Category: Madhya Pradesh

  • “साहब, ये मुझे मार डालेगा…” ट्रस्टी की चेतावनी हुई सच, एक महीने बाद चौकीदार ने ली जान

    “साहब, ये मुझे मार डालेगा…” ट्रस्टी की चेतावनी हुई सच, एक महीने बाद चौकीदार ने ली जान


    मध्य प्रदेश । इंदौर के अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र स्थित 150 साल पुराने बारामत्था बगीची शिव-हनुमान मंदिर के ट्रस्टी कैलाश चंद्र मोदी की निर्मम हत्या ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। 70 वर्षीय कैलाश मोदी की मौत केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और अनदेखी का ऐसा मामला बन गई है, जिसमें पीड़ित ने अपनी जान को खतरा होने की आशंका पहले ही जाहिर कर दी थी। दुखद बात यह रही कि उनकी चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया गया और आखिरकार वही हुआ, जिसका डर उन्हें लगातार सता रहा था।

    परिजनों के अनुसार कैलाश मोदी पिछले कई महीनों से मंदिर परिसर के चौकीदार मुकेश शर्मा की गतिविधियों से परेशान थे। उन्होंने पुलिस कमिश्नर, कलेक्टर, एसीपी और थाना प्रभारी सहित कई अधिकारियों को लिखित शिकायतें देकर बताया था कि आरोपी मंदिर परिसर में अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहा है और विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकियां देता है। 13 मई को दिए गए आवेदन में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि आरोपी कभी भी उनकी हत्या कर सकता है।

    बताया जाता है कि मुकेश शर्मा पर पहले से ही मारपीट, धमकी, अवैध हथियार रखने और अवैध वसूली जैसे पांच आपराधिक मामले दर्ज थे। इसके बावजूद वह लगातार खुलेआम घूमता रहा। पुलिस ने उसके खिलाफ बाउंड ओवर और जिलाबदर की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन वह कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। इसी बीच आरोपी की गुंडागर्दी और बढ़ती गई।

    कैलाश मोदी ने केवल एक-दो नहीं, बल्कि करीब 40 शिकायतें विभिन्न विभागों को सौंपी थीं। उन्होंने मंदिर परिसर में शराबखोरी, जुआ-सट्टा, अवैध गतिविधियों और कब्जे के प्रयासों की जानकारी भी प्रशासन को दी थी। दिसंबर 2025 में आरोपी ने मंदिर परिसर में ही कैलाश मोदी पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था। उस समय भी मामला दर्ज हुआ, लेकिन सख्त कार्रवाई नहीं हुई। यही कारण रहा कि आरोपी के हौसले लगातार बुलंद होते गए।

    मंगलवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे आरोपी मुकेश शर्मा कथित तौर पर नशे की हालत में मंदिर पहुंचा। वहां किसी बात को लेकर विवाद हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के मुताबिक जब कैलाश मोदी ने उसे समझाने का प्रयास किया तो वह आक्रामक हो गया और डंडा लेकर उनके पीछे दौड़ पड़ा। जान बचाने के लिए मोदी पास स्थित गुरुद्वारे की ओर भागे, लेकिन आरोपी ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। उसने ताबड़तोड़ डंडों से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया।

    घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें आरोपी लगातार बुजुर्ग ट्रस्टी पर हमला करता दिखाई दे रहा है। गंभीर रूप से घायल कैलाश मोदी को अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि पुलिस और प्रशासन ने समय रहते शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई की होती तो आज कैलाश मोदी जीवित होते।

    अब पुलिस हत्या के मामले की जांच कर रही है और मृतक द्वारा पहले की गई शिकायतों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। लेकिन यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि जब कोई नागरिक अपनी जान को खतरा बताते हुए बार-बार गुहार लगाता है, तब उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।

  • इंदौर से यूएई के लिए नई सौगात: 17 जुलाई से शुरू होगी अबुधाबी की सीधी उड़ान

    इंदौर से यूएई के लिए नई सौगात: 17 जुलाई से शुरू होगी अबुधाबी की सीधी उड़ान


    मध्य प्रदेश । इंदौर से यूएई की यात्रा करने वाले यात्रियों को जल्द ही एक नई सुविधा मिलने जा रही है। एयर इंडिया एक्सप्रेस ने इंदौर और अबुधाबी के बीच सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू करने का ऐलान किया है। यह नई सेवा 17 जुलाई से शुरू होगी और इसके लिए टिकट बुकिंग भी प्रारंभ कर दी गई है। इस घोषणा ने उन यात्रियों को बड़ी राहत दी है, जो पिछले कई महीनों से शारजाह उड़ान बंद होने के कारण परेशानी का सामना कर रहे थे।

    दरअसल, एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा संचालित इंदौर-शारजाह फ्लाइट प्रदेश की एकमात्र नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ान थी। लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षा कारणों के चलते यह उड़ान 28 फरवरी से बंद कर दी गई थी। कंपनी ने कई बार इसके दोबारा संचालन की संभावना जताई, लेकिन हर बार उड़ान शुरू होने की तारीख आगे बढ़ा दी गई। हाल ही में 1 जुलाई से इसे फिर शुरू करने की घोषणा की गई थी, लेकिन बाद में एयरलाइन ने इसे अपने बुकिंग सिस्टम से ही हटा दिया।

    शारजाह उड़ान के बंद होने से इंदौर और आसपास के क्षेत्रों के हजारों यात्रियों के सामने सीधी अंतरराष्ट्रीय यात्रा का विकल्प लगभग समाप्त हो गया था। विशेष रूप से यूएई में रहने वाले प्रवासी भारतीय, व्यवसायी और पारिवारिक यात्राएं करने वाले लोगों को दिल्ली, मुंबई या अन्य शहरों से कनेक्टिंग फ्लाइट लेने की मजबूरी थी। ऐसे में अबुधाबी के लिए नई सीधी उड़ान की घोषणा को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    ट्रेवल एजेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष अमोल कटारिया के अनुसार शारजाह सेवा बंद होने से यात्रियों और ट्रेवल इंडस्ट्री दोनों में निराशा थी। नई उड़ान शुरू होने से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि इंदौर की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी। इससे व्यापारिक गतिविधियों और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा शुरू की जा रही यह उड़ान सप्ताह में चार दिन संचालित होगी। रविवार, सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को यात्री इस सेवा का लाभ उठा सकेंगे। शुरुआती चरण में एकतरफा किराया लगभग 16 से 17 हजार रुपए के बीच रखा गया है, जिसे प्रतिस्पर्धी और यात्रियों के लिए सुविधाजनक माना जा रहा है।

    फ्लाइट शेड्यूल के अनुसार इंदौर से उड़ान शाम 7:50 बजे रवाना होगी और यूएई के स्थानीय समयानुसार रात 9:35 बजे अबुधाबी पहुंचेगी। कुल यात्रा समय लगभग सवा तीन घंटे रहेगा। वहीं वापसी में यह विमान अबुधाबी से रात 10:35 बजे उड़ान भरेगा और भारतीय समयानुसार तड़के 3:20 बजे इंदौर पहुंचेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अबुधाबी के लिए सीधी उड़ान शुरू होने से मध्य प्रदेश के यात्रियों को न केवल समय की बचत होगी, बल्कि यात्रा खर्च भी कम होगा। इसके अलावा यूएई में कार्यरत भारतीय समुदाय और व्यापारिक वर्ग को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। आने वाले समय में यदि यात्रियों की संख्या अच्छी रहती है तो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। नई सेवा के साथ इंदौर एक बार फिर वैश्विक हवाई संपर्क के मानचित्र पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की ओर बढ़ रहा है।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पांच दिवसीय मध्य प्रदेश दौरा कल से: सुरक्षा के कड़े इंतजाम, कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पांच दिवसीय मध्य प्रदेश दौरा कल से: सुरक्षा के कड़े इंतजाम, कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन


    मध्य प्रदेश । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 18 जून से मध्य प्रदेश के पांच दिवसीय आधिकारिक दौरे पर आ रही हैं। 22 जून तक चलने वाले इस दौरे के दौरान वे इंदौर, ओंकारेश्वर, ग्वालियर और श्योपुर सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों का भ्रमण करेंगी। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। साथ ही यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है।

    राष्ट्रपति के दौरे की शुरुआत इंदौर से होगी। यहां पहुंचने के बाद वे सीधे ओंकारेश्वर जाएंगी, जहां भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगी। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस यात्रा को लेकर ओंकारेश्वर क्षेत्र में विशेष तैयारियां की गई हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग पार्किंग और परिवहन व्यवस्था भी बनाई है।

    19 जून को राष्ट्रपति अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के अवसर पर आयोजित एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम में शामिल होंगी। इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य, जनजातीय कल्याण और सिकल सेल बीमारी के उन्मूलन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी। इसके बाद राष्ट्रपति का कार्यक्रम ग्वालियर और श्योपुर में भी निर्धारित है, जहां वे विभिन्न सरकारी और सामाजिक आयोजनों में भाग लेंगी।

    राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए इंदौर एयरपोर्ट और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। प्रशासन ने एयरपोर्ट क्षेत्र को अस्थायी रूप से ‘नो-फ्लाइंग जोन’ घोषित किया है। इस दौरान किसी भी प्रकार की अनधिकृत उड़ान गतिविधि पर प्रतिबंध रहेगा। सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए रखेंगी ताकि राष्ट्रपति के कार्यक्रमों में किसी प्रकार की बाधा न आए।

    यातायात व्यवस्था के तहत 17 से 19 जून तक कई मार्गों पर डायवर्जन लागू किया गया है। इंदौर-इच्छापुर मार्ग पर चलने वाले भारी मालवाहक वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं। खंडवा, खरगोन, भीकनगांव, कसरावद, धामनोद और अन्य क्षेत्रों से होकर वाहनों को निकाला जाएगा ताकि वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान यातायात प्रभावित न हो।

    ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष योजना बनाई गई है। इंदौर, खंडवा और मूंदी की ओर से आने वाले वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों तक ही जाने की अनुमति होगी। वहां से श्रद्धालुओं को पैदल या प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए परिवहन साधनों के माध्यम से मंदिर क्षेत्र तक पहुंचना होगा। बसों के लिए भी अलग पार्किंग और शटल सेवा की व्यवस्था की गई है।

    राष्ट्रपति के काफिले के गुजरने के दौरान कुछ प्रमुख मार्गों को अस्थायी रूप से नो-व्हीकल जोन घोषित किया जाएगा। सुरक्षा कारणों से इन मार्गों पर आम वाहनों की आवाजाही कुछ समय के लिए रोकी जा सकती है। राष्ट्रपति के गंतव्य तक पहुंचने के बाद यातायात को सामान्य रूप से बहाल कर दिया जाएगा।

    प्रशासन ने नागरिकों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे ट्रैफिक डायवर्जन, पार्किंग व्यवस्था और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। साथ ही यात्रा के दौरान अतिरिक्त समय लेकर निकलें ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए पूरे प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा चुका है।

  • इंदौर में महिलाओं से छेड़छाड़ के तीन मामले: प्रेमी पर धमकी का आरोप, भतीजे और जीजा के खिलाफ भी FIR

    इंदौर में महिलाओं से छेड़छाड़ के तीन मामले: प्रेमी पर धमकी का आरोप, भतीजे और जीजा के खिलाफ भी FIR


    मध्य प्रदेश । इंदौर शहर में महिलाओं और युवतियों के साथ छेड़छाड़ एवं उत्पीड़न के तीन अलग-अलग मामले सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। द्वारकापुरी और खजराना थाना क्षेत्रों में दर्ज इन मामलों ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा और पारिवारिक रिश्तों में बढ़ती संवेदनहीनता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीनों मामलों में पीड़िताओं की शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पहला मामला द्वारकापुरी क्षेत्र का है, जहां 20 वर्षीय युवती ने अपने पूर्व प्रेमी लक्की पंसोरिया के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। युवती के अनुसार दोनों के बीच करीब एक वर्ष से परिचय था और वे एक ही कार्यस्थल पर काम करते थे। आरोपी वहां ड्राइवर के रूप में कार्यरत था। युवती का आरोप है कि शराब की लत और व्यवहार से परेशान होकर उसने आरोपी से बातचीत बंद कर दी थी। इसके बाद आरोपी लगातार उस पर शादी करने का दबाव बनाने लगा।

    शिकायत में युवती ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने उसके फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी। इतना ही नहीं, उसने आत्महत्या कर युवती को कानूनी मामले में फंसाने की बात भी कही। पीड़िता के मुताबिक आरोपी उसका पीछा करता था और लगातार मानसिक दबाव बनाने का प्रयास कर रहा था। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।

    दूसरा मामला खजराना क्षेत्र का है, जहां एक विवाहिता ने अपने ही भतीजे राहुल के खिलाफ छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज कराई है। महिला ने पुलिस को बताया कि आरोपी लंबे समय से उस पर गलत नजर रखता था। कुछ दिन पहले उसने बाथरूम में झांकने की कोशिश की थी, जिस पर परिवार द्वारा उसे फटकार भी लगाई गई थी। इसके बावजूद आरोपी के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया।

    महिला का आरोप है कि मंगलवार रात आरोपी ने फिर अनुचित हरकत की और आपत्तिजनक व्यवहार किया। इसके बाद उसने परिवार के सदस्यों को पूरी जानकारी दी और पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    तीसरा मामला भी खजराना थाना क्षेत्र का है, जहां 17 वर्षीय नाबालिग किशोरी ने अपने जीजा सोहेल के खिलाफ छेड़छाड़ की शिकायत की है। पीड़िता के अनुसार आरोपी ने रास्ते में उसे रोककर जबरन बाइक पर बैठाने की कोशिश की। किशोरी ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसके साथ अनुचित व्यवहार भी किया। किसी तरह वहां से निकलकर वह घर पहुंची और परिजनों को घटना की जानकारी दी।

    परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने नाबालिग की रिपोर्ट दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है। चूंकि मामला नाबालिग से जुड़ा है, इसलिए पुलिस संवेदनशीलता के साथ जांच कर रही है और आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तीनों मामलों में शिकायतों के आधार पर संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। आरोपों की पुष्टि के लिए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और आरोपियों की तलाश जारी है। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • बात खरी है: छात्र नेता की ट्रांसफर चुनौती, पुलिस की फजीहत और नरोत्तम को मिला ‘सनातनी’ आशीर्वाद

    बात खरी है: छात्र नेता की ट्रांसफर चुनौती, पुलिस की फजीहत और नरोत्तम को मिला ‘सनातनी’ आशीर्वाद


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति, प्रशासन और सामाजिक घटनाओं में इन दिनों ऐसे कई घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्होंने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। कहीं धार्मिक मंच से राजनीतिक संकेत निकाले जा रहे हैं, कहीं छात्र राजनीति के तेवर प्रशासन को चुनौती देते दिखाई दे रहे हैं, तो कहीं घरेलू विवाद में पुलिस खुद विवाद का हिस्सा बन गई है। इन घटनाओं ने प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक माहौल को चर्चा का विषय बना दिया है।

    राजधानी भोपाल में चल रही प्रसिद्ध कथावाचक पंडित देवकीनंदन ठाकुर की कथा में उस समय दिलचस्प माहौल बन गया, जब पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा कथा स्थल पर पहुंचे। व्यासपीठ से देवकीनंदन ठाकुर ने नरोत्तम मिश्रा की खुलकर प्रशंसा की और उन्हें सनातन धर्म का सेवक तथा भगवान का सच्चा भक्त बताया। इतना ही नहीं, उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में यह शिकायत भी कर दी कि डबरा में सुंदर नवग्रह मंदिर बनवाने के बावजूद नरोत्तम मिश्रा ने उनकी कथा नहीं करवाई। इस टिप्पणी के बाद कथा पंडाल में मौजूद लोगों के चेहरे खिल उठे और माहौल हंसी-मजाक से भर गया।

    राजनीतिक जानकार इस घटना को सिर्फ एक धार्मिक टिप्पणी नहीं मान रहे हैं। दतिया में संभावित उपचुनाव की चर्चाओं के बीच इसे नरोत्तम मिश्रा के लिए एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा के भीतर भी उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है और कथावाचक के मंच से मिली यह सार्वजनिक सराहना चर्चा का विषय बनी हुई है।

    उधर शिवपुरी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक नेता का बयान सुर्खियों में आ गया। अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं के बीच संगठन के विभाग संगठन मंत्री देशराज नरोलिया ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि वे चाहें तो कलेक्टर का ट्रांसफर करवा सकते हैं। दरअसल, प्रदर्शन के दौरान लंबे समय तक कलेक्टर के मौके पर नहीं पहुंचने से कार्यकर्ता नाराज थे। जब तहसीलदार बातचीत के लिए पहुंचे तो नाराजगी और बढ़ गई। इसके बाद दिया गया बयान प्रशासनिक गलियारों और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। लोगों ने इसे सत्ता और संगठन की ताकत दिखाने वाले बयान के रूप में देखा।

    इसी बीच बैतूल जिले के मुलताई से एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने सभी को हैरान कर दिया। पति-पत्नी के विवाद की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी। पुलिस का उद्देश्य दोनों पक्षों को समझाकर विवाद समाप्त कराना था, लेकिन स्थिति उलट गई। बातचीत के दौरान माहौल इतना बिगड़ा कि कहासुनी हाथापाई में बदल गई। पुलिसकर्मियों और परिवार के सदस्यों के बीच धक्का-मुक्की और मारपीट हो गई। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जिसने पुलिस को बुलाया था, वही पत्नी बाद में अपने पति के बचाव में उतर आई। इस घटना में पुलिसकर्मी और पति दोनों घायल हुए। घटना के बाद लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि पति-पत्नी के झगड़े में तीसरे व्यक्ति का फंसना अक्सर भारी पड़ जाता है।

    राजनीतिक गलियारों में एक और चर्चा राज्यसभा चुनाव को लेकर जारी है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री राज्यसभा जाने की कोशिशों में लगे थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। बताया जा रहा है कि उनकी रणनीति विधानसभा सीट खाली कर अपने परिवार के सदस्य को राजनीतिक अवसर दिलाने की थी। हालांकि यह योजना साकार नहीं हो सकी। अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा के अंदर और बाहर दोनों जगह चर्चाओं का दौर जारी है।

    प्रदेश की ये घटनाएं बताती हैं कि राजनीति, प्रशासन और समाज में हर दिन ऐसे प्रसंग सामने आते हैं, जो कभी गंभीर संदेश देते हैं तो कभी लोगों को मुस्कुराने का मौका भी दे जाते हैं।

  • मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज बदला: 33 जिलों में आंधी-बारिश, जून में अब तक 35% कम वर्षा

    मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज बदला: 33 जिलों में आंधी-बारिश, जून में अब तक 35% कम वर्षा


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून के आगमन से पहले मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। प्रदेश के 33 जिलों में पिछले 24 घंटों के दौरान तेज आंधी और बारिश ने लोगों को गर्मी से राहत दी है। राजधानी भोपाल, जबलपुर, रायसेन, सीहोर, ग्वालियर, सागर, श्योपुर, छिंदवाड़ा, बैतूल, रीवा और सतना समेत कई जिलों में मौसम ने अचानक करवट ली, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई और वातावरण सुहावना हो गया।

    भोपाल में बुधवार सुबह से ही बादलों की आवाजाही बनी रही। दोपहर के समय अचानक मौसम बदला और तेज बारिश शुरू हो गई। करीब 15 मिनट तक हुई बारिश ने शहर की सड़कों को तरबतर कर दिया। इसके बाद धूप और बादलों के बीच आंख-मिचौली का दौर जारी रहा। इसी तरह रायसेन, सागर और श्योपुर में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई, जबकि भिंड, बुरहानपुर और श्योपुर में धूलभरी आंधी चली।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार ग्वालियर में सबसे तेज 70 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं। जबलपुर में 65 किलोमीटर, अशोकनगर में 52 किलोमीटर, भोपाल में 48 किलोमीटर और सीहोर में 46 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार दर्ज की गई। कई अन्य जिलों में भी तेज हवाओं के साथ बारिश हुई, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली।

    बारिश के प्रभाव से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिन के तापमान में गिरावट देखने को मिली। शिवपुरी में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। पचमढ़ी, सिवनी और बैतूल में भी तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया। हालांकि खजुराहो और नौगांव जैसे क्षेत्रों में अभी भी गर्मी का असर बना हुआ है, जहां तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा।

    प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों की बात करें तो भोपाल में अधिकतम तापमान 37 डिग्री, इंदौर में 37.3 डिग्री, उज्जैन में 38.5 डिग्री, ग्वालियर में 39.5 डिग्री और जबलपुर में 40.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आगामी कुछ दिनों तक प्री-मानसून गतिविधियां जारी रहेंगी, जिससे कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर बना रह सकता है।

    हालांकि राहत की इस बारिश के बावजूद प्रदेश में जून माह की कुल वर्षा सामान्य से काफी कम बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार 1 जून से 16 जून तक मध्य प्रदेश में औसतन 35 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश की स्थिति और अधिक चिंताजनक है, जहां सामान्य वर्षा का आधा पानी भी नहीं गिर पाया है। कई जिलों में वर्षा का आंकड़ा सामान्य से काफी नीचे चल रहा है।

    मौसम विभाग का कहना है कि इस बार मानसून सामान्य तिथि से लगभग एक सप्ताह की देरी से प्रदेश में प्रवेश करेगा। सामान्य रूप से मानसून 15 जून तक मध्य प्रदेश पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार धीमी रही है। इसके बावजूद विशेषज्ञों को उम्मीद है कि मानसून सक्रिय होने के बाद वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।

    बुधवार के लिए मौसम विभाग ने 34 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रदेश के मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। किसानों और आम लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

  • अल नीनो और बदलते मौसम के बीच किसानों के लिए अलर्ट: तैयारी ही बनेगी सबसे बड़ी ताकत

    अल नीनो और बदलते मौसम के बीच किसानों के लिए अलर्ट: तैयारी ही बनेगी सबसे बड़ी ताकत


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के किसानों के लिए खरीफ सीजन हमेशा उम्मीदों और चुनौतियों का संगम लेकर आता है। खेती की सफलता काफी हद तक मानसून पर निर्भर रहती है और यही वजह है कि भारतीय कृषि को अक्सर मानसून का जुआ कहा जाता है। इस वर्ष भी मौसम का मिजाज सामान्य नहीं दिख रहा है। प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो की स्थिति और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव ने किसानों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में मानसून 20 जून के बाद दक्षिण-पूर्वी हिस्सों से प्रवेश कर सकता है, लेकिन बारिश का वितरण सामान्य रहेगा या नहीं, इस पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।

    ऐसे हालात में किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सलाह यही है कि वे जल्दबाजी में बुवाई न करें। मानसून की पहली बारिश होते ही खेतों में बीज डाल देना कई बार भारी नुकसान का कारण बन जाता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खेत में कम से कम तीन से चार इंच अच्छी वर्षा होने और मिट्टी के भीतर पर्याप्त नमी पहुंचने के बाद ही बोनी की जानी चाहिए। यदि मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं होगी तो बीज अंकुरित नहीं होंगे या सड़ सकते हैं, जिससे दोबारा बुवाई की नौबत आ सकती है।

    किसानों को अपनी मिट्टी की प्रकृति को समझना भी बेहद जरूरी है। मध्य प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में काली मिट्टी पाई जाती है, जो नमी को लंबे समय तक रोककर रख सकती है। अच्छी बारिश के बाद यह मिट्टी 15 से 20 दिनों तक फसल को नमी प्रदान कर सकती है। वहीं दोमट मिट्टी में यह क्षमता 7 से 10 दिनों तक सीमित रहती है, जबकि रेतीली मिट्टी केवल 3 से 5 दिन तक ही नमी बनाए रख पाती है। इसलिए बोनी और सिंचाई की रणनीति मिट्टी की प्रकृति को ध्यान में रखकर ही बनाई जानी चाहिए।

    अल नीनो के प्रभाव वाले इस सीजन में फसल विविधीकरण भी किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पूरे खेत में एक ही किस्म की फसल लगाने के बजाय अलग-अलग अवधि में पकने वाली किस्मों का चयन किया जाए। यदि किसी एक किस्म को मौसम की मार झेलनी पड़े तो दूसरी किस्म उत्पादन देकर नुकसान की भरपाई कर सकती है। सोयाबीन, मक्का और दलहनी फसलों में यह रणनीति विशेष रूप से उपयोगी मानी जाती है।

    इसके साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेना भी जरूरी है। मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए बीमा किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है। यदि सूखा, कम वर्षा या अन्य प्राकृतिक आपदा के कारण फसल प्रभावित होती है तो बीमा योजना राहत का आधार बन सकती है।

    जल संरक्षण भी इस सीजन की सबसे बड़ी जरूरत है। खेतों में मजबूत मेड़बंदी, रिज-फरो पद्धति और मल्चिंग जैसी तकनीकों का उपयोग कर वर्षा जल को खेत में रोका जा सकता है। इससे न केवल मिट्टी में नमी बनी रहती है बल्कि फसल को लंबे समय तक पानी उपलब्ध होता है। सब्जी उत्पादक किसानों के लिए प्लास्टिक मल्च या सूखी घास का उपयोग भी लाभकारी साबित हो सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम विभाग के पूर्वानुमान, कृषि मौसम सलाह और डिजिटल एप्स की जानकारी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आज के दौर में खेती केवल अनुभव नहीं बल्कि वैज्ञानिक जानकारी और तकनीक पर भी निर्भर है। बदलते मौसम और अल नीनो की चुनौती के बीच वही किसान सफल होगा जो समय रहते तैयारी करेगा और परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति बदलेगा। इस खरीफ सीजन में सावधानी, वैज्ञानिक सोच और सही प्रबंधन ही बेहतर उत्पादन की कुंजी साबित होंगे।

  • पेंशन शिकायत पर भड़के मंत्री विश्वास सारंग, वार्ड प्रभारी को लगाई फटकार

    पेंशन शिकायत पर भड़के मंत्री विश्वास सारंग, वार्ड प्रभारी को लगाई फटकार


    मध्य प्रदेश । भोपाल में जनसमस्याओं के निराकरण के लिए आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान उस समय माहौल गंभीर हो गया, जब कुछ महिलाओं ने पेंशन योजना का लाभ नहीं मिलने की शिकायत सीधे खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग के सामने रखी। शिकायत सुनते ही मंत्री ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित वार्ड प्रभारी को तत्काल तलब कर जवाब मांगा। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    मंत्री विश्वास सारंग के निवास पर प्रतिदिन आयोजित होने वाले जनदर्शन कार्यक्रम में नरेला विधानसभा क्षेत्र के वार्ड क्रमांक-59 स्थित अन्ना नगर की निवासी मंदा सोनवानी, सहला सेनवानी, सुशीला विश्वकर्मा और सोमा सुरेश पहुंचीं। महिलाओं ने मंत्री को बताया कि वे शासन की पेंशन योजनाओं के लिए पात्र हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि समस्या के समाधान के लिए पहले भी कई बार प्रयास किए गए, लेकिन किसी स्तर पर सुनवाई नहीं हुई।

    महिलाओं की शिकायत सुनने के बाद मंत्री सारंग ने तुरंत संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली। प्रारंभिक जानकारी मिलने पर उन्होंने वार्ड क्रमांक-59 के प्रभारी रमीजुद्दीन को मौके पर बुलाने के निर्देश दिए। कुछ ही देर में वार्ड प्रभारी के पहुंचने पर मंत्री ने उनसे पेंशन प्रकरणों में हुई देरी और लापरवाही के संबंध में जवाब तलब किया।

    मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद और पात्र लोगों तक समय पर लाभ पहुंचाना है। यदि पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर कमी मानी जाएगी। उन्होंने वार्ड प्रभारी को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिए कि सभी लंबित प्रकरणों की तत्काल समीक्षा कर पात्र लोगों को पेंशन का लाभ दिलाया जाए।

    जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों को भी चेतावनी दी कि आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं तभी सफल मानी जाएंगी, जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसलिए सभी विभागीय अधिकारियों को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा।

    मंत्री सारंग ने यह भी कहा कि जनदर्शन कार्यक्रम का उद्देश्य जनता और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है, ताकि लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा सके। ऐसे कार्यक्रमों में प्राप्त शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में इस तरह की शिकायतें दोबारा सामने न आएं और प्रत्येक पात्र हितग्राही को समय पर योजना का लाभ मिले।

    इस घटनाक्रम के बाद संबंधित अधिकारियों ने लंबित पेंशन प्रकरणों की जांच और निराकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही प्रभावित महिलाओं सहित अन्य पात्र हितग्राहियों को भी पेंशन योजना का लाभ मिल सकेगा। मंत्री की सख्ती को प्रशासनिक जवाबदेही और जनहित के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।

  • ट्विशा शर्मा मौत मामला: रिटायर्ड जज गिरिबाला की मांगें कोर्ट ने ठुकराईं, न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ी

    ट्विशा शर्मा मौत मामला: रिटायर्ड जज गिरिबाला की मांगें कोर्ट ने ठुकराईं, न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ी


    मध्य प्रदेश । भोपाल में चर्चित एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह और उनकी मां, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की न्यायिक हिरासत अब 30 जून तक बढ़ा दी गई है। मंगलवार को रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद दोनों आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया, जहां कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सुनवाई हुई।

    सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह ने अदालत के समक्ष अपनी ओर से कई मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि जेल में उपलब्ध कराए जा रहे हिंदी और अंग्रेजी अखबारों में उनके मामले से जुड़ी खबरों को काटकर अलग कर दिया जाता है। ऐसे में उन्हें पूरी सामग्री पढ़ने का अवसर नहीं मिल पाता। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें बिना किसी कटौती के पूरा अखबार उपलब्ध कराया जाए।

    इसके अलावा गिरिबाला सिंह ने वकीलों से मिलने के लिए निर्धारित 20 मिनट की समय-सीमा को समाप्त करने की मांग भी की। उनका कहना था कि मामला गंभीर और जटिल है, इसलिए कानूनी सलाह और रणनीति पर चर्चा के लिए अधिक समय की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि उन्हें और उनके बेटे समर्थ सिंह को एक ही समय पर अपने वकीलों से मिलने की अनुमति दी जाए, ताकि बचाव पक्ष की रणनीति बेहतर ढंग से तैयार की जा सके। हालांकि अदालत ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया।

    सुनवाई के दौरान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अदालत को बताया कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। एजेंसी के अनुसार कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच जारी है। ट्विशा शर्मा की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अध्ययन किया जाना है, परिजनों और रिश्तेदारों के बयान दर्ज किए जाने हैं तथा मोबाइल फोन और लैपटॉप की डिजिटल फॉरेंसिक जांच भी प्रक्रिया में है। इसी आधार पर सीबीआई ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।

    गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह की ओर से अदालत में कुछ अन्य आवेदन भी प्रस्तुत किए गए। इनमें ट्विशा के बैंक खाते, कथित सात लाख रुपए के खर्च, मोबाइल टावर लोकेशन और कार की चाबी से संबंधित जांच की मांग शामिल थी। अदालत ने इन बिंदुओं पर सुनवाई के लिए 27 जून की तारीख तय की है।

    मीडिया ट्रायल का मुद्दा भी सुनवाई के दौरान प्रमुखता से उठा। गिरिबाला सिंह ने आरोप लगाया कि ट्विशा के परिजन और रिश्तेदार मीडिया में लगातार बयान दे रहे हैं, जिससे मामले की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि परिजनों को सार्वजनिक बयान देने से रोका जाए। साथ ही जांच के दौरान जब्त की गई दवाइयों के जब्ती पंचनामा की प्रति उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। अदालत ने सीबीआई को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

    दूसरी ओर, ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा द्वारा लीगल एड वकीलों की भूमिका को लेकर उठाए गए सवाल भी चर्चा में हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि कुछ लीगल एड वकील आरोपी पक्ष के साथ जुड़े दिखाई दिए, जबकि उनकी नियुक्ति गिरिबाला सिंह के न्यायिक कार्यकाल के दौरान हुई थी। इस संबंध में उन्होंने मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और उच्च न्यायालय को शिकायत भेजकर स्वतंत्र जांच की मांग की है।

    फिलहाल मामले की जांच जारी है और दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डिजिटल फॉरेंसिक जांच तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। इस हाई-प्रोफाइल मामले पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।

  • स्पीड पोस्ट की रफ्तार पर उपभोक्ता आयोग सख्त, 7 दिन की देरी पर डाक विभाग को ठहराया दोषी

    स्पीड पोस्ट की रफ्तार पर उपभोक्ता आयोग सख्त, 7 दिन की देरी पर डाक विभाग को ठहराया दोषी


    मध्य प्रदेश । भरोसेमंद और तेज डिलीवरी के लिए जानी जाने वाली स्पीड पोस्ट सेवा एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। भोपाल में एक पार्सल की डिलीवरी में हुई देरी ने न केवल डाक विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए, बल्कि मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया। सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने डाक विभाग को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए पीड़ित उपभोक्ता को मुआवजा देने का आदेश जारी किया है।

    मामला भोपाल निवासी ज्योति शर्मा से जुड़ा है। उन्होंने 12 जनवरी 2026 को अरेरा हिल्स उप डाकघर से स्पीड पोस्ट के माध्यम से एक पार्सल भेजा था। इस पार्सल में धार्मिक महत्व की पुस्तक श्रीमद्भगवद्गीता, शुद्ध घी से बनी मिठाइयां और कुछ कपड़े रखे गए थे। पार्सल को सुरक्षित और शीघ्र पहुंचाने के लिए उन्होंने 1228 रुपए का शुल्क भी जमा किया था। स्पीड पोस्ट सेवा का चयन इस विश्वास के साथ किया गया था कि पार्सल तय समय सीमा के भीतर अपने गंतव्य तक पहुंच जाएगा।

    दिलचस्प बात यह रही कि उसी दिन ज्योति शर्मा द्वारा भेजा गया एक अन्य स्पीड पोस्ट पार्सल मात्र तीन दिनों में अपने गंतव्य तक पहुंच गया। लेकिन दूसरा पार्सल सात दिन बाद, यानी 19 जनवरी को पहुंचा। एक ही दिन और एक ही सेवा के तहत भेजे गए दो पार्सलों की डिलीवरी अवधि में इतना बड़ा अंतर उपभोक्ता के लिए चिंता का विषय बन गया।

    मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पार्सल को किसी दूरस्थ क्षेत्र में नहीं बल्कि अपेक्षाकृत नजदीकी स्थान पर भेजा गया था, जहां सामान्य परिस्थितियों में स्पीड पोस्ट दो से तीन दिन के भीतर पहुंच जाती है। ऐसे में सात दिन की देरी को सामान्य नहीं माना जा सकता था। आयोग ने इस तथ्य को भी गंभीरता से लिया कि डाक विभाग देरी के पीछे कोई ठोस और संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं कर पाया।

    जिला उपभोक्ता आयोग की बेंच क्रमांक-1, जिसमें अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ला और सदस्य डॉ. प्रतिभा पांडेय शामिल थे, ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि जब कोई उपभोक्ता अतिरिक्त शुल्क देकर प्रीमियम सेवा लेता है तो समयबद्ध सेवा प्रदान करना विभाग की जिम्मेदारी बन जाती है। केवल यह कह देना कि पार्सल अंततः डिलीवर हो गया, विभाग को जिम्मेदारी से मुक्त नहीं कर सकता।

    आयोग ने अपने आदेश में कहा कि समय पर डिलीवरी न होना और उसके पीछे उचित कारण न बता पाना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर डाक विभाग को उपभोक्ता को मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए 5 हजार रुपए तथा वाद व्यय के रूप में 3 हजार रुपए देने के निर्देश दिए गए हैं। कुल 8 हजार रुपए की यह राशि दो माह के भीतर भुगतान करनी होगी। यदि तय समय सीमा में भुगतान नहीं किया गया तो विभाग को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना पड़ेगा।

    यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो समयबद्ध सेवाओं के लिए अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करते हैं। आयोग का यह निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि सेवा प्रदाताओं को अपने दायित्वों का गंभीरता से पालन करना होगा और लापरवाही की स्थिति में जवाबदेह भी बनना पड़ेगा।