Category: Lifestyle

  • माइग्रेन के दर्द में क्यों फायदेमंद मानी जाती है अजवाइन? तनाव, गैस और सूजन के असर को समझिए, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

    माइग्रेन के दर्द में क्यों फायदेमंद मानी जाती है अजवाइन? तनाव, गैस और सूजन के असर को समझिए, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

    नई दिल्ली । माइग्रेन सामान्य सिरदर्द से अलग और अधिक जटिल न्यूरोलॉजिकल समस्या मानी जाती है। इस स्थिति में सिर के एक हिस्से में तेज धड़कन जैसा दर्द महसूस हो सकता है, जो कई घंटों से लेकर तीन दिनों तक भी बना रह सकता है। कई लोगों को इसके साथ मतली, उल्टी, तेज रोशनी या तेज आवाज से परेशानी जैसी समस्याएं भी होती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि माइग्रेन के प्रभावी प्रबंधन के लिए केवल दवाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि जीवनशैली, खानपान और संभावित ट्रिगर को पहचानना भी जरूरी है।

    माइग्रेन के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। मानसिक तनाव, हार्मोनल बदलाव, पर्याप्त नींद न लेना, लंबे समय तक भूखे रहना, शरीर में पानी की कमी और कुछ विशेष खाद्य पदार्थ इसके प्रमुख ट्रिगर माने जाते हैं। इसके अलावा पाचन संबंधी समस्याएं, जैसे गैस, अपच और पेट फूलना भी कुछ लोगों में माइग्रेन की समस्या को बढ़ा सकती हैं। यही कारण है कि डॉक्टर माइग्रेन के मरीजों को संतुलित दिनचर्या अपनाने और ट्रिगर करने वाले कारणों से बचने की सलाह देते हैं।

    घरेलू उपायों की बात करें तो अजवाइन को लंबे समय से पाचन सुधारने वाले मसाले के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसमें थाइमोल नामक सक्रिय तत्व पाया जाता है, जिसे सूजन कम करने और शरीर को संक्रमण से बचाने वाले गुणों के लिए जाना जाता है। कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में यह भी संकेत मिले हैं कि थाइमोल शरीर में सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। चूंकि कई मामलों में सूजन माइग्रेन के दर्द की तीव्रता बढ़ाने में भूमिका निभा सकती है, इसलिए अजवाइन कुछ लोगों में राहत देने में सहायक हो सकती है।

    आयुर्वेद में भी अजवाइन को पाचन तंत्र के लिए लाभकारी माना गया है। विशेषज्ञ बताते हैं कि पाचन तंत्र और मस्तिष्क के बीच गहरा संबंध होता है, जिसे गट-ब्रेन कनेक्शन कहा जाता है। यदि किसी व्यक्ति में गैस, अपच या पेट की अन्य समस्याएं माइग्रेन को ट्रिगर करती हैं, तो पाचन में सुधार से सिरदर्द की आवृत्ति या तीव्रता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि इसका असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता क्योंकि माइग्रेन के कारण अलग-अलग हो सकते हैं।

    अजवाइन में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं, जो शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद कर सकते हैं। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कई स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए संतुलित मात्रा में अजवाइन का सेवन शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है, हालांकि इसे किसी बीमारी के निश्चित उपचार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    कई लोग माइग्रेन के दौरान गर्म अजवाइन की पोटली या उसकी भाप का भी उपयोग करते हैं। माना जाता है कि इसकी तेज सुगंध कुछ लोगों में सिर के भारीपन और बेचैनी को कम करने में मदद कर सकती है। वहीं, अजवाइन का पानी भी पाचन बेहतर बनाने के लिए घरेलू उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यदि माइग्रेन का संबंध पाचन संबंधी गड़बड़ियों से है, तो इससे कुछ राहत मिल सकती है।

    विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि माइग्रेन एक चिकित्सकीय समस्या है और बार-बार होने वाले या गंभीर सिरदर्द की स्थिति में डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है। अजवाइन जैसे घरेलू उपाय केवल सहायक भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन इन्हें दवा या चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। सही निदान, संतुलित जीवनशैली, पर्याप्त पानी, नियमित नींद और चिकित्सकीय सलाह का पालन ही माइग्रेन को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।

  • बारिश में बाल झड़ना, डैंड्रफ और फ्रिज से हैं परेशान? मॉनसून में अपनाएं ये 8 आसान आदतें, बाल रहेंगे मजबूत और हेल्दी

    बारिश में बाल झड़ना, डैंड्रफ और फ्रिज से हैं परेशान? मॉनसून में अपनाएं ये 8 आसान आदतें, बाल रहेंगे मजबूत और हेल्दी

    नई दिल्ली ।बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं बालों की सेहत के लिए कई नई चुनौतियां भी पैदा कर देता है। वातावरण में बढ़ी नमी, प्रदूषण और बार-बार बालों के भीगने की वजह से बाल कमजोर, बेजान और रूखे दिखाई देने लगते हैं। इस दौरान हेयर फॉल, डैंड्रफ, फ्रिज और स्कैल्प से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। ऐसे में केवल महंगे हेयर प्रोडक्ट्स पर निर्भर रहने के बजाय सही हेयर केयर रूटीन अपनाना अधिक प्रभावी माना जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार मॉनसून में सबसे पहले बालों को बारिश के पानी से बचाने की कोशिश करनी चाहिए। बारिश के पानी में धूल, प्रदूषण और अन्य अशुद्धियां हो सकती हैं, जो स्कैल्प और बालों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। यदि बाल भीग जाएं तो घर पहुंचकर माइल्ड और सल्फेट-फ्री शैंपू से उन्हें साफ करना बेहतर माना जाता है।

    बारिश के मौसम में स्कैल्प को लंबे समय तक गीला नहीं रहने देना चाहिए। नमी के कारण फंगल संक्रमण और डैंड्रफ का खतरा बढ़ सकता है। बाल धोने या भीगने के बाद उन्हें माइक्रोफाइबर तौलिये से हल्के हाथों से सुखाना या हेयर ड्रायर के कूल मोड का सीमित उपयोग करना फायदेमंद हो सकता है। गीले बालों को लंबे समय तक बांधकर रखना भी नुकसानदायक माना जाता है।

    हवा में अधिक नमी होने के कारण इस मौसम में बाल आसानी से फ्रिजी हो जाते हैं। ऐसे में बाल धोने के बाद हल्का एंटी-फ्रिज हेयर सीरम लगाने से बाल स्मूद रहते हैं और उलझने की समस्या कम हो सकती है। साथ ही गीले बालों में बहुत टाइट पोनीटेल या जूड़ा बनाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे बालों की जड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और टूटने की संभावना बढ़ जाती है।

    बालों को सुलझाने के लिए हमेशा चौड़े दांतों वाली कंघी का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। गीले बालों में बारीक कंघी या ब्रश का उपयोग करने से बाल अधिक टूट सकते हैं। इसलिए नीचे से ऊपर की ओर धीरे-धीरे कंघी करने की आदत बालों को सुरक्षित रखने में मदद करती है।

    कई लोग मॉनसून में कंडीशनर लगाना बंद कर देते हैं, जबकि इस मौसम में इसकी जरूरत और बढ़ जाती है। कंडीशनर केवल बालों की लंबाई और सिरों पर लगाना चाहिए, स्कैल्प पर नहीं। इससे बाल मुलायम रहते हैं और उनमें उलझन कम होती है। इसके अलावा लंबे समय तक तेल लगाकर रखने से भी बचना चाहिए। सप्ताह में एक बार हल्के नारियल या आर्गन ऑयल से 15 से 20 मिनट तक मसाज करने के बाद बाल धोना पर्याप्त माना जाता है।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि मॉनसून में स्ट्रेटनर, कर्लर और अत्यधिक गर्म ब्लो ड्रायर जैसी हीट स्टाइलिंग मशीनों का कम से कम उपयोग करें। लगातार गर्मी मिलने से बाल कमजोर और दोमुंहे हो सकते हैं। जहां तक संभव हो, बालों को प्राकृतिक तरीके से सूखने देना बेहतर विकल्प है।

    नियमित सफाई, संतुलित पोषण, पर्याप्त पानी का सेवन और सही हेयर केयर रूटीन अपनाकर बारिश के मौसम में बालों को स्वस्थ, मजबूत और चमकदार बनाए रखा जा सकता है। छोटी-छोटी सावधानियां अपनाने से हेयर फॉल, फ्रिज और डैंड्रफ जैसी सामान्य समस्याओं का जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • हार्ट को रखना है हमेशा हेल्दी? आज ही छोड़ दें ये 5 खराब आदतें, कम होगा दिल की बीमारियों का खतरा

    हार्ट को रखना है हमेशा हेल्दी? आज ही छोड़ दें ये 5 खराब आदतें, कम होगा दिल की बीमारियों का खतरा


    नई दिल्ली।
    स्वस्थ और लंबी जिंदगी के लिए दिल का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। आधुनिक जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के कारण हृदय संबंधी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल उम्र या आनुवंशिक कारण ही नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की कई आदतें भी हार्ट हेल्थ को प्रभावित करती हैं। यदि समय रहते इन आदतों में सुधार कर लिया जाए तो हृदय रोगों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    लंबे समय तक लगातार बैठे रहना दिल के लिए नुकसानदायक माना जाता है। ऑफिस में घंटों कुर्सी पर काम करना या घर पर लंबे समय तक मोबाइल और टीवी के सामने बैठे रहना ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित करता है। इससे वजन बढ़ने, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोग का जोखिम बढ़ सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर 45 से 60 मिनट के बाद कुछ मिनट टहलें या हल्की स्ट्रेचिंग जरूर करें।

    जरूरत से ज्यादा नमक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन भी हार्ट हेल्थ के लिए हानिकारक हो सकता है। पैकेज्ड स्नैक्स, चिप्स, इंस्टेंट फूड और प्रोसेस्ड मीट में सोडियम की मात्रा अधिक होती है, जिससे रक्तचाप बढ़ सकता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसके बजाय ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और घर का संतुलित भोजन अधिक लाभकारी माना जाता है।

    पर्याप्त नींद न लेना भी दिल की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है। लगातार कम नींद लेने से तनाव हार्मोन बढ़ सकते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर और शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है। अधिकांश वयस्कों के लिए प्रतिदिन 7 से 9 घंटे की अच्छी गुणवत्ता वाली नींद जरूरी मानी जाती है।

    लगातार तनाव में रहना भी हृदय रोगों का बड़ा कारण बन सकता है। काम का दबाव, आर्थिक समस्याएं या निजी जीवन की परेशानियां लंबे समय तक बनी रहने पर रक्तचाप बढ़ सकता है। तनाव के कारण कई लोग धूम्रपान, अधिक भोजन या अन्य अस्वस्थ आदतों की ओर भी आकर्षित हो जाते हैं। नियमित योग, ध्यान, गहरी सांस लेने के अभ्यास और व्यायाम तनाव कम करने में मदद कर सकते हैं।

    धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन भी हृदय के लिए बेहद नुकसानदायक है। धूम्रपान रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकता है। वहीं अधिक मात्रा में शराब का सेवन ब्लड प्रेशर बढ़ाने के साथ हृदय की कार्यक्षमता पर भी असर डाल सकता है। इन आदतों से दूरी बनाना दिल की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, रोज कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करना, संतुलित आहार लेना, वजन और ब्लड प्रेशर की नियमित जांच कराना, तनाव को नियंत्रित रखना और किसी भी असामान्य लक्षण जैसे सीने में दर्द, सांस फूलना या अत्यधिक थकान महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना हृदय को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मददगार साबित हो सकता है।

  • बारिश में नरम हो जाते हैं होममेड स्नैक्स? अपनाएं ये 5 आसान स्टोरेज टिप्स, लंबे समय तक रहेंगे कुरकुरे

    बारिश में नरम हो जाते हैं होममेड स्नैक्स? अपनाएं ये 5 आसान स्टोरेज टिप्स, लंबे समय तक रहेंगे कुरकुरे

    नई दिल्ली। बारिश का मौसम अपने साथ ठंडी हवाएं और स्वादिष्ट स्नैक्स का आनंद लेकर आता है। इस दौरान घरों में मठरी, नमकपारे, चकली, सेव, रिबन पकोड़ा और कई तरह के पारंपरिक स्नैक्स बड़ी मात्रा में बनाकर स्टोर किए जाते हैं। हालांकि, मानसून में बढ़ी हुई नमी के कारण ये स्नैक्स जल्दी अपनी कुरकुराहट खो देते हैं और कुछ ही दिनों में नरम पड़ने लगते हैं। यदि सही तरीके से इन्हें स्टोर किया जाए तो लंबे समय तक इनका स्वाद और ताजगी बरकरार रखी जा सकती है।

    स्नैक्स को स्टोर करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि वे पूरी तरह ठंडे हो चुके हों। कई बार लोग जल्दबाजी में गर्म या हल्के गुनगुने स्नैक्स को डिब्बे में बंद कर देते हैं, जिससे अंदर भाप बनती है और नमी बढ़ने के कारण स्नैक्स जल्दी नरम हो जाते हैं। इसलिए किसी भी तले हुए स्नैक को पूरी तरह ठंडा होने के बाद ही कंटेनर में रखें।

    स्टोरेज के लिए हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले एयरटाइट कंटेनर का इस्तेमाल करना चाहिए। मानसून के दौरान हवा में मौजूद नमी आसानी से खुले डिब्बों या ढीले ढक्कन वाले कंटेनरों में पहुंच जाती है। एयरटाइट कंटेनर स्नैक्स को बाहरी नमी से बचाकर लंबे समय तक कुरकुरा बनाए रखने में मदद करते हैं।

    यदि स्नैक्स को लंबे समय तक सुरक्षित रखना हो तो फूड-ग्रेड मॉइश्चर एब्जॉर्बर या सिलिका जेल पैक का उपयोग किया जा सकता है। यह अतिरिक्त नमी को सोखने में मदद करता है और स्नैक्स की गुणवत्ता बनाए रखता है। हालांकि, इस बात का ध्यान रखें कि सिलिका पैक सीधे खाद्य पदार्थ के संपर्क में न आए और केवल फूड-ग्रेड उत्पादों का ही उपयोग किया जाए।

    बार-बार कंटेनर खोलने से भी स्नैक्स की गुणवत्ता प्रभावित होती है। हर बार डिब्बा खोलने पर बाहर की नम हवा अंदर प्रवेश करती है, जिससे स्नैक्स जल्दी नरम होने लगते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि स्नैक्स को छोटे-छोटे एयरटाइट कंटेनरों में अलग-अलग स्टोर करें, ताकि एक बार में केवल जरूरत के अनुसार ही डिब्बा खोला जाए।

    स्नैक्स को हमेशा ठंडी, सूखी और साफ जगह पर रखना चाहिए। गैस स्टोव, सिंक या ऐसी जगह जहां नमी अधिक रहती हो, वहां कंटेनर रखने से बचें। यदि किचन में अधिक सीलन रहती है तो स्नैक्स को पेंट्री या बंद अलमारी में रखना अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है।

    यदि किसी कारण से मठरी, चकली या नमकपारे हल्के नरम हो जाएं, तो उन्हें कुछ मिनट के लिए ओवन या एयर फ्रायर में कम तापमान पर हल्का गर्म किया जा सकता है। इसके बाद ठंडा होने पर उनकी कुरकुराहट काफी हद तक वापस आ जाती है। हालांकि, अधिक देर तक गर्म करने से स्नैक्स जल भी सकते हैं, इसलिए तापमान और समय का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

  • Health Tips: गर्मी में डाइट में शामिल करें ये 5 फल और प्राकृतिक ड्रिंक्स, शरीर रहेगा ठंडा और हाइड्रेटेड

    Health Tips: गर्मी में डाइट में शामिल करें ये 5 फल और प्राकृतिक ड्रिंक्स, शरीर रहेगा ठंडा और हाइड्रेटेड


    नई दिल्ली । गर्मी का मौसम अपने साथ तेज धूप, पसीना और शरीर में पानी की कमी जैसी कई परेशानियां लेकर आता है। ऐसे समय में सिर्फ ज्यादा पानी पीना ही काफी नहीं होता, बल्कि खानपान में भी ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करना जरूरी होता है जो शरीर को ठंडक दें और जरूरी पोषक तत्व भी पहुंचाएं। मौसमी फल और प्राकृतिक पेय पदार्थ शरीर में पानी की कमी को दूर करने के साथ-साथ ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करते हैं। अगर आप भी गर्मी में खुद को फिट और तरोताजा रखना चाहते हैं तो अपनी डाइट में कुछ खास चीजों को जरूर शामिल करें।

    तरबूज बनाए शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड
    गर्मी के मौसम में तरबूज सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले फलों में से एक है। इसमें लगभग 90 प्रतिशत से अधिक पानी होता है, जो शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेट रखने में मदद करता है। इसके अलावा तरबूज में विटामिन A, विटामिन C और लाइकोपीन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो त्वचा और दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं। दोपहर या शाम के समय ताजा तरबूज खाना शरीर को ठंडक देने का आसान और स्वादिष्ट तरीका है।

    खरबूजा देगा पोषण और ताजगी
    खरबूजा भी गर्मियों का एक बेहतरीन फल है। इसमें पानी के साथ फाइबर, पोटैशियम और कई जरूरी विटामिन मौजूद होते हैं। इसे खाने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बेहतर बना रहता है और पाचन भी ठीक रहता है। अगर आपको गर्मी में थकान या कमजोरी महसूस होती है तो नाश्ते या शाम के स्नैक में खरबूजा शामिल करना अच्छा विकल्प हो सकता है।

    खीरा रखें रोज की डाइट का हिस्सा
    खीरा गर्मी के मौसम में सबसे आसान और हेल्दी विकल्पों में से एक है। इसमें भरपूर मात्रा में पानी और फाइबर होता है, जिससे शरीर हाइड्रेट रहता है और पेट भी हल्का महसूस करता है। सलाद के रूप में या हल्के मसालों के साथ खीरा खाने से पाचन बेहतर रहता है और गर्मी की वजह से होने वाली बेचैनी भी कम महसूस होती है। नियमित रूप से खीरा खाने से त्वचा में भी प्राकृतिक निखार बना रहता है।

    आम का स्वाद लें, लेकिन सीमित मात्रा में
    गर्मी का मौसम आम के बिना अधूरा माना जाता है। आम में विटामिन A, विटामिन C और कई जरूरी एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। हालांकि इसमें प्राकृतिक शर्करा की मात्रा भी अधिक होती है, इसलिए इसका सेवन संतुलित मात्रा में करना बेहतर रहता है। दिन में एक मध्यम आकार का आम या सीमित मात्रा में आम खाना पर्याप्त माना जाता है। खासतौर पर मधुमेह या वजन नियंत्रित रखने वाले लोगों को डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार ही आम का सेवन करना चाहिए।

    नारियल पानी से मिलेगी प्राकृतिक ऊर्जा
    गर्मी में शरीर से पसीने के साथ कई जरूरी मिनरल्स भी बाहर निकल जाते हैं। ऐसे में नारियल पानी एक प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक की तरह काम करता है। इसमें पोटैशियम, मैग्नीशियम और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं, जो शरीर में पानी और मिनरल्स का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। तेज धूप से लौटने के बाद या सुबह के समय नारियल पानी पीना शरीर को ताजगी और ऊर्जा देने का आसान तरीका है।

    गर्मी में रखें खानपान का खास ध्यान
    गर्मी के मौसम में सही खानपान अपनाने से कई मौसमी समस्याओं से बचा जा सकता है। अपनी रोज की डाइट में तरबूज, खरबूजा, खीरा, सीमित मात्रा में आम और नारियल पानी शामिल करके आप शरीर को हाइड्रेटेड, ऊर्जावान और स्वस्थ रख सकते हैं। इसके साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, बहुत ज्यादा तली-भुनी चीजों से बचें और ताजे मौसमी फलों को प्राथमिकता दें। छोटी-छोटी अच्छी आदतें गर्मियों को आरामदायक और सेहतमंद बना सकती हैं।

  • दाग धब्बों से लेकर ग्लोइंग स्किन तक रोज़मेरी बन सकती है आपकी ब्यूटी रूटीन की सबसे खास साथी

    दाग धब्बों से लेकर ग्लोइंग स्किन तक रोज़मेरी बन सकती है आपकी ब्यूटी रूटीन की सबसे खास साथी


    नई दिल्ली । स्वस्थ और चमकदार त्वचा पाने की चाहत हर किसी की होती है। इसके लिए लोग तरह तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट का इस्तेमाल करते हैं लेकिन कई बार प्राकृतिक चीजें भी त्वचा की देखभाल में प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं। ऐसी ही एक औषधीय जड़ी बूटी है रोज़मेरी जिसे लंबे समय से बालों और त्वचा की देखभाल में उपयोग किया जाता रहा है। इसमें पाए जाने वाले प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुण त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मददगार माने जाते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार रोज़मेरी में ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जो त्वचा को बाहरी प्रदूषण और फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में सहायता कर सकते हैं। फ्री रेडिकल्स त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर समय से पहले झुर्रियां और बेजानपन पैदा कर सकते हैं। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर रोज़मेरी त्वचा को लंबे समय तक तरोताजा बनाए रखने में सहायक मानी जाती है।

    जिन लोगों की त्वचा तैलीय होती है उनके लिए भी रोज़मेरी लाभदायक मानी जाती है। यह त्वचा पर बनने वाले अतिरिक्त तेल को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है जिससे रोमछिद्रों के बंद होने की संभावना कम होती है। इसके कारण मुंहासों और ब्लैकहेड्स की समस्या में भी राहत मिल सकती है। हालांकि किसी भी नए उत्पाद या घरेलू नुस्खे का उपयोग करने से पहले त्वचा के एक छोटे हिस्से पर परीक्षण करना बेहतर माना जाता है।

    रोज़मेरी में मौजूद प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुण त्वचा को साफ रखने में भी मदद कर सकते हैं। यही वजह है कि कई स्किन केयर प्रोडक्ट में रोज़मेरी एक्सट्रैक्ट का इस्तेमाल किया जाता है। नियमित और संतुलित उपयोग से त्वचा अधिक ताजगी भरी और साफ नजर आ सकती है। हालांकि गंभीर त्वचा रोग या संक्रमण की स्थिति में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

    रोज़मेरी का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है। रोज़मेरी का पानी फेस मिस्ट के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा एलोवेरा जेल में कुछ बूंदें रोज़मेरी ऑयल की मिलाकर लगाने से त्वचा को नमी और ताजगी मिल सकती है। ध्यान रहे कि एसेंशियल ऑयल को कभी भी सीधे त्वचा पर नहीं लगाना चाहिए। इसे हमेशा किसी कैरियर ऑयल या एलोवेरा जेल के साथ मिलाकर ही इस्तेमाल करना चाहिए।

    स्वस्थ त्वचा केवल बाहरी देखभाल से नहीं बल्कि संतुलित आहार पर्याप्त पानी अच्छी नींद और तनाव मुक्त जीवनशैली से भी जुड़ी होती है। यदि रोज़मेरी के साथ पौष्टिक भोजन नियमित व्यायाम और सही स्किन केयर रूटीन अपनाया जाए तो त्वचा की प्राकृतिक चमक लंबे समय तक बरकरार रह सकती है। प्राकृतिक उपाय धीरे धीरे असर दिखाते हैं इसलिए धैर्य और नियमितता बनाए रखना भी जरूरी है।

    रोज़मेरी को अपनी स्किन केयर रूटीन का हिस्सा बनाने से पहले यदि आपकी त्वचा अत्यधिक संवेदनशील है या किसी प्रकार की एलर्जी की समस्या रहती है तो विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा। सही तरीके से और सीमित मात्रा में इस्तेमाल किया गया रोज़मेरी त्वचा की देखभाल के लिए एक उपयोगी प्राकृतिक विकल्प साबित हो सकता है।

  • बरसात में जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी, इन आसान उपायों से रखें सेहत का पूरा ख्याल और रहें बीमारियों से दूर

    बरसात में जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी, इन आसान उपायों से रखें सेहत का पूरा ख्याल और रहें बीमारियों से दूर


    नई दिल्ली । बरसात का मौसम गर्मी से राहत लेकर आता है लेकिन यही मौसम कई तरह की बीमारियों का कारण भी बन सकता है। वातावरण में बढ़ी नमी बैक्टीरिया वायरस और फंगस को तेजी से पनपने का मौका देती है जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यदि खानपान और साफ सफाई का ध्यान न रखा जाए तो वायरल बुखार डेंगू मलेरिया टाइफाइड फूड पॉइजनिंग और पेट संबंधी समस्याएं आसानी से घेर सकती हैं। इसलिए मानसून का आनंद लेने के साथ अपनी सेहत की सुरक्षा करना भी बेहद जरूरी है।

    बारिश के मौसम में सबसे पहले स्वच्छ भोजन और शुद्ध पानी का सेवन करना चाहिए। बाहर खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से जितना हो सके बचें क्योंकि इनमें संक्रमण होने की संभावना अधिक रहती है। हमेशा ताजा और गर्म भोजन ही खाएं। लंबे समय तक रखा हुआ खाना दोबारा खाने से बचें क्योंकि नमी के कारण उसमें बैक्टीरिया तेजी से विकसित हो सकते हैं। पीने के लिए हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही इस्तेमाल करें ताकि पानी से फैलने वाली बीमारियों से बचा जा सके।

    इस मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखना भी बेहद आवश्यक है। रोजाना मौसमी फल हरी सब्जियां दालें दूध दही और प्रोटीन युक्त भोजन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। विटामिन सी से भरपूर फल जैसे संतरा आंवला नींबू और अमरूद इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें ताकि शरीर हाइड्रेट रहे और विषैले तत्व बाहर निकल सकें।

    बरसात के दौरान मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर गमले टायर और पानी रखने वाले बर्तनों की नियमित सफाई करें। सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें और जरूरत पड़ने पर मच्छर भगाने वाले उपाय अपनाएं। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना भी सुरक्षित रहता है।

    बरसात में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में नहीं रहना चाहिए। भीगने पर तुरंत सूखे कपड़े पहनें और शरीर को अच्छी तरह पोंछ लें। गीले जूते और मोजे पहनने से फंगल संक्रमण हो सकता है इसलिए पैरों की सफाई और सूखापन बनाए रखना जरूरी है। यदि त्वचा पर खुजली या लाल चकत्ते दिखाई दें तो डॉक्टर की सलाह लें।

    हाथों की स्वच्छता भी संक्रमण से बचाव का सबसे आसान तरीका है। खाना खाने से पहले और बाहर से आने के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोने की आदत डालें। बच्चों को भी यही आदत सिखाएं क्योंकि वे संक्रमण की चपेट में जल्दी आ सकते हैं।

    यदि लगातार बुखार तेज सिरदर्द शरीर में दर्द उल्टी दस्त या कमजोरी जैसी समस्या महसूस हो तो घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। समय पर जांच और इलाज गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करता है।

    बरसात का मौसम प्रकृति की खूबसूरती और ठंडक का एहसास कराता है लेकिन थोड़ी सी सावधानी आपकी सेहत को सुरक्षित रख सकती है। संतुलित आहार स्वच्छता पर्याप्त आराम और नियमित व्यायाम अपनाकर आप पूरे मानसून स्वस्थ और ऊर्जावान रह सकते हैं।

  • प्रेग्नेंसी में क्यों बढ़ जाता है चेहरे का ग्लो जानिए हार्मोन से लेकर ब्लड फ्लो तक की पूरी वैज्ञानिक वजह

    प्रेग्नेंसी में क्यों बढ़ जाता है चेहरे का ग्लो जानिए हार्मोन से लेकर ब्लड फ्लो तक की पूरी वैज्ञानिक वजह


    नई दिल्ली । गर्भावस्था किसी भी महिला के जीवन का बेहद खास दौर होता है। इन नौ महीनों के दौरान शरीर के भीतर कई ऐसे बदलाव होते हैं जिनका असर केवल मां और शिशु के स्वास्थ्य पर ही नहीं बल्कि त्वचा और चेहरे की रंगत पर भी साफ दिखाई देता है। अक्सर लोग कहते हैं कि गर्भावस्था में महिला के चेहरे पर अलग ही निखार और चमक आ जाती है जिसे सामान्य भाषा में प्रेग्नेंसी ग्लो कहा जाता है। हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर महिला में यह बदलाव एक जैसा दिखाई दे क्योंकि हर शरीर की बनावट और हार्मोनल प्रतिक्रिया अलग होती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का स्तर तेजी से बढ़ता है। इन हार्मोन का सीधा असर त्वचा पर पड़ता है। त्वचा तक रक्त संचार बेहतर होने लगता है जिससे चेहरे की कोशिकाओं को अधिक ऑक्सीजन और पोषण मिलता है। यही वजह है कि कई महिलाओं का चेहरा पहले की तुलना में अधिक ताजा साफ और चमकदार दिखाई देता है। गर्भावस्था के चौथे महीने के बाद यह बदलाव अधिक स्पष्ट रूप से नजर आने लगता है क्योंकि शुरुआती महीनों में उल्टी थकान और कमजोरी अधिक रहती है।

    प्रेग्नेंसी ग्लो की एक बड़ी वजह शरीर में बढ़ने वाली रक्त की मात्रा भी होती है। डॉक्टरों के अनुसार गर्भ में पल रहे शिशु की जरूरतों को पूरा करने के लिए महिला के शरीर में रक्त की मात्रा सामान्य से काफी अधिक हो जाती है। इससे चेहरे की महीन रक्त वाहिकाओं तक भी अधिक रक्त पहुंचता है जिससे गालों पर हल्की गुलाबी आभा और प्राकृतिक चमक दिखाई देती है। यही कारण है कि बिना किसी मेकअप के भी कई महिलाओं का चेहरा दमकता हुआ नजर आता है।

    गर्भावस्था के दौरान त्वचा में प्राकृतिक तेल का उत्पादन भी बढ़ जाता है। इससे त्वचा मुलायम और चमकदार दिख सकती है। हालांकि जिन महिलाओं की त्वचा पहले से तैलीय होती है उन्हें इस दौरान मुंहासों या पिंपल्स की समस्या भी हो सकती है। इसलिए यदि किसी गर्भवती महिला को चेहरे पर दाने निकल आएं तो इसे असामान्य नहीं माना जाता क्योंकि यह भी हार्मोनल बदलाव का सामान्य प्रभाव हो सकता है।

    जैसे जैसे गर्भ में शिशु का विकास होता है वैसे वैसे महिला के शरीर में गर्माहट और रक्त प्रवाह भी बढ़ता है। कई महिलाओं को इस दौरान सामान्य से अधिक गर्मी महसूस होती है। इसका असर चेहरे पर हल्की लालिमा और प्राकृतिक चमक के रूप में दिखाई देता है। यही बदलाव प्रेग्नेंसी ग्लो को और अधिक स्पष्ट बनाता है।

    इस दौरान सही खानपान भी त्वचा की खूबसूरती में अहम भूमिका निभाता है। यदि गर्भवती महिला अपने भोजन में ताजे फल हरी सब्जियां दूध दही दाल अंडा और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करती है तथा पर्याप्त मात्रा में पानी पीती है तो त्वचा को आवश्यक विटामिन और पोषण मिलता है। इससे त्वचा स्वस्थ बनी रहती है और प्राकृतिक निखार बढ़ सकता है।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि हर महिला में प्रेग्नेंसी ग्लो दिखाई दे यह जरूरी नहीं है। किसी को चमक मिलती है तो किसी को पिग्मेंटेशन मुंहासे या त्वचा संबंधी दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए गर्भावस्था के दौरान त्वचा में होने वाले बदलावों को सामान्य रूप से स्वीकार करना चाहिए और किसी भी गंभीर समस्या की स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना सबसे बेहतर विकल्प होता है।

  • घर पर बनाएं होटल जैसे खिले-खिले चावल, इन आसान किचन टिप्स से हर दाना रहेगा अलग और स्वाद भी होगा बेहतरीन

    घर पर बनाएं होटल जैसे खिले-खिले चावल, इन आसान किचन टिप्स से हर दाना रहेगा अलग और स्वाद भी होगा बेहतरीन

    नई दिल्ली । भारतीय भोजन में चावल का महत्वपूर्ण स्थान है और लगभग हर घर में इसे नियमित रूप से बनाया जाता है। हालांकि कई बार चावल पकाते समय वे अधिक नरम, चिपचिपे या आपस में चिपक जाते हैं, जिससे उनका स्वाद और प्रस्तुति दोनों प्रभावित होती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि होटल या रेस्तरां जैसे खिले-खिले चावल बनाने का रहस्य केवल अच्छी गुणवत्ता वाले चावल में नहीं, बल्कि उन्हें तैयार करने और पकाने की सही तकनीक में छिपा होता है।

    चावल बनाने से पहले उन्हें अच्छी तरह धोना सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। दो से चार बार पानी से धोने पर अतिरिक्त स्टार्च निकल जाता है, जिससे पकने के बाद दाने आपस में कम चिपकते हैं। इसके बाद चावल को लगभग 20 से 30 मिनट तक पानी में भिगोकर रखने से दाने पर्याप्त नमी सोख लेते हैं और पकने के दौरान समान रूप से फूलते हैं। यही कारण है कि पेशेवर रसोई में भी यह तरीका व्यापक रूप से अपनाया जाता है।

    खिले हुए चावल बनाने में पानी की सही मात्रा का विशेष महत्व होता है। प्रत्येक प्रकार के चावल के लिए पानी का अनुपात अलग हो सकता है, लेकिन सामान्य रूप से बासमती चावल के लिए एक कप चावल के साथ लगभग डेढ़ से दो कप पानी उपयुक्त माना जाता है। आवश्यकता से अधिक पानी डालने पर चावल जरूरत से ज्यादा नरम हो सकते हैं और उनकी बनावट प्रभावित हो सकती है। इसलिए चावल के प्रकार के अनुसार पानी की मात्रा तय करना बेहतर परिणाम देता है।

    पकाते समय थोड़ा सा घी या कुछ बूंदें तेल डालने से भी चावल के दाने अलग-अलग बने रहने में मदद मिलती है। इससे चावल की सतह पर हल्की चमक भी आती है। यदि चाहें तो स्वाद और सुगंध बढ़ाने के लिए तेजपत्ता, लौंग या छोटी इलायची जैसे साबुत मसालों का सीमित उपयोग किया जा सकता है, जिससे चावल का स्वाद और अधिक आकर्षक हो जाता है।

    चावल पूरी तरह पक जाने के बाद उन्हें तुरंत चलाने से बचना चाहिए। गैस बंद करने के बाद बर्तन को कुछ मिनट तक ढककर रखने से भाप के माध्यम से चावल समान रूप से तैयार हो जाते हैं। इसके बाद चम्मच के बजाय कांटे से हल्के हाथों से दानों को अलग करने पर वे टूटते नहीं हैं और उनकी बनावट भी बनी रहती है।

    रसोई के बर्तन और आंच का चयन भी अंतिम परिणाम को प्रभावित करता है। मोटे तले वाले बर्तन में चावल पकाने से गर्मी समान रूप से फैलती है और चावल नीचे से जलने की संभावना कम रहती है। शुरुआत में मध्यम आंच और बाद में धीमी आंच पर पकाने से चावल अच्छी तरह तैयार होते हैं और हर दाना अलग दिखाई देता है।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि पुराने बासमती चावल सामान्यतः अधिक खिले हुए बनते हैं। इसके अलावा चावल को बार-बार चलाने से बचना चाहिए और यदि बचे हुए चावल दोबारा गर्म करने हों तो उन पर थोड़ा पानी छिड़ककर गर्म करना बेहतर माना जाता है। इन सरल लेकिन प्रभावी तरीकों को अपनाकर घर पर भी आसानी से रेस्तरां जैसी गुणवत्ता वाले खिले-खिले और स्वादिष्ट चावल तैयार किए जा सकते हैं।

  • मुंह के छालों से हैं परेशान तो अपनाएं ये असरदार घरेलू उपाय दर्द जलन और खाने की तकलीफ से मिलेगी राहत

    मुंह के छालों से हैं परेशान तो अपनाएं ये असरदार घरेलू उपाय दर्द जलन और खाने की तकलीफ से मिलेगी राहत


    नई दिल्ली । मुंह के छाले देखने में छोटे होते हैं लेकिन इनकी वजह से होने वाली तकलीफ काफी बड़ी हो सकती है। छाले होने पर खाना खाना पानी पीना और यहां तक कि सामान्य बातचीत करना भी दर्दनाक हो जाता है। कई बार यह समस्या कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है लेकिन इस दौरान जलन और दर्द व्यक्ति की दिनचर्या को प्रभावित कर देते हैं। ऐसे में कुछ आसान घरेलू उपाय राहत दिलाने में मददगार साबित हो सकते हैं। हालांकि यदि छाले लंबे समय तक बने रहें या बार बार होने लगें तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और चिकित्सकीय सलाह जरूर लेनी चाहिए।

    विशेषज्ञों के अनुसार मुंह के छालों के पीछे कई कारण हो सकते हैं। शरीर में विटामिन बी 12 आयरन या फोलिक एसिड की कमी तनाव हार्मोनल बदलाव मुंह के अंदर चोट लगना या रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। कई बार अत्यधिक मसालेदार भोजन या दांतों की तेज धार भी छालों की वजह बन सकती है। इसलिए केवल घरेलू उपचार ही नहीं बल्कि सही खानपान और संतुलित जीवनशैली भी जरूरी है।

    मुंह के छालों में सबसे आसान और प्रभावी घरेलू उपाय नमक वाले गुनगुने पानी से कुल्ला करना माना जाता है। नमक में मौजूद प्राकृतिक गुण मुंह के बैक्टीरिया को कम करने में मदद करते हैं और सूजन को घटाने में सहायक होते हैं। नियमित कुल्ला करने से छाले वाली जगह साफ रहती है और संक्रमण का खतरा भी कम हो सकता है।

    शहद भी मुंह के छालों में राहत देने वाला प्राकृतिक उपाय माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल और सूजन कम करने वाले गुण छाले पर सुरक्षात्मक परत बनाते हैं जिससे जलन कम महसूस होती है। इसके अलावा शहद घाव भरने की प्रक्रिया को भी तेज करने में मदद कर सकता है। दिन में दो से तीन बार साफ उंगली या कॉटन की सहायता से शहद लगाने से आराम मिल सकता है।

    नारियल तेल भी इस समस्या में उपयोगी माना जाता है। इसमें पाया जाने वाला लॉरिक एसिड बैक्टीरिया और सूजन से लड़ने में सहायक होता है। यह छाले वाली जगह को नम बनाए रखता है जिससे दर्द और जलन कम महसूस होती है। हालांकि यदि किसी व्यक्ति को नारियल तेल से एलर्जी हो या लगाने के बाद परेशानी बढ़े तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए।

    बेकिंग सोडा का उपयोग भी कई लोग घरेलू उपचार के रूप में करते हैं। यह मुंह के अम्लीय वातावरण को संतुलित करने में मदद करता है जिससे जलन कम हो सकती है। इसके अलावा ठंडा पानी पीना या बर्फ की हल्की सिकाई भी कुछ समय के लिए दर्द से राहत देती है लेकिन बर्फ को सीधे लंबे समय तक छाले पर नहीं रखना चाहिए।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि छाले दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें बार बार निकलें तेज दर्द हो बुखार आए या खून निकलने जैसी समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। साथ ही पर्याप्त पानी पीना हरी सब्जियां फल और विटामिन युक्त भोजन लेना तथा तनाव कम करना भी इस समस्या से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सही देखभाल और समय पर उपचार से मुंह के छालों की परेशानी से जल्दी राहत पाई जा सकती है।