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  • पाकिस्तान में न्यायपालिका पर सवाल: फर्जी डिग्री के आधार पर फैसले सुनाते रहे जज, पद से हटाए गए

    पाकिस्तान में न्यायपालिका पर सवाल: फर्जी डिग्री के आधार पर फैसले सुनाते रहे जज, पद से हटाए गए

    इस्लामाबाद। पाकिस्तान की न्यायिक व्यवस्था से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने नियुक्तियों की पारदर्शिता और डिग्री सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तारिक महमूद जहांगीरी नामक जज को कथित तौर पर फर्जी कानून की डिग्री के आधार पर वर्षों तक पद पर बने रहने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया है।

    यह कार्रवाई इस्लामाबाद हाई कोर्ट के 116 पन्नों के विस्तृत फैसले के बाद की गई, जिसमें अदालत ने मामले को “गंभीर संस्थागत धोखाधड़ी” बताया।

    डिग्री शुरू से ही अवैध पाई गई

    अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा कि जहांगीरी की लॉ डिग्री वैध नहीं थी, इसलिए उनकी न्यायिक नियुक्ति भी कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं मानी जा सकती। कोर्ट के अनुसार, किसी भी न्यायिक पद के लिए शैक्षणिक योग्यता की प्रामाणिकता अनिवार्य है, और इस मामले में वही मूल आधार ही संदिग्ध पाया गया।

    विश्वविद्यालय रिकॉर्ड से हुआ खुलासा

    मीडिया रिपोर्ट, विशेषकर डॉन में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, अदालत को कराची विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार से आधिकारिक रिकॉर्ड प्राप्त हुए। इन दस्तावेजों ने प्रस्तुत किए गए प्रमाणपत्रों को पूरी तरह फर्जी साबित कर दिया।

    जांच में यह भी सामने आया कि:

    • 1988 में जहांगीरी ने कथित तौर पर फर्जी नामांकन संख्या के साथ परीक्षा दी।

    • परीक्षा के दौरान नकल करते पकड़े गए और उन पर तीन वर्ष का प्रतिबंध लगाया गया।

    • बाद में उन्होंने दंड स्वीकार नहीं किया और किसी अन्य छात्र के एनरोलमेंट नंबर का इस्तेमाल कर दोबारा परीक्षा देने का प्रयास किया।

    कॉलेज में प्रवेश का कोई रिकॉर्ड नहीं

    सुनवाई के दौरान संबंधित लॉ कॉलेज प्रशासन ने अदालत को बताया कि जहांगीरी ने संस्थान में कभी औपचारिक प्रवेश ही नहीं लिया था। अदालत ने उन्हें मूल दस्तावेज पेश करने और अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया, लेकिन वे ऐसा करने में असफल रहे।

    सुनवाई टालने की कोशिशें भी खारिज

    जहांगीरी ने फुल बेंच से सुनवाई की मांग, चीफ जस्टिस को मामले से अलग करने की अपील और कार्यवाही स्थगित कराने जैसे कई प्रयास किए। अदालत ने इन कदमों को “मामले को लंबा खींचने की रणनीति” बताते हुए खारिज कर दिया।

    अदालत की सख्त टिप्पणी

    कोर्ट ने कहा कि जब याचिकाकर्ता पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत कर चुका था, तब संबंधित जज की जिम्मेदारी थी कि वह अपनी डिग्री की वैधता सिद्ध करें। ऐसा न कर पाने पर उन्हें पद से हटाना आवश्यक हो गया।

    पाकिस्तान में छिड़ी नई बहस

    यह मामला अब पाकिस्तान में न्यायिक नियुक्तियों की पारदर्शिता, शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन और संस्थागत जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस का कारण बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद नियुक्ति प्रक्रिया की जांच और कड़े सत्यापन तंत्र की मांग तेज हो सकती है।

  • ट्रंप टैरिफ अमान्य होने के बाद आयातकों ने की रिफंड की मांग… निचली अदालतों में 1500 से ज्यादा केस दायर

    ट्रंप टैरिफ अमान्य होने के बाद आयातकों ने की रिफंड की मांग… निचली अदालतों में 1500 से ज्यादा केस दायर


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (American Supreme Court) द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) के ग्लोबल टैरिफ (Global Tariff) को अमान्य घोषित करने के बाद, इन शुल्कों को चुनौती देने वाले व्यवसायों ने निचली अदालतों में कानूनी कार्यवाही फिर से शुरू करने का अनुरोध किया है ताकि वे सरकार से रिफंड पाने की प्रक्रिया शुरू कर सकें। मंगलवार को, उन चुनौतियों को देने वालों के वकीलों, जिन्होंने न्यायालय के समक्ष सफलतापूर्वक मुकदमा लड़ा था, यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट से अनुरोध किया कि वह पिछले साल के अपने उस फैसले को औपचारिक रूप दे, जिसमें ट्रंप के तथाकथित “पारस्परिक” टैरिफ को अवैध घोषित किया गया था।

    इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट के बहुमत ने 20 फरवरी को बरकरार रखा था। इसके बाद यह मामला यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में वापस जाएगा, जहाँ अगले कदम तय होंगे, जिसमें यह भी शामिल होगा कि क्या आयातकों को उनका पैसा वापस मिलना चाहिए।


    रिफंड प्रक्रिया शुरू करने की मांग

    छोटे व्यवसायों के समूह के वकीलों ने ट्रेड कोर्ट में तीन जजों के पैनल से एक नया निषेधाज्ञा जारी करने का अनुरोध दाखिल किया, जो प्रशासन को टैरिफ नीति लागू करने से रोके और रिफंड प्रक्रिया शुरू करे।

    ब्लूमबर्ग न्यूज के विश्लेषण के अनुसार, अब तक 1,500 से अधिक रिफंड मुकदमे दायर किए जा चुके हैं। इनमें से अधिकांश मुकदमे उन आयातकों ने दायर किए थे, जब सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर में मामले की सुनवाई की थी, और ट्रेड कोर्ट ने उन्हें तब तक रोक दिया था जब तक जज फैसला नहीं दे देते।


    त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता

    बुधवार को, उन अन्य कंपनियों के वकीलों ने जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करते हुए रिफंड मुकदमे दायर किए थे, ट्रेड कोर्ट से इस सप्ताह या जल्द से जल्द सुनवाई आयोजित करने का अनुरोध किया। उन्होंने तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए तर्क दिया कि “वादी को और नुकसान और मुकदमेबाजी की जटिलता से बचा जा सके, जो हर गुजरते दिन के साथ बढ़ती जाती है।” पिछले साल लिखित दस्तावेजों में, न्याय विभाग के वकीलों ने ट्रेड कोर्ट को बताया था कि अगर मुकदमा जीत जाते हैं तो उन्हें ब्याज सहित रिफंड मिलेगा।


    ट्रंप के बयान से पैदा हुई अनिश्चितता

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले की घोषणा के तुरंत बाद, ट्रंप ने ऐसी टिप्पणी की जिससे संकेत मिला कि सरकार रिफंड का भुगतान करने का विरोध कर सकती है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इस पर मुकदमा चलाना होगा,” और यह भी अनुमान लगाया कि इस मुद्दे को सुलझने में वर्षों लग सकते हैं। लिबर्टी जस्टिस सेंटर के वरिष्ठ वकील जेफरी श्वाब ने कहा कि राष्ट्रपति के बयानों ने “चीजों को थोड़ा धुंधला कर दिया है,” इसलिए वे ट्रेड कोर्ट से जल्द से जल्द स्पष्टता की उम्मीद कर रहे हैं।


    व्यापक प्रभाव की संभावना

    छोटे व्यवसायों के वकीलों ने मंगलवार को ट्रेड कोर्ट को बताया कि इस मामले में अपनाई गई कोई भी रिफंड प्रक्रिया दावा करने वाली बाकी कंपनियों के लिए “जल्दी राहत प्रदान करने का खाका” बन सकती है। ट्रेड वकीलों का मानना है कि प्रशासन के लिए रिफंड का विरोध करना कानूनी रूप से कठिन होगा, क्योंकि न्याय विभाग ने न केवल मूल वादियों को भुगतान किए जाने की बात कही थी, बल्कि यह भी कहा था कि सरकार अन्य मामलों में रिफंड से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति जताएगी।


    नए टैरिफ की चुनौतियां

    सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट के तहत अवैध रूप से टैरिफ लगाए थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की घोषणा के तुरंत बाद, ट्रंप ने एक अलग प्राधिकरण – 1974 के ट्रेड एक्ट के तहत वैश्विक टैरिफ का एक नया दौर लगाने वाली घोषणा पर हस्ताक्षर किए। कानूनी विशेषज्ञों ने भविष्यवाणी की है कि प्रशासन को उन शुल्कों को भी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

  • ट्रंप ने अपने सबसे लंबे संबोधन में बोले 5 बड़े झूठ… US के मीडिया ने ही किया फैक्ट चेक

    ट्रंप ने अपने सबसे लंबे संबोधन में बोले 5 बड़े झूठ… US के मीडिया ने ही किया फैक्ट चेक


    वॉशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन (State of the Union Address) में सबसे लंबा भाषण देकर इतिहास रच दिया। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से 8 जंगें रुकवाने का दावा किया तो वहीं अर्थव्यवस्था, टैरिफ वॉर समेत कई मसलों पर बढ़-चढ़कर दावे किए। डोनाल्ड ट्रंप दावे करने में आगे रहे हैं, लेकिन अकसर गलत तथ्य दे देते हैं। ऐसा ही मंगलवार की रात को भी हुआ, जब उन्होंने जनता के सामने कई गलत तथ्य रख दिए। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के बोले गए झूठ ज्यादातर देर तक टिक नहीं सके। अमेरिका के ही कई अखबारों ने उनका फैक्ट चेक कर दिया है।


    अर्थव्यवस्था, नौकरी और निवेश पर क्या गलत दावा

    डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि हमारी इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है। अमेरिकी दुनिया में हॉटेस्ट है। उनका दावा था कि हमारे पास काफी नौकरियां हैं। पहले के मुकाबले अमेरिका में सबसे ज्यादा लोगों के पास जॉब्स हैं। यह इतिहास में सबसे अधिक है। लेकिन डेटा कुछ और कहता है। अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार 2025 में अमेरिका में नौकरी पाने वालों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है। यह आंकड़ा कोरोना काल के किसी भी साल के मुकाबले कम रहा है। अमेरिकी लेबर ब्यूरो के अनुसार 2025 में अमेरिका में सिर्फ 1 लाख 81 हजार ही नई नौकरियां जुड़ीं।


    एरिना के कत्ल में प्रवासी शख्स के शामिल होने का दावा, क्या सच

    अमेरिकी लीडर ने यह दावा भी किया कि एरिना जारुस्का का कत्ल एक प्रवासी ने किया था। उनका कहना कि एक खूंखार अपराधी ने इस कांड को अंजाम दिया, जो खुली सीमाओं से आ गया था। वह यहां मुक्त होकर घूम रहा था। लेकिन उनका यह फैक्ट भी गलत निकला। एरिना के कत्ल में गिरफ्तार डिकार्लोस ब्राउन जूनियर कोई प्रवासी नहीं है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि अमेरिका में बाहर से आने वाले लोग ही ज्यादातर हिंसा के जिम्मेदार रहे हैं।


    बिजली की कीमत कम होने की बात निकली गलत

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका में की कीमतें घट रही हैं। इतनी कमी आई है कि यकीन नहीं होता। लेकिन सच्चाई कुछ और है। अमेरिका में प्रति परिवार ऊर्जा का बिल बीते एक साल में 6.7 पर्सेंट तक बढ़ गया है। वह लगातार कहते रहे हैं कि देश में बिजली की कीमत कम हो जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। सच्चाई यह है कि डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद से कई यूटिलिटी कंपनियों ने मांग की है कि रेट बढ़ाए जाएं। यह इजाफा हुआ भी है। कहा जा रहा है कि 2035 तक 18 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी।


    गैस वाला बयान भी ट्रंप का झूठा ही साबित हुआ

    ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका में गैस की कीमत अब 1.99 डॉलर प्रति गैलन तक हो गई है। लेकिन बीते कुछ दिन पहले पर्यावरण को लेकर लगी पाबंदियों के चलते इसमें इजाफा होने की चर्चा है। इससे स्पष्ट है कि आने वाला समय रेट बढ़ने का रहेगा। यही नहीं कुछ राज्यों में अब भी कीमत 4.60 डॉलर प्रति गैलन है। इस तरह ट्रंप का दावा यहां भी गलत निकला है।


    8 जंगें रुकने का दावा भी झूठा, गाजा में अब भी हो रहीं मौतें

    अब बात करते हैं, डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध वाले दावों की। उन्होंने एक बार फिर से कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के शुरुआती 10 महीनों में 8 जंगें रुकवा दीं। अब इस मामले में भी सच्चाई यह है कि अमेरिका का दखल 6 जंगों में ही रहा है। अन्य दो युद्ध ऐसे रहे हैं, जिसमें उसका कोई रोल नहीं रहा। इसके अलावा कई लोगों ने तो इन 6 में भी उसे कोई क्रेडिट नहीं दिया है। ट्रंप ने गाजा में सीजफायर का दावा किया है, लेकिन वहां अब भी इजरायल के हमले जारी हैं और हर दिन ही कुछ मारे जा रहे हैं।
     

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन (State of the Union Address) में सबसे लंबा भाषण देकर इतिहास रच दिया। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से 8 जंगें रुकवाने का दावा किया तो वहीं अर्थव्यवस्था, टैरिफ वॉर समेत कई मसलों पर बढ़-चढ़कर दावे किए। डोनाल्ड ट्रंप दावे करने में आगे रहे हैं, लेकिन अकसर गलत तथ्य दे देते हैं। ऐसा ही मंगलवार की रात को भी हुआ, जब उन्होंने जनता के सामने कई गलत तथ्य रख दिए। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के बोले गए झूठ ज्यादातर देर तक टिक नहीं सके। अमेरिका के ही कई अखबारों ने उनका फैक्ट चेक कर दिया है।


    अर्थव्यवस्था, नौकरी और निवेश पर क्या गलत दावा

    डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि हमारी इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है। अमेरिकी दुनिया में हॉटेस्ट है। उनका दावा था कि हमारे पास काफी नौकरियां हैं। पहले के मुकाबले अमेरिका में सबसे ज्यादा लोगों के पास जॉब्स हैं। यह इतिहास में सबसे अधिक है। लेकिन डेटा कुछ और कहता है। अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार 2025 में अमेरिका में नौकरी पाने वालों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है। यह आंकड़ा कोरोना काल के किसी भी साल के मुकाबले कम रहा है। अमेरिकी लेबर ब्यूरो के अनुसार 2025 में अमेरिका में सिर्फ 1 लाख 81 हजार ही नई नौकरियां जुड़ीं।


    एरिना के कत्ल में प्रवासी शख्स के शामिल होने का दावा, क्या सच

    अमेरिकी लीडर ने यह दावा भी किया कि एरिना जारुस्का का कत्ल एक प्रवासी ने किया था। उनका कहना कि एक खूंखार अपराधी ने इस कांड को अंजाम दिया, जो खुली सीमाओं से आ गया था। वह यहां मुक्त होकर घूम रहा था। लेकिन उनका यह फैक्ट भी गलत निकला। एरिना के कत्ल में गिरफ्तार डिकार्लोस ब्राउन जूनियर कोई प्रवासी नहीं है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि अमेरिका में बाहर से आने वाले लोग ही ज्यादातर हिंसा के जिम्मेदार रहे हैं।


    बिजली की कीमत कम होने की बात निकली गलत

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका में की कीमतें घट रही हैं। इतनी कमी आई है कि यकीन नहीं होता। लेकिन सच्चाई कुछ और है। अमेरिका में प्रति परिवार ऊर्जा का बिल बीते एक साल में 6.7 पर्सेंट तक बढ़ गया है। वह लगातार कहते रहे हैं कि देश में बिजली की कीमत कम हो जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। सच्चाई यह है कि डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद से कई यूटिलिटी कंपनियों ने मांग की है कि रेट बढ़ाए जाएं। यह इजाफा हुआ भी है। कहा जा रहा है कि 2035 तक 18 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी।


    गैस वाला बयान भी ट्रंप का झूठा ही साबित हुआ

    ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका में गैस की कीमत अब 1.99 डॉलर प्रति गैलन तक हो गई है। लेकिन बीते कुछ दिन पहले पर्यावरण को लेकर लगी पाबंदियों के चलते इसमें इजाफा होने की चर्चा है। इससे स्पष्ट है कि आने वाला समय रेट बढ़ने का रहेगा। यही नहीं कुछ राज्यों में अब भी कीमत 4.60 डॉलर प्रति गैलन है। इस तरह ट्रंप का दावा यहां भी गलत निकला है।


    8 जंगें रुकने का दावा भी झूठा, गाजा में अब भी हो रहीं मौतें

    अब बात करते हैं, डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध वाले दावों की। उन्होंने एक बार फिर से कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के शुरुआती 10 महीनों में 8 जंगें रुकवा दीं। अब इस मामले में भी सच्चाई यह है कि अमेरिका का दखल 6 जंगों में ही रहा है। अन्य दो युद्ध ऐसे रहे हैं, जिसमें उसका कोई रोल नहीं रहा। इसके अलावा कई लोगों ने तो इन 6 में भी उसे कोई क्रेडिट नहीं दिया है। ट्रंप ने गाजा में सीजफायर का दावा किया है, लेकिन वहां अब भी इजरायल के हमले जारी हैं और हर दिन ही कुछ मारे जा रहे हैं।

  • पाकिस्तानी यूनिवर्सिटी का अजीब ‘फरमान’ वायरल: साथ दिखे लड़का-लड़की तो करा देंगे निकाह?

    पाकिस्तानी यूनिवर्सिटी का अजीब ‘फरमान’ वायरल: साथ दिखे लड़का-लड़की तो करा देंगे निकाह?


    लाहौर।
    हमदर्द यूनिवर्सिटी इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा और ट्रोलिंग का विषय बनी हुई है। वजह बना रमजान के दौरान जारी बताया जा रहा एक कथित नोटिस, जिसमें कैंपस में लड़के और लड़की के साथ खड़े होने पर आपत्ति जताने और यहां तक कि उनका “निकाह” कराए जाने जैसी बात लिखी होने का दावा किया जा रहा है।


    वायरल नोटिस में क्या कहा गया?

    सोशल मीडिया पर फैल रहे स्क्रीनशॉट के अनुसार, छात्रों को संबोधित करते हुए कहा गया है कि पवित्र महीने के दौरान किसी भी “कपल” का कैंपस में साथ खड़ा होना सख्त मना है।

    कथित तौर पर इसमें चेतावनी दी गई कि यदि कोई लड़का-लड़की साथ पाया गया तो उनका “तुरंत निकाह” करवा दिया जाएगा।

    इसके साथ ही छात्रों को संस्थान की “पवित्रता बनाए रखने” और अनावश्यक नजदीकी से बचने की सलाह देने की बात भी कही गई है।



    वायरल सामग्री में मजाकिया अंदाज में यह दावा भी किया जा रहा है कि नियम तोड़ने वालों को वलीमा (रिसेप्शन) का खर्च खुद उठाना होगा।


    असली या फर्जी? प्रामाणिकता पर सवाल

    इस कथित नोटिस की सत्यता को लेकर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    कई लोग इसे फर्जी बता रहे हैं और कह रहे हैं कि ऐसा कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ। विश्वविद्यालय की ओर से भी अब तक कोई औपचारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, जिससे मामला और चर्चा में आ गया है।


    सोशल मीडिया पर यूजर्स ने लिए मजे

    नोटिस वायरल होते ही इंटरनेट पर मीम्स और मजेदार प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई—

    • “रिश्ता कराने का तरीका थोड़ा कैज़ुअल है।”

    • “जिनके घर वाले नहीं मान रहे, उनके लिए सुनहरा मौका!”

    • “अब तो क्रश के पास जाकर खड़े होना पड़ेगा।”

    • “ऐसी यूनिवर्सिटी में एडमिशन कैसे लें?”

    छात्रों और कंटेंट क्रिएटर्स ने रील्स बनाकर इस कथित आदेश का हास्यपूर्ण अंदाज में मजाक उड़ाया, जिससे मामला तेजी से फैल गया।


    बहस का मुद्दा क्या बना?

    चाहे नोटिस असली हो या फर्जी, लेकिन इस घटना ने कैंपस अनुशासन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सोशल मीडिया पर अपुष्ट सूचनाओं के तेज प्रसार को लेकर नई बहस छेड़ दी है—कि बिना पुष्टि के वायरल सामग्री किस तरह सार्वजनिक धारणा को प्रभावित कर सकती है।

  • नेतन्याहू ने मोदी को बताया ‘भाई’, कट्टरपंथ के खिलाफ ‘आयरन एलायंस’ बनाने की घोषणा

    नेतन्याहू ने मोदी को बताया ‘भाई’, कट्टरपंथ के खिलाफ ‘आयरन एलायंस’ बनाने की घोषणा


    यरुशलम।
    इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu) ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Indian Prime Minister Narendra Modi) की यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि वह इससे पहले कभी इतने भावुक नहीं हुए। इजराइल की संसद नेसेट में अपने संबोधन के दौरान नेतन्याहू ने मोदी को “महान मित्र” और “विश्व मंच के बड़े नेता” की संज्ञा दी।

    उन्होंने कहा, “नरेन्द्र, मेरे प्रिय मित्र, आपके यहां आने से मैं काफी भावुक हूं… मैं यह कहने का साहस करता हूं कि आप केवल मित्र ही नहीं, बल्कि भाई जैसे हैं।” नेतन्याहू ने दोनों देशों के बीच तकनीकी और रणनीतिक सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना और सहयोग कई गुना बढ़ा है।

    ‘कट्टरपंथी इस्लाम’ के खिलाफ आयरन एलायंस

    नेतन्याहू ने अपने भाषण में कहा कि भारत और इजराइल “कट्टरपंथी इस्लाम” के खतरे के खिलाफ एक “आयरन एलायंस” (मजबूत गठबंधन) का निर्माण करेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देश आज पहले से अधिक मजबूत हैं और साझा मूल्यों — प्रगति, मानव गरिमा और पारस्परिक सम्मान — में विश्वास रखते हैं।

    उन्होंने 07 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद भारत के समर्थन के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया। नेतन्याहू ने इजराइल की कार्रवाई को “रक्षात्मक युद्ध” बताते हुए कहा कि यह मानवता और सत्य के भविष्य के लिए संघर्ष है।

    आईएमईसी और नए समझौते

    नेतन्याहू ने कहा कि भारत और इजराइल मिलकर अमेरिका समर्थित इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकॉनमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) पहल को आगे बढ़ा रहे हैं। इस परियोजना का उद्देश्य समुद्र और रेल मार्ग के जरिए भारत को मध्य पूर्व के रास्ते यूरोप से जोड़ना है।

    उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर तभी सफल हो सकता है जब इसके मार्ग में स्थिर और सुरक्षित देश हों, और इस धुरी पर भारत और इजराइल से अधिक सुरक्षित देश कोई नहीं है।

    नेतन्याहू ने यह भी बताया कि यात्रा के दौरान पर्यटन, संस्कृति, कृषि, जल प्रबंधन और आव्रजन जैसे क्षेत्रों में कई समझौतों को लागू किया जाएगा। उन्होंने इसे अब्राहम समझौते की भावना के अनुरूप शांति और सहयोग की दिशा में अहम कदम बताया।

    इससे पहले, तेल अवीव एयरपोर्ट पर इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपनी पत्नी सारा नेतन्याहू के साथ पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। नेतन्याहू के आमंत्रण पर 25-26 फरवरी तक हो रहा यह दौरा भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

    तेल अवीव पहुंचने पर सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ उनका स्वागत किया गया। भारतीय प्रवासी समुदाय में इस दौरे को लेकर खासा उत्साह देखा गया। प्रवासियों ने इसे दोनों देशों के रिश्तों के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। इसी मौके पर भारतीय मूल की नेत्रहीन गायिका दीना सेमटे ने पीएम मोदी के समक्ष प्रस्तुति दी। मणिपुर से ताल्लुक रखने वाली दीना ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री के सामने प्रस्तुति देने पर गर्व है और संगीत लोगों को जोड़ने का माध्यम है।

    उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद यह मोदी का दूसरा इजराइल दौरा है। इससे पहले वे 2017 में इजराइल गए थे, जो किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा थी। वर्ष 2018 में नेतन्याहू ने भारत का दौरा कर संबंधों को और मजबूती दी थी।

    इस बार की यात्रा को केवल द्विपक्षीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत-इजराइल संबंधों की लंबी ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा माना जा रहा है। दोनों देश रक्षा, प्रौद्योगिकी, जल प्रबंधन, कृषि और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। पीएम मोदी ने नेतन्याहू के साथ मुलाकात में टेक्नोलॉजी, वॉटर मैनेजमेंट, एग्रीकल्चर, टैलेंट पार्टनरशिप और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।

    इस यात्रा को भारत–इजराइल संबंधों में नई मजबूती और रणनीतिक साझेदारी के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।

  • अमेरिकी टैरिफ से सोलर शेयरों में बड़ी गिरावट, वारी और प्रीमियर एनर्जीज टॉप लूजर..

    अमेरिकी टैरिफ से सोलर शेयरों में बड़ी गिरावट, वारी और प्रीमियर एनर्जीज टॉप लूजर..

    नई दिल्ली ।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बुधवार को भारतीय सोलर आयात पर 126 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारतीय सोलर शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। यह टैरिफ उन देशों पर लगाया गया है जो अनुचित रूप से सब्सिडी देते हैं और अमेरिका के घरेलू सोलर उद्योग को नुकसान पहुंचाते हैं।

    इस फैसले के बाद वारी एनर्जीज के शेयर में कारोबार के दौरान 15 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। खबर लिखे जाने तक हल्की रिकवरी के बाद यह 10.83 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,697 रुपए पर कारोबार कर रहा था।

    प्रीमियर एनर्जीज का शेयर भी दबाव में रहा और फिलहाल यह 6.19 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 728.95 रुपए पर था। कारोबार के दौरान इस शेयर में करीब 14 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। इसके अलावा विक्रम सोलर का शेयर 5.67 प्रतिशत कमजोर होकर 174 रुपए पर था, जबकि कारोबार के दौरान 7.76 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई।

    ट्रंप प्रशासन ने भारत के अलावा इंडोनेशिया और लाओस के सोलर उत्पादों पर भी क्रमश: 143 प्रतिशत और 81 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। 2025 की पहली छमाही में अमेरिका के सोलर मॉड्यूल आयात में इन तीन देशों की हिस्सेदारी कुल 57 प्रतिशत रही है। 2024 में अमेरिका को भारतीय सोलर निर्यात की वैल्यू 792.6 मिलियन डॉलर थी, जो 2022 की तुलना में नौ गुना अधिक है।

    अमेरिकी प्रशासन ने यह कार्रवाई यूएस सोलर ग्रुप की याचिका के आधार पर की है। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि कुछ देशों की सब्सिडी अमेरिकी सोलर उद्योग को नुकसान पहुंचा रही है।

    निवेशकों के लिए यह टैरिफ भारतीय सोलर कंपनियों के लिए चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि आगामी कारोबारी सत्र में बिकवाली और दबाव जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।

  • अमेरिका ने भारत के सोलर पैनलों पर लगाया 126% टैरिफ, निर्यात और व्यापार वार्ता पर पड़ेगा असर

    अमेरिका ने भारत के सोलर पैनलों पर लगाया 126% टैरिफ, निर्यात और व्यापार वार्ता पर पड़ेगा असर


    नई दिल्ली। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आयात होने वाले सोलर पैनलों पर 126% की शुरुआती टैरिफ लगाने का फैसला किया है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग का आरोप है कि भारत सरकार ने घरेलू निर्माताओं को अनुचित सब्सिडी दी, जिससे वे कम कीमत पर उत्पाद बेचकर अमेरिकी कंपनियों को नुकसान पहुंचा रहे थे। इसी कार्रवाई के तहत इंडोनेशिया पर 86% से 143% और लाओस पर 81% तक शुल्क लगाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

    भारतीय निर्यात पर असर

    ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले से भारतीय सोलर कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में कारोबार करना कठिन हो सकता है। वर्ष 2024 में भारत ने अमेरिका को 792.6 मिलियन डॉलर करीब 6,500 करोड़ रुपये के सोलर उत्पाद निर्यात किए, जो 2022 की तुलना में नौ गुना अधिक है। दूसरी ओर, अमेरिका में सोलर प्रोजेक्ट विकसित करने वाली कंपनियों और उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ने की आशंका है।

    सामान्य टैरिफ से अलग कदम

    यह शुल्क ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए उन सामान्य टैरिफ से अलग है, जिन्हें हाल ही में अदालत ने खारिज कर दिया था। अदालत के फैसले के बाद ट्रंप ने नए 10% शुल्क लागू किए थे। मौजूदा सोलर टैरिफ एक अलग जांच प्रक्रिया के तहत प्रस्तावित हैं।

    अंतिम फैसला 6 जुलाई तक
    अमेरिका की कुछ सोलर निर्माता कंपनियों के समूह ने घरेलू उद्योग की सुरक्षा के लिए जांच की मांग की थी। इस मामले में अंतिम निर्णय 6 जुलाई तक आने की संभावना है। गौरतलब है कि 2025 की पहली छमाही में अमेरिका में आयात होने वाले 57% सोलर मॉड्यूल भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आए थे। ऐसे में भारी शुल्क का असर अमेरिकी सौर ऊर्जा क्षेत्र पर भी पड़ सकता है।

    भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर असर

    यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि अमेरिका में टैरिफ की स्थिति स्पष्ट होते ही भारत वार्ता दोबारा शुरू करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि भारत और कनाडा के बीच मुक्त व्यापार समझौते एफटीए के लिए संदर्भ की शर्तों टीओआर को इस सप्ताह के अंत तक अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी 26 फरवरी को भारत दौरे पर आ रहे हैं, और इसी दौरान एफटीए वार्ता औपचारिक रूप से शुरू हो सकती है। उल्लेखनीय है कि 22 फरवरी को भारत और अमेरिका ने वाशिंगटन में प्रस्तावित मुख्य वार्ताकारों की बैठक स्थगित कर दी थी, जिसमें अंतरिम व्यापार समझौते के मसौदे को अंतिम रूप दिया जाना था।

  • दुनिया के सबसे महंगे अमेरिकी युद्धपोत USS पर ‘टॉयलेट संकट’, 4500 सैनिकों की बढ़ी मुश्किलें

    दुनिया के सबसे महंगे अमेरिकी युद्धपोत USS पर ‘टॉयलेट संकट’, 4500 सैनिकों की बढ़ी मुश्किलें

    वॉशिंगटन। दुनिया के सबसे आधुनिक और महंगे परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत ‘USS जेराल्ड आर फोर्ड’ (USS Gerald R. Ford) पर इन दिनों तकनीकी खराबी ने बड़ा संचालन संकट खड़ा कर दिया है। जहाज का सीवेज सिस्टम फेल होने से हजारों सैनिकों को रोजमर्रा की बुनियादी सुविधाओं के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

    650 में से अधिकांश टॉयलेट बंद, लंबी कतारें
    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जहाज पर मौजूद 650 टॉयलेट्स में से ज्यादातर काम नहीं कर रहे हैं। करीब 4,500 सैनिकों को इस्तेमाल के लिए 40–45 मिनट तक लाइन में लगना पड़ रहा है, जिससे जहाज पर तनाव और असंतोष का माहौल बन गया है।
    इस समस्या का खुलासा सबसे पहले The Wall Street Journal की रिपोर्ट में हुआ।

    हाई-टेक सिस्टम ही बना परेशानी की जड़
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहाज में लगा वैक्यूम-आधारित अत्याधुनिक सीवेज सिस्टम बेहद संवेदनशील है। एक वाल्व खराब होने पर पूरा सेक्शन बंद हो जाता है।
    NPR के अनुसार, मरम्मत दल को पाइपों में कपड़े, रस्सियां और ठोस जमाव जैसी चीजें मिल रही हैं, जिन्हें हटाने में घंटों लग जाते हैं। कैल्शियम जमा होने की सफाई पर हर बार लाखों डॉलर खर्च करने पड़ते हैं।

    8 महीने से समुद्र में तैनाती, थकान बढ़ी

    यह युद्धपोत जून 2025 से लगातार समुद्र में तैनात है। सामान्य तौर पर ऐसी तैनाती छह महीने की होती है, लेकिन मौजूदा मिशन लंबा खिंच गया है। रिटायर्ड रियर एडमिरल Mark Montgomery ने कहा कि इतनी लंबी तैनाती क्रू पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ा सकती है।

    मिडिल ईस्ट तनाव के बीच बढ़ी तैनाती
    क्षेत्रीय हालात, खासकर ईरान से जुड़े तनाव के चलते अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी बढ़ाई गई है। इस अभियान का नेतृत्व United States Navy कर रही है, जिसने क्षेत्र में कई युद्धपोत तैनात कर रखे हैं।

    युवा सैनिकों पर मानसिक दबाव

    जहाज पर तैनात बड़ी संख्या में 20–22 वर्ष के युवा सैनिक हैं, जो लंबे समय से परिवार से दूर हैं। ‘घोस्ट मोड’ यानी सीमित संचार वाले मिशन के कारण वे घर से संपर्क भी नहीं कर पा रहे।
    Daily Mail को मिले एक पत्र में कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन डेविड स्कारोसी ने भी क्रू की नाराजगी और थकान को स्वीकार किया है।

    पिछली घटनाओं से भी चिंता

    विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक थकान और ऑपरेशनल दबाव सुरक्षा जोखिम बढ़ा सकता है। इससे पहले भी क्षेत्र में तैनात USS Harry S. Truman से जुड़े अभियानों में क्रू पर काम के बोझ को लेकर सवाल उठ चुके हैं।
    फिलहाल अमेरिकी बेड़े में USS Abraham Lincoln सहित कई बड़े कैरियर मिडिल ईस्ट में सक्रिय हैं।

    13 अरब डॉलर से अधिक लागत वाले इस सुपरकैरियर को अमेरिकी नौसेना की तकनीकी ताकत का प्रतीक माना जाता है, लेकिन मौजूदा तकनीकी गड़बड़ी ने दिखाया है कि अत्याधुनिक सिस्टम भी संचालन के स्तर पर बड़ी चुनौती बन सकते हैं—खासकर तब, जब जहाज लंबे समय तक लगातार मिशन पर हो।

  • हिंद महासागर में अमेरिकी कार्रवाई तेज, 15,000 किमी पीछा कर ‘बर्था’ तेल टैंकर जब्त

    हिंद महासागर में अमेरिकी कार्रवाई तेज, 15,000 किमी पीछा कर ‘बर्था’ तेल टैंकर जब्त

    वाशिंगटन। संयुक्त राज्य अमेरिका ने प्रतिबंधित तेल कारोबार के खिलाफ अपनी समुद्री कार्रवाई को और सख्त करते हुए हिंद महासागर में एक और टैंकर जब्त किया है। अमेरिकी सेना ने ‘बर्था’ नामक जहाज का हजारों किलोमीटर तक पीछा करने के बाद उसे रोक लिया।

    कैरेबियन से हिंद महासागर तक चला ऑपरेशन

    अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के मुताबिक यह अभियान कैरेबियन सागर से शुरू हुआ और लगभग 15,000 किलोमीटर तक निगरानी के बाद हिंद महासागर क्षेत्र में जाकर पूरा हुआ। इसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तीसरी बड़ी जब्ती बताया गया है।

    अमेरिका का दावा है कि यह टैंकर प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए वेनेजुएला से कच्चा तेल लेकर चीन जा रहा था और इसका संबंध ईरान से जुड़े प्रतिबंधित नेटवर्क से था।

    ट्रंप प्रशासन की सख्त नीति का हिस्सा

    यह कार्रवाई पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस रणनीति के तहत बताई जा रही है, जिसके जरिए प्रतिबंधों को दरकिनार कर तेल निर्यात करने वाले जहाजों पर नाकाबंदी बढ़ाई गई थी।
    अमेरिका पहले ही ऐसे कई जहाजों को निशाने पर ले चुका है जो प्रतिबंधित ऊर्जा व्यापार से जुड़े बताए जाते हैं।

    जहाज पर चढ़ाई कर की गई जब्ती

    अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने रातभर चले ऑपरेशन में ‘बर्था’ पर चढ़ाई (Boarding Operation) की और बिना किसी टकराव के उसे अपने नियंत्रण में ले लिया।

    यह जहाज कुक आइलैंड्स के ध्वज तले चल रहा था और अमेरिकी ट्रेजरी के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) के प्रतिबंधों की सूची में शामिल संस्थाओं से जुड़ा बताया गया है।

    लाखों बैरल तेल लेकर जा रहा था टैंकर

    रिपोर्ट के अनुसार, यह टैंकर वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA से जुड़ा था और करीब 19 लाख बैरल भारी कच्चा तेल लेकर एशिया की ओर बढ़ रहा था।
    अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ऐसे जहाज प्रतिबंधों से बचने के लिए लंबी समुद्री मार्ग रणनीति अपनाते हैं।

    इंडो-पैसिफिक कमांड के तहत हुई कार्रवाई

    यह अभियान INDOPACOM के जिम्मेदारी क्षेत्र में अंजाम दिया गया। अमेरिकी सेना के अनुसार, तीन संदिग्ध जहाजों की पहचान की गई थी और अब तीनों को पकड़ लिया गया है।

    मालदीव के पास मिला अंतिम लोकेशन सिग्नल

    समुद्री ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार, जहाज की अंतिम लोकेशन मालदीव के तट के पास दर्ज की गई थी, जिसके बाद अमेरिकी बलों ने उसे इंटरसेप्ट किया।

    क्या है संदेश?
    विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर निगरानी और प्रतिबंधों के सख्त अनुपालन का संकेत है। अमेरिका स्पष्ट कर चुका है कि प्रतिबंधों को दरकिनार कर होने वाले समुद्री तेल व्यापार पर वह लंबी दूरी तक पीछा कर कार्रवाई करने से भी पीछे नहीं हटेगा।

  • London में पाकिस्तानियों के हमले से परेशान भारतीय मूल का रेस्टोरेंट मालिक…कारोबार बंद करने को मजबूर

    London में पाकिस्तानियों के हमले से परेशान भारतीय मूल का रेस्टोरेंट मालिक…कारोबार बंद करने को मजबूर


    लंदन।
    ब्रिटेन (Britain) की राजधानी लंदन (London) में भारतीय मूल (Indian-origin) के एक रेस्टोरेंट मालिक (Restaurant Owne) ने 16 वर्षों तक रेस्टोरेंट के सफल संचालन के बाद अब अपना कारोबार बंद करने का ऐलान लिया है। बड़ी बात यह है कि रेस्टोरेंट बंद करने के पीछे की वजह पाकिस्तानी हैं। लंदन के हैमरस्मिथ में ‘रंगरेज’ नामक इस रेस्टोरेंट के मालिक हरमन सिंह कपूर (Harman Singh Kapoor) ने दावा किया है कि पाकिस्तानी उन पर कथित तौर पर लगातार हमले कर रहे हैं। कपूर ने कहा कि वह अगले महीने इंडियन रेस्टोरेंट बंद कर देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें लगातार परेशानियों, ऑनलाइन उत्पीड़न और कथित हमलों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते उन्हें यह कठिन निर्णय लेना पड़ा है।

    कपूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए यह जानकारी साझा की है। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि बढ़ती लागत, ऑनलाइन ट्रोलिंग, बार-बार होने वाली अशांति और कथित तौर पर पाकिस्तानी समूहों द्वारा किए गए हमले, साथ ही लंदन मेट्रोपॉलिटन पुलस से पर्याप्त सहयोग नहीं मिलना—इन सभी कारणों ने उन्हें यह फैसला लेने पर मजबूर किया। कपूर ने यह भी कहा कि अब वह पूरी तरह से सामाजिक और वैचारिक सक्रियता (एक्टिविज़्म) पर ध्यान केंद्रित करेंगे। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि उनके व्यवसाय को भले ही बाधित किया गया हो, लेकिन उनके इरादों को कमजोर नहीं किया जा सकता।


    खालिस्तानियों से जुड़ा है विवाद

    इस पूरे विवाद की जड़ मार्च 2023 की एक घटना से जुड़ी बताई जा रही है, जब कपूर ने आरोप लगाया था कि उनके रेस्टोरेंट पर खालिस्तानी समर्थकों द्वारा हमला किया गया। यह विवाद तब शुरू हुआ जब उन्होंने खालिस्तान मूवमेंट की आलोचना करते हुए वीडियो पोस्ट किए थे। इन वीडियो में उन्होंने खालिस्तान के नाम पर चल रही गतिविधियों पर सवाल उठाए थे।

    कपूर ने अपने वीडियो में अमृतपाल सिंह और उनके सहयोगियों का भी मजाक उड़ाया था, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया। एक वायरल वीडियो में उनके एक सहयोगी को पुलिस से बचते हुए “पुलिस आ गई” कहते हुए सुना गया था, जिस पर कपूर ने टिप्पणी की थी। फिलहाल, ‘रंगरेज’ के बंद होने की खबर से स्थानीय भारतीय समुदाय में निराशा है, वहीं इस मामले ने प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।