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  • पहाड़ों की रानी मनाली क्यों है हर ट्रैवलर की पहली पसंद जानिए घूमने का सही समय और खास जगहें

    पहाड़ों की रानी मनाली क्यों है हर ट्रैवलर की पहली पसंद जानिए घूमने का सही समय और खास जगहें


    नई दिल्ली। मनाली केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं बल्कि एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए भी खास पहचान रखता है। सोलंग वैली में पैराग्लाइडिंग जिपलाइन रोपवे और सर्दियों में स्कीइंग का रोमांच पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है। रोहतांग दर्रा और अटल टनल के आसपास का नजारा किसी पोस्टकार्ड जैसा दिखाई देता है। बर्फबारी के मौसम में यहां आने वाले पर्यटक स्नो एक्टिविटी का भरपूर आनंद लेते हैं और यादगार तस्वीरें अपने साथ लेकर लौटते हैं।

    मनाली की सांस्कृतिक विरासत भी इसे खास बनाती है। हिडिंबा देवी मंदिर अपनी अनोखी लकड़ी की वास्तुकला और धार्मिक महत्व के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। मनु मंदिर वशिष्ठ मंदिर और गर्म पानी के प्राकृतिक कुंड भी यहां आने वाले लोगों की पसंदीदा जगहों में शामिल हैं। इन स्थलों पर पहुंचकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है।

    अगर आपको स्थानीय संस्कृति और खरीदारी का शौक है तो मनाली का मॉल रोड जरूर घूमना चाहिए। यहां ऊनी कपड़े हस्तशिल्प की वस्तुएं शॉल टोपी और स्थानीय स्मृति चिन्ह आसानी से मिल जाते हैं। इसके अलावा हिमाचली व्यंजनों का स्वाद आपकी यात्रा को और भी खास बना देता है। सिड्डू थुकपा मोमोज और स्थानीय चाय का स्वाद पर्यटकों को लंबे समय तक याद रहता है।

    प्रकृति प्रेमियों के लिए मनाली के आसपास कई खूबसूरत स्थान मौजूद हैं। नग्गर कैसल जोगिनी वाटरफॉल वन विहार और सेब के बगीचे मन को सुकून देने वाले अनुभव प्रदान करते हैं। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यहां हर मोड़ पर शानदार दृश्य देखने को मिलते हैं। सुबह की सुनहरी धूप और शाम के समय पहाड़ों पर बिखरती रोशनी मन मोह लेने वाला दृश्य प्रस्तुत करती है।

    मनाली घूमने का सबसे अच्छा समय आपकी पसंद पर निर्भर करता है। यदि आप बर्फबारी का आनंद लेना चाहते हैं तो दिसंबर से फरवरी का समय उपयुक्त है जबकि हरियाली और सुहावने मौसम का आनंद लेने के लिए मार्च से जून तक की यात्रा शानदार रहती है। मानसून के दौरान भूस्खलन की संभावना को देखते हुए यात्रा से पहले मौसम की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

    यात्रा के दौरान गर्म कपड़े आरामदायक जूते और जरूरी दवाइयां साथ रखें। ऊंचाई वाले इलाकों में जाते समय पर्याप्त पानी पीना और मौसम के अनुसार तैयारी करना जरूरी है। पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए प्लास्टिक का उपयोग कम करें और प्राकृतिक स्थलों की साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें।

    मनाली केवल एक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि ऐसा अनुभव है जहां प्रकृति रोमांच संस्कृति और सुकून एक साथ मिलते हैं। परिवार दोस्तों या जीवनसाथी के साथ बिताया गया यहां का हर पल जिंदगी भर की याद बन जाता है। अगर आप अगली छुट्टियों की योजना बना रहे हैं तो मनाली को अपनी यात्रा सूची में जरूर शामिल करें।

  • महंगे हेल्थ सप्लीमेंट से मिलेगी राहत जन औषधि के न्यूट्रास्यूटिकल्स से सस्ती कीमत पर मिलेगा बेहतर पोषण

    महंगे हेल्थ सप्लीमेंट से मिलेगी राहत जन औषधि के न्यूट्रास्यूटिकल्स से सस्ती कीमत पर मिलेगा बेहतर पोषण


    नई दिल्ली। सरकार के अनुसार प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों पर अब कई तरह के पोषण संबंधी उत्पाद उपलब्ध हैं जिनमें प्रोटीन बार इम्यूनिटी बार माल्ट आधारित पोषण आहार प्रोटीन पाउडर और महिलाओं के लिए विशेष प्रोटीन बूस्ट शामिल हैं। इन उत्पादों को अलग अलग आयु वर्ग और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है ताकि हर वर्ग के लोगों को उनकी जरूरत के अनुसार विकल्प मिल सकें।

    जन औषधि पोर्टफोलियो में 35 ग्राम के पैक में प्रोटीन बार और इम्यूनिटी बार उपलब्ध हैं। इसके अलावा महिलाओं के लिए तैयार किया गया जन औषधि वुमेन प्रोटीन बूस्ट चॉकलेट और वनीला फ्लेवर में उपलब्ध है जिसकी कीमत बाजार में मिलने वाले कई समान उत्पादों की तुलना में काफी कम रखी गई है। सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं को अपनी दैनिक प्रोटीन आवश्यकता पूरी करने में मदद मिलेगी।

    परिवारों के लिए माल्ट आधारित पोषण आहार भी उपलब्ध कराया गया है जिसमें आवश्यक विटामिन और खनिज तत्व शामिल हैं। यह उत्पाद बच्चों के विकास युवाओं की ऊर्जा और बुजुर्गों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। अलग अलग पैक साइज उपलब्ध होने से उपभोक्ता अपनी जरूरत और बजट के अनुसार इन्हें खरीद सकते हैं।

    फिटनेस के प्रति जागरूक लोगों और अधिक प्रोटीन की आवश्यकता रखने वालों के लिए जन औषधि केंद्रों पर प्रोटीन पाउडर और 100 प्रतिशत व्हे प्रोटीन पाउडर भी उपलब्ध है। यह मांसपेशियों की रिकवरी और दैनिक प्रोटीन जरूरत पूरी करने में सहायक माना जाता है। वनीला और केसर पिस्ता जैसे फ्लेवर उपलब्ध होने से उपभोक्ताओं को पसंद के अनुसार विकल्प चुनने की सुविधा भी मिलती है।

    सरकार का कहना है कि इन उत्पादों की सबसे बड़ी विशेषता इनकी किफायती कीमत है। बाजार में मिलने वाले महंगे हेल्थ सप्लीमेंट की तुलना में जन औषधि केंद्रों पर उपलब्ध उत्पाद कम कीमत में खरीदे जा सकते हैं जिससे आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय परिवारों को विशेष लाभ मिलेगा। इससे पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना पहले की तुलना में अधिक आसान हो सकेगा।

    हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि विशेष पोषण संबंधी उत्पादों का सेवन डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए। हर व्यक्ति की शारीरिक आवश्यकता अलग होती है इसलिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के किसी भी सप्लीमेंट का नियमित उपयोग शुरू नहीं करना चाहिए।

    प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना का उद्देश्य केवल सस्ती दवाएं उपलब्ध कराना ही नहीं बल्कि लोगों को किफायती स्वास्थ्य सेवाएं और बेहतर पोषण उपलब्ध कराना भी है। सरकार का मानना है कि न्यूट्रास्यूटिकल्स की यह पहल देश के लाखों परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में मजबूत सहारा प्रदान करेगी और स्वस्थ भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • दिल की धड़कनों का बिगड़ा संतुलन पड़ सकता है भारी जानिए Atrial Fibrillation के लक्षण कारण और बचाव के आसान उपाय

    दिल की धड़कनों का बिगड़ा संतुलन पड़ सकता है भारी जानिए Atrial Fibrillation के लक्षण कारण और बचाव के आसान उपाय


    नई दिल्ली। दिल हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है और इसकी नियमित धड़कन पूरे शरीर में रक्त संचार को सुचारु बनाए रखती है। लेकिन जब दिल की धड़कन सामान्य लय खो देती है और बहुत तेज या अनियमित होने लगती है तो यह Atrial Fibrillation यानी एट्रियल फिब्रिलेशन का संकेत हो सकता है। यह ऐसी बीमारी है जिसके बारे में आज भी बड़ी संख्या में लोग जानकारी नहीं रखते जबकि यह स्ट्रोक हार्ट फेलियर और कई गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है।

    Atrial Fibrillation में दिल के ऊपरी कक्ष यानी एट्रिया सामान्य तरीके से सिकुड़ने की बजाय बहुत तेजी और अनियमित रूप से कंपन करने लगते हैं। इसके कारण दिल पूरे शरीर में रक्त को प्रभावी ढंग से पंप नहीं कर पाता। जब रक्त का प्रवाह धीमा होता है तो दिल के भीतर थक्का बनने की आशंका बढ़ जाती है। यही थक्का मस्तिष्क तक पहुंचकर स्ट्रोक का कारण बन सकता है जो कई बार जानलेवा भी साबित होता है।

    इस बीमारी के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। मरीज को दिल की धड़कन तेज महसूस होना सीने में घबराहट सांस फूलना चक्कर आना कमजोरी जल्दी थक जाना या सीने में असहजता महसूस हो सकती है। कुछ लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते और बीमारी का पता नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान चलता है। यही कारण है कि इसे खामोश बीमारी भी कहा जाता है।

    बढ़ती उम्र उच्च रक्तचाप मधुमेह मोटापा थायरॉयड की समस्या धूम्रपान अत्यधिक शराब का सेवन तनाव और पहले से मौजूद हृदय रोग Atrial Fibrillation के प्रमुख जोखिम कारक माने जाते हैं। इसके अलावा शारीरिक गतिविधि की कमी और असंतुलित खानपान भी इस बीमारी की संभावना बढ़ा सकते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच और सही इलाज से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। डॉक्टर ईसीजी इकोकार्डियोग्राफी या अन्य जांचों के माध्यम से इसकी पुष्टि करते हैं। उपचार के दौरान मरीज की स्थिति के अनुसार दवाएं दी जाती हैं ताकि दिल की धड़कन नियंत्रित रहे और रक्त का थक्का बनने का खतरा कम हो सके। कुछ मामलों में विशेष चिकित्सीय प्रक्रियाओं की भी आवश्यकता पड़ सकती है।

    स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नियमित व्यायाम करें संतुलित और पौष्टिक भोजन लें नमक और तैलीय भोजन का सेवन सीमित रखें धूम्रपान और शराब से दूरी बनाए रखें पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित करने के लिए योग या ध्यान का सहारा लें। यदि पहले से ब्लड प्रेशर या डायबिटीज जैसी समस्या है तो उसका नियमित उपचार कराना भी बेहद जरूरी है।

    यदि आपको बार बार दिल की धड़कन अनियमित महसूस होती है सांस लेने में परेशानी होती है या अचानक कमजोरी और चक्कर आने जैसी समस्या होती है तो इसे सामान्य मानकर अनदेखा न करें। समय पर हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेकर जांच कराना भविष्य में होने वाली गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है। जागरूकता और समय पर उपचार ही इस खामोश लेकिन गंभीर बीमारी से सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी उपाय है।

  • स्किन केयर का सबसे आसान और असरदार तरीका गुलाब से करें चेहरे की देखभाल और पाएं हेल्दी ग्लोइंग स्किन

    स्किन केयर का सबसे आसान और असरदार तरीका गुलाब से करें चेहरे की देखभाल और पाएं हेल्दी ग्लोइंग स्किन


    नई दिल्ली। त्वचा की खूबसूरती बनाए रखने के लिए लोग तरह तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं लेकिन कई बार प्राकृतिक उपाय ज्यादा असरदार और सुरक्षित साबित होते हैं। इन्हीं प्राकृतिक उपायों में गुलाब का नाम सबसे ऊपर आता है। सदियों से आयुर्वेद और पारंपरिक सौंदर्य उपचार में गुलाब का उपयोग किया जाता रहा है। इसकी पंखुड़ियों और गुलाब जल में ऐसे प्राकृतिक गुण पाए जाते हैं जो त्वचा को ताजगी देने के साथ उसे स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। नियमित और सही तरीके से गुलाब का उपयोग करने से त्वचा अधिक मुलायम साफ और चमकदार दिखाई दे सकती है।

    गुलाब जल को प्राकृतिक टोनर माना जाता है। चेहरा साफ करने के बाद यदि गुलाब जल लगाया जाए तो यह त्वचा को तरोताजा महसूस कराता है और अतिरिक्त गंदगी हटाने में मदद करता है। गर्मी और उमस के मौसम में चेहरे पर गुलाब जल का इस्तेमाल त्वचा को ठंडक और ताजगी देने का आसान तरीका हो सकता है। यह त्वचा की प्राकृतिक नमी बनाए रखने में भी सहायक माना जाता है।

    अगर त्वचा रूखी रहती है तो गुलाब की पंखुड़ियों का पेस्ट बनाकर उसमें थोड़ा शहद या एलोवेरा जेल मिलाकर फेस पैक के रूप में लगाया जा सकता है। इससे त्वचा को पोषण मिलता है और चेहरा मुलायम महसूस होता है। वहीं तैलीय त्वचा वाले लोग गुलाब जल में चंदन या मुल्तानी मिट्टी मिलाकर फेस पैक तैयार कर सकते हैं जिससे अतिरिक्त तेल नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

    धूप धूल और प्रदूषण के कारण त्वचा अक्सर बेजान दिखाई देने लगती है। ऐसे में गुलाब जल से चेहरा साफ करना या गुलाब आधारित फेस मिस्ट का उपयोग करना त्वचा को ताजगी देने में मदद कर सकता है। कई लोग इसे दिन में दो से तीन बार स्प्रे के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं जिससे त्वचा हाइड्रेटेड महसूस होती है।

    आंखों के आसपास की थकान कम करने के लिए ठंडे गुलाब जल में कॉटन पैड भिगोकर कुछ मिनट आंखों पर रखने से आराम महसूस हो सकता है। यह लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करने वालों के लिए भी उपयोगी माना जाता है। हालांकि यदि आंखों में जलन या एलर्जी हो तो किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

    गुलाब में मौजूद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट तत्व त्वचा को बाहरी नुकसान से बचाने में सहायक माने जाते हैं। नियमित स्किन केयर रूटीन के साथ संतुलित भोजन पर्याप्त पानी और अच्छी नींद भी त्वचा की सेहत के लिए उतने ही जरूरी हैं। केवल किसी एक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय समग्र जीवनशैली अपनाना अधिक लाभदायक होता है।

    ध्यान रखें कि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी नए घरेलू नुस्खे या उत्पाद का उपयोग करने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर परीक्षण करना चाहिए। यदि किसी प्रकार की एलर्जी जलन या गंभीर त्वचा संबंधी समस्या हो तो त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है। प्राकृतिक देखभाल के साथ नियमित दिनचर्या अपनाकर लंबे समय तक स्वस्थ और दमकती त्वचा पाई जा सकती है।

  • 70 साल के बाद कैंसर का बढ़ता खतरा एक्सपर्ट्स ने बताए शुरुआती लक्षण बचाव और समय पर जांच का महत्व

    70 साल के बाद कैंसर का बढ़ता खतरा एक्सपर्ट्स ने बताए शुरुआती लक्षण बचाव और समय पर जांच का महत्व


    नई दिल्ली । उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के प्राकृतिक बदलाव होते हैं और इसी के साथ कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगता है। इनमें कैंसर सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक माना जाता है। हाल के वर्षों में सामने आई कई अंतरराष्ट्रीय रिसर्च यह संकेत देती हैं कि बुजुर्गों में कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सबसे चिंता की बात यह है कि बड़ी संख्या में मरीजों में बीमारी का पता तब चलता है जब कैंसर काफी आगे बढ़ चुका होता है। ऐसे में इलाज जटिल हो जाता है और मरीज के पूरी तरह स्वस्थ होने की संभावना भी कम हो सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उम्र के साथ शरीर की कोशिकाओं में लंबे समय तक होने वाले बदलाव कैंसर का जोखिम बढ़ाते हैं। इसके अलावा प्रतिरक्षा प्रणाली भी पहले की तुलना में कमजोर होने लगती है जिससे शरीर असामान्य कोशिकाओं को प्रभावी तरीके से खत्म नहीं कर पाता। यही कारण है कि 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों में कैंसर के मामले अपेक्षाकृत ज्यादा देखने को मिलते हैं।

    हाल में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन में लाखों बुजुर्ग मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि बड़ी संख्या में लोगों को कैंसर का पता तब चला जब उन्हें गंभीर स्थिति में अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में भर्ती कराना पड़ा। ऐसे मरीजों में जीवित रहने की संभावना उन लोगों की तुलना में काफी कम पाई गई जिनमें बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो गई थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि समय पर जांच और सही निदान जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि फेफड़े लिवर पेट कोलन ओवरी और पैंक्रियाज जैसे कैंसर के मामलों में देर से पहचान होने की संभावना अधिक रहती है। वहीं स्तन और प्रोस्टेट कैंसर जैसे कुछ प्रकारों में नियमित जांच के कारण शुरुआती चरण में बीमारी पकड़ में आने की संभावना बेहतर होती है। इसलिए डॉक्टर उम्र के अनुसार समय समय पर हेल्थ चेकअप और स्क्रीनिंग कराने की सलाह देते हैं।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि बुजुर्गों में अचानक वजन कम होना लगातार थकान भूख में कमी लंबे समय तक खांसी मल या पेशाब की आदतों में बदलाव शरीर के किसी हिस्से में असामान्य गांठ बार बार खून आना या बिना कारण दर्द बने रहना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि ये संकेत लगातार बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

    रिपोर्ट में यह भी चिंता जताई गई कि कई बार अधिक उम्र होने के कारण मरीजों को आवश्यक इलाज कम मिल पाता है जबकि उनकी शारीरिक स्थिति उपचार के लिए उपयुक्त हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इलाज का निर्णय केवल उम्र के आधार पर नहीं बल्कि मरीज की संपूर्ण स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

    स्वस्थ जीवनशैली नियमित व्यायाम संतुलित आहार धूम्रपान और शराब से दूरी पर्याप्त नींद तथा समय समय पर स्वास्थ्य जांच कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं। परिवार के सदस्यों की भी जिम्मेदारी है कि वे बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखें और किसी भी असामान्य बदलाव को हल्के में न लें। समय पर पहचान और सही उपचार ही कैंसर के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार साबित हो सकता है।

  • महंगे हेयर प्रोडक्ट्स छोड़िए अलसी अपनाइए बालों को मजबूत चमकदार और हेल्दी बनाने का आसान घरेलू उपाय

    महंगे हेयर प्रोडक्ट्स छोड़िए अलसी अपनाइए बालों को मजबूत चमकदार और हेल्दी बनाने का आसान घरेलू उपाय


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में प्रदूषण खराब खानपान तनाव और केमिकल युक्त हेयर प्रोडक्ट्स के कारण बालों का झड़ना रूखापन और समय से पहले सफेद होना आम समस्या बन चुकी है। ऐसे में लोग प्राकृतिक उपायों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। अलसी जिसे फ्लैक्ससीड भी कहा जाता है बालों की देखभाल के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक विकल्प माना जाता है। इसमें ओमेगा थ्री फैटी एसिड प्रोटीन विटामिन ई फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो बालों की जड़ों को पोषण देने में मदद करते हैं।

    अलसी का नियमित और सही तरीके से उपयोग करने से बाल मजबूत बनने में सहायता मिल सकती है। इसमें मौजूद ओमेगा थ्री फैटी एसिड स्कैल्प को पोषण देता है और बालों की जड़ों तक जरूरी पोषक तत्व पहुंचाने में मदद करता है। इससे बालों के टूटने और झड़ने की समस्या कम हो सकती है। साथ ही विटामिन ई बालों की प्राकृतिक चमक बनाए रखने और उन्हें मुलायम बनाने में सहायक माना जाता है।

    अगर आपके बाल रूखे और बेजान हो गए हैं तो अलसी का जेल एक अच्छा प्राकृतिक हेयर जेल साबित हो सकता है। अलसी के बीजों को पानी में उबालकर तैयार किया गया जेल बालों को बिना नुकसान पहुंचाए प्राकृतिक नमी देने में मदद करता है। इसे बाल धोने से पहले या हेयर स्टाइलिंग के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे बालों में चमक आती है और फ्रिजी हेयर की समस्या कम हो सकती है।

    अलसी का सेवन भी बालों की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। रोजाना सीमित मात्रा में भुनी हुई अलसी या अलसी पाउडर को दही सलाद या स्मूदी में मिलाकर खाने से शरीर को जरूरी पोषण मिलता है जो बालों की ग्रोथ में मदद कर सकता है। हालांकि किसी भी नई चीज को नियमित आहार में शामिल करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

    यदि स्कैल्प में रूसी या खुजली की समस्या रहती है तो अलसी के जेल में एलोवेरा जेल मिलाकर लगाने से आराम मिल सकता है। यह मिश्रण स्कैल्प को ठंडक पहुंचाने के साथ नमी बनाए रखने में भी मदद करता है। लेकिन अगर किसी को स्कैल्प पर संक्रमण एलर्जी या गंभीर त्वचा संबंधी समस्या है तो घरेलू उपाय अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

    अलसी का उपयोग करते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। पहली बार इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करें ताकि किसी प्रकार की एलर्जी का पता चल सके। तैयार किया गया अलसी जेल लंबे समय तक कमरे के तापमान पर न रखें बल्कि फ्रिज में सुरक्षित रखें और कुछ दिनों के भीतर उपयोग कर लें। किसी भी घरेलू उपाय से तुरंत चमत्कारी परिणाम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए क्योंकि अच्छे परिणाम के लिए नियमित देखभाल और संतुलित जीवनशैली भी उतनी ही जरूरी होती है।

    स्वस्थ बाल केवल बाहरी देखभाल से नहीं बल्कि सही खानपान पर्याप्त पानी नियमित नींद और तनाव से दूरी बनाए रखने से भी मिलते हैं। अलसी इन सभी प्रयासों के साथ एक प्रभावी प्राकृतिक सहयोगी बन सकती है। यदि बालों का झड़ना लगातार बढ़ रहा हो या कोई गंभीर समस्या हो तो त्वचा एवं बाल विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सही कदम होगा।

  • कपल्स के लिए परफेक्ट है उदयपुर सिर्फ 10 हजार में घूमिए महल झीलें बाजार और स्वादिष्ट राजस्थानी व्यंजन

    कपल्स के लिए परफेक्ट है उदयपुर सिर्फ 10 हजार में घूमिए महल झीलें बाजार और स्वादिष्ट राजस्थानी व्यंजन


    नई दिल्ली । अगर आप अपने पार्टनर के साथ किसी खूबसूरत और रोमांटिक जगह पर छुट्टियां बिताने का सपना देख रहे हैं लेकिन बजट की चिंता आपको रोक रही है तो उदयपुर आपके लिए शानदार विकल्प साबित हो सकता है। झीलों की नगरी के नाम से मशहूर यह शहर अपनी प्राकृतिक सुंदरता भव्य महलों ऐतिहासिक इमारतों रंगीन बाजारों और राजस्थानी संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। अच्छी बात यह है कि थोड़ी सी प्लानिंग के साथ एक कपल करीब 10 हजार रुपये के बजट में यहां आरामदायक और यादगार यात्रा कर सकता है।

    कम खर्च में उदयपुर घूमने के लिए अप्रैल से सितंबर का समय सबसे बेहतर माना जाता है। इस दौरान पर्यटकों की भीड़ कम रहती है जिससे होटल और यात्रा दोनों पर अच्छी बचत हो जाती है। अगर पहले से ट्रेन या फ्लाइट की बुकिंग कर ली जाए तो किराया काफी कम हो सकता है। ट्रेन से यात्रा सबसे किफायती विकल्प मानी जाती है जबकि ऑफ सीजन में कई बार सस्ती फ्लाइट भी मिल जाती है।

    रहने के लिए उदयपुर में कई बजट होटल गेस्ट हाउस और होमस्टे उपलब्ध हैं। यहां साफ सुथरे कमरे उचित कीमत पर मिल जाते हैं। कई जगहों पर नाश्ता और मुफ्त वाईफाई जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं। अगर थोड़ा अलग अनुभव चाहते हैं तो छोटे हेरिटेज होटल भी अच्छे विकल्प हो सकते हैं जहां राजस्थानी मेहमाननवाजी का शानदार अनुभव मिलता है।

    उदयपुर का स्वादिष्ट भोजन आपकी यात्रा को और खास बना देता है। यहां दाल बाटी चूरमा गट्टे की सब्जी प्याज कचौरी और पारंपरिक मिठाइयों का स्वाद जरूर लेना चाहिए। स्थानीय ढाबों और रेस्टोरेंट में कम कीमत में भरपेट भोजन मिल जाता है। अगर स्ट्रीट फूड पसंद है तो हाथीपोल बाजार और बड़ा बाजार में कई स्वादिष्ट व्यंजन बेहद किफायती दामों में उपलब्ध हैं।

    शहर घूमने के लिए लोकल बस ऑटो और किराये की स्कूटी सबसे अच्छे विकल्प हैं। स्कूटी लेकर आप अपनी सुविधा के अनुसार पूरे दिन आराम से शहर की खूबसूरत गलियों झीलों और दर्शनीय स्थलों का आनंद ले सकते हैं। इससे समय की बचत भी होती है और खर्च भी कम आता है।

    उदयपुर की यात्रा सिटी पैलेस देखे बिना पूरी नहीं मानी जाती। यह भव्य महल शहर की शान है जहां से पिछोला झील का अद्भुत नजारा दिखाई देता है। शाम के समय यहां का वातावरण और भी आकर्षक हो जाता है। पिछोला झील में बोट राइड का अनुभव कपल्स के लिए बेहद यादगार होता है। सूर्यास्त के समय झील का दृश्य किसी फिल्मी नजारे से कम नहीं लगता। इसके अलावा जगमंदिर फतेह सागर झील सहेलियों की बाड़ी भारतीय लोक कला मंडल और सज्जनगढ़ मानसून पैलेस भी घूमने लायक प्रमुख स्थान हैं।

    अगर आपको खरीदारी का शौक है तो हाथीपोल बाजार बड़ा बाजार चेतक सर्किल और पैलेस रोड जरूर जाएं। यहां राजस्थानी बंधनी साड़ियां मिनिएचर पेंटिंग चांदी के आभूषण हस्तशिल्प और पारंपरिक मोजड़ियां उचित दामों पर मिल जाती हैं। थोड़ा मोलभाव करके आप अच्छी खरीदारी भी कर सकते हैं।

    सही बजट प्लानिंग सस्ते ठहरने के विकल्प लोकल ट्रांसपोर्ट और स्थानीय भोजन का चुनाव करके एक कपल आसानी से दो से तीन दिन की शानदार उदयपुर यात्रा करीब 10 हजार रुपये में पूरी कर सकता है। अगर आप कम खर्च में रॉयल फील और यादगार छुट्टियों का आनंद लेना चाहते हैं तो उदयपुर निश्चित रूप से आपकी ट्रैवल लिस्ट में सबसे ऊपर होना चाहिए।

  • गोवा ट्रिप को बनाएं यादगार इन शानदार बीच खूबसूरत किलों और रोमांचक एक्टिविटीज के साथ जानें पूरी ट्रैवल गाइड

    गोवा ट्रिप को बनाएं यादगार इन शानदार बीच खूबसूरत किलों और रोमांचक एक्टिविटीज के साथ जानें पूरी ट्रैवल गाइड


    नई दिल्ली । अगर आप ऐसी जगह घूमना चाहते हैं जहां सुनहरे समुद्र तट प्राकृतिक खूबसूरती रोमांचक एडवेंचर स्वादिष्ट भोजन और शानदार नाइटलाइफ का अनोखा संगम हो तो गोवा आपके लिए सबसे बेहतरीन डेस्टिनेशन साबित हो सकता है। भारत का यह छोटा सा राज्य हर साल देश और विदेश से लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां का शांत वातावरण समुद्र की लहरें नारियल के पेड़ों की हरियाली और पुर्तगाली संस्कृति का प्रभाव हर किसी का मन मोह लेता है।

    गोवा की पहचान सबसे पहले उसके खूबसूरत बीच से होती है। बागा बीच कैलंगुट बीच कैंडोलिम बीच अंजुना बीच पालोलेम बीच और कोलवा बीच पर्यटकों की पहली पसंद माने जाते हैं। यहां सुबह का सूर्योदय और शाम का सूर्यास्त बेहद आकर्षक दिखाई देता है। समुद्र किनारे बैठकर सुकून के पल बिताना हो या दोस्तों और परिवार के साथ छुट्टियों का आनंद लेना हो गोवा हर किसी की उम्मीदों पर खरा उतरता है।

    एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए भी गोवा किसी जन्नत से कम नहीं है। यहां पैरासेलिंग जेट स्की बनाना राइड स्कूबा डाइविंग स्नॉर्कलिंग और स्पीड बोट जैसी कई रोमांचक गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है। समुद्र के भीतर रंग बिरंगी मछलियों और कोरल रीफ को देखने का अनुभव जीवनभर याद रहता है।

    गोवा सिर्फ बीच तक ही सीमित नहीं है बल्कि यहां कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल भी मौजूद हैं। बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस चर्च से कैथेड्रल अगुआड़ा फोर्ट और चपोरा फोर्ट जैसे स्थान इतिहास और वास्तुकला में रुचि रखने वालों के लिए खास आकर्षण हैं। इन जगहों से समुद्र का मनमोहक दृश्य भी दिखाई देता है।

    अगर आप खरीदारी के शौकीन हैं तो गोवा के फ्ली मार्केट और नाइट मार्केट जरूर जाएं। यहां आपको हैंडिक्राफ्ट ज्वेलरी कपड़े मसाले और स्थानीय कला से जुड़े कई आकर्षक सामान उचित कीमत पर मिल जाएंगे। अंजुना और अरपोरा के बाजार पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।

    गोवा का खानपान भी इसकी सबसे बड़ी खासियत है। यहां सीफूड प्रेमियों के लिए कई स्वादिष्ट व्यंजन मिलते हैं। फिश करी प्रॉन करी क्रैब डिश और स्थानीय गोवन भोजन का स्वाद आपकी यात्रा को और भी खास बना देता है। शाकाहारी पर्यटकों के लिए भी यहां कई बेहतरीन विकल्प उपलब्ध हैं।

    गोवा घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और बीच पर घूमने से लेकर एडवेंचर एक्टिविटीज तक हर चीज का भरपूर आनंद लिया जा सकता है। दिसंबर और नए साल के दौरान यहां का उत्सव और नाइटलाइफ पूरी दुनिया में मशहूर है।

    यात्रा के दौरान कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक है। बीच पर स्वच्छता बनाए रखें स्थानीय नियमों का पालन करें पानी की पर्याप्त मात्रा पीते रहें और धूप से बचाव के लिए सनस्क्रीन का उपयोग करें। यदि दोपहिया वाहन किराए पर लें तो हेलमेट पहनना और ट्रैफिक नियमों का पालन करना न भूलें।

    अगर आप प्रकृति रोमांच इतिहास और सुकून भरी छुट्टियों का शानदार अनुभव एक ही जगह पर चाहते हैं तो गोवा आपके लिए बेहतरीन विकल्प है। सही योजना के साथ की गई गोवा यात्रा निश्चित रूप से आपके जीवन की सबसे यादगार ट्रिप बन सकती है।

  • दाग धब्बों से लेकर ऑयली स्किन तक नींबू है कितना फायदेमंद जानिए कब और कैसे करें सही इस्तेमाल

    दाग धब्बों से लेकर ऑयली स्किन तक नींबू है कितना फायदेमंद जानिए कब और कैसे करें सही इस्तेमाल


    नई दिल्ली । आजकल हर कोई बिना ज्यादा खर्च किए चमकदार और स्वस्थ त्वचा पाना चाहता है। ऐसे में कई लोग घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं और उनमें सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चीजों में नींबू शामिल है। विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर नींबू त्वचा की देखभाल में उपयोगी माना जाता है। हालांकि इसका सही तरीके से उपयोग करना बेहद जरूरी है क्योंकि गलत इस्तेमाल से त्वचा को फायदा होने की बजाय नुकसान भी हो सकता है।

    नींबू में मौजूद विटामिन सी त्वचा को चमकदार बनाने में मदद करता है। यह डेड स्किन सेल्स को हटाने में सहायक माना जाता है और चेहरे की रंगत को निखारने में योगदान दे सकता है। इसके अलावा नींबू में मौजूद प्राकृतिक गुण अतिरिक्त तेल को कम करने में मदद कर सकते हैं जिससे ऑयली स्किन वाले लोगों को कुछ राहत मिल सकती है।

    अगर चेहरे पर हल्के दाग धब्बे या पिंपल के निशान हैं तो नींबू का सीमित और सावधानीपूर्वक उपयोग लाभदायक माना जाता है। लेकिन नींबू को कभी भी सीधे चेहरे पर नहीं लगाना चाहिए। इसे एलोवेरा जेल दही शहद या गुलाब जल जैसी त्वचा के लिए सौम्य चीजों के साथ मिलाकर ही इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। इससे त्वचा पर जलन और रूखापन होने का खतरा कम हो सकता है।

    नींबू का उपयोग करने से पहले त्वचा पर पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए। हाथ के किसी छोटे हिस्से पर लगाकर कुछ समय तक देखें। यदि लालपन खुजली या जलन महसूस हो तो इसे चेहरे पर बिल्कुल न लगाएं। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि नींबू का अम्लीय स्वभाव त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है।

    एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि नींबू लगाने के तुरंत बाद धूप में नहीं निकलना चाहिए। नींबू में मौजूद प्राकृतिक तत्व सूर्य की किरणों के प्रति त्वचा को अधिक संवेदनशील बना सकते हैं जिससे त्वचा पर जलन या काले धब्बे पड़ने की आशंका बढ़ सकती है। यदि नींबू का उपयोग किया है तो चेहरा अच्छी तरह धोने के बाद ही बाहर निकलें और सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूर करें।

    त्वचा की देखभाल केवल घरेलू नुस्खों से पूरी नहीं होती। पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना अच्छी नींद लेना और नियमित रूप से त्वचा की सफाई करना भी उतना ही जरूरी है। यदि चेहरे पर लगातार मुंहासे एलर्जी या अन्य त्वचा संबंधी समस्या बनी रहती है तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर विकल्प है।

    नींबू एक उपयोगी प्राकृतिक सामग्री है लेकिन हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है। इसलिए जो उपाय किसी एक व्यक्ति के लिए फायदेमंद हो वह दूसरे के लिए उपयुक्त हो यह जरूरी नहीं है। सही जानकारी और सावधानी के साथ इसका सीमित उपयोग त्वचा की देखभाल में मददगार हो सकता है। स्वस्थ और सुंदर त्वचा पाने के लिए घरेलू उपायों के साथ संतुलित जीवनशैली अपनाना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

  • 16 राज्यों में फूड पॉइजनिंग से हड़कंप क्या भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर मंडरा रहा है बड़ा संकट जानिए पूरी सच्चाई

    16 राज्यों में फूड पॉइजनिंग से हड़कंप क्या भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर मंडरा रहा है बड़ा संकट जानिए पूरी सच्चाई


    नई दिल्ली । देश में लगातार सामने आ रहे फूड पॉइजनिंग के मामलों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में 16 राज्यों में भोजन से जुड़ी बीमारियों के मामले दर्ज होने और 11 कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की खबर ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। यह घटना केवल किसी एक राज्य या एक कंपनी तक सीमित नहीं है बल्कि यह संकेत देती है कि खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और उनकी निगरानी को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

    फूड पॉइजनिंग तब होती है जब दूषित भोजन या पेय पदार्थ शरीर में पहुंचकर बैक्टीरिया वायरस परजीवी या हानिकारक रसायनों के माध्यम से संक्रमण फैला देते हैं। इसके कारण उल्टी दस्त पेट दर्द बुखार कमजोरी और कई बार गंभीर स्थिति तक पैदा हो सकती है। छोटे बच्चों बुजुर्गों गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों में इसका खतरा और अधिक बढ़ जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि खराब गुणवत्ता वाले कच्चे पदार्थों का उपयोग स्वच्छता की अनदेखी निर्माण प्रक्रिया में लापरवाही गलत तरीके से पैकेजिंग और खाद्य पदार्थों का अनुचित भंडारण फूड पॉइजनिंग की प्रमुख वजह बनते हैं। यदि किसी कंपनी द्वारा तय मानकों का पालन नहीं किया जाता तो बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य खतरे में पड़ सकता है।

    भारत में खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई पर है। यह संस्था खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता तय करती है और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करती है। समय समय पर खाद्य नमूनों की जांच भी की जाती है लेकिन देश की विशाल आबादी और तेजी से बढ़ते खाद्य बाजार को देखते हुए निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

    उपभोक्ताओं की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पैक्ड फूड खरीदते समय निर्माण तिथि समाप्ति तिथि एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और पैकेज की स्थिति जरूर जांचनी चाहिए। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों को खरीदते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। लंबे समय तक खुले में रखा भोजन खाने से बचना चाहिए और हमेशा साफ पानी का ही उपयोग करना चाहिए।

    यदि किसी व्यक्ति को भोजन करने के कुछ समय बाद लगातार उल्टी दस्त तेज बुखार या पेट में असहनीय दर्द जैसी परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

    16 राज्यों में सामने आए मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खाद्य सुरक्षा केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि कंपनियों विक्रेताओं और उपभोक्ताओं सभी को अपनी भूमिका ईमानदारी से निभानी होगी। सुरक्षित भोजन हर नागरिक का अधिकार है और इसके लिए गुणवत्ता नियंत्रण सख्त निगरानी तथा जनजागरूकता तीनों का मजबूत होना बेहद जरूरी है। यदि सभी स्तरों पर जिम्मेदारी के साथ काम किया जाए तो फूड पॉइजनिंग जैसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है और लोगों का स्वास्थ्य बेहतर तरीके से सुरक्षित रखा जा सकता है।