Category: Madhya Pradesh

  • इंदौर मेट्रो का कमर्शियल रन फिर अटका, 24 जून को खत्म होगी CMRS मंजूरी; दोबारा होगा सेफ्टी निरीक्षण

    इंदौर मेट्रो का कमर्शियल रन फिर अटका, 24 जून को खत्म होगी CMRS मंजूरी; दोबारा होगा सेफ्टी निरीक्षण


    मध्यप्रदेश । इंदौरवासियों का मेट्रो में सफर करने का इंतजार एक बार फिर लंबा होता नजर आ रहा है। सुपर कॉरिडोर से विजय नगर तक प्रस्तावित इंदौर मेट्रो का कमर्शियल रन फिर टल गया है। पहले जहां 18 जून को इसका शुभारंभ होने की उम्मीद जताई जा रही थी, वहीं अब स्थिति ऐसी बन गई है कि मेट्रो संचालन शुरू होने में और अधिक समय लग सकता है।

    मेट्रो परियोजना के तहत सुपर कॉरिडोर के लगभग 5.9 किलोमीटर लंबे हिस्से में संचालन की तैयारियां काफी पहले पूरी होने का दावा किया गया था। इसके बावजूद मेट्रो अभी तक ट्रायल और सीमित संचालन के दायरे से बाहर नहीं निकल पाई है। कमर्शियल रन शुरू नहीं होने के कारण यात्रियों को अभी भी मेट्रो सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

    सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (CMRS) द्वारा कमर्शियल रन के लिए दी गई मंजूरी की वैधता 24 जून को समाप्त हो रही है। मेट्रो अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में इस तारीख तक नियमित यात्री सेवा शुरू कर पाना मुश्किल दिखाई दे रहा है। यदि ऐसा होता है तो मेट्रो प्रबंधन को पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू करनी पड़ेगी।

    सूत्रों के अनुसार, मंजूरी की अवधि समाप्त होने के बाद सीएमआरएस से दोबारा निरीक्षण कराना अनिवार्य होगा। इसके लिए नए सिरे से आवेदन, दस्तावेजी प्रक्रिया और तकनीकी परीक्षणों की आवश्यकता पड़ेगी। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग एक महीने का समय लग सकता है। ऐसे में कमर्शियल रन की शुरुआत जुलाई या उससे आगे तक खिसकने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य ने भी स्वीकार किया है कि कमर्शियल रन की नई तारीख अभी निर्धारित नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि 24 जून से पहले सीएमआरएस को दोबारा निरीक्षण के लिए पत्र भेजा जाएगा। निरीक्षण और आवश्यक स्वीकृतियां मिलने के बाद ही यात्री सेवाएं शुरू की जा सकेंगी।

    गौरतलब है कि पहले केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर के हाथों 18 जून को कमर्शियल रन का शुभारंभ प्रस्तावित था। कार्यक्रम की तैयारियां भी लगभग पूरी कर ली गई थीं, लेकिन राज्यसभा चुनाव की व्यस्तताओं के कारण यह आयोजन स्थगित कर दिया गया। इसके बाद उम्मीद थी कि 20 जून को केंद्रीय मंत्री के इंदौर दौरे के दौरान मेट्रो को हरी झंडी मिल सकती है, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई कार्यक्रम तय नहीं किया गया है।

    बार-बार टल रहे कमर्शियल रन ने शहरवासियों की उत्सुकता को निराशा में बदलना शुरू कर दिया है। इंदौर देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में शामिल है और यहां मेट्रो को शहरी परिवहन की बड़ी जरूरत माना जा रहा है। ऐसे में परियोजना के संचालन में लगातार हो रही देरी कई सवाल खड़े कर रही है।

    हालांकि मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी मानकों को पूरा करने के बाद ही सेवा शुरू की जाएगी। लेकिन फिलहाल इतना तय है कि इंदौरवासियों को मेट्रो की पहली नियमित सवारी के लिए अभी कुछ और समय इंतजार करना पड़ेगा।

  • 20 जून को होगा इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का भूमि पूजन, 30 मिनट में तय होगा सफर; सिंहस्थ-2028 को मिलेगी नई रफ्तार

    20 जून को होगा इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का भूमि पूजन, 30 मिनट में तय होगा सफर; सिंहस्थ-2028 को मिलेगी नई रफ्तार


    मध्यप्रदेश । मालवा क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर परियोजना अब धरातल पर उतरने जा रही है। 20 जून को इंदौर जिले के चंद्रावतीगंज में इस परियोजना का भूमि पूजन किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर विशेष रूप से शामिल होंगे। इस परियोजना को सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    करीब 48.10 किलोमीटर लंबे इस एक्सेस-कंट्रोल्ड फोरलेन कॉरिडोर का निर्माण मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) द्वारा हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत कराया जाएगा। इसकी अनुमानित निर्माण लागत लगभग 1,089 करोड़ रुपए है। परियोजना का उद्देश्य इंदौर और उज्जैन के बीच तेज, सुरक्षित और बाधारहित यातायात सुविधा उपलब्ध कराना है।

    भूमि पूजन कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने बुधवार को कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने मंच व्यवस्था, पार्किंग, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा, पेयजल, विद्युत आपूर्ति और बैठक व्यवस्था जैसी सुविधाओं का जायजा लिया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि कार्यक्रम में आने वाले अतिथियों और आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी कर ली जाएं।

    ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके निर्माण के बाद इंदौर से उज्जैन की दूरी महज 30 से 35 मिनट में तय की जा सकेगी। वर्तमान में दोनों शहरों के बीच बढ़ते ट्रैफिक और यात्रा समय की समस्या को देखते हुए यह परियोजना एक बड़ी राहत साबित होगी। इससे मौजूदा हाईवे पर वाहनों का दबाव भी कम होगा और यात्रा अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनेगी।

    धार्मिक पर्यटन के दृष्टिकोण से भी यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण है। उज्जैन में महाकाल मंदिर, महाकाल लोक और सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। वहीं इंदौर प्रदेश की आर्थिक राजधानी होने के साथ-साथ हवाई और व्यावसायिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। नया कॉरिडोर दोनों शहरों को आधुनिक और तेज संपर्क मार्ग से जोड़कर श्रद्धालुओं, पर्यटकों और व्यापारिक वर्ग को बड़ी सुविधा देगा।

    परियोजना का प्रारंभ इंदौर के पित्र पर्वत क्षेत्र के पास से होगा और इसका अंतिम छोर उज्जैन के सिंहस्थ बायपास क्षेत्र तक रहेगा। यह सड़क भविष्य में यातायात की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए विस्तार योग्य भी होगी। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

    सरकार ने निर्माण एजेंसी को परियोजना पूरा करने के लिए लगभग 24 महीने का समय दिया है। लक्ष्य है कि सिंहस्थ-2028 से पहले यह कॉरिडोर पूरी तरह तैयार हो जाए ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे मालवा क्षेत्र के धार्मिक, आर्थिक और पर्यटन विकास के नए कॉरिडोर के रूप में देखा जा रहा है। महाकाल लोक, ओंकारेश्वर, इंदौर एयरपोर्ट और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने वाला यह मार्ग क्षेत्र के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

  • अनिका की जिंदगी के लिए जुटे 8.23 करोड़ रुपए, अब सिर्फ 77 लाख की दरकार; 9 करोड़ पूरे होते ही शुरू होगा इलाज

    अनिका की जिंदगी के लिए जुटे 8.23 करोड़ रुपए, अब सिर्फ 77 लाख की दरकार; 9 करोड़ पूरे होते ही शुरू होगा इलाज


    मध्यप्रदेश । इंदौर की मासूम अनिका शर्मा की जिंदगी बचाने की मुहिम अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचती दिखाई दे रही है। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-2 जैसी गंभीर और दुर्लभ बीमारी से जूझ रही अनिका के इलाज के लिए अब तक 8 करोड़ 23 लाख रुपए जुटाए जा चुके हैं। परिवार को अब सिर्फ शेष राशि मिलने का इंतजार है, ताकि कुल 9 करोड़ रुपए पूरे होते ही बच्ची का इलाज शुरू कराया जा सके।

    पिछले कई महीनों से अनिका के माता-पिता सरिता शर्मा और प्रवीण शर्मा अपनी बेटी की जिंदगी बचाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। महंगे इलाज और विदेश से आने वाले विशेष इंजेक्शन की व्यवस्था करना परिवार के लिए आसान नहीं था, लेकिन समाज, दानदाताओं और सामाजिक संगठनों के सहयोग से यह अभियान एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है।

    अनिका SMA टाइप-2 बीमारी से पीड़ित है, जो बच्चों की मांसपेशियों और शारीरिक विकास को प्रभावित करती है। इस बीमारी के इलाज के लिए अमेरिका से विशेष इंजेक्शन मंगवाया जाना है, जिसकी कीमत करीब 9 करोड़ रुपए बताई जा रही है। यही कारण है कि परिवार लंबे समय से क्राउड फंडिंग के जरिए राशि जुटाने में लगा हुआ है।

    इलाज के लिए सिर्फ धनराशि जुटाना ही चुनौती नहीं थी, बल्कि अनिका की उम्र और वजन भी महत्वपूर्ण मानदंड थे। परिवार के सामने सबसे बड़ी चिंता यह थी कि इलाज के लिए निर्धारित वजन सीमा से बच्ची का वजन अधिक न हो जाए। इसके लिए माता-पिता ने बेहद सावधानी बरतते हुए अनिका को नियंत्रित और विशेष लिक्विड डाइट पर रखा। लगातार निगरानी और चिकित्सकीय सलाह के चलते वे अब तक उसका वजन नियंत्रित रखने में सफल रहे हैं।

    अनिका की मदद के लिए समाज के हर वर्ग से लोग आगे आए हैं। इंदौर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी लोगों ने आर्थिक सहयोग दिया। कई संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और व्यक्तिगत दानदाताओं ने सहायता राशि उपलब्ध कराई, जबकि कुछ लोगों और संगठनों ने मदद का आश्वासन भी दिया है। अब परिवार को इन्हीं स्वीकृत सहायता राशियों के मिलने का इंतजार है।

    इस अभियान को देशभर में पहचान दिलाने में कई चर्चित हस्तियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। अभिनेता सोनू सूद, वरिष्ठ कलाकार रजा मुराद, बिग बॉस की आवाज के रूप में प्रसिद्ध विजय विक्रम सिंह सहित कई सेलिब्रिटी वीडियो संदेशों के माध्यम से लोगों से सहयोग की अपील कर चुके हैं। इन अपीलों का सकारात्मक असर देखने को मिला और बड़ी संख्या में लोग इस अभियान से जुड़े।

    हाल ही में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और “SMA Man of India” के नाम से पहचाने जाने वाले प्रतीक क्वात्रा ने ट्रू होप फाउंडेशन के साथ मिलकर अनिका के लिए 1 करोड़ 20 लाख रुपए की सहायता उपलब्ध कराई। इस सहायता राशि का चेक परिवार को सौंप दिया गया है, जिससे इलाज की दिशा में एक बड़ा कदम आगे बढ़ा है।

    अनिका के माता-पिता का कहना है कि जिन लोगों और संस्थाओं ने सहायता का आश्वासन दिया है, यदि वे जल्द राशि उपलब्ध करा दें तो 9 करोड़ रुपए का लक्ष्य पूरा हो जाएगा और उनकी बेटी को जीवन देने वाला इलाज समय पर मिल सकेगा। परिवार को उम्मीद है कि समाज का सहयोग उनकी बेटी के जीवन में नई उम्मीद लेकर आएगा।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पांच दिवसीय एमपी दौरे पर, इंदौर पहुंचते ही ओंकारेश्वर रवाना; सुरक्षा के कड़े इंतजाम

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पांच दिवसीय एमपी दौरे पर, इंदौर पहुंचते ही ओंकारेश्वर रवाना; सुरक्षा के कड़े इंतजाम


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के पांच दिवसीय आधिकारिक दौरे पर बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इंदौर पहुंचीं। देश की प्रथम नागरिक के स्वागत के लिए देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट पर राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मौजूद रहे। राष्ट्रपति के आगमन के साथ ही प्रदेश में उनके महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू हो गई है, जो 22 जून तक जारी रहेगी।

    इंदौर पहुंचने के बाद राष्ट्रपति मुर्मू सीधे ओंकारेश्वर के लिए रवाना हुईं। यहां वे भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और विशेष पूजा-अर्चना करेंगी। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर ओंकारेश्वर और इंदौर दोनों स्थानों पर प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, जबकि यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है।

    राष्ट्रपति के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इंदौर में विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया। उन्होंने वीर हनुमान मंदिर परिसर स्थित ऐतिहासिक बावड़ी का अवलोकन किया और शहर की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर अधिकारियों से चर्चा की।

    राष्ट्रपति मुर्मू का यह दौरा कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों से जुड़ा हुआ है। 19 जून को वे अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष जागरूकता कार्यक्रम में भाग लेंगी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर आनुवंशिक बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना और प्रभावित समुदायों तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाना है। इसके अलावा राष्ट्रपति ग्वालियर और श्योपुर में आयोजित विभिन्न शासकीय कार्यक्रमों में भी शामिल होंगी।

    राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती है। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के अनुसार एयरपोर्ट और उसके आसपास के क्षेत्रों को अस्थायी रूप से नो-फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है। वहीं 17 से 19 जून तक शहर के कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है ताकि वीआईपी मूवमेंट के दौरान आम जनता को न्यूनतम परेशानी हो।

    ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। दर्शनार्थियों के लिए अलग पार्किंग व्यवस्था, बस सेवाएं और मार्गदर्शन केंद्र बनाए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे निर्धारित ट्रैफिक प्लान का पालन करें और यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलें।

    राष्ट्रपति के दौरे के मद्देनजर भारी मालवाहक वाहनों के मार्ग भी बदले गए हैं। इंदौर-इच्छापुर मार्ग पर चलने वाले ट्रकों और अन्य भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जा रहा है। इससे वीआईपी रूट पर यातायात का दबाव कम करने और सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने में मदद मिलेगी।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह दौरा धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे प्रदेश में विकास, स्वास्थ्य जागरूकता और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कार्यक्रमों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

  • कांग्रेस के मंच पर गूंजे ‘मुर्दाबाद’ के नारे, CM का तंज और सांसद का बैनर वाला बचाव बना चर्चा का विषय

    कांग्रेस के मंच पर गूंजे ‘मुर्दाबाद’ के नारे, CM का तंज और सांसद का बैनर वाला बचाव बना चर्चा का विषय


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में बुधवार का दिन बयानबाजी, विरोध और दिलचस्प घटनाओं के नाम रहा। एक तरफ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस और उसके नेतृत्व पर तीखा हमला बोला, तो दूसरी ओर कांग्रेस के ही कार्यक्रम में पार्टी विरोधी नारे गूंजने लगे। वहीं मंडला में भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते का बारिश से बचने के लिए बैनर का सहारा लेना भी चर्चा का विषय बन गया।

    उज्जैन के महिदपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिना नाम लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने अपनी पार्टी की कमान ‘नौसिखियों’ के हाथ में दे दी है। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि जब गाड़ी चलाने वाले ही अनुभवहीन हों तो गाड़ी आगे बढ़ने के बजाय पीछे ही जाएगी। इससे पहले भी मुख्यमंत्री पटवारी को लेकर तीखी टिप्पणियां कर चुके हैं। राजनीतिक गलियारों में उनके इस बयान को राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन निरस्त होने से जोड़कर देखा जा रहा है।

    उधर ग्वालियर में यूथ कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘रन फॉर OTF’ मैराथन कार्यक्रम में उस समय अजीब स्थिति बन गई जब कांग्रेस के मंच पर ही ‘कांग्रेस पार्टी मुर्दाबाद’ के नारे गूंजने लगे। कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधायक जयवर्धन सिंह सहित कई नेता मौजूद थे। बताया जा रहा है कि मैराथन में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन पुरस्कार नहीं मिलने से नाराज कुछ प्रतिभागियों ने मंच के सामने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते नाराजगी नारेबाजी में बदल गई और कांग्रेस के मंच पर ही कांग्रेस विरोधी आवाजें सुनाई देने लगीं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    राजनीतिक हलचल के बीच मंडला से भी एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई। भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते जिले के निवास क्षेत्र के देवगांव में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम समाप्ति की ओर था कि अचानक तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम स्थल पर लगा बैनर उतार लिया और उसे सांसद के सिर के ऊपर तानकर खड़े हो गए। कुछ देर तक सांसद इसी अस्थायी व्यवस्था के सहारे बारिश से बचते रहे। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

    इसी बीच मंत्रालय से जुड़ा एक रोचक किस्सा भी चर्चा में रहा। एक पुलिस अधिकारी अपनी बेटी की शादी का निमंत्रण देने एक वरिष्ठ महिला अधिकारी के कार्यालय पहुंचे, लेकिन महिला अधिकारी ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया और कर्मचारी के माध्यम से ही कार्ड मंगवा लिया। यह घटना भी मंत्रालय के गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

    राजनीति, प्रशासन और सामाजिक घटनाओं से जुड़ी इन घटनाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मध्य प्रदेश की सियासत में हर दिन कुछ न कुछ ऐसा होता है, जो लोगों की चर्चा और सोशल मीडिया की सुर्खियां बन जाता है।

  • MP में तबादलों की बाढ़: 16 दिन में 17 हजार से ज्यादा ट्रांसफर, एक दिन की छूट में ही ढाई हजार आदेश जारी

    MP में तबादलों की बाढ़: 16 दिन में 17 हजार से ज्यादा ट्रांसफर, एक दिन की छूट में ही ढाई हजार आदेश जारी


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में तबादलों का सीजन इस बार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार द्वारा तबादलों पर लगी रोक में दी गई छूट के बाद प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। महज 16 दिनों की अवधि में 17 हजार से अधिक अधिकारी और कर्मचारियों के तबादले किए गए हैं। खास बात यह है कि 15 जून को तबादला अवधि समाप्त होने के बाद मंत्रियों की मांग पर सरकार ने एक दिन की अतिरिक्त छूट दी और इसी एक दिन में करीब ढाई हजार तबादला आदेश जारी कर दिए गए।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार, 16 जून की रात 12 बजे तक मिली विशेष अनुमति के दौरान विभागों ने तेजी से लंबित प्रस्तावों को मंजूरी देते हुए स्थानांतरण आदेश जारी किए। इन तबादलों में राज्य स्तर और जिला स्तर दोनों श्रेणियों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं। अभी स्कूल शिक्षा विभाग के तबादले पूरी तरह नहीं हुए हैं क्योंकि वहां ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया जारी है। ऐसे में कुल तबादलों की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

    तबादलों की इस व्यापक प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण विभाग शामिल रहे। आबकारी, जेल, वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वाणिज्यिक कर, पंजीयन एवं मुद्रांक, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, नगरीय विकास एवं आवास, जल संसाधन, लोक निर्माण, पर्यावरण, राजस्व, जनजातीय कार्य, महिला एवं बाल विकास, आयुष, कृषि, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और सहकारिता विभागों में बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों का स्थानांतरण किया गया।

    विभागवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में सबसे ज्यादा लगभग 1100 तबादले हुए हैं। इसके अलावा लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में 1700, जनजातीय कार्य विभाग में 1200, नगरीय विकास एवं आवास विभाग में 900, राजस्व विभाग में 400, लोक निर्माण विभाग में 500 तथा वन विभाग में करीब 200 स्थानांतरण किए गए हैं। वहीं सामान्य प्रशासन विभाग, परिवहन, आबकारी, वाणिज्यिक कर और जल संसाधन विभागों में भी बड़ी संख्या में तबादले हुए हैं।

    हालांकि सामान्य प्रशासन विभाग तबादला नीति जारी करता है, लेकिन विभागवार कुल तबादलों का केंद्रीकृत रिकॉर्ड नहीं रखा जाता। इसलिए विभिन्न विभागों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर ही तबादलों की संख्या का अनुमान लगाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जिला स्तर पर हुए हजारों तबादलों को जोड़ने पर यह आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है।

    तबादलों की इस बड़ी कवायद को सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में उठा गया कदम बता रही है। वहीं विपक्ष और कर्मचारी संगठनों की ओर से इसे राजनीतिक और प्रशासनिक संतुलन साधने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि इतने बड़े स्तर पर हुए फेरबदल का सरकारी कामकाज और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर क्या प्रभाव पड़ता है।

    स्कूल शिक्षा विभाग सहित कुछ विभागों में अभी स्थानांतरण प्रक्रिया जारी है, इसलिए आने वाले दिनों में तबादलों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना बनी हुई है।

  • एमपी में खुले बोरवेल पर सख्ती: अब जुर्माने के साथ होगी जेल, रेस्क्यू का पूरा खर्च भी वसूला जाएगा

    एमपी में खुले बोरवेल पर सख्ती: अब जुर्माने के साथ होगी जेल, रेस्क्यू का पूरा खर्च भी वसूला जाएगा


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में लगातार सामने आ रहे बोरवेल हादसों के बाद राज्य सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब खुले या अनुपयोगी बोरवेल को लापरवाही से छोड़ना जमीन मालिकों और ड्रिलिंग एजेंसियों के लिए महंगा साबित होगा। सरकार ने नई बोरवेल नीति और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू कर दी है, जिसके तहत बोरवेल की खुदाई से लेकर उसके बंद करने तक के नियम स्पष्ट कर दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माने के साथ जेल की कार्रवाई भी की जाएगी।

    नई व्यवस्था के अनुसार अब किसी भी नए बोरवेल की खुदाई से पहले संबंधित विभाग में पंजीयन और अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यदि बोरवेल खोदने के बाद उसमें पानी नहीं निकलता है या वह अनुपयोगी साबित होता है, तो जमीन मालिक को 90 दिनों के भीतर उसे मिट्टी, मुरम या कंक्रीट से स्थायी रूप से बंद करना होगा। इसके बाद बंद किए गए बोरवेल की तस्वीर पोर्टल पर अपलोड करना भी जरूरी होगा, ताकि प्रशासन इसकी पुष्टि कर सके।

    सरकार ने पहली बार बोरवेल सुरक्षा नियमों को लेकर कठोर दंडात्मक प्रावधान लागू किए हैं। यदि कोई व्यक्ति पहली बार खुले बोरवेल के मामले में दोषी पाया जाता है तो उस पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। दूसरी बार उल्लंघन करने पर 25 हजार रुपए का जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान रहेगा। यदि खुले बोरवेल के कारण कोई दुर्घटना होती है, तो संबंधित जमीन मालिक और ड्रिलिंग एजेंसी के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज की जाएगी।

    सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि दुर्घटना के बाद चलाए जाने वाले रेस्क्यू ऑपरेशन पर होने वाला पूरा खर्च भी दोषी व्यक्ति या संस्था से वसूला जाएगा। अक्सर बोरवेल हादसों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और प्रशासनिक अमले को कई घंटों या दिनों तक बचाव अभियान चलाना पड़ता है, जिस पर लाखों रुपए खर्च होते हैं। अब यह राशि सरकारी खजाने से नहीं बल्कि जिम्मेदार पक्ष से वसूली जाएगी।

    सरकार ने आम नागरिकों को भी निगरानी प्रक्रिया में शामिल किया है। इसके लिए ‘परख एप’ (PARAKH App) शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति खुले पड़े बोरवेल की फोटो अपलोड कर शिकायत दर्ज करा सकता है। यदि सरकारी जमीन पर खुला बोरवेल पाया जाता है और अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अफसरों पर भी कार्रवाई की जाएगी।

    नई नीति में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधाओं को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। जिन गांवों में नल-जल योजना नहीं पहुंची है और लोगों को निर्धारित मात्रा में पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है, वहां प्राथमिकता के आधार पर नए हैंडपंप और बोरवेल लगाए जाएंगे। इसके लिए प्रशासनिक प्रक्रिया की समय-सीमा भी तय कर दी गई है ताकि लोगों को लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।

    उज्जैन जिले के बड़नगर में दो वर्षीय भागीरथ देवासी की बोरवेल में गिरकर हुई मौत जैसे हादसों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। सरकार का मानना है कि नई नीति और सख्त नियमों से ऐसे दर्दनाक हादसों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय होगी।

  • मानसून की दस्तक में देरी से बढ़ी किसानों की चिंता, एमपी के 13 जिलों में आधा इंच भी बारिश नहीं

    मानसून की दस्तक में देरी से बढ़ी किसानों की चिंता, एमपी के 13 जिलों में आधा इंच भी बारिश नहीं


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में मानसून अब 22 से 24 जून के बीच प्रवेश कर सकता है। मानसून की इस देरी का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ रहा है, क्योंकि खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों की बोवनी प्रभावित होने लगी है। प्रदेश के कई हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां तो देखने को मिली हैं, लेकिन बारिश की मात्रा खेती के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 17 जून के बीच मध्य प्रदेश में औसतन 41.6 मिमी यानी करीब 1.6 इंच बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस बार केवल लगभग 1 इंच बारिश ही दर्ज की गई है। इस तरह प्रदेश में सामान्य से करीब 37 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। स्थिति यह है कि प्रदेश के 13 जिलों में आधा इंच यानी 12.5 मिमी से भी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। इनमें बालाघाट, दमोह, कटनी, मैहर, रीवा, शहडोल, टीकमगढ़, बड़वानी, भिंड, दतिया, धार और खरगोन शामिल हैं। वहीं आलीराजपुर ऐसा जिला है जहां अब तक बारिश का आंकड़ा शून्य है।

    कम बारिश और मानसून की देरी के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर जैसी खरीफ फसलों की बुवाई समय पर नहीं हो पा रही है। शाजापुर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एसएस धाकड़ का कहना है कि सफल बोवनी के लिए कम से कम 4 इंच बारिश आवश्यक है। इतनी बारिश होने पर मिट्टी में पर्याप्त नमी बनती है, जिससे बीजों का अंकुरण बेहतर होता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि जल्दबाजी में बोवनी करने से बचें।

    दरअसल, मानसून के समय पर आने की उम्मीद में कई किसानों ने पहले ही सोयाबीन की बोवनी कर दी थी। अब बारिश नहीं होने से उनके बीज खराब होने का खतरा बढ़ गया है। यदि पर्याप्त नमी नहीं मिली तो किसानों को दोबारा बोवनी करनी पड़ सकती है, जिससे लागत और मेहनत दोनों बढ़ेंगी। हालांकि जिन किसानों के पास सिंचाई की व्यवस्था है, उन्हें कुछ राहत मिल सकती है।

    बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी और बारिश का दौर देखने को मिला। भोपाल और राजगढ़ में आधा इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि बैतूल, गुना, इंदौर और छिंदवाड़ा में भी अच्छी बारिश हुई। बारिश के कारण तापमान में गिरावट आई और मौसम सुहावना हुआ। बैतूल में तापमान एक दिन में करीब 10 डिग्री तक नीचे आ गया।

    मौसम विभाग ने गुरुवार को रतलाम, छिंदवाड़ा और बालाघाट में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। वहीं प्रदेश के 28 जिलों में आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में गर्मी और बारिश दोनों का मिला-जुला असर देखने को मिलेगा। किसानों और आम लोगों की निगाहें अब मानसून की वास्तविक एंट्री पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यही खरीफ सीजन और जल संसाधनों की स्थिति तय करेगा।

  • मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 29 IAS अधिकारियों के तबादले, भोपाल-रीवा को मिले नए कमिश्नर

    मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 29 IAS अधिकारियों के तबादले, भोपाल-रीवा को मिले नए कमिश्नर


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश सरकार ने एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत 29 आईएएस अधिकारियों के तबादले करते हुए कई महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियां की हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा जारी आदेश में भोपाल और रीवा संभाग के आयुक्तों सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। इस प्रशासनिक पुनर्संरचना को आगामी नीतिगत और प्रशासनिक चुनौतियों को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    सरकार ने भोपाल संभाग के आयुक्त संजीव सिंह और रीवा संभाग के आयुक्त बाबू सिंह जामोद को उनके पदों से हटाकर मंत्रालय में नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। अब कर्मवीर शर्मा को भोपाल संभाग का नया आयुक्त नियुक्त किया गया है, जबकि शैलेंद्र सिंह को रीवा संभाग की कमान सौंपी गई है। इन दोनों अधिकारियों की नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री सचिवालय में भी बड़ा बदलाव किया गया है। मुख्यमंत्री के सचिव आलोक कुमार सिंह को उनके पद से हटाकर पंजीयन महानिरीक्षक एवं अधीक्षक मुद्रांक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक गलियारों में इस बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मुख्यमंत्री सचिवालय को राज्य शासन की सबसे प्रभावशाली इकाइयों में गिना जाता है।

    इस फेरबदल में जबलपुर नगर निगम के अपर आयुक्त अरविंद कुमार शाह का नाम भी चर्चा में रहा। हाल ही में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के साथ विवाद के बाद उनका तबादला कर दिया गया है। हालांकि सरकार ने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस निर्णय को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

    राज्य सरकार ने कई वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां भी सौंपी हैं। बाबू सिंह जामोद को नगरीय विकास एवं आवास विभाग का सचिव बनाया गया है। मुकेश चंद्र गुप्ता को जेल विभाग का प्रमुख सचिव, डॉ. ई. रमेश कुमार को राजस्व विभाग का प्रमुख सचिव तथा विवेक कुमार पोरवाल को खनिज साधन विभाग का प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया है।

    इस सूची में एक और महत्वपूर्ण नाम अमन वीर सिंह का है। पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस के पुत्र अमन वीर सिंह पर सरकार ने भरोसा जताते हुए उन्हें ओएसडी सह आयुक्त कोष एवं लेखा तथा पदेन अपर सचिव वित्त विभाग की जिम्मेदारी दी है। इससे पहले वे ऊर्जा विकास निगम में प्रबंध संचालक के रूप में कार्यरत थे।

    वित्त विभाग और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव किया गया है। अपर सचिव वित्त रोहित सिंह को मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम का प्रबंध संचालक बनाया गया है। उनके पास स्कूल शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। वहीं राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मुख्य कार्यपालन अधिकारी हर्षिका सिंह को बजट संचालक नियुक्त किया गया है।

    प्रशासनिक फेरबदल के दौरान शैलेंद्र सिंह की नियुक्ति भी चर्चा में रही। हाल ही में उनके ‘वॉश ऑन व्हील्स’ नवाचार को लेकर आईएएस एसोसिएशन के समूह में चर्चा और विवाद की स्थिति बनी थी। बाद में मुख्य सचिव ने उनके कार्यों की सराहना की थी। अब उन्हें नगरीय विकास विभाग के सचिव पद से हटाकर रीवा संभाग का आयुक्त बनाया गया है।

    इसके अलावा सरकार ने कई वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार भी सौंपे हैं। मनु श्रीवास्तव को कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी) का अतिरिक्त दायित्व दिया गया है। गुलशन बामरा को अनुसूचित जाति कल्याण विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, जबकि अनिरुद्ध मुखर्जी को पर्यावरण विभाग और एपको की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है।

    राज्य सरकार का यह व्यापक प्रशासनिक फेरबदल आने वाले समय में शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे आगामी रणनीतिक बदलावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

  • एमपी में UCC का ड्राफ्ट तैयार: लिव-इन में जन्मे बच्चों को मिलेगा संपत्ति में अधिकार, मानसून सत्र में आ सकता है कानून

    एमपी में UCC का ड्राफ्ट तैयार: लिव-इन में जन्मे बच्चों को मिलेगा संपत्ति में अधिकार, मानसून सत्र में आ सकता है कानून


    भोपाल । मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। उत्तराखंड के बाद अब मध्य प्रदेश भी इस महत्वपूर्ण सामाजिक और कानूनी सुधार को लागू करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हालिया बयान से संकेत मिले हैं कि आगामी मानसून सत्र में यूसीसी विधेयक विधानसभा में पेश किया जा सकता है। इसके लिए गठित समिति ने प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और विभिन्न वर्गों से सुझाव लेने की प्रक्रिया जारी है।

    सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय समिति ने यूसीसी का मसौदा तैयार किया है। समिति राज्यभर में जाकर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और नागरिक संगठनों से संवाद कर रही है। साथ ही सरकार ऑनलाइन माध्यम से भी लोगों की राय ले रही है ताकि कानून को व्यापक जनसमर्थन और सामाजिक स्वीकार्यता मिल सके।

    प्रस्तावित यूसीसी का ढांचा मुख्य रूप से विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर आधारित होगा। सरकार का उद्देश्य अलग-अलग समुदायों में लागू व्यक्तिगत कानूनों के कारण उत्पन्न होने वाली कानूनी जटिलताओं को समाप्त कर सभी नागरिकों के लिए एक समान व्यवस्था लागू करना है।

    ड्राफ्ट का सबसे चर्चित पहलू लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़ा है। प्रस्ताव के अनुसार लिव-इन संबंधों को कानूनी पहचान देने के साथ उनका पंजीकरण या घोषणा अनिवार्य की जा सकती है। यदि ऐसे संबंध टूटते हैं तो महिला को भरण-पोषण और आर्थिक सहायता का अधिकार मिलेगा। इसके अलावा इन संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों को भी पूर्ण कानूनी संरक्षण प्रदान किया जाएगा। उन्हें माता-पिता की संपत्ति में वैधानिक उत्तराधिकार और अन्य कानूनी अधिकार प्राप्त होंगे, जिससे उनके अधिकारों को लेकर किसी प्रकार का विवाद न रहे।

    यूसीसी का एक प्रमुख उद्देश्य लैंगिक समानता सुनिश्चित करना भी है। प्रस्तावित कानून के तहत महिलाओं और पुरुषों को संपत्ति, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में समान अधिकार दिए जाएंगे। तलाक की प्रक्रिया को भी एक समान कानूनी ढांचे में लाने की तैयारी है। किसी भी धर्म के व्यक्ति द्वारा लिया गया तलाक तभी मान्य होगा जब उसका विधिवत पंजीकरण किया जाएगा। तलाक के बाद भरण-पोषण और गुजारा भत्ते के नियम भी सभी समुदायों के लिए समान होंगे।

    सरकार का दावा है कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित किए बिना नागरिकों के समान अधिकारों को मजबूत करेगा। संविधान के समानता संबंधी प्रावधानों और नीति निर्देशक तत्वों के अनुरूप इसे तैयार किया जा रहा है ताकि सभी नागरिकों को एक समान कानूनी संरक्षण मिल सके।

    हालांकि प्रस्तावित यूसीसी को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता देने के प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह व्यवस्था भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों से मेल नहीं खाती। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि आदिवासी समुदाय को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाता है तो इसे समान नागरिक संहिता कैसे कहा जा सकता है।

    इन तमाम बहसों के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि सरकार यूसीसी को लेकर गंभीर है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं तो मानसून सत्र में यह विधेयक विधानसभा में पेश कर पारित कराया जा सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में यूसीसी मध्य प्रदेश की राजनीति और सामाजिक विमर्श का सबसे बड़ा विषय बनने जा रहा है।