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  • रोज सुबह पीएं मेथी का पानी: कोलेस्ट्रॉल घटाए, वजन नियंत्रित करे और मेटाबॉलिज्म बढ़ाए

    रोज सुबह पीएं मेथी का पानी: कोलेस्ट्रॉल घटाए, वजन नियंत्रित करे और मेटाबॉलिज्म बढ़ाए


    नई दिल्ली । आयुर्वेद में मेथी को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और गलत खान-पान के कारण कोलेस्ट्रॉल की समस्या तेजी से बढ़ रही है। जब खून में कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल से ज्यादा हो जाता है तो यह नसों में जमा होकर ब्लॉकेज और दिल पर अतिरिक्त दबाव का कारण बनता है।

    यूपी के अलीगढ़ आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पीयूष माहेश्वरी के अनुसार मेथी के दानों में फाइबर और स्टेरोइडल सैपोनिन्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। सुबह खाली पेट मेथी का पानी पीने से खून में मौजूद बैड कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे कम होता है। यह नसों की दीवारों पर जमा फैट को पिघलाकर शरीर से बाहर निकालता है जिससे ब्लड फ्लो बेहतर होता है और दिल पर पड़ने वाला दबाव कम होता है।

    इसका सेवन आसान है। रात को एक गिलास पानी में एक चम्मच मेथी दाना भिगो दें। सुबह दाने चबाकर खाएं और पानी पी लें। इस सरल उपाय से नसों में जमा कोलेस्ट्रॉल कम होने लगता है और दिल की सेहत बेहतर रहती है।

    डॉ. माहेश्वरी बताते हैं कि डायबिटीज के मरीजों के लिए मेथी का पानी वरदान है। इसमें मौजूद घुलनशील फाइबर ब्लड में शुगर के अवशोषण की गति धीमी करता है और इंसुलिन के उत्पादन में मदद करता है। नियमित सेवन से फास्टिंग शुगर लेवल नियंत्रित रहता है और मेटाबॉलिक रेट बढ़ता है।

    पाचन के लिए भी मेथी का पानी लाभकारी है। यह गैस एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देता है आंतों को साफ़ करता है और शरीर से टॉक्सिन्स निकालता है। मेटाबॉलिज्म को तेज करके यह अतिरिक्त चर्बी को बर्न करने में मदद करता है। पेट लंबे समय तक भरा महसूस होने से ओवरईटिंग और अनावश्यक कैलोरी का सेवन भी कम होता है।

    मेथी की तासीर गर्म होती है जो वात दोष को संतुलित करती है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो जोड़ों और हड्डियों की सूजन कम करने में मदद करते हैं। आयुर्वेद में इसे हार्ट डायबिटीज पाचन और वजन कंट्रोल के लिए शक्तिशाली औषधि माना गया है।

    रोज सुबह खाली पेट मेथी का पानी पीने से नसों में जमा गंदे कोलेस्ट्रॉल कम होता है ब्लड फ्लो बेहतर होता है मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है वजन नियंत्रित रहता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह दिल पाचन और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए एक सरल लेकिन असरदार आयुर्वेदिक उपाय है।

  • भारतीय पारंपरिक औषधि अमृतधारा सिर दर्द घबराहट और अपच में दे राहत..

    भारतीय पारंपरिक औषधि अमृतधारा सिर दर्द घबराहट और अपच में दे राहत..

    नई दिल्ली में स्वास्थ्य और पारंपरिक उपचार के क्षेत्र में अमृतधारा एक ऐसा नाम है जिसे सदियों से भारतीय घरों में प्रयोग किया जाता रहा है। यह औषधि खासतौर पर सिर दर्द, माइग्रेन, अचानक घबराहट, मतली और अपच जैसी समस्याओं में लाभकारी मानी जाती है। हालांकि आधुनिक जीवनशैली में यह पारंपरिक औषधि धीरे-धीरे भूलती जा रही है।

    अमृतधारा बेहद कम पदार्थों से बनाई जाती है और इसका प्रभाव काफी शक्तिशाली होता है। इसे बनाने के लिए मुख्य रूप से तीन सत्वों का उपयोग किया जाता है -भीमसेनी कपूर, सत अजवाइन और सत पुदीना। ये तीक्ष्ण और सुगंधित द्रव्य मिलकर शरीर को ठंडक पहुँचाते हैं और सिर दर्द, माइग्रेन, बेचैनी, सर्दी-जुकाम और अपच में राहत देते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार जब सिर में दर्द या माइग्रेन होता है, तो शरीर कमजोर महसूस करने लगता है और कभी-कभी घबराहट के कारण बीपी गिरने लगता है। ऐसे में अमृतधारा का प्रयोग सभी उम्र के लोगों के लिए लाभकारी है। यह केवल बाहरी उपयोग ही नहीं, बल्कि थोड़ी मात्रा में सेवन करने पर पेट और अपच की समस्या में भी आराम देता है।

    अमृतधारा बनाने की विधि भी बहुत आसान है। एक कांच की शीशी में कपूर सत्व, अजवाइन सत्व और पुदीना सत्व को मिलाकर शीशी तुरंत बंद कर दें। हल्के हाथ से शीशी को हिलाएं ताकि तीनों तत्व आपस में अच्छी तरह मिल जाएं और औषधि का निर्माण हो। ध्यान रखें कि इसे कान, नाक और आंख में डालने से बचें।

    इस औषधि का स्वाद तीखा लेकिन सुगंधित होता है। इसे लंबे समय तक खुला न रखें क्योंकि यह द्रव वाष्पित हो जाता है। सिर दर्द होने पर इसे सीधे माथे पर लगाएं। दांत दर्द में रुई की सहायता से प्रभावित जगह पर लगाना लाभकारी होता है। पेट या अपच की समस्या होने पर थोड़ी मात्रा में सेवन करें। साथ ही यदि मुख से दुर्गंध आती है तो पानी में मिलाकर कुल्ला करने से आराम मिलता है।

    विशेष सावधानी यह है कि गर्भवती महिलाएं और बच्चे इसे सेवन करने से पहले चिकित्सक से सलाह लें। अगर अमृतधारा लगाने पर जलन महसूस हो, तो इसका उपयोग बंद कर दें। यह पारंपरिक औषधि न केवल शरीर को ठंडक देती है, बल्कि ताजगी और राहत का अनुभव भी कराती है।

    अमृतधारा के नियमित और सही उपयोग से सिर दर्द, माइग्रेन और घबराहट जैसी परेशानियों में राहत पाई जा सकती है और यह भारतीय घरेलू उपचार की एक बहुमूल्य धरोहर है जिसे नई पीढ़ी को भी जानना और अपनाना चाहिए।

  • औरत को तारीफ नहीं सम्मान चाहिए इंटरनेशनल वूमेन्स डे पर समाज के आईने में झांकती एक बात

    औरत को तारीफ नहीं सम्मान चाहिए इंटरनेशनल वूमेन्स डे पर समाज के आईने में झांकती एक बात


    नई दिल्ली:हर साल 8 मार्च को दुनिया भर में International Women’s Day मनाया जाता है। इस दिन महिलाओं के सम्मान अधिकार और उपलब्धियों की बात की जाती है। लेकिन सच यही है कि हर साल यह दिन हमें यह याद दिला देता है कि समाज अब भी औरत के असली वजूद को पूरी तरह समझ नहीं पाया है।

    हम अक्सर कहते हैं कि हमारी बेटियां बेटों से कम नहीं हैं लेकिन इस वाक्य के भीतर ही एक छिपा हुआ सच है कि कहीं न कहीं हम अभी भी बराबरी को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पाए हैं। जब हम कहते हैं कि औरत आजाद है तो इसका मतलब यह भी होता है कि उसकी आजादी अभी अधूरी है। जब हम कहते हैं कि बेटियों को भी पढ़ाना चाहिए उन्हें भी आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए तो यह भी इस बात का संकेत है कि इस दिशा में अभी बहुत काम बाकी है।

    आज की महिला जीवन के हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही है। राजनीति से लेकर विज्ञान खेल से लेकर सेना और कला से लेकर व्यापार तक महिलाएं हर जगह अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। लेकिन सवाल यह है कि उसे बार बार खुद को साबित करने की जरूरत क्यों पड़ती है। समाज अक्सर किसी महिला की सफलता को तब स्वीकार करता है जब वह उन सीमाओं को पार कर लेती है जिन्हें लंबे समय तक पुरुषों ने तय किया था। कई बार तो महिला की कामयाबी को इस तरह देखा जाता है जैसे उसने किसी पुरुष की भूमिका निभाकर यह उपलब्धि हासिल की हो।

    असल में हमें यह समझना होगा कि औरत केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे समाज का ताना बाना है। परिवार रिश्तों और भावनाओं को जोड़कर रखने वाली सबसे मजबूत कड़ी अक्सर वही होती है। बचपन से अपने सपनों को सहेजने वाली और फिर अपनों की खुशियों के लिए उन्हें पीछे छोड़ देने वाली भी अक्सर वही होती है। बेटी के रूप में वह रहमत है मां के रूप में जन्नत है बहन के रूप में इज्जत है और दोस्त के रूप में भरोसा है।

    लेकिन समाज का दूसरा चेहरा भी उतना ही कड़वा है। महिलाओं के साथ हिंसा और अपमान की घटनाएं समय समय पर सामने आती रहती हैं। देश में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्होंने पूरे समाज को झकझोर दिया। Manipur women parading case 2023 हो या Kanjhawala case 2023 Delhi जैसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर अभी भी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। इसी तरह Bilkis Bano का मामला भी बार बार यह सवाल उठाता है कि न्याय और संवेदनशीलता के मामले में समाज कहां खड़ा है।

    समस्या की जड़ कहीं और भी है। हम अक्सर महिलाओं का सम्मान उनके रिश्तों के आधार पर करते हैं। हमें लगता है कि हमें अपनी मां बहन बेटी या पत्नी की ही इज्जत करनी चाहिए। लेकिन असली सम्मान तब होगा जब सड़क पर चलने वाली या दफ्तर में काम करने वाली हर महिला को वही सम्मान मिले जो हम अपने घर की महिलाओं को देते हैं।

    हमारी संस्कृति और साहित्य में भी कई बार औरत की खूबसूरती को केवल उसके चेहरे उसकी आंखों या उसकी जुल्फों तक सीमित कर दिया गया है। शायरियों और कविताओं में उसकी आंखों की गहराई और उसके होंठों की नाजुकी का खूब जिक्र मिलता है। इसमें कोई शक नहीं कि महिला की सुंदरता बेमिसाल होती है लेकिन उसकी असली पहचान केवल उसके रूप में नहीं बल्कि उसके व्यक्तित्व उसकी सोच उसकी मेहनत और उसकी संवेदनशीलता में होती है।

    आज की महिला शायद केवल तारीफ नहीं चाहती बल्कि सम्मान चाहती है। उसे यह एहसास चाहिए कि समाज उसे बराबरी की नजर से देखता है। क्योंकि सच यही है कि किसी महिला को खूबसूरत कहना अच्छी बात हो सकती है लेकिन उसकी इज्जत करना उससे भी कहीं ज्यादा खूबसूरत है।

  • Women’s Day 2026: रात में कार ड्राइव करते समय महिलाएं अपनाएं ये 5 सेफ्टी टिप्स, सफर होगा सुरक्षित

    Women’s Day 2026: रात में कार ड्राइव करते समय महिलाएं अपनाएं ये 5 सेफ्टी टिप्स, सफर होगा सुरक्षित



    नई दिल्ली। गाड़ी चलाते समय हर व्यक्ति को ट्रैफिक नियमों और सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी होता है। लेकिन जब महिलाएं ड्राइव कर रही हों, खासकर रात के समय, तो उन्हें अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत होती है। कई महिलाएं देर रात ऑफिस से घर लौटती हैं या अन्य कामों के लिए यात्रा करती हैं, ऐसे में कुछ जरूरी सावधानियां उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती हैं। इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर जानते हैं कि महिलाओं को रात में कार चलाते समय किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।

    1. गाड़ी के सभी दरवाजे लॉक रखें

    ड्राइविंग शुरू करते ही कार के सभी दरवाजों को लॉक कर लेना चाहिए। सिर्फ ड्राइविंग सीट का दरवाजा लॉक करना पर्याप्त नहीं होता। रास्ते में किसी अनजान व्यक्ति को लिफ्ट देने से बचना भी सुरक्षित रहता है।

    2. सुनसान रास्तों से बचें

    रात के समय शॉर्टकट के चक्कर में सुनसान या कम आवाजाही वाले रास्तों से बचना बेहतर होता है। यदि नेविगेशन का उपयोग कर रहे हैं तो छोटे रास्तों की बजाय मुख्य सड़क या हाईवे का चयन करना अधिक सुरक्षित हो सकता है।

    3. कार की स्थिति पहले से जांच लें

    ड्राइव पर निकलने से पहले वाहन की स्थिति जरूर जांच लें। कार की समय पर सर्विसिंग हो, बैटरी सही हो, टायर में पर्याप्त हवा हो और हेडलाइट समेत सभी जरूरी सिस्टम ठीक से काम कर रहे हों।

    4. सेफ्टी टूल्स साथ रखें

    कार में कुछ जरूरी सुरक्षा उपकरण रखना फायदेमंद हो सकता है। जैसे पेपर स्प्रे, इलेक्ट्रिक शॉक रॉड या अन्य सेल्फ डिफेंस टूल्स, जो जरूरत पड़ने पर काम आ सकें।

    5. फोन और लोकेशन हमेशा एक्टिव रखें

    रात में यात्रा करते समय मोबाइल फोन पूरी तरह चार्ज होना चाहिए। अपनी लाइव लोकेशन परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति के साथ शेयर करना भी सुरक्षित कदम है। इसके अलावा मोबाइल के डायल पैड पर पुलिस या किसी करीबी का नंबर सबसे ऊपर सेव रखें ताकि आपात स्थिति में तुरंत कॉल किया जा सके।

    इन छोटी-छोटी सावधानियों को अपनाकर महिलाएं रात में भी ज्यादा सुरक्षित तरीके से ड्राइव कर सकती हैं।

  • Women’s Day Special: 30 की उम्र के बाद महिलाएं क्या खाएं, स्किन ग्लो और कोलेजन के लिए डाइट टिप्स

    Women’s Day Special: 30 की उम्र के बाद महिलाएं क्या खाएं, स्किन ग्लो और कोलेजन के लिए डाइट टिप्स


    नई दिल्ली।  हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। यह दिन केवल महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए नहीं बल्कि उनकी सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए भी बेहद खास माना जाता है। अक्सर महिलाएं घर और ऑफिस की जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को पीछे छोड़ देती हैं। लेकिन 30 की उम्र के बाद शरीर में कई ऐसे बदलाव शुरू हो जाते हैं जिन पर ध्यान देना बेहद जरूरी होता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार 30 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में कोलेजन का स्तर धीरे धीरे कम होने लगता है। कोलेजन एक महत्वपूर्ण प्रोटीन होता है जो त्वचा को मजबूत, लचीला और चमकदार बनाए रखने में मदद करता है। जब शरीर में इसकी कमी होने लगती है तो त्वचा पर झुर्रियां दिखाई देने लगती हैं, त्वचा ढीली पड़ सकती है और प्राकृतिक ग्लो भी कम हो सकता है।

    इसी वजह से 30 की उम्र के बाद महिलाओं के लिए सही और संतुलित डाइट लेना बेहद जरूरी हो जाता है। अगर खानपान में जरूरी पोषक तत्व शामिल किए जाएं तो न केवल कोलेजन का स्तर बेहतर बना रहता है बल्कि शरीर भी लंबे समय तक स्वस्थ रहता है।

    डाइट में सबसे पहले प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना जरूरी है। क्योंकि कोलेजन खुद एक प्रकार का प्रोटीन है और इसकी पर्याप्त मात्रा शरीर को मिलना बेहद आवश्यक है। इसके लिए महिलाएं अपनी डाइट में पनीर, दही, मूंग दाल, राजमा, चना, सोयाबीन, टोफू और विभिन्न प्रकार के ड्राई फ्रूट्स और नट्स शामिल कर सकती हैं। ये खाद्य पदार्थ शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ स्किन और मसल्स को भी मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

    इसके अलावा शरीर के लिए बायोटिन और जिंक भी बेहद जरूरी पोषक तत्व माने जाते हैं। इनकी कमी होने पर त्वचा पर दाग धब्बे दिखने लगते हैं, बाल कमजोर हो सकते हैं और नाखून भी टूटने लगते हैं। इसलिए डाइट में बादाम, कद्दू के बीज, तिल, मशरूम और अंडे की सफेदी जैसे खाद्य पदार्थों को शामिल करना फायदेमंद माना जाता है।

    ओमेगा 3 फैटी एसिड भी महिलाओं की सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह शरीर में सूजन को कम करने, हड्डियों को मजबूत रखने और जोड़ों के दर्द को कम करने में मदद करता है। ओमेगा 3 की पर्याप्त मात्रा पाने के लिए डाइट में अलसी के बीज, चिया सीड्स, अखरोट और सूरजमुखी के बीज जैसे खाद्य पदार्थों को शामिल किया जा सकता है।

    विटामिन C भी कोलेजन के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। अगर शरीर में विटामिन C की कमी हो जाए तो इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है और त्वचा भी जल्दी डैमेज होने लगती है। इसलिए महिलाओं को अपनी डाइट में आंवला, संतरा, नींबू, कीवी, स्ट्रॉबेरी और शिमला मिर्च जैसे विटामिन C से भरपूर फूड्स जरूर शामिल करने चाहिए।

    संतुलित आहार के साथ पर्याप्त पानी पीना, नियमित व्यायाम करना और अच्छी नींद लेना भी महिलाओं की सेहत के लिए उतना ही जरूरी है। सही डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर महिलाएं 30 की उम्र के बाद भी अपनी त्वचा को स्वस्थ और शरीर को ऊर्जावान बनाए रख सकती हैं।

    महिला दिवस का संदेश भी यही है कि महिलाएं अपने परिवार की देखभाल के साथ साथ अपनी सेहत को भी उतनी ही प्राथमिकता दें ताकि वे लंबे समय तक स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकें।

  • चावल खाने से नहीं बढ़ता पेट, एक्सपर्ट ने बताया सही तरीका, बस इन 5 आयुर्वेदिक नियमों का रखें ध्यान

    चावल खाने से नहीं बढ़ता पेट, एक्सपर्ट ने बताया सही तरीका, बस इन 5 आयुर्वेदिक नियमों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली। भारतीय भोजन में चावल का बहुत खास स्थान है। देश के अधिकांश घरों में लंच और डिनर में चावल जरूर बनाया जाता है। दाल चावल, राजमा चावल या अलग अलग तरह की करी के साथ चावल खाना लोगों को बेहद पसंद होता है। हालांकि कई लोग यह मानते हैं कि चावल खाने से पेट बाहर निकल आता है और वजन तेजी से बढ़ने लगता है। इसी डर की वजह से कई लोग अपनी डाइट से चावल को पूरी तरह हटाने का फैसला कर लेते हैं।

    लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि चावल खुद मोटापा नहीं बढ़ाता बल्कि इसे गलत तरीके से खाने या गलत किस्म के चावल चुनने से पाचन पर असर पड़ सकता है और शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा हो सकती है। इसलिए चावल खाने से पहले कुछ जरूरी आयुर्वेदिक नियमों को समझना जरूरी है।

    आयुर्वेद में चावल की उम्र को बहुत महत्व दिया गया है। आमतौर पर लोग बाजार से नया चावल खरीद कर इस्तेमाल करने लगते हैं। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार नया चावल भारी माना जाता है और इसे पचाने में शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। नया चावल कफ बढ़ा सकता है और पाचन को धीमा कर सकता है। जिन लोगों को अक्सर सुस्ती महसूस होती है या जिनका पाचन कमजोर है उन्हें नया चावल खाने से बचना चाहिए।

    इसके विपरीत एक साल पुराना चावल हल्का और सुपाच्य माना जाता है। पुराने चावल की तासीर ऐसी हो जाती है कि वह पेट पर ज्यादा बोझ नहीं डालता और शरीर को जल्दी ऊर्जा देता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि संभव हो तो एक साल पुराना चावल ही इस्तेमाल करना चाहिए।

    चावल बनाने का तरीका भी सेहत पर असर डाल सकता है। आजकल ज्यादातर लोग कुकर में चावल बनाना पसंद करते हैं क्योंकि इससे समय की बचत होती है। लेकिन आयुर्वेद में कुकर में बने चावल को उतना अच्छा नहीं माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार चावल को खुले बर्तन में ज्यादा पानी के साथ पकाना चाहिए और पकने के बाद उसका माड़ यानी अतिरिक्त पानी निकाल देना चाहिए। इससे चावल हल्का और पचने में आसान हो जाता है।

    इसके अलावा आयुर्वेद में शरीर की प्रकृति के अनुसार भी खानपान को महत्व दिया गया है। हर व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है और उसी के अनुसार चावल खाने का तरीका भी अलग हो सकता है।

    जिन लोगों की वात प्रकृति होती है उन्हें अक्सर जोड़ों में दर्द, गैस या त्वचा में रूखापन जैसी समस्याएं रहती हैं। ऐसे लोगों को चावल खाते समय उसमें थोड़ा सा घी मिलाकर खाना चाहिए। इससे पाचन बेहतर होता है और शरीर को संतुलन मिलता है।

    पित्त प्रकृति वाले लोगों को अक्सर एसिडिटी, सीने में जलन या ज्यादा गर्मी महसूस होती है। ऐसे लोगों के लिए दूध के साथ चावल या चावल की खीर खाना फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह शरीर की गर्मी को संतुलित करने में मदद करता है।

    वहीं कफ प्रकृति वाले लोगों का वजन जल्दी बढ़ने की संभावना ज्यादा होती है और उन्हें सर्दी खांसी की समस्या भी हो सकती है। ऐसे लोगों को हमेशा पुराना चावल खाना चाहिए और चावल का माड़ निकाल कर ही सेवन करना चाहिए।

    इस तरह सही प्रकार का चावल चुनकर और सही तरीके से पकाकर खाने से न केवल पाचन बेहतर रहता है बल्कि वजन बढ़ने का खतरा भी कम हो सकता है। इसलिए चावल को पूरी तरह छोड़ने के बजाय उसे सही नियमों के साथ खाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।

  • DIY होम डेकोर ट्रिक: 20 लीटर की पुरानी पानी की केन से बनाएं मिनी पॉन्ड, फ्री में मिलेगा गार्डन जैसा लुक

    DIY होम डेकोर ट्रिक: 20 लीटर की पुरानी पानी की केन से बनाएं मिनी पॉन्ड, फ्री में मिलेगा गार्डन जैसा लुक

    नई दिल्ली।आजकल लोग अपने घर और गार्डन को सजाने के लिए महंगे डेकोरेशन आइटम खरीदते हैं लेकिन कई बार घर में मौजूद बेकार सामान से भी बेहद खूबसूरत सजावट की जा सकती है। अगर आप भी घर को नेचुरल और यूनिक लुक देना चाहते हैं तो एक साधारण 20 लीटर की पानी की केन से शानदार मिनी पॉन्ड बनाया जा सकता है। यह एक आसान और क्रिएटिव DIY आइडिया है जो कम मेहनत में आपके घर की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा सकता है।

    सोशल मीडिया पर इन दिनों ऐसे कई DIY आइडिया वायरल हो रहे हैं जिनमें बेकार सामान को इस्तेमाल कर नई चीजें बनाई जा रही हैं। इसी तरह एक वीडियो में दिखाया गया है कि किस तरह साधारण वाटर केन को एक खूबसूरत प्लांटेड मिनी पॉन्ड में बदला जा सकता है। अगर आप गार्डनिंग के शौकीन हैं तो यह आइडिया आपके लिए बेहद काम का साबित हो सकता है।

    मिनी पॉन्ड बनाने के लिए सबसे पहले एक खाली 20 लीटर की पानी की केन लें और उसे अच्छी तरह साफ कर लें। केन जितनी साफ होगी अंदर का दृश्य उतना ही साफ और आकर्षक दिखाई देगा। इसके बाद केन के निचले हिस्से को सावधानी से काट लें ताकि वह खुला टैंक जैसा दिखने लगे।

    इसके बाद केन के ढक्कन में एक छोटा सा छेद करें और उसमें एक प्लास्टिक की टोटी फिट कर दें। यह टोटी बाद में पानी निकालने और सफाई करने के काम आएगी। जब टोटी फिट हो जाए तो ढक्कन को केन में अच्छी तरह बंद कर दें।

    मिनी पॉन्ड बनाते समय सबसे बड़ी समस्या पानी के रिसाव की हो सकती है। इसलिए ढक्कन को बंद करने से पहले उस पर टेफ्लॉन टेप अच्छी तरह लपेट दें ताकि पानी बाहर न निकले। इसके अलावा सुरक्षा के लिए ढक्कन और टोटी वाली जगह को एम सील से भी सील कर सकते हैं। इससे पानी का रिसाव पूरी तरह रुक जाता है।

    इसके बाद केन को उल्टा करके सेट करें और उसमें पानी भर दें। अब इसमें छोटे-छोटे जलीय पौधे लगाए जा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर रोटाला रोटुंडिफोलिया ग्रीन नाम का पौधा छोटे प्लास्टिक कंटेनर में एक्वेरियम सॉइल के साथ लगाया जा सकता है। इसके अलावा एनुबियास जैसे पौधे भी इसमें लगाए जा सकते हैं। एनुबियास की खासियत यह है कि इसे मिट्टी की जरूरत नहीं होती और यह पत्थर या लकड़ी के सहारे भी आसानी से बढ़ जाता है।

    अगर आप चाहें तो इस मिनी पॉन्ड में छोटी मछलियां और झींगे भी रख सकते हैं। लेकिन चूंकि इसमें कोई फिल्टर नहीं लगाया जाता इसलिए बहुत ज्यादा जीव नहीं रखने चाहिए। इसमें एम्बर टेट्रा जैसी छोटी मछलियां और कुछ झींगे रखना बेहतर माना जाता है ताकि पानी ज्यादा गंदा न हो और बायोलोड कम बना रहे।

    पौधों को सही तरीके से बढ़ने के लिए रोशनी भी जरूरी होती है। इसके लिए एक साधारण एक्वेरियम एलईडी लाइट का इस्तेमाल किया जा सकता है जिसे रोजाना लगभग सात घंटे तक जलाया जा सकता है। इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और मिनी पॉन्ड देखने में भी बेहद खूबसूरत लगता है।

    पानी की सफाई के लिए केन में लगी टोटी काफी मददगार होती है। जब भी पानी बदलना हो तो नीचे लगे टैप को खोलकर आसानी से पानी निकाला जा सकता है और नया पानी डाला जा सकता है।

    इस तरह घर में पड़ी एक साधारण और बेकार पानी की केन को इस्तेमाल कर आप बेहद खूबसूरत मिनी पॉन्ड बना सकते हैं। यह न केवल घर की सजावट को खास बनाता है बल्कि गार्डनिंग के शौकीनों के लिए भी एक शानदार और किफायती आइडिया साबित होता है।

  • Women’s Day Special: पैरों की थकान से राहत दिलाएगा टोगा योगा, 5 मिनट की ये एक्सरसाइज देगी शरीर और दिमाग को एनर्जी

    Women’s Day Special: पैरों की थकान से राहत दिलाएगा टोगा योगा, 5 मिनट की ये एक्सरसाइज देगी शरीर और दिमाग को एनर्जी


    नई दिल्ली। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में महिलाएं एक साथ कई जिम्मेदारियां निभाती हैं। घर संभालना, ऑफिस का काम करना और परिवार की देखभाल करना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। ऐसे में अक्सर महिलाएं अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। दिनभर खड़े रहना, ज्यादा चलना या लंबे समय तक बैठकर काम करना पैरों में दर्द, सूजन और थकान का कारण बन सकता है।

    इन्हीं समस्याओं से राहत दिलाने के लिए एक बेहद आसान और असरदार एक्सरसाइज है टोगा योगा। यह एक सरल फुट एक्सरसाइज है जो पैरों की उंगलियों और तलवों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करती है। टोगा शब्द Toe यानी पैर की उंगलियों और Yoga यानी योग से मिलकर बना है। इसे करने के लिए किसी विशेष उपकरण या ज्यादा समय की जरूरत नहीं होती। दिन में सिर्फ पांच मिनट इस एक्सरसाइज को करने से शरीर और दिमाग दोनों को नई ऊर्जा मिल सकती है।

    टोगा योगा में पैरों की उंगलियों को अलग अलग तरीके से हिलाया और स्ट्रेच किया जाता है। देखने में यह एक्सरसाइज बहुत आसान लगती है लेकिन इसके फायदे काफी प्रभावी होते हैं। हमारे पैरों में कई छोटी छोटी मांसपेशियां होती हैं जो शरीर के संतुलन, चलने फिरने और खड़े रहने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। टोगा योगा इन मांसपेशियों को सक्रिय और मजबूत बनाने में मदद करता है।

    इस एक्सरसाइज का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। जब पैरों की मसल्स मजबूत होती हैं तो लंबे समय तक खड़े रहने या चलने के दौरान थकान कम महसूस होती है। खासतौर पर उन महिलाओं के लिए यह एक्सरसाइज काफी फायदेमंद हो सकती है जिन्हें काम के दौरान लंबे समय तक खड़ा रहना पड़ता है।

    टोगा योगा करने से पैरों में ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है। जब पैरों की उंगलियों को हिलाया और स्ट्रेच किया जाता है तो रक्त प्रवाह में सुधार होता है जिससे सूजन और भारीपन की समस्या कम हो सकती है। बेहतर ब्लड सर्कुलेशन पूरे शरीर में ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करता है।

    यह एक्सरसाइज मानसिक तनाव और थकान को कम करने में भी सहायक मानी जाती है। जब हम ध्यानपूर्वक पैरों की मांसपेशियों को स्ट्रेच करते हैं तो शरीर में रिलैक्सेशन का एहसास होता है। इससे दिनभर की थकान कम होती है और मन भी शांत महसूस करता है।

    टोगा योगा करने के लिए कुछ आसान एक्सरसाइज अपनाई जा सकती हैं। इसमें टो स्प्रेड एक्सरसाइज के तहत पैरों की सभी उंगलियों को फैलाकर कुछ सेकंड तक उसी स्थिति में रखा जाता है। बिग टो लिफ्ट में पैर की बाकी उंगलियों को जमीन पर रखते हुए केवल अंगूठे को ऊपर उठाने की कोशिश की जाती है। टो कर्ल एक्सरसाइज में पैरों की उंगलियों को अंदर की ओर मोड़कर फिर सीधा किया जाता है। टो टैपिंग में उंगलियों को धीरे धीरे जमीन पर टैप किया जाता है। वहीं तौलिया ग्रिप एक्सरसाइज में जमीन पर रखे छोटे तौलिये को पैरों की उंगलियों से पकड़कर अपनी ओर खींचा जाता है।

    महिलाएं अक्सर अपने परिवार और काम की जिम्मेदारियों के बीच खुद को समय नहीं दे पातीं। लेकिन दिन में सिर्फ कुछ मिनट का यह छोटा सा प्रयास सेहत के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है। टोगा योगा एक ऐसी आसान और प्रभावी एक्सरसाइज है जिसे रोजाना अपनाकर पैरों की मजबूती, बेहतर ब्लड सर्कुलेशन और मानसिक राहत हासिल की जा सकती है।

  • Women’s Day Special: साइलेंट बोन लॉस से बचना है तो अपनाएं ये 6 हेल्थ टिप्स, 30 के बाद महिलाओं के लिए बेहद जरूरी

    Women’s Day Special: साइलेंट बोन लॉस से बचना है तो अपनाएं ये 6 हेल्थ टिप्स, 30 के बाद महिलाओं के लिए बेहद जरूरी


    नई दिल्ली। हर साल 8 मार्च को दुनिया भर में विमेंस डे मनाया जाता है। यह दिन केवल महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए ही नहीं बल्कि उनकी सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए भी खास माना जाता है। अक्सर महिलाएं परिवार और काम की जिम्मेदारियों में इतनी व्यस्त हो जाती हैं कि अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। खासतौर पर 30 की उम्र के बाद शरीर में कई ऐसे बदलाव शुरू हो जाते हैं जिनका असर हड्डियों की मजबूती पर भी पड़ता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कई महिलाओं में 30 साल की उम्र के बाद बोन डेंसिटी धीरे धीरे कम होने लगती है। हड्डियों के कमजोर होने की इस प्रक्रिया को मेडिकल भाषा में ऑस्टियोपोरोसिस या साइलेंट बोन लॉस कहा जाता है। इसे साइलेंट बीमारी इसलिए कहा जाता है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण साफ दिखाई नहीं देते। जब तक इसका पता चलता है तब तक कई बार हड्डियां काफी कमजोर हो चुकी होती हैं और मामूली चोट में भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक महिलाओं में हड्डियों के कमजोर होने का सबसे बड़ा कारण शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का कम होना है। यह हार्मोन हड्डियों को मजबूत रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जैसे जैसे उम्र बढ़ती है और खासकर मेनोपॉज के दौरान इसका स्तर तेजी से घटने लगता है। इसके अलावा कैल्शियम और विटामिन D की कमी भी हड्डियों को कमजोर बना सकती है।

    आज की लाइफस्टाइल भी इस समस्या को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। लंबे समय तक बैठकर काम करना, एक्सरसाइज न करना और शारीरिक गतिविधियों की कमी हड्डियों को कमजोर कर सकती है। वहीं धूम्रपान और अधिक शराब का सेवन भी शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को प्रभावित करता है जिससे हड्डियों की ताकत धीरे धीरे कम होने लगती है।

    कुछ मामलों में पारिवारिक इतिहास भी इस समस्या का कारण बन सकता है। अगर परिवार में किसी को पहले से ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या रही है तो महिलाओं में इसका खतरा ज्यादा हो सकता है। इसके अलावा बहुत कम वजन वाली महिलाओं में भी हड्डियों के कमजोर होने की संभावना अधिक रहती है।

    साइलेंट बोन लॉस का खतरा इसलिए भी ज्यादा माना जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण आसानी से समझ नहीं आते। कई बार हल्की चोट में भी हड्डी टूट जाना, कमर या पीठ में लगातार दर्द रहना, शरीर का झुकना या उम्र के साथ लंबाई का धीरे धीरे कम होना इसके संकेत हो सकते हैं। इसलिए विशेषज्ञ समय समय पर बोन डेंसिटी टेस्ट कराने की सलाह देते हैं ताकि हड्डियों की स्थिति का सही पता चल सके।

    हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए सही खानपान और स्वस्थ जीवनशैली बेहद जरूरी है। कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर आहार जैसे दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, बादाम, अखरोट और मछली का सेवन हड्डियों के लिए फायदेमंद माना जाता है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह से सप्लीमेंट भी लिए जा सकते हैं।

    इसके अलावा नियमित व्यायाम भी हड्डियों की मजबूती के लिए बहुत जरूरी है। रोजाना वॉकिंग, योग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और हल्की एक्सरसाइज करने से हड्डियां मजबूत रहती हैं और शरीर भी एक्टिव बना रहता है।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि कैफीन और शराब का अधिक सेवन करने से बचना चाहिए और धूम्रपान से दूरी बनाकर रखना चाहिए। साथ ही मानसिक तनाव को कम करने के लिए योग और मेडिटेशन जैसी आदतें अपनाना भी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है।

    महिलाओं के लिए जरूरी है कि वे अपनी सेहत को प्राथमिकता दें और समय समय पर हेल्थ चेकअप कराएं। सही डाइट, एक्टिव लाइफस्टाइल और नियमित जांच की मदद से हड्डियों को लंबे समय तक मजबूत और स्वस्थ रखा जा सकता है।

  • घर में एक्सपायर्ड दवाओं का स्मार्ट इस्तेमाल: बर्तन साफ करें, ब्लेड तेज करें और कीड़े भगाएं

    घर में एक्सपायर्ड दवाओं का स्मार्ट इस्तेमाल: बर्तन साफ करें, ब्लेड तेज करें और कीड़े भगाएं


    नई दिल्ली । आजकल हर घर में मेडिकल स्टॉक रहता है लेकिन एक्सपायर्ड दवाओं को ज्यादातर लोग सीधे डस्टबिन में फेंक देते हैं। दरअसल इनके रेपर यानी गोलियों और कैप्सूल की एल्युमिनियम फॉयल का इस्तेमाल घरेलू कामों में बेहद कारगर साबित हो सकता है।

    सबसे पहले रेपर से दवाओं को निकालकर अलग रख लें। यह कड़ाही तवा और अन्य बर्तनों की सफाई में काम आता है। हल्का रगड़ने पर बर्तन फिर से चमकने लगते हैं। इसके अलावा कैंची या मिक्सर ब्लेड की धार कम होने पर भी इन्हीं रेपर से इसे तेज किया जा सकता है। कैंची से रेपर को कई बार काटने पर धार बढ़ती है जबकि मिक्सर ब्लेड के लिए रेपर को छोटे टुकड़ों में काटकर पीस दें।

    एक्सपायर्ड दवाओं का इस्तेमाल कीड़े और बदबू दूर करने में भी होता है। इसके लिए रेपर को गर्म पानी में घोलें और हल्का मीठा सोडा मिलाकर सिंक में डाल दें। इससे कीड़े ब्लॉकेज और बदबू दूर होती है। यह मिश्रण पौधों में लगने वाले फंगस से छुटकारा पाने में भी मदद करता है।

    इस तरह घर में पड़े एक्सपायर्ड दवाओं को केवल फेंकने की बजाय उनका स्मार्ट इस्तेमाल करके आप पैसों की बचत भी कर सकते हैं और रसोई-सफाई ब्लेड तेज करना और कीट नियंत्रण जैसे कई काम कर सकते हैं। यह तरीका सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल भी माना जाता है।