तेहरान में जोरदार धमाके राजधानी में तनाव फैल गया
क्या है इस हमले के पीछे कारण? ईरान-इजरायल तनाव की पृष्ठभूमि
आपातकाल के बीच कैसा माहौल? नागरिकों के लिए क्या किया गया ऐलान

क्या है इस हमले के पीछे कारण? ईरान-इजरायल तनाव की पृष्ठभूमि

रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के घर को भी निशाना बनाकर तबाह कर दिया गया. हालांकि अयातुल्ला अली खामेनेई तेहरान में नहीं है उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है. इसी हमले के बीच एक बार फिर यही सवाल सामने आ गया है कि अगर ईरान और इजरायल के बीच यह टकराव लंबा चलता है तो सैन्य ताकत के मामले में कौन भारी पड़ सकता है.
ईरान इजरायल में सैनिकों की संख्या में कौन आगे?
अगर ईरान और इजरायल की बात करें तो सक्रिय सैनिकों की संख्या में ईरान आगे बताया जाता है. ईरान के पास करीब 6 लाख तक एक्टिव सैन्य बल और करीब 3.5 लाख रिजर्व सैनिक हैं. जबकि इजरायल के पास करीब 1.7 लाख सक्रिय सैनिक है. हालांकि इजरायल के पास 4.5 लाख प्रशिक्षित रिजर्व फोर्स है जिसे जरूरत पड़ने पर तुरंत तैनात किया जा सकता है. वहीं संख्या के मामले में भले ही ईरान आगे दिखाई देता है लेकिन ट्रेनिंग तकनीक और ऑपरेशन के एक्सपीरियंस में इजरायल को बड़ा माना जाता है.
एयर पावर पर पकड़ किसकी मजबूत
वायु सेना की बात करें तो इजरायल के पास 600 से ज्यादा आधुनिक लड़ाकू विमान है जिनमें एफ 35 जैसे स्टेल्थ जेट शामिल है. यह जेट रडार से बच निकलने की क्षमता रखते हैं और एडवांस हथियारों से लैस है. दूसरी और ईरान के पास करीब 500 से कुछ ज्यादा विमान हैं लेकिन ईरान के जेट कई पुराने मॉडल के है. ईरान पर बैन के कारण उसे अपग्रेड और मेंटेनेंस में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में हवा में मुकाबले की स्थिति में इजरायल ईरान के मुकाबले बहुत ज्यादा मजबूत है. वहीं ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसकी बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल मानी जाती है. उसके पास हजारों की संख्या में अलग अलग रेंज की मिसाइल है जो क्षेत्रीय स्तर पर इजरायल के लिए बड़ा खतरा बन सकती है. वहीं इजरायल के पास संख्या कम जरूर है लेकिन उसकी मिसाइल तकनीक काफी उन्नत है और कुछ मिसाइलें लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम है.
ईरान और इजरायल के रक्षा बजट में बड़ा अंतर
अगर दोनों देशों के रक्षा बजट की बात करें तो इजरायल हर साल अपने सैन्य बजट पर ईरान से कई गुना ज्यादा खर्च करता है. अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के आंकड़ों के अनुसार इजरायल ने 2024 में करीब 46.5 अरब डॉलर रक्षा पर खर्च किया था. उसे अमेरिका से सैन्य सहायता भी मिलती है. दूसरी ओर ईरान का बजट सीमित है और वह कम लागत वाली रणनीतियों जैसे मिसाइल और ड्रोन तकनीक पर ज्यादा ध्यान देता है. वहीं इजरायल का मल्टी लेयर एयर डिफेंस सिस्टम उसकी सबसे बड़ी ताकतों में गिना जाता है. आयरन डोम जैसे सिस्टम कम दूरी की मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने के लिए जाने जाते हैं. इसके अलावा मध्यम और लंबी दूरी की इंटरसेप्टर क्षमता भी उसके पास है. ईरान के पास भी घरेलू और रूसी तकनीक पर आधारित एयर डिफेंस सिस्टम हैं लेकिन तकनीकी रूप से वे इजरायल के मुकाबले कमजोर माने जाते हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस ऑर्डर के तहत महिंद्रा को 35 ,000 स्कॉर्पियो पिक अप वाहन सप्लाई करने थे जिसे कंपनी अपने इतिहास का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट ऑर्डर बता रही थी। वहीं टाटा मोटर्स की स्थानीय इकाई को 35,000 योद्धा पिक अप और 35 ,000 अल्ट्रा T.7 ट्रकों की डिलीवरी करनी थी। इंडोनेशिया के लिए यह टाटा का अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर माना जा रहा था। हालांकि इस फैसले पर दोनों कंपनियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
दरअसल यह पूरा प्रोजेक्ट इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियान्टो की महत्वाकांक्षी योजना से जुड़ा है। सरकार देशभर में 80,000 से ज्यादा सामुदायिक सहकारी समितियां स्थापित करना चाहती है। इन 4×4 और 6 पहिया ट्रकों का इस्तेमाल ग्रामीण क्षेत्रों में कोल्ड स्टोरेज सब्सिडी वाली खाद और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए किया जाना था। साथ ही ये समितियां लोन सेवाएं भी देतीं जिससे सरकार सीधे ग्रामीण आबादी तक पहुंच बना सके।
लेकिन जकार्ता में इस बड़े आयात का जबरदस्त विरोध हुआ। इंडोनेशिया में पहले से टोयोटा सुजुकी और मित्सुबिशी जैसी वैश्विक कंपनियों की बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स मौजूद हैं। कमजोर घरेलू मांग और घटती कार बिक्री के बीच स्थानीय उद्योग पहले ही दबाव में है। ऐसे में बाहर से 1 लाख से ज्यादा वाहन आयात करने के फैसले को उद्योग संगठनों ने सरकार की औद्योगीकरण और रोजगार सृजन नीति के खिलाफ बताया।
इंडोनेशिया के उद्योग मंत्री अगुस गुमीवांग कर्तासस्मिता ने कहा कि देश के ऑटो सेक्टर में सालाना लगभग 10 लाख पिक अप ट्रक बनाने की क्षमता है। उनके मुताबिक अगर 70, 000 पिक अप ट्रक देश में ही बनाए जाते तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को करीब 27 ट्रिलियन रुपिया लगभग 1.6 अरब डॉलर का फायदा होता और हजारों नौकरियां पैदा होतीं।
यह खरीद सरकारी कंपनी पीटी अग्रिनास पंगन नुसंतारा द्वारा की जानी थी जिसे खाद्य आत्मनिर्भरता और कृषि परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में स्थापित किया गया है। शेष सरकार और संसद के बीच अहम बैठक तक इस आदेश को होल्ड पर रखा गया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इंडोनेशिया सरकार स्थानीय निर्माण को प्राथमिकता देगी या भारत के साथ इस बड़े व्यापारिक समझौते को फिर से हरी झंडी मिलेगी। यह फैसला दोनों देशों के आर्थिक संबंधों पर भी असर डाल सकता है।

प्लेन में किसके रुपये भरे थे?
यह हरक्यूलिस विमान बोलीविया वायुसेना का था और सेंट्रल बैंक से नई छपी करेंसी देश के अन्य शहरों में ले जा रहा था. यानी यह बैंकों को मिलने वाला नोट था. टेकऑफ के तुरंत बाद विमान रनवे से फिसल गया और एल आल्टो शहर के पास हाईवे पर जा गिरा. हादसे में कम से कम 15 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं. कई वाहन भी इसकी चपेट में आ गए. हादसे के बाद विमान में आग लग गई और सड़क पर मलबा बिखर गया. लेकिन इसी बीच एक और चौंकाने वाला दृश्य सामने आया. विमान में मौजूद बड़ी मात्रा में नकदी सड़क पर बिखर गई।
नोट बटोरने के लिए टूट पड़े लोग
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि लोग नोट बटोरने के लिए मौके पर टूट पड़े. कुछ लोग जलते मलबे के पास तक पहुंच गए. पुलिस दंगा-रोधी गियर में पहुंची और भीड़ को हटाने की कोशिश की. जहां एक ओर दमकलकर्मी आग बुझाने और राहत कार्य में जुटे थे, वहीं दूसरी ओर कई लोग जमीन पर पड़े नोट समेटने में लगे थे. प्रशासन ने हादसे के बाद एयरपोर्ट से उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दीं और जांच शुरू कर दी है. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दुर्घटना की असली वजह क्या थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन से निपटने और बुनियादी ढांचे में भारी निवेश के कारण कर्ज तेजी से बढ़ रहा है। यह “कैपिटल एक्सपेंडिचर सुपर साइकिल” आने वाले वर्षों में भी कर्ज बढ़ाने वाला प्रमुख कारक बना रह सकता है। इस रिपोर्ट में चीन की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया है, जहां सरकारी कर्ज GDP के 88.4% से बढ़कर 96.8% तक पहुंच गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका अकेले वैश्विक सार्वजनिक ऋण (Global Public Debt) के एक-तिहाई से अधिक हिस्से के लिए जिम्मेदार है। चीन इस सूची में दूसरे स्थान पर है, जिसका सरकारी कर्ज लगभग 18.68 ट्रिलियन डॉलर है।
2031 तक US का कर्ज GDP का 140% तक पहुंच सकता है
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका में यह आंकड़ा और अधिक है, जो जीडीपी के 122% से भी ऊपर चला गया है। इसके अलावा International Monetary Fund (IMF) ने भी चेतावनी दी है कि अमेरिका का बढ़ता सार्वजनिक कर्ज वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर जोखिम बन सकता है। IMF के अनुसार, यदि यही रुझान जारी रहा तो 2031 तक अमेरिका का कर्ज GDP के 140% तक पहुंच सकता है। संस्था ने अमेरिकी सरकार को तत्काल और ठोस वित्तीय सुधार (fiscal consolidation) लागू करने की सलाह दी है।
ट्रंप का टैरिफ दांव भी बेअसर
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, वॉशिंगटन स्थित संस्था ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ से कर्ज के बढ़ते ट्रेंड को पलटने के लिए कोई उल्लेखनीय आमदनी नहीं हो पायी है और इससे “अफ़ोर्डेबिलिटी की चिंताएँ बढ़ गई हैं। इसमें आगे कहा गया है कि 2036 तक जनता पर मौजूद US फ़ेडरल कर्ज में और 20 परसेंट पॉइंट की बढ़ोतरी होने की संभावना है, जो GDP के 120 परसेंट से ज़्यादा हो जाएगा।
वैश्विक स्तर पर अमेरिकी बॉन्ड्स में भरोसा कायम
हालांकि, बढ़ते कर्ज के बावजूद अमेरिकी ट्रेजरी बाजार अब भी निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प बना हुआ है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी बॉन्ड्स में भरोसा कायम है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि वैश्विक स्तर पर कर्ज-से-GDP अनुपात लगातार पांचवें साल घटकर 308% पर आ गया है, लेकिन उभरती अर्थव्यवस्थाओं में यह अनुपात रिकॉर्ड 235% से अधिक पहुंच गया है, जो भविष्य में वित्तीय अस्थिरता का संकेत दे सकता है।

विवाद का कारण
मालदीव का रुख
चागोस द्वीप समूह: विवाद की पृष्ठभूमि
1965 में ब्रिटेन ने मॉरीशस से चागोस को अलग कर दिया और इसे ब्रिटिश-हिंद महासागर क्षेत्र का हिस्सा बना दिया। डिएगो गार्सिया पर अमेरिका ने 1966 में 50 साल के पट्टे पर सैन्य अड्डा बनाया जो आज भी अमेरिकी रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है। इसके लिए ब्रिटेन ने 1967-1973 के बीच द्वीप के 1,500–2,000 मूल निवासियों को मॉरीशस और सेशेल्स में विस्थापित कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप
हालिया ब्रिटेन-मॉरीशस समझौता

हवाई हमले का विवरण
सख्त चेतावनी
सीमा पर तैयारियाँ
बढ़ता क्षेत्रीय संकट

रूस का बयान
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि दोनों देशों के नागरिक और सैन्य बल हताहत हुए हैं।
चीन की अपील
चीन ने भी दोनों पक्षों से बातचीत और युद्धविराम पर जोर दिया। इसके अलावा कई अन्य देश भी संयम बरतने और तत्काल शांति स्थापित करने की अपील कर चुके हैं।
संयुक्त राष्ट्र की चिंता
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने स्थिति पर गहरी चिंता जताई। उनके प्रवक्ता ने कहा कि सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन और नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की गई है।
सीमा और डूरंड रेखा
ब्रिटिश शासन के दौरान खींची गई विवादित 2,611 किलोमीटर लंबी सीमा, जिसे डूरंड रेखा कहा जाता है, समय-समय पर दोनों देशों के बीच तनाव और गोलीबारी का कारण रही है। अफगानिस्तान की मौजूदा तालिबानी सरकार इसे मान्यता नहीं देती और इस समझौते को समाप्त करने की मांग करती रही है।
हाल की घटनाएँ
इस्लामाबाद में दो वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, सीमा पर अफगान सेना ने कुछ चौकियों पर सफेद झंडे लहराए, जिसे आमतौर पर गोलीबारी रोकने और शांति स्थापित करने का संकेत माना जाता है।

कंपाला। दुनिया में आज भी कई ऐसे देश हैं, जिनमें समलैंगिकता को जघन्य अपराध माना जाता है। अफ्रीकी देश युगांडा भी उन्हीं देशों में से एक है। यहां पर दो युवा महिलाओं को खुले आम प्यार का इजहार करना महंगा पड़ गया। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, दोनों महिलाओं को किस करते हुए देखा गया, चूंकि यह देश के कानून के खिलाफ है, इसलिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।
पुलिस के बयान के मुताबिक एक महिला की उम्र करीब 22 साल है, जबकि दूसरी की उम्र करीब 21 साल है। दोनों को देश के अरुआ शहर से गिरफ्तार किया गया है, जहां पर वह खुले आम किस करने और असामान्य कृत्यों में संलिप्त थीं, जिन्हें यौन प्रकृति का माना जाता है।
आपको बता दें, युगांडा में वर्ष 2023 में एंटी होमोसेक्सुएलिटी एक्ट लागू किया गया है। देश की सरकार द्वारा लागू किए गए इस कानून का पश्चिमी देशों ने भरपूर विरोध किया था लेकिन यहां की सरकार सबसे कठोर एलजीबीटीक्यू विरोधी कानून लागू करने पर लगी हुई है। इस कानून के तहत समलैंगिक संबंध रखने वाले लोगों को आजीवन कारावास की सजा दी जा सकती है, जबकि गंभीर मामलों में मृत्युदंड का भी प्रावधान है।
बार-बार पकड़े जाने पर मृत्युदंड का प्रावधान
समलैंगिक संबंधों को लेकर युगांड़ा का कानून सबसे ज्यादा कठोर है। 2023 में पारित किए गए कानून के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति बार-बार समलैंगिक संबंध बनाते पकड़ा जाता है, या ऐसा समलैंगिक संबंध जिससे लाइलाज बीमारी फैलती हो, नाबालिग, बुजुर्ग या दिव्यांग व्यक्ति के साथ समलैंगिक संबंध बनाने पर व्यक्ति को मृत्युदंड दिया जा सकता है।
गौरतलब है कि युगांडा पूर्वी अफ्रीका का एक रूढ़िवादी और मुख्यतः ईसाई बहुल देश है। इस कानून के कारण मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में व्यापक आक्रोश फैल गया था और संयुक्त राष्ट्र तथा पश्चिमी देशों ने इसकी निंदा की थी। विश्व बैंक ने देश को दी जाने वाली वित्तीय सहायता निलंबित कर दी थी, हालांकि 2025 के मध्य में इसे फिर से बहाल कर दिया गया। इस महीने की शुरुआत में, एक युगांडा अदालत ने “गंभीर समलैंगिकता” श्रेणी के तहत आरोपित पहले व्यक्ति के खिलाफ मामला खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि लंबी न्यायिक हिरासत के कारण उसकी मानसिक स्थिति अस्थिर हो गई थी।

संसद में संबोधन से लेकर सर्वोच्च सम्मान तक
वीडियो में इजरायली संसद में पीएम के स्वागत, तालियों की गूंज और दोनों देशों के बीच हुए अहम समझौतों के हस्ताक्षर के पल दिखाए गए। प्रधानमंत्री ने लिखा, “इजरायल की खास यात्रा की कुछ खास बातें… अच्छी बातचीत और मजबूत सहयोग। हमारी पार्टनरशिप आगे बढ़ती रहे!”
रक्षा, तकनीक और व्यापार में नई गति
दौरे के दौरान रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, तकनीक और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) और भारत-इजरायल-यूएई-यूएसए (आई2यू2) पहल को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
अहम एमओयू: खनिज, समुद्री विरासत और यूपीआई
खनिज अन्वेषण में उन्नत जियोफिजिकल और एआई तकनीक के उपयोग पर सहयोग के लिए समझौता हुआ। गुजरात के लोथल स्थित नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के विकास को लेकर भी सहमति बनी, जिससे साझा समुद्री विरासत को बढ़ावा मिलेगा।
डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में बड़ी पहल के तहत एनपीसीआई इंटरनेशनल और इजरायल की एमएएसएवी के बीच यूपीआई को लागू करने पर समझौता हुआ। इससे दोनों देशों के बीच सीमा-पार रेमिटेंस को आसान बनाने की दिशा में कदम बढ़ेगा।
कृषि, शिक्षा और वित्तीय सहयोग
भारत-इजरायल इनोवेशन सेंटर फॉर एग्रीकल्चर की स्थापना के लिए आईसीएआर और एमएएसएचएवी के बीच समझौता हुआ। मत्स्य पालन और जलीय कृषि में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
वित्तीय क्षेत्र में International Financial Services Centres Authority और Israel Securities Authority के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। इसके अलावा एआई आधारित शिक्षा, वाणिज्यिक मध्यस्थता और विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक सहयोग को लेकर भी कई समझौते हुए, जिनमें Nalanda University और Hebrew University of Jerusalem के बीच एमओयू प्रमुख है।