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  • करेला: कड़वा जरूर, लेकिन सेहत का खजाना; जानें किन बीमारियों में है रामबाण

    करेला: कड़वा जरूर, लेकिन सेहत का खजाना; जानें किन बीमारियों में है रामबाण


    नई दिल्ली: करेला का नाम सुनते ही अधिकतर लोग मुंह बना लेते हैं, लेकिन यही कड़वा करेला सेहत के लिहाज से किसी वरदान से कम नहीं है। आयुर्वेद में करेला को औषधि के रूप में माना गया है और इसे कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में लाभकारी बताया गया है। सिर्फ खाने से ही नहीं, बल्कि बाहरी रूप से लगाने पर भी करेला शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाता है।

    आयुर्वेद में करेले को करवेल्लक कहा जाता है। इसे ऐसा पौधा माना गया है जो दूषित रक्त को शुद्ध करने, बढ़ी हुई शर्करा को नियंत्रित करने और शरीर में मौजूद कीटाणुओं को नष्ट करने की क्षमता रखता है। करेला विटामिन A, B और C का अच्छा स्रोत है, जो इम्युनिटी को मजबूत करने के साथ-साथ त्वचा और आंखों की सेहत के लिए भी जरूरी माने जाते हैं।करेला अग्नि और अग्न्याशय तक प्रभाव डालता है, जिससे पाचन तंत्र बेहतर होता है। यह आंतों की गहराई से सफाई कर वहां मौजूद कीड़े, हानिकारक बैक्टीरिया और विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। जिन लोगों को बार-बार पेट साफ न होने, गैस, अपच या भूख न लगने की समस्या रहती है उनके लिए करेले का जूस या सलाद बेहद फायदेमंद हो सकता है।

    अगर शरीर में लंबे समय से कब्ज की समस्या बनी रहे, तो इससे आंतों में कीड़े पनप सकते हैं और पोषक तत्व शरीर में ठीक से अवशोषित नहीं हो पाते। ऐसे में करेला शरीर का प्राकृतिक डिटॉक्स करता है और पाचन तंत्र को फिर से सक्रिय बनाता है। इसके कड़वे स्वाद को कम करने के लिए इसे काटकर नमक लगाकर कुछ घंटों के लिए छोड़ दिया जाए, तो इसका कड़वापन काफी हद तक कम हो जाता है।त्वचा संबंधी समस्याओं में भी करेला बेहद उपयोगी माना जाता है। चेहरे पर मुंहासे, एक्ने, खुजली या रूखापन अक्सर रक्त की अशुद्धि का संकेत होते हैं। रोजाना सीमित मात्रा में करेले के जूस का सेवन रक्त को शुद्ध करता है, जिससे त्वचा में निखार आता है और एक्ने की समस्या कम होती है। साथ ही यह शरीर की खुद को ठीक करने की क्षमता को भी बढ़ाता है।

    करेला स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए भी लाभकारी बताया गया है, क्योंकि यह दूध बनाने वाले हार्मोन के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है। हालांकि, इस दौरान इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। वहीं, अगर शरीर पर कोई घाव, फोड़ा या सूजन हो जाए, तो करेले का लेप लगाने से घाव जल्दी भरता है और संक्रमण का खतरा कम होता है।कुल मिलाकर करेला भले ही स्वाद में कड़वा हो, लेकिन इसके फायदे इतने ज्यादा हैं कि इसे अपनी डाइट में शामिल करना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।

  • Winter Skin Tips: सर्दियों में ड्राई स्किन से हैं परेशान? रात को सोने से पहले अपनाएं ये 4 घरेलू उपाय

    Winter Skin Tips: सर्दियों में ड्राई स्किन से हैं परेशान? रात को सोने से पहले अपनाएं ये 4 घरेलू उपाय

    नई दिल्ली सर्दियों का मौसम जहां एक तरफ ठंड और आराम लेकर आता है, वहीं दूसरी ओर यह त्वचा के लिए कई परेशानियां भी खड़ी कर देता है। ठंडी हवाएं, कम नमी और गर्म पानी का ज्यादा इस्तेमाल त्वचा की नेचुरल मॉइस्चर छीन लेता है। नतीजा यह होता है कि स्किन ड्राई, रूखी, बेजान और खिंची हुई महसूस होने लगती है। खासतौर पर चेहरे की त्वचा सबसे ज्यादा प्रभावित होती है।

    ड्राई स्किन की समस्या से छुटकारा पाने के लिए कई लोग महंगे क्रीम, लोशन और ब्यूटी प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन कई बार इनसे मनचाहा रिजल्ट नहीं मिलता। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि सर्दियों में भी आपकी त्वचा हेल्दी, सॉफ्ट और ग्लोइंग बनी रहे, तो कुछ आसान घरेलू उपाय बेहद कारगर साबित हो सकते हैं। खास बात यह है कि ये उपाय रात को सोने से पहले अपनाए जाएं, ताकि त्वचा को पूरी रात पोषण मिल सके।

    रात को सोने से पहले चेहरे की ऐसे करें देखभाल

    1. कच्चा दूध
    कच्चा दूध त्वचा के लिए एक बेहतरीन नेचुरल क्लींजर और मॉइस्चराइज़र माना जाता है। सर्दियों में रात को सोने से पहले रुई की मदद से चेहरे पर कच्चा दूध लगाएं और हल्के हाथों से मसाज करें। यह त्वचा की गहराई से सफाई करता है और स्किन को अंदर से पोषण देता है। नियमित इस्तेमाल से त्वचा मुलायम बनी रहती है और चेहरे पर नेचुरल ग्लो नजर आने लगता है।

    2. एलोवेरा जेल
    एलोवेरा को स्किन के लिए वरदान कहा जाता है। इसमें मौजूद गुण त्वचा की नमी को बनाए रखने में मदद करते हैं। ड्राई स्किन से परेशान लोग रात को सोने से पहले चेहरे पर ताजा एलोवेरा जेल लगा सकते हैं। यह त्वचा को ठंडक पहुंचाता है, सूखापन कम करता है और स्किन को सॉफ्ट बनाता है। एलोवेरा नियमित लगाने से त्वचा हेल्दी और फ्रेश नजर आती है।

    3. नारियल तेल
    नारियल तेल सर्दियों के लिए एक बेहतरीन स्किन केयर उपाय है। अगर आप रोज रात को सोने से पहले चेहरे पर 2-3 बूंद नारियल तेल लगाकर हल्की मसाज करते हैं, तो इससे त्वचा को गहराई से नमी मिलती है। नारियल तेल ड्राई स्किन के साथ-साथ काले धब्बे, झाइयां और हल्की सूजन जैसी समस्याओं में भी मददगार माना जाता है। यह स्किन को रिपेयर करने का काम करता है।

    4. शहद
    शहद एक नेचुरल मॉइस्चराइज़र है, जो त्वचा में नमी को लॉक करने में मदद करता है। सर्दियों में रात को सोने से पहले चेहरे पर शहद की हल्की मसाज करने से त्वचा सॉफ्ट और ग्लोइंग बनी रहती है। शहद ड्राई और बेजान त्वचा को पोषण देता है और स्किन को अंदर से हेल्दी बनाता है।

    क्यों जरूरी है नाइट स्किन केयर?

    रात के समय हमारी त्वचा खुद को रिपेयर करती है। इस दौरान अगर स्किन को सही पोषण और नमी मिल जाए, तो उसका असर सुबह साफ नजर आता है। यही वजह है कि रात को सोने से पहले स्किन केयर करना बेहद जरूरी माना जाता है।

  • देसी बनाम मॉडर्न: मकर संक्रांति के लिए सही खाना क्या है, डॉक्टर मीरा पाठक ने किया खुलासा

    देसी बनाम मॉडर्न: मकर संक्रांति के लिए सही खाना क्या है, डॉक्टर मीरा पाठक ने किया खुलासा

    नई दिल्ली। उत्तर भारत में मकर संक्रांति आते ही घरों में रसोई की खुशबू बदल जाती है। सर्दियों में गाजर, मटर, गोभी और विभिन्न दालों के मेल से बनी खिचड़ी इस पर्व का खास हिस्सा होती है। यह सिर्फ स्वाद या परंपरा का हिस्सा नहीं, बल्कि शरीर को हल्का और ऊर्जा देने वाला भोजन भी है।

    खिचड़ी: हल्का और संतुलित भोजन
    जनवरी का महीना त्योहारी सीजन और भारी खाने के बाद शरीर को हल्का और संतुलित भोजन चाहता है। इसी कारण खिचड़ी इस समय सबसे ज्यादा पसंद की जाती है। भंगेल सीएचसी की सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. मीरा पाठक के अनुसार, खिचड़ी एक संपूर्ण और टाइम-टेस्टेड आयुर्वेदिक डाइट है, जिसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और आवश्यक अमीनो एसिड्स संतुलित मात्रा में मौजूद होते हैं। दाल में मौजूद लाइसीन और चावल में मिथिओनीन मिलकर एक कंप्लीट प्रोटीन बनाते हैं।

    डिटॉक्स और रिकवरी के लिए बेहतरीन विकल्प
    डॉ. पाठक बताती हैं कि खिचड़ी पचाने में हल्की होती है और शरीर व मस्तिष्क को ‘सॉफ्ट रीसेट’ देती है। कुछ दिनों तक सिंपल और आसानी से पचने वाला भोजन लेने से आंतें, लिवर और नर्वस सिस्टम को आराम मिलता है और शरीर रिकवरी मोड में चला जाता है। यही कारण है कि इसे डिटॉक्स डाइट के लिए सबसे सुरक्षित और असरदार माना जाता है।

    शुगर लेवल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण
    खिचड़ी धीरे-धीरे ऊर्जा रिलीज करती है, जिससे ब्लड शुगर में अचानक उछाल नहीं आता। जूस, प्रोबायोटिक ड्रिंक्स या कोम्बुचा की तुलना में यह अधिक संतुलित और भरोसेमंद विकल्प है। इसमें हाइड्रेटिंग और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी मौजूद होते हैं, जो सूजन, थकान और शरीर में होने वाले अंदरूनी ‘वेयर एंड टियर’ को कम करने में मदद करते हैं।

    वर्सटाइल और मॉडर्न-सपोर्टेड भोजन
    खिचड़ी की सबसे बड़ी खूबी इसकी वर्सटाइल नेचर है। इसमें चावल की जगह मिलेट्स, मूंग दाल के साथ अन्य दालें, सब्जियां, पनीर या शुद्ध घी मिलाकर इसे और भी पौष्टिक बनाया जा सकता है। यह हमारी पारंपरिक भारतीय समझ पर आधारित है, जिसे आज की मॉडर्न साइंस भी पूरी तरह समर्थन करती है।

    मकर संक्रांति पर बनाई जाने वाली खिचड़ी सिर्फ स्वाद और त्यौहार की पहचान नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, ऊर्जा, डिटॉक्स और शरीर की रिकवरी के लिए एक संतुलित, पौष्टिक और भरोसेमंद भोजन है। यह हर उम्र और हर मौसम के लिए लाभकारी है।

  • मकर संक्रांति पर देसी खिचड़ी बनाम मॉडर्न डिटॉक्स: सेहत के लिए क्यों बेहतर है पारंपरिक स्वाद, जानें डॉक्टर की राय

    मकर संक्रांति पर देसी खिचड़ी बनाम मॉडर्न डिटॉक्स: सेहत के लिए क्यों बेहतर है पारंपरिक स्वाद, जानें डॉक्टर की राय


    नई दिल्ली।उत्तर भारत के घरों में मकर संक्रांति आते ही रसोई की खुशबू कुछ खास हो जाती है। सर्दियों की ठंड में गाजर मटर गोभी और अलग-अलग दालों के मेल से बनी गरमागरम खिचड़ी न सिर्फ स्वाद देती है बल्कि शरीर और मन को भी सुकून पहुंचाती है। यह व्यंजन केवल परंपरा या पर्व से जुड़ा नहीं है बल्कि इसके पीछे गहरी स्वास्थ्य समझ भी छिपी हुई है जिसे आज आधुनिक चिकित्सा भी स्वीकार करती है।जनवरी का महीना आमतौर पर ऐसा समय होता है जब लोग शादी-पार्टियों त्योहारों और भारी भोजन के बाद अपने शरीर को दोबारा संतुलन में लाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में शरीर अपने-आप हल्के सादे और आसानी से पचने वाले भोजन की मांग करता है। शायद यही कारण है कि इस मौसम में खिचड़ी सबसे ज्यादा पसंद की जाती है और यह हमें अंदर से ग्राउंडेड महसूस कराती है।

    इस विषय पर भंगेल सीएचसी की सीनियर मेडिकल ऑफिसर और गायनेकोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. मीरा पाठक ने आईएएनएस से बातचीत में खिचड़ी के स्वास्थ्य लाभों को सरल शब्दों में समझाया। उनका कहना है कि आजकल यह गलत धारणा बन गई है कि खिचड़ी सिर्फ बीमार लोगों या कमजोरी के समय खाई जाती है जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है।डॉ. मीरा पाठक के अनुसार खिचड़ी एक टाइम-टेस्टेड आयुर्वेदिक डाइट है और इसे संपूर्ण आहार माना जाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन और जरूरी अमीनो एसिड्स का संतुलन होता है। दाल में मौजूद लाइसीन और चावल में पाए जाने वाले मिथिओनीन अमीनो एसिड मिलकर एक कंप्लीट प्रोटीन बनाते हैं जो शरीर की मरम्मत और ऊर्जा के लिए बेहद जरूरी है।

    डिटॉक्स डाइट की बात करें तो खिचड़ी सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्पों में से एक है। डॉ. मीरा बताती हैं कि खिचड़ी पचाने में बेहद हल्की होती है और शरीर व दिमाग को एक तरह का सॉफ्ट रीसेट देती है। कुछ दिनों तक सिंपल और हल्का भोजन करने से आंतों लिवर और नर्वस सिस्टम को आराम मिलता है जिससे शरीर खुद को रिपेयर कर पाता है।खिचड़ी की एक और खासियत यह है कि यह धीरे-धीरे ऊर्जा रिलीज करती है। इससे ब्लड शुगर लेवल में अचानक उछाल नहीं आता जो आजकल की जूस डाइट या ट्रेंडी डिटॉक्स ड्रिंक्स में आम समस्या है। डॉ. मीरा के मुताबिक जूस कोम्बुचा या प्रोबायोटिक सप्लीमेंट्स की तुलना में खिचड़ी कहीं ज्यादा संतुलित और पोषण से भरपूर विकल्प है।

    इसके अलावा खिचड़ी में हाइड्रेटिंग और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं जो शरीर की सूजन थकान और अंदरूनी टूट-फूट को ठीक करने में मदद करते हैं। यही कारण है कि इसे रिकवरी और बीमारी के समय दिया जाता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि यह सिर्फ बीमारों का खाना है।खिचड़ी की सबसे बड़ी खूबी इसकी वर्सटाइल प्रकृति है। इसमें चावल की जगह मिलेट्स अलग-अलग दालें मौसमी सब्जियां पनीर या शुद्ध घी मिलाकर इसे और भी पौष्टिक बनाया जा सकता है। यह हमारी पारंपरिक भारतीय समझ का प्रतीक है जिसे आज मॉडर्न साइंस भी पूरी तरह समर्थन देता है।

  • एक दिन के लिए दिल्ली-NCR के आसपास कहां घूमने जाएं? न ज्यादा खर्च न टाइम की झंझट



    नई दिल्ली। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में अपनों के लिए वक्त निकाल पाना अपने आपमें एक बड़ी जंग है. ऑफिस से लंबी छुट्टी ले पाना कई लोगों के लिए बहुत मुश्किल होता है. लेकिन अगर आपको दिन की छुट्टी मिली है और आप कन्फ्यूज हैं कि इस एक दिन में आप अपने परिवार के साथ कहां जा सकते हैं, तो आपको हम 3 ऐसी जगहों के बारे में बताएंगे, जहां आप जा सकते हैं. इन सभी जगहों की यात्रा करना जेब पर भी कम भारी पड़ता है और साथ ही यह सभी जगहें दिल्ली के करीब में हैं.

    एक दिन की छुट्टी में कहां-कहां जा सकते हैं?
    हम जिन जगहों के बारे में बताएंगे, वहां जाना आसान भी हैं और परिवार व दोस्तों के साथ जाने में काफी मजा भी आएगा. इसी के साथ आप आराम से एकदिन में इन सभी जगहों की यात्रा कर वापस भी आ सकेंगे. तो चलिए जानते हैं कौन-कौनसी जगहें हैं इस लिस्ट में?

    दिल्ली के सबसे करीब अगर किसी टूरिस्ट प्लेस की बात हो तो सबसे पहले आगरा का नाम आता है. यहां मौजूद ताज महल (Taj Mahal) अपनी खूबसूरती से आपको इतिहास और मोहब्बत की एक शानदार झलक दिखाएगा. आप अपनी एक दिन की छुट्टी में यहां का एक छोटा ट्रिप प्लेन कर सकते हैं. इस ट्रिप के दौरान आप न सिर्फ ताज महल का दीदार कर सकेंगे, बल्कि आगरा के लाल किला और फतेहपुर सीकरी जैसे मशहूर प्लेसेस में अपनी फैमली और दोस्तो के साथ जा पाएंगे. इसी का साथ यहां स्थानीय खानपान आपको काफी पसंद आएगा.
    मथुरा-वृंदावन

    अगर आप अपनी एक दिन की छुट्टी को भगवान के करीब रहकर गुजारना चाहते हैं तो आप दिल्ली से 3-4 घंटे की दूरी में मौजूद मथुरा और Vrindavan जा सकते हैं. यहां की प्रचीन मंदिरें और वहां भक्ति और संस्कृति का अनोखा संगम आपके मन को न सिर्फ शांति देगा बल्कि एक यादगार सफर बनेगा.

    जयपुर भी बड़ा खास

    इन दोनों जगहों के अलावा आप Jaipur की भी यात्रा कर सकते हैं. 5-6 घंटे का सफर करके आप यहां मौजूद रंगीन बाजारों और महलों में जा सकते हैं और इतिहास को याद कर सकते हैं. इसके अलावा राजस्थान का मशहूर खानपान आपको अपना दीवाना बना देगा.

  • Winter Skincare Routine: सर्दियों में सुबह चेहरे पर क्या लगाने से त्वचा मुलायम और सुंदर होती है? स्किनकेयर में ये चीजें सबसे असरदार

    Winter Skincare Routine: सर्दियों में सुबह चेहरे पर क्या लगाने से त्वचा मुलायम और सुंदर होती है? स्किनकेयर में ये चीजें सबसे असरदार

    नई दिल्ली। सर्दियों में चेहरे को चमकदार, मुलायम और सुंदर बनाए रखने के लिए उसकी एक्ट्रा केयर करने की जरूरत होती है। कुछ लोग सोने से पहले स्किन केयर करते हैं, तो कुछ सुबह उठते ही चेहरे पर निखार लाने के लिए रोजाना कुछ चीजें अप्लाई करते हैं। ऐसे में कई लोगों में यह कंफ्यूजन रहती है कि आखिरकार सर्दियों में सुबह चेहरे पर क्या लगाने से स्किन मुलायम और सुंदर होती है? साथ ही यह भी जानना चाहते हैं कि सर्दियों में स्किनकेयर में कौन सी चीजें सबसे ज्यादा असरदार होती हैं? ऐसे में अपनी स्किन के हिसाब से आप नेचुरल, हर्बल या स्किन केयर प्रॉडक्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं, आइए जानें इसके बारे में।

    सबसे पहले चेहरे को साफ करें
    सुबह उठने के बाद सबसे पहले चेहरे को पानी से साफ करें। पानी बहुत ज्यादा ठंडा या गर्म नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही Hydrating face wash यूज करें। इसके बाद चेहरे पर गुलाबजल का स्प्रे करें। गुलाबजल चेहरे पर लगाने से नेचुरल ग्लो आता है।

    Vitamin C Serum लगाएं
    स्किन को ब्राइट और टाइट बनाने के लिए आप सुबह चेहरा धोने के बाद Vitamin C Serum लगा सकते हैं। इससे दाग-धब्ददबे कम होते हैं। इसके बाद मॉइस्चराइज़र लगाएं। नेचुरल चीजों का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो आप एलोवेरा जेल लगा सकते है। यह स्किन को अंदर से मॉइश्चराइज करता है। इसके उपयोग से स्किन सॉफ्ट भी बनी रहती है।
    Sunscreen लगाना सबसे जरूरी
    सर्दी के मौसम में अगर आप घर पर हैं तो ये न सोचें कि सनस्क्रीन लगाने की क्या जरूरत है। अपनी स्किन को लंबे समय तक जवान बनाए रखने के लिए आपको रोजाना इसे लगाना है। SPF 30–50 वाली सनस्क्रीन का चुनाव करें।

  • सावधान! ये आदतें दे सकती हैं दांतों की इन जानलेवा बीमारियों को न्योता जानें सड़न से बचाने के उपाय

    सावधान! ये आदतें दे सकती हैं दांतों की इन जानलेवा बीमारियों को न्योता जानें सड़न से बचाने के उपाय


    नई दिल्ली । दांतों की सेहत से जुड़ी समस्याएं केवल असुविधा का कारण नहीं बनतीं बल्कि ये शरीर के अन्य हिस्सों पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं। दांतों की समस्याएं जैसे सड़न कैविटी मसूड़ों से खून आना और मुंह की बदबू न केवल हमारे आत्मविश्वास को प्रभावित करती हैं बल्कि शरीर के स्वास्थ्य के लिए भी खतरे की घंटी होती हैं। यदि आप यह समझते हैं कि आपकी कुछ आदतें दांतों की समस्याओं को जन्म देती हैं तो आपको अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने की आवश्यकता हो सकती है।

    मीठी चीजों जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड से दांतों पर असर

    डेंटिस्ट डॉ. लीना गुलानी का कहना है कि अगर आप लगातार मीठे खाद्य पदार्थों जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का सेवन करते हैं तो यह दांतों की सड़न और अन्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। ऐसे खाद्य पदार्थों में शुगर अस्वास्थ्यकर फैट्स और आर्टिफिशियल फ्लेवर होते हैं जो दांतों के इनेमल को नुकसान पहुंचाते हैं। शुगर के साथ बैक्टीरिया दांतों में जमा हो जाते हैं जिससे सड़न और कैविटी का खतरा बढ़ जाता है। यदि लंबे समय तक ऐसा खानपान जारी रखा जाए तो यह मसूड़ों से जुड़ी समस्याओं को भी जन्म दे सकता है। शुगर के अत्यधिक सेवन से दांतों में प्लाक और टार्टर का निर्माण होता है जिससे सड़न की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा जंक फूड जो अक्सर तला हुआ और नमकीन होता है दांतों में फंसा रह जाता है और इसे समय पर साफ न करने पर यह दांतों में सड़न पैदा कर सकता है।

    तंबाकू का सेवन दांतों के लिए गंभीर खतरा

    तंबाकू का सेवन न केवल शरीर के लिए हानिकारक है बल्कि यह दांतों और मसूड़ों के लिए भी बेहद खतरनाक है। डॉ. लीना गुलानी के अनुसार तंबाकू से दांतों में सड़न मसूड़ों से खून आना मुंह में बदबू और गम रोग जैसे गंभीर स्वास्थ्य मुद्दे हो सकते हैं। तंबाकू से दांतों में पीला रंग और काले दाग पड़ सकते हैं। यह मसूड़ों की सूजन और मसूड़ों की बीमारी का कारण भी बनता है। इसके अलावा तंबाकू के सेवन से मुंह के कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।

    दांतों की समस्याओं के लक्षणों को न करें नजरअंदाज

    यदि आपको दांतों में दर्द मसूड़ों में सूजन खून आना या मुंह से बदबू जैसी समस्याएं महसूस हों तो इसे हल्के में लेना बिल्कुल भी उचित नहीं है। डॉ. गुलानी का कहना है कि इन लक्षणों की अनदेखी करना दांतों की बीमारियों को बढ़ावा दे सकता है जो बाद में गंभीर समस्याएं बन सकती हैं। समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श और इलाज लेने से बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है।

    सही टूथब्रश और डाइट का महत्व

    दांतों की सेहत को बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी चीज है सही टूथब्रश का चयन और उसे नियमित रूप से इस्तेमाल करना। डॉ. गुलानी के अनुसार दिन में कम से कम दो बार ब्रश करना दांतों की सफाई और सड़न से बचाव में मदद करता है। इसके साथ ही बैलेंस्ड और हेल्दी डाइट का पालन करना भी बहुत महत्वपूर्ण है। भोजन में शुगर की मात्रा कम करने से न केवल दांतों की सड़न से बचा जा सकता है बल्कि यह आपके पूरे शरीर के लिए भी फायदेमंद होता है।इसके अलावा ज्यादा मीठी चीजों और प्रोसेस्ड फूड का सेवन करने से बचें क्योंकि ये शरीर के लिए न केवल दांतों की सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि आपके समग्र स्वास्थ्य को भी प्रभावित करते हैं।

    फल सब्जियां दूध और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ दांतों को स्वस्थ रखने के लिए अच्छे विकल्प हो सकते हैं।दांतों की सेहत का ख्याल रखना हमारी जिम्मेदारी है और यह हमारे दैनिक जीवन की आदतों पर निर्भर करता है। यदि आप मीठे खाद्य पदार्थों जंक फूड या तंबाकू का सेवन करते हैं तो आपको दांतों की समस्याओं से बचने के लिए इन आदतों में बदलाव करने की आवश्यकता हो सकती है। समय पर विशेषज्ञ की सलाह और दांतों की सही देखभाल के जरिए आप इन समस्याओं से बच सकते हैं और लंबे समय तक स्वस्थ दांतों का आनंद ले सकते हैं।

  • इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं खानी चाहिए मूंगफली, वरना पड़ जाएंगे लेने के देने

    इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं खानी चाहिए मूंगफली, वरना पड़ जाएंगे लेने के देने


    नई दिल्ली । सर्दियों में धूप में बैठकर मूंगफली खाना एक लोकप्रिय शगल है खासतौर पर भारत में। यह न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि प्रोटीन फैट और फाइबर से भरपूर होने के कारण इसे गरीबों का बादाम भी कहा जाता है। हालांकि यह सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती है लेकिन कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों में मूंगफली का सेवन गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इस लेख में हम उन 5 खास परिस्थितियों पर प्रकाश डालेंगे जिनमें मूंगफली का सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
    गंभीर एलर्जी से जूझ रहे लोग

    मूंगफली की एलर्जी दुनिया भर में सबसे आम और खतरनाक एलर्जी मानी जाती है। यह एलर्जी गंभीर परिणाम दे सकती है। यदि किसी व्यक्ति को मूंगफली से एलर्जी है तो उसे इससे बने उत्पादों के सेवन से बचना चाहिए। एलर्जी की प्रतिक्रियाएं त्वचा पर चकत्ते खुजली दस्त और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षणों के रूप में सामने आ सकती हैं। गंभीर मामलों में एनाफिलेक्सिस एक प्रकार की जानलेवा एलर्जिक प्रतिक्रिया हो सकती है जो तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है। इस कारण से मूंगफली या उससे बने उत्पादों से पूरी तरह से परहेज करने की सलाह दी जाती है।

    वेट लॉस डाइट पर रहने वाले लोग
    मूंगफली पोषक तत्वों से भरपूर होने के बावजूद इसमें कैलोरी और फैट की मात्रा भी अधिक होती है। यदि आप वजन घटाने के लिए डाइट पर हैं तो मूंगफली का अत्यधिक सेवन आपके प्रयासों पर पानी फेर सकता है। एक मुट्ठी मूंगफली में 160 से 180 कैलोरी होती हैं जो वेट लॉस डाइट के लिए अनुपयुक्त हो सकती हैं। अत्यधिक फैट और कैलोरी के सेवन से आपका वजन बढ़ सकता है जिससे वेट लॉस के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए यदि आप वजन घटाना चाहते हैं तो मूंगफली का सेवन नियंत्रित मात्रा में करना चाहिए।

    हाई ब्लड प्रेशर के मरीज

    सामान्य मूंगफली में सोडियम की मात्रा बहुत कम होती है लेकिन बाजार में मिलने वाली अधिकतर मूंगफली ‘रोस्टेड और साल्टेड’ नमकीन होती हैं जिनमें अतिरिक्त नमक होता है। नमक का अत्यधिक सेवन उच्च रक्तचाप हाई ब्लड प्रेशर वाले व्यक्तियों के लिए खतरनाक हो सकता है। यह रक्तचाप को अचानक बढ़ा सकता है जो हृदय रोगियों के लिए गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। अगर आप हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं तो नमकीन मूंगफली से बचें और केवल बिना नमक वाली मूंगफली का सेवन करें।

    शरीर में सूजन ,सूजन और जलन की समस्या

    मूंगफली में ओमेगा-6 फैटी एसिड की मात्रा अधिक होती है जबकि ओमेगा-3 की कमी होती है। शरीर में इन फैटी एसिड्स का असंतुलन सूजन और जलन की समस्याओं को बढ़ावा दे सकता है। जो लोग पहले से ही जोड़ों के दर्द आर्थराइटिस या शरीर में सूजन से पीड़ित हैं उन्हें मूंगफली का सेवन बहुत सोच-समझ कर करना चाहिए। ओमेगा-6 का अत्यधिक सेवन सूजन बढ़ा सकता है जिससे इन समस्याओं में वृद्धि हो सकती है। इसीलिए ऐसे लोग मूंगफली के सेवन में सावधानी बरतें और डॉक्टर से परामर्श लें।


    मिनरल्स की कमी वाले लोग

    मूंगफली में फाइटिक एसिड पाया जाता है जो शरीर में आवश्यक मिनरल्स जिंक आयरन कैल्शियम मैग्नीशियम के अवशोषण में बाधा डालता है। यदि आप इन मिनरल्स की कमी से जूझ रहे हैं तो मूंगफली का अत्यधिक सेवन आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। यह फाइटिक एसिड शरीर में इन महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की कमी को बढ़ा सकता है जिससे अन्य स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे लोगों को मूंगफली के सेवन में संयम बरतना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

    मूंगफली का सेवन सेहत के लिए कई लाभकारी हो सकता है लेकिन यह हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं है। खासकर जिन लोगों को एलर्जी हाई ब्लड प्रेशर सूजन की समस्या या मिनरल्स की कमी है उन्हें मूंगफली से बचना चाहिए। किसी भी चीज की अति हानिकारक हो सकती है और यदि आप उपरोक्त में से किसी भी श्रेणी में आते हैं तो मूंगफली को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। इसके अलावा अगर आप सर्दियों में मूंगफली का आनंद लेना चाहते हैं तो सीमित मात्रा में और बिना नमक वाली मूंगफली का सेवन करना सबसे बेहतर रहेगा

  • 40 के बाद भी स्किन रहे ग्लोइंग और यंग: रोज़ अपनाएं ये 8 आसान रुटीन

    40 के बाद भी स्किन रहे ग्लोइंग और यंग: रोज़ अपनाएं ये 8 आसान रुटीन


    नई दिल्ली। 40 की उम्र के बाद भी त्वचा में नेचुरल ग्लो और युवा लुक बनाए रखना मुश्किल नहीं है। सही स्किनकेयर, हेल्दी डाइट, पर्याप्त नींद और स्ट्रेस-फ्री लाइफस्टाइल अपनाकर आप हर उम्र में हेल्दी और ग्लोइंग दिख सकती हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि बड़ी-बड़ी चीज़ों या महंगे प्रोडक्ट्स की जरूरत नहीं, बल्कि रोज़ाना के छोटे-छोटे हेल्दी रुटीन ही स्किन, एनर्जी और कॉन्फिडेंस को बनाए रखते हैं।

    1. स्किन क्लीनिंग और मॉइस्चराइजिंग:
    40 की उम्र में त्वचा ड्राई और डल दिखने लगती है। सुबह और शाम चेहरा अपनी स्किन टाइप के अनुसार माइल्ड क्लींजर से धोएं और हाइड्रेटिंग मॉइस्चराइजर लगाएं। रात में नाइट क्रीम का इस्तेमाल करें, जिससे त्वचा रिपेयर होती है और सुबह फ्रेश ग्लो दिखाई देता है।

    2. सनस्क्रीन का महत्व:
    सन डैमेज त्वचा की एजिंग को तेज करता है। इसलिए घर के अंदर या बाहर, SPF 30 या उससे अधिक का सनस्क्रीन रोजाना लगाना जरूरी है। यह पिगमेंटेशन, झाइयां और झुर्रियों को कंट्रोल करता है और स्किन को लंबे समय तक हेल्दी रखता है।

    3. हेल्दी डाइट और पानी:
    ग्लो बाहर से नहीं, अंदर से आता है। डाइट में हरी सब्जियां, मौसमी फल, सलाद, नट्स और प्रोटीन शामिल करें। शुगर और प्रोसेस्ड फूड कम करें। रोजाना 8–10 गिलास पानी पीने से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और त्वचा नेचुरली ब्राइट दिखती है। ओमेगा-3 फूड जैसे बादाम, अखरोट और बीज स्किन को प्लंप और ग्लोइंग बनाते हैं।

    4. पर्याप्त नींद और स्ट्रेस कम करना:
    40 के बाद स्ट्रेस का असर सीधे चेहरे पर दिखाई देता है। डार्क सर्कल, सूजन और डल स्किन इसके संकेत हैं। रोजाना 7–8 घंटे की नींद लें और योग, मेडिटेशन या हल्की वॉक से स्ट्रेस कम करें।

    5. एक्सरसाइज और फेस योगा:
    20–30 मिनट की डेली वॉक या एक्सरसाइज ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाती है और स्किन में नैचुरल रेडियंस लाती है। फेस योगा और मसाज मसल्स को टाइट रखते हैं और सैगिंग कम करते हैं। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या हल्के वेट्स मसल्स और हड्डियों के लिए भी फायदेमंद हैं।

    6. हार्श केमिकल्स से दूरी:
    40 के बाद हेवी मेकअप और हार्श स्किनकेयर स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सिंपल और कंसिस्टेंट रुटीन अपनाएं। नेचुरल या डर्मेटोलॉजिस्ट-रिकमेन्डेड प्रोडक्ट्स, गर्म पानी से चेहरा धोना और हायल्यूरोनिक एसिड या विटामिन C जैसी एक्टिव इंग्रेडिएंट्स स्किन को सपोर्ट करती हैं और नेचुरल ग्लो बनाए रखती हैं।

    7. स्ट्रेस-फ्री लाइफ:
    लंबे समय तक स्ट्रेस उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज करता है। मेडिटेशन, डीप ब्रीदिंग और “मी-टाइम” जैसी आदतें मानसिक शांति देती हैं और चेहरे पर पॉजिटिव ग्लो लाती हैं।
    8. नियमित हेल्थ चेक-अप:
    40 की उम्र के बाद स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी हो जाती है। इससे संभावित समस्याओं को समय रहते पहचानकर नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं।

    सबसे अहम बात यह है कि बड़ी चीज़ों की जरूरत नहीं, बल्कि रोज़ाना की छोटी-छोटी हेल्दी आदतें ही आपकी स्किन, एनर्जी और कॉन्फिडेंस को 40 की उम्र के बाद भी बनाए रख सकती हैं।

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    नई दिल्ली। कोई हवाई यात्रा नहीं, कोई लंबी छुट्टियां नहीं. बस अपना बैग पैक करें, अपनी कार में बैठें और सड़क पर निकल पड़ें. गणतंत्र दिवस के लिए आने वाले लंबे वीकेंड के साथ, हैदराबाद से ये छोटी रोड ट्रिप एक क्विक, स्ट्रेस-फ्री छुट्टी के लिए एकदम सही हैं. आइए आपको बताते हैं यहां के कुछ खास जगहों के बारे में विस्तार से.
    अनंतगिरी हिल्स, तेलंगाना (80 km): बस थोड़ी ही दूर, फिर भी एक अलग ही दुनिया. कोहरे से ढकी सड़कें, कॉफी के बागान, जंगल के रास्ते और शांत मंदिर—अनंतगिरी बिना किसी खास प्लानिंग के आराम से लंबा वीकेंड बिताने के लिए एकदम सही जगह है.
    बीदर, कर्नाटक (145 km): एक शांत और ऐतिहासिक शहर जहाँ समय रुका हुआ लगता है. बीदर किले के फ़ारसी स्टाइल के मेहराबों में घूमें, पुराने मदरसों को देखें, और किले की दीवारों से सूर्यास्त देखते हुए अपना दिन खत्म करें. यह उन लोगों के लिए एकदम सही है जो भीड़ से दूर एक ऐतिहासिक अनुभव चाहते हैं.
    मेडक (100 km): थोड़ी ही ड्राइव पर, शानदार नज़ारे. मेडक कैथेड्रल शानदार और शांत है, खासकर सर्दियों की रोशनी में यह बहुत सुंदर लगता है. इसके साथ एक आरामदायक दिन की यात्रा, लोकल खाने के ऑप्शन और शांत ग्रामीण माहौल का मज़ा लें.
    नागार्जुन सागर (165 km): खुला पानी, पथरीला इलाका और सुहावना सर्दियों का आसमान. विशाल बांध, नागार्जुनकोंडा तक नाव की सवारी, और जलाशय के किनारे शांत शामें इसे शहर की भागदौड़ से एक आसान और ताज़ा करने वाला ब्रेक बनाती हैं.
    श्रीशैलम (215 km): घने नल्लामाला जंगलों में बसा एक आध्यात्मिक ठिकाना.
    मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन करें, कृष्णा नदी के नज़ारों का आनंद लें, और सुंदर घाट सड़कों का मज़ा लें जो यात्रा को मंज़िल जितना ही मज़ेदार बनाती हैं.
    कुरनूल (210 km): इतिहास पसंद करने वालों और गुफाओं को खोजने वालों के लिए. भारत की सबसे लंबी गुफा प्रणालियों में से एक बेलम गुफाओं को देखें, और मनोरम दृश्यों के लिए कोंडारेड्डी किले में जाएं. यह रोमांच, विरासत और शांतिपूर्ण खोज का एक अनोखा संगम है.