Category: Madhya Pradesh

  • शौचालय, पेयजल और एस्केलेटर सुधारने के आदेश, DRM ने लिया जायजा

    शौचालय, पेयजल और एस्केलेटर सुधारने के आदेश, DRM ने लिया जायजा


    मध्यप्रदेश । भोपाल रेल मंडल के डीआरएम पंकज त्यागी ने बुधवार रात विदिशा रेलवे स्टेशन का निरीक्षण कर अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत चल रहे विकास कार्यों और यात्री सुविधाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान डीआरएम का सख्त रवैया देखने को मिला। जहां कहीं भी लापरवाही, अव्यवस्था या यात्रियों की सुविधा में कमी नजर आई, वहां उन्होंने अधिकारियों, ठेकेदारों और वेंडरों को जमकर फटकार लगाई और तुरंत सुधार के निर्देश दिए।

    डीआरएम ने निरीक्षण की शुरुआत प्लेटफॉर्म नंबर-1 से की, जहां उन्होंने यात्रियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की बारीकी से जांच की। दिव्यांग शौचालय के सामने वेंडर कर्मचारियों को बैठे देख उन्होंने नाराजगी जताई और तत्काल उन्हें हटाने के निर्देश दिए। इसी दौरान एक यात्री ने शिकायत की कि रात के समय स्टेशन के शौचालय बंद कर दिए जाते हैं, जिससे यात्रियों विशेषकर महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। शिकायत सुनते ही डीआरएम ने स्टेशन अधीक्षक और संबंधित ठेकेदार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी लापरवाही दोबारा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    निरीक्षण के दौरान पेयजल व्यवस्था की भी जांच की गई। एक स्टॉल पर पानी की बोतल का मूल्य पूछने पर कर्मचारी सही जानकारी नहीं दे सका, जिस पर डीआरएम ने वेंडरों को साफ चेतावनी दी कि ओवररेटिंग, यात्रियों से अभद्र व्यवहार या किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर उनका लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।

    इसके बाद डीआरएम ने स्टेशन परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने स्वचालित सीढ़ियों, नए फुट ओवरब्रिज (एफओबी), एस्केलेटर और प्लेटफॉर्म शेड की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए और सभी कार्य तय समय सीमा में पूरे किए जाएं।

    निरीक्षण के दौरान डीआरएम ने कई महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए। उन्होंने प्लेटफॉर्म क्रमांक-4 पर बाउंड्रीवॉल का निर्माण शीघ्र पूरा करने, नए एफओबी पर सीसीटीवी कैमरे लगाने, प्लेटफॉर्म और एस्केलेटर शेड में सुधार करने और वेटिंग रूम के खाली हिस्सों में आकर्षक पेंटिंग कराने को कहा। इसके अलावा पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाने, एटीवीएम मशीन को हमेशा चालू रखने और प्लेटफॉर्म के सभी वॉटर स्टैंड की मरम्मत कराने के निर्देश भी दिए गए।

    डीआरएम पंकज त्यागी ने बताया कि यह एक नियमित निरीक्षण था और इसमें जो कमियां सामने आई हैं, उन्हें मौके पर ही सुधारने के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्टेशन के लोकार्पण की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। हालांकि अभी उद्घाटन की तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन प्लेटफॉर्म 1 से 3 तक यात्रियों की आवाजाही के लिए नया एफओबी और एस्केलेटर लोकार्पण से पहले शुरू कर दिए जाएंगे।

    अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत करोड़ों रुपए की लागत से विदिशा रेलवे स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। ऐसे में डीआरएम का सख्त निरीक्षण यह संकेत दे रहा है कि रेलवे स्टेशन के लोकार्पण से पहले किसी भी प्रकार की कमी नहीं छोड़ना चाहता।

  • विदिशा में हादसे का खतरा: न गोताखोर, न होमगार्ड, फिर भी नदी में उतर रहे लोग

    विदिशा में हादसे का खतरा: न गोताखोर, न होमगार्ड, फिर भी नदी में उतर रहे लोग


    मध्यप्रदेश । विदिशा में भीषण गर्मी और अधिक मास के चलते नदी घाटों पर लोगों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचने से लोग गर्मी से राहत पाने के लिए नदी का रुख कर रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि प्रशासन द्वारा खतरनाक घोषित और प्रतिबंधित किए गए बगला घाट पर भी बड़ी संख्या में लोग स्नान करने पहुंच रहे हैं। घाट पर लगे चेतावनी बोर्डों को नजरअंदाज करते हुए बच्चे, युवा और बुजुर्ग नदी में उतर रहे हैं, जबकि मौके पर सुरक्षा के नाम पर कोई व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही।

    बगला घाट को पहले ही प्रशासन ने जोखिमपूर्ण क्षेत्र घोषित कर यहां स्नान पर रोक लगा दी थी। इसके पीछे मुख्य कारण नदी की अधिक गहराई और तेज जल प्रवाह है। पूर्व में यहां कई दर्दनाक हादसे हो चुके हैं, जिनमें लोगों की डूबने से मौत तक हो चुकी है। बावजूद इसके, लोग अपनी जान जोखिम में डालकर घाट पर पहुंच रहे हैं।

    स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह के समय घाट पर सबसे अधिक भीड़ रहती है। लोग धार्मिक आस्था और गर्मी से राहत दोनों कारणों से यहां स्नान करने आते हैं। अधिक मास का धार्मिक महत्व होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ गई है। घाट स्थित मंदिर के पुजारी ने बताया कि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे खतरा पहले से ज्यादा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं।

    शहर में स्विमिंग पूल जैसी सुविधाओं की कमी भी लोगों को नदी की ओर खींच रही है। कई परिवार अपने बच्चों को तैरना सिखाने के लिए भी इसी घाट पर ला रहे हैं। यह स्थिति और अधिक खतरनाक बन जाती है क्योंकि घाट पर न तो प्रशिक्षित गोताखोर मौजूद हैं और न ही किसी प्रकार की रेस्क्यू टीम तैनात है।

    स्थानीय निवासी अश्वनी राजपूत ने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग यहां स्नान करते हैं, लेकिन उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल होमगार्ड जवानों और गोताखोरों की तैनाती की मांग की है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल चेतावनी बोर्ड लगाकर प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। जब तक घाट पर सख्त निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था नहीं होगी, तब तक लोग नियमों का पालन नहीं करेंगे। लोगों ने मांग की है कि प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराया जाए और घाट पर नियमित गश्त बढ़ाई जाए।

    भीषण गर्मी के बीच बगला घाट पर बढ़ती भीड़ और सुरक्षा इंतजामों की कमी किसी बड़े हादसे की आशंका को जन्म दे रही है। ऐसे में प्रशासन के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह केवल चेतावनी जारी करने तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई भी सुनिश्चित करे।

  • सीहोर में कुपोषण का बड़ा खुलासा: 605 बच्चे गंभीर स्थिति में

    सीहोर में कुपोषण का बड़ा खुलासा: 605 बच्चे गंभीर स्थिति में


    मध्यप्रदेश । सीहोर जिले में बच्चों के पोषण स्तर को लेकर एक गंभीर और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। जिला अस्पताल में महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग द्वारा ‘एक कदम सुपोषण की ओर’ अभियान के तहत कुपोषित बच्चों को पोषण टोकरियां वितरित की गईं, लेकिन सरकारी आंकड़े ही इस दावे पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

    जिले में फिलहाल 605 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित (Severe Acute Malnutrition – SAM) श्रेणी में चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें तत्काल विशेष पोषण और चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा सुपोषण सुधार के दावे किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, जमीनी हकीकत इससे काफी अलग नजर आती है।

    केंद्र सरकार के पोषण ट्रैकर ऐप पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों के वजन और ऊंचाई की नियमित एंट्री की जाती है, लेकिन इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई स्थानों पर लक्ष्य पूरा करने के लिए आंकड़े वास्तविकता से अलग दर्ज किए जा रहे हैं। नतीजतन, कई बच्चे जो ऐप पर सामान्य या कम कुपोषित दिखाए जाते हैं, वे अस्पताल पहुंचने पर गंभीर कुपोषण की स्थिति में पाए जाते हैं।

    स्थिति और अधिक गंभीर इसलिए हो जाती है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों को कई व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। संसाधनों की कमी, खराब या अनुपलब्ध मोबाइल उपकरण और दूरस्थ इलाकों में नेटवर्क की समस्या के कारण पोषण ट्रैकर ऐप पर सटीक डेटा एंट्री करना मुश्किल हो जाता है। इसके चलते कागजों पर स्थिति भले ही सुधरी हुई दिखती हो, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत रहती है।

    जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में लगातार कुपोषण और एनीमिया से पीड़ित बच्चों की संख्या बनी हुई है, जो इस बात का संकेत है कि जमीनी स्तर पर सुधार की गति बेहद धीमी है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आंकड़ों के भरोसे स्थिति को बेहतर नहीं माना जा सकता, बल्कि वास्तविक पोषण और चिकित्सा सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन 605 गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को तत्काल उपचार और नियमित पोषण सपोर्ट की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय पर हस्तक्षेप नहीं किया गया तो इन बच्चों का स्वास्थ्य और अधिक बिगड़ सकता है।

    वहीं, महिला बाल विकास विभाग की ओर से चलाए जा रहे अभियान के तहत समय-समय पर पोषण टोकरियां वितरित की जा रही हैं। शहरी बाल विकास परियोजना अधिकारी बीएल मालवीय ने बताया कि अभियान का उद्देश्य बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाना है और इस दौरान स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया है।

    हालांकि, जमीनी स्तर पर मौजूद चुनौतियां और आंकड़ों की विसंगति यह संकेत देती हैं कि केवल वितरण कार्यक्रमों से कुपोषण जैसी गंभीर समस्या का समाधान संभव नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक डेटा पारदर्शिता, नियमित मॉनिटरिंग और ग्रामीण स्तर पर मजबूत स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित नहीं की जातीं, तब तक स्थिति में बड़ा बदलाव मुश्किल है।

  • गर्मी ने बढ़ाई परेशानी: ट्रांसफार्मर फुंकने और बिजली गुल होने की घटनाएं तेज

    गर्मी ने बढ़ाई परेशानी: ट्रांसफार्मर फुंकने और बिजली गुल होने की घटनाएं तेज


    मध्यप्रदेश । सतना जिले में भीषण गर्मी ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। बुधवार को जिले का अधिकतम तापमान 45.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन का अब तक का सबसे अधिक तापमान है। लगातार बढ़ती गर्मी और लू के चलते मौसम विभाग ने 21 और 22 मई के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जिससे स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।

    तेज धूप और तपती गर्म हवाओं के कारण शहर और ग्रामीण इलाकों में आम लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। दोपहर के समय बाजारों में सन्नाटा पसर जाता है और प्रमुख सड़कों पर आवाजाही बेहद कम हो जाती है। जरूरी कामों से बाहर निकलने वाले लोग भी सिर, चेहरा और शरीर को पूरी तरह ढककर ही घरों से निकलने को मजबूर हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान सामान्य से लगभग 4 डिग्री सेल्सियस अधिक रिकॉर्ड किया गया है, जबकि न्यूनतम तापमान 29.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से करीब 2 डिग्री अधिक है। लगातार बढ़ता तापमान आने वाले दिनों में और अधिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का संकेत दे रहा है।

    भीषण गर्मी का असर केवल जनजीवन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव बिजली व्यवस्था पर भी पड़ा है। तापमान बढ़ने के साथ ही एसी, कूलर और पंखों का अत्यधिक उपयोग किया जा रहा है, जिससे विद्युत लाइनों पर लोड कई गुना बढ़ गया है। इसके कारण शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बार-बार बिजली कटौती की समस्या सामने आ रही है।

    स्थिति यह है कि लोड बढ़ने से ट्रांसफार्मरों में आग लगने और आर्मर्ड केबल के अत्यधिक गर्म होकर जलने जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इससे बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है और कई इलाकों में घंटों बिजली गुल रहने की शिकायतें मिल रही हैं।

    विद्युत विभाग के अनुसार, गर्मी के इस चरम दौर में प्रतिदिन 800 से अधिक शिकायतें दर्ज की जा रही हैं। इनमें मुख्य रूप से बिजली ट्रिपिंग, ट्रांसफार्मर खराब होना और लो वोल्टेज की समस्याएं शामिल हैं। विभागीय कर्मचारी लगातार फील्ड में काम कर रहे हैं, लेकिन बढ़ते लोड के कारण व्यवस्था पर दबाव कम नहीं हो पा रहा है।

    रेड अलर्ट के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। दोपहर के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और हल्के कपड़े पहनने की सलाह दी जा रही है। वहीं प्रशासन ने भी हीटवेव से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियों के निर्देश दिए हैं।

    कुल मिलाकर सतना इस समय भीषण गर्मी, लू और बिजली संकट की दोहरी मार झेल रहा है। यदि आने वाले दिनों में तापमान में गिरावट नहीं आती, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

  • दर्दनाक घटना: फंदे पर युवक, नीचे मिली सरकारी टीचर की खून से सनी लाश

    दर्दनाक घटना: फंदे पर युवक, नीचे मिली सरकारी टीचर की खून से सनी लाश

    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के Satna जिले के कोलगवां थाना क्षेत्र में एक कमरे के अंदर दो शव मिलने से हड़कंप मच गया। कमरे के भीतर फर्श पर 29 वर्षीय सरकारी शिक्षिका पूनम अहिरवार का खून से लथपथ शव पड़ा था, जबकि उसके ऊपर 30 वर्षीय युवक अंबिकेश गौतम का शव फंदे से लटका हुआ मिला। यह घटना सामने आते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी।

    मौके से मिला खून से सना तवा, बढ़ा रहस्य
    घटनास्थल से एक खून और बालों से सना तवा भी बरामद हुआ है, जिसे कथित तौर पर तीसरी मंजिल से नीचे फेंका गया था। यह सबूत इस केस को और भी रहस्यमयी बना रहे हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि पहले युवती की हत्या की गई और बाद में युवक ने आत्महत्या कर ली।

    कैसे सामने आया मामला
    रीवा जिले के बेला गांव निवासी दो भाई एक ही कमरे में रहते थे। बड़ा भाई जब कमरे पर पहुंचा तो दरवाजा बाहर से बंद मिला। अंदर कूलर चलने की आवाज आ रही थी। फोन करने पर अंदर से ही रिंग बजने से शक गहरा गया। खिड़की से झांकने पर उसने फंदे पर युवक को देखा, जिसके बाद मकान मालिक की मदद से दरवाजा तोड़ा गया और अंदर भयावह दृश्य सामने आया।

    मृतका सरकारी टीचर, अनूपपुर की रहने वाली
    मृतका की पहचान Poonam Ahirwar के रूप में हुई है, जो अनूपपुर जिले की रहने वाली थीं और बाणसागर देवलोंद में वर्ग-1 की शिक्षिका थीं। परिजनों के अनुसार, वह 14 मई को घर से भोपाल जाने की बात कहकर निकली थीं, लेकिन सतना कैसे पहुंचीं, यह स्पष्ट नहीं है।

    पिता का आरोप तीसरे व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध
    मृतका के पिता ने इस मामले में हत्या का शक जताते हुए कहा कि उनकी बेटी का एक फल व्यापारी से संबंध था और वह इस केस में संदेह जता रहे हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कमरे का ताला कैसे टूटा, हथियार कहां गया और क्या कोई तीसरा व्यक्ति इस वारदात में शामिल था।

     CCTV से मिला अहम सुराग
    पुलिस जांच में सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें 14 मई की रात दोनों को साथ कमरे की ओर जाते हुए देखा गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों एक-दूसरे को पहले से जानते थे।

     पुलिस जांच में कई एंगल
    पुलिस अब इस मामले में
    कॉल डिटेल रिकॉर्ड
    सीसीटीवी फुटेज
    फॉरेंसिक रिपोर्ट
    के आधार पर जांच कर रही है ताकि घटना की असली सच्चाई सामने आ सके।

    सतना का यह डबल डेथ केस अब भी कई सवाल छोड़ गया है—हत्या, आत्महत्या या तीसरे व्यक्ति की भूमिका? जांच के बाद ही इस रहस्यमयी घटना की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।

  • चार्जर विवाद के बाद अस्पताल में हड़कंप, महिला की सतर्कता से बचा नवजात

    चार्जर विवाद के बाद अस्पताल में हड़कंप, महिला की सतर्कता से बचा नवजात


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के Satna स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल जिला अस्पताल में उस समय हड़कंप मच गया जब एक युवक ने प्रसूता वार्ड से नवजात शिशु को झोले में रखकर बाहर ले जाने की कोशिश की। यह घटना मंगलवार-बुधवार की देर रात करीब 2 बजे की बताई जा रही है।

     चार्जर विवाद से शुरू हुआ मामला
    पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी और नवजात की मां के बीच मोबाइल चार्जर को लेकर कहासुनी हुई थी। बताया जा रहा है कि इसी विवाद और नाराजगी के बाद आरोपी ने इस वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई।आरोपी को नशे की हालत में भी पाया गया है।

     दो दिन के नवजात को झोले में रखकर भागा
    नवजात शिशु का जन्म दो दिन पहले ही हुआ था। आरोपी वार्ड के आसपास संदिग्ध रूप से घूमता रहा और बाद में बच्चे को दूध पिलाने के बहाने मां से दूर किया। इसके बाद जैसे ही महिला सो गई, उसने नवजात को झोले में रखा और अस्पताल से बाहर निकलने लगा।

     महिला की सतर्कता से बची बड़ी अनहोनी
    इसी दौरान एक अन्य महिला को झोले से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। शक होने पर जब उसने युवक से पूछताछ की तो वह भागने लगा। घबराहट में आरोपी झोला फेंककर फरार हो गया, लेकिन नवजात सुरक्षित बचा लिया गया।

     पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार
    पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आरोपी की पहचान की। आरोपी की पहचान पटनहा बिल्डिंग, कोलगवां निवासी विपिन सोनी के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर अपहरण के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया है और न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया जारी है।

    सतना जिला अस्पताल की यह घटना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, लेकिन महिला की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया और नवजात सुरक्षित बचा लिया गया।

  • देवरी में सूने मकान से जेवरात चोरी: परिवार अस्पताल में था, घर में हुई वारदात

    देवरी में सूने मकान से जेवरात चोरी: परिवार अस्पताल में था, घर में हुई वारदात


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के Sagar जिले के देवरी इलाके में चोरों ने एक सूने मकान में सेंध लगाकर बड़ी चोरी की घटना को अंजाम दिया। वारदात के समय घर का पूरा परिवार इलाज के लिए बाहर गया हुआ था।

    ताला तोड़कर घर में घुसे, अलमारी साफ कर गए चोर
    देवरी बाजार वार्ड निवासी पुरुषोत्तम रैकवार के घर को निशाना बनाते हुए चोरों ने ताला तोड़ा और अंदर घुसकर अलमारी में रखे सोने-चांदी के जेवरात और नकदी पर हाथ साफ कर दिया। परिवार इलाज के सिलसिले में सागर गया हुआ था, जिसका फायदा उठाकर चोरों ने वारदात को अंजाम दिया।

    लाखों के जेवरात और नकदी ले उड़े चोर
    पीड़ित परिवार के अनुसार अलमारी में रखा पूरा कीमती सामान चोरी हो गया, जिसमें शामिल हैं-
    सोने का हार
    5 सोने की मालाएं
    अंगूठियां, चूड़ियां और झुमकी
    चांदी की करधोनी और पायलें
    करीब 1 लाख रुपए नकद

    कैसे हुई चोरी? घर में नहीं था कोई
    परिवार इलाज के लिए गया हुआ था, जबकि घर की चाबी सामान्यतः एक ब्रश के डिब्बे में रखी जाती थी, जिसकी जानकारी केवल परिजनों को थी। इसी का फायदा उठाकर चोर अंदर घुसे।

     पुलिस जांच में जुटी, CCTV नहीं बना मददगार
    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। एफएसएल टीम ने भी मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। हालांकि इलाके में CCTV कैमरे न होने से जांच और मुश्किल हो गई है। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और मुखबिर तंत्र सक्रिय कर दिया गया है।

    देवरी की यह चोरी एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि सूने घरों की सुरक्षा कितनी कमजोर है। पुलिस अब आरोपियों की तलाश में जुटी है और जल्द खुलासे की उम्मीद जताई जा रही है।

  • दर्दनाक घटना: सुसाइड से पहले दूल्हा-दुल्हन की तरह सजे युवक-युवती

    दर्दनाक घटना: सुसाइड से पहले दूल्हा-दुल्हन की तरह सजे युवक-युवती


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के Sagar जिले में एक दर्दनाक और रहस्यमयी मामला सामने आया है, जहां पति-पत्नी ने कथित तौर पर एक साथ अपनी जान दे दी। मृतक राजेंद्र पटेल और उनकी पत्नी काजल पटेल को लेकर जो बातें सामने आई हैं, उन्होंने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।

    दूल्हा-दुल्हन की तरह सजे, फिर मौत को गले लगाया
    परिजनों के अनुसार, घटना वाले दिन दोनों ने खुद को दूल्हा-दुल्हन की तरह सजाया था। इसके बाद उन्होंने पॉपकॉर्न और शराब मंगाई और कमरे में विशेष तैयारी की। मोबाइल में “साथ जिएंगे, साथ मरेंगे” जैसी रिंगटोन भी लगाई गई थी, जिसने इस पूरे मामले को और भी रहस्यमयी बना दिया।

     घटना से पहले की सामान्य दिनचर्या
    परिवार के अनुसार, उस दिन सुबह राजेंद्र काम के लिए बाहर गया था और बाद में घर लौटा था। काजल ने ससुर को भोजन भी दिया था। दोपहर में राजेंद्र अपने कमरे में आराम करने गया, लेकिन शाम तक बाहर नहीं आया।  जब परिजन कमरे में पहुंचे तो अंदर का दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए।

    मौके से मिले सामान ने बढ़ाया रहस्य
    घटनास्थल से पॉपकॉर्न, शराब की बोतल और नई रस्सी मिलने की बात सामने आई है। परिजनों का कहना है कि ये सामान उसी दिन बाजार से लाया गया होगा। इसी आधार पर मामला और भी रहस्यमयी हो गया है और कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

    परिवार ने जताया शक, जांच की मांग
    परिजनों का कहना है कि काजल का पहले किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क था, और इसी वजह से मानसिक तनाव की संभावना जताई जा रही है। हालांकि यह केवल एक शक है और अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। परिवार का कहना है कि शादी के बाद शुरू में सबकुछ सामान्य था, लेकिन बाद में हालात बदल गए।

    सामान्य जीवन से अचानक खत्म हुआ सफर
    दोनों की शादी करीब ढाई साल पहले हुई थी और परिवार के अनुसार उन्होंने अपनी मर्जी से विवाह किया था। आर्थिक या पारिवारिक परेशानी की बात सामने नहीं आई है।

    यह मामला अब भी कई अनसुलझे सवाल छोड़ गया है आखिर एक सामान्य दिखने वाला दंपती इस तरह का कदम क्यों उठाएगा? पुलिस जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।

  • 800 फीट ऊंचे टावर पर पति-पत्नी और बेटी, पुलिस-एनडीआरएफ रेस्क्यू में जुटी

    800 फीट ऊंचे टावर पर पति-पत्नी और बेटी, पुलिस-एनडीआरएफ रेस्क्यू में जुटी


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के Sagar जिले में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया जब एक पति-पत्नी अपनी बेटी के साथ BSNL टावर पर चढ़ गए। यह घटना कैंट थाना क्षेत्र के पीली कोठी के पीछे टेकरी इलाके की बताई जा रही है तीनों लोग करीब 600 फीट (सूत्रों के अनुसार 800 फीट तक) ऊंचे टावर पर बैठ गए, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

     पुलिस मौके पर, बातचीत से मनाने की कोशिश
    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और परिवार को नीचे उतरने के लिए समझाने की कोशिश की। लेकिन परिवार किसी भी हालत में नीचे उतरने को तैयार नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि परिवार पुलिस की किसी कार्रवाई से नाराज और परेशान है, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया।

     NDRF टीम को किया गया तैनात
    स्थिति को गंभीर देखते हुए प्रशासन ने NDRF टीम को मौके पर बुलाया है। रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है ताकि परिवार को सुरक्षित नीचे उतारा जा सके।

     इलाके में भारी भीड़, सुरक्षा कड़ी
    घटना के बाद आसपास के इलाके में भारी भीड़ जमा हो गई है। पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाकर लोगों को टावर के पास जाने से रोक दिया है ताकि किसी तरह की अनहोनी न हो।

    स्थिति तनावपूर्ण, रेस्क्यू जारी
    फिलहाल टावर पर बैठे परिवार से लगातार बातचीत की जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता तीनों को सुरक्षित नीचे उतारना है। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और हर किसी की नजर रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी है।

  • तापमान में लगातार उछाल: रीवा में अगले 3 दिन और बढ़ेगी गर्मी

    तापमान में लगातार उछाल: रीवा में अगले 3 दिन और बढ़ेगी गर्मी


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के Rewa में भीषण गर्मी और लू का असर लगातार तेज होता जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार गुरुवार को अधिकतम तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान करीब 27 डिग्री दर्ज किया गया है।

    तेज धूप और गर्म हवाओं ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा देखने को मिल रहा है और लोग घरों में रहने को मजबूर हैं।

     लगातार बढ़ रहा तापमान, रातें भी गर्म
    पिछले तीन दिनों के आंकड़ों के अनुसार रीवा में तापमान लगातार सामान्य से अधिक बना हुआ है।
    18 मई: 44.5°C
    19 मई: करीब 44°C
    20 मई: 44.5°C
    न्यूनतम तापमान भी 26 से 27 डिग्री के बीच बना हुआ है, जिससे रात के समय भी लोगों को राहत नहीं मिल रही है।

     अगले तीन दिन और बढ़ेगी गर्मी
    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं:
    22 मई: 45°C तक तापमान
    23 मई: 45 से 46°C
    24 मई: लगभग 45°C
    इसी वजह से क्षेत्र में हीटवेव अलर्ट जारी किया गया है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

     दोपहर  में बाहर निकलने से बचने की सलाह
    आईएमडी ने साफ निर्देश दिए हैं कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें। लगातार बढ़ती गर्मी से डिहाइड्रेशन, चक्कर और लू लगने का खतरा बढ़ गया है।

     स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ी
    स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह 10 बजे के बाद ही गर्म हवाएं तेज हो जाती हैं, जिससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।

    रीवा में लगातार बढ़ती गर्मी ने सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। आने वाले दिनों में राहत की संभावना कम है, ऐसे में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।