रूस का दबदबा घटा, पर अभी भी सबसे बड़ा सप्लायर
2030 तक $100 अरब ट्रेड का लक्ष्य
इंडियन वर्कर्स के लिए रूस में नौकरी और पेमेंट सिस्टम पर बात
पुतिन करेंगे ज़्यादा तेल खरीद की डिमांड

रूस का दबदबा घटा, पर अभी भी सबसे बड़ा सप्लायर
2030 तक $100 अरब ट्रेड का लक्ष्य
इंडियन वर्कर्स के लिए रूस में नौकरी और पेमेंट सिस्टम पर बात
पुतिन करेंगे ज़्यादा तेल खरीद की डिमांड

PIA को खरीदने की दौड़ में चार बड़े नाम शामिल हैं. इन चारों में सबसे ज़्यादा चर्चा फौजी फर्टिलाइज़र कंपनी की है, जो सीधे पाकिस्तानी सेना के प्रभाव में चलने वाली फौजी फाउंडेशन से जुड़ी है. पाकिस्तान की राजनीति और अर्थव्यवस्था में सेना की गहरी पकड़ को देखते हुए माना जा रहा है कि अंततः यह एयरलाइन उसी समूह के हाथों जा सकती है. बाकी दावेदारों में लकी सीमेंट समूह, आरिफ हबीब कॉर्प और एयर ब्लू लिमिटेड भी शामिल हैं. यह पहली बार है जब पाकिस्तान किसी सरकारी एयरलाइन की बोली को सार्वजनिक तौर पर लाइव दिखाएगा.
IMF की शर्तों पर ही बची अर्थव्यवस्था
पाकिस्तान पिछले कई वर्षों से कर्ज पर कर्ज लेकर चल रहा है. 2023 में देश लगभग दिवालिया होने के कगार पर था. रक्षा खर्च लगातार बढ़ता गया और राजस्व घटता रहा. IMF से लिए गए कर्ज़ों की संख्या 20 से भी अधिक हो चुकी है, जबकि देश की अपनी आर्थिक क्षमता बहुत कम है. IMF ने 7 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज को मंजूरी तो दी, लेकिन शर्त रखी कि पाकिस्तान सरकारी कंपनियों में सुधार करे, घाटा कम करे और PIA जैसी डूबती कंपनियों का निजीकरण करे.
PIA की तबाही कैसे हुई?
कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित मानी जाने वाली PIA अपनी ही गलतियों के कारण बर्बादी की गहराई में चली गई. 2020 में सामने आया कि लगभग एक-तिहाई पाकिस्तानी पायलटों के लाइसेंस फर्जी या संदिग्ध थे. इस खुलासे के बाद यूरोप, ब्रिटेन और अमेरिका ने PIA की उड़ानों पर रोक लगा दी. इसके साथ भ्रष्टाचार, राजनीतिक दखल, रिश्तेदारी आधारित भर्तियां और गैर-जरूरी कर्मचारियों की भीड़ ने एयरलाइन को पूरी तरह खोखला कर दिया. हर साल अरबों का घाटा लिखने वाली यह कंपनी पाकिस्तान की सबसे बड़ी आर्थिक बीमारी बन गई.
कर्ज में डूबे देश
पाकिस्तान अब वहां पहुंच चुका है, जहां पुराने कर्ज़ चुकाने के लिए भी नया कर्ज़ लेना पड़ रहा है. ऐसे में PIA का निजीकरण उसके लिए मजबूरी बन गया है. IMF की शर्तें पूरी करने के अलावा पाकिस्तान के पास कोई और रास्ता दिखाई नहीं दे रहा. आने वाले वर्षों में यह देखा जाएगा कि क्या PIA को बेचने के बाद देश अपने आर्थिक गिरावट के सिलसिले को रोक पाता है या नहीं.

पुतिन ने PM मोदी की नेतृत्व क्षमता की सराहना की
पुतिन से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता और भारत-रूस संबंधों के भविष्य के बारे में भी पूछा गया. इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि दुनिया ने भारत की अडिग नीति देखी है और देश को अपने नेतृत्व पर गर्व होना चाहिए. पुतिन ने यह भी बताया कि भारत और रूस के बीच 90 प्रतिशत से अधिक द्विपक्षीय लेन देन सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं.
मोदी से मित्रता और आगामी भारत दौरा
पुतिन ने कहा कि उन्हें अपने मित्र, प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के लिए यात्रा करने में बहुत खुशी हो रही है. उन्होंने यह भी बताया कि दोनों नेताओं ने अगली बैठक भारत में आयोजित करने पर सहमति जताई है.
भारत-रूस सहयोग और ऐतिहासिक संबंध
पुतिन ने कहा कि बहुत सारी बातें चर्चा के लिए हैं, क्योंकि भारत और रूस के बीच सहयोग का दायरा बहुत व्यापक है. उन्होंने दोनों देशों के बीच के विशिष्ट ऐतिहासिक संबंधों को भी रेखांकित किया. उन्होंने भारत की आजादी के बाद की प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि सिर्फ 77 साल के अल्प समय में, देश ने अद्भुत विकास हासिल किया है.
बता दें कि पुतिन अब तक भारत के नौ दौरे कर चुके हैं, जिनमें से तीन मोदी के कार्यकाल में (2016, 2018 और 2021) हुए. दिसंबर में यह उनका दसवां दौरा होगा. वहीं प्रधानमंत्री मोदी सात बार रूस जा चुके हैं.

गौरतलब है कि कल हुई इस घटना के बाद से ही ट्रंप लगातार बाइडन प्रशासन पर इसका दोष दे रहे हैं। क्योंकि आरोपी रहमानुल्लाह बाइडन प्रशासन के दौरान ही अफगानिस्तान से अमेरिका आया था। आरोपी रहमानुल्लाह बाइडन के ऑपरेशन अलाइज वेलकम अभियान के दौरान अमेरिका आया था।
ट्रंप ने रिपोर्टर पर अपनी भड़ास निकालते हुए कहा, “दोष दे रहा हूं क्योंकि वे (बाइडन) हजारों ऐसे लोगों को अमेरिका लेकर आए थे, जिन्हें यहां होना ही नहीं चाहिए था। तुम ऐसे सवाल पूछ रहे हो क्योंकि तुम बेवकूफ इंसान हो।” राष्ट्रपति ने कहा कि बाइडन प्रशासन ने एक कानून पारित किया है, जिसकी वजह से हम इन लोगों को वापस नहीं भेज सकते। उन्होंने पूरे हालात को गड़बड़ करार देते हुए कहा कि अफगानिस्तान का मामला एक गंदगी था। इन (प्रवासियों को) शुरू से ही यहां नहीं होना चाहिए था।
इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने दोनों नेशनल गार्ड्स की सेहत का अपडेट देते हुए बताया कि इसमें घायल एक जवान सैनिक सारा बेकस्ट्राम की मौत हो चुकी है।
ट्रंप और उनकी टीम की तरफ से लगातार लगाए जा रहे आरोपों के बीच बाइडन समर्थकों ने भी जवाब देना शुरू कर दिया है। बाइडन प्रशासन के समर्थकों का कहना है कि इस कार्यक्रम के तहत जिन लोगों को लाया गया था, उन्होंने अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की मदद की थी। इस कार्यक्रम को व्यापक सुरक्षा जांच के बाद ही पूरा किया गया था। अफगानिस्तान में तालिबान के वापस आने के बाद इन लोगों के जीवन के लिए यह कार्यक्रम जरूरी था।
गौरतलब है कि बाइडन प्रशासन की इस पहल के तहत करीब 76 हजार अफगान नागरिकों को अमेरिका लाया गया था। इनमें से कई अमेरिकी सैनिक और राजनयिकों के साथ दुभाषिए और अनुवादक के रूप में काम करते थे।

बुधवार दोपहर को राजधानी बिसाऊ में राष्ट्रपति भवन के आसपास गोलीबारी की आवाजें सुनाई दी थीं। फ्रांस के प्रमुख समाचार माध्यम ‘ज्यून अफ्रीक’ के अनुसार, राष्ट्रपति एम्बालो ने खुद बताया कि सेना प्रमुख ने तख्तापलट कर उन्हें सत्ता से बेदखल कर गिरफ्तार कर लिया है। फ्रांस 24 से बातचीत में उन्होंने कहा कि मुझे पद से हटा दिया गया है।
सेना का दावा
उच्च सैन्य कमान के प्रवक्ता कर्नल दिनिस एन’चामा ने बयान जारी कर कहा कि चुनावी परिणामों में बड़े पैमाने पर धांधली और देश को अस्थिर करने की एक गुप्त साजिश का पता चलने के बाद यह कदम उठाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस साजिश में कुछ राजनीतिक नेता, एक कुख्यात ड्रग तस्कर और देशी-विदेशी नागरिक शामिल थे। परिणामस्वरूप राष्ट्रपति को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया तथा गिनी-बिसाऊ की सभी संवैधानिक संस्थाओं को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया गया है।
चुनावी विवाद
रविवार को हुए चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति उमारो सिस्सोको एम्बालो और विपक्षी उम्मीदवार फर्नांडो डायस दा कोस्टा दोनों ने मंगलवार को अपनी जीत का दावा किया था। आधिकारिक अस्थायी परिणाम गुरुवार को आने थे, लेकिन अब सेना ने पूरी चुनावी प्रक्रिया ही स्थगित कर दी है।
राजधानी में मौजूदा हालात
एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार को बिसाऊ की सड़कें लगभग खाली थीं। सैनिक गश्त कर रहे थे, सभी सीमाएं सील कर दी गईं, राष्ट्रपति हिरासत में हैं और राष्ट्रपति भवन पर सशस्त्र सैनिकों का कब्जा है। अधिकारियों ने दावा किया है कि उनके पास ‘पूर्ण नियंत्रण’ है और अब कोई चुनावी परिणाम घोषित नहीं होगा।
गिनी-बिसाऊ: तख्तापलटों का पुराना इतिहास
1974 में पुर्तगाल से आजादी मिलने के बाद से गिनी-बिसाऊ में दर्जनों तख्तापलट और तख्तापलट के प्रयास हो चुके हैं। सिर्फ पिछले महीने (अक्टूबर 2025) में भी एक असफल कोशिश हुई थी। दक्षिण अमेरिका से यूरोप जाने वाले कोकीन तस्करी के प्रमुख रास्ते के कारण इस देश में पिछले डेढ़-दो दशक से राजनीतिक अस्थिरता और गहराई है।

टैरिफ नीति क्या है?
ट्रंप ने इस साल फिर से राष्ट्रपति पद संभालने के बाद कई देशों से आने वाले सामानों पर 10% से 50% तक टैरिफ लगाए। उनका कहना है कि इससे सरकार की आमदनी बढ़ेगी और लोग अमेरिकी सामान ज्यादा खरीदेंगे।
इनकम टैक्स कम होने वाले लोगों पर फोकस
ट्रंप इस बात पर जोर देते हैं कि ये बदलाव खासतौर पर उन लोगों के लिए होंगे जो 2 लाख डॉलर सालाना तक कमाते हैं।
$2,000 टैरिफ डिविडेंड का वादा
ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में, राष्ट्रपति ट्रंप ने लिखा, “जो लोग टैरिफ के खिलाफ हैं, वे मूर्ख हैं! अब हम दुनिया के सबसे अमीर, सबसे सम्मानित देश हैं, जहां लगभग कोई मुद्रास्फीति नहीं है, और शेयर बाजार की रिकॉर्ड कीमत है। 401k अब तक के उच्चतम हैं।
उन्होंने अमेरिकियों को लाभांश देने का वादा किया और कहा, “हम खरबों डॉलर ले रहे हैं और जल्द ही अपने 37 ट्रिलियन डॉलर के भारी ऋण का भुगतान करना शुरू कर देंगे। संयुक्त राज्य अमेरिका में रिकॉर्ड निवेश, हर जगह संयंत्र और कारखाने बढ़ रहे हैं। एक व्यक्ति को कम से कम $2000 का डिविडेंड (उच्च आय वाले लोगों सहित नहीं!) सभी को भुगतान किया जाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस राजस्व से देश का बड़ा कर्ज $37 ट्रिलियन चुकाया जाएगा और निवेश व उत्पादन में तेजी आएगी।
सुप्रीम कोर्ट की टैरिफ पर प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को लेकर संदेह जताया है और कहा है कि कई टैरिफ को हटाया भी जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो अमेरिका को टैरिफ के रुपयों के तौर पर वापस भुगतान करना पड़ सकता है, जो 100 अरब डॉलर से ज्यादा हो सकता है।

यह कॉम्प्लेक्स 35 मंजिला आठ इमारतों का था, जिसमें लगभग दो हजार अपार्टमेंट शामिल थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इन टावरों की बहुमंजिला संरचनाओं को बांस की मचान से ढका गया था, जिसने आग को तेजी से फैलने में मदद की।
आग पर काबू पाने की जद्दोजहद
तेज हवा और जलते हुए मलबे की वजह से लपटें एक इमारत से दूसरी इमारत तक फैलती चली गईं। आग भड़की तो कई लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी क्योंकि मरम्मत के कारण खिड़कियां बंद थीं।
पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया
बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और मदद

ज्ञात हो कि शेख हसीना को पिछले सप्ताह ढाका की एक विशेष अदालत ने उनकी गैरमौजूदगी में ‘मानवता के विरुद्ध अपराध’ के आरोप में मृत्युदंड की सज़ा सुनाई थी।
सज़ा का कारण और पृष्ठभूमि
यह सज़ा पिछले साल छात्रों के नेतृत्व में हुए एक बड़े आंदोलन के दौरान शेख हसीना की सरकार द्वारा की गई कथित क्रूर दमनकारी कार्रवाई से जुड़ी हुई है। बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद, पाँच अगस्त, दो हज़ार चौबीस को शेख हसीना भारत चली आई थीं। उनके करीबी सहयोगी और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी इसी तरह के आरोपों में मौत की सज़ा सुनाई गई है। अदालत के इस फ़ैसले के बाद, बांग्लादेश सरकार ने भारत को औपचारिक पत्र भेजकर शेख हसीना और असदुज्जमां खान कमाल दोनों के प्रत्यर्पण की माँग की थी।
भारत का यह बयान दिखाता है कि वह इस अत्यंत संवेदनशील मामले को सीधे राजनीतिक प्रतिक्रिया देने के बजाय, पूरी तरह से कानूनी ढांचे के तहत सुलझाना चाहता है, ताकि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर अनावश्यक तनाव न पड़े।
बांग्लादेश का दावा और हसीना का पक्ष
दूसरी ओर, बांग्लादेश का विदेश मंत्रालय यह दावा कर रहा है कि दोनों देशों के बीच मौजूदा प्रत्यर्पण संधि के तहत शेख हसीना को तुरंत सौंपना भारत का दायित्व है। बांग्लादेश सरकार इस मामले को दोनों देशों के बीच हुए समझौते के पालन के रूप में देख रही है।
वहीं, शेख हसीना का पक्ष है कि यह सज़ा एक ‘अवैध न्यायाधिकरण’ (गैर-कानूनी ट्रिब्यूनल) ने दी है। उनके अनुसार, इस न्यायाधिकरण की स्थापना और संचालन एक अनिर्वान्चित अंतरिम सरकार ने किया है, जिसके पास कोई लोकतांत्रिक जनादेश (जनादेश) नहीं है। उनका तर्क है कि यह सज़ा राजनीतिक प्रतिशोध (बदले) की भावना से प्रेरित है और इसकी कोई कानूनी वैधता नहीं है।
यह फ़ैसला ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश में फ़रवरी दो हज़ार छब्बीस में संसदीय चुनाव होने हैं और शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को फिलहाल चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है। ऐसे में, यह प्रत्यर्पण मामला केवल एक कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि बांग्लादेश की वर्तमान और भविष्य की राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित करने वाला एक बड़ा घटनाक्रम बन गया है, जिस पर पूरी दुनिया की नज़र है। भारत इस मामले में कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की पूरी कोशिश कर रहा है।

इमरान ख़ान की बहन नोरीन नियाज़ी के मुताबिक़ अगर पाकिस्तानी सरकार 5 मिनट भी उन्हें इमरान ख़ान से मिल लेने देती तो वो आराम से चली जातीं, लेकिन पता नहीं इमरान ख़ान को किस हालत में रखा गया है और आख़िर क्यों उनसे नहीं मिलने दिया जा रहा है.
4 हफ्ते से क्या छिपा रही शहबाज सरकार?
कोर्ट के आदेश के बावजूद पाकिस्तान की शहबाज़ शरीफ सरकार और पाकिस्तानी पंजाब की मरियम नवाज़ सरकार इमरान ख़ान की बहनों को बीते 4 हफ़्ते से अदियाला जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से नहीं मिलने दे रही है. पिछले हफ्ते भी इमरान ख़ान की बहनों को जब इमरान ख़ान से मिलने नहीं दिया गया था तो वो धरने पर बैठ गई थी, हालांकि इसके बाद रात में पाकिस्तानी पुलिस ने इमरान ख़ान की बहन नोरीन खानूम नियाज़ी के साथ मारपीट की थी और गिरफ्तार कर लिया था.
मंगलवार रात को एक बार फिर इमरान ख़ान की बहने जेल के बाहर धरने पर बैठ गईं. पिछली बार जहां इनके साथ 100 के आसपास कार्यकर्ता थे तो इस बार धरने पर कई नेता भी मौजूद है और हज़ारों की संख्या में जेल के बाद कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं.

अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद के मुताबिक़, हमला कल बीती रात अफ़ग़ानिस्तान के समय अनुसार रात 12 बजे हुआ था और पाकिस्तानी वायुसेना ने अफ़ग़ानिस्तान के खोस्त, कंधार और पक्तिका प्रांत को निशाना बनाया. इसमें 10 लोगों की मौत के अलावा 4 लोग घायल भी हुए हैं.
अफ़ग़ानिस्तान के रिहाइशी इलाकों को निशाना बना रहा पाकिस्तान
पाकिस्तानी सेना पिछले महीने अक्टूबर से ही अफ़ग़ानिस्तान के रिहाइशी इलाकों को अपना निशाना बना रही है. पिछले महीने अफ़ग़ानिस्तान में एयर स्ट्राइक के दौरान पाकिस्तानी सेना ने रिहायशी इलाकों को निशाना बनाते हुए 59 मासूम अफ़ग़ानियों की जान ले ली थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तुर्किये और कतर की मध्यस्ता में सीजफायर का ऐलान हुआ था.
तालिबान के प्रवक्ता ने क्या कहा
अफ़ग़ानिस्तान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान इस तरह के हमलों की कड़ी निंदा करता है और एक बार फिर दोहराता है कि उसके पास अपनी हवाई और ज़मीनी सीमा तथा अपने लोगों की रक्षा करने का कानूनी और धार्मिक अधिकार है और उचित समय पर आवश्यक जवाब दिया जाएगा.
पाकिस्तान ने बीती रात अफ़ग़ानिस्तान के पक्तिका, कुनार और खोस्त प्रांत में हमला किया, जिसमें खोस्त के गुरबाज़ जिले में एक रिहायशी मकान में हमला किया गया इसमें 9 बच्चों की मौत हो गई. इसके अलावा पक्तिका के बारमल जिले में पाकिस्तानी सेना ने हवाई हमला एक मस्जिद पर किया था, जिसमें 2 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं.