Category: International

  • अफगानिस्तान ने पाकिस्तान में सैन्य ठिकानों को किया ध्‍वस्‍त, दी सख्त चेतावनी

    अफगानिस्तान ने पाकिस्तान में सैन्य ठिकानों को किया ध्‍वस्‍त, दी सख्त चेतावनी


    नई दिल्ली। दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक तनाव अब गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। शुक्रवार सुबह अफगानिस्तान के इस्लामिक अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की कि उसकी वायुसेना ने पाकिस्तान की सीमा के भीतर कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इस कदम ने दोनों देशों के बीच तनाव को संभावित पूर्ण युद्ध की स्थिति में खड़ा कर दिया है।

    हवाई हमले का विवरण

    अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार हमला शुक्रवार सुबह लगभग 11:00 बजे किया गया। तालिबानी लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान की सीमा के भीतर गहरी पैठ बनाते हुए राजधानी इस्लामाबाद के पास फैजाबाद के सैन्य शिविर नौशेरा के सैन्य मुख्यालय जम़रुद की सैन्य टाउनशिप और एबटाबाद के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। प्रवक्ता इनायतुल्ला ख्वारज्मी ने कहा ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। हमने पाकिस्तान सेना के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण केंद्रों और सुविधाओं को ध्वस्त किया।तालिबान प्रशासन ने इस हमले को प्रतिशोध बताया। अफगान अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान ने हाल ही में अफगान हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया था और यह कार्रवाई उसी का जवाब है।

    सख्त चेतावनी

    अफगान सेना के प्रमुख फसीहुद्दीन फितरत ने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि यदि कोई भी सैन्य गतिविधि दोबारा हुई तो जवाब और भी भयानक होगा। उन्होंने कहा हम किसी भी आक्रामकता का जवाब दिए बिना नहीं छोड़ेंगे। अगर हमला दोहराया गया तो इस्लामाबाद समेत अन्य प्रमुख शहर भी निशाने पर होंगे।”

    सीमा पर तैयारियाँ

    सिर्फ हवाई हमले तक सीमित नहीं अफगान सेना ने सीमावर्ती इलाकों में टैंक और भारी हथियार तैनात कर दिए हैं। किसी भी संभावित जवाबी हमले के लिए इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। सुरक्षा विश्लेषक अब्दुल सादिक हामिदजोय का कहना है कि तालिबान पिछले चार दशकों से युद्धरत रहे हैं और उनके पास आधुनिक सैन्य क्षमताओं से निपटने का अनुभव है।

    बढ़ता क्षेत्रीय संकट

    काबुल और इस्लामाबाद की इस भिड़ंत ने वैश्विक समुदाय की चिंताएं बढ़ा दी हैं। दोनों देश एक-दूसरे पर आतंकवाद को पनाह देने और जवाबी हमलों के आरोप लगाते रहे हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि यह संघर्ष तुरंत नियंत्रित नहीं हुआ तो यह पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है। फिलहाल पाकिस्तान की ओर से हमले के नुकसान को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन दोनों देशों की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं।

  • पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव पर रूस और चीन ने संभाला मोर्चा, युद्धविराम की अपील

    पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव पर रूस और चीन ने संभाला मोर्चा, युद्धविराम की अपील



    नई दिल्ली। पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव पर रूस और चीन ने संभाला मोर्चा, युद्धविराम की अपील
    नई दिल्ली। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड रेखा के पास बढ़ते सैन्य टकराव के बीच रूस और चीन ने दोनों देशों से तुरंत युद्धविराम और राजनयिक समाधान की अपील की है।

    रूस का बयान
    रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि दोनों देशों के नागरिक और सैन्य बल हताहत हुए हैं।

    उन्होंने अफगानिस्तान और पाकिस्तान से खतरनाक टकराव रोकने और सभी मतभेदों को राजनीतिक और कूटनीतिक माध्यम से सुलझाने का आग्रह किया।

    चीन की अपील
    चीन ने भी दोनों पक्षों से बातचीत और युद्धविराम पर जोर दिया। इसके अलावा कई अन्य देश भी संयम बरतने और तत्काल शांति स्थापित करने की अपील कर चुके हैं।

    संयुक्त राष्ट्र की चिंता
    संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने स्थिति पर गहरी चिंता जताई। उनके प्रवक्ता ने कहा कि सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन और नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की गई है।

    तालिबान सरकार का रुख
    तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने कंधार में कहा कि अफगान सरकार बार-बार शांतिपूर्ण समाधान पर जोर देती रही है और अभी भी बातचीत के माध्यम से समस्या का हल चाहती है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच मौजूदा विवाद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़ा है।
    पाकिस्तान लंबे समय से तालिबानी सरकार से टीटीपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करता रहा है।

    सीमा और डूरंड रेखा
    ब्रिटिश शासन के दौरान खींची गई विवादित 2,611 किलोमीटर लंबी सीमा, जिसे डूरंड रेखा कहा जाता है, समय-समय पर दोनों देशों के बीच तनाव और गोलीबारी का कारण रही है। अफगानिस्तान की मौजूदा तालिबानी सरकार इसे मान्यता नहीं देती और इस समझौते को समाप्त करने की मांग करती रही है।

    हाल की घटनाएँ
    इस्लामाबाद में दो वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, सीमा पर अफगान सेना ने कुछ चौकियों पर सफेद झंडे लहराए, जिसे आमतौर पर गोलीबारी रोकने और शांति स्थापित करने का संकेत माना जाता है।

  • समलैंगिकता ! इस देश में खुलेआम किस करने पर दो महिलाएं गिरफ्तार

    समलैंगिकता ! इस देश में खुलेआम किस करने पर दो महिलाएं गिरफ्तार

    कंपाला। दुनिया में आज भी कई ऐसे देश हैं, जिनमें समलैंगिकता को जघन्य अपराध माना जाता है। अफ्रीकी देश युगांडा भी उन्हीं देशों में से एक है। यहां पर दो युवा महिलाओं को खुले आम प्यार का इजहार करना महंगा पड़ गया। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, दोनों महिलाओं को किस करते हुए देखा गया, चूंकि यह देश के कानून के खिलाफ है, इसलिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

    पुलिस के बयान के मुताबिक एक महिला की उम्र करीब 22 साल है, जबकि दूसरी की उम्र करीब 21 साल है। दोनों को देश के अरुआ शहर से गिरफ्तार किया गया है, जहां पर वह खुले आम किस करने और असामान्य कृत्यों में संलिप्त थीं, जिन्हें यौन प्रकृति का माना जाता है।

    आपको बता दें, युगांडा में वर्ष 2023 में एंटी होमोसेक्सुएलिटी एक्ट लागू किया गया है। देश की सरकार द्वारा लागू किए गए इस कानून का पश्चिमी देशों ने भरपूर विरोध किया था लेकिन यहां की सरकार सबसे कठोर एलजीबीटीक्यू विरोधी कानून लागू करने पर लगी हुई है। इस कानून के तहत समलैंगिक संबंध रखने वाले लोगों को आजीवन कारावास की सजा दी जा सकती है, जबकि गंभीर मामलों में मृत्युदंड का भी प्रावधान है।

    बार-बार पकड़े जाने पर मृत्युदंड का प्रावधान
    समलैंगिक संबंधों को लेकर युगांड़ा का कानून सबसे ज्यादा कठोर है। 2023 में पारित किए गए कानून के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति बार-बार समलैंगिक संबंध बनाते पकड़ा जाता है, या ऐसा समलैंगिक संबंध जिससे लाइलाज बीमारी फैलती हो, नाबालिग, बुजुर्ग या दिव्यांग व्यक्ति के साथ समलैंगिक संबंध बनाने पर व्यक्ति को मृत्युदंड दिया जा सकता है।

    गौरतलब है कि युगांडा पूर्वी अफ्रीका का एक रूढ़िवादी और मुख्यतः ईसाई बहुल देश है। इस कानून के कारण मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में व्यापक आक्रोश फैल गया था और संयुक्त राष्ट्र तथा पश्चिमी देशों ने इसकी निंदा की थी। विश्व बैंक ने देश को दी जाने वाली वित्तीय सहायता निलंबित कर दी थी, हालांकि 2025 के मध्य में इसे फिर से बहाल कर दिया गया। इस महीने की शुरुआत में, एक युगांडा अदालत ने “गंभीर समलैंगिकता” श्रेणी के तहत आरोपित पहले व्यक्ति के खिलाफ मामला खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि लंबी न्यायिक हिरासत के कारण उसकी मानसिक स्थिति अस्थिर हो गई थी।

  • बिकिनी पहनी दो महिलाओं के बीच लेटे दिखे स्टीफन हॉकिंग

    बिकिनी पहनी दो महिलाओं के बीच लेटे दिखे स्टीफन हॉकिंग

    वॉशिंगटन। अमेरिकी फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों के एक नए बैच के सार्वजनिक होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिर बहस छिड़ गई है। इन दस्तावेजों के साथ सामने आई एक तस्वीर में प्रख्यात वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग दिखाई दे रहे हैं, जिससे सोशल मीडिया और मीडिया जगत में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

    तस्वीर में हॉकिंग दो महिलाओं के बीच लेटे हुए नजर आते हैं। दोनों महिलाओं ने स्विमवियर पहन रखा है और उनकी पहचान छिपाने के लिए चेहरों को काले रंग से ढका गया है। तीनों के हाथों में पेय पदार्थ दिखाई दे रहे हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि फोटो कब और किस संदर्भ में ली गई थी।

    अमेरिकी मीडिया, जिनमें New York Post भी शामिल है, ने इस तस्वीर का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी पृष्ठभूमि और परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।

    परिवार ने आरोपों को बताया निराधार
    हॉकिंग के परिवार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्रोफेसर हॉकिंग ने 20वीं सदी में भौतिकी के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया और वे मोटर न्यूरॉन बीमारी से दशकों तक जूझते रहे। बयान में किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार के संकेतों को “पूरी तरह गलत” बताया गया।


    स्टीफन हॉकिंग का 2018 में 76 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। वे लंबे समय तक गंभीर बीमारी के बावजूद वैज्ञानिक अनुसंधान और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे।

    2006 के सम्मेलन से जुड़ा संदर्भ
    रिपोर्ट्स के अनुसार, हॉकिंग उन वैज्ञानिकों के समूह में शामिल थे जिन्होंने मार्च 2006 में कैरिबियन क्षेत्र के सेंट थॉमस द्वीप पर आयोजित एक सम्मेलन में भाग लिया था। यह कार्यक्रम एपस्टीन द्वारा वित्तपोषित बताया जाता है और उस समय हुआ था जब उनके खिलाफ बाद में सामने आए आपराधिक आरोप सार्वजनिक नहीं हुए थे।

    पुराने आरोपों का भी हुआ जिक्र
    दस्तावेजों में अमेरिकी नागरिक वर्जीनिया गिउफ्रे के पूर्व आरोपों का भी उल्लेख मिलता है, जिनमें उन्होंने एपस्टीन नेटवर्क से जुड़े कई प्रभावशाली लोगों पर सवाल उठाए थे। हालांकि, हॉकिंग के खिलाफ किसी भी आपराधिक कृत्य का आधिकारिक आरोप कभी सिद्ध नहीं हुआ।

  • विदेश नीति पर फोकस, इजरायल यात्रा के अनुभव साझा करते हुए पीएम का बड़ा संदेश

    विदेश नीति पर फोकस, इजरायल यात्रा के अनुभव साझा करते हुए पीएम का बड़ा संदेश


    नई दिल्ली। दो दिवसीय इजरायल दौरे से लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारत–इजरायल साझेदारी आने वाले समय में और मजबूत होगी। उन्होंने दौरे की झलकियों वाला एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें एयरपोर्ट पर गर्मजोशी से स्वागत, भारतीय समुदाय से मुलाकात, सांस्कृतिक कार्यक्रम और इजरायली संसद में उनके संबोधन के दृश्य शामिल हैं।

    संसद में संबोधन से लेकर सर्वोच्च सम्मान तक
    वीडियो में इजरायली संसद में पीएम के स्वागत, तालियों की गूंज और दोनों देशों के बीच हुए अहम समझौतों के हस्ताक्षर के पल दिखाए गए। प्रधानमंत्री ने लिखा, “इजरायल की खास यात्रा की कुछ खास बातें… अच्छी बातचीत और मजबूत सहयोग। हमारी पार्टनरशिप आगे बढ़ती रहे!”

    रक्षा, तकनीक और व्यापार में नई गति
    दौरे के दौरान रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, तकनीक और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए इंडि‍या-मिडिल ईस्‍ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) और भारत-इजरायल-यूएई-यूएसए (आई2यू2) पहल को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

    अहम एमओयू: खनिज, समुद्री विरासत और यूपीआई
    खनिज अन्वेषण में उन्नत जियोफिजिकल और एआई तकनीक के उपयोग पर सहयोग के लिए समझौता हुआ। गुजरात के लोथल स्थित नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के विकास को लेकर भी सहमति बनी, जिससे साझा समुद्री विरासत को बढ़ावा मिलेगा।

    डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में बड़ी पहल के तहत एनपीसीआई इंटरनेशनल और इजरायल की एमएएसएवी के बीच यूपीआई को लागू करने पर समझौता हुआ। इससे दोनों देशों के बीच सीमा-पार रेमिटेंस को आसान बनाने की दिशा में कदम बढ़ेगा।

    कृषि, शिक्षा और वित्तीय सहयोग
    भारत-इजरायल इनोवेशन सेंटर फॉर एग्रीकल्चर की स्थापना के लिए आईसीएआर और एमएएसएचएवी के बीच समझौता हुआ। मत्स्य पालन और जलीय कृषि में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

    वित्तीय क्षेत्र में International Financial Services Centres Authority और Israel Securities Authority के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। इसके अलावा एआई आधारित शिक्षा, वाणिज्यिक मध्यस्थता और विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक सहयोग को लेकर भी कई समझौते हुए, जिनमें Nalanda University और Hebrew University of Jerusalem के बीच एमओयू प्रमुख है।

  • पाकिस्तान के हवाई हमलों के जवाब में अफगानिस्तान की जवाबी कार्रवाई, 15 चौकियां कब्जे में लेने का दावा

    पाकिस्तान के हवाई हमलों के जवाब में अफगानिस्तान की जवाबी कार्रवाई, 15 चौकियां कब्जे में लेने का दावा

    नई दिल्ली।  पाकिस्तान द्वारा कथित हवाई हमलों के बाद अफगानिस्तान ने सीमा क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान के उप प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने बयान जारी कर कहा कि गुरुवार रात शुरू किए गए अभियान में दुश्मन की 15 चौकियों पर कब्जा कर लिया गया है। उनके मुताबिक इस कार्रवाई में कई पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जबकि कुछ को जिंदा पकड़ने का भी दावा किया गया है। हालांकि पाकिस्तान की ओर से इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    डूरंड लाइन पर ऑपरेशन, रणनीतिक बढ़त का दावा
    अफगान पक्ष का कहना है कि डूरंड लाइन के आसपास तैनात विशेष इकाइयों ने अत्याधुनिक उपकरणों के साथ अभियान चलाया। बयान में कहा गया कि रात के अंधेरे में दुश्मन की गतिविधियों को निशाना बनाया जा रहा है और सीमा पर रणनीतिक बढ़त हासिल की जा रही है। क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बताए जा रहे हैं।

    पहले हुए थे हवाई हमले, नागरिक हताहत
    तनाव की पृष्ठभूमि में हालिया हवाई हमलों की घटना है। United Nations Assistance Mission in Afghanistan (यूएनएएमए) ने पुष्टि की थी कि पाकिस्तान के सैन्य हमलों में अफगानिस्तान के नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में 13 नागरिकों की मौत हुई। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, जबकि सात अन्य घायल हुए थे। ये हमले 21-22 फरवरी की दरमियानी रात नंगरहार के बेहसूद और खोगियानी जिलों में किए गए बताए गए।

    स्कूल और मस्जिद भी निशाने पर
    स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पक्तिका के बरमल क्षेत्र में एक स्कूल और मस्जिद को निशाना बनाया गया, जबकि ओर्गुन जिले में एक रिहायशी घर पर भी एयर स्ट्राइक की गई। इन घटनाओं के बाद दोनों देशों के बीच पहले से जारी सीमा विवाद और अधिक गहरा गया है।

    आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
    अफगानिस्तान के दावों और पाकिस्तान की चुप्पी के बीच स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है। स्वतंत्र स्रोतों से 15 चौकियों पर कब्जे की पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात नहीं संभले तो क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

  • ट्रंप ने यूक्रेन और ईरान वार्ता की कमान अपने दामाद और दोस्त के हाथों में सौंपी

    ट्रंप ने यूक्रेन और ईरान वार्ता की कमान अपने दामाद और दोस्त के हाथों में सौंपी


    वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दामाद जेरेड कुश्नर और पुराने मित्र स्टीव विटकॉफ को दुनिया के दो सबसे बड़े संकटों यूक्रेन युद्ध और ईरान के तनाव को संभालने की जिम्मेदारी दी है। गुरुवार को दोनों ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में अलग-अलग बैठकों में इन मुद्दों पर चर्चा की।

    जिनेवा में व्यस्त कूटनीतिक दौरा
    कुश्नर और विटकॉफ ने अपने जिनेवा दौरे की शुरुआत ओमान के राजदूत के आवास से की जहां उन्होंने ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की। इसका उद्देश्य तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर एक समझौते पर मुहर लगाना और अमेरिका तथा इजरायल द्वारा संभावित हमलों को रोकना था। इसके कुछ ही घंटों बाद दोनों ने इंटरकॉन्टिनेंटल होटल में यूक्रेनी अधिकारियों से बैठक की। रूसी आक्रमण अब अपने पांचवें वर्ष में है इसलिए यह वार्ता बेहद अहम मानी जा रही थी। इसके बाद फोर सीजन्स होटल में रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मंजिलों पर मुलाकात की गई। शाम तक दोनों फिर से ओमान के राजदूत के आवास लौटे और गुरुवार देर रात अमेरिका के लिए रवाना हुए।

    गाजा शांति समझौते में भूमिका

    कुश्नर और विटकॉफ की जिम्मेदारी केवल यूरोप या ईरान तक सीमित नहीं है। एक सप्ताह से भी कम समय पहले उन्होंने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की उद्घाटन बैठक में हिस्सा लिया था। यह संस्था गाजा पट्टी में हमास और इजरायल के बीच युद्धविराम सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।

    ट्रंप की कूटनीतिक रणनीति
    ट्रंप की यह कवायद उनकी कूटनीतिक रणनीति को साफ दर्शाती है। वे अमेरिकी सरकार के पारंपरिक तंत्र पर भरोसा करने की बजाय अपनी सबसे अहम प्राथमिकताओं के लिए भरोसेमंद सहयोगियों दामाद और मित्र पर निर्भर हैं।

    विशेषज्ञों की चिंता और वाइट हाउस का बचाव

    कई विशेषज्ञों ने कहा है कि तीन बड़े और जटिल मुद्दों को केवल दो लोग संभालना चुनौतीपूर्ण है। ‘कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस’ के वरिष्ठ फेलो आरोन डेविड मिलर ने कहा कि हर वार्ता स्वयं में कई जटिल विवरणों का महासागर है। वहीं वाइट हाउस के एक अधिकारी ने इनका बचाव करते हुए कहा कि कुश्नर और विटकॉफ का सफलता का ट्रैक रिकॉर्ड और समय प्रबंधन उन्हें इन जिम्मेदारियों के लिए सक्षम बनाता है। दोनों को नियमित रूप से खुफिया ब्रीफिंग भी दी जाती है।

    व्यावसायिक हितों पर उठ रहे सवाल

    दोनों के बड़े व्यावसायिक हितों के कारण उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जेरेड कुश्नर की निवेश फर्म ‘एफिनिटी पार्टनर्स’ अरबों डॉलर का प्रबंधन करती है जिसमें कतर के सॉवरेन वेल्थ फंड का पैसा शामिल है। स्टीव विटकॉफ की क्रिप्टो फर्म ‘वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल’ में हिस्सेदारी है जो अबू धाबी सरकार से जुड़े फंड्स के साथ मध्य पूर्व में सौदे कर रही है। इसके अलावा विटकॉफ और रूस के वार्ताकार किरिल दिमित्रीव ने युद्ध के बाद आर्थिक समझौतों पर चर्चा की। रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने कहा कि ये अच्छे व्यापारी हो सकते हैं लेकिन सीनेट की मंजूरी या सरकारी निगरानी के अधीन नहीं हैं।

    यूक्रेन का नजरिया

    यूक्रेन ने कुश्नर और विटकॉफ की भागीदारी का स्वागत किया है। मार्च की शुरुआत में रूसी अधिकारियों के साथ अगली त्रिपक्षीय चर्चा की उम्मीद है जिससे राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की और व्लादिमीर पुतिन की बैठक का रास्ता साफ हो सके। अमेरिका में यूक्रेन की राजदूत ओल्गा स्टेफनिशिना ने कहा कि सीधे राष्ट्रपति ट्रंप से संपर्क होने की वजह से वे दोनों उनके लिए उपयोगी हैं। हालांकि ट्रंप के पहले कार्यकाल में यूक्रेन वार्ता के विशेष दूत रहे कर्ट वोल्कर ने माना कि सीधा संपर्क सकारात्मक है लेकिन कुश्नर और विटकॉफ को इन मुद्दों की पूरी गहन समझ नहीं है।

  • इस कंपनी ने 4000 कर्मचारियों को दिखाया बाहर का रास्ता… 25% उछले शेयर

    इस कंपनी ने 4000 कर्मचारियों को दिखाया बाहर का रास्ता… 25% उछले शेयर

    वाशिंगटन। ट्विटर के को-फाउंडर (Twitter Co-Founder) जैक डोर्सी (J
    ack Dorsey) की कंपनी ब्लॉक इंक (Blockchain Inc) ने हाल ही में एक बड़ा कदम उठाते हुए अपने 4,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का फैसला किया है। गुरुवार, 26 फरवरी को आई इस खबर के बाद कंपनी के शेयरों में वॉल स्ट्रीट पर 25% की जबरदस्त उछाल देखी गई। कंपनी का कहना है कि यह कटौती उसके कुल कर्मचारियों की संख्या को 10,000 से घटाकर लगभग 6,000 कर देगी।


    डोर्सी ने क्या कहा? ‘यह फैसला मुश्किल है, लेकिन जरूरी’

    शेयरधारकों को लिखे एक पत्र में जैक डोर्सी ने इस फैसले को “बेहद मुश्किल” बताया। कंपनी की सीएफओ अमृता आहूजा के मुताबिक, यह कदम कंपनी को लंबी अवधि की वृद्धि के अगले चरण के लिए तैयार करेगा। दिसंबर 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, ब्लॉक में कुल 10,205 कर्मचारी कार्यरत थे।


    प्रभावित कर्मचारियों को मिलेगा यह मुआवजा पैकेज

    डोर्सी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अलग से बताया कि नौकरी जाने से प्रभावित लोगों को 20 सप्ताह का वेतन और कंपनी में बिताए हर साल के लिए एक अतिरिक्त सप्ताह का वेतन दिया जाएगा। इसके अलावा, उन्हें मई के अंत तक के लिए इक्विटी, छह महीने का स्वास्थ्य बीमा, कंपनी के डिवाइस और संक्रमण में मदद के लिए 5,000 डॉलर की अतिरिक्त राशि भी प्रदान की जाएगी।

    कंपनी पर कितना पड़ेगा खर्च?
    छंटनी के इस पूरे अभियान के चलते ब्लॉक पर लगभग 500 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त खर्च आएगा। इसमें ज्यादातर राशि विच्छेद भुगतान, कर्मचारी लाभ और कुछ गैर-नकद खर्च शामिल हैं, जिसका असर अगली तिमाही के वित्तीय नतीजों में देखने को मिलेगा।


    AI का बढ़ता प्रभाव: क्या यही है बड़ी वजह?

    ब्लॉक के सह-सीईओ ने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला कंपनी के संकट में होने की वजह से नहीं लिया गया है। डोर्सी ने लिखा, “हम पहले से ही देख रहे हैं कि हम जो इंटेलिजेंस टूल (AI) बना और इस्तेमाल कर रहे हैं, वे छोटी टीमों के साथ मिलकर काम करने का एक नया तरीका सक्षम कर रहे हैं। यह मूल रूप से बदल रहा है कि किसी कंपनी को बनाने और चलाने का क्या मतलब है, और यह बदलाव तेजी से हो रहा है।” उनका कहना है कि अन्य कंपनियां भी इसी तरह अपने कार्यबल में बदलाव कर सकती हैं क्योंकि ये AI उपकरण उनके लिए दक्षता में बढ़ोतरी ला रहे हैं।


    AI के चलते छंटनी करने वाली कंपनियों की लिस्ट में शामिल हुआ ब्लॉक

    ब्लॉक, जो एक वित्तीय सेवा प्रदाता कंपनी है, अब उन कंपनियों की सूची में शामिल हो गई है, जिन्होंने AI के कारण अपने कार्यबल में बदलाव का हवाला देते हुए छंटनी की घोषणा की है। इससे पहले Pinterest, CrowdStrike और Chegg जैसी कंपनियां भी इस सूची में शामिल हो चुकी हैं। कंपनी ने यह घोषणा अपने चौथी तिमाही के नतीजों के साथ की, जो काफी हद तक उम्मीदों के अनुरूप रहे।

  • इस देश में खुलेआम किस करने पर दो महिलाएं गिरफ्तार… यहां समलैंगिकता है जघन्य अपराध!

    इस देश में खुलेआम किस करने पर दो महिलाएं गिरफ्तार… यहां समलैंगिकता है जघन्य अपराध!


    कंपाला।
    दुनिया में आज भी कई ऐसे देश हैं, जिनमें समलैंगिकता (Homosexuality) को जघन्य अपराध माना जाता है। अफ्रीकी देश युगांडा (African Country Uganda) भी उन्हीं देशों में से एक है। यहां पर दो युवा महिलाओं (Two Young Women) को खुले आम प्यार का इजहार करना महंगा पड़ गया। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, दोनों महिलाओं को किस करते हुए देखा गया, चूंकि यह देश के कानून के खिलाफ है, इसलिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

    पुलिस के बयान के मुताबिक एक महिला की उम्र करीब 22 साल है, जबकि दूसरी की उम्र करीब 21 साल है। दोनों को देश के अरुआ शहर से गिरफ्तार किया गया है, जहां पर वह खुले आम किस करने और असामान्य कृत्यों में संलिप्त थीं, जिन्हें यौन प्रकृति का माना जाता है।

    आपको बता दें, युगांडा में वर्ष 2023 में एंटी होमोसेक्सुएलिटी एक्ट लागू किया गया है। देश की सरकार द्वारा लागू किए गए इस कानून का पश्चिमी देशों ने भरपूर विरोध किया था लेकिन यहां की सरकार सबसे कठोर एलजीबीटीक्यू विरोधी कानून लागू करने पर लगी हुई है। इस कानून के तहत समलैंगिक संबंध रखने वाले लोगों को आजीवन कारावास की सजा दी जा सकती है, जबकि गंभीर मामलों में मृत्युदंड का भी प्रावधान है।


    बार-बार पकड़े जाने पर मृत्युदंड का प्रावधान
    समलैंगिक संबंधों को लेकर युगांड़ा का कानून सबसे ज्यादा कठोर है। 2023 में पारित किए गए कानून के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति बार-बार समलैंगिक संबंध बनाते पकड़ा जाता है, या ऐसा समलैंगिक संबंध जिससे लाइलाज बीमारी फैलती हो, नाबालिग, बुजुर्ग या दिव्यांग व्यक्ति के साथ समलैंगिक संबंध बनाने पर व्यक्ति को मृत्युदंड दिया जा सकता है।

    गौरतलब है कि युगांडा पूर्वी अफ्रीका का एक रूढ़िवादी और मुख्यतः ईसाई बहुल देश है। इस कानून के कारण मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में व्यापक आक्रोश फैल गया था और संयुक्त राष्ट्र तथा पश्चिमी देशों ने इसकी निंदा की थी। विश्व बैंक ने देश को दी जाने वाली वित्तीय सहायता निलंबित कर दी थी, हालांकि 2025 के मध्य में इसे फिर से बहाल कर दिया गया। इस महीने की शुरुआत में, एक युगांडा अदालत ने “गंभीर समलैंगिकता” श्रेणी के तहत आरोपित पहले व्यक्ति के खिलाफ मामला खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि लंबी न्यायिक हिरासत के कारण उसकी मानसिक स्थिति अस्थिर हो गई थी।

  • US से वार्ता के बीच रूस का यूक्रेन पर भयंकर हमला… रातभर में बरसाए 420 ड्रोन और 39 मिसाइल…

    US से वार्ता के बीच रूस का यूक्रेन पर भयंकर हमला… रातभर में बरसाए 420 ड्रोन और 39 मिसाइल…


    कीव।
    जिनेवा (Geneva) में अमेरिका (America) और यूक्रेन (Ukraine) के बीच चल रही वार्ता के बीच रूस ने कीव पर भयंकर हवाई हमला किया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की (President Volodymyr Zelensky) ने गुरुवार को कहा कि रूस (Russia) ने रात भर में यूक्रेन पर 420 ड्रोन और 39 मिसाइलों से हमला किया। यह हमला अमेरिकी और यूक्रेनी दूतों द्वारा जिनेवा में युद्ध समाप्त करने के लिए और अधिक बातचीत करने से कुछ घंटे पहले हुआ, जो अब अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। जेलेंस्की ने बताया कि इस हमले में 11 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं और यूक्रेन के आठ क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे तथा आवासीय इलाकों को निशाना बनाया गया। अधिकारियों के अनुसार, बच्चों सहित दर्जनों लोग घायल हुए हैं, हालांकि मृतकों की सटीक संख्या की तुरंत पुष्टि नहीं की गई।

    जेलेंस्की ने बुधवार देर रात कहा कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की और शांति वार्ता को आगे बढ़ाने में उनके प्रयासों तथा भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया। अमेरिका की मध्यस्थता में मॉस्को और कीव के बीच वार्ता जारी है, लेकिन रूस द्वारा दावा किए गए यूक्रेनी क्षेत्र के मुद्दे पर गतिरोध बना हुआ है। जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ शिखर सम्मेलन की मांग की है और कहा है कि आमने-सामने की बैठक किसी समझौते तक पहुंचने में निर्णायक साबित हो सकती है। हालांकि, क्रेमलिन ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, सिवाय यूक्रेनी राष्ट्रपति को मॉस्को आमंत्रित करने के, जिसे जेलेंस्की ने ठुकरा दिया।

    ट्रंप के प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने वार्ता में हिस्सा लिया। ये दोनों जिनेवा में ईरान के साथ परमाणु वार्ता पर विचार करने के बाद यूक्रेन युद्ध पर चर्चा के लिए पहुंचे थे। उन्होंने यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के प्रमुख रुस्तम उमेरोव से मुलाकात की। वे जेलेंस्की के साथ ट्रंप की बातचीत में भी शामिल हुए। उमेरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि दूतों के साथ यूक्रेन को आर्थिक सहायता, पुनर्निर्माण, निवेश आकर्षित करने के तरीकों और दीर्घकालिक सहयोग के ढांचे पर चर्चा हुई। उनके अनुसार, बैठक में रूस को शामिल करके त्रिपक्षीय वार्ता के अगले दौर की तैयारियों पर भी विचार किया गया, साथ ही कैदियों के संभावित आदान-प्रदान पर भी बात हुई।

    जेलेंस्की ने बताया कि रूस ने पोल्टावा क्षेत्र में गैस बुनियादी ढांचे तथा कीव और ड्नीप्रो क्षेत्रों में बिजली सबस्टेशनों पर हमला किया। राजधानी कीव सहित पांच अन्य क्षेत्रों में आपातकालीन दल मौके पर पहुंचे। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली ने रूस की अधिकांश मिसाइलों को मार गिराया और पश्चिमी सहयोगियों को समय पर अतिरिक्त वायु रक्षा हथियारों की आपूर्ति के लिए धन्यवाद दिया। रूस की बड़ी सेना के खिलाफ लड़ाई जारी रखने के लिए यूक्रेन को विदेशी मदद की सख्त जरूरत है।

    यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने सहयोगी देशों से अधिक सैन्य सहायता देने की अपील की। उन्होंने विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर पोस्ट में कहा कि जब पूरी दुनिया मॉस्को से इस व्यर्थ युद्ध को रोकने की मांग कर रही है, तो पुतिन और अधिक आतंक, हमलों और आक्रामकता पर उतारू हैं। रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसकी वायु रक्षा ने रात भर में कई रूसी क्षेत्रों के साथ-साथ काला सागर और आज़ोव सागर के ऊपर 17 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। यूक्रेन के स्वदेशी लंबी दूरी के ड्रोन ने रूस के अंदरूनी इलाकों में तेल रिफाइनरियों, ईंधन डिपो और सैन्य रसद केंद्रों पर हमले किए हैं।


    रूस और यूक्रेन ने सैनिकों के शवों का किया आदान-प्रदान

    गौरतलब है कि पिछली वार्ताओं में रूसी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख व्लादिमीर मेदिंस्की ने गुरुवार को बताया कि रूस ने 1000 शहीद यूक्रेनी सैनिकों के शव यूक्रेन को सौंपे और बदले में अपने 35 शहीद सैनिकों के शव वापस लिए। उन्होंने यह नहीं बताया कि यह आदान-प्रदान कब हुआ। बाद में यूक्रेन के युद्धबंदियों के समन्वय मुख्यालय ने शवों की वापसी की पुष्टि की, हालांकि उन्होंने कहा कि रूसी पक्ष की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ये यूक्रेनी रक्षकों के हो सकते हैं।