Category: Madhya Pradesh

  • जहरीली शराब ने खोला MP-गुजरात नेटवर्क का राज, 38.59% मेथनॉल वाली शराब से 9 मौतें; उज्जैन से रईस गिरफ्तार

    जहरीली शराब ने खोला MP-गुजरात नेटवर्क का राज, 38.59% मेथनॉल वाली शराब से 9 मौतें; उज्जैन से रईस गिरफ्तार


    भोपाल ।
    गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों का मामला अब मध्य प्रदेश तक पहुंच गया है। इस कांड में मौतों का आंकड़ा नौ तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है और गुजरात पुलिस की जांच में मध्य प्रदेश से जुड़े आरोपियों की भूमिका भी सामने आई है। गुजरात स्टेट मॉनिटरिंग सेल ने मध्य प्रदेश के उज्जैन से रईस को पकड़ा है। पुलिस के मुताबिक रईस पर जहरीली शराब तैयार करने वाले नेटवर्क में अहम भूमिका निभाने का आरोप है। उसे गुजरात ले जाकर पूछताछ की जा रही है।

    जांच में मुरैना निवासी नरेंद्र सिंह यादव उर्फ डॉक्टर का नाम भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक रईस को नरेंद्र के कथित अनुभव की जानकारी थी और इसी वजह से उसे गुजरात बुलाया गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार भावनगर में रईस और नरेंद्र ने स्थानीय शराब तस्कर गौतम सोलंकी के साथ मिलकर नकली शराब तैयार की। एफआईआर में आरोप है कि पहले एक खेप तैयार की गई थी लेकिन बाद की खेप में मेथनॉल मिलाकर करीब 25 कार्टन जहरीली शराब तैयार की गई। इसे अलग अलग लोगों तक पहुंचाया गया।

    इस पूरे मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस शराब को तैयार करने में नरेंद्र की भूमिका बताई जा रही है वही शराब पीने के बाद उसकी भी तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नरेंद्र को भावनगर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां 18 अगस्त को उसकी मौत हो गई। पुलिस जांच में उसे मामले के आरोपियों में शामिल किया गया है। हालांकि किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका का अंतिम निर्धारण अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा।

    फोरेंसिक जांच में जहरीली शराब की गंभीरता भी सामने आई है। जब्त किए गए एक नमूने में 38.59 प्रतिशत मेथनॉल पाया गया जबकि इथेनॉल की मात्रा सिर्फ 0.94 प्रतिशत थी। मेथनॉल अत्यंत जहरीला पदार्थ है और लाइसेंसी शराब में इसका इस तरह मौजूद होना सामान्य नहीं है। इसी जहरीले मिश्रण को पीने के बाद कई लोगों की हालत बिगड़ी और मौतें हुईं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि मेथनॉल कहां से खरीदा गया और तैयार की गई शराब की कितनी बोतलें अभी भी लोगों तक पहुंची हैं।

    जांच के दौरान यह भी सामने आया कि रईस और उसके साथियों ने शराब बनाने के लिए कच्चा माल जुटाया था। एफआईआर के मुताबिक इसमें मेथनॉल के साथ बोतलें कैप और ब्रांडेड शराब जैसे दिखने वाले स्टीकर शामिल थे। पुलिस का आरोप है कि नकली शराब को असली ब्रांड की बोतलों जैसा रूप देकर बाजार में पहुंचाने की कोशिश की गई। गुजरात पुलिस ने अब तक इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और बड़ी मात्रा में नकली शराब रसायन तथा अन्य सामान जब्त किए हैं।

    इस मामले का मध्य प्रदेश से जुड़ना इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि मुरैना में जनवरी 2021 में जहरीली शराब कांड में 24 लोगों की मौत हुई थी। उस घटना के बाद भी अवैध शराब के नेटवर्क पर कार्रवाई की गई थी। पांच साल बाद भावनगर कांड में मुरैना के एक व्यक्ति का नाम सामने आने से अवैध शराब के अंतरराज्यीय नेटवर्क को लेकर सवाल फिर खड़े हो गए हैं। 2021 के मुरैना मामले में बाद में अदालत ने 14 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा भी सुनाई थी।

    अब गुजरात पुलिस की जांच का फोकस केवल भावनगर तक सीमित नहीं है। रईस के मध्य प्रदेश संपर्कों से लेकर शराब बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए कच्चे माल की सप्लाई और तैयार शराब के वितरण तक हर कड़ी की जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल थे। भावनगर की घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि अवैध और मिलावटी शराब किस तरह लोगों की जान के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती नेटवर्क की पूरी कड़ी तक पहुंचना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है।

  • भोपाल में रहवासी इलाकों की दुकानों पर सीलिंग की तैयारी, 8 हजार से ज्यादा नोटिस; व्यापारियों का विरोध तेज

    भोपाल में रहवासी इलाकों की दुकानों पर सीलिंग की तैयारी, 8 हजार से ज्यादा नोटिस; व्यापारियों का विरोध तेज


    भोपाल ।
    भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रहे कारोबार को लेकर नगर निगम की कार्रवाई अब और सख्त होती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम ने शहरभर में ऐसे भवनों और संपत्तियों की पहचान शुरू की है जहां आवासीय उपयोग की अनुमति के बावजूद व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के मुताबिक 62 हजार से ज्यादा संपत्तियां जांच के दायरे में हैं और नोटिस की संख्या लगातार बढ़ रही है। 18 अगस्त तक नगर निगम की ओर से 6589 नोटिस जारी किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इसके बाद भी सर्वे और नोटिस जारी करने की प्रक्रिया जारी रही।

    नगर निगम की कार्रवाई का अगला चरण सुनवाई और अंतिम आदेश से जुड़ा है। अधिकारियों के मुताबिक नोटिस मिलने के बाद संबंधित संपत्ति के दस्तावेज और वास्तविक उपयोग की जांच की जाएगी। मामले के गुण दोष के आधार पर अंतिम आदेश जारी होगा। इसके बाद यदि व्यावसायिक गतिविधि नियमों के विपरीत पाई गई और आदेश का पालन नहीं हुआ तो प्रतिष्ठान को सील करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। कुछ मामलों में अंतिम चेतावनी भी दी जा चुकी है और ऐसे प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की तैयारी है।

    इस पूरे अभियान ने भोपाल के व्यापारियों में चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि शहर के कई इलाकों में वर्षों से छोटे कारोबार चल रहे हैं और अचानक बड़े पैमाने पर सीलिंग होने से दुकानदारों के साथ वहां काम करने वाले कर्मचारियों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है। व्यापारी संगठनों ने सरकार से ऐसी नीति बनाने की मांग की है जिससे नियमों के दायरे में रहकर पुराने व्यावसायिक उपयोग को नियमित करने का रास्ता निकले। व्यापारियों की ओर से मिक्स्ड लैंड यूज और नए मास्टर प्लान को लेकर भी मांग उठाई जा रही है।

    कार्रवाई के विरोध में व्यापारी सड़क पर भी उतर चुके हैं। रोशनपुरा चौराहे पर प्रदर्शन और चक्काजाम के दौरान कारोबारियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। महिला कारोबारियों ने भी विरोध में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि ब्यूटी पार्लर क्लीनिक दुकान और दूसरे छोटे व्यवसाय बंद होने से बड़ी संख्या में लोगों की रोजी रोटी प्रभावित हो सकती है। व्यापारी संगठनों ने सरकार से व्यावहारिक समाधान निकालने की अपील की है।

    दूसरी तरफ रहवासी संगठन इस कार्रवाई के समर्थन में हैं। उनका कहना है कि आवासीय कॉलोनियों में लगातार बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों से पार्किंग ट्रैफिक शोर और सुरक्षा जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। इसी वजह से कई रहवासी संगठनों ने अभियान चलाकर आवासीय क्षेत्रों में नियमों के खिलाफ कारोबार पर रोक लगाने की मांग की है। भोपाल में रहवासियों की ओर से टॉर्च मार्च भी निकाला जा चुका है और आगे भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी की गई है।

    नगर निगम का सर्वे केवल दुकानों तक सीमित नहीं रहने वाला है। अधिकारियों की ओर से भवन की अनुमति भूमि उपयोग और आसपास की स्थिति की भी जांच की जा रही है। मुख्य मार्गों से लेकर उनसे जुड़ी गलियों और कॉलोनियों तक सर्वे का दायरा बढ़ाया गया है। जल निकायों हरित पट्टी और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में स्थित निर्माण भी जांच के दायरे में हैं। नगर निगम का उद्देश्य यह पता लगाना है कि स्वीकृत उपयोग और मौके पर हो रही गतिविधि में कितना अंतर है।

    इस विवाद की जड़ में भोपाल की पुरानी शहरी योजना और भूमि उपयोग का सवाल भी है। व्यापारियों का कहना है कि शहर के कई हिस्सों में लंबे समय से आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां एक साथ चल रही हैं। उनका तर्क है कि मास्टर प्लान में स्पष्ट नीति बनाकर इस स्थिति का समाधान किया जा सकता है। दूसरी ओर रहवासियों का कहना है कि नियमों को नजरअंदाज कर किसी भी इलाके को धीरे धीरे बाजार में बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि भोपाल में आगे रास्ता क्या निकलेगा। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम पर नियमों का पालन कराने का दबाव है तो दूसरी तरफ हजारों कारोबारियों की आजीविका का सवाल है। ऐसे में सुनवाई के बाद होने वाले अंतिम आदेश और सरकार की भविष्य की शहरी नीति इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी। फिलहाल नोटिस और सर्वे के बीच भोपाल के व्यापारियों और रहवासियों की निगाह नगर निगम की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

  • त्योहारी सीजन से पहले महंगी हुई शक्कर, बढ़ते भाव पर सरकार की नजर; स्टॉक और जमाखोरी की जांच की मांग

    त्योहारी सीजन से पहले महंगी हुई शक्कर, बढ़ते भाव पर सरकार की नजर; स्टॉक और जमाखोरी की जांच की मांग


    भोपाल ।
    भोपाल में शक्कर की कीमतों में तेजी ने त्योहारी सीजन से पहले आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय व्यापारियों के मुताबिक बाजार में शक्कर के भाव तेजी से ऊपर जा रहे हैं और खुदरा बाजार में ग्राहकों को इसके लिए और अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। हालांकि उपलब्ध स्थानीय रिपोर्टों में भोपाल के थोक भाव में 19 अगस्त को करीब 2 रुपये की बढ़ोतरी के बाद कीमत 62 रुपये किलो तक पहुंचने की बात कही गई है। इसलिए अलग-अलग क्वालिटी और बाजार स्तर के हिसाब से भाव में अंतर संभव है।

    शक्कर के बढ़ते दामों का असर केवल घरेलू रसोई तक सीमित नहीं है। किराना दुकानदारों के साथ मिठाई और खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों पर भी इसका असर पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि जब किसी जरूरी खाद्य वस्तु के भाव लगातार बदलते हैं तो दुकानदारों के लिए नया स्टॉक खरीदना और ग्राहकों को स्थिर कीमत पर माल उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाता है। वहीं ग्राहक भी बढ़े हुए भाव को लेकर सवाल करने लगे हैं।

    बाजार विशेषज्ञों ने तेजी के पीछे मांग और आपूर्ति के साथ कारोबार में बढ़ती सट्टेबाजी और जमाखोरी की आशंका पर भी नजर रखने की जरूरत बताई है। हालांकि किसी कारोबारी या समूह द्वारा कृत्रिम कमी पैदा किए जाने की पुष्टि जांच के बिना नहीं की जा सकती। ऐसे में वास्तविक स्टॉक और बाजार में हो रही खरीद बिक्री के आंकड़ों की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।

    राष्ट्रीय स्तर पर भी शक्कर की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। रॉयटर्स के मुताबिक घरेलू कीमतें करीब दो महीनों में लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ी हैं और उत्पादन में कमी को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की आशंका ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है।

    बढ़ते भाव को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने भी कदम उठाए हैं। सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए शक्कर के स्टॉक पर सीमा लागू करने का फैसला किया है। सितंबर से नवंबर के बीच 10 टन से अधिक मासिक खपत करने वाले थोक उपभोक्ताओं को 15 दिन से अधिक का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी। इससे जमाखोरी पर अंकुश लगाने और बाजार में उपलब्धता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

    इसके साथ ही सरकार ने 10 लाख टन कच्ची शक्कर के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति भी दी है। इसका मकसद घरेलू बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति लाकर कीमतों पर दबाव कम करना है। सरकार की योजना के तहत आयात की प्रक्रिया अगस्त के अंतिम सप्ताह में शुरू होगी और अक्टूबर के अंत तक इसकी अनुमति दी गई है।

    भोपाल के बाजार में अब निगाह इस बात पर है कि आने वाले दिनों में शक्कर की सप्लाई और कीमत किस दिशा में जाती है। कारोबारियों की मांग है कि बड़े स्टॉकिस्ट और थोक व्यापारियों के स्टॉक की नियमित निगरानी हो तथा असामान्य खरीद या भंडारण की स्थिति में जांच की जाए। इससे वास्तविक कमी और कृत्रिम तेजी के बीच अंतर स्पष्ट हो सकेगा।

    फिलहाल शक्कर की कीमतों में तेजी ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि त्योहारी मांग बढ़ने के साथ आम आदमी की रसोई पर इसका कितना अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। सरकार के स्टॉक नियंत्रण और आयात जैसे कदमों से बाजार में आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद है। लेकिन स्थानीय स्तर पर कीमतें कब स्थिर होंगी इसका असर सप्लाई और बाजार की गतिविधियों पर निर्भर करेगा।

  • 82 लाख की जमीन 18 लाख में रजिस्ट्री का आरोप, कटनी की DSP नेहा पच्चीसिया सहित 3 पर FIR

    82 लाख की जमीन 18 लाख में रजिस्ट्री का आरोप, कटनी की DSP नेहा पच्चीसिया सहित 3 पर FIR


    कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी में पदस्थ सीएसपी नेहा पच्चीसिया की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विभागीय जांच रिपोर्ट के बाद पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया समेत तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मामला हत्या के एक आरोपी के परिवार की बेशकीमती जमीन के कथित दबाव में कराए गए सौदे से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज और मारूफ अहमद के खिलाफ BNS की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है। कटनी एसपी अभिनय विश्वकर्मा ने FIR की पुष्टि की है।

    82.86 लाख की जमीन 18.20 लाख में रजिस्ट्री का आरोप

    शिकायत और विभागीय जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, सरकारी गाइडलाइन के अनुसार जमीन की कीमत 82 लाख 86 हजार रुपए थी। आरोप है कि इसकी रजिस्ट्री महज 18 लाख 20 हजार रुपए में कराई गई। दस्तावेजों में 15 लाख रुपए चेक और 3.20 लाख रुपए नकद भुगतान का उल्लेख है।

    मामला कुठला थाना क्षेत्र में एक युवक की हत्या के केस से जुड़ा है। इस मामले में आकाश लोधी को मुख्य आरोपी बनाया गया था। गिरफ्तारी के बाद डिफॉल्ट जमानत पर बाहर आए आकाश ने जमीन के सौदे को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे।

    DSP पर परिवार पर दबाव बनाने का आरोप

    आकाश लोधी का आरोप है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद DSP नेहा पच्चीसिया ने उसके परिवार पर जमीन बेचने के लिए दबाव बनाया। उसने दावा किया कि उसके पिता रमेश लोधी को दो दिन तक DSP के घर पर बैठाकर रखा गया। इसके बाद सरकारी वाहन से ग्राम कन्हवारा स्थित करीब 2.15 हेक्टेयर जमीन की रजिस्ट्री कराई गई।

    आकाश के मुताबिक, जमीन की गाइडलाइन कीमत करीब 82 लाख रुपए थी, जबकि सौदा 1 करोड़ 7 लाख रुपए में तय किया गया था। आरोप है कि रजिस्ट्री के समय सिर्फ 15 लाख रुपए का चेक दिया गया और बाकी 92 लाख रुपए सात दिन में देने की बात कही गई।

    रकम नहीं मिली तो CM हेल्पलाइन में शिकायत

    आरोप के मुताबिक, बाकी रकम नहीं मिलने पर रमेश लोधी ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत की। उन्होंने जमीन के नामांतरण पर भी आपत्ति जताई। इसके बाद रमेश लोधी और उनके दामाद को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने का भी आरोप लगाया गया।

    शिकायत के बाद जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और IPS अधिकारी अनु बेनीवाल को जांच सौंपी गई। जांच में जमीन के सौदे, रजिस्ट्री और रकम के लेनदेन से जुड़े कई पहलुओं की पड़ताल की गई।

    बैंक खाते में ट्रांसफर हुए 15 लाख रुपए

    जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के मुताबिक, जमीन के खरीदार मारूफ अहमद हनफी के खाते में 15 लाख रुपए क्षितिज राज के खाते से ट्रांसफर किए गए थे। शिकायत में क्षितिज राज को नेहा पच्चीसिया का कथित पार्टनर और संबंधी बताया गया है।

    जांच में कथित तौर पर यह भी देखा गया कि आपराधिक मामले की जांच के दौरान रमेश लोधी पर जमीन कम कीमत में बेचने का दबाव बनाया गया या नहीं।

    पहले भी विवादों में रही हैं नेहा पच्चीसिया

    DSP नेहा पच्चीसिया इससे पहले भी शिकायतों और विवादों को लेकर चर्चा में रही हैं। एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी की कथित अवैध वसूली की शिकायत के बाद कटनी एसपी ने उनके ड्राइवर केशव सिंह को सस्पेंड किया था। साथ ही DSP से तीन थानों का प्रभार भी वापस लिया गया था।

    इसके अलावा हत्या के एक मामले में समय पर चालान पेश नहीं होने के कारण आरोपी को डिफॉल्ट बेल मिलने का मामला भी विभागीय जांच के दायरे में आया था। इसी मामले में आरोपी ने नेहा पच्चीसिया के खिलाफ न्यायालय में परिवाद पेश कर जमीन से जुड़े गंभीर आरोप लगाए थे।

    अब पुलिस जांच से साफ होगी पूरी तस्वीर

    लगातार सामने आई शिकायतों के बाद जबलपुर रेंज के आईजी के निर्देश पर मामलों की जांच कराई गई। विभागीय जांच और शिकायतों के आधार पर अब कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज और मारूफ अहमद के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

    फिलहाल पुलिस जमीन के सौदे, कथित दबाव और बैंक खातों के जरिए हुए लेनदेन की जांच कर रही है। FIR में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

  • MP में नर्मदा-मंदाकिनी खतरे के निशान के पार, कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात, आज भारी बारिश का अलर्ट

    MP में नर्मदा-मंदाकिनी खतरे के निशान के पार, कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात, आज भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सक्रिय स्ट्रॉन्ग सिस्टम के कारण डिंडौरी, पन्ना, रीवा, सतना, छतरपुर समेत कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। नर्मदा और मंदाकिनी समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। मैहर में आज सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है, जबकि डिंडौरी में आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेंगे।

    16 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    मौसम विभाग ने निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर समेत 16 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में अगले 24 घंटे में 4 से 8 इंच तक बारिश होने का अनुमान है। इसके अलावा ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, सागर, दमोह, पन्ना, सीधी और सिवनी में भी भारी बारिश की चेतावनी है। भोपाल समेत कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।

    मऊगंज में नदी उफनी, एक मजदूर बहा

    मऊगंज में अष्टभुजा नदी के उफान पर आने से नईगढ़ी गांव में बाढ़ की स्थिति बन गई। अमृत योजना के निर्माण कार्य में लगे चार मजदूर फंस गए, जिनमें से एक तेज बहाव में बह गया। बताया गया कि वह करीब दो घंटे तक मदद के लिए गुहार लगाता रहा।

    उमरिया में भी एक बुजुर्ग के बाढ़ में बहने की खबर है। डिंडौरी में भारी बारिश के कारण आंगनवाड़ी से लेकर 12वीं तक के स्कूल बंद रहे। खरमेर नदी का पानी पुल के ऊपर आने से डिंडौरी-मंडला स्टेट हाईवे पर आवागमन बंद हो गया।

    चित्रकूट में बाजार तक पहुंचा मंदाकिनी का पानी

    चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का पानी बाजार तक पहुंच गया। सड़कों पर पानी भरने के कारण नाव चलानी पड़ी। गुप्त गोदावरी की दोनों गुफाओं को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। रीवा के निराला नगर हॉस्टल समेत नौ इलाकों में जलभराव से घरों और दुकानों में रखा सामान प्रभावित हुआ है।

    MP में अब तक 23.6 इंच बारिश

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, मानसून ट्रफ समेत अन्य सिस्टम सक्रिय होने से पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश हो रही है। 20 से 24 अगस्त के बीच बारिश का असर धीरे-धीरे मध्य और पश्चिमी हिस्सों की ओर बढ़ने के संकेत हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक 599 मिमी यानी 23.6 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य बारिश 675.1 मिमी यानी 26.6 इंच के मुकाबले यह करीब 3 इंच कम है। प्रदेश में अब तक 11% कम बारिश हुई है। पूर्वी हिस्से में 11% और पश्चिमी हिस्से में 12% बारिश सामान्य से कम है।

    39 जिलों में अब भी बारिश का घाटा

    प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से 4% से 58% तक कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का घाटा 19% तक है। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में भी सामान्य से 5% से 39% तक कम बारिश हुई है।

    इसके उलट अनूपपुर, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, बड़वानी, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन और राजगढ़ में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • 10 साल से बेटे के अगले गुरुवार का इंतजार, अब आश्रम ही परिवार; भारत भवन की कलाकार की कहानी ने झकझोरा

    10 साल से बेटे के अगले गुरुवार का इंतजार, अब आश्रम ही परिवार; भारत भवन की कलाकार की कहानी ने झकझोरा


    भोपाल । भोपाल के अपना घर वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों की जिंदगी बाहर से भले ही सामान्य नजर आए लेकिन उनके भीतर कई ऐसी कहानियां दबी हैं जो रिश्तों और बदलते पारिवारिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। हाल ही में आश्रम में रहने वाले 70 वर्षीय घनश्याम की मौत के बाद जब उनके चारों बच्चे अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचे तो वहां रहने वाले दूसरे बुजुर्ग भी भावुक हो गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक घनश्याम का निधन 4 अगस्त 2026 को हुआ था। आश्रम प्रबंधन ने परिवार के आने का इंतजार किया लेकिन कोई नहीं पहुंचा। आखिरकार पुलिस की मदद से उनका अंतिम संस्कार कराया गया।

    घनश्याम की कहानी भी संघर्ष से भरी रही। वह इंदौर में टायर और ट्यूब का कारोबार करते थे और उन्होंने अपने चार बच्चों को पालने के लिए जीवनभर मेहनत की। बुजुर्गावस्था में वह भोपाल के अपना घर वृद्धाश्रम में रहने लगे। उनके निधन के बाद परिवार से संपर्क किया गया लेकिन किसी के नहीं पहुंचने पर दो दिन तक उनके शव को इस उम्मीद में रखा गया कि शायद कोई अपना अंतिम विदाई देने आ जाए। परिवार की ओर से अंतिम संस्कार आश्रम से कराने की बात कही गई। इस घटना ने आश्रम में रह रहे दूसरे बुजुर्गों के भीतर अपने भविष्य को लेकर चिंता पैदा कर दी।

    इसी आश्रम में रहने वाली 80 वर्षीय अंजली श्रीवास्तव की कहानी भी बेहद भावुक कर देने वाली है। अंजली को करीब एक दशक से आश्रम में रहते हुए बताया गया है। उन्होंने एक पुराने प्रसंग को याद करते हुए कहा कि जब उन्हें मोतियाबिंद की समस्या थी तब एक मिठाई कारोबारी उन्हें मंदिर के पास से उठाकर आश्रम छोड़ गया था। कुछ समय बाद उनका बेटा उनसे मिलने आया और अगले गुरुवार को वापस आने की बात कही। वह गुरुवार फिर कभी नहीं आया। अंजली की यह कहानी इंतजार और उम्मीद के उस दर्द को सामने लाती है जिसमें बुजुर्ग वर्षों तक अपनों के लौटने की राह देखते रहते हैं। वर्ष 2022 की एक रिपोर्ट में भी अंजली श्रीवास्तव ने बताया था कि वह अपना घर वृद्धाश्रम में करीब 11 वर्षों से रह रही थीं।

    आश्रम में रहने वाली रानी चंद्र सक्सेना की जिंदगी भी कभी कला और सम्मान से जुड़ी थी। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने भारत भवन से जुड़कर रंगमंच पर काम किया और रंग निर्देशक बाबा कारंत के साथ कई नाटकों में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने आकाशवाणी और दूरदर्शन में समाचार वाचक के तौर पर भी काम किया। उनके पति सरकारी मत्स्य विभाग में वरिष्ठ पद पर रहे थे। आज उनकी जिंदगी का एक बड़ा सहारा उनका बेटा है जो विदेश में रहता है लेकिन दूरी और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण रानी ने करीब 15 वर्ष पहले आश्रम को अपना ठिकाना बना लिया।

    रानी का कहना है कि अब आश्रम ही उनका परिवार है। उन्हें यह उम्मीद नहीं है कि विदेश में रहने वाला बेटा उनके पास लौटकर आएगा। उन्होंने आश्रम संचालिका माधुरी मिश्रा को अपने अंतिम समय की जिम्मेदारी भी सौंप दी है। यह बात केवल एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं बल्कि उन अनेक बुजुर्गों की स्थिति को सामने लाती है जो उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच चुके हैं जहां उन्हें सबसे ज्यादा अपनेपन और सहारे की जरूरत होती है।

    अपना घर वृद्धाश्रम की संचालिका माधुरी मिश्रा के मुताबिक कोई भी बुजुर्ग खुशी से अपना घर नहीं छोड़ता। उनके अनुसार कई बुजुर्ग परिस्थितियों से मजबूर होकर आश्रम पहुंचते हैं। जब किसी बुजुर्ग की मृत्यु के बाद परिवार का कोई सदस्य नहीं आता तो वहां रहने वाले दूसरे लोगों को भी अपने भविष्य की चिंता सताने लगती है। भोपाल में वर्षों से बुजुर्गों की सेवा कर रहा यह आश्रम अब कई लोगों के लिए केवल रहने की जगह नहीं बल्कि उनका अंतिम सहारा और परिवार बन चुका है।

    इन कहानियों का सबसे बड़ा संदेश यही है कि बुजुर्गों को केवल आर्थिक मदद नहीं बल्कि समय अपनापन और सम्मान भी चाहिए। जिंदगी की भागदौड़ में परिवार कितना भी दूर क्यों न हो जाए लेकिन माता पिता के जीवन के आखिरी पड़ाव पर उनकी मौजूदगी और संवेदनशीलता सबसे बड़ी जरूरत बन जाती है।

  • मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पीथमपुर में दो बड़े उद्योगों का किया उद्घाटन, धार में निवेश और रोजगार को मिलेगी नई गति

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पीथमपुर में दो बड़े उद्योगों का किया उद्घाटन, धार में निवेश और रोजगार को मिलेगी नई गति

    मध्य प्रदेश: के धार जिले के पीथमपुर में औद्योगिक विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की मौजूदगी में एडवांस ऑप्टिकल फाइबर और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स का उद्घाटन किया गया। इन दोनों औद्योगिक इकाइयों के शुरू होने से प्रदेश में निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। सरकार के अनुसार, इन उद्योगों से 30 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है।

    पीथमपुर लंबे समय से मध्य प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल रहा है और अब यहां नई तकनीक से जुड़े उद्योगों के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। ऑप्टिकल फाइबर निर्माण से दूरसंचार और डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़े क्षेत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है, जबकि बैटरी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट ऊर्जा भंडारण और आधुनिक औद्योगिक जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों क्षेत्रों में भविष्य में मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए इन संयंत्रों की शुरुआत को औद्योगिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

    उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नए उद्योगों की स्थापना से मध्य प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। उन्होंने औद्योगिक निवेश को प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे राज्य के विकास के साथ देश की आर्थिक प्रगति को भी गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए किए गए समझौतों को अब जमीन पर उतारने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने धार जिले के औद्योगिक बदलाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बीते एक महीने के दौरान वह दूसरी बार इस क्षेत्र में आए हैं और इससे पहले भी कई उद्योगों का लोकार्पण किया गया था। उनके मुताबिक, पिछले समय में किए गए कई समझौते अब वास्तविक औद्योगिक परियोजनाओं में बदल रहे हैं। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी तेज हो रही हैं।

    धार जिले को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र कभी पिछड़ेपन के लिए जाना जाता था, लेकिन अब औद्योगिक विकास की वजह से इसकी तस्वीर बदल रही है। जनजातीय बहुल धार और पीथमपुर क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ने वाले इलाकों में शामिल हो रहे हैं। औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से स्थानीय कारोबार, परिवहन, निर्माण, सेवा और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

    ऑप्टिकल फाइबर और बैटरी निर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेश को राज्य के औद्योगिक विस्तार के साथ तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे स्थानीय युवाओं को नए प्रकार के कौशल और रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही उद्योगों के आसपास सहायक इकाइयों और सेवा क्षेत्र के विस्तार की संभावना भी बनेगी।

    सरकार का जोर प्रदेश में बड़े निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ रोजगार आधारित औद्योगिक विकास पर है। पीथमपुर में शुरू हुए दोनों प्लांट इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माने जा रहे हैं। आने वाले समय में इन परियोजनाओं से उत्पादन बढ़ने और रोजगार के अवसरों में विस्तार होने की उम्मीद है। इससे धार जिले की औद्योगिक पहचान और मजबूत होने के साथ मध्य प्रदेश के आर्थिक विकास को भी नई गति मिल सकती है।

  • बारिश से फिर भीगेगा मध्य प्रदेश 20 अगस्त को इन इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी भोपाल समेत कई जिलों में बढ़ी मौसम की हलचल

    बारिश से फिर भीगेगा मध्य प्रदेश 20 अगस्त को इन इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी भोपाल समेत कई जिलों में बढ़ी मौसम की हलचल


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है और 20 अगस्त को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश का खतरा बना हुआ है जबकि आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां धीरे धीरे मध्य और पश्चिमी हिस्सों की ओर बढ़ सकती हैं। ऐसे में लोगों को अगले कुछ दिनों तक मौसम के बदलते मिजाज पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

    20 अगस्त को टीकमगढ़ और सागर समेत कुछ इलाकों में भारी से बेहद भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा कई जिलों में तेज बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 21 अगस्त को भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का असर बना रहेगा। ग्वालियर दतिया और शिवपुरी सहित कुछ जिलों में भारी बारिश की संभावना बताई गई है। इस दौरान गरज चमक और तेज हवाओं का असर भी देखने को मिल सकता है।

    राजधानी भोपाल की बात करें तो 20 अगस्त को मौसम मुख्य रूप से बादलों से घिरा रहने और बारिश के आसार बने रहने की संभावना है। मौसम पूर्वानुमान में दिन का तापमान करीब 29 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान करीब 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। अगले कुछ दिनों में भी भोपाल में बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना दिखाई दे रही है।

    प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के कारण कई इलाकों में नदी नालों और जलाशयों के जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है। भारी बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। लगातार बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क प्रभावित होने और खेतों में पानी जमा होने जैसी स्थिति भी सामने आ सकती है।

    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक बारिश की गतिविधि के पीछे सक्रिय मानसूनी सिस्टम का प्रभाव अहम है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का जोर रहने के बाद यह गतिविधि मध्य और पश्चिमी मध्य प्रदेश की ओर बढ़ सकती है। ऐसे में इंदौर उज्जैन भोपाल सागर जबलपुर रीवा और ग्वालियर चंबल संभाग के मौसम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि किसी एक शहर में बारिश की तीव्रता अलग अलग हो सकती है इसलिए स्थानीय मौसम चेतावनी पर ध्यान देना जरूरी है।

    बारिश के साथ बिजली गिरने और गरज चमक का खतरा भी बना रह सकता है। ऐसे मौसम में खुले मैदान खेत या पेड़ के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। वाहन चालकों को भी बारिश के दौरान सड़क पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। जलभराव वाले रास्तों से गुजरने से बचना बेहतर होगा क्योंकि कई बार कम समय में हुई तेज बारिश से पानी तेजी से बढ़ सकता है।

    कुल मिलाकर 20 अगस्त को मध्य प्रदेश में मौसम सक्रिय रहने वाला है। कई जिलों में बारिश का दौर तेज हो सकता है जबकि कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिलेगी। मौसम विभाग की चेतावनियों को देखते हुए लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की ताजा जानकारी पर नजर रखनी चाहिए। आने वाले दिनों में भी प्रदेश में बारिश की गतिविधियां जारी रहने के संकेत हैं।

  • MP में फिर एक्टिव हुआ मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम, 5 जिलों में अति भारी बारिश की चेतावनी

    MP में फिर एक्टिव हुआ मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम, 5 जिलों में अति भारी बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। ट्रफ और डिप्रेशन के असर से पूर्वी हिस्से में बारिश का जोर है। मौसम विभाग ने सागर संभाग के टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सागर और दमोह में अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। अगले 24 घंटे में इन जिलों में 8 इंच तक पानी गिर सकता है। दतिया, भिंड, निवाड़ी, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, कटनी, मैहर और सतना में भारी बारिश की चेतावनी है। भोपाल समेत प्रदेश के कई जिलों में भी कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    मौसम विभाग के अनुसार, 18 से 24 अगस्त के बीच प्रदेश में बारिश का मिजाज बदलता रहेगा। 19 अगस्त को विंध्य और महाकौशल में भारी से अति भारी बारिश हुई। अब 20 से 24 अगस्त के दौरान बारिश का असर धीरे-धीरे मध्य और पश्चिमी मध्य प्रदेश की ओर बढ़ने के संकेत हैं।

    चित्रकूट में गुप्त गोदावरी उफनी, गुफाएं बंद

    बुधवार को पूर्वी मध्य प्रदेश में हुई भारी बारिश से कई जगह बाढ़ जैसे हालात बने। सतना के तराई क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के बाद चित्रकूट की गुप्त गोदावरी में पानी बढ़ गया। पहाड़ी का पानी गुफाओं के ऊपर से बहने लगा। सुरक्षा को देखते हुए चित्रकूट नगर परिषद ने दोनों गुफाएं बंद कर पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी।

    सतना के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के भुमकहर गांव में 55 वर्षीय चरवाहा नाले में बह गया। सूचना मिलने के बाद SDERF की टीम मौके पर पहुंची और उसकी तलाश शुरू की।

    डिंडौरी में नदी-नाले उफने, 12 से ज्यादा गांवों का संपर्क टूटा

    डिंडौरी में बुधवार सुबह से तेज बारिश जारी है। नदी-नाले उफान पर हैं और 12 से ज्यादा गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। पन्ना के बृजपुर क्षेत्र के कई गांवों में पानी भर गया। सिमरिया के बोदा गांव में भी जलभराव हुआ। घरों में रखा खाद्य सामग्री भी बारिश के पानी से भीग गई।

    उमरिया में संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के जोहिला डैम के तीन गेट 4 मीटर तक खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है।

    MP में अब तक 23 इंच बारिश, फिर भी 12% कम

    मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश में 1 जून से अब तक 583.4 मिमी यानी करीब 23 इंच बारिश हो चुकी है। इस अवधि में सामान्य बारिश 663.7 मिमी यानी 26.1 इंच होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में अब तक करीब 3.1 इंच यानी 12% कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 14% और पश्चिमी हिस्से में 10% कम बारिश दर्ज की गई है।

    39 जिलों में सामान्य से कम बारिश

    पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से 19% तक कम बारिश हुई है। 18 जिलों में बारिश 4% से 58% तक कम है। पश्चिमी मध्य प्रदेश के 21 जिलों में भी सामान्य से 5% से 39% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    इसके विपरीत अनूपपुर, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, बड़वानी, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन और राजगढ़ में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है।

    जून में कमी, जुलाई में कोटा पूरा; अगस्त में फिर तेज हुआ मानसून

    मौसम विभाग के अनुसार, जून में प्रदेश में सामान्य से 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश हुई, लेकिन इसके बाद मानसून दो बार कमजोर पड़ा और कई दिनों तक बारिश थमी रही।

    अगस्त में मानसून ने फिर जोर पकड़ा और महीने के दूसरे हिस्से में स्ट्रॉन्ग सिस्टम सक्रिय हुआ। इससे बारिश के आंकड़े में सुधार आया, लेकिन जून की कमी अब तक पूरी नहीं हो पाई है। पूरे मानसून सीजन में प्रदेश में औसतन 37.3 इंच बारिश होती है, जबकि भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में सामान्य बारिश करीब 38 से 39 इंच रहती है।

  • मध्यप्रदेश में चार IAS अधिकारियों का तबादला, गृह से पर्यटन और खनिज से उच्च शिक्षा विभाग में बदली जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश में चार IAS अधिकारियों का तबादला, गृह से पर्यटन और खनिज से उच्च शिक्षा विभाग में बदली जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश: में प्रशासनिक स्तर पर एक बार फिर फेरबदल किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 19 अगस्त 2026 को चार भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की नवीन पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। इस बदलाव के तहत अधिकारियों को गृह, उच्च शिक्षा, पर्यटन और नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सभी पदस्थापनाएं अस्थाई रूप से स्थानापन्न पद पर की गई हैं और यह व्यवस्था अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी।

    तबादला आदेश के अनुसार 2012 बैच की IAS अधिकारी भारती जाटव ओगरे को नई जिम्मेदारी दी गई है। वे इससे पहले खनिज साधन विभाग में अपर सचिव के पद पर कार्यरत थीं। अब उन्हें उच्च शिक्षा विभाग में अपर सचिव नियुक्त किया गया है। उनकी नई पदस्थापना 17 जून 2026 को जारी पुराने आदेश में संशोधन के तहत की गई है।

    2013 बैच की IAS अधिकारी मनीषा सेतिया की जिम्मेदारी में भी बदलाव किया गया है। वे अब तक गृह विभाग में अपर सचिव के रूप में कार्य कर रही थीं। नए आदेश के तहत उन्हें गृह विभाग से हटाकर पर्यटन विभाग में अपर सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पर्यटन विभाग के प्रशासनिक कामकाज में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

    इसी क्रम में 2016 बैच की IAS अधिकारी शुचिस्मिता सक्सेना को भी नई जिम्मेदारी मिली है। वे पहले लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में उप सचिव के पद पर कार्यरत थीं। अब उन्हें गृह विभाग में उप सचिव बनाया गया है। गृह विभाग राज्य प्रशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यहां उनकी नई पदस्थापना प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    2017 बैच के IAS अधिकारी विवेक कुमार को भी नई जिम्मेदारी दी गई है। वे फिलहाल पदस्थापना का इंतजार कर रहे थे। अब उन्हें नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग में उप सचिव नियुक्त किया गया है। उनकी नई पदस्थापना के बाद विभाग से जुड़े प्रशासनिक कार्यों में उनकी भूमिका तय होगी।

    सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से जारी किया गया है। आदेश पर मुख्य सचिव अशोक बर्नवाल के हस्ताक्षर हैं। आदेश की प्रतियां संबंधित अधिकारियों और विभिन्न प्रशासनिक कार्यालयों को भेजी गई हैं। इनमें राज्यपाल कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग तथा मध्यप्रदेश भवन, नई दिल्ली सहित संबंधित विभाग शामिल हैं।

    गृह, उच्च शिक्षा और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण विभागों में अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव को प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। खासतौर पर गृह विभाग में अधिकारी स्तर पर बदलाव होने से विभागीय कामकाज की जिम्मेदारियों का नया वितरण हुआ है। वहीं उच्च शिक्षा विभाग में नई पदस्थापना से शिक्षा प्रशासन से जुड़े कार्यों में नई भूमिका तय होगी।

    पर्यटन विभाग में मनीषा सेतिया की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब राज्य में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने और विभिन्न पर्यटन स्थलों की सुविधाओं को मजबूत करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। दूसरी ओर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग में विवेक कुमार की नियुक्ति ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

    सरकार की ओर से इन तबादलों के पीछे किसी विशेष कारण का उल्लेख नहीं किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार यह प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों की नवीन पदस्थापना है। अब संबंधित अधिकारी अपनी नई जिम्मेदारियों के अनुसार विभागों में कार्यभार संभालेंगे और उनके कार्यभार ग्रहण करने के बाद विभागीय कामकाज में बदलाव दिखाई देगा।