Category: Lifestyle

  • Natural Skin Care Habits: अगर महंगी क्रीम और स्किन केयर प्रोडक्ट्स भी आपके चेहरे पर असर नहीं दिखा पा रहे हैं,

    Natural Skin Care Habits: अगर महंगी क्रीम और स्किन केयर प्रोडक्ट्स भी आपके चेहरे पर असर नहीं दिखा पा रहे हैं,


    नई दिल्‍ली । कई बार ऐसा होता है कि हम महंगी से महंगी क्रीम, सीरम और फेस पैक इस्तेमाल करते हैं, फिर भी चेहरे पर वो निखार नहीं आता जिसकी उम्मीद होती है। तब मन में सवाल उठता है कि आखिर कमी कहां रह गई। असल में स्किन की सेहत सिर्फ बाहर से लगाए गए प्रोडक्ट्स पर नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की आदतों पर टिकी होती है। सही दिनचर्या अपनाकर, बिना ज्यादा खर्च किए भी चेहरे पर नैचुरल पिंक ग्लो लाया जा सकता है।अगर नींद पूरी नहीं होती, तो उसका असर सबसे पहले चेहरे पर दिखता है। डलनेस, डार्क सर्कल और पिंपल्स की बड़ी वजह खराब स्लीप साइकल मानी जाती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक रोज 7-8 घंटे की गहरी नींद स्किन सेल्स को रिपेयर करने में मदद करती है। अच्छी नींद से चेहरा फ्रेश दिखता है और नेचुरल ग्लो अपने आप नजर आने लगता है।

    पानी की कमी छीन लेती है चेहरे की चमक

    दिनभर कम पानी पीने से शरीर ही नहीं, स्किन भी डिहाइड्रेट हो जाती है। जब स्किन में नमी की कमी होती है, तो चेहरा बेजान और रूखा लगने लगता है। रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और स्किन अंदर से हाइड्रेट रहती है। यही आदत चेहरे पर पिंक और हेल्दी ग्लो लाने में मदद करती है।
    संतुलित डाइट है नेचुरल ब्यूटी का राज
    स्किन की सेहत का सीधा कनेक्शन हमारे खाने से होता है। ज्यादा तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड स्किन प्रॉब्लम्स बढ़ा सकता है। वहीं फल, सब्जियां, नट्स और प्रोटीन से भरपूर डाइट स्किन को जरूरी पोषण देती है। विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर खाना स्किन को अंदर से मजबूत बनाता है।

    चेहरे की सही सफाई भी है जरूरी

    दिनभर धूल-मिट्टी और पॉल्यूशन चेहरे पर जम जाता है। अगर स्किन को ठीक से साफ न किया जाए, तो पोर्स बंद हो सकते हैं और पिंपल्स की समस्या बढ़ सकती है। दिन में दो बार हल्के क्लींजर से फेस वॉश करना स्किन को साफ रखता है और नेचुरल ग्लो बनाए रखने में मदद करता है।

    धूप से बचाव भी है स्किन के लिए जरूरी

    बिना धूप से बचाव के बाहर निकलना स्किन को नुकसान पहुंचा सकता है। सूरज की तेज किरणें स्किन एजिंग और पिगमेंटेशन बढ़ा सकती हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि बाहर जाते समय सन प्रोटेक्शन अपनाना स्किन को लंबे समय तक हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रखता है।

    तनाव कम करेंगे तो चेहरा खुद बोलेगा
    ज्यादा तनाव सिर्फ दिमाग ही नहीं, स्किन को भी प्रभावित करता है। स्ट्रेस हार्मोनल बदलाव लाकर स्किन प्रॉब्लम्स बढ़ा सकता है। रोज थोड़ा वक्त खुद के लिए निकालना, रिलैक्स करना और पॉजिटिव रहना चेहरे पर साफ नजर आता है।

  • ठंड में घूम आओ दक्षिण भारत के 5 खूबसूरत हिल स्टेशन सर्दियों में ट्रैवल का मजा हो जाता है डबल

    ठंड में घूम आओ दक्षिण भारत के 5 खूबसूरत हिल स्टेशन सर्दियों में ट्रैवल का मजा हो जाता है डबल

    नई दिल्ली । दक्षिण भारत के 5 खूबसूरत हिल स्टेशन सर्दियों का मौसम आते ही मन करता है कहीं ठंडी और सुकून भरी जगह पर घूमने निकल जाएं। अक्सर लोग उत्तर भारत के हिल स्टेशनों की तरफ रुख करते हैं लेकिन दक्षिण भारत के हिल स्टेशन भी इस मौसम में किसी जन्नत से कम नहीं लगते। यहां न ज्यादा कड़ाके की ठंड होती है और न ही भीड़-भाड़ का दबाव। हरियाली बादलों से ढके पहाड़ कॉफी-चाय के बागान और शांत माहौल सर्दियों में ट्रैवल का मजा दोगुना कर देते हैं। आइए जानते हैं दक्षिण भारत के ऐसे ही 5 हिल स्टेशनों के बारे में जो सर्दियों में और भी खूबसूरत हो जाते हैं।

    सर्दियों में और भी निखर जाती है ‘क्वीन ऑफ हिल्स
    तमिलनाडु की ऊटी को यूं ही पहाड़ों की रानी नहीं कहा जाता। सर्दियों में यहां की ठंडी हवा हरे-भरे गार्डन और चाय के बागान अलग ही सुकून देते हैं। सुबह की हल्की धुंध और शाम की ठंडक घूमने का मजा बढ़ा देती है। बोटैनिकल गार्डन और ऊटी लेक इस मौसम में खास तौर पर आकर्षक लगते हैं।
    चाय के बागानों के बीच सर्दियों का सुकून
    केरल का मुन्नार सर्दियों में और भी खूबसूरत नजर आता है। चारों तरफ फैले चाय के बागान ठंडी हवाएं और बादलों से ढकी पहाड़ियां मन को शांति देती हैं। यहां का मौसम सर्दियों में घूमने के लिए बिल्कुल परफेक्ट रहता है। नेचर लवर्स और कपल्स के लिए यह जगह किसी सपने से कम नहीं।
    बादलों और झीलों का रोमांटिक संगम
    तमिलनाडु का कोडाइकनाल सर्दियों में बेहद शांत और रोमांटिक हो जाता है। यहां की झीलें झरने और घुमावदार सड़कें सफर को यादगार बना देती हैं। ठंडी हवा और हल्की धूप के बीच टहलना यहां का खास अनुभव है। यही वजह है कि सर्दियों में यहां पर्यटकों की पसंद और बढ़ जाती है।
    कॉफी की खुशबू और सर्दियों की ठंडक
    कर्नाटक का कूर्ग सर्दियों में हरियाली और ठंडी फिजा के लिए जाना जाता है। कॉफी के बागान पहाड़ों से गिरते झरने और शांत वातावरण यहां की पहचान हैं। सर्दियों में मौसम इतना सुहावना होता है कि घूमने के साथ-साथ आराम करने का भी भरपूर मौका मिलता है।
    भीड़ से दूर सुकून भरी जगह
    अगर आप सर्दियों में भीड़-भाड़ से दूर किसी शांत जगह पर जाना चाहते हैं तो यरकौड एक अच्छा विकल्प है। तमिलनाडु का यह हिल स्टेशन सर्दियों में ठंडी हवा और हरियाली से भर जाता है। यहां का शांत माहौल और प्राकृतिक खूबसूरती ट्रैवल को खास बना देती है।
    अब सर्दियों में घूम आओ
    दक्षिण भारत के ये हिल स्टेशन सर्दियों में न सिर्फ खूबसूरत लगते हैं बल्कि यहां का मौसम भी घूमने के लिए बेहद आरामदायक होता है। अगर आप इस सर्दी कुछ अलग और सुकून भरा ट्रैवल अनुभव चाहते हैं तो इन जगहों को अपनी ट्रैवल लिस्ट में जरूर शामिल करें। यहां आकर सच में ट्रैवल का मजा डबल हो जाता है।

  • प्रिंस एंड्रयू का रॉयल लॉज 30 कमरे शाही स्विमिंग पूल और 200 साल पुराना इतिहास जानें इसकी खासियत

    प्रिंस एंड्रयू का रॉयल लॉज 30 कमरे शाही स्विमिंग पूल और 200 साल पुराना इतिहास जानें इसकी खासियत


    नई दिल्ली । ब्रिटेन के किंग चार्ल्स ने हाल ही में अपने भाई प्रिंस एंड्रयू से उनके प्रिंस टाइटल को वापस लेने और रॉयल लॉज को खाली करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद रॉयल लॉज एक बार फिर चर्चा में आ गया है। जेफ्री एपस्टीन विवाद के कारण यह संपत्ति अब एक नई दिशा में आगे बढ़ने को तैयार है। आइए जानते हैं इस भव्य रॉयल लॉज के बारे में जो 200 साल पुरानी ऐतिहासिकता और शाही ठाठ-बाट का प्रतीक है।

    रॉयल लॉज की विशेषताएँ

    विंडसर ग्रेट पार्क के भीतर स्थित रॉयल लॉज एक विशाल संपत्ति है जिसमें 30 कमरे और कई शानदार सुविधाएं हैं। यह भव्य मैंसन 40 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है और आधिकारिक रूप से Crown Estate के स्वामित्व में है। यहां शाही स्विमिंग पूल एवियरी पक्षी घर छह लॉज कॉटेज माली का घर और शाही सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों के लिए अलग आवास मौजूद हैं। रॉयल लॉज की सुरक्षा उच्च स्तर की है क्योंकि यह विंडसर कासल और अन्य शाही निवासों के बेहद करीब स्थित है।

    प्रिंस एंड्रयू को कैसे मिला रॉयल लॉज

    प्रिंस एंड्रयू को यह शानदार रॉयल लॉज दिवंगत महारानी एलिजाबेथ-II ने दिया था। 2003 में प्रिंस एंड्रयू ने रॉयल लॉज के लिए 1 मिलियन पाउंड का भुगतान किया और 75 साल की लीज ली जो 2078 तक वैध थी। इस लीज की शर्तों के अनुसार उन्हें लॉज के मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई थी। एंड्रयू ने इस संपत्ति पर लगभग 7.5 मिलियन पाउंड की राशि खर्च की और इसे 2005 तक रेनोवेट किया।यह लीज में दिलचस्प बात यह है कि सालाना किराया अगर मांगा जाए के रूप में एक  तुलसी के बीज निर्धारित किया गया था। इसका मतलब यह था कि यदि Crown Estate ने किराया मांगा तो उसे नाममात्र की राशि ही चुकानी पड़ती थी।

    रॉयल लॉज का ऐतिहासिक महत्व

    रॉयल लॉज का इतिहास 1660 के दशक से जुड़ा हुआ है। यह संपत्ति शिकार लॉज के रूप में शुरू हुई थी और 19वीं सदी की शुरुआत में जॉर्ज IV ने इसे एक निजी रिट्रीट और शिकार लॉज के रूप में बदल दिया था। तब से इसे रॉयल लॉज नाम मिला। इस रॉयल लॉज में 1930 के दशक में फिर से निर्माण किया गया और यहां ब्रिटेन की रानी एलिजाबेथ-II ने अपने बचपन के कुछ साल बिताए थे जब वे अपने माता-पिता ड्यूक और डचेस ऑफ यॉर्क के साथ यहां रहते थे। यहां तक कि क्वीन मदर ने भी इसे 2002 तक अपनी मृत्यु तक अपना विंडसर निवास बनाए रखा था। इसलिए रॉयल लॉज शाही परिवार के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसका ऐतिहासिक और भावनात्मक मूल्य भी है।

    प्रिंस एंड्रयू द्वारा किए गए बदलाव

    प्रिंस एंड्रयू ने रॉयल लॉज में कई संरचनात्मक बदलाव किए थे। इन बदलावों में मुख्य रूप से अंदरूनी छत में सुधार बाहरी पेंटिंग और गेट एंट्रेंस पर नई टारमैकिन्ग शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने सुरक्षा के उपायों को मजबूत करने के लिए लाइटिंग और सिक्योरिटी कैमरे भी लगाए। रॉयल लॉज में पुलिस आवास और कंजर्वेटरी के निर्माण की अनुमति पहले से दी जा चुकी थी जो सुरक्षा बढ़ाने में मदद करती है।

    किंग चार्ल्स का फैसला

    हालांकि किंग चार्ल्स के आदेश के बाद प्रिंस एंड्रयू को रॉयल लॉज खाली करना पड़ा है लेकिन यह संपत्ति अब भी शाही परिवार के इतिहास का अहम हिस्सा है। इसके भविष्य को लेकर अब तक कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है लेकिन इसे लेकर चर्चा और योजनाएं लगातार चल रही हैं।
    रॉयल लॉज की शाही धरोहर और प्रिंस एंड्रयू के साथ जुड़ी इस संपत्ति की कहानी ब्रिटिश शाही परिवार के इतिहास और संस्कृति को दर्शाती है।

  • रोजाना 1 चम्मच चिया सीड्स खाने से मिलेंगे 5 जबरदस्त फायदे जानें सही तरीका

    रोजाना 1 चम्मच चिया सीड्स खाने से मिलेंगे 5 जबरदस्त फायदे जानें सही तरीका


    नई दिल्ली । चिया सीड्स एक छोटे आकार के बीज होते हैं जो पोषण से भरपूर होते हैं और इन्हें सुपरफूड के रूप में जाना जाता है। अगर आप रोजाना 1 चम्मच चिया सीड्स का सेवन करते हैं तो आपको एक महीने में ही कई शारीरिक बदलाव नजर आने लगते हैं। ये बीज शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं और सेहत में सुधार करते हैं। तो आइए जानते हैं चिया सीड्स के सेवन से मिलने वाले 5 जबरदस्त फायदे:

    वजन तेजी से कंट्रोल होता है

    चिया सीड्स में उच्च मात्रा में फाइबर होता है जो पेट को लंबे समय तक भरा रखता है। इससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग से बचाव होता है। नियमित रूप से 1 चम्मच चिया सीड्स खाने से वजन कम करने में मदद मिलती है और यह शरीर के मेटाबोलिज्म को भी बेहतर बनाता है।

    पाचन तंत्र मजबूत होता है

    अगर आपको कब्ज गैस या ब्लोटिंग की समस्या रहती है तो चिया सीड्स आपके लिए एक बेहतरीन उपाय हो सकते हैं। इन बीजों में प्रचुर मात्रा में फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं जो आंतों की सफाई करते हैं और पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं।

    ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है

    चिया सीड्स डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं। ये ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने से रोकते हैं और शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारने में मदद करते हैं। इससे डायबिटीज का जोखिम कम होता है और ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहता है।

    दिल की सेहत में सुधार होता है

    चिया सीड्स में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स होते हैं जो दिल के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। ये खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं जिससे दिल की सेहत बेहतर रहती है। इसके नियमित सेवन से हार्ट अटैक और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा भी घटता है।

     त्वचा में नेचुरल ग्लो आता है

    चिया सीड्स में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं और उसे चमकदार बनाते हैं। इसके सेवन से त्वचा स्वस्थ सॉफ्ट और ग्लोइंग नजर आने लगती है। इसके अलावा ये त्वचा को हाइड्रेट भी करते हैं जिससे उम्र बढ़ने के लक्षण कम होते हैं।

    चिया सीड्स खाने का सही तरीका

    चिया सीड्स को कभी भी सूखा न खाएं।  चम्मच चिया सीड्स को एक गिलास पानी में भिगोकर 20-30 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद आप इसे सुबह खाली पेट या किसी स्मूदी दही या सलाद में मिलाकर खा सकते हैं। चिया सीड्स का सेवन बहुत आसान है और अगर आप इसे अपनी डाइट में शामिल करते हैं तो आप एक महीने में इसके अद्भुत लाभ देख सकते हैं। तो बिना किसी मेहनत के अपनी सेहत में सुधार के लिए रोजाना 1 चम्मच चिया सीड्स जरूर शामिल करें।

  • 1 महीने तक सुबह खाली पेट खजूर खाने से क्या होंगे फायदे? जानें 7 हैरान कर देने वाले लाभ

    1 महीने तक सुबह खाली पेट खजूर खाने से क्या होंगे फायदे? जानें 7 हैरान कर देने वाले लाभ


    नई दिल्ली । खजूर एक सुपरफूड के रूप में जाना जाता है जो न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। अगर आप हर सुबह खाली पेट 1 महीने तक खजूर खाते हैं तो आपके शरीर में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। खजूर में वह सभी पोषक तत्व होते हैं जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ विभिन्न बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं खजूर के सेवन से मिलने वाले 7 महत्वपूर्ण फायदे ।
    पाचन तंत्र को मजबूत बनाएं
    खजूर में उच्च मात्रा में फाइबर होता है जो पाचन को बेहतर बनाता है। रोज सुबह खजूर खाने से आंतों की सफाई होती है और कब्ज गैस एसिडिटी जैसी समस्याएं कम होती हैं। इससे पेट साफ रहता है और पाचन क्रिया बेहतर होती है।

    शरीर को मिलती है भरपूर ऊर्जा
    खजूर में प्राकृतिक शुगर ग्लूकोज फ्रक्टोज और सुक्रोज होता है जो तुरंत शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। इससे पूरे दिन थकान या कमजोरी का अनुभव नहीं होता और आप दिनभर सक्रिय रहते हैं।

    वजन बढ़ाने या घटाने में मदद

    जो लोग दुबले-पतले हैं उनके लिए खजूर वजन बढ़ाने में मदद करता है क्योंकि यह उच्च कैलोरी वाला होता है। वहीं सीमित मात्रा में सेवन करने पर खजूर मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाकर वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है।

    खून की कमी एनीमिया को दूर करता है

    खजूर आयरन से भरपूर होता है जो खून की कमी को दूर करता है। रोजाना खजूर खाने से हीमोग्लोबिन लेवल बढ़ता है जिससे एनीमिया चक्कर आना और कमजोरी जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।

    दिल को स्वस्थ रखता है

    खजूर में पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखते हैं। इसके सेवन से दिल की सेहत बेहतर रहती है और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है।

    दिमाग और याददाश्त को तेज करता है

    खजूर में एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन्स होते हैं जो दिमाग को सक्रिय रखते हैं। इसका नियमित सेवन याददाश्त को बेहतर बनाता है और मानसिक तनाव को कम करता है। यह दिमाग को तेज रखने में भी सहायक होता है।

    हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत बनाता है
    खजूर में कैल्शियम फॉस्फोरस और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स होते हैं जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। इसके सेवन से जोड़ों के दर्द में भी राहत मिलती है और हड्डियां मजबूत होती हैं।

    खजूर खाने का सही तरीका

    सुबह खाली पेट 2–3 खजूर खाएं। आप चाहें तो रात में खजूर को पानी में भिगोकर सुबह इसका सेवन कर सकते हैं। इसके बाद एक गिलास गुनगुना पानी पीना फायदेमंद होता है। अगर आपको डायबिटीज है तो खजूर का सेवन सीमित मात्रा में करें और डॉक्टर की सलाह लें। अगर आप सिर्फ 1 महीने तक सुबह खाली पेट खजूर खाना शुरू कर देते हैं तो शरीर में अंदर से मजबूत बदलाव दिखने लगेंगे और कई बीमारियों से भी राहत मिल सकती है।

  • क्रिसमस 2025: भारत की इन जगहों पर मनाएं त्योहार, जश्न बन जाएगा यादगार

    क्रिसमस 2025: भारत की इन जगहों पर मनाएं त्योहार, जश्न बन जाएगा यादगार


    नई दिल्ली/हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला क्रिसमस ईसाई समुदाय के लिए सबसे पवित्र और उल्लासपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह दिन ईसा मसीह के जन्म का प्रतीक है, जिसे पूरी दुनिया में रोशनी, सजावट, प्रार्थना और खुशियों के साथ मनाया जाता है। भारत में भी क्रिसमस का रंग देखते ही बनता है, खासकर उत्तर-पूर्वी राज्यों में, जहां यह पर्व पूरे उत्साह और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। अगर आप इस क्रिसमस घूमने और कुछ अलग अनुभव करने का प्लान बना रहे हैं, तो उत्तर-पूर्व भारत की ये जगहें आपके सफर को खास बना सकती हैं।

    शिलांग: रोशनी और संगीत से सजा क्रिसमस शहर
    मेघालय की राजधानी शिलांग को ‘ईस्ट का स्कॉटलैंड’ कहा जाता है और क्रिसमस के दौरान यह शहर किसी परी लोक से कम नहीं लगता। यहां के चर्च रंग-बिरंगी लाइट्स से सज जाते हैं और खास प्रार्थनाओं का आयोजन होता है। क्रिसमस ट्री, कैरोल सिंगिंग और स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रम शहर को जीवंत बना देते हैं। स्थानीय संगीत और नृत्य यहां के जश्न को और खास बना देते हैं।

    मेचुका: बर्फीली वादियों में सादगी भरा जश्न

    अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी सियांग जिले में स्थित मेचुका उन यात्रियों के लिए है, जो शांति और प्रकृति के करीब रहकर क्रिसमस मनाना चाहते हैं। बर्फ से ढके पहाड़, साफ नदियां और शांत वातावरण इस जगह को खास बनाते हैं। क्रिसमस के समय यहां ठंड काफी होती है, लेकिन यही ठंड इस जगह की खूबसूरती को और बढ़ा देती है।

    असम: परंपरा, प्रकृति और आस्था का संगम

    असम अपने चाय बागानों, वन्यजीव अभयारण्यों और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। क्रिसमस पर यहां के चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं होती हैं। काजीरंगा नेशनल पार्क, माजुली द्वीप और ऐतिहासिक शहरों की सैर के साथ क्रिसमस मनाना एक अनोखा अनुभव देता है।

    तवांग: शांति और आध्यात्म के बीच क्रिसमस

    अरुणाचल प्रदेश का तवांग अपनी प्राकृतिक सुंदरता और बौद्ध संस्कृति के लिए मशहूर है। एशिया का दूसरा सबसे बड़ा तवांग मठ यहां स्थित है। क्रिसमस के दौरान बर्फ से ढका तवांग और उसका शांत माहौल सुकून और यादगार अनुभव देता है।

    गंगटोक: पहाड़ों में जश्न का अनोखा रंग

    सिक्किम की राजधानी गंगटोक क्रिसमस पर बेहद खूबसूरत नजर आती है। यहां के चर्चों में खास आयोजन होते हैं और शहर की सजी-धजी गलियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। त्सोमगो झील और रुमटेक मठ की सैर इस यात्रा को और खास बना देती है।उत्तर-पूर्व भारत की ये जगहें न सिर्फ क्रिसमस के जश्न को खास बनाती हैं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और शांति का ऐसा अनुभव देती हैं, जो लंबे समय तक याद रहता है।

  • बिना खर्च और बिना केमिकल, घर पर पाएँ खूबसूरत और दमकती त्वचा

    बिना खर्च और बिना केमिकल, घर पर पाएँ खूबसूरत और दमकती त्वचा

    नई दिल्ली
    ।महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स के दौर में भी पुराने देसी नुस्खे अपनी जगह बनाए हुए हैं। बलिया में आज भी एक खास घरेलू उपाय चर्चा में है, जो त्वचा को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ, मुलायम और चमकदार बनाने में असरदार साबित हो रहा है। सरसों का उबटन सदियों से त्वचा की देखभाल का सबसे भरोसेमंद तरीका रहा है। यह नुस्खा न केवल सस्ता है, बल्कि ठंड के मौसम में डेड स्किन हटाकर त्वचा को पोषण और नमी भी देता है।

    देसी नुस्खों की वापसी और महंगे प्रोडक्ट्स की तुलना

    आज बाजार में तरह-तरह के महंगे लोशन और क्रीम मौजूद हैं, लेकिन आम लोगों के लिए उनकी कीमत बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे में पुराने समय से चले आ रहे देसी नुस्खे एक बार फिर भरोसे का विकल्प बनकर सामने आए हैं। बलिया के वरिष्ठ नागरिक आसिफ जैदी बताते हैं कि उनके बचपन में दादी और नानी के घरेलू नुस्खों में सरसों के उबटन का खास महत्व था। लोग इसे पूरे शरीर पर लगाकर धूप में बैठते और धीरे-धीरे मालिश करते थे, जिससे त्वचा की गहराई से सफाई होती थी।

    सरसों का उबटन: सदियों पुरानी परंपरा

    सरसों का उबटन कोई नया प्रयोग नहीं है, बल्कि यह सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा रहा है। पुराने जमाने में जब बाजारू साबुन और क्रीम नहीं होती थीं, तब यही उबटन त्वचा की देखभाल का सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता था। जब यह उबटन शरीर पर सूखता है, तो डेड स्किन को अपने साथ हटाता है और त्वचा को साफ, कोमल और चमकदार बनाता है। खास बात यह है कि इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं होते, जो इसे आधुनिक केमिकल युक्त उत्पादों से अलग बनाता है।

    घर पर ऐसे तैयार करें सरसों का उबटन

    सरसों के दानों को धीमी आंच पर हल्का भूनकर हल्दी के साथ पीस लें। तैयार पाउडर में थोड़ा सरसों का तेल मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे पूरे शरीर पर लगाकर हल्के हाथों से मालिश करें। जब उबटन सूख जाए, तो साफ पानी से नहा लें। इसके नियमित उपयोग से त्वचा में प्राकृतिक ग्लो आता है, टैनिंग की समस्या कम होती है और त्वचा भीतर से मजबूत बनती है।

    स्वास्थ्य और रक्त संचार के लिए भी फायदेमंद

    सरसों का उबटन सिर्फ त्वचा के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर के लिए फायदेमंद है। मालिश से रक्त संचार बेहतर होता है, थकान दूर होती है और मांसपेशियों को आराम मिलता है। एड़ियों की फटने की समस्या में भी राहत मिलती है। एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण इसे ठंड के मौसम में विशेष रूप से लाभकारी बनाते हैं।

  • ठंड में घूमने का प्लान? ये 10 हिल स्टेशन बना देंगे ट्रिप को खास

    ठंड में घूमने का प्लान? ये 10 हिल स्टेशन बना देंगे ट्रिप को खास

    Winter travel India
    नई दिल्ली/ज़्यादातर राज्य में नवंबर-दिसंबर में ठंड का मौसम शुरू हो जाता है. अगर आप भी इस सर्दी में हिल स्टेशन जाने का प्लान बना रहे है. तो यहां भारत की 10 छिपी हुई और खूबसूरत जगहों की लिस्ट है जो सर्दियों में घूमने के लिए एकदम सही है.
    मेचुका वैली, अरुणाचल प्रदेश
    नवंबर-दिसंबर के दौरान अरुणाचल प्रदेश बर्फ से ढका रहता है. आप इस समय मेचुका वैली घूमने जा सकते है. सर्दियों में यहां का तापमान फ्रीजिंग पॉइंट से नीचे चला जाता है. इसके अलावा यह वैली दूसरी जगहों के मुकाबले बहुत कम भीड़ वाली है. यहां आप पंचमुखी शिव मंदिर 400 साल पुरानी योंगचा मठ और कई झरने देख सकते है.

    कल्पा वैली, हिमाचल प्रदेश

    कांगड़ा, शिमला और मनाली के बजाय आप कल्पा वैली जा सकते है. यह एक छोटा सा गांव है जिसकी आबादी दूसरे गांवों के मुकाबले कम है. नवंबर से फरवरी तक यह वैली बर्फ की सफेद चादर से ढकी रहती है. यह जगह अपने पार्टनर और परिवार के साथ समय बिताने के लिए एकदम सही है.
    ज़ीरो वैली, अरुणाचल प्रदेश
    ज़ीरो वैली की खूबसूरती हर किसी को मोह लेती है. यह समुद्र तल से 1700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यहां होने वाला म्यूजिक फेस्टिवल दुनिया भर में मशहूर है. अगर आप नॉर्थ-ईस्ट की संस्कृति को करीब से देखना और अनुभव करना चाहते है, तो यह जगह एकदम सही है.

    चोपता, उत्तराखंड
    समुद्र तल से लगभग 2,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चोपता, तुंगनाथ-चंद्रशिला ट्रेक के लिए जाना जाता है. सर्दियों में यहां से हिमालय की चोटियां और भी खूबसूरत दिखती है. इस जगह से चौखंबा और नंदा देवी जैसी चोटियां साफ देखी जा सकती है. अगर आप कम बजट में शानदार अनुभव चाहते हैं, तो आप यहां आ सकते है.

    लंबासिंगी, आंध्र प्रदेश

    लंबासिंगी दक्षिण भारत की एकमात्र ऐसी जगह है जहां सर्दियों में तापमान शून्य डिग्री के करीब रहता है. इतना ही नहीं, यहां कभी-कभी बर्फबारी भी होती है. यह हिल स्टेशन नवंबर से जनवरी के बीच कोहरे की चादर से ढका रहता है. यहां आखिरी बार बर्फबारी 2012 में हुई थी. अगर आप सुहावनी ठंड के साथ घाटियों का आनंद लेना चाहते हैं, तो आप यहां आ सकते है.

    मैनपाट, छत्तीसगढ़

    छत्तीसगढ़ में मैनपाट को मिनी तिब्बत के नाम से जाना जाता है. हालांकि यहां बहुत ज़्यादा ठंड नहीं पड़ती, लेकिन यहां एक सुहावनी ठंडक रहती है. यहां कई घूमने की जगहें है, जिनमें धकपो शेड्रूपलिंग मठ, परपतिया व्यू पॉइंट और टाइगर पॉइंट शामिल है. इनके अलावा यहां कई छोटे-बड़े झरने भी है जिनका आप मज़ा ले सकते है. मैनपाट में दिसंबर से जनवरी तक एक आदिवासी त्योहार मनाया जाता है, जो आपकी यात्रा में रोमांच का अनुभव देगा.

    तवांग, अरुणाचल प्रदेश

    3,048 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, तवांग स्वर्ग का दूसरा नाम है. यहां सेला पास और सेला झील पूरी तरह से जम जाते है. एशिया का दूसरा सबसे बड़ा मठ तवांग मठ यहीं स्थित है. आप बटर टी के साथ पारंपरिक भोजन और संस्कृति का आनंद ले सकते है.

    लोहाजंग, उत्तराखंड

    उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित लोहाजंग गांव, ब्रह्मताल, अली बेदनी और बुग्याल ट्रेक के लिए बेस कैंप है. यहां से नंदा देवी और त्रिशूल चोटियों के शानदार नज़ारे दिखते है. दिन में धूप रहती है, लेकिन रात में तापमान -28°C से नीचे चला जाता है.

    बिनसर, उत्तराखंड

    अल्मोड़ा जिले में स्थित बिनसर समुद्र तल से 2,420 मीटर की ऊंचाई पर है. यहां से हिमालय का 360-डिग्री नज़ारा दिखता है. अगर आप अपने साथ कुछ शांति भरे पल बिताना चाहते है, तो आप यहां आ सकते है.

    खिरसू, उत्तराखंड

    पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित खिरसू एक शांत और छिपा हुआ हिल स्टेशन है. यहां से आप नंदा देवी, त्रिशूल और पंचाचूली सहित 300 से ज़्यादा पहाड़ों की चोटियां देख सकते है. गंडियाल देवी मंदिर सेब के बाग और देवदार के जंगल आपको एक अनोखी शांति का अनुभव देंगे.

  • ठंडियों में ये 9 घरेलू उपाय आपकी स्किन का रखेंगे ध्यान, बनी रहेगी चेहरे की नमी नहीं पड़ेगी त्वचा रूखीआज हम

    ठंडियों में ये 9 घरेलू उपाय आपकी स्किन का रखेंगे ध्यान, बनी रहेगी चेहरे की नमी नहीं पड़ेगी त्वचा रूखीआज हम


    नई दिल्ली/ सर्दियों में त्वचा अपनी चमक और नमी खो देती है, जिससे चेहरा रूखा और बेजान नजर आने लगता है. इसलिए इस शुष्क मौसम में चेहरे पर मॉइश्चराइजर लगाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है. हालांकि स्किन केयर के लिए घरेलू उपचार सबसे अच्छे होते हैं क्योंकि वे प्रभावी होते हैं और उनका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता. ऐसे में आज हम ठंड के महीने में रूखी त्वचा की देखभाल करने के 9 तरीके बता रहे हैं, जिससे विंटर (sardi me skin ka khayl kaise rakhein) में आपकी त्वचा की नमी बरकरार रहेगी.घुटने तक लंबे काले बाल पाना है तो नारियल तेल में इन 3 चीजों को मिक्स करके लगाइए, महीने के अंदर अंतर होने लगेगा महसूस

    – केले का फेस पैक

    अगर आपकी स्किन टाइप ड्राई है तो आप केले का फेस पैक लगा सकते हैं. आपको बस केले को मैश करना है, उसमें दूध, शहद, नींबू का रस मिक्स करना और चेहरे पर लगा लेना है. इससे स्किन पर कसाव और चमर दोनों बरकरार रहेगी.

    – बादाम का तेल

    आप अपने चेहरे पर बादाम के तेल से मालिश कर सकते हैं और बेहतरीन नतीजों के लिए इसे रात भर के लिए छोड़ सकते हैं. इससे आपकी चमक और नमी चेहरे पर बनी रहेगी.

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    -शहद और अंडा

    शहद और अंडा त्वचा को सही नमी प्रदान करते हैं. इन दोनों को मिक्स करके फेस मास्क की तरह अप्लाई कर लीजिए फिर 10 मिनट बाद पानी से अच्छे से चेहरा साफ कर लीजिए.
    – ओटमील और दूध
    थोड़े से ओटमील और दूध का पेस्ट बनाएं. इसे चेहरे पर लगाएं,फिर कुछ मिनट बाद साफ पानी से फेस क्लीन कर लें. इससे आपके चेहरे से डेड स्किन हट जाएगी और यह अधिक चमकदार और सुंदर नजर आएगा.

    – खीरा

    खीरे में पानी की मात्रा भरपूर होती है, आप इसे सीधे खा सकते हैं या चेहरे पर लगा सकते हैं. यह भी आपके चेहरे की नमी बनाए रखेगा.

    – नारियल का तेल

    रूखी और बेजान त्वचा के लिए नारियल का तेल एक बेहतरीन मॉइस्चराइज़र के रूप में काम करता है. इसे भी आप अप्लाई कर सकते हैं.

    – एलोवेरा

    एलोवेरा जेल बेहतरीन मॉइस्चराइज़र के रूप में काम करता है. यह त्वचा पर मुंहासे और झुर्रियों को भी दूर रखता है, जिससे आपकी त्वचा में कसाव बना रहता है.

    – दूध 

    एंटीऑक्सीडेंट और लैक्टिक एसिड से भरपूर कच्चे दूध में पपीता, शहद, बादाम, हल्दी मिलाकर फेस पर लगाएं. यह आपकी त्वचा के रंग को एक समान करने और आपके चेहरे पर काले धब्बे हटाने में मदद करेगा.अपनी त्वचा को अच्छे से हाइड्रेट करें. इससे आपके शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं.सलाह दी जाती है कि महिलाओं को दिन में कम से कम 1.6 लीटर पानी पीना चाहिए और पुरुषों को लगभग 2 लीटर पानी.

  • इम्यूनिटी बूस्टर हैं ये 5 फल, रोजाना सेवन से सर्दी-जुकाम समेत कई बीमारियां रहेंगी दूर

    इम्यूनिटी बूस्टर हैं ये 5 फल, रोजाना सेवन से सर्दी-जुकाम समेत कई बीमारियां रहेंगी दूर

    नई दिल्ली
    ।आज की बदलती जीवनशैली और अनियमित खानपान के कारण लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती जा रही है। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता की वजह से सर्दी-जुकाम, वायरल, फ्लू और छोटी-मोटी बीमारियां बार-बार घेर लेती हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर डाइट में सही पोषक तत्व शामिल किए जाएं, तो इम्यून सिस्टम को काफी हद तक मजबूत बनाया जा सकता है। खासतौर पर फल इम्यूनिटी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।फल न केवल शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल्स देते हैं, बल्कि इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत भी देते हैं। नियमित रूप से फलों का सेवन करने से शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली बेहतर होती है। आज हम आपको ऐसे 5 फलों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें इम्यूनिटी बूस्टर माना जाता है। अगर इन्हें रोजाना डाइट में शामिल किया जाए, तो कई बीमारियों से बचाव संभव है।

    1. संतरा

    संतरा इम्यूनिटी बढ़ाने वाले फलों में सबसे ऊपर आता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन-C पाया जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। संतरे का नियमित सेवन करने से सर्दी-जुकाम, खांसी और वायरल इंफेक्शन का खतरा कम होता है। इसके अलावा यह स्किन को हेल्दी रखने और शरीर में कोलेजन के निर्माण में भी मदद करता है।

    2. अमरूद

    अमरूद को विटामिन-C का पावरहाउस कहा जाता है। इसमें संतरे से भी ज्यादा विटामिन-C मौजूद होता है। साथ ही इसमें एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर भी भरपूर मात्रा में होते हैं। अमरूद खाने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और सर्दियों में फ्लू या इंफेक्शन का जोखिम कम हो जाता है। यह पाचन तंत्र के लिए भी बेहद फायदेमंद है।

    3. सेब

    सेब को सेहत का खजाना माना जाता है। इसमें मौजूद फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन-C शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ावा देते हैं। सेब खाने से पाचन तंत्र मजबूत रहता है और शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा मिलती है। रोज एक सेब खाने की आदत कई बीमारियों से बचाव में मदद कर सकती है।

    4. अनार

    अनार में विटामिन-C के साथ-साथ कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं। यह फल एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है, जिससे शरीर में सूजन कम करने में मदद मिलती है। अनार का सेवन खासतौर पर बुजुर्गों के लिए फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि यह कमजोरी और संक्रमण से बचाव करता है।

    5. कीवी

    कीवी में उच्च मात्रा में विटामिन-C और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसका सेवन सर्दियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, कीवी को छिलके के साथ खाने से इसके पोषक तत्व और ज्यादा असरदार हो जाते हैं। यह फल दिल और पाचन स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इन फलों को रोजाना संतुलित मात्रा में डाइट में शामिल किया जाए, तो इम्यूनिटी मजबूत होती है और शरीर कई तरह की बीमारियों से सुरक्षित रहता है। साथ ही पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और पानी पीना भी जरूरी है।