Category: Madhya Pradesh

  • MP: भोपाल में CJP की बैठक में हंगामा….छात्रों ने लगाए नारे, माइक छीनने की कोशिश

    MP: भोपाल में CJP की बैठक में हंगामा….छात्रों ने लगाए नारे, माइक छीनने की कोशिश


    भोपाल।
    भोपाल (Bhopal) में सीजेपी (CJP) की बैठक के दौरान उस वक्त हंगामा हो गया, जब छात्रों और युवाओं का एक समूह बैठक में पहुंच गया. युवकों ने CJP के प्रतिनिधियों (Representatives) से स्कूलों के ऑडिट (School audits) और संगठन की गतिविधियों को लेकर सवाल किए. सवाल-जवाब के दौरान विवाद बढ़ गया और कुछ युवकों ने नारेबाजी शुरू कर दी. इस दौरान माइक छीनने की कोशिश भी की गई. हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस गांधी भवन पहुंची और छात्रों को समझाइश देकर मामला शांत कराया।

    दरअसल, शहर के गांधी भवन का यह मामला है. यहां CJP की बैठक के दौरान अचानक हंगामे की स्थिति बन गई. दरअसल, छात्रों और युवाओं का एक समूह बैठक के दौरान अंदर पहुंचा था. इनमें कुछ युवक काली टी-शर्ट पहने हुए थे। युवकों ने CJP के प्रतिनिधियों से स्कूलों के ऑडिट को लेकर सवाल पूछना शुरू किया।

    सवाल-जवाब के दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया. युवकों ने दिल्ली में हुए पिछले प्रदर्शनों और संगठन की गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए। इसी दौरान कुछ युवकों ने नारेबाजी शुरू कर दी. ‘यह दिल्ली नहीं, भोपाल है’, ‘कॉकरोच पार्टी मुर्दाबाद’ और ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाए गए. मामला बढ़ने पर माइक छीनने की कोशिश भी हुई।

    हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस बल गांधी भवन पहुंचा. पुलिस ने मौके पर मौजूद छात्रों और युवाओं को समझाइश दी. पुलिस की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ. घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बैठक के दौरान युवकों की नारेबाजी और हंगामे का दृश्य दिखाई दे रहा है।

  • ट्विशा शर्मा डेथ केस में बड़ा मोड़: जिस कोर्ट से मिली थी गिरिबाला सिंह को बेल वहीं चलेगा मां-बेटे पर मुकदमा

    ट्विशा शर्मा डेथ केस में बड़ा मोड़: जिस कोर्ट से मिली थी गिरिबाला सिंह को बेल वहीं चलेगा मां-बेटे पर मुकदमा


    भोपाल । भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में अब मुकदमे की अगली प्रक्रिया उसी विशेष अदालत में आगे बढ़ेगी जहां से पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को इस मामले में शुरुआत में अग्रिम जमानत मिली थी। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार श्रीवास्तव ने मामले को विशेष न्यायाधीश ओडब्ल्यू पल्लवी द्विवेदी की अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद अब रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे तथा ट्विशा के पति समर्थ सिंह के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर इसी अदालत में आगे की सुनवाई होगी।

    मामले में अधिवक्ता अंकुर पांडे के अनुसार विशेष अदालत ने ही पहले गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी। हालांकि बाद में जबलपुर हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया था। इसके बाद सीबीआई ने कार्रवाई करते हुए गिरिबाला सिंह को हिरासत में लिया था। वह तब से जेल में हैं। अब मामले को उसी विशेष अदालत में भेजे जाने के बाद मुकदमे की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।

    ट्विशा शर्मा मौत मामला लंबे समय से चर्चा में रहा है और इसकी जांच सीबीआई कर रही है। जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने 17 अगस्त को भोपाल की अदालत में गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब अदालत के सामने अगला अहम चरण आरोप तय करने का है। उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देशों के अनुसार चार्जशीट दाखिल होने के बाद निचली अदालतों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आरोपियों पर आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रयास करना होता है। ऐसे में इस मामले में भी सुनवाई की दिशा अब तेजी से आगे बढ़ सकती है।

    मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट में एम्स दिल्ली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार ट्विशा के शरीर पर किसी तरह की गंभीर चोट के निशान नहीं मिले थे। दूसरी ओर इससे पहले एम्स भोपाल में तैयार की गई शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत से पहले शरीर पर छह चोटों के निशान दर्ज किए गए थे। दोनों रिपोर्टों में सामने आए इस अंतर ने मामले को और गंभीर बना दिया है और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों की अहमियत बढ़ गई है।

    अब अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान चार्जशीट में शामिल साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया होगी। आरोप तय होने के बाद मुकदमे की सुनवाई किस दिशा में जाती है यह अदालत के सामने पेश किए जाने वाले दस्तावेजों और साक्ष्यों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा घटनाक्रम यही है कि मुकदमे को विशेष न्यायाधीश पल्लवी द्विवेदी की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया है और इसी अदालत में गिरिबाला सिंह तथा समर्थ सिंह के खिलाफ मामले की अगली कार्यवाही आगे बढ़ेगी।

  • एमपी में अगले 4 दिन तेज बारिश के आसार, सतना-रीवा समेत 17 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट

    एमपी में अगले 4 दिन तेज बारिश के आसार, सतना-रीवा समेत 17 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। बंगाल की खाड़ी में बने लो प्रेशर एरिया और ट्रफ के असर से अगले चार दिन प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश होने का अनुमान है। मंगलवार को उमरिया और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है, जबकि सतना, रीवा, पन्ना समेत 15 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। लगातार बारिश को देखते हुए मैहर में मंगलवार को भी सभी शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टी रहेगी।

    4 सितंबर तक कई संभागों में बारिश

    IMD (मौसम केंद्र) भोपाल के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एरिया और ट्रफ के कारण 4 सितंबर तक जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर, भोपाल, नर्मदापुरम, उज्जैन और ग्वालियर-चंबल संभाग में बारिश का दौर जारी रहेगा। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 1 और 2 सितंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश में तेज बारिश होगी। 3 सितंबर को भोपाल और ग्वालियर संभाग में भारी बारिश की संभावना है, जबकि 4 सितंबर को सिस्टम पश्चिम की ओर बढ़ते हुए उज्जैन, भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभाग को प्रभावित करेगा।

    आज 17 जिलों में अलर्ट

    मंगलवार को उमरिया और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, कटनी, मैहर, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, जबलपुर, मंडला, सिवनी और छिंदवाड़ा में भारी बारिश हो सकती है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने का अनुमान है।

    मैहर में आज भी स्कूल बंद

    मैहर में लगातार भारी बारिश और नदी-नालों के उफान को देखते हुए कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी ने 1 सितंबर को सभी शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश घोषित किया है। कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने सोमवार देर रात आदेश जारी किया।

    डैमों में 70% से ज्यादा पानी

    लगातार बारिश से प्रदेश के ज्यादातर डैमों में जलस्तर तेजी से बढ़ा है। अधिकांश बांधों में 70% तक पानी पहुंच चुका है और कुछ के गेट भी खोले गए हैं। हालांकि इंदौर और उज्जैन संभाग के डैमों की स्थिति अभी अपेक्षाकृत कमजोर है।

    भोपाल के बड़े तालाब का जलस्तर 1666.50 फीट तक पहुंच गया है। अब यह फुल टैंक लेवल से सिर्फ 0.30 फीट खाली है। बड़ा तालाब भरने के बाद भदभदा डैम के गेट खोले जाएंगे। इससे कलियासोत डैम का जलस्तर भी बढ़ेगा।

    अब तक 27.7 इंच बारिश

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अब तक 702.9 मिमी यानी 27.7 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 782.6 मिमी यानी 30.8 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में अभी 3.1 इंच बारिश कम हुई है। ओवरऑल बारिश सामान्य से 10% कम है। पूर्वी हिस्से में 5% और पश्चिमी हिस्से में 15% कम बारिश दर्ज की गई है।

    39 जिलों में 2 से 57% तक कम बारिश

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल मिलाकर 5% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी और टीकमगढ़ समेत जिलों में 4% से 53% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 4% से 53% तक कम बारिश हुई है।

    16 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी

    IMD के मुताबिक अनूपपुर, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़ और शिवपुरी में अब तक सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • सीलिंग से सहमा भोपाल का कारोबार अरेरा कॉलोनी में निगम टीम का विरोध 15 से ज्यादा प्रतिष्ठान बंद व्यापारियों ने मास्टर प्लान की मांग उठाई

    सीलिंग से सहमा भोपाल का कारोबार अरेरा कॉलोनी में निगम टीम का विरोध 15 से ज्यादा प्रतिष्ठान बंद व्यापारियों ने मास्टर प्लान की मांग उठाई


    भोपाल । भोपाल के रहवासी इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम ने सोमवार सुबह से बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी। सुबह करीब 9 बजे शुरू हुए अभियान के तहत शहर के अलग अलग इलाकों में दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद कराया गया। चार घंटे के भीतर 15 से ज्यादा प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई के दौरान अरेरा कॉलोनी में उस समय हंगामे की स्थिति बन गई जब नगर निगम की टीम आर्य समाज मंदिर के पास कार्रवाई करने पहुंची। दुकानदारों ने निगम की कार्रवाई का विरोध करते हुए सवाल उठाया कि केवल छोटे कारोबारियों के प्रतिष्ठानों पर ही कार्रवाई क्यों की जा रही है जबकि बड़े शॉपिंग मॉल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर समान कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।

    अरेरा कॉलोनी में विरोध कर रहे दुकानदारों का कहना था कि एक ही इलाके में कई जगह कमर्शियल गतिविधियां संचालित हो रही हैं लेकिन निगम का अमला चुनिंदा दुकानों को ही निशाना बना रहा है। दुकानदारों के विरोध के बाद निगम की टीम आगे बढ़ गई। इस दौरान निगम अधिकारी पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए। कार्रवाई के दौरान कई व्यापारियों ने अपनी परेशानी सामने रखते हुए कहा कि अचानक प्रतिष्ठान बंद होने से उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

    10 नंबर मार्केट व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष आनंद सोनी ने कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि व्यापारियों को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। उनका कहना है कि अगर भोपाल का मास्टर प्लान समय पर लागू किया जाता तो आज इस तरह की समस्या सामने नहीं आती। व्यापारियों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द मास्टर प्लान लागू करे या फिर मिक्स्ड लैंड यूज की व्यवस्था को लेकर समाधान निकाले ताकि रहवासी इलाकों में लंबे समय से चल रहे कारोबार को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बन सके।

    व्यापारियों का दावा है कि सीलिंग की कार्रवाई का असर भोपाल के बड़े हिस्से के कारोबार पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि पिछले डेढ़ महीने से मुख्यमंत्री मंत्री सांसद विधायक महापौर और अन्य जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी समस्या रखी जा चुकी है लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। व्यापारियों के मुताबिक कार्रवाई से कई बाजारों में सन्नाटा छा गया है और छोटे कारोबारियों के सामने भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    नगर निगम की कार्रवाई रचना नगर सर्वधर्म अरेरा कॉलोनी खानूगांव और गौतम नगर तक पहुंची। रचना नगर में जूंबा डांस हाउस को सील किया गया। सर्वधर्म बी सेक्टर में एक होटल को बंद कराया गया। गौतम नगर में एक होटल संचालक ने खुद ही कमर्शियल गतिविधि बंद कर दी। खानूगांव में भी एक भवन में चल रही व्यावसायिक गतिविधि को बंद कराया गया। ई-3 अरेरा कॉलोनी में कार्रवाई के दौरान दुकानदारों ने कुछ और समय देने की मांग की लेकिन निगम अधिकारियों ने कहा कि पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है।

    इस बीच मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले रहवासी विवेक त्रिपाठी ने भी निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बड़े और प्रभावशाली लोगों के प्रतिष्ठानों को छोड़कर छोटे कारोबारियों पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में रखी जाएगी। दूसरी ओर निगम की कार्रवाई के बाद कई प्रतिष्ठानों पर यह तख्तियां भी लगाई गई हैं कि भवन में व्यवसायिक गतिविधियां बंद हैं। अब इस पूरे मामले में व्यापारियों और नगर निगम के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है और स्थायी समाधान के लिए मास्टर प्लान तथा मिक्स्ड लैंड यूज की मांग फिर तेज हो गई है।

  • उज्जैन में धधकती चिता के सामने तांत्रिक क्रिया का वीडियो वायरल, मानव अवशेष खाने का दावा; संतों ने मांगी कार्रवाई

    उज्जैन में धधकती चिता के सामने तांत्रिक क्रिया का वीडियो वायरल, मानव अवशेष खाने का दावा; संतों ने मांगी कार्रवाई

    उज्जैन। मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित चक्रतीर्थ श्मशान घाट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में किन्नर अखाड़े से जुड़ी किन्नर साधक काली उर्फ नंद गिरि धधकती चिता के सामने कथित रूप से तांत्रिक क्रिया करती नजर आ रही हैं। वीडियो में वह तलवार की मदद से चिता से कथित मानव अवशेष निकालकर उसे खाने का दावा करती दिखाई देती हैं। वीडियो सामने आने के बाद संत समाज ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है।

    बताया गया है कि उक्त वीडियो काली उर्फ नंद गिरि ने अपने इंस्टाग्राम खाते पर साझा किया था। वीडियो में वह जलती चिता के सामने तलवार लेकर तांत्रिक क्रिया करती दिखाई देती हैं। इसके बाद वह तलवार से चिता के भीतर से कथित मानव अंग का अवशेष निकालती हैं और कैमरे के सामने उसे खाने का दावा करती हैं।

    वीडियो में किन्नर साधक यह कहते हुए भी सुनाई देती हैं कि गर्म अवस्था में मानव शरीर का हिस्सा खाना हर किसी के बस की बात नहीं है और यह उनके लिए रोजमर्रा की साधना का हिस्सा है। वीडियो के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद लोगों में नाराजगी देखी जा रही है और मामले में कार्रवाई की मांग उठ रही है।

    संत समाज ने कहा है कि अघोर एवं तांत्रिक साधना की अपनी परंपराएं और मर्यादाएं होती हैं। ऐसी साधनाओं को सार्वजनिक प्रदर्शन या प्रचार का माध्यम बनाना उचित नहीं है। संतों का कहना है कि इस प्रकार के वीडियो से धार्मिक परंपराओं को लेकर समाज में गलत संदेश जाता है।

    महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरि ने कहा कि अघोर साधना की अपनी मर्यादा है और तांत्रिक क्रियाओं का सार्वजनिक प्रदर्शन उचित नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, वैदिक परंपराओं के नाम पर इस तरह की गतिविधियों का प्रचार-प्रसार स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि निजी प्रसिद्धि और प्रचार के लिए ऐसी गतिविधियों को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने से समाज में गलत संदेश जाता है। उन्होंने प्रशासन से मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।

    इधर, अघोरी अखाड़े के पीठाधीश्वर एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़ेश्वरी अघोरी बाबा विष्णुनाथ ने भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि वीडियो में एक महिला जलती चिता के पास धारदार हथियार लेकर चिता की सामग्री और कथित मानव अवशेषों से छेड़छाड़ करती दिखाई दे रही है।

    शिकायतकर्ता के अनुसार, यदि वीडियो में दिखाई दे रही सामग्री वास्तव में मानव शव के अवशेष हैं और उनके साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई है, तो यह भारतीय न्याय संहिता की धारा 301 के अंतर्गत अपराध के दायरे में आ सकता है। शिकायत में पुलिस से वीडियो की सत्यता की जांच कराने तथा तथ्य सामने आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की गई है।

    वीडियो के वायरल होने के बाद चक्रतीर्थ श्मशान घाट की सुरक्षा और वहां होने वाली कथित तांत्रिक गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, वायरल वीडियो में किए गए दावों और उसमें दिखाई दे रही सामग्री की वास्तविक प्रकृति की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

  • MP के 1 लाख 22 हजार विद्यार्थियों को कल मिलेंगे 25-25 हजार रुपये

    MP के 1 लाख 22 हजार विद्यार्थियों को कल मिलेंगे 25-25 हजार रुपये


    भोपाल। कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में 75 प्रतिशत या अधिक अंक पाने वाले प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों का आधुनिक तकनीक से जुड़ने का सपना जल्द ही पूरा होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के लगभग 1 लाख 22 हजार विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रुपये की राशि का अंतरण करेंगे। विद्यार्थियों को यह राशि 1 सितंबर को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर
    , भोपाल में आयोजित लैपटॉप क्रय के लिये राशि वितरण कार्यक्रम के दौरान प्रदान की जाएगी।

    प्रदेश सरकार द्वारा विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने और उन्हें डिजिटल तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना चलाई जा रही है। इसके अंतर्गत कक्षा 12वीं की परीक्षा में पहले ही प्रयास में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को लैपटॉप खरीदने के लिए 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।

    प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा का संबल

    प्रदेश सरकार द्वारा योजना के अंतर्गत इस वर्ष प्रदेश के लगभग 1 लाख 22 हजार विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जा रहा है। प्रत्येक विद्यार्थी के खाते में 25 हजार रुपये की राशि अंतरित की जाएगी। इस प्रकार विद्यार्थियों को कुल 304 करोड़ 98 लाख 50 हजार रुपये से अधिक की राशि का अंतरण किया जाएगा।

    उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार की यह पहल प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आवश्यक डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लैपटॉप के माध्यम से विद्यार्थी ऑनलाइन अध्ययन, डिजिटल पाठ्य सामग्री, ई-लर्निंग और अन्य तकनीकी संसाधनों का उपयोग कर अपनी शिक्षा को और बेहतर बना सकेंगे।

  • चित्रकूट में लगातार बारिश से मंदाकिनी खतरे के निशान से ऊपर, रामघाट पर जाने पर रोक, 2 दिन स्कूल बंद

    चित्रकूट में लगातार बारिश से मंदाकिनी खतरे के निशान से ऊपर, रामघाट पर जाने पर रोक, 2 दिन स्कूल बंद

    मध्‍य प्रदेश। चित्रकूट में लगातार बारिश के चलते मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। सोमवार को रामघाट पर नदी खतरे के निशान से करीब दो मीटर ऊपर बहती रही। सतना के पहाड़ी इलाकों और चित्रकूट में हुई बारिश का असर नदी के जलस्तर पर पड़ा। बाढ़ का पानी रामघाट के आसपास स्थित मठ-मंदिरों तक पहुंच गया। भरत मंदिर परिसर में भी पानी घुसने से फर्श पर मलबा जमा हो गया है।

    बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने रामघाट पर बैरिकेडिंग कर लोगों को नदी और घाट क्षेत्र की ओर जाने से रोक दिया है। कई मठ-मंदिरों के निचले हिस्से पानी में डूब गए हैं। पानी कम होने के बाद मंदिरों और घाट क्षेत्र में जमा मलबे की सफाई शुरू करा दी गई है।

    भरत मंदिर में घुसा पानी, मलबे की सफाई शुरू
    मंदाकिनी का पानी भरत मंदिर परिसर में भी पहुंच गया। पानी के साथ बहकर आया मलबा मंदिर के अंदर फर्श पर जमा हो गया। जलस्तर कम होने के बाद मंदिर परिसर में सफाई का काम शुरू कराया गया। आसपास के मठ-मंदिरों में भी पानी और मलबे के कारण सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। प्रशासन की ओर से रामघाट और आसपास के संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है। लोगों को नदी के बढ़े जलस्तर से दूर रहने की हिदायत दी जा रही है।

    सड़क-रास्ते जलमग्न, प्री-प्राइमरी से कक्षा 8 तक स्कूल बंद
    लगातार बारिश और बाढ़ के कारण जिले के कई इलाकों में सड़क और रास्ते जलमग्न हो गए हैं। नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने से आवागमन भी प्रभावित हुआ है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए डीएम पुलकित गर्ग के आदेश पर 31 अगस्त और 1 सितंबर को जिले के सभी सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी से कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों का अवकाश घोषित किया गया है।

    जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रंजना शुक्ला ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। प्रशासन के अनुसार जलभराव और तेज बहाव के बीच छोटे बच्चों का स्कूल आना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए दो दिन के लिए अवकाश किया गया है।

    छात्रों की छुट्टी, शिक्षक पहुंचेंगे स्कूल
    बीएसए रंजना शुक्ला के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अवकाश केवल छात्र-छात्राओं के लिए है। स्कूलों में पदस्थ शिक्षक और शिक्षिकाएं निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचेंगे और विभागीय एवं अन्य आवश्यक सरकारी कार्य करेंगे। सभी विद्यालय प्रबंधनों को आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है कि बारिश और अवकाश के दौरान बच्चों को जलभराव वाले इलाकों, नदी-नालों और तेज बहाव वाले पानी के पास न जाने दें।

    फिलहाल प्रशासन की नजर मंदाकिनी के जलस्तर और बारिश की स्थिति पर बनी हुई है। रामघाट पर बैरिकेडिंग के साथ संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है। पानी उतरने के बाद घाट और मंदिर क्षेत्रों में जमा मलबे की सफाई कर स्थिति सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा है।

  • 3200 करोड़ की निवेश ठगी के आरोपी लविश चौधरी को दुबई से लाने की तैयारी तेज! MP STF ने तैयार किए 200 दस्तावेज

    3200 करोड़ की निवेश ठगी के आरोपी लविश चौधरी को दुबई से लाने की तैयारी तेज! MP STF ने तैयार किए 200 दस्तावेज


    भोपाल । निवेश के नाम पर देशभर में करीब 3200 करोड़ रुपए की ठगी के आरोपी लविश उर्फ लविश चौधरी को दुबई से भारत लाने के लिए मध्य प्रदेश एसटीएफ ने प्रत्यर्पण की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है। विदेश में छिपे किसी आरोपी को वापस भारत लाने के लिए मध्य प्रदेश की किसी जांच एजेंसी की ओर से की जा रही यह पहली बड़ी प्रत्यर्पण कवायद बताई जा रही है। लविश के खिलाफ पहले ब्लू नोटिस और उसके बाद रेड नोटिस जारी कराया जा चुका है। ब्लू नोटिस के जरिए एसटीएफ को उसके दुबई में होने और उसकी लोकेशन की पुष्टि करने में मदद मिली। अब जांच एजेंसी का अगला लक्ष्य आरोपी को दुबई से भारत लाकर भारतीय न्यायिक प्रक्रिया के सामने पेश करना है।

    एसटीएफ ने प्रत्यर्पण की कार्रवाई के लिए केस से जुड़े करीब 200 दस्तावेज अरबी भाषा में तैयार कराए हैं। इन दस्तावेजों को सत्यापन के लिए इंदौर जिला एवं सत्र न्यायालय भेजा गया है। कानूनी प्रक्रिया के तहत उस अदालत से दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी है जहां आरोपी के खिलाफ चालान पेश किया गया है। एसटीएफ के डीआईजी राहुल लोढ़ा के मुताबिक अदालत से सत्यापन और मंजूरी मिलने के बाद अगले 15 दिनों में पूरी फाइल दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय भेजी जाएगी। इसके बाद दस्तावेज राज्य स्तरीय प्रक्रिया से गुजरते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय तक पहुंचेंगे और इन्हीं माध्यमों से प्रत्यर्पण का अनुरोध संयुक्त अरब अमीरात के संबंधित प्राधिकरण या अदालत के सामने रखा जाएगा।

    भारत और यूएई के बीच वर्ष 1999 से प्रत्यर्पण संधि लागू है। इसी संधि के तहत तय शर्तों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार किसी आरोपी के प्रत्यर्पण के अनुरोध पर कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में लविश को भारत लाने की प्रक्रिया अब अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंचने वाली है। इस मामले में एसटीएफ अब तक करीब 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसी का फोकस अब विदेश में मौजूद मुख्य आरोपी तक पहुंचने पर है।

    प्रत्यर्पण के लिए तैयार की गई फाइल में आरोपी के खिलाफ दर्ज एफआईआर केस डायरी जांच के दौरान सामने आए साक्ष्य अदालत से जुड़े दस्तावेज और अन्य जरूरी रिकॉर्ड शामिल किए गए हैं। एसटीएफ के अनुसार मूल केस डायरी और ज्यादातर रिकॉर्ड हिंदी में हैं। यूएई की कानूनी प्रक्रिया में दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए इनका अरबी भाषा में अनुवाद कराया गया है। इसके साथ ही अंग्रेजी भाषा की कॉपी भी तैयार की गई है। इस तरह भारतीय जांच से जुड़े दस्तावेजों को यूएई की कानूनी व्यवस्था के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।

    लविश की तलाश में एसटीएफ ने सबसे पहले ब्लू नोटिस का सहारा लिया था। जांच एजेंसी के मुताबिक ब्लू नोटिस के जरिए किसी व्यक्ति की पहचान उसकी लोकेशन या उसकी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी हासिल करने में मदद मिलती है। इसी प्रक्रिया के दौरान एसटीएफ को इनपुट मिला कि लविश अपने पासपोर्ट के जरिए दुबई पहुंचा था और इसके बाद उसके बाहर निकलने का कोई रिकॉर्ड सामने नहीं आया। इस जानकारी के आधार पर उसके दुबई में मौजूद होने की पुष्टि की गई।

    इसके बाद एसटीएफ ने उसके खिलाफ रेड नोटिस जारी कराया। रेड नोटिस किसी वांछित व्यक्ति की तलाश और प्रत्यर्पण या इसी तरह की कानूनी कार्रवाई के लिए अस्थायी गिरफ्तारी का अनुरोध होता है। हालांकि रेड नोटिस अपने आप में अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं होता और जिस देश में आरोपी मौजूद है वहां की कानून व्यवस्था के मुताबिक ही आगे की कार्रवाई होती है।

    अब लविश के मामले में एसटीएफ ने लोकेशन की पुष्टि से आगे बढ़ते हुए प्रत्यर्पण की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। अदालत से दस्तावेजों के सत्यापन के बाद फाइल सीबीआई मुख्यालय पहुंचेगी और फिर केंद्रीय गृह मंत्रालय तथा विदेश मंत्रालय के जरिए यूएई के संबंधित प्राधिकरण तक मामला पहुंचेगा। इसके बाद दुबई में आरोपी के प्रत्यर्पण को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

  • 3 हजार से 4-5 हजार रुपए तक ही अटका वेतन: 23 साल बाद भी नियमितीकरण नहीं, 7 सितंबर को BJP ऑफिस पहुंचकर कर्मचारी मांगेंगे हक

    3 हजार से 4-5 हजार रुपए तक ही अटका वेतन: 23 साल बाद भी नियमितीकरण नहीं, 7 सितंबर को BJP ऑफिस पहुंचकर कर्मचारी मांगेंगे हक


    भोपाल । मध्य प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में वर्षों से काम कर रहे अस्थायी और अंशकालीन कर्मचारियों ने अब अपनी मांगों को लेकर सरकार और भाजपा संगठन के सामने मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। स्कूलों छात्रावासों पंचायतों अस्पतालों और नगरीय निकायों समेत अलग अलग विभागों में सेवाएं दे रहे सैकड़ों कर्मचारी 7 सितंबर को भोपाल स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचेंगे। कर्मचारी संगठन का कहना है कि वे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को वर्ष 2003 में किए गए उस वादे की याद दिलाएंगे जिसमें अस्थायी कर्मचारियों को नियमित कर शासकीय सेवक का दर्जा देने की बात कही गई थी। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के सामने धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को अनिश्चितकालीन धरना अनशन में बदला जा सकता है।

    अस्थायी आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा की ओर से भाजपा संगठन को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2003 का विधानसभा चुनाव अस्थायी कर्मचारियों के मुद्दे पर लड़ा गया था। संगठन के मुताबिक उस समय तत्कालीन भाजपा नेता उमा भारती ने कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में वल्लभ भवन के सामने अनिश्चितकालीन धरना दिया था। प्रदेशभर में यात्राएं कर अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने और उन्हें शासकीय सेवक का दर्जा देने का वादा भी किया गया था। कर्मचारियों का कहना है कि उस समय से अब तक करीब 23 साल बीत चुके हैं लेकिन उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

    कर्मचारी नेताओं के मुताबिक सरकारी विभागों के नियमित कर्मचारियों की तरह ही अस्थायी और अंशकालीन कर्मचारी भी लंबे समय से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। स्कूलों और छात्रावासों में सफाई खाना बनाने और भृत्य के काम से लेकर पंचायतों में चौकीदारी नल जल व्यवस्था अस्पतालों में विभिन्न सेवाओं नगरीय निकायों में सफाई और टैक्स वसूली जैसे काम भी इन कर्मचारियों से कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें बेहद कम मानदेय या वेतन मिलने का आरोप संगठन ने लगाया है।

    मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा का कहना है कि 2003 में अंशकालीन कर्मचारियों को करीब 3 हजार रुपए मिलते थे जबकि आज भी कई कर्मचारियों को महज 4 से 5 हजार रुपए ही मिल रहे हैं। इसी तरह पंचायतों के चौकीदार और नल जल कर्मचारी उस समय करीब 2 हजार रुपए पाते थे और वर्तमान में भी कई कर्मचारियों का भुगतान 2 से 3 हजार रुपए के आसपास होने का दावा किया गया है। संगठन का कहना है कि 23 साल में महंगाई कई गुना बढ़ गई लेकिन हजारों कर्मचारियों की आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई।

    कर्मचारी नेताओं ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से अस्थायी कर्मचारियों का वेतन दोगुना करने की घोषणा का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि यह घोषणा भी पूरी तरह लागू नहीं हो सकी। अब संगठन सरकार द्वारा निर्धारित 12,425 रुपए न्यूनतम वेतन दिए जाने की मांग कर रहा है।

    कर्मचारी संगठन ने आंदोलन को दो चरणों में रखने की जानकारी दी है। स्कूलों छात्रावासों और विभिन्न विभागों में काम करने वाले अंशकालीन कर्मचारी 7 सितंबर को भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचकर अपनी मांग रखेंगे जबकि ग्राम पंचायतों के चौकीदार नल जल चालक और अन्य कर्मचारी 8 सितंबर को संगठन के सामने अपनी बात रखेंगे। कर्मचारियों ने सरकार के 1.62 लाख रुपए प्रति व्यक्ति वार्षिक आय के दावे पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि जब बड़ी संख्या में कर्मचारी बेहद कम मासिक आय में काम कर रहे हैं तो उनके जीवन यापन और आर्थिक सुरक्षा पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

    अब कर्मचारियों की नजर 7 और 8 सितंबर को होने वाले प्रदर्शन पर है। संगठन का कहना है कि वह सरकार से केवल आश्वासन नहीं बल्कि न्यूनतम वेतन और स्थायीकरण को लेकर स्पष्ट निर्णय चाहता है। मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो भाजपा कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना अनशन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।

  • आतंकवादियों की बहन बयान पर विजय शाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: अभियोजन मंजूरी का फैसला राज्यपाल के पास, कोर्ट ने कहा रिपोर्ट पेश करें

    आतंकवादियों की बहन बयान पर विजय शाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: अभियोजन मंजूरी का फैसला राज्यपाल के पास, कोर्ट ने कहा रिपोर्ट पेश करें


    भोपाल । मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह से जुड़े विवादित बयान के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए बयान के बाद दर्ज FIR को चुनौती देने वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच और अभियोजन मंजूरी की स्थिति पर जानकारी ली। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के सामने सरकार की ओर से बताया गया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और जांच रिपोर्ट फिलहाल सीलबंद है। अब चार्जशीट या क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने से पहले सक्षम प्राधिकारी से अभियोजन की मंजूरी लेना जरूरी है। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले में कैबिनेट स्तर पर विचार हो चुका है और फाइल अंतिम निर्णय के लिए राज्यपाल के पास भेजी गई है।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच की स्थिति को लेकर स्पष्ट सवाल किया कि जब जांच रिपोर्ट पूरी तरह तैयार है तो क्या अब केवल सरकार की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। सरकार की ओर से इसकी पुष्टि की गई। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने बताया कि कैबिनेट इस विषय पर विचार कर चुकी है और फाइल राज्यपाल के पास भेजी गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस पर अंतिम निर्णय हो जाएगा। सरकार की ओर से मंत्री के माफीनामे का भी हवाला दिया गया। अदालत से अनुरोध किया गया कि सक्षम प्राधिकारी जब मामले पर विचार करे तो विजय शाह की ओर से घटना के अगले दिन सार्वजनिक रूप से मांगी गई माफी को भी ध्यान में रखा जाए।

    विजय शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने भी अदालत के सामने यही बात रखी कि मंत्री ने बयान के बाद माफी मांग ली थी और इस तथ्य को रिकॉर्ड पर लिया जाना चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले के गुण दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की। अदालत ने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट सीलबंद है। अभियोजन मंजूरी का विषय फिलहाल सक्षम प्राधिकारी के सामने लंबित है। मंजूरी मिलने के बाद सीलबंद रिपोर्ट को संबंधित सक्षम अदालत के सामने पेश किया जाएगा।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच अधिकारी और DIG इंटेलिजेंस डी कल्याण चक्रवर्ती की भूमिका को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी अपना काम पूरा कर चुके हैं इसलिए उन्हें बार बार व्यक्तिगत रूप से अदालत में आने की जरूरत नहीं है। अब सक्षम प्राधिकारी के फैसले के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि अभियोजन की मंजूरी नहीं मिलती है तो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने की बात भी अदालत के सामने रखी गई।

    मामला मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह की उस टिप्पणी से जुड़ा है जो उन्होंने 11 मई 2025 को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में हलमा कार्यक्रम के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की थी। ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में दिए गए बयान में उन्होंने कर्नल सोफिया को आतंकवादियों की बहन कहकर टिप्पणी की थी। बयान सामने आने के बाद इस पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले का स्वत संज्ञान लिया था और बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया।

    इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले भी मध्य प्रदेश सरकार के रुख पर नाराजगी जता चुका है। अभियोजन की मंजूरी में देरी को लेकर अदालत ने सरकार को सख्त चेतावनी दी थी और कहा था कि उसके निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। पिछली सुनवाई में मंत्री की ओर से कई बार माफी मांगे जाने की दलील भी दी गई थी लेकिन अदालत ने इसे पर्याप्त नहीं माना था।

    अब पूरा मामला अभियोजन की मंजूरी पर टिक गया है। मध्य प्रदेश कैबिनेट ने मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं देने का प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा है। राज्यपाल के निर्णय के बाद ही यह तय होगा कि सीलबंद जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे अभियोजन की कार्रवाई होगी या मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।