Category: Lifestyle

  • कोहरे में सुरक्षित सफर के लिए 'लाइफ-सेविंग' टिप्स

    कोहरे में सुरक्षित सफर के लिए 'लाइफ-सेविंग' टिप्स


    नई दिल्ली ।सुनने की शक्ति का करें इस्तेमाल जब कोहरा इतना घना हो कि आँखें जवाब दे जाएं, तो अपने कान खोलें। अपनी गाड़ी का म्यूजिक सिस्टम बंद कर दें और खिड़कियों के शीशे थोड़े नीचे गिरा दें। इससे आपको दूसरी गाड़ियों के हॉर्न, सायरन या इंजन की आवाजें साफ सुनाई देंगी। विशेषकर चौराहों और मोड़ पर यह तकनीक आपको किसी भी अनचाही टक्कर से बचा सकती है। लो-बीम लाइट और फॉग लैम्प्स का प्रयोग अक्सर लोग गलती करते हैं कि कोहरे में हेडलाइट को ‘हाई-बीम’ पर कर देते हैं। हाई-बीम की रोशनी कोहरे की बूंदों से टकराकर परावर्तित (Reflect) होती है, जिससे सामने कुछ भी दिखना बंद हो जाता है। हमेशा लो-बीम का उपयोग करें और अपनी गाड़ी के फॉग लैम्प्स जलाकर रखें।

    पार्किंग लाइट और इंडिकेटर का सही उपयोग कोहरे में गाड़ी चलाते समय चारों इंडिकेटर जलाकर न चलें, क्योंकि इससे पीछे वाले ड्राइवर को यह समझ नहीं आता कि आप मुड़ने वाले हैं या खड़े हैं। इंडिकेटर का इस्तेमाल केवल मुड़ने के लिए करें। यदि कोहरा बहुत ज्यादा है, तो सड़क के किनारे सफेद पट्टी को गाइड मानकर चलें।रफ्तार पर नियंत्रण और सुरक्षित दूरी कोहरे में रफ्तार का रोमांच जानलेवा हो सकता है। अपनी गति कम रखें और आगे चल रही गाड़ी से सामान्य से दोगुनी दूरी बनाए रखें। अचानक ब्रेक लगाने से बचें, क्योंकि गीली सड़क और कोहरे के कारण टायर फिसल सकते हैं और पीछे वाली गाड़ी आपसे टकरा सकती है। डिफॉगर का करें इस्तेमाल सर्दियों में गाड़ी के अंदर और बाहर के तापमान में अंतर होने के कारण शीशों पर धुंध जम जाती है। गाड़ी के डिफॉगर को चालू रखें ताकि विंडशील्ड साफ रहे। यदि डिफॉगर नहीं है, तो एसी चलाकर हवा को शीशों की तरफ मोड़ दें।

    अगर गाड़ी खराब हो जाए या रुकना पड़े

    यदि कोहरा इतना ज्यादा है कि आगे बढ़ना संभव नहीं है, तो गाड़ी को सड़क से काफी दूर सुरक्षित स्थान पर खड़ा करें। अपनी हजार्ड लाइट्स चालू कर दें ताकि दूसरों को आपकी मौजूदगी का पता चल सके। सड़क के बिल्कुल किनारे गाड़ी खड़ी करना खतरनाक हो सकता है।

  • दिल की बात कहने के कुछ 'स्मार्ट' और रोमांटिक तरीके

    दिल की बात कहने के कुछ 'स्मार्ट' और रोमांटिक तरीके


    नई दिल्ली ।संकेतों और बॉडी लैंग्वेज का सहारा लें सीधे आई लव यू’ कहने से पहले अपनी हरकतों से उन्हें अहसास दिलाएं। उनकी छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखना, उनकी पसंद-नापसंद को याद रखना और मुश्किल वक्त में उनके साथ खड़े रहना यह जता देता है कि वो आपके लिए कितने खास हैं। कई बार बिना कहे भी बहुत कुछ कह दिया जाता है।

    लिखावट का जादू आज के डिजिटल दौर में हाथ से लिखा हुआ एक छोटा सा नोट या लेटर किसी भी महंगे गिफ्ट से ज्यादा कीमती होता है। अगर आप बोलने में हिचकिचा रहे हैं, तो अपनी भावनाओं को कागज पर उतारें। एक प्यारा सा कार्ड या छोटा सा मैसेज उनके डेस्क या किताब में छोड़ देना एक बेहद ‘क्यूट’ तरीका हो सकता है।एक यादगार ‘डेट’ प्लान करें जरूरी नहीं कि वह कोई फाइव स्टार होटल हो। किसी शांत जगह पर वॉक, उनकी पसंदीदा जगह पर कॉफी या सूर्यास्त देखते हुए दिल की बात कहना माहौल को रोमांटिक बना देता है। जब माहौल खुशनुमा होता है, तो सामने वाले का जवाब सकारात्मक होने की संभावना बढ़ जाती है।

    दोस्तों की मदद लें, लेकिन संभलकर अगर आप बहुत ज्यादा शर्मीले हैं, तो अपने किसी भरोसेमंद कॉमन फ्रेंड की मदद ले सकते हैं। वे बातों-बातों में यह जान सकते हैं कि सामने वाले के मन में आपके लिए क्या चल रहा है। लेकिन ध्यान रहे, इज़हार आपको खुद ही करना चाहिए क्योंकि आपकी आँखों की सच्चाई कोई और बयां नहीं कर सकता। क्रिएटिविटी दिखाएं अगर आप संगीत, पेंटिंग या कुकिंग के शौकीन हैं, तो अपनी कला का इस्तेमाल करें। उनके लिए कोई गाना गाना या उनकी पसंद का खाना बनाकर ‘सरप्राइज’ देना आपके प्यार की गहराई को दर्शाता है।

    इन बातों का रखें खास ख्याल

    जल्दबाजी न करें: इज़हार करने से पहले यह पक्का कर लें कि आप दोनों के बीच एक अच्छी समझ बन चुकी है। प्राइवेसी का सम्मान: सबके सामने इज़हार करने से बचें, इससे सामने वाला दबाव महसूस कर सकता है। एकांत में बात करना हमेशा बेहतर होता है। परिणाम के लिए तैयार रहें: प्यार में ‘हाँ’ और ‘ना’ दोनों की गुंजाइश होती है। अगर जवाब आपकी उम्मीद के मुताबिक न हो, तब भी सामने वाले की पसंद का सम्मान करें और गरिमा बनाए रखें।

  • दुबलेपन से परेशान? ये सुपरफूड्स बिना सप्लीमेंट वजन बढ़ाने का हेल्दी तरीका हैं

    दुबलेपन से परेशान? ये सुपरफूड्स बिना सप्लीमेंट वजन बढ़ाने का हेल्दी तरीका हैं


    नई दिल्ली । आज के समय में मोटापा एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन चुका हैलेकिन वहीं कुछ लोग दुबलेपन से भी परेशान हैं। पतले शरीर वाले लोगों को अक्सर समाज में इतने कमजोर क्यों हो? जैसे अनचाहे सवाल और ताने सुनने पड़ते हैंजो आत्मविश्वास को प्रभावित करते हैं। ऐसे में वजन बढ़ाना उनके लिए सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक जरूरत भी बन जाता है। कई लोग महंगे सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैंलेकिन नेचुरल फूड्स की मदद से भी हेल्दी और स्थायी वेट गेन किया जा सकता है।

    अंडे: मसल्स ग्रोथ का आधार

    अंडे वजन बढ़ाने के लिए सबसे बेहतरीन फूड्स में से एक हैं। इनमें प्रोटीन और हेल्दी फैट्स की भरपूर मात्रा होती हैजो मांसपेशियों के विकास और शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद करता है। दिन में तीन अंडे तक आसानी से खाए जा सकते हैं। अंडे न सिर्फ मसल्स बढ़ाते हैंबल्कि एनर्जी भी प्रदान करते हैं।

    नट्स और बीज: कैलोरी और पोषण का पावरहाउस

    बादामअखरोटपिस्ता और कद्दू के बीज जैसी चीजें हेल्दी फैट्सप्रोटीन और कैलोरी का अच्छा स्रोत हैं। इन्हें स्नैक्स के रूप में या दहीस्मूदी में डालकर खाया जा सकता है। नट्स न सिर्फ वजन बढ़ाने में मदद करते हैं बल्कि दिल और मस्तिष्क के लिए भी फायदेमंद हैं।

    अवोकाडो: हेल्दी फैट से भरपूर

    अवोकाडो में मोनोसैचुरेटेड फैट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैंजो वजन बढ़ाने के लिए जरूरी हैं। इसे सैंडविचसलाद या स्मूदी में मिलाकर खाया जा सकता है। अवोकाडो पेट को लंबे समय तक संतुष्ट रखता है और शरीर में स्वस्थ फैट का स्तर बढ़ाता है।

    ओट्स और होल ग्रेन: कार्ब्स का हेल्दी सोर्स

    ओट्सब्राउन राइसक्विनोआ और होल ग्रेन ब्रेड जैसी चीजें वजन बढ़ाने के लिए जरूरी कार्ब्स देती हैं। ये धीरे-धीरे एनर्जी रिलीज करते हैं और शरीर को जरूरी कैलोरी प्रदान करते हैं। इनका सेवन नाश्ते में दूध या दही के साथ करना सबसे अच्छा है।

    मांस और चिकन: प्रोटीन और फैट का कॉम्बिनेशन
    यदि आप नॉन-वेज खाते हैंतो चिकनमछली और लाल मांस भी हेल्दी वेट गेन के लिए बेहतरीन हैं। इनमें प्रोटीन और हेल्दी फैट्स होते हैंजो मसल्स बिल्डिंग और शरीर के आकार को बढ़ाने में मदद करते हैं।

    दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स: कैल्शियम और प्रोटीन का लाभ

    दूधपनीर और दही वजन बढ़ाने के लिए आसान और हेल्दी विकल्प हैं। इसमें मौजूद प्रोटीन और कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और मसल्स ग्रोथ को बढ़ावा देते हैं।

    संक्षिप्त टिप्स

    दिन में 5-6 छोटे भोजन करें। सप्लीमेंट्स की बजाय प्राकृतिक फूड्स पर ध्यान दें। वर्कआउट के साथ प्रोटीन और फैट युक्त फूड्स का सेवन करें। नियमित रूप से वजन और मसल्स मास पर ध्यान दें।

  • रिश्ते में 'स्पेस' जरूरी: घंटों बातें करने से बढ़ती है बोरियत, थोड़ी दूरी लाती है ताजगी

    रिश्ते में 'स्पेस' जरूरी: घंटों बातें करने से बढ़ती है बोरियत, थोड़ी दूरी लाती है ताजगी


    नई दिल्ली । रिश्तों में प्यार और नजदीकी की शुरुआत अक्सर रोमांचक होती है। नए प्यार में लोग सुबह की गुड मॉर्निंगसे लेकर रात की गुड नाइटतक हर पल एक-दूसरे के साथ साझा करना चाहते हैं। घंटों फोन पर बातें करनाहर छोटी-छोटी बात साझा करना शुरू में सुखद अनुभव लगता है। लेकिन समय के साथ यही आदत रिश्ते में बोझ बन सकती है। लगातार संपर्क में रहने से बातचीत की गुणवत्ता गिरती हैरोमांच खत्म होता है और रिश्ते में बोरियत और चिड़चिड़ापन आने लगता है। सोचिए अगर आपको गुलाब जामुन बेहद पसंद हैलेकिन दिन में बार-बार वही परोसा जाएतो कुछ ही दिनों में उसका स्वाद फीका लगने लगेगा। रिश्तों का गणित भी कुछ ऐसा ही है। जरूरत से ज्यादा जुड़े रहने से रिश्ते में भावनात्मक दूरी बन सकती है। जब बातचीत केवल और बताओ या तुम बताओ? जैसे सवालों तक सीमित रह जाएतो समझ लेना चाहिए कि अब रिश्ते में रोमांच नहींबल्कि आदत रह गई है।

    घंटों बात करने के कई नुकसान हैं। लगातार हर छोटी बात साझा करने से मिलने पर कुछ खास बचता ही नहीं। हर समय रिप्लाई देने का दबाव मानसिक थकान और झुंझलाहट पैदा करता है। साथ ही अगर आप अपने शौकदोस्तों और परिवार को छोड़कर पूरी तरह पार्टनर में खो जाएंतो यह स्वस्थ रिश्ते का संकेत नहीं है। रिश्ते में स्पेस देना जरूरी है। स्पेस का मतलब यह नहीं कि प्यार कम हैबल्कि इसका अर्थ है कि दोनों को अपने लिए थोड़ा समय चाहिए। अपनी हॉबीरुचियों और दोस्तों के लिए समय निकालने से व्यक्ति बेहतर बनता है और रिश्ते में लौटने पर बातचीत और मिलन और खास महसूस होता है।

    थोड़ी दूरी पार्टनर की कमी का एहसास कराती है। यही दूरी रिश्ते में ताजगी और गहराई बनाए रखती है। कहावत है दूरी से चाहत बढ़ती है। जब आप अपने लिए समय लेते हैंतो पार्टनर भी आपकी कमी महसूस करता है और मिलने पर बातचीत अधिक रोमांचक और दिलचस्प होती है। रिश्तों में संतुलन बनाए रखना इसलिए जरूरी है। प्यार और नजदीकी होनी चाहिएलेकिन लगातार संपर्क में रहने से बचना चाहिए। थोड़ी दूरी रिश्ते को नया उत्साह देती हैबोरियत कम करती है और मानसिक तनाव से राहत दिलाती है। रिश्ते की लंबी उम्र और खुशी के लिए स्पेसएक आवश्यक तत्व है। कुल मिलाकररिश्ते में ताजगी बनाए रखने के लिए जरूरत से ज्यादा बात करने से बचें। पार्टनर को थोड़ा स्पेस देंअपने लिए समय निकालें और बातचीत को खास बनाकर लौटें। यही तरीका रिश्ते को मजबूतस्वस्थ और रोमांचक बनाता है।

  • फेंकने की भूल न करें! अनार के छिलके हैं औषधियों का खजाना; इसकी 'मैजिकल टी' से दूर होंगी ये 5 बड़ी बीमारियाँ

    फेंकने की भूल न करें! अनार के छिलके हैं औषधियों का खजाना; इसकी 'मैजिकल टी' से दूर होंगी ये 5 बड़ी बीमारियाँ


    नई दिल्ली । आयुर्वेद में अनार को ‘एक फल सौ बीमार’ की दवा कहा गया है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि फल के साथ-साथ इसके छिलके भी समान रूप से गुणकारी होते हैं। आधुनिक विज्ञान और प्राचीन चिकित्सा पद्धति दोनों ही मानते हैं कि अनार के छिलकों में दानों की तुलना में अधिक एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। इन छिलकों से तैयार की गई चाय न केवल आपके शरीर को भीतर से साफ डिटॉक्स करती है, बल्कि कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में रामबाण का काम करती है।

    अनार के छिलकों की चाय के 5 अद्भुत फायदे

    पाचन तंत्र के लिए वरदान अगर आप गैस, अपच या डायरिया जैसी समस्याओं से परेशान हैं, तो अनार के छिलकों की चाय आपके लिए सबसे सरल उपाय है। इसमें मौजूद टैनिन्स और पॉलीफेनॉल्स आंतों की सूजन को कम करते हैं और पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली को सुचारू बनाते हैं। यह पेट की अंदरूनी परत को राहत पहुँचाकर पुरानी से पुरानी कब्ज में भी फायदा देती है। इम्युनिटी का ‘कवच’ बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम और संक्रमण से बचने के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का मजबूत होना जरूरी है। विटामिन-C और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर यह चाय इम्युनिटी को तेजी से बूस्ट करती है, जिससे आपका शरीर वायरस और बैक्टीरिया से लड़ने के लिए तैयार रहता है। दिल की सेहत का रखवाला अनार के छिलकों में पाए जाने वाले फ्लेवोनॉयड्स बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में सहायक होते हैं।
    इस चाय के नियमित सेवन से ब्लड सर्कुलेशन रक्त संचार में सुधार होता है और धमनियों में रुकावट आने का खतरा कम हो जाता है, जिससे दिल की बीमारियाँ कोसों दूर रहती हैं।वेट लॉस और मेटाबॉलिज्म मोटापे से परेशान लोगों के लिए यह चाय एक बेहतरीन ‘वेट लॉस ड्रिंक’ साबित हो सकती है। यह मेटाबॉलिज्म को तेज करती है, जिससे शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी फैट बर्न होने लगती है। साथ ही, यह भूख को नियंत्रित कर बेवजह की क्रेविंग को कम करती है। निखरेगी त्वचा और मजबूत होंगे बाल अनार के छिलकों के एंटी-बैक्टीरियल गुण मुंहासों, झुर्रियों और बढ़ती उम्र के निशानों को रोकने में मदद करते हैं। यह चाय पीने से शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं, जिसका सीधा असर चेहरे की चमक पर दिखता है। इसके अलावा, यह बालों की जड़ों को मजबूती देकर उन्हें असमय सफेद होने से भी बचाती है।

    कैसे बनाएं अनार के छिलकों की चाय

    इसे बनाना बेहद आसान है। अनार के छिलकों को धोकर धूप में सुखा लें और उनका पाउडर बना लें। एक कप पानी उबालें और उसमें आधा चम्मच यह पाउडर मिलाएं। थोड़ी देर उबलने के बाद इसे छान लें और स्वादानुसार शहद या नींबू मिलाकर इसका आनंद लें।

  • महंगी ड्राई क्लीनिंग को कहें बाय-बाय! इन 5 आसान ट्रिक्स से घर पर धोएं पफर जैकेट; नहीं खराब होगी रूई

    महंगी ड्राई क्लीनिंग को कहें बाय-बाय! इन 5 आसान ट्रिक्स से घर पर धोएं पफर जैकेट; नहीं खराब होगी रूई


    नई दिल्ली । पफर जैकेट की बनावट अन्य कपड़ों से अलग होती है, इसलिए इसे धोने के लिए विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है। अगर आप इसे सामान्य कपड़ों की तरह धो देंगे, तो इसकी रूई के गुच्छे बन सकते हैं और जैकेट अपनी गर्माहट और शेप खो सकती है। नीचे दिए गए तरीकों को अपनाकर आप इस जोखिम को कम कर सकते हैं।

    सफाई से पहले ‘केयर लेबल’ जरूर देखे

    किसी भी पफर जैकेट को पानी में डालने से पहले उसके अंदर की तरफ लगे केयर लेबल को ध्यान से पढ़ें। अगर उस पर ‘Dry Clean Only’ लिखा है, तो घर पर रिस्क न लें। यदि उस पर मशीन या हैंड वॉश का विकल्प है, तभी आगे बढ़ें। धोने से पहले सभी जिप बंद कर दें और पॉकेट खाली कर लें।

    जिद्दी दागों का ‘स्पॉट ट्रीटमेंट

    पूरी जैकेट को गीला करने से पहले कॉलर, कफ और दाग-धब्बों वाली जगहों पर ध्यान दें। एक पुराने टूथब्रश और माइल्ड डिटर्जेंट की मदद से दाग वाली जगह को हल्के हाथों से रगड़ें। इससे जैकेट को मशीन में ज्यादा देर तक नहीं घुमाना पड़ेगा और गंदगी भी साफ हो जाएगी।

    लिक्विड डिटर्जेंट और ठंडे पानी का प्रयोग

    पफर जैकेट के लिए कभी भी पाउडर डिटर्जेंट का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इसके कण जैकेट की रूई में फंस सकते हैं। हमेशा माइल्ड लिक्विड डिटर्जेंट और ठंडे पानी का चुनाव करें। गर्म पानी जैकेट के बाहरी फैब्रिक को नुकसान पहुँचा सकता है और उसकी चमक फीकी कर सकता है।

    टेनिस बॉल’ ट्रिक सबसे कारगर तरीका

    यदि आप जैकेट को मशीन में सुखा रहेतो ड्रायर में जैकेट के साथ 2-3 साफ टेनिस बॉल डाल दें। जैसे-जैसे मशीन घूमेगी, ये बॉल जैकेट से टकराएंगी और अंदर जमी हुई रूई को फेंटकर उसे फिर से फुला देंगी। इससे रूई के गुच्छे नहीं बनेंगे और जैकेट पिचकने से बच जाएगी।

    सुखाने का सही तरीका

    अगर आप ड्रायर का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो जैकेट को कभी भी निचोड़ें नहीं। इसे एक तौलिये पर सपाट बिछाकर सुखाएं। धूप में सीधे टांगने के बजाय इसे छांव में सुखाना बेहतर है। सूखने के दौरान हर 1-2 घंटे में जैकेट को हाथों से थपथपाएं ताकि अंदर की रूई अपनी सही जगह पर वापस आ जाए। पफर जैकेट पर कभी भी फैब्रिक सॉफ्टनर या ब्लीच का उपयोग न करें, क्योंकि ये जैकेट के वाटर-रेसिस्टेंट कोटिंग और अंदर के फाइबर को नष्ट कर सकते हैं।

  • डिजिटल डिस्ट्रैक्शन का साइलेंट अटैक: नोटिफिकेशन और मल्टीटास्किंग ने छीना फोकस, छात्र और कर्मचारी मानसिक थकान के शिकार

    डिजिटल डिस्ट्रैक्शन का साइलेंट अटैक: नोटिफिकेशन और मल्टीटास्किंग ने छीना फोकस, छात्र और कर्मचारी मानसिक थकान के शिकार


    नई दिल्ली/भोपाल। वर्तमान दौर में तकनीक ने जहाँ जीवन को आसान बनाया है, वहीं इसने मानवीय क्षमताओं, विशेषकर ‘एकाग्रता पर एक गहरा प्रहार किया है। देशभर के शिक्षण संस्थानों और कॉर्पोरेट जगत से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, छात्र और कामकाजी पेशेवर एक नई तरह की चुनौती का सामना कर रहे हैंफोकस की कमी’। मोबाइल नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया की लत और एक साथ कई काम करनेकी होड़ ने उत्पादकता को निचले स्तर पर पहुँचा दिया है, जिससे अब मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है।

    20 मिनट भी नहीं टिक रहा छात्रों का ध्यान विभिन्न शिक्षण संस्थानों द्वारा किए गए आंतरिक सर्वेक्षणों में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। यह पाया गया है कि आज का औसत छात्र किसी एक विषय पर लगातार 20 से 25 मिनट से अधिक समय तक ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहा है। पढ़ाई के दौरान हर कुछ मिनटों में मोबाइल स्क्रीन चेक करने की आदत ने उनकी सीखने की क्षमता को बाधित किया है। शिक्षाविदों का मानना है कि यदि यही स्थिति रही, तो आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक परिणामों में बड़ी गिरावट देखी जा सकती है।

    मल्टीटास्किंग का बोझ और घटती कार्यक्षमता यही स्थिति कॉर्पोरेट कार्यालयों की भी है। दफ्तरों में कर्मचारियों पर एक साथ कई प्रोजेक्ट्स संभालने का दबाव होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ‘मल्टीटास्किंग’ दरअसल एक भ्रम है। जब मस्तिष्क बार-बार एक काम से दूसरे काम पर स्विच करता है, तो वह कॉग्निटिव लोड मानसिक भार बढ़ा देता है, जिससे काम की गुणवत्ता गिर जाती है और कर्मचारी जल्दी मानसिक थकान महसूस करने लगते हैं।

    क्या हैं इस समस्या के मुख्य कारण? मनोवैज्ञानिकों ने फोकस खोने के पीछे तीन प्रमुख कारणों को रेखांकित किया है अनियंत्रित स्क्रीन टाइम: सोशल मीडिया और ऐप्स के नोटिफिकेशन डोपामाइन रिलिज़ करते हैं, जो हमें बार-बार फोन देखने को मजबूर करते हैं। अनियमित दिनचर्या नींद की कमी और शारीरिक गतिविधि का अभाव मानसिक स्पष्टता को खत्म कर देता है। डिजिटल शोर: हर वक्त सूचनाओं के अंबार के बीच मस्तिष्क को ‘विश्राम’ नहीं मिल पा रहा है।

    समाधान की ओर बढ़ते कदम डिजिटल डिटॉक्स और वर्कशॉप इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए अब संस्थानों ने सक्रिय कदम उठाना शुरू कर दिया है। कई स्कूल और कॉलेज अब ‘डिजिटल डिटॉक्स’ सत्र आयोजित कर रहे हैं, जहाँ छात्रों को बिना गैजेट्स के समय बिताने और एकाग्रता बढ़ाने के गुर सिखाए जा रहे हैं। वहीं, सरकारी स्तर पर भी छात्रों के लिए काउंसलिंग और मानसिक सहायता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों की सलाह कैसे बढ़ाएं अपना फोकस करियर काउंसलरों ने इस समस्या से निपटने के लिए कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए हैं मोनोटास्किंग’ अपनाएं: एक समय में केवल एक ही काम पर पूरा ध्यान दें।

    फोन को रखें दूर काम या पढ़ाई के समय मोबाइल को न केवल साइलेंट करें, बल्कि उसे अपनी नजरों से दूर रखें। ब्रेक का नियम काम को छोटे हिस्सों में बांटें और हर एक घंटे बाद 5-10 मिनट का ‘स्क्रीन-फ्री’ ब्रेक लें। समय रहते यदि इस ‘डिजिटल डिस्ट्रैक्शन’ पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह न केवल व्यक्तिगत करियर बल्कि देश की समग्र कार्यक्षमता के लिए भी बड़ी चुनौती बन जाएगा।

  • हाई बीपी का नया विलेन: ऑकलैंड यूनिवर्सिटी की रिसर्च में खुलासा, नमक ही नहीं दिमाग के खास सिग्नल भी हैं जिम्मेदार

    हाई बीपी का नया विलेन: ऑकलैंड यूनिवर्सिटी की रिसर्च में खुलासा, नमक ही नहीं दिमाग के खास सिग्नल भी हैं जिम्मेदार


    नई दिल्ली । हाई ब्लड प्रेशर को अब तक हम केवल ज्यादा नमक खाने, तला-भुना भोजन मोटापा और मानसिक तनाव के साथ जोड़कर देखते आए हैं। लेकिन ऑकलैंड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की एक ताज़ा स्टडी ने चिकित्सा जगत में खलबली मचा दी है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि हाई बीपी के पीछे केवल हमारा खानपान ही नहीं, बल्कि हमारे दिमाग की वायरिंग और उससे निकलने वाले सिग्नल भी एक बड़ी भूमिका निभाते हैं।

    क्या है दिमाग का वह हिस्सा जो बढ़ाता है बीपी

    वैज्ञानिकों के अनुसार दिमाग के निचले हिस्से में एक विशेष क्षेत्र होता है जिसे लैटरल पैराफेशियल रीजन कहा जाता है। आमतौर पर यह हिस्सा शरीर की उन प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है जो अपने आप होती हैं, जैसे सांस लेना, दिल का धड़कना और पाचन क्रिया। स्टडी में खुलासा हुआ है कि इसी क्षेत्र में मौजूद कुछ विशेष नसें ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार होती हैं। जब ये नसें जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं, तो वे रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ने के संकेत भेजती हैं। वाहिकाओं के सिकुड़ने से रक्त का प्रवाह बाधित होता है और दबाव बढ़ जाता है, जिसे हम मेडिकल भाषा में हाई ब्लड प्रेशर कहते हैं।

    अब तक की थ्योरी से कैसे अलग है यह रिसर्च

    अब तक डॉक्टरों का मानना था कि बीपी बढ़ने का मुख्य कारण किडनी की कार्यक्षमता में कमी या आर्टरीज में फैट का जमना है। लेकिन यह नई रिसर्च बताती है कि दिमागी नियंत्रण यदि दिमाग का लैटरल पैराफेशियल रीजन गलत सिग्नल भेज रहा है, तो स्वस्थ खानपान के बावजूद व्यक्ति का बीपी बढ़ सकता है। ऑटोमैटिक रिस्पॉन्स: कई बार शरीर बिना किसी बाहरी कारण जैसे नमक या गुस्सा के भी आंतरिक दिमागी संकेतों की वजह से हाइपरटेंशन का शिकार हो जाता है।

    एक्सपर्ट की सलाह: खुद को कैसे रखें सुरक्षित

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस नई रिसर्च के बाद अब बीपी के इलाज के तरीकों में बदलाव आ सकता है। केवल दवाएं ही नहीं बल्कि ‘न्यूरोलॉजिकल कंट्रोल पर भी ध्यान देना होगा। वर्तमान में खुद को सुरक्षित रखने के लिए आप ये कदम उठा सकते हैं ब्रीदिंग एक्सरसाइज: चूंकि यह हिस्सा सांस लेने को भी नियंत्रित करता है, इसलिए गहरी सांस लेने वाले व्यायाम दिमाग को शांत कर बीपी कम करने में मदद कर सकते हैं। माइंडफुलनेस योग और ध्यान के जरिए दिमाग के निचले हिस्से को रिलैक्स रखा जा सकता है। नियमित चेकअप: यदि खानपान सही होने के बाद भी बीपी बढ़ा हुआ है, तो डॉक्टर से न्यूरोलॉजिकल कारणों पर चर्चा करें।

  • रोज़ खाएं सिर्फ एक कटोरी ओट्स, दिल को रखें मजबूत और हार्ट अटैक-स्ट्रोक के खतरों से दूर!

    रोज़ खाएं सिर्फ एक कटोरी ओट्स, दिल को रखें मजबूत और हार्ट अटैक-स्ट्रोक के खतरों से दूर!

    नई दिल्ली।  दिल की सेहत आज के समय में सबसे बड़ी चिंता बन चुकी है। बदलती जीवनशैली, गलत खानपान, लगातार तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी ने लोगों के दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा दिया है। हाई कोलेस्ट्रॉल, जिसे कभी केवल बुजुर्गों की समस्या माना जाता था, अब हर उम्र में देखने को मिल रहा है। यही हाई कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे दिल की नसों में जमता है और हार्ट अटैक, स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का रास्ता साफ करता है।

    आजकल लोग अक्सर दवाइयों पर निर्भर हो जाते हैं, लेकिन आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही यह मानते हैं कि सही भोजन से कई बीमारियों को जड़ से रोका जा सकता है। इनमें से एक सुपरफूड है ओट्स। यह आसानी से पचता है, शरीर में संतुलन बनाए रखता है और दिल की सेहत के लिए वरदान साबित होता है।

    रोजाना सिर्फ एक कटोरी ओट्स खाने से शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी और हानिकारक तत्व बाहर निकलते हैं। यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है और शरीर में दोषों का संतुलन बनाए रखता है। आयुर्वेद के अनुसार जब पाचन ठीक रहता है, तो खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) अपने आप नियंत्रित होने लगता है।

    विज्ञान भी ओट्स के फायदे मानता है। इसमें मौजूद बीटा-ग्लूकान फाइबर पेट में जाकर एक जेल जैसी परत बना देता है, जो आंतों में कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को कम कर देता है। इसका सीधा फायदा यह होता है कि बैड कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे कम होता है और दिल की धमनियां बेहतर तरीके से काम करती हैं। यही कारण है कि नियमित ओट्स खाने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है।

    ओट्स सिर्फ कोलेस्ट्रॉल के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर के लिए फायदेमंद है। इसमें प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है, जो मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और शरीर को ऊर्जा देता है। इसके साथ ही इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट धीरे-धीरे ऊर्जा प्रदान करते हैं, जिससे लंबे समय तक पेट भरा रहता है और बार-बार भूख नहीं लगती। यही वजह है कि वजन घटाने वाले लोगों के लिए भी ओट्स बहुत अच्छा विकल्प माना जाता है।

    ओट्स में कई जरूरी विटामिन और मिनरल्स भी होते हैं। इसमें आयरन खून की कमी को दूर करता है, मैग्नीशियम और पोटेशियम दिल की धड़कन को संतुलित रखते हैं, और जिंक व एंटीऑक्सीडेंट्स रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। यही नहीं, ओट्स ब्लड शुगर को भी संतुलित रखता है। यह धीरे पचता है, जिससे खून में शुगर अचानक नहीं बढ़ती। इसलिए यह डायबिटीज के मरीजों के लिए भी सुरक्षित है।

    आयुर्वेद कहता है कि ओट्स शरीर को अंदर से साफ करता है। यह आंतों में जमा गंदगी और टॉक्सिन को बाहर निकालता है और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है। जब शरीर का मेटाबॉलिज्म सही रहता है, तो फैट जमा नहीं होता और कोलेस्ट्रॉल का स्तर संतुलित बना रहता है। नियमित रूप से ओट्स खाने वाले लोगों में दिल की समस्याएं काफी कम देखी जाती हैं।

    ओट्स को रोज़ाना अपनी डाइट में शामिल करना न सिर्फ दिल की बीमारियों से बचाने में मदद करता है, बल्कि शरीर को ऊर्जा, ताकत और संतुलन भी देता है। यह सुपरफूड हर उम्र के लिए फायदेमंद है और स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सबसे आसान उपायों में से एक है।

  • ठंड में स्किन ड्राई हो रही है? ये फेस पैक हटाएंगे कालापन और देंगे जवां लुक

    ठंड में स्किन ड्राई हो रही है? ये फेस पैक हटाएंगे कालापन और देंगे जवां लुक


    नई दिल्ली। सर्दियों में ठंडी हवा और ड्राई स्किन की वजह से चेहरे पर रूखापन, कालापन और उम्र के असर जल्दी दिखने लगते हैं। साथ ही लोग धूप में बैठकर गर्माहट लेते हैं, जिससे त्वचा पर टैनिंग और काला पन बढ़ जाता है। अगर इस मौसम में स्किन केयर छोड़ दिया जाए तो निखार भी गायब होने लगता है। ऐसे में घर पर बने नेचुरल फेस पैक से आप अपनी त्वचा को ग्लो, नमी और जवांपन दे सकते हैं।
    1) ओट्स-दूध फेस पैक (डेड स्किन हटाए, स्किन को हाइड्रेट करे)
    सर्दियों में ग्लो और नरमी बनाए रखने के लिए ओट्स और दूध का फेस पैक बहुत फायदेमंद है।
    बनाने का तरीका:2 बड़े चम्मच ओट्स लें और उसमें 3 बड़े चम्मच दूध मिलाकर पेस्ट बना लें।
    चेहरे पर 15-20 मिनट लगाकर फिर धो लें।

    फायदा:ओट्स स्किन की डेड सेल्स हटाकर एक्सफोलिएट करता है, वहीं दूध स्किन को हाइड्रेट करके नरम बनाता है।

    2) शहद-नींबू फेस पैक (ग्लो और ब्राइटनिंग)
    शहद में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं और यह स्किन को नर्म बनाता है। नींबू त्वचा की रंगत को हल्का कर ब्राइटनेस देता है।
    बनाने का तरीका:1 चम्मच शहद में 2-3 बूंद नींबू का रस मिलाएं, जरूरत अनुसार गुलाबजल डालकर पेस्ट तैयार करें।
    चेहरे को हल्का गीला करके 10-15 मिनट लगाएं और फिर धो लें।
    सावधानियां:अगर आपकी स्किन संवेदनशील है, तो नींबू की मात्रा कम रखें और धूप में बाहर जाने से पहले यह पैक न लगाएं।

    3) कॉफी फेस पैक (टैनिंग हटाने के लिए बेस्ट)
    धूप से हुए कालेपन और टैनिंग को हटाने के लिए कॉफी फेस पैक असरदार है।
    बनाने का तरीका:2 चम्मच कॉफी पाउडर + 1 चम्मच शहद + जरूरत अनुसार दूध मिलाकर पेस्ट बनाएं।
    15-20 मिनट बाद धो लें।
    फायदा:कॉफी स्किन को एक्सफोलिएट कर टैनिंग कम करती है, शहद से त्वचा नरम होती है और दूध से हाइड्रेशन मिलता है।
    4) पपीते का फेस पैक (स्किन में ग्लो और ब्राइटनेस)
    पपीता विटामिन-सी और एंजाइम से भरपूर होता है, जो स्किन को ग्लो देता है।
    बनाने का तरीका:
    एक पका पपीता मैश करके उसमें थोड़ा कच्चा दूध मिलाएं।
    पेस्ट को चेहरे पर 10-15 मिनट लगाकर धो लें।
    फायदा:पपीता त्वचा की डेड सेल्स हटाकर ग्लो बढ़ाता है और दूध त्वचा को नरम बनाए रखता है।