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  • बढ़ती परेशानियों के बीच खाने पर असर, हर निवाले से पहले सोचने को मजबूर लोग

    बढ़ती परेशानियों के बीच खाने पर असर, हर निवाले से पहले सोचने को मजबूर लोग


    नई दिल्ली । आजकल कई लोग ऐसी परेशानी से जूझ रहे हैं, जिसमें खाना खाते ही तुरंत वॉशरूम जाने की जरूरत महसूस होने लगती है। बाहर खाना हो, ऑफिस में लंच करना हो या किसी फंक्शन में बैठना—हर बार मन में यही डर बना रहता है कि कहीं अचानक टॉयलेट न जाना पड़ जाए। डॉक्टरों के मुताबिक यह समस्या मामूली लग सकती है, लेकिन लंबे समय तक बनी रहे तो बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकती है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि इस स्थिति को मेडिकल भाषा में गैस्ट्रोकोलिक रिफ्लेक्स (Gastrocolic Reflex) कहा जाता है। यह शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें खाना पेट में पहुंचते ही आंतें सक्रिय हो जाती हैं। हालांकि अगर यह प्रतिक्रिया जरूरत से ज्यादा होने लगे और हर बार दस्त, पेट दर्द या गैस की समस्या पैदा करे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    डॉक्टरों के अनुसार, कई बार पेट ठीक से साफ न होने, खराब खानपान, ज्यादा मसालेदार भोजन, तनाव या कमजोर पाचन तंत्र के कारण यह समस्या बढ़ जाती है। खाना खाते ही पेट में मरोड़, गैस और टॉयलेट जाने की तीव्र इच्छा होने लगती है। लंबे समय तक ऐसा होना आंतों में संक्रमण या पाचन संबंधी बीमारी की तरफ इशारा कर सकता है।

    विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अगर यह समस्या लगातार बनी रहे, तो लिवर और आंतों की जांच करवाना जरूरी हो जाता है। समय रहते इलाज न कराने पर शरीर में पोषक तत्वों की कमी, कमजोरी और गंभीर पाचन समस्याएं हो सकती हैं।

    इस परेशानी से जुड़ी कुछ प्रमुख बीमारियां भी सामने आती हैं। इनमें इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) प्रमुख है, जिसमें खाना खाते ही पेट दर्द और गैस बनने लगती है। वहीं कुछ लोगों को दूध या डेयरी उत्पादों से एलर्जी होती है, जिसे लैक्टोज इंटॉलरेंस कहा जाता है। ऐसे लोगों को दूध पीते ही दस्त या पेट खराब होने लगता है। इसके अलावा सीलिएक डिजीज में गेहूं या ग्लूटेन से बनी चीजें खाने पर आंतें प्रभावित होती हैं और बार-बार दस्त की समस्या हो सकती है।

    डॉक्टरों की सलाह है कि अगर खाना खाते ही बार-बार टॉयलेट जाना पड़ रहा है, पेट में लगातार दर्द रहता है, वजन कम हो रहा है या कमजोरी महसूस हो रही है, तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करवानी चाहिए। खानपान में सुधार, पर्याप्त पानी, फाइबर युक्त भोजन और तनाव कम करके इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

  • प्रेग्नेंसी डायबिटीज को हल्के में न लें, बाद में बढ़ सकता है गंभीर बीमारियों का रिस्क

    प्रेग्नेंसी डायबिटीज को हल्के में न लें, बाद में बढ़ सकता है गंभीर बीमारियों का रिस्क


    नई दिल्ली । गर्भावस्था के दौरान होने वाली जेस्टेशनल डायबिटीज को अक्सर महिलाएं अस्थायी समस्या मानकर भूल जाती हैं, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इसका असर डिलीवरी के बाद भी लंबे समय तक शरीर पर बना रह सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रेग्नेंसी के बाद ब्लड शुगर भले ही सामान्य हो जाए, लेकिन शरीर में हुए हार्मोनल और मेटाबॉलिक बदलाव भविष्य में थायरॉयड, हार्ट डिजीज और टाइप-2 डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, मां बनने के बाद ज्यादातर महिलाओं का पूरा ध्यान बच्चे की देखभाल में चला जाता है। ऐसे में लगातार थकान, वजन बढ़ना, बाल झड़ना, कमजोरी, मूड स्विंग्स, डिप्रेशन या ठंड ज्यादा लगने जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। जबकि यही संकेत थायरॉयड डिसफंक्शन की ओर इशारा कर सकते हैं।

    डॉक्टरों का कहना है कि जेस्टेशनल डायबिटीज के दौरान शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ जाता है, जिसका असर थायरॉयड ग्लैंड पर भी पड़ सकता है। थायरॉयड शरीर के मेटाबॉलिज्म, हार्ट रेट, बॉडी टेम्परेचर और एनर्जी लेवल को नियंत्रित करता है। ऐसे में इसमें गड़बड़ी होने पर शरीर धीरे-धीरे कई समस्याओं की चपेट में आने लगता है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि थायरॉयड की परेशानी अचानक नहीं दिखती, बल्कि इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। बिना वजह वजन बढ़ना, ड्राई स्किन, ध्यान लगाने में परेशानी, एंग्जायटी, पीरियड्स अनियमित होना और लगातार कमजोरी इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। कई महिलाएं इन्हें पोस्ट-प्रेग्नेंसी बदलाव समझकर अनदेखा कर देती हैं, जिससे समस्या गंभीर हो सकती है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज हुई हो, उन्हें डिलीवरी के बाद भी नियमित हेल्थ चेकअप करवाते रहना चाहिए। खासतौर पर अगर परिवार में डायबिटीज या थायरॉयड की हिस्ट्री हो तो अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।

    डॉक्टरों का मानना है कि संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और समय-समय पर ब्लड शुगर व थायरॉयड टेस्ट करवाकर भविष्य में होने वाली गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। क्योंकि मां की सेहत सिर्फ गर्भावस्था तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसका असर लंबे समय तक पूरे शरीर पर दिखाई देता है।

  • मां को दोष देना बंद करो, साइंस समझो: बच्चे की हालत बिगड़ने पर मां को ताने, डॉक्टर का फूटा गुस्सा

    मां को दोष देना बंद करो, साइंस समझो: बच्चे की हालत बिगड़ने पर मां को ताने, डॉक्टर का फूटा गुस्सा



    नई दिल्ली। बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर अक्सर परिवारों में सबसे पहले मां को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है। ऐसा ही एक मामला पीडियाट्रिशियन डॉ. माधवी भारद्वाज के सामने आया, जहां 20 महीने के बच्चे को दौरे पड़ने पर परिवार ने मां की देखभाल पर सवाल उठाए।

    डॉक्टर ने बताया कि बच्चा अचानक बुखार और दौरे की स्थिति में अस्पताल लाया गया था, जहां समय पर इलाज देकर उसकी हालत को स्थिर कर दिया गया। इसके बावजूद घरवालों ने मां से कहा कि अगर उसने ठीक से ध्यान रखा होता, तो यह स्थिति नहीं आती।

    इस पर डॉ. माधवी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि लोगों को पहले मेडिकल साइंस समझनी चाहिए। उन्होंने बताया कि 6 महीने से 5 साल तक के बच्चों में तेज बुखार के दौरान फेब्राइल सीजर्स (दौरे) आम होते हैं और यह हमेशा लापरवाही का नतीजा नहीं होता।

    डॉक्टर ने यह भी कहा कि समाज में अक्सर मांओं को हर स्थिति के लिए दोषी ठहरा दिया जाता है, जबकि कई बार यह पूरी तरह मेडिकल कंडीशन होती है। उन्होंने अपील की कि लोगों को दोष देने के बजाय समाधान और सही इलाज पर ध्यान देना चाहिए।

  • चिपचिपी त्वचा से परेशान? जानिए ऑयली स्किन के लिए असरदार देखभाल

    चिपचिपी त्वचा से परेशान? जानिए ऑयली स्किन के लिए असरदार देखभाल


    नई दिल्ली । ऑयली स्किन यानी तैलीय त्वचा गर्मी और बारिश के मौसम में और ज्यादा चिपचिपी हो जाती है। इसके कारण चेहरे पर अतिरिक्त तेल, पोर्स बंद होना और मुंहासों की समस्या बढ़ सकती है। लेकिन कुछ आसान आदतें अपनाकर इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।

    1. डाइट में तेल और जंक फूड कम करें
    बहुत ज्यादा तला-भुना, बटर, चीज, केक, पेस्ट्री और फास्ट फूड ऑयली स्किन को बढ़ा सकते हैं। इसलिए हल्का और हेल्दी खाना लें।

    2. शरीर को हाइड्रेट रखे
    दिनभर में 8–10 गिलास पानी जरूर पिएं। पानी शरीर को डिटॉक्स करता है और स्किन में एक्स्ट्रा ऑयल बनने की समस्या कम करता है।

    3. विटामिन और जिंक का ध्यान रखें
    विटामिन B2 और जिंक की कमी से भी ऑयली स्किन और एक्ने बढ़ सकते हैं। हरी सब्जियां, काबुली चना और हेल्दी फूड्स डाइट में शामिल करें।

    4. सोने से पहले मेकअप जरूर हटाएं
    मेकअप लगाकर सोने से पोर्स बंद हो जाते हैं और बैक्टीरिया बढ़ते हैं, जिससे स्किन ऑयली और खराब हो सकती है।

    5. मिट्टी (क्ले) फेस पैक इस्तेमाल करें
    हफ्ते में 1 बार क्ले फेस पैक लगाने से अतिरिक्त तेल कम होता है और स्किन साफ रहती है।

    6. वजन को कंट्रोल में रखें
    ओवरवेट होने से भी हार्मोनल बदलाव होते हैं, जो ऑयली स्किन की समस्या बढ़ा सकते हैं।

    7. हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं
    फल, हरी सब्जियां और फाइबर वाली डाइट लें। कब्ज और खराब डाइजेशन भी स्किन प्रॉब्लम को बढ़ा सकते हैं।

  • एड़ियों की दरारें बन सकती हैं दर्दनाक घाव, ऐसे करें समय रहते इलाज

    एड़ियों की दरारें बन सकती हैं दर्दनाक घाव, ऐसे करें समय रहते इलाज


    नई दिल्ली । एड़ियों में दरारें (Cracked Heels) एक आम समस्या है, लेकिन अगर इन्हें समय पर ठीक न किया जाए तो ये दर्दनाक घाव और संक्रमण का कारण बन सकती हैं। खासकर गर्मी और सर्दी में यह समस्या ज्यादा बढ़ जाती है।

    फटी एड़ियां क्यों होती हैं?
    त्वचा का ज्यादा सूखना (Dry skin)
    पैरों की सही सफाई न होना
    खुली चप्पल या सैंडल पहनना
    शरीर में पानी की कमी
    डेड स्किन का जमा होना

     एड़ियां ठीक करने के आसान घरेलू उपाय
     1. गुनगुने पानी में भिगोना
    गुनगुने पानी में थोड़ा नमक या शैम्पू डालें
    10–15 मिनट पैरों को भिगोएं
    इससे डेड स्किन नरम हो जाती है और साफ करना आसान होता है
     2. डेड स्किन हटाना (सावधानी से)
    हल्के हाथों से प्यूमिक स्टोन (पिसाई पत्थर) से सफाई करें
    जोर से स्क्रैच न करें वरना घाव बन सकता है
    3. मॉइस्चराइज़र लगाना जरूरी
    नहाने के बाद गाढ़ी क्रीम या वैसलीन लगाएं
    रात को सोने से पहले जरूर लगाएं
    फिर मोजे पहन लें ताकि नमी बनी रहे
    4. एलोवेरा और घरेलू नुस्खे
    एलोवेरा जेल लगाना फायदेमंद है
    शहद + ग्लिसरीन + गुलाब जल का मिश्रण भी असरदार है
    यह त्वचा को मुलायम और हीलिंग में मदद करता है
    5. अंदर से देखभाल (Diet & Hydration)
    खूब पानी पिएं
    विटामिन E और हेल्दी फैट वाला खाना लें
    हरी सब्जियां और फल शामिल करें

    क्या न करें
    फटी एड़ियों को हाथ से ज्यादा खुरचें नहीं
    बिना मॉइस्चराइज़र पैरों को सूखा न छोड़ें
    ज्यादा देर नंगे पैर न चलें

    फटी एड़ियां छोटी समस्या लग सकती हैं, लेकिन लापरवाही से यह दर्द और संक्रमण में बदल सकती हैं। सही सफाई, मॉइस्चराइजिंग और घरेलू देखभाल से इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है।

  • Multani Mitti: गर्मियों में स्किन को देगा नेचुरल ग्लो, जानिए इस्तेमाल के तरीके

    Multani Mitti: गर्मियों में स्किन को देगा नेचुरल ग्लो, जानिए इस्तेमाल के तरीके


    नई दिल्ली । गर्मी के मौसम में त्वचा पर तेल, पसीना और धूल जमने से चेहरा dull और चिपचिपा लगने लगता है। ऐसे में मुल्तानी मिट्टी एक पारंपरिक और असरदार स्किनकेयर उपाय माना जाता है, जो त्वचा को साफ, ठंडा और फ्रेश रखने में मदद कर सकती है।

     मुल्तानी मिट्टी के असली फायदे


    1. अतिरिक्त तेल को कम करती है
    मुल्तानी मिट्टी त्वचा से एक्स्ट्रा ऑयल (sebum) को सोख लेती है, जिससे चेहरा कम ऑयली और ज्यादा साफ दिखता है।

    2. गहरी सफाई (Deep cleansing)
    यह स्किन पोर्स से धूल, गंदगी और टॉक्सिन्स को हटाने में मदद करती है, जिससे ब्लैकहेड्स और पिंपल्स की समस्या कम हो सकती है।

    3. ठंडक का एहसास
    गर्मी में इसका कूलिंग इफेक्ट चेहरे को राहत देता है और जलन या रैशेज में भी आराम मिल सकता है।

    4. स्किन टोन को बेहतर बनाती है
    नियमित इस्तेमाल से स्किन ज्यादा फ्रेश और even-toned दिख सकती है।

    मुल्तानी मिट्टी इस्तेमाल करने के आसान तरीके
     1. ऑयली स्किन फेस पैक
    2 चम्मच मुल्तानी मिट्टी
    गुलाब जल
    1 चुटकी हल्दी

     2. ग्लो के लिए फेस पैक
    मुल्तानी मिट्टी
    शहद
    दूध या मलाई

     3. पिंपल कंट्रोल पैक
    मुल्तानी मिट्टी
    नींबू का रस (कुछ बूंदें)
    गुलाब जल

     4. गर्मी में कूलिंग फेस पैक
    मुल्तानी मिट्टी
    खीरे का रस

     जरूरी सावधानियां
    बहुत ड्राई स्किन वाले लोग इसे ज्यादा न लगाएं
    हफ्ते में 2–3 बार से ज्यादा इस्तेमाल न करें
    लगाने के बाद मॉइस्चराइज़र जरूर लगाएं
    अगर एलर्जी हो तो तुरंत बंद करें

    मुल्तानी मिट्टी एक नेचुरल, सस्ता और असरदार उपाय है जो गर्मियों में त्वचा को साफ, ठंडा और फ्रेश रखने में मदद करता है। लेकिन यह कोई “मैजिक स्किन ट्रीटमेंट” नहीं है—इसे सही तरीके और संतुलन के साथ इस्तेमाल करना ही बेहतर परिणाम देता है।

  • हिमाचल की छुपी हुई जन्नत: जहां से दिखेगा कैलाश पर्वत का शानदार दृश्य

    हिमाचल की छुपी हुई जन्नत: जहां से दिखेगा कैलाश पर्वत का शानदार दृश्य


    नई दिल्ली । हिमाचल प्रदेश अपनी बर्फीली चोटियों और शांत वादियों के लिए मशहूर है, लेकिन किन्नौर जिले का कल्पा गांव एक ऐसी जगह है जहां प्रकृति, शांति और आध्यात्मिकता एक साथ मिलते हैं। सबसे खास बात यहां से साफ मौसम में किन्नर कैलाश पर्वत का अद्भुत और बेहद करीब जैसा दृश्य दिखाई देता है।

     कल्पा क्यों है खास
    कल्पा सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि एक अनुभव है।
    यह जगह अपने लिए जानी जाती है-
    बर्फ से ढकी हिमालयी चोटियों के शानदार नज़ारे
    देवदार और सेब के घने बागान
    शांत और कम भीड़-भाड़ वाला वातावरण
    सूर्योदय और सूर्यास्त का सुनहरा दृश्य

    सुबह की पहली किरण जब किन्नर कैलाश की चोटियों पर पड़ती है, तो पूरा पर्वत सुनहरे और गुलाबी रंग में चमक उठता है यह नजारा पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

     यहां से दिखता है किन्नर कैलाश का सबसे सुंदर दृश्
    कल्पा गांव को किन्नर कैलाश देखने के सबसे अच्छे पॉइंट्स में गिना जाता है।
    इसके अलावा आप यहां से देख सकते हैं:
    पूरी किन्नौर घाटी
    बर्फीली हिमालयी श्रृंखलाएं
    देवदार के जंगलों का फैला हुआ दृश्य
     फोटोग्राफर्स के लिए यह जगह किसी “नेचुरल स्टूडियो” से कम नहीं है।

     कल्पा कैसे पहुंचे?
    सड़क मार्ग (सबसे आसान तरीका)
    दिल्ली से बस: कश्मीरी गेट से रिकांग पिओ के लिए HRTC बस
    रिकांग पिओ से टैक्सी/लोकल बस द्वारा कल्पा
    कुल दूरी: लगभग 580–600 km
    समय: 14–16 घंटे

     ट्रेन से
    नजदीकी रेलवे स्टेशन: शिमला
    वहां से सड़क मार्ग से आगे यात्रा करनी होती है
     हवाई मार्ग
    नजदीकी एयरपोर्ट: शिमला एयरपोर्ट
    वहां से टैक्सी द्वारा कल्पा
    रुकने और खाने की सुविधा
    कल्पा में बजट से लेकर आरामदायक ठहरने की सुविधा आसानी से मिल जाती है:
    होमस्टे, होटल और गेस्ट हाउस उपलब्ध
    किराया लगभग ₹800 से शुरू

    खाने में आप ट्राई कर सकते हैं:
    किन्नौरी राजमा
    सिद्दू
    मोमो और थुकपा
    देसी घी वाली रोटियां
    ताजा सेब और एप्पल जूस

    अगर आप भीड़ से दूर, शांति और प्रकृति के बीच कुछ दिन बिताना चाहते हैं, तो हिमाचल का कल्पा गांव आपके लिए परफेक्ट जगह है। यहां का किन्नर कैलाश दर्शन न सिर्फ आंखों को सुकून देता है, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव भी कराता है।
  • Sun Tan Removal Tips: घर पर बनाएं ये फेस पेस्ट और पाएं ग्लोइंग स्किन

    Sun Tan Removal Tips: घर पर बनाएं ये फेस पेस्ट और पाएं ग्लोइंग स्किन


    नई दिल्ली । गर्मियों में सूरज की UV किरणें (Ultraviolet Rays) त्वचा की ऊपरी परत को प्रभावित करती हैं, जिससे स्किन डार्क और डल दिखने लगती है। जो हिस्से खुले रहते हैं जैसे चेहरा, हाथ और गर्दन वह ज्यादा टैन होते हैं। महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स के बजाय घर पर बने नुस्खे इस समस्या में काफी असरदार माने जाते हैं।

    बेसन और दही का टैन रिमूवल पेस्ट
    कैसे बनाएं:
    2 चम्मच बेसन
    2 चम्मच दही
    1 चुटकी हल्दी
    इन्हें मिलाकर एक स्मूद पेस्ट तैयार करें।

    कैसे लगाएं:
    चेहरे और टैन वाली जगह पर लगाएं
    15–20 मिनट बाद हल्के हाथों से रगड़कर धो लें

    फायदे:
    डेड स्किन हटाता है
    स्किन को प्राकृतिक रूप से ब्राइट बनाता है
    टैनिंग धीरे-धीरे कम करता है
     नींबू और शहद का नेचुरल पेस्ट
    कैसे बनाएं:
    1 चम्मच शहद
    1 चम्मच नींबू का रस
    दोनों को अच्छे से मिलाएं।

    कैसे लगाएं:
    टैन वाली जगह पर हल्के हाथ से लगाएं
    10–15 मिनट बाद धो लें

    फायदे:
    नींबू स्किन को हल्का करता है
    शहद स्किन को मॉइश्चर देता है
    स्किन टोन को समान बनाने में मदद करता है
    कितने दिनों में असर दिखेगा?
    अगर इन दोनों पेस्ट को नियमित रूप से 7 दिनों तक इस्तेमाल किया जाए, तो:
    टैनिंग में कमी दिखाई देने लगती है
    स्किन पहले से ज्यादा साफ और फ्रेश लगती है
    जरूरी सावधानियां
    नींबू लगाने के बाद धूप में तुरंत न जाएं
    पहले पैच टेस्ट जरूर करें
    बहुत ज्यादा रगड़ने से बचें

    सन टैन एक आम समस्या है, लेकिन सही घरेलू उपाय अपनाकर इसे आसानी से कम किया जा सकता है। बेसन-दही और शहद-नींबू जैसे नेचुरल पेस्ट त्वचा को बिना साइड इफेक्ट के निखारने में मदद करते हैं।

  • बारिश से पहले क्यों बढ़ जाते हैं वायरल फीवर के मामले? जानिए मौसम और सेहत का यह अहम संबंध

    बारिश से पहले क्यों बढ़ जाते हैं वायरल फीवर के मामले? जानिए मौसम और सेहत का यह अहम संबंध

    नई दिल्ली । बारिश से ठीक पहले का मौसम शरीर के लिए सबसे संवेदनशील माना जाता है। गर्मी के बाद जब अचानक हवा में नमी बढ़ती है, तापमान बार-बार ऊपर-नीचे होता है और वातावरण अस्थिर हो जाता है, तो वायरस और बैक्टीरिया को फैलने का बेहतर माहौल मिल जाता है। इसी वजह से इस समय वायरल फीवर, फ्लू और इंफेक्शन के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं।

    इस मौसम में शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी थोड़ी कमजोर पड़ जाती है। दिन में गर्मी और रात में ठंडक के कारण शरीर एडजस्ट नहीं कर पाता, जिससे सर्दी-जुकाम, गले में दर्द और बुखार जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। इसके साथ ही नमी बढ़ने से मच्छरों की संख्या भी बढ़ती है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

    सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों पर पड़ता है। गंदा पानी, बाहर का खाना और साफ-सफाई की कमी भी पेट से जुड़ी बीमारियों जैसे दस्त, उल्टी और फूड पॉइजनिंग को बढ़ावा देती है।

    कैसे करें बचाव

    इस मौसम में बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें ताकि मच्छर न पनपें। बाहर का खुला या बासी खाना खाने से बचें और हल्का, ताजा भोजन करें। पर्याप्त पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें।

    बारिश में भीगने के बाद तुरंत कपड़े बदलना जरूरी है। बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें। अगर बुखार, कमजोरी या खांसी लंबे समय तक बनी रहे तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने की बजाय डॉक्टर से सलाह लें।

    थोड़ी सावधानी रखकर इस मौसम की कई गंभीर बीमारियों से आसानी से बचा जा सकता है।
    बारिश से पहले बदलते मौसम, नमी और कमजोर इम्युनिटी के कारण वायरल बीमारियां तेजी से फैलती हैं।

  • क्या किचन स्पंज से होता है कैंसर? जानिए वायरल दावे की सच्चाई और असली खतरा क्या है

    क्या किचन स्पंज से होता है कैंसर? जानिए वायरल दावे की सच्चाई और असली खतरा क्या है

    नई दिल्ली । किचन में रोज इस्तेमाल होने वाला स्पंज या स्क्रबर अचानक चर्चा में है, क्योंकि सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से फैल रहा है कि यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। इस दावे ने कई लोगों के बीच चिंता पैदा कर दी है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह पूरी तरह भ्रामक और वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं है।

    असल में किचन स्पंज का सबसे बड़ा मुद्दा कैंसर नहीं बल्कि उसमें पनपने वाले बैक्टीरिया हैं। जब स्पंज लंबे समय तक गीला रहता है और उसमें खाने के छोटे कण फंस जाते हैं, तो यह बैक्टीरिया के बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण बन जाता है। ऐसे में इसका उपयोग करने पर ये हानिकारक सूक्ष्मजीव बर्तनों और भोजन तक पहुंच सकते हैं, जिससे पेट से जुड़ी बीमारियां, फूड पॉइजनिंग, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

    डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक किसी भी विश्वसनीय शोध में यह साबित नहीं हुआ है कि किचन स्पंज सीधे तौर पर कैंसर का कारण बनता है। इसलिए इसे लेकर जो दावा वायरल हो रहा है, वह एक मिथक से ज्यादा कुछ नहीं है। कैंसर जैसी बीमारी के कारण जटिल और लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रियाओं से जुड़े होते हैं, जिनका संबंध सामान्य घरेलू स्पंज से नहीं पाया गया है।

    विशेषज्ञ यह जरूर मानते हैं कि खराब किचन हाइजीन कई तरह के संक्रमणों को बढ़ावा दे सकती है। गंदा स्पंज बैक्टीरिया का स्रोत बन सकता है, जो खाने की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए इसे नियमित रूप से साफ करना और समय-समय पर बदलना जरूरी माना जाता है।

    सेहत विशेषज्ञों के अनुसार किचन स्पंज को कुछ हफ्तों के अंतराल पर बदल देना चाहिए और इस्तेमाल के बाद उसे पूरी तरह सूखने देना चाहिए। इसके अलावा गर्म पानी से समय-समय पर उसकी सफाई करना और अलग-अलग कामों के लिए अलग स्क्रबर का उपयोग करना भी बेहतर माना जाता है।

    कुल मिलाकर, किचन स्पंज से कैंसर होने का दावा वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है, लेकिन साफ-सफाई की अनदेखी निश्चित रूप से स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है। इसलिए असली ध्यान डर पर नहीं, बल्कि सही हाइजीन आदतों पर देना चाहिए।