Category: Madhya Pradesh

  • शादी का झांसा देकर महिलाओं से करोड़ों ऐंठने वाला गिरफ्तार ज्वेलरी दुकान पर हुई थी मुलाकात 1.27 करोड़ की ठगी का खुलासा

    शादी का झांसा देकर महिलाओं से करोड़ों ऐंठने वाला गिरफ्तार ज्वेलरी दुकान पर हुई थी मुलाकात 1.27 करोड़ की ठगी का खुलासा


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन में महिलाओं को कथित तौर पर प्रेम जाल में फंसाकर शादी का झांसा देने और उनसे मोटी रकम ऐंठने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने जयपुर निवासी एक युवक को राजस्थान के पाली से गिरफ्तार किया है। पुलिस की शुरुआती जांच में आरोप है कि आरोपी महिलाओं से पहले नजदीकी बढ़ाता था और शादी का भरोसा देकर उनसे बड़ी रकम लेता था। इसके बाद जब महिलाएं शादी के लिए दबाव बनाती थीं तो वह उनसे दूरी बनाने लगता और अपना ठिकाना बदलकर फरार हो जाता था। उज्जैन में सामने आए मामले में आरोपी पर एक महिला से करीब 1 करोड़ 27 लाख रुपये लेने का आरोप है।
    मामले की शिकायत उज्जैन निवासी महिला ने 13 मई 2026 को माधवनगर थाने में दर्ज कराई थी। महिला के मुताबिक उसकी मुलाकात आरोपी मनीष से एक ज्वेलरी की दुकान पर हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और धीरे धीरे नजदीकियां हो गईं। महिला का आरोप है कि आरोपी ने उसके सामने शादी का प्रस्ताव रखा और भरोसा दिलाया कि दोनों जल्द शादी करेंगे। इसी भरोसे के आधार पर उसने महिला से अलग अलग समय पर बड़ी रकम ली। शिकायत के अनुसार करीब चार महीने तक संपर्क में रहने के दौरान आरोपी ने महिला से लगभग 1 करोड़ 27 लाख रुपये खर्च करा लिए।

    महिला का आरोप है कि मार्च 2026 में जब उसने शादी के लिए दबाव बनाया तो आरोपी ने शादी से इनकार कर दिया। इसके बाद कथित तौर पर उसने महिला को धमकी भी दी और वहां से फरार हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए माधवनगर पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपी की तलाश में तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया। पुलिस को मिली जानकारी के आधार पर आरोपी को राजस्थान के पाली से गिरफ्तार कर लिया गया। न्यायालय में पेश करने के बाद पुलिस ने पूछताछ और बरामदगी के लिए उसे पुलिस अभिरक्षा में लिया।

    उज्जैन पुलिस के मुताबिक पूछताछ के दौरान आरोपी की निशानदेही पर नकदी दो महंगे मोबाइल फोन और ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए खरीदा गया सामान बरामद किया गया है। पुलिस को शक है कि यह मामला केवल एक महिला तक सीमित नहीं है। शुरुआती जांच में आरोपी के मध्य प्रदेश के धार और नीमच में भी युवतियों के संपर्क में रहने और उनसे लाखों रुपये लेने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब इन दावों की जांच कर रही है।

    पुलिस के अनुसार आरोपी कथित तौर पर अपना ठिकाना बदलकर किराए के मकानों में रहता था और महिलाओं से बातचीत के जरिए नजदीकी बढ़ाता था। इसके बाद शादी का वादा कर उनसे पैसे लेने का तरीका अपनाता था। पुलिस अब उसके मोबाइल फोन ऑनलाइन खरीदारी बैंकिंग और पैसों के लेन देन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही है। साथ ही उसके संपर्क में रही महिलाओं के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि पता लगाया जा सके कि उसने कितनी महिलाओं को कथित तौर पर अपना शिकार बनाया।

    उज्जैन पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और पूछताछ के बाद इस मामले में और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर ठगी गई रकम कहां इस्तेमाल की गई और आरोपी के साथ इस पूरे मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही ठगी के पूरे नेटवर्क और रकम का वास्तविक आंकड़ा सामने आ सकेगा।

  • फाइव स्टार होटल की किचन में गंदगी का मामला, फ्रीजर का तापमान भी मानक से बाहर; खाद्य विभाग ने लिए कई सैंपल

    फाइव स्टार होटल की किचन में गंदगी का मामला, फ्रीजर का तापमान भी मानक से बाहर; खाद्य विभाग ने लिए कई सैंपल


    इंदौर । इंदौर के प्रसिद्ध सयाजी होटल में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने का मामला सामने आया है। गुरुवार को खाद्य विभाग की टीम ने होटल की किचन और फूड स्टोरेज एरिया में करीब पांच घंटे तक निरीक्षण किया। जांच के दौरान फूड स्टोरेज में चूहे और किचन तथा फूड प्रिपरेशन एरिया में कॉकरोच मिलने की बात सामने आई। अधिकारियों को खाद्य सामग्री के रखरखाव और लेबलिंग से जुड़ी कई कमियां भी मिलीं। विभाग ने अलग अलग खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा है। संबंधित कार्रवाई की पुष्टि खाद्य सुरक्षा विभाग से जुड़े सोशल मीडिया अपडेट में भी हुई है।

    जांच के दौरान खाद्य स्टोरेज में चूहों की मौजूदगी दिखाई दी। पैलेट के नीचे भी चूहों की मौजूदगी के संकेत मिले। किचन और फूड प्रिपरेशन प्लेटफॉर्म पर कॉकरोच तथा गंदगी मिलने की बात अधिकारियों ने दर्ज की। ड्राय स्टोरेज की दीवार और फर्श में दरारें भी मिलीं। इसके अलावा गीले और सूखे कचरे के लिए अलग व्यवस्था नहीं होने की कमी सामने आई। पीने के पानी के बर्तनों के पास रखे डस्टबिन में भी अलग अलग प्रकार का कचरा एक साथ मिला।

    स्टोरेज में वेज और नॉनवेज खाद्य सामग्री के रखरखाव को लेकर भी सवाल उठे। जांच में सीफूड चिकन और मटन के लिए अलग अलग स्टोरेज व्यवस्था नहीं मिलने की जानकारी सामने आई। ड्राय और नॉनवेज स्टोरेज के प्लेटफॉर्म पर जंग के निशान भी मिले। स्टोरेज रैक दीवार से सटाकर रखे गए थे। खाद्य सामग्री को नमी और संभावित संक्रमण से बचाने के लिए स्टोरेज की स्वच्छता और उचित व्यवस्था बेहद जरूरी मानी जाती है।

    फ्रीजर के तापमान को लेकर भी जांच में गंभीर कमी सामने आई। नॉनवेज को सुरक्षित रखने के लिए सामान्य तौर पर फ्रीजर में करीब माइनस 18 डिग्री सेल्सियस तापमान बनाए रखना जरूरी होता है। निरीक्षण के दौरान एक फ्रीजर का तापमान प्लस 20 डिग्री और दूसरे का माइनस 16 डिग्री दर्ज किया गया। इसके अलावा 33 नॉनवेज पैकेटों पर पैकेजिंग डेट बैच नंबर और एक्सपायरी डेट दर्ज नहीं होने की बात सामने आई। पैक्ड कुल्फी पर भी जरूरी जानकारी नहीं मिली।

    स्टोर में रखी मूंगफली में फंगस पाया गया। इसके साथ ही सड़े हुए टमाटर और आलू भी मिले। उबले आलू पर एक्सपायरी डेट की टैगिंग पाए जाने की जानकारी सामने आई। कुछ खाद्य उत्पाद उचित लेबल के बिना रखे गए थे। टॉपिंग के कुछ टेट्रापैक लीक भी मिले जिससे खाद्य सामग्री के दूषित होने का जोखिम बढ़ सकता है। पैकेटबंद कुकीज पर भी पैकेजिंग और एक्सपायरी से जुड़ी जानकारी नहीं होने की बात सामने आई।

    लाइसेंस से जुड़े दस्तावेजों को लेकर भी खाद्य विभाग ने आपत्ति दर्ज की। जांच में होटल में इस्तेमाल होने वाली नॉनवेज गतिविधियों का लाइसेंस में उल्लेख नहीं होने की जानकारी सामने आई। इसी तरह इन हाउस बेकरी और स्वीट्स निर्माण से जुड़ी गतिविधियों का उल्लेख भी लाइसेंस में नहीं मिलने की बात कही गई। निरीक्षण के दौरान होटल का सेंट्रल FSSAI फाइव स्टार लाइसेंस मौके पर उपलब्ध नहीं मिला। हालांकि होटल स्वयं अलग अलग ट्रैवल प्लेटफॉर्म पर पांच सितारा होटल के रूप में सूचीबद्ध है।

    खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने जांच के दौरान पनीर कच्चे नॉनवेज पैक्ड पनीर सौंफ मसाले और ड्रायफ्रूट्स समेत कई खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए हैं। इन सैंपलों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है। अधिकारियों के मुताबिक रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की स्थिति में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब खाद्य सुरक्षा विभाग इंदौर में होटल और रेस्टोरेंट्स में स्वच्छता तथा खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर लगातार निरीक्षण कर रहा है। FSSAI के नियमों के तहत खाद्य कारोबारियों के लिए स्वच्छ परिसर उचित भंडारण और सही लेबलिंग जैसी व्यवस्थाएं जरूरी हैं।

    अब सभी की नजर प्रयोगशाला रिपोर्ट और खाद्य विभाग की आगामी कार्रवाई पर है। सैंपल रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि जांच के दौरान लिए गए खाद्य पदार्थ निर्धारित सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं। इसके बाद विभाग नियमों के मुताबिक होटल प्रबंधन के खिलाफ आगे की कार्रवाई कर सकता है।

  • इंदौर के दोहरे हत्याकांड में मासूम की गवाही पर टिकी नजर, घटना के तुरंत बाद रिकॉर्ड हुआ बयान जांच में बनेगा अहम कड़ी

    इंदौर के दोहरे हत्याकांड में मासूम की गवाही पर टिकी नजर, घटना के तुरंत बाद रिकॉर्ड हुआ बयान जांच में बनेगा अहम कड़ी


    इंदौर । इंदौर के कनाड़िया थाना क्षेत्र के झलारिया गांव में हुए मां बेटी हत्याकांड की जांच में अब 8 साल के मासूम बेटे का बयान बेहद अहम माना जा रहा है। पुलिस के मुताबिक आरोपी पिता सुनील चौहान ने पहले पत्नी अनीता की हत्या की और इसके बाद दोनों बच्चों को हिंगोनिया तालाब में फेंक दिया। इस घटना में 10 वर्षीय बेटी माही की मौत हो गई जबकि 8 वर्षीय बेटा अजय किसी तरह अपनी जान बचाकर तालाब से बाहर निकल आया। इसके बाद उसने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। घटना के बाद पुलिस ने बच्चे का बयान मोबाइल में रिकॉर्ड किया था। बताया जा रहा है कि यह वीडियो करीब 2 मिनट 8 सेकंड का है। बाद में बच्चे का बयान अदालत में भी दर्ज कराया गया। घटना और बच्चे के पुलिस को दिए बयान की जानकारी की पुष्टि कई रिपोर्टों में हुई है।

    पुलिस के अनुसार तालाब में फेंके जाने के बाद बच्चे ने अपनी जान बचाने के लिए खुद को मृत होने का आभास दिया और मौका मिलते ही पानी से बाहर निकलकर सड़क की ओर पहुंचा। वहां गश्त कर रही पुलिस टीम की नजर उस पर पड़ी। गीले कपड़ों और घबराए हुए बच्चे ने पुलिस को जो जानकारी दी उसके बाद तालाब में तलाश अभियान शुरू किया गया। कई घंटे की मशक्कत के बाद उसकी बहन का शव बरामद किया गया। इस तरह घटना के तुरंत बाद सामने आया बच्चे का बयान पुलिस के लिए शुरुआती जांच का महत्वपूर्ण आधार बना।

    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अदालत में 8 साल के बच्चे की गवाही कितनी महत्वपूर्ण होगी। कानूनी तौर पर केवल उम्र कम होने की वजह से किसी बच्चे की गवाही को खारिज नहीं किया जाता। अदालत यह देखती है कि बच्चा सवाल समझने और उनके जवाब तार्किक तरीके से देने में सक्षम है या नहीं। यदि अदालत को लगता है कि बच्चा घटनाक्रम को समझने और सही तरीके से बताने की क्षमता रखता है तो उसकी गवाही को साक्ष्य के रूप में महत्व दिया जा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय अदालत ही करेगी और बयान की विश्वसनीयता दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों के साथ परखी जाएगी।

    इस मामले में घटना के तुरंत बाद दिया गया बयान भी जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है। बच्चे ने घटना के कुछ ही समय बाद पुलिस को जानकारी दी थी। ऐसे बयान की जांच करते समय पुलिस और अदालत परिस्थितियों तथा दूसरे साक्ष्यों से उसका मिलान कर सकती है। वीडियो रिकॉर्डिंग भी जांच में उपयोगी हो सकती है लेकिन केवल वीडियो बन जाना अपने आप में पर्याप्त नहीं माना जाता। डिजिटल रिकॉर्ड को कानून के मुताबिक सुरक्षित और प्रमाणित तरीके से अदालत के सामने पेश करना जरूरी होगा।

    मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट घटनास्थल से मिले साक्ष्य आरोपी के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की भी जांच होगी। इन सभी साक्ष्यों को एक साथ देखकर अदालत यह तय करेगी कि अभियोजन पक्ष के आरोप किस हद तक साबित होते हैं। इसलिए बच्चे का बयान महत्वपूर्ण होने के बावजूद पूरे मामले का फैसला केवल एक साक्ष्य के आधार पर नहीं बल्कि समग्र साक्ष्य के आधार पर होगा।

    इस घटना का सबसे संवेदनशील पहलू मासूम की मानसिक स्थिति भी है। उसने अपनी मां और बहन को खोया है और खुद भी जानलेवा परिस्थिति से बचकर निकला है। ऐसे हादसे का बच्चे के मन पर गहरा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक उसे सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल देना जरूरी है। परिवार को उससे बार बार घटना पूछने के बजाय उसे भावनात्मक सहारा देना चाहिए। जरूरत पड़ने पर बाल मनोवैज्ञानिक या काउंसलर की मदद भी ली जा सकती है।

    इस पूरे मामले में एक तरफ पुलिस हत्या के आरोपों से जुड़े साक्ष्यों को मजबूत करने में जुटी है तो दूसरी तरफ मासूम के भविष्य और मानसिक सुरक्षा की चुनौती भी सामने है। मां और बहन की मौत के बाद उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। ऐसे में अदालत में न्याय की प्रक्रिया के साथ उसकी देखभाल और पुनर्वास पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी होगा। आरोपी सुनील चौहान के खिलाफ पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • दर्द की गोली को हल्के में न लें! बार-बार पेनकिलर लेने से किडनी पर पड़ा असर, इंदौर में 31 वर्षीय युवक का हुआ ट्रांसप्लांट

    दर्द की गोली को हल्के में न लें! बार-बार पेनकिलर लेने से किडनी पर पड़ा असर, इंदौर में 31 वर्षीय युवक का हुआ ट्रांसप्लांट


    भोपाल । बुखार या शरीर में दर्द होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से पेनकिलर लेकर खाना कई लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुकी है। दर्द कम होते ही लोग इसे बीमारी का इलाज मान लेते हैं लेकिन इंदौर में सामने आया एक मामला इस आदत के गंभीर खतरे की ओर इशारा करता है। 31 वर्षीय नंदराम को अहमदाबाद में काम करने के दौरान बुखार और हाथ पैर में दर्द हुआ तो उसने डॉक्टर से संपर्क करने के बजाय मेडिकल स्टोर से पेनकिलर खरीदकर लेना शुरू कर दिया। करीब एक महीने में उसने लगभग 13 बार दवा ली। हर बार कुछ समय के लिए राहत मिलती रही लेकिन समस्या दोबारा सामने आती रही। बाद में जब पेट में दर्द शुरू हुआ तो जांच में उसकी दोनों किडनियां गंभीर रूप से खराब पाई गईं।

    ललितपुर जिले के तुर्का गांव निवासी नंदराम ने इसके बाद दिल्ली भोपाल और अहमदाबाद में इलाज कराया। हालत बिगड़ने पर उसे नियमित डायलिसिस की जरूरत पड़ने लगी। करीब एक साल तक डायलिसिस के बाद उसे इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए भर्ती किया गया। 4 अगस्त को उसकी मां भगवती ने अपनी किडनी दान की और बेटे को नई जिंदगी मिली। यह ट्रांसप्लांट आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त किया गया। फिलहाल नंदराम की हालत स्थिर बताई गई है और ट्रांसप्लांट के बाद नई किडनी सामान्य रूप से काम कर रही है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ दर्द निवारक दवाओं का बार बार या लंबे समय तक इस्तेमाल किडनी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। खासकर NSAIDs जैसी दवाओं का अधिक इस्तेमाल जोखिम बढ़ा सकता है। ये दवाएं किडनी में रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकती हैं और कुछ परिस्थितियों में एक्यूट किडनी इंजरी का खतरा बढ़ सकता है। नेशनल किडनी फाउंडेशन भी लंबे समय तक या अधिक मात्रा में NSAIDs के इस्तेमाल को किडनी के लिए नुकसानदायक मानता है।

    हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पेनकिलर की एक या दो खुराक लेने से हर व्यक्ति की किडनी खराब हो जाएगी। खतरा दवा के प्रकार और मात्रा के साथ व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर भी निर्भर करता है। पहले से किडनी की बीमारी होना हाई ब्लड प्रेशर या शरीर में पानी की कमी जैसी स्थितियां जोखिम बढ़ा सकती हैं। डिहाइड्रेशन खुद भी किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।

    डॉक्टरों का कहना है कि बार बार होने वाले बुखार या दर्द को केवल पेनकिलर से दबाने के बजाय उसके कारण की जांच कराना जरूरी है। संक्रमण सूजन या दूसरी बीमारी की वजह से दर्द और बुखार हो सकता है। ऐसे में दवा का चुनाव उसकी सही मात्रा और कितने समय तक इस्तेमाल करना है यह डॉक्टर की सलाह से तय किया जाना चाहिए।

    इंदौर में इलाज करा रहे 37 वर्षीय जितेंद्र कुमार का मामला भी पेनकिलर के लंबे इस्तेमाल से जुड़ी गंभीर परेशानी की ओर ध्यान खींचता है। अशोक नगर निवासी जितेंद्र इलेक्ट्रिशियन का काम करते थे और काम के दौरान होने वाली थकान तथा शरीर के दर्द से राहत के लिए पेनकिलर लेने लगे। करीब एक महीने तक लगातार दवा लेने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और जांच में दोनों किडनियों के खराब होने की जानकारी मिली। वर्ष 2021 से वह स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से जूझ रहे हैं और अब सप्ताह में तीन दिन डायलिसिस के लिए अस्पताल जाना पड़ता है।

    एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में अब तक 8 किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने की जानकारी दी गई है। इनमें सभी ट्रांसप्लांट आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त किए गए हैं। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार 7 मामलों में मां ने अपने बच्चों को किडनी दान की है। अस्पताल का कहना है कि मरीजों को समय पर उपचार जरूरी दवाएं और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर लगातार काम किया जा रहा है।

    विशेषज्ञों की सलाह साफ है कि हर दर्द के लिए खुद से पेनकिलर लेना सुरक्षित तरीका नहीं है। अगर दर्द या बुखार बार बार हो रहा है तो उसके कारण की जांच कराना ज्यादा जरूरी है। दवा की जरूरत होने पर डॉक्टर से सही दवा और उसकी खुराक के बारे में सलाह लेना चाहिए। खासकर लंबे समय तक दर्द निवारक दवा लेने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूरी है। दवाओं के गलत या अत्यधिक इस्तेमाल से होने वाली किडनी की क्षति कई बार गंभीर स्थिति तक पहुंच सकती है और कुछ मामलों में डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की जरूरत भी पड़ सकती है।

  • अस्पताल दूर टीकाकरण अधूरा और कुपोषण का संकट, बालाघाट में बैगा बच्चों की मौत ने खोली सिस्टम की पोल

    अस्पताल दूर टीकाकरण अधूरा और कुपोषण का संकट, बालाघाट में बैगा बच्चों की मौत ने खोली सिस्टम की पोल


    भोपाल । मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा ब्लॉक में बैगा आदिवासी परिवारों के बच्चों की मौत का मामला स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। प्रभावित गांवों में बच्चों के बीमार पड़ने और मौतों की खबर सामने आने के बाद सरकारी टीमें सक्रिय हुईं लेकिन बीमारी के कारण और मृतकों की संख्या को लेकर सरकारी दावे और स्थानीय स्तर पर किए जा रहे दावों में अंतर दिखाई दे रहा है। जिला प्रशासन के अनुसार आठ बच्चों की मौत हुई है जबकि स्थानीय कांग्रेस विधायक संजय उइके ने 20 बच्चों की मौत का दावा किया है। उन्होंने मृत बच्चों की सूची होने और कई परिवारों को लंबे समय तक राशन नहीं मिलने की बात भी कही है।

    बिरसा ब्लॉक के बैगा बहुल इलाकों में कुंडेकसा अडोरी कोरका और बांदरी समेत कई गांवों में बड़ी संख्या में बच्चे बीमार हुए। बच्चों में बुखार सर्दी खांसी दस्त त्वचा संबंधी समस्या और मिजल्स जैसे लक्षण सामने आए। स्वास्थ्य विभाग ने बाद में घर घर सर्वे शुरू किया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 14 अगस्त तक 140 प्रभावित बच्चों में से 100 स्वस्थ होकर घर लौट चुके थे जबकि 40 बच्चों का उपचार चल रहा था। स्वास्थ्य टीमों ने बच्चों को विटामिन ए ओआरएस आयरन सिरप और अन्य जरूरी दवाएं भी दीं।

    इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच को लेकर उठ रहा है। प्रभावित आदिवासी गांव बेहद दुर्गम इलाकों में स्थित हैं और कई जगह अस्पताल तथा स्वास्थ्य केंद्र काफी दूर हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ इलाकों में निकटतम अस्पताल करीब 70 किलोमीटर दूर है। ऐसे में गंभीर हालत में बच्चों को समय पर अस्पताल पहुंचाना परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। कई परिवार पारंपरिक उपचार और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध साधनों पर निर्भर रहते हैं जिससे अस्पताल पहुंचने में और देरी हो सकती है।

    दूसरी बड़ी चिंता कुपोषण की है। प्रभावित क्षेत्र के आंगनवाड़ी केंद्रों में किए गए वजन परीक्षण में बड़ी संख्या में बच्चे सामान्य से कम वजन के पाए गए। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार जुलाई में 28 आंगनवाड़ी केंद्रों में छह साल से कम उम्र के 1149 बच्चों का वजन किया गया। इनमें 213 बच्चे मध्यम रूप से कम वजन वाले और 18 बच्चे गंभीर रूप से कम वजन वाले पाए गए। यानी पोषण संकट बीमारी के साथ बच्चों की स्थिति को और गंभीर बना रहा था।

    टीकाकरण को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। मिजल्स से बचाव के लिए टीकाकरण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है लेकिन दूरदराज के गांवों में वैक्सीनेशन कवरेज और स्वास्थ्य कर्मियों की नियमित पहुंच को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें सामने आई हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बाद में प्रभावित इलाकों में सर्वेक्षण टीमों की संख्या बढ़ाई और घर घर जाकर बच्चों की जांच शुरू की। 14 अगस्त तक 20 सर्वेक्षण टीमें सक्रिय थीं और सैकड़ों लोगों की जांच की जा चुकी थी।

    सरकार की ओर से बीमारी को किसी रहस्यमयी बीमारी के बजाय मौसमी संक्रमणों से जोड़कर देखा गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि कई मामलों में मलेरिया और मिजल्स जैसे लक्षण पाए गए हैं। आईसीएमआर और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल की टीमें भी क्षेत्र में पहुंचकर स्थिति का आकलन कर चुकी हैं। प्रशासन ने पानी के स्रोतों को सैनिटाइज करने सफाई अभियान चलाने और मच्छरों के नियंत्रण के लिए फॉगिंग तथा एंटी लार्वा गतिविधियां शुरू की हैं।

    प्रशासन ने अब प्रभावित गांवों में निगरानी बढ़ा दी है। घर घर स्वास्थ्य जांच के साथ बीमार बच्चों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है और पोषण तथा राशन की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन की ओर से यह भी बताया गया है कि कई बच्चों को उपचार के बाद स्वस्थ होने पर घर भेजा जा चुका है।

    हालांकि मौतों की वास्तविक संख्या और उनके कारण को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने तक किसी एक बीमारी को सभी मौतों का निश्चित कारण बताना जल्दबाजी होगी। फिलहाल यह मामला सिर्फ बीमारी का नहीं बल्कि दूरदराज आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच पोषण टीकाकरण और समय पर निगरानी की व्यवस्था का भी बड़ा सवाल बन चुका है। बैगा जैसे विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूह के बच्चों तक सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाना इस संकट से निकलने की सबसे बड़ी चुनौती है।

  • BJP युवा मोर्चा की नई टीम तैयार, ग्वालियर से भोपाल और उज्जैन तक बदली कमान; जानें किसे मिली कौन सी जिम्मेदारी

    BJP युवा मोर्चा की नई टीम तैयार, ग्वालियर से भोपाल और उज्जैन तक बदली कमान; जानें किसे मिली कौन सी जिम्मेदारी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने युवा मोर्चा के संगठन को और मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति के बाद भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने 12 जिलों में नए जिलाध्यक्षों की घोषणा की है। इसके साथ ही 9 जिलों में जिला महामंत्रियों की नियुक्ति भी की गई है। नई जिम्मेदारियां ग्वालियर ग्रामीण मऊगंज सतना कटनी पांढुर्णा भोपाल ग्रामीण धार ग्रामीण बुरहानपुर देवास विदिशा उज्जैन ग्रामीण और शाजापुर में दी गई हैं। इससे पहले जुलाई में भी युवा मोर्चा ने 15 जिलों में अध्यक्षों की नियुक्ति की थी। उस सूची में ग्वालियर नगर समेत कई जिलों को नई कमान मिली थी। (peptechtime.com)

    ताजा नियुक्तियों में ग्वालियर ग्रामीण की जिम्मेदारी शिवराज यादव को दी गई है जबकि मनोज गुर्जर को जिला महामंत्री बनाया गया है। मऊगंज में प्रवीण सिंह जिलाध्यक्ष और विवेक तिवारी महामंत्री होंगे। सतना में यश यादव को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है और शुभम परिहार जिला महामंत्री बनाए गए हैं। कटनी में पारस जैन को जिलाध्यक्ष तथा देवांश श्रीवास्तव को महामंत्री नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने ग्रामीण और संगठनात्मक क्षेत्रों में युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है।

    पांढुर्णा में विवेक रामचाकले को जिलाध्यक्ष बनाया गया है जबकि पंकज बंजारी को जिला महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। भोपाल ग्रामीण में वीरेंद्र सिंह राजपूत को युवा मोर्चा का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। धार ग्रामीण में उज्ज्वल सोलंकी को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। इन दोनों जिलों में फिलहाल जिला महामंत्री के नाम की घोषणा नहीं की गई है।

    बुरहानपुर में भरत रावल को जिलाध्यक्ष और अमित वास्कले को जिला महामंत्री बनाया गया है। देवास में रजत पाल सिंह को अध्यक्ष तथा मोहित जाट को महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। विदिशा में अनुज मित्तल जिलाध्यक्ष होंगे जबकि शिवेंद्र सिंह राजपूत को जिला महामंत्री बनाया गया है। उज्जैन ग्रामीण में हरजीत सिंह को जिलाध्यक्ष और राहुल धाकड़ को जिला महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। शाजापुर में हर्षवर्धन मंडलोई को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यहां भी महामंत्री का नाम फिलहाल घोषित नहीं किया गया है।

    बीजेपी युवा मोर्चा में लगातार हो रही इन नियुक्तियों को संगठन विस्तार की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। जुलाई में प्रदेश के 15 जिलों में अध्यक्षों की पहली बड़ी सूची जारी हुई थी जिसमें सागर ग्रामीण हरदा सीधी टीकमगढ़ खरगोन जबलपुर ग्रामीण बैतूल झाबुआ उज्जैन नगर ग्वालियर नगर रतलाम बड़वानी शहडोल सीहोर और खंडवा शामिल थे। उस सूची में छह जिलों के महामंत्रियों की भी घोषणा की गई थी। (starsamachar.com)

    पार्टी के युवा संगठन में जिला अध्यक्षों की भूमिका अहम मानी जाती है। इन पदाधिकारियों के जरिए बूथ स्तर तक युवा कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और संगठन की गतिविधियों को गति देने की जिम्मेदारी रहती है। आने वाले समय में प्रदेश के बाकी जिलों में भी नियुक्तियां होने की संभावना है। इससे युवा मोर्चा का संगठनात्मक ढांचा और मजबूत होने के साथ आगामी राजनीतिक गतिविधियों में युवाओं की भूमिका बढ़ सकती है।

    इधर बीजेपी महिला मोर्चा ने भी प्रदेश में संगठनात्मक नियुक्तियों का ऐलान किया है। महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अर्चना परांजपे राजगढ़े की ओर से जारी सूची में अलग अलग संभागों के लिए प्रभारियों की नियुक्ति की गई है। चंबल की जिम्मेदारी ज्योति तोमर को जबकि ग्वालियर की जिम्मेदारी क्रांति जोशी को दी गई है। सागर में शालिनी खरबानी रीवा में आशा गुप्ता शहडोल में डॉ. स्वप्ना वर्मा और जबलपुर में डॉ. सारिका उपाध्याय को जिम्मेदारी मिली है। इसके अलावा छिंदवाड़ा नर्मदापुरम भोपाल इंदौर निमाड़ उज्जैन और मंदसौर संभाग में भी महिला पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

    बीजेपी के दोनों मोर्चों में एक साथ संगठनात्मक गतिविधियां तेज होने से साफ है कि पार्टी जिला स्तर पर अपनी टीम को सक्रिय करने पर जोर दे रही है। युवा और महिला कार्यकर्ताओं को नई जिम्मेदारियां देकर संगठन बूथ और जमीनी स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • मुरैना में ट्रेन से तोमर का भाषण और भोपाल में पटवारी का हमला, MP की राजनीति में छाया इंजन-डिब्बे वाला तंज

    मुरैना में ट्रेन से तोमर का भाषण और भोपाल में पटवारी का हमला, MP की राजनीति में छाया इंजन-डिब्बे वाला तंज


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों नेताओं के बयानों और अंदाज को लेकर खूब चर्चा हो रही है। मुरैना में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने संत रविदास की 650वीं जयंती के कार्यक्रम में जाति व्यवस्था को लेकर नेताओं पर सीधा निशाना साधा। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी की सरकार और संगठन के भीतर कथित खींचतान को ट्रेन के इंजन और डिब्बों की लड़ाई बताकर सियासी तंज कसा। पटवारी का यह बयान 20 अगस्त को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में दिए गए उनके हमले के दौरान सामने आया था।

    मुरैना में संत रविदास जयंती के अवसर पर आयोजित समरसता संकल्प अभियान और यात्रा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जाति का बंधन भगवान ने नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि समाज में अपनी व्यवस्था के लिए लोगों ने जाति व्यवस्था बनाई थी लेकिन बाद में इसके स्वरूप को बिगाड़ने और तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा देने का काम नेताओं ने अपने स्वार्थ के लिए किया। तोमर के इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। संत रविदास के विचारों में सामाजिक समरसता और समानता का संदेश प्रमुख रहा है और इसी विचार को लेकर समरसता से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

    तोमर का दूसरा अंदाज तब देखने को मिला जब उन्होंने मुरैना के कैलारस से वीरपुर के बीच हाल ही में शुरू हुई मेमू ट्रेन में आम यात्रियों के साथ सफर किया। ट्रेन के अलग अलग स्टेशनों पर रुकने के दौरान उन्होंने लोगों को संबोधित भी किया। ट्रेन के अंदर खड़े होकर माइक से संबोधन के वीडियो सामने आने के बाद इसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। राजनीतिक कार्यक्रमों में नेताओं के भाषण और जनसंपर्क के इस अंदाज को लेकर लोग अपने अपने तरीके से टिप्पणी कर रहे हैं।

    इधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी की सरकार पर हमला बोलते हुए ट्रेन का ही उदाहरण इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी एक ऐसी ट्रेन बन गई है जिसमें डिब्बे कहते हैं कि इंजन हटा दो और इंजन कहता है कि डिब्बों को बदल दूंगा। पटवारी ने आरोप लगाया कि इस कथित खींचतान के बीच सबसे ज्यादा परेशानी आम जनता को हो रही है। उनके बयान की पुष्टि हालिया मीडिया रिपोर्टों में भी हुई है।

    पटवारी ने आरोप लगाया कि बीजेपी के बड़े नेता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खिलाफ दिल्ली तक जा रहे हैं जबकि दूसरी तरफ मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल में बदलाव की बात कर रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इसी राजनीतिक स्थिति को इंजन और डिब्बों के बीच चल रही लड़ाई बताया। यह बयान विपक्ष की ओर से बीजेपी सरकार पर किया गया राजनीतिक हमला है और इसे इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

    पटवारी ने सरकार को घेरते हुए शिक्षा व्यवस्था और महंगाई जैसे मुद्दे भी उठाए। उन्होंने स्कूलों की स्थिति को लेकर कांग्रेस के जरिए जमीनी अभियान चलाने की बात कही और सरकार से शिक्षा व्यवस्था पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों और सांची दूध के दामों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।

    इस पूरे घटनाक्रम में दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर सामाजिक समरसता और जातिगत भेदभाव के मुद्दे पर नेताओं की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस बीजेपी की अंदरूनी राजनीति पर ट्रेन के इंजन और डिब्बों का रूपक इस्तेमाल कर रही है। दोनों बयानों ने मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी को तेज कर दिया है। अब इन मुद्दों पर आने वाली प्रतिक्रियाएं प्रदेश की राजनीतिक बहस को और गर्म कर सकती हैं।

  • MP में बाढ़ जैसे हालात से हड़कंप, ट्रक पानी में फंसा; कई इलाकों में घरों में घुसा पानी और स्कूलों की छुट्टी

    MP में बाढ़ जैसे हालात से हड़कंप, ट्रक पानी में फंसा; कई इलाकों में घरों में घुसा पानी और स्कूलों की छुट्टी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। राज्य के पूर्वी हिस्से में सक्रिय मौसम प्रणाली के कारण कई जिलों में लगातार बारिश हो रही है और नदी नाले उफान पर हैं। डिंडौरी पन्ना रीवा सतना मैहर और छतरपुर समेत कई इलाकों में हालात बिगड़ने लगे हैं। नर्मदा और मंदाकिनी जैसी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है जबकि कई निचले इलाकों में पानी भरने से जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में प्रदेश के 16 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। स्थानीय मौसम रिपोर्टों के मुताबिक कुछ इलाकों में 4 से 8 इंच तक बारिश होने की संभावना है।

    भारी बारिश को देखते हुए मैहर और डिंडौरी में स्कूलों की छुट्टी कर दी गई है। डिंडौरी में आंगनवाड़ी केंद्रों को भी बंद रखा गया है। प्रशासन ने नदी नालों और जलभराव वाले इलाकों में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। मौसम विभाग की ओर से पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया था।

    मैहर में बारिश के कारण एक बड़ा हादसा टल गया। गुरुवार देर रात मर्जुआ नाले को पार करने की कोशिश के दौरान एक ट्रक करीब सात फीट गहरे पानी में फंस गया। ट्रक में ड्राइवर और क्लीनर मौजूद थे। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। मुकुंदपुर चौकी प्रभारी नागेश्वर मिश्रा ने पानी में उतरकर ट्रक तक पहुंचने की कोशिश की। ग्रामीणों की मदद से रस्से का सहारा लिया गया और दोनों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    बारिश का असर पन्ना और चित्रकूट इलाके में भी दिखाई दे रहा है। रनेह जलप्रपात और बृहस्पति कुंड में पानी का बहाव तेज हो गया है। वहीं नर्मदा का जलस्तर बढ़ने से जबलपुर का धुआंधार जलप्रपात भी सामान्य रूप से दिखाई नहीं दे रहा है। कई स्थानों पर नदी और नालों का पानी पुलों के ऊपर से बह रहा है जिससे आवागमन प्रभावित हुआ है। डिंडौरी मंडला स्टेट हाईवे पर भी पानी आने के कारण यातायात बाधित होने की स्थिति बनी है।

    रीवा और सतना के कई रिहायशी इलाकों में भी पानी घुसने की खबर है। कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की जरूरत पड़ी है। जबलपुर में बरगी डैम के गेट खोले जाने से नर्मदा के जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है। ऐसे हालात में प्रशासन और स्थानीय एजेंसियां निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रही हैं।

    मौसम विभाग के मुताबिक निवाड़ी टीकमगढ़ छतरपुर समेत 16 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। इसके अलावा ग्वालियर दतिया शिवपुरी गुना अशोकनगर विदिशा रायसेन नर्मदापुरम सागर दमोह पन्ना सीधी और सिवनी में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। राज्य के अन्य हिस्सों में भी कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    लगातार बारिश के बावजूद पूरे मानसूनी सीजन में प्रदेश में कुल बारिश अभी सामान्य से कम है। मौसम रिपोर्ट के अनुसार 20 अगस्त तक मध्य प्रदेश में करीब 599 मिलीमीटर यानी 23.6 इंच बारिश दर्ज की गई है जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश करीब 675 मिलीमीटर यानी 26.6 इंच मानी जाती है। यानी प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 11 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां धीरे धीरे मध्य और पश्चिमी मध्य प्रदेश की ओर बढ़ सकती हैं। ऐसे में पूर्वी हिस्से के बाद राज्य के दूसरे जिलों में भी बारिश का असर बढ़ने की संभावना है। लोगों को सलाह दी गई है कि तेज बारिश के दौरान नदी नालों और जलभराव वाले रास्तों से दूरी बनाए रखें तथा मौसम और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर नजर रखें।

  • बीना स्टेशन पर रेलवे का मेगा ब्लॉक, ट्रेनों के नंबर और रूट बदले; मालखेड़ी भोपाल और कटनी में मिलेगा अस्थाई ठहराव

    बीना स्टेशन पर रेलवे का मेगा ब्लॉक, ट्रेनों के नंबर और रूट बदले; मालखेड़ी भोपाल और कटनी में मिलेगा अस्थाई ठहराव


    भोपाल । मध्य प्रदेश से होकर ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए सितंबर और अक्टूबर में बड़ी परेशानी सामने आ सकती है। पश्चिम मध्य रेलवे के बीना स्टेशन यार्ड में चल रहे रीमॉडलिंग कार्य के कारण ट्रेनों के संचालन में व्यापक बदलाव किया गया है। रेलवे के संशोधित आदेश के अनुसार 16 ट्रेनें पूरी तरह निरस्त रहेंगी जबकि 48 ट्रेनों को परिवर्तित मार्ग से चलाया जाएगा। इसके अलावा कुछ ट्रेनों के नंबर में बदलाव किया गया है और कई प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा के लिए अस्थाई ठहराव की व्यवस्था की गई है। बीना यार्ड रीमॉडलिंग के कारण 20 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच रेल परिचालन में बड़े स्तर पर बदलाव प्रस्तावित है।

    बीना स्टेशन पर आगासौद और बीना के बीच तीसरी रेल लाइन को बीना स्टेशन से जोड़ने का काम किया जा रहा है। इसके लिए प्री नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन इंटरलॉकिंग से जुड़े कार्य किए जाएंगे। रेलवे के मुताबिक सुरक्षित रेल संचालन के लिए इस दौरान कुछ ट्रेनों को रद्द करना पड़ेगा जबकि कई ट्रेनों के मार्ग बदले जाएंगे। यह काम कई चरणों में पूरा किया जा रहा है और नॉन इंटरलॉकिंग का अंतिम चरण 13 से 15 अक्टूबर तक निर्धारित है।

    इस बदलाव के तहत दादर से बलिया जाने वाली ट्रेन को नए नंबर 11043 के साथ चलाया जाएगा जबकि बलिया से दादर की सेवा 11044 नंबर से संचालित होगी। इसी तरह दादर से गोरखपुर जाने वाली ट्रेन को 11047 और गोरखपुर से दादर जाने वाली ट्रेन को 11048 नंबर दिया गया है। यानी जिन यात्रियों ने पुराने ट्रेन नंबर देखकर टिकट या यात्रा की योजना बनाई है उन्हें यात्रा से पहले संशोधित नंबर जरूर जांचना होगा।

    गुना रूठियाई और मक्सी क्षेत्र से परिवर्तित मार्ग पर चलने वाली कई ट्रेनों को मालखेड़ी स्टेशन पर अस्थाई ठहराव दिया गया है। इनमें डॉ अंबेडकर नगर रीवा ट्रेन 11704 हावड़ा इंदौर ट्रेन 22912 अहमदाबाद दरभंगा ट्रेन 15560 भुज शालीमार ट्रेन 22829 और अहमदाबाद गोरखपुर ट्रेन 19489 समेत कई सेवाएं शामिल हैं। इन ट्रेनों को मालखेड़ी स्टेशन पर करीब दो मिनट रुकने की व्यवस्था की गई है। वापसी दिशा की कई ट्रेनों को भी इसी तरह का अस्थाई ठहराव मिलेगा।

    वेरावल और जबलपुर के बीच चलने वाली 11465 और 11466 ट्रेन को भी परिवर्तित मार्ग से चलाया जाएगा। यात्रियों को राहत देने के लिए इन दोनों ट्रेनों का निशातपुरा के बजाय भोपाल स्टेशन पर करीब पांच मिनट का अस्थाई ठहराव रखा गया है। यह बदलाव संबंधित निर्धारित तारीखों पर लागू रहेगा।

    कटनी स्टेशन पर भी चार ट्रेनों को दो मिनट का अस्थाई ठहराव मिलेगा। इनमें लोकमान्य तिलक टर्मिनस बलिया ट्रेन 11071 और 11072 तथा रानी कमलापति रीवा ट्रेन 12185 और 12186 शामिल हैं। इसके अलावा कटनी साउथ स्टेशन पर हावड़ा भोपाल ट्रेन 13025 और 13026 सहित भोपाल धनबाद भोपाल चोपन भोपाल सिंगरौली और सिंगरौली भोपाल जैसी सेवाओं को अस्थाई ठहराव दिया जाएगा।

    यार्ड के काम का असर मेमू ट्रेनों पर भी पड़ेगा। कोटा बीना मेमू 61633 को निर्धारित अवधि में बीना के बजाय मुंगावली में शॉर्ट टर्मिनेट किया जाएगा। वहीं बीना भोपाल की कुछ मेमू सेवाओं को बीना के बजाय मंडी बामोरा से शुरू किया जाएगा। भोपाल बीना मेमू भी निर्धारित अवधि में मंडी बामोरा में शॉर्ट टर्मिनेट होगी।

    रीमॉडलिंग के दौरान बीना स्टेशन पर कई ट्रेनों के ठहराव समय में भी कटौती की गई है। जिन ट्रेनों का निर्धारित ठहराव 10 मिनट था उनमें इसे घटाकर दो मिनट किया गया है। पांच मिनट वाले ठहराव को भी दो मिनट किया गया है। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि सितंबर और अक्टूबर में बीना होकर यात्रा करने से पहले ट्रेन का नंबर रूट ठहराव और शुरुआती या अंतिम स्टेशन जरूर जांच लें। यार्ड रीमॉडलिंग पूरा होने के बाद ट्रेनों का संचालन सामान्य व्यवस्था के अनुसार किया जाएगा।

  • नियाज खान का बड़ा दावा-नाम सुनते ही मकान देने से किया इनकार, पूछा क्या हर मुसलमान आतंकवादी है?

    नियाज खान का बड़ा दावा-नाम सुनते ही मकान देने से किया इनकार, पूछा क्या हर मुसलमान आतंकवादी है?

    भोपाल । पूर्व IAS अधिकारी नियाज खान एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने देश में मुसलमानों के प्रति कथित भेदभाव और नफरत के माहौल को लेकर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए उनके पोस्ट के मुताबिक उनका दावा है कि कोई मुसलमान कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न हो उसे हिंदू बहुल रिहायशी इलाके में मकान लेने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सिर्फ धर्म की पहचान के आधार पर हर मुसलमान को आतंकवादी समझा जाना उचित है। नियाज खान इससे पहले भी धर्म और सामाजिक सौहार्द से जुड़े अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। वर्ष 2025 में भी उनके एक पोस्ट को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी जिसमें उन्होंने भारत के हिंदू और मुस्लिम समाज के बीच साझा सांस्कृतिक और आनुवंशिक जुड़ाव की बात कही थी।

    नियाज खान ने अपने ताजा बयान में दावा किया कि हिंदू परिवार कई बार मुसलमानों को अपना मकान देने से बचते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें खुद ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा है। उनके मुताबिक भोपाल के शक्तिनगर इलाके में उन्होंने एक मकान लेने की कोशिश की थी लेकिन मकान मालिक ने उनका नाम पूछने के बाद कथित तौर पर मकान देने से इनकार कर दिया। हालांकि यह उनके व्यक्तिगत अनुभव का दावा है और इससे पूरे समाज के व्यवहार के बारे में कोई सार्वभौमिक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    नियाज खान ने अपने पोस्ट में यह सवाल भी उठाया कि क्या किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान के आधार पर उसे संदेह की नजर से देखना सही है। उन्होंने मुसलमानों को लेकर बने पूर्वाग्रहों पर चिंता जताते हुए कहा कि देश के मुसलमान भी देश के प्रति उतने ही जिम्मेदार और देशभक्त हैं। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर धार्मिक पहचान और आवासीय भेदभाव को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।

    नियाज खान ने इससे पहले देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को लेकर भी सोशल मीडिया पर अपनी राय रखी थी। उन्होंने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और किसी दूसरे देश पर निर्भरता कम करने की बात कही थी। उनके मुताबिक राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में भारत को अपनी क्षमता पर ज्यादा भरोसा करना चाहिए।

    इसके अलावा नियाज खान ने बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान और अजय देवगन को लेकर भी तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने पान मसाला और गुटखा से जुड़े विज्ञापनों में फिल्मी सितारों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि ऐसे उत्पादों के प्रचार से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने दोनों अभिनेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए उन्हें जेल भेजने तक की बात कही। यह उनका व्यक्तिगत बयान और मांग है। दोनों अभिनेताओं के खिलाफ इस बयान के आधार पर किसी आपराधिक दोष का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    गौरतलब है कि तंबाकू और गुटखा विज्ञापनों को लेकर शाहरुख खान और अजय देवगन समेत कुछ बड़े फिल्मी सितारों का नाम पहले भी कानूनी बहस में आया है। वर्ष 2023 में केंद्र सरकार की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया गया था कि शाहरुख खान अक्षय कुमार और अजय देवगन को गुटखा कंपनियों से जुड़े विज्ञापनों के मामले में नोटिस जारी किए गए थे।

    नियाज खान के ताजा बयान ने एक बार फिर धर्म के आधार पर भेदभाव और सार्वजनिक जीवन में मशहूर हस्तियों की जिम्मेदारी जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। उनके बयानों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं लेकिन इन मुद्दों पर बहस करते समय व्यक्तिगत अनुभव और व्यापक सामाजिक स्थिति के बीच अंतर करना जरूरी है। साथ ही किसी समुदाय के बारे में सामान्यीकरण करने के बजाय घटनाओं और आरोपों को तथ्य और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर देखना ज्यादा उचित होगा।