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  • झाड़ू जैसे बेजान बालों के लिए घरेलू उपाय, मिल सकती है पार्लर जैसी चमक

    झाड़ू जैसे बेजान बालों के लिए घरेलू उपाय, मिल सकती है पार्लर जैसी चमक


    नई दिल्ली। आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में बालों की सेहत सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है। धूल, प्रदूषण, तनाव और गलत लाइफस्टाइल मिलकर बालों को कमजोर बना रहे हैं। धीरे-धीरे ये बाल अपनी प्राकृतिक चमक खोकर झाड़ू जैसे रूखे और बेजान दिखने लगते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सिर्फ बाहरी देखभाल नहीं बल्कि अंदरूनी कारण भी बालों की हालत बिगाड़ते हैं जैसे खराब डाइट, कम पानी पीना और नींद की कमी।

    महंगे प्रोडक्ट्स क्यों नहीं देते हमेशा रिजल्ट?
    अक्सर लोग सोचते हैं कि महंगे शैंपू, कंडीशनर और पार्लर ट्रीटमेंट से बाल ठीक हो जाएंगे। लेकिन सच्चाई यह है कि बालों की जड़ें कमजोर होने पर सिर्फ ऊपर से की गई केयर ज्यादा असर नहीं दिखा पाती। बार-बार शैंपू बदलना और नए प्रोडक्ट्स ट्राय करना भी स्कैल्प के नेचुरल बैलेंस को बिगाड़ सकता है, जिससे बाल और ज्यादा रूखे हो जाते हैं।

    किचन में छिपा है बालों का असली इलाज
    सबसे खास बात यह है कि बालों की देखभाल के लिए आपको ज्यादा खर्च करने की जरूरत नहीं है। आपकी रसोई में मौजूद चीजें ही बालों को नई जिंदगी दे सकती हैं।
    दही बालों को ठंडक और नमी देता है
    शहद बालों को मुलायम बनाता है
    नारियल तेल जड़ों को मजबूत करता है
    करी पत्ता बालों की ग्रोथ में मदद करता है
    इन देसी उपायों का असर धीरे-धीरे दिखता है, लेकिन यह लंबे समय तक टिकाऊ होता है।

    छोटी गलतियां जो बालों को कर रही हैं खराब
    बालों की खराब हालत के पीछे कई छोटी-छोटी गलतियां जिम्मेदार होती हैं, जैसे:
    गीले बालों में कंघी करना
    ज्यादा हीट स्टाइलिंग का इस्तेमाल
    रात में बालों की सही देखभाल न करना
    गंदे तकिए पर सोना
    हेयर केयर में लापरवाही
    ये आदतें धीरे-धीरे बालों को कमजोर बना देती हैं और उनकी चमक खत्म कर देती हैं।

    आसान देसी हेयर केयर रूटीन
    अगर बाल झाड़ू जैसे हो गए हैं, तो कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं:
    हफ्ते में 2 बार हल्का गर्म नारियल तेल से मसाज करें
    करी पत्ते डालकर तेल तैयार करें और स्कैल्प पर लगाएं
    दही और शहद का हेयर मास्क लगाएं
    माइल्ड शैंपू का ही इस्तेमाल करें और बार-बार बदलने से बचें

    बालों की खूबसूरती सिर्फ महंगे प्रोडक्ट्स से नहीं, बल्कि सही देखभाल और देसी नुस्खों से वापस लाई जा सकती है। अगर आप नियमित रूप से स्कैल्प की सफाई, सही डाइट और प्राकृतिक उपायों को अपनाते हैं, तो बेजान बाल भी फिर से सिल्की, शाइनी और हेल्दी बन सकते हैं।

  • टैनिंग दूर करने के आसान घरेलू उपाय, चेहरा बनेगा निखरा

    टैनिंग दूर करने के आसान घरेलू उपाय, चेहरा बनेगा निखरा

    लाइफस्टाइल | गर्मियों में धूप, धूल और पसीने की वजह से त्वचा डल और टैन हो जाती है। ऐसे में लोग महंगे फेस वॉश और स्क्रब का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कई बार इनमें मौजूद केमिकल्स त्वचा को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। इसी कारण अब लोग घरेलू और नेचुरल स्किन केयर की ओर लौट रहे हैं।

    घर पर बने क्लींजर के फायदे
    ब्यूटी एक्सपर्ट्स के अनुसार रसोई में मौजूद कुछ प्राकृतिक चीजें त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं:
    त्वचा को गहराई से साफ करती हैं
    डेड स्किन हटाती हैं
    टैनिंग कम करती हैं
    स्किन को सॉफ्ट और ग्लोइंग बनाती हैं

    कैसे बनाएं होममेड फेस क्लींजर?
    इसके लिए आपको चाहिए:
    1 चम्मच कॉफी पाउडर
    1 चम्मच ताजा दही
    1 चम्मच शहद
    इन तीनों को अच्छी तरह मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार करें।

    कैसे करें इस्तेमाल?
    चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करें
    20–25 मिनट तक छोड़ दें
    फिर साफ पानी से धो लें
    हफ्ते में 2–3 बार इस्तेमाल करें

    सावधानी जरूरी है
    पहली बार इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। अगर जलन या एलर्जी महसूस हो तो तुरंत उपयोग बंद कर दें।
    यह घरेलू क्लींजर बिना केमिकल के त्वचा को साफ करने और प्राकृतिक निखार देने में मदद कर सकता है। नियमित इस्तेमाल से चेहरा ज्यादा मुलायम, साफ और चमकदार दिखाई देने लगता है।
  • हेयर फॉल रोकने के लिए स्कैल्प क्लीनिंग है अहम, एक्सपर्ट टिप्स

    हेयर फॉल रोकने के लिए स्कैल्प क्लीनिंग है अहम, एक्सपर्ट टिप्स


    नई दिल्ली। आज के समय में बाल झड़ने की समस्या हर उम्र के लोगों में तेजी से बढ़ रही है। जैसे ही बाल गिरने लगते हैं, लोग तुरंत नया शैंपू खरीद लेते हैं कभी प्याज वाला, कभी अदरक वाला, कभी “हर्बल” नाम देखकर। मार्केटिंग भी इसी उम्मीद पर टिकी होती है कि लोग सोचेंगे कि नया प्रोडक्ट ही उनकी समस्या का हल है। लेकिन हेयर एक्सपर्ट जावेद हबीब के मुताबिक यह सोच पूरी तरह सही नहीं है। उनका मानना है कि शैंपू बदलने से बालों का झड़ना नहीं रुकता, क्योंकि असली समस्या शैंपू नहीं बल्कि स्कैल्प की स्थिति होती है।

    स्कैल्प की गंदगी कैसे बढ़ाती है हेयर फॉल?
    बालों की जड़ों यानी स्कैल्प पर अगर तेल, धूल और पसीना जमा हो जाए तो रोमछिद्र (pores) बंद होने लगते हैं। इससे:
    बालों की जड़ों तक ऑक्सीजन और पोषण कम पहुंचता है
    स्कैल्प में इंफेक्शन या डैंड्रफ बढ़ सकता है
    बाल कमजोर होकर तेजी से गिरने लगते हैं
    इसलिए सिर्फ बाहरी प्रोडक्ट बदलने से ज्यादा जरूरी है कि स्कैल्प को साफ और बैलेंस रखा जाए।

    प्याज और अदरक वाले शैंपू का सच
    आजकल बाजार में “ऑनियन शैंपू”, “जिंजर शैंपू” जैसे कई प्रोडक्ट मिलते हैं, जिनका दावा होता है कि ये हेयर फॉल रोक देंगे। लेकिन सच्चाई यह है कि शैंपू एक wash-off product होता है, जो कुछ ही मिनट में धो दिया जाता है। ऐसे में उसमें मौजूद हर्बल इंग्रीडिएंट्स को स्कैल्प में गहराई तक असर करने का पर्याप्त समय नहीं मिलता। इसलिए सिर्फ नाम या इंग्रीडिएंट देखकर यह मान लेना कि हेयर फॉल रुक जाएगा, सही नहीं है।

    जावेद हबीब की असली हेयर केयर टिप्स
    हेयर एक्सपर्ट्स के अनुसार बालों की सही देखभाल के लिए कुछ बेसिक बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
    स्कैल्प को नियमित रूप से साफ रखें
    हल्का और बैलेंस्ड शैंपू इस्तेमाल करें
    जरूरत से ज्यादा प्रोडक्ट बदलने से बचें
    डैंड्रफ और ऑयल बिल्डअप को कंट्रोल करें
    सही डाइट और नींद का ध्यान रखें

    बालों का झड़ना रोकने का कोई “मैजिक शैंपू” नहीं है। असली समाधान स्कैल्प की सफाई, सही हेयर केयर रूटीन और लाइफस्टाइल में सुधार है। बार-बार शैंपू बदलना समस्या को हल करने के बजाय उसे और उलझा सकता है।

  • पुरुषों में ज्यादा बाल झड़ने की वजह क्या है? जानें वैज्ञानिक कारण

    पुरुषों में ज्यादा बाल झड़ने की वजह क्या है? जानें वैज्ञानिक कारण


    नई दिल्ली। बालों का झड़ना आज एक आम समस्या बन चुका है, लेकिन पुरुषों और महिलाओं में इसका पैटर्न पूरी तरह अलग होता है। पुरुषों में जहां समय के साथ सिर के आगे और बीच के हिस्से से बाल तेजी से कम होकर गंजापन दिखने लगता है, वहीं महिलाओं में आमतौर पर पूरे सिर में हल्का-हल्का बाल पतला होता है, लेकिन पूरी तरह गंजापन बेहद कम देखा जाता है।

    इसका सबसे बड़ा कारण शरीर में पाए जाने वाले हार्मोन और उनकी कार्यप्रणाली है।
    पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन नामक हार्मोन एक एंजाइम की मदद से DHT (डायहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन) में बदल जाता है। यही DHT बालों की जड़ों पर सबसे ज्यादा असर डालता है। यह धीरे-धीरे बालों की जड़ों को कमजोर कर देता है, जिससे बाल पतले होते जाते हैं और अंततः गिरने लगते हैं। समय के साथ यह प्रक्रिया इतनी तेज हो जाती है कि सिर के कुछ हिस्सों में पूरी तरह गंजापन दिखाई देने लगता है।

    महिलाओं में क्यों बच जाते हैं बाल?
    महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन नामक हार्मोन अधिक मात्रा में पाया जाता है। यह हार्मोन बालों की जड़ों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है और DHT के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित करता है। इसी कारण महिलाओं में बालों का झड़ना होता तो है, लेकिन वह आमतौर पर “डिफ्यूज थिनिंग” के रूप में होता है यानी पूरे सिर में हल्की-हल्की कमी, न कि पुरुषों जैसा पैच वाला गंजापन। इसके अलावा महिलाओं के हेयर फॉलिकल्स (बालों की जड़ें) हार्मोन के प्रति अपेक्षाकृत कम संवेदनशील होती हैं, जिससे बाल लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।

    जेनेटिक्स भी निभाता है बड़ी भूमिका
    बाल झड़ने की समस्या सिर्फ हार्मोन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसमें जेनेटिक फैक्टर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे मेडिकल भाषा में Androgenetic Alopecia कहा जाता है। अगर परिवार में पिता या दादा को गंजापन रहा है, तो पुरुषों में इसकी संभावना काफी बढ़ जाती है। महिलाओं में भी यह जेनेटिक प्रभाव होता है, लेकिन उसका असर अपेक्षाकृत धीमा और कम गंभीर होता है।

    उम्र और हार्मोनल बदलाव का अस
    जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। महिलाओं में मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है, जिससे बालों का झड़ना बढ़ सकता है। हालांकि तब भी पुरुषों जैसा पूरा गंजापन दुर्लभ होता है।

    पुरुषों में गंजापन मुख्य रूप से DHT हार्मोन के अधिक प्रभाव और जेनेटिक संवेदनशीलता के कारण होता है, जबकि महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन बालों को सुरक्षा प्रदान करता है। यही वजह है कि पुरुषों में गंजापन ज्यादा दिखाई देता है और महिलाओं में बाल झड़ने के बावजूद पूरा सिर आमतौर पर सुरक्षित रहता है।

  • सुबह के नाश्ते की आसान और हेल्दी शुरुआत: झटपट बनने वाला वेजिटेबल उपमा, स्वाद और सेहत का परफेक्ट मेल

    सुबह के नाश्ते की आसान और हेल्दी शुरुआत: झटपट बनने वाला वेजिटेबल उपमा, स्वाद और सेहत का परफेक्ट मेल

    नई दिल्ली ।  लंबी यात्रा का नाम सुनते ही जहां कुछ लोगों के चेहरे पर उत्साह आ जाता है, वहीं कई लोगों के लिए सफर एक बड़ी परेशानी बन जाता है। कार, बस या पहाड़ी रास्तों पर सफर करते समय उल्टी, चक्कर, घबराहट और जी मिचलाने जैसी समस्याएं कई यात्रियों को परेशान करती हैं। इस स्थिति को सामान्य भाषा में मोशन सिकनेस कहा जाता है। यह समस्या न केवल यात्रा का आनंद खराब कर देती है, बल्कि कई बार लोगों को सफर करने से भी डर लगने लगता है। हालांकि, कुछ आसान घरेलू उपायों को अपनाकर इस परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    मोशन सिकनेस आमतौर पर तब होती है जब आंखों और दिमाग के बीच तालमेल बिगड़ जाता है। चलते वाहन में शरीर एक तरह की गति महसूस करता है, जबकि दिमाग उसे अलग तरीके से समझता है। इसी कारण घबराहट, चक्कर और उल्टी जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। लेकिन यदि सफर से पहले और दौरान कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए, तो यात्रा काफी आरामदायक बन सकती है।

    अदरक को इस समस्या का सबसे प्रभावी घरेलू उपाय माना जाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण पेट को शांत रखने में मदद करते हैं और जी मिचलाने की समस्या को कम करते हैं। सफर पर निकलने से पहले अदरक वाली चाय पीना या अदरक का छोटा टुकड़ा चबाना फायदेमंद साबित हो सकता है। कई लोग अदरक की टॉफी या कैंडी का इस्तेमाल भी करते हैं, जिससे यात्रा के दौरान राहत मिलती है।

    नींबू और काला नमक भी सफर के दौरान काफी लाभकारी माने जाते हैं। नींबू की खुशबू और उसका स्वाद पेट को आराम देता है। यात्रा के दौरान यदि जी मिचलाने लगे तो नींबू के टुकड़े पर थोड़ा काला नमक लगाकर चूसने से तुरंत राहत महसूस हो सकती है। यह तरीका खासतौर पर पहाड़ी रास्तों में बेहद कारगर माना जाता है।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि खाली पेट सफर करने से बचना चाहिए। कई लोग यह सोचकर बिना कुछ खाए यात्रा पर निकल जाते हैं कि इससे उल्टी नहीं होगी, लेकिन वास्तव में खाली पेट होने से परेशानी और बढ़ सकती है। सफर से पहले हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करना बेहतर माना जाता है। तला-भुना और अधिक मसालेदार भोजन से दूरी बनाना भी जरूरी है।

    सही सीट का चुनाव भी मोशन सिकनेस को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। कार या बस में आगे की सीट पर बैठने से शरीर को कम झटके महसूस होते हैं। साथ ही बाहर के दृश्यों को देखने से दिमाग और आंखों के बीच बेहतर तालमेल बना रहता है, जिससे चक्कर और घबराहट कम होती है। सफर के दौरान लगातार मोबाइल देखने या किताब पढ़ने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे परेशानी बढ़ सकती है।

    ताजी हवा लेना भी बेहद जरूरी है। बंद खिड़कियां, तेज गंध और घुटन भरा माहौल कई बार उल्टी की समस्या को बढ़ा देते हैं। ऐसे में वाहन की खिड़की थोड़ा खुला रखना या बीच-बीच में ताजी हवा लेना राहत पहुंचा सकता है।

    अगर किसी व्यक्ति को हर यात्रा में गंभीर मोशन सिकनेस की समस्या होती है, तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी हो सकता है। कुछ मामलों में दवाओं की जरूरत भी पड़ सकती है। सही सावधानी और घरेलू उपायों के जरिए सफर को आरामदायक और आनंददायक बनाया जा सकता है।

  • बार-बार थकान महसूस हो रही है? गर्मी में शरीर दे रहा है ये चेतावनी संकेत

    बार-बार थकान महसूस हो रही है? गर्मी में शरीर दे रहा है ये चेतावनी संकेत


    नई दिल्ली । भीषण गर्मी के बीच कई लोग लगातार थकान, कमजोरी और सांस फूलने जैसी समस्याओं से परेशान हो रहे हैं। अक्सर इसे मौसम का असर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक यह केवल गर्मी की वजह नहीं, बल्कि शरीर में छिपी किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है।

    डिहाइड्रेशन बन रहा सबसे बड़ा कारण
    गर्मियों में पसीने के जरिए शरीर से पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से बाहर निकल जाते हैं। अगर समय पर पानी न पिया जाए तो डिहाइड्रेशन हो सकता है, जिससे सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी और लगातार थकान महसूस होने लगती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि प्यास लगने का इंतजार न करें, बल्कि थोड़ी-थोड़ी देर में पानी, नारियल पानी या नींबू पानी लेते रहें।

    खून की कमी यानी एनीमिया भी वजह
    लगातार थकान और कमजोरी का एक बड़ा कारण शरीर में आयरन की कमी यानी एनीमिया भी हो सकता है। खासकर महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। इसमें ऑक्सीजन शरीर तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाती, जिससे जल्दी थकान, चक्कर आना, चेहरे पर पीलापन और हाथ-पैर ठंडे रहने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

    डायबिटीज और थायरॉयड का संकेत भी संभ
    डॉक्टरों के अनुसार अगर थकान के साथ ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना या अचानक वजन कम होना जैसे लक्षण दिखें, तो यह डायबिटीज का संकेत हो सकता है। वहीं थायरॉयड की समस्या में शरीर सुस्त रहता है और व्यक्ति हर समय थका हुआ महसूस करता है।

    नींद और तनाव भी बढ़ा रहे समस्या
    लगातार मोबाइल का इस्तेमाल, देर रात तक जागना और 6–7 घंटे से कम नींद लेना भी शरीर की ऊर्जा को कम करता है। इसके साथ तनाव और मानसिक दबाव शरीर को अंदर से कमजोर बना देते हैं, जिससे थकान और बढ़ जाती है।

    गलत खानपान भी बड़ी वजह
    गर्मियों में जंक फूड, ज्यादा तला-भुना खाना और मीठे ड्रिंक्स शरीर को अस्थायी राहत तो देते हैं, लेकिन पोषण नहीं देते। इसके बजाय हल्का, ताजा और पौष्टिक आहार जैसे फल, दही, सलाद और घर का खाना ज्यादा फायदेमंद होता है।

    कब हो जाएं सतर्क?
    अगर कई दिनों तक लगातार थकान बनी रहे, रोजमर्रा के काम करना मुश्किल लगे या कमजोरी बढ़ती जाए, तो इसे हल्के में न लें और डॉक्टर से जांच जरूर करवाएं। समय पर जांच और सही जीवनशैली अपनाकर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

  • कैंसर ट्रीटमेंट में नई उम्मीद? भारत में लॉन्च हुई एडवांस थेरेपी

    कैंसर ट्रीटमेंट में नई उम्मीद? भारत में लॉन्च हुई एडवांस थेरेपी


    नई दिल्ली। भारत में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत नई इम्यूनोथेरेपी दवा लॉन्च की गई है, जिसे आम तौर पर “Cancer Shot” कहा जा रहा है। यह दवा खासतौर पर Non-Small Cell Lung Cancer के मरीजों के लिए विकसित की गई है, जो देश में फेफड़ों के कैंसर के सबसे आम प्रकारों में से एक है।

    क्या है यह नई इम्यूनोथेरेपी?
    यह दवा इम्यून सिस्टम को मजबूत करके कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में मदद करती है। इसका मुख्य टारगेट PD-L1 प्रोटीन होता है, जो कैंसर सेल्स को शरीर की इम्यून सिस्टम से बचने में मदद करता है। नई दवा (एटेजोलिज़ुमैब आधारित इम्यूनोथेरेपी) इस प्रोटीन को ब्लॉक करके शरीर की T-Cells को दोबारा सक्रिय करती है, जिससे वे कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर नष्ट कर सकें।

    7 मिनट में इलाज कैसे संभव हुआ
    पहले यह दवा IV (इंट्रावेनस) इन्फ्यूजन के जरिए दी जाती थी, जिसमें कई घंटे लगते थे और मरीज को अस्पताल में लंबे समय तक रहना पड़ता था।

    अब नई Subcutaneous (SC) इंजेक्शन तकनीक से:
    दवा सिर्फ 7 मिनट में दी जा सकती है
    जांघ या त्वचा के नीचे इंजेक्शन लगाया जाता है
    अस्पताल में समय काफी कम लगता है
    एक साथ अधिक मरीजों का इलाज संभव हो पाता है
    किन मरीजों को मिलेगा फायदा?

    डॉक्टरों के अनुसार यह इलाज सभी के लिए नहीं है। यह सिर्फ उन्हीं मरीजों को दिया जाता है जिनके कैंसर सेल्स में PD-L1 प्रोटीन का स्तर अधिक होता है। औसतन NSCLC मरीजों में लगभग 50% लोग इस थेरेपी के लिए उपयुक्त पाए जाते हैं।

    कीमत कितनी है?
    भारत में इस नई इम्यूनोथेरेपी की कीमत काफी अधिक है:
    एक डोज की कीमत: लगभग ₹3.7 लाख
    आमतौर पर जरूरी डोज: 6
    हालांकि, कंपनियों द्वारा पेशेंट असिस्टेंस प्रोग्राम और सरकारी हेल्थ स्कीम्स के तहत लागत को कुछ हद तक कम करने की सुविधा दी जा रही है।

    क्या है खास फायदा?
    इलाज का समय कई घंटों से घटकर 7 मिनट हो गया
    अस्पताल पर दबाव कम
    मरीजों को कम असुविधा
    इलाज की प्रक्रिया ज्यादा आसान और तेज
    वैश्विक अध्ययन बताते हैं कि अधिकतर मरीज पारंपरिक IV इन्फ्यूजन की बजाय इस नई SC तकनीक को अधिक पसंद करते हैं।

    “Cancer Shot” इम्यूनोथेरेपी कैंसर इलाज में तकनीकी बदलाव का एक बड़ा उदाहरण है। हालांकि इसकी कीमत अभी भी काफी अधिक है, लेकिन यह फेफड़ों के कैंसर के मरीजों के लिए तेज और सुविधाजनक इलाज का विकल्प बनकर सामने आई है।

  • PCOS का नाम बदला: अब PMOS कहलाएगा, AIIMS डॉक्टर ने बताया कारण

    PCOS का नाम बदला: अब PMOS कहलाएगा, AIIMS डॉक्टर ने बताया कारण


    नई दिल्ली। महिलाओं में तेजी से बढ़ रही हार्मोनल और मेटाबॉलिक समस्या Polycystic Ovary Syndrome को लेकर मेडिकल जगत में बड़ा बदलाव किया गया है। अब इस स्थिति को “PMOS” नाम से भी जाना जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव इसलिए जरूरी था क्योंकि पुराना नाम केवल ओवरी (अंडाशय) तक सीमित संकेत देता था, जबकि यह बीमारी पूरे शरीर को प्रभावित करती है।

    AIIMS के डॉक्टरों और अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट्स का कहना है कि PCOS नाम कई बार भ्रम पैदा करता था। कई महिलाओं में अल्ट्रासाउंड में “सिस्ट” दिखाई नहीं देते थे, फिर भी उन्हें यह समस्या होती थी। ऐसे में सही पहचान और इलाज में देरी हो जाती थी।

    PCOS/PMOS क्या है?
    इस स्थिति में महिलाओं के शरीर में एंड्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इसके कारण कई लक्षण दिखाई देते हैं जैसे:
    अनियमित पीरियड्स
    चेहरे पर बाल बढ़ना
    मुंहासे और त्वचा संबंधी समस्या
    तेजी से वजन बढ़ना
    गर्भधारण में परेशानी
    डॉक्टरों के अनुसार अल्ट्रासाउंड में जो “सिस्ट” दिखते हैं, वे असल में सिस्ट नहीं होते बल्कि अधूरे विकसित फॉलिकल्स होते हैं।

    नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?
    विशेषज्ञों के मुताबिक “PCOS” शब्द बीमारी की पूरी गंभीरता को नहीं दर्शाता था। यह केवल ओवरी से जुड़ी समस्या जैसा लगता था, जबकि यह एक हार्मोनल, मेटाबॉलिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी स्थिति है।नए नाम “PMOS” का उद्देश्य यह समझाना है कि यह बीमारी सिर्फ प्रजनन अंगों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करती है।

    शरीर पर अस
    इस समस्या के कारण महिलाओं में कई गंभीर जोखिम बढ़ सकते हैं:
    टाइप-2 डायबिटीज
    मोटापा और फैटी लीवर
    हाई ब्लड प्रेशर
    दिल की बीमारियों का खतरा
    बांझपन और गर्भधारण में कठिनाई
    डिप्रेशन और एंग्जायटी
    डॉक्टरों की राय

    विशेषज्ञों का कहना है कि नाम बदलने से इलाज की प्रक्रिया तुरंत नहीं बदलेगी, लेकिन इससे मरीजों को बीमारी को बेहतर समझने में मदद मिलेगी। अब डॉक्टर सिर्फ पीरियड्स ही नहीं, बल्कि ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और मेटाबॉलिक हेल्थ पर भी अधिक ध्यान देंगे।

    PCOS का नया नाम PMOS मेडिकल समझ को और व्यापक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य बीमारी को केवल “ओवरी की समस्या” नहीं बल्कि एक पूरे शरीर को प्रभावित करने वाली स्थिति के रूप में पहचान देना है।

  • भारी बारिश के बीच चारधाम यात्रा? ये जरूरी सावधानियां रखें ध्यान में

    भारी बारिश के बीच चारधाम यात्रा? ये जरूरी सावधानियां रखें ध्यान में


    नई दिल्ली । उत्तराखंड में चल रही बारिश और ओलावृष्टि के बीच चार धाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यह पवित्र यात्रा जितनी आस्था से जुड़ी है, उतनी ही कठिन और जोखिमभरी भी हो सकती है खासकर खराब मौसम में।

    मौसम की जानकारी सबसे जरूरी
    विशेषज्ञों के अनुसार यात्रा शुरू करने से पहले मौसम का अपडेट लगातार देखते रहना चाहिए। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम कभी भी अचानक बदल सकता है धूप के बाद तेज बारिश, ओलावृष्टि या धुंध जैसी स्थिति बन सकती है। यदि किसी क्षेत्र में रेड या ऑरेंज अलर्ट जारी हो तो वहां यात्रा टालना ही सुरक्षित विकल्प है।

    यात्रा की योजना में रखें लचीलापन
    चार धाम यात्रा के दौरान समय का बहुत सख्त शेड्यूल न रखें। बारिश और भूस्खलन के कारण रास्ते कई घंटों या कभी-कभी पूरे दिन के लिए बंद हो सकते हैं। इसलिए अतिरिक्त 1–2 दिन का समय रखना और होटल बुकिंग में लचीलापन रखना समझदारी मानी जाती है।

    सुबह की यात्रा सबसे सुरक्षित
    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक पहाड़ों में सुबह का समय यात्रा के लिए सबसे बेहतर होता है। शाम होते-होते धुंध और बारिश बढ़ने लगती है, जिससे विजिबिलिटी कम हो जाती है और हादसों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए कोशिश करें कि लंबा सफर सुबह जल्दी शुरू कर शाम से पहले पूरा कर लिया जाए।

    जरूरी सामान साथ रखें
    यात्रा के दौरान हल्का लेकिन जरूरी सामान रखना बेहद जरूरी है। इसमें रेनकोट, वाटरप्रूफ जैकेट, अतिरिक्त मोजे और मजबूत ग्रिप वाले ट्रैकिंग शूज शामिल होने चाहिए। खासकर केदारनाथ और यमुनोत्री जैसे ट्रैक बारिश में बेहद फिसलन भरे हो जाते हैं।

    स्वास्थ्य का रखें विशेष ध्यान
    बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों के लिए यह यात्रा और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ठंड, ऊंचाई और बारिश की वजह से सांस लेने में दिक्कत, थकान और बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा, हार्ट या ब्लड प्रेशर के मरीजों को यात्रा से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

    सावधानी ही सुरक्षा है
    विशेषज्ञ मानते हैं कि चार धाम यात्रा को सफल बनाने के लिए तैयारी और सतर्कता सबसे जरूरी है। सही योजना, मौसम की जानकारी और जरूरी सावधानियों के साथ यह यात्रा न सिर्फ सुरक्षित बल्कि यादगार भी बन सकती है।

  • मिलावटी हल्दी से बचें: ये आसान ट्रिक बताएगी शुद्धता का सच

    मिलावटी हल्दी से बचें: ये आसान ट्रिक बताएगी शुद्धता का सच


    नई दिल्ली । भारतीय रसोई में हल्दी सिर्फ एक मसाला नहीं, बल्कि सेहत और औषधीय गुणों का अहम हिस्सा मानी जाती है। लेकिन आजकल बाजार में मिलावट वाली हल्दी की समस्या बढ़ती जा रही है, जो लंबे समय में शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। ऐसे में हल्दी की शुद्धता जांचना बेहद जरूरी हो जाता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक कई बार हल्दी में चमकदार पीला रंग देने के लिए मेटानिल येलो, लेड क्रोमेट जैसे केमिकल्स मिलाए जाते हैं। इसके अलावा चॉक पाउडर या घटिया क्वालिटी के कच्चे पदार्थों की मिलावट भी की जाती है, जिससे इसकी शुद्धता पर असर पड़ता है।

    पानी से करें आसान टेस्ट
    घर पर हल्दी की शुद्धता जांचने का सबसे आसान तरीका है वॉटर टेस्ट। इसके लिए एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच हल्दी डालकर कुछ देर छोड़ दें। अगर हल्दी नीचे बैठ जाए और पानी हल्का पीला रहे, तो हल्दी को शुद्ध माना जाता है। लेकिन अगर पानी ज्यादा गहरा पीला हो जाए या हल्दी पूरी तरह घुलने लगे, तो यह मिलावट का संकेत हो सकता है।

    हथेली से भी पता चलेगा सच
    एक और आसान तरीका है हथेली टेस्ट। एक चुटकी हल्दी हथेली पर रखकर उसे अंगूठे से 10–20 सेकंड तक रगड़ें। असली हल्दी हल्का पीला दाग छोड़ती है, जबकि मिलावटी हल्दी का रंग अक्सर अलग या फीका होता है।

    मिलावटी हल्दी के नुकसान
    विशेषज्ञों के अनुसार मिलावटी हल्दी के सेवन से पेट दर्द, अपच, मतली और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में लंबे समय तक इसका सेवन लिवर और पाचन तंत्र पर भी असर डाल सकता है।

    खरीदते समय रखें ये सावधानी
    हल्दी खरीदते समय हमेशा भरोसेमंद ब्रांड चुनें और ज्यादा चमकदार पीले रंग पर भरोसा न करें। समय-समय पर घर में इसकी जांच करना भी सुरक्षित माना जाता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना इस्तेमाल होने वाले मसालों की शुद्धता पर ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि छोटी-सी मिलावट भी लंबे समय में बड़ी स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकती है।