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  • पानी में ज्यादा देर रहते ही क्यों सिकुड़ने लगती हैं उंगलियां? जानें इसके पीछे का साइंस

    पानी में ज्यादा देर रहते ही क्यों सिकुड़ने लगती हैं उंगलियां? जानें इसके पीछे का साइंस

    नई दिल्ली।  पानी में उंगलियों का सिकुड़ना स्किन नहीं, दिमाग का कमाल है. यह शरीर की एक स्मार्ट ट्रिक है, जो गीली चीजें पकड़ने में हमारी मदद करती है. आइए जान लेते हैं कि ऐसा क्यों होता है?
    पानी में उंगलियां सिकुड़ना
    आपने भी गौर किया होगा कि नहाते समय या ज्यादा देर तक पानी में रहने के बाद अचानक आपकी उंगलियां सिकुड़ जाती हैं और उन पर झुर्रियां सी बन जाती हैं. पहली नजर में लगता है जैसे त्वचा ने पानी सोख लिया हो, लेकिन असली कहानी इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है. यह बदलाव सिर्फ त्वचा का नहीं, बल्कि हमारे दिमाग और नसों का कमाल है. यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे शरीर की एक स्मार्ट ट्रिक मानते हैं.

    पानी में जाते ही उंगलियां क्यों बदल जाती हैं?

    जब हम लंबे समय तक पानी में रहते हैं, तो हाथों और पैरों की उंगलियों की त्वचा धीरे-धीरे सिकुड़ने लगती है. आमतौर पर लोग मान लेते हैं कि स्किन ने पानी सोख लिया है, लेकिन वैज्ञानिक रिसर्च बताती है कि इसका कारण पानी नहीं, बल्कि हमारा नर्वस सिस्टम है. यह पूरी प्रक्रिया दिमाग के कंट्रोल में होती है और इसे एक न्यूरोलॉजिकल रिएक्शन माना जाता है.

    दिमाग कैसे देता है सिकुड़ने का सिग्नल?

    जैसे ही उंगलियां पानी में ज्यादा देर तक रहती हैं, वहां मौजूद नसें एक्टिव हो जाती हैं. ये नसें दिमाग को संकेत भेजती हैं, जिसके बाद ब्लड वेसल्स यानी खून की नलिकाएं सिकुड़ने लगती हैं. जब उंगलियों में खून की मात्रा कम हो जाती है, तो ऊपर की त्वचा अंदर की ओर खिंच जाती है. इसी खिंचाव की वजह से स्किन पर झुर्रियां दिखाई देने लगती हैं.

    क्या यह कोई बीमारी है?

    नहीं, बिल्कुल नहीं. पानी में उंगलियों का सिकुड़ना पूरी तरह से सामान्य प्रक्रिया है. बल्कि डॉक्टर इसे इस बात का संकेत मानते हैं कि आपकी नसें सही तरीके से काम कर रही हैं. दिलचस्प बात यह है कि जिन लोगों की नसों में गंभीर नुकसान होता है, उनकी उंगलियां पानी में भी नहीं सिकुड़तीं हैं. यानी यह झुर्रियां दिखना शरीर के हेल्दी होने का एक इशारा भी है.

    सिकुड़ने से हमें क्या फायदा मिलता है?

    यह बदलाव सिर्फ देखने के लिए नहीं होता, बल्कि इसके पीछे एक फायदा भी छिपा है. सिकुड़ी हुई उंगलियों से गीली चीजों को पकड़ना आसान हो जाता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि झुर्रियों की वजह से स्किन पर ग्रूव्स बन जाते हैं, जिससे पानी बाहर निकल जाता है और पकड़ मजबूत हो जाती है. ठीक वैसे ही जैसे गाड़ी के टायरों में बनी ग्रिप गीली सड़क पर मदद करती है.

    शरीर की स्मार्ट डिजाइन

    इंसान का शरीर हालात के हिसाब से खुद को ढालने में माहिर है. पानी में उंगलियों का सिकुड़ना उसी का एक उदाहरण है. यह प्रक्रिया अपने आप शुरू होती है और पानी से बाहर आते ही धीरे-धीरे खत्म भी हो जाती है. इसमें किसी तरह की दवा या इलाज की जरूरत नहीं होती.

    कब हो सकता है चिंता का विषय?

    अगर लंबे समय तक पानी में रहने के बाद भी उंगलियां बिल्कुल नहीं सिकुड़तीं, तो डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है. यह नसों से जुड़ी किसी समस्या का संकेत हो सकता है. हालांकि ज्यादातर मामलों में यह पूरी तरह नॉर्मल होता है और चिंता की कोई बात नहीं होती है.

  • 2026 की सबसे प्रतीक्षित फिल्म में 60 साल के ‘किंग’ का एक्शन धमाका, बेटी सुहाना संग पहली बार बड़े पर्दे पर दिखेगा जादू

    2026 की सबसे प्रतीक्षित फिल्म में 60 साल के ‘किंग’ का एक्शन धमाका, बेटी सुहाना संग पहली बार बड़े पर्दे पर दिखेगा जादू

    नई दिल्ली।  साल 2026 सिनेमा प्रेमियों के लिए बेहद खास होने वाला है। एक तरफ जहां कई बड़ी फिल्मों की रिलीज का इंतजार किया जा रहा है, वहीं IMDb ने मोस्ट एंटीसिपेटेड इंडियन फिल्मों की लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में पांच अलग-अलग भाषाओं की 20 फिल्में शामिल हैं, लेकिन जो फिल्म सबसे ऊपर रही, उसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यह फिल्म है बॉलीवुड के असली ‘किंग’ शाहरुख खान की अपकमिंग मूवी ‘किंग’।

    60 साल की उम्र में भी शाहरुख खान एक बार फिर धमाकेदार एक्शन अवतार में बड़े पर्दे पर लौटने जा रहे हैं। खास बात यह है कि इस फिल्म में वे पहली बार अपनी बेटी सुहाना खान के साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे, जिसने फैंस की एक्साइटमेंट को कई गुना बढ़ा दिया है।

    सिद्धार्थ आनंद के निर्देशन में बनेगी मेगा एक्शन फिल्म

    फिल्म ‘किंग’ का निर्देशन कर रहे हैं सिद्धार्थ आनंद, जो इससे पहले ‘पठान’ और ‘वॉर’ जैसी ब्लॉकबस्टर एक्शन फिल्में दे चुके हैं। ऐसे में दर्शकों को शाहरुख के स्टाइलिश एक्शन और हाई-ऑक्टेन ड्रामा की पूरी उम्मीद है। फिल्म में दीपिका पादुकोण, रानी मुखर्जी, अभिषेक बच्चन, अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ और जयदीप अहलावत जैसे बड़े सितारे भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।

    ‘रामायण पार्ट 1’ को पछाड़कर टॉप पर पहुंची ‘किंग’

    IMDb की इस लिस्ट में शाहरुख खान की ‘किंग’ ने नितेश तिवारी की ‘रामायण: पार्ट 1’ को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है। ‘रामायण पार्ट 1’ इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर है, जबकि थलपति विजय की ‘जन नायकन’ ने टॉप-3 में जगह बनाई है। भले ही ‘जन नायकन’ इस वक्त CBFC सर्टिफिकेट विवाद में फंसी हो, लेकिन दर्शकों की उत्सुकता कम नहीं हुई है।

    साउथ फिल्मों का दबदबा

    IMDb की मोस्ट एंटीसिपेटेड लिस्ट में इस बार साउथ फिल्मों का जबरदस्त दबदबा देखने को मिला है। प्रभास की फिल्म ‘स्पिरिट’ चौथे नंबर पर है, जबकि यश की ‘टॉक्सिक’ पांचवें स्थान पर रही। सलमान खान की वॉर ड्रामा फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ छठे नंबर पर है, वहीं सनी देओल की ‘बॉर्डर 2’ ने टॉप-10 में जगह बना ली है। आलिया भट्ट की फिल्म ‘अल्फा’ भी इस लिस्ट में शामिल है।

    25 करोड़ दर्शकों की पसंद से बनी लिस्ट

    IMDb इंडिया के मुताबिक, यह लिस्ट किसी सर्वे पर आधारित नहीं है, बल्कि दुनियाभर के 25 करोड़ से ज्यादा मासिक विजिटर्स द्वारा देखे गए पेज व्यूज के आधार पर तैयार की गई है। इस लिस्ट में 10 हिंदी, 5 तेलुगु, 3 तमिल, 1 मलयालम और 1 कन्नड़ फिल्म शामिल हैं।

    स्टार्स का डबल धमाका

    इस लिस्ट में कई सितारों की दो-दो फिल्में शामिल हैं। यश, प्रभास, सनी देओल, रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और नयनतारा जैसे सितारों का डबल धमाका साफ दिखता है, जो बताता है कि दर्शकों का भरोसा इन स्टार्स और उनकी फिल्मों पर कितना मजबूत है।

  • Honeymoon Place in Winter: सर्दियों में हनीमून के लिए भारत की सबसे रोमांटिक जगहें

    Honeymoon Place in Winter: सर्दियों में हनीमून के लिए भारत की सबसे रोमांटिक जगहें

    नई दिल्ली।  शादी के बाद हर कपल के लिए हनीमून जिंदगी का सबसे खूबसूरत दौर होता है। यही वह समय होता है जब दो लोग एक-दूसरे को बेहतर समझते हैं और साथ में यादगार पल बिताते हैं। अक्सर लोग हनीमून के लिए यूरोप का सपना देखते हैं, जहां बर्फीली वादियां, झीलें और पहाड़ हों। लेकिन अगर आप सर्दियों में भारत में ही हनीमून प्लान कर रहे हैं, तो यहां ऐसी कई जगहें हैं जो किसी विदेशी डेस्टिनेशन से कम नहीं हैं।

    गुलमर्ग, जम्मू और कश्मीर

    गुलमर्ग को भारत का विंटर वंडरलैंड कहा जाता है। सर्दियों में यहां बर्फ की चादर बिछ जाती है और पूरा इलाका किसी रोमांटिक फिल्म के सीन जैसा लगने लगता है। यहां आप दुनिया की सबसे ऊंची गोंडोला केबल कार की सवारी कर सकते हैं, बर्फबारी का आनंद ले सकते हैं और बर्फीली वादियों में अपने पार्टनर के साथ हाथ थामकर घूम सकते हैं। रोमांस और एडवेंचर का परफेक्ट कॉम्बिनेशन गुलमर्ग में मिलता है।

    औली, उत्तराखंड

    औली को मिनी स्विट्जरलैंड ऑफ इंडिया कहा जाता है। बर्फ से ढकी पहाड़ियां, शांत माहौल और स्कीइंग का रोमांच—ये सब औली को हनीमून कपल्स के लिए खास बनाते हैं। दिसंबर से मार्च के बीच औली का नजारा बेहद रोमांटिक होता है। अगर आप शांति, प्रकृति और रोमांस चाहते हैं, तो औली एक बेहतरीन विकल्प है।

    मनाली, हिमाचल प्रदेश

    मनाली नए शादीशुदा जोड़ों के बीच सबसे लोकप्रिय हनीमून डेस्टिनेशन में से एक है। यहां सोलांग वैली में पैराग्लाइडिंग, रोहतांग पास में बर्फ, और कैफे कल्चर कपल्स को खूब आकर्षित करता है। सर्दियों में मनाली की ठंड, बर्फ और पहाड़ों के बीच बिताया गया समय हनीमून को यादगार बना देता है।

    सिक्किम

    सिक्किम उन कपल्स के लिए है जो भीड़ से दूर शांति और प्राकृतिक सुंदरता चाहते हैं। गंगटोक से कंचनजंगा के नजारे किसी सिनेमाई दृश्य से कम नहीं लगते। वहीं लाचुंग और युमथांग घाटी किसी स्विस पोस्टकार्ड जैसी दिखाई देती हैं। यहां का शांत वातावरण और ठंडी हवा हनीमून के लिए परफेक्ट है।

    अंडमान और निकोबार

    अगर आप बर्फ नहीं, बल्कि समुद्र और बीच के दीवाने हैं, तो अंडमान और निकोबार आपके लिए बेस्ट है। यहां के साफ-सुथरे समुद्र तट, स्कूबा डाइविंग, स्नॉर्कलिंग और रोमांटिक सनसेट हनीमून को खास बना देते हैं। यह जगह सर्दियों में कपल्स के बीच बेहद लोकप्रिय रहती है।

  • गले की खराश और दर्द को कहें अलविदा! सर्दियों में अपनाएं ये असरदार घरेलू उपाय

    गले की खराश और दर्द को कहें अलविदा! सर्दियों में अपनाएं ये असरदार घरेलू उपाय


    नई दिल्ली। सर्दियों के मौसम में ठंडी हवा, प्रदूषण और कमजोर इम्युनिटी की वजह से गले में दर्द, खराश, खांसी और जुकाम की समस्या आम हो जाती है। कई बार सही समय पर ध्यान न देने से यह परेशानी बढ़कर इंफेक्शन का रूप भी ले सकती है। ऐसे में दवाइयों के साथ-साथ कुछ घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय बेहद कारगर साबित हो सकते हैं।

    लहसुन से बढ़ाएं रोग प्रतिरोधक क्षमता
    लहसुन में मौजूद एलिसिन तत्व में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। यह गले में सूजन और संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता है। रोज़ 1–2 कली लहसुन का सेवन सर्दी-जुकाम और गले की खराश से बचाव करता है।

    अदरक, काली मिर्च और तुलसी वाली चाय
    अगर गले में दर्द या बैठापन महसूस हो रहा है तो अदरक, काली मिर्च और तुलसी डालकर बनाई गई गर्म चाय बेहद फायदेमंद होती है।
    अदरक सूजन कम करता है
    काली मिर्च बलगम निकालने में मदद करती है
    तुलसी इम्युनिटी को मजबूत बनाती है
    यह चाय शरीर को गर्म रखती है और गले को राहत देती है।

    मुलेठी: आयुर्वेदिक रामबाण
    आयुर्वेद में मुलेठी को गले की बीमारियों के लिए कारगर माना गया है। मुलेठी का छोटा टुकड़ा धीरे-धीरे चूसने से इसका रस गले की खराश को शांत करता है और खांसी में आराम देता है।

    शहद से मिले प्राकृतिक आराम
    शहद में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।

    यह गले की जलन को कम करता है और खांसी को शांत करता है। गुनगुने पानी या हर्बल चाय में शहद मिलाकर पीना बेहद लाभकारी होता है।

    ओटमील और पोषक आहार का सेवन
    ओटमील में जिंक, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो इम्युन सिस्टम को मजबूत करते हैं। इसमें केला, शहद, दालचीनी और थोड़ा अदरक मिलाकर खाने से गले को आराम मिलता है और शरीर को जरूरी पोषण भी मिलता है।
    कब जाएं डॉक्टर के पास?
    अगर गले का दर्द 3–4 दिन से ज्यादा बना रहे, बुखार हो, निगलने में परेशानी हो या आवाज लगातार बैठी रहे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

  • शंख भस्म: हड्डियों और पेट की सेहत के लिए आयुर्वेद का चमत्कारी खजाना

    शंख भस्म: हड्डियों और पेट की सेहत के लिए आयुर्वेद का चमत्कारी खजाना


    नई दिल्ली। आयुर्वेद सदियों से जड़ी-बूटियों और भस्मों के माध्यम से स्वास्थ्य को सुधारने का अनमोल ज्ञान देता आया है। इस कड़ी में शंख भस्म एक ऐसा खजाना है जिसे आयुर्वेद में चमत्कारी भस्म के रूप में जाना जाता है। इसे मुख्यतः पेट और हड्डियों की बीमारियों में लाभकारी माना गया है।शंख भस्म मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट से बनती है। इसका उपयोग एसिड रिफ्लक्स, पेट की जलन और पाचन से जुड़ी समस्याओं में किया जाता है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञ बताते हैं कि शंख भस्म पेट की पाचन अग्नि को रीसेट करती है, जिससे भोजन बेहतर ढंग से पचता है और गैस, पेट दर्द, उल्टी जैसी परेशानियों में राहत मिलती है।

    हड्डियों और जोड़ों के लिए वरदान:
    शंख भस्म कैल्शियम से भरपूर होने के कारण हड्डियों को मजबूत बनाने ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने और दांतों की मजबूती बनाए रखने में सहायक होती है। शरीर में कैल्शियम की कमी होने पर भी शंख भस्म लाभकारी है। खास बात यह है कि यह वात और कफ दोषों को संतुलित करने में भी मदद करती है, जिससे शरीर में असंतुलन की वजह से होने वाली बीमारियों को रोका जा सकता है।

    त्वचा और सौंदर्य में भी उपयोगी:
    शंख भस्म का लेपन या सेवन चेहरे पर मुहांसों, दाग-धब्बों और त्वचा की समस्याओं में भी लाभकारी माना गया है। आयुर्वेद में इसे न केवल आंतरिक स्वास्थ्य बल्कि बाहरी सुंदरता और त्वचा की चमक बनाए रखने के लिए भी प्रयोग किया जाता है।

    सुरक्षित उपयोग:
    ध्यान रखें कि शंख भस्म को सीधा नहीं खाना चाहिए। इसे किसी आयुर्वेदिक मिश्रण या चिकित्सा के अनुसार लिया जाता है। सेवन की मात्रा और तरीका रोग और शरीर की स्थिति के अनुसार अलग-अलग होता है। गर्भवती महिलाएं और बच्चों के लिए चिकित्सक की सलाह आवश्यक है। संक्षेप में शंख भस्म आयुर्वेद का एक ऐसा खनिज है, जो पाचन, हड्डियों, जोड़ों और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक है। इसके नियमित और सही उपयोग से शरीर में ऊर्जा, संतुलन और मजबूती आती है।

  • नहाते समय कान में चला गया पानी? घरेलू उपायों से मिल सकती है राहत, लापरवाही बढ़ा सकती है संक्रमण का खतरा

    नहाते समय कान में चला गया पानी? घरेलू उपायों से मिल सकती है राहत, लापरवाही बढ़ा सकती है संक्रमण का खतरा

    नई दिल्ली । नहाते समय या बाल धोते वक्त कान में पानी चला जाना एक आम समस्या हैजिसे अधिकतर लोग हल्के में ले लेते हैं। हालांकि डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह छोटी-सी परेशानी समय पर ध्यान न देने पर गंभीर रूप ले सकती है। कान में फंसा पानी न सिर्फ असहजता पैदा करता हैबल्कि संक्रमणदर्द और सुनने की क्षमता पर असर जैसी समस्याओं का कारण भी बन सकता है। इसलिए जरूरी है कि सही और सुरक्षित तरीकों से ही इस समस्या से राहत पाई जाए। विशेषज्ञों के अनुसारजब नहाते समय तेज दबाव के साथ पानी कान में प्रवेश करता हैतो वह ईयर कैनाल में फंस सकता है। कान की बनावट और अंदर मौजूद ईयर वैक्स कान का मैल कई बार पानी को बाहर निकलने से रोक देता है।
    इससे कान भारी लगने लगता हैआवाजें साफ सुनाई नहीं देतीं और एक अजीब-सी झनझनाहट महसूस होती है। लंबे समय तक नमी बनी रहने से कान के अंदर गर्म और नम वातावरण बन जाता हैजो बैक्टीरिया और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल होता है। यही कारण है कि लापरवाही करने पर इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि सबसे आसान और सुरक्षित घरेलू उपाय गुरुत्वाकर्षण (ग्रैविटी) का इस्तेमाल करना है। जिस कान में पानी गया होउस तरफ सिर झुकाकर कुछ मिनट तक लेटना कई बार पानी को बाहर निकालने के लिए पर्याप्त होता है। इसी दौरान कान की लोब को हल्के से नीचे और बाहर की ओर खींचने से ईयर कैनाल सीधी होती है और फंसा हुआ पानी बाहर निकल सकता है।

    कुछ मामलों में हेयर ड्रायर का उपयोग भी मददगार हो सकता है। ड्रायर को कम गर्मी या ठंडी हवा के मोड पर रखकर कान से सुरक्षित दूरी पर इस्तेमाल किया जाए तो अंदर की नमी सूख सकती है। हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि ड्रायर को बहुत पास लाना या ज्यादा देर तक गर्म हवा देना नुकसानदेह हो सकता है। डॉक्टर साफ तौर पर बताते हैं कि कान में कॉटन बडपिनमाचिस की तीली या किसी भी नुकीली वस्तु का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इससे कान की अंदरूनी त्वचा को चोट लग सकती है और ईयर ड्रम के फटने का भी खतरा रहता है। इसी तरह जबरदस्ती फूंक मारना या किसी तरल पदार्थ को कान में डालना स्थिति को और बिगाड़ सकता है।

    यदि 24 घंटे से अधिक समय तक कान में पानी भरा हुआ महसूस होदर्दखुजली या जलन शुरू हो जाएया कान से पीले रंग का स्राव निकलने लगेतो तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। जिन लोगों का पहले कान का ऑपरेशन हो चुका हो या जिनके कान के पर्दे में छेद की समस्या रही होउन्हें घरेलू उपाय करने से पहले विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह है कि नहाते समय या तैराकी के दौरान ईयर प्लग का इस्तेमाल किया जाए। जरूरत पड़ने पर कॉटन पर हल्की वैसलीन लगाकर कान में रखा जा सकता हैताकि पानी अंदर न जाए। साथ ही बार-बार कान साफ करने की आदत से भी बचना चाहिएक्योंकि इससे ईयर वैक्स का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है।

  • सर्दियों में देसी घी: रूखी त्वचा के लिए प्राकृतिक मॉइस्चराइजर, पोषण और एंटी-एजिंग का असरदार उपाय

    सर्दियों में देसी घी: रूखी त्वचा के लिए प्राकृतिक मॉइस्चराइजर, पोषण और एंटी-एजिंग का असरदार उपाय


    नई दिल्ली।  सर्दियों का मौसम आते ही रूखी, खिंची और बेजान त्वचा एक आम समस्या बन जाती है। ठंडी हवा, हीटर का इस्तेमाल और गरम पानी से नहाने की आदत त्वचा की प्राकृतिक नमी छीन लेती है। ऐसे में जहां बाजार के कई मॉइस्चराइजर केवल ऊपरी परत को मुलायम बनाते हैं, वहीं शुद्ध देसी घी त्वचा को गहराई से पोषण देने का एक प्राकृतिक और प्रभावी विकल्प बनकर सामने आया है।

    2025 की रिपोर्ट Necole Bitchie और Healthline के अनुसार, देसी घी में मौजूद विटामिन A, D, E और K के साथ-साथ प्राकृतिक फैटी एसिड त्वचा की नमी को लॉक करने, सूजन कम करने और फाइन लाइन्स को रोकने में मदद करते हैं। यही वजह है कि आयुर्वेद में घी को न सिर्फ खाने बल्कि त्वचा पर लगाने के लिए भी लाभकारी माना गया है।विशेषज्ञों के मुताबिक, सर्दियों में त्वचा की बैरियर लेयर कमजोर हो जाती है, जिससे Transepidermal Water Loss TEWL बढ़ता है। घी इस बैरियर को मजबूत करता है और त्वचा को अंदर से रिपेयर करने में मदद करता है। आयुर्वेदिक परंपरा में इस्तेमाल होने वाला शतधौत घृत 100 बार धुला घी विशेष रूप से स्किन हाइड्रेशन बढ़ाने, जलन कम करने और एक्जिमा व सोरायसिस जैसी समस्याओं में राहत देने के लिए जाना जाता है।

    टॉपिकल इस्तेमाल की बात करें तो घी सूखी, फटी और संवेदनशील त्वचा के लिए सुरक्षित माना गया है। सर्दियों में फटे होंठ, रूखे हाथ, ड्राई पैच और फटी एड़ियों पर घी लगाने से त्वचा जल्दी मुलायम होती है। यही नहीं, बच्चों की मालिश और बीमारी के बाद स्किन रिकवरी में भी देसी घी का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है।हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि घी का टेक्सचर काफी रिच और ऑयली होता है। ऐसे में एक्ने-प्रोन या बहुत तैलीय त्वचा पर इसका ज्यादा इस्तेमाल पोर्स ब्लॉक कर सकता है, जिससे पिंपल्स की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए ऐसी त्वचा वाले लोगों को घी को सीधे पूरे चेहरे पर लगाने के बजाय पहले पैच टेस्ट करना चाहिए या सिर्फ बहुत सूखे हिस्सों पर सीमित मात्रा में उपयोग करना चाहिए।

    त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि घी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स झुर्रियों दाग-धब्बों और सूजन को कम करने में मदद करते हैं, जिससे त्वचा ज्यादा स्वस्थ और जवां दिखती है। रात में सोने से पहले हल्के हाथों से घी लगाने से त्वचा को गहरी नमी और पोषण मिलता है।इस रूप में देसी घी सर्दियों में केवल एक पारंपरिक घरेलू नुस्खा नहीं बल्कि वैज्ञानिक रूप से समर्थित स्किन केयर विकल्प भी है। सही मात्रा और सही त्वचा प्रकार के अनुसार इसका इस्तेमाल करने से यह सर्दियों में त्वचा की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। यदि त्वचा बहुत संवेदनशील हो, तो विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहेगा।

  • मौन व्रत: मानसिक शांति और स्वास्थ्य के लिए वरदान..

    मौन व्रत: मानसिक शांति और स्वास्थ्य के लिए वरदान..


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और शोर-शराबे से भरी दुनिया में शांति एक दुर्लभ लेकिन बेहद जरूरी चीज बन गई है। लगातार अशांति और शोर-शराबा न केवल शरीर को बीमारियों की ओर ले जाता हैबल्कि तनावचिड़चिड़ापन और मानसिक थकान भी बढ़ाता है। ऐसे में मौन का अभ्यास सेल्फ-अवेयरनेसमानसिक स्पष्टता और आंतरिक शांति का बेहतरीन साधन बन जाता है।

    सनातन धर्म में मौन व्रत को सर्वोत्तम तप माना गया है। हर साल मौनी अमावस्या को यह व्रत रखा जाता है। यह न केवल धार्मिक महत्व रखता हैबल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। मौन का अभ्यास केवल बाहर की शांति नहीं हैबल्कि यह एक सक्रिय प्रक्रिया हैजो हमें आंतरिक दुनिया की ओर ले जाती है और मन को शांत करती है।

    आयुर्वेद के अनुसारअधिक बोलना वात दोष को बढ़ाता हैजिससे मन अशांत होता हैनींद प्रभावित होती है और ऊर्जा का क्षय होता है। मौन रहने से मन शांत रहता हैसत्व गुण बढ़ते हैंऊर्जा बचती है और एकाग्रताध्यान और मानसिक क्षमता मजबूत होती है। यह तनावक्रोध और हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है।भगवद्गीता में मौन को गुह्य ज्ञान कहा गया है। इसमें मौन व्रत को मानसिक तप का रूप माना गया हैजो शरीर और मन के संतुलन के लिए फायदेमंद है। मौन व्रत से वाणी और संयम के जरिए ओजस की रक्षा होती है और सेहत मजबूत बनती है।

    कई रिसर्च में यह सिद्ध हुआ है कि शोर प्रदूषण मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालता हैजबकि मौन का दिमाग पर हीलिंग प्रभाव पड़ता है। अध्ययन बताते हैं कि रोजाना दो घंटे का मौन ब्रेन सेल्स के विकास को बढ़ाता हैजिससे याददाश्तभावनाएं और सीखने की क्षमता सुधरती है। मौन तनाव हार्मोन कोर्टिसोल को कम करता हैब्लड प्रेशर और हृदय गति को नियंत्रित करता हैनींद सुधारता है और एकाग्रताक्रिएटिविटी और भावनात्मक संतुलन बढ़ाता है।संक्षेप मेंमौन व्रत केवल आध्यात्मिक साधना नहीं हैबल्कि यह शारीरिकमानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का वरदान भी है। जीवन में शांति और संतुलन बनाए रखने के लिए मौन व्रत को अपनी दिनचर्या में अपनाना एक अत्यंत उपयोगी साधन हो सकता है।

  • नई ट्रेंडिंग स्टाइल: क्यों लोग बदल रहे हैं बालों का रंग और क्या है इसका असर?

    नई ट्रेंडिंग स्टाइल: क्यों लोग बदल रहे हैं बालों का रंग और क्या है इसका असर?

    नई दिल्ली।  आजकल बालों का रंग बदलना सिर्फ फैशन नहीं रहा, बल्कि यह खुद को व्यक्त करने और स्टाइल स्टेटमेंट बनाने का तरीका बन गया है। सलून और हेयर स्टाइलिस्ट्स का कहना है कि पिछले कुछ सालों में बाल रंगने की मांग में 40-50% बढ़ोतरी देखी गई है। खासकर युवाओं और सोशल मीडिया प्रभावित पीढ़ी में ब्राउन, ब्लॉन्ड, पेस्टल और हाईलाइटेड बालों का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है।

    बालों का रंग बदलने के पीछे सिर्फ स्टाइल का फैक्टर नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोग अपने स्वयं के व्यक्तित्व और मूड को दर्शाने के लिए यह कदम उठा रहे हैं। उदाहरण के लिए, गहरे रंग के बाल अधिक पारंपरिक और गंभीर, जबकि हल्के और पेस्टल टोन के बाल क्रिएटिव और फ्री स्पिरिटेड व्यक्तित्व को दिखाते हैं।

    बालों के रंग में नया तकनीकी इनोवेशन

    आजकल हेयर कलर में कई नए और सुरक्षित फॉर्मूले उपलब्ध हैं। प्राकृतिक हर्बल और ऑर्गेनिक हेयर डाई बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। ये न केवल बालों को सुरक्षित रखती हैं, बल्कि लंबे समय तक रंग को बनाए रखने में भी मदद करती हैं। कुछ ब्रांड्स में फेड-फ्री और UV प्रोटेक्टेड कलर भी उपलब्ध है, जिससे बाल चमकदार और स्वस्थ रहते हैं।

    सैलून प्रोफेशनल्स बताते हैं कि ग्रैजुएट, ऑफिस-गोइंग और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर युवाओं के बीच कलर ट्रेंड्स को काफी प्रभावित कर रहे हैं। अब लोग सिर्फ पार्टी या इवेंट्स के लिए नहीं, बल्कि डेली लुक के लिए भी रंग बदलते हैं।

    बाल रंगते समय ध्यान रखने वाली बातें

    हेयर एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि बालों को कलर करने से पहले हमेशा सैलून प्रोफेशनल से सलाह लें। घर पर खुद से डाई लगाने से बालों में डैमेज और ब्रेकेज हो सकता है। इसके अलावा, बालों को रंगने के बाद मास्क, कंडीशनर और सन्सक्रीन का इस्तेमाल करना जरूरी है ताकि रंग लंबे समय तक बना रहे और बाल स्वस्थ रहें।

    बालों का रंग बदलने से व्यक्तित्व में भी नया आत्मविश्वास आता है। कई लोग कहते हैं कि नया हेयर कलर उन्हें सक्रिय और ऊर्जा से भरा महसूस कराता है। इस वजह से बालों का रंग केवल फैशन नहीं, बल्कि एक प्रकार की मानसिक और सामाजिक अभिव्यक्ति बन गया है।

    सोशल मीडिया और सेलिब्रिटी का असर

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और बॉलीवुड-हॉलीवुड सितारे भी इस ट्रेंड को बढ़ावा दे रहे हैं। इंस्टाग्राम और टिकटॉक पर बालों के नए रंगों के वीडियो और टिप्स वायरल होते रहते हैं। युवा अपने हेयर कलर के लिए फोटोशूट और सोशल मीडिया पोस्ट के लिए भी प्रेरित हो रहे हैं।

  • सेब पर छिड़क लें बस एक चुटकी सेंधा नमक, स्वाद के साथ सेहत के फायदे हो जाएंगे दोगुने, जानिए दादी-नानी का आजमाया नुस्खा

    सेब पर छिड़क लें बस एक चुटकी सेंधा नमक, स्वाद के साथ सेहत के फायदे हो जाएंगे दोगुने, जानिए दादी-नानी का आजमाया नुस्खा


    नई दिल्ली । एक सेब रोज खाओ और डॉक्टर को दूर भगाओ यह कहावत लगभग हर किसी ने सुनी है। सेब को सेहत का खजाना माना जाता है, लेकिन आयुर्वेद और आधुनिक न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर सेब को सही तरीके से खाया जाए, तो इसके फायदे और भी बढ़ सकते हैं। दादी-नानी के जमाने से चला आ रहा एक सरल घरेलू नुस्खा आज फिर चर्चा में है सेब के स्लाइस पर एक चुटकी सेंधा नमक छिड़क कर खाना। यह न केवल स्वाद को बढ़ाता है, बल्कि शरीर पर इसके पोषक तत्वों का असर भी दोगुना कर देता है। न्यूट्रिशन विशेषज्ञों के अनुसार, सेब और सेंधा नमक का संयोजन शरीर के लिए पावरहाउस से कम नहीं है। सेब में मौजूद प्राकृतिक शुगर शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है। जब इसे नमक के साथ खाया जाता है, तो शरीर इसे तेजी से अवशोषित करता है। यही वजह है कि यह नुस्खा दोपहर की थकान, कमजोरी या वर्कआउट से पहले इंस्टेंट एनर्जी देने में बेहद कारगर माना जाता है।

    सेंधा नमक या हिमालयन पिंक सॉल्ट में सोडियम के साथ-साथ पोटैशियम, मैग्नीशियम और अन्य ट्रेस मिनरल्स भी होते हैं। ये तत्व शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने में मदद करते हैं। खासकर गर्मी के मौसम में, अधिक पसीना आने या भारी शारीरिक मेहनत के दौरान यह मिश्रण मांसपेशियों में ऐंठन और डिहाइड्रेशन से बचाव करता है पाचन से जुड़ी समस्याओं में भी यह नुस्खा बेहद लाभकारी है। सेब फाइबर से भरपूर होता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करता है। वहीं सेंधा नमक पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करता है। दोनों मिलकर पेट फूलने, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाते हैं और गट हेल्थ को बेहतर बनाते हैं।

    एसिडिटी से परेशान लोगों के लिए भी सेब और सेंधा नमक का यह संयोजन फायदेमंद माना जाता है। सेंधा नमक की क्षारीय प्रकृति सेब के कुछ एसिडिक तत्वों को संतुलित कर देती है, जिससे पेट में जलन और खट्टी डकार जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं। अक्सर लोगों को यह महसूस होता है कि नमक लगाने से सेब और भी मीठा लगने लगता है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है। नमक जीभ पर मौजूद कड़वाहट महसूस करने वाले रिसेप्टर्स को दबा देता है, जिससे सेब की प्राकृतिक मिठास और अधिक उभर कर सामने आती है।

    सेवन के सही तरीके की बात करें, तो हमेशा साधारण रिफाइंड नमक की जगह सेंधा नमक या गुलाबी नमक का ही उपयोग करें। नमक की मात्रा सिर्फ एक चुटकी तक सीमित रखें, क्योंकि अधिक नमक से ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सेब को अच्छी तरह धोकर ताजे स्लाइस में काटें और तुरंत सेवन करें। यह आसान घरेलू नुस्खा बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए फायदेमंद है। खासतौर पर जिम जाने वालों और खिलाड़ियों के लिए यह एक बेहतरीन प्री-वर्कआउट स्नैक साबित हो सकता है। हालांकि, किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या में इसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहेगा।