Category: Lifestyle

  • Skin Care Mistakes: महंगे प्रोडक्ट्स के बाद भी नहीं मिल रहा ग्लो? आपकी 7 गलतियां हो सकती हैं वजह

    Skin Care Mistakes: महंगे प्रोडक्ट्स के बाद भी नहीं मिल रहा ग्लो? आपकी 7 गलतियां हो सकती हैं वजह

    नई दिल्ली।  हर महिला चाहती है कि उसकी स्किन लंबे समय तक जवां और हेल्दी बनी रहे, लेकिन व्यस्त दिलचर्या, बढ़ती जिम्मेदारियां और सेल्फ-केयर की कमी के कारण अक्सर महिलाएं अनजाने में कुछ ऐसी स्किनकेयर मिस्टेक्स कर बैठती हैं, जो उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर देती हैं। इन गलतियों की वजह से स्किन पर झुर्रियां, फाइन लाइन्स और ढीलापन जल्दी नजर आने लगता है। आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही गलतियों के बारे में, जो ज्यादातर महिलाएं करती हैं और जिनसे बचकर स्किन को हेल्दी रखा जा सकता है।

    सनस्क्रीन का इस्तेमाल न करना
    अक्सर महिलाएं सोचती हैं कि सनस्क्रीन सिर्फ धूप में बाहर जाने पर लगाना जरूरी है। जबकि हकीकत यह है कि सूर्य की हानिकारक यूवी किरणें घर या ऑफिस के अंदर भी स्किन को नुकसान पहुंचा सकती हैं। सनस्क्रीन न लगाने से समय से पहले झुर्रियां और पिगमेंटेशन बढ़ने लगता है।

    स्किन की जरूरत के हिसाब से प्रॉडक्ट न चुनना
    बहुत सी महिलाएं बिना अपनी स्किन टाइप को समझे ही प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल कर लेती हैं। गलत प्रॉडक्ट्स स्किन को ड्राई, ऑयली या एक्ने-प्रोन बना सकते हैं। समय के साथ ये स्किन बैरियर को कमजोर कर देते हैं, जिससे उम्र के निशान जल्दी दिखने लगते हैं।

    चेहरे को ज्यादा रगड़ना या हार्श क्लेंजर यूज करना
    चेहरे की सफाई जरूरी है, लेकिन इसे ज्यादा रगड़ना या कठोर क्लींजर का इस्तेमाल स्किन की नेचुरल नमी छीन लेता है। ड्राई और डैमेज्ड स्किन पर फाइन लाइन्स जल्दी नजर आती हैं और एजिंग के साइन बढ़ जाते हैं।

    हाइड्रेशन की अनदेखी करना
    पर्याप्त पानी न पीना और मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल न करना स्किन को डल और बेजान बना देता है। डिहाइड्रेशन से स्किन पर झुर्रियां जल्दी उभर आती हैं। स्किन को अंदर और बाहर दोनों तरह से हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है।

    स्लीप रूटीन नजरअंदाज करना
    कम नींद लेना या अनियमित नींद की आदत स्किन की हेल्थ को प्रभावित करती है। नींद के दौरान स्किन रिपेयर होती है। नींद की कमी से डार्क सर्कल्स, पफी आईज और समय से पहले एजिंग की समस्या हो जाती है।

    स्ट्रेस और अनहेल्दी डाइट
    जरूरत से ज्यादा स्ट्रेस और जंक फूड, मीठे व तैलीय खाने का सेवन स्किन को नुकसान पहुंचाता है। ये आदतें कोलेजन प्रॉडक्शन को कम करती हैं और स्किन की इलास्टिसिटी घटा देती हैं, जिससे उम्र के निशान जल्दी दिखते हैं।

    नाइट केयर स्किप करना
    दिनभर की थकान के बाद बिना चेहरा साफ किए सो जाना या नाइट क्रीम/सीरम का इस्तेमाल न करना स्किन के लिए हानिकारक है। रात का समय स्किन रिपेयर का होता है, इसे इग्नोर करना एजिंग प्रॉसेज को बढ़ाता है।

  • भारत की 7 सबसे खूबसूरत अल्पाइन झीलें: स्वर्ग जैसी प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव

    भारत की 7 सबसे खूबसूरत अल्पाइन झीलें: स्वर्ग जैसी प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव

    नई दिल्ली।  भारत का हिमालय न केवल अपनी ऊँचाई और बर्फ से ढकी चोटियों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां की अल्पाइन झीलें भी देश-विदेश के पर्यटकों को अपनी ओर खींचती हैं। अगर आप प्राकृतिक सुंदरता का वास्तविक अनुभव लेना चाहते हैं, तो ये सात झीलें आपके लिए स्वर्ग जैसी छटा पेश करती हैं। इनमें केदारताल, समिति, गदसर, सत्सर, घेपन, चंद्रताल और मार्सर झीलें शामिल हैं, जो ट्रेकर्स और प्रकृति प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। इन झीलों तक पहुंचना कभी आसान नहीं होता, लेकिन हर कदम पर खुलती खूबसूरत वादियां और पर्वतीय नजारे थकान को भी भूल जाने पर मजबूर कर देते हैं।

    केदारताल झील: चुनौतीपूर्ण ट्रेक और बर्फीली चोटियां

    केदारताल झील 15,485 फीट की ऊँचाई पर स्थित है और इसे भारत की सबसे चुनौतीपूर्ण ट्रेकिंग जगहों में से एक माना जाता है। यह झील माउंट थलय सागर, माउंट गंगोत्री, माउंट जोगिन, माउंट भृगुपंथ और मंडी पर्वत की विशाल चोटियों से घिरी हुई है। ट्रेक के दौरान आपको बर्फ से ढके रास्तों और ठंडी हवाओं का सामना करना पड़ता है। केदारताल ट्रेक का खर्च प्रति व्यक्ति लगभग ₹12,000 से ₹25,000 तक आता है। यहाँ का दृश्य और शांति, कठिनाइयों को पूरी तरह भुला देती है।

    समिति झील: गौमुख ट्रेक का अंत और प्राकृतिक सुंदरता

    समिति झील 13,779 फीट की ऊँचाई पर स्थित है और यह गौमुख ट्रेक के आखिरी दिन ही दिखाई देती है। झील के आस-पास का वातावरण पूरी तरह से प्राकृतिक और साफ-सुथरा है। यहां की ठंडी हवा, बर्फ और पहाड़ियों का दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। समिति झील तक पहुँचने में मेहनत जरूर लगती है, लेकिन इसकी सुंदरता हर थकान को दूर कर देती है।

    गदसर झील: कश्मीर ग्रेट लेक्स का रत्न

    गदसर झील कश्मीर ग्रेट लेक्स ट्रेक का हिस्सा है और इसे अक्सर भारत के सबसे खूबसूरत ट्रेक्स में गिना जाता है। ट्रेक के चौथे दिन झील दिखाई देती है और इसकी शांत जलधारा, मनमोहक रंग और स्थानीय कहानियां इसे विशेष बनाती हैं। झील में प्रवेश मुफ्त है, लेकिन नाव की सवारी का खर्च होता है। 2-सीटर पैडल बोट ₹100-₹200, 4-सीटर ₹200-₹400, और 6-सीटर रोइंग बोट ₹300-₹900 में उपलब्ध है।

    सत्सर झील: जंगल में एकांत और स्वर्ग जैसा अनुभव

    सत्सर झील पूरी तरह से एकांत में स्थित है और सड़क मार्ग से दिखाई नहीं देती। यहां पहुंचने के लिए जंगल से होते हुए लगभग एक घंटे की हाइक करनी पड़ती है। यह झील ऑफ-द-बीटन-पाथ डेस्टिनेशन है और ट्रेकर्स को शांति, रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत मिश्रण देती है। सत्सर झील का ट्रेक और भ्रमण प्रति व्यक्ति ₹18,000 से ₹40,000+ तक हो सकता है, जो गाइड, अवधि और सुविधाओं पर निर्भर करता है।

    घेपन झील: लाहौल का छिपा खजाना

    घेपन झील (घेपन घाट) लाहौल में स्थित है और लगभग इस लिस्ट में शामिल नहीं हो पाई थी। ट्रेक लीडर रवि और आयुषी ने हाल ही में अपने एक्सप्लोरेटरी ट्रेक पर इसे खोजा। झील के शांत और आकर्षक दृश्य इसे ट्रेकर्स के बीच लोकप्रिय बनाते हैं। यहाँ का खर्च ट्रेक पैकेज पर निर्भर करता है और प्रति व्यक्ति लगभग ₹10,000 से ₹20,000+ हो सकता है।

    चंद्रताल झील: सड़क और ट्रेक दोनों विकल्प

    चंद्रताल झील हिमाचल प्रदेश में स्थित है और इसे सड़क मार्ग से भी पहुँचा जा सकता है। हालांकि हम्प्टा पास के चुनौतीपूर्ण चार दिन के ट्रेक के बाद इसे अल्पाइन झील ट्रेक की सूची में शामिल किया गया है। यहां ट्रांसपोर्ट और रहने का खर्च अलग-अलग होता है। मनाली/काज़ा से टैक्सी का किराया ₹4,000-₹20,000+ हो सकता है। झील का नीला पानी और आसपास का बर्फीला परिदृश्य इसे यादगार बनाता है।

    मार्सर झील: दुर्गमता में छुपा आकर्षण

    मार्सर झील आसानी से नहीं पहुँचाई जा सकती, लेकिन इसकी दुर्गमता और लोककथाओं की वजह से यह ट्रेकर्स के लिए आकर्षण का केंद्र है। आसपास के रहस्य, शांत वातावरण और बर्फ से ढकी चोटियां इसे किसी भी साहसी यात्री के लिए स्वर्ग जैसा अनुभव देती हैं।

  • सर्दियों में कैसे बढ़ाएं आईब्रो की ग्रोथ? आजमा लें ये 5 देसी नुस्खे, पतली Eyebrows हो जाएंगी मोटी और घनी

    सर्दियों में कैसे बढ़ाएं आईब्रो की ग्रोथ? आजमा लें ये 5 देसी नुस्खे, पतली Eyebrows हो जाएंगी मोटी और घनी


    नई दिल्ली सर्दियों का मौसम आते ही त्वचा और बालों से नमी कम होने लगती है। ठंडी हवाएं, ड्राई स्किन, गलत खानपान और तनाव का असर सिर्फ सिर के बालों पर ही नहीं, बल्कि आईब्रो पर भी पड़ता है। नतीजतन भौंहें झड़ने लगती हैं और धीरे-धीरे पतली दिखाई देने लगती हैं। जबकि हर महिला चाहती है कि उसकी आईब्रो घनी और शेप में हों, क्योंकि मोटी भौंहें पूरे लुक को निखार देती हैं। ऐसे में महंगे प्रोडक्ट्स के बजाय कुछ घरेलू उपाय ज्यादा कारगर साबित हो सकते हैं।

    अरंडी का तेल: जड़ों को करे मजबूत

    आईब्रो की ग्रोथ बढ़ाने के लिए अरंडी का तेल बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद ओमेगा-9 फैटी एसिड और प्रोटीन बालों की जड़ों को पोषण देते हैं। रात को सोने से पहले उंगलियों या साफ ब्रश की मदद से हल्के हाथों से अरंडी के तेल से आईब्रो की मालिश करें और सुबह धो लें। नियमित इस्तेमाल से भौंहें मोटी और मजबूत होने लगती हैं।

    नारियल तेल: पोषण और चमक दोनों

    नारियल तेल विटामिन ई और जरूरी फैटी एसिड्स से भरपूर होता है। यह आईब्रो को नमी देता है और बालों की ग्रोथ को बढ़ावा देता है। रोज रात को रुई में थोड़ा सा नारियल तेल लेकर आईब्रो पर लगाएं। कुछ ही हफ्तों में फर्क नजर आने लगेगा और भौंहें शाइनी भी दिखेंगी।

    प्याज का रस: तेजी से बढ़ाए ग्रोथ

    प्याज का रस आईब्रो की ग्रोथ के लिए एक पुराना और असरदार नुस्खा है। इसमें मौजूद सल्फर बालों को मजबूत बनाता है और नई ग्रोथ में मदद करता है। ताजा प्याज का रस निकालकर आईब्रो पर लगाएं और 20–30 मिनट बाद चेहरा धो लें। हफ्ते में 2–3 बार इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

    विटामिन ई कैप्सूल: झड़ना करे कम

    विटामिन ई बालों को टूटने से रोकने में मदद करता है। कैप्सूल को काटकर उसका जेल निकाल लें और आईब्रो पर हल्के हाथों से 5 मिनट मसाज करें। रात को लगाने से ज्यादा फायदा मिलता है। कुछ दिनों में भौंहें घनी दिखने लगती हैं।

    एलोवेरा जेल: नेचुरल हाइड्रेशन

    एलोवेरा जेल बालों को नमी देने के साथ-साथ उन्हें मजबूत भी बनाता है। इसमें मौजूद एंजाइम्स और एंटीऑक्सीडेंट्स आईब्रो की ग्रोथ में सहायक होते हैं। फ्रेश एलोवेरा जेल आईब्रो पर लगाकर छोड़ दें। लगातार इस्तेमाल से अच्छे परिणाम मिलते हैं।

    नियमित देखभाल से मिलेगा बेहतर परिणाम

    अगर इन देसी नुस्खों को नियमित रूप से अपनाया जाए, तो सर्दियों में भी आईब्रो की ग्रोथ बेहतर हो सकती है। साथ ही संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और तनाव से दूरी भी जरूरी है। थोड़ी सी देखभाल से पतली आईब्रो फिर से मोटी, घनी और आकर्षक बन सकती हैं।

  • ठंड का मज़ा दोगुना: सर्दियों में घूमने लायक भारत की ये खूबसूरत जगहें

    ठंड का मज़ा दोगुना: सर्दियों में घूमने लायक भारत की ये खूबसूरत जगहें

    नई दिल्ली  भारत में कई ऐसी जगहें हैं, जहां जनवरी के महीने में घूमने का मजा ही कुछ और होता है। आज हम आपको भारत की उन जगहों के बारे में बताएंगे, जिन्हें आपको सर्दियों में जरूर विजिट करना चाहिए। आइए इन जगहों के बारे में विस्तार से जानें, ताकि आपको सही जानकारी हो सकें।
    सर्दियों की शुरुआत
    सर्दियों का मौसम शुरू हो चुका है। इसके साथ ही लोगों की लाइफस्टाइल में भी बदलाव आ जाता है। लोग शरीर को गर्म रखने और इम्युनिटी मजबूत करने के लिए अपनी डाइट में गर्म और हेल्दी चीजें शामिल करने लगते हैं। इस मौसम में सेहत का खास ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है।

    सर्दियों में घूमना
    अक्सर लोग सर्दियों में घर पर रहना पसंद करते हैं, लेकिन भारत में कई ऐसी जगहें हैं, जहां जनवरी के महीने में घूमने का मजा ही कुछ और होता है। इन जगहों पर आप ठंड के साथ-साथ सुहावनी धूप का भी आनंद ले सकते हैं। ये डेस्टिनेशन आपकी ट्रिप को यादगार बनाने के लिए एकदम परफेक्ट हैं।

    ठंड में घूमें ये जगहें
    अगर आप सर्दियों में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो भारत की इन खूबसूरत जगहों को अपनी वेकेशन लिस्ट में जरूर शामिल करें। आइए जानते हैं उन डेस्टिनेशन्स के बारे में, जहां सर्दियों में घूमना सबसे ज्यादा खास होता है।

    रन ऑफ कच्छ जाएं
    गुजरात में स्थित रन ऑफ कच्छ सर्दियों में घूमने के लिए एक बेहतरीन जगह है। यहां आपको ठंड के मौसम में भी हल्की गर्माहट और भरपूर धूप का एहसास होता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं लगती। यहां आप काला डूंगर, इंडिया ब्रिज और धोरडो गांव घूम सकते हैं। साथ ही कच्छ की लोक संस्कृति, फोक डांस और संगीत कार्यक्रमों का आनंद भी ले सकते हैं।

    गोवा जरूर जाएं
    सर्दियों के मौसम में गोवा घूमने का अलग ही मजा होता है। यहां के खूबसूरत बीच, चटक धूप और ठंडी हवाएं आपकी ट्रिप को यादगार बना देती हैं। आप ओल्ड गोवा के चर्च, दूधसागर वॉटरफॉल, फोर्ट अगुआड़ा, अंजुना बीच और स्थानीय मार्केट्स की सैर कर सकते हैं।

    राजस्थान विजिट करें
    आपको सर्दियों में एक बार राजस्थान विजिट करना चाहिए। इसे पिंक सिटी के नाम से भी जाना जाता है। राजस्थान में आप हवा महल, नाहरगढ़ किला, आमेर किला, जंतर-मंतर जैसी जगहों पर घूमने के लिए जा सकते हैं।

    मुंबई घूमने जाएं
    सर्दियों के मौसम में मुंबई भी घूमने के लिए एक शानदार विकल्प है। यहां समुद्र किनारे ठंडी हवाओं और धूप का मजा लिया जा सकता है। इसके अलावा आप लोनावला, अलीबाग, नासिक और महाबलेश्वर जैसी नजदीकी जगहों की सैर कर सकते हैं। मुंबई में एलीफेंटा गुफाएं, गेटवे ऑफ इंडिया और गिरगांव चौपाटी भी जरूर देखें।

    अलप्पुझा विजिट करें
    अगर आप सर्दियों में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो एक बार अलप्पुझा जरूर विजिट करें। यह खूबसूरत जगह केरल में स्थित है। हालांकि केरल में घूमने के लिए कई शानदार डेस्टिनेशन हैं, लेकिन अलप्पुझा अपनी शांत वादियों और बैकवाटर्स के लिए खास तौर पर जाना जाता है। सर्दियों में यहां का मौसम काफी सुहावना रहता है। यहां आप बैकवाटर, वेम्बनाड झील और कुट्टनाड जैसी जगहों की सैर कर सकते हैं।

    सुंदरवन है बेस्ट
    सर्दियों के मौसम में सुंदरवन का वातावरण बेहद सुहावना होता है। यहां आप रॉयल बंगाल टाइगर सहित कई दुर्लभ वन्यजीवों को देखने का रोमांचक अनुभव ले सकते हैं। सुंदरवन का प्राकृतिक सौंदर्य और शांत माहौल किसी का भी मन मोह लेता है। वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है। यहां सजनेखली पक्षी अभयारण्य, हॉलिडे आइलैंड और कपिलमुनि मंदिर जैसे प्रमुख आकर्षण मौजूद हैं।

    मनाली शहर देखें
    सर्दियों में हिमाचल प्रदेश का मनाली शहर किसी जन्नत से कम नहीं लगता। बर्फ से ढकी पहाड़ियां और ठंडी हवाएं यहां की खूबसूरती को और भी बढ़ा देती हैं। यहां आप स्कीइंग, ट्रेकिंग, पैराग्लाइडिंग और रिवर राफ्टिंग जैसे रोमांचक खेलों का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा हिडिम्बा देवी मंदिर और वशिष्ठ मंदिर जैसे धार्मिक स्थल मनाली की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं।

  • नेल कटर की एक आदत बना सकती है आपको मरीज, रोज़मर्रा की लापरवाही से बढ़ता संक्रमण का खतरा

    नेल कटर की एक आदत बना सकती है आपको मरीज, रोज़मर्रा की लापरवाही से बढ़ता संक्रमण का खतरा


    नई दिल्ली। नाखूनों से जुड़ी छोटी चूक कैसे बन जाती है बड़ी स्वास्थ्य समस्या  घर हो ऑफिस या फिर ब्यूटी पार्लर-नेल कटर एक ऐसी रोज़मर्रा की चीज है जिसे लोग अक्सर बिना सोचे-समझे एक-दूसरे के साथ साझा कर लेते हैं। देखने में यह आदत बेहद मामूली लगती है लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यही लापरवाही नाखूनों और त्वचा से जुड़े गंभीर संक्रमण की वजह बन सकती है। कई बार लोग लंबे समय तक इलाज कराते रहते हैं जबकि समस्या की जड़ सिर्फ अस्वच्छ नेल कटर होती है।

    डॉक्टरों के अनुसार नाखून काटते समय त्वचा पर बहुत ही बारीक कट या खरोंच लग जाती है जो सामान्य आंखों से दिखाई नहीं देती। जब कोई संक्रमित या पहले से इस्तेमाल किया गया नेल कटर दोबारा उपयोग में लाया जाता है तो उस पर मौजूद बैक्टीरिया और फंगस सीधे इन सूक्ष्म घावों के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। यही कारण है कि नाखूनों के फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक तेजी से फैलते हैं।स्वच्छता से जुड़ी कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि धातु से बने नेल कटर पर फंगस और बैक्टीरिया लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं। खासतौर पर पैरों के नाखूनों में यह खतरा ज्यादा होता है क्योंकि जूते पहनने से वहां नमी बनी रहती है। यही नमी फंगस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनाती है। सैलून या पार्लर में बिना ठीक से स्टरलाइज़ किए गए औजार इस खतरे को और बढ़ा देते हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि कुछ लोगों में यह जोखिम और भी ज्यादा होता है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग बुजुर्ग छोटे बच्चे डायबिटीज से पीड़ित मरीज और वे लोग जो लंबे समय तक बंद जूते पहनते हैं-इन सभी में नाखूनों का संक्रमण जल्दी पनप सकता है। इसके अलावा जो लोग बार-बार मैनीक्योर या पेडीक्योर कराते हैं उन्हें भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है।नाखूनों में संक्रमण के कुछ संकेतों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जैसे नाखूनों का रंग पीला या काला पड़ना उनका असामान्य रूप से मोटा होना बार-बार टूटना नाखूनों के आसपास जलन या सूजन और कभी-कभी बदबू आना। ये लक्षण बताते हैं कि नाखूनों के भीतर संक्रमण पनप रहा है जिसका समय पर इलाज जरूरी है।

    डॉक्टरों का साफ कहना है कि बचाव ही इसका सबसे बेहतर इलाज है। हर व्यक्ति को अपना अलग नेल कटर इस्तेमाल करना चाहिए और उसे नियमित रूप से साफ व सूखा रखना चाहिए। नाखून बहुत गहराई तक काटने से बचें और हाथ-पैर लंबे समय तक गीले न रखें। सैलून में सेवाएं लेते समय यह जरूर देखें कि औजार ठीक से साफ और स्टरलाइज़ किए गए हों।अगर घरेलू देखभाल के बावजूद नाखूनों की स्थिति बिगड़ती जाए दर्द बढ़े या संक्रमण फैलता महसूस हो तो बिना देरी किए त्वचा विशेषज्ञ से संपर्क करना जरूरी है। समय पर इलाज न मिलने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है और उपचार लंबा चल सकता है।

  • सर्दियों में स्वाद और सेहत का संगम: घर पर बनाएं गरमागरम खसखस का हलवा..

    सर्दियों में स्वाद और सेहत का संगम: घर पर बनाएं गरमागरम खसखस का हलवा..


    नई दिल्ली। सर्दियों का मौसम आते ही कुछ गरमागरम और मीठा खाने की इच्छा अपने आप बढ़ जाती है। ऐसे में अगर स्वाद के साथ सेहत भी मिले, तो वह डेज़र्ट और भी खास बन जाता है। खसखस का हलवा एक ऐसा ही पारंपरिक व्यंजन है, जो न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होता है, बल्कि शरीर को भीतर से गर्म रखने और ताकत देने में भी मदद करता है। यह हलवा खासतौर पर उत्तर भारत और आयुर्वेदिक परंपराओं में सर्दियों के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है।

    आमतौर पर सर्दियों में गाजर का हलवा या मूंग दाल का हलवा ज्यादा बनाया जाता है, लेकिन खसखस से बना हलवा अपनी अलग खुशबू, मलाईदार टेक्सचर और पोषण गुणों के कारण खास पहचान रखता है। खसखस कैल्शियम, आयरन, फाइबर और हेल्दी फैट्स से भरपूर होता है, जो ठंड के मौसम में शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा देता है। अच्छी बात यह है कि इसे घर पर बहुत ही आसान तरीके से तैयार किया जा सकता है।खसखस का हलवा बनाने के लिए ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती। आधा कप खसखस, एक कप दूध, 3 से 4 टेबलस्पून देसी घी, आधा कप चीनी या गुड़, थोड़ी सी इलायची और पसंद के ड्राई फ्रूट्स से यह स्वादिष्ट हलवा तैयार हो जाता है। सबसे पहले खसखस को अच्छे से धोकर 3–4 घंटे या रातभर के लिए भिगो देना चाहिए। इससे खसखस नरम हो जाता है और पीसने में आसानी होती है। भीगने के बाद थोड़ा दूध डालकर इसे मिक्सर में बारीक पीस लें, ताकि पेस्ट एकदम स्मूद बन जाए।

    अब कड़ाही में देसी घी गर्म करें और उसमें पिसा हुआ खसखस डालें। मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए इसे भूनें। कुछ ही देर में इसमें से खुशबू आने लगेगी और घी अलग दिखाई देने लगेगा। इसके बाद इसमें दूध डालें और धीमी आंच पर पकाते रहें। जब मिश्रण गाढ़ा होने लगे, तब इसमें चीनी या गुड़ डालें और अच्छी तरह मिलाएं। आखिर में इलायची पाउडर और कटे हुए काजू, बादाम व किशमिश डालकर 2–3 मिनट तक और पकाएं। बस तैयार है गरमागरम खसखस का हलवा।

    सेहत के लिहाज से खसखस का हलवा सर्दियों में बेहद फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करता है, कमजोरी और थकान दूर करता है, हड्डियों को मजबूत बनाता है और पाचन तंत्र को बेहतर करता है। साथ ही यह तुरंत ऊर्जा देने वाला पौष्टिक डेज़र्ट भी है।अगर आप रिफाइंड चीनी से परहेज करते हैं, तो इस हलवे में गुड़ या खजूर का पेस्ट इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे हलवा और भी हेल्दी बन जाता है। सर्दियों में परिवार के साथ बैठकर खसखस के हलवे का आनंद लेना स्वाद और सेहत-दोनों का बेहतरीन संगम साबित हो सकता है।

  • करेला: कड़वा जरूर, लेकिन सेहत का खजाना; जानें किन बीमारियों में है रामबाण

    करेला: कड़वा जरूर, लेकिन सेहत का खजाना; जानें किन बीमारियों में है रामबाण


    नई दिल्ली: करेला का नाम सुनते ही अधिकतर लोग मुंह बना लेते हैं, लेकिन यही कड़वा करेला सेहत के लिहाज से किसी वरदान से कम नहीं है। आयुर्वेद में करेला को औषधि के रूप में माना गया है और इसे कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में लाभकारी बताया गया है। सिर्फ खाने से ही नहीं, बल्कि बाहरी रूप से लगाने पर भी करेला शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाता है।

    आयुर्वेद में करेले को करवेल्लक कहा जाता है। इसे ऐसा पौधा माना गया है जो दूषित रक्त को शुद्ध करने, बढ़ी हुई शर्करा को नियंत्रित करने और शरीर में मौजूद कीटाणुओं को नष्ट करने की क्षमता रखता है। करेला विटामिन A, B और C का अच्छा स्रोत है, जो इम्युनिटी को मजबूत करने के साथ-साथ त्वचा और आंखों की सेहत के लिए भी जरूरी माने जाते हैं।करेला अग्नि और अग्न्याशय तक प्रभाव डालता है, जिससे पाचन तंत्र बेहतर होता है। यह आंतों की गहराई से सफाई कर वहां मौजूद कीड़े, हानिकारक बैक्टीरिया और विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। जिन लोगों को बार-बार पेट साफ न होने, गैस, अपच या भूख न लगने की समस्या रहती है उनके लिए करेले का जूस या सलाद बेहद फायदेमंद हो सकता है।

    अगर शरीर में लंबे समय से कब्ज की समस्या बनी रहे, तो इससे आंतों में कीड़े पनप सकते हैं और पोषक तत्व शरीर में ठीक से अवशोषित नहीं हो पाते। ऐसे में करेला शरीर का प्राकृतिक डिटॉक्स करता है और पाचन तंत्र को फिर से सक्रिय बनाता है। इसके कड़वे स्वाद को कम करने के लिए इसे काटकर नमक लगाकर कुछ घंटों के लिए छोड़ दिया जाए, तो इसका कड़वापन काफी हद तक कम हो जाता है।त्वचा संबंधी समस्याओं में भी करेला बेहद उपयोगी माना जाता है। चेहरे पर मुंहासे, एक्ने, खुजली या रूखापन अक्सर रक्त की अशुद्धि का संकेत होते हैं। रोजाना सीमित मात्रा में करेले के जूस का सेवन रक्त को शुद्ध करता है, जिससे त्वचा में निखार आता है और एक्ने की समस्या कम होती है। साथ ही यह शरीर की खुद को ठीक करने की क्षमता को भी बढ़ाता है।

    करेला स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए भी लाभकारी बताया गया है, क्योंकि यह दूध बनाने वाले हार्मोन के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है। हालांकि, इस दौरान इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। वहीं, अगर शरीर पर कोई घाव, फोड़ा या सूजन हो जाए, तो करेले का लेप लगाने से घाव जल्दी भरता है और संक्रमण का खतरा कम होता है।कुल मिलाकर करेला भले ही स्वाद में कड़वा हो, लेकिन इसके फायदे इतने ज्यादा हैं कि इसे अपनी डाइट में शामिल करना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।

  • Winter Skin Tips: सर्दियों में ड्राई स्किन से हैं परेशान? रात को सोने से पहले अपनाएं ये 4 घरेलू उपाय

    Winter Skin Tips: सर्दियों में ड्राई स्किन से हैं परेशान? रात को सोने से पहले अपनाएं ये 4 घरेलू उपाय

    नई दिल्ली सर्दियों का मौसम जहां एक तरफ ठंड और आराम लेकर आता है, वहीं दूसरी ओर यह त्वचा के लिए कई परेशानियां भी खड़ी कर देता है। ठंडी हवाएं, कम नमी और गर्म पानी का ज्यादा इस्तेमाल त्वचा की नेचुरल मॉइस्चर छीन लेता है। नतीजा यह होता है कि स्किन ड्राई, रूखी, बेजान और खिंची हुई महसूस होने लगती है। खासतौर पर चेहरे की त्वचा सबसे ज्यादा प्रभावित होती है।

    ड्राई स्किन की समस्या से छुटकारा पाने के लिए कई लोग महंगे क्रीम, लोशन और ब्यूटी प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन कई बार इनसे मनचाहा रिजल्ट नहीं मिलता। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि सर्दियों में भी आपकी त्वचा हेल्दी, सॉफ्ट और ग्लोइंग बनी रहे, तो कुछ आसान घरेलू उपाय बेहद कारगर साबित हो सकते हैं। खास बात यह है कि ये उपाय रात को सोने से पहले अपनाए जाएं, ताकि त्वचा को पूरी रात पोषण मिल सके।

    रात को सोने से पहले चेहरे की ऐसे करें देखभाल

    1. कच्चा दूध
    कच्चा दूध त्वचा के लिए एक बेहतरीन नेचुरल क्लींजर और मॉइस्चराइज़र माना जाता है। सर्दियों में रात को सोने से पहले रुई की मदद से चेहरे पर कच्चा दूध लगाएं और हल्के हाथों से मसाज करें। यह त्वचा की गहराई से सफाई करता है और स्किन को अंदर से पोषण देता है। नियमित इस्तेमाल से त्वचा मुलायम बनी रहती है और चेहरे पर नेचुरल ग्लो नजर आने लगता है।

    2. एलोवेरा जेल
    एलोवेरा को स्किन के लिए वरदान कहा जाता है। इसमें मौजूद गुण त्वचा की नमी को बनाए रखने में मदद करते हैं। ड्राई स्किन से परेशान लोग रात को सोने से पहले चेहरे पर ताजा एलोवेरा जेल लगा सकते हैं। यह त्वचा को ठंडक पहुंचाता है, सूखापन कम करता है और स्किन को सॉफ्ट बनाता है। एलोवेरा नियमित लगाने से त्वचा हेल्दी और फ्रेश नजर आती है।

    3. नारियल तेल
    नारियल तेल सर्दियों के लिए एक बेहतरीन स्किन केयर उपाय है। अगर आप रोज रात को सोने से पहले चेहरे पर 2-3 बूंद नारियल तेल लगाकर हल्की मसाज करते हैं, तो इससे त्वचा को गहराई से नमी मिलती है। नारियल तेल ड्राई स्किन के साथ-साथ काले धब्बे, झाइयां और हल्की सूजन जैसी समस्याओं में भी मददगार माना जाता है। यह स्किन को रिपेयर करने का काम करता है।

    4. शहद
    शहद एक नेचुरल मॉइस्चराइज़र है, जो त्वचा में नमी को लॉक करने में मदद करता है। सर्दियों में रात को सोने से पहले चेहरे पर शहद की हल्की मसाज करने से त्वचा सॉफ्ट और ग्लोइंग बनी रहती है। शहद ड्राई और बेजान त्वचा को पोषण देता है और स्किन को अंदर से हेल्दी बनाता है।

    क्यों जरूरी है नाइट स्किन केयर?

    रात के समय हमारी त्वचा खुद को रिपेयर करती है। इस दौरान अगर स्किन को सही पोषण और नमी मिल जाए, तो उसका असर सुबह साफ नजर आता है। यही वजह है कि रात को सोने से पहले स्किन केयर करना बेहद जरूरी माना जाता है।

  • देसी बनाम मॉडर्न: मकर संक्रांति के लिए सही खाना क्या है, डॉक्टर मीरा पाठक ने किया खुलासा

    देसी बनाम मॉडर्न: मकर संक्रांति के लिए सही खाना क्या है, डॉक्टर मीरा पाठक ने किया खुलासा

    नई दिल्ली। उत्तर भारत में मकर संक्रांति आते ही घरों में रसोई की खुशबू बदल जाती है। सर्दियों में गाजर, मटर, गोभी और विभिन्न दालों के मेल से बनी खिचड़ी इस पर्व का खास हिस्सा होती है। यह सिर्फ स्वाद या परंपरा का हिस्सा नहीं, बल्कि शरीर को हल्का और ऊर्जा देने वाला भोजन भी है।

    खिचड़ी: हल्का और संतुलित भोजन
    जनवरी का महीना त्योहारी सीजन और भारी खाने के बाद शरीर को हल्का और संतुलित भोजन चाहता है। इसी कारण खिचड़ी इस समय सबसे ज्यादा पसंद की जाती है। भंगेल सीएचसी की सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. मीरा पाठक के अनुसार, खिचड़ी एक संपूर्ण और टाइम-टेस्टेड आयुर्वेदिक डाइट है, जिसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और आवश्यक अमीनो एसिड्स संतुलित मात्रा में मौजूद होते हैं। दाल में मौजूद लाइसीन और चावल में मिथिओनीन मिलकर एक कंप्लीट प्रोटीन बनाते हैं।

    डिटॉक्स और रिकवरी के लिए बेहतरीन विकल्प
    डॉ. पाठक बताती हैं कि खिचड़ी पचाने में हल्की होती है और शरीर व मस्तिष्क को ‘सॉफ्ट रीसेट’ देती है। कुछ दिनों तक सिंपल और आसानी से पचने वाला भोजन लेने से आंतें, लिवर और नर्वस सिस्टम को आराम मिलता है और शरीर रिकवरी मोड में चला जाता है। यही कारण है कि इसे डिटॉक्स डाइट के लिए सबसे सुरक्षित और असरदार माना जाता है।

    शुगर लेवल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण
    खिचड़ी धीरे-धीरे ऊर्जा रिलीज करती है, जिससे ब्लड शुगर में अचानक उछाल नहीं आता। जूस, प्रोबायोटिक ड्रिंक्स या कोम्बुचा की तुलना में यह अधिक संतुलित और भरोसेमंद विकल्प है। इसमें हाइड्रेटिंग और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी मौजूद होते हैं, जो सूजन, थकान और शरीर में होने वाले अंदरूनी ‘वेयर एंड टियर’ को कम करने में मदद करते हैं।

    वर्सटाइल और मॉडर्न-सपोर्टेड भोजन
    खिचड़ी की सबसे बड़ी खूबी इसकी वर्सटाइल नेचर है। इसमें चावल की जगह मिलेट्स, मूंग दाल के साथ अन्य दालें, सब्जियां, पनीर या शुद्ध घी मिलाकर इसे और भी पौष्टिक बनाया जा सकता है। यह हमारी पारंपरिक भारतीय समझ पर आधारित है, जिसे आज की मॉडर्न साइंस भी पूरी तरह समर्थन करती है।

    मकर संक्रांति पर बनाई जाने वाली खिचड़ी सिर्फ स्वाद और त्यौहार की पहचान नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, ऊर्जा, डिटॉक्स और शरीर की रिकवरी के लिए एक संतुलित, पौष्टिक और भरोसेमंद भोजन है। यह हर उम्र और हर मौसम के लिए लाभकारी है।

  • मकर संक्रांति पर देसी खिचड़ी बनाम मॉडर्न डिटॉक्स: सेहत के लिए क्यों बेहतर है पारंपरिक स्वाद, जानें डॉक्टर की राय

    मकर संक्रांति पर देसी खिचड़ी बनाम मॉडर्न डिटॉक्स: सेहत के लिए क्यों बेहतर है पारंपरिक स्वाद, जानें डॉक्टर की राय


    नई दिल्ली।उत्तर भारत के घरों में मकर संक्रांति आते ही रसोई की खुशबू कुछ खास हो जाती है। सर्दियों की ठंड में गाजर मटर गोभी और अलग-अलग दालों के मेल से बनी गरमागरम खिचड़ी न सिर्फ स्वाद देती है बल्कि शरीर और मन को भी सुकून पहुंचाती है। यह व्यंजन केवल परंपरा या पर्व से जुड़ा नहीं है बल्कि इसके पीछे गहरी स्वास्थ्य समझ भी छिपी हुई है जिसे आज आधुनिक चिकित्सा भी स्वीकार करती है।जनवरी का महीना आमतौर पर ऐसा समय होता है जब लोग शादी-पार्टियों त्योहारों और भारी भोजन के बाद अपने शरीर को दोबारा संतुलन में लाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में शरीर अपने-आप हल्के सादे और आसानी से पचने वाले भोजन की मांग करता है। शायद यही कारण है कि इस मौसम में खिचड़ी सबसे ज्यादा पसंद की जाती है और यह हमें अंदर से ग्राउंडेड महसूस कराती है।

    इस विषय पर भंगेल सीएचसी की सीनियर मेडिकल ऑफिसर और गायनेकोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. मीरा पाठक ने आईएएनएस से बातचीत में खिचड़ी के स्वास्थ्य लाभों को सरल शब्दों में समझाया। उनका कहना है कि आजकल यह गलत धारणा बन गई है कि खिचड़ी सिर्फ बीमार लोगों या कमजोरी के समय खाई जाती है जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है।डॉ. मीरा पाठक के अनुसार खिचड़ी एक टाइम-टेस्टेड आयुर्वेदिक डाइट है और इसे संपूर्ण आहार माना जाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन और जरूरी अमीनो एसिड्स का संतुलन होता है। दाल में मौजूद लाइसीन और चावल में पाए जाने वाले मिथिओनीन अमीनो एसिड मिलकर एक कंप्लीट प्रोटीन बनाते हैं जो शरीर की मरम्मत और ऊर्जा के लिए बेहद जरूरी है।

    डिटॉक्स डाइट की बात करें तो खिचड़ी सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्पों में से एक है। डॉ. मीरा बताती हैं कि खिचड़ी पचाने में बेहद हल्की होती है और शरीर व दिमाग को एक तरह का सॉफ्ट रीसेट देती है। कुछ दिनों तक सिंपल और हल्का भोजन करने से आंतों लिवर और नर्वस सिस्टम को आराम मिलता है जिससे शरीर खुद को रिपेयर कर पाता है।खिचड़ी की एक और खासियत यह है कि यह धीरे-धीरे ऊर्जा रिलीज करती है। इससे ब्लड शुगर लेवल में अचानक उछाल नहीं आता जो आजकल की जूस डाइट या ट्रेंडी डिटॉक्स ड्रिंक्स में आम समस्या है। डॉ. मीरा के मुताबिक जूस कोम्बुचा या प्रोबायोटिक सप्लीमेंट्स की तुलना में खिचड़ी कहीं ज्यादा संतुलित और पोषण से भरपूर विकल्प है।

    इसके अलावा खिचड़ी में हाइड्रेटिंग और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं जो शरीर की सूजन थकान और अंदरूनी टूट-फूट को ठीक करने में मदद करते हैं। यही कारण है कि इसे रिकवरी और बीमारी के समय दिया जाता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि यह सिर्फ बीमारों का खाना है।खिचड़ी की सबसे बड़ी खूबी इसकी वर्सटाइल प्रकृति है। इसमें चावल की जगह मिलेट्स अलग-अलग दालें मौसमी सब्जियां पनीर या शुद्ध घी मिलाकर इसे और भी पौष्टिक बनाया जा सकता है। यह हमारी पारंपरिक भारतीय समझ का प्रतीक है जिसे आज मॉडर्न साइंस भी पूरी तरह समर्थन देता है।