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  • गर्मी से राहत के लिए मनाली-शिमला नहीं: मई-जून में इन कम भीड़ वाली जगहों का बनाएं ट्रैवल प्लान

    गर्मी से राहत के लिए मनाली-शिमला नहीं: मई-जून में इन कम भीड़ वाली जगहों का बनाएं ट्रैवल प्लान


    नई दिल्ली । मई-जून की गर्मी शुरू होते ही लोग ठंडी जगहों की ओर रुख करते हैं। आमतौर पर हर साल मनाली, शिमला और मसूरी जैसे हिल स्टेशनों पर भारी भीड़ देखने को मिलती है। होटल से लेकर सड़क तक हर जगह लंबी कतारें और ट्रैफिक जाम ट्रिप के मजे को कम कर देते हैं। ऐसे में ट्रैवल एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि इस बार भीड़-भाड़ वाले टूरिस्ट स्पॉट्स की बजाय कुछ नई और शांत जगहों को एक्सप्लोर किया जाए, जहां प्रकृति का असली सुकून और ठंडा मौसम दोनों का आनंद मिल सके।

    1. मैकलियोडगंज, हिमाचल प्रदेश – तिब्बती संस्कृति और शांति का संगम

    हिमाचल प्रदेश का मैकलियोडगंज अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। यह जगह हरी-भरी पहाड़ियों और ठंडे मौसम के बीच एक अलग ही अनुभव देती है। यहां तिब्बती संस्कृति का अनोखा मेल देखने को मिलता है। पर्यटक यहां नामग्याल मठ, भागसू फॉल्स, त्सुगलागखांग कॉम्प्लेक्स, धर्मकोट और आसपास के खूबसूरत ट्रेकिंग रूट्स का आनंद ले सकते हैं। कांगड़ा हवाई अड्डा यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है।

    2. धनौल्टी, उत्तराखंड – भीड़ से दूर शांत पहाड़ी स्वर्ग

    उत्तराखंड का धनौल्टी उन लोगों के लिए बेहतरीन जगह है जो शांति और प्राकृतिक सुंदरता की तलाश में हैं। यहां का मौसम गर्मियों में भी ठंडा और सुहावना रहता है। यहां आप देवगढ़ किला, दशावतार मंदिर, सुरखंड देवी मंदिर और टिहरी बांध जैसे स्थानों की सैर कर सकते हैं। देहरादून रेलवे स्टेशन और जॉली ग्रांट एयरपोर्ट यहां के नजदीकी ट्रैवल पॉइंट हैं।

     3. चिकमगलूर, कर्नाटक – कॉफी की खुशबू और हरियाली का अनुभव

    दक्षिण भारत का चिकमगलूर अपनी कॉफी बागानों और हरे-भरे पहाड़ों के लिए मशहूर है। यह जगह गर्मियों में ठंडे और आरामदायक मौसम के कारण पर्यटकों की पहली पसंद बनती जा रही है। यहां आप कॉफी म्यूजियम, भद्रा वाइल्डलाइफ सैंचुरी, हनुमान गुंडी फॉल्स और झीलों की खूबसूरती का आनंद ले सकते हैं। मैंगलोर एयरपोर्ट यहां से सबसे नजदीक है।

     4. कूर्ग, कर्नाटक – मिनी स्कॉटलैंड का प्राकृतिक जादू

    कूर्ग को भारत का ‘स्कॉटलैंड’ भी कहा जाता है। यह जगह अपनी कॉफी प्लांटेशन, झरनों और हरियाली के लिए बेहद लोकप्रिय है। यहां पर्यटक नामद्रोलिंग मठ, इरुप्पु फॉल्स, मंडलपट्टी व्यूपॉइंट, नागरहोल नेशनल पार्क और कॉफी एस्टेट्स घूम सकते हैं। यह जगह गर्मियों में सुकून भरा अनुभव देती है।

     इस बार ट्रिप को बनाएं भीड़ से अलग और यादगार

    अगर आप गर्मियों की छुट्टियों में सुकून, ठंडक और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेना चाहते हैं, तो मनाली और मसूरी जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों की बजाय मैकलियोडगंज, धनौल्टी, चिकमगलूर और कूर्ग जैसे डेस्टिनेशन चुनना बेहतर रहेगा। ये जगहें न सिर्फ शांत हैं बल्कि आपको प्रकृति के करीब ले जाकर एक यादगार ट्रैवल अनुभव भी देती हैं।

  • डाइट में एकरूपता से खतरा: आंतों की सेहत बिगड़ने का बढ़ सकता है जोखिम

    डाइट में एकरूपता से खतरा: आंतों की सेहत बिगड़ने का बढ़ सकता है जोखिम

    नई दिल्ली ।  आज की तेज रफ्तार जिंदगी में कई लोग सुविधा के चलते रोजाना एक ही तरह का भोजन करने लगते हैं। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह आदत लंबे समय में शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकत है, खासकर गट हेल्थ यानी आंतों की सेहत पर इसका सीधा असर पड़ता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, हमारे पाचन तंत्र में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करने और भोजन को पचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। जब डाइट में विविधता नहीं होती और लगातार एक ही तरह का खाना खाया जाता है, तो इन बैक्टीरिया की विविधता कम होने लगती है। इसका असर सीधे पाचन पर पड़ता है और गैस, कब्ज, ब्लोटिंग और थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

    हेल्थ एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि ज्यादा समय तक ऑयली या प्रोसेस्ड फूड का सेवन करने से स्थिति और गंभीर हो सकती है। शरीर को संतुलित रूप से काम करने के लिए अलग-अलग पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जो एक ही तरह के भोजन से पूरी नहीं हो पाती।

    डॉक्टरों की सलाह है कि गट हेल्थ को बेहतर बनाए रखने के लिए डाइट में विविधता बेहद जरूरी है। रोजाना भोजन में अलग-अलग तरह के फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और फर्मेंटेड फूड शामिल करने चाहिए। इससे शरीर को आवश्यक विटामिन और मिनरल मिलते हैं और पाचन तंत्र मजबूत होता है।

    इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और हल्की शारीरिक गतिविधि करना भी आंतों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि हर सप्ताह डाइट में कुछ नई और हेल्दी चीजें जरूर शामिल करनी चाहिए, ताकि शरीर को सभी जरूरी पोषक तत्व मिलते रहें और स्वास्थ्य संतुलित बना रहे।


  • भीषण गर्मी से बचाव: हीट वेव में सुरक्षित रहने के आसान और असरदार तरीके

    भीषण गर्मी से बचाव: हीट वेव में सुरक्षित रहने के आसान और असरदार तरीके


    नई दिल्ली । देश के कई हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और हीट वेव की स्थिति लोगों की सेहत के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण डिहाइड्रेशन, लू लगना, चक्कर आना, कमजोरी और यहां तक कि गंभीर मामलों में हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
    विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी के इस चरम मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। इसलिए घर से बाहर निकलने से पहले कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद महत्वपूर्ण है।

     शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी कदम
    गर्मी में सबसे पहले ध्यान रखने वाली बात है पर्याप्त पानी पीना। शरीर में पानी की कमी होने से डिहाइड्रेशन और लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। घर से बाहर निकलने से पहले पानी जरूर पिएं और साथ में बोतल भी रखें। इसके अलावा नींबू पानी, छाछ या ओआरएस का सेवन भी शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है।

    हल्के और ढीले कपड़े पहनें
    गर्मी में तंग और गहरे रंग के कपड़े शरीर की गर्मी बढ़ा सकते हैं। इसलिए सूती, हल्के और ढीले कपड़े पहनना बेहतर होता है। सफेद या हल्के रंग के कपड़े धूप को कम अवशोषित करते हैं और शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं।

    धूप से बचाव के लिए जरूरी सुरक्षा
    घर से बाहर निकलते समय सिर को ढकना बेहद जरूरी है। इसके लिए छाता, टोपी या स्कार्फ का उपयोग करें। साथ ही सनग्लासेज पहनने से आंखों को तेज धूप से सुरक्षा मिलती है। सीधे सूरज की रोशनी में लंबे समय तक रहने से बचें, खासकर दोपहर 12 से 4 बजे के बीच।

    हल्का और ताजा खाना खाएं
    गर्मी में भारी और मसालेदार भोजन शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है। इसलिए हल्का और ताजा भोजन करें।
    फल, सलाद, दही और तरल पदार्थों को डाइट में शामिल करें ताकि शरीर को जरूरी पोषण भी मिले और गर्मी से राहत भी।

    लू लगने के लक्षण पहचानना जरूरी
    अगर किसी व्यक्ति को तेज सिरदर्द, उल्टी, चक्कर, अत्यधिक पसीना या कमजोरी महसूस हो तो यह लू के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत ठंडी जगह पर जाएं, पानी पिएं और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

    सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है
    हीट वेव के दौरान थोड़ी सी सावधानी आपको गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकती है। पर्याप्त पानी पीना, सही कपड़े पहनना, धूप से बचाव और हल्का भोजन करना जैसी आदतें अपनाकर आप गर्मी के कहर से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

  • गर्मियों में मिलने वाला औषधीय फल, शरीर के लिए बेहद फायदेमंद

    गर्मियों में मिलने वाला औषधीय फल, शरीर के लिए बेहद फायदेमंद


    नई दिल्ली । प्रकृति ने इंसानों को स्वास्थ्य के लिए अनेक ऐसे फल और पौधे दिए हैं, जो बिना किसी दवा के शरीर को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इन्हीं में से एक है लसोड़ा, जिसे ‘इंडियन चेरी’ के नाम से भी जाना जाता है। यह एक जंगली फल है, जो पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण सेहत के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है।

    लसोड़ा का वैज्ञानिक नाम कॉर्डिया डाइकोटोमा है। यह एक तेजी से बढ़ने वाला पर्णपाती वृक्ष होता है, जो आमतौर पर 10 से 20 मीटर तक ऊंचा हो सकता है। इसके फल, पत्ते और बीज सभी औषधीय गुणों से युक्त होते हैं और आयुर्वेद में इनका लंबे समय से उपयोग किया जाता रहा है।

    इस फल में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, फॉस्फोरस, जिंक और आयरन जैसे कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। इन्हीं गुणों के कारण इसे प्राकृतिक रूप से शरीर को पोषण देने वाला फल माना जाता है। बिहार वन एवं पर्यावरण विभाग के अनुसार, यह न केवल स्वास्थ्य बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहद उपयोगी वृक्ष है, क्योंकि इसे आसानी से उगाया जा सकता है और यह प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

    लसोड़े का स्वाद पकने पर मीठा होता है, जबकि कच्चे फल का उपयोग गोंद जैसी सामग्री के रूप में किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका उपयोग सब्जी, अचार और चटनी बनाने में भी किया जाता है, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लसोड़े में मौजूद उच्च फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है। इसमें मौजूद आयरन शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया को दूर करने में सहायक है। वहीं कैल्शियम और फॉस्फोरस हड्डियों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    इसके अलावा इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट शरीर को हानिकारक फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और इम्युनिटी को मजबूत बनाते हैं। यही कारण है कि इसे एक प्राकृतिक स्वास्थ्य रक्षक फल माना जाता है।

    गर्मियों के मौसम में आसानी से मिलने वाला यह फल न केवल ताजे रूप में खाया जा सकता है, बल्कि अचार और सब्जी के रूप में भी इसका उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसे नियमित आहार में शामिल करने से शरीर को प्राकृतिक रूप से बेहतर पोषण मिलता है और कई बीमारियों से बचाव संभव है।

  • घर पर आसानी से बनने वाले नेचुरल और हाइड्रेटिंग समर बेवरेज रेसिपीज़

    घर पर आसानी से बनने वाले नेचुरल और हाइड्रेटिंग समर बेवरेज रेसिपीज़


    नई दिल्ली |  जैसे-जैसे गर्मियों का पारा बढ़ता है, शरीर में पानी की कमी, थकान और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में बाजार के कोल्ड ड्रिंक्स या शुगर-लोडेड पेय पदार्थों की बजाय घर पर बने नेचुरल ड्रिंक्स ज्यादा फायदेमंद होते हैं। ये न सिर्फ शरीर को ठंडक देते हैं बल्कि इम्युनिटी और पाचन को भी बेहतर बनाते हैं।

    खीरा-मिंट कूलर: ताजगी से भरपूर डिटॉक्स ड्रिंक
    खीरा और पुदीना गर्मियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। खीरे का रस, पुदीने की पत्तियां, नींबू का रस और थोड़ा सा काला नमक मिलाकर एक बेहतरीन डिटॉक्स ड्रिंक तैयार किया जा सकता है। यह ड्रिंक शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में मदद करता है और तुरंत ठंडक देता है।

     आम पन्ना: पारंपरिक स्वाद के साथ हेल्दी कूलिंग
    कच्चे आम से बनने वाला आम पन्ना भारतीय घरों में गर्मियों की शान माना जाता है। इसमें कच्चे आम को उबालकर उसका गूदा निकाला जाता है और फिर इसमें भुना जीरा, काला नमक, पुदीना और पानी मिलाया जाता है। यह न केवल लू से बचाता है बल्कि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस भी बनाए रखता है।

     नारियल पानी स्पेशल मिक्स ड्रिंक
    नारियल पानी अपने आप में एक परफेक्ट हाइड्रेटिंग ड्रिंक है, लेकिन इसे और भी स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें नींबू का रस और कुछ मिंट लीव्स मिलाई जा सकती हैं। यह ड्रिंक तुरंत एनर्जी देती है और शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेटेड रखती है।

     तरबूज कूलर: गर्मी का सबसे मीठा समाधान
    तरबूज में 90% से अधिक पानी होता है, जो इसे एक बेहतरीन समर फ्रूट बनाता है। इसका जूस बनाकर उसमें थोड़ा नींबू और मिंट मिलाने से यह एक रिफ्रेशिंग ड्रिंक बन जाता है। यह शरीर को ठंडा रखने के साथ-साथ स्किन के लिए भी फायदेमंद है।

     नींबू-पानी विद हनी: सिंपल लेकिन असरदार ड्रिंक
    नींबू पानी गर्मियों का सबसे आसान और प्रभावी पेय है। इसमें शहद मिलाने से यह और भी हेल्दी हो जाता है। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है।

    गर्मियों में शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए नेचुरल और घर पर बने ड्रिंक्स सबसे अच्छा विकल्प हैं। ये न सिर्फ शरीर को ठंडक देते हैं बल्कि लंबे समय तक फिट और एक्टिव रहने में मदद करते हैं। इसलिए इस गर्मी में बाजार के ड्रिंक्स से दूरी बनाएं और इन हेल्दी विकल्पों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

  • स्वस्थ रहने का राज: गर्मियों में इम्यून सिस्टम मजबूत करने के असरदार तरीके

    स्वस्थ रहने का राज: गर्मियों में इम्यून सिस्टम मजबूत करने के असरदार तरीके


    नई दिल्ली ।  गर्मी का मौसम जहां एक तरफ तेज धूप और गर्म हवाएं लेकर आता है, वहीं दूसरी ओर यह शरीर के लिए कई तरह की स्वास्थ्य चुनौतियां भी खड़ा करता है। इस दौरान सर्दी-जुकाम, वायरल संक्रमण, पेट की समस्याएं और डिहाइड्रेशन जैसी दिक्कतें आम हो जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सबसे बड़ा कारण कमजोर इम्यूनिटी यानी शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता का कम होना है।
    हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इम्यून सिस्टम मजबूत हो, तो शरीर कई तरह की बीमारियों से खुद ही लड़ सकता है। इसके लिए दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय रोजमर्रा की जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करना सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।
    संतुलित आहार से बढ़ाएं शरीर की ताकत
    इम्यूनिटी को मजबूत बनाने की शुरुआत आपकी थाली से होती है। स्वस्थ और संतुलित आहार शरीर की रक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। रोजाना के भोजन में फल, हरी सब्जियां, दालें, अनाज, नट्स और दही को शामिल करना बेहद जरूरी है। ये सभी चीजें विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाती हैं।वहीं, ज्यादा चीनी, जंक फूड और तले-भुने खाने से दूरी बनाना जरूरी है क्योंकि ये चीजें इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकती हैं।

    पूरी नींद है मजबूत इम्यूनिटी की कुंजी
    शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त नींद लेना बेहद जरूरी है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी नींद इम्यून सिस्टम को एक्टिव और मजबूत बनाए रखती है। नींद के दौरान शरीर अपनी मरम्मत करता है और नई ऊर्जा तैयार करता है। अगर नींद पूरी नहीं होती, तो शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है, जिससे बीमार पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।

    नियमित व्यायाम से बढ़ेगा स्टैमिना और इम्यून पावर
    हर दिन कम से कम 30 से 45 मिनट तक हल्का व्यायाम, योग या वॉक करना शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और शरीर में सूजन कम होती है। नियमित शारीरिक गतिविधि न सिर्फ शरीर को फिट रखती है, बल्कि इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाती है, जिससे संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है।

     तनाव को करें कंट्रोल, इम्यूनिटी रहेगी मजबूत
    ज्यादा तनाव लेना शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर सीधा असर डालता है। तनाव हार्मोन शरीर की इम्यूनिटी को कमजोर कर सकते हैं। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य का। ध्यान, प्राणायाम, संगीत सुनना या अपनी पसंदीदा गतिविधियों में समय बिताना तनाव कम करने के बेहतरीन तरीके हैं। शांत मन शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है।

     शरीर को हाइड्रेट रखना है बेहद जरूरी
    गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेटेड रखना सबसे जरूरी माना जाता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर के टॉक्सिन बाहर निकलते हैं और कोशिकाएं बेहतर तरीके से काम करती हैं। इसके साथ ही नींबू पानी, छाछ और हर्बल टी का सेवन भी शरीर को ठंडक देता है और इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करता है।

    छोटी आदतें, बड़ा स्वास्थ्य लाभ
    गर्मी में बीमारियों से बचने के लिए इम्यूनिटी को मजबूत रखना बेहद जरूरी है। संतुलित आहार, अच्छी नींद, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और पर्याप्त हाइड्रेशन जैसी आदतें अपनाकर शरीर को प्राकृतिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है। ये आसान उपाय न सिर्फ मौसमी बीमारियों से बचाते हैं, बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जीने में भी मदद करते हैं।

  • हंतावायरस का खतरा बढ़ा: साधारण बुखार समझने की गलती पड़ सकती है भारी, डॉक्टरों ने दी गंभीर चेतावनी

    हंतावायरस का खतरा बढ़ा: साधारण बुखार समझने की गलती पड़ सकती है भारी, डॉक्टरों ने दी गंभीर चेतावनी


    नई दिल्ली। Hantavirus Infection को लेकर दुनियाभर में चिंता बढ़ती जा रही है। हाल के मामलों में कई लोगों की मौत के बाद डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इस वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में यह गंभीर मेडिकल इमरजेंसी बन सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआत में मरीज को बुखार, थकान, सिरदर्द, शरीर दर्द, ठंड लगना, उल्टी और पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है। यही वजह है कि कई लोग इसे डेंगू, फ्लू या सामान्य वायरल संक्रमण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

    अमृता अस्पताल फरीदाबाद के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप बजाद के मुताबिक यह संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और कृन्तकों के यूरिन, लार और मल के संपर्क से फैलता है। लंबे समय से बंद कमरों, गोदामों या स्टोर रूम की सफाई के दौरान धूल के जरिए वायरस शरीर में पहुंच सकता है।

    डॉक्टरों का कहना है कि असली खतरा तब शुरू होता है जब संक्रमण फेफड़ों को प्रभावित करने लगता है। मरीज को सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न, सूखी खांसी और ऑक्सीजन लेवल गिरने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। गंभीर मामलों में फेफड़ों में पानी भर सकता है और मरीज को ICU या वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार इसका सबसे खतरनाक रूप Hantavirus Pulmonary Syndrome माना जाता है, जिसकी मृत्यु दर गंभीर मामलों में 35 से 40 प्रतिशत तक बताई गई है।

    डॉक्टरों ने सलाह दी है कि घरों और गोदामों में चूहों की संख्या नियंत्रित रखें, सफाई के दौरान मास्क और दस्ताने पहनें तथा बंद कमरों में उचित वेंटिलेशन बनाए रखें। शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत मेडिकल जांच कराना बेहद जरूरी माना जा रहा है

  • कटरा: मां वैष्णो देवी की नगरी, जहां श्रद्धा के साथ खानपान के नियम भी निभाए जाते हैं

    कटरा: मां वैष्णो देवी की नगरी, जहां श्रद्धा के साथ खानपान के नियम भी निभाए जाते हैं

    नई दिल्ली। भारत में खाने की बात हो और प्याज-लहसुन का जिक्र न आए, ऐसा शायद ही कभी होता हो। हर घर की रसोई से लेकर बड़े-बड़े होटलों तक इन दोनों का इस्तेमाल आम माना जाता है। लेकिन जम्मू-कश्मीर का कटरा एक ऐसा शहर है, जहां पहुंचते ही खान-पान की पूरी तस्वीर बदल जाती है। यहां न बाजारों में प्याज-लहसुन बिकता दिखाई देता है, न ढाबों और होटलों के खाने में इसका इस्तेमाल होता है और न ही लोग इसे अपने घरों में रखना पसंद करते हैं। यही वजह है कि कटरा को देश के सबसे अनोखे धार्मिक शहरों में गिना जाता है।

    कटरा माता वैष्णो देवी मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां से माता के दरबार के लिए यात्रा शुरू करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यात्रा शुरू करने से पहले शरीर और मन की पवित्रता बनाए रखना जरूरी माना जाता है। इसी वजह से पूरे शहर में सात्विक भोजन की परंपरा विकसित हुई। स्थानीय लोगों का मानना है कि प्याज और लहसुन तामसिक भोजन की श्रेणी में आते हैं, जो मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। यही कारण है कि वर्षों से यहां इनका इस्तेमाल नहीं किया जाता।

    सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह परंपरा किसी सरकारी आदेश या कानूनी प्रतिबंध के कारण नहीं चल रही, बल्कि लोगों की आस्था और आपसी सम्मान से कायम है। यहां रहने वाले दूसरे धर्मों के लोग, यहां तक कि मुस्लिम परिवार भी स्थानीय परंपराओं का सम्मान करते हुए प्याज-लहसुन से दूरी बनाए रखते हैं। यही सामाजिक सौहार्द कटरा को बाकी शहरों से अलग पहचान देता है।

    अक्सर लोगों को लगता है कि बिना प्याज और लहसुन के खाना स्वादिष्ट नहीं हो सकता, लेकिन कटरा इस सोच को बदल देता है। यहां के रसोइए हींग, अदरक, हरी मिर्च और खास मसालों के इस्तेमाल से ऐसा स्वाद तैयार करते हैं कि श्रद्धालु खाने की तारीफ किए बिना नहीं रहते। दाल, कढ़ी, सब्जियां, पूरी और चटनियों का स्वाद यहां अलग ही अनुभव देता है। कई लोग तो कटरा के सात्विक भोजन को सेहत और स्वाद का बेहतरीन मेल मानते हैं।

    कटरा की यह परंपरा सिर्फ खान-पान तक सीमित नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति और धार्मिक वातावरण का हिस्सा बन चुकी है। दुकानदार भी प्याज-लहसुन का स्टॉक नहीं रखते और यदि कोई पर्यटक इसकी मांग करता है, तो उसे विनम्रता से यहां की परंपरा के बारे में बताया जाता है। यही वजह है कि कटरा आज भी अपनी आध्यात्मिक पहचान और सात्विक जीवनशैली के कारण देश-दुनि

  • ग्लोइंग और साफ त्वचा के लिए Azelaic Acid बना पसंदीदा विकल्प, एक्सपर्ट्स ने बताए इसके फायदे

    ग्लोइंग और साफ त्वचा के लिए Azelaic Acid बना पसंदीदा विकल्प, एक्सपर्ट्स ने बताए इसके फायदे

    नई दिल्ली ।आज के समय में स्किनकेयर केवल सुंदर दिखने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोग अब अपनी त्वचा को स्वस्थ और संतुलित बनाए रखने पर भी ध्यान देने लगे हैं। बाजार में मौजूद कई एक्टिव इंग्रीडिएंट्स के बीच Azelaic Acid तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। त्वचा विशेषज्ञ इसे एक ऐसा तत्व मानते हैं जो चेहरे की कई सामान्य समस्याओं पर एक साथ काम करने की क्षमता रखता है।

    Azelaic Acid खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी माना जाता है जो मुहांसों, चेहरे की लालिमा, असमान स्किन टोन और जिद्दी दाग-धब्बों से परेशान रहते हैं। यह त्वचा को धीरे-धीरे साफ और संतुलित बनाने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह त्वचा पर ज्यादा कठोर प्रभाव डाले बिना असर दिखाता है, इसलिए संवेदनशील त्वचा वाले लोग भी इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं।

    यह एक्टिव त्वचा की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचाने के बजाय अंदर से काम करता है। यह स्किन पोर्स को साफ रखने, बैक्टीरिया को नियंत्रित करने और सूजन को कम करने में मदद करता है। इसी कारण इसे पिंपल्स और उनके निशानों दोनों पर असरदार माना जाता है। कई लोग इसे अपने स्किनकेयर रूटीन का स्थायी हिस्सा बना रहे हैं क्योंकि यह लंबे समय तक त्वचा की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकता है।

    त्वचा विशेषज्ञ बताते हैं कि Azelaic Acid का इस्तेमाल धीरे-धीरे शुरू करना चाहिए। शुरुआत में कम प्रतिशत वाले प्रोडक्ट्स का उपयोग बेहतर माना जाता है ताकि त्वचा इस एक्टिव के अनुकूल हो सके। शुरुआती दिनों में हल्की झुनझुनी, खुजली या सूखापन महसूस होना सामान्य हो सकता है, लेकिन समय के साथ त्वचा इसकी आदी हो जाती है। यदि जलन अधिक महसूस हो तो विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी होता है।

    इस एक्टिव की खास बात यह भी है कि इसे अन्य स्किनकेयर तत्वों के साथ संतुलित तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। कई लोग इसे नियासिनमाइड और विटामिन-सी जैसे इंग्रीडिएंट्स के साथ उपयोग करते हैं ताकि त्वचा की चमक और रंगत बेहतर हो सके। हालांकि, किसी भी नए एक्टिव को रूटीन में शामिल करने से पहले अपनी त्वचा की जरूरतों को समझना बेहद जरूरी माना जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आज की जीवनशैली, बढ़ते प्रदूषण और तनाव के कारण त्वचा संबंधी समस्याएं पहले से ज्यादा बढ़ गई हैं। ऐसे में Azelaic Acid जैसे एक्टिव्स लोगों के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर सामने आए हैं। यह न केवल चेहरे की बनावट को बेहतर बनाने में मदद करता है, बल्कि त्वचा को अधिक संतुलित और स्वस्थ दिखाने में भी योगदान देता है।

    स्किनकेयर में धैर्य को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है और Azelaic Acid के साथ भी यही बात लागू होती है। इसके परिणाम धीरे-धीरे दिखाई देते हैं। कुछ लोगों को शुरुआती सुधार कुछ हफ्तों में महसूस हो सकता है, जबकि दाग-धब्बों और पिग्मेंटेशन पर असर दिखने में अधिक समय लग सकता है। नियमित और सही इस्तेमाल के साथ यह त्वचा की रंगत और टेक्सचर में स्पष्ट बदलाव ला सकता है।

  • रेस्टोरेंट स्टाइल स्वाद अब घर में, पनीर दो प्याजा की सिंपल रेसिपी से बढ़ाएं खाने का मज़ा..

    रेस्टोरेंट स्टाइल स्वाद अब घर में, पनीर दो प्याजा की सिंपल रेसिपी से बढ़ाएं खाने का मज़ा..


    नई दिल्ली ।
    रसोई में कुछ ऐसी डिशें होती हैं जो साधारण सामग्री से बनकर भी स्वाद में बेहद खास बन जाती हैं और उन्हीं में से एक है पनीर दो प्याजा। यह डिश अपने मसालेदार फ्लेवर, प्याज की खास बनावट और ढाबे जैसे स्वाद के कारण हर घर में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए किसी जटिल प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती, बल्कि कुछ आसान स्टेप्स को फॉलो करके ही एक बेहतरीन लंच या डिनर तैयार किया जा सकता है।

    इस डिश की असली पहचान इसका नाम है, जिसमें “दो प्याजा” का मतलब है प्याज का दो अलग-अलग रूपों में इस्तेमाल। एक तरफ बारीक कटा प्याज ग्रेवी को गहराई और स्वाद देता है, जबकि दूसरी तरफ बड़े टुकड़ों में कटा प्याज डिश में हल्का क्रंच और ताजगी जोड़ता है। यही संयोजन इसे बाकी पनीर की सब्जियों से अलग बनाता है और इसे खास स्वाद प्रदान करता है।

    पनीर दो प्याजा बनाने की शुरुआत सामग्री की तैयारी से होती है। पनीर को मध्यम आकार के क्यूब्स में काटकर अलग रखा जाता है। प्याज को दो हिस्सों में बांटा जाता है, एक हिस्सा बारीक काटा जाता है और दूसरा बड़े टुकड़ों में रखा जाता है। इसके साथ टमाटर, अदरक-लहसुन पेस्ट और हरी मिर्च मिलकर इस डिश की बेस ग्रेवी तैयार करते हैं, जो आगे चलकर मसालों के साथ मिलकर गहरा स्वाद देती है।

    पकाने की प्रक्रिया में सबसे पहले तेल या बटर को गर्म किया जाता है और उसमें बारीक कटे प्याज को सुनहरा होने तक भुना जाता है। इसके बाद अदरक-लहसुन पेस्ट और हरी मिर्च डालकर उसकी कच्ची खुशबू खत्म की जाती है। फिर टमाटर मिलाकर तब तक पकाया जाता है जब तक मिश्रण तेल न छोड़ने लगे। इसके बाद हल्दी, धनिया और लाल मिर्च पाउडर डालकर मसाले को अच्छे से मिलाया जाता है ताकि ग्रेवी का स्वाद और रंग दोनों निखर जाएं।

    इसके बाद पनीर के टुकड़े धीरे-धीरे डालकर हल्के हाथों से मिलाए जाते हैं ताकि उनका आकार बना रहे और वे मसाले को अच्छी तरह सोख लें। जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी डालकर इसे कुछ मिनट तक पकने दिया जाता है। इसके बाद बड़े कटे हुए प्याज डाले जाते हैं, जो हल्का पककर भी अपनी क्रंची बनावट बनाए रखते हैं और डिश में एक अलग टेक्सचर जोड़ते हैं।

    अंत में गरम मसाला और हरा धनिया डालकर इसे सजाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और खुशबू दोनों और बढ़ जाते हैं। यह पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में एक साधारण किचन को रेस्टोरेंट जैसे स्वाद में बदल देती है। तैयार पनीर दो प्याजा को गरमा-गरम रोटी, नान या जीरा राइस के साथ परोसा जाए तो इसका स्वाद और भी शानदार हो जाता है।

    इस तरह यह डिश न केवल रोजमर्रा के खाने को खास बनाती है बल्कि किसी भी मौके पर एक बेहतरीन विकल्प के रूप में भी सामने आती है। सरल सामग्री और आसान विधि के कारण यह हर घर की पसंद बनती जा रही है और अपने ढाबे जैसे स्वाद के कारण लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।