Category: Madhya Pradesh

  • मध्य प्रदेश में मौसम का बड़ा अलर्ट, 5 जिलों में अति भारी बारिश का खतरा; 25 जिलों में ढाई इंच से ज्यादा पानी गिरने के आसार MP में आज बारिश का बड़ा अलर्ट

    मध्य प्रदेश में मौसम का बड़ा अलर्ट, 5 जिलों में अति भारी बारिश का खतरा; 25 जिलों में ढाई इंच से ज्यादा पानी गिरने के आसार MP में आज बारिश का बड़ा अलर्ट


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। मंगलवार को प्रदेश के बड़े हिस्से में तेज बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार टीकमगढ़ दमोह नरसिंहपुर बैतूल और राजगढ़ में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर बहुत तेज बारिश होने की आशंका है। इसके अलावा गुना आगर मालवा शाजापुर सीहोर हरदा सागर रायसेन नर्मदापुरम छिंदवाड़ा पांढुर्णा सिवनी बालाघाट मंडला जबलपुर कटनी शहडोल छतरपुर पन्ना सीधी और सिंगरौली में भी भारी बारिश की चेतावनी है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक इन 25 जिलों में ढाई इंच से ज्यादा बारिश हो सकती है।

    प्रदेश के बाकी हिस्सों में भी बारिश का दौर थमता नजर नहीं आ रहा है। भोपाल विदिशा इंदौर धार आलीराजपुर बुरहानपुर बड़वानी खंडवा खरगोन झाबुआ उज्जैन नीमच मंदसौर देवास रतलाम ग्वालियर शिवपुरी दतिया अशोकनगर मुरैना भिंड श्योपुर डिंडौरी रीवा सतना मऊगंज मैहर उमरिया अनूपपुर और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। यानी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बादल सक्रिय रहेंगे और लोगों को बारिश से राहत मिलने के बजाय अगले कुछ दिनों तक मौसम का असर देखने को मिल सकता है।

    इससे पहले सोमवार को भी भोपाल समेत कई जिलों में तेज बारिश हुई। भोपाल में सुबह से ही बादल छाए रहे और दोपहर बाद बारिश का सिलसिला शुरू हो गया जो रात तक चलता रहा। शहर के कई इलाकों में बारिश के कारण यातायात प्रभावित हुआ। भोपाल रेलवे स्टेशन पर भी भारी बारिश का असर दिखाई दिया और प्लेटफॉर्म के शेड से पानी तेज धार के रूप में गिरता नजर आया। वहीं विदिशा में तेज बारिश के बाद बाजार की सड़कों पर पानी भर गया जिससे दुकानदारों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रायसेन और शाजापुर समेत अन्य जिलों में भी बारिश का असर देखने को मिला।

    बीते 24 घंटे के आंकड़ों पर नजर डालें तो नर्मदापुरम में औसतन 3.7 इंच बारिश दर्ज की गई। शिवपुरी के करेरा में 5.4 इंच बारिश हुई जबकि निवाड़ी के ओरछा में 3.3 इंच और सागर के रहली में करीब 3 इंच पानी गिरा। भोपाल के कोलार इलाके में 3.2 इंच नवीबाग में 3.1 इंच और भोपाल शहर में करीब 3 इंच बारिश दर्ज की गई।

    शहडोल में भी बारिश के बाद बाणसागर डैम के तीन गेट आधा आधा मीटर खोले गए हैं। लगातार बारिश और बांधों में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। नदी नालों और जलभराव वाले रास्तों से दूरी बनाए रखना भी जरूरी होगा।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश में लो प्रेशर एरिया यानी निम्न दाब क्षेत्र और ट्रफ की सक्रियता बनी हुई है। यही सिस्टम बारिश को लगातार मजबूती दे रहा है। इसके चलते अगले तीन दिनों तक कई जिलों में भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।

    हालांकि प्रदेश में बारिश का वितरण समान नहीं है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर रीवा सागर और शहडोल संभाग में कई जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। करीब 40 जिलों में बारिश सामान्य से 6 से 51 प्रतिशत तक कम बताई गई है। दूसरी ओर अनूपपुर डिंडौरी निवाड़ी सतना शहडोल सीधी सिंगरौली उमरिया भिंड भोपाल बुरहानपुर गुना ग्वालियर खरगोन और राजगढ़ में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    ऐसे में मंगलवार की बारिश कई जिलों के लिए राहत लेकर आ सकती है लेकिन जिन इलाकों में पहले से जलभराव है वहां परेशानी बढ़ने की आशंका भी है। प्रशासन और स्थानीय लोगों को मौसम विभाग के अलर्ट पर नजर रखते हुए जरूरी सावधानी बरतनी होगी।

  • आरसी में सिर्फ गणेश और आधार में पूरा नाम तो ट्रांसफर अटक सकता है, भोपाल RTO में नाम मिसमैच से परेशान वाहन मालिक

    आरसी में सिर्फ गणेश और आधार में पूरा नाम तो ट्रांसफर अटक सकता है, भोपाल RTO में नाम मिसमैच से परेशान वाहन मालिक


    भोपाल ।
    भोपाल में वाहन मालिकों के लिए आरसी और आधार कार्ड में दर्ज नाम का मामूली अंतर भी बड़ी परेशानी का कारण बनता जा रहा है। खासकर ऐसे लोगों की दिक्कत बढ़ गई है जो अपनी पुरानी गाड़ी बेचने या किसी दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया में हैं। भोपाल आरटीओ में आधार आधारित प्रक्रिया के दौरान नाम का मिलान नहीं होने से वाहन ट्रांसफर के आवेदन अटकने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई वाहन मालिकों का कहना है कि वर्षों पहले वाहन खरीदते समय जिन दस्तावेजों के आधार पर आरसी तैयार हुई थी उनमें नाम अलग तरीके से दर्ज था। बाद में आधार कार्ड बनवाते समय पूरा नाम और सरनेम जुड़ गया। अब दोनों दस्तावेजों में यही अंतर वाहन ट्रांसफर के समय समस्या खड़ी कर रहा है।

    होशंगाबाद रोड निवासी गणेश बडाले का मामला इसका उदाहरण है। उनकी स्कूटी की आरसी में केवल गणेश नाम दर्ज है जबकि आधार कार्ड में पूरा नाम गणेश बडाले लिखा हुआ है। जब उन्होंने स्कूटी ट्रांसफर कराने के लिए आवेदन किया तो आधार और आरसी में नाम का मिलान नहीं होने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। गणेश के मुताबिक वह करीब पांच दिन से आरटीओ के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन अभी तक उन्हें यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि समस्या का समाधान किस दस्तावेज में सुधार कराने से होगा। उनका कहना है कि उन्होंने सामान्य तरीके से वाहन ट्रांसफर के लिए आवेदन किया था लेकिन नाम में अंतर सामने आने के बाद पूरी प्रक्रिया रुक गई।

    ऐसी समस्या केवल एक वाहन मालिक तक सीमित नहीं है। आरटीओ में पहुंच रहे लोगों के मुताबिक पुराने वाहनों के दस्तावेजों में दर्ज नाम और आधार कार्ड के नाम में अंतर होने के कारण कई मामलों में आवेदन अटक रहे हैं। किसी आरसी में सिर्फ पहला नाम दर्ज है तो कहीं सरनेम जुड़ा हुआ है जबकि आधार कार्ड में नाम का प्रारूप अलग है। उदाहरण के तौर पर किसी वाहन की आरसी में केवल यासिर दर्ज है जबकि आधार कार्ड में यासिर खान लिखा है। इसी तरह किसी आरसी में सतेंद्र मिश्रा दर्ज है जबकि दूसरे दस्तावेज में केवल सतेंद्र नाम हो सकता है। ऐसे मामलों में दस्तावेज वास्तविक रूप से एक ही व्यक्ति के होने के बावजूद सिस्टम में नाम का मिलान नहीं होने से परेशानी पैदा हो सकती है।

    यह समस्या खास तौर पर 10 से 15 साल पुरानी गाड़ियों के मालिकों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है। उस समय वाहन रजिस्ट्रेशन के लिए अलग-अलग दस्तावेजों का इस्तेमाल होता था और नाम दर्ज करने का तरीका भी आज की डिजिटल प्रक्रिया से अलग था। बाद में आधार कार्ड में पूरा नाम दर्ज होने के कारण पुराने आरसी रिकॉर्ड और मौजूदा पहचान दस्तावेज के बीच अंतर पैदा हो गया। वाहन मालिकों को अक्सर तब तक इस अंतर का पता नहीं चलता जब तक उन्हें गाड़ी ट्रांसफर कराने की जरूरत नहीं पड़ती।

    ऐसे में यदि आपके पास पुराना वाहन है तो उसे बेचने या ट्रांसफर कराने से पहले आरसी में दर्ज नाम और आधार कार्ड के नाम की जांच कर लेना बेहतर होगा। नाम के साथ सरनेम जुड़ा है या नहीं और दोनों दस्तावेजों में नाम की स्पेलिंग एक जैसी है या नहीं यह भी देखना जरूरी है। छोटी सी गलती समय रहते पकड़ में आ जाए तो आगे की प्रक्रिया में होने वाली परेशानी से बचा जा सकता है। खासकर पुरानी गाड़ियों के मालिकों को अपने दस्तावेजों की जानकारी पहले से दुरुस्त रखनी चाहिए ताकि वाहन बेचते या ट्रांसफर करते समय फाइल नाम मिसमैच के कारण अटक न जाए।

  • दुकानों पर सीलिंग के बीच व्यापारियों का अनोखा विरोध, मिंटो हॉल में प्रार्थना सभा कर मांगेंगे रहवासी इलाकों के कारोबार का स्थायी समाधान

    दुकानों पर सीलिंग के बीच व्यापारियों का अनोखा विरोध, मिंटो हॉल में प्रार्थना सभा कर मांगेंगे रहवासी इलाकों के कारोबार का स्थायी समाधान

    भोपाल । भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई के बाद व्यापारियों और रहवासी संगठनों के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कार्रवाई और सर्वे से परेशान व्यापारियों ने अब विरोध का अलग रास्ता अपनाने का फैसला किया है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के नेतृत्व में व्यापारी बुधवार सुबह कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर यानी मिंटो हॉल परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने प्रार्थना सभा करेंगे। इस दौरान व्यापारी सामूहिक रूप से रामधुन का गायन करेंगे और कारोबारियों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रार्थना करेंगे। चैंबर के अध्यक्ष गोविंद गोयल के नेतृत्व में होने वाली इस सभा को व्यापारियों की ओर से शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी विरोध के तौर पर देखा जा रहा है।

    दरअसल राजधानी में रहवासी क्षेत्रों में संचालित दुकानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नगर निगम ने कार्रवाई तेज कर दी है। कई इलाकों में सर्वे के साथ भवनों में किए गए अन्य निर्माण संबंधी उल्लंघनों की भी जांच की जा रही है। निगम की सख्ती के बाद ऐसे व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है जो लंबे समय से रहवासी भवनों में दुकान या अन्य कारोबार संचालित कर रहे हैं। अवधपुरी अयोध्या बायपास गौतम नगर अशोका गार्डन और लालघाटी समेत कई क्षेत्रों में दुकानदारों के बीच नोटिस मिलने के बाद वैकल्पिक कमर्शियल स्थान तलाशने की चर्चा तेज हो गई है।

    व्यापारियों का कहना है कि अचानक सख्ती से उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। उनका तर्क है कि यदि शहर का मास्टर प्लान समय पर स्पष्ट तरीके से लागू होता और रहवासी तथा व्यावसायिक क्षेत्रों का पहले से व्यवस्थित निर्धारण किया जाता तो आज ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती। वहीं दूसरी ओर रहवासी संगठनों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों से स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है और किसी भी स्थिति में रहवासी इलाकों का व्यावसायीकरण नहीं होना चाहिए।

    इसी मुद्दे को लेकर पिछले दिनों विरोध प्रदर्शन भी तेज हुए हैं। रोशनपुरा चौराहे पर व्यापारियों ने चक्काजाम किया था। इसके बाद बाग सेवनिया अवधपुरी 10 नंबर और आनंद नगर में भी प्रदर्शन हुए। दूसरी ओर रहवासी संघ की ओर से गुलमोहर कॉलोनी में टॉर्च लाइट रैली निकाली गई थी। इससे पहले सात नंबर मार्केट में भी रहवासी संगठनों ने रैली के जरिए अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।

    नगर निगम ने अब मुख्य मार्गों के दोनों ओर के क्षेत्रों के साथ उनसे जुड़ी गलियों में भी सर्वे शुरू कर दिया है। नदी और तालाब के किनारे बने भवनों के अलावा ग्रीन बेल्ट बफर जोन और कैचमेंट एरिया में निर्माण की भी प्राथमिकता से जांच की जा रही है। अवैध मैरिज गार्डन को भी नोटिस दिए जाने की तैयारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह कार्रवाई और तेज होने के संकेत हैं।

    व्यापारियों की प्रार्थना सभा के जरिए अब इस पूरे विवाद का स्थायी समाधान निकालने की मांग सामने रखी जाएगी। सवाल यह है कि प्रशासन व्यापारियों की चिंता और रहवासियों की आपत्तियों के बीच ऐसा रास्ता कैसे निकालेगा जिससे नियमों का पालन भी हो और वर्षों से कारोबार कर रहे लोगों की रोजी-रोटी पर भी अचानक संकट न आए। भोपाल में कमर्शियल एक्टिविटी को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब शहर की बड़ी प्रशासनिक और कारोबारी चुनौती बनता जा रहा है।

  • MP में आज 25 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, टीकमगढ़-दमोह समेत 5 जिलों में अति भारी बारिश के आसार

    MP में आज 25 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, टीकमगढ़-दमोह समेत 5 जिलों में अति भारी बारिश के आसार


    भोपाल। मध्यप्रदेश में बारिश का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। मंगलवार को प्रदेश के करीब आधे हिस्से में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक टीकमगढ़, दमोह, नरसिंहपुर, बैतूल और राजगढ़ में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। इन जिलों में ढाई इंच से ज्यादा बारिश होने की संभावना है।

    इसके अलावा गुना, आगर-मालवा, शाजापुर, सीहोर, हरदा, सागर, रायसेन, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, जबलपुर, कटनी, शहडोल, छतरपुर, पन्ना, सीधी और सिंगरौली में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    30 जिलों में भी बारिश का दौर
    मौसम विभाग के अनुसार भोपाल, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, देवास, रतलाम, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, डिंडौरी, रीवा, सतना, मऊगंज, मैहर, उमरिया, अनूपपुर और निवाड़ी में भी कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    भोपाल में तेज बारिश, विदिशा के बाजार में भरा पानी
    सोमवार को भोपाल समेत कई जिलों में जोरदार बारिश हुई। भोपाल के कई इलाकों में तेज बारिश के चलते यातायात प्रभावित हुआ। वहीं विदिशा के बाजार में पानी भरने से दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रायसेन और शाजापुर में भी बारिश का असर देखने को मिला।

    पिछले 24 घंटे में नर्मदापुरम में औसतन 3.7 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा शिवपुरी के करैरा में 5.4 इंच, निवाड़ी के ओरछा में 3.3 इंच, सागर के रहली में 3 इंच, भोपाल के कोलार में 3.2 इंच, नवीबाग में 3.1 इंच और भोपाल शहर में करीब 3 इंच बारिश हुई।

    लो प्रेशर और ट्रफ से बदला मौसम
    मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में लो प्रेशर एरिया और ट्रफ सक्रिय हैं। इन मौसमी सिस्टम की वजह से कई हिस्सों में लगातार बारिश हो रही है। अगले तीन दिनों तक भी प्रदेश के अलग-अलग जिलों में तेज बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    40 जिलों में सामान्य से कम बारिश
    प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में अब तक 19% तक कम बारिश दर्ज की गई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, टीकमगढ़ और डिंडौरी समेत कई जिलों में सामान्य से 6% से 51% तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिमी मध्यप्रदेश के भी कई जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे है। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, खंडवा, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 1% से 49% तक कम पानी गिरा है।

    15 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    IMD के अनुसार अनूपपुर, डिंडौरी, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, गुना, ग्वालियर, खरगोन और राजगढ़ में अब तक सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • महाकाल की नगरी में कुर्सी की रस्साकशी और प्रशासनिक किस्से

    महाकाल की नगरी में कुर्सी की रस्साकशी और प्रशासनिक किस्से


    उज्जैन । महाकाल की नगरी उज्जैन में इन दिनों राजनीति और प्रशासनिक गलियारों की चर्चाएं लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं। खास तौर पर एक नियुक्ति को लेकर सामने आए घटनाक्रम ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। चर्चा है कि पिछड़े वर्ग से जुड़े एक पद पर नियुक्ति का पत्र जारी होने के बाद ही विरोध के स्वर उठने लगे। इसके बाद महज 48 घंटे के भीतर नई सूची सामने आई और उसमें संबंधित नाम दिखाई नहीं दिया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं और इसे प्रभावशाली नेताओं की आपत्ति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि पूरे मामले को लेकर आधिकारिक स्तर पर अलग अलग दावे सामने आने की चर्चा है।

    उधर हिम्मतगढ़ की पहाड़ी से जुड़ा एक मामला भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि हाल में हुई लाखों रुपये की लूट के बाद पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने में तेजी दिखाई। चर्चा तो यहां तक है कि वारदात के बाद आरोपी कथित तौर पर उसी इलाके में फिर एकत्र हो गए जहां पुलिस को उनकी मौजूदगी का सुराग मिल गया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मामले की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की। इस घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली और आरोपियों की कथित लापरवाही दोनों पर तरह तरह की बातें कही जा रही हैं।

    नागपंचमी के दौरान शिवाजी भवन से जुड़ा एक प्रसंग भी चर्चा में रहा। धार्मिक आयोजन के बीच एक श्रद्धालु को रोके जाने की बात सामने आने के बाद मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। आस्था और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर भी सवाल उठे। हालांकि ऐसे मामलों में वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान को ही आधार माना जाना चाहिए।

    प्रशासनिक गलियारों में नामांतरण से जुड़े कथित लेनदेन की चर्चाओं ने भी माहौल गर्म किया हुआ है। एक अधिकारी पर प्रति बीघा रकम मांगने के आरोपों की चर्चा है। यदि इस तरह के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय हो सकता है। दूसरी ओर एक अधिकारी द्वारा कथित सिफारिश पर सख्त प्रतिक्रिया दिए जाने की चर्चा भी सामने आई है। बताया जाता है कि सिफारिश के जवाब में नोटिस जारी करने तक की बात कही गई। इससे यह संदेश गया कि प्रशासनिक कामकाज में दबाव और सिफारिश को लेकर अब सख्ती बरती जा रही है।

    नागपंचमी की भीड़ और आगामी सिंहस्थ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी प्रशासन की प्राथमिकता बनी हुई है। इसी क्रम में बड़ी संख्या में बैरिकेडिंग और भीड़ प्रबंधन की तैयारियों को लेकर अधिकारियों की सक्रियता चर्चा में रही। रात तक व्यवस्थाओं की निगरानी किए जाने और संभावित भीड़ वाले क्षेत्रों में पहले से इंतजाम करने की कोशिश को प्रशासनिक तैयारी के तौर पर देखा गया।

    इसी बीच एक बड़े राजनीतिक चेहरे के अचानक उज्जैन दौरे और वीआईपी गेस्ट हाउस में बैठकों की खबर ने भी सियासी चर्चाओं को हवा दे दी। कार्यक्रम की सूचना को लेकर कुछ नेताओं के नाराज होने की बात कही गई लेकिन बाद में दौरा अचानक तय होने की जानकारी सामने आने के बाद स्थिति सामान्य होने की चर्चा है। हेलीपैड से लेकर बैठकों तक नेताओं के बीच हल्के फुल्के तंज और राजनीतिक बातचीत का दौर भी चलता रहा।

    सिंहस्थ की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण और शहर के विकास से जुड़े मुद्दे भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं। ऐसे में उज्जैन का सियासी माहौल आने वाले दिनों में और गर्म रहने की संभावना है। बाबा की नगरी में फिलहाल राजनीति प्रशासन और सिंहस्थ की तैयारियां एक साथ चर्चा के केंद्र में हैं और यही वजह है कि यहां हर छोटा बड़ा घटनाक्रम राजनीतिक गलियारों में नई कहानी को जन्म दे रहा है।

  • इंदौर होटल कांड में नया मोड़, युवक ने बदली पहचान; मोबाइल और कमरे की तलाशी में मिला संदिग्ध सामान, पुलिस जांच में जुटी

    इंदौर होटल कांड में नया मोड़, युवक ने बदली पहचान; मोबाइल और कमरे की तलाशी में मिला संदिग्ध सामान, पुलिस जांच में जुटी


    इंदौर । इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र में स्थित एक होटल में युवती के साथ दो युवकों के मिलने के बाद रविवार रात हंगामा हो गया। स्कीम नंबर 114 पार्ट-1 स्थित होटल सिल्वर पैलेस में कुछ लोगों ने युवती के साथ गलत गतिविधि होने का आरोप लगाते हुए पुलिस को सूचना दी। इसके बाद राजपूत करणी सेना के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और होटल के कमरे से एक युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। दूसरा युवक मौके से फरार हो गया। पुलिस ने फिलहाल पकड़े गए युवक के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

    मिली जानकारी के मुताबिक करणी सेना के कार्यकर्ताओं को होटल में एक हिंदू युवती के साथ दो युवकों के मौजूद होने की सूचना मिली थी। संगठन के पदाधिकारी होटल पहुंचे और कमरे में मौजूद युवकों से पूछताछ की। आरोप है कि दोनों युवक युवती को नशा करा रहे थे। पूछताछ के दौरान पकड़े गए युवक ने पहले अपनी पहचान छिपाते हुए अपना नाम लक्की बताया। बाद में पूछताछ में उसकी पहचान खजराना निवासी फैजान खान के रूप में हुई। उसके साथ मौजूद अमन खान मौके से निकल गया।

    मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने अमन पर फर्जी पुलिसकर्मी बनकर लोगों को डराने और ब्लैकमेल करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। संगठन का दावा है कि दोनों युवक खजराना और आसपास के क्षेत्रों में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़े हुए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस जांच के बाद ही इन दावों की वास्तविकता स्पष्ट होगी।

    घटना के दौरान फैजान के मोबाइल फोन की जांच किए जाने का भी दावा किया गया। संगठन के मुताबिक मोबाइल में कई युवतियों के साथ आपत्तिजनक फोटो वीडियो और चैट मिले। इसके अलावा गांजा एमडी और चाकू की तस्वीरें भी मोबाइल में होने की बात सामने आई। होटल के कमरे की तलाशी के दौरान शराब की बोतलें कंडोम और कथित तौर पर सेक्स वर्धक गोलियां मिलने का भी दावा किया गया है। पुलिस इन सभी बरामद वस्तुओं और डिजिटल सामग्री की जांच कर रही है।

    मामले में सबसे अहम पहलू युवती की स्थिति और उसके बयान को माना जा रहा है। लसूड़िया थाना प्रभारी राजकुमार यादव के मुताबिक पुलिस के पास करणी सेना के कार्यकर्ता फैजान नाम के युवक को लेकर आए थे। पुलिस का कहना है कि युवक काफी नशे की हालत में था। उसके मोबाइल में आपत्तिजनक वीडियो चाकू और गांजे से संबंधित तस्वीरें मिलने की बात भी सामने आई है। पुलिस अधिकारी के अनुसार युवक का नशा उतरने के बाद उससे विस्तार से पूछताछ की जाएगी और युवती से भी घटना के संबंध में जानकारी ली जाएगी।

    फिलहाल पुलिस ने युवक को हिरासत में लेकर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। फरार बताए जा रहे अमन खान की तलाश और मामले में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। करणी सेना के पदाधिकारियों ने फरार युवक की गिरफ्तारी और पूरे मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

    पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि होटल के कमरे में वास्तव में क्या हुआ था और युवती के साथ किसी तरह की जबरदस्ती या नशीला पदार्थ देने की बात सही है या नहीं। फिलहाल मामले में लगाए गए सभी गंभीर आरोप जांच के अधीन हैं।

  • इंदौर की लकड़ी मंडी में बड़ा खेल! शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, राज्य स्तरीय टीम ने पकड़े बिना टीपी और फर्जी दस्तावेज वाले वाहन

    इंदौर की लकड़ी मंडी में बड़ा खेल! शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, राज्य स्तरीय टीम ने पकड़े बिना टीपी और फर्जी दस्तावेज वाले वाहन


    इंदौर । इंदौर के धार रोड स्थित जीएनटी टिम्बर मार्केट में अवैध वनोपज के कारोबार को लेकर वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब तीन महीने पहले ही विभाग के अधिकारियों को शिकायत मिली थी कि मार्केट और आसपास के इलाकों में बिना ट्रांजिट परमिट यानी टीपी के लकड़ी और अन्य वनोपज लाई जा रही है। शिकायतों को गंभीर मानते हुए इंदौर डीएफओ ने सात रात्रि गश्ती दल भी गठित किए थे। इन दलों को अलग-अलग दिनों में जीएनटी मार्केट और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी कर अवैध परिवहन रोकने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई और आखिरकार राज्य स्तरीय उड़न दस्ते को इंदौर आकर कार्रवाई करनी पड़ी।

    वन विभाग की ओर से 15 मई को जारी आदेश में साफ तौर पर कहा गया था कि सीएम हेल्पलाइन फोन और अन्य माध्यमों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि जीएनटी मार्केट में बिना टीपी अवैध वनोपज लाई जा रही है और उसका कारोबार किया जा रहा है। इसके बाद सात टीमों को रात में गश्त करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे कि बिना वैध दस्तावेज के कोई वनोपज इंदौर में प्रवेश न कर सके। प्रत्येक टीम को सप्ताह में एक दिन रात्रि गश्त करनी थी। यानी विभाग को शिकायत की जानकारी भी थी और निगरानी के लिए बाकायदा व्यवस्था भी बनाई गई थी लेकिन अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश नहीं लग सका।

    मामला राज्य स्तर तक पहुंचने के बाद भोपाल से राज्य स्तरीय उड़न दस्ता इंदौर पहुंचा। टीम ने धार रोड स्थित जीएनटी टिम्बर मार्केट में कार्रवाई करते हुए बबूल की लकड़ी से भरे दो वाहनों को पकड़ा। जांच के दौरान एक वाहन का चालक लकड़ी के परिवहन से संबंधित टीपी पेश नहीं कर सका। दूसरे वाहन में महाराष्ट्र के जलगांव की टीपी दिखाई गई लेकिन जांच में उसे फर्जी पाया गया। टीम ने दस्तावेज को स्कैन कर तैयार की गई फर्जी टीपी बताया। दोनों वाहनों को जब्त कर वन विभाग के नवरत्न बाग स्थित कार्यालय भेज दिया गया।

    इस कार्रवाई के दौरान स्थानीय वन अमले को पहले से शामिल नहीं किया गया था। राज्य स्तरीय टीम के साथ उज्जैन और देवास के वन कर्मचारी भी मौजूद रहे। टीम ने जीएनटी मार्केट की जालाराम इंटरप्राइजेस की आरा मशीन की भी जांच की। करीब दो घंटे तक दस्तावेज और रिकॉर्ड खंगालने के बाद मशीन को सील कर दिया गया।

    प्रारंभिक जांच में यह आशंका भी सामने आई है कि अलग-अलग राज्यों की टीपी का इस्तेमाल कर मध्यप्रदेश की लकड़ी को दूसरे राज्यों से लाई गई वनोपज के रूप में दिखाया जा रहा हो सकता है। महाराष्ट्र तेलंगाना गुजरात राजस्थान और उत्तर प्रदेश की टीपी के जरिए लकड़ी के परिवहन की शिकायतें जांच के दायरे में हैं। यह भी आरोप सामने आते रहे हैं कि एक ही टीपी के आधार पर अलग-अलग वाहनों में लकड़ी भेजी जाती है।

    जीएनटी मार्केट में बिना सील हैमर के लकड़ी से भरे वाहनों के पहुंचने की शिकायतें भी सामने आई हैं। आरोप है कि ऐसी लकड़ी को आरा मशीनों में चीरकर गुटके और फाचरे तैयार किए जाते हैं और फिर उन्हें इंदौर की नगरीय सीमा से बाहर भेज दिया जाता है। अब राज्य स्तरीय टीम इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

    डीएफओ इंदौर लालसुधाकर सिंह के मुताबिक बिना वैध दस्तावेज के वनोपज का परिवहन अवैध माना जाता है और ऐसे मामलों में वाहन तथा संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब विभाग को तीन महीने पहले ही अवैध कारोबार की सूचना मिल चुकी थी और सात गश्ती दल निगरानी में लगाए गए थे तो राज्य स्तरीय टीम की कार्रवाई से पहले स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी। जांच आगे बढ़ने के साथ इस सवाल का जवाब भी सामने आने की उम्मीद है।

  • कोच के दस्तावेजों पर IDA का स्विमिंग पूल टेंडर? बिना अनुमति इस्तेमाल का आरोप, संस्था ने कहा- आरोप बेबुनियाद

    कोच के दस्तावेजों पर IDA का स्विमिंग पूल टेंडर? बिना अनुमति इस्तेमाल का आरोप, संस्था ने कहा- आरोप बेबुनियाद


    इंदौर । इंदौर में स्विमिंग पूल संचालन के एक टेंडर को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। दिल्ली के रिटायर्ड इंटरनेशनल स्विमिंग कोच मुकुंद मोहन शर्मा ने आरोप लगाया है कि उनके शैक्षणिक और पेशेवर दस्तावेजों का कथित रूप से बिना अनुमति इस्तेमाल कर इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी IDA का स्विमिंग पूल संचालन का ठेका हासिल किया गया। कोच का दावा है कि उन्होंने ये दस्तावेज केवल दिल्ली के तालकटोरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के टेंडर में भाग लेने के लिए एक संस्था को दिए थे लेकिन बाद में उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल इंदौर के टेंडर में कर लिया गया। मामला सामने आने के बाद उन्होंने इंदौर पुलिस कमिश्नर से शिकायत की है और अब क्राइम ब्रांच मामले में FIR दर्ज करने की तैयारी कर रही है।

    मुकुंद मोहन शर्मा के अनुसार वह वर्ष 2022 में अपने छात्र संदीप तोकस के माध्यम से देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट से जुड़े थे। इसके बाद 21 फरवरी 2023 को उन्होंने संस्था के डायरेक्टर देवेंद्र लांबा और उनकी पत्नी मधुलिका को अपने शैक्षणिक और पेशेवर योग्यता से जुड़े दस्तावेज दिए थे। उनका कहना है कि ये दस्तावेज केवल नई दिल्ली के तालकटोरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के स्विमिंग पूल संचालन के टेंडर में इस्तेमाल करने के लिए दिए गए थे। बाद में वह टेंडर निरस्त हो गया।

    कोच का आरोप है कि टेंडर निरस्त होने के बाद उन्होंने अपने दस्तावेजों को किसी अन्य सरकारी अर्धसरकारी या निजी संस्था की टेंडर प्रक्रिया में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल इंदौर में IDA के स्विमिंग पूल संचालन का ठेका हासिल करने में किया गया। शर्मा के मुताबिक 8 सितंबर 2023 को IDA का अनुबंध हासिल किया गया था। उनका दावा है कि पूरी प्रक्रिया में उनसे किसी तरह की लिखित अनुमति या सहमति नहीं ली गई।

    सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शर्मा को कथित दस्तावेज दुरुपयोग की जानकारी करीब तीन साल बाद जनवरी 2026 में मिली। एक परिचित के माध्यम से उन्हें पता चला कि उनके दस्तावेज इंदौर के IDA टेंडर में लगाए गए हैं। इसके बाद उन्होंने IDA के CEO को ईमेल के जरिए शिकायत की। 25 फरवरी को उन्होंने मामले की जानकारी देते हुए ईमेल भेजा और 7 मार्च को रिमाइंडर भी भेजा। कई महीने तक स्पष्ट कार्रवाई या जांच की जानकारी नहीं मिलने के बाद उन्होंने लिखित शिकायत के साथ शपथपत्र भी दिया।

    शर्मा ने यह भी आशंका जताई है कि उनके शैक्षणिक और पेशेवर दस्तावेजों का इस्तेमाल अन्य शहरों में स्विमिंग पूल के टेंडर लाइसेंस या परमिट हासिल करने के लिए भी किया गया हो सकता है। उन्होंने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के लखनऊ स्थित रीजनल सेंटर के स्विमिंग पूल से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में भी अपने दस्तावेजों के इस्तेमाल की जांच कराने की मांग की है।

    हालांकि देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट के संचालक देवेंद्र लांबा ने शर्मा के आरोपों को पूरी तरह गलत और निराधार बताया है। उनका कहना है कि शर्मा पहले उनके संस्थान से जुड़े थे और उनकी शैक्षणिक योग्यता तथा उपलब्धियों से संबंधित दस्तावेज संस्था के रिकॉर्ड में उपलब्ध थे। लांबा के मुताबिक किसी कोच या कर्मचारी के संस्थान से जुड़ने पर उसकी योग्यता और उपलब्धियों के दस्तावेज रिकॉर्ड में रखना सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि क्राइम ब्रांच की शिकायत के बाद संस्था अपना जवाब दे चुकी है और जरूरत पड़ने पर संबंधित दस्तावेज और अंडरटेकिंग भी जांच एजेंसी को उपलब्ध कराई जाएगी।

    लांबा ने यह भी कहा कि देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट का हेड ऑफिस गुरुग्राम में है और देश के अलग-अलग हिस्सों में उसके कई सेंटर संचालित होते हैं। उनके मुताबिक टेंडर प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि हेड ऑफिस के माध्यम से की जाती है।

    वहीं IDA के CEO डॉ. परीक्षित झाडे ने बताया कि मुकुंद मोहन शर्मा की ओर से शिकायत प्राप्त हुई है और विभागीय स्तर पर इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामला आरोप और जांच के स्तर पर है और क्राइम ब्रांच की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दस्तावेजों का वास्तव में किस तरह इस्तेमाल हुआ और टेंडर प्रक्रिया में किसी नियम का उल्लंघन हुआ या नहीं।

  • आयुष्मान क्लेम में बड़ा खेल सामने आया, कहीं ओवर डायग्नोसिस तो कहीं टेलीफोन पर इलाज; भोपाल के 3 अस्पतालों पर कार्रवाई

    आयुष्मान क्लेम में बड़ा खेल सामने आया, कहीं ओवर डायग्नोसिस तो कहीं टेलीफोन पर इलाज; भोपाल के 3 अस्पतालों पर कार्रवाई


    भोपाल। भोपाल में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज में कथित गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। आयुष्मान योजना की टीम ने शहर के तीन निजी अस्पतालों में औचक निरीक्षण कर कई अनियमितताएं पकड़ी हैं। जांच के बाद तीनों अस्पतालों को तत्काल प्रभाव से आयुष्मान योजना से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर 10 दिन के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। अब इन अस्पतालों में पहले इलाज करा चुके मरीजों के रिकॉर्ड और आयुष्मान क्लेम की भी जांच की जाएगी।

    आयुष्मान भारत के अधिकारियों और विभागीय टीम ने यश्वी मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल सूर्यांश मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और मारुति मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल का औचक निरीक्षण किया था। जांच के दौरान सबसे गंभीर मामला मरीजों को दूसरे जिलों से बड़ी संख्या में भोपाल बुलाकर भर्ती करने का सामने आया। यश्वी अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि सिंगरौली और दूसरे जिलों के गांवों से मरीजों को एक साथ बड़ी संख्या में भोपाल लाया गया था। उन्हें मुफ्त इलाज का भरोसा देकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच टीम ने 30 मरीजों के रिकॉर्ड खंगाले जिनमें करीब 20 मरीज दूसरे जिलों के पाए गए।

    आयुष्मान योजना के अधिकारियों ने माना कि मामले की पूरी तस्वीर पुराने रिकॉर्ड की जांच के बाद ही साफ होगी। इसी वजह से तीनों अस्पतालों के पहले के आयुष्मान क्लेम का डेस्क ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए हैं। पुराने मरीजों से भी संपर्क कर यह पता लगाया जाएगा कि उन्हें किस बीमारी के लिए भर्ती किया गया था उनका वास्तविक इलाज क्या हुआ और अस्पताल में कितने दिन रखा गया। मरीजों के बयान और अस्पताल के दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा।

    जांच के दौरान एक मरीज के मामले ने भी सवाल खड़े किए। ब्रजनारायण नाम के मरीज को पेट में दर्द की शिकायत थी। अस्पताल की फाइल में उन्हें गंभीर संक्रमण ब्लड प्रेशर गिरने और अंगों पर असर जैसी स्थिति बताते हुए 8 से 11 अगस्त तक आईसीयू में भर्ती दिखाया गया। लेकिन 11 अगस्त की सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर उन्हें अस्पताल के बाहर देखा गया। बाद में रात 9 बजकर 36 मिनट पर वह आईसीयू वार्ड में दूसरे मरीजों के साथ बातचीत करते नजर आए। इस मामले ने आईसीयू में भर्ती दिखाकर किए गए क्लेम की वास्तविकता पर सवाल खड़े किए हैं।

    मारुति मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल की जांच में भी आईसीयू में भर्ती मरीजों के मामलों में ओवर डायग्नोसिस की आशंका सामने आई। जांच टीम को वहां मरीजों का इलाज करते हुए BAMS डॉक्टर भी मिले। अधिकारियों ने ऐसे मामलों के रिकॉर्ड की जांच करने और यह पता लगाने के निर्देश दिए हैं कि मरीजों को जिस गंभीर स्थिति में भर्ती दिखाया गया था वह चिकित्सकीय रूप से वास्तव में सही थी या नहीं।

    सूर्यांश मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की जांच में भी गंभीर अनियमितता सामने आई। रिकॉर्ड में जिन डॉक्टरों के नाम मरीजों के इलाज से जुड़े थे वे मौके पर मरीजों का इलाज करते नहीं मिले। जांच के दौरान टेलीफोन पर इलाज किए जाने की बात भी सामने आई। अब अस्पताल के रिकॉर्ड में दर्ज डॉक्टरों की भूमिका और मरीजों के इलाज से जुड़े दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जाएगी।

    आयुष्मान योजना के सीईओ अरविंद कुमार शाह के मुताबिक तीनों अस्पतालों में तत्काल प्रभाव से नए आयुष्मान मरीजों की भर्ती पर रोक लगा दी गई है। पुराने मरीजों के क्लेम का भी ऑडिट किया जाएगा। अस्पतालों से जवाब मिलने और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

    इस कार्रवाई के बाद आयुष्मान योजना से जुड़े दूसरे अस्पतालों पर भी जांच की नजर रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि यदि कहीं मरीजों को अनावश्यक रूप से भर्ती करने फर्जी या बढ़े हुए क्लेम लगाने अथवा इलाज की स्थिति को गलत तरीके से दर्ज करने जैसी गड़बड़ी मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल तीन अस्पतालों पर हुई कार्रवाई ने आयुष्मान योजना के नाम पर होने वाले संभावित फर्जीवाड़े को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • कभी MP से बाघ मांग रहा था छत्तीसगढ़, अब खुद पहुंच रहे टाइगर और बढ़ा रहे कुनबा; अचानकमार बना नई उम्मीद का केंद्र

    कभी MP से बाघ मांग रहा था छत्तीसगढ़, अब खुद पहुंच रहे टाइगर और बढ़ा रहे कुनबा; अचानकमार बना नई उम्मीद का केंद्र


    छत्तीसगढ़ । कभी बाघों की कमी से जूझ रहे छत्तीसगढ़ के जंगलों में अब टाइगरों की दहाड़ फिर सुनाई दे रही है। खास बात यह है कि इसके पीछे किसी बड़े ट्रांसलोकेशन अभियान से ज्यादा प्राकृतिक जंगलों और वन्यजीव कॉरिडोर की भूमिका सामने आई है। मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ कान्हा और पेंच टाइगर रिजर्व से निकलकर बाघ प्राकृतिक रास्तों से छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व तक पहुंचे और अब वहीं अपना क्षेत्र बनाकर प्रजनन कर रहे हैं। इससे छत्तीसगढ़ में बाघों की आबादी बढ़ाने की उम्मीद मजबूत हुई है।

    एक समय ऐसा था जब छत्तीसगढ़ को अपने जंगलों में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश से बाघ लेने की जरूरत महसूस हुई थी। इसके लिए बाघों को दूसरे राज्यों से लाने की चर्चा भी हुई थी लेकिन अब प्राकृतिक रूप से पहुंचे बाघ ही छत्तीसगढ़ के जंगलों में नया कुनबा तैयार कर रहे हैं। यही वजह है कि फिलहाल मध्य प्रदेश से बाघ लाने के प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है।

    अचानकमार टाइगर रिजर्व में बांधवगढ़ से पहुंची बाघिन झुमरी इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल बनी है। करीब 400 किलोमीटर का सफर तय कर झुमरी वर्ष 2021 में बांधवगढ़ से अचानकमार पहुंची थी। यहां उसने अपना क्षेत्र बनाया और अब तक तीन बार में सात शावकों को जन्म दे चुकी है। हाल ही में उसके फिर चार शावकों को जन्म देने की जानकारी सामने आई है। झुमरी के कारण अचानकमार में बाघों की प्राकृतिक आबादी बढ़ाने की उम्मीद को नई मजबूती मिली है।

    मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ पहुंचने वाले बाघों में केवल झुमरी ही नहीं है। वर्ष 2023 में कान्हा से टी-200 नाम का बाघ अचानकमार पहुंचा था। पेंच से आई गंगा नाम की बाघिन ने भी यहां अपना कुनबा बढ़ाने में योगदान दिया। इसके अलावा मध्य प्रदेश से घायल अवस्था में पहुंची एक बाघिन को आशा नाम दिया गया। इन बाघों और बाघिनों की मौजूदगी ने अचानकमार के जंगलों में बाघों की आबादी के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है।

    आंकड़ों पर नजर डालें तो अचानकमार में बाघों की संख्या लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। वर्ष 2010 में यहां केवल एक बाघ दर्ज किया गया था। 2014 में यह संख्या बढ़कर तीन हुई और 2018 में पांच बाघ दर्ज किए गए। अब हालिया निगरानी में यहां 18 बाघों की मौजूदगी का पता चला है। वहीं छत्तीसगढ़ में वर्ष 2022 में 17 बाघ दर्ज किए गए थे जबकि अप्रैल 2025 तक राज्य में बाघों की संख्या बढ़कर 35 हो गई।

    वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक इस बदलाव में मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व से प्राकृतिक रूप से होने वाला बाघों का मूवमेंट बेहद महत्वपूर्ण है। अचानकमार टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर प्रियंका पांडेय के अनुसार मध्य प्रदेश से पहुंचे बाघ और बाघिनों ने यहां प्रजनन कर आबादी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।

    हालांकि बाघों के इस प्राकृतिक आवागमन को बनाए रखना आसान नहीं है। बांधवगढ़ कान्हा और पेंच से अचानकमार तक आने वाले बाघों को जंगलों के बीच सुरक्षित कॉरिडोर की जरूरत होती है। रास्ते में इंसानी बस्तियां सड़कें और दूसरी बाधाएं उनके लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं। बाघों की आबादी को लंबे समय तक स्थायी रूप से बढ़ाने के लिए इन प्राकृतिक कॉरिडोर को सुरक्षित रखना जरूरी होगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों के बीच जीन पूल का प्राकृतिक आदान प्रदान भी वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। यदि जंगलों के बीच संपर्क टूटता है तो बाघों की आवाजाही प्रभावित होगी और भविष्य में आनुवंशिक विविधता पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच मौजूद प्राकृतिक वन गलियारों का संरक्षण दोनों राज्यों में बाघों की आबादी के लिए बेहद अहम है।

    छत्तीसगढ़ के जंगलों में लौटती बाघों की दहाड़ इसलिए भी खास है क्योंकि यह संरक्षण की उस सफलता को दिखाती है जिसमें प्रकृति को अपना रास्ता देने पर वन्यजीव खुद नए क्षेत्रों तक पहुंचकर अपना कुनबा बढ़ा सकते हैं। अब चुनौती इस प्राकृतिक रास्ते को सुरक्षित रखने की है ताकि मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ तक बाघों की यह आवाजाही भविष्य में भी जारी रहे।