्म की खास बात केवल अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और रवीना टंडन की वापसी नहीं है, बल्कि इसमें बॉलीवुड के कई लोकप्रिय कलाकार भी नजर आएंगे। फिल्म की स्टारकास्ट में परेश रावल, अरशद वारसी, जैकी श्रॉफ, दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडीज, राजपाल यादव, जॉनी लीवर, लारा दत्ता, आफताब शिवदासानी, तुषार कपूर, श्रेयस तलपड़े और दलेर मेहंदी जैसे कलाकार शामिल हैं।

    निर्माताओं के अनुसार फिल्म का ट्रेलर बड़े स्तर पर लॉन्च किया जाएगा, जिसके बाद दर्शकों को इसकी कहानी और किरदारों की अधिक झलक देखने को मिलेगी। फिल्म 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है।

    फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों ने यह साबित कर दिया है कि ‘मोहरा’ की यादें आज भी दर्शकों के दिलों में ताजा हैं। तीन दशक बाद अक्षय, सुनील और रवीना को एक साथ देखना फैंस के लिए किसी खास तोहफे से कम नहीं माना जा रहा है।

  • कैसे बने ‘कल्याण कुमार’ से ‘पवन कल्याण’? आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम ने सुनाया दिलचस्प किस्सा

    कैसे बने ‘कल्याण कुमार’ से ‘पवन कल्याण’? आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम ने सुनाया दिलचस्प किस्सा


    नई दिल्ली । तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री के लोकप्रिय अभिनेता और आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। फिल्मों में ‘पावर स्टार’ के नाम से प्रसिद्ध पवन कल्याण ने राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका चर्चित नाम ‘पवन कल्याण’ आखिर उन्हें कैसे मिला। हाल ही में एक बातचीत के दौरान उन्होंने अपने नाम के पीछे की दिलचस्प कहानी साझा की।

    पवन कल्याण ने बताया कि उनका जन्म नाम ‘श्री कल्याण कुमार’ था। उनका नामकरण तिरुमाला देवस्थानम के भगवान योग नरसिम्हा मंदिर में हुआ था, जहां परिवार ने उनका नाम ‘श्री कल्याण कुमार’ रखा। बाद में जब उनका स्कूल में दाखिला हुआ, तो नाम से ‘श्री’ शब्द हटा दिया गया और पारिवारिक उपनाम जुड़ने के कारण उनका नाम ‘के. कल्याण कुमार’ हो गया।

    उन्होंने बताया कि युवावस्था में उन्हें मार्शल आर्ट्स का काफी शौक था और वे इसके लिए कड़ी मेहनत करते थे। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने लंबे समय तक मार्शल आर्ट्स का प्रशिक्षण लिया। इसी दौरान उन्होंने कई सार्वजनिक प्रदर्शनों में अपनी शारीरिक क्षमता और ताकत का प्रदर्शन भी किया।

    पवन कल्याण के अनुसार, प्रशिक्षण के दिनों में वे अपनी छाती पर भारी वजन उठाने और कठिन स्टंट करने के लिए जाने जाते थे। प्रदर्शन के दौरान उनकी छाती पर भारी पत्थर की सिल्लियां रखकर उन्हें तोड़ा जाता था। उनकी शारीरिक शक्ति और साहस को देखकर उनके मार्शल आर्ट्स शिक्षक काफी प्रभावित हुए।

    यहीं से उनके जीवन में एक नया मोड़ आया। उनके शिक्षक ने उनकी तुलना भगवान हनुमान से करते हुए कहा कि उनमें ‘पवन पुत्र हनुमान’ जैसी ऊर्जा, शक्ति और साहस दिखाई देता है। इसी भावना के साथ शिक्षक ने उनके नाम के आगे ‘पवन’ शब्द जोड़ दिया। इसके बाद ‘कल्याण कुमार’ धीरे-धीरे ‘पवन कल्याण’ के नाम से पहचाने जाने लगे।

    समय के साथ यही नाम उनकी पहचान बन गया। जब उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा, तब भी उन्होंने इसी नाम को अपनाया। देखते ही देखते पवन कल्याण तेलुगु सिनेमा के सबसे लोकप्रिय सितारों में शामिल हो गए। उनकी फिल्मों को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला और उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा में एक अलग मुकाम हासिल किया।

    फिल्मों में सफलता के बाद उन्होंने राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई और अपनी पार्टी के जरिए जनता के बीच मजबूत आधार तैयार किया। आज वे आंध्र प्रदेश सरकार में उपमुख्यमंत्री के पद पर कार्यरत हैं और राज्य की राजनीति के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं।

    पवन कल्याण की यह कहानी केवल नाम बदलने की नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन और व्यक्तित्व निर्माण की भी कहानी है। एक मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षु से सुपरस्टार और फिर उपमुख्यमंत्री तक का उनका सफर लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत माना जाता है। उनके नाम के पीछे छिपी यह रोचक कहानी आज भी उनके प्रशंसकों के बीच उत्सुकता का विषय बनी हुई है।

  • जब घर से रूठकर लापता हो गए थे लाडले श्याम सुंदर दास: जानिए कैसे एक लाचार पिता की मार्मिक वेदना ने रचे भारतीय सिनेमा के दो कालजयी गीत

    जब घर से रूठकर लापता हो गए थे लाडले श्याम सुंदर दास: जानिए कैसे एक लाचार पिता की मार्मिक वेदना ने रचे भारतीय सिनेमा के दो कालजयी गीत

    नई दिल्ली । संगीत और मानवीय संवेदनाओं का रिश्ता बेहद गहरा और रूहानी होता है। अक्सर जिन गीतों को सुनकर लोग झूम उठते हैं या जिन्हें विशुद्ध रूप से रोमांटिक विरह गीत मान लिया जाता है, उनके सृजन के पीछे कभी-कभी किसी रचनाकार की जिंदगी का सबसे बड़ा और असहनीय व्यक्तिगत दर्द छिपा होता है। भारतीय सिनेमा के इतिहास में साल 1957 और 1959 के दौर में लिखे गए दो कालजयी गीतों— ‘जरा सामने तो आ ओ छलिए’ और ‘आ लौट के आजा मेरे मीत’ के साथ भी कुछ ऐसा ही जुड़ा हुआ है। इन गीतों को दशकों से लोग प्रेम की वेदना समझकर गाते आ रहे हैं, लेकिन वास्तव में ये बोल एक लाचार पिता के अपने कलेजे के टुकड़े से बिछड़ने की तड़प से पैदा हुए थे।

    इस भावुक कर देने वाली कहानी के केंद्र में महान गीतकार पंडित भरत व्यास और उनका परिवार है। भरत व्यास का बेटा श्याम सुंदर दास स्वभाव से बेहद संवेदनशील और उनका अत्यधिक लाडला था। एक दिन किसी घरेलू बात पर पिता से मामूली नाराजगी के बाद वह गुस्से में बिना बताए घर छोड़कर कहीं चला गया। शुरुआत में लगा कि वह जल्द लौट आएगा, लेकिन जब दिन बीतने लगे तो परिवार की चिंता गहरे डर में बदल गई। बेटे को ढूंढने के लिए भरत व्यास ने हर संभव जतन किए, अखबारों में विज्ञापन दिए, पोस्टर छपवाए और हर धार्मिक स्थल पर मन्नतें मांगीं, लेकिन बेटे का कहीं कोई सुराग नहीं मिला।

    इकलौते बेटे के इस तरह अचानक लापता हो जाने के गम ने पंडित भरत व्यास को भीतर से पूरी तरह तोड़ दिया था। वे गहरे डिप्रेशन और एक आत्म-अपराधबोध के जाल में फंस गए, जिसके कारण उन्होंने बाहरी दुनिया और अपने काम से पूरी तरह दूरी बना ली। वे दिन-रात गुमसुम रहने लगे। इसी मानसिक संकट के बीच एक फिल्म निर्माता उनके पास एक गीत लिखवाने की दरख्वास्त लेकर पहुंचे, जिसे भरत व्यास ने मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण गुस्से में मना कर दिया। बाद में उनकी पत्नी के समझाने और संबल देने पर वे काम करने के लिए राजी हुए और उन्होंने फिल्म ‘जनम जनम के फेरे’ के लिए एक गीत लिखा।

    अपने इसी मानसिक तनाव और बेटे की तलाश में भटकने के दर्द को उन्होंने पन्नों पर उतारा, जो आगे चलकर ‘जरा सामने तो आ ओ छलिए, छुपा-छुपा के नखरे दिखाए’ के रूप में सामने आया। लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी की जादुई आवाजों से सजे इस गीत ने रेडियो पर आते ही लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, लेकिन इस बड़ी कामयाबी के बाद भी भरत व्यास का बेटा वापस नहीं लौटा था। इसके बाद साल 1959 में फिल्म ‘रानी रूपमति’ के लिए गीत लिखते समय भी उनके दिल का वह पुराना जख्म फिर हरा हो गया और उन्होंने बेटे को पुकारते हुए ‘आ लौट के आजा मेरे मीत, तुझे मेरे गीत बुलाते हैं’ जैसा मर्मस्पर्शी गीत लिख डाला।

    सिनेमाई पर्दे पर जब इन गानों को दर्शाया गया, तो दर्शकों ने इसे नायक-नायिका के विरह का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण माना। हालांकि, इन गीतों के बोलों को यदि एक पिता और लापता बेटे के संदर्भ में ध्यान से पढ़ा जाए, तो रचनाकार की आत्मा का रोना साफ महसूस होता है। इस बेहद दर्दनाक कहानी का अंत सुखद रहा क्योंकि ‘आ लौट के आजा मेरे मीत’ गीत की अभूतपूर्व सफलता और देश भर में गूंजने के कुछ समय बाद, उनका बेटा श्याम सुंदर दास आखिरकार सकुशल अपने पिता के पास वापस लौट आया, जिससे भरत व्यास के जीवन का सबसे लंबा और कठिन इंतजार हमेशा के लिए समाप्त हो गया।