Category: Lifestyle

  • महंगी सनस्क्रीन छोड़ें, किचन के ये देसी नुस्खे देंगे नेचुरल ग्लो और टैनिंग से छुटकारा

    महंगी सनस्क्रीन छोड़ें, किचन के ये देसी नुस्खे देंगे नेचुरल ग्लो और टैनिंग से छुटकारा

    नई दिल्ली । तेज धूप और बढ़ती गर्मी के बीच त्वचा की देखभाल आज के समय में एक बड़ी जरूरत बन गई है लोग अपनी स्किन को टैनिंग और यूवी किरणों से बचाने के लिए महंगी सनस्क्रीन और ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर हजारों रुपये खर्च करते हैं लेकिन इसके बावजूद कई बार चेहरे पर कालापन पिग्मेंटेशन और रूखापन बना रहता है इसका कारण केवल प्रोडक्ट नहीं बल्कि सही जानकारी का अभाव और गलत चुनाव भी होता है

    अक्सर लोग सनस्क्रीन खरीदते समय सिर्फ SPF नंबर देखकर ही फैसला कर लेते हैं जबकि विशेषज्ञों के अनुसार यह पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं है सही सनस्क्रीन वही होती है जिस पर ब्रॉड स्पेक्ट्रम लिखा हो क्योंकि यह UVA और UVB दोनों तरह की हानिकारक किरणों से त्वचा की रक्षा करती है इसके साथ ही स्किन टाइप के अनुसार सनस्क्रीन चुनना भी बेहद जरूरी है ऑयली स्किन वालों को जेल बेस्ड और ड्राई स्किन वालों को लोशन बेस्ड सनस्क्रीन का उपयोग करना चाहिए

    इसके अलावा कई सनस्क्रीन में ऐसे केमिकल होते हैं जो लंबे समय में त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं इसलिए प्रोडक्ट खरीदते समय उसके इंग्रीडिएंट्स और एक्सपायरी डेट की जांच करना भी जरूरी है कई बार गलत या एक्सपायर्ड सनस्क्रीन त्वचा पर उल्टा असर डालती है

    अगर आप केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स से बचना चाहते हैं तो किचन में मौजूद प्राकृतिक चीजें आपकी त्वचा के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं घरेलू नुस्खे न केवल सस्ते होते हैं बल्कि लंबे समय तक त्वचा को हेल्दी बनाए रखते हैं

    दही और मसूर दाल का पैक त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है मसूर दाल को पीसकर उसमें दही मिलाकर लगाने से यह एक नेचुरल एक्सफोलिएटर की तरह काम करता है दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा को ठंडक देता है और टैनिंग को कम करने में मदद करता है इस पैक को चेहरे पर 15 मिनट तक लगाकर धोने से त्वचा साफ और चमकदार बनती है

    इसी तरह एलोवेरा और नारियल तेल का मिश्रण भी त्वचा के लिए बेहद लाभकारी है एलोवेरा में हल्का प्राकृतिक SPF होता है जो त्वचा को धूप से बचाने में मदद करता है वहीं नारियल तेल त्वचा को मॉइश्चराइज कर उसे मुलायम बनाए रखता है यह खासतौर पर ड्राई स्किन वालों के लिए बेहद असरदार उपाय है

    सिर्फ घरेलू नुस्खे अपनाना ही काफी नहीं है बल्कि सनस्क्रीन लगाने का सही तरीका भी जानना जरूरी है घर से बाहर निकलने से कम से कम 20 मिनट पहले सनस्क्रीन लगानी चाहिए ताकि वह त्वचा में अच्छी तरह समा जाए अगर आप लंबे समय तक धूप में रहते हैं तो हर 3 से 4 घंटे में इसे दोबारा लगाना चाहिए

    त्वचा की देखभाल केवल महंगे प्रोडक्ट्स पर निर्भर नहीं होती बल्कि सही जानकारी और प्राकृतिक उपायों के संतुलन से ही असली निखार मिलता है इस गर्मी में अपनी स्किन को सुरक्षित और चमकदार बनाए रखने के लिए किचन के इन आसान और असरदार नुस्खों को अपनाना एक बेहतर और सस्ता विकल्प साबित हो सकता है

  • Summer Travel Guide: भीषण गर्मी में राहत देने वाली खूबसूरत जगहें, घूमने के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन

    Summer Travel Guide: भीषण गर्मी में राहत देने वाली खूबसूरत जगहें, घूमने के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन


    नई दिल्ली। इस समय गर्मी का मौसम शुरू हो गया है और लगतार गर्मी बढ़ती ही जाएगी। गर्मियों की तपती धूप से राहत पाने के लिए ठंडी और सुकून भरी जगहों की तलाश हर किसी को होती है। भारत में कई ऐसे खूबसूरत हिल स्टेशन और ठंडी जगहें हैं, जहां आप गर्मी से बचकर आरामदायक छुट्टियां बिता सकते हैं। चलिए जानते हैं वो घूमने की जगहें।

    वैली ऑफ फ्लावर्स
    उत्तराखंड की मशहूर वैली ऑफ फ्लावर्स ट्रेक गर्मियों में बेहद खूबसूरत लगती है। यहां चारों तरफ रंग-बिरंगे फूल और हरियाली देखने को मिलती है, जो ट्रेकिंग के शौकीनों को खास अनुभव देती है। यहां आने के बाद आपका मन जहां से जाने को बिलकुल भी नहीं करेगा। यहां आप कई तस्वीरें भी खींच सकती हैं।

    मनाली
    इस समय मनाली जाने का अच्छा ऑप्शन हैं। गर्मियों के लिए ये सबसे लोकप्रिय डेस्टिनेशन में से एक है। यहां का ठंडा मौसम, बर्फ से ढके पहाड़ और हरी-भरी वादियां पर्यटकों को बेहद आकर्षित करती हैं। आप यहां रोहतांग पास, सोलंग वैली और एडवेंचर एक्टिविटीज का मजा ले सकते हैं।

    गुलमर्ग
    अगर आप कश्मीर की खूबसूरती देखना चाहते हैं, तो गुलमर्ग जरूर जाएं। यहां का ठंडा मौसम और प्राकृतिक सौंदर्य इसे “धरती का स्वर्ग” बनाता है। आप यहां केबल कार राइड और बर्फीले नजारों का आनंद ले सकते हैं।यहां के नजारे ही इतने प्यारे होते हैं कि आप यहां आने के लिए मजबूर हो जाएंगे।

    जुकू वैली
    नागालैंड की जुकू वैली ट्रेक अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है। यहां हरे-भरे मैदान और खूबसूरत फूल देखने को मिलते हैं, जो इसे एक अलग और यादगार ट्रेकिंग डेस्टिनेशन बनाते हैं।

    शिलॉन्ग
    शिलॉन्ग को ‘पूर्व का स्कॉटलैंड’ कहा जाता है और यह भारत के सबसे खूबसूरत हिल स्टेशनों में से एक है। यहां का ठंडा और सुहावना मौसम, हरियाली से भरी पहाड़ियां और झरने पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। गर्मियों में भी यहां का तापमान काफी आरामदायक रहता है, इसलिए यह घूमने के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है।

  • हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ा, तेज गर्मी में सिरदर्द और चक्कर जैसी समस्याएं बढ़ीं

    हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ा, तेज गर्मी में सिरदर्द और चक्कर जैसी समस्याएं बढ़ीं


    नई दिल्ली । प्रदेश में तापमान लगातार बढ़ने के साथ ही लोगों की सेहत पर इसका सीधा असर दिखने लगा है। दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण अस्पतालों और क्लीनिकों में हीट स्ट्रोक, सिरदर्द और चक्कर आने जैसी शिकायतों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि यह स्थिति लापरवाही करने पर गंभीर रूप भी ले सकती है।

    हीट स्ट्रोक क्या है और कैसे होता है
    हीट स्ट्रोक तब होता है जब शरीर का तापमान नियंत्रण से बाहर हो जाता है और शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता। तेज धूप में लंबे समय तक रहने, पर्याप्त पानी न पीने और अत्यधिक शारीरिक श्रम करने से यह स्थिति बनती है। इसमें शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है, जिससे दिमाग और अन्य अंग प्रभावित हो सकते हैं।

    सिरदर्द और चक्कर आने के मुख्य कारण
    गर्मी में शरीर में पानी और नमक की कमी (डिहाइड्रेशन) होने लगती है, जिससे ब्लड प्रेशर असंतुलित हो सकता है। इसी कारण लोगों को सिरदर्द, कमजोरी, थकान और चक्कर आने की शिकायत होती है। कई बार तेज धूप में अचानक बाहर निकलने से भी यह समस्या बढ़ जाती है।

    किन लोगों को ज्यादा खतरा
    बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बाहर काम करने वाले मजदूर इस मौसम में ज्यादा जोखिम में रहते हैं। इसके अलावा जिन लोगों को पहले से हृदय रोग, डायबिटीज या ब्लड प्रेशर की समस्या है, उन्हें भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

    हीट स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण
    विशेषज्ञों के अनुसार हीट स्ट्रोक के शुरुआती संकेतों में तेज सिरदर्द, चक्कर, मतली, त्वचा का लाल होना, अत्यधिक पसीना या अचानक पसीना बंद हो जाना शामिल है। गंभीर स्थिति में मरीज बेहोश भी हो सकता है, जो आपातकालीन स्थिति मानी जाती है।

    गर्मी से बचाव के उपाय
    डॉक्टर सलाह देते हैं कि दिन के सबसे गर्म समय यानी दोपहर 12 से 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें। हल्के और ढीले कपड़े पहनें, सिर को ढककर रखें और पर्याप्त मात्रा में पानी, नींबू पानी या ओआरएस का सेवन करें। तली-भुनी चीजों से भी बचना चाहिए।

    कब लें तुरंत चिकित्सा सहायता
    अगर किसी व्यक्ति को तेज चक्कर, बेहोशी, लगातार उल्टी या शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज न मिलने पर हीट स्ट्रोक जानलेवा भी हो सकता है।

  • गर्मी में डिहाइड्रेशन के मामले बढ़े, शरीर में पानी की कमी से बिगड़ सकती है सेहत

    गर्मी में डिहाइड्रेशन के मामले बढ़े, शरीर में पानी की कमी से बिगड़ सकती है सेहत


    नई दिल्ली । तेज गर्मी और लू के बीच इन दिनों डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। अस्पतालों में रोजाना ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं जिन्हें कमजोरी, चक्कर और थकान जैसी शिकायतें हो रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह समस्या समय रहते ध्यान न देने पर गंभीर रूप ले सकती है।

    डिहाइड्रेशन क्या है और कैसे होता है
    डिहाइड्रेशन तब होता है जब शरीर में पानी की मात्रा जरूरत से कम हो जाती है। गर्मी में अधिक पसीना आने और पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने के कारण शरीर में तरल पदार्थों की कमी हो जाती है। इससे शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो जाती हैं।

    डिहाइड्रेशन के सामान्य लक्षण
    पानी की कमी होने पर शरीर कई संकेत देता है। इनमें अत्यधिक प्यास लगना, मुंह सूखना, सिरदर्द, कमजोरी, चक्कर आना, पेशाब का रंग गहरा होना और थकान शामिल हैं। गंभीर स्थिति में व्यक्ति बेहोशी तक महसूस कर सकता है।

    किन लोगों में ज्यादा खतरा
    विशेषज्ञों के अनुसार छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और खुले में काम करने वाले मजदूर डिहाइड्रेशन के अधिक शिकार होते हैं। इसके अलावा जो लोग कम पानी पीते हैं या अधिक शारीरिक मेहनत करते हैं, उनमें भी इसका खतरा ज्यादा रहता है।

    गर्मी में डिहाइड्रेशन बढ़ने के कारण
    तेज धूप में लंबे समय तक बाहर रहना, पसीने के साथ शरीर से नमक और पानी का अधिक निकलना, और पानी की पर्याप्त मात्रा में पूर्ति न होना इसके मुख्य कारण हैं। इसके अलावा चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक्स का अधिक सेवन भी शरीर को डिहाइड्रेट कर सकता है।

    बचाव के आसान उपाय
    डॉक्टर सलाह देते हैं कि गर्मी में हर कुछ समय पर पानी पीते रहें, भले ही प्यास न लगे। नारियल पानी, नींबू पानी और ओआरएस का सेवन भी फायदेमंद होता है। हल्के और सूती कपड़े पहनें और धूप में बाहर निकलने से बचें।

    कब हो जाए सावधान
    अगर किसी व्यक्ति को लगातार चक्कर, अत्यधिक कमजोरी, उल्टी या बेहोशी महसूस हो तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी होता है।

  • धूल और गर्मी से एलर्जी व खांसी-जुकाम का बढ़ता खतरा, बदलते मौसम में रखें सावधानी

    धूल और गर्मी से एलर्जी व खांसी-जुकाम का बढ़ता खतरा, बदलते मौसम में रखें सावधानी


    नई दिल्ली । तेज गर्मी और उड़ती धूल का मिश्रण इन दिनों लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। शहरों और ग्रामीण इलाकों में बढ़ते तापमान के साथ हवा में मौजूद धूलकण सांस संबंधी समस्याओं को बढ़ा रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार इस मौसम में एलर्जी, खांसी, जुकाम और गले की परेशानी के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं।

    धूल और गर्मी कैसे बनती है बीमारी की वजह
    गर्म मौसम में सड़कें सूख जाती हैं और वाहनों की आवाजाही से धूल लगातार हवा में फैलती रहती है। यह धूल जब सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करती है तो नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित करती है। इससे एलर्जी ट्रिगर होती है और लोगों को छींक, नाक बहना, खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

    किन लोगों को ज्यादा खतरा
    विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों, बुजुर्गों और पहले से अस्थमा या एलर्जी से पीड़ित लोगों पर इसका असर ज्यादा होता है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग भी जल्दी संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे लोगों में हल्की धूल भी गंभीर खांसी-जुकाम का कारण बन सकती है।

    एलर्जी और जुकाम के सामान्य लक्षण
    इस मौसम में सबसे आम लक्षणों में बार-बार छींक आना, नाक बंद या बहना, गले में खराश, आंखों में जलन और लगातार खांसी शामिल हैं। कई बार यह स्थिति बढ़कर सांस लेने में परेशानी और अस्थमा अटैक तक भी पहुंच सकती है।

    बदलते मौसम में क्यों बढ़ती है समस्या
    गर्मी के मौसम में शरीर जल्दी डिहाइड्रेट हो जाता है और नाक-गला भी सूखने लगता है। ऐसे में धूल और बैक्टीरिया आसानी से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। हवा में नमी कम होने के कारण एलर्जी फैलाने वाले कण ज्यादा देर तक वातावरण में बने रहते हैं।

    बचाव के लिए क्या करें
    डॉक्टर सलाह देते हैं कि इस मौसम में बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग जरूर करें। घर के अंदर नियमित सफाई रखें और धूल जमा न होने दें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे। सुबह और शाम के समय ज्यादा धूल भरे इलाकों से बचना चाहिए।

    कब लें डॉक्टर की सलाह
    अगर खांसी-जुकाम 5–7 दिन से ज्यादा चले, सांस लेने में परेशानी हो या बुखार लगातार बना रहे तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज न मिलने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है।

  • बाहर का खाना खाने से फूड पॉइज़निंग का खतरा, लापरवाही पड़ सकती है भारी

    बाहर का खाना खाने से फूड पॉइज़निंग का खतरा, लापरवाही पड़ सकती है भारी


    नई दिल्ली । आज के समय में बाहर का खाना लोगों की लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा बन चुका है। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी हों या छात्र, ज्यादातर लोग स्ट्रीट फूड, ढाबे या रेस्टोरेंट का खाना पसंद करते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यही आदत कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन सकती है। सबसे बड़ा खतरा फूड पॉइज़निंग का होता है, जो दूषित भोजन या गंदे पानी से फैलने वाले बैक्टीरिया के कारण होता है।

    कैसे होता है फूड पॉइज़निंग का खतरा

    फूड पॉइज़निंग तब होती है जब खाना बैक्टीरिया, वायरस या टॉक्सिन से संक्रमित हो जाता है। बाहर के खाने में कई बार साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता। कच्चे या अधपके भोजन, लंबे समय तक खुले में रखे गए पकवान, गंदे तेल का बार-बार उपयोग और दूषित पानी इस समस्या को और बढ़ा देते हैं। स्ट्रीट फूड में हाथों की स्वच्छता की कमी भी संक्रमण फैलने का बड़ा कारण बनती है।

    फूड पॉइज़निंग के शुरुआती लक्षण

    फूड पॉइज़निंग होने पर शरीर तुरंत संकेत देने लगता है। मरीज को पेट दर्द, मरोड़, उल्टी, दस्त और कमजोरी महसूस होती है। कई मामलों में हल्का बुखार और डिहाइड्रेशन भी हो सकता है। गंभीर स्थिति में मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत भी आ सकती है।

    किन लोगों के लिए ज्यादा खतरा

    विशेषज्ञों के अनुसार छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग फूड पॉइज़निंग के अधिक शिकार हो सकते हैं। इन लोगों में संक्रमण तेजी से फैलता है और शरीर पर इसका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है।

    स्ट्रीट फूड और बाहर का खाना कितना सुरक्षित

    स्ट्रीट फूड भले ही स्वाद में लाजवाब हो, लेकिन सुरक्षा के मामले में हमेशा भरोसेमंद नहीं होता। कई जगहों पर साफ पानी, स्वच्छ बर्तन और सही तरीके से खाना स्टोर करने की व्यवस्था नहीं होती। इसी कारण कई बार लोग एक ही समय में बड़ी संख्या में बीमार हो जाते हैं।

    कैसे रखें खुद को सुरक्षित

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाहर खाना खाते समय कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए। हमेशा साफ-सुथरी जगह से ही खाना लें, ताजा और गर्म भोजन का ही सेवन करें, कटे हुए फल या खुले में रखे खाद्य पदार्थों से बचें। खाने से पहले हाथ धोना या सैनिटाइज़र का उपयोग करना भी संक्रमण के खतरे को कम करता है।

    कब लें डॉक्टर की सलाह

    अगर किसी व्यक्ति को लगातार उल्टी, दस्त, तेज पेट दर्द या कमजोरी महसूस हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी होता है, क्योंकि समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।

  • Summer Special Recipe: ठंडक देने वाला खीरे का रायता, घर पर बनाएं स्वादिष्ट और हेल्दी डिश

    Summer Special Recipe: ठंडक देने वाला खीरे का रायता, घर पर बनाएं स्वादिष्ट और हेल्दी डिश



    नई दिल्ली  गर्मी का मौसम आते है शरीर में पानी की कमी होने लगती है इसलिए हमें ज्यादातर पानी वाले फल ही खाने चाहिए, जिससे हाइड्रेटेड रहे। इसके साथ ही आप खीरे का रायता (Cucumber Raita) भी खा सकते हैं ये काफी स्वादिष्ट ऑप्शन है। खीरा प्राकृतिक रूप से ठंडक देने वाला होता है और दही पाचन को बेहतर बनाता है, इसलिए इन दोनों का संयोजन गर्मियों के लिए एक परफेक्ट डिश माना जाता है। लेकिन अब सवाल उठता हैं अगर इसे बनाना नहीं आता तो क्या करें। तब परेशान होने की बात नहीं हैं हम आपके लिए इसकी खास रेसिपी लेकर आए हैं।

    खीरे का रायता बनाने की सामग्री
    2 मध्यम आकार के खीरे
    1 कप ताजा दही
    1/2 छोटा चम्मच भुना जीरा पाउडर
    स्वादानुसार नमक
    1/4 छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर
    थोड़ी सी हरी धनिया पत्ती (बारीक कटी हुई)
    वैकल्पिक: 1 हरी मिर्च (बारीक कटी हुई)

    बनाने की विधि
    सबसे पहले खीरे को अच्छे से धो लें और छील लें। इसके बाद खीरे को कद्दूकस कर लें। यदि खीरे में ज्यादा पानी हो, तो हल्का सा निचोड़ लें ताकि रायता ज्यादा पतला न हो। अब एक बाउल में दही लें और उसे अच्छे से फेंट लें ताकि वह स्मूद हो जाए।

    फेंटे हुए दही में कद्दूकस किया हुआ खीरा डालें और अच्छी तरह मिला लें। इसके बाद इसमें नमक, काली मिर्च और भुना जीरा पाउडर डालकर मिक्स करें। यदि आप थोड़ा तीखा पसंद करते हैं, तो इसमें बारीक कटी हरी मिर्च भी डाल सकते हैं।

    अंत में ऊपर से हरी धनिया डालकर सजाएं। चाहें तो थोड़ा सा भुना जीरा पाउडर ऊपर से छिड़क दें, इससे स्वाद और भी बढ़ जाएगा। अब आपका ठंडा-ठंडा खीरे का रायता तैयार है। इसे आपक रोटी चावल या फिर ऐसे ही खा सकते हैं।

    इसको खाने का फायदा
    खीरा शरीर में पानी की कमी को दूर करता है और दही पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह रायता गर्मी में लू से बचाने में भी मदद करता है और पेट को हल्का रखता है। इस तरह खीरे का रायता न केवल स्वादिष्ट है बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। गर्मियों में इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।

  • Heatwave Alert: बढ़ते तापमान और लू से बढ़ रही परेशानी, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की सावधानी

    Heatwave Alert: बढ़ते तापमान और लू से बढ़ रही परेशानी, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की सावधानी


    नई दिल्ली । इन दिनों लगातार बढ़ती गर्मी और लू (हीटवेव) ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। दोपहर के समय चल रही गर्म हवाएं लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं। मौसम विभाग के अनुसार तापमान में लगातार बढ़ोतरी से आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

    लू क्या है और क्यों खतरनाक होती है
    लू यानी हीटवेव तब होती है जब किसी क्षेत्र में सामान्य से बहुत अधिक तापमान दर्ज किया जाता है और गर्म हवाएं चलती हैं। यह स्थिति शरीर के तापमान को तेजी से बढ़ा देती है, जिससे शरीर का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है। लंबे समय तक लू के संपर्क में रहने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

    शरीर पर लू का असर
    लू का असर सबसे पहले शरीर की ऊर्जा पर पड़ता है। व्यक्ति को कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर और अत्यधिक थकान महसूस होने लगती है। गंभीर मामलों में उल्टी, बेहोशी और हीट स्ट्रोक जैसी स्थिति भी बन सकती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है।

    किन लोगों पर ज्यादा खतरा
    विशेषज्ञों के अनुसार बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बाहर काम करने वाले मजदूर लू के अधिक शिकार होते हैं। इसके अलावा जिन लोगों को पहले से हृदय, किडनी या डायबिटीज जैसी बीमारियां हैं, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

    लू लगने के शुरुआती लक्षण
    लू लगने पर शरीर में तेज सिरदर्द, बेचैनी, तेज प्यास, त्वचा का सूखना, चक्कर आना और तेज धड़कन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कई बार शरीर का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

    बचाव के जरूरी उपाय
    डॉक्टर सलाह देते हैं कि दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें। हल्के और ढीले कपड़े पहनें, सिर को ढककर रखें और पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस और तरल पदार्थ का सेवन करें। धूप में ज्यादा देर तक खड़े रहने से बचना चाहिए।

    कब लें तुरंत डॉक्टर की सलाह
    अगर किसी व्यक्ति को लगातार चक्कर, बेहोशी, अत्यधिक कमजोरी या शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता हुआ महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।

  • अपान वायु मुद्रा से मिलेगा पीरियड्स दर्द में आराम, ऐंठन और थकान होगी कम

    अपान वायु मुद्रा से मिलेगा पीरियड्स दर्द में आराम, ऐंठन और थकान होगी कम


    नई दिल्ली । महिलाओं के लिए मासिक धर्म का समय अक्सर असहजता से भरा होता है। पेट दर्द, ऐंठन, कमर में भारीपन और थकान जैसी समस्याएं कई बार इतनी बढ़ जाती हैं कि रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में हर बार दवा लेना जरूरी या सही नहीं होता। यही वजह है कि आजकल प्राकृतिक तरीकों जैसे योग और हस्त मुद्राओं की ओर रुझान बढ़ रहा है।

    क्या है अपान वायु मुद्रा?

    अपान वायु मुद्रा एक विशेष हस्त मुद्रा है, जिसे योग में शरीर की ऊर्जा संतुलित करने के लिए किया जाता है। यह मुद्रा खासतौर पर पेट के निचले हिस्से में होने वाले दर्द और ऐंठन को कम करने में मददगार मानी जाती है।

    कैसे मिलती है पीरियड्स में राहत?

    पीरियड्स के दौरान जब इस मुद्रा का अभ्यास किया जाता है, तो शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और मांसपेशियों का तनाव धीरे-धीरे कम होने लगता है। इससे पेट दर्द, ऐंठन और खिंचाव में राहत मिल सकती है। साथ ही यह शरीर को अंदर से शांत करने का काम करती है, जिससे थकान भी कम महसूस होती है।

    करने का सही तरीका

    इस मुद्रा को करना बेहद आसान है-

    आराम से सुखासन में बैठ जाएं
    हाथों को घुटनों पर रखें, हथेलियां ऊपर की ओर रहें
    तर्जनी उंगली को मोड़कर अंगूठे की जड़ से लगाएं
    मध्यमा और अनामिका उंगली को मोड़कर अंगूठे से स्पर्श कराएं
    छोटी उंगली सीधी रखें
    आंखें बंद कर शांत मन से कुछ मिनट तक अभ्यास करें
    मानसिक तनाव में भी फायदेमंद

    पीरियड्स के दौरान कई महिलाओं को चिड़चिड़ापन, बेचैनी और तनाव महसूस होता है। यह मुद्रा मन को शांत करने में मदद करती है, जिससे मूड बेहतर हो सकता है और मानसिक संतुलन बना रहता है।

    पाचन और ऊर्जा पर भी असर

    अपान वायु मुद्रा पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे गैस, अपच और भारीपन में भी राहत दे सकती है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर में ऊर्जा का स्तर संतुलित रहता है और दिनभर एक्टिव महसूस होता है।

    ध्यान रखने वाली जरूरी बातें
    खाना खाने के तुरंत बाद इस मुद्रा का अभ्यास न करें
    शुरुआत में कम समय के लिए करें, धीरे-धीरे अवधि बढ़ाएं
    अगर कोई गंभीर समस्या या दर्द हो तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें

  • काली कोहनी से हैं परेशान? इन घरेलू उपायों से पाएं साफ और चमकदार त्वचा

    काली कोहनी से हैं परेशान? इन घरेलू उपायों से पाएं साफ और चमकदार त्वचा


    नई दिल्ली । अक्सर देखने को मिलता है लोग अपने चेहरे का काफी ध्यान रख लेते हैं। लेकिन कोहनी और घुटनों को नजर अंदाज कर देते हैं। यही वजह है कि समय के साथ इन हिस्सों की स्किन काली और रूखी दिखने लगती है। और धीरे-धीरे हम इतने काफी परेशान हो जाते हैं इसको साफ करने के लिए तरह-तरह के प्रोडक्ट उसे करने की सोचते हैं लेकिन आप अपने घर में ही इसे आसानी से साफ कर सकते हैं तो चलिए इसके बारे में आपको सारी जानकारी बताते हैं।

    घर पर ही करें साफ
    आपको बता दें कि ये समस्या बेहद आम है यह अक्सर हर किसी को हो जाता है।धूप, गंदगी, फ्रिक्शन और मॉइस्चर की कमी के कारण होती है। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान घरेलू उपायों की मदद से इस डार्कनेस को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    नींबू और शहद
    चेहरे के साथ साथ स्क्रीन के लिए भी नींबू और शहद काफी काटकर साबित होते हैं। नींबू में मौजूद नेचुरल ब्लीचिंग गुण स्किन के रंग को हल्का करने में मदद करते हैं। जबकि शहद स्किन को गहराई से मॉइस्चराइज कर उसे सॉफ्ट बनाता है। इसके लिए एक चम्मच नींबू के रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर कोहनी और घुटनों पर लगाएं और करीब 20 मिनट बाद धो लें। कुछ दिनों में ही इसका इस्तेमाल करने से साफ असर नजर आने लगता है।

    एलोवेरा जेल
    एलोवेरा जेल काफी अच्छा होता है आपको इस गर्मी में जरूर लगाना चाहिए अपने आपके चेहरे को ठंडक भी पहुंचना है साथ ही आपकी स्किन ब्राइट बनता है। ये स्किन को ठंडक देने के साथ-साथ डार्कनेस कम करने में भी मदद करता है। रोज रात को सोने से पहले ताजा एलोवेरा जेल को कोहनी और घुटनों पर लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें। कुछ ही दिनों में स्किन मुलायम और साफ नजर आने लगेगी।

    स्क्रबिंग
    डेड स्किन सेल्स जमा होने से भी कोहनी और घुटने काले पड़ने लगते हैं। इसलिए हफ्ते में कम से कम दो बार स्क्रब करना जरूरी है। इसके लिए चीनी और तेल को मिलाकर नेचुरल स्क्रब तैयार करें और हल्के हाथों से रगड़ें। इससे भी जल्दी ठीक हो जाएगा और आप की समस्या दूर हो जाएगी।