Category: International

  • कनाडा की नेवी को ईरान ने घोषित किया आतंकी संगठन, जानिए वजह ?

    कनाडा की नेवी को ईरान ने घोषित किया आतंकी संगठन, जानिए वजह ?

    तेहरान । कनाडा की नेवी को ईरान ने आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। मंगलवार को शिया इस्लामिक देश ने यह फैसला लिया। उसका कहना है कि कनाडा ने 2024 में ईरान की सेना रिवॉलूशनरी गार्ड्स को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। उसके जवाब में ही यह कदम उठाया गया है। ईरान की ओर से कहा गया कि ओटावा ने हमारी सेना की वैचारिक शाखा को आतंकी समूह घोषित किया था। यह फैसला पूरी तरह से गलत था और अंतरराष्ट्रीय कानूनों एवं सिद्धांतों के विपरीत था। उसी का जवाब देते हुए हम ऐसा कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान को यह अधिकार है कि वह अपने खिलाफ उठाए गए किसी कदम का जवाब दे सके।

    उन्होंने कहा कि हम अपने जवाब देने के अधिकार का ही इस्तेमाल करते हुए रॉयल कनैडियन नेवी को आतंकी संगठन घोषित करते हैं। ईरान ने कहा कि यदि कोई हमारे खिलाफ आता है तो हमें भी कुछ कदम तो उठाने ही होंगे। दरअसल कनाडा ने 19 जून, 2024 को ईरान के रिवॉलूशनरी गार्ड्स को एक आतंकी समूह घोषित कर दिया था। इसके तहत ईरान की सेना की इस यूनिट के किसी भी मेंबर के कनाडा में प्रवेश पर पाबंदी लगाई गई थी। इसके अलावा कनाडा के किसी भी नागरिक या समूह के साथ किसी भी तरह की डीलिंग करने से भी रोका था।

    इसके अलावा यह आदेश भी कनाडा की ओर से था कि यदि ईरानी सेना की कोई संपत्ति कनाडा में है तो उसे भी जब्त कर लिया जाए। कनाडा ने इस फैसले के पीछे दलील दी थी कि ईरान की सेना अपने देश में और बाहर मानवाधिकारों का हनन कर रही है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया था। दरअसल तेहरान से जनवरी 2020 में उड़ाने भरने वाले एक कनाडाई विमान को मार गिराया गया था। इस घटना में 176 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 85 कनाडाई नागरिक थे।
    इस घटना को लेकर ईरान के रिवॉलूशनरी गार्ड्स ने गलती मानी थी और उसका कहना था कि हमसे चूक हुई है। हमने किसी भ्रम के चलते ऐसी घटना को अंजाम दिया था। हम इसके लिए माफी मांगते हैं। फिर भी कनाडा ने ईरान की सेना पर पाबंदियां थोप दी थीं। बता दें कि ईरान के साथ कनाडा ने 2012 में ही कूटनीतिक संबंध खत्म कर दिए थे। कनाडा का कहना था कि ईरान वैश्विक शांति के लिए खतरा है और इसीलिए हम ऐसा कदम उठा रहे हैं।

  • बांग्लादेश तुर्की से खरीदने जा रहा सिरिट लेजर मिसाइल

    बांग्लादेश तुर्की से खरीदने जा रहा सिरिट लेजर मिसाइल

    ढाका। भारत-बांग्लादेश संबंधों में आई तल्खी के बीच ढाका अपनी सैन्य क्षमता को तेजी से मजबूत कर रहा है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के नेतृत्व में बांग्लादेश ने तुर्की का रुख किया है और सिरिट (Cirit) लेजर-गाइडेड मिसाइलों खरीदने का फैसला लिया है। ये ‘स्मार्ट’ मिसाइलें, जो पहले से बांग्लादेश के ड्रोनों और आने वाले हमलावर हेलीकॉप्टरों पर एकीकृत हैं, आधुनिक युद्ध में सटीक हमलों की क्षमता बढ़ाएंगी। दरअसल, शेख हसीना के कार्यकाल के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार में बांग्लादेश-पाकिस्तान संबंध मजबूत हुए हैं। पाकिस्तान पहले से ही तुर्की से बड़े पैमाने पर हथियार खरीदता है।

    गौरतलब है कि बांग्लादेश ने तुर्की से बायराकटार टीबी-2 ड्रोन पहले ही खरीद लिए हैं, जिनका उपयोग भारतीय सीमा की निगरानी में हो रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, रक्षा मंत्रालय की निविदा प्रक्रिया के बावजूद तुर्की की सिरिट मिसाइल प्रणाली चुने जाने की संभावना मजबूत है। तुर्की की कंपनी रोकेत्सन द्वारा निर्मित यह मिसाइल सटीक और किफायती है, जिसे हमलावर हेलीकॉप्टरों पर भी लगाया जा सकता है। यह स्थिर और गतिशील दोनों लक्ष्यों को नष्ट कर सकती है, जिसमें बख्तरबंद और गैर-बख्तरबंद वाहन शामिल हैं।

    अब सवाल है कि सिरिट मिसाइल का भारत पर क्या असर हो सकता है? दरअसल, यह मिसाइल छोटे रॉकेट और निर्देशित टैंक-रोधी मिसाइलों के बीच की कमी को पूरा करती है। निर्माता के अनुसार, इसे विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर आसानी से लगाया जा सकता है। बांग्लादेशी रक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह देश की सैन्य जरूरतों के लिए आदर्श है। ड्रोन और हमलावर हेलीकॉप्टरों पर इसका परीक्षण हो चुका है। इन मिसाइलों से बांग्लादेश वायु सेना भारत के निकट चटगांव पहाड़ी क्षेत्र में दुश्मन ठिकानों को निशाना बना सकती है।

    इतना ही नहीं, बांग्लादेश तुर्की से छह टी-129 अटैक हमलावर हेलीकॉप्टर खरीदने की बातचीत कर रहा है। भविष्य में देश शक्तिशाली चौथी पीढ़ी के यूरोफाइटर जेट हासिल करना चाहता है।

  • पाकिस्तान की हालत खस्ता : एयरलाइंस के बाद अब बैंक, होटल बेचने की तैयारी में शरीफ सरकार

    पाकिस्तान की हालत खस्ता : एयरलाइंस के बाद अब बैंक, होटल बेचने की तैयारी में शरीफ सरकार


    इस्‍लामाबाद। बीते दिनों सरकारी एयरलाइंस की सार्वजनिक नीलामी के बाद अब पाकिस्तान की सरकार बैंकों और होटलों को भी बेचने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक आर्थिक तंगी से जूझ रहे PAK के पास निजीकरण के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है और इस क्रम में शहबाज शरीफ की सरकार ने बैंक, होटल, बिजली कंपनियां, बीमा और यहां तक की रिटेल नेटवर्क तक को बेचने की योजना बना ली है।

    पाकिस्तानी हुकूमत के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की शर्तों को पूरा करने और डिफॉल्ट से बचने के लिए सरकार को मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा है। पाकिस्तानी अफसरों ने तो यह तक कह दिया है कि स्थिति ‘करो या मरो’ जैसी बन गई है। न्यूज 18 की एक रिपोर्ट में सरकारी दस्तावेजों और कैबिनेट मीटिंग्स का हवाला देकर बताया गया है कि 2026 के अंत तक कई बड़े सरकारी आउटलेट प्राइवेट हाथों में सौंपे जा सकते हैं। इनमें बिजली वितरण कंपनियां, बैंक, होटल, इंश्योरेंस और एनर्जी सेक्टर शामिल हैं।
    क्या है ‘एजेंडा-5’?

    जानकारी के मुताबिक शरीफ सरकार ने निजीकरण के लिए अगले 12 महीनों में पांच बड़े सेक्टर चिन्हित किए हैं, जिसे अनौपचारिक तौर पर ‘एजेंडा-5’ का नाम दिया गया है। इनमें बिजली वितरण कंपनियां, बैंकिंग सेक्टर, होटल और रियल एस्टेट, एनर्जी जनरेशन कंपनियां और बीमा और रिटेल नेटवर्क के कुछ वर्टिकल शामिल हैं।

    यह पूरा प्राइवेटाइजेशन प्रोग्राम पाकिस्तान के हाइब्रिड पॉलिटिकल सिस्टम के तहत चल रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की भूमिका अहम बताई जा रही है। हालांकि इस फैसले का पाकिस्तान में भारी विरोध भी हो रहा है। जहां समर्थकों का कहना है कि आर्थिक सुधार का यह इकलौता रास्ता है, वहीं दूसरी तरफ विरोधियों का आरोप है कि यह शहबाज शरीफ की सरकार की नाकामी दिखाती है। इसे देश की संप्रभुता से खिलवाड़ भी कहा जा रहा है।
    पाकिस्तान की हालत खस्ता

    पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बीते दिनों पाक को अपनी सरकारी एयरलाइंस, नेशनल एयरलाइन पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) की सार्वजनिक नीलामी करनी पड़ी। वहीं पाकिस्तान पर मौजूदा समय में करीब 131 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी कर्ज है। हालात यह हैं कि सरकार रोजमर्रा के खर्च चलाने के लिए भी उधार ले रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की स्थिति अगर यही बनी रही तो वह दिन दूर नहीं जब पाकिस्तान में श्रीलंका जैसे हालात पैदा हो जाएं।

  • पाक आर्मी चीफ मुनीर ने सगे भाई के बेटे से ही करा दिया बेटी का निकाह

    पाक आर्मी चीफ मुनीर ने सगे भाई के बेटे से ही करा दिया बेटी का निकाह

    लाहोर। पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की बेटी की शादी हो गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि मुनीर ने अपने ही सगे भाई के बेटे से अपनी बेटी की शादी कराई है। यह शादी पिछले हफ्ते रावलपिंडी में हुई और इसमें तमाम राजनीतिक हस्तियों और सैन्य अफसरों ने हिस्सा लिया। हालांकि हाई प्रोफाइल मेहमानों के बावजूद, इसे बिल्कुल निजी रखा गया था।

    पत्रकार ने की परिवार में शादी की पुष्टि
    पाकिस्तानी पत्रकार जाहिद गिशकोरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया है। इसमें उन्होंने बताया है कि आसिम मुनीर की बेटी का निकाह उनके भाई के बेटे से हुआ है। एक अन्य पत्रकार रजा मुनीब ने भी इस बात की पुष्टि की है। रजा ने कहा कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अपनी बेटी की शादी, भाई कासिम मुनीर के बेटे से की है। यह शादी रावलपिंडी में हुई।

    पिछले हफ्ते हुआ निकाह
    अपने वीडियो में गिशकोरी ने बताया कि दूल्हे का नाम अब्दुर रहमान है। यह एक हाई प्रोफाइल शादी थी। उन्होंने आगे बताया कि रहमान पहले पाकिस्तान आर्मी में कैप्टन था। गिशकोरी ने इस वीडियो में आसिम मुनीर की बेटियों के बारे में भी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि मुनीर की चार बेटियां हैं। यह उनकी तीसरी बेटी की शादी है, जिसका नाम महनूर है।

    क्या करता है दूल्हा?
    दूल्हे के बारे में और ज्यादा जानकारी देते हुए गिशकोरी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना में कैप्टन रहने के बाद वह सिविल सर्विसेज की तरफ चला गया। फिलहाल वह आर्मी अफसरों के सिविल सर्विसेज कोटा के तहत असिस्टेंट कमिश्नर है। गिशकोरी ने बताया कि इस शादी में वर्तमान पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, पाकिस्तान स्थित पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ समेत कई रिटायर्ड जनरल्स और पूर्व आर्मी चीफ मौजूद रहे।
    पूरी तरह गोपनीय रखी गई शादी
    इस शादी में यूएई के राष्ट्रपति के शामिल होने की भी खबरें थीं। हालांकि गिशकोरी ने विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से बताया कि यूएई के राष्ट्रपति वहां आए नहीं थे। उन्होंने बताया कि इस शादी में 400 से ज्यादा मेहमान मौजूद थे और सुरक्षा कारणों से शादी को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया था।

  • ट्रंप के बाद पाकिस्तान का साथ देने वाले चीन ने भी किया सीजफायर कराने का दावा

    ट्रंप के बाद पाकिस्तान का साथ देने वाले चीन ने भी किया सीजफायर कराने का दावा


    बीजिंग।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के बाद अब चीन (China) भी भारत और पाकिस्तान में सीजफायर (India-Pakistan, ceasefire) कराने का दावा कर रहा है।  चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को दावा किया कि इस वर्ष चीन द्वारा ‘मध्यस्थता’ किए गए प्रमुख संवेदनशील मुद्दों में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव भी शामिल रहे। भारत लगातार यह कहता रहा है कि भारत और पाकिस्तान से संबंधित मामलों में किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के लिए कोई जगह नहीं है।

    भारत का यह कहना रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सात से 10 मई के दौरान संघर्ष का समाधान दोनों देशों की सेनाओं के सैन्य संचालन महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच सीधी बातचीत के माध्यम से हुआ था। भारतीय सशस्त्र बलों ने सात मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था।

    बीजिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हालात और चीन के विदेश संबंधों पर संगोष्ठी में वांग ने कहा, ‘इस साल, द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से किसी भी समय की तुलना में स्थानीय युद्ध और सीमा पार संघर्ष अधिक बार भड़के। भू-राजनीतिक उथल-पुथल लगातार फैलती जा रही है।’ उन्होंने कहा, ‘स्थायी शांति स्थापित करने के लिए, हमने एक वस्तुनिष्ठ और तर्कसंगत रुख अपनाया है, और लक्षणों और मूल कारणों दोनों को संबोधित करने पर ध्यान केंद्रित किया है।’

    उन्होंने कहा, ‘गतिरोध वाले मुद्दों को सुलझाने के लिए चीन के इस दृष्टिकोण का अनुसरण करते हुए, हमने उत्तरी म्यांमा, ईरान के परमाणु मुद्दे, पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव, फिलिस्तीन और इजरायल के मुद्दों तथा कंबोडिया और थाईलैंड के बीच हालिया संघर्ष में मध्यस्थता की।’


    पाकिस्तान को दी थी मदद

    इस वर्ष 7 से 10 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष में चीन की भूमिका, विशेष रूप से उसके द्वारा पाकिस्तान को प्रदान की गई सैन्य सहायता, गंभीर जांच और आलोचना के दायरे में आ गई। कूटनीतिक मोर्चे पर, चीन ने सात मई को भारत और पाकिस्तान से संयम बरतने का आह्वान किया था।

    चीन की विदेश नीति संबंधी पहल पर अपने संबोधन में वांग ने भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार की अच्छी गति का जिक्र किया। साथ ही अगस्त में तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बीजिंग द्वारा आमंत्रित किए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘इस वर्ष हमने भारत और उत्तर कोरिया के नेताओं को चीन में आमंत्रित किया। चीन-भारत संबंधों में अच्छी गति देखने को मिली और उत्तर कोरिया के साथ पारंपरिक मित्रता और मजबूत हुई तथा उसे और बढ़ावा मिला।’ उन्होंने यह भी कहा कि एससीओ शिखर सम्मेलन एक शानदार सफलता थी। वांग यी ने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ चीन का जुड़ाव अब साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण के एक नए चरण में प्रवेश कर गया है, जो अब और तेज गति से आगे बढ़ रहा है।

  • बांग्लादेश में जहां भीड़ ने ली थी जान, वहीं फिर खूनखराबा: मैमनसिंह में हिंदू युवक की हत्या

    बांग्लादेश में जहां भीड़ ने ली थी जान, वहीं फिर खूनखराबा: मैमनसिंह में हिंदू युवक की हत्या

    नई दिल्ली। पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों की कड़ी थमने का नाम नहीं ले रही है। मैमनसिंह जिले से एक बार फिर दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक हिंदू युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह वही इलाका है, जहां कुछ दिन पहले ईशनिंदा के आरोप में दीपू चंद्र दास को भीड़ ने बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला था।
    लगातार हो रही हत्याओं से पूरे क्षेत्र में भय और तनाव का माहौल बना हुआ है।

    ताजा मामले में बांग्लादेश के ग्रामीण अर्धसैनिक बल अंसार के सदस्य बजेंद्र बिस्वास की जान चली गई। सोमवार, 29 दिसंबर की शाम करीब 6:45 बजे भालुका उपजिला क्षेत्र स्थित लबीब ग्रुप की गारमेंट फैक्ट्री सुल्ताना स्वेटर्स लिमिटेड में यह घटना हुई। बजेंद्र बिस्वास वहां सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात थे और फैक्ट्री परिसर में बने अंसार बैरक में अपने साथियों के साथ रहते थे।

    पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बातचीत के दौरान बजेंद्र के साथी नोमान मियां ने कथित तौर पर मजाक में सरकारी शॉटगन उनकी ओर तान दी। कुछ ही पलों बाद अचानक गोली चल गई, जो बजेंद्र की बाईं जांघ में जा लगी। गंभीर रूप से घायल बजेंद्र को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    घटना के बाद पुलिस ने आरोपी नोमान मियां को हिरासत में ले लिया और वारदात में इस्तेमाल की गई शॉटगन जब्त कर ली है। संबंधित थाने के प्रभारी मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए मैमनसिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया है और मामले की गहन जांच की जा रही है।

    गौर करने वाली बात यह है कि बीते दो हफ्तों में यह इसी इलाके में हिंदू समुदाय से जुड़ी तीसरी हत्या है। 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या और अब बजेंद्र बिस्वास की गोली मारकर मौत ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं से भालुका और आसपास के क्षेत्रों में तनाव गहराता जा रहा है, जबकि स्थानीय प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दावे कर रहा है।

  • बांग्लादेश की लोकतंत्र की जननी खालिदा जिया का निधन, तारिक रहमान बोले ‘अल्लाह की पुकार’

    बांग्लादेश की लोकतंत्र की जननी खालिदा जिया का निधन, तारिक रहमान बोले ‘अल्लाह की पुकार’


    नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी (Bangladesh Nationalist Party) प्रमुख बेगम खालिदा जिया का मंगलवार, 30 दिसंबर 2025 को 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर ने देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोक की लहर दौड़ा दी। बेटे तारिक रहमान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, मेरी मां और BNP की अध्यक्ष बेगम खालिदा जिया अल्लाह की पुकार सुनकर आज हमें छोड़कर चली गईं।

    तारिक ने अपने पोस्ट में कहा कि उनकी मां केवल राजनीतिक नेता नहीं थीं, बल्कि लोकतंत्र की जननी और बांग्लादेश की मां के रूप में जानी जाती थीं।

    उन्होंने जीवनभर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए संघर्ष किया और तानाशाही व राजनीतिक उत्पीड़न के खिलाफ मजबूती से खड़ी रहीं। इसके अलावा, तारिक ने खालिदा जिया के मातृत्व और करुणा की भी तारीफ की, बताया कि राजनीतिक संघर्षों के बीच उन्होंने हमेशा अपने परिवार को संभाला और कठिन परिस्थितियों में भी साहस नहीं खोया।

    गिरफ्तारी, बीमारी और संघर्ष भरा जीवन
    खालिदा जिया का जीवन संघर्षों और चुनौतियों से भरा रहा।

    उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया, इलाज से वंचित रखा गया और लगातार राजनीतिक उत्पीड़न झेलना पड़ा। बावजूद इसके उनका व्यक्तित्व शांत, अडिग और मजबूत रहा। निजी जीवन में उन्हें अपने पति और बच्चों को खोने का दर्द भी सहना पड़ा, लेकिन उन्होंने देश की सेवा को अपना सर्वोच्च उद्देश्य बनाया और जनता को अपने परिवार की तरह अपनाया।

    लोकतांत्रिक विरासत और योगदान
    खालिदा जिया ने तीन बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के रूप में सेवा की और महिलाओं की भागीदारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल की।

    उनके नेतृत्व में BNP ने बांग्लादेश में राष्ट्रीयता, लोकतंत्र और विकास के मुद्दों को मजबूती से उठाया। उनके राजनीतिक जीवन और संघर्षों की कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

    पारिवारिक जीवन और BNP में योगदान
    खालिदा जिया के पति, जियाउर रहमान, बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति थे, जिनकी हत्या 1981 में हुई। इस व्यक्तिगत और राजनीतिक सदमे के बावजूद, खालिदा जिया ने पार्टी और देश की सेवा जारी रखी। उनके बेटे तारिक रहमान भी BNP में सक्रिय भूमिका निभाते रहे और उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। BNP, बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी, 1978 में जियाउर रहमान द्वारा स्थापित की गई थी और यह राष्ट्रीयता, लोकतंत्र और विकास के मुद्दों पर सक्रिय रही है।

    देश और दुनिया के प्रति आभार
    तारिक रहमान ने परिवार की ओर से देश और दुनिया भर से मिले प्रेम, सम्मान और संवेदनाओं के लिए आभार जताया। खालिदा जिया का निधन बांग्लादेश की राजनीति में एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है। उनका जीवन, संघर्ष और लोकतांत्रिक सिद्धांत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।

    खालिदा जिया का जीवन केवल बीएनपी या बांग्लादेश तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में लोकतंत्र और महिलाओं की राजनीति में उनकी पहचान अमिट रही। उनकी मातृत्व, नेतृत्व क्षमता और लोकतंत्र के प्रति समर्पण उन्हें हमेशा यादगार बनाए रखेंगे।

  • पुतिन के सरकारी आवास पर ड्रोन हमला? रूस ने 91 यूक्रेनी ड्रोन गिराने का दावा, यूक्रेन ने किया खारिज

    पुतिन के सरकारी आवास पर ड्रोन हमला? रूस ने 91 यूक्रेनी ड्रोन गिराने का दावा, यूक्रेन ने किया खारिज


    नई दिल्ली । रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में तनाव फिर चरम पर पहुंच गया है। रूस ने दावा किया है कि यूक्रेन ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नोवगोरोड स्थित सरकारी आवास पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला करने की कोशिश की। रूसी वायु रक्षा प्रणाली ने इस कथित हमला नाकाम कर दिया।

    रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के अनुसार 28 और 29 दिसंबर की रात कुल 91 ड्रोन रूस की ओर भेजे गए थे। इन सभी ड्रोन को अलग-अलग क्षेत्रों में मार गिराया गया। लावरोव ने इस हमले को आतंकवादी कार्रवाई करार दिया और चेतावनी दी कि राष्ट्रपति के आवास को निशाना बनाना रूस की संप्रभुता और सुरक्षा पर हमला है जिसका जवाब कड़ा होगा। हालांकि रूस ने अब तक इस ड्रोन हमले से जुड़े कोई वीडियो या तस्वीरें साझा नहीं की हैं और यह स्पष्ट नहीं है कि हमले के समय पुतिन उस आवास पर मौजूद थे या नहीं।

    दूसरी ओर यूक्रेन ने रूस के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इसे “पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत” बताया। उन्होंने कहा कि रूस इस तरह के दावों के जरिए कीव पर हमले का बहाना खोज रहा है। जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यूक्रेन कूटनीतिक समाधान के लिए प्रतिबद्ध है जबकि रूस युद्ध को लंबा खींचने के लिए बहाने तलाश रहा है।यूक्रेनी राष्ट्रपति ने यह भी आरोप लगाया कि रूस पहले भी इसी तरह के दावों के आधार पर कीव में सरकारी इमारतों और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाता रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह रूस की मंशा को समझते हुए चुप न रहे।

    रूस की ओर से विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने कहा कि पुतिन ने इस कथित हमले की जानकारी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को फोन पर दी। उशाकोव के अनुसार ट्रम्प इस जानकारी से हैरान थे। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में ट्रम्प और जेलेंस्की के बीच फ्लोरिडा में युद्ध समाप्त करने को लेकर लंबी बातचीत हुई थी।इसी बीच जेलेंस्की ने खुलासा किया कि अमेरिका ने शांति योजना के तहत यूक्रेन को 15 साल की सुरक्षा गारंटी का प्रस्ताव दिया है लेकिन कीव इससे अधिक मजबूत और दीर्घकालिक गारंटी चाहता है। रूस पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह यूक्रेन में NATO या पश्चिमी देशों की सैन्य मौजूदगी स्वीकार नहीं करेगा।

    विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन के आवास पर ड्रोन हमले का दावा शांति वार्ता के नाजुक दौर में दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह आरोप केवल कूटनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है या संघर्ष को और तेज करता है।इस बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर भी इस पर बनी हुई है कि रूस और यूक्रेन के बीच मौजूदा तनाव का समाधान किस दिशा में होगा। दोनों देशों के बीच जारी युद्ध के कारण वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा संकट भी प्रभावित हो रहा है।

  • यूक्रेन ने पुतिन के आवास के आसपास दागे 91 ड्रोन…, ट्रंप के शांति डील के प्रयासों पर फिर सकता है पानी

    यूक्रेन ने पुतिन के आवास के आसपास दागे 91 ड्रोन…, ट्रंप के शांति डील के प्रयासों पर फिर सकता है पानी


    मास्को।
    रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध (Russia and Ukraine war) को खत्म करने की कोशिशों के बीच एक बार फिर हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं. रूस ने सोमवार को आरोप लगाया कि यूक्रेन (Ukraine) ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (President Vladimir Putin) के उत्तरी रूस में स्थित एक आवास पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला करने की कोशिश की. रूस का दावा है कि इस कथित हमले में कुल 91 ड्रोन इस्तेमाल किए गए, जिन्हें रूसी एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते मार गिराया. शांति समझौतों पर बातचीत के बीच हुए इस हमले से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप खासा नाराज हैं. उनकी पुतिन से बात भी हुई है।

    यूक्रेन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इसे रूस की ओर से “झूठ का एक और दौर” बताया और कहा कि ऐसे बयान शांति वार्ता को कमजोर करने के लिए दिए जा रहे हैं. इस आरोप-प्रत्यारोप के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव और गहरा गया है।

    इस पूरे मामले में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी बीच में आना पड़ा. ट्रंप ने बताया कि खुद राष्ट्रपति पुतिन ने उन्हें फोन कर इस कथित ड्रोन हमले की जानकारी दी. फ्लोरिडा में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात से पहले ट्रंप ने मीडिया से कहा कि पुतिन ने सुबह-सुबह उन्हें बताया कि उन पर हमला हुआ है. ट्रंप ने कहा कि वह इस बात से नाराज हैं, लेकिन उन्होंने यह भी माना कि यह दावा गलत भी हो सकता है।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “एक बात युद्ध के दौरान हमला करने की होती है और दूसरी बात किसी नेता के घर पर हमला करने की. यह ऐसा करने का सही समय नहीं है.” उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर यह घटना सच साबित होती है, तो यह तनाव को और बढ़ा सकती है.

    बीते 24 घंटों में ट्रंप ने पुतिन से दो बार बात की है. इससे एक दिन पहले उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी मुलाकात की थी. ट्रंप के मुताबिक, पुतिन के साथ उनकी बातचीत “काफी सकारात्मक” रही और कुछ जटिल मुद्दों के बावजूद शांति की उम्मीद अभी खत्म नहीं हुई है.

    हालांकि, इसी बीच राष्ट्रपति पुतिन ने अपने सैन्य बलों को यूक्रेन के जापोरिज़िया क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण हासिल करने के अभियान को तेज करने के निर्देश दिए हैं. क्रेमलिन ने एक बार फिर मांग की है कि यूक्रेन अपने सैनिकों को डोनबास के उन इलाकों से हटा ले, जहां अब भी उसकी मौजूदगी है.

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ड्रोन हमले का यह दावा सच साबित होता है, तो यह रूस-यूक्रेन युद्ध में एक और बड़ा तनावपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जिससे पहले से नाजुक शांति प्रयासों को गंभीर झटका लग सकता है.

  • ट्रंप को शांति पुरस्कार से सम्मानित करेगा इस्राइल …. नेतन्याहू बोले- इनके लिए हम तोड़ रहे परंपरा

    ट्रंप को शांति पुरस्कार से सम्मानित करेगा इस्राइल …. नेतन्याहू बोले- इनके लिए हम तोड़ रहे परंपरा


    वॉशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को इस्राइल के सर्वोच्च नागरिक सम्मान (Israel’s highest civilian honor) इस्राइल शांति पुरस्कार (Israel Peace Prize) से सम्मानित किया जाएगा। इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Prime Minister Benjamin Netanyahu) ने सोमवार को फ्लोरिडा में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात के बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये एलान किया। नेतन्याहू ने एलान करते हुए कहा कि इस्राइली सरकार ने फैसला किया है कि राष्ट्रपति ट्रंप को इस्राइल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जाए। 80 साल में यह पुरस्कार किसी भी गैर इस्राइली नागरिक को नहीं दिया गया है और पहली बार है कि शांति श्रेणी में यह पुरस्कार दिया जाएगा।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इस एलान पर खुशी जताई और कहा कि यह सम्मान उनके लिए अनापेक्षित था। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस्राइली प्रधानमंत्री ने कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप ने लोगों को चौंकाने के लिए कई परंपराएं तोड़ी हैं, इसलिए हमने भी तय किया है कि हम भी एक परंपरा तोड़ेंगे और नई बनाएंगे। वो ये है कि इस्राइल सम्मान, जो 80 साल से किसी गैर इस्राइली नागरिक को नहीं दिया गया है, उससे राष्ट्रपति ट्रंप को सम्मानित किया जाएगा। भोजन के दौरान हमारे शिक्षा मंत्री ने इसका एलान किया था और यह पुरस्कार राष्ट्रपति ट्रंप के इस्राइली और यहूदी लोगों की भलाई में दिए गए योगदान के लिए दिया जाएगा।’

    इस्राइली प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आपने इस्राइली लोगों के लिए जो किया, हमारी आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई में जो मदद की, उसके लिए हम लोग आपके शुक्रगुजार हैं।’


    इस्राइस के स्वतंत्रता दिवस समारोह में किया जाएगा सम्मानित

    इस्राइल पुरस्कार, इस्राइल का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो पारंपरिक रूप से विज्ञान, कला और मानविकी जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम करने के लिए इस्राइली नागरिकों को दिया जाता है। शांति श्रेणी में यह पुरस्कार पहले कभी नहीं दिया गया था। जुलाई 2025 में, इस्राइल ने पुरस्कार नियमों में संशोधन किया ताकि यह सम्मान किसी विदेशी नागरिक को भी दिया जा सके, जिससे ट्रंप के चयन का रास्ता साफ हो गया। ट्रंप पुरस्कार लेने के लिए इस्राइल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल हो सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी संकेत दिया कि वह समारोह में शामिल होने पर विचार करेंगे।