Category: Madhya Pradesh

  • ट्रम्प टैरिफ का असर भी नहीं रोक पाया मप्र का निर्यात, नए बाजारों के दम पर 4% की बढ़ोतरी

    ट्रम्प टैरिफ का असर भी नहीं रोक पाया मप्र का निर्यात, नए बाजारों के दम पर 4% की बढ़ोतरी


    मध्यप्रदेश । अमेरिकी व्यापार नीतियों और बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मध्य प्रदेश ने निर्यात के क्षेत्र में उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। अमेरिका में लागू किए गए ट्रम्प टैरिफ और उससे पैदा हुई व्यापारिक चुनौतियों का असर प्रदेश के निर्यात पर जरूर पड़ा, लेकिन निर्यातकों ने नए बाजारों में अवसर तलाशकर इस प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर दिया। यही वजह रही कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में मध्य प्रदेश का कुल निर्यात 4 प्रतिशत बढ़कर 68,837 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा 66,218 करोड़ रुपए था।

    निर्यात क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के अनुसार अमेरिका अब भी मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बना हुआ है, लेकिन उसकी हिस्सेदारी में कमी दर्ज की गई है। एक वर्ष पहले प्रदेश के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 20.4 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 19.4 प्रतिशत रह गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी आयात शुल्क और व्यापारिक नीतियों में बदलाव के कारण कई भारतीय निर्यातकों को चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

    हालांकि प्रदेश के उद्योगों और निर्यातकों ने परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति बदली। उन्होंने चीन, जर्मनी, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में नए अवसर तलाशे और वहां बढ़ती मांग का लाभ उठाया। इन बाजारों में निर्यात बढ़ने से अमेरिका में आई गिरावट की भरपाई हो गई और कुल निर्यात वृद्धि का रास्ता खुला।

    Federation of Indian Export Organisations (फीयो) की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के निर्यात में इंदौर संभाग की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही। कुल निर्यात में 50.5 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले इंदौर संभाग की रही। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इंदौर से 34,654 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 32,580 करोड़ रुपए था। इस प्रकार इंदौर ने लगभग 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।

    प्रदेश में निर्यात के मामले में भोपाल दूसरे स्थान पर रहा, जहां से 13,807 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ। वहीं उज्जैन संभाग 9,204 करोड़ रुपए के निर्यात के साथ तीसरे स्थान पर रहा। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक केंद्र वैश्विक बाजारों में अपनी उपस्थिति लगातार मजबूत कर रहे हैं।

    राष्ट्रीय स्तर पर भी मध्य प्रदेश ने अपनी स्थिति बनाए रखी है। देश के कुल वस्तु निर्यात में प्रदेश की हिस्सेदारी 1.8 प्रतिशत रही और राज्य लगातार दूसरे वर्ष भी देश के प्रमुख निर्यातक राज्यों की सूची में 13वें स्थान पर बना रहा।

    फीयो के अतिरिक्त महानिदेशक सुविध शाह के अनुसार, वैश्विक व्यापारिक चुनौतियों और अमेरिकी टैरिफ के बावजूद मध्य प्रदेश का निर्यात बढ़ना सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी और कृषि आधारित उत्पादों की मांग में वृद्धि तथा नए बाजारों में प्रवेश से प्रदेश को बड़ा लाभ मिला है।

    उद्योगवार आंकड़ों पर नजर डालें तो फार्मा सेक्टर प्रदेश का सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बनकर उभरा है। कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 19.2 प्रतिशत रही। दवाइयों और स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने का सीधा फायदा प्रदेश के फार्मा उद्योग को मिला। इसके बाद कॉटन यार्न और गारमेंट क्षेत्र का योगदान 10 प्रतिशत रहा, जबकि मशीनरी उत्पाद 6 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

    इसके अलावा ऑयल मील, बासमती चावल, सामान्य चावल और एल्युमिनियम उत्पादों की भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अच्छी मांग देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नए बाजारों में विस्तार की यह रणनीति जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश का निर्यात और तेजी से बढ़ सकता है।

  • 2027 नगरीय निकाय चुनाव की तैयारी शुरू, महापौर-अध्यक्ष पदों के आरक्षण के लिए आयुक्त को मिली जिम्मेदारी

    2027 नगरीय निकाय चुनाव की तैयारी शुरू, महापौर-अध्यक्ष पदों के आरक्षण के लिए आयुक्त को मिली जिम्मेदारी


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राज्य सरकार ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। विधानसभा चुनाव से लगभग एक वर्ष पहले होने वाले नगर निगम और नगरपालिका चुनावों को राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इनके परिणाम प्रदेश की राजनीतिक दिशा और जनता के मूड का संकेत देने वाले माने जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं को समय रहते पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, नगरीय निकायों में महापौर और अध्यक्ष पदों के आरक्षण निर्धारण की पूरी प्रक्रिया के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त को अधिकृत अधिकारी नियुक्त किया गया है। यह प्रक्रिया मध्य प्रदेश नगरपालिका (महापौर तथा अध्यक्ष के पद का आरक्षण) नियम, 1999 के प्रावधानों के तहत संचालित की जाएगी।

    सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब State Election Commission Madhya Pradesh ने भी आगामी नगरीय निकाय चुनावों के लिए मतदाता सूची को अद्यतन करने का कार्य शुरू कर दिया है। निर्वाचन आयोग द्वारा नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मृत एवं स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने तथा अन्य सुधार संबंधी प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगरीय निकाय चुनावों के नतीजे अक्सर विधानसभा चुनावों से पहले जनता के रुझान का संकेत देते हैं। यही कारण है कि सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों इन चुनावों को बेहद गंभीरता से लेते हैं। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले होने वाले निकाय चुनाव प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    पिछले चुनावों के अनुभव को देखते हुए सरकार इस बार किसी भी प्रकार की देरी या कानूनी विवाद से बचना चाहती है। गौरतलब है कि वर्ष 2019 में नगरीय निकाय चुनाव प्रस्तावित थे, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक कारणों से प्रक्रिया समय पर शुरू नहीं हो सकी। इसके बाद वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण चुनावी गतिविधियां प्रभावित हुईं और चुनाव लगभग दो वर्षों तक टल गए। अंततः मई 2022 में नगरीय निकाय चुनाव संपन्न कराए गए थे।

    सरकार अब पिछली परिस्थितियों से सबक लेते हुए चुनाव से काफी पहले आरक्षण, मतदाता सूची और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा करना चाहती है, ताकि किसी प्रकार की न्यायिक या प्रशासनिक बाधा उत्पन्न न हो।

    आरक्षण व्यवस्था की बात करें तो प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में कुल पदों में 50 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के लिए निर्धारित रहेगा। अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षण संबंधित निकाय क्षेत्र की जनसंख्या के अनुपात के आधार पर तय किया जाएगा। वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू रहेगा।

    आरक्षण की प्रक्रिया रोटेशन प्रणाली के आधार पर की जाएगी। इसके तहत पिछली बार आरक्षित रहे निकायों को छोड़कर नए निकायों को आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों में महापौर पदों की आरक्षण श्रेणी लॉटरी प्रणाली के माध्यम से तय की जाएगी। इन श्रेणियों में अनारक्षित, ओबीसी, एससी, एसटी और महिला आरक्षित वर्ग शामिल होंगे।

    सरकार की इस शुरुआती तैयारी को आगामी चुनावी रणनीति और प्रशासनिक सतर्कता के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले महीनों में आरक्षण प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय सामने आने की संभावना है।

  • एमएसएमई को मिला बड़ा प्रोत्साहन: ढाई साल में 3723 करोड़ रुपए का इंसेंटिव, अब अगले ढाई साल में 4500 करोड़ देने का लक्ष्य

    एमएसएमई को मिला बड़ा प्रोत्साहन: ढाई साल में 3723 करोड़ रुपए का इंसेंटिव, अब अगले ढाई साल में 4500 करोड़ देने का लक्ष्य


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित ‘समृद्ध एमएसएमई-विकसित मध्यप्रदेश’ कार्यक्रम में 900 उद्योग इकाइयों को सिंगल क्लिक के माध्यम से 360 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि वितरित की गई। इसके साथ ही 31 मार्च 2026 तक लंबित सभी पात्र देनदारियों का भी निराकरण कर दिया गया। कुछ उद्योगों को विशेष सहायता के तहत मंडी शुल्क और बिजली अनुदान का लाभ भी दिया गया।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए प्रतिबद्ध है और आने वाले ढाई वर्षों में एमएसएमई क्षेत्र को 4500 करोड़ रुपए का इंसेंटिव उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एमएसएमई क्षेत्र रोजगार सृजन का सबसे बड़ा आधार बनकर उभरा है और सरकार इसकी क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 24 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां संचालित हो रही हैं, जिनके माध्यम से सवा करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। इनमें 4 लाख 41 हजार से ज्यादा इकाइयों का संचालन महिलाएं कर रही हैं, जो प्रदेश में महिला उद्यमिता की बढ़ती भागीदारी का संकेत है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार लगातार नई योजनाएं और अवसर उपलब्ध करा रही है।

    कार्यक्रम में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार पिछले ढाई वर्षों के दौरान राज्य में 30 नए औद्योगिक क्षेत्रों और 14 औद्योगिक क्लस्टरों को स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा 1063 औद्योगिक भूखंडों का आवंटन भी किया जा चुका है। राज्य सरकार का मानना है कि इन पहलों से निवेश बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

    मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मध्यप्रदेश स्टार्टअप इकोसिस्टम में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 7400 से अधिक स्टार्टअप कार्यरत हैं, जिनमें से 3400 से अधिक का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। यह संख्या कुल स्टार्टअप्स का लगभग 50 प्रतिशत है, जो महिला नेतृत्व वाले उद्यमों की मजबूत उपस्थिति को दर्शाती है।

    एमएसएमई मंत्री Chaitanya Kashyap और प्रमुख सचिव Raghvendra Singh ने बताया कि वर्तमान सरकार के पिछले ढाई वर्षों में उद्योगों को 3723 करोड़ रुपए का इंसेंटिव दिया गया है। इसके मुकाबले इससे पहले के ढाई वर्षों में यह राशि केवल 1245 करोड़ रुपए थी। यानी प्रोत्साहन राशि में लगभग तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

    मुख्यमंत्री ने वर्ष 2027 तक प्रदेश में एक करोड़ एमएसएमई इकाइयों के लक्ष्य की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य हर जिले में उद्योग और हर परिवार में रोजगार सुनिश्चित करना है। इस दिशा में अगले ढाई से तीन वर्षों में 5000 नए औद्योगिक भूखंड आवंटित किए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार अब तक 76 विधानसभा क्षेत्रों में एमएसएमई सेंटर स्थापित करने के लिए स्थानों का चयन भी किया जा चुका है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सागर जिले के केसली में आयोजित लाडली बहना सम्मेलन का भी उल्लेख किया, जहां उन्होंने लाडली बहना योजना की 37वीं किस्त के रूप में 1.25 करोड़ हितग्राहियों के खातों में 1835 करोड़ रुपए की राशि हस्तांतरित की। साथ ही 190.85 करोड़ रुपए लागत के 53 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन भी किया गया।

  • मानपुर में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के रिश्तेदार पर जानलेवा हमले का आरोप, लाठी-तलवार से मारपीट के बाद थाने का घेराव

    मानपुर में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के रिश्तेदार पर जानलेवा हमले का आरोप, लाठी-तलवार से मारपीट के बाद थाने का घेराव


    मध्यप्रदेश । महू के मानपुर थाना क्षेत्र में रविवार को एक विवादित घटना के बाद तनाव की स्थिति बन गई। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष Jitu Patwari के रिश्तेदार बताए जा रहे संजय पटेल पर कथित रूप से जानलेवा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पहले उनकी बाइक को कार से टक्कर मारी गई और उसके बाद उन पर लाठी तथा धारदार हथियारों से हमला किया गया। घटना में गंभीर रूप से घायल संजय पटेल को उपचार के लिए इंदौर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार विष्णुप्रसाद पटेल ने आरोप लगाया है कि रविवार सुबह संजय पटेल बाइक से कहीं जा रहे थे। इसी दौरान पंजाबी ढाबे के पास एक कार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि टक्कर के बाद कार से उन्हें कुचलने का प्रयास किया गया। इसके बाद कार में सवार कुछ लोगों ने कथित रूप से उन्हें घेर लिया और मारपीट शुरू कर दी।

    शिकायतकर्ताओं के अनुसार मिथुन ठाकुर, धनसिंह ठाकुर, विरेन ठाकुर और उनके अन्य साथियों ने लाठी तथा तलवार जैसे हथियारों से हमला किया। घटना में संजय पटेल गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए इंदौर रेफर किया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी है और सभी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और समर्थक बड़ी संख्या में मानपुर थाने पहुंच गए। उन्होंने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर थाने का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों ने लोगों को कार्रवाई का आश्वासन देकर स्थिति को शांत कराया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस घटना की पृष्ठभूमि में दो पक्षों के बीच पहले से चला आ रहा विवाद भी सामने आया है। मानपुर पुलिस के मुताबिक 12 जून को नाली निर्माण को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हुआ था। उस समय संजय पटेल की ओर से कुछ लोगों के खिलाफ घर में घुसकर तोड़फोड़ और मारपीट का मामला दर्ज कराया गया था। वहीं दूसरे पक्ष ने भी पत्थरबाजी और मारपीट के आरोप लगाते हुए प्रतिपक्ष के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

    पुलिस का कहना है कि दोनों मामलों की जांच की जा रही है और पुराने विवाद तथा ताजा घटना के बीच संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर विशेष टीमें गठित की हैं।

    इस संबंध में एसडीओपी Lalit Singh Sikarwar और टीआई Mahendra Makashre ने बताया कि आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस के अनुसार आरोप सिद्ध होने की स्थिति में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही कुछ आरोपियों को गुंडा सूची में शामिल करने और जिलाबदर की प्रक्रिया शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है।

    फिलहाल पुलिस सभी पक्षों के बयान दर्ज कर रही है और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • BRICS कृषि एजेंडे में ब्राजील सबसे आगे, 88% वादों पर अमल; भारत 85% के साथ दूसरे स्थान पर

    BRICS कृषि एजेंडे में ब्राजील सबसे आगे, 88% वादों पर अमल; भारत 85% के साथ दूसरे स्थान पर


    मध्यप्रदेश । इंदौर में संपन्न हुई BRICS कृषि मंत्रियों की बैठक के बाद जारी इंदौर घोषणा-पत्र और विभिन्न सार्वजनिक रिपोर्टों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि कृषि क्षेत्र में किए गए वादों और संकल्पों को लागू करने की गति सभी सदस्य देशों में समान नहीं रही। खाद्य सुरक्षा, डिजिटल कृषि, महिला सशक्तिकरण, भूमि पुनरुद्धार और कृषि व्यापार जैसे प्रमुख मुद्दों पर बीते पांच वर्षों में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, लेकिन उनके क्रियान्वयन में देशों के बीच उल्लेखनीय अंतर देखने को मिला।

    विश्लेषण के अनुसार कृषि प्रतिबद्धताओं को लागू करने के मामले में Brazil सबसे आगे रहा। रिपोर्ट में ब्राजील का अमल स्तर 88 प्रतिशत बताया गया है। ब्राजील ने भूमि पुनरुद्धार साझेदारी, पारिवारिक खेती को बढ़ावा देने और नए कृषि एक्शन प्लान को आगे बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाई। कृषि सुधारों और सतत विकास आधारित योजनाओं को लागू करने में उसकी सक्रियता अन्य सदस्य देशों की तुलना में अधिक रही।

    दूसरे स्थान पर India रहा, जहां कृषि क्षेत्र में 85 प्रतिशत प्रतिबद्धताओं पर अमल का दावा किया गया है। भारत में डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन, ड्रोन तकनीक का उपयोग, जलवायु अनुकूल गांवों का विकास, कृषि डिजिटलीकरण और महिला आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं को BRICS एजेंडे के अनुरूप माना गया। “लखपति दीदी” जैसी पहल और तकनीक आधारित खेती के प्रयासों ने भारत की स्थिति को मजबूत किया, हालांकि कुछ क्षेत्रों में प्रगति अपेक्षाकृत धीमी बताई गई है।

    तीसरे स्थान पर China रहा, जिसने खाद्य सुरक्षा, कृषि अनुसंधान और डिजिटल कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। खाद्य सुरक्षा सहयोग रणनीति और तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने में चीन की भूमिका प्रमुख रही। वहीं Russia 80 प्रतिशत अमल के साथ चौथे स्थान पर रहा। रूस ने BRICS ग्रेन एक्सचेंज और राष्ट्रीय मुद्राओं में कृषि व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की, हालांकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण कुछ सहयोगी कार्यक्रम प्रभावित हुए।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि South Africa और BRICS के नए सदस्य देशों की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी रही। दक्षिण अफ्रीका का अमल स्तर 65 प्रतिशत आंका गया, जबकि नए सदस्य देशों का औसत प्रदर्शन 45 प्रतिशत के आसपास रहा। नए सदस्य देशों में United Arab Emirates, Egypt, Iran, Ethiopia, Saudi Arabia और Indonesia शामिल हैं। इनके लिए वर्ष 2024 और 2025 की कृषि प्रतिबद्धताओं को आधार बनाकर आकलन किया गया।

    पिछले पांच वर्षों के दौरान BRICS देशों ने कई महत्वपूर्ण कृषि निर्णय लिए। वर्ष 2021 में भारत की अध्यक्षता के दौरान खाद्य सुरक्षा, कृषि उत्पादकता और छोटे किसानों को सशक्त बनाने पर केंद्रित एक्शन प्लान को मंजूरी दी गई। 2022 में चीन की मेजबानी में खाद्य सुरक्षा सहयोग रणनीति और “डेक्कन प्रिंसिपल्स ऑन फूड सिक्योरिटी” को अपनाया गया। 2023 में दक्षिण अफ्रीका ने ग्रामीण विकास और जलवायु अनुकूल कृषि को प्राथमिकता दी। 2024 में रूस ने ग्रेन एक्सचेंज और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का प्रस्ताव रखा, जबकि 2025 में ब्राजील ने भूमि पुनरुद्धार साझेदारी और डिजिटल प्रमाणन जैसे नए प्रस्तावों को आगे बढ़ाया।

    हालांकि रिपोर्ट में BRICS की एक प्रमुख कमजोरी भी उजागर हुई है। संगठन का ढांचा पूरी तरह स्वैच्छिक है और सदस्य देशों के लिए किसी भी निर्णय को लागू करना कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। इसके अलावा प्रगति की निगरानी के लिए कोई स्वतंत्र तंत्र भी मौजूद नहीं है। अधिकांश मूल्यांकन सदस्य देशों की स्वयं प्रस्तुत रिपोर्टों, संयुक्त घोषणाओं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर किए जाते हैं। यही कारण है कि कई बार घोषित लक्ष्यों और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच अंतर देखने को मिलता है।

  • सोमवार की भस्म आरती में जटाधारी स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, वैष्णव तिलक और दिव्य आभूषणों से हुआ राजाधिराज श्रृंगार

    सोमवार की भस्म आरती में जटाधारी स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, वैष्णव तिलक और दिव्य आभूषणों से हुआ राजाधिराज श्रृंगार


    मध्यप्रदेश । धर्मनगरी उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध Shri Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple में सोमवार तड़के भस्म आरती के दौरान आध्यात्मिक और भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। प्रातः चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा विभिन्न फलों के रस से निर्मित पंचामृत अर्पित कर विशेष अभिषेक संपन्न हुआ।

    भस्म आरती की शुरुआत मंदिर परंपरा के अनुसार प्रथम घंटाल बजाने के साथ हुई। मंत्रोच्चार और वैदिक विधानों के बीच भगवान महाकाल का ध्यान कर उन्हें हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती की गई और बाबा महाकाल के मस्तक पर भांग, चंदन तथा त्रिपुंड अर्पित कर उनका दिव्य श्रृंगार आरंभ हुआ।

    सोमवार के विशेष अवसर पर भगवान महाकाल को जटाधारी स्वरूप में सजाया गया। उनके मस्तक पर चंदन और वैष्णव तिलक लगाया गया तथा उन्हें राजाधिराज स्वरूप में अलंकृत किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव का यह स्वरूप वैराग्य, शक्ति और लोककल्याण का प्रतीक माना जाता है। श्रृंगार के दौरान विविध आभूषणों और पूजन सामग्रियों का उपयोग कर बाबा महाकाल की अलौकिक छवि प्रस्तुत की गई।

    श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। Maha Nirvani Akhada की ओर से परंपरानुसार भगवान महाकाल को भस्म समर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और यही भस्म आरती की सबसे विशेष और दिव्य परंपरा मानी जाती है।

    भस्म अर्पण के उपरांत भगवान महाकाल को शेषनाग स्वरूप रजत मुकुट, रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष की मालाएं धारण कराई गईं। इसके साथ ही सुगंधित पुष्पों से निर्मित विशेष हार अर्पित किए गए। मोगरा और गुलाब के पुष्पों से सुसज्जित बाबा महाकाल का मनोहारी स्वरूप भक्तों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। श्रृंगार के बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया तथा आरती के माध्यम से समस्त श्रद्धालुओं ने उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

    भस्म आरती में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया और बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए। मंदिर परिसर पूरे समय हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंजता रहा। धार्मिक मान्यता है कि भोर बेला में बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन करने से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

  • महू में सैन्य भूमि पर चला बुलडोजर, अवैध पशु बाड़े और अतिक्रमण हटाने की संयुक्त कार्रवाई

    महू में सैन्य भूमि पर चला बुलडोजर, अवैध पशु बाड़े और अतिक्रमण हटाने की संयुक्त कार्रवाई


    मध्यप्रदेश । महू के बंडा बस्ती क्षेत्र में सोमवार को सैन्य भूमि पर किए गए कथित अतिक्रमणों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया गया। सेना, रक्षा संपदा विभाग, कैंटोनमेंट बोर्ड, जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने सुबह करीब 11:30 बजे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के अनुसार संबंधित लोगों को दो दिन पहले नोटिस जारी किए गए थे और निर्धारित समय सीमा पूरी होने के बाद यह कार्रवाई अमल में लाई गई।

    कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में बुलडोजर की मदद से पशु बाड़ों, टीन शेड और अन्य अस्थायी निर्माणों को हटाने का काम किया गया। पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई और लोगों की आवाजाही पर भी नजर रखी गई।

    यह मामला पिछले महीने सामने आए एक विवाद के बाद चर्चा में आया था। पुलिस के अनुसार बंडा बस्ती क्षेत्र स्थित एक पशु बाड़े से गोवंश के अवशेष और कथित रूप से गोमांस बरामद किया गया था। उस दौरान कार्रवाई के समय पथराव की घटना भी सामने आई थी, जिससे इलाके में तनाव की स्थिति बन गई थी। पुलिस ने इस मामले में Imran Khatkhat समेत कुछ अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार मामले की विवेचना की गई और संबंधित कानूनी प्रक्रियाएं शुरू की गईं।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकरण में दर्ज आरोपों की जांच जारी है और कानूनी कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है। कुछ आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू किए जाने की जानकारी अधिकारियों द्वारा दी गई थी। हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिया जाना है।

    घटना के बाद विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने सैन्य भूमि पर बने कथित अवैध बाड़ों और निर्माणों को हटाने की मांग उठाई थी। इसके बाद संबंधित विभागों ने भूमि अभिलेखों और सीमांकन की जांच की। अधिकारियों के अनुसार जांच में यह पाया गया कि संबंधित क्षेत्र में सैन्य भूमि पर कई स्थानों पर अतिक्रमण किया गया था। इसी आधार पर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

    प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक लगभग एक एकड़ सैन्य भूमि पर 10 से अधिक लोगों द्वारा कब्जा किया गया था। इस भूमि पर बने 10 से ज्यादा पशु बाड़ों, शेड और अन्य अस्थायी ढांचों को हटाया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि सैन्य क्षेत्र की अन्य भूमि पर भी संभावित अतिक्रमणों की पहचान की जा रही है और आवश्यकतानुसार आगे भी इसी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी।

    अधिकारियों का कहना है कि सरकारी और सैन्य भूमि को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए अभियान जारी रहेगा। वहीं स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण न करें और नियमों का पालन करें। फिलहाल बंडा बस्ती क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से जारी है तथा स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है।

  • खजराना गणेश मंदिर में गर्भगृह का गेट होगा चौड़ा, ट्रांसपेरेंट ग्लास कवर के पीछे विराजे भगवान गणेश

    खजराना गणेश मंदिर में गर्भगृह का गेट होगा चौड़ा, ट्रांसपेरेंट ग्लास कवर के पीछे विराजे भगवान गणेश


    मध्यप्रदेश । इंदौर का प्रसिद्ध Khajrana Ganesh Temple देशभर के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र माना जाता है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्त भगवान गणेश के दर्शन करने पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन ने गर्भगृह के मुख्य प्रवेश द्वार के चौड़ीकरण का कार्य शुरू कर दिया है। इस दौरान भगवान गणेश की प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए विशेष स्टील और ट्रांसपेरेंट ग्लास से बने संरक्षित कवर में रखा गया है, जिससे निर्माण कार्य के दौरान धूल, मलबा या अन्य किसी प्रकार का प्रभाव प्रतिमा पर न पड़े।

    मंदिर प्रशासन के अनुसार यह कार्य खजराना गणेश मंदिर के मास्टर प्लान के तहत किया जा रहा है। गर्भगृह के प्रवेश द्वार की चौड़ाई बढ़ने से श्रद्धालुओं की आवाजाही अधिक सुगम होगी और एक समय में अधिक संख्या में भक्त भगवान के दर्शन कर सकेंगे। वर्तमान में भीड़ के दौरान दर्शन व्यवस्था प्रभावित होती है, जिसे सुधारने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

    निर्माण कार्य शुरू करने से पहले गर्भगृह के मुख्य द्वार और आसपास की दीवारों पर लगी लगभग 150 किलोग्राम चांदी को सावधानीपूर्वक हटाया गया था। मंदिर के पुजारी Ashok Bhatt के अनुसार निकाली गई चांदी को सुरक्षित रूप से ट्रेजरी में जमा कर दिया गया है। गेट चौड़ीकरण का काम पूरा होने के बाद इस चांदी को दोबारा उसी स्थान पर स्थापित किया जाएगा।

    पुजारी अशोक भट्ट ने बताया कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भवन की संरचनात्मक मजबूती की जांच कराई गई थी। इसके लिए SGSITS की विशेषज्ञ टीम ने निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की थी। रिपोर्ट के आधार पर ही चौड़ीकरण कार्य को मंजूरी दी गई। अनुमान है कि इस कार्य को पूरा होने में एक सप्ताह या उससे अधिक समय लग सकता है।

    मंदिर प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि निर्माण कार्य के कारण श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसी वजह से अधिकांश काम रात के समय किया जा रहा है, जबकि दिन में दर्शन व्यवस्था सामान्य रूप से संचालित की जा रही है।

    गर्भगृह के मुख्य द्वार के बाद मंदिर परिसर में स्थित सभा मंडप में भी बदलाव किए जाएंगे। मंदिर प्रशासन की योजना सभा मंडप को लगभग दो से ढाई फीट नीचे करने की है। वर्तमान में भीड़ बढ़ने पर पीछे खड़े श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन करने में कठिनाई होती है। मंडप को नीचे करने से दूर खड़े भक्त भी आसानी से भगवान गणेश के दर्शन कर सकेंगे।

    इसके अलावा भविष्य में दर्शन हॉल के विकास कार्य भी किए जाएंगे। मंदिर प्रशासन का मानना है कि आगामी Simhastha और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु खजराना गणेश मंदिर पहुंच सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं।

  • इंदौर में दो अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की मौत, सड़क हादसे में ठेकेदार ने तोड़ा दम

    इंदौर में दो अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की मौत, सड़क हादसे में ठेकेदार ने तोड़ा दम


    मध्यप्रदेश । इंदौर में रविवार को दो अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की मौत हो गई। एक ओर तेजाजी नगर क्षेत्र में रहने वाले एक पेंटिंग ठेकेदार की सड़क दुर्घटना में जान चली गई, वहीं दूसरी ओर पलासिया इलाके में एक निजी बीमा कंपनी के कर्मचारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। दोनों मामलों में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    पहला मामला तेजाजी नगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार शक्करखेड़ी निवासी Pappu Kewat को गंभीर हालत में एमवाय अस्पताल लाया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह पेंटिंग ठेकेदारी का काम करते थे और रविवार को एक निर्माण स्थल का निरीक्षण करने निपानिया क्षेत्र गए थे।

    परिजनों के मुताबिक, रविवार को अवकाश होने के कारण वह अपने काम से संबंधित एक स्थान देखने गए थे। वहां से लौटते समय किसी अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे के बाद वे सड़क पर घायल अवस्था में पड़े रहे। बाद में राहगीरों की नजर उन पर पड़ी और उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

    परिवार के सदस्य अंकित ने बताया कि मृतक अपने परिवार के इकलौते बेटे थे। उनके तीन बच्चे हैं, जिनमें से दो की शादी हो चुकी है। माता-पिता गांव में रहते हैं। अचानक हुई इस घटना से परिवार गहरे सदमे में है। पुलिस आसपास के क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की मदद से अज्ञात वाहन की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

    उधर, दूसरी घटना पलासिया क्षेत्र से सामने आई है, जहां एक निजी बीमा कंपनी में कार्यरत कर्मचारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, Ramchandra निवासी ओल्ड पलासिया को रविवार रात उनके परिचित एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    परिजनों ने पुलिस को बताया कि रविवार शाम वह सामान्य रूप से घर पर थे। कुछ समय बाद वह बाथरूम गए और बाहर आने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। बताया गया कि उन्हें अचानक उल्टियां शुरू हो गईं। स्थिति गंभीर होने पर परिजन उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उपचार शुरू होने से पहले ही उनकी मौत हो गई।

    पुलिस के अनुसार, मृतक एक निजी बीमा कंपनी में कार्यरत थे। उनका एक बेटा जबलपुर एयरपोर्ट पर नौकरी करता है, जबकि दूसरा बेटा इंदौर में रहता है। परिवार मूल रूप से छतरपुर का रहने वाला है।

    पलासिया पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।

    दोनों घटनाओं के बाद संबंधित थाना पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए जांच आगे बढ़ा दी है। एक मामले में सड़क हादसे के जिम्मेदार वाहन चालक की तलाश जारी है, जबकि दूसरे मामले में चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • एक इंच बारिश के बाद फिर बढ़ी उमस, इंदौर में रात का तापमान 6 डिग्री उछला; आज फिर बारिश की संभावना

    एक इंच बारिश के बाद फिर बढ़ी उमस, इंदौर में रात का तापमान 6 डिग्री उछला; आज फिर बारिश की संभावना


    मध्यप्रदेश । इंदौर में रविवार अलसुबह हुई करीब एक इंच बारिश ने लोगों को कुछ समय के लिए गर्मी से राहत जरूर दी, लेकिन यह राहत ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। बारिश के बाद दिन चढ़ते ही तेज धूप और बढ़ी हुई नमी ने मौसम को फिर से असहज बना दिया। पूरे दिन उमस भरी गर्मी के कारण लोग परेशान रहे, वहीं रात के तापमान में अचानक हुई बढ़ोतरी ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार रविवार को शहर का अधिकतम तापमान 36.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग एक डिग्री कम रहा। हालांकि तापमान में गिरावट के बावजूद वातावरण में मौजूद नमी के कारण उमस काफी अधिक महसूस हुई। वहीं न्यूनतम तापमान में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 25.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। पिछले दिन की तुलना में रात के तापमान में करीब 6 डिग्री का उछाल देखा गया।

    सोमवार सुबह शहर का मौसम बदला-बदला नजर आया। आसमान में हल्के बादल छाए रहे और बीच-बीच में धूप भी निकलती रही। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि दिन के दौरान इंदौर और आसपास के इलाकों में फिर से बारिश या हल्की बौछारें देखने को मिल सकती हैं। स्थानीय स्तर पर बन रहे बादल और वातावरण में मौजूद नमी के कारण प्री-मानसून गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।

    इस सीजन में अब तक इंदौर में लगभग 2 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है, जबकि केवल जून महीने में औसतन करीब 5 इंच बारिश होती है। ऐसे में अभी भी सामान्य आंकड़े तक पहुंचने के लिए अच्छी बारिश की जरूरत बनी हुई है। शहर के जलस्रोतों और भूजल स्तर को देखते हुए पर्याप्त वर्षा बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    मानसून की सुस्त चाल फिलहाल मौसम विशेषज्ञों और प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। जून के शुरुआती दिनों में अपेक्षित वर्षा नहीं होने के कारण शहर के तालाबों और जलाशयों का जलस्तर लगातार घट रहा है। बढ़ती आबादी और पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए इंदौर को हर साल अच्छी बारिश की आवश्यकता रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर को दीर्घकालिक जल संकट से बचाने के लिए सामान्य से बेहतर वर्षा जरूरी है।

    मौसम विभाग के अनुसार इंदौर में मानसून की औपचारिक एंट्री 18 जून के बाद होने की संभावना है। फिलहाल अरब सागर और आसपास के क्षेत्रों में मजबूत मौसमी सिस्टम सक्रिय नहीं होने के कारण मानसून की गति धीमी बनी हुई है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं तो मानसून तेजी पकड़ सकता है और जून के अंत तक बारिश का आंकड़ा सामान्य स्तर के करीब पहुंच सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी वर्षा केवल तालाबों को भरने के लिए ही नहीं, बल्कि भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। पर्याप्त बारिश होने पर बोरवेल, ट्यूबवेल और अन्य जलस्रोतों को भी राहत मिलेगी। ऐसे में शहरवासियों की निगाहें अब मानसून की जोरदार दस्तक पर टिकी हुई हैं।