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  • तेहरान समेत कई इलाकों में विस्फोट, इजरायल की बड़ी सैन्य कार्रवाई का दावा

    तेहरान समेत कई इलाकों में विस्फोट, इजरायल की बड़ी सैन्य कार्रवाई का दावा


    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय माहौल आज 28 फरवरी 2026 को अचानक तनावपूर्ण हो गया है जब Israel ने Iran पर एक बड़ा सैन्य हमला शुरू कर दिया। इजरायल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने बताया कि यह हमला पहले से किया गया हमला प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक था जिसका उद्देश्य देश पर संभावित खतरे को दूर करना है। इस कार्रवाई के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है और क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति अत्यधिक नाजुक हो गई है। इजरायल ने देश भर में विशेष और स्थायी आपातकाल लागू कर दिया है और नागरिकों से सतर्क रहने को कहा है क्योंकि संभावित मिसाइलों या जवाबी हमलों का खतरा बना हुआ है।

    तेहरान में जोरदार धमाके राजधानी में तनाव फैल गया
    ईरान की राजधानी तेहरान के केंद्र में आज सुबह कई धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं और धुएं का गुबार भी उठता देखा गया। ईरानी मीडिया के अनुसार राजधानी के रिपब्लिक और यूनिवर्सिटी स्ट्रीट जैसे इलाकों में मिसाइलें गिरीं जिससे इलाके में भारी तनाव का माहौल बन गया है। स्थानीय प्रशासन ने सक्रिय सुरक्षा बलों को मौके पर भेज दिया है लेकिन फिलहाल किसी नुकसान या हताहतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। घटनास्थल से धुएं के काले बादल उठते हुए देखे गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की चेतावनी जारी की गई है। इस हमले की पृष्ठभूमि और विस्तृत रणनीतिक वजहों पर अभी तक पूर्ण जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन यह घटना क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।

    क्या है इस हमले के पीछे कारण? ईरान-इजरायल तनाव की पृष्ठभूमि

    विश्लेषकों का कहना है कि यह हमला उन वर्षों से चल रहे तनावों का नवीनतम चरण है जिसमें इजरायल और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम बैलिस्टिक मिसाइल विकास और सैन्य विवाद शामिल रहे हैं। इजरायल लगातार चेतावनी देता रहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमताएं उसके राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। पिछले साल दोनों देशों के बीच हवाई संघर्ष और मिसाइल दागे जाने जैसे कई घटनाक्रम भी सामने आ चुके हैं। ऐसे में आज का हमला इसी तनाव की परिणति भी माना जा रहा है।

    आपातकाल के बीच कैसा माहौल? नागरिकों के लिए क्या किया गया ऐलान
    इजरायल में आपातकाल के लागू होने के बाद वहां के नागरिकों को संभावित मिसाइल हमलों से निपटने के लिए चेतावनी जारी की गई है। सेना ने एयर राइड सायरन बजाने के साथ सुरक्षा आश्रयों के पास रहने की सलाह दी है और लोगों से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने को कहा गया है। वहीं ईरान ने भी अपनी एयर स्पेस बंद कर दी है और सुरक्षा बलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। इसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा चिंताओं और राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है जिससे आसपास के देशों की सुरक्षा नीति पर भी प्रभाव दिख सकता है।

  • इजरायल के सामने कितनी देर तक टिक सकता है ईरान, देखें दोनों की मिलिट्री पावर

    इजरायल के सामने कितनी देर तक टिक सकता है ईरान, देखें दोनों की मिलिट्री पावर


    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव का माहौल बन गया है. आज यानी शनिवार को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान की राजधानी तेहरान पर हमले किए. इसके बाद पूरे इलाके में हालात तेजी से बदल गए. इजरायल ने इसे प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक बताया और कहा कि संभावित हमले के खतरे को रोकने के लिए यह कार्रवाई की गई है. जबकि ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की आशंका जताई गई है. रिपोर्ट्स के अनुसार तेहरान इस्फहान कोम और खोर्रमाबाद समेत कई शहरों में इजरायल की ओर से मिसाइल और एयर स्ट्राइक की गई है. बताया जा रहा है कि इजरायल की और से ईरान पर हुए अचानक हमले में अमेरिका भी शामिल था.

    रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के घर को भी निशाना बनाकर तबाह कर दिया गया. हालांकि अयातुल्ला अली खामेनेई तेहरान में नहीं है उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है. इसी हमले के बीच एक बार फिर यही सवाल सामने आ गया है कि अगर ईरान और इजरायल के बीच यह टकराव लंबा चलता है तो सैन्य ताकत के मामले में कौन भारी पड़ सकता है.

    ईरान इजरायल में सैनिकों की संख्या में कौन आगे?

    अगर ईरान और इजरायल की बात करें तो सक्रिय सैनिकों की संख्या में ईरान आगे बताया जाता है. ईरान के पास करीब 6 लाख तक एक्टिव सैन्य बल और करीब 3.5 लाख रिजर्व सैनिक हैं. जबकि इजरायल के पास करीब 1.7 लाख सक्रिय सैनिक है. हालांकि इजरायल के पास 4.5 लाख प्रशिक्षित रिजर्व फोर्स है जिसे जरूरत पड़ने पर तुरंत तैनात किया जा सकता है. वहीं संख्या के मामले में भले ही ईरान आगे दिखाई देता है लेकिन ट्रेनिंग तकनीक और ऑपरेशन के एक्सपीरियंस में इजरायल को बड़ा माना जाता है.

    एयर पावर पर पकड़ किसकी मजबूत

    वायु सेना की बात करें तो इजरायल के पास 600 से ज्यादा आधुनिक लड़ाकू विमान है जिनमें एफ 35 जैसे स्टेल्थ जेट शामिल है. यह जेट रडार से बच निकलने की क्षमता रखते हैं और एडवांस हथियारों से लैस है. दूसरी और ईरान के पास करीब 500 से कुछ ज्यादा विमान हैं लेकिन ईरान के जेट कई पुराने मॉडल के है. ईरान पर बैन के कारण उसे अपग्रेड और मेंटेनेंस में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में हवा में मुकाबले की स्थिति में इजरायल ईरान के मुकाबले बहुत ज्यादा मजबूत है. वहीं ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसकी बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल मानी जाती है. उसके पास हजारों की संख्या में अलग अलग रेंज की मिसाइल है जो क्षेत्रीय स्तर पर इजरायल के लिए बड़ा खतरा बन सकती है. वहीं इजरायल के पास संख्या कम जरूर है लेकिन उसकी मिसाइल तकनीक काफी उन्नत है और कुछ मिसाइलें लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम है.

    ईरान और इजरायल के रक्षा बजट में बड़ा अंतर

    अगर दोनों देशों के रक्षा बजट की बात करें तो इजरायल हर साल अपने सैन्य बजट पर ईरान से कई गुना ज्यादा खर्च करता है. अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के आंकड़ों के अनुसार इजरायल ने 2024 में करीब 46.5 अरब डॉलर रक्षा पर खर्च किया था. उसे अमेरिका से सैन्य सहायता भी मिलती है. दूसरी ओर ईरान का बजट सीमित है और वह कम लागत वाली रणनीतियों जैसे मिसाइल और ड्रोन तकनीक पर ज्यादा ध्यान देता है. वहीं इजरायल का मल्टी लेयर एयर डिफेंस सिस्टम उसकी सबसे बड़ी ताकतों में गिना जाता है. आयरन डोम जैसे सिस्टम कम दूरी की मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने के लिए जाने जाते हैं. इसके अलावा मध्यम और लंबी दूरी की इंटरसेप्टर क्षमता भी उसके पास है. ईरान के पास भी घरेलू और रूसी तकनीक पर आधारित एयर डिफेंस सिस्टम हैं लेकिन तकनीकी रूप से वे इजरायल के मुकाबले कमजोर माने जाते हैं.

  • इंडोनेशिया का भारत को बड़ा झटका! टाटा-महिंद्रा के 1.05 लाख ट्रकों का मेगा ऑर्डर फिलहाल रोका

    इंडोनेशिया का भारत को बड़ा झटका! टाटा-महिंद्रा के 1.05 लाख ट्रकों का मेगा ऑर्डर फिलहाल रोका


    नई दिल्ली ।
    दक्षिण पूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था इंडोनेशिया ने भारत की ऑटो इंडस्ट्री को बड़ा झटका दिया है। स्थानीय नीति निर्माताओं और व्यापारिक संगठनों के तीखे विरोध के बाद इंडोनेशिया सरकार ने भारतीय कंपनियों टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा से 1 05 000 ट्रकों की खरीद के मेगा ऑर्डर पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह डील दोनों भारतीय कंपनियों के लिए अब तक के सबसे बड़े निर्यात ऑर्डरों में से एक मानी जा रही थी।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक इस ऑर्डर के तहत महिंद्रा को 35 ,000 स्कॉर्पियो पिक अप वाहन सप्लाई करने थे जिसे कंपनी अपने इतिहास का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट ऑर्डर बता रही थी। वहीं टाटा मोटर्स की स्थानीय इकाई को 35,000 योद्धा पिक अप और 35 ,000 अल्ट्रा T.7 ट्रकों की डिलीवरी करनी थी। इंडोनेशिया के लिए यह टाटा का अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर माना जा रहा था। हालांकि इस फैसले पर दोनों कंपनियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

    दरअसल यह पूरा प्रोजेक्ट इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियान्टो की महत्वाकांक्षी योजना से जुड़ा है। सरकार देशभर में 80,000 से ज्यादा सामुदायिक सहकारी समितियां स्थापित करना चाहती है। इन 4×4 और 6 पहिया ट्रकों का इस्तेमाल ग्रामीण क्षेत्रों में कोल्ड स्टोरेज सब्सिडी वाली खाद और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए किया जाना था। साथ ही ये समितियां लोन सेवाएं भी देतीं जिससे सरकार सीधे ग्रामीण आबादी तक पहुंच बना सके।

    लेकिन जकार्ता में इस बड़े आयात का जबरदस्त विरोध हुआ। इंडोनेशिया में पहले से टोयोटा सुजुकी और मित्सुबिशी जैसी वैश्विक कंपनियों की बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स मौजूद हैं। कमजोर घरेलू मांग और घटती कार बिक्री के बीच स्थानीय उद्योग पहले ही दबाव में है। ऐसे में बाहर से 1 लाख से ज्यादा वाहन आयात करने के फैसले को उद्योग संगठनों ने सरकार की औद्योगीकरण और रोजगार सृजन नीति के खिलाफ बताया।

    इंडोनेशिया के उद्योग मंत्री अगुस गुमीवांग कर्तासस्मिता ने कहा कि देश के ऑटो सेक्टर में सालाना लगभग 10 लाख पिक अप ट्रक बनाने की क्षमता है। उनके मुताबिक अगर 70, 000 पिक अप ट्रक देश में ही बनाए जाते तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को करीब 27 ट्रिलियन रुपिया लगभग 1.6 अरब डॉलर का फायदा होता और हजारों नौकरियां पैदा होतीं।

    यह खरीद सरकारी कंपनी पीटी अग्रिनास पंगन नुसंतारा द्वारा की जानी थी जिसे खाद्य आत्मनिर्भरता और कृषि परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में स्थापित किया गया है। शेष सरकार और संसद के बीच अहम बैठक तक इस आदेश को होल्ड पर रखा गया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इंडोनेशिया सरकार स्थानीय निर्माण को प्राथमिकता देगी या भारत के साथ इस बड़े व्यापारिक समझौते को फिर से हरी झंडी मिलेगी। यह फैसला दोनों देशों के आर्थिक संबंधों पर भी असर डाल सकता है।

  • बोलीविया में नोटों से भरा कार्गो विमान हुआ क्रैश, 15 लोगों की मौत…

    बोलीविया में नोटों से भरा कार्गो विमान हुआ क्रैश, 15 लोगों की मौत…


    ला पाज।
    बोलीविया (Bolivia) की राजधानी ला पाज (La Paz) के पास शुक्रवार को बड़ा विमान हादसा (Major Plane Crash) हो गया. नकदी से भरा एक कार्गो विमान (Cargo Plane) उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद क्रैश हो गया. हादसे में कम से कम 15 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं. फायर चीफ पावेल टोवर ने बताया कि अभी यह साफ नहीं है कि मरने वाले लोग विमान में सवार थे या फिर हाईवे पर चल रहे वाहनों में मौजूद थे. विमान ला पाज़ एयरपोर्ट से उड़ान भर रहा था, तभी रनवे से फिसलकर एल आल्टो शहर की ओर बढ़ गया और सड़क पर चल रहे कई वाहनों से टकरा गया।


    प्लेन में किसके रुपये भरे थे?

    यह हरक्यूलिस विमान बोलीविया वायुसेना का था और सेंट्रल बैंक से नई छपी करेंसी देश के अन्य शहरों में ले जा रहा था. यानी यह बैंकों को मिलने वाला नोट था. टेकऑफ के तुरंत बाद विमान रनवे से फिसल गया और एल आल्टो शहर के पास हाईवे पर जा गिरा. हादसे में कम से कम 15 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं. कई वाहन भी इसकी चपेट में आ गए. हादसे के बाद विमान में आग लग गई और सड़क पर मलबा बिखर गया. लेकिन इसी बीच एक और चौंकाने वाला दृश्य सामने आया. विमान में मौजूद बड़ी मात्रा में नकदी सड़क पर बिखर गई।

    नोट बटोरने के लिए टूट पड़े लोग
    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि लोग नोट बटोरने के लिए मौके पर टूट पड़े. कुछ लोग जलते मलबे के पास तक पहुंच गए. पुलिस दंगा-रोधी गियर में पहुंची और भीड़ को हटाने की कोशिश की. जहां एक ओर दमकलकर्मी आग बुझाने और राहत कार्य में जुटे थे, वहीं दूसरी ओर कई लोग जमीन पर पड़े नोट समेटने में लगे थे. प्रशासन ने हादसे के बाद एयरपोर्ट से उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दीं और जांच शुरू कर दी है. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दुर्घटना की असली वजह क्या थी।

  • दुनिया पर कर्ज के बोझ बढ़कर रिकॉर्ड 348 ट्रिलियन डॉलर पहुंचा, US-चीन सबसे आगे

    दुनिया पर कर्ज के बोझ बढ़कर रिकॉर्ड 348 ट्रिलियन डॉलर पहुंचा, US-चीन सबसे आगे


    वॉशिंगटन।
    वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। वॉशिंगटन स्थित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान Institute of International Finance (IIF) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 के अंत तक दुनिया का कुल कर्ज बढ़कर रिकॉर्ड 348 ट्रिलियन डॉलर (Record $348 trillion) तक पहुंच गया है। यह वृद्धि कोविड-19 महामारी (COVID-19 Pandemic) के बाद सबसे तेज मानी जा रही है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन का सबसे बड़ा योगदान रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और चीन के तेजी से कर्ज बढ़ाने से ग्लोबल कर्ज में सिर्फ एक साल में करीब 29 ट्रिलियन डॉलर का नया कर्ज जुड़ा है। इसमें 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक सरकारी उधारी रही। अमेरिका, चीन और यूरो जोन ने मिलकर कुल कर्ज वृद्धि में लगभग तीन-चौथाई हिस्सा जोड़ा है, जिससे वैश्विक वित्तीय संतुलन पर दबाव और बढ़ गया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन से निपटने और बुनियादी ढांचे में भारी निवेश के कारण कर्ज तेजी से बढ़ रहा है। यह “कैपिटल एक्सपेंडिचर सुपर साइकिल” आने वाले वर्षों में भी कर्ज बढ़ाने वाला प्रमुख कारक बना रह सकता है। इस रिपोर्ट में चीन की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया है, जहां सरकारी कर्ज GDP के 88.4% से बढ़कर 96.8% तक पहुंच गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका अकेले वैश्विक सार्वजनिक ऋण (Global Public Debt) के एक-तिहाई से अधिक हिस्से के लिए जिम्मेदार है। चीन इस सूची में दूसरे स्थान पर है, जिसका सरकारी कर्ज लगभग 18.68 ट्रिलियन डॉलर है।


    2031 तक US का कर्ज GDP का 140% तक पहुंच सकता है

    रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका में यह आंकड़ा और अधिक है, जो जीडीपी के 122% से भी ऊपर चला गया है। इसके अलावा International Monetary Fund (IMF) ने भी चेतावनी दी है कि अमेरिका का बढ़ता सार्वजनिक कर्ज वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर जोखिम बन सकता है। IMF के अनुसार, यदि यही रुझान जारी रहा तो 2031 तक अमेरिका का कर्ज GDP के 140% तक पहुंच सकता है। संस्था ने अमेरिकी सरकार को तत्काल और ठोस वित्तीय सुधार (fiscal consolidation) लागू करने की सलाह दी है।


    ट्रंप का टैरिफ दांव भी बेअसर

    साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, वॉशिंगटन स्थित संस्था ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ से कर्ज के बढ़ते ट्रेंड को पलटने के लिए कोई उल्लेखनीय आमदनी नहीं हो पायी है और इससे “अफ़ोर्डेबिलिटी की चिंताएँ बढ़ गई हैं। इसमें आगे कहा गया है कि 2036 तक जनता पर मौजूद US फ़ेडरल कर्ज में और 20 परसेंट पॉइंट की बढ़ोतरी होने की संभावना है, जो GDP के 120 परसेंट से ज़्यादा हो जाएगा।


    वैश्विक स्तर पर अमेरिकी बॉन्ड्स में भरोसा कायम

    हालांकि, बढ़ते कर्ज के बावजूद अमेरिकी ट्रेजरी बाजार अब भी निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प बना हुआ है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी बॉन्ड्स में भरोसा कायम है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि वैश्विक स्तर पर कर्ज-से-GDP अनुपात लगातार पांचवें साल घटकर 308% पर आ गया है, लेकिन उभरती अर्थव्यवस्थाओं में यह अनुपात रिकॉर्ड 235% से अधिक पहुंच गया है, जो भविष्य में वित्तीय अस्थिरता का संकेत दे सकता है।

  • मॉरीशस ने मालदीव के साथ तोड़े सभी राजनयिक रिश्ते, चागोस द्वीप विवाद बना वजह

    मॉरीशस ने मालदीव के साथ तोड़े सभी राजनयिक रिश्ते, चागोस द्वीप विवाद बना वजह


    नई दिल्ली/माले। मॉरीशस सरकार ने शुक्रवार 27 फरवरी को एक बड़ा कूटनीतिक फैसला लिया और मालदीव के साथ अपने सभी राजनयिक संबंधों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कदम मालदीव के चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता को लेकर बदलते रुख के बाद उठाया गया। ध्यान दें कि दोनों देश भारत के मित्र हैं।

    विवाद का कारण

    मॉरीशस के विदेश मंत्रालय के अनुसार मालदीव ने हाल ही में चागोस द्वीप समूह पर मॉरीशस की संप्रभुता को मान्यता देना बंद कर दिया है। साथ ही मालदीव ने मॉरीशस और ब्रिटेन के बीच चागोस को लेकर हुए हालिया समझौते पर आपत्ति जताई। मॉरीशस की कैबिनेट ने इस कदम को राष्ट्रीय हितों की रक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन के लिए आवश्यक बताया।

    मालदीव का रुख

    मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मुइज्जू ने 5 फरवरी को स्टेट ऑफ द नेशन संबोधन में कहा कि चागोस पर मालदीव का दावा मॉरीशस या किसी अन्य देश से अधिक मजबूत है। उन्होंने 2022 में मालदीव की पिछली सरकार द्वारा मॉरीशस की मान्यता को औपचारिक रूप से वापस ले लिया और इसे समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया।

    चागोस द्वीप समूह: विवाद की पृष्ठभूमि

    चागोस द्वीप समूह हिंद महासागर में स्थित 60 से अधिक छोटे द्वीपों का समूह है जिसमें सबसे बड़ा डिएगो गार्सिया है। रणनीतिक रूप से इसका महत्व बहुत अधिक है क्योंकि यहां से मध्य पूर्व दक्षिण एशिया और अफ्रीका पर सैन्य और सुरक्षा निगरानी आसान है।

    1965 में ब्रिटेन ने मॉरीशस से चागोस को अलग कर दिया और इसे ब्रिटिश-हिंद महासागर क्षेत्र का हिस्सा बना दिया। डिएगो गार्सिया पर अमेरिका ने 1966 में 50 साल के पट्टे पर सैन्य अड्डा बनाया जो आज भी अमेरिकी रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है। इसके लिए ब्रिटेन ने 1967-1973 के बीच द्वीप के 1,500–2,000 मूल निवासियों को मॉरीशस और सेशेल्स में विस्थापित कर दिया।

    अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप

    मॉरीशस ने दशकों तक चागोस पर अपनी संप्रभुता के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी। 2019 में ICJ ने ब्रिटेन को द्वीप को मॉरीशस को सौंपने की सलाह दी। UN महासभा ने भी ब्रिटेन से मॉरीशस को चागोस सौंपने का प्रस्ताव पारित किया।

    हालिया ब्रिटेन-मॉरीशस समझौता

    ब्रिटेन और मॉरीशस ने समझौता किया जिसमें मॉरीशस की संप्रभुता को मान्यता दी गई लेकिन डिएगो गार्सिया पर अमेरिकी सैन्य बेस लंबे पट्टे (99 साल) के तहत संचालित होता रहेगा।

    मालदीव का विवाद
    मालदीव ने अब चागोस पर मॉरीशस की संप्रभुता और ब्रिटेन के साथ हुए समझौते पर आपत्ति जताई। इससे मॉरीशस ने मालदीव के साथ सभी राजनयिक संबंध तोड़ दिए।

  • अफगानिस्तान ने पाकिस्तान में सैन्य ठिकानों को किया ध्‍वस्‍त, दी सख्त चेतावनी

    अफगानिस्तान ने पाकिस्तान में सैन्य ठिकानों को किया ध्‍वस्‍त, दी सख्त चेतावनी


    नई दिल्ली। दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक तनाव अब गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। शुक्रवार सुबह अफगानिस्तान के इस्लामिक अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की कि उसकी वायुसेना ने पाकिस्तान की सीमा के भीतर कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इस कदम ने दोनों देशों के बीच तनाव को संभावित पूर्ण युद्ध की स्थिति में खड़ा कर दिया है।

    हवाई हमले का विवरण

    अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार हमला शुक्रवार सुबह लगभग 11:00 बजे किया गया। तालिबानी लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान की सीमा के भीतर गहरी पैठ बनाते हुए राजधानी इस्लामाबाद के पास फैजाबाद के सैन्य शिविर नौशेरा के सैन्य मुख्यालय जम़रुद की सैन्य टाउनशिप और एबटाबाद के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। प्रवक्ता इनायतुल्ला ख्वारज्मी ने कहा ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। हमने पाकिस्तान सेना के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण केंद्रों और सुविधाओं को ध्वस्त किया।तालिबान प्रशासन ने इस हमले को प्रतिशोध बताया। अफगान अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान ने हाल ही में अफगान हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया था और यह कार्रवाई उसी का जवाब है।

    सख्त चेतावनी

    अफगान सेना के प्रमुख फसीहुद्दीन फितरत ने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि यदि कोई भी सैन्य गतिविधि दोबारा हुई तो जवाब और भी भयानक होगा। उन्होंने कहा हम किसी भी आक्रामकता का जवाब दिए बिना नहीं छोड़ेंगे। अगर हमला दोहराया गया तो इस्लामाबाद समेत अन्य प्रमुख शहर भी निशाने पर होंगे।”

    सीमा पर तैयारियाँ

    सिर्फ हवाई हमले तक सीमित नहीं अफगान सेना ने सीमावर्ती इलाकों में टैंक और भारी हथियार तैनात कर दिए हैं। किसी भी संभावित जवाबी हमले के लिए इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। सुरक्षा विश्लेषक अब्दुल सादिक हामिदजोय का कहना है कि तालिबान पिछले चार दशकों से युद्धरत रहे हैं और उनके पास आधुनिक सैन्य क्षमताओं से निपटने का अनुभव है।

    बढ़ता क्षेत्रीय संकट

    काबुल और इस्लामाबाद की इस भिड़ंत ने वैश्विक समुदाय की चिंताएं बढ़ा दी हैं। दोनों देश एक-दूसरे पर आतंकवाद को पनाह देने और जवाबी हमलों के आरोप लगाते रहे हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि यह संघर्ष तुरंत नियंत्रित नहीं हुआ तो यह पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है। फिलहाल पाकिस्तान की ओर से हमले के नुकसान को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन दोनों देशों की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं।

  • पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव पर रूस और चीन ने संभाला मोर्चा, युद्धविराम की अपील

    पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव पर रूस और चीन ने संभाला मोर्चा, युद्धविराम की अपील



    नई दिल्ली। पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव पर रूस और चीन ने संभाला मोर्चा, युद्धविराम की अपील
    नई दिल्ली। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड रेखा के पास बढ़ते सैन्य टकराव के बीच रूस और चीन ने दोनों देशों से तुरंत युद्धविराम और राजनयिक समाधान की अपील की है।

    रूस का बयान
    रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि दोनों देशों के नागरिक और सैन्य बल हताहत हुए हैं।

    उन्होंने अफगानिस्तान और पाकिस्तान से खतरनाक टकराव रोकने और सभी मतभेदों को राजनीतिक और कूटनीतिक माध्यम से सुलझाने का आग्रह किया।

    चीन की अपील
    चीन ने भी दोनों पक्षों से बातचीत और युद्धविराम पर जोर दिया। इसके अलावा कई अन्य देश भी संयम बरतने और तत्काल शांति स्थापित करने की अपील कर चुके हैं।

    संयुक्त राष्ट्र की चिंता
    संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने स्थिति पर गहरी चिंता जताई। उनके प्रवक्ता ने कहा कि सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन और नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की गई है।

    तालिबान सरकार का रुख
    तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने कंधार में कहा कि अफगान सरकार बार-बार शांतिपूर्ण समाधान पर जोर देती रही है और अभी भी बातचीत के माध्यम से समस्या का हल चाहती है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच मौजूदा विवाद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़ा है।
    पाकिस्तान लंबे समय से तालिबानी सरकार से टीटीपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करता रहा है।

    सीमा और डूरंड रेखा
    ब्रिटिश शासन के दौरान खींची गई विवादित 2,611 किलोमीटर लंबी सीमा, जिसे डूरंड रेखा कहा जाता है, समय-समय पर दोनों देशों के बीच तनाव और गोलीबारी का कारण रही है। अफगानिस्तान की मौजूदा तालिबानी सरकार इसे मान्यता नहीं देती और इस समझौते को समाप्त करने की मांग करती रही है।

    हाल की घटनाएँ
    इस्लामाबाद में दो वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, सीमा पर अफगान सेना ने कुछ चौकियों पर सफेद झंडे लहराए, जिसे आमतौर पर गोलीबारी रोकने और शांति स्थापित करने का संकेत माना जाता है।

  • समलैंगिकता ! इस देश में खुलेआम किस करने पर दो महिलाएं गिरफ्तार

    समलैंगिकता ! इस देश में खुलेआम किस करने पर दो महिलाएं गिरफ्तार

    कंपाला। दुनिया में आज भी कई ऐसे देश हैं, जिनमें समलैंगिकता को जघन्य अपराध माना जाता है। अफ्रीकी देश युगांडा भी उन्हीं देशों में से एक है। यहां पर दो युवा महिलाओं को खुले आम प्यार का इजहार करना महंगा पड़ गया। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, दोनों महिलाओं को किस करते हुए देखा गया, चूंकि यह देश के कानून के खिलाफ है, इसलिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

    पुलिस के बयान के मुताबिक एक महिला की उम्र करीब 22 साल है, जबकि दूसरी की उम्र करीब 21 साल है। दोनों को देश के अरुआ शहर से गिरफ्तार किया गया है, जहां पर वह खुले आम किस करने और असामान्य कृत्यों में संलिप्त थीं, जिन्हें यौन प्रकृति का माना जाता है।

    आपको बता दें, युगांडा में वर्ष 2023 में एंटी होमोसेक्सुएलिटी एक्ट लागू किया गया है। देश की सरकार द्वारा लागू किए गए इस कानून का पश्चिमी देशों ने भरपूर विरोध किया था लेकिन यहां की सरकार सबसे कठोर एलजीबीटीक्यू विरोधी कानून लागू करने पर लगी हुई है। इस कानून के तहत समलैंगिक संबंध रखने वाले लोगों को आजीवन कारावास की सजा दी जा सकती है, जबकि गंभीर मामलों में मृत्युदंड का भी प्रावधान है।

    बार-बार पकड़े जाने पर मृत्युदंड का प्रावधान
    समलैंगिक संबंधों को लेकर युगांड़ा का कानून सबसे ज्यादा कठोर है। 2023 में पारित किए गए कानून के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति बार-बार समलैंगिक संबंध बनाते पकड़ा जाता है, या ऐसा समलैंगिक संबंध जिससे लाइलाज बीमारी फैलती हो, नाबालिग, बुजुर्ग या दिव्यांग व्यक्ति के साथ समलैंगिक संबंध बनाने पर व्यक्ति को मृत्युदंड दिया जा सकता है।

    गौरतलब है कि युगांडा पूर्वी अफ्रीका का एक रूढ़िवादी और मुख्यतः ईसाई बहुल देश है। इस कानून के कारण मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में व्यापक आक्रोश फैल गया था और संयुक्त राष्ट्र तथा पश्चिमी देशों ने इसकी निंदा की थी। विश्व बैंक ने देश को दी जाने वाली वित्तीय सहायता निलंबित कर दी थी, हालांकि 2025 के मध्य में इसे फिर से बहाल कर दिया गया। इस महीने की शुरुआत में, एक युगांडा अदालत ने “गंभीर समलैंगिकता” श्रेणी के तहत आरोपित पहले व्यक्ति के खिलाफ मामला खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि लंबी न्यायिक हिरासत के कारण उसकी मानसिक स्थिति अस्थिर हो गई थी।

  • विदेश नीति पर फोकस, इजरायल यात्रा के अनुभव साझा करते हुए पीएम का बड़ा संदेश

    विदेश नीति पर फोकस, इजरायल यात्रा के अनुभव साझा करते हुए पीएम का बड़ा संदेश


    नई दिल्ली। दो दिवसीय इजरायल दौरे से लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारत–इजरायल साझेदारी आने वाले समय में और मजबूत होगी। उन्होंने दौरे की झलकियों वाला एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें एयरपोर्ट पर गर्मजोशी से स्वागत, भारतीय समुदाय से मुलाकात, सांस्कृतिक कार्यक्रम और इजरायली संसद में उनके संबोधन के दृश्य शामिल हैं।

    संसद में संबोधन से लेकर सर्वोच्च सम्मान तक
    वीडियो में इजरायली संसद में पीएम के स्वागत, तालियों की गूंज और दोनों देशों के बीच हुए अहम समझौतों के हस्ताक्षर के पल दिखाए गए। प्रधानमंत्री ने लिखा, “इजरायल की खास यात्रा की कुछ खास बातें… अच्छी बातचीत और मजबूत सहयोग। हमारी पार्टनरशिप आगे बढ़ती रहे!”

    रक्षा, तकनीक और व्यापार में नई गति
    दौरे के दौरान रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, तकनीक और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए इंडि‍या-मिडिल ईस्‍ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) और भारत-इजरायल-यूएई-यूएसए (आई2यू2) पहल को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

    अहम एमओयू: खनिज, समुद्री विरासत और यूपीआई
    खनिज अन्वेषण में उन्नत जियोफिजिकल और एआई तकनीक के उपयोग पर सहयोग के लिए समझौता हुआ। गुजरात के लोथल स्थित नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के विकास को लेकर भी सहमति बनी, जिससे साझा समुद्री विरासत को बढ़ावा मिलेगा।

    डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में बड़ी पहल के तहत एनपीसीआई इंटरनेशनल और इजरायल की एमएएसएवी के बीच यूपीआई को लागू करने पर समझौता हुआ। इससे दोनों देशों के बीच सीमा-पार रेमिटेंस को आसान बनाने की दिशा में कदम बढ़ेगा।

    कृषि, शिक्षा और वित्तीय सहयोग
    भारत-इजरायल इनोवेशन सेंटर फॉर एग्रीकल्चर की स्थापना के लिए आईसीएआर और एमएएसएचएवी के बीच समझौता हुआ। मत्स्य पालन और जलीय कृषि में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

    वित्तीय क्षेत्र में International Financial Services Centres Authority और Israel Securities Authority के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। इसके अलावा एआई आधारित शिक्षा, वाणिज्यिक मध्यस्थता और विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक सहयोग को लेकर भी कई समझौते हुए, जिनमें Nalanda University और Hebrew University of Jerusalem के बीच एमओयू प्रमुख है।