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  • चेहरे के ओपन पोर्स से छुटकारा पाना है? अपनाएं ये 5 घरेलू उपाय, मिलेगी साफ और ग्लोइंग ग्लास स्किन

    चेहरे के ओपन पोर्स से छुटकारा पाना है? अपनाएं ये 5 घरेलू उपाय, मिलेगी साफ और ग्लोइंग ग्लास स्किन


    नई दिल्ली ।आजकल धूल, प्रदूषण, ऑयली स्किन और गलत स्किन केयर रूटीन की वजह से चेहरे पर ओपन पोर्स यानी छोटे-छोटे गड्ढों की समस्या तेजी से बढ़ रही है। ये पोर्स चेहरे की खूबसूरती कम कर देते हैं और स्किन को अनइवन दिखाते हैं। कई लोग महंगे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कुछ घरेलू उपाय भी इस समस्या में काफी असरदार माने जाते हैं।
    अगर आप भी साफ, स्मूद और ग्लास जैसी चमकदार स्किन पाना चाहते हैं, तो कुछ आसान घरेलू उपाय आपकी मदद कर सकते हैं। सबसे पहला उपाय बर्फ का इस्तेमाल माना जाता है। चेहरे पर हल्के हाथों से बर्फ रगड़ने से स्किन टाइट होती है और पोर्स छोटे दिखाई देने लगते हैं। यह स्किन को तुरंत फ्रेश लुक देने में भी मदद करता है।
    दूसरा उपाय मुल्तानी मिट्टी का फेस पैक है। मुल्तानी मिट्टी अतिरिक्त ऑयल को हटाकर स्किन को गहराई से साफ करती है। इसमें गुलाब जल मिलाकर लगाने से त्वचा को ठंडक मिलती है और पोर्स कम नजर आने लगते हैं।
    टमाटर का रस भी ओपन पोर्स की समस्या में फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद नैचुरल एसिड स्किन को टाइट करने में मदद करते हैं। नियमित रूप से टमाटर का रस लगाने से चेहरा साफ और चमकदार दिख सकता है।
    एलोवेरा जेल भी स्किन के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। यह त्वचा को हाइड्रेट रखने के साथ पोर्स को साफ करने में मदद करता है। रात में सोने से पहले एलोवेरा जेल लगाने से त्वचा को राहत मिल सकती है।
    इसके अलावा बेसन और दही का फेस पैक भी स्किन टाइट करने में असरदार माना जाता है। यह त्वचा से गंदगी हटाकर चेहरे को नेचुरल ग्लो देने में मदद करता है।
    विशेषज्ञों के अनुसार, ओपन पोर्स की समस्या से बचने के लिए चेहरे को साफ रखना, पर्याप्त पानी पीना और ज्यादा केमिकल वाले प्रोडक्ट्स से दूरी बनाना भी जरूरी है। नियमित स्किन केयर और सही खानपान से त्वचा लंबे समय तक स्वस्थ और चमकदार बनी रह सकती है।

  • सर्दियों में स्किन केयर का आसान तरीका, डार्क सर्कल और रूखापन दोनों होंगे दूर

    सर्दियों में स्किन केयर का आसान तरीका, डार्क सर्कल और रूखापन दोनों होंगे दूर


    नई दिल्ली । सर्दियों के मौसम में त्वचा की नमी कम होने लगती है, जिसका असर सबसे पहले आंखों के नीचे की नाजुक त्वचा पर दिखाई देता है। इसी कारण डार्क सर्कल यानी आंखों के नीचे काले घेरे की समस्या बढ़ जाती है। यह न सिर्फ चेहरे की खूबसूरती कम करते हैं, बल्कि थकान और तनाव भी चेहरे पर साफ नजर आने लगता है।
    ऐसे में कई लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कुछ घरेलू नुस्खे भी इस समस्या में काफी असरदार माने जाते हैं। खासतौर पर नारियल तेल, एलोवेरा, हल्दी और वैसलीन से तैयार किया गया घरेलू मिश्रण त्वचा को पोषण देने और डार्क सर्कल कम करने में मदद कर सकता है।
    इस घरेलू उपाय के लिए एक चम्मच नारियल तेल, एक चम्मच वैसलीन, आधा चम्मच हल्दी पाउडर और एक चम्मच एलोवेरा जेल की जरूरत होती है। सबसे पहले एलोवेरा जेल को एक कटोरी में निकाल लें, फिर उसमें नारियल तेल, हल्दी और वैसलीन मिलाकर अच्छी तरह तैयार करें।
    रात में सोने से पहले इस मिश्रण को आंखों के नीचे हल्के हाथों से लगाएं और सुबह ठंडे पानी से चेहरा धो लें। नियमित रूप से इस्तेमाल करने पर कुछ ही दिनों में फर्क नजर आने लगता है।
    विशेषज्ञों के अनुसार नारियल तेल में मौजूद विटामिन ई और फैटी एसिड त्वचा को मॉइस्चराइज करने में मदद करते हैं, जबकि एलोवेरा त्वचा को ठंडक और राहत देता है। हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा की रंगत सुधारने में सहायक माने जाते हैं।
    इसके अलावा पर्याप्त नींद लेना, तनाव कम करना, पौष्टिक आहार लेना और आंखों की हल्की मसाज करना भी डार्क सर्कल कम करने में मददगार हो सकता है।
    अगर आप भी सर्दियों में चमकदार और फ्रेश स्किन पाना चाहते हैं, तो यह आसान घरेलू उपाय आपकी स्किन के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

  • सुबह पेट साफ नहीं होता? ये योगासन देंगे प्राकृतिक राहत और बढ़ाएंगे एनर्जी

    सुबह पेट साफ नहीं होता? ये योगासन देंगे प्राकृतिक राहत और बढ़ाएंगे एनर्जी


    नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार जिंदगी, गलत खानपान और तनावपूर्ण दिनचर्या के कारण कब्ज (Constipation) एक आम समस्या बन चुकी है। कई लोग सुबह उठते ही पेट साफ न होने की परेशानी से जूझते हैं, जिससे पूरा दिन भारीपन, सुस्ती और चिड़चिड़ापन बना रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर दिन की शुरुआत सही योग और हल्के व्यायाम से की जाए तो यह समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। कुछ सरल योगासन न सिर्फ पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं, बल्कि शरीर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स भी करते हैं।

     1. सीटेड त्रियक ताड़ासन: आंतों को सक्रिय करने वाला आसन
    सुबह गुनगुना पानी पीने के बाद इस आसन का अभ्यास किया जा सकता है। इसमें बैठकर शरीर को दाईं और बाईं ओर झुकाया जाता है। यह क्रिया आंतों को सक्रिय करती है और मल को बाहर निकालने में मदद करती है। नियमित अभ्यास से पेट हल्का महसूस होता है।

     2. वज्रासन: पाचन शक्ति को मजबूत करने का सबसे आसान उपाय
    वज्रासन को भोजन के बाद भी किया जा सकता है। घुटनों के बल बैठकर रीढ़ सीधी रखी जाती है।
    यह आसन पाचन क्रिया को सुधारता है और कब्ज की समस्या में राहत देता है। रोज 5–10 मिनट अभ्यास बेहद लाभकारी होता है।

    3. पवनमुक्तासन: गैस और सूजन से तुरंत राहत
    इस आसन में पीठ के बल लेटकर घुटनों को छाती की ओर लाया जाता है।
    यह पेट में जमा गैस को बाहर निकालने में मदद करता है और सूजन को कम करता है। इसे दोनों पैरों से बारी-बारी से करना चाहिए।

     4. सुप्त उदराकर्षण आसन: आंतों की प्राकृतिक मसाज
    यह आसन लेटकर किया जाता है, जिसमें घुटनों को दाईं और बाईं ओर झुकाया जाता है।
    यह आंतों की हल्की मालिश करता है और मल को नीचे की ओर बढ़ाने में मदद करता है, जिससे पेट आसानी से साफ होता है।

     5. पदोत्तानासन: पेट पर दबाव डालकर सफाई में मददगार
    खड़े होकर आगे झुकने वाला यह आसन पेट पर हल्का दबाव डालता है।
    इससे पाचन क्रिया तेज होती है और मल त्याग आसान होता है। कुछ सेकंड तक स्थिति में रहना लाभकारी होता है।

    नियमित अभ्यास से मिलेंगे कई फायदे
    विशेषज्ञों के अनुसार, इन योगासनों के साथ सुबह गुनगुना पानी पीना और हल्की स्ट्रेचिंग करना बेहद फायदेमंद है।
    इनसे न सिर्फ कब्ज की समस्या दूर होती है, बल्कि:
    पाचन तंत्र मजबूत होता है
    शरीर डिटॉक्स होता है
    नींद बेहतर होती है
    दिनभर ऊर्जा बनी रहती है

    कब्ज जैसी समस्या को दवाओं पर निर्भर हुए बिना भी नियंत्रित किया जा सकता है। अगर इन 5 सरल योगासनों को रोजाना जीवन में शामिल किया जाए, तो कुछ ही दिनों में पेट की समस्याओं में काफी सुधार देखा जा सकता है और शरीर अधिक हल्का व सक्रिय महसूस करता है।

  • गर्मी से बचाव: तेज धूप और लू में कैसे रखें सेहत का ध्यान, जानिए आसान टिप्स

    गर्मी से बचाव: तेज धूप और लू में कैसे रखें सेहत का ध्यान, जानिए आसान टिप्स


    नई दिल्ली । भारत के कई हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है और गर्म हवाओं यानी लू का असर भी लोगों की सेहत पर साफ दिखाई दे रहा है। गर्मियों के मौसम में सबसे ज्यादा परेशानी डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक, थकान और स्किन से जुड़ी समस्याओं की होती है। ऐसे में जरूरी है कि हम अपने रोजमर्रा के जीवन में कुछ छोटे बदलाव करके खुद को सुरक्षित रखें। विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी में शरीर का तापमान संतुलित रखना सबसे जरूरी होता है। इसके लिए सही खानपान, पर्याप्त पानी और हल्का आहार बेहद जरूरी है।

    हाइड्रेशन है सबसे जरूरी कदम
    गर्मी में शरीर को सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है। दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं। इसके अलावा नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और फलों का रस शरीर को ठंडक देने में मदद करते हैं।

    खीरा, तरबूज और संतरा जैसे फल गर्मियों में शरीर को हाइड्रेट रखते हैं और ऊर्जा भी बनाए रखते हैं। कैफीन और ज्यादा शुगर वाले ड्रिंक्स से बचना चाहिए क्योंकि ये शरीर को और ज्यादा डिहाइड्रेट कर सकते हैं।

     घरेलू उपाय जो गर्मी में देंगे राहत
    गर्मी से राहत पाने के लिए कुछ आसान घरेलू उपाय भी बहुत फायदेमंद होते हैं। जैसे रात को सोने से पहले गुलाब जल और ठंडे पानी से चेहरा धोना त्वचा को ठंडक देता है। पुदीना और बेल का शरबत शरीर को अंदर से ठंडा रखता है। वहीं एलोवेरा जूस और सत्तू भी गर्मी में ऊर्जा बनाए रखने में मदद करते हैं।

     कपड़ों का चुनाव भी है अहम
    गर्मी में हल्के और ढीले कपड़े पहनना सबसे बेहतर होता है। कॉटन के कपड़े शरीर को हवा लगने देते हैं और पसीना सोख लेते हैं। गहरे रंगों की जगह हल्के रंग जैसे सफेद, हल्का नीला या हरा पहनना ज्यादा आरामदायक रहता है।

    गर्मी में किन गलतियों से बचें
    दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक धूप में बाहर निकलने से बचना चाहिए क्योंकि इस समय लू का खतरा सबसे ज्यादा होता है। खाली पेट बाहर जाना या बिना पानी पिए लंबे समय तक रहना भी नुकसानदायक हो सकता है। ज्यादा मसालेदार और तला हुआ खाना गर्मी में पाचन पर असर डालता है, इसलिए हल्का और ताजा भोजन लेना चाहिए।

    गर्मी का मौसम चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन सही सावधानियों और जीवनशैली में छोटे बदलाव करके इसे आरामदायक बनाया जा सकता है। शरीर को हाइड्रेट रखना, सही खानपान और धूप से बचाव ही गर्मी से बचने का सबसे आसान तरीका है।

  • क्या गर्मी में नुकसान पहुंचा सकता है मेथी दाना? सेवन से पहले जान लें ये जरूरी बातें

    क्या गर्मी में नुकसान पहुंचा सकता है मेथी दाना? सेवन से पहले जान लें ये जरूरी बातें


    नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम आते ही खानपान में बदलाव करना बेहद जरूरी हो जाता है। इस दौरान लोग शरीर को ठंडा और स्वस्थ रखने के लिए कई घरेलू उपाय अपनाते हैं। मेथी दाना भी इन्हीं चीजों में शामिल है, जिसे आयुर्वेद में औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। हालांकि, गर्मियों में इसका सेवन करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
    आयुर्वेद के अनुसार मेथी दाने की तासीर गर्म मानी जाती है। यही वजह है कि इसका अधिक सेवन गर्मियों में शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है। लेकिन सही मात्रा और सही तरीके से सेवन किया जाए तो यह शरीर को कई फायदे भी पहुंचा सकता है।
    विशेषज्ञों के अनुसार मेथी दाना पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसमें फाइबर, आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने और कमजोरी दूर करने में सहायक माने जाते हैं। यह ब्लड शुगर कंट्रोल करने और वजन घटाने में भी मददगार माना जाता है।
    गर्मियों में मेथी दाने का सेवन भिगोकर करना ज्यादा लाभकारी माना जाता है। रातभर पानी में भिगोए गए मेथी दानों को सुबह खाली पेट खाने से शरीर को ठंडक मिल सकती है और पाचन भी बेहतर रहता है। कई लोग इसका पानी पीना भी पसंद करते हैं।
    हालांकि आयुर्वेद में यह भी कहा गया है कि जरूरत से ज्यादा मेथी दाना खाने से शरीर में गर्मी, एसिडिटी, पेट में जलन और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासतौर पर जिन लोगों की बॉडी हीट ज्यादा रहती है, उन्हें सीमित मात्रा में ही इसका सेवन करना चाहिए।
    गर्भवती महिलाओं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को मेथी दाने का सेवन डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही करना चाहिए। अगर संतुलित मात्रा में और सही तरीके से सेवन किया जाए, तो मेथी दाना गर्मियों में भी शरीर के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
  • शिमला 2 दिन ट्रिप प्लान: पहाड़ों की रानी में यादगार सफर का पूरा गाइड

    शिमला 2 दिन ट्रिप प्लान: पहाड़ों की रानी में यादगार सफर का पूरा गाइड

    नई दिल्ली । हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला, जिसे ‘पहाड़ों की रानी’ कहा जाता है, भारत के सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में से एक है। हर साल लाखों पर्यटक यहां की ठंडी हवाओं, हरे-भरे पहाड़ों और ब्रिटिश काल की ऐतिहासिक इमारतों को देखने आते हैं। शिमला की खूबसूरती हर मौसम में अलग ही अनुभव देती है, लेकिन सही प्लानिंग के साथ इसे सिर्फ 2 दिन में भी पूरी तरह एक्सप्लोर किया जा सकता है।
    पहला दिन: शहर की खूबसूरती और एडवेंचर का रोमांच

    शिमला ट्रिप की शुरुआत रिज मैदान से करना सबसे बेहतर माना जाता है। यह स्थान शहर का केंद्र है और यहां से चारों ओर फैले पहाड़ों का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। पर्यटक यहां फोटोग्राफी, वॉक और लोकल कल्चर को महसूस करने के लिए आते हैं। रिज के पास ही स्थित मॉल रोड शिमला की सबसे जीवंत जगह है, जहां कैफे, रेस्तरां और शॉपिंग स्ट्रीट पर्यटकों को आकर्षित करती है।

    इसके बाद यात्रा का अगला पड़ाव क्राइस्ट चर्च होता है, जो ब्रिटिश काल की ऐतिहासिक धरोहर है। इसकी गोथिक शैली की वास्तुकला और शांत वातावरण पर्यटकों को एक अलग ही अनुभव प्रदान करता है।

    दोपहर में आप जाखू मंदिर जा सकते हैं, जो भगवान हनुमान को समर्पित है। यह शिमला की सबसे ऊंची पहाड़ी पर स्थित है और यहां से पूरे शहर का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। 108 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा इस स्थान को और भी खास बनाती है।

    शाम होते ही कुफरी का रुख करना सबसे अच्छा रहता है। शिमला से करीब 15–20 किलोमीटर दूर यह जगह एडवेंचर और नेचुरल ब्यूटी के लिए प्रसिद्ध है। यहां स्नो एक्टिविटी, हॉर्स राइडिंग और एडवेंचर स्पोर्ट्स का आनंद लिया जा सकता है। सर्दियों में यह क्षेत्र बर्फ से ढक जाता है, जो पर्यटकों को बेहद आकर्षित करता है।

    दूसरा दिन: शांति, प्रकृति और संस्कृति का संगम

    दूसरे दिन की शुरुआत दोर्जे ड्रेक मठ से करें। यह बौद्ध मठ शिमला की तिब्बती संस्कृति और आध्यात्मिक शांति का प्रतीक है। यहां का शांत वातावरण मन को सुकून देता है और यात्रा को आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ता है।

    इसके बाद मशोबरा की ओर बढ़ें, जिसे ‘शांत शिमला’ कहा जाता है। यह जगह घने जंगलों, सेब के बागानों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है। यहां शहर की भीड़ से दूर एक अलग ही सुकून मिलता है।

    अगर समय मिले तो चैल जरूर जाएं, जो शिमला से लगभग 44 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां का ऐतिहासिक चैल पैलेस और दुनिया का सबसे ऊंचा क्रिकेट ग्राउंड इस जगह को खास बनाते हैं। यह स्थान इतिहास और प्रकृति का सुंदर मेल है।

  • करियर में नहीं होता कोई दबाव: पलक तिवारी बोलीं- मां श्वेता तिवारी हमेशा दिल की सुनने की सलाह देती हैं

    करियर में नहीं होता कोई दबाव: पलक तिवारी बोलीं- मां श्वेता तिवारी हमेशा दिल की सुनने की सलाह देती हैं

    नई दिल्ली । बॉलीवुड और डिजिटल एंटरटेनमेंट की दुनिया में तेजी से अपनी पहचान बना रहीं पलक तिवारी इन दिनों अपने नए प्रोजेक्ट्स को लेकर चर्चा में हैं। हालांकि इस बार उनकी चर्चा केवल प्रोफेशनल लाइफ तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने अपनी निजी जिंदगी और खासकर अपनी मां श्वेता तिवारी के साथ रिश्ते को लेकर भी खुलकर बात की है।

    पलक ने बताया कि उनकी मां ने कभी भी उनके करियर को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने हमेशा उन्हें अपने फैसले खुद लेने की आजादी दी है। उनके अनुसार, एक कलाकार का सफर व्यक्तिगत होता है और हर इंसान अपनी सोच और अनुभवों के आधार पर अपने लिए रास्ता चुनता है।

    उन्होंने कहा कि उनकी और उनकी मां की पीढ़ी और अनुभव पूरी तरह अलग हैं। जिस दौर में उनकी मां ने इंडस्ट्री में काम किया, वह आज के समय से काफी अलग था। इसलिए दोनों की सोच और काम को देखने का नजरिया भी अलग है। इसके बावजूद दोनों के बीच आपसी समझ और सम्मान हमेशा बना रहता है।

    पलक के मुताबिक, उनकी मां केवल एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाती हैं। वह उन्हें सुझाव जरूर देती हैं, लेकिन कभी किसी फैसले के लिए मजबूर नहीं करतीं। उन्होंने बताया कि जब भी वह किसी नए प्रोजेक्ट पर विचार करती हैं, तो उनकी मां केवल इतना पूछती हैं कि क्या वह काम उन्हें अंदर से सही महसूस हो रहा है या नहीं।

    उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मां का मानना है कि अभिनय केवल पेशा नहीं बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव है। अगर कलाकार किसी किरदार या कहानी से खुद को जोड़ नहीं पाता, तो उसका प्रदर्शन भी पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाता। यही वजह है कि उन्हें हमेशा अपने दिल की सुनने की सलाह दी जाती है।

    पलक ने स्वीकार किया कि इंडस्ट्री में कदम रखना उनके लिए आसान नहीं था, क्योंकि लोगों की उम्मीदें पहले से ही काफी ज्यादा थीं। लेकिन उन्होंने खुद की पहचान अलग तरीके से बनाने की कोशिश की और हर फैसले को अपनी समझ से लिया।

    उन्होंने कहा कि किसी भी कलाकार के लिए आत्मविश्वास और स्वतंत्र सोच बेहद जरूरी होती है। जब इंसान अपने फैसले खुद लेता है, तो वह अपनी सफलता और असफलता दोनों को बेहतर तरीके से समझ पाता है। यही सोच उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देती है।

    मां-बेटी के इस रिश्ते की सबसे खास बात यही है कि इसमें भरोसा और स्वतंत्रता दोनों मौजूद हैं। पलक मानती हैं कि परिवार का समर्थन किसी भी कलाकार के लिए बहुत जरूरी होता है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है अपनी पहचान खुद बनाना।

    आज पलक तिवारी धीरे-धीरे इंडस्ट्री में अपनी जगह मजबूत कर रही हैं और उनके विचार यह दिखाते हैं कि वह केवल स्टार किड की पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि अपने दम पर एक अलग मुकाम हासिल करना चाहती हैं।

  • सोना खरीदने और ईंधन खपत कम करने की अपील पर विवाद, व्यापारियों और विपक्ष ने उठाए सवाल

    सोना खरीदने और ईंधन खपत कम करने की अपील पर विवाद, व्यापारियों और विपक्ष ने उठाए सवाल


    नई दिल्ली । देश में हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से संसाधनों के सीमित उपयोग और सोना-चांदी की खरीदारी को लेकर की गई अपील के बाद राजनीतिक और आर्थिक हलकों में बहस तेज हो गई है। इस बयान के बाद जहां विपक्षी दलों ने सरकार की आर्थिक स्थिति और नीतियों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, वहीं सराफा व्यापार से जुड़े संगठनों ने भी इसे लेकर अपनी चिंता खुलकर जाहिर की है।

    प्रधानमंत्री द्वारा लगातार दो दिनों तक पेट्रोल-डीजल के सीमित इस्तेमाल और अनावश्यक खर्च से बचने की अपील को कई लोग एहतियाती कदम मान रहे हैं, लेकिन व्यापारिक वर्ग का कहना है कि इस तरह की सार्वजनिक अपीलों का सीधा असर बाजार की गतिविधियों और लोगों की खरीदारी की मानसिकता पर पड़ता है। खासकर ज्वेलरी उद्योग से जुड़े कारोबारियों का मानना है कि सोना-चांदी की खरीद को लेकर पैदा हुई आशंका बाजार में मंदी ला सकती है।

    राजनीतिक मोर्चे पर भी इस मुद्दे ने तेजी से तूल पकड़ लिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उनका कहना है कि जब राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हो रही हो, तो सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जनता के बीच अचानक इस तरह की अपीलें आने से असमंजस की स्थिति पैदा होती है और इसका असर आम लोगों के साथ-साथ व्यापारियों पर भी पड़ता है।

    वहीं, सराफा व्यापार से जुड़े संगठनों ने भी सरकार के रुख पर नाराज़गी जाहिर की है। व्यापारिक प्रतिनिधियों का कहना है कि देशभर में लाखों परिवार इस उद्योग पर निर्भर हैं और यदि बाजार में खरीदारी कम होती है, तो इसका असर सीधे रोजगार और छोटे कारोबारियों की आय पर पड़ेगा। उनका मानना है कि किसी भी बड़े फैसले या सार्वजनिक संदेश से पहले उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से चर्चा की जानी चाहिए थी।

    व्यापारियों का यह भी कहना है कि ज्वेलरी सेक्टर केवल व्यापार का माध्यम नहीं, बल्कि देश की पारंपरिक अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। शादी-विवाह और सामाजिक आयोजनों में सोना-चांदी की खरीदारी लंबे समय से भारतीय समाज का हिस्सा रही है, इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अनिश्चितता बाजार की गति को प्रभावित कर सकती है।

    इस मुद्दे पर विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी सरकार को घेरने की कोशिश की है। उनका कहना है कि यदि जनता से बार-बार त्याग और खर्च कम करने की अपील की जा रही है, तो यह देश की आर्थिक चुनौतियों की ओर इशारा करता है। विपक्ष ने इसे आम लोगों पर मानसिक दबाव बनाने वाला कदम बताया है।

    हालांकि, सरकार की ओर से इन तमाम आशंकाओं को खारिज किया गया है। केंद्रीय स्तर पर यह स्पष्ट किया गया कि देश में तेल और गैस का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है। सरकार का कहना है कि नागरिकों से केवल संसाधनों के जिम्मेदार और विवेकपूर्ण उपयोग की अपील की गई है, ताकि ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सके।

    फिलहाल, इस मुद्दे ने राजनीतिक बहस के साथ-साथ व्यापारिक जगत में भी नई चिंता पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस पर आगे क्या रुख अपनाती है और बाजार में इसका क्या प्रभाव देखने को मिलता है।

  • डैंड्रफ और खुजली से परेशान हैं? अपनाएं ये आसान घरेलू हर्बल शैम्पू रेसिपी

    डैंड्रफ और खुजली से परेशान हैं? अपनाएं ये आसान घरेलू हर्बल शैम्पू रेसिपी


    नई दिल्ली । गर्मी का मौसम आते ही बालों और स्कैल्प से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं। पसीना, धूल और उमस के कारण अक्सर डैंड्रफ, खुजली और ऑयली स्कैल्प जैसी परेशानियां लोगों को घेर लेती हैं। ऐसे में अधिकतर लोग केमिकल युक्त शैम्पू का उपयोग करते हैं, जो शुरुआती राहत तो देते हैं, लेकिन लंबे समय में बालों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी वजह से नेचुरल हर्बल उपायों की ओर रुझान बढ़ रहा है।
    आयुर्वेद में नीम को बालों और त्वचा की समस्याओं के लिए बेहद प्रभावी माना गया है। इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीसेप्टिक गुण स्कैल्प को गहराई से साफ करने और खुजली व डैंड्रफ को कम करने में मदद करते हैं। घर पर बना नीम हर्बल शैम्पू न केवल सुरक्षित है, बल्कि बालों को प्राकृतिक पोषण भी देता है।
    इस शैम्पू को बनाने के लिए ताजी नीम की पत्तियां, पानी, माइल्ड लिक्विड या कास्टाइल साबुन, एलोवेरा जेल और नारियल तेल की जरूरत होती है। सबसे पहले नीम की पत्तियों को अच्छे से धोकर पानी में उबाला जाता है, जब तक पानी आधा न रह जाए। इसके बाद इसे ठंडा कर छान लिया जाता है ताकि नीम का अर्क अलग हो जाए।
    इस अर्क में हल्का साबुन मिलाकर शैम्पू तैयार किया जाता है। चाहें तो इसमें एलोवेरा जेल और नारियल तेल भी मिलाया जा सकता है, जिससे बालों को अतिरिक्त नमी और पोषण मिलता है। यह मिश्रण बालों को साफ करने के साथ-साथ स्कैल्प को ठंडक भी प्रदान करता है।
    इस्तेमाल के लिए बालों को हल्का गीला कर तैयार शैम्पू लगाकर 2–3 मिनट तक हल्की मसाज करनी चाहिए और फिर साफ पानी से धो लेना चाहिए। बेहतर परिणाम के लिए इसका उपयोग सप्ताह में दो से तीन बार किया जा सकता है। यह घरेलू हर्बल शैम्पू खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद माना जाता है, जो डैंड्रफ, खुजली, ऑयली स्कैल्प या हल्के फंगल इंफेक्शन से परेशान रहते हैं। नियमित उपयोग से बाल साफ, मजबूत और स्वस्थ बने रहते हैं।

  • मिनी गोवा का एहसास अब उत्तर प्रदेश में, गढ़मुक्तेश्वर बना नया हॉलिडे स्पॉट

    मिनी गोवा का एहसास अब उत्तर प्रदेश में, गढ़मुक्तेश्वर बना नया हॉलिडे स्पॉट


    नई दिल्ली। अगर आप हर बार गोवा या मनाली घूमने का सपना देखते हैं, लेकिन समय और बजट की कमी आड़े आ जाती है, तो अब परेशान होने की जरूरत नहीं है। उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में स्थित गढ़मुक्तेश्वर इन दिनों लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसे अब लोग प्यार से “यूपी का मिनी गोवा” कहने लगे हैं। दिल्ली-एनसीआर से कुछ ही घंटों की दूरी पर मौजूद यह जगह वीकेंड ट्रिप के लिए परफेक्ट बनती जा रही है। यहां पहुंचते ही गंगा किनारे फैली रेत और शांत बहता पानी लोगों को किसी बीच का एहसास कराता है।

     रेत, पानी और सुकून – बीच जैसा अनुभव
    गढ़मुक्तेश्वर में गंगा नदी के किनारे फैली सफेद रेत और ठंडी हवा पर्यटकों को आकर्षित करती है। खासकर शाम के समय यहां का नजारा बेहद खूबसूरत हो जाता है। लोग घंटों बैठकर पानी को निहारते हैं, फोटो-वीडियो बनाते हैं और नाव की सवारी का आनंद लेते हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर यहां की तस्वीरें और रील्स तेजी से वायरल हो रही हैं।

     दिल्ली-एनसीआर वालों के लिए परफेक्ट वीकेंड स्पॉट
    दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद से यहां आना बेहद आसान है। कम दूरी और कम खर्च की वजह से यह जगह युवाओं और फैमिली ट्रैवलर्स दोनों की पसंद बनती जा रही है। लोग सुबह निकलकर शाम तक वापस लौट आते हैं, जिससे यह एक “क्विक गेटवे” के रूप में मशहूर हो रहा है।

     धार्मिक महत्व भी है खास
    गढ़मुक्तेश्वर सिर्फ घूमने की जगह नहीं है, बल्कि इसका धार्मिक महत्व भी गहरा है। यहां स्थित गंगा घाट और प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र हैं। रोजाना बड़ी संख्या में लोग गंगा स्नान और पूजा के लिए यहां पहुंचते हैं।
    शाम की गंगा आरती यहां का सबसे आकर्षक दृश्य होता है, जहां दीपों की रोशनी और घंटियों की आवाज माहौल को दिव्य बना देती है।

    सोशल मीडिया ने बढ़ाई लोकप्रियता
    इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर वायरल हो रहे वीडियो ने गढ़मुक्तेश्वर को नई पहचान दी है। ट्रैवल ब्लॉगर्स इसे “Hidden Beach” और “Mini Goa” जैसे नामों से प्रमोट कर रहे हैं। बारिश के मौसम में यहां का नजारा और भी ज्यादा आकर्षक हो जाता है।

     मेले और त्योहारों में लगता है विशाल मेला
    कार्तिक पूर्णिमा और गंगा मेले के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। उस समय पूरा इलाका रोशनी, भीड़ और आस्था से भर जाता है। घाटों पर अलग ही उत्सव जैसा माहौल देखने को मिलता है।

     कम बजट में बेहतरीन अनुभव
    आज के समय में जहां ट्रिप्स महंगे होते जा रहे हैं, वहीं गढ़मुक्तेश्वर कम बजट में शानदार अनुभव देता है। शांति, प्रकृति और धार्मिकता का यह मिश्रण इसे उत्तर भारत का उभरता हुआ टूरिस्ट स्पॉट बना रहा है।

    अगर आप भी गोवा जैसी बीच वाली फीलिंग चाहते हैं, तो गढ़मुक्तेश्वर आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। दिल्ली के पास ही मौजूद यह जगह अब धीरे-धीरे एक पॉपुलर वीकेंड डेस्टिनेशन बन चुकी है।