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  • ठंड और बढ़ता वायु प्रदूषण बना सेहत के लिए खतरा, आयुर्वेदिक उपाय बन सकते हैं सुरक्षा कवच

    ठंड और बढ़ता वायु प्रदूषण बना सेहत के लिए खतरा, आयुर्वेदिक उपाय बन सकते हैं सुरक्षा कवच


    नई दिल्ली  /प्रदेश में जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है, वैसे-वैसे वायु प्रदूषण का स्तर भी चिंताजनक होता जा रहा है। राजधानी समेत कई जिलों में हवा की गुणवत्ता खराब हो चुकी है, जिसका सीधा असर लोगों की सेहत पर दिखाई दे रहा है। अस्पतालों में छींक, खांसी, गले में खराश, सांस लेने में दिक्कत, कब्ज और एलर्जी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह मौसम खासतौर पर उन लोगों के लिए ज्यादा जोखिम भरा है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है या जो पहले से ही अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जी और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों से ग्रस्त हैं। ऐसे में आयुर्वेदिक उपाय ठंड और प्रदूषण दोनों से बचाव का प्रभावी, सुरक्षित और किफायती विकल्प बनकर सामने आ रहे हैं।

    सही दिनचर्या से मिलेगा दोहरी सुरक्षा
    राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के रोग एवं विकृति विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह बताते हैं कि सर्दियों में यदि ऋतु के अनुसार दिनचर्या और भोजन अपनाया जाए, तो ठंड और प्रदूषण से होने वाले दुष्प्रभावों को काफी हद तक रोका जा सकता है। उनके अनुसार, रोजाना सरसों के तेल से हल्की मालिश सिर से पांव तक करने से शरीर में गर्माहट बनी रहती है और त्वचा भी सुरक्षित रहती है। इसके साथ ही सुबह नाक में अणु तेल या सरसों तेल की 1–2 बूंद डालने से नाक और फेफड़ों को प्रदूषण से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है।

    सूर्यस्नान, योग और भाप के लाभ

    सर्दियों में रोजाना कम से कम 30 मिनट धूप में बैठना शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा देता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। विशेषज्ञों की सलाह से अनुलोम-विलोम, कपालभाति और भ्रामरी प्राणायाम करने से श्वसन तंत्र सशक्त होता है और फेफड़े बेहतर तरीके से काम करते हैं। रात में भाप लेना भी बेहद फायदेमंद माना गया है। इससे नाक और सांस की नलियां साफ होती हैं, बलगम निकलता है और सर्दी-जुकाम में राहत मिलती है।

    सर्दियों में सही भोजन बनेगा सेहत की ढाल
    आयुर्वेद में हेमंत और शिशिर ऋतु में उष्ण, तरल और स्नेही आहार को लाभकारी बताया गया है। बाल रोग विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया के अनुसार बच्चों को रोज हल्दी वाला दूध देना चाहिए, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इस मौसम में आसानी से मिलने वाला आंवला विटामिन-सी और आयरन का बेहतरीन स्रोत है। इसके अलावा गुड़, अदरक, कच्ची हल्दी, तिल और सोंठ से बने व्यंजन शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं और ठंड के असर को कम करते हैं।

    पाचन ठीक रहेगा तो बीमारियां रहेंगी दूर
    प्रभारी अधीक्षक डॉ. अरुण कुमार सिंह बताते हैं कि ठंड के मौसम में पाचन शक्ति कमजोर पड़ जाती है, जिससे कब्ज, गैस और अपच की समस्या बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए दिनभर गुनगुना पानी पीना, रात को दूध में एक चम्मच घी लेना और सुबह भिगोया हुआ मेथी दाना खाना फायदेमंद होता है।

    आयुर्वेदिक जीवनशैली है सबसे आसान समाधान
    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग नियमित योग, संतुलित आहार और आयुर्वेदिक उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें, तो ठंड और प्रदूषण के संयुक्त प्रभाव से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। यह न केवल बीमारी से बचाव करता है, बल्कि शरीर को अंदर से मजबूत भी बनाता है।

  • ज़रूरत की खबर सर्दियों में मुँह ढककर सोना ख़तरनाक घट सकती है 20% तक ऑक्सीजन जानें 11 गंभीर हेल्थ रिस्क

    ज़रूरत की खबर सर्दियों में मुँह ढककर सोना ख़तरनाक घट सकती है 20% तक ऑक्सीजन जानें 11 गंभीर हेल्थ रिस्क


    नई दिल्ली । सर्दी के मौसम में गर्माहट और सुरक्षित महसूस करने की चाहत में कई लोग सोते समय अपने चेहरे को रजाई या कंबल से पूरी तरह ढक लेते हैं। यह आदत भले ही आरामदायक महसूस हो लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह आपकी नींद की गुणवत्ताऔर श्वसन स्वास्थ्य दोनों के लिए अत्यंत हानिकारक है।

    बेंगलुरू के स्पर्श हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी विभाग के HOD डॉ. शिवराज अज्जी करियप्पाला लक्ष्मण ने इस आदत के गंभीर वैज्ञानिक और स्वास्थ्य जोखिमों पर प्रकाश डाला है।डॉक्टर के मुताबिक मुँह ढककर सोने से कंबल के अंदर ताजी हवा का फ्लो काफी कम हो जाता है जिससे हम अपनी ही छोड़ी हुई हवा जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड अधिक होती है को दोबारा भीतर लेते हैं। इससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर 15 से 20% तक घट सकता है। नतीजतन फेफड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन ग्रहण करने के लिए ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है जिससे नींद बार-बार टूटती है। लंबे समय तक ऐसा करने से सुबह उठकर भारीपन थकान लगातार सिरदर्द और सांस संबंधी गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं।

    मुँह ढककर सोना क्यों है रिस्की 11 हेल्थ रिस्क

    वैज्ञानिक स्टडीज और डॉक्टर की राय के आधार पर चेहरा ढककर सोना निम्नलिखित 11 तरह की समस्याओं को जन्म दे सकता है

    स्वास्थ्य पर पड़ने वाले मुख्य नकारात्मक प्रभाव

    ऑक्सीजन की कमी हाइपोक्सिया कंबल के भीतर CO2 का स्तर बढ़ता है और ऑक्सीजन घटती है जिससे दम घुटने जैसा एहसास होता है।

    थकान और सिरदर्द कम ऑक्सीजन के कारण सुबह उठने पर सिर भारी और शरीर थका हुआ महसूस होता है।
    नींद की गुणवत्ता पर असर: बढ़ती गर्मी और कम ऑक्सीजन के कारण गहरी नींद बाधित होती है।
    शरीर का तापमान बढ़ना कंबल के अंदर तापमान बढ़ने से पसीना आता है जिससे शरीर बेचैन होता है और नींद टूटती है।
    पिंपल्स और एक्जिमा बंद और नमी वाले माहौल में पसीना आने से त्वचा के छिद्र बंद हो जाते हैं जिससे पिंपल्स रैशेज और एक्जिमा जैसी त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
    ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल: खराब नींद के कारण दिनभर चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी आती है।
    सांस की दिक्कतें बढ़ना: हवा का फ्लो रुकने से सांस उथली हो जाती है जो फेफड़ों के लिए ठीक नहीं है। गला और छाती में सूखापन सांस की हवा का संचलन न होने से म्यूकस मेंब्रेन सख सकती है।
    संक्रमण का खतरा साँस द्वारा छोड़ी गई नमी और गर्मी कंबल के भीतर सूक्ष्मजीवों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनाती है।
    स्लीप एप्निया का ख़तरा सांस लेने में रुकावट की समस्या स्लीप एप्निया को यह आदत और गंभीर बना सकती है।
    गंभीर मामलों में हृदय गति पर दबाव लंबे समय तक ऑक्सीजन की कमी रहने से हृदय प्रणाली पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।

    किन लोगों के लिए यह आदत जानलेवा हो सकती है

    डॉक्टर शिवराज अज्जी करियप्पाला लक्ष्मण स्पष्ट करते हैं कि कुछ लोगों के लिए मुँह ढककर सोना अत्यंत गंभीर और जानलेवा स्थिति उत्पन्न कर सकता हैअस्थमा और स्लीप एप्निया के मरीज़ इन स्थितियों में पहले से ही सांस लेने में दिक्कत होती है। मुँह ढकने से हवा का फ्लो और कम हो जाता है जिससे सांस रुकने जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है। शिशु और छोटे बच्चे बच्चों खासकर शिशुओं के लिए यह आदत जानलेवा है। इसे सडेन इन्फेंट डेथ सिन्ड्रोम का एक बड़ा कारण माना जाता है। कंबल या रजाई गलती से पूरी तरह चेहरे पर आने से शिशु का दम घुट सकता है।

    मुँह ढककर सोने की आदत कैसे छुड़ाएं

    अगर आपको यह आदत है तो इसे धीरे-धीरे छोड़ना बेहतर है। धीरे आदत बदलें एकदम से चेहरा खुला न रखें। शुरुआत में कंबल में थोड़ा गैप या एयर-टनल बनाए रखें। कुछ दिनों में धीरे-धीरे कंबल को नीचे लाकर पहले नाक-मुँह और फिर पूरे चेहरे को एक्सपोज करने की आदत डालें। सचेत पोजिशनिंग: सोने से पहले कंबल को कंधों के नीचे सेट करें ताकि नींद में भी वह चेहरे तक न आए।तापमान नियंत्रित रखें कमरे का तापमान इतना आरामदायक रखें कि आपको अत्यधिक ठंड महसूस न हो और चेहरा ढकने की ज़रूरत ही न पड़े। वज़नदार कंबल का प्रयोग: कई लोग सुरक्षित एहसास के लिए मुँह ढकते हैं। इसकी जगह वेटेड ब्लैंकेट का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह बिना मुँह ढके वही शांति और सुरक्षित होने का एहसास देता है।

  • जनवरी में बर्फबारी का मज़ा: भारत की 7 खूबसूरत और बजट-फ्रेंडली जगहें

    जनवरी में बर्फबारी का मज़ा: भारत की 7 खूबसूरत और बजट-फ्रेंडली जगहें

     सर्दियों में बर्फ और ठंडी हवा का आनंद लेना किसी भी ट्रैवलर का सपना होता है। जनवरी में हिमालय की चोटियों पर बर्फ की सफेद चादर, पहाड़ों की ठंडी हवा और प्रकृति की सुंदरता किसी का भी मन मोह लेती है। अगर आप कम बजट में सफर करना चाहते हैं, तो ये सात जगहें आपके लिए परफेक्ट हैं:

    1. औली (Uttarakhand)
    औली बर्फबारी और स्कीइंग के लिए सबसे पसंदीदा जगहों में से एक है। यहां चेयर-लिफ्ट और पहाड़ी नज़ारे बेहद खूबसूरत हैं। दिल्ली से ऋषिकेश या हरिद्वार तक सस्ती ट्रेन या बस से आसानी से पहुंचा जा सकता है, वहां से शेयर टैक्सी या बस औली के लिए उपलब्ध हैं। होमस्टे और हॉस्टल बजट ट्रैवलर्स के लिए बेहतरीन विकल्प हैं।

    2. चोपता (Uttarakhand)
    प्रकृति के करीब महसूस करना हो तो चोपता बेस्ट है। जनवरी में यहां बर्फबारी और ट्रेकिंग का मज़ा लिया जा सकता है। ऋषिकेश और हरिद्वार से सस्ती जीप और बसें मिलती हैं। टेंट में ठहरना बजट-फ्रेंडली और रोमांचक अनुभव देता है।

    3. कुल्लू-मनाली (Himachal Pradesh)
    सोलंग वैली और रोहतांग पास बर्फबारी के लिए मशहूर हैं। दिल्ली से HRTC की सस्ती बसें आसानी से मिल जाती हैं। बजट 5000 रुपये के अंदर हो तो डॉर्मिटरी, होस्टल और बजट होटल सबसे अच्छे विकल्प हैं।

    4. शिमला (Himachal Pradesh)
    शिमला का जादू सर्दियों में अलग ही होता है। कुफरी में जनवरी में जबरदस्त बर्फबारी होती है। चंडीगढ़ और दिल्ली से बस या ट्रेन आसानी से मिल जाती है। कालका से शिमला तक की टॉय ट्रेन यात्रा को और खास बनाती है। आसपास के गांवों में रहकर खर्च कम किया जा सकता है।

    5. गुलमर्ग (Jammu & Kashmir)
    असली कड़क ठंड और गहरी बर्फ का अनुभव चाहिए तो गुलमर्ग परफेक्ट है। यहां की सुंदरता फिल्मी सीन जैसी लगती है। स्नो स्कीइंग, स्नोबोर्डिंग और गोंडोला केबल कार इसकी खासियत हैं। जनवरी में यह भारत की सबसे ठंडी और खूबसूरत बर्फबारी वाली जगहों में गिना जाता है।

    6. मसूरी (Uttarakhand)
    मसूरी का मौसम जनवरी में किसी जन्नत से कम नहीं लगता। बर्फ से ढकी सड़कों पर घूमना बेहद शांत और रोमांचक अनुभव देता है। केम्प्टी फॉल्स, कंपनी गार्डन, मॉल रोड, लेक मिस्ट और मॉस्सी फॉल्स घूमने लायक हैं। बजट में रहने के लिए कई किफायती होटल और होमस्टे उपलब्ध हैं।

    7. तवांग (Arunachal Pradesh)
    तवांग बर्फबारी और ठंड के लिए प्रसिद्ध है। जनवरी में बर्फ की मोटी परतें और सेला पास, माधुरी झील, नूरानांग फॉल्स यहां की खास पहचान हैं। यह दुनिया के सबसे बड़े बौद्ध मठों में से एक का घर भी है। जनवरी–फरवरी यहां घूमने का सबसे बेहतरीन समय है।

    जनवरी में इन जगहों पर जाकर आप बर्फबारी का मज़ा, रोमांच और सुकून एक साथ ले सकते हैं। ये सभी डेस्टिनेशन बजट-फ्रेंडली होने के साथ प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर हैं।

  • सर्दियों में क्या खाएं ताकि शरीर रहे गर्म और सेहत बनी रहे मजबूत

    सर्दियों में क्या खाएं ताकि शरीर रहे गर्म और सेहत बनी रहे मजबूत


    नई दिल्‍ली । सर्दियों का मौसम खुशियों के साथ-साथ ठंड, नमी और बीमारियों का खतरा भी लेकर आता है। तापमान गिरते ही शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने लगती है और सर्दी-खांसी, वायरल इन्फेक्शन, जोड़ों का दर्द जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में सही खानपान बेहद जरूरी है। अगर डाइट में कुछ सुपरफूड शामिल कर लिए जाएं, तो न सिर्फ शरीर अंदर से गर्म रहता है, बल्कि इम्यून सिस्टम भी मजबूत रहता है।

    यहां जानिए सर्दियों के पांच सुपरफूड्स जो आपकी सेहत का रखेंगे ख्याल:

    1. पालक – इम्यूनिटी का हरा हथियार
    पालक में आयरन, विटामिन C, K और फोलेट भरपूर मात्रा में होते हैं। यह खून की कमी को दूर करने और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करता है। साथ ही, एंटीऑक्सीडेंट से आंखों की रोशनी बढ़ती है और शरीर अंदर से ताकतवर बनता है। इसे सूप, सब्जी या सलाद में शामिल करें।

    2. केल – हड्डियों और सूजन के लिए बढ़िया
    केल विटामिन A, C और K का भंडार है। इसमें कैल्शियम अधिक मात्रा में होता है, जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। इसके एंटीऑक्सीडेंट शरीर की सूजन कम करने में भी मदद करते हैं। इसे सब्जी, सूप या स्मूदी में शामिल किया जा सकता है।

    3. सरसों का साग – सर्दियों की शान
    सरसों का साग विटामिन C, K और बीटा-कैरोटीन से भरपूर होता है। यह शरीर को गर्म रखने और डिटॉक्स करने में मदद करता है। मक्के की रोटी के साथ इसे खाने से सर्दियों में संपूर्ण आहार मिलता है।

    4. मेथी के पत्ते – ऊर्जा और शुगर कंट्रोल
    मेथी के पत्ते आयरन, फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होते हैं। यह थकान दूर करने, पाचन सुधारने और ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में मदद करता है। सर्दियों में मेथी का पराठा या सब्जी बेहद लाभकारी है।

    5. कॉलीर्ड ग्रीन्स – दिल और कोलेस्ट्रॉल के लिए लाभकारी
    कॉलीर्ड ग्रीन्स विटामिन K, कैल्शियम और फाइबर का अच्छा स्रोत हैं। यह कोलेस्ट्रॉल कम करने और दिल को स्वस्थ रखने में मदद करता है। सर्दियों में इसका सेवन शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है।

    अगर सर्दियों में इन पांच सुपरफूड्स को अपनी रोजमर्रा की डाइट में शामिल किया जाए, तो शरीर रहेगा गर्म, इम्यूनिटी मजबूत और बीमारियों से दूर।

  • सर्दियों में कर्ली बालों की खास देखभाल: इस होममेड तेल से मिलेगा नेचुरल पोषण

    सर्दियों में कर्ली बालों की खास देखभाल: इस होममेड तेल से मिलेगा नेचुरल पोषण


    नई दिल्ली ।सर्दियों के मौसम में कर्ली बालों को खास देखभाल की जरूरत होती है। ठंडी हवा कम नमी और रूखापन इन बालों की मुख्य समस्याएं बन जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप कर्ली बाल बेजान फ्रिज़ी और टूटने लगते हैं। लेकिन अब आपको महंगे हेयर प्रोडक्ट्स पर खर्च करने की जरूरत नहीं है। ब्यूटी एक्सपर्ट के अनुसार एक आसान और किफायती होममेड तेल कर्ली बालों को प्राकृतिक रूप से पोषण देने में मदद करता है।

    कर्ली बालों को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है

    दिल्ली के शाहदरा स्थित Colorrs Salon की ओनर और ब्यूटी एक्सपर्ट रेणु माहेश्वरी बताती हैं कि कर्ली बालों की बनावट ऐसी होती है कि स्कैल्प का नैचुरल ऑयल बालों की लंबाई तक नहीं पहुंच पाता जिससे बाल ज्यादा ड्राई उलझे हुए और बेजान नजर आते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए कर्ली बालों को अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती है जो उन्हें मुलायम मजबूत और खूबसूरत बनाए।

    होममेड तेल की सामग्री

    यह होममेड तेल बालों को गहरी नमी और पोषण देने के लिए तैयार किया जाता है। इसके लिए कुछ साधारण सामग्री की आवश्यकता होती है विटामिन ई कैप्सूल बालों को डैमेज से बचाता है और उन्हें स्वस्थ रखता है।बादाम का तेल बालों में नमी बनाए रखने में मदद करता है।
    करी पत्ता बालों की ग्रोथ को बढ़ावा देता है और स्कैल्प को स्वस्थ बनाता है।तिल का तेल स्कैल्प को मजबूत करता है और बालों को पोषण देता है।

    तेल बनाने का तरीका

    यह होममेड तेल तैयार करने की प्रक्रिया बेहद सरल है सबसे पहले एक कटोरी में विटामिन ई कैप्सूल का तेल निकाल लें। अब इसमें थोड़े से करी पत्ते और तिल डालें और अच्छे से मिक्स करें। चाहें तो इस मिश्रण में थोड़ा सा बादाम का तेल भी डाल सकती हैं।अब आपका होममेड कर्ली हेयर ऑयल तैयार है।

    तेल का सही तरीका

    इस तेल को बालों में लगाने का तरीका बहुत आसान है हफ्ते में दो बार इस तेल को हल्के हाथों से स्कैल्प और बालों में लगाएं।इसे रातभर बालों में छोड़ दें या कम से कम एक घंटे तक इसे लगा रहने दें।इसके बाद माइल्ड शैंपू से बाल धो लें।इस तेल का नियमित इस्तेमाल करने से कर्ली बालों में नमी बनी रहती है फ्रिज़ीनेस कम होती है और कर्ल्स ज्यादा शाइनी और डिफाइंड दिखते हैं।

    सर्दियों में कर्ली बालों की देखभाल के लिए यह आसान और किफायती होममेड तेल एक बेहतरीन उपाय है। इस तेल का इस्तेमाल करने से बालों को प्राकृतिक पोषण मिलता है जिससे वे मुलायम मजबूत और खूबसूरत बनते हैं। इस उपाय को अपनाकर आप बिना किसी साइड इफेक्ट के हेल्दी कर्ली हेयर पा सकती हैं।

  • कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की लव लाइफ और पत्नी की शिक्षा: जानिए 13 साल बाद भी पढ़ाई जारी रखने की प्रेरक कहानी

    कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की लव लाइफ और पत्नी की शिक्षा: जानिए 13 साल बाद भी पढ़ाई जारी रखने की प्रेरक कहानी


    नई दिल्ली ।अनिरुद्धाचार्य महाराज, जिन्हें हम पूकी बाबा के नाम से भी जानते हैं, भारत के एक प्रसिद्ध कथावाचक और आध्यात्मिक गुरु हैं। उनकी कथा शैली और मजाकिया अंदाज उन्हें युवाओं और बुजुर्गों दोनों में समान रूप से लोकप्रिय बनाती है। अनिरुद्धाचार्य के पास 17 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हैं, जो उन्हें सोशल मीडिया पर फॉलो करते हैं और उनकी धार्मिक और जीवन से जुड़ी शिक्षाओं को मानते हैं।

    पारिवारिक जीवन और पत्नी के साथ संबंध

    कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की निजी जिंदगी भी उतनी ही प्रेरणादायक है, जितनी उनकी कथाएँ। उनकी पत्नी का नाम आरती तिवारी है, जो एक गृहिणी हैं। अनिरुद्धाचार्य अक्सर अपने कथा सत्रों में विवाह के महत्व पर चर्चा करते हैं और बताते हैं कि जीवन की सफलता और सुकून में पत्नी का साथ बेहद महत्वपूर्ण होता है। उनका कहना है कि, सही जीवनसाथी के साथ विवाह से जीवन में शांति और खुशी बनी रहती है, और यह किसी भी इंसान की जीवनधारा को बदल सकता है। अपने जीवन में वह हमेशा अपनी पत्नी के साथ सहायक रहे हैं और उन्हें शादी के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।

    शादी के बाद पत्नी की शिक्षा को बढ़ावा

    एक खास बात यह है कि, अनिरुद्धाचार्य ने अपनी पत्नी को शादी के बाद कॉलेज में दाखिला लेने के लिए प्रेरित किया। वह मानते हैं कि महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार होना चाहिए, और इस तरह से जेंडर इक्वालिटी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है। अनिरुद्धाचार्य ने अपनी पत्नी के उच्च शिक्षा के खर्च को भी खुद उठाया, ताकि वह अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। 13 साल के वैवाहिक जीवन के बाद भी, आरती तिवारी अपनी पढ़ाई जारी रख रही हैं। कुछ जानकारों का कहना है कि, उनके पास साइकोलॉजी में PhD की उपाधि भी है, जो इस बात का प्रमाण है कि अनिरुद्धाचार्य के समर्थन से उनकी पत्नी ने शिक्षा में सफलता हासिल की।

    घर और बच्चों की जिम्मेदारी उठाने का उत्साह

    अनिरुद्धाचार्य ने अपनी एक कथा में बताया कि जब उनकी पत्नी परीक्षा की तैयारी में व्यस्त रहती थी, तो वह खुद घर और बच्चों की पूरी जिम्मेदारी उठाते थे। उन्होंने इस बारे में कहा कि पारिवारिक जीवन में सहयोग और समर्थन बहुत महत्वपूर्ण है, और यह एक अच्छे रिश्ते की बुनियाद बनाता है।

    सामाजिक विवाद और केस

    हालांकि, हाल ही में अनिरुद्धाचार्य को एक विवाद का सामना भी करना पड़ा। बेटियों पर की गई एक विवादास्पद टिप्पणी के कारण सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना की गई। इसके बाद उनके खिलाफ एक परिवाद दर्ज किया गया, और उन्हें 1 जनवरी 2026 को कोर्ट में पेश होना है। इस मामले में उनकी कथाएँ और विचार समाज में कई तरह की प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न कर रहे हैं।

    कथावाचक अनिरुद्धाचार्य न केवल एक महान आध्यात्मिक गुरु हैं, बल्कि उन्होंने अपनी निजी जिंदगी में भी उदाहरण प्रस्तुत किया है कि एक अच्छे जीवनसाथी की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है। उनकी पत्नी आरती तिवारी का शिक्षा में योगदान और उनके परिवार में निभाई गई भूमिका प्रेरणा देने वाली है। उनके विचार और जीवन की गहराई दर्शाते हैं कि रिश्ते और परिवार की अहमियत आध्यात्मिक जीवन में भी महत्वपूर्ण है।

  • वियतनाम: 40 हजार रुपये में विदेश यात्रा का अद्भुत अनुभव!

    वियतनाम: 40 हजार रुपये में विदेश यात्रा का अद्भुत अनुभव!


    नई दिल्‍ली । अगर आप विदेश घूमने का सपना देख रहे हैं लेकिन बजट की वजह से रुक गए हैं, तो अब आपके लिए एक बेहतरीन मौका है। वियतनाम, जो दिल्ली से करीब 5000 किलोमीटर दूर स्थित है, एक ऐसा देश है जहां आप सिर्फ 40 हजार रुपये में घूम सकते हैं। आइए जानते हैं इस सस्ती और रोमांचक यात्रा के बारे में।

    फ्लाइट का किराया

    वियतनाम जाने के लिए फ्लाइट का खर्च भी बहुत कम है। दिल्ली से हनोई (Vietnam का प्रमुख शहर) की फ्लाइट का किराया ऑफ सीजन में सिर्फ 8,000 से 10,000 रुपये के बीच हो सकता है। इस तरह, आने-जाने का खर्च कुल मिलाकर 16,000 से 20,000 रुपये तक आता है। इतना कम बजट में विदेश यात्रा करना वाकई एक शानदार मौका है!

    वियतनाम की करेंसी

    वियतनाम की करेंसी वियानी डोंग (VND) है, और भारत के एक रुपये के बदले आपको करीब 291.03 वियानी डोंग मिलते हैं। इसका मतलब है कि यहां आपका भारतीय रुपया ज्यादा ताकतवर है, और आप अपनी यात्रा का भरपूर आनंद ले सकते हैं।

    होटल का खर्च

    हनोई में रहने के लिए होटल या गेस्ट हाउस का खर्च भी काफी सस्ता है। यहां पर आपको एक रात का ठहराव 1,500 से 2,500 रुपये तक में मिल सकता है। इस हिसाब से, अगर आप चार दिन के लिए रुकते हैं, तो होटल का कुल खर्च 6,000 से 10,000 रुपये तक हो सकता है।

    खाना-पीना

    वियतनाम में खाने का खर्च भी बहुत कम है। अगर आप स्ट्रीट फूड पसंद करते हैं, तो एक अच्छा और स्वादिष्ट भोजन 150 से 200 रुपये में मिल सकता है। वहीं, रेस्तरां में खाना खाने पर बिल 400 से 600 रुपये तक आ सकता है। कुल मिलाकर चार दिन में खाने-पीने का खर्च लगभग 4,000 से 5,000 रुपये तक हो सकता है।

    ट्रांसपोर्ट का खर्च

    वियतनाम में लोकल ट्रांसपोर्ट भी बेहद सस्ता है। यहां की टैक्सी और उबर सेवाओं का किराया प्रति दिन 300 से 500 रुपये तक हो सकता है। अगर आप मोटरसाइकिल रेंट पर लेना चाहते हैं, तो वह भी आसानी से उपलब्ध है। इस प्रकार, 4-5 दिनों का ट्रांसपोर्ट खर्च लगभग 1,500 से 2,500 रुपये तक आ सकता है।

    शॉपिंग और बाजार

    वियतनाम की शॉपिंग भी किफायती है। यहां के हनोई ओल्ड क्वार्टर नाइट मार्केट, बेन थान मार्केट और होई एन नाइट मार्केट में आपको बहुत अच्छे और सस्ते कपड़े मिल सकते हैं। इसलिए अगर आप शॉपिंग के शौक़ीन हैं, तो वियतनाम में खरीदारी भी मजेदार होगी, और खर्च भी बहुत कम आएगा।

    कुल मिलाकर खर्च

    अगर आप वियतनाम 4-5 दिनों के लिए जाते हैं, तो फ्लाइट, होटल, खाना, ट्रांसपोर्ट और शॉपिंग मिलाकर आपका कुल खर्च लगभग 40,000 रुपये हो सकता है। इस बजट में आप एक शानदार विदेश यात्रा का आनंद ले सकते हैं।

    वियतनाम, अपने कम खर्च और अद्भुत पर्यटन स्थलों के कारण एक बेहतरीन बजट डेस्टिनेशन बन चुका है। यहां आप शानदार सेंट्रल हनोई, हलॉन्ग बे, हो ची मिन्ह सिटी, और अन्य जगहों का भ्रमण कर सकते हैं। यदि आपके पास एक सीमित बजट है, तो वियतनाम आपके लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन हो सकता है।

    तो अब इंतजार किस बात का? पैक करें अपनी बैग और वियतनाम की इस किफायती यात्रा का आनंद लें!

  • महिलाएं अकेले ट्रैवल की हिम्मत जुटा रही हैं पहाड़ से समुद्र तक सफर के लिए जानें 7 जरूरी बातें

    महिलाएं अकेले ट्रैवल की हिम्मत जुटा रही हैं पहाड़ से समुद्र तक सफर के लिए जानें 7 जरूरी बातें


    नई दिल्ली । आजकल महिलाएं अकेले यात्रा करने में पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो रही हैं। यह एक अद्भुत अनुभव हैजो न केवल नया उत्साह देता है बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ाता है। लेकिन जैसा कि हर नया अनुभव थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता हैखासकर जब अकेले सफर किया जा रहा होकुछ जरूरी बातें ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। अगर आप भी पहली बार अकेली यात्रा करने की सोच रही हैंतो यहां कुछ महत्वपूर्ण टिप्स दी गई हैंजो आपकी यात्रा को सहज और सुरक्षित बना सकती हैं।

    टिकट बुकिंग से शुरुआत करें

    अकेले ट्रैवल की शुरुआत भरोसेमंद तरीके से करें। चाहे फ्लाइट होट्रेन हो या बसहमेशा आधिकारिक वेबसाइट या भरोसेमंद ऐप से ही टिकट बुक करें। अपने टिकट और होटल बुकिंग की सारी जानकारी एक ही जगह पर रखें ताकि आप उन्हें तुरंत एक्सेस कर सकें। इसके अलावायात्रा के दौरान समयसीट और कैंसलेशन पॉलिसी को भी चेक कर लें।

     मदद लेने में हिचकिचाएं नहीं

    अगर आप अकेले सफर कर रही हैं और अजनबी जगह पर हैंतो यह जरूरी नहीं है कि आपको हर चीज खुद ही संभालनी हो। अगर आप रास्ता भूल जाएं या कोई दिक्कत होतो नजदीकी होटल स्टाफपुलिस या स्थानीय लोगों से मदद लेने में कोई बुराई नहीं है। हालांकिअपनी पर्सनल जानकारी को ज्यादा साझा न करें और किसी संदिग्ध व्यक्ति से बचकर रहें।

     डर पर काबू पाएं

    पहली बार अकेले यात्रा करने पर डर लगना स्वाभाविक हैलेकिन यह जरूरी है कि आप अपनी चिंता को शांत करें और अपने डर को काबू में रखें। याद रखेंलाखों महिलाएं अकेले यात्रा करती हैं और यह अनुभव उन्हें आत्मनिर्भर और मजबूत बनाता है। आप भी छोटे-छोटे कदम उठाकर इस यात्रा को सफल बना सकती हैं।

     बुरे हालात में शांत रहें

    यात्रा के दौरान कभी-कभी किसी चीज़ के खो जानेरास्ता भटकने या होटल ढूंढने में मुश्किल हो सकती है। ऐसे समय में शांत रहें और सोचे-समझे फैसले लें। यह भी जरूरी है कि आप स्थानीय मोबाइल नेविगेशन का इस्तेमाल करें या पुलिस हेल्पलाइन से संपर्क करें।

    खुद पर भरोसा रखें

    अकेले यात्रा करने से आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता बढ़ती है। जब आप अकेले टिकट बुक करती हैंहोटल चेक-इन करती हैं और नए रास्ते पर चलती हैंतो आपको खुद पर विश्वास होता है। यह आत्मविश्वास आपकी अगली यात्रा को और भी आसान और मजेदार बना देगा।

     कोई परेशान करे तो तुरंत कदम उठाएं

    अगर यात्रा के दौरान कोई आपको परेशान करता है या गलत व्यवहार करता हैतो तुरंत कदम उठाएं। बिना झिझक के उस व्यक्ति से दूरी बनाएंपास के लोगों को बताएं और होटल या पुलिस को शिकायत करें। आजकल वुमन सेफ्टी ऐप्स का भी इस्तेमाल किया जा सकता हैजो संकट के समय में सहायक होते हैं।

    कानून की जानकारी जरूरी है

    अकेले यात्रा करने से पहलेहमेशा स्थानीय और राष्ट्रीय कानूनों की जानकारी रखें। खासकर अगर आप विदेश यात्रा कर रही हैंतो विदेशी यात्रा नियमहेल्पलाइन नंबर 1121091 और सुरक्षा नियमों को पहले से जान लें। यह जानकारी आपको किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षा का अहसास दिलाएगी।

    अकेले यात्रा करना न केवल एक रोमांचक अनुभव हैबल्कि यह आपके व्यक्तित्व और आत्मविश्वास को भी नया आकार देता है। सही तैयारी और सुरक्षा उपायों के साथमहिलाएं किसी भी यात्रा को सुरक्षित और आनंददायक बना सकती हैं। यदि आप पहली बार सोलो ट्रिप पर जा रही हैंतो इन 7 जरूरी बातों को ध्यान में रखें और अपनी यात्रा का पूरी तरह से आनंद लें।

  • जेन-जी का नया स्किन केयर ड्रिंक ट्रेंड क्या वाकई असरदार हैं ये जूस

    जेन-जी का नया स्किन केयर ड्रिंक ट्रेंड क्या वाकई असरदार हैं ये जूस


    नई दिल्ली । आजकल सोशल मीडिया पर स्किन केयर ड्रिंक्स का एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है जिसमें ग्लोइंग स्किन पिंपल-फ्री चेहरे और ग्लास स्किन पाने के लिए विभिन्न प्रकार के जूस और शॉट्स का सेवन किया जा रहा है। इन ड्रिंक्स में गाजर नींबू ऑलिव ऑयल जैसे इंग्रीडिएंट्स का इस्तेमाल हो रहा है।
    यह ट्रेंड इतनी तेजी से बढ़ा है कि Pinterest की रिपोर्ट के अनुसार स्किन-केयर ड्रिंक से जुड़े सर्च में 176 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। लोग अब सीरम और क्रीम की बजाय सीधे इन ड्रिंक्स के जरिए अपनी त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
    वायरल स्किन केयर ड्रिंक
    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों कई तरह के स्किन केयर ड्रिंक्स के रेसिपी ट्रेंड कर रहे हैं। इन ड्रिंक्स में रेटिनॉल शॉट्स ग्रीन जूस और नींबू-ऑलिव ऑयल वाले जूस सबसे ज्यादा पॉपुलर हैं। इन ड्रिंक्स का दावा किया जा रहा है कि इन्हें पीने से त्वचा में निखार आ जाएगा चेहरे की चमक बढ़ेगी और पिंपल्स से छुटकारा मिलेगा। कई लोग इन ट्रेंड्स को फॉलो कर रहे हैं और इन्हें अपनी स्किन केयर रूटीन का हिस्सा बना रहे हैं।
    गाजर और रेटिनॉल: एक मिथक
    अमेरिकी न्यूट्रिशनिस्ट लूसिया स्टान्सबी ने इस ट्रेंड पर अपनी राय दी है। वह कहती हैं कि इन वायरल स्किन-केयर ड्रिंक्स में गाजर का इस्तेमाल इस धारणा के आधार पर किया जाता है कि गाजर रेटिनॉल का अच्छा सोर्स है। हालांकि यह पूरी तरह से सही नहीं है। गाजर में बीटा-कैरोटीन होता है जो शरीर में विटामिन A में बदलता है लेकिन यह प्रक्रिया बहुत धीमी होती है और बहुत कम मात्रा में होती है।
    इसलिए गाजर के जूस से रेटिनॉल मिलने का दावा सही नहीं है। इसके अलावा जब गाजर का जूस तैयार किया जाता है तो उसमें मौजूद फाइबर और कई अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्व कम हो जाते हैं। ऐसे में गाजर को जूस के रूप में पीने की बजाय उसे सीधे खा लेना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।
    जूस अकेला स्किन को ठीक नहीं कर सकता
    स्किन केयर के लिए सिर्फ जूस पीने से चमत्कारी सुधार की उम्मीद करना गलत है। न्यूट्रिशनिस्ट लूसिया का कहना है कि हमारी त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए केवल ड्रिंक पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। एक अच्छी डाइट पर्याप्त नींद सही मात्रा में पानी और नियमित एक्सरसाइज से स्किन की सेहत पर असल प्रभाव पड़ता है। जूस और ड्रिंक स्किन केयर का एक हिस्सा हो सकते हैं लेकिन यह अकेले आपकी त्वचा को स्वस्थ नहीं बना सकते।
    सही जानकारी और सोच जरूरी
    लूसिया स्टान्सबी की सलाह है कि किसी भी वायरल स्किन-केयर ट्रेंड को अपनाने से पहले हमें सही जानकारी हासिल करनी चाहिए। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली रेसिपीज को blindly फॉलो करना कभी भी सही नहीं होता। हमें यह समझना चाहिए कि भोजन और ड्रिंक केवल शरीर को पोषण देते हैं जबकि त्वचा की समस्याओं को हल करने के लिए कई अन्य पहलुओं का ध्यान रखना जरूरी है।
    इसलिए यदि आप स्किन केयर ड्रिंक्स का सेवन करना चाहते हैं तो यह सुनिश्चित करें कि वे आपकी समग्र सेहत और त्वचा के लिए लाभकारी हों और साथ ही साथ अपनी जीवनशैली में अन्य हेल्दी आदतें भी शामिल करें।स्किन केयर ड्रिंक्स का ट्रेंड बढ़ रहा है और लोग इसके जरिए अपनी त्वचा को निखारने की कोशिश कर रहे हैं।
    लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि सिर्फ ड्रिंक से आपकी स्किन की समस्या हल नहीं होगी। सही जानकारी अच्छे खानपान पर्याप्त नींद और व्यायाम से ही स्वस्थ और ग्लोइंग त्वचा प्राप्त की जा सकती है। इसलिए किसी भी वायरल स्किन-केयर ट्रेंड को अपनाने से पहले उसकी सटीकता और प्रभावकारिता पर विचार करें।

  • Beauty Trends 2025: पूरे साल छाए रहे ये 5 ट्रेंड-नेचुरल ग्लो और सिंपल ब्यूटी का चला जबरदस्त क्रेज

    Beauty Trends 2025: पूरे साल छाए रहे ये 5 ट्रेंड-नेचुरल ग्लो और सिंपल ब्यूटी का चला जबरदस्त क्रेज


    नई दिल्ली। साल 2025 ब्यूटी और फैशन की दुनिया में नेचुरल ग्लो, सिंपल मेकअप और स्किन-फ्रेंडली रूटीन का साल रहा। जहां पहले भारी-भरकम मेकअप और लेयर्ड स्किनकेयर पसंद किया जाता था, वहीं इस साल महिलाओं ने हल्के, आसान और दमकते लुक्स को अपनाया। सोशल मीडिया पर पूरे साल कुछ खास ब्यूटी ट्रेंड्स वायरल रहे, जिन्हें न सिर्फ आम महिलाओं बल्कि कई सेलिब्रिटी और इन्फ्लुएंसर्स ने भी फॉलो किया। आइए जानते हैं 2025 के वो 5 ब्यूटी ट्रेंड्स जिन्हें महिलाओं ने खूब पसंद किया-

    1. सिंपल स्किनकेयर रूटीन (Simple Skincare Routine)

    2025 में महिलाओं ने स्किन के लिए “क्लीन और मिनिमल” रूटीन चुनना शुरू किया।
    ज्यादा प्रोडक्ट्स की जगह सिर्फ क्लेंजर + मॉइस्चराइज़र + सनस्क्रीन की बेसिक रूटीन बेहद लोकप्रिय रही। घरेलू नुस्खे, नैचुरल फेस पैक और केमिकल-फ्री प्रोडक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ी।
    सेलिब्रिटी भी अपने नो-फिल्टर स्किनकेयर को खुलकर शेयर करती दिखीं।

    2. कोरियन ग्लो (Korean Glass Skin Trend)

    कोरियन स्किनकेयर का जादू 2025 में भी छाया रहा।
    ग्लास स्किन यानी चमकदार, साफ और हाईड्रेटेड लुक पाने के लिए महिलाएं-

    हाइड्रेशन-युक्त सीरम

    शीट मास्क

    डबल क्लेंज़िंग
    का खूब इस्तेमाल करती रहीं।
    सोशल मीडिया पर “ग्लोइंग स्किन चैलेंज” और “K-स्किनकेयर रूटीन” खूब वायरल हुए।

    3. रेट्रो मेकअप लुक (Retro Makeup Comeback)

    क्लासिक और एलीगेंट 90’s और 80’s मेकअप 2025 में फिर से छा गया।
    इस लुक की खासियत-

    सॉफ्ट और नैचुरल आई शैडो

    न्यूड या ब्राउन लिप्स

    हल्का ब्लश

    पॉलिश्ड, सिंपल फिनिश
    AI फोटो टूल्स और रेट्रो फिल्टर ट्रेंड की वजह से भी यह लुक खूब पसंद किया गया।

    4. स्किनिमलिज़्म (Skinminimalism)

    कम मेकअप और ज्यादा नैचुरल ब्यूटी- यही ट्रेंड 2025 में सबसे बड़ा मूवमेंट रहा।
    इसका मकसद त्वचा की वास्तविक चमक को उभारना है।

    कम प्रोडक्ट्स

    कम केमिकल

    ज्यादा नेचुरल स्किन केयर
    महिलाओं ने “स्किन ब्रीदिंग” और “नो-फाउंडेशन डे” को बढ़ावा दिया और Skinminimalism टैग ट्रेंड में रहा।

    5. मैचा स्किनकेयर (Matcha Beauty Trend)

    ग्रीन टी की तरह मैचा अब ब्यूटी इंडस्ट्री का सुपरफूड बन गया।
    इसके एंटीऑक्सीडेंट और डिटॉक्स गुणों के कारण-

    मैचा फेस मास्क

    मैचा क्लेंज़र

    मैचा सीरम
    2025 में बेहद लोकप्रिय रहे।
    इसने स्किन को ग्लोइंग, सूदिंग और ब्राइट बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।

    2025 की ब्यूटी दुनिया ने साबित किया कि खूबसूरती का असली राज़ नेचुरल ग्लो, स्वस्थ स्किन और सिंपल ब्यूटी रूटीन में है।
    इस साल ट्रेंड्स ने महिलाओं को यह एहसास कराया कि कम भी खूबसूरत हो सकता है-और असली ब्यूटी आत्मविश्वास से आती है!