Category: Madhya Pradesh

  • देवास में दर्दनाक सड़क हादसा: स्कॉर्पियो पलटने से बुआ-भतीजे की मौत, दो मासूम समेत 10 घायल

    देवास में दर्दनाक सड़क हादसा: स्कॉर्पियो पलटने से बुआ-भतीजे की मौत, दो मासूम समेत 10 घायल


    मध्य प्रदेश । देवास जिले के सोनकच्छ क्षेत्र में बुधवार दोपहर एक भीषण सड़क हादसे ने खुशियों से भरे परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया। इंदौर से भोपाल लौट रही एक स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर पलट गई, जिससे वाहन में सवार दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य घायल हो गए। मृतकों में बुआ और भतीजा शामिल हैं। हादसे के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों की मदद से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।

    जानकारी के अनुसार दुर्घटना बुधवार दोपहर करीब दो बजे हुई। स्कॉर्पियो वाहन में सवार परिवार इंदौर से भोपाल की ओर जा रहा था। रास्ते में सोनकच्छ के पास अचानक वाहन का संतुलन बिगड़ गया और स्कॉर्पियो सड़क पर कई बार पलटते हुए दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसा इतना भीषण था कि वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

    दुर्घटना में इंदौर निवासी मयूरेश गर्ग और उनकी बुआ संगीता अग्रवाल की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि दोनों परिवार के साथ यात्रा कर रहे थे। मयूरेश गर्ग सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े हुए थे तथा भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में भी उनकी पहचान थी। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई।

    हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, एंबुलेंस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए। वाहन में फंसे घायलों को बाहर निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। राहगीरों और ग्रामीणों की मदद से सभी घायलों को तत्काल सोनकच्छ अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद कुछ घायलों को बेहतर इलाज के लिए रेफर किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

    घायलों में सुनील अग्रवाल, प्रखर अग्रवाल, रिमी अग्रवाल, पलक अग्रवाल, सुरभि अग्रवाल, स्वप्निल गर्ग, शर्मिला गर्ग, कनव गर्ग और दो छोटे बच्चे शामिल हैं। इनमें एक डेढ़ साल की बच्ची और दो वर्ष का बालक भी है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका उपचार जारी है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद स्कॉर्पियो सड़क किनारे पलटी हुई अवस्था में पड़ी थी। वाहन के परखच्चे उड़ गए थे। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और घायलों को बाहर निकालने में मदद की। समय रहते राहत कार्य शुरू होने से कई लोगों की जान बचाई जा सकी।

    हादसे की जानकारी मिलते ही पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय भी सोनकच्छ अस्पताल पहुंचे और घायलों का हालचाल जाना। उन्होंने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की तथा प्रशासन को घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश देने की बात कही।

    पुलिस ने दुर्घटना का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर वाहन के अनियंत्रित होने को हादसे की वजह माना जा रहा है, हालांकि वास्तविक कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि दुर्घटना तेज रफ्तार, सड़क की स्थिति या किसी तकनीकी खराबी के कारण हुई।

    यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और सावधानीपूर्वक वाहन चलाने की आवश्यकता की याद दिलाता है। परिवार के लिए यह यात्रा एक दर्दनाक त्रासदी में बदल गई, जिसने दो जिंदगियां छीन लीं और कई लोगों को घायल कर दिया।

  • पाटन कृषि मंडी में 80 क्विंटल मूंग की चोरी, ट्रक बाहर ले जाकर खाली किया और फिर वापस खड़ा कर गए बदमाश

    पाटन कृषि मंडी में 80 क्विंटल मूंग की चोरी, ट्रक बाहर ले जाकर खाली किया और फिर वापस खड़ा कर गए बदमाश


    मध्य प्रदेश । जबलपुर जिले की पाटन कृषि उपज मंडी में एक हैरान कर देने वाली चोरी की वारदात सामने आई है, जिसने मंडी प्रशासन, व्यापारियों और किसानों सभी को चिंता में डाल दिया है। अज्ञात बदमाशों ने मंडी परिसर में खड़े एक ट्रक से करीब 80 क्विंटल मूंग चोरी कर ली। वारदात को अंजाम देने का तरीका इतना सुनियोजित था कि शुरुआत में किसी को चोरी होने का अंदाजा तक नहीं हुआ। आरोपियों ने पहले ट्रक को मंडी से बाहर निकाला, उसमें भरी पूरी मूंग दूसरे वाहन में उतारी और फिर खाली ट्रक को वापस उसी स्थान पर लाकर खड़ा कर दिया।

    जानकारी के अनुसार पाटन निवासी अनाज व्यापारी विकास अग्रवाल ने किसानों से 134 बोरी मूंग खरीदी थी। कुल मिलाकर यह लगभग 80 क्विंटल मूंग थी, जिसकी कीमत करीब साढ़े चार लाख रुपए बताई जा रही है। खरीदा गया अनाज एक ट्रक में लोड कर मंडी परिसर में खड़ा किया गया था। व्यापारी का इरादा अगले दिन सुबह इस माल को जबलपुर भेजने का था, इसलिए सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रक को मंडी परिसर में ही रखा गया था।

    लेकिन 16 जून की सुबह जब व्यापारी मंडी पहुंचे तो उनके होश उड़ गए। ट्रक अपनी जगह पर खड़ा था, लेकिन उसमें रखा पूरा अनाज गायब था। पहले तो उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर माल कहां गया, लेकिन जांच करने पर पता चला कि ट्रक पूरी तरह खाली है। इसके बाद तुरंत मंडी प्रबंधन और पुलिस को सूचना दी गई।

    शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मंडी परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू किया। फुटेज में रात करीब एक से दो बजे के बीच कुछ संदिग्ध लोग ट्रक को मंडी से बाहर ले जाते दिखाई दिए हैं। प्रारंभिक जांच में पुलिस को आशंका है कि आरोपियों ने पहले ट्रक को मंडी से बाहर निकाला, फिर किसी सुनसान स्थान पर ले जाकर उसमें भरी मूंग दूसरे वाहन में शिफ्ट कर दी। इसके बाद शक से बचने के लिए खाली ट्रक को वापस उसी स्थान पर लाकर खड़ा कर दिया गया।

    इस पूरी घटना ने मंडी की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मंडी प्रबंधन का कहना है कि परिसर में चौबीस घंटे सुरक्षा कर्मी तैनात रहते हैं। घटना वाली रात भी चौकीदार अपनी ड्यूटी पर मौजूद थे। हालांकि पूछताछ में चौकीदारों ने बताया कि वे उस समय मंडी परिसर के बाहर गश्त कर रहे थे, जिसका फायदा उठाकर बदमाश अंदर घुस गए और वारदात को अंजाम दे दिया।

    पाटन थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी जी.एस. राजपूत के अनुसार सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्धों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रही है और जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने का दावा कर रही है।

    स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि पाटन कृषि उपज मंडी में इस प्रकार की चोरी की घटना पहले कभी सामने नहीं आई। रोजाना बड़ी मात्रा में कृषि उपज की खरीदी-बिक्री होती है और सैकड़ों वाहन मंडी में आते-जाते हैं। ऐसे में इस घटना ने व्यापारियों और किसानों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी हुई है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर चोरी गई मूंग बरामद की जाएगी।

  • नीट परीक्षा के लिए जबलपुर तैयार, 23 केंद्रों पर 10 हजार से अधिक छात्र देंगे परीक्षा; राष्ट्रपति और CM के दौरे के बीच विशेष इंतजाम

    नीट परीक्षा के लिए जबलपुर तैयार, 23 केंद्रों पर 10 हजार से अधिक छात्र देंगे परीक्षा; राष्ट्रपति और CM के दौरे के बीच विशेष इंतजाम


    मध्य प्रदेश । राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) को लेकर जबलपुर जिला प्रशासन ने व्यापक स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली हैं। 21 जून को आयोजित होने वाली इस महत्वपूर्ण परीक्षा में जिले के 23 केंद्रों पर 10 हजार से अधिक छात्र शामिल होंगे। परीक्षा की निष्पक्षता, सुरक्षा और छात्रों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने कई विशेष इंतजाम किए हैं। खास बात यह है कि इसी दिन राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री का भी प्रस्तावित दौरा है, जिसके चलते प्रशासन ने परीक्षा और वीवीआईपी मूवमेंट दोनों को ध्यान में रखते हुए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है।

    नीट परीक्षा देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हाल ही में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे विवादों और परीक्षा रद्द होने की घटनाओं के बाद इस बार सुरक्षा और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार सभी परीक्षा केंद्रों पर कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं।

    जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में 23 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां कुल 10,426 विद्यार्थी परीक्षा देंगे। छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए पहली बार प्रशासन की ओर से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई है। शहर के पेंटीनाका चौक से दोपहर 12 बजे तक विद्यार्थियों के लिए विशेष बस सेवा उपलब्ध रहेगी, जिससे दूर-दराज से आने वाले छात्रों को राहत मिलेगी।

    परीक्षा के दौरान गर्मी और मौसम की चुनौतियों को देखते हुए भी विशेष प्रबंध किए गए हैं। सभी परीक्षा केंद्रों पर निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। परीक्षा कक्षों में पंखों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है ताकि छात्र आरामदायक वातावरण में परीक्षा दे सकें। वहीं परीक्षा केंद्रों के बाहर अभिभावकों के बैठने के लिए अस्थायी शेड तैयार किए जा रहे हैं, जहां कूलर, पंखे और पेयजल की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

    प्रशासन ने अभिभावकों के लिए अस्थायी कैंटीन की भी व्यवस्था की है। परीक्षा के दौरान कई घंटों तक बाहर इंतजार करने वाले परिजनों को भोजन और नाश्ते की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    सुरक्षा के लिहाज से भी इस बार विशेष सतर्कता बरती जा रही है। परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे, बायोमैट्रिक मशीनें और जैमर लगाए जाएंगे। प्रशासन के अनुसार 19 जून तक सभी उपकरण स्थापित कर दिए जाएंगे, जबकि 20 जून को उनका अंतिम परीक्षण किया जाएगा। परीक्षा केंद्रों की निगरानी लगातार की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनुचित गतिविधि को रोका जा सके।

    इस बार एक और बड़ी चुनौती प्रशासन के सामने है। 21 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री मोहन यादव का भी जबलपुर दौरा प्रस्तावित है। ऐसे में परीक्षा केंद्रों तक छात्रों की सुगम आवाजाही और वीवीआईपी मूवमेंट के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक और सुरक्षा योजना तैयार की गई है। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सभी संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

    प्रशासन का दावा है कि इस बार नीट परीक्षा को पूरी पारदर्शिता, सुरक्षा और बेहतर व्यवस्थाओं के साथ संपन्न कराया जाएगा। छात्रों और अभिभावकों की सुविधा को केंद्र में रखते हुए किए गए ये इंतजाम परीक्षा दिवस को सुचारु और सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • उज्जैन में महामंडलेश्वर ज्ञानदास की कार पर देर रात पथराव, बोले- लगातार परेशान किया गया तो भू-समाधि लेने को हो जाऊंगा मजबूर

    उज्जैन में महामंडलेश्वर ज्ञानदास की कार पर देर रात पथराव, बोले- लगातार परेशान किया गया तो भू-समाधि लेने को हो जाऊंगा मजबूर


    मध्य प्रदेश । धार्मिक नगरी उज्जैन में मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात एक चिंताजनक घटना सामने आई, जब श्री पंच निर्मोही अणि अखाड़े के महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज की कार पर अज्ञात युवकों ने पथराव कर दिया। इस घटना में महामंडलेश्वर तो सुरक्षित बच गए, लेकिन उनकी स्कॉर्पियो वाहन के शीशे टूट गए। घटना के बाद उन्होंने महाकाल थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज देवास से लौटकर अपने सदावल रोड स्थित आश्रम जा रहे थे। रात करीब 12:30 बजे जब उनका वाहन हनुमानगढ़ी क्षेत्र से गुजर रहा था, तभी कुछ अज्ञात युवकों ने उनकी कार को रोकने का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि वाहन चालक ने सुरक्षा कारणों से गाड़ी नहीं रोकी और आगे बढ़ने की कोशिश की। इसी दौरान युवकों ने कार पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया।

    अचानक हुए इस हमले से वाहन में सवार लोग घबरा गए। पथराव के कारण स्कॉर्पियो के आगे के कांच क्षतिग्रस्त हो गए। हालांकि सौभाग्य से वाहन में मौजूद किसी व्यक्ति को गंभीर चोट नहीं आई और महामंडलेश्वर भी पूरी तरह सुरक्षित रहे। घटना के बाद वे सीधे महाकाल थाने पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी।

    महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज ने घटना को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब उन्हें परेशान करने की कोशिश की गई हो। उनका कहना है कि लगातार इस तरह की घटनाएं होने से वे मानसिक रूप से व्यथित हैं। उन्होंने भावुक होकर कहा कि यदि इसी तरह उन्हें परेशान किया जाता रहा तो उन्हें उज्जैन छोड़कर किसी अन्य तीर्थस्थल में जाना पड़ सकता है या फिर वे भू-समाधि लेने जैसा कठोर निर्णय लेने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

    महामंडलेश्वर के अनुसार हमलावरों की संख्या चार थी। पहले उन्होंने वाहन को रुकवाने की कोशिश की और जब वाहन नहीं रुका तो पथराव शुरू कर दिया। घटना रात के अंधेरे में हुई, इसलिए वे हमलावरों की पहचान नहीं कर सके। इससे पुलिस के सामने आरोपियों तक पहुंचने की चुनौती भी बढ़ गई है।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई। महाकाल थाना पुलिस ने शिकायत दर्ज कर आसपास के क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल और आसपास के मार्गों की रिकॉर्डिंग की जांच की जा रही है, ताकि संदिग्ध युवकों की पहचान कर जल्द से जल्द उन्हें पकड़ा जा सके।

    धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए देशभर में प्रसिद्ध उज्जैन में किसी संत-महात्मा के साथ इस प्रकार की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों और संत समाज ने भी घटना पर चिंता जताई है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

    फिलहाल पुलिस विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उचित कार्रवाई की जाएगी। वहीं संत समाज इस घटना को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रहा है।

  • महिदपुर में CM मोहन यादव का कांग्रेस पर तीखा हमला, बोले- नौसिखिए को कमान दी, गाड़ी ठोके तो हम क्या करें

    महिदपुर में CM मोहन यादव का कांग्रेस पर तीखा हमला, बोले- नौसिखिए को कमान दी, गाड़ी ठोके तो हम क्या करें


    मध्य प्रदेश । उज्जैन जिले के महिदपुर और डेलनपुर क्षेत्र बुधवार को विकास और राजनीति दोनों के केंद्र बने रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यहां करीब 207 करोड़ रुपए की लागत से तैयार विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और जनता को समर्पण किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जहां प्रदेश सरकार की विकास योजनाओं और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई, वहीं कांग्रेस पर भी जमकर राजनीतिक हमला बोला।

    मुख्यमंत्री ने महिदपुर में 188.42 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित सामाकोटा बैराज का लोकार्पण किया। इस परियोजना से क्षेत्र के 18 गांवों के लगभग 11 हजार किसान परिवारों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा। लंबे समय से पानी की समस्या झेल रहे किसानों के लिए यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से खेती अधिक लाभकारी बनेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

    लोकार्पण कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक तेज बहादुर सिंह, विधायक सतीश मालवीय, महापौर मुकेश टटवाल सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उच्च शिक्षा, स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य और ऊर्जा विभाग से जुड़े कई निर्माण कार्यों का भी लोकार्पण किया। इनमें महाविद्यालय भवन, कन्या विद्यालय भवन, विद्युत उपकेंद्र और उप स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं।

    इससे पहले मुख्यमंत्री डेलनपुर बालाजी धाम पहुंचे, जहां उन्होंने नव निर्मित मंदिर में ध्वज स्थापना, कलश प्रतिष्ठा और श्री राम दरबार प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में भाग लिया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम भारतीय संस्कृति और आदर्श शासन व्यवस्था के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के मन में रामराज्य जैसी व्यवस्था और भगवान श्रीराम जैसे आदर्श परिवार की कामना रहती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के बाद अब चित्रकूट धाम को भी भव्य स्वरूप देने की दिशा में सरकार कार्य कर रही है। उन्होंने प्रदेश के उन सभी स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित करने की बात कही, जहां भगवान श्रीराम के चरण पड़े थे।

    मुख्यमंत्री ने डेलनपुर बालाजी धाम के फर्श और बाउंड्री वॉल निर्माण की घोषणा भी की। साथ ही प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई योजनाओं पर जोर दिया।

    राजनीतिक रूप से कार्यक्रम उस समय चर्चा में आ गया जब मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और उसके नेतृत्व पर तीखे तंज कसे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने एक नौसिखिए को पार्टी की कमान सौंप दी है। यदि वह गाड़ी को आगे बढ़ाने के बजाय पीछे ले जाकर ठोक दे तो उसके लिए कोई और जिम्मेदार नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए कांग्रेस नेतृत्व और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम पर कटाक्ष किया। उन्होंने लाड़ली बहना योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं के हित में कभी कोई ठोस काम नहीं किया, जबकि प्रदेश सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने दावा किया कि आने वाले समय में महिदपुर के डोंगला क्षेत्र की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी तथा यह क्षेत्र वैज्ञानिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरेगा। विकास कार्यों और राजनीतिक बयानबाजी के बीच महिदपुर का यह कार्यक्रम प्रदेश की राजनीति और विकास दोनों के लिहाज से चर्चा का विषय बन गया।

  • उज्जैन में महामंडलेश्वर ज्ञानदास की कार पर हमला: देर रात चार युवकों ने किया पथराव, संत ने जताई सुरक्षा को लेकर चिंता

    उज्जैन में महामंडलेश्वर ज्ञानदास की कार पर हमला: देर रात चार युवकों ने किया पथराव, संत ने जताई सुरक्षा को लेकर चिंता


    मध्य प्रदेश । धार्मिक नगरी उज्जैन में मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात एक चिंताजनक घटना सामने आई, जब श्री पंच निर्मोही अणि अखाड़े के महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज की कार पर अज्ञात युवकों ने पथराव कर दिया। घटना में महामंडलेश्वर सुरक्षित रहे, लेकिन उनकी स्कॉर्पियो वाहन के कांच क्षतिग्रस्त हो गए। घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

    जानकारी के अनुसार महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज देवास से अपने सदावल रोड स्थित आश्रम लौट रहे थे। रात करीब साढ़े बारह बजे जब उनका वाहन हनुमानगढ़ी क्षेत्र के पास पहुंचा, तभी कुछ अज्ञात युवकों ने उनकी कार को रोकने का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि वाहन चालक ने सुरक्षा कारणों से कार नहीं रोकी और आगे बढ़ने का प्रयास किया। इसी दौरान युवकों ने कार पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया।

    अचानक हुए इस हमले से वाहन के सामने के कांच टूट गए और कार को नुकसान पहुंचा। हालांकि सौभाग्य से महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज और वाहन में मौजूद अन्य लोगों को कोई शारीरिक चोट नहीं पहुंची। घटना के तुरंत बाद महामंडलेश्वर सीधे महाकाल थाने पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस को दी।

    महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज ने घटना पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है और इस प्रकार की घटनाएं संत समाज की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की घटनाएं लगातार होती रहीं तो उन्हें उज्जैन छोड़कर किसी अन्य तीर्थस्थल पर जाने या फिर कठोर आध्यात्मिक निर्णय लेने के लिए विवश होना पड़ सकता है। उनके इस बयान ने संत समाज और अनुयायियों के बीच भी चिंता पैदा कर दी है।

    महामंडलेश्वर के अनुसार हमला करने वाले चार युवक थे। पहले उन्होंने वाहन को रुकवाने का प्रयास किया और जब वाहन नहीं रुका तो पथराव शुरू कर दिया। रात का समय और अंधेरा होने के कारण हमलावरों की स्पष्ट पहचान नहीं हो सकी। यही वजह है कि फिलहाल पुलिस अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच कर रही है।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हुई और आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू कर दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हमलावरों की पहचान करने और घटना के पीछे की वजह जानने के लिए सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हमला पूर्व नियोजित था या फिर किसी अन्य कारण से यह घटना हुई।

    उज्जैन जैसे प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र में संतों की सुरक्षा को लेकर यह घटना कई सवाल खड़े कर रही है। संत समाज और स्थानीय लोगों का मानना है कि दोषियों की शीघ्र पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और धार्मिक वातावरण प्रभावित न हो।

    फिलहाल पुलिस जांच जारी है और सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

  • महाकाल मंदिर में मुस्लिम युवक से मारपीट: आधार कार्ड देखने के बाद हुआ विवाद, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

    महाकाल मंदिर में मुस्लिम युवक से मारपीट: आधार कार्ड देखने के बाद हुआ विवाद, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो


    मध्य प्रदेश । विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे एक युवक के साथ हुई मारपीट की घटना ने उज्जैन में चर्चा का विषय बना दिया है। घटना उस समय हुई जब युवक मंदिर की चलित भस्मारती में शामिल होने के लिए कतार में खड़ा था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कुछ लोग युवक से बहस करते और उसके साथ मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। घटना के बाद पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर युवक को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और पूरे मामले की जानकारी जुटानी शुरू की।

    पुलिस के अनुसार, महाराष्ट्र के पुणे जिले के पिंपरी क्षेत्र का रहने वाला 26 वर्षीय सरफराज शेख एक हिंदू युवती के साथ महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने आया था। दोनों देर रात मंदिर पहुंचे और चलित भस्मारती में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं की कतार में लग गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक युवक ने माथे पर चंदन का त्रिपुंड लगाया हुआ था और ‘महाकाल’ भी लिखा हुआ था, जिससे वह सामान्य श्रद्धालुओं की तरह दिखाई दे रहा था।

    बताया जा रहा है कि कतार में खड़े कुछ लोगों को युवक पर संदेह हुआ। इसके बाद उसकी पहचान जानने के लिए आधार कार्ड देखा गया। आधार कार्ड में उसका नाम और पहचान सामने आने के बाद वहां मौजूद कुछ लोगों ने आपत्ति जताई। इसी दौरान विवाद बढ़ गया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। देखते ही देखते कुछ लोगों ने युवक के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू कर दी।

    घटना के दौरान युवक अपनी बात रखने और खुद को छोड़ने की गुहार लगाता रहा, लेकिन माहौल लगातार गर्माता गया। आसपास मौजूद लोगों में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस पूरे घटनाक्रम को वहां मौजूद कुछ लोगों ने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद मामला सार्वजनिक चर्चा में आ गया।

    सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस अधिकारियों ने युवक और उसके साथ आई युवती से पूछताछ की। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दोनों दर्शन करने के उद्देश्य से उज्जैन आए थे। पुलिस ने किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए दोनों के परिजनों को भी उज्जैन बुलाया है।

    महाकाल थाना पुलिस का कहना है कि फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। हालांकि वायरल वीडियो और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि यदि कोई शिकायत प्राप्त होती है तो कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

    यह घटना एक बार फिर धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था, पहचान को लेकर उत्पन्न होने वाले विवादों और सोशल मीडिया के प्रभाव पर चर्चा का कारण बनी है। प्रशासन का प्रयास है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न होने दी जाए। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है और संबंधित लोगों से जानकारी जुटाई जा रही है।

  • आवास योजना में मकान दिलाने का झांसा, युवक से 5.60 लाख की ठगी: खुद को वकील बताने वाले आरोपी पर केस दर्ज

    आवास योजना में मकान दिलाने का झांसा, युवक से 5.60 लाख की ठगी: खुद को वकील बताने वाले आरोपी पर केस दर्ज


    मध्य प्रदेश । इंदौर में सरकारी आवास योजना के नाम पर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आजाद नगर थाना क्षेत्र में रहने वाले एक युवक ने आरोप लगाया है कि खुद को वकील बताने वाले व्यक्ति ने उसकी मां के नाम पर आवास योजना में मकान दिलाने का झांसा देकर 5 लाख 60 हजार रुपए हड़प लिए। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार रामनगर मुसाखेड़ी निवासी कपिल उईके ने नीलगिरी परिसर दूधिया निवासी दीपक शर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। कपिल का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान उसकी पहचान दीपक शर्मा से हुई थी। उस समय दीपक ने स्वयं को पेशे से वकील बताया था और जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता देने का भरोसा दिलाया था। इसी परिचय का फायदा उठाकर उसने परिवार का विश्वास जीत लिया।

    कपिल के मुताबिक जून 2026 में दीपक शर्मा ने उसकी मां अवंतीबाई के नाम पर सरकारी आवास योजना का लाभ दिलाने की बात कही। आरोपी उन्हें जिला न्यायालय परिसर स्थित कैंटीन में ले गया, जहां एक महिला के माध्यम से आवेदन फार्म भरवाया गया। इसके बाद कुछ राशि भी जमा कराई गई। अगले दिन आरोपी ने अवंतीबाई के मोबाइल में 311 ऐप डाउनलोड कर यह विश्वास दिलाया कि आवास योजना से जुड़ी सारी जानकारी और अपडेट इसी माध्यम से प्राप्त होंगे।

    कुछ दिनों बाद आरोपी ने दावा किया कि आवंटित होने वाला मकान किसी अन्य व्यक्ति को अधिक कीमत पर बेचा जा सकता है। उसने पूरे सौदे की प्रक्रिया कलेक्टर कार्यालय में पूरी कराने की बात कही। 10 जून को कथित खरीदार पक्ष और पीड़ित परिवार को कलेक्टर कार्यालय बुलाया गया, जहां लगभग 9 लाख 60 हजार रुपए में सौदा तय हुआ। आरोप है कि खरीदार पक्ष ने उसी समय 5 लाख 60 हजार रुपए नकद दिए, जबकि शेष राशि खाते में जमा कराने की बात कही गई।

    पीड़ित परिवार का कहना है कि यहीं से ठगी का खेल शुरू हुआ। आरोपी दीपक शर्मा उसी शाम उनके घर पहुंचा और रकम गिनने के बहाने नकदी अपने कब्जे में ले ली। अगले दिन वह एक महिला के साथ दोबारा घर आया और नगर निगम द्वारा सत्यापन किए जाने की बात कहकर परिवार को भ्रमित करता रहा। बाद में उसने कहा कि अधिकारी आने वाले हैं, इसलिए रकम तैयार रखी जाए।

    कपिल के अनुसार आरोपी ने चालाकी से पूरी रकम एक बैग में रखवाई और फिर उसे नाश्ता लेने के बहाने घर से बाहर भेज दिया। इसके बाद वह कपिल को नगर निगम कार्यालय ले गया। वहां बैग लेकर अंदर जाने की बात कहकर वह भवन में प्रवेश कर गया, लेकिन फिर वापस नहीं लौटा। काफी देर इंतजार करने के बाद जब कपिल ने उसे तलाशने की कोशिश की तो उसका कोई पता नहीं चला।

    घर लौटकर जांच करने पर परिवार को एहसास हुआ कि पूरी नकदी गायब हो चुकी है। इसके बाद आरोपी को लगातार फोन किए गए, लेकिन उसने कॉल उठाना बंद कर दिया। खुद को ठगा महसूस करने के बाद कपिल ने वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।

    मामले की जांच के बाद आजाद नगर पुलिस ने आरोपी दीपक शर्मा के खिलाफ चोरी और धोखाधड़ी से जुड़े आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस अब आरोपी की तलाश कर रही है और यह भी जांच कर रही है कि कहीं उसने इसी तरह अन्य लोगों को भी सरकारी योजनाओं का झांसा देकर ठगी का शिकार तो नहीं बनाया। यह मामला एक बार फिर लोगों को सावधान करता है कि सरकारी योजनाओं से जुड़े किसी भी काम के लिए केवल अधिकृत माध्यमों और अधिकारियों पर ही भरोसा करें।

  • इंदौर की महावीर कॉलोनी में पानी का संकट गहराया: दूषित जल से लोग बीमार, नर्मदा लाइन का अब भी इंतजार

    इंदौर की महावीर कॉलोनी में पानी का संकट गहराया: दूषित जल से लोग बीमार, नर्मदा लाइन का अब भी इंतजार


    मध्य प्रदेश । इंदौर के वार्ड क्रमांक-16 स्थित महावीर नगर में पेयजल संकट और दूषित पानी की समस्या एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। भागीरथपुरा जलकांड की यादें अभी लोगों के जहन से मिट भी नहीं पाई थीं कि अब महावीर नगर के रहवासियों को भी इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बोरिंग के पानी में सीवरेज मिलने की शिकायत सामने आने के बाद नगर निगम ने सरकारी बोरिंग बंद कर दी है, जिससे पूरे इलाके के लोग टैंकरों के भरोसे रहने को मजबूर हो गए हैं।

    महावीर नगर और आसपास की कॉलोनियों के लोग वर्षों से नर्मदा जलापूर्ति योजना का इंतजार कर रहे हैं। क्षेत्र में आज तक नर्मदा की पाइपलाइन नहीं पहुंच सकी है, जिसके कारण लोग बोरिंग और टैंकरों से मिलने वाले पानी पर निर्भर हैं। लेकिन अब जब बोरिंग का पानी भी दूषित होने लगा है, तो लोगों की चिंता और बढ़ गई है। रहवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।

    स्थानीय निवासी बसंत राव निकम बताते हैं कि पिछले 35 वर्षों से वे इस क्षेत्र में रह रहे हैं और अक्सर बोरिंग के पानी में गंदगी तथा सीवरेज की समस्या देखने को मिलती है। शिकायत के बाद निगम की टीम चैंबर साफ कर देती है, लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। उनका कहना है कि वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई।

    इसी तरह क्षेत्र की अन्य महिलाओं ने भी अपनी परेशानी साझा की। सीमा साखले और ममता मालवीय का कहना है कि वे कई वर्षों से यहां रह रही हैं, लेकिन आज तक नर्मदा जलापूर्ति का लाभ नहीं मिल पाया। ऐसे में उन्हें मजबूरी में बोरिंग का पानी इस्तेमाल करना पड़ता है, जो कई बार दूषित निकलता है।

    इस बीच एक मासूम बच्ची की तबीयत बिगड़ने के बाद मामला और गंभीर हो गया। बच्ची के पिता नागेश्वर खालोटिया का दावा है कि दूषित पानी के सेवन के कारण उनकी बेटी अविका खालोटिया गंभीर रूप से बीमार हो गई। उसे लगातार दस्त, कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होने लगीं। इंदौर के अस्पतालों में उपचार के बाद भी जब स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, तो परिवार उसे बेहतर इलाज के लिए अहमदाबाद लेकर गया। चिकित्सकों ने संक्रमण की पुष्टि की और दूषित भोजन या पानी को संभावित कारण बताया।

    रहवासियों का कहना है कि केवल एक बच्ची ही नहीं, बल्कि कई अन्य लोग भी उल्टी-दस्त और पेट संबंधी बीमारियों से प्रभावित हुए हैं। इससे पूरे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है। लोगों को डर है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

    नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित बोरिंग को बंद कर दिया गया है और नई बोरिंग कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। साथ ही अमृत-2 योजना के तहत 30 लाख लीटर क्षमता की पानी की टंकी और नई जलापूर्ति व्यवस्था विकसित करने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार आगामी कुछ महीनों में इस दिशा में काम शुरू हो सकता है, जिससे क्षेत्र की 30 से 40 कॉलोनियों को लाभ मिलेगा।

    फिलहाल महावीर नगर के लोग स्वच्छ पानी और नर्मदा लाइन के इंतजार में हैं। उनका कहना है कि विकास के दावों के बीच यदि लोगों को आज भी पीने के सुरक्षित पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

  • बरगी क्रूज हादसा जांच अंतिम चरण में, इंजन नष्ट करने से लेकर कलेक्टर की भूमिका तक उठे गंभीर सवाल

    बरगी क्रूज हादसा जांच अंतिम चरण में, इंजन नष्ट करने से लेकर कलेक्टर की भूमिका तक उठे गंभीर सवाल


     मध्य प्रदेश
    ।  के जबलपुर जिले में स्थित Bargi Dam में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे की न्यायिक जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। इस मामले की जांच राज्य सरकार द्वारा गठित आयोग, जिसकी अध्यक्षता Justice Sanjay Divedi कर रहे हैं, लगातार विभिन्न पक्षों के बयान दर्ज कर रहा है और जल्द ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने की तैयारी में है।
    30 अप्रैल को हुए इस हादसे में तेज हवाओं के बीच पर्यटक क्रूज अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया था, जिसमें चार बच्चों सहित कुल 13 लोगों की मौत हो गई थी। घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

    जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं ने कई अहम मुद्दे आयोग के सामने रखे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों ने आरोप लगाया है कि हादसे के बाद क्रूज और उसके इंजन की स्वतंत्र तकनीकी जांच नहीं कराई गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे मामलों में विस्तृत फॉरेंसिक जांच की जाती है। उनका कहना है कि क्रूज के क्षतिग्रस्त हिस्सों को हटाने या नष्ट करने की प्रक्रिया भी संदेह के घेरे में है, जिसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

    शिकायतकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया है कि क्रूज के मेंटेनेंस और संचालन से जुड़े दस्तावेजों की पर्याप्त जांच नहीं की गई। उनके अनुसार, फिटनेस सर्टिफिकेट, सर्विस रिकॉर्ड और तकनीकी निरीक्षण रिपोर्टों की गहन समीक्षा होनी चाहिए थी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसा तकनीकी खराबी के कारण हुआ या प्रशासनिक लापरवाही के चलते।

    इसके अलावा, आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि हादसे के समय एंबुलेंस तो पहुंची थी, लेकिन उसमें पर्याप्त मेडिकल स्टाफ या डॉक्टर मौजूद नहीं थे। राहत और बचाव कार्यों में समन्वय की कमी भी सामने आई, जिससे कई लोगों की जान बचाने में देरी हुई।

    एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू जिला प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सामने आया है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि तत्कालीन कलेक्टर और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए जाएं, क्योंकि आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के तहत उनकी जिम्मेदारी अहम होती है। उनका कहना है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष समीक्षा के बिना जिम्मेदारी तय करना संभव नहीं होगा।

    आयोग ने अब तक कई प्रत्यक्षदर्शियों और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज कर लिए हैं। साथ ही घटनास्थल का निरीक्षण, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी पूरी की जा चुकी है। आयोग ने संकेत दिया है कि शेष औपचारिकताओं के बाद रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा और इसमें संभावित लापरवाही और जिम्मेदार पक्षों का उल्लेख किया जाएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला राज्य में जल पर्यटन और सुरक्षा मानकों को लेकर एक बड़ा उदाहरण बन सकता है। बरगी बांध क्षेत्र में हुई यह घटना प्रशासनिक व्यवस्थाओं और तकनीकी निगरानी प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करती है, जिन पर भविष्य में सख्त सुधार की आवश्यकता है।