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  • अमेरिका-इजरायल हमले को लेकर नया दावा, Donald Trump बोले- Mojtaba Khamenei घायल हो सकते हैं

    अमेरिका-इजरायल हमले को लेकर नया दावा, Donald Trump बोले- Mojtaba Khamenei घायल हो सकते हैं


    नई दिल्ली। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के स्वास्थ्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दावा किया जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले में वे घायल हो गए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि मोजतबा खामेनेई ज़िंदा हैं, लेकिन उन्हें चोटें आई हैं। हालांकि उनकी स्थिति को लेकर अभी भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

    हमले में अली खामेनेई की मौत का दावा
    रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के हमले के पहले ही दिन ईरान के दूसरे सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत होने की खबर सामने आई थी। इसके बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया। सुप्रीम लीडर बनने के बाद से मोजतबा पब्लिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

    झिग ने क्या कहा
    डोनाल्ड झिग ने कहा कि उन्हें लगता है कि मोजतबा खामेनेई जीवित हैं, लेकिन वे घायल हो सकते हैं। इससे पहले ईरान के सरकारी मीडिया में भी यह बताया गया था कि उन्हें हल्की चोटें आई हैं।

    चोटों को लेकर क्या सामने आया
    साइप्रस में ईरान के राजदूत अलीरेजा सलारियन ने बताया कि मोजतबा खामेनेई के पैरों और हाथों में चोट लगने की जानकारी मिली है। उनके अनुसार संभव है कि उनका इलाज अस्पताल में चल रहा हो। कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि उनके पैर में फ्रैक्चर हुआ है और चेहरे पर भी चोट के निशान हैं, खासकर बाईं आंख के आसपास।

    परिवार को भी भारी नुकसान
    रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में अली खामेनेई के परिवार को भी बड़ा नुकसान हुआ। बताया जा रहा है कि मोजतबा की पत्नी, उनकी मां और परिवार के कुछ अन्य सदस्य भी हमले में मारे गए। हालांकि इन आंदोलनों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और ईरान की ओर से आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    जनता रूप से नहीं आए नजर
    मोजतबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर बनाए जाने के बाद से अब तक जनता रूप से नहीं देखा गया है। उनकी ओर से जारी पहला संदेश भी ईरानी टीवी एंकर द्वारा दायर किया गया था।

  • भारत-चिली संबंधों पर जोर, Narendra Modi ने José Antonio Kast को दी शुभकामनाएं

    भारत-चिली संबंधों पर जोर, Narendra Modi ने José Antonio Kast को दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिली के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जोस एंटोनियो कास्ट को पदभार संभालने पर बधाई दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर संदेश साझा करते हुए उनके सफल कार्यकाल की कामना की और भारत तथा चिली के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की उम्मीद जताई।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में लिखा कि चिली के राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने पर जोस एंटोनियो कास्ट को हार्दिक बधाई। उन्होंने कहा कि वह भारत और चिली के बीच मित्रतापूर्ण संबंधों को और मजबूत बनाने तथा व्यापार, तकनीक और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहराई करने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने को उत्सुक हैं।

    वालपराइसो में हुआ शपथ ग्रहण समारोह
    जोस एंटोनियो कास्ट ने बुधवार को चिली के तटीय शहर वालपराइसो में स्थित नेशनल कांग्रेस बिल्डिंग में एक औपचारिक समारोह में राष्ट्रपति पद की शपथ ली। 60 वर्षीय नेता ने वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हॉल ऑफ ऑनर में पदभार ग्रहण किया।

    समारोह में पूर्व राष्ट्रपति गैब्रियल बोरिक भी मौजूद रहे। उन्होंने अपने उत्तराधिकारी को ‘पियोचा डी ओ’हिगिंस’ के बाद, जो चिली के राष्ट्रपति पद के अधिकार और सत्ता का पारंपरिक प्रतीक माना जाता है।

    विदेशी प्रतिनिधियों के लिए आयोजित हुआ विशेष भोज
    शपथ ग्रहण के बाद राष्ट्रपति कलाकारों ने पास के शहर विना डेल मार में स्थित सेरो कैस्टिलो प्रेसिडेंशियल पैलेस में विदेशी प्रतिनिधियों के लिए एक विशेष भोज का आयोजन किया। यह कार्यक्रम चिली में राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह की पारंपरिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। इस समारोह में कई देशों के प्रमुख नेता और प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें फेलिप VI, जेवियर मिली, जोस राउल मुलिनो, रोड्रिगो चावेस और सैंटियागो पेना सहित कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और राजनयिक मौजूद थे।

    जर्मन मूल के परिवार से आते हैं कलाकार
    जोस एंटोनियो कलाकार सीनेटर से वकील हैं और जर्मन मूल के परिवार से आते हैं। उन्होंने चिली की प्रतिष्ठित पोंटिफिकल कैथोलिक यूनिवर्सिटी ऑफ चिली से कानून की पढ़ाई की। छात्र जीवन के दौरान ही उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी थी और वे जयमे गुजमान द्वारा शुरू किए गए ग्रेमियल आंदोलन से जुड़े।

    बाद में उन्होंने दक्षिणपंथी राजनीतिक दल इंडिपेंडेंट डेमोक्रेटिक यूनियन (यूपीएम) के साथ लगभग दो दशक तक काम किया। इस दौरान वे पहले नगरपालिका परिषद के सदस्य रहे और बाद में 2002 से 2018 तक चिली की संसद में सांसद के रूप में कार्य किया।

    रिपब्लिकन पार्टी बनाकर अलग पहचान बनाई
    2019 में जाति ने रिपब्लिकन पार्टी की स्थापना की और एक मजबूत कंजर्वेटिव राजनीतिक मंच की वकालत की। वे सुरक्षा, कार्मिक इमिग्रेशन नियमों और पारंपरिक सामाजिक मूल्यों को लेकर अपने सख्त रुख के लिए जाने जाते हैं।

    राष्ट्रपति बनने से पहले जाति ने 2017 और 2021 के चुनावों में भी किस्मत आजमाई थी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। हालांकि तीसरे प्रयास में उन्होंने जीत हासिल की। पिछले साल दिसंबर में हुए रनऑफ चुनाव में उन्होंने वामपंथी उम्मीदवार जीननेट जारा को हराकर राष्ट्रपति पद पर कब्जा किया और अब चिली के नए राष्ट्रपति के रूप में देश की कमान संभाल ली है।

  • लंबी जंग के लिए तैयार ईरान, कहा- टकराव बढ़ा तो हिल सकती है वैश्विक अर्थव्यवस्था

    लंबी जंग के लिए तैयार ईरान, कहा- टकराव बढ़ा तो हिल सकती है वैश्विक अर्थव्यवस्था

    तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वह लंबी अवधि तक चलने वाले युद्ध के लिए तैयार है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर संघर्ष जारी रहा तो इसका असर पूरी दुनिया की आर्थिक व्यवस्था पर पड़ेगा और वैश्विक बाजारों में बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
    यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान ने दो वाणिज्यिक जहाजों पर गोलीबारी की और अमेरिका या उसके सहयोगियों से जुड़े जहाजों को चेतावनी जारी की है। साथ ही ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है और ईरान में अब अमेरिकी सेना के लिए निशाना बनाने योग्य बहुत कम लक्ष्य बचे हैं।

    तेल बाजार में उथल-पुथल

    दरअसल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत के बाद क्षेत्र में संघर्ष तेज हो गया था। इसके बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है।

    कीमतों को काबू में रखने के लिए International Energy Agency (IEA) ने सदस्य देशों के साथ मिलकर अपने भंडार से 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने का फैसला किया है। इसे अब तक की सबसे बड़ी रणनीतिक तेल आपूर्ति मानी जा रही है।

    जहाजों पर हमले और कंपनियों की चिंता

    संघर्ष के 12वें दिन ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps ने उन आर्थिक संस्थानों और बैंकों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है, जिन्हें वह अमेरिका और इजरायल से जुड़ा मानता है। इसके बाद कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने Dubai से अपने कर्मचारियों को निकालना शुरू कर दिया है।

    ईरान का दावा है कि उसने लाइबेरिया के झंडे वाले कंटेनर जहाज “एक्सप्रेस रोम” और थाई मालवाहक पोत “मयूरी नारी” पर हमला किया, क्योंकि वे चेतावनी के बावजूद Strait of Hormuz में दाखिल हुए थे।

    Royal Navy of Oman ने जहाज से 20 चालक दल के सदस्यों को बचा लिया, जबकि तीन लोगों की तलाश जारी है।

    वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा खतरा

    विश्लेषकों का कहना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है तो इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। इस समुद्री मार्ग से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी का परिवहन होता है, साथ ही वैश्विक उर्वरक आपूर्ति का भी बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

    फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने जी-7 देशों से अपील की है कि जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही जल्द बहाल कराने के लिए कदम उठाए जाएं। वहीं United Nations ने सभी पक्षों से मानवीय सहायता सामग्री के आवागमन की अनुमति देने का आग्रह किया है।

    खाड़ी क्षेत्र में हमले जारी

    इस बीच Dubai सरकार ने बताया कि दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास दो ड्रोन गिरने से चार लोग घायल हो गए।

    वहीं Salalah Port पर हुए ड्रोन हमले में ईंधन टैंकों को निशाना बनाया गया, जिससे लाखों लीटर तेल में आग लग गई। हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

    दूसरी ओर इजरायल ने ईरान और लेबनान में Hezbollah के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर नए हमले शुरू करने का दावा किया है। Beirut में एक बहुमंजिला आवासीय इमारत पर हवाई हमले से इमारत को भारी नुकसान पहुंचा और आसपास खड़ी कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं।

    ईरान में सुरक्षा अलर्ट

    ईरान के राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख Ahmad Reza Radan ने कहा है कि सुरक्षा बल पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी विरोध प्रदर्शन को दुश्मन की गतिविधि माना जाएगा। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अमेरिका और इजरायल के हमलों में अब तक 1200 से अधिक लोगों की मौत और 10 हजार से ज्यादा नागरिकों के घायल होने की जानकारी सामने आई है, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

  • US हमले के बाद मोजतबा खामेनेई की हालत पर सस्पेंस, ट्रंप का दावा- जिंदा हैं, लेकिन बुरी तरह घायल

    US हमले के बाद मोजतबा खामेनेई की हालत पर सस्पेंस, ट्रंप का दावा- जिंदा हैं, लेकिन बुरी तरह घायल



    नई दिल्ली। ईरान में चल रहे युद्ध और सत्ता परिवर्तन के बीच नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अटकलें तेज हो गई हैं। अमेरिका ने दावा किया है कि खामेनेई भी उस हमले में घायल हुए हैं जिसमें ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया था। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि मोजतबा खामेनेई संभवतः जीवित हैं, लेकिन गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं।

    फॉक्स न्यूज रेडियो के ब्रायन किलमीड शो को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने पहली बार मोजतबा खामेनेई की स्थिति पर टिप्पणी की। उनसे जब पूछा गया कि क्या नया ईरानी नेता जीवित है, तो ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि वह शायद जिंदा हैं।” हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह घायल हो सकते हैं, लेकिन किसी न किसी रूप में जीवित हैं।

    ब्रिटेन के अखबार द सन की रिपोर्ट में मोजतबा की हालत को लेकर और भी गंभीर दावे किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मोजतबा खामेनेई फिलहाल कोमा में हैं। हमले में उनका कम से कम एक पैर कट गया है और उनके पेट या लीवर को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है। बताया गया है कि तेहरान के सीना यूनिवर्सिटी अस्पताल में कड़ी सुरक्षा के बीच उनका इलाज चल रहा है।

    इस बीच मोजतबा खामेनेई की ओर से ईरानी सरकारी टेलीविजन पर एक बयान प्रसारित किया गया। हालांकि यह बयान उन्होंने खुद नहीं पढ़ा, बल्कि एक एंकर ने इसे पढ़कर सुनाया। बयान में अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा गया है कि क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को तुरंत बंद किया जाए, अन्यथा उन पर हमले किए जाएंगे।

    बयान में यह भी कहा गया कि ईरान इस ‘थोपे गए युद्ध’ के लिए दुश्मनों से हर्जाना वसूलेगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो ईरान उनकी संपत्तियों को जब्त करने या बराबर मूल्य की संपत्ति को नष्ट करने की कार्रवाई करेगा।

  • Iran-US-Israel War: ईरान ने भारत को कहा “शुक्रिया”, मानवीय मदद के लिए सराहा

    Iran-US-Israel War: ईरान ने भारत को कहा “शुक्रिया”, मानवीय मदद के लिए सराहा


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और संभावित संघर्ष के बीच भारत को कूटनीतिक मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण सराहना मिली है। ईरान ने खुलकर भारत का धन्यवाद किया। यह घटना 20 फरवरी 2026 को शुरू हुई जब ईरानी नौसेना के युद्धपोत IRIS Lavan को तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और उसे तत्काल मदद की जरूरत थी।

    भारत ने तुरंत दिया मानवीय सहयोग
    ईरानी युद्धपोत ने भारत से कोच्चि बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति मांगी। भारत ने बिना किसी देरी के इस मानवीय अनुरोध को स्वीकार कर लिया। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में बताया कि ईरान ने अपने जहाजों को भारतीय बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति 20 फरवरी को मांगी थी, जिसे 1 मार्च 2026 को मंजूरी दे दी गई। इसके बाद 4 मार्च 2026 को IRIS Lavan कोच्चि पोर्ट पर पहुंचा।

    जहाज का क्रू फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में सुरक्षित रूप से मौजूद है। भारत ने यह स्पष्ट किया कि यह कदम केवल मानवीय और दोस्ताना सहयोग के तहत किया गया है।

    ईरान ने जताया आभार
    ईरानी अधिकारियों ने भारत के इस कदम को दोस्ताना और मानवीय सहयोग बताते हुए आभार व्यक्त किया। यह कदम ऐसे समय में आया जब मिडिल ईस्ट में संघर्ष और तनाव का माहौल लगातार बढ़ रहा था, खासकर अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के विवाद के चलते।

    भारत की कूटनीतिक नीति
    भारत ने साफ किया है कि वह मौजूदा हालात में शांति, बातचीत और कूटनीति के जरिए तनाव को कम करने का पक्षधर है। इस कदम से यह संदेश भी गया कि भारत वैश्विक मानवीय मूल्यों और सुरक्षा का समर्थन करता है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय विवादों में सीधा भागीदारी से बचता है।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव
    अमेरिका ने हाल ही में ईरान के एक युद्धपोत को समुद्र में निशाना बनाया था। इसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया था। ऐसे समय में भारत की मदद ने ईरान के जहाज और क्रू की सुरक्षा सुनिश्चित की। यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कूटनीतिक संवेदनशीलता और तटस्थ नीति को उजागर करती है।

    कोच्चि पोर्ट का महत्व
    कोच्चि बंदरगाह इस प्रकार के मानवीय और तकनीकी सहयोग के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। भारतीय नौसेना और पोर्ट अथॉरिटीज़ ने जहाज और उसके क्रू के लिए सभी सुविधाएं मुहैया कराई। यह कदम भारत की समुद्री सुरक्षा और मानवीय सहायता क्षमताओं को भी दर्शाता है।

    ईरान का भारत को धन्यवाद कहना केवल एक मानवीय सहयोग की घटना नहीं है, बल्कि यह मिडिल ईस्ट में भारत की संतुलित कूटनीति और भरोसेमंद भूमिका को भी दर्शाता है। यह स्पष्ट करता है कि शांति और बातचीत के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय विवादों को हल करना भारत की प्राथमिकता है।

  • पानी के नीचे छिपी ईरान की ग़दीर मिनी सबमरीन: अमेरिका के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

    पानी के नीचे छिपी ईरान की ग़दीर मिनी सबमरीन: अमेरिका के लिए क्यों बढ़ी चिंता?


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अपनी नौसेना ताकत को और मजबूत करते हुए दो नई मिनी पनडुब्बियां अपने बेड़े में शामिल की हैं। ये अत्याधुनिक ग़दीर क्लास पनडुब्बी डिवीजन की पनडुब्बियां हैं, जिन्हें विशेष रूप से समुद्री क्षेत्रों में गुप्त अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है।

    इन पनडुब्बियों का उद्घाटन श्रीनगर रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बंदरगाह बंदर अब्बास में किया गया, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लास से अहम जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य के मुहाने पर है।पर स्थित है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग एक तिहाई समुद्री तेल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में ईरान की सैन्य सक्रियता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

    ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक इन मिनी पनडुब्बियों में अत्याधुनिक सोनार इवेडिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो इन्हें दुश्मन के सोनार और निगरानी उपकरणों से बचाने में सक्षम बनाती है। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये पानी की सतह के नीचे से ही मिसाइल दाग सकती हैं। इसके अलावा ये टॉरपीडो लॉन्च करने और समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता भी रखती हैं।

    इन मिजेट पनडुब्बियों का वजन करीब 150 मीट्रिक टन से कम होता है और इनमें लगभग नौ सदस्यों का चालक दल काम करता है। इन्हें विशेष रूप से अरब की खाड़ी जैसे उथले पानी वाले क्षेत्रों में संचालन के लिए तैयार किया गया है। छोटे आकार और गुप्त संचालन की क्षमता के कारण ये दुश्मन के लिए आसानी से पकड़ में नहीं आतीं और अचानक हमला करने में सक्षम मानी जाती हैं।

    ईरानी नौसेना के अधिकारियों के अनुसार यह उपलब्धि देश के स्वदेशी रक्षा कार्यक्रम की सफलता को दर्शाती है। उनका दावा है कि ईरान 1990 के दशक से अपने रक्षा उपकरण जैसे टैंक, मिसाइल और लड़ाकू विमानों का निर्माण स्वयं कर रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्यके आसपास ईरान की बढ़ती सैन्य गतिविधियां वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री सुरक्षा पर असर डाल सकती हैं। यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उछाल आ सकता है।

    इस स्थिति का असर भारत समेत कई एशियाई देशों पर भी पड़ सकता है। तेल की कीमतों में वृद्धि से परिवहन, खाद्य आपूर्ति और उर्वरकों की लागत बढ़ सकती है, जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है। विश्लेषकों के मुताबिक ईरान की ये नई पनडुब्बियां क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं और आने वाले समय में मध्य पूर्व के सुरक्षा समीकरण को और जटिल बना सकती हैं।

  • ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच भारत-ईरान बातचीत: जहाजों की अनुमति पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं, ऊर्जा और सुरक्षा प्रमुख मुद्दे

    ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच भारत-ईरान बातचीत: जहाजों की अनुमति पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं, ऊर्जा और सुरक्षा प्रमुख मुद्दे

    नई दिल्ली। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का आज 13वां दिन है। मध्य-पूर्व में युद्ध और तनाव के बीच भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों ने पिछले कुछ दिनों में तीन बार बातचीत की है। यह जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी।

    जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान ने भारत जाने वाले जहाजों को अनुमति दी है, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल इस विषय पर अधिक जानकारी देना जल्दबाजी होगी। हाल की बातचीत में समुद्री शिपिंग की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

    विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत ने ईरान के दिवंगत नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को औपचारिक श्रद्धांजलि दी थी। विदेश सचिव ने 5 मार्च को ईरानी दूतावास में जाकर शोक-पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। मंत्रालय ने कहा कि यह औपचारिकता पहले दिन पूरी कर दी गई और बिना तथ्यात्मक जानकारी के टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

    उधर, रूस ने अमेरिका और इजराइल से ईरान पर हमले रोकने और बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने कहा कि पूरे क्षेत्र में मानवीय स्थिति बेहद कठिन होती जा रही है और लगातार बढ़ता तनाव गंभीर चिंता का विषय है। रूस की अपील है कि दोनों पक्ष वार्ता के रास्ते पर लौटें और संघर्ष को रोकें।

    संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी UNHCR ने भी चेताया है कि इस संघर्ष के कारण अब तक करीब 32 लाख लोग ईरान में विस्थापित हो चुके हैं। यह आंकड़ा देशभर में शुरुआती आकलन पर आधारित है। एजेंसी ने कहा कि अगर संघर्ष जारी रहा, तो विस्थापित लोगों की संख्या और बढ़ सकती है, जिससे मानवीय संकट और गहरा जाएगा।

    ईरान ने भी स्पष्ट चेतावनी दी है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने कहा कि यदि ईरान के किसी भी द्वीप पर हमला किया गया, तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी में हमलावरों के खिलाफ पूरी ताकत से जवाब देने में किसी प्रकार की सीमा नहीं मानी जाएगी।

    इस बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने GCC (गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल) के प्रस्ताव का समर्थन किया। इस प्रस्ताव का मकसद खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और हमलों को रोकना, जहाजों की आवाजाही सुरक्षित बनाना और ऊर्जा सप्लाई में बाधा से बचाना है। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि ईरान के हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं और इससे वैश्विक शांति को गंभीर खतरा है। प्रस्ताव को 135 देशों ने समर्थन दिया। सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों में से 13 ने पक्ष में वोट किया, जबकि रूस और चीन ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत लगातार ईरान के साथ संपर्क बनाए हुए है। युद्ध का असर केवल एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर के कई देशों और उनके नागरिकों पर इसका प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राथमिकता है कि भारतीय नागरिकों और ऊर्जा संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

    जायसवाल ने बताया कि बातचीत के दौरान समुद्री शिपिंग सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति जैसे प्रमुख मुद्दों पर फोकस किया गया। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ कि ईरान ने भारतीय जहाजों को आवाजाही की अनुमति दी है या नहीं। मंत्रालय ने कहा कि इस विषय पर जल्दबाजी में कोई घोषणा करना सही नहीं होगा।

    विदेश मंत्रालय का यह भी कहना है कि युद्ध और तनाव के बीच सभी पक्षों को शांति बनाए रखने और कूटनीतिक बातचीत के रास्ते अपनाने की आवश्यकता है। भारत ने इस संघर्ष के दौरान हर कदम पर सावधानी और कूटनीतिक संतुलन बनाए रखा है और आगे भी स्थिति पर करीबी नजर रखेगा।

  • अमेरिका भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में, 16 ट्रेडिंग पार्टनर्स की सेक्शन 301 जांच शुरू

    अमेरिका भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में, 16 ट्रेडिंग पार्टनर्स की सेक्शन 301 जांच शुरू


    नई दिल्ली। अमेरिकी ट्रम्प प्रशासन ने भारत और चीन सहित 16 प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ नई जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई ‘सेक्शन 301’ के तहत की जा रही है, जो अमेरिकी ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 का हिस्सा है और अमेरिका को उन देशों पर एकतरफा टैरिफ या प्रतिबंध लगाने की शक्ति देती है, जो अमेरिकी कंपनियों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नुकसान पहुंचा रहे हों।

    इस कदम के पीछे पिछली घटनाओं का संदर्भ है। फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार दिया था। इसके बाद ट्रम्प प्रशासन ने 150 दिनों के लिए 10% का अस्थायी टैरिफ लागू किया। अब नई जांच के माध्यम से प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि टैरिफ का दबाव जारी रहे और ट्रेडिंग पार्टनर्स को बातचीत की मेज पर लाया जा सके।

    यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने बताया कि यह जांच भारत, चीन, यूरोपीय संघ (EU), जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, वियतनाम, ताइवान, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे पर केंद्रित है। अगर जांच में इन देशों की नीतियां अनुचित व्यापार व्यवहार के तहत पाई गईं, तो उन पर भारी टैरिफ लगाया जा सकता है।

    जांच का मुख्य फोकस उन देशों पर है, जो जरूरत से अधिक उत्पादन कर अमेरिकी बाजार में सस्ते दाम पर माल बेचते हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान होता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी देश में जूतों की फैक्ट्री सालाना 100 जूते बना सकती है, लेकिन घरेलू मांग केवल 20 जूते की है, तो शेष 80 जूते सस्ते दाम पर अमेरिका में भेज दिए जाते हैं। अमेरिका इसे मार्केट डंपिंग और अनुचित व्यापार व्यवहार मानता है।

    भारत के लिए यह चिंता का विषय है। 2024 में भारत का अमेरिका के साथ गुड्स ट्रेड सरप्लस 58,216 मिलियन डॉलर था, जो 2025 में घटकर 45,801 मिलियन डॉलर रह गया। इस कमी के बावजूद भारत इस जांच की सूची में शामिल है। यदि भारत की नीतियां ‘अनुचित’ पाई गईं, तो भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ या प्रतिबंध लग सकते हैं।

    इसके अलावा, अमेरिका फोर्स्ड लेबर पर भी अलग जांच कर रहा है। इसका उद्देश्य है बंधुआ मजदूरी से बने सामानों के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना। पहले ही उइगर फोर्स्ड लेबर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले सोलर पैनल और अन्य सामानों पर कार्रवाई की जा चुकी है। अब यह कार्रवाई अन्य देशों पर भी लागू हो सकती है।

    जांच की टाइमलाइन भी निर्धारित कर दी गई है। 15 अप्रैल तक आम जनता और कंपनियों से सुझाव मांगे गए हैं, इसके बाद 5 मई के आसपास सार्वजनिक सुनवाई होगी। लक्ष्य है कि जुलाई में अस्थायी टैरिफ खत्म होने से पहले नए टैरिफ प्रस्ताव और जांच के नतीजे तैयार हो जाएं।

    जेमिसन ग्रीर ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रम्प टैरिफ लगाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार को बचाना है। साथ ही ट्रेडिंग पार्टनर्स को चेतावनी दी गई है कि वे मौजूदा व्यापार समझौतों का पालन करें, अन्यथा भारी टैक्स या प्रतिबंध झेलना पड़ेगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस जांच का असर टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग गुड्स और कृषि उत्पादों की कीमतों पर पड़ेगा। व्यवसायियों, निर्यातकों और आयातकों को अमेरिकी पॉलिसी पर लगातार नजर रखनी होगी, क्योंकि जुलाई के बाद अमेरिकी बाजार में कीमतों और टैरिफ में बड़े बदलाव संभव हैं।

    यह कदम व्यापार के वैश्विक परिदृश्य में भारत और अन्य देशों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी है। यदि व्यापारिक नीतियों में सुधार नहीं हुआ, तो अमेरिकी टैरिफ की मार व्यापार घाटे और निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति पर गहरा असर डाल सकती है।

  • ईरान के हमलों के बीच कतर से सीमित उड़ानें शुरू, भारत के लिए भी विशेष विमान रवाना

    ईरान के हमलों के बीच कतर से सीमित उड़ानें शुरू, भारत के लिए भी विशेष विमान रवाना


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में ईरान की ओर से जारी हमलों के बीच नागरिक उड़ानों पर भारी असर पड़ा है। दूसरे देशों के नागरिक इस तनावपूर्ण माहौल में फंसे हुए हैं। इसी बीच कतार वायुमार्ग ने 12 मार्च से दोहा से सीमित उड़ानों का संचालन शुरू करने की घोषणा की है। एयरलाइन ने बताया कि 12 से 17 मार्च तक दोहा के लिए और दोहा से सीमित विमान चलाए जाएंगे।

    एयरलाइन के अपडेटेड शेड्यूल के अनुसार 12 मार्च को हमाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कुल 29 विमान उड़ान भरेंगे जिनमें 15 प्रस्थान और 14 आगमन होंगे। दोहा से उड़ानें मुंबई नई दिल्ली कोच्चि इस्लामाबाद न्यूयॉर्क फ्रैंकफर्ट बीजिंग लंदन काहिरा और जोहान्सबर्ग के लिए होंगी। वहीं दोहा आने वाली उड़ानों में सोल जेद्दा नई दिल्ली हांगकांग मस्कट मेलबर्न डलास और बैंकॉक शामिल हैं।

    भारत के लिए उड़ानों का विशेष शेड्यूल भी तैयार किया गया है। 13 मार्च को दोहा से कोच्चि के लिए उड़ान होगी। 14 मार्च को मुंबई 15 मार्च को नई दिल्ली और 16 मार्च को कोच्चि और मुंबई के लिए उड़ानें संचालित होंगी। वहीं कोच्चि से दोहा 14 मार्च को मुंबई से 15 मार्च और नई दिल्ली से 16 मार्च को विमान रवाना होंगे। 17 मार्च को दोहा से कोच्चि और मुंबई के लिए उड़ानें जारी रहेंगी।

    कतर एयरवेज ने कहा कि कतर नागरिक उड्डयन मंत्रालय से अस्थायी प्राधिकरण मिलने के बाद लिमिटेड ऑपरेटिंग कॉरिडोर का इस्तेमाल कर विमान संचालित किए जा रहे हैं। एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि ये उड़ानें नियमित कमर्शियल ऑपरेशन की वापसी नहीं हैं। इन अस्थायी उड़ानों का उद्देश्य प्रभावित यात्रियों को उनके परिवार और प्रियजनों से मिलाना है। कतर एयरस्पेस की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही नियमित संचालन फिर से शुरू होगा।

    कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने कैबिनेट मीटिंग में कहा कि अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के संघर्ष के दौरान देश की तैयारियों और क्षमता को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने नागरिक सुरक्षा और एयरलाइन संचालन की स्थिरता पर जोर दिया।

    इस बीच बहरीन के गृह मंत्रालय ने जानकारी दी कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के साथ जासूसी के आरोप में चार बहरीन नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें उम्र 22 से 36 वर्ष के लोग शामिल हैं जबकि एक 25 वर्षीय व्यक्ति विदेश में फरार है। मंत्रालय के अनुसार आरोपियों ने हाई रिजॉल्यूशन कैमरा और एन्क्रिप्टेड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर महत्वपूर्ण स्थानों की तस्वीरें ली और उन्हें IRGC को भेजा। सुरक्षा और यात्री सुविधा को ध्यान में रखते हुए कतर एयरवेज का यह कदम संकटग्रस्त क्षेत्र में फंसे यात्रियों के लिए राहत का संकेत देता है खासकर भारत समेत अन्य देशों के नागरिकों के लिए।

  • मध्य पूर्व संघर्ष में 1100 से ज्यादा बच्चे बने निशाना, यूनिसेफ ने कूटनीति और बातचीत से हल निकालने की अपील की

    मध्य पूर्व संघर्ष में 1100 से ज्यादा बच्चे बने निशाना, यूनिसेफ ने कूटनीति और बातचीत से हल निकालने की अपील की


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में ईरान की ओर से जारी हमलों के बीच संयुक्त राष्ट्र के बाल आपातकालीन कोष ने चिंताजनक आंकड़े साझा किए हैं। 28 फरवरी से अब तक इस क्षेत्र में 1100 से अधिक बच्चे या तो घायल हो गए हैं या उनकी मौत हो चुकी है। इसमें ईरान में 200, लेबनान में 91, इजरायल में चार और कुवैत में एक बच्चा शामिल है। यूनिसेफ ने चेताया है कि जैसे-जैसे संघर्ष बढ़ेगा, यह संख्या और बढ़ सकती है।

    यूनिसेफ ने बच्चों को निशाना बनाने और उनकी निर्भरता पर हमलों की कड़ी निंदा की। संगठन ने बताया कि पढ़ाई में बड़े पैमाने पर बाधा उत्पन्न होने के कारण लाखों बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, जबकि लगातार बमबारी और हमलों से लाखों बच्चे बेघर हो चुके हैं। सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर, जिसमें हॉस्पिटल, स्कूल और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं, को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है या नष्ट कर दिया गया है। बच्चों को मारना या उनके जीवन और शिक्षा के आधारभूत साधनों को नुकसान पहुंचाना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।

    यूनिसेफ ने कहा कि हथियारों से होने वाली लड़ाई में बच्चों के खिलाफ गंभीर उल्लंघन अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन माना जा सकता है। संगठन ने सभी संघर्षरत पक्षों से अपील की है कि वे लड़ाई के तरीके और साधनों का चुनाव करते समय बच्चों और आम नागरिकों को न्यूनतम जोखिम में रखें। खासकर ऐसे विस्फोटक हथियारों का इस्तेमाल करने से बचें जिनका असर बच्चों पर अधिक होता है।

    यूनिसेफ ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के नेतृत्व में सभी पक्षों से संघर्ष रोकने और कूटनीतिक बातचीत में शामिल होने की पुरजोर अपील की। संगठन ने चेताया कि इस इलाके के लगभग 20 करोड़ बच्चे दुनिया से तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।

    यूनिसेफ का यह बयान वैश्विक समुदाय को याद दिलाता है कि युद्ध केवल सैन्य या राजनीतिक संकट नहीं है, बल्कि इसमें सबसे संवेदनशील वर्ग बच्चे भी सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। संगठन का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और उनके बुनियादी अधिकारों की रक्षा के बिना इस संकट का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

    संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों, अस्पतालों और अन्य बुनियादी सेवाओं को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। यूनिसेफ ने सभी पक्षों से कहा कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानवता की दिशा में काम करना चाहिए, ताकि बच्चों और आम नागरिकों के जीवन को बचाया जा सके। यूनिसेफ का यह आंकड़ा और चेतावनी वैश्विक समुदाय के लिए गंभीर संदेश है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष में मानवीय राहत और कूटनीतिक प्रयासों को सबसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए।