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  • खाने में तेल की बढ़ती मात्रा से बढ़ रहा मोटापा, एक्सपर्ट्स ने बताए बचाव के आसान तरीके

    खाने में तेल की बढ़ती मात्रा से बढ़ रहा मोटापा, एक्सपर्ट्स ने बताए बचाव के आसान तरीके


    नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार जिंदगी में खानपान की गलत आदतें स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही हैं। इनमें सबसे प्रमुख कारण है भोजन में अत्यधिक तेल का इस्तेमाल। विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरत से ज्यादा तेल का सेवन धीरे-धीरे मोटापे और कई गंभीर बीमारियों की जड़ बन सकता है। यह न केवल शरीर में अतिरिक्त कैलोरी बढ़ाता है, बल्कि हृदय, लीवर और पाचन तंत्र पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।
    नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार, संतुलित मात्रा में तेल का उपयोग स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी है, लेकिन जब इसकी मात्रा आवश्यकता से अधिक हो जाती है, तो यह शरीर में फैट बढ़ाने लगता है। समय के साथ यह मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए खानपान में छोटे-छोटे बदलाव करके बड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है।
    हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि सबसे पहले हमें अपने रोजमर्रा के खाने में तेल की मात्रा को नियंत्रित करना चाहिए। खाना बनाते समय सीधे बर्तन में तेल डालने की बजाय मापने वाली छोटी चम्मच का उपयोग करना एक प्रभावी तरीका है। इससे अनजाने में ज्यादा तेल डालने की आदत पर रोक लगती है और कैलोरी इनटेक नियंत्रित रहता है।
    इसके अलावा तले हुए खाद्य पदार्थों का सेवन भी सीमित करना जरूरी है। समोसा, पकौड़ी, पूड़ी और फास्ट फूड जैसे भोजन में तेल की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो शरीर में फैट बढ़ाने का काम करता है। इसकी जगह भाप में पका हुआ, ग्रिल्ड या हल्का भुना हुआ भोजन अधिक फायदेमंद होता है। ऐसे भोजन में पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं और तेल की मात्रा भी कम होती है।
    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि घर पर खाना बनाते समय हल्के और स्वस्थ तेलों का चयन किया जाए, साथ ही उनकी मात्रा पर विशेष ध्यान दिया जाए। बार-बार तेल गर्म करने से भी उसमें हानिकारक तत्व बन जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए और अधिक नुकसानदायक होते हैं। इसलिए ताजा और सीमित मात्रा में तेल का उपयोग करना बेहतर विकल्प है।
    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मोटापा कई बीमारियों की जड़ है और इसका एक प्रमुख कारण असंतुलित खानपान है। जब शरीर में अतिरिक्त वसा जमा होने लगती है, तो यह न केवल शारीरिक सक्रियता को कम करती है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालती है। इसलिए समय रहते खानपान में सुधार करना बेहद जरूरी है।
    अगर हम अपने दैनिक जीवन में कुछ छोटे बदलाव अपनाएं, जैसे कम तेल का उपयोग, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम, तो न केवल मोटापे से बचा जा सकता है बल्कि जीवनशैली भी बेहतर बन सकती है। सही खानपान और अनुशासन ही स्वस्थ जीवन की असली कुंजी है।
  • नींद की अनियमितता बन सकती है खतरनाक: जानिए तन-मन को कैसे रखें सुरक्षित

    नींद की अनियमितता बन सकती है खतरनाक: जानिए तन-मन को कैसे रखें सुरक्षित


    नई दिल्ली । तन और मन की सेहत के लिए नींद को सबसे बुनियादी जरूरत माना जाता है, लेकिन आज की तेज रफ्तार जिंदगी में नींद की अनियमितता एक “खामोश खतरे” के रूप में उभर रही है। देर रात तक मोबाइल, काम का दबाव, तनाव और असंतुलित दिनचर्या ने लोगों की स्लीप साइकल को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार, नियमित और गहरी नींद स्वस्थ जीवन की नींव है, और इसकी कमी धीरे-धीरे शरीर और मस्तिष्क दोनों को कमजोर कर सकती है।
    विशेषज्ञों का कहना है कि नींद सिर्फ आराम नहीं, बल्कि शरीर की मरम्मत और दिमाग की रीसेट प्रक्रिया है। जब यह प्रक्रिया बार-बार बाधित होती है, तो इसका असर सीधे मानसिक संतुलन, एकाग्रता और इम्यून सिस्टम पर पड़ता है। शुरुआत में यह समस्या सामान्य लगती है, लेकिन समय के साथ यह गंभीर रूप ले सकती है।
    नींद की अनियमितता के प्रमुख संकेतों में दिनभर थकान महसूस होना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, बार-बार भूलने की आदत और चिड़चिड़ापन शामिल हैं। कई लोगों में यह समस्या चिंता और अवसाद जैसी स्थितियों को भी बढ़ा सकती है। कुछ मामलों में नींद के दौरान असामान्य गतिविधियां, जैसे बार-बार करवट बदलना या अचानक जाग जाना भी देखने को मिलता है। यह सभी संकेत इस बात का संकेत हैं कि शरीर की प्राकृतिक लय बिगड़ चुकी है।
    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नींद की अनियमितता का सबसे बड़ा कारण अनियमित दिनचर्या और डिजिटल उपकरणों का अत्यधिक उपयोग है। रात में देर तक स्क्रीन देखने से दिमाग सक्रिय रहता है और मेलाटोनिन हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे नींद आने में देरी होती है। इसके अलावा कैफीन, तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी भी इस समस्या को बढ़ाते हैं।
    इस समस्या से बचाव के लिए सरल लेकिन प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण है कि हर दिन एक निश्चित समय पर सोने और जागने की आदत बनाई जाए। इससे शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी, जिसे बॉडी क्लॉक कहा जाता है, संतुलित रहती है। हल्का व्यायाम या योग भी नींद को बेहतर बनाने में मदद करता है, क्योंकि इससे तनाव कम होता है और शरीर थकान महसूस करता है।
    इसके अलावा, सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप से दूरी बनाना जरूरी है। स्क्रीन की नीली रोशनी दिमाग को सक्रिय रखती है और नींद आने की प्रक्रिया को धीमा कर देती है। रात में कैफीन, शराब और धूम्रपान से बचना भी बेहद जरूरी है क्योंकि ये नींद की गुणवत्ता को खराब करते हैं।
    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि अगर नींद की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से सलाह लें। अच्छी नींद न केवल शरीर को ऊर्जा देती है बल्कि मानसिक स्थिरता, सकारात्मक सोच और बेहतर जीवनशैली में भी अहम भूमिका निभाती है।
    इसलिए व्यस्त जीवन के बीच नींद को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही वह आधार है जो तन और मन दोनों को स्वस्थ और संतुलित बनाए रखता है।
  • सेहत का आसान योग: सर्वांगासन कैसे सुधारता है हार्मोन और डाइजेशन

    सेहत का आसान योग: सर्वांगासन कैसे सुधारता है हार्मोन और डाइजेशन


    नई दिल्ली । आज की तेज़ रफ्तार और असंतुलित जीवनशैली में पाचन संबंधी समस्याएं और हार्मोनल असंतुलन आम हो गए हैं। कब्ज, अपच, ब्लोटिंग और थायरॉइड जैसी परेशानियां लोगों की सेहत को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में योग एक प्राकृतिक और प्रभावी समाधान के रूप में सामने आता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, सर्वांगासन, जिसे शोल्डर स्टैंड भी कहा जाता है, शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी योगासन है, जो हार्मोन बैलेंस करने के साथ-साथ पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है।

    सर्वांगासन को योग शास्त्र में “संपूर्ण शरीर का आसन” कहा गया है क्योंकि यह शरीर के लगभग हर हिस्से पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से थायरॉइड और पैराथायरॉइड ग्रंथियों की कार्यप्रणाली पर असर पड़ता है, जिससे हार्मोन का संतुलन बेहतर होता है। जब शरीर में हार्मोन संतुलित रहते हैं, तो मेटाबॉलिज्म सही तरीके से काम करता है और शरीर की ऊर्जा भी बढ़ती है। खासतौर पर महिलाओं में यह आसन पीरियड्स की अनियमितता को सुधारने में सहायक माना जाता है।

    इसके अलावा, सर्वांगासन पाचन तंत्र के लिए भी बेहद फायदेमंद है। इस आसन के दौरान पेट के अंग जैसे आंतें, लिवर, पैंक्रियास और पेट पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे इनकी कार्यक्षमता बढ़ती है। यह दबाव पाचन क्रिया को सक्रिय करता है और कब्ज, गैस, ब्लोटिंग और अपच जैसी समस्याओं को कम करता है। नियमित अभ्यास से पेट हल्का महसूस होता है और भोजन का पाचन बेहतर तरीके से होता है।

    आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों में सर्वांगासन को एंडोक्राइन सिस्टम को संतुलित करने और पाचन सुधारने वाला महत्वपूर्ण योगासन बताया गया है। यह रक्त संचार को बेहतर बनाता है, मानसिक तनाव को कम करता है और शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। इसके नियमित अभ्यास से थकान कम होती है और शरीर अधिक सक्रिय महसूस करता है। साथ ही यह वजन नियंत्रण में भी सहायक माना जाता है।

    योग विशेषज्ञों के अनुसार, सर्वांगासन का अभ्यास सही तकनीक के साथ करना जरूरी है। इसके लिए सबसे पहले योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं और हाथों को शरीर के बगल में रखें, हथेलियां जमीन की ओर हों। अब धीरे-धीरे सांस लेते हुए दोनों पैरों को ऊपर उठाएं। इस दौरान घुटनों को सीधा रखें और धीरे-धीरे नितंब और पीठ को ऊपर उठाते हुए शरीर का भार कंधों पर लाएं।

    ठोड़ी को छाती से लगाने की कोशिश करें और हाथों से पीठ को सहारा दें। कोहनियां जमीन पर टिकी रहें। शरीर को सीधा रखते हुए पैरों को ऊपर की ओर रखें और इस स्थिति में 10 से 30 सेकंड तक बने रहें। शुरुआती लोग कम समय से शुरुआत कर सकते हैं और धीरे-धीरे अवधि बढ़ा सकते हैं। इस दौरान सामान्य और गहरी सांस लेते रहना चाहिए।

    अंत में धीरे-धीरे वापस प्रारंभिक स्थिति में आएं और शरीर को आराम दें। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वांगासन का अभ्यास खाली पेट करना चाहिए। हालांकि, जिन लोगों को गर्दन में दर्द, हाई ब्लड प्रेशर या गर्भावस्था जैसी स्थिति है, उन्हें यह आसन बिना डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए।

    नियमित अभ्यास से सर्वांगासन न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी संतुलित करता है और एक स्वस्थ जीवनशैली की ओर ले जाता है।

  • डेंगू-मलेरिया से सुरक्षा: मच्छरों के आतंक से बचने के WHO के सरल टिप्स

    डेंगू-मलेरिया से सुरक्षा: मच्छरों के आतंक से बचने के WHO के सरल टिप्स


    नई दिल्ली । मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियाँ जैसे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया आज भी दुनिया के कई हिस्सों में गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनी हुई हैं। विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक बार फिर इस बीमारी को पूरी तरह खत्म करने के लक्ष्य को दोहराया है और लोगों को मच्छरों से बचाव के लिए जरूरी सावधानियों के बारे में जागरूक किया है।

    WHO के अनुसार, मलेरिया जैसी बीमारी को रोका और ठीक किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए समय पर सावधानी और सही उपाय अपनाना बेहद जरूरी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मच्छरों को पनपने से रोका जाए और खुद को उनके काटने से सुरक्षित रखा जाए।

    क्या करें (Do’s)

    WHO ने कुछ आसान लेकिन बेहद प्रभावी उपाय बताए हैं:

    घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें, क्योंकि मच्छर रुके हुए पानी में ही अंडे देते हैं
    गमलों, टायरों, बाल्टियों और अन्य कंटेनरों को खाली रखें या ढककर रखें
    शाम से सुबह तक पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें
    सोते समय मच्छरदानी का उपयोग जरूर करें
    खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगवाएं ताकि मच्छर घर में प्रवेश न कर सकें
    घर और आसपास नियमित सफाई बनाए रखें

    क्या न करें (Don’ts)

    घर के बाहर या अंदर पानी को जमा न होने दें
    बिना सुरक्षा के खुले में न सोएं
    मच्छर की समस्या को हल्के में न लें
    शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें
     मलेरिया के लक्षणों को पहचानें

    WHO के अनुसार, मलेरिया के शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है:

    तेज बुखार
    ठंड लगना और कंपकंपी
    सिरदर्द
    शरीर में दर्द और थकान
    मतली या उल्टी

    यदि बीमारी बढ़ जाए तो गंभीर लक्षण भी दिख सकते हैं:

    भ्रम की स्थिति
    सांस लेने में कठिनाई
    दौरे पड़ना
    गहरे रंग का पेशाब

    समय पर इलाज है सबसे जरूरी

    WHO ने सलाह दी है कि जैसे ही लक्षण दिखें, तुरंत जांच कराएं और इलाज शुरू करें। मलेरिया का इलाज शुरुआती चरण में आसान होता है, लेकिन देर करने पर यह जानलेवा भी हो सकता है।
    सामूहिक प्रयास से ही संभव है रोकथाम

    मच्छरों से बचाव सिर्फ व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामुदायिक जिम्मेदारी भी है। साफ-सफाई, जलजमाव रोकना और जागरूकता फैलाकर इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

  • स्किन के लिए खतरा बन सकता है ओवरनाइट फेस पैक जानें एक्सपर्ट की सलाह

    स्किन के लिए खतरा बन सकता है ओवरनाइट फेस पैक जानें एक्सपर्ट की सलाह


    नई दिल्ली । चेहरे को चमकाने के लिए लोग कई प्रकार के फेस पैक लगाते हैं। ताकि अच्छा निखार आ सके।लेकिन कई बार देखा जाता है कि लोग इसका इस्तेमाल करते समय कुछ गलतियां कर देते हैं। फेस मास्क या फेस पैक लगाते समय यह गलती कर बैठते हैं कि उसे जरूरत से ज्यादा देर तक चेहरे पर लगा रहने देते हैं। उनकी सोच होती है कि जितनी देर फेस पैक रहेगा, त्वचा उतनी ज्यादा ग्लो करेगी। लेकिन इससे ज्यादा गला नहीं होता है बल्कि आपकी स्किन को नुकसान पहुंचता है चलिए बताते हैं कैसे।

    अधिक देर तक न लगाए रखें
    चाहे आप कोई प्रोडक्ट का फेस पैक लगा रहे हो या फिर बेसन और हल्दी का। अधिकतर लोग यही मानते हैं कि ज्यादा देर तक लगाने से स्किन और बेहतर हो जाएगी। चेहरे की सुंदरता बढ़ाने के लिए फेस पैक का उपयोग काफी आम है। यह त्वचा की गंदगी हटाने, नमी बनाए रखने और नेचुरल ग्लो देने में मदद करता है। लेकिन अगर इसे जरूरत से ज्यादा समय तक चेहरे पर छोड़ दिया जाए, तो यह लाभ की बजाय नुकसान भी पहुंचा सकता है।

    जब फेस पैक पूरी तरह सूख जाता है और उसके बाद भी उसे चेहरे पर लगा रहने दिया जाता है, तो त्वचा सिकुड़ने लगती है। इससे चेहरे पर खिंचाव महसूस होता है और कई बार जलन, खुजली या लालपन जैसी समस्या भी हो सकती है।

    त्वचा में रूखापन और नमी की कमी
    फेस पैक त्वचा से अतिरिक्त तेल, गंदगी और डेड स्किन को हटाने का काम करता है। लेकिन अगर इसे जरूरत से ज्यादा देर तक रखा जाए, तो यह त्वचा की प्राकृतिक नमी भी सोख लेता है। इसके कारण चेहरा सूखा, खुरदरा और थका हुआ दिखने लगता है।
    कुछ फेस पैक में क्ले, चारकोल या एक्टिव इंग्रीडिएंट्स होते हैं, जो लंबे समय तक त्वचा पर रहने पर रोमछिद्रों को बंद कर सकते हैं। इससे पिंपल्स, दाने या एलर्जिक रिएक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए आपको इन्हें सीमित समय तक कि उसे करना चाहिए यानी कि कैसे फेस पैक सुख आपको उसे धूल देना चाहिए ताकि आपका चेहरा अच्छा रहे।
  • मच्छरों और बदबू से परेशान हैं? कूलर में डालें फिटकरी और पाएं ठंडी, साफ और सुरक्षित हवा

    मच्छरों और बदबू से परेशान हैं? कूलर में डालें फिटकरी और पाएं ठंडी, साफ और सुरक्षित हवा


    नई दिल्ली । भीषण गर्मी और उमस भरे मौसम में एयर कूलर आम लोगों के लिए राहत का सबसे सस्ता और असरदार साधन बन जाता है खासकर मिडिल क्लास परिवारों में कूलर का उपयोग तेजी से बढ़ जाता है लेकिन इसके साथ एक बड़ी समस्या भी सामने आती है और वह है कूलर के टैंक में जमा गंदा पानी और उससे आने वाली बदबू यह समस्या न केवल असहजता पैदा करती है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकती है

    दरअसल कूलर में जमा पानी कुछ ही दिनों में गंदा होने लगता है और उसमें बैक्टीरिया तथा सूक्ष्म जीव पनपने लगते हैं यही कारण है कि कूलर चलाने पर कमरे में सीलन और बदबू महसूस होती है इसके अलावा रुका हुआ पानी मच्छरों के पनपने के लिए सबसे अनुकूल जगह बन जाता है जिससे डेंगू मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है

    ऐसी स्थिति में अगर आप इस समस्या से राहत पाना चाहते हैं तो आपकी रसोई में मौजूद एक साधारण सी चीज फिटकरी बेहद कारगर साबित हो सकती है फिटकरी का उपयोग सदियों से पानी को साफ करने के लिए किया जाता रहा है और इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है जब फिटकरी को पानी में डाला जाता है तो यह उसमें मौजूद गंदगी के सूक्ष्म कणों को आपस में जोड़ देती है जिससे वे भारी होकर टैंक की तली में बैठ जाते हैं और ऊपर का पानी साफ और पारदर्शी हो जाता है

    कूलर के टैंक में फिटकरी का एक छोटा सा टुकड़ा डालने से पानी लंबे समय तक साफ बना रहता है और उसमें गंदगी जल्दी जमा नहीं होती इसके साथ ही यह मच्छरों के लार्वा के पनपने की संभावना को भी कम कर देता है क्योंकि फिटकरी पानी के रासायनिक संतुलन में ऐसा बदलाव लाती है जो मच्छरों के लिए अनुकूल नहीं होता

    इसके अलावा फिटकरी में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं जो पानी में मौजूद बैक्टीरिया और हानिकारक जीवाणुओं को नियंत्रित करने में मदद करते हैं यही वजह है कि कूलर से आने वाली बदबू भी धीरे धीरे खत्म हो जाती है जब पानी साफ और बैक्टीरिया मुक्त होता है तो कूलर से निकलने वाली हवा भी ताजी और ठंडी महसूस होती है

    हालांकि फिटकरी का उपयोग करते समय कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है विशेषज्ञों के अनुसार कूलर के टैंक में बहुत अधिक मात्रा में फिटकरी डालना सही नहीं है एक छोटा सा टुकड़ा ही पर्याप्त होता है अधिक मात्रा में उपयोग करने से पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है

    इसके साथ ही केवल फिटकरी पर निर्भर रहना भी सही नहीं है कूलर की नियमित सफाई बेहद जरूरी है टैंक और पैड्स को समय समय पर साफ करना चाहिए ताकि फंगस और गंदगी जमा न हो सके बेहतर स्वास्थ्य के लिए हर तीन से चार दिन में कूलर का पानी पूरी तरह बदलना एक अच्छी आदत है

    अगर आप इन आसान घरेलू उपायों को अपनाते हैं तो न केवल कूलर की बदबू और गंदगी से छुटकारा पा सकते हैं बल्कि अपने परिवार को मच्छरों से होने वाली खतरनाक बीमारियों से भी सुरक्षित रख सकते हैं

  • बालों की सेहत का राज गर्मियों में कितनी बार धोएं बाल और कैसे रखें नैचुरल चमक बरकरार

    बालों की सेहत का राज गर्मियों में कितनी बार धोएं बाल और कैसे रखें नैचुरल चमक बरकरार

    नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम आते ही तेज धूप पसीना धूल और प्रदूषण का असर सबसे पहले हमारे बालों और सिर की त्वचा पर दिखाई देने लगता है। इस दौरान कई लोगों के बाल चिपचिपे और बेजान हो जाते हैं तो कुछ लोगों को रूखेपन और बाल झड़ने की समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या गर्मियों में रोजाना बाल धोना चाहिए या फिर सीमित बार ही शैंपू करना बेहतर होता है

    दरअसल हमारे सिर की त्वचा प्राकृतिक रूप से एक तेल बनाती है जिसे सीबम कहा जाता है। यह तेल बालों को पोषण देता है और उन्हें सूखने से बचाकर उनकी प्राकृतिक चमक बनाए रखता है। लेकिन गर्मियों में अत्यधिक पसीना आने के कारण यह तेल धूल और गंदगी के साथ मिलकर सिर में चिपचिपाहट पैदा कर देता है। यदि लंबे समय तक बाल साफ नहीं किए जाएं तो इससे खुजली डैंड्रफ और बाल झड़ने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं

    हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि रोजाना शैंपू करना जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार बार बार शैंपू करने से सिर की त्वचा का प्राकृतिक तेल कम हो जाता है जिससे बाल कमजोर और रूखे हो सकते हैं। इसलिए बाल धोने की सही आवृत्ति हर व्यक्ति के बालों की प्रकृति पर निर्भर करती है

    जिन लोगों के बाल तैलीय यानी ऑयली होते हैं उन्हें सप्ताह में लगभग तीन बार बाल धोने की सलाह दी जाती है ताकि अतिरिक्त तेल और गंदगी साफ हो सके। वहीं जिन लोगों के बाल सूखे या घुंघराले होते हैं उनके लिए सप्ताह में एक या दो बार शैंपू करना पर्याप्त होता है। घुंघराले बालों में प्राकृतिक तेल नीचे तक आसानी से नहीं पहुंच पाता जिससे वे जल्दी सूख जाते हैं जबकि सीधे और पतले बाल जल्दी ऑयली नजर आते हैं

    बाल धोने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि उन्हें धोने की आवृत्ति। बहुत ज्यादा गर्म पानी से बाल धोना नुकसानदायक हो सकता है क्योंकि इससे बालों की नमी खत्म हो जाती है और वे बेजान दिखने लगते हैं। हमेशा हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करना बेहतर होता है

    शैंपू लगाने का सही तरीका यह है कि पहले उसे हथेली पर लेकर हल्का झाग बना लें और फिर धीरे धीरे सिर की त्वचा पर लगाएं। बालों को जोर से रगड़ने से बचना चाहिए क्योंकि इससे बाल टूट सकते हैं। इसके बाद साफ पानी से बालों को अच्छी तरह धोना जरूरी है ताकि कोई केमिकल अवशेष न रह जाए

    शैंपू के बाद कंडीशनर का इस्तेमाल भी बालों के लिए बेहद फायदेमंद होता है। यह बालों को मुलायम बनाता है और उन्हें टूटने से बचाता है। खासकर लंबे और सूखे बालों वाले लोगों के लिए कंडीशनर बेहद जरूरी माना जाता है

    अंत में यह समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति के बाल अलग होते हैं इसलिए एक ही नियम सभी पर लागू नहीं होता। सही जानकारी और संतुलित देखभाल से ही आप गर्मियों में भी अपने बालों को स्वस्थ मजबूत और चमकदार बनाए रख सकते हैं

  • ना कोल्ड ड्रिंक ना जूस, गर्मी में शरीर को ठंडा रखेगा घर का बना कच्चे आम का झोलिया

    ना कोल्ड ड्रिंक ना जूस, गर्मी में शरीर को ठंडा रखेगा घर का बना कच्चे आम का झोलिया

    नई दिल्ली । भीषण गर्मी और तपती धूप के इस मौसम में जब तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच जाता है तब शरीर को ठंडा रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है ऐसे में लू और डिहाइड्रेशन का खतरा तेजी से बढ़ जाता है लोग राहत पाने के लिए बाजार में मिलने वाले कोल्ड ड्रिंक्स और पैक्ड जूस का सहारा लेते हैं लेकिन ये पेय पदार्थ शरीर को तात्कालिक राहत देने के बजाय कई बार नुकसान भी पहुंचा सकते हैं ऐसे समय में किचन में मौजूद एक देसी और पारंपरिक उपाय आपकी सेहत के लिए किसी अमृत से कम नहीं है और वह है कच्चे आम से बना झोलिया

    कच्चे आम जिसे कैरी भी कहा जाता है गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है इससे बना झोलिया न केवल स्वाद में चटपटा और ताजगी भरा होता है बल्कि यह शरीर को अंदर से ठंडा रखता है और लू से बचाने में मदद करता है खास बात यह है कि इसे घर पर बहुत ही कम समय में आसानी से तैयार किया जा सकता है

    झोलिया बनाने के लिए सबसे पहले कच्चे आम को धोकर छील लिया जाता है और छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है इसके बाद एक बर्तन में पानी गरम करके आम के टुकड़ों को कुछ मिनट तक उबाला जाता है जब आम नरम हो जाए तो उसे ठंडा कर लिया जाता है इसके बाद मिक्सर में उबले हुए आम के साथ पुदीना हरा धनिया हरी मिर्च और कुछ खास मसाले मिलाए जाते हैं इसमें काला नमक सादा नमक काली मिर्च और स्वादानुसार चीनी डालकर इसे अच्छी तरह पीस लिया जाता है

    जब यह मिश्रण स्मूद हो जाए तो इसे छानकर ठंडा किया जाता है और जरूरत के अनुसार पानी या बर्फ मिलाकर सर्व किया जाता है यह पेय न केवल प्यास बुझाता है बल्कि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है

    गर्मी के मौसम में कच्चे आम का झोलिया पीने से शरीर को कई फायदे मिलते हैं यह पाचन को बेहतर बनाता है शरीर को ऊर्जा देता है और लू के प्रभाव से बचाता है साथ ही इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर में पानी की कमी को दूर करने में सहायक होते हैं

    खास बात यह है कि यह पूरी तरह प्राकृतिक पेय है जिसमें किसी प्रकार के केमिकल या प्रिजर्वेटिव नहीं होते इसलिए यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए सुरक्षित और फायदेमंद है इसे आप घर आए मेहमानों को भी ठंडे शरबत के रूप में परोस सकते हैं या फिर इसे पानी पुरी के पानी के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं

    आज जब लोग हेल्दी लाइफस्टाइल की ओर लौट रहे हैं ऐसे में कच्चे आम का झोलिया एक बार फिर से लोगों की पसंद बनता जा रहा है यह न केवल स्वाद और सेहत का बेहतरीन संगम है बल्कि भारतीय परंपरा का भी एक अहम हिस्सा है जो हमें प्राकृतिक तरीकों से स्वस्थ रहने की सीख देता है

  • पानी पीने के बाद भी नहीं बुझ रही प्यास? शरीर दे रहा है गंभीर बीमारी का संकेत

    पानी पीने के बाद भी नहीं बुझ रही प्यास? शरीर दे रहा है गंभीर बीमारी का संकेत


    नई दिल्ली ।गर्मी के मौसम में बार-बार प्यास लगना और गला सूखना आम बात मानी जाती है लेकिन जब पर्याप्त पानी पीने के बाद भी यह समस्या लगातार बनी रहती है तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है यह शरीर द्वारा दिया जाने वाला एक गंभीर चेतावनी संकेत हो सकता है जिसे मेडिकल भाषा में जेरोस्टोमिया कहा जाता है

    जेरोस्टोमिया वह स्थिति है जिसमें मुंह में लार का उत्पादन कम हो जाता है लार हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि यह भोजन को पचाने में मदद करती है मुंह को नम बनाए रखती है और बैक्टीरिया से बचाव करती है जब लार ग्रंथियां ठीक से काम नहीं करतीं तो मुंह में सूखापन महसूस होने लगता है और व्यक्ति को बार बार पानी पीने की जरूरत पड़ती है

    हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार यह समस्या केवल पानी की कमी नहीं बल्कि कई गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत भी हो सकती है इनमें सबसे प्रमुख डायबिटीज है जब शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है तो किडनी अतिरिक्त शुगर को बाहर निकालने के लिए अधिक पेशाब बनाती है जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है और मुंह सूखने लगता है साथ ही लगातार प्यास भी महसूस होती है

    इसके अलावा यह लक्षण अल्जाइमर स्ट्रोक एचआईवी संक्रमण और नर्व डैमेज जैसी गंभीर स्थितियों से भी जुड़े हो सकते हैं कई मामलों में यह ऑटोइम्यून डिसऑर्डर का संकेत भी होता है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ही अपनी लार ग्रंथियों को प्रभावित करने लगती है विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि कई बार यह समस्या बीमारियों के बजाय दवाइयों के साइड इफेक्ट के कारण भी हो सकती है हाई ब्लड प्रेशर एलर्जी डिप्रेशन या घबराहट की दवाएं लार ग्रंथियों की कार्यक्षमता को कम कर देती हैं जिससे मुंह सूखने की समस्या बढ़ जाती है

    इस स्थिति से बचने के लिए केवल सादा पानी पीना पर्याप्त नहीं होता शरीर को सही तरीके से हाइड्रेट रखना जरूरी है इसके लिए नींबू पानी नारियल पानी और ओआरएस का सेवन फायदेमंद माना जाता है इसके साथ ही तरबूज खरबूजा खीरा और ककड़ी जैसे पानी से भरपूर फलों को आहार में शामिल करना चाहिए चाय कॉफी और कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन कम करना चाहिए क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी को और बढ़ा सकते हैं पानी में पुदीना या नींबू डालकर पीना भी राहत दे सकता है

    अगर यह समस्या कई दिनों तक बनी रहती है और इसके साथ चबाने या निगलने में कठिनाई महसूस हो तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए समय पर जांच और इलाज से कई गंभीर बीमारियों को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सकता है

  • घुटनों और कूल्हों की कमजोरी का आसान इलाज, नी मूवमेंट से पाएं संतुलन और ताकत

    घुटनों और कूल्हों की कमजोरी का आसान इलाज, नी मूवमेंट से पाएं संतुलन और ताकत


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बदलती जीवनशैली का असर लोगों के स्वास्थ्य पर साफ नजर आने लगा है लंबे समय तक बैठकर काम करना शारीरिक गतिविधियों की कमी और अनियमित खानपान के कारण घुटनों और कूल्हों के जोड़ों में दर्द कमजोरी और अकड़न जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं पहले ये समस्याएं उम्र बढ़ने के साथ दिखाई देती थीं लेकिन अब युवा वर्ग भी इससे अछूता नहीं है

    ऐसे में योग का एक बेहद आसान लेकिन प्रभावी अभ्यास नी मूवमेंट लोगों के लिए राहत का जरिया बन सकता है जिसे समस्थिति भी कहा जाता है यह एक बेसिक योग मुद्रा है लेकिन इसके फायदे बेहद व्यापक हैं भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार यह अभ्यास न केवल घुटनों और हिप जॉइंट्स को मजबूत बनाता है बल्कि शरीर के निचले हिस्से की स्थिरता और ताकत भी बढ़ाता है

    नी मूवमेंट को करने के लिए किसी विशेष उपकरण या जगह की जरूरत नहीं होती इसे घर पर आसानी से किया जा सकता है इस अभ्यास को करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों को आपस में मिला लें हाथों को शरीर के दोनों ओर सीधा रखें और नजर सामने की ओर स्थिर रखें इसके बाद धीरे धीरे अपने शरीर को ऐसे नीचे झुकाएं जैसे आप हवा में कुर्सी पर बैठने जा रहे हों इस स्थिति में शरीर को संतुलित रखते हुए कुछ मिनट तक रुकना होता है

    यह अभ्यास देखने में जितना सरल लगता है उतना ही असरदार है नियमित रूप से इसका अभ्यास करने से घुटनों और कूल्हों के जोड़ों में मजबूती आती है साथ ही जांघों और पिंडलियों की मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए यह विशेष रूप से फायदेमंद है क्योंकि यह शरीर के निचले हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है और कमजोरी को दूर करता है

    नी मूवमेंट का एक बड़ा फायदा यह भी है कि यह शरीर के संतुलन को बेहतर बनाता है जिससे रोजमर्रा के काम करना आसान हो जाता है इसके साथ ही यह मानसिक एकाग्रता को भी बढ़ाता है जब आप इस मुद्रा में स्थिर रहते हैं तो आपका ध्यान पूरी तरह शरीर और सांस पर केंद्रित होता है जिससे तनाव कम होता है और मानसिक शांति मिलती है

    यह अभ्यास केवल शारीरिक मजबूती तक सीमित नहीं है बल्कि यह शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करने में भी मदद करता है व्यस्त दिनचर्या में यदि रोजाना कुछ मिनट भी इस अभ्यास के लिए निकाल लिए जाएं तो यह लंबे समय में बड़े फायदे दे सकता है

    हालांकि यह एक सरल योग अभ्यास है लेकिन हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त हो यह जरूरी नहीं है जिन लोगों को गंभीर जोड़ों की समस्या या आर्थराइटिस है उन्हें इसे करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए स्वस्थ व्यक्ति इसे नियमित रूप से अपनाकर अपने शरीर को मजबूत और संतुलित बना सकते हैं