Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल की सड़कों पर जानलेवा गड्ढे और जलभराव से लोग परेशान निगम परिषद में कई मुद्दों पर बात लेकिन सड़कों पर खामोशी

    भोपाल की सड़कों पर जानलेवा गड्ढे और जलभराव से लोग परेशान निगम परिषद में कई मुद्दों पर बात लेकिन सड़कों पर खामोशी


    भोपाल । राजधानी भोपाल में लगातार हो रही बारिश ने शहर की सड़कों की हालत खराब कर दी है। कई इलाकों में सड़कें उखड़ चुकी हैं और जगह जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं। बारिश का पानी इन गड्ढों में भर जाने के कारण वाहन चालकों के लिए खतरा और बढ़ गया है। कई जगह सड़क और गड्ढे के बीच अंतर करना तक मुश्किल हो जाता है। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों के साथ पैदल चलने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहरवासियों का कहना है कि जर्जर सड़कों की समस्या लगातार बढ़ रही है लेकिन जिम्मेदार स्तर पर इसका स्थायी समाधान दिखाई नहीं दे रहा है।

    इसी बीच बुधवार को भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक ISBT स्थित मीटिंग हॉल में आयोजित हुई। बैठक में नगर निगम से जुड़े कई अहम प्रस्तावों और मुद्दों पर पार्षदों तथा निगम प्रशासन के बीच चर्चा हुई। भवनों को किराए पर देने से लेकर फर्नीचर और स्टेशनरी की खरीद तथा मल्टीलेवल पार्किंग के ठेके जैसे विषय बैठक में उठाए गए। निगम परिषद की बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा और निर्णय की प्रक्रिया आगे बढ़ी लेकिन शहर की बदहाल सड़कों और गड्ढों की समस्या चर्चा का हिस्सा नहीं बन सकी।

    बारिश के बाद भोपाल के कई इलाकों में सड़कों की स्थिति लगातार खराब हुई है। कहीं सड़क की ऊपरी परत उखड़ गई है तो कहीं बड़े गड्ढे वाहन चालकों के लिए परेशानी बन चुके हैं। जिन सड़कों पर पहले से छोटे गड्ढे थे वे लगातार बारिश के कारण और गहरे हो गए हैं। पानी भरने के बाद इनकी वास्तविक गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता। ऐसे में तेज रफ्तार से गुजरने वाले वाहन अचानक गड्ढे में गिरने पर असंतुलित हो सकते हैं। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति ज्यादा जोखिम भरी हो जाती है।

    शहर के लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में सड़कों की स्थिति हर साल खराब होती है और कई स्थानों पर मरम्मत के बाद भी समस्या दोबारा सामने आ जाती है। नागरिक चाहते हैं कि केवल गड्ढों को मिट्टी या मलबे से भरने के बजाय सड़क की स्थायी मरम्मत की जाए ताकि बारिश के बाद दोबारा वही स्थिति पैदा न हो। कई लोगों का यह भी कहना है कि नगर निगम और संबंधित विभागों को बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त सड़कों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत करानी चाहिए।

    नागरिकों के लिए सबसे बड़ी चिंता उन सड़कों की है जहां दिनभर भारी यातायात रहता है। इन मार्गों पर गड्ढों के कारण वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाने या रास्ता बदलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है। वहीं पैदल राहगीरों के लिए जलभराव वाली सड़कें और खुले या गहरे गड्ढे अलग परेशानी पैदा कर रहे हैं।

    नगर निगम परिषद की बैठक में जब कई प्रशासनिक और ठेके से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई तो शहर की जर्जर सड़कों का विषय सामने नहीं आने पर नागरिकों के बीच सवाल उठ रहे हैं। लोगों की मांग है कि राजधानी की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को भी परिषद की प्राथमिकता में शामिल किया जाए। भोपालवासियों का कहना है कि सड़कों की समस्या सीधे उनकी रोजमर्रा की आवाजाही और सुरक्षा से जुड़ी है इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    फिलहाल बारिश का दौर जारी रहने के कारण सड़कों की स्थिति और खराब होने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में शहरवासियों की नजर अब नगर निगम और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर है कि गड्ढों और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कब शुरू होती है और लोगों को इस परेशानी से कब राहत मिलती है।

  • MP: छिंदवाड़ा NICU अग्निकांड में 1 बच्ची की मौत, 2 झुलसे बच्चों के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी सरकार

    MP: छिंदवाड़ा NICU अग्निकांड में 1 बच्ची की मौत, 2 झुलसे बच्चों के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी सरकार


    छिंदवाड़ा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल (Chhindwara District Hospital) के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (Special Newborn Care Unit) में शनिवार तड़के वार्मर मशीन में अचानक आग लगने से बड़ा हादसा हो गया. इस दुखद घटना में झुलसे तीन नवजात शिशुओं में से एक बच्ची ने जबलपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना जताई है।

    मुख्यमंत्री ने मृतक बच्ची के परिजनों को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है. इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि जबलपुर मेडिकल कॉलेज में उपचाराधीन अन्य दो नवजात बच्चों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी.

    आग लगने के तुरंत बाद ऑन-ड्यूटी स्टाफ ने मुस्तैदी दिखाते हुए अग्निशामक यंत्रों का उपयोग किया और ऑक्सीजन सप्लाई लाइन बंद कर बड़े हादसे को टाल दिया. यूनिट में मौजूद 33 नवजातों में से 30 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    वार्मर में रखे 3 बच्चे झुलस गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत एंबुलेंस और डॉक्टरों की निगरानी में जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया. इनमें से एक नवजात की हालत अत्यंत गंभीर थी, जिसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.

    इस घटना को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल मरीजों की जान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं. उन्होंने प्रदेश के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों का तुरंत फायर सेफ्टी ऑडिट कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    फिलहाल, छिंदवाड़ा जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन ने हादसे के तकनीकी कारणों की जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर लिए गए हैं।

  • MP में आज 14 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, चंबल-जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग में चेतावनी

    MP में आज 14 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, चंबल-जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग में चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में बारिश का दौर अभी थमा नहीं है। पूर्वी हिस्से में लो प्रेशर एरिया और मानसून ट्रफ के एक्टिव होने से कई जिलों में तेज बारिश हो रही है। शनिवार को बालाघाट, छतरपुर, नरसिंहपुर, सतना, सीधी और पन्ना समेत कई जिलों में नदी-नाले उफान पर रहे। मौसम विभाग ने रविवार को 14 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। जबलपुर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग में बारिश का असर ज्यादा रहने की संभावना है, जबकि भोपाल में हल्की बारिश हो सकती है।

    14 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक अगले 24 घंटे में श्योपुर, मुरैना, भिंड, शिवपुरी, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, डिंडौरी और सीधी में भारी बारिश होने की संभावना है।

    वहीं भोपाल, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, हरदा, ग्वालियर, गुना, दतिया, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, मंडला, रीवा, सतना, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    सीधी में 104 करोड़ की सड़क का हिस्सा बहा

    लगातार बारिश के बीच सीधी में करीब छह महीने पहले बनी 104 करोड़ रुपए की सड़क का बड़ा हिस्सा तेज बहाव में बह गया। सड़क के क्षतिग्रस्त होने से आवागमन प्रभावित हुआ है।

    पन्ना में उफनती नदी में एक डंपर बह गया। धरमपुर थाना क्षेत्र में कालिंजर से अजयगढ़ जा रहा डंपर शहपुरा नदी के तेज बहाव की चपेट में आया। चालक सनी उर्फ रोहित सिंह ने किसी तरह तैरकर अपनी जान बचाई।

    सतना में बाइक समेत तीन लोग नाले में बहे

    सतना के नागौद क्षेत्र में ललचहा-इटमा नाले में शुक्रवार देर रात तेज बहाव के दौरान बाइक समेत तीन लोग बह गए। बालेंद्र सिंह और दीपू पांडेय तैरकर सुरक्षित बाहर निकल आए, जबकि तीसरा व्यक्ति पानी के तेज बहाव में बह गया। उसकी तलाश की जा रही है।

    छतरपुर में नदी पार कर स्कूल जाते हैं बच्चे

    छतरपुर के महाराजपुर क्षेत्र के हरपई पुरवा में कुम्हेड़ नदी का जलस्तर बढ़ने से करीब 250 से 300 लोगों की परेशानी बढ़ गई है। पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों का महाराजपुर से संपर्क प्रभावित हो जाता है। कई बार अभिभावकों को बच्चों को कंधे पर बैठाकर नदी पार करानी पड़ती है। बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को भी इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है।

    नर्मदा का जलस्तर बढ़ा, पुल डूबे

    नरसिंहपुर में लगातार बारिश और बरगी बांध के गेट खुले होने से नर्मदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। बरमान के रेतघाट पर बना पुल पूरी तरह पानी में डूब गया है। वहीं नरसिंहपुर-जबलपुर को जोड़ने वाला झांसीघाट पुल भी जलमग्न होने की स्थिति में पहुंच गया है।

    26 अगस्त तक बारिश का दौर

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 21 और 22 अगस्त को पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का सबसे ज्यादा असर रहा। अब 23 से 26 अगस्त तक भी प्रदेश में बारिश जारी रहने के आसार हैं। इस दौरान पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी तेज बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

    40 जिलों में सामान्य से कम बारिश

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में अब तक 19% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, डिंडौरी, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी और टीकमगढ़ में सामान्य से 1% से 51% तक कम पानी गिरा है।

    पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, अलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 2% से 47% तक कम बारिश दर्ज हुई है।

    15 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक अनूपपुर, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, बड़वानी, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन और राजगढ़ में अब तक सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • जबलपुर की महिला आरक्षक वर्षा पटेल ने माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराकर मध्य प्रदेश पुलिस का गौरव बढ़ाया

    जबलपुर की महिला आरक्षक वर्षा पटेल ने माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराकर मध्य प्रदेश पुलिस का गौरव बढ़ाया

    मध्य प्रदेश। पुलिस में आरक्षक के पद पर कार्यरत वर्षा पटेल ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जबलपुर की रहने वाली वर्षा ने 21 अगस्त 2026 को यूरोप की सर्वोच्च चोटी माउंट एल्ब्रुस के शिखर पर पहुंचकर भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा और मध्य प्रदेश पुलिस का ध्वज फहराया। उनकी इस उपलब्धि से जबलपुर के साथ-साथ मध्य प्रदेश पुलिस का भी गौरव बढ़ा है।

    माउंट एल्ब्रुस अभियान की शुरुआत 11 अगस्त को हुई थी। अभियान के दौरान पर्वतारोहियों को मौसम की चुनौती का सामना करना पड़ा। तेज हवाओं, कड़ाके की ठंड और बदलती मौसम परिस्थितियों के कारण टीम को शिखर अभियान के लिए अनुकूल समय का इंतजार करना पड़ा। मौसम में सुधार आने के बाद अंतिम चढ़ाई शुरू की गई और वर्षा पटेल ने निर्धारित लक्ष्य हासिल करते हुए चोटी पर तिरंगा फहराया।

    वर्षा पटेल का पर्वतारोहण से जुड़ा सफर उनकी खेल पृष्ठभूमि से भी जुड़ा हुआ है। जबलपुर के गढ़ा क्षेत्र से संबंध रखने वाली वर्षा को बचपन से खेल और साहसिक गतिविधियों में रुचि रही है। वह राष्ट्रीय स्तर की बेसबॉल खिलाड़ी भी रह चुकी हैं। विभिन्न प्रतियोगिताओं में उनके नाम 10 से अधिक पदक हासिल करने की जानकारी सामने आई है।

    मध्य प्रदेश पुलिस में जिम्मेदारी निभाने के साथ वर्षा ने पर्वतारोहण के अपने जुनून को भी जारी रखा। पुलिस सेवा की नियमित जिम्मेदारियों के बीच कठिन पर्वतारोहण अभियानों की तैयारी करना उनके अनुशासन और निरंतर प्रयास को दर्शाता है। माउंट एल्ब्रुस की सफलता उनके इसी अभियान का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

    इससे पहले वर्षा पटेल ने अगस्त 2024 में ऑस्ट्रेलिया की सर्वोच्च चोटी माउंट कोजियास्को पर भारत का तिरंगा फहराया था। उस समय भी उन्होंने पर्वतारोहण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की थी। माउंट कोजियास्को की ऊंचाई करीब 2,228 मीटर है और इसे ऑस्ट्रेलिया की सबसे ऊंची चोटी माना जाता है।

    माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराने के बाद वर्षा पटेल का लक्ष्य अब और बड़े पर्वतारोहण अभियानों की ओर बढ़ना है। वह दुनिया के सात महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर पहुंचकर भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराने वाले सात शिखर अभियान को पूरा करना चाहती हैं। माउंट एल्ब्रुस की सफलता के बाद उनकी नजर अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी माउंट किलिमंजारो पर है।

    सात शिखर अभियान को दुनिया के प्रमुख पर्वतारोहण लक्ष्यों में गिना जाता है। इसके तहत सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों को फतह करने का प्रयास किया जाता है। वर्षा पटेल की मौजूदा उपलब्धि इस लंबे अभियान की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

    वर्षा की यात्रा यह भी दिखाती है कि पुलिस सेवा, खेल और साहसिक गतिविधियों को एक साथ आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रशिक्षण, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी होती है। माउंट एल्ब्रुस की कठिन परिस्थितियों में हासिल की गई यह सफलता उनके पर्वतारोहण अभियान को नई दिशा देती है और आने वाले अभियानों के लिए उनके अनुभव को मजबूत करती है।

    मध्य प्रदेश के लिए भी यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य पुलिस में कार्यरत एक महिला आरक्षक ने अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियान में अपनी पहचान बनाई है। तिरंगे के साथ मध्य प्रदेश पुलिस का ध्वज फहराकर वर्षा ने अपनी सेवा और अपने राज्य दोनों का प्रतिनिधित्व किया। अब उनकी अगली चुनौती माउंट किलिमंजारो और सात शिखर अभियान के अन्य पर्वतों तक पहुंचने की होगी।

  • रील बनाने का जुनून या ट्रैफिक के लिए खतरा? इंदौर में गाड़ियों के सामने जेब्रा क्रॉसिंग पर लेटी इंफ्लुएंसर, पुलिस ने शुरू की जांच

    रील बनाने का जुनून या ट्रैफिक के लिए खतरा? इंदौर में गाड़ियों के सामने जेब्रा क्रॉसिंग पर लेटी इंफ्लुएंसर, पुलिस ने शुरू की जांच


    इंदौर। सोशल मीडिया पर वायरल होने की होड़ में बनाए जा रहे वीडियो अब कई बार लोगों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। इंदौर में ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां एक महिला इंफ्लुएंसर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में युवती ट्रैफिक सिग्नल के पास वाहनों के सामने जेब्रा क्रॉसिंग पर लेटकर वीडियो शूट कराती नजर आ रही है। वीडियो सामने आने के बाद इंदौर पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल ने मामले को संज्ञान में लिया है और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है।

    प्रारंभिक जांच में पुलिस को वायरल वीडियो इंदौर के लैंटर्न चौराहे का प्रतीत हो रहा है। वीडियो में सिग्नल पर वाहन रुके हुए दिखाई देते हैं और इसी दौरान युवती उनके आगे जेब्रा क्रॉसिंग पर लेटती नजर आती है। बताया जा रहा है कि युवती का नाम प्रकृति गौर है और वह सोशल मीडिया के लिए फोटो और वीडियो शूट करा रही थी। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भी सड़क पर इस तरह शूटिंग करने को लेकर सवाल उठाए और यातायात नियमों के पालन की मांग की।

    मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंचने के बाद सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल ने वायरल वीडियो को आइडेंटिफाई किया। एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के मुताबिक शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर सामने आए इस वीडियो की पुलिस ने पहचान की है। शुरुआती जांच में वीडियो लैंटर्न चौराहे का होने की संभावना सामने आई है। हालांकि पुलिस अब वीडियो से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि कर रही है।

    पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वीडियो शूट के दौरान वास्तव में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं। इसके साथ ही यह देखा जा रहा है कि युवती के सड़क पर लेटने से यातायात प्रभावित हुआ या वाहन चालकों और राहगीरों के लिए किसी तरह का खतरा पैदा हुआ। अगर जांच में नियमों का उल्लंघन या लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने की बात सामने आती है तो संबंधित युवती के खिलाफ नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।

    एडिशनल डीसीपी ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाने की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि यातायात नियमों की अनदेखी की जाए। पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह की ओर से सोशल मीडिया कंटेंट को लेकर जारी प्रिवेंटिव ऑर्डर के तहत भी इस मामले की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इंफ्लुएंसर कोई भी हो यदि उसके कंटेंट के कारण यातायात बाधित होता है या खुद अथवा किसी अन्य व्यक्ति की जान को खतरा पैदा होता है तो कार्रवाई की जा सकती है।

    वहीं मामला सामने आने और विवाद बढ़ने के बाद संबंधित इंफ्लुएंसर ने एक अन्य वीडियो जारी कर सफाई दी और खेद जताया। उनका कहना है कि वीडियो को कुछ लोगों ने गलत तरीके से पेश किया है। इंफ्लुएंसर ने दावा किया कि शूटिंग के दौरान जानबूझकर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन नहीं किया गया था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में सार्वजनिक स्थानों पर वीडियो शूट करते समय ज्यादा सावधानी बरती जाएगी।

    फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। वीडियो की वास्तविक लोकेशन शूटिंग के समय ट्रैफिक की स्थिति और नियमों के उल्लंघन से जुड़े तथ्यों की पुष्टि के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया कंटेंट बनाने के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों का ध्यान रखने की जरूरत को सामने लाता है।

  • बाढ़ ने VIP ठिकाने को भी नहीं छोड़ा, दूसरी मंजिल पर गुजरी रात; पानी उतरते ही कीचड़ का कहर

    बाढ़ ने VIP ठिकाने को भी नहीं छोड़ा, दूसरी मंजिल पर गुजरी रात; पानी उतरते ही कीचड़ का कहर


    रीवा।
    मध्य प्रदेश के रीवा में लगातार बारिश के बाद बीहर नदी का जलस्तर बढ़ने से शहर के कई हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। इस बाढ़ का असर आम लोगों के साथ जनप्रतिनिधियों के घरों तक भी पहुंचा। गुढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक नागेंद्र सिंह का निजी निवास भी बाढ़ के पानी की चपेट में आ गया। नदी किनारे स्थित उनके घर के निचले हिस्से में पानी भर जाने के कारण उन्हें करीब 18 घंटे से ज्यादा समय तक घर की दूसरी मंजिल पर रहना पड़ा। बारिश और नदी के बढ़े जलस्तर के कारण स्थिति ऐसी बन गई थी कि घर से नीचे उतरना मुश्किल था।

    बीहर नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ ही विधायक के घर के ग्राउंड फ्लोर और आसपास के हिस्सों में पानी पहुंच गया। हालात को देखते हुए नागेंद्र सिंह ने घर की दूसरी मंजिल पर ही रहकर पानी कम होने का इंतजार किया। लंबे समय तक बाढ़ का पानी घर के आसपास जमा रहने से निचले हिस्से में भारी गंदगी और कीचड़ फैल गया। बारिश का दौर कमजोर पड़ने के बाद जब नदी का जलस्तर नीचे आया तो विधायक घर के निचले हिस्से में पहुंचे। इसके बाद वहां सफाई का काम शुरू कराया गया।

    पानी उतरने के बाद घर के भीतर और आसपास की स्थिति ने बाढ़ की भयावहता को साफ दिखा दिया। कई हिस्सों में कीचड़ और गंदगी जमा हो गई थी। बाढ़ का पानी अपने साथ गाद और दूसरी गंदगी भी लेकर आया जिससे घर के निचले हिस्से को साफ करने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। फिलहाल सफाई का काम जारी है।

    बाढ़ के बाद भाजपा विधायक नागेंद्र सिंह ने शहर में जलभराव और बाढ़ की स्थिति को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने नदी और उसके आसपास बढ़ते अतिक्रमण को बाढ़ की गंभीर वजहों में से एक बताया। विधायक का कहना है कि नदी के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण होने से पानी के निकलने का रास्ता प्रभावित होता है। जब बारिश के दौरान नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता है तो पानी को पर्याप्त जगह नहीं मिलती और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है।

    नागेंद्र सिंह ने रीवा में हाल के वर्षों में बनाए गए कुछ नए पुलों की ऊंचाई और डिजाइन को लेकर भी सवाल खड़े किए। उनके अनुसार नए पुलों की ऊंचाई पुराने पुलों की तुलना में कम दिखाई देती है। उनका दावा है कि पुलों की संरचना और कम ऊंचाई के कारण बीहर नदी के पानी के प्रवाह में रुकावट पैदा हो सकती है। इसका असर बाढ़ के दौरान आसपास के इलाकों में दिखाई देता है।

    विधायक के मुताबिक इस बार नदी का जलस्तर बढ़ने और पानी के बहाव में रुकावट के चलते हालात ज्यादा गंभीर हुए। इसका असर उनके खुद के घर पर भी पड़ा और उन्हें लंबे समय तक दूसरी मंजिल पर रहना पड़ा। हालांकि अब नदी का जलस्तर घटने लगा है और घर में सफाई का काम चल रहा है।

    रीवा में आई इस बाढ़ ने एक बार फिर नदी के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र अतिक्रमण और पुलों के निर्माण की गुणवत्ता व डिजाइन को लेकर चर्चा तेज कर दी है। विधायक ने जिन मुद्दों को उठाया है उन पर प्रशासनिक स्तर पर जांच और तकनीकी समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है ताकि भविष्य में भारी बारिश के दौरान शहर और नदी किनारे रहने वाले लोगों को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

  • केन-बेतवा लिंक परियोजना पर CM मोहन यादव का बड़ा फोकस, 5,039 प्रभावित परिवारों के सम्मानजनक पुनर्वास के दिए निर्देश

    केन-बेतवा लिंक परियोजना पर CM मोहन यादव का बड़ा फोकस, 5,039 प्रभावित परिवारों के सम्मानजनक पुनर्वास के दिए निर्देश


    खजुराहो। मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खजुराहो में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में परियोजना की वर्तमान प्रगति के साथ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन पर विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि विकास की इस बड़ी परियोजना में प्रभावित परिवारों के हितों की अनदेखी किसी भी स्थिति में नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुनर्वास की प्रक्रिया संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ पूरी की जाए और पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिले।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखंड के विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र में सिंचाई के साथ पेयजल और ऊर्जा की उपलब्धता में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। उन्होंने पन्ना और छतरपुर जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि परियोजना से प्रभावित गांवों में अधिकारी घर-घर जाकर परिवारों की समस्याओं और वास्तविक जरूरतों की जानकारी लें। खासकर जनजातीय परिवारों की समस्याओं को प्राथमिकता के साथ सुनकर उनका समाधान करने पर जोर दिया गया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नए पुनर्वास स्थलों पर केवल मकान उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है। वहां स्कूल आंगनवाड़ी केंद्र स्वास्थ्य सुविधाएं सामुदायिक भवन और दूसरी जरूरी मूलभूत सुविधाएं भी विकसित की जानी चाहिए। सरकार का उद्देश्य है कि विस्थापित परिवारों को नए स्थान पर बेहतर जीवन और रोजगार के अवसर मिलें और वे विकास की मुख्यधारा से जुड़े रहें।

    बैठक में पन्ना की रूंझ-मझगांव परियोजना से प्रभावित परिवारों के लिए स्वीकृत अतिरिक्त राशि का भुगतान जल्द करने के निर्देश भी दिए गए। जिन लोगों के पास उम्र से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं उनके लिए मेडिकल परीक्षण के आधार पर आयु निर्धारण की व्यवस्था अपनाने को कहा गया ताकि मुआवजे और पुनर्वास लाभ लेने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    परियोजना की निगरानी को लेकर मुख्यमंत्री ने जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट को नियमित मॉनिटरिंग और विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर की परियोजना में लगातार निगरानी जरूरी है ताकि निर्माण और पुनर्वास से जुड़े काम अनावश्यक रूप से लंबित न हों। प्रभावित इलाकों में जन चौपाल और जागरूकता यात्राएं आयोजित करने पर भी जोर दिया गया ताकि ग्रामीणों को परियोजना के लाभों की जानकारी मिल सके और उनकी आशंकाओं का समाधान किया जा सके।

    केन-बेतवा लिंक परियोजना से मध्य प्रदेश में करीब 8.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। वहीं 44 लाख से अधिक लोगों को पेयजल सुविधा मिलने का अनुमान है। परियोजना के तहत 103 मेगावाट जल विद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का प्रावधान भी बताया गया है। परियोजना का प्रत्यक्ष लाभ पन्ना दमोह छतरपुर टीकमगढ़ निवाड़ी सागर विदिशा रायसेन शिवपुरी और दतिया समेत कई जिलों के करीब 1,382 गांवों को मिलने की उम्मीद है।

    परियोजना के कारण छतरपुर और पन्ना जिलों में कुल 5,039 परिवार प्रभावित हो रहे हैं। इनमें पन्ना के 1,321 और छतरपुर के 3,718 परिवार शामिल हैं। बताया गया कि सभी प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के विशेष पैकेज का विकल्प चुना है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि इन परिवारों का पुनर्वास सम्मानजनक तरीके से होना चाहिए।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केन-बेतवा परियोजना को सिर्फ पानी पहुंचाने वाली योजना के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इससे कृषि उत्पादन बढ़ने पेयजल संकट कम होने ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलने की संभावना है। बैठक में वन मंत्री दिलीप अहिरवार सांसद वीडी शर्मा समेत कई विधायक वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रमुख सचिव जल संसाधन संदीप यादव ने परियोजना की प्रगति और अब तक हुए कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की।

  • बड़वानी से भोपाल तक IAS काजल जावला का सफर, 29 महीने के कार्यकाल में छोड़ी खास छाप; अब नई जिम्मेदारी के साथ नई पारी

    बड़वानी से भोपाल तक IAS काजल जावला का सफर, 29 महीने के कार्यकाल में छोड़ी खास छाप; अब नई जिम्मेदारी के साथ नई पारी


    बड़वानी। मध्यप्रदेश में हुए प्रशासनिक फेरबदल के बीच जिला पंचायत बड़वानी की मुख्य कार्यपालन अधिकारी IAS काजल जावला का तबादला कर दिया गया है। करीब 29 महीने तक बड़वानी में जिम्मेदारी संभालने के बाद अब उन्हें अपर मिशन संचालक राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। बड़वानी में उनका कार्यकाल योजनाओं के क्रियान्वयन से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर बदलाव और कई उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए जाना जाएगा। जल संरक्षण पंचायत विकास शिक्षा महिला आजीविका और ग्रामीण योजनाओं की लगातार निगरानी ने उनके कार्यकाल को अलग पहचान दी।
    काजल जावला की कार्यशैली में मैदानी स्तर पर योजनाओं की स्थिति की समीक्षा और अधिकारियों कर्मचारियों के साथ लगातार समन्वय प्रमुख रहा। उन्होंने सरकारी योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय उनके वास्तविक क्रियान्वयन पर जोर दिया। इसी का असर कई योजनाओं के प्रदर्शन में दिखाई दिया। जल संरक्षण के क्षेत्र में बड़वानी ने उनके कार्यकाल के दौरान प्रदेश स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की। जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 में जिला प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में 5666 जल संरक्षण कार्य पूरे किए गए। इनमें खेत तालाब कंटूर ट्रेंच डगवेल रिचार्ज और सामुदायिक तालाब जैसे काम शामिल रहे।

    जल संचय जन भागीदारी अभियान 2.0 में भी जिले ने उल्लेखनीय काम किया। जनसहयोग से 30155 कंटूर गड्ढे बनाए गए जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 41957 जल संरक्षण कार्य पूरे किए गए। इस अभियान ने ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरचनाओं को मजबूत करने के साथ जल संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को भी बढ़ावा दिया।

    महिलाओं की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने वाले एक बगिया मां के नाम अभियान में भी बड़वानी प्रदेश में तीसरे स्थान पर रहा। जिले में 732 बगिया स्वीकृत हुईं। कानपुरी बोरलाय और मतराला ग्राम पंचायतों को बेहतर प्रदर्शन के कारण प्रदेश की टॉप 10 पंचायतों में स्थान मिला। पंचायत स्तर की उपलब्धियों में भी जिले का प्रदर्शन मजबूत रहा। पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स में मलफा और मोरतलाई ग्राम पंचायतों ने प्रदेश में क्रमशः पहला और दूसरा स्थान हासिल किया।

    आदि कर्मयोगी अभियान के तहत जिले के 529 गांव चयनित हुए और सभी गांवों के विलेज एक्शन प्लान तैयार करने में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बड़वानी प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहा। इस उपलब्धि पर जिले को राष्ट्रपति स्तर पर सम्मान भी मिला। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के क्रियान्वयन में भी बड़वानी लगातार दूसरे स्थान पर रहा।

    शिक्षा के क्षेत्र में भी काजल जावला के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण काम हुए। कायाकल्प अभियान के तहत करीब 600 सरकारी स्कूलों का कायाकल्प किया गया। इससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिली। प्रधानमंत्री पोषण अभियान और मध्यान्ह भोजन योजना की निगरानी से खाद्यान्न उठाव और एसएमएस मॉनिटरिंग का प्रदर्शन 44 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत तक पहुंचा और लंबे समय तक यह स्थिति बनी रही। जनसहयोग से पांच स्कूलों में सरस्वती प्रसादम अभियान भी संचालित हुआ जिसमें बच्चों को भोजन के अलावा फल दही मिठाई और शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई गई।

    किसानों और महिलाओं की आय बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड कार्यक्रम के तहत चार सब्जी क्लस्टर विकसित किए गए जिससे करीब 450 किसान सब्जी उत्पादन से जुड़े। मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए 10 तालाबों का निर्माण कराया गया। पाटी विकासखंड में स्वयं सहायता समूहों को रिवॉल्विंग फंड उपलब्ध कराने और आजीविका कैफे तथा कियोस्क के जरिए महिला समूहों की आय बढ़ाने के प्रयास भी किए गए।

    जनता की शिकायतों के निराकरण में भी बड़वानी का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा। सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए लगातार मॉनिटरिंग की गई और जिला टॉप तीन में बना रहा। अब करीब 29 महीने बाद काजल जावला बड़वानी से विदा हो रही हैं। उनके तबादले के साथ जिम्मेदारी जरूर बदली है लेकिन जल संरक्षण पंचायत विकास शिक्षा और महिला आजीविका के क्षेत्र में किए गए काम उनके कार्यकाल की पहचान बने रहेंगे। अब भोपाल में नई जिम्मेदारी के साथ उनके प्रशासनिक अनुभव का दायरा और व्यापक होने की उम्मीद है।

  • कांवड़ यात्रा के चलते भोपाल-इंदौर मार्ग पर बड़ा ट्रैफिक बदलाव, 23 अगस्त से भारी वाहनों की एंट्री पर रोक; जानें पूरा डायवर्जन

    कांवड़ यात्रा के चलते भोपाल-इंदौर मार्ग पर बड़ा ट्रैफिक बदलाव, 23 अगस्त से भारी वाहनों की एंट्री पर रोक; जानें पूरा डायवर्जन


    भोपाल। पंडित प्रदीप मिश्रा की कांवड़ यात्रा को देखते हुए भोपाल और इंदौर के बीच यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यातायात को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए 23 अगस्त की सुबह से 25 अगस्त की शाम तक मुख्य मार्ग पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहेगा। इस दौरान भोपाल से इंदौर और इंदौर से भोपाल के बीच सफर करने वाले वाहन चालकों को निर्धारित वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल करना होगा। ऐसे में अगले तीन दिनों तक इस रूट पर यात्रा करने वाले लोगों के लिए पहले से अपनी यात्रा की योजना बनाना जरूरी होगा।

    कांवड़ यात्रा सीहोर क्षेत्र से होकर गुजरेगी। यात्रा के चलते भोपाल-इंदौर हाईवे पर सामान्य यातायात और भारी वाहनों की आवाजाही प्रभावित रहेगी। प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से निकालने की व्यवस्था की है। इसके तहत भोपाल से इंदौर जाने वाले सभी वाहनों को ब्यावरा होकर भेजा जाएगा। इसी तरह इंदौर से भोपाल की ओर आने वाले वाहनों को भी भोपाल-ब्यावरा-इंदौर मार्ग के जरिए आवागमन करना होगा। इस बदलाव के कारण वाहन चालकों को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी।

    यातायात डायवर्जन 23 अगस्त की सुबह से प्रभावी होगा और 25 अगस्त की शाम तक लागू रहेगा। इस दौरान भोपाल-इंदौर के बीच नियमित रूप से सफर करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। खासकर उन लोगों को अतिरिक्त समय लेकर निकलना चाहिए जिन्हें तय समय पर भोपाल या इंदौर पहुंचना जरूरी है। ब्यावरा होकर वैकल्पिक मार्ग अपनाने के कारण यात्रा की दूरी बढ़ेगी और सामान्य समय की तुलना में करीब डेढ़ से दो घंटे अतिरिक्त लग सकते हैं। ऐसे में यात्रियों को अपने सफर का समय उसी हिसाब से तय करने की सलाह दी गई है।

    कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के कारण मुख्य मार्ग पर यातायात का दबाव भी बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए वाहन चालकों से अपील की गई है कि वे यात्रा मार्ग पर अनावश्यक रूप से वाहन न रोकें और यातायात व्यवस्था में तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें। विशेष रूप से भारी वाहनों के चालकों को डायवर्जन व्यवस्था का पालन करना होगा ताकि यात्रा मार्ग पर किसी तरह की अव्यवस्था या जाम की स्थिति पैदा न हो।

    यात्रियों के लिए सीहोर और देवास क्षेत्र के प्रमुख मार्गों पर भी अतिरिक्त सतर्कता जरूरी होगी। यदि संभव हो तो इन क्षेत्रों के व्यस्त मार्गों पर जाने से बचने और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। स्थानीय प्रशासन की ओर से समय समय पर जारी होने वाली यातायात एडवाइजरी पर भी नजर रखना जरूरी होगा। कुल मिलाकर 23 से 25 अगस्त तक भोपाल-इंदौर के बीच यात्रा करने वालों को सामान्य रूट के बजाय ब्यावरा होकर सफर करना होगा। ऐसे में वाहन चालक घर से निकलने से पहले रूट की जानकारी लें और अतिरिक्त समय के साथ यात्रा शुरू करें ताकि कांवड़ यात्रा के कारण होने वाले ट्रैफिक बदलाव का असर उनकी यात्रा पर कम से कम पड़े।

  • भाजपा युवा मोर्चा में संगठन विस्तार की रफ्तार तेज, 12 जिलाध्यक्षों का ऐलान; अभी भी कई जिलों में नियुक्तियां बाकी

    भाजपा युवा मोर्चा में संगठन विस्तार की रफ्तार तेज, 12 जिलाध्यक्षों का ऐलान; अभी भी कई जिलों में नियुक्तियां बाकी


    भोपाल। मध्यप्रदेश में भाजपा युवा मोर्चा के संगठनात्मक विस्तार की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है। पार्टी ने युवा मोर्चा के 12 और जिलाध्यक्षों की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही अब तक प्रदेश के 27 जिलों में युवा मोर्चा के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति हो चुकी है। हालांकि प्रदेश के बाकी जिलों में अभी नियुक्तियों का इंतजार बना हुआ है। नई नियुक्तियों के साथ संगठन ने कई जिलों में युवा नेतृत्व को जिम्मेदारी सौंपते हुए जिला स्तर पर अपनी टीम को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। खास बात यह है कि नई सूची में 9 जिलों के जिला महामंत्रियों के नाम भी घोषित किए गए हैं।

    भाजपा युवा मोर्चा की ओर से जारी नई नियुक्तियों में भोपाल ग्रामीण ग्वालियर ग्रामीण मऊगंज सतना कटनी पांढुर्णा धार ग्रामीण बुरहानपुर देवास विदिशा उज्जैन ग्रामीण और शाजापुर शामिल हैं। इससे पहले जुलाई में 15 जिलाध्यक्षों की घोषणा की गई थी। इस तरह करीब एक महीने के अंतराल में पार्टी ने 12 और जिलों में अध्यक्षों की नियुक्ति की है। लगातार हो रही इन नियुक्तियों को संगठन में नई टीम को सक्रिय करने की प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

    भोपाल ग्रामीण में वीरेंद्र सिंह राजपूत को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी पत्नी रूमा राजपूत भोपाल शहर के वार्ड 85 की पार्षद हैं। वहीं ग्वालियर ग्रामीण में शिवराज यादव को जिलाध्यक्ष और मनोज गुर्जर को जिला महामंत्री बनाया गया है। मऊगंज में प्रवीण सिंह को जिलाध्यक्ष तथा विवेक तिवारी को महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। सतना में यश यादव जिलाध्यक्ष और शुभम परिहार महामंत्री बनाए गए हैं।

    कटनी में पारस जैन को जिलाध्यक्ष और देवांश श्रीवास्तव को जिला महामंत्री नियुक्त किया गया है। पांढुर्णा में विवेक रामचाकले को जिलाध्यक्ष तथा पंकज बंजारी को महामंत्री बनाया गया है। धार ग्रामीण में उज्ज्वल सोलंकी को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बुरहानपुर में भरत रावल जिलाध्यक्ष और अमित वास्कले जिला महामंत्री बने हैं।

    इसी तरह देवास में रजत पाल सिंह को जिलाध्यक्ष तथा मोहित जाट को जिला महामंत्री बनाया गया है। विदिशा में अनुज मित्तल को जिलाध्यक्ष और शिवेन्द्र सिंह राजपूत को महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। उज्जैन ग्रामीण में हरजीत सिंह जिलाध्यक्ष और राहुल धाकड़ जिला महामंत्री बनाए गए हैं। शाजापुर में हर्षवर्धन मंडलोई को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    नई नियुक्तियों के बाद युवा मोर्चा के संगठनात्मक ढांचे को लेकर गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है। जिलाध्यक्षों की जिम्मेदारी केवल संगठन विस्तार तक सीमित नहीं होगी बल्कि युवाओं को पार्टी से जोड़ने संगठनात्मक कार्यक्रमों को गति देने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। हालांकि अभी भी कई जिलों में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति बाकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में भाजपा की ओर से शेष जिलों को लेकर भी फैसले सामने आने की संभावना है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पार्टी बाकी जिलों में किन नए चेहरों पर भरोसा जताती है और युवा मोर्चा की पूरी टीम कब तक आकार लेती है।