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  • गर्मियों में ठंडक और ताजगी का डबल मजा, घर पर बनाएं हेल्दी और स्वादिष्ट समर स्पेशल ड्रिंक्स..

    गर्मियों में ठंडक और ताजगी का डबल मजा, घर पर बनाएं हेल्दी और स्वादिष्ट समर स्पेशल ड्रिंक्स..

    नई दिल्ली ।  गर्मियों का मौसम अपने साथ तेज धूप, थकान और शरीर में पानी की कमी जैसी कई परेशानियां लेकर आता है। ऐसे समय में लोग ऐसे पेय पदार्थों की तलाश करते हैं जो शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ स्वाद और ऊर्जा भी प्रदान करें। यही कारण है कि घर पर बनने वाले हेल्दी और फ्रेश ड्रिंक्स इन दिनों काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। ताजे फलों, सब्जियों और प्राकृतिक सामग्री से तैयार किए गए ये समर स्पेशल ड्रिंक्स न केवल शरीर को हाइड्रेट रखते हैं बल्कि गर्मी के असर को कम करने में भी मदद करते हैं।

    गर्मियों में चुकंदर और गाजर से तैयार होने वाला हेल्दी ड्रिंक शरीर को एनर्जी देने के साथ-साथ ठंडक भी पहुंचाता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर को तरोताजा बनाए रखते हैं और थकान को दूर करने में मदद करते हैं। इसी तरह गुलाब और अदरक से तैयार ड्रिंक स्वाद और ताजगी का अनोखा मेल माना जाता है, जो गर्मी में शरीर को तुरंत राहत देता है। इसमें पुदीना और नींबू का इस्तेमाल स्वाद को और भी बढ़ा देता है।

    फलों से बने कूलर्स भी इस मौसम में लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। सेब और खस के स्वाद से तैयार ठंडा पेय शरीर को सुकून देने के साथ गर्मी से राहत देता है। वहीं चीकू और ऑरेंज फ्लेवर से तैयार कूलर बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है। इसमें दूध और क्रीम का स्वाद इसे और अधिक रिच और खास बना देता है।

    गर्मियों में नींबू आधारित ड्रिंक्स की मांग सबसे ज्यादा रहती है और चेरी लेमोनेड इसका शानदार उदाहरण है। चेरी, नींबू और सोडा वॉटर से तैयार यह ड्रिंक शरीर को इंस्टेंट फ्रेशनेस देता है। इसका हल्का खट्टा-मीठा स्वाद गर्मी में मूड को भी फ्रेश कर देता है। इसी तरह मैंगो और पाइनएप्पल का कॉम्बिनेशन भी समर सीजन में काफी पसंद किया जाता है। पुदीना और शहद के साथ तैयार यह ड्रिंक स्वाद के साथ शरीर को ठंडा रखने में भी मदद करता है।

    मौसंबी स्लश जैसे पेय गर्मी में शरीर को तुरंत ठंडक पहुंचाने के लिए बेहतरीन विकल्प माने जाते हैं। ताजे फलों के रस से तैयार ये ड्रिंक्स शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखते हैं। इसके अलावा आलूबुखारे और ऑरेंज फ्लेवर से तैयार कूलर भी इस मौसम में अलग स्वाद का अनुभव देता है।

    आजकल लोग बाजार में मिलने वाले अधिक शुगर और केमिकल वाले पेय पदार्थों की बजाय घर पर तैयार हेल्दी ड्रिंक्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। ये ड्रिंक्स स्वादिष्ट होने के साथ पौष्टिक भी होते हैं और इन्हें बेहद कम समय में आसानी से तैयार किया जा सकता है। गर्मियों में यदि खानपान के साथ ऐसे हेल्दी और फ्रेश ड्रिंक्स को शामिल किया जाए तो शरीर को ठंडक, ऊर्जा और ताजगी लंबे समय तक मिलती रहती है।

  • स्किन केयर हैक: अलसी का पानी बना सकता है चेहरा निखरा और साफ

    स्किन केयर हैक: अलसी का पानी बना सकता है चेहरा निखरा और साफ


    नई दिल्ली। अलसी के बीज यानी फ्लैक्ससीड्स को स्वास्थ्य के साथ-साथ स्किन के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। इनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं। जब अलसी के बीजों को पानी में भिगोकर उनका जेल या अर्क तैयार किया जाता है, तो यही “अलसी का पानी” स्किन के लिए एक असरदार घरेलू उपाय बन जाता है।

    दाग-धब्बों और पिगमेंटेशन में राहत
    अलसी के पानी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और लिग्नान्स त्वचा की रंगत सुधारने में मदद करते हैं। यह धीरे-धीरे चेहरे पर मौजूद दाग-धब्बों और पिगमेंटेशन को हल्का करता है। नियमित इस्तेमाल से त्वचा ज्यादा साफ, स्मूद और समान रंगत वाली दिखाई देने लगती है।

    त्वचा को देता है गहराई से हाइड्रेशन
    अलसी का पानी स्किन को अंदर तक नमी प्रदान करता है। यह ड्राईनेस को कम करके त्वचा को सॉफ्ट और ग्लोइंग बनाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व स्किन की ऊपरी परत को रिपेयर करते हैं, जिससे चेहरा हेल्दी और फ्रेश नजर आता है।

    मुंहासों और सूजन में फायदेमंद
    अलसी के बीजों में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मुंहासों की समस्या को कम करने में मदद करते हैं। यह स्किन की जलन और सूजन को शांत करता है और पोर्स को साफ रखता है, जिससे नए पिंपल्स बनने की संभावना कम हो जाती है।

    एंटी-एजिंग असर और कोलेजन बूस्ट
    अलसी का पानी त्वचा में कोलेजन उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद करता है। इससे त्वचा टाइट रहती है और झुर्रियां व फाइन लाइन्स कम दिखाई देती हैं। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स फ्री रेडिकल्स से लड़कर स्किन को लंबे समय तक जवां बनाए रखने में मदद करते हैं।

    अलसी का पानी कैसे लगाएं?
    अलसी का फेस जेल तैयार करने के लिए 1–2 चम्मच अलसी के बीजों को एक कप पानी में रातभर भिगो दें। सुबह इसे हल्का उबालकर या छानकर जेल जैसा पानी निकाल लें। इस पानी को कॉटन की मदद से चेहरे और गर्दन पर लगाएं। 15–20 मिनट बाद धो लें या चाहें तो रातभर भी लगा सकते हैं। बाद में हल्का मॉइश्चराइज़र जरूर लगाएं।

    अलसी के बीज का पानी एक आसान, सस्ता और नेचुरल स्किन केयर उपाय है। यह दाग-धब्बों को कम करने के साथ-साथ त्वचा को हाइड्रेट, टाइट और ग्लोइंग बनाने में मदद करता है। नियमित उपयोग से स्किन की क्वालिटी में धीरे-धीरे सुधार देखा जा सकता है।

  • सरकारी दफ्तरों में सफेद तौलिये का राज आया सामने, आखिर क्यों अफसरों की कुर्सियों पर आज भी कायम है यह पुरानी परंपरा

    सरकारी दफ्तरों में सफेद तौलिये का राज आया सामने, आखिर क्यों अफसरों की कुर्सियों पर आज भी कायम है यह पुरानी परंपरा

    नई दिल्ली ।  सरकारी दफ्तरों में अगर आपने कभी किसी बड़े अधिकारी के केबिन में कदम रखा हो, तो एक चीज जरूर आपकी नजरों में आई होगी—कुर्सी की पीठ पर सलीके से रखा सफेद तौलिया। वर्षों से यह दृश्य सरकारी कार्यालयों की पहचान बना हुआ है। बदलते दौर, आधुनिक फर्नीचर और एयर कंडीशन ऑफिसों के बावजूद यह परंपरा आज भी कायम है। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर सरकारी अफसरों की कुर्सियों पर सिर्फ सफेद तौलिया ही क्यों लगाया जाता है? लाल, नीला या कोई दूसरा रंग क्यों नहीं? इसके पीछे छिपी वजह बेहद दिलचस्प और इतिहास से जुड़ी हुई है।

    दरअसल, इस परंपरा की शुरुआत ब्रिटिश शासनकाल से मानी जाती है। उस दौर में सरकारी कार्यालयों में आज जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद नहीं थीं। न एयर कंडीशनर होते थे और न ही बेहतर वेंटिलेशन की व्यवस्था। गर्मी और उमस के बीच अधिकारी लंबे समय तक काम करते थे, जिससे कुर्सियों पर पसीने और धूल का असर जल्दी दिखाई देता था। ऐसे में कुर्सियों को साफ और सुरक्षित रखने के लिए उन पर तौलिया डालने की शुरुआत की गई। सफेद रंग इसलिए चुना गया क्योंकि उस पर गंदगी तुरंत नजर आ जाती थी और उसे समय-समय पर बदलना आसान होता था।

    कुछ जानकारों के अनुसार, उस समय भारतीय लोगों में बालों में तेल लगाने की आदत आम थी। इससे कुर्सियों के कवर जल्दी खराब हो जाते थे। अंग्रेज अधिकारियों ने कुर्सियों को तेल और गंदगी से बचाने के लिए सफेद तौलिये का इस्तेमाल शुरू किया। धीरे-धीरे यह केवल सफाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकारी पद और अधिकार का प्रतीक बन गया। समय बीतने के साथ सफेद तौलिया अफसरों की पहचान में शामिल हो गया और यह परंपरा सरकारी संस्कृति का हिस्सा बन गई।

    आज भी कई सरकारी कार्यालयों में वरिष्ठ अधिकारियों की कुर्सियों पर सफेद तौलिया अनिवार्य रूप से दिखाई देता है। खास बात यह है कि कई जगहों पर इन्हें नियमित रूप से बदला भी जाता है ताकि साफ-सफाई बनी रहे। सफेद तौलिया अब केवल स्वच्छता का साधन नहीं, बल्कि अनुशासन और प्रशासनिक गरिमा का प्रतीक माना जाता है। बड़े अधिकारियों की कुर्सियों पर इसका होना उनके पद और जिम्मेदारी को दर्शाने वाला संकेत भी बन चुका है।

    हालांकि आधुनिक दौर में ऑफिसों का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। शानदार इंटीरियर, आरामदायक कुर्सियां, एयर कंडीशनर और आधुनिक सुविधाएं लगभग हर बड़े सरकारी कार्यालय में मौजूद हैं, लेकिन सफेद तौलिये की परंपरा अभी भी खत्म नहीं हुई। कई लोग इसे सरकारी सिस्टम की पुरानी पहचान मानते हैं, तो कुछ इसे एक तरह का स्टेटस सिंबल भी समझते हैं।

    दिलचस्प बात यह है कि निजी कंपनियों और कॉर्पोरेट ऑफिसों में यह परंपरा लगभग दिखाई नहीं देती, जबकि सरकारी दफ्तरों में इसका महत्व आज भी बरकरार है। यही वजह है कि सफेद तौलिया अब सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि भारतीय सरकारी व्यवस्था की एक खास पहचान बन चुका है। वर्षों पुरानी यह परंपरा आज भी उसी मजबूती के साथ जारी है और शायद आने वाले समय में भी सरकारी दफ्तरों की संस्कृति का हिस्सा बनी रहेगी।

  • नींबू पानी के चमत्कारी फायदे: ग्लोइंग स्किन और हेल्दी लाइफ का नेचुरल राज

    नींबू पानी के चमत्कारी फायदे: ग्लोइंग स्किन और हेल्दी लाइफ का नेचुरल राज


    नई दिल्ली। नींबू पानी को आयुर्वेद और आधुनिक हेल्थ साइंस दोनों में एक बेहद फायदेमंद ड्रिंक माना गया है। इसमें मौजूद विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट्स और साइट्रिक एसिड शरीर को अंदर से डिटॉक्स करने में मदद करते हैं, जिसका सीधा असर त्वचा पर दिखाई देता है।

    नियमित रूप से नींबू पानी पीने से शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं, जिससे स्किन साफ, फ्रेश और ग्लोइंग नजर आती है। यही कारण है कि इसे “नेचुरल ब्यूटी ड्रिंक” भी कहा जाता है।

    मुंहासों और पिंपल्स में राहत
    नींबू पानी में मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया को कम करने में मदद करते हैं। इससे मुंहासे बनने की संभावना घटती है और स्किन धीरे-धीरे साफ होने लगती है। इसके अलावा इसमें मौजूद साइट्रिक एसिड डेड स्किन सेल्स को हटाने में भी मदद करता है, जिससे स्किन ज्यादा स्मूद और क्लियर दिखती है।

    ब्लैकहेड्स और ऑयली स्किन पर असर
    नींबू पानी शरीर की अंदरूनी सफाई के साथ-साथ स्किन के ऑयल बैलेंस को भी सुधारता है। इससे चेहरे पर एक्स्ट्रा ऑयल कम होता है, जो ब्लैकहेड्स और पोर्स की समस्या को कम करने में मदद करता है। नियमित सेवन से स्किन ज्यादा बैलेंस्ड और हेल्दी दिखने लगती है।

    कोलेजन बढ़ाने में मददगार
    नींबू में मौजूद विटामिन C कोलेजन के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। कोलेजन एक ऐसा प्रोटीन है जो त्वचा को टाइट और जवां बनाए रखता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, कोलेजन कम होने लगता है, जिससे झुर्रियां और फाइन लाइन्स दिखने लगती हैं। नींबू पानी इसका प्राकृतिक समाधान माना जाता है।

    डिटॉक्स और स्किन ग्लो का कनेक्शन
    नींबू पानी शरीर को डिटॉक्स करने का काम करता है। यह लीवर को साफ रखने में मदद करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। जब शरीर अंदर से साफ होता है, तो उसका असर चेहरे पर भी साफ दिखाई देता है। इसी वजह से इसे ग्लोइंग स्किन पाने का आसान और प्राकृतिक तरीका माना जाता है।

    नींबू पानी पीने का सही समय
    विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पीना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर को दिनभर एक्टिव रखता है और मेटाबॉलिज्म को बेहतर करता है।

    नींबू पानी कोई जादुई इलाज नहीं, लेकिन यह एक सरल और प्राकृतिक तरीका जरूर है जो धीरे-धीरे स्किन और हेल्थ दोनों को सुधारता है। नियमित सेवन से त्वचा साफ, चमकदार और जवान बनी रह सकती है।

  • गर्मियों में पुदीना पानी का कमाल, शरीर को ठंडक देने के साथ मिलते हैं कई स्वास्थ्य लाभ

    गर्मियों में पुदीना पानी का कमाल, शरीर को ठंडक देने के साथ मिलते हैं कई स्वास्थ्य लाभ

    नई दिल्ली ।  गर्मियों के बढ़ते तापमान के बीच शरीर को ठंडा और संतुलित रखना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे समय में प्राकृतिक और घरेलू उपायों की ओर लोगों का रुझान बढ़ता है, जिनमें पुदीना पानी एक सरल लेकिन बेहद प्रभावी विकल्प के रूप में सामने आता है। यह न केवल शरीर को ठंडक प्रदान करने में मदद करता है, बल्कि कई शारीरिक और मानसिक लाभ भी देता है, जिससे गर्मी के मौसम में सेहत को बेहतर बनाए रखा जा सकता है।

    पुदीना एक ऐसी जड़ी-बूटी है जिसमें प्राकृतिक रूप से ठंडक प्रदान करने वाले गुण पाए जाते हैं। इसकी तासीर ठंडी मानी जाती है, जो शरीर के तापमान को संतुलित करने में सहायक होती है। जब इसे पानी में मिलाकर सेवन किया जाता है, तो यह शरीर के अंदरूनी तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है और गर्मी के कारण होने वाली थकान और बेचैनी को कम कर सकता है।

    पुदीना पानी का सबसे बड़ा लाभ यह माना जाता है कि यह शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है और लू लगने जैसी समस्याओं से राहत दिला सकता है। लगातार गर्म वातावरण में रहने के कारण शरीर में जो गर्मी जमा होती है, उसे यह प्राकृतिक पेय कम करने में सहायक हो सकता है। इसके नियमित सेवन से व्यक्ति अधिक तरोताजा और ऊर्जावान महसूस कर सकता है।

    इसके अलावा यह पाचन तंत्र के लिए भी लाभकारी माना जाता है। गर्मियों में अक्सर गैस, अपच और पेट भारी रहने जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। पुदीना पानी इन समस्याओं को कम करने में सहायक हो सकता है क्योंकि यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाने और पेट को हल्का महसूस कराने में मदद करता है।

    गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी होना एक आम समस्या है, जिससे कमजोरी और चक्कर आने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। पुदीना पानी शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेट रखने में मदद करता है, जिससे शरीर में पानी का संतुलन बना रहता है और डिहाइड्रेशन का खतरा कम हो सकता है।

    यह भी देखा गया है कि पुदीना पानी मुंह की दुर्गंध को कम करने में सहायक होता है। यह प्राकृतिक रूप से सांसों को ताजगी प्रदान करता है, जिससे व्यक्ति अधिक फ्रेश महसूस करता है। साथ ही इसकी सुगंध और ठंडक मानसिक तनाव और थकान को कम करने में भी मदद कर सकती है, जिससे मूड बेहतर रहता है।

    त्वचा के लिए भी पुदीना पानी लाभकारी माना जाता है। यह शरीर को अंदर से डिटॉक्स करने में मदद करता है, जिसका प्रभाव त्वचा पर साफ दिखाई देता है। नियमित सेवन से त्वचा अधिक साफ, फ्रेश और स्वस्थ नजर आ सकती है।

    पुदीना पानी बनाना भी बेहद आसान है। ताजी पुदीना पत्तियों को पानी में डालकर उसमें नींबू और हल्का काला नमक मिलाकर कुछ घंटों के लिए छोड़ दिया जाता है। इसके बाद इसे ठंडा करके दिनभर सेवन किया जा सकता है। यह एक सरल, सस्ता और प्राकृतिक उपाय है जो गर्मियों में सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है।

  • झाड़ू जैसे बेजान बालों के लिए घरेलू उपाय, मिल सकती है पार्लर जैसी चमक

    झाड़ू जैसे बेजान बालों के लिए घरेलू उपाय, मिल सकती है पार्लर जैसी चमक


    नई दिल्ली। आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में बालों की सेहत सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है। धूल, प्रदूषण, तनाव और गलत लाइफस्टाइल मिलकर बालों को कमजोर बना रहे हैं। धीरे-धीरे ये बाल अपनी प्राकृतिक चमक खोकर झाड़ू जैसे रूखे और बेजान दिखने लगते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सिर्फ बाहरी देखभाल नहीं बल्कि अंदरूनी कारण भी बालों की हालत बिगाड़ते हैं जैसे खराब डाइट, कम पानी पीना और नींद की कमी।

    महंगे प्रोडक्ट्स क्यों नहीं देते हमेशा रिजल्ट?
    अक्सर लोग सोचते हैं कि महंगे शैंपू, कंडीशनर और पार्लर ट्रीटमेंट से बाल ठीक हो जाएंगे। लेकिन सच्चाई यह है कि बालों की जड़ें कमजोर होने पर सिर्फ ऊपर से की गई केयर ज्यादा असर नहीं दिखा पाती। बार-बार शैंपू बदलना और नए प्रोडक्ट्स ट्राय करना भी स्कैल्प के नेचुरल बैलेंस को बिगाड़ सकता है, जिससे बाल और ज्यादा रूखे हो जाते हैं।

    किचन में छिपा है बालों का असली इलाज
    सबसे खास बात यह है कि बालों की देखभाल के लिए आपको ज्यादा खर्च करने की जरूरत नहीं है। आपकी रसोई में मौजूद चीजें ही बालों को नई जिंदगी दे सकती हैं।
    दही बालों को ठंडक और नमी देता है
    शहद बालों को मुलायम बनाता है
    नारियल तेल जड़ों को मजबूत करता है
    करी पत्ता बालों की ग्रोथ में मदद करता है
    इन देसी उपायों का असर धीरे-धीरे दिखता है, लेकिन यह लंबे समय तक टिकाऊ होता है।

    छोटी गलतियां जो बालों को कर रही हैं खराब
    बालों की खराब हालत के पीछे कई छोटी-छोटी गलतियां जिम्मेदार होती हैं, जैसे:
    गीले बालों में कंघी करना
    ज्यादा हीट स्टाइलिंग का इस्तेमाल
    रात में बालों की सही देखभाल न करना
    गंदे तकिए पर सोना
    हेयर केयर में लापरवाही
    ये आदतें धीरे-धीरे बालों को कमजोर बना देती हैं और उनकी चमक खत्म कर देती हैं।

    आसान देसी हेयर केयर रूटीन
    अगर बाल झाड़ू जैसे हो गए हैं, तो कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं:
    हफ्ते में 2 बार हल्का गर्म नारियल तेल से मसाज करें
    करी पत्ते डालकर तेल तैयार करें और स्कैल्प पर लगाएं
    दही और शहद का हेयर मास्क लगाएं
    माइल्ड शैंपू का ही इस्तेमाल करें और बार-बार बदलने से बचें

    बालों की खूबसूरती सिर्फ महंगे प्रोडक्ट्स से नहीं, बल्कि सही देखभाल और देसी नुस्खों से वापस लाई जा सकती है। अगर आप नियमित रूप से स्कैल्प की सफाई, सही डाइट और प्राकृतिक उपायों को अपनाते हैं, तो बेजान बाल भी फिर से सिल्की, शाइनी और हेल्दी बन सकते हैं।

  • टैनिंग दूर करने के आसान घरेलू उपाय, चेहरा बनेगा निखरा

    टैनिंग दूर करने के आसान घरेलू उपाय, चेहरा बनेगा निखरा

    लाइफस्टाइल | गर्मियों में धूप, धूल और पसीने की वजह से त्वचा डल और टैन हो जाती है। ऐसे में लोग महंगे फेस वॉश और स्क्रब का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कई बार इनमें मौजूद केमिकल्स त्वचा को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। इसी कारण अब लोग घरेलू और नेचुरल स्किन केयर की ओर लौट रहे हैं।

    घर पर बने क्लींजर के फायदे
    ब्यूटी एक्सपर्ट्स के अनुसार रसोई में मौजूद कुछ प्राकृतिक चीजें त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं:
    त्वचा को गहराई से साफ करती हैं
    डेड स्किन हटाती हैं
    टैनिंग कम करती हैं
    स्किन को सॉफ्ट और ग्लोइंग बनाती हैं

    कैसे बनाएं होममेड फेस क्लींजर?
    इसके लिए आपको चाहिए:
    1 चम्मच कॉफी पाउडर
    1 चम्मच ताजा दही
    1 चम्मच शहद
    इन तीनों को अच्छी तरह मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट तैयार करें।

    कैसे करें इस्तेमाल?
    चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करें
    20–25 मिनट तक छोड़ दें
    फिर साफ पानी से धो लें
    हफ्ते में 2–3 बार इस्तेमाल करें

    सावधानी जरूरी है
    पहली बार इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। अगर जलन या एलर्जी महसूस हो तो तुरंत उपयोग बंद कर दें।
    यह घरेलू क्लींजर बिना केमिकल के त्वचा को साफ करने और प्राकृतिक निखार देने में मदद कर सकता है। नियमित इस्तेमाल से चेहरा ज्यादा मुलायम, साफ और चमकदार दिखाई देने लगता है।
  • हेयर फॉल रोकने के लिए स्कैल्प क्लीनिंग है अहम, एक्सपर्ट टिप्स

    हेयर फॉल रोकने के लिए स्कैल्प क्लीनिंग है अहम, एक्सपर्ट टिप्स


    नई दिल्ली। आज के समय में बाल झड़ने की समस्या हर उम्र के लोगों में तेजी से बढ़ रही है। जैसे ही बाल गिरने लगते हैं, लोग तुरंत नया शैंपू खरीद लेते हैं कभी प्याज वाला, कभी अदरक वाला, कभी “हर्बल” नाम देखकर। मार्केटिंग भी इसी उम्मीद पर टिकी होती है कि लोग सोचेंगे कि नया प्रोडक्ट ही उनकी समस्या का हल है। लेकिन हेयर एक्सपर्ट जावेद हबीब के मुताबिक यह सोच पूरी तरह सही नहीं है। उनका मानना है कि शैंपू बदलने से बालों का झड़ना नहीं रुकता, क्योंकि असली समस्या शैंपू नहीं बल्कि स्कैल्प की स्थिति होती है।

    स्कैल्प की गंदगी कैसे बढ़ाती है हेयर फॉल?
    बालों की जड़ों यानी स्कैल्प पर अगर तेल, धूल और पसीना जमा हो जाए तो रोमछिद्र (pores) बंद होने लगते हैं। इससे:
    बालों की जड़ों तक ऑक्सीजन और पोषण कम पहुंचता है
    स्कैल्प में इंफेक्शन या डैंड्रफ बढ़ सकता है
    बाल कमजोर होकर तेजी से गिरने लगते हैं
    इसलिए सिर्फ बाहरी प्रोडक्ट बदलने से ज्यादा जरूरी है कि स्कैल्प को साफ और बैलेंस रखा जाए।

    प्याज और अदरक वाले शैंपू का सच
    आजकल बाजार में “ऑनियन शैंपू”, “जिंजर शैंपू” जैसे कई प्रोडक्ट मिलते हैं, जिनका दावा होता है कि ये हेयर फॉल रोक देंगे। लेकिन सच्चाई यह है कि शैंपू एक wash-off product होता है, जो कुछ ही मिनट में धो दिया जाता है। ऐसे में उसमें मौजूद हर्बल इंग्रीडिएंट्स को स्कैल्प में गहराई तक असर करने का पर्याप्त समय नहीं मिलता। इसलिए सिर्फ नाम या इंग्रीडिएंट देखकर यह मान लेना कि हेयर फॉल रुक जाएगा, सही नहीं है।

    जावेद हबीब की असली हेयर केयर टिप्स
    हेयर एक्सपर्ट्स के अनुसार बालों की सही देखभाल के लिए कुछ बेसिक बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
    स्कैल्प को नियमित रूप से साफ रखें
    हल्का और बैलेंस्ड शैंपू इस्तेमाल करें
    जरूरत से ज्यादा प्रोडक्ट बदलने से बचें
    डैंड्रफ और ऑयल बिल्डअप को कंट्रोल करें
    सही डाइट और नींद का ध्यान रखें

    बालों का झड़ना रोकने का कोई “मैजिक शैंपू” नहीं है। असली समाधान स्कैल्प की सफाई, सही हेयर केयर रूटीन और लाइफस्टाइल में सुधार है। बार-बार शैंपू बदलना समस्या को हल करने के बजाय उसे और उलझा सकता है।

  • पुरुषों में ज्यादा बाल झड़ने की वजह क्या है? जानें वैज्ञानिक कारण

    पुरुषों में ज्यादा बाल झड़ने की वजह क्या है? जानें वैज्ञानिक कारण


    नई दिल्ली। बालों का झड़ना आज एक आम समस्या बन चुका है, लेकिन पुरुषों और महिलाओं में इसका पैटर्न पूरी तरह अलग होता है। पुरुषों में जहां समय के साथ सिर के आगे और बीच के हिस्से से बाल तेजी से कम होकर गंजापन दिखने लगता है, वहीं महिलाओं में आमतौर पर पूरे सिर में हल्का-हल्का बाल पतला होता है, लेकिन पूरी तरह गंजापन बेहद कम देखा जाता है।

    इसका सबसे बड़ा कारण शरीर में पाए जाने वाले हार्मोन और उनकी कार्यप्रणाली है।
    पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन नामक हार्मोन एक एंजाइम की मदद से DHT (डायहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन) में बदल जाता है। यही DHT बालों की जड़ों पर सबसे ज्यादा असर डालता है। यह धीरे-धीरे बालों की जड़ों को कमजोर कर देता है, जिससे बाल पतले होते जाते हैं और अंततः गिरने लगते हैं। समय के साथ यह प्रक्रिया इतनी तेज हो जाती है कि सिर के कुछ हिस्सों में पूरी तरह गंजापन दिखाई देने लगता है।

    महिलाओं में क्यों बच जाते हैं बाल?
    महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन नामक हार्मोन अधिक मात्रा में पाया जाता है। यह हार्मोन बालों की जड़ों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है और DHT के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित करता है। इसी कारण महिलाओं में बालों का झड़ना होता तो है, लेकिन वह आमतौर पर “डिफ्यूज थिनिंग” के रूप में होता है यानी पूरे सिर में हल्की-हल्की कमी, न कि पुरुषों जैसा पैच वाला गंजापन। इसके अलावा महिलाओं के हेयर फॉलिकल्स (बालों की जड़ें) हार्मोन के प्रति अपेक्षाकृत कम संवेदनशील होती हैं, जिससे बाल लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।

    जेनेटिक्स भी निभाता है बड़ी भूमिका
    बाल झड़ने की समस्या सिर्फ हार्मोन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसमें जेनेटिक फैक्टर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे मेडिकल भाषा में Androgenetic Alopecia कहा जाता है। अगर परिवार में पिता या दादा को गंजापन रहा है, तो पुरुषों में इसकी संभावना काफी बढ़ जाती है। महिलाओं में भी यह जेनेटिक प्रभाव होता है, लेकिन उसका असर अपेक्षाकृत धीमा और कम गंभीर होता है।

    उम्र और हार्मोनल बदलाव का अस
    जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। महिलाओं में मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है, जिससे बालों का झड़ना बढ़ सकता है। हालांकि तब भी पुरुषों जैसा पूरा गंजापन दुर्लभ होता है।

    पुरुषों में गंजापन मुख्य रूप से DHT हार्मोन के अधिक प्रभाव और जेनेटिक संवेदनशीलता के कारण होता है, जबकि महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन बालों को सुरक्षा प्रदान करता है। यही वजह है कि पुरुषों में गंजापन ज्यादा दिखाई देता है और महिलाओं में बाल झड़ने के बावजूद पूरा सिर आमतौर पर सुरक्षित रहता है।

  • सुबह के नाश्ते की आसान और हेल्दी शुरुआत: झटपट बनने वाला वेजिटेबल उपमा, स्वाद और सेहत का परफेक्ट मेल

    सुबह के नाश्ते की आसान और हेल्दी शुरुआत: झटपट बनने वाला वेजिटेबल उपमा, स्वाद और सेहत का परफेक्ट मेल

    नई दिल्ली ।  लंबी यात्रा का नाम सुनते ही जहां कुछ लोगों के चेहरे पर उत्साह आ जाता है, वहीं कई लोगों के लिए सफर एक बड़ी परेशानी बन जाता है। कार, बस या पहाड़ी रास्तों पर सफर करते समय उल्टी, चक्कर, घबराहट और जी मिचलाने जैसी समस्याएं कई यात्रियों को परेशान करती हैं। इस स्थिति को सामान्य भाषा में मोशन सिकनेस कहा जाता है। यह समस्या न केवल यात्रा का आनंद खराब कर देती है, बल्कि कई बार लोगों को सफर करने से भी डर लगने लगता है। हालांकि, कुछ आसान घरेलू उपायों को अपनाकर इस परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    मोशन सिकनेस आमतौर पर तब होती है जब आंखों और दिमाग के बीच तालमेल बिगड़ जाता है। चलते वाहन में शरीर एक तरह की गति महसूस करता है, जबकि दिमाग उसे अलग तरीके से समझता है। इसी कारण घबराहट, चक्कर और उल्टी जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। लेकिन यदि सफर से पहले और दौरान कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए, तो यात्रा काफी आरामदायक बन सकती है।

    अदरक को इस समस्या का सबसे प्रभावी घरेलू उपाय माना जाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण पेट को शांत रखने में मदद करते हैं और जी मिचलाने की समस्या को कम करते हैं। सफर पर निकलने से पहले अदरक वाली चाय पीना या अदरक का छोटा टुकड़ा चबाना फायदेमंद साबित हो सकता है। कई लोग अदरक की टॉफी या कैंडी का इस्तेमाल भी करते हैं, जिससे यात्रा के दौरान राहत मिलती है।

    नींबू और काला नमक भी सफर के दौरान काफी लाभकारी माने जाते हैं। नींबू की खुशबू और उसका स्वाद पेट को आराम देता है। यात्रा के दौरान यदि जी मिचलाने लगे तो नींबू के टुकड़े पर थोड़ा काला नमक लगाकर चूसने से तुरंत राहत महसूस हो सकती है। यह तरीका खासतौर पर पहाड़ी रास्तों में बेहद कारगर माना जाता है।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि खाली पेट सफर करने से बचना चाहिए। कई लोग यह सोचकर बिना कुछ खाए यात्रा पर निकल जाते हैं कि इससे उल्टी नहीं होगी, लेकिन वास्तव में खाली पेट होने से परेशानी और बढ़ सकती है। सफर से पहले हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करना बेहतर माना जाता है। तला-भुना और अधिक मसालेदार भोजन से दूरी बनाना भी जरूरी है।

    सही सीट का चुनाव भी मोशन सिकनेस को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। कार या बस में आगे की सीट पर बैठने से शरीर को कम झटके महसूस होते हैं। साथ ही बाहर के दृश्यों को देखने से दिमाग और आंखों के बीच बेहतर तालमेल बना रहता है, जिससे चक्कर और घबराहट कम होती है। सफर के दौरान लगातार मोबाइल देखने या किताब पढ़ने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे परेशानी बढ़ सकती है।

    ताजी हवा लेना भी बेहद जरूरी है। बंद खिड़कियां, तेज गंध और घुटन भरा माहौल कई बार उल्टी की समस्या को बढ़ा देते हैं। ऐसे में वाहन की खिड़की थोड़ा खुला रखना या बीच-बीच में ताजी हवा लेना राहत पहुंचा सकता है।

    अगर किसी व्यक्ति को हर यात्रा में गंभीर मोशन सिकनेस की समस्या होती है, तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी हो सकता है। कुछ मामलों में दवाओं की जरूरत भी पड़ सकती है। सही सावधानी और घरेलू उपायों के जरिए सफर को आरामदायक और आनंददायक बनाया जा सकता है।