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  • Night Skincare Alert: सोने से पहले चेहरे पर ये चीजें न लगाएं, ज्यादातर लोग कर रहे हैं बड़ी गलती

    Night Skincare Alert: सोने से पहले चेहरे पर ये चीजें न लगाएं, ज्यादातर लोग कर रहे हैं बड़ी गलती


    नई दिल्ली। रात का समय त्वचा के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। सोते समय आपकी त्वचा खुद को रिपेयर और रिन्यू करती है। लेकिन कई लोग अनजाने में सोने से पहले ऐसे प्रोडक्ट्स या घरेलू नुस्खे चेहरे पर लगा लेते हैं, जो त्वचा के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इससे मुहांसे, एलर्जी, ऑयली स्किन और स्किन डैमेज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। आइए जानते हैं, रात में कौन-सी चीजें चेहरे पर नहीं लगानी चाहिए।

    भारी और ऑयली क्रीम
    रात में अधिक मॉइश्चराइजर लगाने की गलती अक्सर की जाती है। लेकिन बहुत ज्यादा भारी या ऑयली क्रीम लगाने से पोर्स बंद हो सकते हैं। इसके कारण पिंपल्स, ब्लैकहेड्स और ऑयली स्किन की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए रात में हमेशा हल्का और स्किन टाइप के अनुसार मॉइश्चराइजर लगाना बेहतर होता है।

    नींबू
    नींबू को स्किन ब्राइटनिंग के लिए इस्तेमाल करना आम है, लेकिन इसे रात में सीधे चेहरे पर लगाना नुकसानदेह हो सकता है। नींबू में एसिडिक तत्व होते हैं, जिससे त्वचा में जलन, रेडनेस और एलर्जी हो सकती है। खासकर संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को इससे बचना चाहिए।

    मेकअप हटाए बिना सोना
    यह सबसे बड़ी और आम गलती है। मेकअप हटाए बिना सोने से पोर्स बंद हो जाते हैं, पिंपल्स बढ़ सकते हैं और त्वचा बेजान दिख सकती है। सोने से पहले हमेशा क्लींजर या मेकअप रिमूवर से चेहरा साफ करना जरूरी है।

    टूथपेस्ट का इस्तेमाल
    कुछ लोग पिंपल्स को जल्दी सुखाने के लिए टूथपेस्ट लगाते हैं। यह स्किन के लिए हानिकारक हो सकता है क्योंकि इससे त्वचा सूख सकती है, जलन और रेडनेस बढ़ सकती है। पिंपल्स के लिए हमेशा डर्मेटोलॉजिस्ट द्वारा सुझाए गए प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें।

    ज्यादा स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल
    रात में कई प्रोडक्ट्स जैसे सीरम, क्रीम, ऑयल और फेस पैक एक साथ लगाने से स्किन के लिए ओवरलोड हो सकता है। इससे स्किन बैरियर कमजोर हो सकता है। इसलिए कम लेकिन सही प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना हमेशा बेहतर होता है।

    सही नाइट स्किनकेयर रूटीन
    रात में त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रखने के लिए सरल और हल्का रूटीन अपनाएं:

    हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ करें।

    मेकअप पूरी तरह हटाएं।

    जरूरत हो तो हल्का सीरम लगाएं।

    स्किन टाइप के अनुसार मॉइश्चराइजर लगाएं।

    यह रूटीन त्वचा को रातभर हाइड्रेट और रिपेयर रखने में मदद करता है, जिससे सुबह त्वचा फ्रेश, चमकदार और हेल्दी दिखती है।

  • काशी में बुढ़वा मंगल की महफिल सजी, होली के रंग के बाद विदेशी और देशी सैलानी हुए मंत्रमुग्ध

    काशी में बुढ़वा मंगल की महफिल सजी, होली के रंग के बाद विदेशी और देशी सैलानी हुए मंत्रमुग्ध


    नई दिल्ली। बुढ़वा मंगल’ होली के ठीक बाद पड़ने वाले पहले मंगलवार को मनाया जाता है। यह केवल होली का समापन नहीं, बल्कि प्रेम, सौहार्द, संगीत और बुजुर्गों के सम्मान का जश्न है। स्थानीय लोग इस दिन नए कपड़े पहनकर घाटों पर पहुंचते हैं, कुल्हड़ में ठंडई और बनारसी मिठाइयों का स्वाद लेते हैं और बुजुर्गों को फूलों और अबीर से सम्मानित करते हैं।

    प्रभुनाथ त्रिपाठी, काशी निवासी, बताते हैं, “मंगलवार को ‘बुढ़वा मंगल’ के साथ होली की खुमारी का समापन होता है। यह सालों पुरानी रीत है, जिसमें खान-पान, गुलाल और संगीत का भी आनंद लिया जाता है।”

    गंगा घाटों पर संगीत और भक्ति
    इस महफिल का मुख्य आकर्षण गंगा घाट होते हैं। दशाश्वमेध घाट से अस्सी घाट तक बजड़े (नावों) सजाए जाते हैं और लोकगायक तथा कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देते हैं। फूलों, गद्दों, मसनद और इत्र की खुशबू से महकते घाट शाम को संगीत की महफिल में बदल जाते हैं।

    बनारस घराने की होरी, चैती, ठुमरी, बिरहा और कजरी की मधुर धुनें गूंजती हैं। कभी उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई, गिरिजा देवी की चैती, पंडित किशन महाराज का तबला और सितार की झंकार रातभर लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती थी। आज भी लोकगायक मां गंगा और हनुमान जी के चरणों में अपनी कला अर्पित करते हैं।

    घाटों की रंगीन छटा
    बुढ़वा मंगल के दिन दशाश्वमेध से अस्सी घाट तक संगीत, रंग और उत्सव का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है। लोकगायक और कलाकार गंगा में खड़े बजड़े पर प्रस्तुति देते हैं। बनारसी घराने की धुनें शाम को सुरम्य और सुरीली बना देती हैं।

    यह महफिल काशी के अक्खड़पन, फक्कड़पन और आध्यात्मिकता का संगम प्रस्तुत करती है। सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, बल्कि यह एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अनुभव भी है।

    देश-विदेश से सैलानी
    इस दिन काशी में देश-विदेश से सैलानी भी पहुंचते हैं। वे गंगा तट पर बिखरे रंग, संगीत और बनारसी जोश का आनंद लेते हैं। घरों में स्वादिष्ट पकवान बनते हैं, मित्र और रिश्तेदार अंतिम होली मिलन करते हैं, और परिवार के बुजुर्गों का सम्मान किया जाता है।

    ‘बुढ़वा मंगल’ केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि काशी की संस्कृति, संगीत, रंग और बुजुर्गों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। यह महफिल गंगा घाटों को रंगीन और जीवन से भर देती है, जो हर साल देश-विदेश से आए लोगों के लिए यादगार अनुभव बन जाती है।
  • कैलोरी बर्न से मसल्स गेन तक, फिट रहने के लिए कंपाउंड मूवमेंट्स क्यों हैं जरूरी

    कैलोरी बर्न से मसल्स गेन तक, फिट रहने के लिए कंपाउंड मूवमेंट्स क्यों हैं जरूरी


    नई दिल्ली। फिट रहने और मसल्स बनाने के लिए कंपाउंड मूवमेंट्स को अपनी एक्सरसाइज रूटीन में शामिल करना बेहद फायदेमंद है। ये व्यायाम सिर्फ मांसपेशियों को मजबूत नहीं बनाते, बल्कि कैलोरी बर्न, मेटाबॉलिज्म, हार्मोन और कार्डियो फिटनेस पर भी सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

    कंपाउंड मूवमेंट्स क्या हैं?
    कंपाउंड मूवमेंट्स ऐसे व्यायाम हैं जिनमें एक साथ कई मांसपेशियां और जोड़ सक्रिय होते हैं। उदाहरण के लिए:स्क्वैट्स और डेडलिफ्ट: पैरों के साथ-साथ पीठ और कोर मसल्स को भी मजबूत बनाते हैं। बेंच प्रेस, पुल-अप, ओवरहेड प्रेस, लंज: कई मसल ग्रुप को काम में लेते हैं। इन अभ्यासों से शरीर एक समन्वित इकाई की तरह काम करता है, जिससे ताकत और सहनशीलता बढ़ती है।

    मसल्स और ताकत में तेजी
    कंपाउंड एक्सरसाइज में अक्सर अधिक वजन उठाना पड़ता है, जिससे मांसपेशियों की ताकत और आकार तेजी से बढ़ते हैं। भारी लिफ्ट्स जैसे स्क्वैट और डेडलिफ्ट टेस्टोस्टेरोन और ग्रोथ हार्मोन के स्तर को अस्थायी रूप से बढ़ाते हैं। इससे मसल ग्रोथ और रिकवरी दोनों में मदद मिलती है।

    कैलोरी बर्न और वजन नियंत्रण
    कंपाउंड मूवमेंट्स में अधिक मसल्स सक्रिय होने के कारण कैलोरी बर्न ज्यादा होती है। मेटाबॉलिज्म बढ़ता है। वजन को नियंत्रित रखना आसान होता है। हार्ट और कार्डियो फिटनेस में सुधार होता है। वहीं, आइसोलेशन एक्सरसाइज केवल एक मसल और जोड़ पर फोकस करती हैं, इसलिए इनसे कैलोरी बर्न और स्ट्रेंथ बढ़ाने की दर कम होती है।

    इंटरमस्कुलर कोऑर्डिनेशन और रियल-लाइफ एक्टिविटी
    कंपाउंड मूवमेंट्स शरीर के जोड़ों और मांसपेशियों की स्थिरता बढ़ाते हैं। उठाना, धक्का देना, खींचना जैसी रोजमर्रा की एक्टिविटी के लिए शरीर तैयार होता है। इंटरमस्कुलर कोऑर्डिनेशन बेहतर होता है।

    शुरुआती लोगों के लिए टिप्स
    शुरुआती लोग बॉडीवेट स्क्वाट, पुश-अप, लंज, असिस्टेड पुल-अप जैसी कंपाउंड एक्सरसाइज से शुरुआत कर सकते हैं।

    सही फॉर्म से व्यायाम करें।

    धीरे-धीरे वजन बढ़ाएं।

    इन्हें नियमित रूटीन में शामिल करें।

  • गर्मी से बचने के देसी नुस्खे: शरीर को ठंडा रखती हैं ये 5 पारंपरिक चीजें, लू और डिहाइड्रेशन से मिलेगा बचाव

    गर्मी से बचने के देसी नुस्खे: शरीर को ठंडा रखती हैं ये 5 पारंपरिक चीजें, लू और डिहाइड्रेशन से मिलेगा बचाव


    नई दिल्‍ली । जैसे जैसे गर्मी का मौसम बढ़ता है, वैसे वैसे शरीर पर इसका असर भी साफ दिखाई देने लगता है। तेज धूप, गर्म हवाएं और बढ़ता तापमान लोगों को जल्दी थका देता है और लू, डिहाइड्रेशन तथा पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है। आज के समय में लोग गर्मी से राहत पाने के लिए फ्रिज के ठंडे पानी और एसी का सहारा लेते हैं, लेकिन आयुर्वेद और ग्रामीण जीवन में ऐसे कई पारंपरिक उपाय मौजूद हैं जो बिना किसी आधुनिक सुविधा के भी शरीर को ठंडा और स्वस्थ बनाए रखते हैं।

    सबसे पहले बात करते हैं मिट्टी के घड़े मटका के पानी की। शहरों में भले ही आरओ और फ्रिज का इस्तेमाल बढ़ गया हो, लेकिन मिट्टी के घड़े का पानी आज भी सबसे प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है। घड़े की मिट्टी में मौजूद छोटे छोटे छिद्र वाष्पीकरण की प्रक्रिया के जरिए पानी को स्वाभाविक रूप से ठंडा रखते हैं। यह पानी शरीर को धीरे धीरे ठंडक देता है और पाचन तंत्र के लिए भी बेहतर माना जाता है। इसके विपरीत फ्रिज का अत्यधिक ठंडा पानी गले और पेट के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

    गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए बेल का शरबत भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। ग्रामीण इलाकों में इसे गर्मी का सबसे प्रभावी पेय माना जाता है। बेल में फाइबर और विटामिन सी की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाती है और पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाती है। एक गिलास बेल का शरबत न केवल लू के प्रभाव को कम करता है बल्कि पूरे दिन शरीर को तरोताजा बनाए रखता है।

    इसके अलावा गांवों में खस और जूट के परदे भी प्राकृतिक कूलिंग का एक बेहतरीन तरीका माने जाते हैं। पुराने समय से ही लोग खस या जूट के बोरों को पानी से गीला करके खिड़कियों पर लगाते हैं। जब गर्म हवा इन गीले परदों से होकर गुजरती है तो कमरे का तापमान 5 से 10 डिग्री तक कम हो जाता है। खस की हल्की खुशबू वातावरण को ताजगी से भर देती है और मन को भी शांति देती है।

    गर्मियों में शरीर को ऊर्जा देने और ठंडा रखने के लिए सत्तू भी बेहद लोकप्रिय है। चना और जौ से बना सत्तू पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसे पानी में घोलकर पीने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है और शरीर का तापमान भी नियंत्रित रहता है। यही वजह है कि गांवों में किसान चिलचिलाती धूप में काम करने से पहले सत्तू का सेवन करना पसंद करते हैं।

    वहीं प्याज का देसी नुस्खा भी गर्मी से बचाव के लिए लंबे समय से अपनाया जाता रहा है। ग्रामीण इलाकों में मान्यता है कि जेब में प्याज रखकर बाहर निकलने से लू नहीं लगती। प्याज में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करते हैं। कच्चे प्याज का सलाद या छाछ के साथ इसका सेवन करने से भी शरीर की गर्मी कम होती है।

    कुल मिलाकर देखा जाए तो हमारे पारंपरिक और देसी उपाय न केवल सस्ते और आसान हैं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी हैं। यदि गर्मियों में इन प्राकृतिक तरीकों को अपनाया जाए तो शरीर को ठंडा रखने के साथ साथ कई मौसमी बीमारियों से भी बचा जा सकता है।

  • मिनटों में तैयार करें हेल्दी ब्रेकफास्ट: बिना गैस जलाए बनाएं ये 5 टेस्टी रेसिपी, दिनभर रहेंगे एनर्जेटिक

    मिनटों में तैयार करें हेल्दी ब्रेकफास्ट: बिना गैस जलाए बनाएं ये 5 टेस्टी रेसिपी, दिनभर रहेंगे एनर्जेटिक


    नई दिल्‍ली । आज की तेज रफ्तार जिंदगी में सुबह का समय सबसे ज्यादा व्यस्त होता है। ऑफिस कॉलेज या अन्य कामों की जल्दी में कई लोग नाश्ता करने का समय ही नहीं निकाल पाते और अक्सर ब्रेकफास्ट स्किप कर देते हैं। इससे न केवल शरीर की ऊर्जा कम होती है बल्कि लंबे समय में स्वास्थ्य पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ता है। हालांकि अगर थोड़ी सी प्लानिंग की जाए तो बिना गैस जलाए भी कुछ ऐसे हेल्दी और टेस्टी नाश्ते तैयार किए जा सकते हैं जो कुछ ही मिनटों में बन जाते हैं और पूरे दिन शरीर को ऊर्जा देते हैं।

    सबसे आसान और लोकप्रिय विकल्प ओवरनाइट ओट्स है। अगर सुबह आपके पास बिल्कुल समय नहीं होता तो यह रेसिपी आपके लिए बिल्कुल परफेक्ट है। रात में एक जार में दूध या दही के साथ ओट्स चिया सीड्स थोड़ा शहद और अपनी पसंद के फल जैसे केला या सेब डालकर फ्रिज में रख दें। सुबह तक ओट्स अच्छी तरह फूलकर तैयार हो जाते हैं। यह फाइबर और पोषक तत्वों से भरपूर होता है जिससे लंबे समय तक पेट भरा रहता है और शरीर को भरपूर ऊर्जा मिलती है।

    दूसरा हेल्दी विकल्प स्प्राउट्स सलाद है जो खासतौर पर फिटनेस पसंद करने वालों के बीच काफी लोकप्रिय है। अंकुरित मूंग चना और मोठ में प्रोटीन और आयरन की अच्छी मात्रा होती है। इसमें बारीक कटा प्याज टमाटर खीरा और हरी मिर्च मिलाकर ऊपर से नींबू का रस और काला नमक डाल दें। यह स्वाद में भी बेहतरीन होता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है। नियमित रूप से इसका सेवन करने से शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया से बचाव में भी सहायता मिल सकती है।

    तीसरा विकल्प है दही पोहा जो भारत के कई हिस्सों में पारंपरिक नाश्ते के रूप में खाया जाता है। इसके लिए पोहा को हल्के पानी से धोकर उसमें ताजा दही थोड़ा गुड़ या शहद और कटे हुए मेवे मिला लें। यह नाश्ता पेट को ठंडक देता है और तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है। खासकर गर्मियों के मौसम में यह बेहद फायदेमंद माना जाता है।

    अगर आपको हल्का मीठा नाश्ता पसंद है तो पीनट बटर बनाना टोस्ट भी बेहतरीन विकल्प है। होल-व्हीट या मल्टीग्रेन ब्रेड पर पीनट बटर की परत लगाकर उसके ऊपर केले के स्लाइस या स्ट्रॉबेरी रख दें। पीनट बटर में मौजूद गुड फैट्स और प्रोटीन मांसपेशियों की रिकवरी में मदद करते हैं और लंबे समय तक शरीर को ऊर्जा देते हैं। यही कारण है कि यह बच्चों और युवाओं दोनों के बीच काफी पसंद किया जाता है।

    पांचवां हेल्दी विकल्प है पनीर या टोफू रोल। इसके लिए पनीर या टोफू के छोटे-छोटे टुकड़े करके उसमें चाट मसाला काली मिर्च और हल्का सेंधा नमक मिला लें। इसके बाद इसे लेट्यूस के पत्तों या पहले से बनी रोटी में लपेटकर रोल बना लें। यह लो-कार्ब और हाई-प्रोटीन नाश्ता वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है।

    कुल मिलाकर अगर सुबह समय की कमी हो तो भी हेल्दी नाश्ता करना मुश्किल नहीं है। इन आसान और बिना गैस के बनने वाली रेसिपी को अपनाकर आप अपने दिन की शुरुआत हेल्दी तरीके से कर सकते हैं और पूरे दिन एनर्जेटिक महसूस कर सकते हैं।

  • लोहे की कड़ाही में खाना बनाने के फायदे और बचें इन सब्जियों से, जानिए क्यों

    लोहे की कड़ाही में खाना बनाने के फायदे और बचें इन सब्जियों से, जानिए क्यों


    नई दिल्‍ली । भारतीय रसोई में सदियों से लोहे की कड़ाही का इस्तेमाल होता रहा है। इसे केवल पारंपरिक माना ही नहीं जाता बल्कि यह सेहत के लिए भी लाभकारी है। विशेषज्ञों के अनुसार लोहे के बर्तनों में पकाया गया खाना शरीर को प्राकृतिक रूप से आयरन देता है जिससे खून की कमी यानी एनीमिया जैसी समस्याओं से बचाव होता है।आजकल अधिकतर लोग स्टील या नॉन-स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल करते हैं लेकिन लोहे की कड़ाही में बना खाना स्वाद में अलग और स्मोकी होता है। यह सब्जियों को अच्छी तरह भूनने और क्रिस्पी बनाने में भी मदद करता है। लेकिन हर सब्जी और व्यंजन को इसमें पकाना सही नहीं माना जाता।

    लोहे की कड़ाही में बनाना फायदेमंद सब्जियां

    हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक मेथी और सरसों का साग लोहे की कड़ाही में बनाने के लिए सबसे बेहतर मानी जाती हैं। इन सब्जियों में मौजूद पोषक तत्व कड़ाही में पकाने से शरीर को अच्छे से मिलते हैं और स्वाद भी बढ़ जाता है। इसके अलावा बैंगन का भरता आलू-जीरा परवल भिंडी और बीन्स जैसी सूखी सब्जियां भी लोहे की कड़ाही में आसानी से बनाई जा सकती हैं। हल्का स्मोकी फ्लेवर और पोषक तत्वों की सुरक्षा इन सब्जियों को और भी स्वादिष्ट बनाती है।

    लोहे की कड़ाही में न बनाएं ये चीजें
    खट्टी चीजें जैसे टमाटर की ज्यादा ग्रेवी इमली या नींबू वाली डिश लंबे समय तक लोहे की कड़ाही में नहीं बनानी चाहिए। खटास के कारण लोहे के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया होती है जिससे खाना काला पड़ सकता है और स्वाद बदल सकता है।साथ ही दही वाली डिश जैसे कढ़ी या दही ग्रेवी भी लोहे की कड़ाही में नहीं बनानी चाहिए। दही में मौजूद खटास बर्तन के साथ प्रतिक्रिया कर सकती है जिससे खाने का रंग और स्वाद प्रभावित होता है।

    लोहे की कड़ाही में खाना बनाने के फायदे
    सबसे बड़ा फायदा यह है कि खाने में प्राकृतिक आयरन की मात्रा बढ़ती है जिससे शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है और एनीमिया जैसी समस्याओं से बचाव होता है। इसके अलावा इसमें बना खाना ज्यादा स्वादिष्ट भुना और क्रिस्पी होता है। नॉन-स्टिक बर्तनों की तुलना में लोहे की कड़ाही अधिक सुरक्षित मानी जाती है क्योंकि इसमें केमिकल कोटिंग नहीं होती। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह लंबे समय तक टिकती है और हेल्दी कुकिंग का बेहतरीन विकल्प साबित होती है।

  • पानी में उगाएं ये 5 इंडोर पौधे, घर और बालकनी बनेगी हरी-भरी मिनी गार्डन

    पानी में उगाएं ये 5 इंडोर पौधे, घर और बालकनी बनेगी हरी-भरी मिनी गार्डन


    नई दिल्ली। घर में हरियाली लाने का शौक आजकल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन शहरों और अपार्टमेंट में जगह की कमी या मिट्टी और खाद की परेशानी के कारण कई लोग गार्डनिंग से दूर रह जाते हैं। ऐसे में पानी में उगने वाले इंडोर पौधे एक शानदार विकल्प साबित हो सकते हैं। ये पौधे कम जगह में भी आसानी से बढ़ते हैं और घर की सजावट में चार चाँद लगाते हैं।

     मनी प्लांट

    मनी प्लांट इंडोर पौधों में सबसे लोकप्रिय है। इसे उगाना बेहद आसान है। बस इसकी एक छोटी बेल काटकर पानी से भरे गिलास या जार में रखें। कुछ ही दिनों में जड़ें उगने लगती हैं। इसे हल्की रोशनी वाली जगह रखें और पानी हर सप्ताह बदलते रहें। यह न सिर्फ घर को सजाता है बल्कि सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ाता है।

    स्नेक प्लांट

    स्नेक प्लांट को आमतौर पर मिट्टी में उगाया जाता है, लेकिन इसकी पत्ती की कटिंग को पानी में डालने पर भी यह जड़ें उगाती है। जड़ें निकलने में लगभग डेढ़ से दो महीने लग सकते हैं। यह कम रोशनी में भी बढ़ता है, इसलिए इसे बेडरूम, लिविंग रूम या ऑफिस में रखा जा सकता है।

    मॉन्स्टेरा

    मॉन्स्टेरा अपने बड़े और डिजाइनदार पत्तों के लिए जाना जाता है। इसकी कटिंग को पानी में डालें और दो-तीन हफ्तों में जड़ें दिखने लगेंगी। हल्की छनकर आने वाली रोशनी इसे सबसे अच्छा बढ़ने में मदद करती है। यह पौधा घर के इंटीरियर को स्टाइलिश लुक देता है।

     सिंगोनियम

    सिंगोनियम या एरोहेड प्लांट की पत्तियां तीर के आकार की होती हैं। इसे पानी में उगाना आसान है और लगभग दो हफ्तों में जड़ें निकलने लगती हैं। इसे स्टडी टेबल, ऑफिस डेस्क, किचन विंडो या छोटे कोने में रखा जा सकता है। इसकी आकर्षक पत्तियां घर की सजावट में निखार लाती हैं।

    लकी बैम्बू

    लकी बैम्बू आमतौर पर पानी में उगाया जाता है और इसकी देखभाल बहुत कम मेहनत में होती है। इसे तेज धूप से दूर, अच्छी रोशनी वाली जगह रखें और जड़ें हमेशा पानी में डूबी रहें। वास्तु और फेंगशुई के अनुसार यह घर में सकारात्मक ऊर्जा और शुभता लाता है।

    इंडोर पौधों के फायदे

    पानी में उगने वाले ये पौधे न केवल घर को हरा-भरा बनाते हैं बल्कि हवा को साफ करने और मानसिक तनाव कम करने में भी मदद करते हैं। कम जगह में भी इन्हें सजाकर आप अपने घर या बालकनी को छोटे-छोटे गार्डन में बदल सकते हैं।

  • प्राचीन ठंडक रहस्य: गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के 5 देसी तरीके…

    प्राचीन ठंडक रहस्य: गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के 5 देसी तरीके…

    नई दिल्ली:  गर्मियों का मौसम आते ही शरीर को ठंडा रखना हर किसी के लिए चुनौती बन जाता है। शहरों में लोग अक्सर फ्रिज का ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक और एयर कंडीशनर का सहारा लेते हैं। ये तुरंत राहत तो देते हैं और गर्मी में थोड़ी राहत महसूस कराते हैं, लेकिन लंबे समय में स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक असर भी पड़ सकता है। अगर हम गांवों की जीवनशैली देखें तो पता चलता है कि वहां लोग सदियों से प्राकृतिक और देसी तरीकों से गर्मी से राहत पाते आए हैं। इन तरीकों में न तो बिजली की जरूरत होती है और न ही महंगे उपकरण। फिर भी ये शरीर को अंदर से ठंडा रखने में बेहद असरदार हैं।

    हमारे पारंपरिक खान-पान और घरेलू नुस्खों में कई चीजें शामिल हैं जो शरीर का तापमान संतुलित रखने में मदद करती हैं। यही कारण है कि गांवों में लोग तेज गर्मी के बावजूद ज्यादा हेल्दी और एनर्जेटिक रहते हैं। आइए जानते हैं पांच ऐसी देसी चीजों के बारे में जो गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए आज भी अपनाई जाती हैं।


    1. मटके का पानी

    गांवों में ज्यादातर घरों में मिट्टी के मटके में पानी रखा जाता है। मटके का पानी फ्रिज के पानी जितना ठंडा नहीं होता लेकिन धीरे-धीरे शरीर को ठंडक पहुंचाता है। मिट्टी के बर्तन में छोटे-छोटे छिद्र पानी को धीरे-धीरे ठंडा करते हैं। यह पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है और पाचन के लिए भी लाभकारी होता है।

    2. सत्तू का शरबत

    भुने हुए चने से बनने वाला सत्तू का शरबत बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में गर्मियों में बहुत लोकप्रिय है। इसे देसी एनर्जी ड्रिंक भी कहा जाता है। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है, लंबे समय तक पेट भरा रखता है और लू से बचाव में मदद करता है।

    3. बेल का शरबत

    बेल का फल गर्मियों में बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसका शरबत शरीर को अंदर से ठंडा करता है और पाचन में सुधार लाता है। आयुर्वेद में भी इसे गर्मी से राहत और पाचन के लिए उपयोगी बताया गया है।

    4. छाछ (मट्ठा)

    दही से बनी छाछ गर्मियों में शरीर को हल्का और ठंडा रखने में मदद करती है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक तत्व पाचन को मजबूत बनाते हैं और शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। छाछ पीने से गर्मी में हल्का महसूस होता है और ऊर्जा बनी रहती है।

    5. खस का शरबत

    खस की जड़ से तैयार शरबत भी गर्मियों में ठंडक देने के लिए काफी प्रभावी है। खस की तासीर ठंडी मानी जाती है और यह शरीर को ठंडक देने के साथ गर्मी से होने वाली थकान को भी कम करता है। इसका सेवन शरीर को तरोताजा महसूस कराता है और लंबे समय तक ठंडक बनाए रखता है।

    आज के समय में लोग गर्मी से बचने के लिए फ्रिज के ठंडे पानी और कोल्ड ड्रिंक्स पर निर्भर हो जाते हैं। लेकिन हमारे पारंपरिक देसी तरीके आज भी उतने ही असरदार हैं जितने पहले थे और शरीर को अंदर से ठंडा बनाए रखने में मदद करते हैं। गर्मी में स्वास्थ्य और ऊर्जा बनाए रखने के लिए इन प्राकृतिक उपायों को अपनाना सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है।
  • दही: ब्लड प्रेशर कम करने और इम्यूनिटी बढ़ाने वाला सुपरफूड, जानें 12 हेल्थ बेनिफिट्स और सावधानियां

    दही: ब्लड प्रेशर कम करने और इम्यूनिटी बढ़ाने वाला सुपरफूड, जानें 12 हेल्थ बेनिफिट्स और सावधानियां


    नई दिल्ली । दही सेहत का खजाना है। इसमें प्रोटीन गुड फैट शुगर और प्रोबायोटिक्स की भरपूर मात्रा होती है जो न सिर्फ स्वादिष्ट है बल्कि गट हेल्थ इम्यूनिटी और मेटाबॉलिज्म को भी रीसेट करता है। इतना ही नहीं यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मददगार है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित स्टडी बताती है कि नियमित दही खाने से हाई ब्लड प्रेशर का रिस्क 16–20% तक कम हो सकता है। हफ्ते में पांच या उससे अधिक बार संतुलित डाइट के साथ दही खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है।

    डॉ. संचयन रॉय सीनियर कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल दिल्ली के अनुसार दही में मौजूद जिंक सेलेनियम और विटामिन D संक्रमण पैदा करने वाले वायरस और बैक्टीरिया के खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करते हैं। इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और शरीर में इंफ्लेमेशन कम होता है। नियमित सेवन से सर्दी-जुकाम से लेकर गंभीर बीमारियों का रिस्क घटता है।

    हार्ट हेल्थ के लिए भी दही बेहद फायदेमंद है। इसमें पोटेशियम और मैग्नीशियम मौजूद हैं जो शरीर से एक्स्ट्रा सोडियम को बाहर निकालकर ब्लड प्रेशर को संतुलित रखते हैं। प्रोबायोटिक्स बैड कोलेस्ट्रॉल LDLको कम करने और इंफ्लेमेशन घटाने में मदद करते हैं। इन गुणों के कारण दही हार्ट डिजीज का रिस्क कम कर सकता है।

    ब्लड प्रेशर कंट्रोल में दही कैसे मदद करता है? इसमें मौजूद बायोएक्टिव पेप्टाइड्स ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाले एंजाइम्स की एक्टिविटी को कम करते हैं और ब्लड वेसल्स को रिलैक्स करते हैं। इससे ब्लड फ्लो बेहतर होता है और दबाव संतुलित रहता है। विशेष रूप से मिड एज महिलाओं और अधिक BMI वाले लोगों के लिए दही ज्यादा फायदेमंद साबित होता है।

    दही के नियमित सेवन से पाचन तंत्र भी मजबूत होता है। प्रोबायोटिक्स गट माइक्रोबायोम का संतुलन बनाए रखते हैं बैड बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकते हैं और IBS कब्ज या ब्लोटिंग जैसी समस्याओं में राहत देते हैं। स्वस्थ गट माइक्रोबायोम मूड और ब्रेन फंक्शनिंग को भी प्रभावित करता है।

    दही खाने का सही समय दोपहर का माना जाता है क्योंकि इस समय पाचन क्षमता सबसे मजबूत होती है। खाली पेट दही खाने से पेट में एसिड बढ़ सकता है इसलिए इसे हमेशा मेन कोर्स के साथ साइड डिश के रूप में लें। मीठा या फ्लेवर्ड दही एक्स्ट्रा शुगर और प्रिजर्वेटिव्स के कारण नुकसानदेह हो सकता है।

    साथ ही दही स्किन और बालों के लिए भी लाभकारी है। इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड और प्रोटीन स्किन की रंगत सुधारते हैं मॉइश्चर बनाए रखते हैं और बालों की जड़ें मजबूत करते हैं।हालांकि कुछ लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। आर्थराइटिस अस्थमा किडनी डिजीज लैक्टोज इनटॉलेरेंस या गंभीर एसिडिटी वाले लोगों को दही सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।

    दही खाने से ब्लड प्रेशर कम होता है इम्यूनिटी मजबूत होती है और यह शरीर को कई तरह की लाइफस्टाइल डिजीज से बचाने में मदद करता है। इसे अपनी डाइट में शामिल करना एक छोटी लेकिन असरदार हेल्थ हैबिट है।

  • सुबह खाली पेट पानी पीना: सेहत के लिए ‘साइलेंट हीलर’, जानें 11 फायदे और सही तरीका

    सुबह खाली पेट पानी पीना: सेहत के लिए ‘साइलेंट हीलर’, जानें 11 फायदे और सही तरीका


    नई दिल्ली । हम अक्सर सुनते हैं कि सुबह खाली पेट पानी पीना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। हेल्थ एक्सपर्ट इसे साइलेंट हीलर कहते हैं क्योंकि यह छोटी लेकिन असरदार आदत हमारे शरीर को रीस्टार्ट का संदेश देती है। इंग्लैंड की लॉफबोरो यूनिवर्सिटी की स्टडी बताती है कि सुबह उठने के 30 मिनट के अंदर आधा लीटर पानी पीने से ब्रेन की फंक्शनिंग में सुधार आता है।

    डॉ. रोहित शर्मा कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल जयपुर बताते हैं कि सोते समय शरीर रिकवरी और रिपेयर मोड में चला जाता है। मेटाबॉलिज्म और ऑर्गन्स स्लो हो जाते हैं। ऐसे में सुबह पानी पीना शरीर को धीरे धीरे इस मोड से बाहर निकालता है। मूड संतुलित रहता है फोकस और याददाश्त बढ़ती है और सोचने समझने की क्षमता बेहतर होती है।

    डाइजेशन पर इसका असर भी महत्वपूर्ण है। खाली पेट पानी पेट में पहुंचकर पाचन तंत्र को सक्रिय करता है पेट और आंतों की मांसपेशियां मूवमेंट शुरू करती हैं। गैस्ट्रिक जूस और एंजाइम्स रिलीज होने से खाना पचाने की क्षमता बढ़ती है। कब्ज एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं कम होती हैं।

    सुबह पानी पीने से कई लाइफस्टाइल डिजीज का जोखिम घट सकता है। हाइड्रेटेड रहने से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और टॉक्सिन्स जमा नहीं होते। किडनी स्टोन यूरिन इन्फेक्शन हाई ब्लड प्रेशर और कब्ज जैसी बीमारियों के खतरे कम होते हैं।

    वजन कम करने में भी यह मददगार है। पानी मेटाबॉलिज्म को 20–30% तक एक्टिव करता है और कैलोरी बर्न में सहायक होता है। पेट थोड़ा भरा महसूस होने से नाश्ते में ओवरईटिंग कम होती है। हालांकि सिर्फ पानी पीने से वजन कम नहीं होता इसे हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ अपनाना जरूरी है।

    मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर दिखता है। डिहाइड्रेशन से थकान चिड़चिड़ापन और फोकस की कमी हो सकती है। सुबह पानी पीने से ब्रेन को पर्याप्त ऑक्सीजन और ब्लड सप्लाई मिलती है जिससे स्ट्रेस हॉर्मोन बैलेंस होते हैं और दिन की शुरुआत क्लियर और शांत होती है।

    एनर्जी लेवल और मूड पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। रात भर डिहाइड्रेटेड रहने से शरीर सुस्त रहता है। पानी पीते ही सेल्स सक्रिय हो जाती हैं थकान कम होती है और सिर भारी लगने की समस्या घटती है। यही कारण है कि हेल्थ एक्सपर्ट चाय कॉफी से पहले पानी पीने की सलाह देते हैं।

    डॉ. शर्मा के मुताबिक गुनगुना या नॉर्मल टेम्परेचर का पानी सुबह के लिए सबसे सही है। ठंडा पानी डाइजेशन धीमा कर सकता है। आमतौर पर 1–2 गिलास 250–500 ml पानी पर्याप्त होता है लेकिन मौसम और हेल्थ कंडीशन के हिसाब से मात्रा बदल सकती है।

    कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। किडनी या हार्ट की समस्या लो ब्लड प्रेशर गंभीर गैस्ट्रिक इश्यू वाले लोग थोड़ी सतर्कता बरतें। सुबह खाली पेट पानी पीना एक छोटी लेकिन असरदार आदत है जो डाइजेशन मेटाबॉलिज्म मेंटल हेल्थ और ओवरऑल वेलबीइंग को बेहतर बनाती है।