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  • जब सरकारी फरमान के आगे नहीं झुके संगीत के सरताज किशोर कुमार, 'आंधी' फिल्म के गानों पर प्रतिबंध से लेकर राजनीतिक टकराव की पूरी कहानी

    जब सरकारी फरमान के आगे नहीं झुके संगीत के सरताज किशोर कुमार, 'आंधी' फिल्म के गानों पर प्रतिबंध से लेकर राजनीतिक टकराव की पूरी कहानी

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा और संगीत के इतिहास में सत्तर का दशक अपनी बेहतरीन कलात्मकता के साथ-साथ राजनीतिक उथल-पुथल के लिए भी जाना जाता है। इस दौर में जहां एक तरफ आरडी बर्मन, गुलजार और किशोर कुमार जैसे दिग्गज मिलकर संगीत के नए कीर्तिमान रच रहे थे, वहीं दूसरी तरफ देश में लागू आपातकाल का साया कला जगत पर भी पड़ने लगा था। इसी दौर की एक बेहद चर्चित और विवादित कहानी फिल्म ‘आंधी’ और उसके सदाबहार गाने ‘तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं’ से जुड़ी हुई है। किशोर कुमार और लता मंगेशकर की जादुई आवाज से सजे इस दर्दभरे और रूहानी गाने को एक समय पर सरकारी कोपभाजन का शिकार होना पड़ा था और इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था। संजीव कुमार और सुचित्रा सेन की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म और इसके गानों को प्रतिबंधित किए जाने के पीछे राजनीतिक गलियारों में उठी एक बड़ी अफवाह थी।

    उस समय देश के राजनीतिक हालातों को देखते हुए यह बात तेजी से फैली कि फिल्म ‘आंधी’ की कहानी और सुचित्रा सेन का किरदार पूरी तरह से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के जीवन और उनके व्यक्तित्व पर आधारित है। इस अफवाह के सामने आते ही तत्कालीन सरकार ने फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी और इसके चलते ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन जैसे सरकारी माध्यमों पर इस फिल्म के गानों के प्रसारण को पूरी तरह बंद कर दिया गया। हालांकि यह प्रतिबंध बहुत लंबा नहीं चला और कुछ महीनों के बाद जब फिल्म से बैन हटा, तो यह सिनेमाघरों में रिलीज हुई और इसके गाने एक बार फिर दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गए। लेकिन इस प्रतिबंध के पीछे सिर्फ फिल्म की कहानी ही एकमात्र वजह नहीं थी, बल्कि इसके पीछे किशोर कुमार और तत्कालीन सरकार के बीच का सीधा टकराव भी था।

    कई मीडिया रिपोर्ट्स और ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी के प्रचारक और तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री वीसी शुक्ला ने किशोर कुमार तक एक सरकारी संदेश भिजवाया था। इस संदेश में किशोर कुमार से सरकार और इंदिरा गांधी के नीतियों के समर्थन में एक विशेष गाना गाने के लिए कहा गया था। अपनी मर्जी के मालिक और बेहद स्वाभिमानी स्वभाव के धनी किशोर कुमार ने इस सरकारी फरमान को मानने से साफ इनकार कर दिया। किशोर कुमार का यह कड़ा रुख सरकार को नागवार गुजरा और इसके बाद उनके गानों को सरकारी रेडियो और दूरदर्शन चैनलों पर बजाने से पूरी तरह रोक दिया गया। इस विवाद पर किशोर कुमार ने बेहद बेबाकी से कहा था कि कोई भी ताकत उनसे वह काम नहीं करवा सकती जो वह खुद अपनी मर्जी से न करना चाहें और वह किसी और के इशारों पर काम नहीं करेंगे।

    इस ऐतिहासिक गाने के बनने की कहानी भी अपने आप में बेहद दिलचस्प है। संगीत निर्देशक आरडी बर्मन यानी पंचम दा ने इस गाने की मूल धुन असल में एक बंगाली दुर्गा पूजा एल्बम के लिए तैयार की थी, जिसके बोल ‘जेते जेते पथे होलो देरी’ थे। इस बंगाली गाने को खुद पंचम दा ने अपनी आवाज दी थी, जो मशहूर गीतकार गुलजार को बेहद पसंद आई थी। इसके बाद गुलजार के कहने पर इस धुन को फिल्म ‘आंधी’ में शामिल करने का फैसला किया गया और उन्होंने इस पर ‘तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं’ जैसे कालजयी बोल लिखे। किशोर कुमार भले ही तेरह अक्टूबर उन्नीस सौ सतासी को इस दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन सरकारी पाबंदियों के आगे न झुकने का उनका यह हौसला और उनकी जादुई आवाज आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में हमेशा के लिए अमर है।

  • कुमार सानू का वो ऐतिहासिक रिकॉर्ड जिसे आज तक कोई सिंगर नहीं तोड़ पाया, जानिए आखिर क्यों एक ही दिन में रिकॉर्ड करने पड़े थे इतने सारे गाने

    कुमार सानू का वो ऐतिहासिक रिकॉर्ड जिसे आज तक कोई सिंगर नहीं तोड़ पाया, जानिए आखिर क्यों एक ही दिन में रिकॉर्ड करने पड़े थे इतने सारे गाने

    नई दिल्ली। भारतीय संगीत जगत में नव्वै का दशक एक ऐसा स्वर्णिम काल माना जाता है जिसने बॉलीवुड को कई सदाबहार और यादगार गाने दिए। इस दौर में अपनी मखमली आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले दिग्गज पाशर्व गायक कुमार सानू ने सफलता के कई नए आयाम स्थापित किए। आज के समय में जहां आधुनिक तकनीक के बावजूद सिंगर्स के लिए एक दिन में एक गाना पूरी तरह रिकॉर्ड करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है, वहीं कुमार सानू ने करीब तैंतीस साल पहले एक ऐसा ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया था जिसे आज तक कोई भी छू नहीं सका है।
    उन्होंने महज एक दिन के भीतर रिकॉर्ड अठाइस गाने गाकर अपना नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में हमेशा के लिए दर्ज करा लिया था। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने यह रिकॉर्ड किसी पुरस्कार या प्रसिद्धि की चाह में नहीं बनाया था, बल्कि इसके पीछे एक बेहद व्यावहारिक वजह थी। कुमार सानू को उन दिनों करीब चालीस दिनों के लंबे अमेरिकी दौरे पर जाना था और वह नहीं चाहते थे कि उनके विदेश जाने की वजह से किसी भी संगीतकार का काम रुके या फिल्म की शूटिंग प्रभावित हो, इसलिए उन्होंने जाने से पहले अपना सारा लंबित काम खत्म करने का फैसला किया और मैराथन रिकॉर्डिंग करते हुए यह अद्भुत मुकाम हासिल कर लिया।

    कोलकाता के एक बंगाली परिवार में जन्मे इस महान गायक का असली नाम सानू भट्टाचार्य है, लेकिन उनके संगीत के सफर में एक बड़ा मोड़ तब आया जब उस दौर की मशहूर संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। उन्होंने जब पहली बार सानू की आवाज सुनी, तो उन्हें उसमें महान गायक किशोर कुमार की झलक दिखाई दी। इसके बाद उन्होंने सानू भट्टाचार्य को अपना नाम बदलकर कुमार सानू रखने की सलाह दी ताकि फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें एक नई पहचान मिल सके।

    कुमार सानू के करियर को सबसे बड़ी उड़ान साल उन्नीस सौ नब्बे में आई फिल्म आशिकी से मिली। इस फिल्म के गानों ने भारतीय संगीत उद्योग के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए और इसकी ब्लॉकबस्टर कामयाबी ने कुमार सानू को रातों-रात देश का सबसे बड़ा सुपरस्टार सिंगर बना दिया। इसके बाद तो जैसे हिंदी सिनेमा में उनके नाम की आंधी चल पड़ी और वह हर बड़े अभिनेता और निर्माता-निर्देशक की पहली पसंद बन गए।

    कुमार सानू की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने साल उन्नीस सौ इक्यानवे से लेकर उन्नीस सौ पंचानवे तक लगातार पांच सालों तक फिल्मफेयर बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का पुरस्कार जीतकर एक नया इतिहास रच दिया था। उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान साजन, दीवाना, बाजीगर और नाइन्टीन फोर्टी टू ए लव स्टोरी जैसी सुपरहिट फिल्मों के गानों के लिए मिला था। कामयाबी के शिखर पर पहुंचने के बाद जब छठे साल भी उन्हें फिल्मफेयर के लिए नामांकित किया गया, तो उन्होंने अपनी दरियादिली और बड़प्पन का परिचय देते हुए इस अवॉर्ड को लेने से साफ मना कर दिया। उनका मानना था कि अब उन्हें लगातार मिलने वाले इस सम्मान की जगह किसी नए, प्रतिभावान और उभरते हुए कलाकार को मौका मिलना चाहिए ताकि फिल्म इंडस्ट्री में नए चेहरों को प्रोत्साहन मिल सके।

    अपने पूरे करियर में कुमार सानू ने न सिर्फ हिंदी और अपनी मातृभाषा बंगाली में गाने गाए, बल्कि उन्होंने देश की पंद्रह से अधिक क्षेत्रीय भाषाओं में सैकड़ों सुपरहिट गानों को अपनी सुरीली आवाज से सजाया। भारतीय संगीत जगत और संस्कृति में उनके इस बेमिसाल और अभूतपूर्व योगदान को सम्मानित करते हुए भारत सरकार ने साल दो हजार नौ में उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा था। आज भी उनके गाए रोमांटिक गाने युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं और उनका यह सफर संगीत के नए साधकों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

  • रणवीर सिंह ने घटाई फीस, लेकिन मुनाफे में हिस्सेदारी से करेंगे बड़ी कमाई

    रणवीर सिंह ने घटाई फीस, लेकिन मुनाफे में हिस्सेदारी से करेंगे बड़ी कमाई


    नई दिल्ली। रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर फिल्म सीरीज ‘धुरंधर’ ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की। फिल्म की को-प्रोड्यूसर ज्योति देशपांडे ने खुलासा किया कि रणवीर ने इस प्रोजेक्ट के लिए पारंपरिक तरीके से बड़ी फीस नहीं ली थी। इसके बजाय उन्होंने एक छोटी निश्चित फीस के साथ “बैकएंड डील” यानी फिल्म के मुनाफे में हिस्सेदारी का विकल्प चुना। यही रणनीति बाद में उनके लिए बेहद फायदेमंद साबित हुई।

    निर्देशक आदित्य धर ने भी लिया रिस्क
    फिल्म के निर्देशक आदित्य धर ने भी इसी मॉडल को अपनाया। उन्होंने भी कम फिक्स्ड फीस लेकर फिल्म के लाभ में हिस्सेदारी स्वीकार की।निर्माताओं के अनुसार इस व्यवस्था का उद्देश्य यह था कि फिल्म से जुड़े प्रमुख लोगों की सफलता में सीधी भागीदारी हो और सभी का फोकस बेहतर परिणाम देने पर रहे।

    जब बजट बढ़ा, लेकिन दांव सफल रहा
    ज्योति देशपांडे के मुताबिक फिल्म का वास्तविक खर्च शुरुआती अनुमान से काफी अधिक हो गया था। शुरुआत में जो बजट तय किया गया था, वह बाद में लगभग दोगुना हो गया। हालांकि फिल्म की शानदार कमाई ने इस जोखिम को सफलता में बदल दिया और निवेशकों से लेकर कलाकारों तक सभी को इसका लाभ मिला।

    एक फिल्म से बनी दो फिल्मों की फ्रेंचाइजी
    निर्माताओं का कहना है कि शुरुआत में ‘धुरंधर’ को एक ही फिल्म के रूप में बनाया जा रहा था। लेकिन पहले शेड्यूल की शूटिंग पूरी होने के बाद कहानी और फुटेज का दायरा इतना बढ़ गया कि इसे दो भागों में रिलीज करने का फैसला लिया गया। यही निर्णय बाद में फ्रेंचाइजी की सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ।

    शानदार स्टारकास्ट ने बढ़ाई फिल्म की ताकत
    फिल्म में रणवीर सिंह के अलावा अक्षय खन्ना, आर. माधवन, अर्जुन रामपाल, गौरव गेरा, सारा अर्जुन और राकेश बेदी जैसे कलाकार नजर आए।

    रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुई ‘धुरंधर 2
    रिपोर्ट्स के अनुसार ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ ने मिलकर दुनिया भर में लगभग 3000 करोड़ रुपये का कारोबार किया। वहीं ‘धुरंधर 2’ भारतीय सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में दूसरे स्थान पर पहुंच गई। इस सूची में शीर्ष स्थान पर दंगल बनी हुई है।

    ‘धुरंधर’ की सफलता यह दिखाती है कि फिल्म इंडस्ट्री में केवल बड़ी फीस ही कमाई का रास्ता नहीं होती। सही रणनीति, जोखिम उठाने की क्षमता और मुनाफे में हिस्सेदारी का मॉडल कलाकारों और निर्माताओं दोनों के लिए बेहद लाभदायक साबित हो सकता है।

  • डॉन 3 पर नया बवाल, रणवीर सिंह ने FWICE के खिलाफ उठाया कानूनी कदम

    डॉन 3 पर नया बवाल, रणवीर सिंह ने FWICE के खिलाफ उठाया कानूनी कदम


    नई दिल्ली। रणवीर सिंह और FWICE के बीच चल रहा विवाद अब कानूनी स्तर तक पहुंच गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रणवीर सिंह ने संगठन को लीगल नोटिस भेजा है। बताया जा रहा है कि नोटिस भेजे जाने के बाद FWICE को अदालत या कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखना पड़ सकता है। हालांकि नोटिस में की गई मांगों का आधिकारिक विवरण अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।

    FWICE ने जारी किया था गैर-सहयोग निर्देश
    पिछले सप्ताह FWICE ने अपने सदस्यों से रणवीर सिंह के साथ काम नहीं करने का आग्रह किया था। संगठन का यह कदम ‘डॉन 3’ परियोजना से जुड़े विवाद के बाद सामने आया। FWICE का कहना था कि फिल्म से अचानक अलग होने के कारण निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, जिसके चलते संगठन ने यह रुख अपनाया।

    फरहान अख्तर और एक्सेल एंटरटेनमेंट की शिकायत
    रिपोर्ट्स के अनुसार फरहान अख्तर और Excel Entertainment ने FWICE को शिकायत भेजी थी। शिकायत में कहा गया था कि फिल्म के प्री-प्रोडक्शन पर लगभग 45 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे। ऐसे में मुख्य अभिनेता के परियोजना से हटने से निर्माण प्रक्रिया प्रभावित हुई और आर्थिक नुकसान हुआ।

    क्या है पूरा मामला?
    कुछ वर्ष पहले Don 3 की घोषणा हुई थी, जिसमें रणवीर सिंह को नए ‘डॉन’ के रूप में पेश किया गया था। यह भूमिका पहले शाहरुख खान निभा चुके हैं। बाद में खबरें आईं कि रणवीर अब इस फिल्म का हिस्सा नहीं हैं। इसके बाद निर्माताओं और अभिनेता के बीच मतभेदों की चर्चा शुरू हुई, जो अब कानूनी नोटिस तक पहुंच गई है।

    आगे क्या हो सकता है?
    फिल्म इंडस्ट्री की नजरें अब इस मामले पर टिकी हैं। यदि दोनों पक्ष बातचीत से समाधान नहीं निकालते, तो विवाद लंबी कानूनी प्रक्रिया का रूप ले सकता है। वहीं, उद्योग जगत यह भी देख रहा है कि इसका असर रणवीर सिंह की आगामी फिल्मों और ‘डॉन 3’ की प्रगति पर कितना पड़ता है।

    रणवीर के आगामी प्रोजेक्ट्स
    विवादों के बीच रणवीर सिंह अपने अन्य प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रहे हैं। खबरों के मुताबिक वह निर्देशक आदित्य धर की एक नई फिल्म से जुड़े हैं। इसके अलावा निर्देशक जय मेहता की एक ज़ॉम्बी-आधारित फिल्म में भी उनके काम करने की चर्चा है।

  • ‘जब रफी साहब की आवाज ने बदल दी राजेश खन्ना की जिद्द’: एक गाने ने रच दिया था इतिहास

    ‘जब रफी साहब की आवाज ने बदल दी राजेश खन्ना की जिद्द’: एक गाने ने रच दिया था इतिहास


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार राजेश खन्ना अपने करियर के चरम पर थे। उस समय उनके कई हिट गाने किशोर कुमार की आवाज में रिकॉर्ड हो रहे थे। राजेश खन्ना को यह विश्वास था कि किशोर कुमार उनकी सफलता की “लकी आवाज” हैं। लेकिन फिल्म ‘दो रास्ते’ के एक गाने को लेकर स्थिति बदल गई, जब संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल ने अलग राय रखी।

    मखमली आवाज की तलाश और रफी की एंट्री
    म्यूजिक डायरेक्टर्स का मानना था कि इस खास गाने के लिए एक ऐसी आवाज चाहिए जो नरम, भावपूर्ण और रूहानी हो। इसी कारण उन्होंने मोहम्मद रफी को चुना। राजेश खन्ना इसके खिलाफ थे और उन्होंने किशोर कुमार की आवाज की जिद्द रखी, लेकिन संगीतकारों ने स्पष्ट कहा कि इस गाने के साथ सिर्फ रफी साहब ही न्याय कर सकते हैं।

    स्टूडियो में हुआ वो जादू जिसने सब बदल दिया
    जब मोहम्मद रफी ने स्टूडियो में “रेशमी जुल्फें” गाया, तो पूरा माहौल बदल गया। उनकी आवाज में ऐसा जादू था कि हर कोई मंत्रमुग्ध रह गया। रिकॉर्डिंग सुनने के बाद खुद राजेश खन्ना भी इस गाने के फैन बन गए। कहा जाता है कि इसी पल उन्होंने स्वीकार किया कि यह गाना सिर्फ रफी साहब की आवाज में ही सही लग सकता है।

    फिल्म, कास्ट और दिलचस्प किस्से
    फिल्म के लिए पहले संजय खान को अप्रोच किया गया था, लेकिन बाद में यह रोल संजय खान से हटकर राजेश खन्ना को मिला। फिल्म में मुमताज पहली बार बतौर लीड ए-ग्रेड अभिनेत्री नजर आईं और उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

    रफी की विरासत और दीवानगी
    मोहम्मद रफी की आवाज का जादू ऐसा था कि संगीतकारों से लेकर दर्शकों तक हर कोई उनके गीतों का दीवाना था। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके अंतिम संस्कार में भारी बारिश के बावजूद हजारों लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे।

    यह किस्सा सिर्फ एक गाने का नहीं, बल्कि उस दौर की संगीत परंपरा और कलाकारों की समझ का प्रतीक है, जहां सही आवाज और सही भाव ही किसी गीत को अमर बना देते थे। “रेशमी जुल्फें” ने न सिर्फ राजेश खन्ना की सोच बदली, बल्कि मोहम्मद रफी की गायकी को एक और ऐतिहासिक ऊंचाई दी

  • ‘फिल्म इंडस्ट्री से दूरी जरूरी थी’ – भारत भाग्य विधाता से पहले कंगना रनौत का बड़ा बयान, जानिए वजह

    ‘फिल्म इंडस्ट्री से दूरी जरूरी थी’ – भारत भाग्य विधाता से पहले कंगना रनौत का बड़ा बयान, जानिए वजह


    नई दिल्ली। अपनी अपकमिंग फिल्म को लेकर चल रहे प्रमोशन के दौरान कंगना रनौत ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय तक रहने के बाद अक्सर कलाकार एक “बबल” में जीने लगते हैं, जहां वास्तविक जीवन से दूरी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने अपनी नई फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ के किरदार में खुद को ढालना शुरू किया, तो उन्हें एहसास हुआ कि इस भूमिका को सही तरीके से निभाने के लिए वास्तविक जीवन के अनुभव जरूरी हैं।

    नर्स के किरदार ने बदला नजरिया
    कंगना इस फिल्म में एक नर्स का किरदार निभा रही हैं, जो 2008 के मुंबई आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि पर आधारित कहानी से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि यह किरदार केवल अभिनय नहीं, बल्कि “एक तरह की तपस्या” जैसा अनुभव था। उनके मुताबिक, मिडल क्लास बैकग्राउंड से आने के बावजूद लंबे समय तक फिल्म इंडस्ट्री में रहने के कारण असल जिंदगी से दूरी बढ़ जाती है।

    राजनीति और आम लोगों से जुड़ाव का असर
    कंगना रनौत ने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राजनीति से जुड़े रहने के कारण उन्हें आम लोगों से सीधे बातचीत का मौका मिला, जिससे उनके अभिनय में और गहराई आई। उनके अनुसार, एक कलाकार के लिए सिर्फ ग्लैमर नहीं बल्कि समाज की वास्तविकता को समझना भी जरूरी है।

    फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ पर चर्चा तेज
    फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म में कंगना का किरदार मुंबई हमलों के दौरान मेडिकल स्टाफ की भूमिका पर केंद्रित है। फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने के बाद दर्शकों में उत्सुकता बढ़ गई है और सोशल मीडिया पर इसे लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    कंगना रनौत का कहना है कि वास्तविक जीवन से दूरी कभी-कभी कलाकारों के लिए जरूरी हो सकती है, ताकि वे अपने किरदारों को ज्यादा प्रामाणिक तरीके से निभा सकें। ‘भारत भाग्य विधाता’ के जरिए वह एक बार फिर गंभीर और संवेदनशील भूमिका में नजर आने वाली हैं।

  • थोड़ा रेशम लगता है गाने की धुन चुराना हॉलीवुड कंपनी को पड़ा था भारी, बप्पी दा ने कॉपीराइट केस में दी थी मात

    थोड़ा रेशम लगता है गाने की धुन चुराना हॉलीवुड कंपनी को पड़ा था भारी, बप्पी दा ने कॉपीराइट केस में दी थी मात

    नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत में डिस्को किंग के नाम से मशहूर दिवंगत संगीतकार बप्पी लहरी न केवल अपनी अनूठी धुनों और सोने के गहनों के शौक के लिए जाने जाते थे, बल्कि वे अपने काम के प्रति बेहद सजग भी थे। साठ और सत्तर के दशक से लेकर आज तक बॉलीवुड के कई गानों पर विदेशी धुनों की नकल करने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इतिहास में एक ऐसा अनोखा वाकया भी दर्ज है जब हॉलीवुड के एक बड़े संगीतकार ने बॉलीवुड के गाने की धुन चुराई थी। इस चोरी पर बप्पी लहरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिकी अदालत का दरवाजा खटखटाया और न केवल यह ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई जीती, बल्कि विदेशी कंपनी को भारी-भरकम हर्जाना देने पर भी मजबूर कर दिया था। यह पूरा मामला भारतीय सिनेमा के संगीत इतिहास में कॉपीराइट उल्लंघन के खिलाफ सबसे बड़ी जीतों में से एक माना जाता है।

    इस विवाद की जड़ें साल 1981 में आई बॉलीवुड फिल्म ‘ज्योति’ से जुड़ी हुई हैं। इस फिल्म के लिए बप्पी लहरी ने एक बेहद खूबसूरत और थिरकने पर मजबूर कर देने वाला गाना तैयार किया था, जिसके बोल थे ‘थोड़ा रेशम लगता है’। इस गाने को स्वर कोकिला दिवंगत लता मंगेशकर ने अपनी जादुई आवाज से सजाया था और रिलीज के बाद यह गाना देश के कोने-कोने में गूंजने लगा था। सब कुछ सामान्य चल रहा था और लोग इस गाने को पसंद कर रहे थे, लेकिन इस गाने के रिलीज होने के ठीक 21 साल बाद, यानी साल 2002 में अमेरिकी हिप-हॉप आर्टिस्ट ‘ट्रुथ हर्ट्स’ का एक नया गाना रिलीज हुआ जिसका टाइटल ‘एडिक्टिव’ था। जब भारतीय संगीत प्रेमियों ने इस अमेरिकी गाने को सुना, तो वे दंग रह गए क्योंकि इस गाने की पूरी शुरुआत और बैकग्राउंड म्यूजिक हूबहू लता मंगेशकर के उसी पुराने गाने से लिया गया था।

    जैसे ही यह बात बप्पी लहरी के संज्ञान में आई, उन्होंने तुरंत उस अमेरिकी गाने को पूरा सुना और म्यूजिक लेबल ‘सारेगामा’ के साथ मिलकर अमेरिकी अदालत में कानूनी कार्रवाई करने का फैसला किया। बप्पी दा ने ‘एडिक्टिव’ गाने के मशहूर अमेरिकी प्रोड्यूसर डॉ. ड्रे के खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन का मुकदमा दायर कर दिया। अदालत की कार्यवाही के दौरान अमेरिकी मेकर्स ने बचाव में यह अजीब तर्क दिया कि उन्होंने यह धुन एक विदेशी रेडियो स्टेशन पर बजते हुए सुनी थी और उन्हें इस बात की बिल्कुल जानकारी नहीं थी कि इसके वास्तविक कॉपीराइट्स किसके पास सुरक्षित हैं। हालांकि, बप्पी दा और सारेगामा की लीगल टीम ने अदालत के सामने पुख्ता सबूत पेश किए कि यह धुन पूरी तरह से भारतीय संगीतकार की मूल रचना है।

    बप्पी दा और डॉ. ड्रे के बीच यह कानूनी लड़ाई काफी समय तक अमेरिकी कोर्ट में चलती रही और अंततः अदालत ने भारतीय संगीतकार के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने कड़े आदेश में कहा कि जब तक इस अमेरिकी गाने में बप्पी लहरी और सारेगामा को आधिकारिक तौर पर क्रेडिट नहीं दिया जाता, तब तक ‘एडिक्टिव’ गाने की सीडी और पूरे एल्बम की बिक्री पर तुरंत प्रभाव से रोक लगी रहेगी। इसके साथ ही, अदालत ने हॉलीवुड की संबंधित म्यूजिक कंपनी पर बड़ा जुर्माना लगाया, जिसके तहत हर्जाना और रॉयल्टी मिलाकर उन्हें 500 मिलियन डॉलर यानी करीब 4,744 करोड़ रुपये देने का ऐतिहासिक आदेश जारी किया गया।

    इस कानूनी जीत ने दुनिया भर में भारतीय संगीत की ताकत और उसके कानूनी अधिकारों का लोहा मनवाया। जिस फिल्म ‘ज्योति’ के गाने पर यह पूरा विवाद हुआ था, वह फिल्म भी जितेंद्र के डबल रोल, हेमा मालिनी, अशोक कुमार, शशिकला और अजीत जैसे दिग्गज कलाकारों के अभिनय और बेहतरीन गानों की वजह से बॉक्स ऑफिस पर काफी सफल रही थी। भारतीय संगीत को वैश्विक स्तर पर सम्मान दिलाने वाले बप्पी लहरी भले ही लंबे समय तक बीमार रहने और स्लीप एपनिया के कारण 15 फरवरी 2022 को इस दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन हॉलीवुड के खिलाफ दर्ज कराई गई उनकी यह ऐतिहासिक जीत हमेशा संगीत जगत की आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

  • कृति सेनन का ग्लैमरस अवतार बना चर्चा का विषय, ‘Cocktail 2’ को लेकर बढ़ा उत्साह

    कृति सेनन का ग्लैमरस अवतार बना चर्चा का विषय, ‘Cocktail 2’ को लेकर बढ़ा उत्साह


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री Kriti Sanon एक बार फिर अपने स्टाइल और ग्लैमर को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उनका नया समर-रेडी लुक सामने आया है, जिसमें वे एडन एम्बेलिश्ड आउटफिट में बेहद आकर्षक नजर आईं। उनके इस ग्लिट्ज और ग्रेस से भरपूर अंदाज ने सोशल मीडिया पर फैंस का ध्यान खींच लिया है।

    कृति सेनन अपनी सादगी, कॉन्फिडेंस और फैशन सेंस के लिए जानी जाती हैं, और इस बार भी उन्होंने अपने लुक से एक बार फिर साबित कर दिया कि वे बॉलीवुड की सबसे स्टाइलिश अभिनेत्रियों में से एक क्यों मानी जाती हैं। उनका यह नया अवतार तेजी से वायरल हो रहा है और फैंस लगातार उनकी तारीफ कर रहे हैं।

    इसके साथ ही उनकी आगामी फिल्म Cocktail 2 को लेकर भी दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। माना जा रहा है कि इस फिल्म में कृति सेनन एक नए और दिलचस्प किरदार में नजर आ सकती हैं, जिसे लेकर फैंस लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं।

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में कृति का स्टाइलिश और एलिगेंट अंदाज साफ झलक रहा है। उनका यह लुक समर फैशन के लिए भी ट्रेंड सेट करता नजर आ रहा है। वहीं, फिल्म ‘Cocktail 2’ को लेकर बढ़ती चर्चा ने उनके फैनबेस में उत्साह और बढ़ा दिया है।

    कुल मिलाकर, कृति सेनन का यह नया लुक और उनकी आने वाली फिल्म दोनों ही एंटरटेनमेंट और फैशन वर्ल्ड में चर्चा का बड़ा विषय बने हुए हैं।

  • प्रेग्नेंसी के ग्लो से लेकर डिलीवरी के बाद मोटापे के तानों तक, कियारा आडवाणी ने बयां किया मां बनने का दर्द

    प्रेग्नेंसी के ग्लो से लेकर डिलीवरी के बाद मोटापे के तानों तक, कियारा आडवाणी ने बयां किया मां बनने का दर्द

    नई दिल्ली । बॉलीवुड की अग्रणी अभिनेत्रियों में शुमार कियारा आडवाणी ने मातृत्व और उसके बाद समाज में महिलाओं के प्रति बदलने वाले दृष्टिकोण पर बेहद संजीदगी से अपनी बात रखी है। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने मां बनने के बाद महिलाओं के सामने आने वाली व्यावहारिक और मानसिक चुनौतियों पर खुलकर चर्चा की। कियारा ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि कैसे बच्चा होने के बाद समाज महिलाओं को लेकर बेहद आत्मकेंद्रित और जजमेंटल हो जाता है। उन्होंने कहा कि मां बनने के इस खूबसूरत लेकिन कठिन सफर के बाद वे दुनिया को और भी बेहतर और परिपक्व तरीके से समझने लगी हैं, जिसका सकारात्मक असर उनके अभिनय पर भी दिखेगा। अभिनेत्री के अनुसार, अब जो भी फिल्म निर्देशक उनके साथ काम करेंगे, उन्हें उनके अभिनय का एक बिल्कुल नया, गहरा और सबसे बेहतरीन वर्जन देखने को मिलेगा।

    कियारा आडवाणी ने बॉम्बे टाइम्स को दिए अपने विशेष इंटरव्यू में गर्भावस्था के दौरान और बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं के प्रति लोगों के बदलते व्यवहार के दोहरे मापदंडों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि जब कोई महिला गर्भवती होती है, तब हर कोई उसकी तारीफ करता है। लोग उसके चेहरे की चमक और खूबसूरती की सराहना करते हुए उसे पलकों पर बिठाकर रखते हैं। समाज का रवैया उस समय ऐसा होता है जैसे वे किसी देवी की तरह उस महिला का सम्मान कर रहे हों। लेकिन जैसे ही वह महिला बच्चे को जन्म देती है, अचानक लोगों की सोच और नजरिया पूरी तरह बदल जाता है। लोग उसके मातृत्व की सराहना करने के बजाय उसके शारीरिक बदलावों पर टिप्पणियां करना शुरू कर देते हैं, जिससे महिलाओं को काफी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है।

    अभिनेत्री ने समाज की इस कड़वी सच्चाई को बयां करते हुए कहा कि बच्चे के जन्म के तुरंत बाद लोग महिला के चेहरे की चमक को भूलकर उसके बढ़े हुए वजन यानी मोटापे पर ध्यान केंद्रित करने लगते हैं। समाज में यह उम्मीद की जाने लगती है कि मां बनने के तुरंत बाद वह महिला बिल्कुल फिट दिखने लगे और बिना समय लिए अपने पुराने रूटीन में वापस लौट आए। कियारा ने स्पष्ट किया कि असल में एक महिला के जीवन का सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण समय बच्चे के जन्म के बाद ही शुरू होता है, क्योंकि इसी नाजुक दौर में उसे सबसे ज्यादा पारिवारिक और सामाजिक सहयोग की आवश्यकता होती है। यह वह समय होता है जब महिला को शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर सबसे ज्यादा सहारा चाहिए होता है।

    अपनी बात को और अधिक सरल ढंग से समझाते हुए कियारा आडवाणी ने एक पुरानी कहावत का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जैसे अक्सर कहा जाता है कि एक बच्चे की सही परवरिश करने के लिए पूरे गांव के सहारे की जरूरत होती है, ठीक उसी तरह एक नई मां को संभालने और मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए भी पूरे परिवार और समाज के सहयोग की जरूरत होती है। प्रसव के बाद का समय वह होता है जब आपको उस महिला का सबसे ज्यादा ख्याल रखना चाहिए, क्योंकि वह एक साथ दो मोर्चों पर जूझ रही होती है। वह अपने शरीर में होने वाले हार्मोनल और शारीरिक बदलावों का सामना करने के साथ-साथ एक मां के रूप में अपनी बिल्कुल नई भूमिका और जिम्मेदारियों में खुद को ढालने की कोशिश कर रही होती है।

    गौरतलब है कि कियारा आडवाणी ने साल 2023 में अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ सात फेरे लिए थे और शादी के दो साल बाद यानी 15 जुलाई, 2025 को उन्होंने अपनी बेटी सारायाह का दुनिया में स्वागत किया था। अपनी व्यक्तिगत जिंदगी के इस खूबसूरत अनुभव को जीने के बाद वे दोबारा काम पर लौटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। आने वाले समय में कियारा सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित और पैन इंडिया स्तर पर बनने वाली एक्शन फिल्म ‘टॉक्सिक’ में एक बेहद अहम भूमिका निभाती हुई नजर आएंगी। हालांकि इस बड़ी फिल्म की रिलीज डेट के बारे में मेकर्स ने अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन फैंस बड़े पर्दे पर कियारा के इस नए अवतार को देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

    कियारा आडवाणी के इस बेबाक और संवेदनशील इंटरव्यू ने मनोरंजन जगत के साथ-साथ आम समाज में भी एक नई बहस को जन्म दे दिया है। मातृत्व के बाद महिलाओं पर होने वाली बॉडी शेमिंग और अवास्तविक फिटनेस उम्मीदों के खिलाफ उठाई गई उनकी यह आवाज निश्चित रूप से समाज को इस विषय पर दोबारा सोचने और नई माताओं के प्रति अधिक संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित करेगी।

  • शाहरुख खान से लेकर अक्षय कुमार तक, जब भारतीय सिनेमा के इन दिग्गज कलाकारों ने बनाए वैश्विक कीर्तिमान

    शाहरुख खान से लेकर अक्षय कुमार तक, जब भारतीय सिनेमा के इन दिग्गज कलाकारों ने बनाए वैश्विक कीर्तिमान

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा ने न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी एक खास और अमिट पहचान बनाई है। बॉलीवुड के सितारों की लोकप्रियता और उनका काम अक्सर दुनिया भर में सुर्खियां बटोरता रहता है। इसी कड़ी में एक-दो नहीं बल्कि कई बार भारतीय फिल्म जगत के कलाकारों ने अपने असाधारण और अनोखे प्रयासों से प्रतिष्ठित गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया है। इन कलाकारों ने अपनी फिल्मों के प्रचार के अनोखे तरीकों, सबसे लंबे अभिनय करियर, अनोखे किरदारों और अपनी बेमिसाल वैश्विक लोकप्रियता के दम पर ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जिन्हें तोड़ पाना किसी भी अन्य वैश्विक कलाकार के लिए एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य साबित हो रहा है।

    बॉलीवुड के ‘खिलाड़ी’ यानी अक्षय कुमार अपने प्रशंसकों को खुश करने और नए प्रयोग करने के मामले में हमेशा आगे रहते हैं। उन्होंने साल 2023 में अपनी फिल्म ‘सेल्फी’ के प्रमोशन के दौरान एक अद्भुत रिकॉर्ड अपने नाम किया था। अक्षय ने अपने फैंस के साथ महज 3 मिनट के बेहद संक्षिप्त समय में कुल 184 परफेक्ट सेल्फी खींचकर एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बना डाला था। वहीं दूसरी तरफ, बच्चन परिवार के नाम भी एक बेहद अनोखा सिनेमाई रिकॉर्ड दर्ज है। फिल्म ‘पा’ में असल जिंदगी के पिता अमिताभ बच्चन ने एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित बेटे का किरदार निभाया था, जबकि उनके वास्तविक बेटे अभिषेक बच्चन ने फिल्म में उनके पिता की भूमिका अदा की थी। गिनीज बुक ने इस अनोखे प्रदर्शन को दुनिया का इकलौता ऐसा रिवर्सल रोल माना, जहां असल जिंदगी के पारिवारिक रिश्ते पर्दे पर पूरी तरह से उलट गए थे।

    अभिषेक बच्चन के नाम इस पारिवारिक रिकॉर्ड के अलावा एक और व्यक्तिगत वैश्विक कीर्तिमान भी दर्ज है। साल 2009 में अपनी फिल्म ‘दिल्ली-6’ के अनोखे प्रमोशन के दौरान अभिषेक ने 12 घंटे के भीतर देश के विभिन्न शहरों में कुल 13 पब्लिक अपीयरेंस यानी सार्वजनिक प्रस्तुतियां दी थीं। इस दौरान उन्होंने अपने निजी विमान और कार की मदद से लगभग 1800 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया था और हॉलीवुड के मशहूर स्टार विल स्मिथ के पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया था। लोकप्रियता की बात करें तो बॉलीवुड के ‘किंग खान’ यानी शाहरुख खान को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा दुनिया का सबसे लोकप्रिय और मांग वाला अभिनेता घोषित किया जा चुका है। एक वैश्विक विश्लेषण के अनुसार, शाहरुख खान की ग्लोबल डिमांड दुनिया के किसी भी अन्य औसत अभिनेता की तुलना में 53.2 गुना ज्यादा आंकी गई थी, जो उनकी बेमिसाल वैश्विक बादशाहत को साबित करती है।

    सिनेमा के शुरुआती दौर के कलाकारों की बात करें तो दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार के नाम भी एक बेहद सम्मानित और ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने साल 1936 में फिल्म ‘जीवन नैया’ से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी और इसके बाद वे लगातार 63 वर्षों तक मुख्य और सहायक भूमिकाओं में बड़े पर्दे पर सक्रिय रूप से नजर आते रहे। सबसे लंबे समय तक बतौर मुख्य अभिनेता सक्रिय रहने का यह रिकॉर्ड आज भी ‘दादा मुनी’ के नाम से मशहूर अशोक कुमार के ही पास है। इसी तरह मशहूर कैरेक्टर आर्टिस्ट जगदीश राज खुराना ने सिनेमाई इतिहास में एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया है जिसे तोड़ना लगभग असंभव माना जाता है। उन्होंने अपने पूरे करियर में 144 से भी अधिक फिल्मों में सिर्फ ‘पुलिस इंस्पेक्टर’ का किरदार निभाया था, जिसके चलते उनका नाम गिनीज बुक में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। अभिनेत्रियों में कैटरीना कैफ ने साल 2013 में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए उस दौर के हिसाब से रिकॉर्ड 63.75 करोड़ रुपये की अनुमानित सालाना कमाई के साथ बॉलीवुड की सबसे महंगी और कमाई करने वाली अभिनेत्री के रूप में अपना नाम इस वैश्विक सूची में दर्ज कराया था।

    ये वैश्विक रिकॉर्ड्स इस बात का साफ संकेत हैं कि बॉलीवुड के कलाकार न केवल कला के क्षेत्र में बल्कि कूटनीति, विपणन और लोकप्रियता के हर पैमाने पर दुनिया के किसी भी सिनेमा से पीछे नहीं हैं। आने वाले समय में तकनीक और सिनेमा के बदलते स्वरूप के साथ भारतीय कलाकारों द्वारा ऐसे कई और नए कीर्तिमान स्थापित किए जाने की पूरी संभावना दिखाई देती है।