Category: Madhya Pradesh

  • एक्सपायरी दवाओं के आरोपों के बीच हड़ताल: कटनी में मेडिकल स्टोर्स पर ताले

    एक्सपायरी दवाओं के आरोपों के बीच हड़ताल: कटनी में मेडिकल स्टोर्स पर ताले


    कटनी । कटनी में बुधवार को दवा कारोबार पूरी तरह प्रभावित रहा, जब ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर पूरे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की दवा दुकानें बंद रहीं। इस एक दिवसीय बंद का नेतृत्व कटनी केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन ने किया, जिसने ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

    सुबह से ही शहर के मेडिकल स्टोरों के शटर बंद रहे, जिससे दवा बाजार में सन्नाटा पसरा रहा। केवल आपातकालीन सेवाओं से जुड़े स्टोर और पीएम जन औषधि केंद्रों को इस बंद से छूट दी गई, ताकि मरीजों को जरूरी दवाओं की उपलब्धता में कोई बाधा न आए।

    ऑनलाइन दवा कंपनियों पर गंभीर आरोप
    एसोसिएशन के अध्यक्ष चंदू जादवानी ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन दवा कंपनियां भारी डिस्काउंट और ऑफर्स का लालच देकर व्यापार कर रही हैं, जिससे स्थानीय दवा कारोबारियों को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि निगरानी व्यवस्था कमजोर होने के कारण ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर एक्सपायरी दवाओं की बिक्री तक के मामले सामने आ रहे हैं, जो आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।

    व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन फार्मेसी के बढ़ते प्रभाव ने छोटे और मध्यम दवा विक्रेताओं के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है। कई दुकानदारों का कारोबार लगातार घट रहा है और वे आर्थिक दबाव में आ रहे हैं।

    16 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया
    दोपहर के समय एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन को 16 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। इसमें मुख्य रूप से ऑनलाइन दवा बिक्री पर पूर्ण नियंत्रण या प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। इसके साथ ही दवाओं पर दिए जा रहे अत्यधिक डिस्काउंट को रोकने और एक मजबूत नियामक व्यवस्था बनाने की बात भी रखी गई।

    संघ के सचिव सागर आहूजा ने कहा कि बिना सख्त नियमों के चल रही ऑनलाइन फार्मेसी व्यवस्था पारंपरिक दवा कारोबारियों के अधिकारों का हनन कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध मरीजों के खिलाफ नहीं, बल्कि अनियंत्रित ऑनलाइन व्यापार प्रणाली के खिलाफ है।

    आंदोलन तेज करने की चेतावनी
    एसोसिएशन ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। व्यापारियों ने कहा कि वे अपने हितों और आम जनता की सुरक्षा दोनों के लिए एक मजबूत और पारदर्शी दवा बिक्री प्रणाली की मांग कर रहे हैं।

    कटनी का यह बंद केवल व्यापारिक विरोध नहीं बल्कि दवा वितरण प्रणाली में सुधार की मांग के रूप में देखा जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं।

  • महात्मा गांधी की तस्वीर वाले फर्जी नोटों से मचा बवाल, कलेक्टर से कार्रवाई की मांग

    महात्मा गांधी की तस्वीर वाले फर्जी नोटों से मचा बवाल, कलेक्टर से कार्रवाई की मांग


    कटनी । कटनी शहर में मंगलवार रात माईजी की नदी क्षेत्र से गुजर रही एक बारात उस समय विवादों में आ गई, जब बारात में शामिल कुछ युवक मनोरंजन के तौर पर नकली नोट हवा में उड़ा रहे थे। इन नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर छपी हुई थी, जिसे लेकर मौके पर मौजूद एक युवक ने आपत्ति जताई। शिकायतकर्ता बाबू उर्फ अविनाश नामदेव के अनुसार, ये नोट जमीन पर गिर रहे थे और लोगों के पैरों के नीचे आ रहे थे, जिसे उन्होंने राष्ट्रपिता का अपमान मानते हुए विरोध किया।

     विरोध करने पर युवक से मारपीट, नाली में धकेला
    अविनाश का आरोप है कि जब उन्होंने बारातियों को ऐसा करने से रोका और समझाने की कोशिश की, तो बारात में शामिल लोग भड़क गए। देखते ही देखते मामला बढ़ गया और गाली-गलौज के बाद मारपीट शुरू हो गई। पीड़ित का कहना है कि आरोपियों ने उन्हें धक्का देकर नाली में गिरा दिया और जान से मारने की धमकी भी दी। इस घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    कलेक्टर को दी शिकायत, कार्रवाई की मांग
    घटना के बाद अविनाश ने कलेक्टर आशीष तिवारी से लिखित शिकायत की है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि मारपीट करने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी केस दर्ज किया जाए। साथ ही, उन्होंने जिले में “मनोरंजन बैंक” जैसे नकली नोटों की बिक्री और सार्वजनिक उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की अपील भी की है।

     जागरूकता बनाम हंगामा: मामला बना चर्चा का विषय
    इस घटना के बाद शहर में लोगों के बीच नाराजगी और बहस का माहौल है। जहां एक ओर लोग इसे राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान से जोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बारात में हुए हंगामे को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

  • टीकमगढ़ में अवैध रेत खनन पर बड़ी कार्रवाई: धसान नदी में दो पनडुब्बियां जलाई गईं

    टीकमगढ़ में अवैध रेत खनन पर बड़ी कार्रवाई: धसान नदी में दो पनडुब्बियां जलाई गईं


    टीकमगढ़ । टीकमगढ़ जिले में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए बुधवार को बड़ी कार्रवाई की। पलेरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत धसान नदी में चल रहे अवैध खनन पर छापेमारी कर दो पनडुब्बियों को मौके पर ही आग लगाकर नष्ट कर दिया गया। इसके साथ ही, रेत खनन में इस्तेमाल की जा रही एक पोकलेन मशीन को प्रशासन ने जब्त कर लिया। इस कार्रवाई से अवैध खनन में लगे लोगों में हड़कंप मच गया और वे मौके से फरार हो गए।

     कलेक्टर के निर्देश पर हुई त्वरित कार्रवाई
    कलेक्टर विवेक श्रोतिय को धसान नदी में अवैध रेत उत्खनन की सूचना मिली थी, जिसके बाद उन्होंने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद जतारा एसडीएम और पलेरा तहसीलदार की टीम को मौके पर रवाना किया गया। टीम के पहुंचते ही अवैध खनन में शामिल लोग वहां से भाग निकले, लेकिन प्रशासन ने मौके पर मौजूद मशीनरी को जब्त और नष्ट करने की कार्रवाई शुरू कर दी।

    दो पनडुब्बियां जलाई गईं, मशीन जब्त
    राजस्व विभाग की टीम ने पलेरा तहसील के मजरा कूटिन क्षेत्र में धसान नदी पर चल रहे अवैध खनन को रोका। यहां मौजूद दो पनडुब्बियों को आग लगाकर पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। वहीं एक पोकलेन मशीन को जब्त कर लिया गया है, जिसे आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सुरक्षित रखा गया है।

     प्रशासन का सख्त संदेश: अवैध खनन पर लगातार कार्रवाई जारी
    कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिले में किसी भी हालत में अवैध रेत खनन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन की टीम लगातार निगरानी कर रही है और सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है। एसडीएम जतारा निशांत भूरिया, तहसीलदार पलेरा कुलदीप सिंह, तहसीलदार जतारा नितिन गौड़ और नायब तहसीलदार श्रीपत अहीरवार ने संयुक्त रूप से यह कार्रवाई की।

     रेत माफिया पर शिकंजा कसने की तैयारी
    लगातार मिल रही शिकायतों और कार्रवाई के बावजूद जिले में अवैध खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। प्रशासन का कहना है कि आगे भी इसी तरह सख्त अभियान चलाकर रेत माफिया पर शिकंजा कसा जाएगा।

  • नवजात की मौत से सनसनी: शरीर पर चींटियां, डॉक्टरों ने बताई 1 हफ्ते पुरानी डिलीवरी

    नवजात की मौत से सनसनी: शरीर पर चींटियां, डॉक्टरों ने बताई 1 हफ्ते पुरानी डिलीवरी


    टीकमगढ़ । टीकमगढ़ शहर के सिविल लाइन रोड स्थित नगर पालिका की ‘नेकी की दीवार’ परिसर में बुधवार दोपहर उस समय सनसनी फैल गई, जब कपड़ों के ढेर के बीच एक नवजात शिशु का शव मिला। यह वही जगह है, जहां लोग जरूरतमंदों के लिए कपड़े दान करते हैं और मानवता की मिसाल पेश करते हैं, लेकिन इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया।

    सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल भेजा गया। घटना के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई और हर कोई इस अमानवीय कृत्य पर हैरान नजर आया।

    डॉक्टरों का अनुमान: करीब एक सप्ताह पहले हुआ था जन्
    जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि नवजात की उम्र लगभग एक सप्ताह के आसपास हो सकती है। ड्यूटी डॉक्टर विजय जैन के अनुसार बच्चे के शरीर पर चींटियां लगी हुई थीं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि शव काफी समय से वहां पड़ा हुआ था।

    डॉक्टरों का यह भी कहना है कि बच्चे के हाथ पर मिले निशानों से संभावना जताई जा रही है कि उसका जन्म किसी निजी अस्पताल में हुआ हो सकता है। हालांकि, मौत के सही समय और कारण की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

     पुलिस जांच में जुटी, सीसीटीवी खंगाले जा रहे
    कोतवाली थाना प्रभारी रवि भूषण पाठक ने बताया कि पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर नवजात को इस तरह ‘नेकी की दीवार’ परिसर में कौन और कब छोड़कर गया। इसके लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि आरोपी तक पहुंचा जा सके। पुलिस का कहना है कि जल्द ही मामले की सच्चाई सामने लाई जाएगी।

    इलाके में गुस्सा और चिंता का माहौल
    इस घटना ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश और दुख का माहौल पैदा कर दिया है। जिस जगह को जरूरतमंदों की मदद और इंसानियत की मिसाल माना जाता है, वहीं इस तरह की घटना सामने आने से लोग स्तब्ध हैं।

  • इंदौर में बैंक कर्मचारी पर धोखाधड़ी का आरोप: खातों से लाखों रुपये गायब

    इंदौर में बैंक कर्मचारी पर धोखाधड़ी का आरोप: खातों से लाखों रुपये गायब


    इंदौर । इंदौर के राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में स्थित बीजलपुर की आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शाखा में कार्यरत एक कर्मचारी पर बड़ा वित्तीय घोटाले का आरोप सामने आया है। शिकायत के अनुसार बैंक कर्मचारी विष्णु शर्मा ने एक महिला और उसके देवर के खातों से बिना अनुमति लाखों रुपए निकाल लिए। पीड़िता द्रोपती बाई पति हीरालाल वर्मा ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने उनके देवर सत्यनारायण के बैंक खाते से लगातार अवैध लेन-देन किया और उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई।

    एटीएम जारी कर खुद ही रख लिया, फिर निकाली रकम
    आरोपों के मुताबिक, बैंक कर्मचारी ने पहले सत्यनारायण के नाम पर एटीएम कार्ड जारी कराया और उसे अपने पास ही रख लिया। इसके बाद 3 अगस्त से 14 अगस्त 2025 के बीच एटीएम ट्रांजैक्शन और ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए खाते से लाखों रुपए निकाल लिए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि खाताधारक को इस पूरे मामले की कोई जानकारी नहीं थी कि उसके नाम से एटीएम कार्ड जारी हो चुका है।

    ओटीपी लेकर महिला के खाते से भी उड़ाए पैसे
    शिकायत में यह भी सामने आया है कि 16 सितंबर 2025 को आरोपी द्रोपती बाई के घर पहुंचा और कहा कि बैंक खाता आधार से लिंक नहीं है। इसी बहाने उसने ओटीपी हासिल कर लिया और उनके खाते से करीब 4 लाख 85 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। इसी तरह देवर सत्यनारायण के खाते से भी करीब 4 लाख 89 हजार रुपए निकाले जाने का आरोप है, जिससे कुल धोखाधड़ी की रकम लाखों में पहुंच गई है।

     खाता खुलवाने के बहाने शुरू हुई धोखाधड़ी
    पीड़िता के अनुसार आरोपी पहले सत्यनारायण की दुकान पर खाता खुलवाने के लिए पहुंचा था। वहीं से उसके संपर्क में आया और धीरे-धीरे बैंकिंग प्रक्रिया के नाम पर पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। आरोप यह भी है कि कुछ रकम भूपेंद्र नामक व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर की गई, जिससे मामले की जटिलता और बढ़ गई है।

     पुलिस ने दर्ज किया केस, जांच जारी
    राजेंद्र नगर पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी बैंक कर्मचारी से पूछताछ शुरू कर दी गई है। पुलिस अब पूरे ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और बैंकिंग प्रक्रिया की गहन जांच कर रही है। फिलहाल यह मामला बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा और ग्राहक डेटा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

  • इंदौर में हड़कंप: ऑफिस में भीषण आग से लाखों का नुकसान, जांच शुरू

    इंदौर में हड़कंप: ऑफिस में भीषण आग से लाखों का नुकसान, जांच शुरू


    नई दिल्ली । इंदौर के लसूडिया क्षेत्र स्थित बेलमोर्ट पार्क के मेंटेनेंस ऑफिस में बुधवार तड़के अचानक आग लग गई। सुबह करीब 5 बजे गार्ड ने ऑफिस से धुआं निकलते देखा, जिसके बाद तुरंत आसपास के लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग तेजी से फैल गई।

    सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और कई दमकल वाहनों की मदद से आग पर काबू पाया गया। फायर ब्रिगेड के एएसआई सुशील कुमार दुबे के अनुसार आग लगने के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल सका है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि शॉर्ट सर्किट इसकी वजह हो सकता है। इस हादसे में ऑफिस में रखे सभी दस्तावेज, फर्नीचर और अन्य जरूरी सामान पूरी तरह जलकर खाक हो गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

    खंडवा रोड पर सब्जी दुकान जलकर राख
    इसी दिन सुबह खंडवा रोड स्थित अनुराधा नगर में भी एक सब्जी की दुकान में आग लग गई। दुकान बबली पति प्रीतम सिंह की बताई जा रही है। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरा सामान जल गया। दमकल विभाग ने मौके पर पहुंचकर करीब 1000 लीटर पानी डालकर आग पर काबू पाया। शुरुआती जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है।

    रेडिसन चौराहे के पास फर्नीचर बिल्डिंग में आग
    तीसरी घटना इंदौर के रेडिसन चौराहे के पास स्थित महिदपुर वाला फर्नीचर की बिल्डिंग में हुई, जहां सातवें माले पर आग लग गई। यह घटना सुबह करीब 10:30 बजे की है। सूचना मिलते ही दमकल की टीमें मात्र 15 मिनट में मौके पर पहुंच गईं और कर्मचारियों की मदद से आग पर काबू पा लिया गया। हालांकि आग के दौरान पूरे भवन में घना धुआं फैल गया, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस के अनुसार विजयनगर और खजराना थाना क्षेत्र की टीमें भी मौके पर पहुंचीं और स्थिति को नियंत्रित किया गया।

    लगातार आग की घटनाओं से बढ़ी चिंता
    इंदौर में एक ही दिन में तीन अलग-अलग जगहों पर आग लगने की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में अधिकतर मामलों में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, जिससे बिजली व्यवस्था और वायरिंग की जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

  • ग्लैमरस करियर और अचानक मौत: ट्विशा शर्मा की जिंदगी के अनसुने पहलू

    ग्लैमरस करियर और अचानक मौत: ट्विशा शर्मा की जिंदगी के अनसुने पहलू


    मध्य प्रदेश । भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस ने अब नया मोड़ ले लिया है। अब तक रिटायर्ड जज की बहू और वकील की पत्नी के रूप में पहचानी जाने वाली ट्विशा की जिंदगी का ग्लैमरस चेहरा सामने आया है। मॉडलिंग, फिल्मों और कॉर्पोरेट दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुकी ट्विशा शर्मा कभी फैशन और ग्लैमर इंडस्ट्री का चर्चित नाम थीं। लेकिन चमक-दमक से भरी जिंदगी का अंत जिस दर्दनाक तरीके से हुआ, उसने पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया है।

    ट्विशा शर्मा ने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखने के बाद कई नामी मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए विज्ञापन शूट किए थे। उन्होंने तेलुगु शॉर्ट फिल्मों और फिल्मों में भी अभिनय किया। अपने आकर्षक व्यक्तित्व और कॉन्फिडेंस की वजह से उन्होंने “मिस पुणे” का खिताब भी हासिल किया था। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें उनका ग्लैमरस अंदाज दिखाई दे रहा है।

    हालांकि अभिनय के क्षेत्र में बड़ी सफलता नहीं मिलने के बाद ट्विशा ने पढ़ाई पर ध्यान दिया और एमबीए कर कॉर्पोरेट सेक्टर में नौकरी शुरू की। इसी दौरान उनकी मुलाकात मेट्रिमोनियल साइट के जरिए भोपाल निवासी समर्थ सिंह से हुई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और दिसंबर 2025 में शादी हो गई। लेकिन शादी के कुछ ही महीनों बाद रिश्ते में तनाव और विवाद की बातें सामने आने लगीं।

    ट्विशा की संदिग्ध मौत के बाद परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है। घटना को आठ दिन से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन परिजनों ने अब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया है। परिवार दूसरे पोस्टमार्टम की मांग पर अड़ा हुआ है। मामले में दहेज मृत्यु का केस दर्ज किया गया है। वहीं, पूर्व जिला जज और ट्विशा की सास गिरीबाला सिंह को अग्रिम जमानत मिल चुकी है, जबकि पति समर्थ सिंह अब भी फरार बताया जा रहा है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है और कई टीमें उसकी तलाश में जुटी हैं।

    मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब ट्विशा के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने दावा किया कि शादी के बाद से ही उनकी बेटी मानसिक प्रताड़ना झेल रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हनीमून के दौरान भी समर्थ सिंह का व्यवहार हिंसक था। परिवार का कहना है कि उन्होंने शुरुआती शिकायतों को नजरअंदाज किया, जिसका आज उन्हें पछतावा है।

    ट्विशा के भाई मेजर हर्षित शर्मा ने भी जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि एफआईआर दर्ज कराने में देरी की गई और आरोपियों को बचाने की कोशिश हुई। वहीं ट्विशा की बहन नैना शर्मा ने वायरल सीसीटीवी फुटेज पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि वीडियो अधूरा है और घटना से जुड़े कई महत्वपूर्ण हिस्से सामने नहीं लाए गए।

    इस बीच राज्यसभा सांसद Vivek Tankha ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री को पत्र लिखकर मामले की CBI जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी जरूरी है, क्योंकि परिवार का स्थानीय पुलिस पर भरोसा कमजोर हुआ है।

    उधर, पूर्व सैनिकों ने भी ट्विशा को न्याय दिलाने के समर्थन में भोपाल में बाइक रैली निकालकर प्रदर्शन किया। मामले को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस तेज हो गई है। अब सभी की नजर पुलिस जांच और फरार आरोपी की गिरफ्तारी पर टिकी हुई है।

  • केमिस्टों की हड़ताल का असर: आज दवा दुकानों पर ताले, प्रशासन अलर्ट

    केमिस्टों की हड़ताल का असर: आज दवा दुकानों पर ताले, प्रशासन अलर्ट


    मध्य प्रदेश । ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री के विरोध में देशभर के केमिस्ट संगठनों के आह्वान पर आज झाबुआ जिले में मेडिकल स्टोर बंद रखे गए। इस बंद का असर झाबुआ, थांदला और पेटलावद सहित पूरे जिले में देखने को मिला। स्थानीय दवा विक्रेताओं ने इस विरोध को समर्थन देते हुए कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए दवाओं की बिक्री बढ़ने से पारंपरिक मेडिकल स्टोरों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

    केमिस्टों का आरोप: नियमों का उल्लंघन कर हो रही ऑनलाइन बिक्री
    शिवम मेडिकल के संचालक महेंद्र प्रताप सिंह राठौर ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री में नियमों की अनदेखी हो रही है। बिना उचित निगरानी और सत्यापन के दवाइयों की होम डिलीवरी से न केवल व्यापार प्रभावित हो रहा है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं। केमिस्टों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से गलत दवा उपयोग की संभावना बढ़ जाती है, जो जनस्वास्थ्य के लिए खतरा है।

    मरीजों की परेशानी से बचने प्रशासन ने की वैकल्पिक व्यवस्था
    मेडिकल स्टोर बंद रहने के कारण मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन ने पहले से व्यवस्था की है। ड्रग इंस्पेक्टर के अनुसार, जिले में कुछ सरकारी और निजी अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर आज खुले रखे गए हैं। इनमें जिला चिकित्सालय स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के साथ-साथ मेघनगर और थांदला के जन औषधि केंद्र शामिल हैं।

    निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोर भी खुले
    प्रशासन ने कई निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोरों को भी संचालन की अनुमति दी है ताकि मरीजों को जरूरी दवाएं आसानी से मिल सकें। इनमें झाबुआ, थांदला और पेटलावद क्षेत्र के कई मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल शामिल हैं। इन केंद्रों पर आम नागरिक अपनी आवश्यक दवाएं प्राप्त कर सकते हैं।

    प्रशासन की अपील
    ड्रग इंस्पेक्टर ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और केवल निर्धारित मेडिकल स्टोरों से ही दवाएं खरीदें। उन्होंने आश्वासन दिया है कि आवश्यक दवाओं की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी।

  • तबादला नीति में राहत: गंभीर बीमार कर्मचारियों को मिल सकती है छूट

    तबादला नीति में राहत: गंभीर बीमार कर्मचारियों को मिल सकती है छूट


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद तबादलों का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार की तबादला नीति-2026 को मंजूरी दे दी गई। नई नीति के तहत प्रदेश में 1 जून से 15 जून तक कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादले किए जा सकेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट को मुख्यमंत्री सचिवालय भेजा गया था, जिसे अंतिम मंजूरी मिलने के बाद लागू करने का निर्णय लिया गया।

    नई तबादला नीति में कर्मचारियों को कई महत्वपूर्ण राहतें दी गई हैं। सरकार ने साफ किया है कि पति-पत्नी की पोस्टिंग एक ही स्थान पर रखने के मामलों पर प्राथमिकता से विचार किया जाएगा। इसके अलावा गंभीर बीमारी से पीड़ित कर्मचारियों को भी तबादलों में विशेष रियायत दी जाएगी। सरकार ने ऐसे मामलों को संवेदनशील मानते हुए उन्हें प्राथमिक श्रेणी में रखने का फैसला किया है।

    कैबिनेट बैठक के बाद एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री की ‘ए प्लस’ नोटशीट वाले तबादलों को 31 मई तक पूरा किया जाएगा। लंबित आवेदन भी इसी अवधि में निपटाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी की पोस्टिंग और गंभीर बीमारी से जुड़े मामलों को सामान्य तबादला नीति से अलग रखा गया है, ताकि इन मामलों में त्वरित निर्णय लिए जा सकें।

    नई नीति में प्रशासनिक और स्वैच्छिक तबादलों की सीमा अलग-अलग तय करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। अब तक दोनों को एक ही कोटे में शामिल किया जाता था, जिससे प्रशासनिक जरूरतों के मुताबिक फेरबदल करने में परेशानी होती थी। सरकार का मानना है कि अलग कोटा तय होने से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।

    तबादलों की सीमा को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था बनाई गई है। जिन विभागों में 200 तक कर्मचारी हैं, वहां कुल कर्मचारियों के 20 प्रतिशत तक तबादले किए जा सकेंगे। 200 से 1000 कर्मचारियों वाले विभागों में 15 प्रतिशत, 1000 से 2000 कर्मचारियों वाले विभागों में 10 प्रतिशत और 2000 से अधिक कर्मचारियों वाले विभागों में पांच प्रतिशत तबादले किए जाएंगे।

    स्कूल शिक्षा विभाग की तबादला नीति हर वर्ष की तरह अलग रहेगी। वहीं जनजातीय कार्य, राजस्व और ऊर्जा विभाग भी अपनी अलग नीति जारी कर सकेंगे, लेकिन वे मूल ढांचे से अलग व्यवस्था नहीं बना पाएंगे। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादले जिला स्तर पर प्रभारी मंत्री और कलेक्टर की अनुशंसा से होंगे, जबकि प्रथम श्रेणी अधिकारियों के तबादलों के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी जरूरी होगी।

    सरकार ने यह भी तय किया है कि सभी ट्रांसफर ऑर्डर ऑनलाइन सिस्टम के जरिए जारी किए जाएंगे। हालांकि जिन विभागों में ऑनलाइन व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, वहां ऑफलाइन आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। अनुसूचित क्षेत्रों में रिक्त पदों को प्राथमिकता से भरने का निर्णय लिया गया है। साथ ही किसी जिले में तीन वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद ही तबादले किए जाएंगे और वरिष्ठता का भी ध्यान रखा जाएगा।

    कर्मचारी संगठनों के नेताओं को नियुक्ति के बाद चार साल तक तबादलों से छूट देने का प्रावधान भी रखा गया है। वहीं गंभीर बीमारी से जूझ रहे और सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे शिक्षकों को तबादले से राहत दी जाएगी। अतिरिक्त शिक्षकों को अन्य संस्थानों में समायोजित करने की प्रक्रिया भी लागू की जाएगी।

    कैबिनेट बैठक में तबादला नीति के अलावा कई अन्य अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने उज्जैन में वर्ष 2027 में होने वाली मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक का उल्लेख किया और कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का भी निरीक्षण करेंगे। बैठक में प्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने वाले पुलिस अधिकारियों को सम्मानित किए जाने की जानकारी भी साझा की गई।

  • अंधविश्वास बना मौत की वजह: अशोकनगर में 13 साल की बच्ची की दर्दनाक मौत

    अंधविश्वास बना मौत की वजह: अशोकनगर में 13 साल की बच्ची की दर्दनाक मौत


    मध्य प्रदेश । अशोकनगर जिले के मोला डेम गांव में अंधविश्वास और झाड़-फूंक के चक्कर में एक 13 वर्षीय किशोरी की जान चली गई। बुधवार तड़के सांप के काटने के बाद बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय परिजन उसे देव स्थान पर झाड़-फूंक कराने ले गए। इलाज में हुई देरी आखिरकार मासूम के लिए जानलेवा साबित हुई और जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।

    मृतक किशोरी की पहचान लक्ष्मी आदिवासी के रूप में हुई है। घटना बुधवार सुबह करीब 4:30 बजे की बताई जा रही है। लक्ष्मी अपने माता-पिता के साथ घर में जमीन पर सो रही थी। इसी दौरान अचानक एक जहरीले सांप ने उसके पैर में काट लिया। तेज दर्द महसूस होते ही किशोरी जोर-जोर से चीखने लगी। बेटी की आवाज सुनकर माता-पिता घबराकर उठे तो वहां सांप दिखाई दिया। घटना के बाद परिवार और आसपास के ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई।

    ग्रामीणों ने परिजनों को तुरंत अस्पताल ले जाने की सलाह देने के बजाय बच्ची को स्थानीय देव स्थान ले जाने की बात कही। इसके बाद परिवार लक्ष्मी को अस्पताल पहुंचाने के बजाय झाड़-फूंक कराने ले गया। वहां काफी देर तक कथित उपचार चलता रहा। ग्रामीण मान्यताओं और अंधविश्वास के कारण समय लगातार बीतता गया, जबकि किशोरी की हालत बिगड़ती चली गई।

    जब काफी देर बाद भी बच्ची की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ और उसकी हालत गंभीर होने लगी, तब परिजनों को अस्पताल ले जाने की जरूरत महसूस हुई। आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल के लिए रवाना किया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने तक किशोरी की सांसें लगभग थम चुकी थीं। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    घटना के बाद अस्पताल में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। अस्पताल प्रबंधन ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव का पोस्टमार्टम कराया और बाद में शव परिजनों को सौंप दिया गया।

    यह घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में फैले अंधविश्वास और जागरूकता की कमी को उजागर करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सांप काटने की स्थिति में मरीज को बिना समय गंवाए तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए, क्योंकि शुरुआती इलाज और एंटी-वेनम इंजेक्शन ही जान बचाने का सबसे प्रभावी तरीका होता है। लेकिन कई ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग झाड़-फूंक और टोने-टोटके पर भरोसा कर इलाज में देरी कर देते हैं, जिसका परिणाम कई बार जानलेवा साबित होता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान की बेहद जरूरत है, ताकि लोग अंधविश्वास छोड़कर समय पर चिकित्सा सुविधा का सहारा लें और ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।