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  • कोलेस्ट्रॉल बीमारी नहीं, लाइफस्टाइल का अलार्म! जानें आयुर्वेद क्या देता है संकेत

    कोलेस्ट्रॉल बीमारी नहीं, लाइफस्टाइल का अलार्म! जानें आयुर्वेद क्या देता है संकेत


    नई दिल्ली। सबसे पहले एक बात साफ कर लें-कोलेस्ट्रॉल कोई “जहर” नहीं है। यह एक वसा जैसा पदार्थ है, जिसे हमारा शरीर खुद भी बनाता है। कोशिकाओं की संरचना, हार्मोन बनाने और विटामिन D के निर्माण में इसकी अहम भूमिका होती है। समस्या तब शुरू होती है जब “बैड कोलेस्ट्रॉल” यानी LDL जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है और धमनियों में जमा होने लगता है। इससे दिल की बीमारी, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए इसे न तो नजरअंदाज करें, न ही बेवजह डरें-समझदारी से कंट्रोल करें।
    आयुर्वेद क्या कहता है?

    आयुर्वेद के अनुसार, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल शरीर में “कफ” और “मेद” की अधिकता से जुड़ा माना जाता है। यानी यह असंतुलित आहार, कम शारीरिक गतिविधि और गलत दिनचर्या का संकेत है।

    1. लहसुन


    सुबह खाली पेट भुनी हुई 1–2 लहसुन की कलियां गुनगुने पानी के साथ लेने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेद में माना जाता है कि लहसुन रक्त संचार सुधारने और वसा कम करने में मदद करता है।

    2. मेथी दाना


    मेथी में घुलनशील फाइबर पाया जाता है। रातभर भिगोकर सुबह इसका पानी पीना या दाने चबाना लाभकारी माना जाता है। हालांकि रोज़ाना लगातार लेने के बजाय बीच-बीच में लेना बेहतर बताया जाता है।

    3. अर्जुन की छाल

    अर्जुन की छाल को आयुर्वेद में हृदय के लिए लाभकारी माना गया है। इसका काढ़ा दिल की सेहत सुधारने और लिपिड प्रोफाइल संतुलित रखने में सहायक बताया जाता है।

    4. धनिया पानी
    धनिया का पानी लीवर फंक्शन को बेहतर करने में मददगार माना जाता है। चूंकि कोलेस्ट्रॉल का निर्माण लीवर में होता है, इसलिए लीवर स्वस्थ रहेगा तो लिपिड लेवल भी संतुलित रहेगा।

    लेकिन एक जरूरी सच


    यह समझना बहुत जरूरी है कि अगर आपका कोलेस्ट्रॉल बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है या पहले से दिल की बीमारी है, तो सिर्फ घरेलू उपायों पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह, ब्लड टेस्ट और दवाइयों की भी अहम भूमिका होती है। आयुर्वेदिक उपाय सहायक हो सकते हैं, लेकिन वे आधुनिक चिकित्सा का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक हैं।

    लाइफस्टाइल ही असली गेम-चेंजर

    रोज़ कम से कम 30 मिनट तेज चलना या व्यायाम

    तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड कम करना

    धूम्रपान और अत्यधिक शराब से दूरी

    वजन नियंत्रित रखना

    तनाव कम करना

    सीधी बात-कोलेस्ट्रॉल हमें चेतावनी देता है कि जीवनशैली सुधारने का समय आ गया है। घबराने के बजाय इसे एक संकेत मानिए, और शरीर के साथ दोस्ती कीजिए। दिल आपका है-देखभाल भी आपकी जिम्मेदारी है।

  • होली स्पेशल टिप्स: केमिकल रंगों से बचें और स्किन को सुरक्षित रखें

    होली स्पेशल टिप्स: केमिकल रंगों से बचें और स्किन को सुरक्षित रखें


    नई दिल्ली। होली रंगों और खुशियों का त्योहार है लेकिन आजकल बाजार में मिलने वाले रासायनिक Chemical युक्त रंग, गुलाल और पेंट हमारी त्वचा के लिए खतरा बन सकते हैं इससे त्वचा पर खुजली, रैशेज, जलन और रूखापन जैसी समस्याएं होना आम बात है इसलिए अगर आप चाहते हैं कि होली का मज़ा भी बना रहे और आपकी स्किन भी सुरक्षित रहे तो कुछ आसान और प्रभावी उपायों को अपनाना बेहद जरूरी है सबसे पहला कदम है तेल लगाना होली खेलने से कम से कम 20-30 मिनट पहले नारियल तेल, सरसों के तेल या ऑलिव ऑयल से पूरे शरीर पर अच्छी तरह मसाज करें यह तेल स्किन पर एक प्रोटेक्टिव बैरियर का काम करता है जिससे रंग पोर्स में नहीं जा पाते और बाद में उन्हें हटाना आसान हो जाता है

    इसके बाद जरूरी है सनस्क्रीन का इस्तेमाल होली अक्सर बाहर खेली जाती है धूप और रंगों के कॉम्बिनेशन से फोटोटॉक्सिक रिएक्शन हो सकता है जिससे स्किन जल सकती है या टैनिंग हो सकती है इसलिए तेल लगाने के बाद अच्छी मात्रा में वॉटरप्रूफ सनस्क्रीन लगाना न भूलें यह स्किन को सूरज की हानिकारक किरणों से भी बचाता है और रंग खेलने का आनंद बिना नुकसान के मिलता है

    होली पर हल्के और नैचुरल रंगों का चुनाव भी आपकी स्किन को सुरक्षित रखने का एक और तरीका है बाजार में मिलने वाले केमिकल रंगों के बजाय फूलों से बने रंग, हल्दी, चंदन या बेसन के रंग इस्तेमाल करें ये त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचाते और स्किन को आराम देते हैं इसके अलावा होली के दिन पानी का प्रॉपर इस्तेमाल करें अत्यधिक पानी से बचें और रंग लगाने के बाद तुरंत स्नान करें स्नान के लिए हल्के और माइल्ड साबुन या शॉवर जेल का उपयोग करें ताकि त्वचा को नुकसान न पहुंचे

    होली के बाद स्किन की देखभाल करना भी जरूरी है स्नान के बाद मॉइस्चराइजर लगाना न भूलें यह स्किन को हाइड्रेट रखता है और रंगों के कारण होने वाले नुकसान को कम करता है इसके साथ ही अगर त्वचा पर कोई एलर्जी या जलन महसूस हो तो ठंडे पानी से कमप्रेस करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें

    इस तरह से होली के दिन कुछ सावधानियों और घरेलू उपायों को अपनाकर आप रंगों का मज़ा भी ले सकते हैं और अपनी त्वचा को भी सुरक्षित रख सकते हैं होली सिर्फ एक त्योहार नहीं है यह खुशियों का उत्सव है और इसे सही तरीके से मनाना सबसे महत्वपूर्ण है ताकि त्योहार के बाद कोई परेशानी न हो

  • मौसमी थकान का सच: सर्दियों से वसंत में बदलाव पर शरीर क्यों महसूस करता है कमजोरी

    मौसमी थकान का सच: सर्दियों से वसंत में बदलाव पर शरीर क्यों महसूस करता है कमजोरी


    नई दिल्ली। जैसे ही सर्दियों का मौसम धीरे-धीरे खत्म होता है और वसंत की हल्की गर्मी शुरू होती है, कई लोग सामान्य से अधिक थकान महसूस करने लगते हैं। सुबह और रात में हल्की ठंड होती है और दिन में धूप निकलने से गर्मी लगती है। ऐसे में शरीर में सुस्ती, आलस और ऊर्जा की कमी महसूस होना आम बात हो गई है। इस स्थिति को सीजनल फटीग या मौसमी थकान कहते हैं।

    सीजनल फटीग तब होती है जब मौसम बदलता है और शरीर को नए तापमान और रोशनी के अनुसार एडजस्ट होना मुश्किल लगता है। सर्दियों में दिन छोटे और रातें लंबी होती हैं, जिससे प्राकृतिक प्रकाश कम मिलता है। इससे शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन का संतुलन प्रभावित होता है, जो नींद, ऊर्जा और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालता है। जैसे ही वसंत आता है, दिन लंबे और उजाले बढ़ते हैं। शरीर को इस बदलाव के अनुसार अपनी दिनचर्या और ऊर्जा स्तर एडजस्ट करने में समय लगता है, और इसी दौरान अधिक थकान, सुस्ती और मानसिक कमजोरी महसूस हो सकती है।

    सीजनल फटीग से ग्रस्त व्यक्ति को कई बार पर्याप्त नींद के बावजूद थकान बनी रहती है। दिनचर्या प्रभावित हो सकती है और काम या पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो सकता है। व्यक्ति को मानसिक थकान, सुस्ती, आलस्य, एकाग्रता में कमी और कभी-कभी नींद न आने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

    इसका मुख्य कारण मौसम में बदलाव के कारण शरीर की ऊर्जा और हार्मोनल प्रतिक्रिया है। सर्दियों में ठंड के कारण शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, और वसंत में अचानक गर्मी और रोशनी बढ़ने पर शरीर को फिर से ऊर्जा स्तर संतुलित करने में समय लगता है। इसके अलावा विटामिन डी की कमी भी थकान में योगदान कर सकती है क्योंकि सर्दियों में धूप कम मिलती है।

    सीजनल फटीग से बचने के लिए कुछ उपाय बेहद मददगार साबित होते हैं। रोजाना हल्की एक्सरसाइज या योग करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म सक्रिय रहता है। पर्याप्त पानी पीना, संतुलित आहार लेना और प्राकृतिक प्रकाश में समय बिताना भी मदद करता है। नींद पूरी करना, स्ट्रेस कम करना और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।

    यदि थकान लंबे समय तक बनी रहे, मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो, नींद न आए या सामान्य गतिविधियों में कठिनाई हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। कभी-कभी ये लक्षण अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत भी हो सकते हैं।

    इस प्रकार सर्दियों से वसंत के मौसम में शरीर का एडजस्ट होना और ऊर्जा स्तर में बदलाव सामान्य है, लेकिन समझदारी और सावधानी से आप सीजनल फटीग को कम कर सकते हैं और स्वस्थ दिनचर्या बनाए रख सकते हैं।

  • ऑयली और डल स्किन से छुटकारा, समर में ऐसे रखें चेहरा फ्रेश और जवान

    ऑयली और डल स्किन से छुटकारा, समर में ऐसे रखें चेहरा फ्रेश और जवान


    नई दिल्ली । जैसे ही तापमान चढ़ता है त्वचा की परेशानी भी बढ़ने लगती है। तेज धूप पसीना और उमस मिलकर स्किन को बेजान चिपचिपी और थकी हुई बना देते हैं। ऑयली स्किन और ज्यादा ऑयली हो जाती है जबकि ड्राई स्किन रूखी और खिंची खिंची महसूस होने लगती है। अगर आप चाहते हैं कि गर्मियों में भी आपकी त्वचा दमकती और जवां दिखे तो अब समय है अपना स्किनकेयर रूटीन बदलने का। सही देखभाल से न सिर्फ टैन और पिंपल्स से बचाव होगा बल्कि नेचुरल ग्लो भी बरकरार रहेगा।

    क्लींजिंग है सबसे पहला और जरूरी कदम

    गर्मियों में चेहरे पर धूल पसीना और एक्स्ट्रा ऑयल जल्दी जमा हो जाता है। इसलिए दिन में दो बार माइल्ड पीएच बैलेंस्ड और अल्कोहल फ्री फेस वॉश से चेहरा साफ करें। ऑयली स्किन वालों के लिए जेल बेस्ड क्लींजर बेहतर रहते हैं जबकि ड्राई स्किन वालों को नॉन फोमिंग क्लींजर चुनना चाहिए। इससे पोर्स साफ रहते हैं और मुंहासों का खतरा कम होता है।

    क्रीम नहीं जेल और वॉटर बेस्ड प्रोडक्ट्स चुनें

    गर्मियों में भारी क्रीम त्वचा को और चिपचिपा बना सकती हैं। ऐसे में हल्के जेल बेस्ड या वॉटर बेस्ड मॉइश्चराइज़र का इस्तेमाल करें। दिन में दो बार क्लींजिंग टोनिंग और मॉइश्चराइजिंग CTM रूटीन फॉलो करने से स्किन फ्रेश और हेल्दी बनी रहती है।

    एंटीऑक्सिडेंट सीरम से बढ़ाएं नैचुरल ग्लो
    अपने समर रूटीन में एंटीऑक्सिडेंट सीरम जरूर शामिल करें। विटामिन C जैसे एंटीऑक्सिडेंट्स फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं कोलेजन को बढ़ावा देते हैं और स्किन को ब्राइट बनाते हैं। साथ ही डाइट में खट्टे फल हरी पत्तेदार सब्जियां और ग्रीन टी शामिल करना भी फायदेमंद रहेगा।

    हाइड्रेशन है सबसे बड़ी कुंजी

    गर्मी में शरीर और त्वचा दोनों को ज्यादा पानी की जरूरत होती है। दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और जरूरत हो तो हाइड्रेटिंग फेस मिस्ट या एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करें। रात में सोने से पहले हाइड्रेटिंग फेस मास्क लगाने से स्किन को एक्स्ट्रा नमी मिलती है और सुबह चेहरा फ्रेश दिखता है।

    हफ्ते में दो बार करें एक्सफोलिएशन
    स्किन से डेड सेल्स हटाने के लिए हफ्ते में एक या दो बार हल्के स्क्रब से एक्सफोलिएट करें। इससे पोर्स साफ रहते हैं और चेहरा साफ सुथरा दिखता है। ध्यान रखें ज्यादा स्क्रबिंग से स्किन को नुकसान भी हो सकता है।

    सनस्क्रीन कभी न भूलें

    गर्मियों में यूवी ए और यूवी बी किरणें स्किन को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। घर से बाहर निकलते समय SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन जरूर लगाएं। घर के अंदर रहते हुए भी सनस्क्रीन लगाना फायदेमंद होता है क्योंकि धूप की किरणें खिड़कियों से भी अंदर आ सकती हैं।

    हल्का मेकअप और सही टोनर का इस्तेमाल
    भारी मेकअप से बचें क्योंकि यह पोर्स को बंद कर सकता है और पिंपल्स बढ़ा सकता है। एलोवेरा या खीरा बेस्ड टोनर का उपयोग करें जो त्वचा को ठंडक और ताजगी देता है।

  • बॉलीवुड की होली स्पेशल हिट्स, ‘रंग बरसे’ से लेकर ‘होली के दिन’ तक, आज भी हैं एवरग्रीन

    बॉलीवुड की होली स्पेशल हिट्स, ‘रंग बरसे’ से लेकर ‘होली के दिन’ तक, आज भी हैं एवरग्रीन


    नई दिल्ली: होली का त्योहार बस आने ही वाला है और हर तरफ उत्सव का माहौल है। रंग, गुलाल और मिठाईयों के बीच बॉलीवुड के एवरग्रीन होली गाने इस त्योहार को और भी खास बना देते हैं। ये गाने सिर्फ संगीत नहीं बल्कि यादों का हिस्सा बन गए हैं और दशकों से दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए हैं। आज हम बात करेंगे ऐसे 5 गानों की, जो हर होली को जश्न में बदल देते हैं।

    सबसे पहले आते हैं नरगिस दत्त और राजकुमार पर फिल्माए गए गीत ‘होली आई रे’ की। 1950 में रिलीज हुए इस गाने को शकील बदायूनी ने लिखा था। यह गाना बॉलीवुड के इतिहास में होली के सबसे बेहतरीन और कालजयी गीतों में से एक माना जाता है। आज भी जब यह गाना बजता है, त्योहार की खुशियाँ दोगुनी हो जाती हैं।

    1975 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘शोले’ का गाना ‘होली के दिन दिल खिल जाते हैं’ भी हर होली पर सुना और गाया जाता है। हेमा मालिनी और धर्मेंद्र पर फिल्माया गया यह गाना आनंद बक्शी के लिखे शब्दों और मस्त धुन के कारण हमेशा लोकप्रिय रहा। यह गाना इस त्योहार की मस्ती और उमंग का सबसे बेहतरीन प्रतीक बन चुका है।

    बॉलीवुड की क्लासिक फिल्मों में ‘सिलसिला’ का गाना ‘रंग बरसे’ कभी पीछे नहीं रहता। अमिताभ बच्चन और रेखा पर फिल्माया गया यह गीत त्रिकोणीय प्रेम कहानी की पृष्ठभूमि में बेहद लोकप्रिय हुआ। इस गाने के बोल हरिवंश राय बच्चन ने लिखे थे और आज भी यह गाना होली पार्टीज़ और उत्सवों में सबका फेवरेट बना हुआ है।

    1990 के दशक की यादों में बसे जूही चावला और शाहरुख खान के फिल्म ‘डर’ का गाना ‘अंग से अंग लगाना’ भी होली की धूम में अपना खास स्थान रखता है। इस गीत को आनंद बक्शी ने लिखा और विनोद राठौड़, अल्का याग्निक और सुदेश भोसले ने अपनी आवाज दी। शाहरुख का नेगेटिव रोल और जूही के साथ उनकी केमिस्ट्री इसे आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाती है।

    और अंत में, अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी पर फिल्माया गया गाना ‘होली खेले रघुबीरा’ हमेशा होली के रंगों में चार चाँद लगा देता है। इसकी धुन और गीतकार की कला इसे हर होली पार्टी में बजाने योग्य बनाती है।

    ये पांच गाने सिर्फ संगीत का आनंद नहीं देते, बल्कि हर बार होली का जश्न और उत्साह दोगुना कर देते हैं। चाहे यह पुरानी फिल्में हों या आधुनिक पार्टीज़, इन गानों की धुन और बोल हर उम्र के लोगों के लिए होली के त्योहार को और रंगीन बना देते हैं। इस होली, इन गानों को सुनकर आप भी अपने घर और दोस्तों के साथ त्योहार का मजा दोगुना कर सकते हैं।

  • मिलावटी खोया से होली पर खतरा: घर पर पहचानें शुद्ध खोया

    मिलावटी खोया से होली पर खतरा: घर पर पहचानें शुद्ध खोया


    नई दिल्ली । होली का त्योहार नजदीक है और बाजारों में मिठाइयों की मांग बढ़ गई है। इसी बीच मिलावटखोर मिलावटी खोया बेचकर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने 12,800 किलो खोया बिक्री पर रोक दिया और 760 क्विंटल से अधिक खोया नष्ट कराया। ये कोई अलग मामला नहीं है, देशभर से मिलावटी खोया मिलने और उसकी बिक्री पर कार्रवाई की खबरें लगातार आ रही हैं।

    मिलावटी खोया दिखने में असली जैसा लगता है, लेकिन इसके सेवन से पेट दर्द, अपच, गैस, दस्त, फूड पॉइजनिंग, लिवर और किडनी की समस्या और हार्ट हेल्थ पर नकारात्मक असर हो सकता है। अगर इसमें डिटर्जेंट या यूरिया जैसी हानिकारक चीजें मिली हों, तो यह केमिकल टॉक्सिसिटी का कारण बन सकती है।

    डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली के अनुसार मिलावटी खोया अक्सर स्टार्च, मैदा, सिंथेटिक दूध, रिफाइंड तेल या वनस्पति घी, यहां तक कि साबुन या डिटर्जेंट जैसे हानिकारक पदार्थ मिलाकर बनाया जाता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, हार्ट डिजीज का खतरा होता है और पाचन तंत्र प्रभावित होता है।

    घर पर असली और नकली खोया पहचानना आसान है। FSSAI के अनुसार असली खोया मुलायम, दानेदार और हल्का गुलाबी रंग का होता है, जबकि मिलावटी खोया चिपचिपा, बहुत चिकना या रासायनिक गंध वाला हो सकता है।

    अगर आप घर पर खोया बनाना चाहते हैं तो प्रक्रिया सरल है। दूध को कड़ाही में उबालें, मीडियम आंच पर लगातार चलाएं और किनारों पर जमने वाली मलाई को वापस मिलाएं। जैसे-जैसे पानी सूखता है, दूध गाढ़ा होकर रबड़ी जैसा हो जाएगा। जब मिश्रण पूरी तरह गाढ़ा होकर एक जगह इकट्ठा हो जाए, तो गैस बंद करें। ठंडा होने पर खोया और सख्त और दानेदार हो जाएगा। इसे एयरटाइट डिब्बे में फ्रिज में 4-5 दिन या फ्रीजर में महीने भर रखा जा सकता है।

    अगर किसी दुकान पर मिलावटी खोया मिलने का शक हो तो पहले दुकानदार से बात करें। संतोषजनक जवाब न मिले तो FSSAI के टोल-फ्री नंबर 1800112100 पर शिकायत दर्ज करें। स्थानीय पुलिस और जिले के खाद्य सुरक्षा विभाग को भी सूचना दी जा सकती है। शिकायत के लिए सैंपल और रसीद सुरक्षित रखें।

    मिलावटी फूड बेचने वालों पर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट, 2006 के तहत कार्रवाई होती है। इसमें भारी जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या रद्द, दुकान सील और गंभीर मामलों में जेल की सजा शामिल हो सकती है। फूड सेफ्टी ऑफिसर जांच के बाद सैंपल लैब में भेजते हैं और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करते हैं। होली पर मिठाइयों का मज़ा लेते हुए मिलावटी खोया से बचना बेहद जरूरी है। घर पर शुद्ध खोया बनाएं और सुरक्षित मिठाइयों का आनंद लें।

  • बर्डवॉचिंग लवर्स के लिए खास, सर्दियां खत्म होने से पहले घूम आएं ये 4 जगह

    बर्डवॉचिंग लवर्स के लिए खास, सर्दियां खत्म होने से पहले घूम आएं ये 4 जगह


    नई दिल्ली । हर सर्दियों में उत्तर भारत परिंदों का स्वर्ग बन जाता है। साइबेरिया और दूसरे ठंडे इलाकों से हजारों पक्षी यहां की झीलों तालाबों और वेटलैंड्स में आकर डेरा डालते हैं। सर्दियों के खत्म होने से पहले इन परिंदों का दीदार करने के लिए आप उत्तर भारत की कुछ बेहतरीन जगहों पर जाने का प्लान कर सकते हैं।

    ​परिंदों का स्वर्ग​

    साइबेरियन क्रेन बार हेडेड गीज फ्लेमिंगो और अलग अलग तरह की बतखें सर्दियों में उत्तर भारत की रौनक बढ़ा देती हैं। लेकिन ये नजारा हमेशा नहीं रहता। मार्च आते आते ये मेहमान पक्षी फिर से अपने देश की ओर उड़ान भरने लगते हैं।

    ​घूमने का बना लें प्लान​

    धुंध के बीच से उड़ते बेहद खूबसूरत पक्षी को देखने के लिए सुबह का समय सबसे बढ़िया रहता है। आइए जानते हैं उत्तर भारत की कुछ बेहतरीन जगहों के बारे में जहां आप सर्दियों के खत्म होने से पहले इन परिंदों का दीदार कर सकते हैं।

    ​केओलादेव राष्ट्रीय उद्यान​
    राजस्थान के भरतपुर में स्थित यह नेशनल पार्क देश के सबसे मशहूर बर्ड सैंक्चुअरी में से एक है। पहले इसे भरतपुर बर्ड सैंक्चुअरी के नाम से जाना जाता था। यह जगह यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट भी है।

    ​हरियाणा में सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान​
    मध्य एशिया यूरोप और साइबेरिया से हजारों पक्षी यहां आते हैं। यहां आप पेंटेड स्टॉर्क पेलिकन क्रेन कई तरह की बतखें और शिकारी पक्षी आसानी से देख सकते हैं।

    ​पोंग बांध झील हिमाचल प्रदेश​
    पोंग बांध झील जिसे महाराणा प्रताप सागर के नाम से भी जाना जाता है सर्दियों के महीनों में प्रवासी जलपक्षियों का एक विशाल ठिकाना बन जाती है। धौलाधार पर्वत श्रृंखला से घिरी यह झील एक सुंदर वातावरण प्रदान करती है।

    ​हरिके आर्द्रभूमि पंजाब​
    हरिके आर्द्रभूमि ब्यास और सतलुज नदियों के संगम पर स्थित है। इसे उत्तर भारत की सबसे बड़ी आर्द्रभूमियों में से एक माना जाता है। पक्षी प्रेमियों को यहां गुच्छेदार बत्तखें पोचार्ड और दलदली बाज देखने को मिलते हैं।

  • इस होली कम समय में बनाए गुझिया, तलते वक्त फट जाती है तो यहां देखें आसान रेसिपी

    इस होली कम समय में बनाए गुझिया, तलते वक्त फट जाती है तो यहां देखें आसान रेसिपी


    नई दिल्ली । होली का त्योहार गुझिया के बिना अधूरी है। गुझिया की तैयारी कुछ दिनों पहले से ही शुरु हो जाती है। लेकिन ऑफिस और भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास समय की कमी है। ऐसे में काफी लोग होली के मौके पर गुझिया बना नहीं पाते हैं और बाजार से खरीद कर लाते हैं। बाजार की गुझिया का स्वाद घर जैसा नहीं होता है। साथ बाजार की गुझिया में चीनी की मात्रा काफी अधिक होती है जिसकी चलते यह सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकती है। कुछ आसान तरीके हैं जिनकी मदद से आप होली के मौके पर कम समय में गुझिया बना सकते हैं। इसके साथ ही गुझिया बनाने में लोगों को एक और समस्या रहती है कि तलते समय यह फट जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं किस तरह कम समय में गुझिया बनाएं और वह भी बिना फटे।

    गुझिया की सामग्री

    मैदा- दो कप
    घी- 1 कप
    पानी- 1 कप
    खोया- 1 कप
    चीनी- 1 कप
    1 छोटा चम्मच छोटी इलायची
    1 चम्मच कद्दूकस किया हुआ बादाम
    नारियल का बुरादा
    काजू
    किशमिश
    चिरौंजी
    गुझिया बनाने की विधि 
    मैदे में आधा कप घी और पानी मिलाकर अच्छे से गूंथकर आधे घंटे के लिए ढककर रख दें। खोए को हल्की आंच पर थोड़ी देर के लिए भून लें। खोया जब ठंडा हो जाए तो इसमें बादाम, इलायची पाउडर और चीनी मिला दें। गूंथे हुए मैदे की लोई बनाकर उसे गोल पूरी की तरह बेल लें। अब उसमें तैयार मिश्रण भरकर किनारों पर हल्का पानी लगाकर उसे बंद करें। फैंसी कटर की मदद से गुझिया के किनारों को शेप दे सकते हैं। एक कढ़ाई में घी डालकर गर्म कर लें। हल्की आंच पर गुझिया को तब तक तलें जब तक वह हल्के भूरे रंग की न हो जाए। एक बड़े प्लेट में टिश्यू पेपर बिछाकर उसपर गुझिया निकाल लें। जब ये ठंडा हो जाए तो उसे एक डिब्बे में बंद करके रख दें।
    फट जाती है तो अपनाएं ये तरीके

    गुझिया तलने के लिए हमेशा मोटी तली वाली कढ़ाई लेना चाहिए। पतली कढ़ाई में गुझिया जल्दी जल जाती है। गुझिया तलने के लिए तेल न तो ज्यादा होना चाहिए और न ही कम। तेल को मध्यम आंच पर गर्म करें। तेल से धुआं नहीं उठना चाहिए। तेल तैयार हो जाए तो कढ़ाई के हिसाब से गुझिया डालें। गुझिया डालते ही उसे हिलाना नहीं चाहिए। इससे फटने का डर रहता है। गुझिया को 7-10 मिनट तक धीमी आंच पर पकाना चाहिए। तेज आंच पर पकाने से ये अंदर से कच्ची रह सकती है और साथ ही फट भी सकती है। जब गुझिया एक तरह से सुनहरी हो जाए तब इसे पलटें।

  • तनाव मुक्त जीवन के लिए योग: मन की 5 वृत्तियों का सरल ज्ञान..

    तनाव मुक्त जीवन के लिए योग: मन की 5 वृत्तियों का सरल ज्ञान..


    नई दिल्ली: शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए लोग जिम और कसरत का सहारा लेते हैं, लेकिन मन का स्वास्थ्य उतना ही जरूरी है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, मन को स्वस्थ रखने के लिए योग में चित्त की मुख्य 5 वृत्तियों का अभ्यास किया जाता है। इन वृत्तियों की समझ से मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है और जीवनशैली सुधारने में मदद मिलती है।

    चित्त वृत्ति निरोध का अर्थ है मन का अध्ययन करना और उसे सभी प्रकार के बोझ और विकारों से मुक्त करना। योग में पांच प्रमुख वृत्तियां बताई गई हैं: प्रमाणवृत्ति, विपर्ययवृत्ति, विकल्प वृत्ति, निद्रावृत्ति और स्मृतिवृत्ति।

    1. प्रमाणवृत्ति: यह ध्यान का पहला चरण है। इसमें मन को सही ज्ञान और धारणा की स्थिति में लाया जाता है। आँखों और कानों से प्राप्त अनुभव के माध्यम से मन को वास्तविकता से जोड़ा जाता है।

    2. विपर्ययवृत्ति: इसमें मन में उत्पन्न भ्रम और गलत ज्ञान को दूर किया जाता है। विपर्ययवृत्ति का लक्ष्य मन के भीतर पल रहे विरोधाभासी विचारों को संशोधित करना है।

    3. विकल्प वृत्ति: यह कल्पनाशील ज्ञान से संबंधित है, जिसे वस्तु से कोई लेना-देना नहीं होता। इसे शब्द ज्ञान या कल्पना द्वारा प्राप्त ज्ञान कहा जा सकता है।

    4. निद्रावृत्ति: इसका अर्थ है ज्ञान की कमी। इस अवस्था में मन ज्ञान की स्थिति से दूर होता है और अज्ञान या तमस का अनुभव करता है।

    5. स्मृतिवृत्ति: जब मन बार-बार पुरानी यादों को याद करता है और अतीत के सुखद पलों में खुद को डुबो देता है।

    इन पांच वृत्तियों का अभ्यास मानसिक विकारों और तनाव को हटाने में सक्षम है। योग के माध्यम से इन पर ध्यान केंद्रित कर मन को शांत, सशक्त और बोझ-मुक्त बनाया जा सकता है। तन की तरह मन को भी स्वस्थ रखना जरूरी है, और चित्त की ये पाँच वृत्तियां इसे संभव बनाती हैं।

  • Holi Skincare Tips: रंगों का त्योहार खुशी से मनाएं, स्किन और बालों को रखें सुरक्षित

    Holi Skincare Tips: रंगों का त्योहार खुशी से मनाएं, स्किन और बालों को रखें सुरक्षित


    नई दिल्ली । होली का त्योहार नजदीक है और रंग-गुलाल की तैयारी जोरों पर है। लेकिन उत्साह के बीच अक्सर लोग अपनी त्वचा और बालों की देखभाल को नजरअंदाज कर देते हैं। केमिकल युक्त रंगों से स्किन इरीटेशन, एलर्जी, रैशेज और बालों के रूखेपन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में कुछ आसान सावधानियां अपनाकर आप रंगों का मजा बिना किसी नुकसान के ले सकते हैं।

    होली खेलने से पहले अपनाएं ये उपाय, मॉइस्चराइजर की मोटी परत लगाएं

    होली से एक रात पहले चेहरे और शरीर पर अच्छी तरह मॉइस्चराइजर लगाएं। होली खेलने से ठीक पहले भी इसकी मोटी परत लगाएं। इससे त्वचा पर एक सुरक्षा कवच बन जाता है और रंग गहराई तक नहीं जाता।

    सनस्क्रीन जरूर लगाएं
    अक्सर होली खुले मैदान या छत पर खेली जाती है। ऐसे में धूप से बचाव जरूरी है। एसपीएफ 50 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन लगाएं ताकि यूवी किरणों से त्वचा सुरक्षित रहे।

     नारियल तेल और हल्दी का इस्तेमाल

    होली से एक-दो दिन पहले त्वचा पर नारियल तेल और हल्दी लगाने से त्वचा मजबूत होती है और रंगों का असर कम पड़ता है। बालों में भी नारियल तेल लगाकर रखें, इससे रंग आसानी से निकल जाता है।

    होली खेलने के बाद रखें इन बातों का ध्यान जोर से स्क्रबिंग न करें

    रंग हटाने के लिए त्वचा को बार-बार रगड़ना नुकसानदायक हो सकता है। इससे त्वचा में जलन और रैशेज बढ़ सकते हैं।

    पहले सादे पानी से धोएं

    होली के बाद सबसे पहले सादे पानी से रंग धोएं। तुरंत साबुन या बॉडी वॉश का उपयोग न करें। जब ज्यादातर रंग निकल जाए तब हल्के क्लींजर का इस्तेमाल करें।

     एलोवेरा जेल लगाएं

    त्वचा साफ करने के बाद एलोवेरा जेल लगाएं। यह स्किन को ठंडक देता है और डैमेज हुई त्वचा की मरम्मत में मदद करता है।

    आंखों और बालों की सुरक्षा भी जरूरी

    होली के दौरान आंखों में रंग जाने से संक्रमण का खतरा रहता है। इसलिए सनग्लासेस पहनें। बालों को सुरक्षित रखने के लिए पहले से तेल लगाएं या हेयर मास्क का उपयोग करें। जिन्हें सांस की समस्या है, वे गुलाल से दूरी बनाए रखें।

    हर्बल गुलाल है सुरक्षित विकल्प

    पक्के रंगों में मेटल साल्ट्स, सिंथेटिक डाई और इंडस्ट्रियल पिगमेंट हो सकते हैं, जो त्वचा और बालों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए हर्बल या प्राकृतिक गुलाल से होली खेलना बेहतर और सुरक्षित विकल्प है।