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  • लौकी का रायता गर्मियों में शरीर को ठंडक और आराम देने में सहायक..

    लौकी का रायता गर्मियों में शरीर को ठंडक और आराम देने में सहायक..

    नई दिल्ली:गर्मियों के मौसम में हल्का, ठंडा और सुपाच्य भोजन शरीर को आराम देने के साथ साथ पाचन तंत्र को भी संतुलित रखने में मदद करता है। ऐसे समय में लौकी का रायता एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है, जो स्वाद और सेहत दोनों का संतुलन बनाए रखता है। यह डिश न केवल गर्मी में शरीर को ठंडक प्रदान करती है बल्कि भोजन को हल्का और पौष्टिक भी बनाती है।

    लौकी को सामान्यतः लोग ज्यादा पसंद नहीं करते, लेकिन जब इसे रायते के रूप में तैयार किया जाता है तो इसका स्वाद पूरी तरह बदल जाता है। दही और मसालों के साथ मिलकर यह एक ऐसा व्यंजन बनता है जो हर उम्र के लोगों को आसानी से पसंद आ सकता है। यह लंच और डिनर दोनों के साथ परोसा जा सकता है और गर्मियों में थाली को संतुलित बनाता है।

    लौकी रायता बनाने की प्रक्रिया भी सरल होती है। इसके लिए सबसे पहले लौकी को अच्छे से छीलकर कद्दूकस किया जाता है और हल्के नमक के साथ कुछ मिनट तक उबाला जाता है ताकि वह नरम हो जाए। इसके बाद इसे ठंडा करके अतिरिक्त पानी निकाल दिया जाता है ताकि रायता पतला न हो।

    इसके बाद ताजा और ठंडे दही को अच्छी तरह फेंटकर स्मूद बनाया जाता है ताकि उसमें कोई गांठ न रहे। दही में भुना जीरा पाउडर, काला नमक, सामान्य नमक और बारीक कटी हरी मिर्च मिलाकर बेस तैयार किया जाता है। यह मिश्रण रायते को स्वाद और संतुलित स्वाद प्रोफाइल देता है।

    अब ठंडी की गई लौकी को इस दही के मिश्रण में धीरे धीरे मिलाया जाता है ताकि सभी सामग्री अच्छे से एकसार हो जाएं। ऊपर से हरा धनिया डालकर इसे सजाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। चाहें तो हल्का लाल मिर्च पाउडर भी स्वाद के अनुसार मिलाया जा सकता है।

    यह रायता न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि गर्मियों में शरीर को ठंडक देने में भी मदद करता है। दही और लौकी दोनों ही पाचन के लिए फायदेमंद माने जाते हैं, जिससे यह व्यंजन हल्के और हेल्दी भोजन के रूप में अच्छा विकल्प बन जाता है।

    गर्मियों में ऐसे व्यंजन शरीर को हाइड्रेट रखने और भारी भोजन से बचाने में मदद करते हैं। लौकी का रायता इसी कारण से कई घरों में खास पसंद किया जाता है और यह रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा आसानी से बन सकता है।

  • कम सामग्री में बनने वाली तीखी डिश, जानिए तड़का मिर्ची की आसान विधि..

    कम सामग्री में बनने वाली तीखी डिश, जानिए तड़का मिर्ची की आसान विधि..

    नई दिल्ली:अगर आपको खाने में हल्का सा तीखा और चटपटा स्वाद पसंद है, तो तड़का मिर्ची एक ऐसी आसान रेसिपी है जो आपकी रोजमर्रा की थाली का स्वाद पूरी तरह बदल सकती है। इसे दाल-चावल, खिचड़ी, रोटी या पराठे के साथ परोसा जाए तो साधारण खाना भी खास बन जाता है। यह रेसिपी कम समय में तैयार हो जाती है और स्वाद में बेहद असरदार होती है।

    तड़का मिर्ची बनाने के लिए मुख्य सामग्री में लंबी हरी मिर्च, तेल, जीरा, राई, हल्दी, नमक, हींग और अमचूर पाउडर या नींबू का रस शामिल होता है। इसके अलावा स्वाद और सजावट के लिए धनिया पत्ती का उपयोग किया जाता है। इन साधारण सामग्रियों से तैयार होने वाली यह डिश खाने के शौकीनों के बीच काफी लोकप्रिय है।

    इसे बनाने की प्रक्रिया भी बेहद आसान है। सबसे पहले हरी मिर्च को अच्छे से धोकर हल्का चीरा लगाया जाता है ताकि मसाले अंदर तक जा सकें। इसके बाद एक कड़ाही में तेल गर्म किया जाता है और उसमें जीरा तथा राई डाली जाती है। जब ये चटकने लगते हैं तो उसमें हींग मिलाई जाती है, जिससे स्वाद और भी बढ़ जाता है।

    इसके बाद हरी मिर्च को कड़ाही में डालकर हल्का सा भून लिया जाता है ताकि उसका कच्चापन खत्म हो जाए। फिर इसमें हल्दी और नमक मिलाकर अच्छे से चलाया जाता है। धीमी आंच पर कुछ मिनट तक पकाने से मिर्च नरम हो जाती है और मसाले अच्छे से उसमें समा जाते हैं।

    अंत में अमचूर पाउडर या नींबू का रस डालकर हल्का मिलाया जाता है, जिससे इसमें खट्टा और तीखा स्वाद आ जाता है। गैस बंद करने के बाद ऊपर से धनिया पत्ती डालकर इसे सजाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं।

    तड़का मिर्ची को गरम दाल-चावल के साथ, खिचड़ी के साथ या फिर साधारण रोटी के साथ खाया जा सकता है। यह एक ऐसा साइड डिश है जो कम भूख में भी खाने का मन बढ़ा देता है और पूरी थाली का स्वाद बदल देता है।

  • बच्चों की सेहत को लेकर अलर्ट रहें पेट दर्द और पाचन समस्या के संकेतों को समझें समय रहते इलाज करें

    बच्चों की सेहत को लेकर अलर्ट रहें पेट दर्द और पाचन समस्या के संकेतों को समझें समय रहते इलाज करें


    नई दिल्ली । बच्चों की सेहत और उनका सही विकास पूरी तरह उनके पोषण और पाचन तंत्र की स्थिति पर निर्भर करता है। आज की व्यस्त जीवनशैली में माता-पिता अक्सर बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े छोटे संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर समस्या का रूप ले सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के पाचन स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी है क्योंकि उनका पाचन तंत्र अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता।

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार बच्चों में पाचन संबंधी समस्याएं आम हैं, लेकिन शुरुआती लक्षणों को समझकर समय पर इलाज किया जाए तो बड़ी परेशानियों से बचा जा सकता है। बच्चों में कब्ज, दस्त, पेट दर्द और एसिडिटी जैसी समस्याएं सबसे ज्यादा देखने को मिलती हैं, जिन्हें अक्सर सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

    कब्ज एक आम समस्या है जिसमें बच्चा कठोर मल त्याग करता है या शौच के समय रोने लगता है। कई बार बच्चा शौच करने से डरने लगता है, जो आगे चलकर आदत बन सकती है। वहीं दस्त की स्थिति में बच्चे को बार बार पतला मल आता है जिससे शरीर में पानी की कमी होने का खतरा बढ़ जाता है और बच्चा सुस्त और कमजोर दिखाई देने लगता है।

    इसके अलावा पेट में जलन और एसिडिटी भी बच्चों में पाचन समस्या का बड़ा संकेत है। इस स्थिति में बच्चा पेट में जलन की शिकायत करता है, खट्टी डकारें आती हैं और कभी कभी उल्टी जैसी समस्या भी हो सकती है। भोजन असहजता या फूड इनटॉलरेंस भी एक महत्वपूर्ण संकेत है, जिसमें दूध, गेहूं या कुछ विशेष खाद्य पदार्थों से पेट फूलना, दर्द या एलर्जी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

    कृमि संक्रमण भी बच्चों में एक आम लेकिन गंभीर समस्या है जो साफ सफाई की कमी के कारण होती है। इसमें बच्चा बार बार पेट दर्द की शिकायत करता है, भूख कम हो जाती है, वजन नहीं बढ़ता और कई बार नींद में दांत पीसने की आदत भी देखी जाती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि माता पिता को बच्चों के व्यवहार और स्वास्थ्य में होने वाले छोटे बदलावों पर भी नजर रखनी चाहिए। अगर बच्चा लगातार पेट दर्द, उल्टी, दस्त या कब्ज जैसी समस्याओं से जूझ रहा हो तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। घरेलू उपायों से आराम न मिलने पर तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना जरूरी है।

    साथ ही बच्चों को स्वच्छता की आदतें सिखाना, उबला या साफ पानी देना और संतुलित आहार उपलब्ध कराना बेहद आवश्यक है। नियमित रूप से हाथ धोने की आदत भी उन्हें कई संक्रमणों से बचा सकती है। समय पर ध्यान और सही देखभाल से बच्चों को स्वस्थ और मजबूत बनाया जा सकता है।

  • गोंद कतीरा का गलत सेवन पाचन तंत्र पर डाल सकता है नकारात्मक असर..

    गोंद कतीरा का गलत सेवन पाचन तंत्र पर डाल सकता है नकारात्मक असर..

    नई दिल्ली:गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडा रखने और लू से बचाव के लिए लोग अक्सर प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और घरेलू उपायों का सहारा लेते हैं। इनमें गोंद कतीरा को विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है, जो शरीर को ठंडक देने और गर्मी के प्रभाव को कम करने में सहायक होता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसका गलत तरीके से सेवन करने पर यह फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है और पाचन तंत्र पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

    जानकारों के अनुसार सबसे बड़ी गलती यह होती है कि कई लोग गोंद कतीरा को पूरी तरह से भिगोए बिना या कम समय के लिए भिगोकर ही सेवन कर लेते हैं। यह तरीका शरीर के लिए हानिकारक साबित हो सकता है क्योंकि अधपका या सूखा गोंद कतीरा पेट में जाकर फूल सकता है, जिससे पेट में भारीपन, गैस, ऐंठन और अपच जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

    सही तरीका यह बताया जाता है कि गोंद कतीरा को हमेशा पर्याप्त समय देकर पानी में भिगोना चाहिए। आमतौर पर एक से दो चम्मच मात्रा को रातभर लगभग आठ से दस घंटे तक पानी में रखने पर यह पूरी तरह फूलकर जेली जैसी बनावट में बदल जाता है। इसके बाद ही इसका सेवन करना सुरक्षित माना जाता है।

    भीगे हुए गोंद कतीरा को ठंडाई, शरबत, दूध या अन्य पारंपरिक पेय में मिलाकर लिया जा सकता है। यह शरीर को ठंडक देने के साथ साथ गर्मी से राहत पहुंचाने में भी मदद करता है। गर्म मौसम में इसका संतुलित सेवन शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में सहायक माना जाता है।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि इसकी मात्रा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अत्यधिक सेवन करने से पाचन तंत्र पर दबाव पड़ सकता है और अन्य शारीरिक समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए सामान्य रूप से सीमित मात्रा में ही इसका उपयोग करना सुरक्षित माना जाता है।

    इसके अलावा सही तरीके से उपयोग करने पर गोंद कतीरा शरीर की ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है और कुछ हद तक जोड़ों तथा हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। लेकिन इसका पूरा लाभ तभी मिलता है जब इसे सही विधि और संतुलित मात्रा में लिया जाए।

    गर्मियों में प्राकृतिक उपाय अपनाते समय सावधानी बेहद जरूरी है, क्योंकि गलत जानकारी या गलत तरीका किसी भी फायदेमंद चीज को नुकसानदायक बना सकता है।

  • एलोवेरा और हल्दी से पाएं ग्लोइंग स्किन, दाग-धब्बों से मिलेगा छुटकारा

    एलोवेरा और हल्दी से पाएं ग्लोइंग स्किन, दाग-धब्बों से मिलेगा छुटकारा


    नई दिल्ली। गर्मियों में तेज धूप, धूल और प्रदूषण की वजह से त्वचा पर दाग-धब्बे, मुंहासे और डलनेस आम समस्या बन जाती है। ऐसे में एलोवेरा और हल्दी का प्राकृतिक फेस पैक बिना ज्यादा खर्च के त्वचा को निखारने का आसान तरीका माना जाता है।

    एलोवेरा और हल्दी क्यों फायदेमंद हैं?


    एलोवेरा के फायदे

    एलोवेरा में विटामिन A, C, E और कई एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। यह त्वचा को गहराई से नमी देता है, जलन और सूजन को कम करता है और सनबर्न से राहत दिलाता है। इसके नियमित उपयोग से त्वचा मुलायम और हाइड्रेट रहती है।

    हल्दी के फायदे

    हल्दी में मौजूद करक्यूमिन एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है। यह मुंहासों को कम करता है, दाग-धब्बों को हल्का करता है और स्किन टोन को बेहतर बनाता है।

    एलोवेरा-हल्दी फेस पैक कैसे बनाएं?


    2 बड़े चम्मच ताजा एलोवेरा जेल लें
    आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाएं
    चाहें तो 1 चम्मच शहद या दही भी मिला सकते हैं
    सभी चीजों को अच्छे से मिलाकर पेस्ट तैयार करें
    इस्तेमाल करने का तरीका

    चेहरे को साफ करके इस पेस्ट को 10–15 मिनट तक लगाएं और फिर गुनगुने पानी से धो लें। इसे हफ्ते में 2–3 बार लगाने से त्वचा में धीरे-धीरे निखार आने लगता है।

    क्या फायदे मिलते हैं?
    दाग-धब्बे कम होते हैं
    त्वचा साफ और ग्लोइंग बनती है
    डेड स्किन हटती है
    पिंपल्स की समस्या में राहत मिलती है
    स्किन हाइड्रेट और फ्रेश रहती है

    सावधानी

    संवेदनशील त्वचा वाले लोग पहले पैच टेस्ट जरूर करें, क्योंकि हल्दी कुछ लोगों में हल्की जलन या एलर्जी कर सकती है। कुल मिलाकर यह एक आसान, सस्ता और प्राकृतिक उपाय है जो नियमित इस्तेमाल से त्वचा की सेहत और चमक दोनों को बेहतर बना सकता है।
  • हेल्दी डाइट टिप्स: रोटी को बनाएं प्रोटीन रिच, पाएं जबरदस्त फायदे

    हेल्दी डाइट टिप्स: रोटी को बनाएं प्रोटीन रिच, पाएं जबरदस्त फायदे


    नई दिल्ली। गेहूं की रोटी भारतीय भोजन का सबसे आम हिस्सा है, लेकिन सिर्फ गेहूं की रोटी शरीर की प्रोटीन की जरूरत को पूरा नहीं कर पाती। ऐसे में अगर आटे में कुछ पौष्टिक चीजें मिलाई जाएं तो वही साधारण रोटी एक हेल्दी और प्रोटीन-रिच डाइट में बदल सकती है।

    गेहूं की रोटी में मिलाएं ये प्रोटीन-युक्त चीजें


    सोयाबीन का आटा

    सोयाबीन को प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। गेहूं के आटे में थोड़ी मात्रा में सोया आटा मिलाने से रोटी का प्रोटीन स्तर काफी बढ़ जाता है। यह मांसपेशियों की मजबूती के लिए भी फायदेमंद है।

    बेसन (चना आटा)

    चना दाल से बना बेसन प्रोटीन से भरपूर होता है। इसे आटे में मिलाकर रोटी बनाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और लंबे समय तक पेट भरा महसूस होता है।

    रागी का आटा

    रागी में प्रोटीन के साथ कैल्शियम और आयरन भी भरपूर मात्रा में होता है। यह हड्डियों को मजबूत बनाने और खून की कमी दूर करने में मदद करता है।

    क्विनोआ का आटा

    क्विनोआ आजकल सुपरफूड के रूप में जाना जाता है। इसमें सभी जरूरी अमीनो एसिड पाए जाते हैं, जो शरीर के विकास और रिकवरी के लिए जरूरी हैं।

    बीज और मेवे (सीड्स)

    चिया सीड्स, अलसी और कद्दू के बीज प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स से भरपूर होते हैं। इन्हें पीसकर आटे में मिलाने से रोटी ज्यादा पौष्टिक बन जाती है। बादाम और मूंगफली का पाउडर भी ऊर्जा बढ़ाने में मदद करता है।

    दालों का पाउडर

    मूंग, चना या उड़द दाल को हल्का भूनकर उसका पाउडर बनाकर आटे में मिलाने से प्रोटीन की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है।

    कैसे बनाएं और फायदा क्या है

    इन सभी चीजों को गेहूं के आटे में सीमित मात्रा में मिलाकर सामान्य रोटी की तरह ही इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे न सिर्फ स्वाद बेहतर होता है, बल्कि शरीर की ताकत, इम्युनिटी और पाचन क्षमता भी मजबूत होती है।

  • आज से अमरनाथ यात्रा रजिस्ट्रेशन, श्रद्धालुओं के लिए जरूरी गाइडलाइन जारी

    आज से अमरनाथ यात्रा रजिस्ट्रेशन, श्रद्धालुओं के लिए जरूरी गाइडलाइन जारी


    नई दिल्ली। अमरनाथ यात्रा 2026 (Amarnath Yatra) के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 15 अप्रैल से शुरू हो चुकी है। हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए इस पवित्र यात्रा में शामिल होंगे। यह यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर अगस्त के अंत तक चलेगी।

    यात्रा में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। बिना परमिट के किसी भी श्रद्धालु को यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी। श्रद्धालु ऑनलाइन या देशभर की निर्धारित बैंक शाखाओं के जरिए ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    Amarnath Yatra के लिए कैसे करें रजिस्ट्रेशन और कितनी है फीस
    अमरनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन दो तरीकों से किया जा सकता है—ऑनलाइन और ऑफलाइन। ऑनलाइन आवेदन श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड (SASB) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर किया जा सकता है, जबकि ऑफलाइन प्रक्रिया बैंक शाखाओं के माध्यम से पूरी होती है।

    रजिस्ट्रेशन के दौरान श्रद्धालुओं को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, पहचान पत्र और हेल्थ सर्टिफिकेट जमा करना होता है। इसके बाद यात्रा परमिट जारी किया जाता है।

    फीस की बात करें तो भारतीय श्रद्धालुओं के लिए यह लगभग 150 से 220 रुपये के बीच तय की गई है, जबकि विदेशी यात्रियों के लिए शुल्क अधिक हो सकता है।

    रूट, नियम और जरूरी गाइडलाइन
    अमरनाथ यात्रा के लिए दो मुख्य रूट निर्धारित किए गए हैं—पहलगाम और बालटाल। पहलगाम रूट लंबा लेकिन आसान माना जाता है, जबकि बालटाल रूट छोटा लेकिन ज्यादा कठिन है।

    यात्रा के लिए कुछ जरूरी नियम भी तय किए गए हैं:

    उम्र 13 से 70 साल के बीच होनी चाहिए
    अनिवार्य हेल्थ सर्टिफिकेट (CHC) जरूरी है
    RFID कार्ड साथ रखना होगा
    गर्भवती महिलाओं (6 सप्ताह से अधिक) को अनुमति नहीं है
    इसके अलावा श्रद्धालुओं को मौसम, सुरक्षा और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा।

    कुल मिलाकर, अमरनाथ यात्रा 2026 के लिए इस बार व्यवस्था को ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया गया है। अगर आप यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो समय रहते रजिस्ट्रेशन कराना बेहद जरूरी है।

  • रोजाना शहद का सेवन क्यों है जरूरी? जानिए इसके जबरदस्त हेल्थ बेनिफिट्स

    रोजाना शहद का सेवन क्यों है जरूरी? जानिए इसके जबरदस्त हेल्थ बेनिफिट्स


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट रहना सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे में लोग प्राकृतिक और सुरक्षित उपायों की तलाश में रहते हैं। इन्हीं में एक बेहद असरदार चीज है Honey, जिसे सदियों से आयुर्वेद और घरेलू नुस्खों में उपयोग किया जाता रहा है। हल्की मिठास और पोषक तत्वों से भरपूर शहद न सिर्फ स्वाद बढ़ाता है, बल्कि शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में भी मदद करता है।

     इम्युनिटी बढ़ाने में कारगर
    शहद में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स, विटामिन्स और मिनरल्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। इसके एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं। यही वजह है कि रोजाना सीमित मात्रा में शहद का सेवन करने की सलाह दी जाती है।

     वजन घटाने में सहायक
    अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो शहद आपकी डाइट का हिस्सा बन सकता है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है, जिससे फैट बर्निंग प्रक्रिया तेज होती है। खास बात यह है कि शहद, रिफाइंड शुगर की तुलना में एक हेल्दी विकल्प है, जिससे मीठा खाने की इच्छा भी संतुलित तरीके से पूरी हो सकती है।

    शहद-नींबू ड्रिंक: सुबह का हेल्दी स्टार्ट
    वजन घटाने के लिए Honey और Lemon का मिश्रण बेहद लोकप्रिय है। एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद और आधा नींबू मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से शरीर डिटॉक्स होता है और पाचन तंत्र बेहतर बनता है। इससे दिनभर हल्कापन और ऊर्जा बनी रहती है।

     दालचीनी के साथ डबल फायदा
    शहद को Cinnamon के साथ मिलाकर सेवन करने से भी मोटापा कम करने में मदद मिलती है। ग्रीन टी में शहद और दालचीनी मिलाकर पीने से ब्लड शुगर संतुलित रहता है और शरीर को नेचुरल एनर्जी मिलती है।

     सेवन में रखें सावधानी
    भले ही शहद प्राकृतिक है, लेकिन इसका अधिक सेवन नुकसानदेह हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए, खासकर डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

     क्यों बनाएं शहद को डेली रूटीन का हिस्सा?

    इम्युनिटी बढ़ाता है
    पाचन सुधारता है
    वजन नियंत्रित करने में मदद करता है
    शरीर को नेचुरल एनर्जी देता है

  • समर हेल्थ टिप्स: खाली पेट इस ड्रिंक से करें दिन की शुरुआत, शरीर रहेगा फिट

    समर हेल्थ टिप्स: खाली पेट इस ड्रिंक से करें दिन की शुरुआत, शरीर रहेगा फिट


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित दिनचर्या और खराब खान-पान ने सेहत को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। ऊपर से चिलचिलाती गर्मी शरीर को और कमजोर बना देती है। ऐसे में अगर आप दिन की शुरुआत एक आसान और नेचुरल उपाय से करें, तो कई बीमारियों से बचा जा सकता है। आयुर्वेद भी सुबह खाली पेट कुछ खास चीजों के सेवन की सलाह देता है, जिनमें mint, lemon और honey का मिश्रण एक बेहद असरदार हेल्दी ड्रिंक माना जाता है।

    क्या है यह हेल्दी ड्रिंक और क्यों है खास?

    यह ड्रिंक गुनगुने पानी में पुदीना, नींबू और शहद मिलाकर तैयार की जाती है। यह न सिर्फ शरीर को अंदर से डिटॉक्स करती है, बल्कि पाचन को दुरुस्त कर दिनभर के लिए एनर्जी भी देती है। National Health Mission ने भी इसे अपनी वेलनेस टिप्स में शामिल किया है, जिससे इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है।

    पाचन तंत्र को बनाएं मजबूत

    इस ड्रिंक में मौजूद पुदीना पेट को ठंडक देता है और गैस, ब्लोटिंग जैसी समस्याओं को कम करता है। वहीं नींबू और गुनगुना पानी कब्ज और अपच को दूर करने में मदद करते हैं। रोजाना सेवन से आपका डाइजेशन सिस्टम धीरे-धीरे मजबूत होने लगता है।

    त्वचा में लाए प्राकृतिक निखार

    नींबू में भरपूर विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो त्वचा को अंदर से साफ करते हैं। शहद स्किन को मॉइस्चराइज करता है, जिससे चेहरा चमकदार और हेल्दी दिखता है। नियमित सेवन से स्किन पर नेचुरल ग्लो आ सकता है।

    इम्युनिटी बढ़ाने में कारगर

    यह ड्रिंक शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करती है। नींबू जहां इम्युनिटी को बूस्ट करता है, वहीं शहद में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो सर्दी-जुकाम और गले की खराश से बचाव करते हैं।

    एनर्जी और डिटॉक्स का डबल फायदा

    गुनगुना पानी शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है, जबकि शहद तुरंत ऊर्जा देता है। यह ड्रिंक शरीर को हल्का और फ्रेश महसूस कराती है, जिससे दिनभर एक्टिव बने रहना आसान हो जाता है।

     सावधानी भी जरूरी

    हालांकि यह ड्रिंक पूरी तरह नेचुरल है, लेकिन अगर आपको डायबिटीज, एसिडिटी या कोई अन्य गंभीर समस्या है, तो इसे शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

    बनाने की आसान विधि

    एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नींबू निचोड़ लें। इसमें 7-10 पुदीने की पत्तियां हल्का मसलकर डालें और 1-2 चम्मच शहद मिलाएं। इसे अच्छी तरह मिलाकर सुबह खाली पेट धीरे-धीरे पिएं।

  • 5 घंटे तक ‘मृत’ घोषित शख्स अचानक जिंदा, अस्पताल में हुआ चौंकाने वाला चमत्कार

    5 घंटे तक ‘मृत’ घोषित शख्स अचानक जिंदा, अस्पताल में हुआ चौंकाने वाला चमत्कार


    नई दिल्ली। रूस के साइबेरिया क्षेत्र(Siberia Region)के याकुतिया (Yakutia) में एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसे डॉक्टर “मेडिकल चमत्कार” मान रहे हैं। एक व्यक्ति, जो कड़ाके की ठंड में करीब 5 घंटे तक बिना सांस और बिना धड़कन के पड़ा रहा, उसे डॉक्टरों ने क्लिनिकली मृत घोषित कर दिया था। लेकिन बाद में “ग्रेजुअल थॉइंग” तकनीक की मदद से उसे दोबारा जीवन मिल गया।

    -20°C ठंड में बेसुध पड़ा मिला शख्स
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्यक्ति शराब के नशे में बाहर गिर पड़ा था। उस समय तापमान लगभग -20 डिग्री सेल्सियस (-4°F) था। राहगीरों ने जब उसे देखा तो वह पूरी तरह बेहोश था और शरीर में कोई हरकत नहीं थी। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों को न पल्स मिली, न सांस और न ही ECG में कोई हार्टबीट।

    डॉक्टरों ने नहीं छोड़ी उम्मीद
    मिरनी अस्पताल के डॉक्टरों ने तुरंत उसे “ग्रेजुअल रीवॉर्मिंग” (धीरे-धीरे गर्म करने की प्रक्रिया) पर रखा।
    डॉक्टरों ने करीब 4 घंटे तक उसके शरीर का तापमान धीरे-धीरे बढ़ाया—25°C से 34°C तक।
    यदि शरीर को अचानक गर्म किया जाता, तो दिल और नसों के फटने का खतरा था। इसलिए बेहद सावधानी से इलाज किया गया।

    फिर लौटी धड़कन
    जब शरीर का तापमान 34°C के करीब पहुंचा, तो डॉक्टरों ने CPR और जीवन रक्षक दवाएं दीं।
    करीब 25 मिनट बाद मॉनिटर पर हल्की हार्टबीट दिखाई दी-और यहीं से उसकी वापसी शुरू हो गई।

    ठंड बनी ‘रक्षक’, नहीं तो मौत तय थी
    डॉक्टरों के अनुसार, यह मामला इसलिए खास है क्योंकि अत्यधिक ठंड ने शरीर को “प्रिजर्वेशन मोड” में डाल दिया था। इस स्थिति में शरीर की ऑक्सीजन जरूरत बहुत कम हो जाती है, जिससे अंग लंबे समय तक सुरक्षित रह सकते हैं।

    5 दिन में अस्पताल से चला गया घर
    सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि 24 घंटे कोमा में रहने के बाद वह व्यक्ति पूरी तरह होश में आया।
    सिर्फ 5 दिन बाद वह बिना किसी गंभीर दिमागी या अंग क्षति के अपने पैरों पर चलकर अस्पताल से बाहर चला गया।