Category: Madhya Pradesh

  • हर-हर महादेव से गूंजा मध्य प्रदेश, महाकाल से ओंकारेश्वर तक विशेष पूजा; 6 क्विंटल फूलों से सजे भोजेश्वर के होंगे भव्य दर्शन

    हर-हर महादेव से गूंजा मध्य प्रदेश, महाकाल से ओंकारेश्वर तक विशेष पूजा; 6 क्विंटल फूलों से सजे भोजेश्वर के होंगे भव्य दर्शन


    उज्जैन । सावन के चौथे और आखिरी सोमवार पर मध्य प्रदेश के शिवालयों में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। सुबह से ही उज्जैन से लेकर ओंकारेश्वर भोजपुर टीकमगढ़ इंदौर मंदसौर और ग्वालियर तक शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं। हर तरफ हर हर महादेव और बोल बम के जयकारे गूंज रहे हैं। भगवान शिव के प्रिय सावन महीने के अंतिम सोमवार को लेकर मंदिरों में विशेष पूजा अभिषेक और आकर्षक श्रृंगार किया गया है।

    उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में सोमवार तड़के भस्म आरती के लिए मंदिर के कपाट 2:30 बजे खोल दिए गए। परंपरा के अनुसार सभा मंडप में भगवान शिव के गण वीरभद्र के कान में स्वस्ति वाचन कर बाबा की आज्ञा ली गई। इसके बाद चांदी का पट खोलकर कर्पूर आरती की गई। नंदी हॉल में नंदी का स्नान ध्यान और पूजन संपन्न हुआ। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध दही घी शक्कर शहद तथा फलों के रस से बने पंचामृत से विशेष पूजन हुआ।

    भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का बेहद आकर्षक श्रृंगार किया गया। भगवान को रजत चंद्र त्रिशूल मुकुट और अन्य आभूषण धारण कराए गए। भांग चंदन और ड्रायफ्रूट से श्रृंगार करने के बाद भस्म अर्पित की गई। बाबा को शेषनाग का रजत मुकुट रजत की मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला पहनाई गई। फूलों की माला से भी भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। फल और मिठाई का भोग लगाया गया। बाबा के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

    महाकाल मंदिर में आज शाम 4 बजे बाबा की राजसी सवारी भी निकलेगी। पूजा अर्चना के बाद भगवान महाकाल को पालकी में विराजित कर नगर भ्रमण कराया जाएगा। सवारी में भगवान के अलग अलग स्वरूपों के दर्शन होंगे। चंद्रमौलेश्वर पालकी में मनमहेश गजराज पर शिव तांडव गरुड़ रथ पर और उमा महेश नंदी रथ पर विराजमान होंगे। घुड़सवार पुलिस दल सशस्त्र बल होमगार्ड भजन मंडलियां और पुलिस बैंड सवारी का हिस्सा होंगे। रामघाट पर शिप्रा नदी के जल से भगवान का अभिषेक और पूजन किया जाएगा।

    ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग में भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। यहां बाबा का रुद्राभिषेक और विशेष पूजन किया जा रहा है। शाम को भगवान ओंकारेश्वर का नौका विहार होगा। पारंपरिक सवारी के दौरान हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की जाएगी। सवारी में पुलिस बैंड सात ढोल बैंड और धार्मिक झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

    भोजपुर के ऐतिहासिक भोजेश्वर महादेव मंदिर में भी सावन के अंतिम सोमवार को विशेष आयोजन हुआ। यहां भगवान भोजेश्वर महादेव को महाकालेश्वर स्वरूप में सजाया गया है। भोलेनाथ का करीब 6 क्विंटल फूलों से भव्य श्रृंगार किया गया। टीकमगढ़ के शिवधाम कुंडेश्वर में रिमझिम बारिश के बीच श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंच रहे हैं। इंदौर के गेंदेश्वर महादेव मंदिर में प्रतीकात्मक रूप से 12 ज्योतिर्लिंग बनाए गए हैं जहां सुबह से भक्त दर्शन कर रहे हैं।

    मंदसौर के अष्टमुखी पशुपतिनाथ मंदिर में मंगला आरती के बाद अभिषेक और पूजन शुरू हुआ। वहीं इंदौर के पंचकुइयां स्थित प्राचीन भूतेश्वर महादेव मंदिर में बेलपत्र और फूलों से बाबा का विशेष श्रृंगार किया गया। रतलाम से सांवरिया मित्र मंडल की पैदल कांवड़ यात्रा केदारेश्वर के लिए रवाना हुई है जिसमें ढोल ताशे डीजे और धार्मिक झांकियां शामिल हैं। श्योपुर में भी कांवड़िए भूतेश्वर महादेव का जलाभिषेक करेंगे।

    सावन के अंतिम सोमवार पर मध्य प्रदेश का माहौल पूरी तरह शिवमय नजर आ रहा है। मंदिरों में विशेष श्रृंगार से लेकर अभिषेक कांवड़ यात्राओं और भव्य सवारियों तक हर जगह श्रद्धा और उत्साह का संगम दिखाई दे रहा है। शाम को महाकाल की राजसी सवारी और ओंकारेश्वर की पारंपरिक यात्रा के साथ शिवभक्ति का यह पर्व और भव्य रूप लेगा।

  • भोपाल में दिखेगा सेना का शौर्य, आर्मी डे परेड में पहली बार सड़कों पर उतरेंगे टैंक; 50 हजार दर्शकों के लिए खास इंतजाम

    भोपाल में दिखेगा सेना का शौर्य, आर्मी डे परेड में पहली बार सड़कों पर उतरेंगे टैंक; 50 हजार दर्शकों के लिए खास इंतजाम


    भोपाल । भोपाल में देश की सैन्य ताकत और शौर्य का ऐसा नजारा पहली बार देखने को मिलेगा जब सेना के भारी-भरकम टैंक शहर की सड़कों पर अपनी ताकत और क्षमता का प्रदर्शन करते नजर आएंगे। 15 जनवरी 2027 को आर्मी डे के मौके पर होने वाली विशेष परेड के लिए तैयारियां तेज हो गई हैं। इस ऐतिहासिक आयोजन को करीब 50 हजार दर्शकों के देखने की उम्मीद है। खास बात यह है कि भोपाल में पहली बार आर्मी डे परेड किसी सैन्य कैंटोनमेंट के भीतर नहीं बल्कि आम लोगों के बीच सार्वजनिक क्षेत्र में आयोजित की जाएगी।

    आर्मी डे परेड 2027 के लिए भोपाल का चयन इसी साल मार्च में किया गया था। इसके बाद से ही प्रशासन और सेना के स्तर पर आयोजन को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। शनिवार को सेना भोपाल पुलिस जिला प्रशासन बिजली कंपनी लोक निर्माण विभाग भेल और सीपीए के अधिकारियों ने प्रस्तावित परेड मार्ग और आयोजन स्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने गोविंदपुरा थाने से जंबूरी मैदान तक जाने वाली सड़क का जायजा लिया और सैन्य वाहनों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए जरूरी बदलावों पर चर्चा की।

    एडीएम महेंद्र कपचे के नेतृत्व में अधिकारियों ने पूरे मार्ग का निरीक्षण किया। गोविंदपुरा थाने से जंबूरी मैदान तक करीब 2.4 किलोमीटर लंबे मार्ग को विशेष रूप से तैयार किया जाएगा। इस सड़क की चौड़ाई बढ़ाकर करीब 15 मीटर की जाएगी। भारी सैन्य टैंकों और अन्य सैन्य वाहनों की आवाजाही को देखते हुए सड़क की मजबूती बढ़ाने का काम भी किया जाएगा। पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर एससी वर्मा के मुताबिक सड़क को इस तरह मजबूत किया जाएगा कि भारी वजन वाले सैन्य टैंकों का दबाव आसानी से सह सके।

    परेड को देखने आने वाले लोगों के लिए भी विशेष इंतजाम किए जाएंगे। सड़क के दोनों ओर करीब 50 हजार दर्शकों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी। प्रशासन की कोशिश है कि बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के बावजूद आयोजन स्थल पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे। इसी वजह से पूरे मार्ग को पहले से चिन्हित कर आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं।

    आयोजन के दौरान सड़क पर स्पीड ब्रेकर नहीं होंगे ताकि टैंक और सैन्य वाहनों की आवाजाही में किसी तरह की बाधा न आए। इसके अलावा मार्ग में आने वाले कुछ बिजली के पोल और पेड़ों को भी हटाया जाएगा। सैन्य वाहनों की पार्किंग के लिए नटराज-हेमा स्कूल मार्ग को निर्धारित किया गया है। इससे मुख्य परेड मार्ग पर भीड़ और वाहनों का दबाव कम रखने में मदद मिलेगी।

    भोपाल में होने वाला यह आयोजन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि आम नागरिकों को सेना के अत्याधुनिक टैंकों और सैन्य वाहनों को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। आमतौर पर आर्मी डे परेड सैन्य कैंटोनमेंट क्षेत्रों में आयोजित होती रही है लेकिन 2027 में भोपाल में इसे सार्वजनिक क्षेत्र में आयोजित करने का फैसला किया गया है। इससे शहरवासियों के बीच सेना के प्रति जुड़ाव और गौरव की भावना को और मजबूत करने की उम्मीद है।

    आयोजन को सफल बनाने के लिए सेना और स्थानीय प्रशासन के बीच लगातार समन्वय किया जा रहा है। सड़क की मजबूती से लेकर दर्शकों के बैठने की व्यवस्था यातायात प्रबंधन बिजली व्यवस्था और सुरक्षा तक हर पहलू पर तैयारी की जा रही है। आने वाले दिनों में परेड मार्ग पर निर्माण और सुधार कार्य तेज होने की संभावना है। 15 जनवरी 2027 को भोपाल में होने वाला आर्मी डे समारोह शहर के लिए एक ऐतिहासिक अवसर होगा जब राजधानी की सड़कों पर पहली बार सेना के टैंक अपनी ताकत का प्रदर्शन करते दिखाई देंगे और हजारों लोग इस भव्य सैन्य आयोजन के गवाह बनेंगे।

  • पत्नी से कहासुनी के बाद कमरे में गया था विनोद, कुछ देर बाद फंदे पर मिला शव; भोपाल के कृषक नगर में सनसनी

    पत्नी से कहासुनी के बाद कमरे में गया था विनोद, कुछ देर बाद फंदे पर मिला शव; भोपाल के कृषक नगर में सनसनी


    भोपाल । भोपाल के निशातपुरा थाना क्षेत्र में रविवार देर रात एक दर्दनाक घटना सामने आई। कृषक नगर में रहने वाले 55 वर्षीय लोडिंग ऑटो चालक विनोद कुशवाहा ने घर के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना से कुछ देर पहले ही विनोद शराब के नशे में घर पहुंचा था। पत्नी ने उसके शराब पीकर आने का विरोध किया तो दोनों के बीच विवाद हो गया। कहासुनी के बाद विनोद अपने कमरे में चला गया। कुछ देर बाद जब परिजनों ने कमरे में जाकर देखा तो वह फंदे पर लटका मिला। घटना के बाद परिवार में चीख पुकार मच गई। सूचना मिलने पर निशातपुरा पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मर्ग कायम किया। पुलिस अब आत्महत्या के पीछे की वास्तविक वजहों का पता लगाने में जुटी है।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान विनोद कुशवाहा पिता लालूराम कुशवाहा के रूप में हुई है। वह निशातपुरा के कृषक नगर में अपने परिवार के साथ रहता था और लोडिंग ऑटो चलाकर परिवार की जिम्मेदारियां संभालता था। उसके परिवार में पत्नी एक बेटा और दो बेटियां हैं। दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है। परिजनों ने पुलिस को बताया कि विनोद लंबे समय से शराब का सेवन करता था। शराब पीने के बाद उसका व्यवहार कई बार बदल जाता था और घर में पत्नी तथा बच्चों के साथ विवाद की स्थिति बन जाती थी।

    परिजनों के मुताबिक परिवार के लोग विनोद को शराब छोड़ने के लिए लगातार समझाते थे। पत्नी और बच्चों की ओर से उसे शराब से दूर रहने की सलाह दी जाती थी लेकिन वह कई बार इस बात पर नाराज हो जाता था। शराब छोड़ने की बात को लेकर भी घर में कहासुनी होने की जानकारी पुलिस को दी गई है। रविवार देर रात भी विनोद शराब के नशे में घर पहुंचा। पत्नी ने जब शराब पीकर आने पर आपत्ति जताई तो दोनों के बीच विवाद हो गया। विवाद के बाद विनोद अपने कमरे में चला गया और परिवार के लोग भी कुछ देर बाद शांत हो गए।

    कुछ समय बीतने के बाद परिजनों को विनोद की कोई गतिविधि नजर नहीं आई। जब उन्होंने कमरे में जाकर देखा तो उनके होश उड़ गए। विनोद फंदे पर लटका हुआ था। परिजनों ने उसे बचाने की कोशिश की और तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को फंदे से नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ ही परिवार के सदस्यों से पूछताछ शुरू कर दी है।

    फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है। शुरुआती जानकारी में पत्नी से विवाद और शराब की लत को घटना से जोड़कर देखा जा रहा है लेकिन पुलिस का कहना है कि वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। पुलिस परिजनों के बयान दर्ज कर रही है और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है।

    विनोद की मौत से परिवार सदमे में है। एक ओर घर के मुखिया की अचानक मौत से परिजन टूट गए हैं तो दूसरी ओर इस घटना ने शराब की लत से पैदा होने वाले पारिवारिक तनाव और उसके गंभीर परिणामों को भी सामने ला दिया है। फिलहाल निशातपुरा पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

  • जंतर-मंतर आंदोलन के बाद MP में सरकारी भर्तियों की रफ्तार तेज, डेढ़ महीने में 35% ज्यादा पदों के विज्ञापन; अब 19 हजार नौकरियों की तैयारी

    जंतर-मंतर आंदोलन के बाद MP में सरकारी भर्तियों की रफ्तार तेज, डेढ़ महीने में 35% ज्यादा पदों के विज्ञापन; अब 19 हजार नौकरियों की तैयारी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भर्ती के मोर्चे पर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। जनवरी से जून 2026 के मुकाबले जुलाई और अगस्त में सरकारी भर्तियों के विज्ञापन तेजी से जारी हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से जून तक 7,723 पदों के लिए विज्ञापन निकाले गए थे जबकि 1 जुलाई से 21 अगस्त के बीच ही 10,399 पदों पर भर्ती के विज्ञापन जारी हो चुके हैं। यानी करीब डेढ़ महीने में पहले छह महीनों की तुलना में 2,676 अधिक पदों पर भर्ती निकली और इसमें लगभग 34.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई।

    भर्तियों में यह तेजी उस दौर में आई जब बेरोजगारी और लंबित भर्ती परीक्षाओं को लेकर युवाओं का आंदोलन चल रहा था। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के बैनर तले युवाओं ने 6 जून से 25 जुलाई तक जंतर-मंतर समेत विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन किया। आंदोलन के दौरान युवाओं ने सरकारी भर्तियों की संख्या बढ़ाने लंबित परीक्षाओं के परिणाम जारी करने और भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग उठाई थी। मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कुछ भर्तियों की प्रक्रिया पहले धीमी गति से आगे बढ़ रही थी लेकिन आंदोलन के बाद कई विभागों ने रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया में तेजी दिखाई।

    आंदोलन से पहले यानी जनवरी से जून के बीच MPESB MPPSC और अन्य विभागों के जरिए कुल 7,723 पदों पर भर्ती के विज्ञापन जारी हुए थे। इनमें MPESB के 5,346 पद शामिल थे। इन पदों में आईटीआई ट्रेनिंग ऑफिसर पुलिस एएसआई वनरक्षक जेल प्रहरी और नर्सिंग ऑफिसर जैसी भर्तियां शामिल रहीं। MPPSC के जरिए 1,391 पदों पर भर्ती निकली जबकि पुलिस बैंड आरक्षक के 679 पदों के अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन MPSEDC MPPCB MPBDC और अन्य विभागों में भी पदों के विज्ञापन जारी हुए।

    भर्ती प्रक्रिया में सबसे बड़ा बदलाव आंदोलन खत्म होने के आसपास देखने को मिला। 25 जुलाई को आंदोलन समाप्त हुआ और इसके अगले ही दिन 26 जुलाई को 4,771 पदों पर भर्ती के विज्ञापन जारी किए गए। इससे पहले 23 जुलाई को सरकार ने पुलिस विभाग में 9,662 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी थी। इनमें 8,500 आरक्षक GD और चालक के पद शामिल हैं। खास बात यह है कि पुलिस विभाग में इतनी बड़ी भर्ती करीब आठ साल बाद होने जा रही है।

    सिर्फ नए विज्ञापन ही नहीं बल्कि लंबित भर्ती परीक्षाओं के परिणाम जारी करने की दिशा में भी तेजी दिखाई दी। 4,848 पदों के लिए हुई परीक्षाओं के परिणाम घोषित किए गए। इनमें 2,873 पदों के परिणाम 26 जुलाई से 21 अगस्त के बीच जारी हुए। यानी आंदोलन खत्म होने के बाद नए विज्ञापनों के साथ पुराने भर्ती परिणामों को जारी करने का काम भी तेज हुआ।

    अब युवाओं की नजर सितंबर से दिसंबर 2026 के भर्ती कैलेंडर पर है। MPESB के संशोधित कैलेंडर के मुताबिक इस अवधि में 11 बड़ी भर्ती परीक्षाएं प्रस्तावित हैं जिनमें कुल 19,062 पद शामिल हैं। इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अवसरों का दायरा और बढ़ सकता है।

    सरकार ने भी सरकारी नौकरियों को लेकर बड़ा लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री ने 15 अगस्त को वर्ष 2026 में एक लाख सरकारी नौकरियों की भर्ती का लक्ष्य घोषित किया। इसके साथ 2027-28 तक करीब दो लाख सरकारी पदों पर भर्ती अभियान की रूपरेखा तैयार करने की बात कही गई है। सरकार ने पांच साल में 2.5 लाख सरकारी पदों पर भर्ती का लक्ष्य भी रखा है।

    भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए आवेदन से लेकर रिजल्ट तक डिजिटल सिस्टम विकसित करने की तैयारी है। अभ्यर्थियों को भर्ती से जुड़ी जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध कराने के लिए विशेष ऐप लाने की घोषणा की गई है। इसके अलावा पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए विशेष कानून बनाने की तैयारी भी बताई गई है।

    कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में सरकारी भर्तियों की तस्वीर आने वाले महीनों में और बदल सकती है। जुलाई-अगस्त में बढ़ी भर्ती की रफ्तार और सितंबर से दिसंबर तक प्रस्तावित 19 हजार से ज्यादा पद युवाओं के लिए बड़ा अवसर हैं। हालांकि अभ्यर्थियों के लिए जरूरी होगा कि वे आधिकारिक भर्ती कैलेंडर आवेदन की तारीख पात्रता और परीक्षा कार्यक्रम पर नजर रखें क्योंकि केवल विज्ञापन जारी होना नौकरी मिलने की गारंटी नहीं है बल्कि चयन प्रक्रिया के हर चरण में सफलता हासिल करना जरूरी होगा।

  • TET में फेल हुए तो जाएगी नौकरी? 2028 तक मिला मौका, जानिए किन शिक्षकों को परीक्षा देना जरूरी और प्रमोशन पर क्या होगा

    TET में फेल हुए तो जाएगी नौकरी? 2028 तक मिला मौका, जानिए किन शिक्षकों को परीक्षा देना जरूरी और प्रमोशन पर क्या होगा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में लंबे समय से सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों के सामने अब TET यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा की नई चुनौती खड़ी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सेवारत शिक्षकों के लिए भी TET पास करना जरूरी किया गया है। यही वजह है कि 15 से 20 साल से नौकरी कर रहे शिक्षक भी अब परीक्षा की तैयारी को लेकर असमंजस में हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किन शिक्षकों को TET देना होगा और अगर तय समय में परीक्षा पास नहीं की तो क्या नौकरी चली जाएगी।

    दरअसल TET की अनिवार्यता पहले मुख्य रूप से नई शिक्षक भर्ती से जुड़ी शर्त मानी जाती थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2025 के फैसले के बाद इसका दायरा पहले से सेवा में मौजूद शिक्षकों तक पहुंच गया। शिक्षक संगठनों ने इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग भी उठाई और तर्क दिया कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति TET अनिवार्य होने से पहले हो चुकी थी उन्हें बाद में इस नियम के दायरे में नहीं लाया जाना चाहिए। हालांकि कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने शिक्षा के अधिकार कानून को बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य से जोड़ते हुए शिक्षक की योग्यता को महत्वपूर्ण माना।

    अब सबसे अहम बात यह है कि हर सेवारत शिक्षक को TET देना जरूरी नहीं है। जिन शिक्षकों की सेवा में पांच साल से कम समय बचा है उन्हें TET की अनिवार्यता से राहत दी गई है। वहीं जिनकी सेवा में पांच साल से ज्यादा समय बाकी है उन्हें TET पास करना होगा। इसके लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया गया है। हालांकि जो शिक्षक प्रमोशन चाहते हैं उनके लिए TET की शर्त अलग है। सेवा में कितने भी साल बाकी हों प्रमोशन के लिए TET पास करना जरूरी होगा।

    यही वजह है कि 2028 तक समय मिलने के बावजूद शिक्षक अभी से चिंतित हैं। सबसे बड़ी परेशानी नियमों की स्पष्टता को लेकर है। अलग-अलग समय पर नियुक्त हुए शिक्षकों को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं। 2005 से 2009 के बीच भर्ती हुए करीब 70 हजार शिक्षकों की स्थिति को लेकर राज्य सरकार भी राहत की मांग कर रही है। इसके अलावा पुराने पात्रता परीक्षणों को TET के बराबर माना जाएगा या नहीं इस पर भी स्पष्टता का इंतजार है। इसी तरह पहले से TET या CTET पास कर चुके शिक्षकों को दोबारा परीक्षा देनी होगी या उनका पुराना प्रमाणपत्र मान्य होगा इसको लेकर भी शिक्षकों में असमंजस है।

    नौकरी जाने का सवाल भी शिक्षकों की चिंता बढ़ा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक पात्र शिक्षकों को तय अवधि में TET पास करना होगा। निर्धारित समय तक योग्यता हासिल नहीं करने पर सेवा संबंधी कार्रवाई की स्थिति बन सकती है। वहीं प्रमोशन के लिए TET अनिवार्य रहेगा। कोर्ट ने 31 अगस्त 2028 तक परीक्षा पास करने का मौका दिया है और राज्यों को नियमित रूप से परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद अतिरिक्त मोहलत नहीं दिए जाने की बात भी कही गई है।

    शिक्षकों की दूसरी बड़ी चिंता परीक्षा के सिलेबस और कठिनाई स्तर को लेकर है। लंबे समय से कक्षा में पढ़ाने वाले शिक्षकों का कहना है कि परीक्षा की तैयारी और नियमित शिक्षण कार्य दोनों को साथ संभालना आसान नहीं होगा। कुछ विषयों का स्तर ग्रेजुएशन तक होने की बात सामने आने से भी शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है। ऑनलाइन परीक्षा भी कई वरिष्ठ शिक्षकों के लिए चुनौती बन सकती है क्योंकि उन्हें कंप्यूटर आधारित परीक्षा देने का पर्याप्त अभ्यास नहीं है।

    फीस और परीक्षा व्यवस्था को लेकर भी मांगें उठ रही हैं। शिक्षक संगठन फीस माफ करने ऑफलाइन परीक्षा आयोजित करने परीक्षा के दिन अवकाश देने और जरूरत पड़ने पर यात्रा भत्ता उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि शिक्षक अपनी नियुक्ति की तारीख सेवा अवधि पुराने TET या CTET प्रमाणपत्र और प्रमोशन की स्थिति के आधार पर अपनी पात्रता को स्पष्ट करें। 2028 तक मिला समय राहत जरूर है लेकिन नियमों की अस्पष्टता के बीच शिक्षकों के लिए यह परीक्षा अब नौकरी और करियर दोनों से जुड़ा महत्वपूर्ण पड़ाव बन गई है।

  • Madhya Pradesh Weather: 27 अगस्त तक बारिश का दौर, डिंडौरी-बालाघाट में ऑरेंज अलर्ट; विदिशा से रीवा तक बारिश बनी मुसीबत

    Madhya Pradesh Weather: 27 अगस्त तक बारिश का दौर, डिंडौरी-बालाघाट में ऑरेंज अलर्ट; विदिशा से रीवा तक बारिश बनी मुसीबत


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मानसून ट्रफ चक्रवाती परिसंचरण और निम्न दबाव क्षेत्र से बने मजबूत मौसम सिस्टम के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश का दौर शुरू हो गया है। अगले 24 घंटे में खासतौर पर पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने डिंडौरी और बालाघाट में ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए 4 से 8 इंच तक बारिश की आशंका जताई है। इसके अलावा विदिशा सागर रायसेन नर्मदापुरम बैतूल छिंदवाड़ा पांढुर्णा नरसिंहपुर दमोह सिवनी जबलपुर मंडला कटनी उमरिया शहडोल अनूपपुर रीवा मऊगंज सीधी और छतरपुर में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

    राजधानी भोपाल में रविवार रात तेज बारिश हुई। वहीं विदिशा जिले के लटेरी में करीब एक घंटे हुई मूसलाधार बारिश के बाद मुख्य बाजार में पानी भर गया। सड़कों पर पानी जमा होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। अशोकनगर में बारिश ने एक परिवार पर दुखों का पहाड़ गिरा दिया। ईसागढ़ के नरसूखेड़ी गांव के पास पुलिया पार करते समय करीब 30 वर्षीय अजय मराठा बाइक समेत तेज बहाव में बह गया। काफी तलाश के बाद सोमवार सुबह उसका शव झाड़ियों में फंसा मिला।

    सीधी में भी बारिश के दौरान हादसा सामने आया जहां प्रसिद्ध बढ़ौरा शिव मंदिर के पास एक महिला की पुल से गिरने के बाद मौत हो गई। दूसरी ओर रीवा के जवा जनपद की रौली गांव में बाढ़ ने अंतिम यात्रा का रास्ता भी रोक दिया। संजय गांधी अस्पताल रीवा में मोतीलाल तिवारी के निधन के बाद जब उनका शव गांव ले जाया जा रहा था तो रास्ते में तेज बहाव के कारण आगे जाना मुश्किल हो गया। ग्रामीणों ने दो ड्रमों को आपस में बांधकर उनके ऊपर शव रखा और बाढ़ के पानी को पार कराया। इसके बाद शव गांव पहुंचाया गया और अंतिम संस्कार किया गया।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में 27 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। पूर्वी हिस्से के साथ अब पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी कई जगह तेज बारिश होने की संभावना है। भोपाल सीहोर राजगढ़ इंदौर धार आलीराजपुर बुरहानपुर बड़वानी खंडवा खरगोन झाबुआ उज्जैन नीमच आगर मालवा मंदसौर शाजापुर देवास रतलाम हरदा ग्वालियर गुना शिवपुरी दतिया अशोकनगर मुरैना भिंड श्योपुर सतना सिंगरौली मैहर पन्ना टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    मौसम विभाग के मुताबिक जून में बारिश की कमी के बाद जुलाई में स्थिति कुछ सुधरी थी लेकिन मानसून के दो बार ब्रेक लेने से बारिश का आंकड़ा फिर पीछे चला गया। अब अगस्त के आखिरी सप्ताह में सक्रिय हुए मजबूत सिस्टम ने प्रदेश के कई हिस्सों में राहत दी है। हालांकि लगातार भारी बारिश के कारण नदी नालों के उफान पर आने और निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने और तेज बहाव वाले रास्तों व पुलियाओं को पार करने से बचने की सलाह दी गई है। राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक बारिश का असर देखने को मिलेगा।
  • MP: उज्जैन में UCC कानून का विरोध…. बुर्का-हिजाब पहन सड़क पर उतरीं मुस्लिम महिलाएं

    MP: उज्जैन में UCC कानून का विरोध…. बुर्का-हिजाब पहन सड़क पर उतरीं मुस्लिम महिलाएं


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में यूसीसी कानून (UCC Law) के विरोध में सैंकड़ों की संख्या में बुर्का और हिजाब पहन कर मुस्लिम महिलाएं (Muslim Women) सड़क पर उतर गई हैं। इन दौरान मुस्लिम महिलाएं हाथों में तख्तियां लेकर प्रशासन को ज्ञापन देने पहुंची। इन तख्तियों पर लिखा,काला कानून वापस लो,धर्म निरपेक्षता जिंदाबाद,शरीयत में छेड़छाड़ बर्दास्त नहीं कि जाएगी। इस दौरान महिलाओं ने सरकार को चेताया की मुस्लिम लॉ के तहत निकाह हमारा, फैसला हमारा,शरीयत में दखल मंजूर नही करेंगे। UGC को लेकर महिलाओं के समर्थन देने पर मुस्लिम महिलाओं ने कहा कि हम उनको बताना चाहते हैं कि ये स्पष्ठ नही है। कुछ बाते जानने की जरूरत है। इस दौरान तीन थानों के थाना प्रभारी सहित एसडीएम, सीएसपी ओर पुलिस के जवान तैनात रहे।

    उज्जैन के खाराकुआं स्थित जामा मस्जिद में रविवार सेकड़ों की संख्या में मुस्लिम महिलाए सड़कों पर उतरीं और मस्जिद के अंदर हिन्दुस्तान जिंदाबाद के बैनर लगाकर UGC द्वारा बनाए कानून को मानने से इंकार किया। उन्होंने आरोप लगाए की यह कानून तीन तलाक,विवाह सहित कई मामलों में स्पष्ठ नहीं है।इस प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं शामिल हुईं। मंच पर महिला प्रतिनिधि मौजूद थीं, जबकि सामने एकत्रित महिलाओं के हाथों में तख्तियां और तिरंगे झंडे देखे गए। महिलाओं ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी समुदाय या सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि विधेयक के उन प्रावधानों को लेकर है, जिन्हें वे अपने धार्मिक और व्यक्तिगत कानूनों से जुड़ा मानती हैं। डॉक्टर फौजिया अंजुम ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को केवल समानता के नाम पर विधेयक का समर्थन करने के बजाय उसके प्रावधानों को गहराई से समझना चाहिए।


    राष्ट्रपति को ज्ञापन में पुर्नविचार की मांग

    बताया जा रहा है कि 23 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन सौंपकर उज्जैन की मुस्लिम नुमाइंदा कमेटी ने मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक- 2026 को लेकर विधेयक के प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग की है। कमेटी ने राष्ट्रपति से चार प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 को मौजूदा स्वरूप में वापस लेने या उस पर पुनर्विचार करना शामिल है। इसके अलावा, धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा, सभी प्रभावित समुदायों से व्यापक परामर्श और मुस्लिम या अन्य धर्म-निर्देशित समुदायों को कानून में अलग-अलग श्रेणियों में रखने के बजाय समान दृष्टिकोण अपनाने की मांग की गई है।

    प्रदर्शन में शामिल शाइस्ता परवीन शेख ने कहा कि महिलाएं संविधान और अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हुई हैं। प्रसासनिक अधिकारों ज्ञापन में संविधान के मौलिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों का हवाला दिया गया है। कमेटी ने अनुच्छेद 44 का उल्लेख करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता नीति-निर्देशक तत्वों में शामिल है, जबकि धार्मिक स्वतंत्रता मौलिक अधिकारों का हिस्सा है।

    पार्षद नाजिया कुरैशी ने बताया कि यह प्रदर्शन मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और शरीयत से जुड़े मामलों को लेकर है। उन्होंने उन दावों को भी खारिज किया, जिनमें बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं द्वारा UCC के समर्थन की बात कही जा रही है।

  • भोपाल में 24 अगस्त का मौसम: दिनभर छाए रह सकते हैं बादल, बारिश के दौर से तापमान में आएगी नरमी

    भोपाल में 24 अगस्त का मौसम: दिनभर छाए रह सकते हैं बादल, बारिश के दौर से तापमान में आएगी नरमी


    भोपाल । राजधानी भोपाल में 24 अगस्त सोमवार को मानसून का असर एक बार फिर देखने को मिल सकता है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार शहर में बारिश के दौर बने रहने की संभावना है और आसमान में बादलों की आवाजाही जारी रह सकती है। दिन का मौसम अपेक्षाकृत ठंडा और नम रहने के आसार हैं। ताजा पूर्वानुमान में भोपाल के लिए 24 अगस्त को अधिकतम तापमान करीब 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
    रविवार को भी भोपाल में बारिश और बादलों का असर बना हुआ है। ऐसे में सोमवार को भी मौसम में अचानक बड़ा बदलाव आने के बजाय मानसूनी गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। दिन के समय बादल छाए रहने के साथ बीच बीच में बारिश या बौछारें देखने को मिल सकती हैं। बारिश होने की स्थिति में तापमान में और गिरावट आ सकती है जिससे लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।

    मौसम का यह मिजाज मध्य प्रदेश में सक्रिय मानसूनी परिस्थितियों के बीच बना हुआ है। राज्य के कई हिस्सों में पिछले दिनों बारिश का दौर जारी रहा है जबकि कुछ जिलों में भारी बारिश के कारण नदी नाले और जलस्रोत उफान पर भी रहे। भोपाल में हालांकि बारिश की तीव्रता कई अन्य जिलों की तुलना में कम रही है लेकिन मौसम विभाग के अनुसार राजधानी में आने वाले दिनों में भी बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।

    24 अगस्त को भोपाल में सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है। दिन बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर बारिश के दौर बन सकते हैं। कहीं हल्की बारिश हो सकती है तो कुछ इलाकों में तेज बौछारें भी पड़ सकती हैं। मानसून के दौरान शहर में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहता इसलिए एक इलाके में तेज बारिश होने के दौरान दूसरे इलाके में केवल बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है।

    बारिश के कारण शहर की सड़कों पर जलभराव और यातायात की परेशानी भी बढ़ सकती है। खासकर जिन इलाकों में पहले से सड़कें खराब हैं या गड्ढे बने हुए हैं वहां बारिश का पानी जमा होने से वाहन चालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी। दोपहिया वाहन चलाने वालों को फिसलन वाली सड़कों पर विशेष सतर्कता रखनी चाहिए। तेज बारिश के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से भी बचना बेहतर रहेगा।

    मौसम पूर्वानुमान में अगले कुछ दिनों तक भी भोपाल में बारिश का सिलसिला जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं। 25 अगस्त को बारिश की गतिविधि और बढ़ सकती है जबकि 26 और 27 अगस्त को भी बारिश के दौर बने रहने का अनुमान है। ऐसे में राजधानी में मानसून की सक्रियता अभी खत्म होती नजर नहीं आ रही है।

    कुल मिलाकर 24 अगस्त को भोपाल का मौसम बादलों और बारिश के बीच सुहावना रहने की उम्मीद है। तापमान में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होने से गर्मी से राहत मिल सकती है। हालांकि बाहर निकलने वाले लोगों को बारिश को ध्यान में रखते हुए जरूरी तैयारी के साथ घर से निकलना चाहिए। मौसम तेजी से बदल सकता है इसलिए स्थानीय स्तर पर जारी होने वाले मौसम अलर्ट पर नजर रखना भी जरूरी होगा।

  • रिसर्च अब जमीन पर उतारने की तैयारी, भोपाल में आज ‘वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस’ कॉन्क्लेव; 2047 के लिए बनेगा रोडमैप

    रिसर्च अब जमीन पर उतारने की तैयारी, भोपाल में आज ‘वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस’ कॉन्क्लेव; 2047 के लिए बनेगा रोडमैप


    भोपाल। मध्यप्रदेश को वर्ष 2047 तक समृद्ध और विकसित राज्य बनाने की दिशा में सरकार ने विशेषज्ञ संस्थानों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी उद्देश्य से 24 अगस्त को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 को लेकर राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में प्रदेश में मौजूद 130 से ज्यादा केंद्रीय, राज्य स्तरीय और निजी संस्थानों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। कॉन्क्लेव का सबसे खास हिस्सा वन इंस्टीट्यूट वन प्रॉमिस होगा, जिसमें प्रत्येक संस्थान मध्यप्रदेश के विकास में अपने स्तर पर एक ठोस योगदान का संकल्प देने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

    सरकार की कोशिश है कि प्रदेश में मौजूद IIT, IIM, AIIMS, ISRO, DRDO, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और दूसरे विशेषज्ञ संस्थानों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल सिर्फ अकादमिक और शोध गतिविधियों तक सीमित न रहे, बल्कि उसे प्रदेश की वास्तविक जरूरतों से जोड़ा जाए। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, ऊर्जा, पर्यावरण, तकनीक, कौशल विकास और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों के समाधान में इन संस्थानों की विशेषज्ञता का उपयोग करने की योजना है।

    कॉन्क्लेव में सरकार के अलग-अलग विभाग अपनी प्राथमिकताएं और चुनौतियां विशेषज्ञ संस्थानों के सामने रखेंगे। इसके बाद संबंधित संस्थान अपने शोध, तकनीक, विशेषज्ञों और उपलब्ध संसाधनों के जरिए इन समस्याओं के समाधान की दिशा सुझाएंगे। इसका उद्देश्य सरकार, शिक्षा संस्थानों, शोध संगठनों, उद्योग और नवाचार क्षेत्र के बीच ऐसा तालमेल तैयार करना है, जिससे भविष्य में संयुक्त परियोजनाएं विकसित की जा सकें और उनका लाभ प्रदेश की जनता तक पहुंच सके।

    इस कार्यक्रम में 59 केंद्रीय संस्थानों के अलावा 26 राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय, 11 शासकीय इंजीनियरिंग संस्थान, 19 शासकीय मेडिकल कॉलेज, 8 राज्य स्तरीय शोध संस्थान और 9 चयनित निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों की भागीदारी प्रस्तावित है। इनमें IIT इंदौर, IIM इंदौर, IISER भोपाल, MANIT भोपाल, AIIMS भोपाल, IIIT, NFSU भोपाल, RRCAT इंदौर, DRDO और ISRO जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं। कृषि, चिकित्सा, प्रबंधन, रक्षा, ऊर्जा, पर्यावरण, तकनीक और कौशल विकास से जुड़े संस्थानों को भी इस पहल में शामिल किया गया है।

    कॉन्क्लेव में दोपहर 2 बजे से 3:45 बजे तक समावेशी आर्थिक विकास और सामाजिक सशक्तीकरण के लिए आगे की कार्ययोजना पर चर्चा होगी। इस दौरान कृषि, उद्यानिकी, पर्यावरण, उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, MSME, नगरीय विकास, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, औद्योगिक विकास, जनजातीय कल्याण और महिला एवं बाल विकास विभाग अपनी प्राथमिकताएं सामने रखेंगे। इसके बाद विशेषज्ञ संस्थानों के साथ समाधान और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा होगी।

    इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान और केंद्रीय संस्थानों के बीच होने वाले एमओयू भी होंगे। इन समझौतों के जरिए संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी समाधान, क्षमता निर्माण और भविष्य की परियोजनाओं के लिए सहयोग का रास्ता तैयार किया जाएगा। यानी इसका तत्काल असर किसी नई सरकारी योजना के रूप में दिखाई देने के बजाय आने वाले समय में नई तकनीक, बेहतर नीतियों और शोध आधारित समाधानों के रूप में सामने आ सकता है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संबोधन भी होगा। इससे पहले केंद्रीय संस्थानों के प्रमुख मुख्यमंत्री के साथ सीधे संवाद करेंगे। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 की विकास परिकल्पना पर मुख्य वक्तव्य देंगे। सरकार की कोशिश है कि 2047 के लक्ष्य को केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी न रखकर प्रदेश में मौजूद विशेषज्ञ संस्थानों को भी उसका सक्रिय साझेदार बनाया जाए। अब देखने वाली बात होगी कि वन इंस्टीट्यूट वन प्रॉमिस के तहत संस्थानों की ओर से सामने आने वाले संकल्प कितनी तेजी से जमीन पर उतरते हैं और उनका वास्तविक लाभ मध्यप्रदेश को किस रूप में मिलता है।

  • वर्ग-1 शिक्षक भर्ती में दूसरी काउंसलिंग की मांग तेज, 24 से 26 अगस्त तक अंबेडकर पार्क में धरना देंगे अभ्यर्थी

    वर्ग-1 शिक्षक भर्ती में दूसरी काउंसलिंग की मांग तेज, 24 से 26 अगस्त तक अंबेडकर पार्क में धरना देंगे अभ्यर्थी


    भोपाल। भोपाल में उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती 2023 के अभ्यर्थियों ने दूसरी काउंसलिंग और पदवृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। वेटिंग शिक्षक संघ वर्ग-1 भर्ती 2023 के बैनर तले अभ्यर्थी 24 से 26 अगस्त तक टीटी नगर स्थित अंबेडकर पार्क में तीन दिवसीय धरना देंगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू हुए करीब तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक दूसरी काउंसलिंग शुरू नहीं हो सकी है। लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों में इसे लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।

    अभ्यर्थियों के मुताबिक उन्होंने उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत परीक्षा समेत चयन से जुड़े सभी चरण पूरे किए हैं। परिणाम आने और चयन प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद उन्हें नियुक्ति की उम्मीद थी, लेकिन दूसरी काउंसलिंग नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में पात्र अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। संघ का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर शासन और प्रशासन को कई बार ज्ञापन दिए गए और अलग-अलग समय पर प्रदर्शन भी किए गए। हर बार आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक ऐसा कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है, जिससे दूसरी काउंसलिंग का रास्ता साफ हो सके।

    अभ्यर्थियों का सबसे बड़ा सवाल अमोल सोले प्रकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले से जुड़ा है। संघ का दावा है कि दूसरी काउंसलिंग को SLP डायरी नंबर 14600/2025 का हवाला देकर रोका जा रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह मामला करीब 11 अभ्यर्थियों से संबंधित है, ऐसे में इसके कारण हजारों पात्र और प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों का भविष्य अनिश्चितकाल तक रोकना उचित नहीं है। उनका सवाल है कि यदि मामला सीमित संख्या में अभ्यर्थियों से जुड़ा है तो बाकी पात्र अभ्यर्थियों के लिए भर्ती प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ाई जा रही है।

    संघ ने यह भी सवाल उठाया है कि अगर यह मामला विभाग के लिए इतना महत्वपूर्ण है तो करीब डेढ़ साल के दौरान मुख्य पीठ के समक्ष इसकी प्रभावी सुनवाई सुनिश्चित क्यों नहीं हो पाई। अभ्यर्थियों का कहना है कि कई बार सुनवाई की तारीख आने से पहले ही मामला आगे बढ़ जाता है और इस वजह से दूसरी काउंसलिंग का इंतजार और लंबा होता जा रहा है। उनका कहना है कि लगातार देरी के कारण हजारों युवाओं के रोजगार और भविष्य पर असर पड़ रहा है।

    वेटिंग शिक्षक संघ ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत का मुद्दा भी उठाया है। संघ के मुताबिक सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी की स्थिति लगातार बनी हुई है। दूसरी ओर पात्र और चयन प्रक्रिया से गुजर चुके अभ्यर्थी उपलब्ध हैं। ऐसे में वर्षों तक भर्ती प्रक्रिया को लंबित रखने से केवल अभ्यर्थियों को ही नुकसान नहीं हो रहा, बल्कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। संघ का कहना है कि रिक्त पदों पर योग्य अभ्यर्थियों को मौका देकर शिक्षकों की जरूरत को पूरा किया जा सकता है।

    अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह और डीपीआई आयुक्त अभिषेक सिंह से मामले में तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि जब सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत है, योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध हैं और दूसरी काउंसलिंग की मांग लंबे समय से की जा रही है, तो फिर फैसला लेने में इतनी देरी क्यों की जा रही है।

    वेटिंग शिक्षक संघ के अनुसार 24, 25 और 26 अगस्त को अंबेडकर पार्क, टीटी नगर में होने वाला धरना शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा। संघ ने प्रशासन से तीन दिवसीय प्रदर्शन की अनुमति भी मांगी है। संगठन का कहना है कि आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था और प्रशासन की ओर से निर्धारित सभी नियमों का पालन किया जाएगा। अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार पदवृद्धि के साथ जल्द से जल्द दूसरी काउंसलिंग शुरू करे, ताकि वर्षों से नियुक्ति की राह देख रहे पात्र शिक्षकों को रोजगार का अवसर मिल सके।