Category: Madhya Pradesh

  • इंदौर में 25.90 लाख रुपये की MD ड्रग्स बरामद, लग्जरी लाइफस्टाइल के लिए तस्करी करने वाला आरोपी गिरफ्तार

    इंदौर में 25.90 लाख रुपये की MD ड्रग्स बरामद, लग्जरी लाइफस्टाइल के लिए तस्करी करने वाला आरोपी गिरफ्तार


    इंदौर।
    में क्राइम ब्रांच ने मादक पदार्थों की तस्करी के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी के पास से 259 ग्राम MD ड्रग्स बरामद हुई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 25 लाख 90 हजार रुपये बताई गई है। आरोपी कथित तौर पर जल्दी अमीर बनने और महंगी जीवनशैली अपनाने के लालच में ड्रग्स तस्करी से जुड़ा था।

    पुलिस को सूचना मिली थी कि मंदसौर जिले की तरफ से MD ड्रग्स की एक बड़ी खेप लेकर एक व्यक्ति इंदौर पहुंचने वाला है। सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच ने निगरानी बढ़ाई और सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में वाहनों की जांच के लिए व्यवस्था की गई। आने-जाने वाले वाहनों पर नजर रखी जा रही थी।

    इसी दौरान पुलिस टीम को काले रंग की बाइक पर एक संदिग्ध व्यक्ति आता दिखाई दिया। पुलिस के अनुसार, बाइक सवार ने पुलिस को देखते ही भागने की कोशिश की। इस व्यवहार से संदेह बढ़ गया और टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। इसके बाद बाइक की तलाशी ली गई।

    तलाशी के दौरान पुलिस को बाइक की पेट्रोल टंकी के पास प्लास्टिक की एक थैली छिपी हुई मिली। जांच में उसमें MD ड्रग्स होने की पुष्टि हुई। बरामद पदार्थ का कुल वजन 259 ग्राम बताया गया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर ड्रग्स और बाइक को अपने कब्जे में ले लिया।

    पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह कम समय में ज्यादा पैसा कमाना चाहता था। उसे महंगी गाड़ियां खरीदने, ब्रांडेड सामान इस्तेमाल करने और पब-क्लब जैसी आलीशान जिंदगी जीने का शौक था। उसकी आमदनी इन इच्छाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। पुलिस के अनुसार इसी लालच में उसने अवैध मादक पदार्थों की तस्करी का रास्ता चुना।

    पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी को MD ड्रग्स की यह खेप कहां से मिली थी। इसके अलावा इंदौर में इसकी डिलीवरी किस व्यक्ति या समूह को की जानी थी, इसकी जानकारी भी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसियां आरोपी के पिछले संपर्कों और संभावित आपराधिक नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं।

    पूछताछ में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी पहले भी इस तरह की तस्करी में शामिल रहा है या नहीं। साथ ही उसके संपर्क में रहने वाले लोगों और संभावित सप्लायरों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि इस मामले के जरिए मादक पदार्थों की सप्लाई से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है। बरामद 259 ग्राम MD ड्रग्स की कीमत करीब 25.90 लाख रुपये आंकी गई है। आरोपी से पूछताछ के आधार पर तस्करी के नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    इंदौर में सामने आया यह मामला यह भी दिखाता है कि तेज और महंगी जीवनशैली हासिल करने की चाह में कुछ लोग अवैध गतिविधियों की ओर बढ़ जाते हैं। हालांकि इस मामले में आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगी।

  • देश के कई हिस्सों में आफत बन सकती है बारिश, 22 अगस्त को भारी वर्षा और तेज हवाओं का अलर्ट, जानें आपके शहर का मौसम

    देश के कई हिस्सों में आफत बन सकती है बारिश, 22 अगस्त को भारी वर्षा और तेज हवाओं का अलर्ट, जानें आपके शहर का मौसम


    भोपाल । 22 अगस्त 2026 को देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रहने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के मुताबिक मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रह सकता है और कुछ इलाकों में भारी वर्षा के साथ गरज चमक और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है। मौसम में बदलाव का असर सामान्य जनजीवन के साथ यातायात और स्थानीय गतिविधियों पर भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में लोगों को अपने क्षेत्र के मौसम अपडेट पर नजर रखने और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।

    मध्य प्रदेश की बात करें तो 22 अगस्त की सुबह से 23 अगस्त की सुबह तक कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। रायसेन नर्मदापुरम दतिया भिंड सिंगरौली सीधी छिंदवाड़ा सिवनी बालाघाट पन्ना दमोह सागर छतरपुर टीकमगढ़ निवाड़ी और पांढुर्णा में भारी बारिश के साथ गरज चमक और करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना बताई गई है। इसके अलावा प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी गरज चमक के साथ बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है।

    भोपाल में भी 22 अगस्त को मौसम सुहावना रहने के साथ बादल छाए रहने की संभावना है। उपलब्ध पूर्वानुमान के अनुसार भोपाल में शनिवार को न्यूनतम तापमान करीब 20.3 डिग्री और अधिकतम तापमान करीब 26.4 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। अगले कुछ दिनों में भी शहर में बादल और कहीं कहीं बारिश की स्थिति बनी रहने का अनुमान है। ऐसे में सुबह और शाम के समय मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिल सकता है।

    देश के दूसरे हिस्सों में भी 22 अगस्त को मौसम पूरी तरह सामान्य रहने की उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार दिल्ली उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड उत्तराखंड हिमाचल प्रदेश जम्मू कश्मीर पश्चिम बंगाल पंजाब राजस्थान मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश और आंधी की स्थिति बन सकती है। कुछ क्षेत्रों में तेज हवाओं की रफ्तार 85 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। पहाड़ी इलाकों में बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है जबकि निचले इलाकों में जलभराव की परेशानी सामने आ सकती है।

    लगातार बारिश वाले इलाकों में नदी नालों और छोटे जलस्रोतों के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बारिश के दौरान बिजली गिरने की आशंका वाले क्षेत्रों में खुले मैदान पेड़ के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचना जरूरी है। वाहन चालकों को भी तेज बारिश के दौरान गति नियंत्रित रखने और जलभराव वाली सड़कों से गुजरते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

    मौसम के इस बदले मिजाज का असर किसानों पर भी पड़ सकता है। जहां बारिश फसलों के लिए राहत लेकर आ सकती है वहीं अत्यधिक वर्षा से खेतों में जलभराव और फसल को नुकसान की स्थिति भी बन सकती है। इसलिए किसानों को स्थानीय मौसम विभाग की सलाह के अनुसार कृषि कार्य करने की जरूरत है।

    कुल मिलाकर 22 अगस्त को मानसून कई क्षेत्रों में सक्रिय रहने वाला है। मध्य प्रदेश में कई जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान है जबकि भोपाल समेत कई इलाकों में बादल और बारिश का दौर जारी रह सकता है। मौसम को देखते हुए लोगों के लिए जरूरी है कि घर से निकलने से पहले स्थानीय मौसम अपडेट जरूर देखें और भारी बारिश या आंधी की स्थिति में प्रशासन की ओर से जारी दिशा निर्देशों का पालन करें।

  • MP में बारिश का जोर, 16 जिलों में अलर्ट, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर

    MP में बारिश का जोर, 16 जिलों में अलर्ट, कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम सक्रिय होने से पूर्वी हिस्से में भारी बारिश का दौर जारी है। मानसून ट्रफ, चक्रवाती सिस्टम और लो प्रेशर एरिया के असर से पिछले दो दिनों से कई जिलों में तेज बारिश हो रही है। नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई जगह बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। शनिवार को भी 16 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक सिवनी और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। अगले 24 घंटे में यहां 4 से 8 इंच तक बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा दतिया, भिंड, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सागर, दमोह, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, रायसेन, विदिशा और अशोकनगर में भारी बारिश की चेतावनी है।

    24 अगस्त तक जारी रह सकता है बारिश का दौर

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, प्रदेश में इस समय तीन मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं। इनके प्रभाव से पूर्वी हिस्से के साथ उत्तर और मध्य मध्यप्रदेश में भी बारिश हो रही है। अगले तीन दिनों तक बारिश का दौर बना रहने की संभावना है।

    उन्होंने बताया कि 24 अगस्त तक बारिश की गतिविधियां धीरे-धीरे मध्य और पश्चिमी मध्यप्रदेश की ओर बढ़ सकती हैं।

    रीवा में सड़कों पर पानी, नदियों का बढ़ा जलस्तर

    विंध्य क्षेत्र में लगातार बारिश से हालात बिगड़ गए हैं। शुक्रवार शाम से शुरू हुआ बारिश का दौर देर रात तक चलता रहा। रीवा शहर के कई निचले इलाकों में पानी भर गया। कई सड़कें जलमग्न होने से आवागमन प्रभावित हुआ है।

    लगातार बारिश के कारण क्षेत्र की नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। मऊगंज, सतना और चित्रकूट में नदियां उफान पर हैं।

    नागौद में एक दिन में 6.4 इंच बारिश

    सतना जिले के नागौद में पिछले 24 घंटे में 6.4 इंच बारिश दर्ज की गई। यह इस मानसून सीजन में जिले में एक दिन में हुई सबसे ज्यादा बारिश है।

    सतना में 1 जून से 21 अगस्त तक औसतन 32.2 इंच बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से करीब 5 इंच अधिक है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

    नर्मदा-मंदाकिनी खतरे के निशान से ऊपर

    पूर्वी मध्यप्रदेश में लगातार बारिश के कारण कई नदियां उफान पर हैं। नर्मदा और मंदाकिनी का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर पहुंच गया है। पन्ना में केन, मिढ़ासन, व्यारमा और पतने नदी में भी उफान है। तेंदुघाट बांध के पांच गेट खोलकर पानी छोड़ा गया है।

    उमरिया में संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के जोहिला डैम के दो गेट एक-एक मीटर खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है।

    स्कूल बंद, कई गांवों का संपर्क टूटा

    बारिश और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए मैहर और डिंडौरी में शुक्रवार को स्कूल बंद रहे थे। डिंडौरी में आंगनवाड़ियों को भी बंद रखा गया। पन्ना में लगातार बारिश के चलते शुक्रवार और शनिवार को स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया।

    सीधी के रामपुर नैकिन में भवरसेन पहाड़ की मिट्टी और पत्थर सड़क पर आ जाने से यातायात बाधित हुआ। इससे करीब 30 गांवों का मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हुआ है।

    मैहर में 7 फीट पानी में फंसा ट्रक, पुलिस ने बचाया

    मैहर में गुरुवार देर रात मर्जुआ नाला पार करते समय एक ट्रक करीब 7 फीट गहरे पानी में फंस गया। सूचना मिलने पर मुकुंदपुर चौकी प्रभारी नागेश्वर मिश्रा मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से रस्से के जरिए ट्रक ड्राइवर राकेश साहू और क्लीनर इंद्रकमल द्विवेदी को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

    सतना में सेमरावल नदी का पानी पुल के ऊपर आने से सेमरिया रोड बंद है। वहीं कोठी क्षेत्र के पवैया विद्युत सब स्टेशन में बारिश का पानी भर गया। कोटर तहसील के अबेर गांव में अलहा तालाब की मेड़ टूटने से पानी बस्ती में घुस गया।

    MP में अब तक 24 इंच बारिश, फिर भी 11% कमी

    मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश में 1 जून से अब तक 609.2 मिमी यानी करीब 24 इंच बारिश हो चुकी है। इस अवधि में सामान्य बारिश 685.3 मिमी यानी करीब 27 इंच होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में अब तक करीब 3 इंच बारिश कम हुई है और ओवरऑल 11% बारिश की कमी है। पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से 10% और पश्चिमी हिस्से में 12% कम बारिश हुई है।

    39 जिलों में सामान्य से कम बारिश

    पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से 19% तक कम बारिश दर्ज की गई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी और टीकमगढ़ में 5% से 60% तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिमी मध्यप्रदेश के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 1% से 37% तक कम बारिश हुई है।

    इन 16 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी

    अनूपपुर, डिंडौरी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, बड़वानी, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन और राजगढ़ में अब तक सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • 32 IAS अफसरों का फेरबदल, चर्चित नामों को मिली नई कमान; सृष्टि देशमुख रीवा तो अभिषेक चौधरी ग्वालियर पहुंचे

    32 IAS अफसरों का फेरबदल, चर्चित नामों को मिली नई कमान; सृष्टि देशमुख रीवा तो अभिषेक चौधरी ग्वालियर पहुंचे

    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में शुक्रवार 21 अगस्त को प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS के 32 अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। इस प्रशासनिक बदलाव में जिला पंचायत CEO नगर निगम आयुक्त अपर कलेक्टर और SDM स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। लंबे समय से अलग अलग मैदानी पदों पर काम कर रहे कई अधिकारियों को अब नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं जिससे प्रदेश के कई जिलों और नगर निगमों में प्रशासनिक नेतृत्व का चेहरा बदल गया है।

    इस तबादला सूची में कुछ चर्चित IAS अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं। 2019 बैच की IAS सृष्टि देशमुख गौड़ा को खंडवा के अपर कलेक्टर पद से हटाकर जिला पंचायत रीवा का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। उनके सामने अब ग्रामीण विकास और पंचायत स्तर की योजनाओं के क्रियान्वयन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। इसी फेरबदल में उनके पति IAS डॉ. नागार्जुन बी गौड़ा को भी खंडवा से स्थानांतरित किया गया है। उन्हें जिला पंचायत खंडवा के CEO पद से हटाकर नगर निगम सतना का आयुक्त बनाया गया है। इसके साथ ही उन्हें सतना स्मार्ट सिटी के CEO का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।

    ग्वालियर नगर निगम में भी बड़ा बदलाव हुआ है। नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय को अब ग्वालियर से हटाकर जिला पंचायत सिंगरौली का CEO बनाया गया है। वहीं 2018 बैच के IAS अधिकारी अभिषेक चौधरी को जिला पंचायत धार के CEO पद से स्थानांतरित कर ग्वालियर नगर निगम का आयुक्त बनाया गया है। इस बदलाव के बाद ग्वालियर नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था में नया नेतृत्व देखने को मिलेगा। ग्वालियर में नगर निगम से जुड़ी विकास योजनाओं शहर की व्यवस्थाओं और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कामकाज की जिम्मेदारी अब अभिषेक चौधरी के पास होगी।

    इंदौर नगर निगम को भी नया आयुक्त मिला है। 2022 बैच के IAS अधिकारी विशाल धाकड़ को कुक्षी में SDM के पद से स्थानांतरित कर नगर पालिक निगम इंदौर का आयुक्त बनाया गया है। वहीं अक्षय कुमार तेम्रवाल को जिला पंचायत दतिया के CEO पद से हटाकर भोपाल नगर निगम में अपर आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है। इन बदलावों से प्रदेश के प्रमुख नगरीय निकायों में भी प्रशासनिक स्तर पर नई टीम सामने आएगी।

    जिला पंचायत CEO स्तर पर भी बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं। जगदीश कुमार गोमे को सिंगरौली से हटाकर सागर जिला पंचायत का CEO बनाया गया है। नवीत कुमार धुर्वे को टीकमगढ़ से स्थानांतरित कर देवास जिला पंचायत CEO की जिम्मेदारी दी गई है। ऐश्वर्य वर्मा को डिंडोरी के शहपुरा में SDM पद से हटाकर सीधी जिला पंचायत CEO बनाया गया है। आशीष को सेंधवा से हटाकर खंडवा जिला पंचायत CEO की जिम्मेदारी दी गई है। कार्तिकेय जायसवाल को वारासिवनी से श्योपुर जिला पंचायत CEO बनाया गया है। वहीं अर्पित गुप्ता और तनुश्री मीणा को भी क्रमशः बड़वानी और बालाघाट जिला पंचायत CEO की जिम्मेदारी मिली है।

    इस तबादला सूची में 2024 बैच के प्रशिक्षु IAS अधिकारियों को भी मैदानी प्रशासन में नई जिम्मेदारी दी गई है। इन अधिकारियों को सहायक कलेक्टर पद से हटाकर अलग अलग क्षेत्रों में SDM बनाया गया है। आशीष कुमार को बीना अनिकेत शांडिल्य को बैहर आकाश अग्रवाल को मझौली पाटिल आशीष अशोक को कुक्षी सुशिर श्रीकृष्ण श्रीराम को देवसर कुलदीप पटेल को बिछिया जामदार फरहान इरफान को शहपुरा ठाकरे ऋषिकेष विजय को बिजावर और नवकिरण कौर को डबरा SDM की जिम्मेदारी दी गई है।

    सरकार के इस व्यापक प्रशासनिक फेरबदल से प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों और नगर निकायों में अधिकारियों की भूमिका बदल गई है। अब नई पदस्थापना के बाद अधिकारियों के सामने अपने अपने क्षेत्रों में विकास योजनाओं को गति देने और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की चुनौती होगी। खास तौर पर ग्वालियर सतना इंदौर भोपाल रीवा सिंगरौली और खंडवा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हुए बदलाव पर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी। नई जिम्मेदारियों के साथ इन अधिकारियों का कामकाज आने वाले समय में इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के असर को तय करेगा।

  • मध्य प्रदेश में 32 IAS अधिकारियों के तबादले, जिला पंचायत CEO से नगर निगम आयुक्त तक बदली प्रशासनिक जिम्मेदारियां

    मध्य प्रदेश में 32 IAS अधिकारियों के तबादले, जिला पंचायत CEO से नगर निगम आयुक्त तक बदली प्रशासनिक जिम्मेदारियां

    मध्य प्रदेश :  में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए राज्य सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के 32 अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में मंत्रालय से लेकर जिलों के मैदानी प्रशासन तक कई अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। इस फेरबदल में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों, नगर निगम आयुक्तों, अपर कलेक्टरों और अनुविभागीय अधिकारियों को नई पदस्थापना दी गई है।

    नए आदेश के तहत नगर निगम और विकास प्राधिकरण के स्तर पर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। धार जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक चौधरी को ग्वालियर नगर निगम का आयुक्त बनाया गया है। दतिया जिला पंचायत के सीईओ अक्षय कुमार तेम्रवाल को भोपाल नगर निगम में अपर आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है।

    सतना नगर निगम के आयुक्त पद पर डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा को पदस्थ किया गया है। उन्हें सतना स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। वहीं विवेक के.व्ही. को जबलपुर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।

    जिला पंचायत स्तर पर भी व्यापक बदलाव किया गया है। ग्वालियर नगर निगम आयुक्त रहे संघ प्रिय को सिंगरौली जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। सिंगरौली के सीईओ जगदीश कुमार गोमे को सागर जिला पंचायत की जिम्मेदारी दी गई है। देवास जिला पंचायत के सीईओ पद पर नवीत कुमार धुर्वे की पदस्थापना की गई है।

    खंडवा में अपर कलेक्टर रहीं सृष्टि देशमुख गौड़ा को रीवा जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। अभिषेक सराफ को सीधी, सौम्या आनंद को खंडवा, ऐश्वर्य वर्मा को श्योपुर और आशीष को टीकमगढ़ जिला पंचायत का सीईओ बनाया गया है। इसके अलावा अर्पित गुप्ता को बड़वानी और तनुश्री मीणा को बालाघाट जिला पंचायत की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    प्रशासनिक फेरबदल का असर मंत्रालय स्तर पर भी दिखाई दिया है। संजना जैन को जल संसाधन विभाग में उप सचिव, ज्योति शर्मा को मध्य प्रदेश शासन में उप सचिव, अंजली जोसेफ जोनाथन को लोक निर्माण विभाग में उप सचिव और अनिल कुमार डामोर को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में उप सचिव पद पर पदस्थ किया गया है। कार्तिकेय जायसवाल, विशाल धाकड़ और सोनाली देव को भी उप सचिव, मध्य प्रदेश शासन की जिम्मेदारी दी गई है।

    मैदानी प्रशासन में भी कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां मिली हैं। काजल जावला को राज्य शिक्षा केंद्र, भोपाल में अपर मिशन संचालक बनाया गया है। श्रद्धा शुक्ला को खंडवा का अपर कलेक्टर पद सौंपा गया है। इसके अलावा विभिन्न जिलों में राजस्व एसडीओ के पदों पर भी नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।

    आशीष कुमार को बीना, अनिकेत शांडिल्य को बैहर, आकाश अग्रवाल को मझौली और पाटिल आशीष अशोक को कुक्षी का एसडीओ राजस्व बनाया गया है। सुशिर श्रीकृष्ण श्रीराम को देवसर, कुलदीप पटेल को बिछिया, जामदार फरहान इरफान को शहपुरा, ठाकरे ऋषिकेष विजय को बिजावर और नवकिरण कौर को डबरा का एसडीओ राजस्व नियुक्त किया गया है।

    राज्य सरकार के आदेश के अनुसार सभी संबंधित अधिकारियों को अपनी नई पदस्थापना पर शीघ्र कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक फेरबदल को जिलों और स्थानीय निकायों में कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने तथा विभिन्न स्तरों पर प्रशासनिक जिम्मेदारियों को नए सिरे से व्यवस्थित करने की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।

  • कटनी में सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा एक्शन, निलंबन के निर्देश और कार्यालय सील

    कटनी में सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा एक्शन, निलंबन के निर्देश और कार्यालय सील

    मध्य प्रदेश:के कटनी में पुलिस प्रशासन से जुड़े गंभीर आरोपों के मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए सीएसपी नेहा पच्चीसिया को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के मुख्य सचिव को इस संबंध में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

    यह मामला कटनी के कुठला थाना क्षेत्र में दर्ज हत्या के एक प्रकरण से जुड़ा है। आरोप है कि हत्या के मामले में नामजद आरोपी रमेश लोधी पर दबाव बनाकर उसकी कंहवारा स्थित जमीन को कथित तौर पर वास्तविक मूल्य से काफी कम कीमत पर दूसरे व्यक्ति के नाम हस्तांतरित कराया गया। इसी प्रकरण में सीएसपी नेहा पच्चीसिया की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं।

    जांच से जुड़े तथ्यों के अनुसार, संबंधित जमीन का गाइडलाइन मूल्य 82.86 लाख रुपये बताया गया है, जबकि उसे कथित रूप से 18.20 लाख रुपये में मारूफ अहमद हनफी के नाम हस्तांतरित कराया गया। मामले में मारूफ अहमद हनफी को कथित फ्रंटमैन के तौर पर बताया गया है। जमीन के लेनदेन को लेकर पुलिस प्रशासन के स्तर पर भी जांच की जा रही है।

    आरोपों की गंभीरता को देखते हुए कटनी में सीएसपी कार्यालय को भी सील कर दिया गया है। यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय से मिले निर्देशों के बाद प्रशासनिक टीम ने की। कार्यालय सील करने का उद्देश्य मामले से संबंधित केस डायरी, सरकारी रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित रखना बताया गया है, ताकि जांच के दौरान किसी प्रकार की छेड़छाड़ या साक्ष्यों पर प्रभाव की आशंका न रहे।

    मामले में कुठला थाने में एफआईआर संख्या 0738/2026 दर्ज की गई है। सीएसपी नेहा पच्चीसिया के अलावा क्षितिज राज बारापत्रे और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। दर्ज धाराओं में 61, 198, 199(बी), 308(7) और 318(4) शामिल हैं।

    जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि जमीन के कथित सौदे में सीएसपी से करीबी बताए जा रहे क्षितिज राज बारापत्रे के खातों से धनराशि की फंडिंग की गई थी। इस पहलू की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे लेनदेन की प्रकृति और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही, दबाव या पद के कथित दुरुपयोग को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाए और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाए।

    निलंबन की कार्रवाई के साथ गृह विभाग की ओर से विभागीय जांच की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। इसके अलावा मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी जांच को भी तेज किए जाने की बात सामने आई है। अब जांच के दौरान जमीन सौदे, कथित वित्तीय लेनदेन, पुलिस पद के संभावित दुरुपयोग और संबंधित दस्तावेजों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।

    सरकार की इस कार्रवाई को पुलिस प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

  • रात में सोए अफसर की सुबह नहीं खुली आंखें, कमरे में मिला शव; न सुसाइड नोट मिला न चोट के निशान

    रात में सोए अफसर की सुबह नहीं खुली आंखें, कमरे में मिला शव; न सुसाइड नोट मिला न चोट के निशान


    कटनी । मध्य प्रदेश के कटनी जिले में आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मूलरूप से उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के रहने वाले मानवेंद्र प्रताप सिंह कटनी में आयकर विभाग में तैनात थे और विभागीय गेस्ट हाउस में रह रहे थे। गुरुवार रात वह अपने कमरे में सोने गए थे लेकिन शुक्रवार सुबह काफी देर तक कमरे से कोई हलचल नहीं हुई। जब सरकारी ड्राइवर उन्हें लेने पहुंचा और कई बार दरवाजा खटखटाने के बावजूद भीतर से कोई जवाब नहीं मिला तो गेस्ट हाउस के कर्मचारियों को अनहोनी की आशंका हुई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और कमरे का दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई। वहां अधिकारी बिस्तर पर अचेत अवस्था में मिले।

    घटना माधवनगर थाना क्षेत्र के बरगवां इलाके की बताई जा रही है। पुलिस ने मृतक की पहचान मानवेंद्र प्रताप सिंह के रूप में की है। वह बाराबंकी के निलालडिया असंदा क्षेत्र के रहने वाले विजेंद्र प्रताप सिंह के बेटे थे। शुरुआती जांच में कमरे के भीतर किसी तरह के संघर्ष या हिंसा के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। पुलिस को न तो कोई सुसाइड नोट मिला और न ही अधिकारी के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं। यही वजह है कि फिलहाल मौत की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल बने हुए हैं।

    बताया गया है कि शुक्रवार सुबह सरकारी ड्राइवर मानवेंद्र प्रताप सिंह के कमरे पर कार की चाबी लेने पहुंचा था। उसने दरवाजे की घंटी बजाई और कई बार दस्तक दी लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। काफी देर तक कमरे से आवाज या किसी प्रकार की हलचल नहीं आने पर गेस्ट हाउस के कर्मचारियों को शक हुआ। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस टीम के पहुंचने के बाद कमरे का दरवाजा तोड़ा गया और अधिकारी को बिस्तर पर पड़ा देखा गया। इसके बाद आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई।

    प्रारंभिक स्तर पर अधिकारी की मौत को हार्ट अटैक से जोड़कर देखा जा रहा है लेकिन पुलिस ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। मौत की वास्तविक वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि अधिकारी की तबीयत पहले से खराब थी या रात के दौरान अचानक कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या हुई। कमरे के अंदर किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश या किसी आपराधिक घटना के संकेत मिले हैं या नहीं इसकी भी जांच की जा रही है।

    मानवेंद्र प्रताप सिंह की कटनी में आयकर विभाग के कार्यालय में पोस्टिंग वर्ष 2024-25 के दौरान हुई थी। पोस्टिंग के बाद से वह बरगवां स्थित विभागीय गेस्ट हाउस में ही रह रहे थे। उनका परिवार बाराबंकी में रहता था और नौकरी के कारण वह कटनी में अकेले रह रहे थे। परिवार को घटना की जानकारी दे दी गई है और उनके कटनी पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है।

    माधवनगर थाना प्रभारी शैलेंद्र सिंह यादव के मुताबिक मामले की जांच जारी है। परिवार के सदस्यों के पहुंचने के बाद पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा और रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत की सही वजह सामने आएगी। फिलहाल पुलिस ने घटना को लेकर किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष इस मामले में सबसे अहम होंगे। बंद कमरे में अधिकारी की मौत ने विभागीय गेस्ट हाउस में भी चिंता बढ़ा दी है और पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है।

  • आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों और माताओं को पोषण आहार उपलब्ध कराने बदली व्यवस्था, स्व-सहायता समूहों से तैयार हो रहा टेक होम राशन

    आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों और माताओं को पोषण आहार उपलब्ध कराने बदली व्यवस्था, स्व-सहायता समूहों से तैयार हो रहा टेक होम राशन

    मध्यप्रदेश: में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं तक पूरक पोषण आहार की पहुंच को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने टेक होम राशन व्यवस्था में बदलाव किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास विभाग ने अगस्त के पहले सप्ताह से नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत स्थानीय स्व-सहायता समूहों के माध्यम से तैयार किया गया टेक होम राशन पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया जा रहा है। सरकार का जोर पोषण व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर अधिक प्रभावी बनाने के साथ महिलाओं और बच्चों को नियमित पोषण सहायता उपलब्ध कराने पर है।

    पूरक पोषण कार्यक्रम के तहत पात्र हितग्राहियों को वर्ष में कम से कम 300 दिन पूरक पोषण सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों पर प्रतिदिन नाश्ता और गर्म पका भोजन दिया जा रहा है। वहीं छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों और गर्भवती तथा धात्री माताओं के लिए मंगलवार को गर्म पका भोजन और शेष दिनों में टेक होम राशन उपलब्ध कराया जाता है। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों पर स्थानीय स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार टेक होम राशन का वितरण शुरू किया गया है।

    इस बदलाव से पोषण आहार की उपलब्धता को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने के साथ स्व-सहायता समूहों की भागीदारी भी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय समूहों के माध्यम से तैयार होने वाले राशन से आंगनवाड़ी सेवाओं से जुड़े हितग्राहियों को निर्धारित पोषण सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाया जा रहा है। छह से 60 माह के अति गंभीर कुपोषित बच्चों और छह से 72 माह के अति कम वजन वाले बच्चों के लिए अतिरिक्त पोषण आहार के रूप में भी स्थानीय स्तर पर तैयार टेक होम राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।

    बच्चों की पोषण स्थिति की नियमित निगरानी के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों पर उनका वजन और लंबाई या ऊंचाई मापी जाती है। इन आंकड़ों को पोषण ट्रैकर पर दर्ज किया जाता है, जिससे बच्चों की पोषण स्थिति पर नजर रखी जा सके। चिन्हित बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण, पोषण परामर्श और आवश्यक देखभाल के साथ जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग तथा पोषण पुनर्वास केंद्रों से समन्वय कर रेफरल की कार्रवाई की जाती है।

    हर महीने आयोजित दस दिवसीय शारीरिक माप दिवसों में जन्म से छह वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच की जाती है। कुपोषण की स्थिति वाले चिन्हित बच्चों का आवश्यक कार्यक्रमों के तहत पंजीयन कर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाता है। मैदानी अमले द्वारा गृहभेंट के माध्यम से बच्चों की स्थिति का फॉलोअप करने के साथ परिवारों को पोषण और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी दिया जाता है।

    विशेष जनजातीय क्षेत्रों में भी बच्चों और माताओं तक पोषण सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महाअभियान के अंतर्गत जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से 681 नवीन आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन शुरू किया गया है। सहरिया, बैगा और भारिया जैसे विशेष जनजातीय समूहों के क्षेत्रों में आंगनवाड़ी सेवाओं, पूरक पोषण आहार और बच्चों की वृद्धि तथा पोषण स्थिति की निगरानी को प्राथमिकता दी जा रही है।

    स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय से नियमित स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य जांच, रेफरल और फॉलोअप की व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। नई टेक होम राशन व्यवस्था के जरिए पोषण सेवाओं को अधिक स्थानीय और सतत बनाने की कोशिश की गई है। अगस्त के पहले सप्ताह से शुरू हुई यह व्यवस्था बच्चों और माताओं तक पूरक पोषण आहार की पहुंच मजबूत करने के साथ स्व-सहायता समूहों की भूमिका बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

  • खंडवा कलेक्ट्रेट में डॉग मास्क पहनकर प्रदर्शन करने वाले युवक को सता रहा अपनी जान का खतरा

    खंडवा कलेक्ट्रेट में डॉग मास्क पहनकर प्रदर्शन करने वाले युवक को सता रहा अपनी जान का खतरा

    मध्य प्रदेश: के खंडवा जिले में नगर निगम द्वारा संचालित श्वान बधियाकरण कार्यक्रम में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अनोखा प्रदर्शन करने वाले एक युवक ने अब अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित जनसुनवाई के दौरान डॉग मास्क पहनकर पहुंचे इस युवक का वीडियो इंटरनेट और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ था। प्रदर्शन के इस चर्चित तरीके के बाद अब पीड़ित युवक अपनी और अपने परिवार की जान को खतरा होने की बात कह रहा है।

    पूरा मामला खंडवा नगर निगम में कथित तौर पर हुए लाखों रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है। आरोप है कि श्वान बधियाकरण केंद्र के संचालन और आवारा कुत्तों की नसबंदी प्रक्रिया में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। इसी मुद्दे की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए विपक्षी जनप्रतिनिधि उस युवक को कलेक्ट्रेट में अधिकारियों की टेबल तक ले गए थे। हालांकि इस मामले पर नगर निगम प्रशासन ने अपना स्पष्टीकरण जारी करते हुए सभी आरोपों को खारिज किया है और ई-टेंडरिंग के जरिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होने का दावा किया है।

    प्रदर्शन के बाद से युवक इस कदर भयभीत है कि वह अपना चेहरा और पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहता। युवक का मानना है कि जिन लोगों के खिलाफ यह आवाज उठाई गई है, वे उसे या उसके परिवार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि उसे इस बात का भरोसा भी है कि इस अनोखे कदम के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले का संज्ञान लिया जाएगा, निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ उचित दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

    इस अनूठे प्रदर्शन को लेकर स्थानीय राजनीति भी गरमा गई है। सत्ता पक्ष ने इसे सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का जरिया करार दिया है, जबकि अन्य जनप्रतिनिधियों ने इसे आधुनिक दौर यानी ‘जेन-जी’ शैली का विरोध प्रदर्शन बताते हुए इसका बचाव किया है। राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मामला पूरे देश में चर्चा और बहस का केंद्र बन गया है, जिसमें आवारा कुत्तों की समस्या और पशु अधिकारों को लेकर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

    स्वास्थ्य विभाग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार जिले में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। खंडवा के शासकीय अस्पताल के रेबीज नियंत्रण विभाग के मुताबिक बीते महीनों में सैकड़ों मामले दर्ज किए गए हैं, हालांकि सरकारी रेबीज नियंत्रण कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के चलते पिछले कुछ वर्षों में किसी भी मरीज की जान जाने की खबर नहीं है और पीड़ितों को समय पर इलाज उपलब्ध कराया गया है।

    खंडवा में हुए इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और नागरिकों की सुरक्षा के सवाल को एक बार फिर सामने ला खड़ा किया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और प्रदर्शनकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है।

  • MP: बालाघाट के बैगा अंचल में मलेरिया और मीजल्स की वजह से हुई 19 बच्चों की मौत….

    MP: बालाघाट के बैगा अंचल में मलेरिया और मीजल्स की वजह से हुई 19 बच्चों की मौत….


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बालाघाट (Balaghat) के बैगा अंचल में 19 बच्चों की मौत ने पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में ला दिया है. शुरुआत में इन बच्चों की मौत के पीछे कुपोषण (Malnutrition) को वजह माना गया था, लेकिन ICMR और दूसरे प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों की जांच रिपोर्ट में मौतों की मुख्य वजह मलेरिया और मीजल्स (Malaria and Measles) यानी खसरा संक्रमण (Measles infection) सामने आया है. जांच में खसरा और मलेरिया संक्रमण को बच्चों की मौत की प्रमुख वजह बताया गया है. लेकिन इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद मामला खत्म नहीं हुआ है. इसके बजाय बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक और बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

    जिन बच्चों में खसरे का संक्रमण मिला, वे सभी नियमित टीकाकरण से छूटे हुए थे. यानी संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी टीकाकरण इन बच्चों तक नहीं पहुंच पाया था. बालाघाट में हुई 19 बच्चों की मौतें संक्रमण से जुड़ी बताई गई हैं, लेकिन आदिवासी इलाकों में बच्चों के सामने सिर्फ संक्रमण का खतरा नहीं है. इन इलाकों में कुपोषण भी बच्चों के स्वास्थ्य को लगातार कमजोर कर रहा है. एक तरफ मलेरिया और खसरे जैसे संक्रमण हैं और दूसरी तरफ कुपोषण की समस्या. इन दोनों के बीच आदिवासी बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

    एक तरफ बीमारी, दूसरी तरफ कुपोषण

    ग्रामीण मध्य प्रदेश में बच्चों की पोषण स्थिति को लेकर नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 के आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं. आंकड़ों के मुताबिक ग्रामीण मध्य प्रदेश में अंडरवेट बच्चों का आंकड़ा 33 फीसदी से बढ़कर 42 फीसदी से ज्यादा हो गया है. इस स्थिति में सवाल यह है कि बच्चों को बीमारी से बचाने वाली वैक्सीन और कुपोषण से बचाने वाला पोषण दोनों की व्यवस्था में कमी कहां रह गई. बालाघाट में सामने आई 19 बच्चों की मौतों ने इन दोनों व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    एक ओर अगर बच्चे नियमित टीकाकरण से छूट रहे हैं तो दूसरी ओर उन्हें पर्याप्त पोषण भी नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में संक्रमण और कुपोषण दोनों बच्चों के स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन रहे हैं. केंद्र के मिशन पोषण 2.0 के तहत गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के साथ 6 साल तक के बच्चों को साल में कम से कम 300 दिन पोषण आहार दिए जाने का प्रावधान है. लेकिन मध्य प्रदेश की करीब 97 हजार आंगनबाड़ियों में एक साल में जुलाई तक करीब 260 दिन ही नियमित पोषण आहार मिलने के आरोप लगाए गए हैं. यानी जिस व्यवस्था के तहत बच्चों और महिलाओं तक पूरे साल पोषण पहुंचाने की बात है, वहां नियमित सप्लाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    इसी बीच प्रदेश में पोषण आहार बनाने वाले रीवा, सागर, देवास, शिवपुरी और होशंगाबाद सहित जिलों के सभी 7 प्लांट बंद किए जा चुके हैं. पोषण आहार की व्यवस्था में हुए बदलाव ने भी सवाल खड़े किए हैं. जिस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों तक लगातार पोषण पहुंचाना था, वही व्यवस्था बदलाव के दौरान प्रभावित हुई. ऐसे में आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार की नियमितता को लेकर चिंता सामने आई है।


    सरकार ने माना, व्यवस्था बदलने के दौरान सप्लाई प्रभावित हुई

    महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री निर्मला भूरिया के मुताबिक पुरानी व्यवस्था में ग्रामीण एवं पंचायत विकास विभाग की ओर से पोषण आहार उपलब्ध कराया जा रहा था. मंत्री के अनुसार यह व्यवस्था संतोषजनक नहीं पाई गई, जिसके बाद इसमें बदलाव किया गया. नए टेंडर जारी होने तक स्थानीय स्तर पर विभाग स्वसहायता समूहों के जरिए बच्चों को पोषण आहार उपलब्ध करा रहा है. हालांकि मंत्री ने यह भी माना कि व्यवस्था बदलने के दौरान कुछ दिनों तक पोषण आहार की सप्लाई प्रभावित हुई थी. इससे यह सवाल और अहम हो जाता है कि व्यवस्था बदलने के बीच बच्चों तक पोषण आहार की नियमित पहुंच कैसे सुनिश्चित की गई. खासकर उन इलाकों में जहां पहले से ही बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति चुनौतीपूर्ण है।


    बालाघाट में बच्चों की मौत पर सरकार गंभीर

    बालाघाट में बच्चों की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने विभाग की सचिव को बालाघाट जाने के निर्देश दिए हैं. इसका उद्देश्य वहां के हालात पर नजर रखना और स्थिति की जानकारी लेना है. बालाघाट के बैगा अंचल में हुई 19 बच्चों की मौतों ने स्वास्थ्य, टीकाकरण और पोषण व्यवस्था को लेकर कई सवाल सामने रख दिए हैं. जांच में मलेरिया और खसरा संक्रमण मौतों की मुख्य वजह सामने आने के बाद अब नियमित टीकाकरण भी चर्चा के केंद्र में है. क्योंकि जिन बच्चों में खसरे का संक्रमण मिला, वे नियमित टीकाकरण से छूटे हुए थे. वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण मध्य प्रदेश में अंडरवेट बच्चों की संख्या बढ़ने का आंकड़ा भी सामने है।


    बालाघाट में बच्चों की मौत पर सरकार गंभीर

    मध्य प्रदेश की चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि देश की कमजोर जनजातीय आबादी का बड़ा हिस्सा इसी राज्य में रहता है. देश में 75 जनजातीय समूहों को विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह घोषित किया गया है. मध्य प्रदेश में डिंडोरी, मंडला, बालाघाट, अनूपपुर, उमरिया, श्योपुर और छिंदवाड़ा के जनजातीय समुदाय इस श्रेणी में शामिल हैं. ऐसे में बालाघाट की 19 बच्चों की मौत केवल एक इलाके की घटना नहीं रह जाती, बल्कि यह सवाल उठाती है कि कमजोर जनजातीय इलाकों में बच्चों तक स्वास्थ्य और पोषण की सुविधाएं कितनी नियमित और प्रभावी तरीके से पहुंच रही हैं।

    बालाघाट में बच्चों की मौत की जांच में मलेरिया और खसरा संक्रमण सामने आया है. खसरे से संक्रमित बच्चों का नियमित टीकाकरण नहीं हुआ था. दूसरी ओर ग्रामीण मध्य प्रदेश में कुपोषण के आंकड़े बढ़े हैं और पोषण आहार की सप्लाई में भी व्यवधान की बात सरकार ने स्वीकार की है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आदिवासी बच्चों को एक साथ बीमारी और कुपोषण से कैसे बचाया जाए. टीकाकरण और पोषण दोनों की नियमित व्यवस्था बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है. बालाघाट की घटना ने इस पूरी व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।