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  • ईरान ने अमेरिका को दिया बड़ा झटका, कतर में मिसाइल चेतावनी रडार सिस्टम को पहुंचाया नुकसान

    ईरान ने अमेरिका को दिया बड़ा झटका, कतर में मिसाइल चेतावनी रडार सिस्टम को पहुंचाया नुकसान



    नई दिल्ली। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष और ज्यादा गंभीर होता जा रहा है। हालात अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं जहां दोनों पक्षों की ओर से लगातार सैन्य कार्रवाई हो रही है। एक तरफ ईरान खाड़ी क्षेत्र में हमले कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने हिंद महासागर में एक ईरानी पोत को डुबो दिया, जिसमें 80 से अधिक लोगों की मौत होने की खबर है। इसी बीच खबर सामने आई है कि ईरान के हमले में कतर में मौजूद अमेरिका की एक अहम मिसाइल चेतावनी प्रणाली को नुकसान पहुंचा है, जिसे इस क्षेत्र में अमेरिकी सुरक्षा तंत्र की “आंख” माना जाता था।

    1.1 अरब डॉलर के रडार सिस्टम को नुकसान

    मिली जानकारी के अनुसार लगभग 1.1 अरब डॉलर की लागत से तैयार यह रडार सिस्टम अमेरिकी सेना के मिसाइल रक्षा नेटवर्क का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा था। इस पर हुए हमले से क्षेत्र में तैनात मिसाइल रक्षा तंत्र को बड़ा झटका लगा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे संभावित मिसाइल हमलों का समय रहते पता लगाने की क्षमता कमजोर हो सकती है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

    सैटेलाइट तस्वीरों से हुई नुकसान की पुष्टि

    अमेरिकी सैन्य ढांचे को हुए नुकसान की पुष्टि सैटेलाइट तस्वीरों से भी हुई है। प्लैनेट लैब्स द्वारा जारी इमेज में अमेरिकी स्पेस फोर्स के AN/FPS-132 (ब्लॉक 5) बैलिस्टिक मिसाइल अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम के आसपास क्षति और आग बुझाने की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। यह रडार सिस्टम मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना द्वारा संचालित सबसे बड़े मिसाइल चेतावनी रडारों में से एक माना जाता है।

    ईरान ने कैसे किया हमला

    ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस हमले को सटीक मिसाइल स्ट्राइक बताया है। हालांकि कुछ सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला कम लागत वाले हमलावर ड्रोन से भी किया गया हो सकता है, जो संभवतः शाहेद श्रेणी का था। रिपोर्ट्स के मुताबिक मिसाइलों और ड्रोन के संयुक्त बड़े हमले के दौरान यह ड्रोन रक्षा तंत्र को भेदने में सफल रहा और रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचा गया।

    क्यों महत्वपूर्ण है यह रडार सिस्टम

    इस रडार सिस्टम को अमेरिकी रक्षा कंपनी रेथियॉन ने अपग्रेडेड अर्ली वार्निंग रडार (UEWR) कार्यक्रम के तहत विकसित किया था। यह प्रणाली लगभग 5000 किलोमीटर तक की दूरी पर बैलिस्टिक मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों को ट्रैक करने में सक्षम है। साथ ही यह पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में मिसाइल लॉन्च का शुरुआती अलर्ट देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कतर में इसकी लोकेशन रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जाती है क्योंकि यहां से यह रडार ईरान, इराक, सीरिया, तुर्किये, मध्य एशिया के कुछ हिस्सों और हिंद महासागर तक की गतिविधियों पर नजर रख सकता है।

    रणनीतिक असर की आशंका

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले का असर केवल एक सैन्य ठिकाने को हुए नुकसान तक सीमित नहीं है। अमेरिका के पूर्व सैन्य अधिकारी और पेंटागन के पूर्व सलाहकार कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि इस हमले में अमेरिका की “आंखें” निशाना बनी हैं। वहीं भू-राजनीति विशेषज्ञ ब्रायन एलन के अनुसार इस घटना के दूरगामी रणनीतिक प्रभाव भी हो सकते हैं।

    सिस्टम को बदलना आसान नहीं

    सैन्य विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका के पास सैटेलाइट और अन्य रडार सहित वैश्विक सेंसर नेटवर्क मौजूद है, लेकिन AN/FPS-132 जैसे बड़े और स्थायी रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचने से क्षेत्रीय निगरानी में अंतर आ सकता है। ऐसे बड़े सिस्टम को जल्दी बदलना या दोबारा स्थापित करना आसान नहीं होता। इसलिए कुछ समय के लिए मिसाइल निगरानी और ट्रैकिंग क्षमता कमजोर पड़ सकती है। यह स्थिति इसलिए भी संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि इस क्षेत्र में अमेरिका के कई अहम सैन्य ठिकाने मौजूद हैं और यहीं से दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े प्रमुख समुद्री मार्ग भी गुजरते हैं।

  • कनाडा में पंजाबी यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल की बेरहमी से हत्या, मां ने खालिस्तानियों पर लगाया आरोप, विवादित टिप्पणियां बनीं वजह

    कनाडा में पंजाबी यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल की बेरहमी से हत्या, मां ने खालिस्तानियों पर लगाया आरोप, विवादित टिप्पणियां बनीं वजह



    नई दिल्ली। कनाडा में पंजाबी मूल की यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल (45) की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। घटना मंगलवार रात साढ़े 9 बजे विंडसर इलाके में हुई, जब हमलावर उसके घर में घुसे और उसे घर के भीतर ही कई बार चाकू मारे। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। नैन्सी का जन्म हरियाणा में हुआ था और बाद में उनका परिवार लुधियाना शिफ्ट हो गया। उनकी मां जालंधर में रहती हैं।

    नैन्सी ग्रेवाल अपने यूट्यूब वीडियो के लिए विवादित रही हैं। वह खुलकर खालिस्तानियों, अकाल तख्त जत्थेदार और डेरा ब्यास मुखी की आलोचना करती थीं। हत्या से पहले नैन्सी ने इंस्टाग्राम पर अकाल तख्त जत्थेदार और डेरे के मुखी पर विवादित टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने धार्मिक नेताओं की गतिविधियों पर सवाल उठाए थे।

    कनाडा पुलिस ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद रात में टीम तुरंत मौके पर पहुंची। अस्पताल में नैन्सी ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने नैन्सी के घर और आसपास का क्षेत्र सील कर सबूत जुटाए। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और किसी के पास जानकारी होने पर डिटेक्टिव सार्जेंट जेमी नेस्टर से संपर्क करने को कहा है।

    नैन्सी की मां छिंदरपाल कौर ने कहा कि बेटी पहले भी कई बार धमकी और हमले का शिकार हो चुकी थी। पिछले हमले में घर में आग लगाई गई थी, जिससे नैन्सी बच गई थी। इस बार हमलावरों ने उसकी रेकी कर बेरहमी से कत्ल किया। मां ने आरोप लगाया कि इसमें 3-4 लोग शामिल थे और उन्होंने उनके नाम नोट कर लिए हैं। छिंदरपाल ने कनाडा पुलिस से अपील की है कि आरोपी को गिरफ्तार कर न्याय दिलाया जाए।

    नैन्सी पेशे से नर्स थीं और दो कंपनियों में काम करती थीं। वह गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करती थीं। उनके परिवार ने बताया कि बेटी ने हमेशा सच के रास्ते पर चलने की सीख दी।

    पुलिस के अनुसार हत्या की घटना की गंभीर जांच की जा रही है। आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी के लिए सीसीटीवी फुटेज और आसपास के सबूत जुटाए जा रहे हैं। नैन्सी ग्रेवाल के परिवार ने न्याय की उम्मीद जताई है और बताया कि उनका यह कट्टर विरोध और निर्भीक व्यक्तित्व कई लोगों को परेशान करता था।

    नैन्सी की हत्या ने कनाडा और पंजाब की समाज में सनसनी मचा दी है। सोशल मीडिया पर उनके समर्थक और भारतीय समुदाय ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और जिम्मेदारों को कानून के तहत सजा दिलाने की मांग की है।

  • जेन जेड आंदोलन के छह महीने बाद नेपाल में संसदीय चुनाव के लिए हो रहा मतदान

    जेन जेड आंदोलन के छह महीने बाद नेपाल में संसदीय चुनाव के लिए हो रहा मतदान



    काठमांडू । पड़ोसी देश नेपाल में जेन जेड आंदोलन के करीब छह महीने बाद गुरुवार को संसदीय चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। संघीय संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा की 275 सीटों के लिए वोटिंग सुबह सात बजे (भारतीय समयानुसार 6:45 बजे) शुरू हुई। मतदाता शाम पांच बजे (भारतीय समयानुसार 4:45 बजे) तक अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।

    नेताओं ने डाला वोट, बेहतर भविष्य की उम्मीद
    पुष्प कमल दहल ने भरतपुर महानगर में चितवन जिले के शांतिपुर वार्ड नंबर-14 स्थित नेपाल पुलिस स्कूल मतदान केंद्र पर वोट डाला। मतदान के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चुनावों के बाद देश खुशहाली की दिशा में आगे बढ़ेगा और मतदाता ऐसे प्रतिनिधियों को चुनेंगे जो राष्ट्र और नागरिकों के हितों को प्राथमिकता देंगे।

    रवि लामिछाने ने भी किया मतदान
    रवि लामिछाने ने काठमांडू के चुच्चीपाटी स्थित काठमांडू उपत्यका खानेपानी लिमिटेड (केयूकेएल) मतदान केंद्र पर अपना वोट डाला। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह चुनाव देश में राजनीतिक समाधान का रास्ता खोलेगा। लामिछाने चितवन निर्वाचन क्षेत्र-2 से प्रतिनिधि सभा का चुनाव लड़ रहे हैं। इस दौरान बालेंद्र शाह समेत कई अन्य नेताओं ने भी मतदान किया।

    जेन जेड आंदोलन के बाद हो रहा चुनाव
    स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मतदान प्रक्रिया सुबह सात बजे शुरू हुई। उल्लेखनीय है कि जेन जेड आंदोलन के कारण खड्ग प्रसाद शर्मा ओली की सरकार, जिसे नेपाली कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था, को इस्तीफा देना पड़ा था।

    मतदान केंद्रों पर विशेष व्यवस्थाएं
    नेपाल निर्वाचन आयोग के अनुसार मतदान केंद्रों पर पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की गई है। वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और पुरानी बीमारियों से पीड़ित मतदाताओं के लिए विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में चुनाव सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर का उपयोग किया गया है।

  • ईरान ने होर्मूज स्ट्रेट से सिर्फ चीनी जहाजों को दी इजाजत; भारत को नहीं, जानिए वजह

    ईरान ने होर्मूज स्ट्रेट से सिर्फ चीनी जहाजों को दी इजाजत; भारत को नहीं, जानिए वजह

    तेहरान। मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध और तनाव के बीच ईरान ने एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz से गुजरने की अनुमति केवल चीनी जहाजों को देने की घोषणा की है। इस फैसले को चीन के समर्थन के प्रति ईरान की कृतज्ञता के रूप में देखा जा रहा है।
    ईरानी अधिकारियों का कहना है कि युद्ध के दौरान China ने तेहरान का खुलकर समर्थन किया, इसलिए उसके तेल टैंकरों और जहाजों को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। वहीं अन्य देशों—खासकर पश्चिमी देशों और उनके सहयोगियों—के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने से रोका जा सकता है।

    भारत के लिए बड़ा झटका

    ईरान के इस फैसले से India को बड़ा झटका लग सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है और इनका अधिकांश परिवहन होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ही होता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% से अधिक हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।

    ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड का दावा

    ईरान की सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने दावा किया है कि इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका “पूर्ण नियंत्रण” है। ईरानी समाचार एजेंसी Fars News Agency के मुताबिक IRGC नौसेना के अधिकारी Mohammad Akbarzadeh ने कहा कि क्षेत्र में गुजरने वाले जहाजों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

    अमेरिका ने दी सुरक्षा की चेतावनी

    इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी नौसेना क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा के लिए तैनात की जाएगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि जहाजरानी कंपनियों को जोखिम बीमा उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो।

    बढ़ी वैश्विक चिंता

    तनाव के कारण तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार कुछ बीमा कंपनियों ने खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के लिए प्रीमियम बढ़ा दिए हैं। वहीं समुद्री डेटा कंपनी Lloyd’s List Intelligence के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में करीब 200 तेल टैंकर फंसे हुए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ता है तो इसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।

  • ईरान ने तुर्की की ओर दागी बैलिस्टिक मिसाइल, ईरानी राजदूत तलब

    ईरान ने तुर्की की ओर दागी बैलिस्टिक मिसाइल, ईरानी राजदूत तलब


    अंकारा। मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच तनाव और बढ़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक Iran ने बुधवार को Turkey की दिशा में एक बैलिस्टिक मिसाइल दाग दी। हालांकि NATO की एयर डिफेंस प्रणाली ने मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया। इस घटना के बाद तुर्की में हड़कंप मच गया और इसे युद्ध में नाटो की पहली प्रत्यक्ष एंट्री के रूप में देखा जा रहा है।

    नाटो की प्रवक्ता Allison Hart ने बयान जारी कर कहा कि संगठन तुर्की को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा करता है और अपने सभी सहयोगी देशों के साथ मजबूती से खड़ा है।

    इराक और सीरिया के एयरस्पेस से गुजरी मिसाइल

    तुर्की के रक्षा मंत्रालय के अनुसार ईरान की ओर से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल Iraq और Syria के हवाई क्षेत्र से गुजरते हुए तुर्की की ओर बढ़ रही थी। इससे पहले कि वह लक्ष्य तक पहुंचती, पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र में तैनात नाटो एयर डिफेंस सिस्टम ने उसे मार गिराया।

    तुर्की प्रेसिडेंसी के कम्युनिकेशन निदेशालय ने बताया कि इंटरसेप्टर का मलबा देश के दक्षिणी प्रांत Hatay Province में गिरा। इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

    रणनीतिक सैन्य ठिकानों के पास गिरा मलबा

    जिस इलाके में मिसाइल का मलबा गिरा, वह तुर्की के प्रमुख सैन्य अड्डे Incirlik Air Base से लगभग 60 मील दूर बताया जा रहा है। वहीं तुर्की के Kürecik क्षेत्र में नाटो का एक महत्वपूर्ण अर्ली-वॉर्निंग रडार सिस्टम भी मौजूद है, जो बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली का अहम हिस्सा माना जाता है।

    तुर्की ने ईरानी राजदूत को किया तलब

    घटना के बाद तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने अपने ईरानी समकक्ष Abbas Araghchi से बातचीत कर कड़ी आपत्ति जताई। इसके साथ ही तुर्की ने Iran के राजदूत को विदेश मंत्रालय में तलब कर घटना पर जवाब मांगा।

    तुर्की के अधिकारियों ने चेतावनी दी कि देश के खिलाफ किसी भी दुश्मनी भरे कदम का जवाब देने का अधिकार उनके पास सुरक्षित है।

    विश्लेषकों का मानना है कि अगर ऐसे हमले जारी रहे तो यह संघर्ष और ज्यादा देशों को अपनी चपेट में ले सकता है, जिससे पूरे मध्य पूर्व और यूरोप की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
  • ईरान की धरती पर नहीं उतरेंगे अमेरिकी सैनिक? जानिए वजह

    ईरान की धरती पर नहीं उतरेंगे अमेरिकी सैनिक? जानिए वजह


    वाशिंगटन। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए व्यापक हवाई हमलों के बाद मध्य पूर्व में युद्ध भड़क गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरानी जनता के लिए ‘आजादी’ बताया है। आसमान से बरसती मिसाइलों और भयानक बमबारी के बीच ट्रंप का ‘एंडगेम’ यानी अंतिम लक्ष्य बिल्कुल साफ हो चुका है- ईरान में पूरी तरह से सत्ता परिवर्तन। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के असली लक्ष्य को हासिल करना- बिना जमीनी सेना के लगभग असंभव है।

    इस संघर्ष ने अपने शुरुआती दिनों में ही पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। शनिवार तड़के हुए अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, कई शीर्ष अधिकारी और सैकड़ों नागरिक मारे गए हैं। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों, अमेरिकी ठिकानों और इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं। इराक स्थित ईरान-समर्थित गुटों और लेबनान के हिज्बुल्लाह ने भी युद्ध में प्रवेश कर लिया है। इसके साथ ही इजरायल द्वारा दक्षिणी लेबनान पर जमीनी हमले की योजना की भी खबरें हैं।
    क्या केवल हवाई हमलों से सत्ता परिवर्तन संभव है?

    राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी जनता से अपील करते हुए कहा है- जब हम अपना काम खत्म कर लेंगे, तो अपनी सरकार पर कब्ब्जा कर लेना। यह आपकी होगी। हालांकि, विशेषज्ञ इस रणनीति पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

    अल-जजीरा से बात करते हुए स्टिम्सन सेंटर थिंक टैंक के केली ग्रीको ने कहा कि जमीनी सेना के बिना इतना बड़ा राजनीतिक बदलाव लाना लगभग असंभव है। उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रंप हवाई हमलों की ताकत को लेकर कुछ ज्यादा ही मुग्ध हो गए हैं। सेंटर फॉर इंटरनेशनल पॉलिसी के मैथ्यू डस ने स्पष्ट किया कि इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जहां केवल हवाई हमलों से सत्ता परिवर्तन हुआ हो। उन्होंने 2011 के लीबिया युद्ध का उदाहरण दिया, जहां नाटो के हवाई हमलों के बावजूद मुअम्मर गद्दाफी को हटाने के लिए जमीनी स्तर पर विद्रोहियों को ही लड़ना पड़ा था।
    हालिया रॉयटर्स सर्वेक्षण के अनुसार, केवल 25% अमेरिकी इस युद्ध का समर्थन कर रहे हैं। इसकी तुलना में 2003 के इराक युद्ध को शुरुआत में लगभग 55% जनसमर्थन प्राप्त था। डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटल ने एक खुफिया ब्रीफिंग के बाद चिंता व्यक्त की है कि अमेरिका ईरान में जमीनी सेना उतारने की दिशा में बढ़ रहा है, जिससे अमेरिकी सैनिकों के लिए खतरा बहुत अधिक बढ़ जाएगा।
    ट्रंप का ‘मास्टरप्लान’: हवा और समंदर से तबाही

    ट्रंप प्रशासन की रणनीति इराक या अफगानिस्तान जैसी नहीं है, जहां लाखों सैनिक भेजकर कब्ज़ा किया गया था। ट्रंप का दांव है कि आसमान और समंदर से ही इतना भयानक प्रहार किया जाए कि ईरान का पूरा सिस्टम ताश के पत्तों की तरह ढह जाए। इस रणनीति का सबसे बड़ा उदाहरण ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत है।

    ट्रंप का मानना है कि नेतृत्व को खत्म करने से व्यवस्था अपने आप पंगु हो जाएगी। अमेरिका ईरान की मिसाइल क्षमता, उसकी नेवी और उसके परमाणु ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर रहा है ताकि ईरान के पास पलटवार की कोई ताकत ही न बचे।
    ‘बूट्स ऑन द ग्राउंड’ से परहेज क्यों?

    ट्रंप हमेशा से अमेरिका को दूसरे देशों के ‘अंतहीन युद्धों’ में फंसाने के खिलाफ रहे हैं। किसी देश में पैदल सेना भेजने का मतलब है अमेरिकी सैनिकों की लाशें वापस आना और खरबों डॉलर का खर्च। ट्रंप का ‘अमेरिका फर्स्ट’ का नारा इसके सख्त खिलाफ है।

    ट्रंप खुलेआम ईरानी जनता से कह रहे हैं कि वे इस मौके का फायदा उठाएं और खुद अपनी सरकार को उखाड़ फेंकें। ट्रंप को उम्मीद है कि भारी बमबारी और बदहाली से टूटकर ईरानी जनता खुद बगावत कर देगी और अमेरिका को सेना उतारने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
    ट्रंप प्रशासन के भीतर और बाहर अलग-अलग सुर

    इस युद्ध के उद्देश्यों को लेकर अमेरिकी नेताओं और प्रशासन के बयानों में काफी विरोधाभास देखने को मिल रहा है। विदेश मंत्री मार्क रूबियो ने कहा कि लक्ष्य ईरान के परमाणु और ड्रोन कार्यक्रमों तथा नौसेना को नष्ट करना है ताकि वह विदेशी हमलों से न बच सके।

    वहीं रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि यह कोई अंतहीन युद्ध नहीं होगा; हम स्पष्ट उद्देश्यों के साथ काम कर रहे हैं। डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने कहा, ‘यह एक अवैध युद्ध है जो झूठ पर आधारित है। ट्रंप प्रशासन के पास ईरान को लेकर कोई स्पष्ट योजना नहीं है।’

    विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने इस युद्ध की आवश्यकता और इसके सटीक लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से जनता के सामने नहीं रखा है। यह संघर्ष अब उस त्वरित सैन्य कार्रवाई से कहीं अधिक लंबा खिंचता दिख रहा है, जिसके लिए ट्रंप जाने जाते हैं, जैसे जनवरी में वेनेज़ुएला के निकोलस मादुरो का अपहरण या जून में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले।

  • थाईलैंड की अनोखी शादी : एक ही मंडप में दो दूल्हों संग दुल्हन ने रचाई शादी

    थाईलैंड की अनोखी शादी : एक ही मंडप में दो दूल्हों संग दुल्हन ने रचाई शादी


    बैंकॉक। शादी-ब्याह के इस सीजन में आपने कई तरह के विवाह समारोह देखे होंगे, लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसी शादी की तस्वीरें वायरल हो रही हैं जिसने लोगों को हैरान कर दिया है। इस अनोखी शादी में एक दुल्हन ने एक ही मंडप में दो दूल्हों के साथ विवाह रचा लिया।

    यह अनोखा मामला Thailand का बताया जा रहा है, जहां 37 वर्षीय महिला Duangduan Ketsaro ने दो ऑस्ट्रियाई पुरुषों से शादी की। बताया जाता है कि डुआंगडुआन पहले सिंगर और सॉन्गराइटर रह चुकी हैं। शादी का समारोह सादा लेकिन पारंपरिक तरीके से आयोजित किया गया, जिसमें परिवार और करीबी दोस्त मौजूद रहे। समारोह की तस्वीरें सामने आने के बाद यह शादी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

    पहले एक से प्यार, फिर दूसरे से भी बना रिश्ता

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डुआंगडुआन की मुलाकात सबसे पहले ऑस्ट्रिया के रिटायर्ड पुलिस अधिकारी Roman से थाईलैंड के मशहूर पर्यटन शहर Pattaya में हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच रिश्ता गहरा हुआ और वे करीब पांच साल तक साथ रहे।

    कुछ समय बाद उनकी मुलाकात Macky नाम के दूसरे ऑस्ट्रियाई युवक से हुई। दोनों के बीच भी प्यार हो गया। डुआंगडुआन के मुताबिक उन्होंने अपने इस रिश्ते को कभी छिपाया नहीं और तीनों ने आपसी समझ से भविष्य को लेकर खुलकर बातचीत की।

    परिवार की सहमति से हुआ विवाह

    डुआंगडुआन ने बताया कि शादी से पहले उन्होंने अपने माता-पिता और बच्चों से भी सलाह ली थी।

    उनकी पहले की शादी से तीन बेटियां हैं और वे नानी भी बन चुकी हैं।

    उन्होंने बताया कि संगीत करियर में सफलता नहीं मिलने के बाद उन्हें आर्थिक और व्यक्तिगत संघर्षों का सामना करना पड़ा। परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए उन्होंने पटाया में काम शुरू किया, जहां उनकी मुलाकात पहले रोमन और फिर मैकी से हुई।

    समय के साथ दोनों पुरुष न केवल उनकी जिंदगी का हिस्सा बने, बल्कि परिवार की जिम्मेदारियों में भी साथ देने लगे। डुआंगडुआन के अनुसार, उनके माता-पिता और बच्चे भी इस शादी से खुश हैं।

  • अमेरिका नहीं चाहता भारत बने ताकतवर, ईरानी अधिकारी का बड़ा आरोप

    अमेरिका नहीं चाहता भारत बने ताकतवर, ईरानी अधिकारी का बड़ा आरोप

    वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भारत में ईरानी सुप्रीम लीडर के विशेष प्रतिनिधि Abdul Majid Hakim Elahi ने कहा कि अमेरिका अपने वैश्विक वर्चस्व को बनाए रखने के लिए दुनिया में जानबूझकर युद्ध जैसी स्थितियां पैदा करता है। उनका दावा है कि ईरान के साथ मौजूदा संघर्ष के पीछे भी अमेरिका की यही रणनीति है, ताकि भारत और चीन जैसे देशों को उभरने से रोका जा सके।

    खास बातचीत में इलाही ने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि भारत या चीन जैसे देश वैश्विक ताकत के रूप में सामने आएं। उनके मुताबिक, अमेरिका की कोशिश रहती है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उसकी ताकत को कोई चुनौती न दे और इसी वजह से वह विभिन्न क्षेत्रों में युद्ध की स्थितियां पैदा करता है।

    भविष्य में भारत भी होगा बड़ी ताकत

    इलाही ने कहा कि आने वाले समय में भारत, चीन, रूस और अमेरिका दुनिया के सबसे प्रभावशाली देशों में शामिल होंगे। हालांकि, उनका आरोप है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर अपनी ताकत को साझा नहीं करना चाहता और इसी कारण वह वैश्विक स्तर पर टकराव की स्थितियां बनाए रखता है।

    ईरान ने नहीं, अमेरिका ने शुरू किया संघर्ष

    ईरानी अधिकारी ने यह भी कहा कि मौजूदा युद्ध की शुरुआत ईरान ने नहीं की, बल्कि अमेरिका और इजरायल ने सैन्य कार्रवाई कर इसे शुरू किया। इससे पहले ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी Ali Larijani ने भी कहा था कि ईरान केवल अपनी रक्षा कर रहा है। उनके अनुसार अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरानी नागरिकों और ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जिसके जवाब में ईरान प्रतिक्रिया दे रहा है।

    लारिजानी ने यह भी कहा कि चूंकि संघर्ष की शुरुआत अमेरिका की ओर से हुई है, इसलिए इसे खत्म करने की जिम्मेदारी भी उसी की है।

    लंबा खिंच सकता है संघर्ष

    इस बीच विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य ढांचे और नौसैनिक अड्डों पर किए गए हमलों के बाद यह संघर्ष लंबा चल सकता है। इन हमलों में ईरान के कुछ वरिष्ठ नेताओं के मारे जाने की खबरें भी सामने आई हैं।

    जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन हमलों में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत होने और कई अन्य के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

  • दुनिया का सबसे सुरक्षित स्थान में UAE के तीन शहर

    दुनिया का सबसे सुरक्षित स्थान में UAE के तीन शहर

    नई दिल्‍ली। मध्य पूर्व में पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है। इस संघर्ष का प्रभाव संयुक्त अरब अमीरात के शानदार शहरों अबू धाबी और दुबई तक भी पहुंच रहा है, जिन्हें आमतौर पर सुरक्षित ठिकाने और वैश्विक संघर्षों से अलग-थलग माना जाता रहा है।

    मध्य पूर्व में पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है। इस संघर्ष का प्रभाव संयुक्त अरब अमीरात के शानदार शहरों अबू धाबी और दुबई तक भी पहुंच रहा है, जिन्हें आमतौर पर सुरक्षित ठिकाने और वैश्विक संघर्षों से अलग-थलग माना जाता रहा है। दरअसल, अमेरिकी-इजरायली सैन्य अभियानों में ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों और अमेरिकी सेना के ठिकानों सहित पूरे क्षेत्र में जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।

    दुबई तक मिसाइल और ड्रोन हमलों की पहुंच के साथ ही वैश्विक संघर्षों से दुनिया के कई स्थानों के अछूते न रहने की चिंताएं बढ़ गई हैं। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी तनाव के बीच, यहां दुनिया के 10 सबसे सुरक्षित शहरों की सूची दी गई है। यह सूची Numbeo द्वारा तैयार की गई है (Safety Index 2026 के आधार पर)।
    दुनिया के 10 सबसे सुरक्षित शहर

    किंगदाओ (किंगडाओ), शेडोंग, चीन
    अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात
    दोहा, कतर
    शारजाह, संयुक्त अरब अमीरात
    दुबई, संयुक्त अरब अमीरात
    ताइपे, ताइवान
    मनामा, बहरीन
    मस्कट, ओमान
    द हेग (डेन हाग), नीदरलैंड्स
    आइंडहोवन, नीदरलैंड्स

    गौरतल है कि Numbeo का डेटा वेबसाइट पर आने वाले आगंतुकों द्वारा दिए गए सर्वेक्षणों के आधार पर तैयार किया जाता है, जो स्थापित वैज्ञानिक और सरकारी सर्वेक्षणों की तरह संरचित होते हैं। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात खुद दुनिया के 10 सबसे सुरक्षित देशों की सूची में शामिल नहीं है।

    इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (IEP) द्वारा जारी ग्लोबल पीस इंडेक्स (2025) के अनुसार, दुनिया के 10 सबसे शांतिपूर्ण (सुरक्षित) देश निम्नलिखित हैं…
    दुनिया के 10 सबसे सुरक्षित देश

    आइसलैंड: ग्लोबल पीस इंडेक्स में सबसे ऊपर, स्कोर 1.10 (लगभग)
    आयरलैंड: स्कोर 1.26
    न्यूजीलैंड: स्कोर 1.28
    ऑस्ट्रिया: स्कोर 1.29
    स्विट्जरलैंड: स्कोर 1.29
    सिंगापुर: स्कोर 1.36
    पुर्तगाल: स्कोर 1.37
    डेनमार्क: स्कोर 1.39
    स्लोवेनिया: स्कोर 1.409 (लगभग)
    फिनलैंड: स्कोर 1.42 (लगभग)

    बता दें कि यह वैश्विक शांति सूचकांक 23 मात्रात्मक और गुणात्मक संकेतकों पर आधारित है, जिन्हें 1-5 के पैमाने पर भारित किया जाता है। स्कोर जितना कम, देश उतना ही अधिक शांतिपूर्ण और सुरक्षित माना जाता है। यह सूचकांक विश्व की 99.7 प्रतिशत आबादी को कवर करता है और उच्च सम्मानित स्रोतों से डेटा लेकर तैयार किया जाता है।

  • सऊदी से रक्षा समझौते के बाद भी खामोश पाकिस्तान, ईरानी हमलों पर नहीं दिखी सैन्य प्रतिक्रिया

    सऊदी से रक्षा समझौते के बाद भी खामोश पाकिस्तान, ईरानी हमलों पर नहीं दिखी सैन्य प्रतिक्रिया


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुआ संघर्ष अब कई देशों को प्रभावित करता नजर आ रहा है। इसी बीच आशंका जताई जा रही है कि इसका असर पाकिस्तान तक भी पहुंच सकता है। इसकी वजह पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुआ सुरक्षा समझौता है, जिसके मुताबिक किसी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा। हालांकि हालिया हालात में पाकिस्तान इस समझौते के अनुरूप कदम उठाता नजर नहीं आ रहा है। ईरान पहले ही सऊदी अरब के कई इलाकों पर हमले कर चुका है।

    क्या है समझौते की शर्तें
    सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौता (SMDA) हुआ था, जिसने दोनों देशों के सुरक्षा सहयोग को औपचारिक रूप दिया। समझौते के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया था कि किसी एक देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा और दोनों मिलकर उसका जवाब देंगे।

    रिपोर्ट के अनुसार इस समझौते में यह भी प्रावधान है कि यदि किसी तीसरे देश द्वारा पाकिस्तान पर हमला होता है, तो उसे सऊदी अरब पर हमला माना जाएगा और सऊदी अरब को भी जवाब देने का अधिकार होगा।

    ईरान के हमले, लेकिन पाकिस्तान की चुप्पी
    हाल के समय में ईरान ने सऊदी अरब के कई शहरों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। सऊदी अरब की रिफाइनरी को भी निशाना बनाया गया। इसके बावजूद पाकिस्तान की ओर से समझौते के तहत किसी तरह की सैन्य कार्रवाई या जवाबी कदम सामने नहीं आए हैं।

    अपने ही समझौते में उलझा पाकिस्तान?
    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इन हमलों की निंदा करते हुए सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई है। हालांकि उन्होंने सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने या ईरान के खिलाफ कार्रवाई की कोई घोषणा नहीं की। इससे यह संदेश जा रहा है कि पाकिस्तान फिलहाल इस समझौते को पूरी तरह लागू करने से बच रहा है।

    विदेश मंत्री ने क्या कहा
    पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने मंगलवार को कहा कि संघर्ष शुरू होने के समय वह सऊदी अरब और ईरान के नेताओं के संपर्क में थे। उन्होंने इस्लामाबाद में मीडिया को बताया कि उस समय वह इस्लामी सहयोग संगठन की बैठक में भाग लेने के लिए सऊदी अरब में मौजूद थे और उन्होंने सऊदी अरब तथा ईरान के विदेश मंत्रियों से बातचीत की।

    डार के मुताबिक उन्होंने अपने ईरानी समकक्ष को बताया कि पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ पारस्परिक रक्षा समझौता है। इस पर ईरानी पक्ष ने उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा कि सऊदी अरब की जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ न हो।

    उन्होंने दावा किया कि इस बातचीत के बाद सऊदी अरब पर युद्ध का प्रभाव बेहद सीमित रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस संघर्ष को खत्म करने के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

    विदेश मंत्री ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से उन्होंने तुर्की, बांग्लादेश, फिलिस्तीन, ईरान, उज्बेकिस्तान, सऊदी अरब, कतर, ओमान, इराक, बहरीन और अजरबैजान के विदेश मंत्रियों के अलावा यूरोपीय संघ के उपाध्यक्ष और संयुक्त अरब अमीरात के उपप्रधानमंत्री से भी फोन पर बातचीत की है।