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  • नहाते समय कान में चला गया पानी? घरेलू उपायों से मिल सकती है राहत, लापरवाही बढ़ा सकती है संक्रमण का खतरा

    नहाते समय कान में चला गया पानी? घरेलू उपायों से मिल सकती है राहत, लापरवाही बढ़ा सकती है संक्रमण का खतरा

    नई दिल्ली । नहाते समय या बाल धोते वक्त कान में पानी चला जाना एक आम समस्या हैजिसे अधिकतर लोग हल्के में ले लेते हैं। हालांकि डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह छोटी-सी परेशानी समय पर ध्यान न देने पर गंभीर रूप ले सकती है। कान में फंसा पानी न सिर्फ असहजता पैदा करता हैबल्कि संक्रमणदर्द और सुनने की क्षमता पर असर जैसी समस्याओं का कारण भी बन सकता है। इसलिए जरूरी है कि सही और सुरक्षित तरीकों से ही इस समस्या से राहत पाई जाए। विशेषज्ञों के अनुसारजब नहाते समय तेज दबाव के साथ पानी कान में प्रवेश करता हैतो वह ईयर कैनाल में फंस सकता है। कान की बनावट और अंदर मौजूद ईयर वैक्स कान का मैल कई बार पानी को बाहर निकलने से रोक देता है।
    इससे कान भारी लगने लगता हैआवाजें साफ सुनाई नहीं देतीं और एक अजीब-सी झनझनाहट महसूस होती है। लंबे समय तक नमी बनी रहने से कान के अंदर गर्म और नम वातावरण बन जाता हैजो बैक्टीरिया और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल होता है। यही कारण है कि लापरवाही करने पर इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि सबसे आसान और सुरक्षित घरेलू उपाय गुरुत्वाकर्षण (ग्रैविटी) का इस्तेमाल करना है। जिस कान में पानी गया होउस तरफ सिर झुकाकर कुछ मिनट तक लेटना कई बार पानी को बाहर निकालने के लिए पर्याप्त होता है। इसी दौरान कान की लोब को हल्के से नीचे और बाहर की ओर खींचने से ईयर कैनाल सीधी होती है और फंसा हुआ पानी बाहर निकल सकता है।

    कुछ मामलों में हेयर ड्रायर का उपयोग भी मददगार हो सकता है। ड्रायर को कम गर्मी या ठंडी हवा के मोड पर रखकर कान से सुरक्षित दूरी पर इस्तेमाल किया जाए तो अंदर की नमी सूख सकती है। हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि ड्रायर को बहुत पास लाना या ज्यादा देर तक गर्म हवा देना नुकसानदेह हो सकता है। डॉक्टर साफ तौर पर बताते हैं कि कान में कॉटन बडपिनमाचिस की तीली या किसी भी नुकीली वस्तु का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इससे कान की अंदरूनी त्वचा को चोट लग सकती है और ईयर ड्रम के फटने का भी खतरा रहता है। इसी तरह जबरदस्ती फूंक मारना या किसी तरल पदार्थ को कान में डालना स्थिति को और बिगाड़ सकता है।

    यदि 24 घंटे से अधिक समय तक कान में पानी भरा हुआ महसूस होदर्दखुजली या जलन शुरू हो जाएया कान से पीले रंग का स्राव निकलने लगेतो तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। जिन लोगों का पहले कान का ऑपरेशन हो चुका हो या जिनके कान के पर्दे में छेद की समस्या रही होउन्हें घरेलू उपाय करने से पहले विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह है कि नहाते समय या तैराकी के दौरान ईयर प्लग का इस्तेमाल किया जाए। जरूरत पड़ने पर कॉटन पर हल्की वैसलीन लगाकर कान में रखा जा सकता हैताकि पानी अंदर न जाए। साथ ही बार-बार कान साफ करने की आदत से भी बचना चाहिएक्योंकि इससे ईयर वैक्स का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है।

  • मौन व्रत: मानसिक शांति और स्वास्थ्य के लिए वरदान..

    मौन व्रत: मानसिक शांति और स्वास्थ्य के लिए वरदान..


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और शोर-शराबे से भरी दुनिया में शांति एक दुर्लभ लेकिन बेहद जरूरी चीज बन गई है। लगातार अशांति और शोर-शराबा न केवल शरीर को बीमारियों की ओर ले जाता हैबल्कि तनावचिड़चिड़ापन और मानसिक थकान भी बढ़ाता है। ऐसे में मौन का अभ्यास सेल्फ-अवेयरनेसमानसिक स्पष्टता और आंतरिक शांति का बेहतरीन साधन बन जाता है।

    सनातन धर्म में मौन व्रत को सर्वोत्तम तप माना गया है। हर साल मौनी अमावस्या को यह व्रत रखा जाता है। यह न केवल धार्मिक महत्व रखता हैबल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। मौन का अभ्यास केवल बाहर की शांति नहीं हैबल्कि यह एक सक्रिय प्रक्रिया हैजो हमें आंतरिक दुनिया की ओर ले जाती है और मन को शांत करती है।

    आयुर्वेद के अनुसारअधिक बोलना वात दोष को बढ़ाता हैजिससे मन अशांत होता हैनींद प्रभावित होती है और ऊर्जा का क्षय होता है। मौन रहने से मन शांत रहता हैसत्व गुण बढ़ते हैंऊर्जा बचती है और एकाग्रताध्यान और मानसिक क्षमता मजबूत होती है। यह तनावक्रोध और हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है।भगवद्गीता में मौन को गुह्य ज्ञान कहा गया है। इसमें मौन व्रत को मानसिक तप का रूप माना गया हैजो शरीर और मन के संतुलन के लिए फायदेमंद है। मौन व्रत से वाणी और संयम के जरिए ओजस की रक्षा होती है और सेहत मजबूत बनती है।

    कई रिसर्च में यह सिद्ध हुआ है कि शोर प्रदूषण मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालता हैजबकि मौन का दिमाग पर हीलिंग प्रभाव पड़ता है। अध्ययन बताते हैं कि रोजाना दो घंटे का मौन ब्रेन सेल्स के विकास को बढ़ाता हैजिससे याददाश्तभावनाएं और सीखने की क्षमता सुधरती है। मौन तनाव हार्मोन कोर्टिसोल को कम करता हैब्लड प्रेशर और हृदय गति को नियंत्रित करता हैनींद सुधारता है और एकाग्रताक्रिएटिविटी और भावनात्मक संतुलन बढ़ाता है।संक्षेप मेंमौन व्रत केवल आध्यात्मिक साधना नहीं हैबल्कि यह शारीरिकमानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का वरदान भी है। जीवन में शांति और संतुलन बनाए रखने के लिए मौन व्रत को अपनी दिनचर्या में अपनाना एक अत्यंत उपयोगी साधन हो सकता है।

  • नई ट्रेंडिंग स्टाइल: क्यों लोग बदल रहे हैं बालों का रंग और क्या है इसका असर?

    नई ट्रेंडिंग स्टाइल: क्यों लोग बदल रहे हैं बालों का रंग और क्या है इसका असर?

    नई दिल्ली।  आजकल बालों का रंग बदलना सिर्फ फैशन नहीं रहा, बल्कि यह खुद को व्यक्त करने और स्टाइल स्टेटमेंट बनाने का तरीका बन गया है। सलून और हेयर स्टाइलिस्ट्स का कहना है कि पिछले कुछ सालों में बाल रंगने की मांग में 40-50% बढ़ोतरी देखी गई है। खासकर युवाओं और सोशल मीडिया प्रभावित पीढ़ी में ब्राउन, ब्लॉन्ड, पेस्टल और हाईलाइटेड बालों का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है।

    बालों का रंग बदलने के पीछे सिर्फ स्टाइल का फैक्टर नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोग अपने स्वयं के व्यक्तित्व और मूड को दर्शाने के लिए यह कदम उठा रहे हैं। उदाहरण के लिए, गहरे रंग के बाल अधिक पारंपरिक और गंभीर, जबकि हल्के और पेस्टल टोन के बाल क्रिएटिव और फ्री स्पिरिटेड व्यक्तित्व को दिखाते हैं।

    बालों के रंग में नया तकनीकी इनोवेशन

    आजकल हेयर कलर में कई नए और सुरक्षित फॉर्मूले उपलब्ध हैं। प्राकृतिक हर्बल और ऑर्गेनिक हेयर डाई बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। ये न केवल बालों को सुरक्षित रखती हैं, बल्कि लंबे समय तक रंग को बनाए रखने में भी मदद करती हैं। कुछ ब्रांड्स में फेड-फ्री और UV प्रोटेक्टेड कलर भी उपलब्ध है, जिससे बाल चमकदार और स्वस्थ रहते हैं।

    सैलून प्रोफेशनल्स बताते हैं कि ग्रैजुएट, ऑफिस-गोइंग और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर युवाओं के बीच कलर ट्रेंड्स को काफी प्रभावित कर रहे हैं। अब लोग सिर्फ पार्टी या इवेंट्स के लिए नहीं, बल्कि डेली लुक के लिए भी रंग बदलते हैं।

    बाल रंगते समय ध्यान रखने वाली बातें

    हेयर एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि बालों को कलर करने से पहले हमेशा सैलून प्रोफेशनल से सलाह लें। घर पर खुद से डाई लगाने से बालों में डैमेज और ब्रेकेज हो सकता है। इसके अलावा, बालों को रंगने के बाद मास्क, कंडीशनर और सन्सक्रीन का इस्तेमाल करना जरूरी है ताकि रंग लंबे समय तक बना रहे और बाल स्वस्थ रहें।

    बालों का रंग बदलने से व्यक्तित्व में भी नया आत्मविश्वास आता है। कई लोग कहते हैं कि नया हेयर कलर उन्हें सक्रिय और ऊर्जा से भरा महसूस कराता है। इस वजह से बालों का रंग केवल फैशन नहीं, बल्कि एक प्रकार की मानसिक और सामाजिक अभिव्यक्ति बन गया है।

    सोशल मीडिया और सेलिब्रिटी का असर

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और बॉलीवुड-हॉलीवुड सितारे भी इस ट्रेंड को बढ़ावा दे रहे हैं। इंस्टाग्राम और टिकटॉक पर बालों के नए रंगों के वीडियो और टिप्स वायरल होते रहते हैं। युवा अपने हेयर कलर के लिए फोटोशूट और सोशल मीडिया पोस्ट के लिए भी प्रेरित हो रहे हैं।

  • सेब पर छिड़क लें बस एक चुटकी सेंधा नमक, स्वाद के साथ सेहत के फायदे हो जाएंगे दोगुने, जानिए दादी-नानी का आजमाया नुस्खा

    सेब पर छिड़क लें बस एक चुटकी सेंधा नमक, स्वाद के साथ सेहत के फायदे हो जाएंगे दोगुने, जानिए दादी-नानी का आजमाया नुस्खा


    नई दिल्ली । एक सेब रोज खाओ और डॉक्टर को दूर भगाओ यह कहावत लगभग हर किसी ने सुनी है। सेब को सेहत का खजाना माना जाता है, लेकिन आयुर्वेद और आधुनिक न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर सेब को सही तरीके से खाया जाए, तो इसके फायदे और भी बढ़ सकते हैं। दादी-नानी के जमाने से चला आ रहा एक सरल घरेलू नुस्खा आज फिर चर्चा में है सेब के स्लाइस पर एक चुटकी सेंधा नमक छिड़क कर खाना। यह न केवल स्वाद को बढ़ाता है, बल्कि शरीर पर इसके पोषक तत्वों का असर भी दोगुना कर देता है। न्यूट्रिशन विशेषज्ञों के अनुसार, सेब और सेंधा नमक का संयोजन शरीर के लिए पावरहाउस से कम नहीं है। सेब में मौजूद प्राकृतिक शुगर शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है। जब इसे नमक के साथ खाया जाता है, तो शरीर इसे तेजी से अवशोषित करता है। यही वजह है कि यह नुस्खा दोपहर की थकान, कमजोरी या वर्कआउट से पहले इंस्टेंट एनर्जी देने में बेहद कारगर माना जाता है।

    सेंधा नमक या हिमालयन पिंक सॉल्ट में सोडियम के साथ-साथ पोटैशियम, मैग्नीशियम और अन्य ट्रेस मिनरल्स भी होते हैं। ये तत्व शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने में मदद करते हैं। खासकर गर्मी के मौसम में, अधिक पसीना आने या भारी शारीरिक मेहनत के दौरान यह मिश्रण मांसपेशियों में ऐंठन और डिहाइड्रेशन से बचाव करता है पाचन से जुड़ी समस्याओं में भी यह नुस्खा बेहद लाभकारी है। सेब फाइबर से भरपूर होता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करता है। वहीं सेंधा नमक पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करता है। दोनों मिलकर पेट फूलने, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाते हैं और गट हेल्थ को बेहतर बनाते हैं।

    एसिडिटी से परेशान लोगों के लिए भी सेब और सेंधा नमक का यह संयोजन फायदेमंद माना जाता है। सेंधा नमक की क्षारीय प्रकृति सेब के कुछ एसिडिक तत्वों को संतुलित कर देती है, जिससे पेट में जलन और खट्टी डकार जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं। अक्सर लोगों को यह महसूस होता है कि नमक लगाने से सेब और भी मीठा लगने लगता है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है। नमक जीभ पर मौजूद कड़वाहट महसूस करने वाले रिसेप्टर्स को दबा देता है, जिससे सेब की प्राकृतिक मिठास और अधिक उभर कर सामने आती है।

    सेवन के सही तरीके की बात करें, तो हमेशा साधारण रिफाइंड नमक की जगह सेंधा नमक या गुलाबी नमक का ही उपयोग करें। नमक की मात्रा सिर्फ एक चुटकी तक सीमित रखें, क्योंकि अधिक नमक से ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सेब को अच्छी तरह धोकर ताजे स्लाइस में काटें और तुरंत सेवन करें। यह आसान घरेलू नुस्खा बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए फायदेमंद है। खासतौर पर जिम जाने वालों और खिलाड़ियों के लिए यह एक बेहतरीन प्री-वर्कआउट स्नैक साबित हो सकता है। हालांकि, किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या में इसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहेगा।

  • Skin Care Mistakes: महंगे प्रोडक्ट्स के बाद भी नहीं मिल रहा ग्लो? आपकी 7 गलतियां हो सकती हैं वजह

    Skin Care Mistakes: महंगे प्रोडक्ट्स के बाद भी नहीं मिल रहा ग्लो? आपकी 7 गलतियां हो सकती हैं वजह

    नई दिल्ली।  हर महिला चाहती है कि उसकी स्किन लंबे समय तक जवां और हेल्दी बनी रहे, लेकिन व्यस्त दिलचर्या, बढ़ती जिम्मेदारियां और सेल्फ-केयर की कमी के कारण अक्सर महिलाएं अनजाने में कुछ ऐसी स्किनकेयर मिस्टेक्स कर बैठती हैं, जो उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर देती हैं। इन गलतियों की वजह से स्किन पर झुर्रियां, फाइन लाइन्स और ढीलापन जल्दी नजर आने लगता है। आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही गलतियों के बारे में, जो ज्यादातर महिलाएं करती हैं और जिनसे बचकर स्किन को हेल्दी रखा जा सकता है।

    सनस्क्रीन का इस्तेमाल न करना
    अक्सर महिलाएं सोचती हैं कि सनस्क्रीन सिर्फ धूप में बाहर जाने पर लगाना जरूरी है। जबकि हकीकत यह है कि सूर्य की हानिकारक यूवी किरणें घर या ऑफिस के अंदर भी स्किन को नुकसान पहुंचा सकती हैं। सनस्क्रीन न लगाने से समय से पहले झुर्रियां और पिगमेंटेशन बढ़ने लगता है।

    स्किन की जरूरत के हिसाब से प्रॉडक्ट न चुनना
    बहुत सी महिलाएं बिना अपनी स्किन टाइप को समझे ही प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल कर लेती हैं। गलत प्रॉडक्ट्स स्किन को ड्राई, ऑयली या एक्ने-प्रोन बना सकते हैं। समय के साथ ये स्किन बैरियर को कमजोर कर देते हैं, जिससे उम्र के निशान जल्दी दिखने लगते हैं।

    चेहरे को ज्यादा रगड़ना या हार्श क्लेंजर यूज करना
    चेहरे की सफाई जरूरी है, लेकिन इसे ज्यादा रगड़ना या कठोर क्लींजर का इस्तेमाल स्किन की नेचुरल नमी छीन लेता है। ड्राई और डैमेज्ड स्किन पर फाइन लाइन्स जल्दी नजर आती हैं और एजिंग के साइन बढ़ जाते हैं।

    हाइड्रेशन की अनदेखी करना
    पर्याप्त पानी न पीना और मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल न करना स्किन को डल और बेजान बना देता है। डिहाइड्रेशन से स्किन पर झुर्रियां जल्दी उभर आती हैं। स्किन को अंदर और बाहर दोनों तरह से हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है।

    स्लीप रूटीन नजरअंदाज करना
    कम नींद लेना या अनियमित नींद की आदत स्किन की हेल्थ को प्रभावित करती है। नींद के दौरान स्किन रिपेयर होती है। नींद की कमी से डार्क सर्कल्स, पफी आईज और समय से पहले एजिंग की समस्या हो जाती है।

    स्ट्रेस और अनहेल्दी डाइट
    जरूरत से ज्यादा स्ट्रेस और जंक फूड, मीठे व तैलीय खाने का सेवन स्किन को नुकसान पहुंचाता है। ये आदतें कोलेजन प्रॉडक्शन को कम करती हैं और स्किन की इलास्टिसिटी घटा देती हैं, जिससे उम्र के निशान जल्दी दिखते हैं।

    नाइट केयर स्किप करना
    दिनभर की थकान के बाद बिना चेहरा साफ किए सो जाना या नाइट क्रीम/सीरम का इस्तेमाल न करना स्किन के लिए हानिकारक है। रात का समय स्किन रिपेयर का होता है, इसे इग्नोर करना एजिंग प्रॉसेज को बढ़ाता है।

  • भारत की 7 सबसे खूबसूरत अल्पाइन झीलें: स्वर्ग जैसी प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव

    भारत की 7 सबसे खूबसूरत अल्पाइन झीलें: स्वर्ग जैसी प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव

    नई दिल्ली।  भारत का हिमालय न केवल अपनी ऊँचाई और बर्फ से ढकी चोटियों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां की अल्पाइन झीलें भी देश-विदेश के पर्यटकों को अपनी ओर खींचती हैं। अगर आप प्राकृतिक सुंदरता का वास्तविक अनुभव लेना चाहते हैं, तो ये सात झीलें आपके लिए स्वर्ग जैसी छटा पेश करती हैं। इनमें केदारताल, समिति, गदसर, सत्सर, घेपन, चंद्रताल और मार्सर झीलें शामिल हैं, जो ट्रेकर्स और प्रकृति प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। इन झीलों तक पहुंचना कभी आसान नहीं होता, लेकिन हर कदम पर खुलती खूबसूरत वादियां और पर्वतीय नजारे थकान को भी भूल जाने पर मजबूर कर देते हैं।

    केदारताल झील: चुनौतीपूर्ण ट्रेक और बर्फीली चोटियां

    केदारताल झील 15,485 फीट की ऊँचाई पर स्थित है और इसे भारत की सबसे चुनौतीपूर्ण ट्रेकिंग जगहों में से एक माना जाता है। यह झील माउंट थलय सागर, माउंट गंगोत्री, माउंट जोगिन, माउंट भृगुपंथ और मंडी पर्वत की विशाल चोटियों से घिरी हुई है। ट्रेक के दौरान आपको बर्फ से ढके रास्तों और ठंडी हवाओं का सामना करना पड़ता है। केदारताल ट्रेक का खर्च प्रति व्यक्ति लगभग ₹12,000 से ₹25,000 तक आता है। यहाँ का दृश्य और शांति, कठिनाइयों को पूरी तरह भुला देती है।

    समिति झील: गौमुख ट्रेक का अंत और प्राकृतिक सुंदरता

    समिति झील 13,779 फीट की ऊँचाई पर स्थित है और यह गौमुख ट्रेक के आखिरी दिन ही दिखाई देती है। झील के आस-पास का वातावरण पूरी तरह से प्राकृतिक और साफ-सुथरा है। यहां की ठंडी हवा, बर्फ और पहाड़ियों का दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। समिति झील तक पहुँचने में मेहनत जरूर लगती है, लेकिन इसकी सुंदरता हर थकान को दूर कर देती है।

    गदसर झील: कश्मीर ग्रेट लेक्स का रत्न

    गदसर झील कश्मीर ग्रेट लेक्स ट्रेक का हिस्सा है और इसे अक्सर भारत के सबसे खूबसूरत ट्रेक्स में गिना जाता है। ट्रेक के चौथे दिन झील दिखाई देती है और इसकी शांत जलधारा, मनमोहक रंग और स्थानीय कहानियां इसे विशेष बनाती हैं। झील में प्रवेश मुफ्त है, लेकिन नाव की सवारी का खर्च होता है। 2-सीटर पैडल बोट ₹100-₹200, 4-सीटर ₹200-₹400, और 6-सीटर रोइंग बोट ₹300-₹900 में उपलब्ध है।

    सत्सर झील: जंगल में एकांत और स्वर्ग जैसा अनुभव

    सत्सर झील पूरी तरह से एकांत में स्थित है और सड़क मार्ग से दिखाई नहीं देती। यहां पहुंचने के लिए जंगल से होते हुए लगभग एक घंटे की हाइक करनी पड़ती है। यह झील ऑफ-द-बीटन-पाथ डेस्टिनेशन है और ट्रेकर्स को शांति, रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत मिश्रण देती है। सत्सर झील का ट्रेक और भ्रमण प्रति व्यक्ति ₹18,000 से ₹40,000+ तक हो सकता है, जो गाइड, अवधि और सुविधाओं पर निर्भर करता है।

    घेपन झील: लाहौल का छिपा खजाना

    घेपन झील (घेपन घाट) लाहौल में स्थित है और लगभग इस लिस्ट में शामिल नहीं हो पाई थी। ट्रेक लीडर रवि और आयुषी ने हाल ही में अपने एक्सप्लोरेटरी ट्रेक पर इसे खोजा। झील के शांत और आकर्षक दृश्य इसे ट्रेकर्स के बीच लोकप्रिय बनाते हैं। यहाँ का खर्च ट्रेक पैकेज पर निर्भर करता है और प्रति व्यक्ति लगभग ₹10,000 से ₹20,000+ हो सकता है।

    चंद्रताल झील: सड़क और ट्रेक दोनों विकल्प

    चंद्रताल झील हिमाचल प्रदेश में स्थित है और इसे सड़क मार्ग से भी पहुँचा जा सकता है। हालांकि हम्प्टा पास के चुनौतीपूर्ण चार दिन के ट्रेक के बाद इसे अल्पाइन झील ट्रेक की सूची में शामिल किया गया है। यहां ट्रांसपोर्ट और रहने का खर्च अलग-अलग होता है। मनाली/काज़ा से टैक्सी का किराया ₹4,000-₹20,000+ हो सकता है। झील का नीला पानी और आसपास का बर्फीला परिदृश्य इसे यादगार बनाता है।

    मार्सर झील: दुर्गमता में छुपा आकर्षण

    मार्सर झील आसानी से नहीं पहुँचाई जा सकती, लेकिन इसकी दुर्गमता और लोककथाओं की वजह से यह ट्रेकर्स के लिए आकर्षण का केंद्र है। आसपास के रहस्य, शांत वातावरण और बर्फ से ढकी चोटियां इसे किसी भी साहसी यात्री के लिए स्वर्ग जैसा अनुभव देती हैं।

  • सर्दियों में कैसे बढ़ाएं आईब्रो की ग्रोथ? आजमा लें ये 5 देसी नुस्खे, पतली Eyebrows हो जाएंगी मोटी और घनी

    सर्दियों में कैसे बढ़ाएं आईब्रो की ग्रोथ? आजमा लें ये 5 देसी नुस्खे, पतली Eyebrows हो जाएंगी मोटी और घनी


    नई दिल्ली सर्दियों का मौसम आते ही त्वचा और बालों से नमी कम होने लगती है। ठंडी हवाएं, ड्राई स्किन, गलत खानपान और तनाव का असर सिर्फ सिर के बालों पर ही नहीं, बल्कि आईब्रो पर भी पड़ता है। नतीजतन भौंहें झड़ने लगती हैं और धीरे-धीरे पतली दिखाई देने लगती हैं। जबकि हर महिला चाहती है कि उसकी आईब्रो घनी और शेप में हों, क्योंकि मोटी भौंहें पूरे लुक को निखार देती हैं। ऐसे में महंगे प्रोडक्ट्स के बजाय कुछ घरेलू उपाय ज्यादा कारगर साबित हो सकते हैं।

    अरंडी का तेल: जड़ों को करे मजबूत

    आईब्रो की ग्रोथ बढ़ाने के लिए अरंडी का तेल बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद ओमेगा-9 फैटी एसिड और प्रोटीन बालों की जड़ों को पोषण देते हैं। रात को सोने से पहले उंगलियों या साफ ब्रश की मदद से हल्के हाथों से अरंडी के तेल से आईब्रो की मालिश करें और सुबह धो लें। नियमित इस्तेमाल से भौंहें मोटी और मजबूत होने लगती हैं।

    नारियल तेल: पोषण और चमक दोनों

    नारियल तेल विटामिन ई और जरूरी फैटी एसिड्स से भरपूर होता है। यह आईब्रो को नमी देता है और बालों की ग्रोथ को बढ़ावा देता है। रोज रात को रुई में थोड़ा सा नारियल तेल लेकर आईब्रो पर लगाएं। कुछ ही हफ्तों में फर्क नजर आने लगेगा और भौंहें शाइनी भी दिखेंगी।

    प्याज का रस: तेजी से बढ़ाए ग्रोथ

    प्याज का रस आईब्रो की ग्रोथ के लिए एक पुराना और असरदार नुस्खा है। इसमें मौजूद सल्फर बालों को मजबूत बनाता है और नई ग्रोथ में मदद करता है। ताजा प्याज का रस निकालकर आईब्रो पर लगाएं और 20–30 मिनट बाद चेहरा धो लें। हफ्ते में 2–3 बार इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

    विटामिन ई कैप्सूल: झड़ना करे कम

    विटामिन ई बालों को टूटने से रोकने में मदद करता है। कैप्सूल को काटकर उसका जेल निकाल लें और आईब्रो पर हल्के हाथों से 5 मिनट मसाज करें। रात को लगाने से ज्यादा फायदा मिलता है। कुछ दिनों में भौंहें घनी दिखने लगती हैं।

    एलोवेरा जेल: नेचुरल हाइड्रेशन

    एलोवेरा जेल बालों को नमी देने के साथ-साथ उन्हें मजबूत भी बनाता है। इसमें मौजूद एंजाइम्स और एंटीऑक्सीडेंट्स आईब्रो की ग्रोथ में सहायक होते हैं। फ्रेश एलोवेरा जेल आईब्रो पर लगाकर छोड़ दें। लगातार इस्तेमाल से अच्छे परिणाम मिलते हैं।

    नियमित देखभाल से मिलेगा बेहतर परिणाम

    अगर इन देसी नुस्खों को नियमित रूप से अपनाया जाए, तो सर्दियों में भी आईब्रो की ग्रोथ बेहतर हो सकती है। साथ ही संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और तनाव से दूरी भी जरूरी है। थोड़ी सी देखभाल से पतली आईब्रो फिर से मोटी, घनी और आकर्षक बन सकती हैं।

  • ठंड का मज़ा दोगुना: सर्दियों में घूमने लायक भारत की ये खूबसूरत जगहें

    ठंड का मज़ा दोगुना: सर्दियों में घूमने लायक भारत की ये खूबसूरत जगहें

    नई दिल्ली  भारत में कई ऐसी जगहें हैं, जहां जनवरी के महीने में घूमने का मजा ही कुछ और होता है। आज हम आपको भारत की उन जगहों के बारे में बताएंगे, जिन्हें आपको सर्दियों में जरूर विजिट करना चाहिए। आइए इन जगहों के बारे में विस्तार से जानें, ताकि आपको सही जानकारी हो सकें।
    सर्दियों की शुरुआत
    सर्दियों का मौसम शुरू हो चुका है। इसके साथ ही लोगों की लाइफस्टाइल में भी बदलाव आ जाता है। लोग शरीर को गर्म रखने और इम्युनिटी मजबूत करने के लिए अपनी डाइट में गर्म और हेल्दी चीजें शामिल करने लगते हैं। इस मौसम में सेहत का खास ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है।

    सर्दियों में घूमना
    अक्सर लोग सर्दियों में घर पर रहना पसंद करते हैं, लेकिन भारत में कई ऐसी जगहें हैं, जहां जनवरी के महीने में घूमने का मजा ही कुछ और होता है। इन जगहों पर आप ठंड के साथ-साथ सुहावनी धूप का भी आनंद ले सकते हैं। ये डेस्टिनेशन आपकी ट्रिप को यादगार बनाने के लिए एकदम परफेक्ट हैं।

    ठंड में घूमें ये जगहें
    अगर आप सर्दियों में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो भारत की इन खूबसूरत जगहों को अपनी वेकेशन लिस्ट में जरूर शामिल करें। आइए जानते हैं उन डेस्टिनेशन्स के बारे में, जहां सर्दियों में घूमना सबसे ज्यादा खास होता है।

    रन ऑफ कच्छ जाएं
    गुजरात में स्थित रन ऑफ कच्छ सर्दियों में घूमने के लिए एक बेहतरीन जगह है। यहां आपको ठंड के मौसम में भी हल्की गर्माहट और भरपूर धूप का एहसास होता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं लगती। यहां आप काला डूंगर, इंडिया ब्रिज और धोरडो गांव घूम सकते हैं। साथ ही कच्छ की लोक संस्कृति, फोक डांस और संगीत कार्यक्रमों का आनंद भी ले सकते हैं।

    गोवा जरूर जाएं
    सर्दियों के मौसम में गोवा घूमने का अलग ही मजा होता है। यहां के खूबसूरत बीच, चटक धूप और ठंडी हवाएं आपकी ट्रिप को यादगार बना देती हैं। आप ओल्ड गोवा के चर्च, दूधसागर वॉटरफॉल, फोर्ट अगुआड़ा, अंजुना बीच और स्थानीय मार्केट्स की सैर कर सकते हैं।

    राजस्थान विजिट करें
    आपको सर्दियों में एक बार राजस्थान विजिट करना चाहिए। इसे पिंक सिटी के नाम से भी जाना जाता है। राजस्थान में आप हवा महल, नाहरगढ़ किला, आमेर किला, जंतर-मंतर जैसी जगहों पर घूमने के लिए जा सकते हैं।

    मुंबई घूमने जाएं
    सर्दियों के मौसम में मुंबई भी घूमने के लिए एक शानदार विकल्प है। यहां समुद्र किनारे ठंडी हवाओं और धूप का मजा लिया जा सकता है। इसके अलावा आप लोनावला, अलीबाग, नासिक और महाबलेश्वर जैसी नजदीकी जगहों की सैर कर सकते हैं। मुंबई में एलीफेंटा गुफाएं, गेटवे ऑफ इंडिया और गिरगांव चौपाटी भी जरूर देखें।

    अलप्पुझा विजिट करें
    अगर आप सर्दियों में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो एक बार अलप्पुझा जरूर विजिट करें। यह खूबसूरत जगह केरल में स्थित है। हालांकि केरल में घूमने के लिए कई शानदार डेस्टिनेशन हैं, लेकिन अलप्पुझा अपनी शांत वादियों और बैकवाटर्स के लिए खास तौर पर जाना जाता है। सर्दियों में यहां का मौसम काफी सुहावना रहता है। यहां आप बैकवाटर, वेम्बनाड झील और कुट्टनाड जैसी जगहों की सैर कर सकते हैं।

    सुंदरवन है बेस्ट
    सर्दियों के मौसम में सुंदरवन का वातावरण बेहद सुहावना होता है। यहां आप रॉयल बंगाल टाइगर सहित कई दुर्लभ वन्यजीवों को देखने का रोमांचक अनुभव ले सकते हैं। सुंदरवन का प्राकृतिक सौंदर्य और शांत माहौल किसी का भी मन मोह लेता है। वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है। यहां सजनेखली पक्षी अभयारण्य, हॉलिडे आइलैंड और कपिलमुनि मंदिर जैसे प्रमुख आकर्षण मौजूद हैं।

    मनाली शहर देखें
    सर्दियों में हिमाचल प्रदेश का मनाली शहर किसी जन्नत से कम नहीं लगता। बर्फ से ढकी पहाड़ियां और ठंडी हवाएं यहां की खूबसूरती को और भी बढ़ा देती हैं। यहां आप स्कीइंग, ट्रेकिंग, पैराग्लाइडिंग और रिवर राफ्टिंग जैसे रोमांचक खेलों का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा हिडिम्बा देवी मंदिर और वशिष्ठ मंदिर जैसे धार्मिक स्थल मनाली की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं।

  • नेल कटर की एक आदत बना सकती है आपको मरीज, रोज़मर्रा की लापरवाही से बढ़ता संक्रमण का खतरा

    नेल कटर की एक आदत बना सकती है आपको मरीज, रोज़मर्रा की लापरवाही से बढ़ता संक्रमण का खतरा


    नई दिल्ली। नाखूनों से जुड़ी छोटी चूक कैसे बन जाती है बड़ी स्वास्थ्य समस्या  घर हो ऑफिस या फिर ब्यूटी पार्लर-नेल कटर एक ऐसी रोज़मर्रा की चीज है जिसे लोग अक्सर बिना सोचे-समझे एक-दूसरे के साथ साझा कर लेते हैं। देखने में यह आदत बेहद मामूली लगती है लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यही लापरवाही नाखूनों और त्वचा से जुड़े गंभीर संक्रमण की वजह बन सकती है। कई बार लोग लंबे समय तक इलाज कराते रहते हैं जबकि समस्या की जड़ सिर्फ अस्वच्छ नेल कटर होती है।

    डॉक्टरों के अनुसार नाखून काटते समय त्वचा पर बहुत ही बारीक कट या खरोंच लग जाती है जो सामान्य आंखों से दिखाई नहीं देती। जब कोई संक्रमित या पहले से इस्तेमाल किया गया नेल कटर दोबारा उपयोग में लाया जाता है तो उस पर मौजूद बैक्टीरिया और फंगस सीधे इन सूक्ष्म घावों के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। यही कारण है कि नाखूनों के फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक तेजी से फैलते हैं।स्वच्छता से जुड़ी कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि धातु से बने नेल कटर पर फंगस और बैक्टीरिया लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं। खासतौर पर पैरों के नाखूनों में यह खतरा ज्यादा होता है क्योंकि जूते पहनने से वहां नमी बनी रहती है। यही नमी फंगस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनाती है। सैलून या पार्लर में बिना ठीक से स्टरलाइज़ किए गए औजार इस खतरे को और बढ़ा देते हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि कुछ लोगों में यह जोखिम और भी ज्यादा होता है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग बुजुर्ग छोटे बच्चे डायबिटीज से पीड़ित मरीज और वे लोग जो लंबे समय तक बंद जूते पहनते हैं-इन सभी में नाखूनों का संक्रमण जल्दी पनप सकता है। इसके अलावा जो लोग बार-बार मैनीक्योर या पेडीक्योर कराते हैं उन्हें भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है।नाखूनों में संक्रमण के कुछ संकेतों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जैसे नाखूनों का रंग पीला या काला पड़ना उनका असामान्य रूप से मोटा होना बार-बार टूटना नाखूनों के आसपास जलन या सूजन और कभी-कभी बदबू आना। ये लक्षण बताते हैं कि नाखूनों के भीतर संक्रमण पनप रहा है जिसका समय पर इलाज जरूरी है।

    डॉक्टरों का साफ कहना है कि बचाव ही इसका सबसे बेहतर इलाज है। हर व्यक्ति को अपना अलग नेल कटर इस्तेमाल करना चाहिए और उसे नियमित रूप से साफ व सूखा रखना चाहिए। नाखून बहुत गहराई तक काटने से बचें और हाथ-पैर लंबे समय तक गीले न रखें। सैलून में सेवाएं लेते समय यह जरूर देखें कि औजार ठीक से साफ और स्टरलाइज़ किए गए हों।अगर घरेलू देखभाल के बावजूद नाखूनों की स्थिति बिगड़ती जाए दर्द बढ़े या संक्रमण फैलता महसूस हो तो बिना देरी किए त्वचा विशेषज्ञ से संपर्क करना जरूरी है। समय पर इलाज न मिलने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है और उपचार लंबा चल सकता है।

  • सर्दियों में स्वाद और सेहत का संगम: घर पर बनाएं गरमागरम खसखस का हलवा..

    सर्दियों में स्वाद और सेहत का संगम: घर पर बनाएं गरमागरम खसखस का हलवा..


    नई दिल्ली। सर्दियों का मौसम आते ही कुछ गरमागरम और मीठा खाने की इच्छा अपने आप बढ़ जाती है। ऐसे में अगर स्वाद के साथ सेहत भी मिले, तो वह डेज़र्ट और भी खास बन जाता है। खसखस का हलवा एक ऐसा ही पारंपरिक व्यंजन है, जो न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होता है, बल्कि शरीर को भीतर से गर्म रखने और ताकत देने में भी मदद करता है। यह हलवा खासतौर पर उत्तर भारत और आयुर्वेदिक परंपराओं में सर्दियों के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है।

    आमतौर पर सर्दियों में गाजर का हलवा या मूंग दाल का हलवा ज्यादा बनाया जाता है, लेकिन खसखस से बना हलवा अपनी अलग खुशबू, मलाईदार टेक्सचर और पोषण गुणों के कारण खास पहचान रखता है। खसखस कैल्शियम, आयरन, फाइबर और हेल्दी फैट्स से भरपूर होता है, जो ठंड के मौसम में शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा देता है। अच्छी बात यह है कि इसे घर पर बहुत ही आसान तरीके से तैयार किया जा सकता है।खसखस का हलवा बनाने के लिए ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती। आधा कप खसखस, एक कप दूध, 3 से 4 टेबलस्पून देसी घी, आधा कप चीनी या गुड़, थोड़ी सी इलायची और पसंद के ड्राई फ्रूट्स से यह स्वादिष्ट हलवा तैयार हो जाता है। सबसे पहले खसखस को अच्छे से धोकर 3–4 घंटे या रातभर के लिए भिगो देना चाहिए। इससे खसखस नरम हो जाता है और पीसने में आसानी होती है। भीगने के बाद थोड़ा दूध डालकर इसे मिक्सर में बारीक पीस लें, ताकि पेस्ट एकदम स्मूद बन जाए।

    अब कड़ाही में देसी घी गर्म करें और उसमें पिसा हुआ खसखस डालें। मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए इसे भूनें। कुछ ही देर में इसमें से खुशबू आने लगेगी और घी अलग दिखाई देने लगेगा। इसके बाद इसमें दूध डालें और धीमी आंच पर पकाते रहें। जब मिश्रण गाढ़ा होने लगे, तब इसमें चीनी या गुड़ डालें और अच्छी तरह मिलाएं। आखिर में इलायची पाउडर और कटे हुए काजू, बादाम व किशमिश डालकर 2–3 मिनट तक और पकाएं। बस तैयार है गरमागरम खसखस का हलवा।

    सेहत के लिहाज से खसखस का हलवा सर्दियों में बेहद फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करता है, कमजोरी और थकान दूर करता है, हड्डियों को मजबूत बनाता है और पाचन तंत्र को बेहतर करता है। साथ ही यह तुरंत ऊर्जा देने वाला पौष्टिक डेज़र्ट भी है।अगर आप रिफाइंड चीनी से परहेज करते हैं, तो इस हलवे में गुड़ या खजूर का पेस्ट इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे हलवा और भी हेल्दी बन जाता है। सर्दियों में परिवार के साथ बैठकर खसखस के हलवे का आनंद लेना स्वाद और सेहत-दोनों का बेहतरीन संगम साबित हो सकता है।