Category: Madhya Pradesh

  • ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: विकास नहीं, भ्रष्टाचार के आरोप, चार तहसीलदार हटाए गए

    ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: विकास नहीं, भ्रष्टाचार के आरोप, चार तहसीलदार हटाए गए


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के अंतर्गत आने वाले पलवा गांव में मंगलवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब जिले के कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, एसडीएम और तहसीलदारों का काफिला निरीक्षण के लिए गांव पहुंचा। जैसे ही अधिकारी गांव की बदहाल सड़कों और जलभराव वाले इलाकों में पहुंचे, ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा।

    ग्रामीणों ने मौके पर ही प्रशासनिक अमले को घेर लिया और विकास कार्यों में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया। लोगों का कहना था कि गांव में सड़कें, नालियां और जल निकासी की व्यवस्था सिर्फ कागजों में पूरी दिखाई जाती है, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद गांव की हालत बदतर बनी हुई है। जगह-जगह कीचड़, गंदा पानी और टूटी सड़कों ने आम जनजीवन को मुश्किल में डाल दिया है।

    कीचड़ में फंसी अफसरों की गाड़ियां, बढ़ा गुस्सा
    निरीक्षण के दौरान स्थिति तब और बिगड़ गई जब अधिकारियों के वाहन दलदल जैसी सड़कों में फंस गए। काफी मशक्कत के बाद गाड़ियों को बाहर निकाला गया, लेकिन यह दृश्य ग्रामीणों के गुस्से को और भड़का गया। लोगों ने सवाल उठाया कि जब प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियां गांव में सुरक्षित नहीं चल पा रहीं, तो बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों की हालत कितनी खराब होगी। ग्रामीणों ने कहा कि बारिश के मौसम में स्थिति और भयावह हो जाती है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुधार नहीं हुआ।

    भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग
    ग्रामीणों ने सरपंच और सहायक सचिव सहित स्थानीय अधिकारियों पर विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उनका कहना था कि नालियों का निर्माण बेहद घटिया गुणवत्ता का हुआ है, जिससे पानी सड़कों पर भर जाता है। ग्रामीणों ने मांग की कि पूरे विकास कार्यों की उच्चस्तरीय वित्तीय जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।

    कलेक्टर ने लिया एक्शन, 4 तहसीलदारों के तबादले
    घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत सख्त कदम उठाए। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने रात में ही चार तहसीलदारों के स्थानांतरण आदेश जारी कर दिए। इसमें शहपुरा तहसील से जुड़े अधिकारियों के पदस्थापना परिवर्तन शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में विकास कार्यों की समीक्षा की जा रही है और लापरवाही पाए जाने पर आगे भी कार्रवाई होगी।

    पलवा गांव की यह घटना एक बार फिर ग्रामीण विकास योजनाओं की जमीनी सच्चाई को उजागर करती है। जहां एक ओर कागजों में विकास दिखता है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

  • दवा संकट की आशंका: जबलपुर में मेडिकल स्टोर्स बंद, प्रशासन ने की वैकल्पिक व्यवस्था

    दवा संकट की आशंका: जबलपुर में मेडिकल स्टोर्स बंद, प्रशासन ने की वैकल्पिक व्यवस्था


    नई दिल्ली । ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी के बढ़ते चलन के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने बुधवार को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया। इस हड़ताल का असर पूरे देश में देखने को मिला, जहां करीब 12 लाख से अधिक मेडिकल स्टोर बंद रहे। मध्यप्रदेश के कई जिलों के साथ-साथ जबलपुर में भी इसका व्यापक असर पड़ा, जहां लगभग 2000 मेडिकल स्टोरों ने अपने शटर गिरा दिए।

    जबलपुर में दवा बाजार पर असर, दुकानें बंद
    जबलपुर शहर में सुबह से ही मेडिकल स्टोर बंद नजर आए। दवा खरीदने पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि अस्पतालों के अंदर स्थित मेडिकल स्टोर्स को हड़ताल से बाहर रखा गया है, ताकि गंभीर मरीजों को दवा मिलती रहे।

    केमिस्ट संगठनों का आरोप स्वास्थ्य के लिए खतरा
    केमिस्ट संगठनों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना उचित जांच के दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे गलत दवा सेवन और दुरुपयोग की आशंका बढ़ रही है। उनका तर्क है कि ऑफलाइन मेडिकल स्टोर्स में दवाएं देने से पहले डॉक्टर की पर्ची और जांच की प्रक्रिया सख्ती से अपनाई जाती है। संगठन का मानना है कि ई-फार्मेसी के बढ़ते प्रभाव से स्थानीय दुकानदारों का व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है।

    प्रशासन ने की वैकल्पिक व्यवस्था
    हड़ताल को देखते हुए जिला प्रशासन ने मरीजों की सुविधा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था लागू की है। सरकारी अस्पतालों, जन औषधि केंद्रों और अमृत फार्मेसी को चालू रखा गया है ताकि मरीजों को जरूरी दवाएं मिल सकें।

    हेल्पलाइन और आपात व्यवस्था जारी
    आपात स्थिति में दवा उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। जरूरत पड़ने पर मरीज या परिजन औषधि निरीक्षकों से सीधे संपर्क कर सकते हैं।

    देवेंद्र कुमार जैन: 88199 04545
    प्रवीण पटेल: 95899 07750
    कंट्रोल रूम (भोपाल): 0755-2665385

  • होटल में जानलेवा हमला: ग्वालियर में बदमाश ने की फायरिंग, आरोपी पुलिस की गिरफ्त में

    होटल में जानलेवा हमला: ग्वालियर में बदमाश ने की फायरिंग, आरोपी पुलिस की गिरफ्त में


    नई दिल्ली ।  ग्वालियर के हजीरा चौराहा स्थित होटल करिश्मा में उस समय हड़कंप मच गया जब सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात करीब 1:30 बजे कुछ बदमाशों ने फायरिंग कर दी। बताया जा रहा है कि पूरी घटना सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि आरोपियों को देर रात खाना नहीं मिला था। होटल संचालक रवि सिंह उर्फ सोनू जब शटर बंद कर रहे थे, तभी दो बाइक पर चार युवक वहां पहुंचे और खाना मांगने लगे। होटल बंद होने और तंदूर ठंडा होने की बात कहने पर विवाद शुरू हो गया।

    गाली-गलौज से लेकर ताबड़तोड़ फायरिंग तक
    विवाद बढ़ते ही मामला हिंसक हो गया। आरोपियों ने पहले गाली-गलौज की और फिर दहशत फैलाने के लिए फायरिंग शुरू कर दी। सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि आरोपी सूरज गौड़ अपने साथी को उकसाते हुए “मार दे इनको आज” कह रहा है। इसी दौरान करण बाथम ने कट्टा निकालकर होटल संचालक पर गोली चला दी, लेकिन निशाना चूकने से उनकी जान बच गई।

    होटल में तोड़फोड़, मौके से फरार हुए आरोपी
    फायरिंग के बाद आरोपियों ने होटल के शटर और काउंटर में तोड़फोड़ भी की और मौके से फरार हो गए। अचानक हुई इस घटना से इलाके में दहशत फैल गई और स्थानीय लोग मौके पर इकट्ठा हो गए।

    एक आरोपी गिरफ्तार, बाकी की तलाश जारी
    पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी सूरज गौड़ को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, अन्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। एसएसपी ग्वालियर के अनुसार, यह मामला गंभीर आपराधिक प्रवृत्ति का है और बाकी फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    CCTV बना सबसे बड़ा सबूत
    घटना की पूरी वारदात होटल में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है, जिससे पुलिस को आरोपियों की पहचान और कार्रवाई में मदद मिली है।

  • भोजशाला की प्रतिमा की कहानी: 26 कलाकारों ने 35 दिन में तैयार की थी वाग्देवी मूर्ति

    भोजशाला की प्रतिमा की कहानी: 26 कलाकारों ने 35 दिन में तैयार की थी वाग्देवी मूर्ति


    नई दिल्ली । मध्यप्रदेश के ग्वालियर में एक ऐसी ऐतिहासिक और भावनात्मक कहानी छिपी है, जो धार की भोजशाला से जुड़ी है। यहां रखी हुई मां वाग्देवी (सरस्वती) की अष्टधातु प्रतिमा पिछले 15 वर्षों से एक घर में सुरक्षित रखी गई है, जिसका निर्माण 2011 में मात्र 35 से 40 दिनों में 26 कलाकारों ने मिलकर किया था।

    यह प्रतिमा मूल रूप से धार स्थित भोजशाला के गर्भगृह में स्थापित की जानी थी, लेकिन उस समय उपजे धार्मिक और प्रशासनिक विवाद के कारण इसे वहां नहीं ले जाया जा सका और ग्वालियर में ही रोक दिया गया।

    लंदन म्यूजियम वाली प्रतिमा की हूबहू कॉपी
    इस प्रतिमा की सबसे खास बात यह है कि इसे लंदन म्यूजियम में रखी मूल मां वाग्देवी की मूर्ति के समान आकार और डिज़ाइन में बनाया गया है।
    यह प्रतिमा अष्टधातु (आठ धातुओं के मिश्रण) से बनी है
    ऊंचाई लगभग साढ़े 3 फीट और वजन 250 किलो से अधिक है
    2011 में इसकी लागत लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये आई थी
    इसे पूरी तरह पारंपरिक शिल्प और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तैयार किया गया

    विवाद के कारण रुक गई प्राण-प्रतिष्ठा
    मूर्तिकार प्रभात राय के परिवार के अनुसार, जब 2011 में बसंत पंचमी पर प्रतिमा की स्थापना की तैयारी थी, तभी भोजशाला को लेकर विवाद भड़क गया। सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने प्रतिमा को धार भेजने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद कई वर्षों तक हर बसंत पंचमी पर पुलिस सुरक्षा में प्रतिमा को कुछ दिनों के लिए प्रदर्शित किया जाता रहा, लेकिन स्थायी स्थापना कभी नहीं हो सकी।

    15 साल से ग्वालियर में सुरक्षा के साये में
    इस प्रतिमा को लेकर स्थिति बेहद संवेदनशील रही। शुरुआती वर्षों में मूर्तिकार के घर पर पुलिस सुरक्षा तक तैनात रही। प्रतिमा को आज भी ग्वालियर में सुरक्षित रखा गया है और इसकी देखरेख परिवार कर रहा है। मूर्तिकार परिवार का कहना है कि यह केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है।

    कोर्ट फैसले के बाद फिर जगी उम्मीद
    हाल ही में भोजशाला को लेकर आए कोर्ट के फैसले के बाद इस प्रतिमा को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है। हिंदू पक्ष का कहना है कि मूल प्रतिमा को वापस लाकर भोजशाला में स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। हालांकि, फिलहाल इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

    “अगर कोई नहीं ले गया तो मैं इसे रखूंगा” – मूर्तिकार का बयान
    मूर्तिकार प्रभात राय के बेटे अनुज राय ने भावुक होकर कहा कि यदि भविष्य में प्रतिमा को भोजशाला ले जाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती, तो वे इसे अपने पास ही गर्व से सुरक्षित रखेंगे। उनके अनुसार, यह प्रतिमा केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है।

    लंदन में रखी मूल प्रतिमा पर भी चर्चा
    इधर, धार की मूल मां वाग्देवी प्रतिमा के लंदन म्यूजियम में होने को लेकर भी मांगें उठ रही हैं कि उसे भारत लाकर भोजशाला में पुनः स्थापित किया जाए। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह प्रतिमा खंडित अवस्था में है, लेकिन धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • बदनामी के डर से खामोशी: हनीट्रैप मामले में कई पीड़ित नहीं आ रहे सामने

    बदनामी के डर से खामोशी: हनीट्रैप मामले में कई पीड़ित नहीं आ रहे सामने


    नई दिल्ली ।  मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल में सामने आए हाईप्रोफाइल हनीट्रैप केस ने पूरे सिस्टम को हिला दिया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस पूरे गैंग की शुरुआत जेल के अंदर हुई थी, जहां श्वेता विजय जैन और अलका दीक्षित की दोस्ती बनी थी। यहीं से “फंसाओ और वसूली करो” की खतरनाक साजिश का बीज पड़ा। जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने मिलकर एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जो नेताओं, कारोबारियों और प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाकर उन्हें हनीट्रैप में फंसाता और फिर वीडियो-फोटो के जरिए मोटी रकम की मांग करता था।

    कैसे चलता था पूरा हनीट्रैप सिस्टम?
    पुलिस के अनुसार गैंग बेहद संगठित तरीके से काम करता था। पहले किसी महिला के जरिए टारगेट से नजदीकी बढ़ाई जाती थी। फिर निजी मुलाकातों में आपत्तिजनक फोटो और वीडियो रिकॉर्ड किए जाते थे। इसके बाद धमकी देकर लाखों-करोड़ों की वसूली शुरू हो जाती थी। गैंग के सदस्य खुद को कभी कारोबारी, कभी राजनीतिक संपर्क वाला व्यक्ति बताकर भरोसा जीतते थे। कई मामलों में फर्जी पहचान और सोशल मीडिया नेटवर्क का भी इस्तेमाल किया गया।

    हाईप्रोफाइल नामों तक पहुंचने की कोशिश
    जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह ने सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि दिल्ली तक के नेताओं को टारगेट करने की कोशिश की थी। पुलिस को शक है कि गैंग के पास कई प्रभावशाली लोगों के निजी वीडियो और डाटा मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल दबाव बनाने में किया जा रहा था।

    पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 40 अफसरों की टीम एक्टिव
    मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच ने 40 से अधिक पुलिसकर्मियों की 7 टीमें बनाकर इंदौर और भोपाल में एक साथ छापेमारी की। पांच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और कई मोबाइल, लैपटॉप और डिजिटल सबूत जब्त किए गए हैं। पुलिस को यह भी शक है कि कुछ वीडियो एआई (AI) तकनीक से तैयार किए गए हो सकते हैं, जिसकी जांच की जा रही है।

    ड्रग्स और हथियार नेटवर्क से भी जुड़े तार
    जांच में सामने आया है कि इस गैंग के कुछ सदस्य ड्रग्स और अवैध हथियार तस्करी नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस अब बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल डिटेल्स और सोशल मीडिया चैट्स की गहन जांच कर रही है।

    बदनामी के डर से कई पीड़ित सामने नहीं आए
    पुलिस का मानना है कि इस गिरोह ने कई बड़े कारोबारियों और नेताओं को पहले भी निशाना बनाया है, लेकिन सामाजिक बदनामी के डर से कई लोग शिकायत दर्ज नहीं करा रहे।

    उज्जैन से शुरू हुआ विवाद, बना बड़ा रैकेट
    सूत्रों के मुताबिक अलका दीक्षित का उज्जैन में एक जमीन विवाद था, जिसके बाद उसने हनीट्रैप का रास्ता अपनाया। धीरे-धीरे यह नेटवर्क भोपाल, इंदौर और आसपास के जिलों तक फैल गया।

    पुलिस का बयान
    डीसीपी क्राइम ब्रांच के अनुसार जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में कई बड़े और चौंकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं।
  • #JusticeForTwisha ट्रेंड में: सोशल मीडिया पर इंसाफ की मांग तेज

    #JusticeForTwisha ट्रेंड में: सोशल मीडिया पर इंसाफ की मांग तेज


    नई दिल्ली । भोपाल की दिवंगत अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की मौत के बाद सोशल मीडिया पर #JusticeForTwisha अभियान तेजी से वायरल हो गया है। इंस्टाग्राम, X (ट्विटर) और व्हाट्सऐप पर लोग लगातार उनके लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। शुरुआत उनके परिवार और दोस्तों द्वारा पोस्ट और वीडियो शेयर करने से हुई, जिसके बाद यह मुद्दा धीरे-धीरे बड़े सोशल मीडिया मूवमेंट में बदल गया।

    हजारों पोस्ट और तेजी से बढ़ता ट्रेंड
    रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक 6,000 से ज्यादा पोस्ट X पर और लगभग 4,000 से ज्यादा पोस्ट इंस्टाग्राम पर #JusticeForTwisha के साथ किए जा चुके हैं। जैसे-जैसे यह हैशटैग बढ़ा, सोशल मीडिया एल्गोरिदम ने इसे ट्रेंडिंग में शामिल कर दिया, जिससे यह और ज्यादा लोगों तक पहुंचने लगा।

    सोशल मीडिया अभियान कैसे बनता है ट्रेंड?
    विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे अभियान अक्सर तीन चरणों में फैलते हैं:
    परिवार या करीबी लोगों की भावनात्मक पोस्ट से शुरुआत
    सोशल मीडिया यूजर्स और क्रिएटर्स का जुड़ाव
    एल्गोरिदम द्वारा हैशटैग को ट्रेंड में प्रमोट करना
    जब किसी हैशटैग पर कम समय में ज्यादा लाइक, शेयर और कमेंट आते हैं, तो वह तेजी से वायरल हो जाता है।

    क्या इसके पीछे कोई बड़ी टीम होती है?
    ऐसे अभियानों के पीछे हमेशा संगठित टीम हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार यह पूरी तरह ऑर्गेनिक होता है, जहां लोग भावनात्मक रूप से जुड़कर पोस्ट करते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में डिजिटल मार्केटिंग, इन्फ्लुएंसर्स और सोशल मीडिया नेटवर्क भी इन अभियानों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं। पिछले बड़े मामलों जैसे सुशांत सिंह राजपूत केस में भी इसी तरह के हैशटैग ट्रेंड हुए थे, जहां लाखों यूजर्स एक साथ जुड़ गए थे।

    क्या ऐसे कैंपेन में पैसा भी लगता है?
    डिजिटल मार्केटिंग विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ अभियानों में सोशल मीडिया प्रमोशन और कंटेंट पुश करने के लिए पैसे भी खर्च किए जाते हैं। हालांकि, हर ट्रेंड पेड नहीं होता। कई बार यह पूरी तरह यूजर्स की भावनाओं से प्रेरित होता है।

    फेक अकाउंट और डिजिटल पॉलिटिक्स का पहलू
    कुछ मामलों में ऐसे ट्रेंड्स को बढ़ाने के लिए फेक अकाउंट्स और संगठित डिजिटल नेटवर्क का भी इस्तेमाल होने के आरोप लगते रहे हैं। मुंबई पुलिस जैसी जांचों में पहले यह भी सामने आया था कि हजारों फेक अकाउंट्स से हैशटैग ट्रेंड करवाए गए थे।

    #JusticeForTwisha जैसे अभियान यह दिखाते हैं कि सोशल मीडिया आज सिर्फ बातचीत का नहीं, बल्कि न्याय की मांग का भी बड़ा मंच बन चुका है। लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि जानकारी और तथ्यों की जांच के बाद ही किसी ट्रेंड को आगे बढ़ाया जाए।

  • दवा बिक्री को लेकर बड़ा विरोध: भोपाल-छतरपुर में केमिस्टों की नारेबाजी

    दवा बिक्री को लेकर बड़ा विरोध: भोपाल-छतरपुर में केमिस्टों की नारेबाजी


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में बुधवार को दवा व्यापारियों की बड़ी हड़ताल देखने को मिली। प्रदेशभर में लगभग 41 हजार मेडिकल स्टोर्स बंद रहे, जबकि अकेले भोपाल में ही 3 हजार से ज्यादा दुकानों ने कामकाज रोक दिया। यह बंद ऑनलाइन दवा बिक्री के बढ़ते प्रभाव और नियमों की कमी के विरोध में बुलाया गया था। इस दौरान केवल अस्पतालों के अंदर संचालित मेडिकल स्टोर्स को ही छूट दी गई, ताकि इमरजेंसी मरीजों को दवा मिल सके।

    केमिस्टों का आरोप: ऑनलाइन दवाएं बन रही खतरा
    केमिस्ट संगठनों का कहना है कि बिना सख्त नियमों के ऑनलाइन दवाओं की बिक्री बढ़ रही है, जिससे कई गंभीर समस्याएं पैदा हो रही हैं। उनका आरोप है कि:
    नकली या गलत दवाओं की संभावना बढ़ रही है
    पर्चियों की सत्यता की सही जांच नहीं हो रही
    छोटे स्थानीय मेडिकल स्टोर्स को भारी नुकसान हो रहा है
    भारी डिस्काउंट के कारण बाजार असंतुलित हो रहा है
    इस मुद्दे को लेकर ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स ने पूरे देश में विरोध दर्ज कराया है।

    मरीजों की परेशानी, अस्पताल स्टोर्स पर बढ़ी भीड़
    दवा दुकानों के बंद रहने से आम मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर लोग जरूरी दवाइयों के लिए सरकारी अस्पतालों की ओर दौड़ते नजर आए, जिससे वहां भीड़ बढ़ गई। इमरजेंसी सेवाओं को ध्यान में रखते हुए जिला स्तर पर टास्क फोर्स बनाई गई है, जो जरूरतमंद मरीजों तक दवाएं पहुंचाने का काम कर रही है।

    भोपाल, छतरपुर और अन्य जिलों में प्रदर्शन
    भोपाल में थोक दवा बाजार में केमिस्टों ने एकत्र होकर नारेबाजी की और कलेक्टोरेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपने की तैयारी की। छतरपुर और अन्य जिलों में भी इसी तरह विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। कई जगह केमिस्टों ने बाइक रैलियां निकालीं और प्रशासन को अपनी मांगें सौंपीं।

    केमिस्टों की प्रमुख मांगें
    हड़ताल कर रहे व्यापारियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
    ई-फार्मेसी पर सख्त और स्पष्ट नियम लागू किए जाएं
    ऑनलाइन दवा बिक्री पर नियंत्रण लगाया जाए
    भारी डिस्काउंट वाली ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगे
    नकली और बिना निगरानी वाली दवाओं पर सख्त कार्रवाई हो

    कोविड के दौरान मिली थी छू
    कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन दवा बिक्री को सरकार ने आवश्यक सेवा के तहत अनुमति दी थी, ताकि लोगों को घर बैठे दवाएं मिल सकें। इसी छूट का उपयोग अब केमिस्ट संगठन नियमों की कमी के रूप में बता रहे हैं।

    यह विरोध सिर्फ व्यापार का नहीं बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा का मुद्दा बन गया है। एक तरफ ऑनलाइन दवा बिक्री की सुविधा है, तो दूसरी तरफ केमिस्ट संगठन इसे जोखिम भरा बता रहे हैं। आने वाले समय में इस पर सरकार की नीति और नियमों की भूमिका बेहद अहम होगी।

  • मध्य प्रदेश में भीषण लू का कहर: पारा 45°C के पार, कई जिलों में जनजीवन प्रभावित

    मध्य प्रदेश में भीषण लू का कहर: पारा 45°C के पार, कई जिलों में जनजीवन प्रभावित

    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश इन दिनों भीषण गर्मी और तपती लू की चपेट में है। प्रदेश के कई जिलों में तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है और हालात ऐसे बन गए हैं कि दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसर जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के कई हिस्सों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

    राज्य के ग्वालियर, भिंड, मुरैना, रतलाम, खंडवा, खरगोन और आसपास के इलाकों में गर्म हवाओं का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोग घरों से निकलने से बच रहे हैं। दोपहर के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब लू के थपेड़े शरीर को झुलसा देने वाले हो जाते हैं।

    मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों तक राहत मिलने की संभावना कम है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह भीषण लू 20 मई तक जारी रह सकती है। इसके बाद ही मौसम में हल्का बदलाव देखने को मिल सकता है। विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

    गर्मी का असर सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और कमजोरी के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि लोग दिन के सबसे गर्म समय यानी 12 बजे से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें और पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थों का सेवन करें।

    स्थानीय प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि वे धूप में अनावश्यक यात्रा से बचें और हल्के, ढीले व सूती कपड़े पहनें। साथ ही, सिर को ढककर बाहर निकलने और छायादार स्थानों में रहने की सलाह दी गई है।

    गांवों और कस्बों में स्थिति और अधिक कठिन हो गई है, जहां बिजली कटौती और पानी की कमी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। किसान वर्ग भी इस गर्मी से प्रभावित हो रहा है, क्योंकि खेतों में काम करना दिन के समय लगभग असंभव हो गया है।

    कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में गर्मी का यह दौर लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण बन गया है। मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए आने वाले दिनों में सतर्क रहने की आवश्यकता और भी बढ़ गई है। फिलहाल लोगों को राहत का इंतजार है, लेकिन आसमान से बरसती आग अभी थमती नजर नहीं आ रही है।

  • MP में भीषण गर्मी का कहर, नौगांव में पारा 47 डिग्री पहुंचा, 4 दिन लू का अलर्ट

    MP में भीषण गर्मी का कहर, नौगांव में पारा 47 डिग्री पहुंचा, 4 दिन लू का अलर्ट

    भोपाल। मध्य प्रदेश इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। प्रदेश में सूरज आग बरसा रहा है और दिन के साथ रातें भी तपने लगी हैं। मंगलवार को छतरपुर जिले के नौगांव में सीजन का सबसे अधिक 47 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जबकि खजुराहो में पारा 46.4 डिग्री तक पहुंच गया। इस सीजन में पहली बार तापमान 47 डिग्री के आंकड़े तक पहुंचा है।

    मौसम विभाग (IMD) ने प्रदेश में अगले चार दिनों तक हीटवेव यानी लू चलने का अलर्ट जारी किया है। मंगलवार को राज्य के 22 शहरों में अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। नौगांव और खजुराहो के बाद दतिया तीसरा सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 45.8 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।

    इसके अलावा राजगढ़ में 45.6 डिग्री, दमोह में 45.5 डिग्री, शाजापुर, टीकमगढ़, गुना और सागर में 45.2 डिग्री, सतना में 45.1 डिग्री तथा मुरैना, शहडोल, रायसेन, रीवा और श्योपुर में 45 डिग्री तापमान दर्ज हुआ। मंडला में 44.6 डिग्री, उमरिया में 44.5 डिग्री, खरगोन में 44.4 डिग्री, रतलाम में 44.2 डिग्री और खंडवा में 44.1 डिग्री तापमान रहा।

    प्रदेश के बड़े शहरों में भी गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़े। ग्वालियर में इस सीजन में पहली बार तापमान 45 डिग्री पहुंचा। भोपाल में 44.2 डिग्री, इंदौर में 43.7 डिग्री, उज्जैन में 43.8 डिग्री और जबलपुर में 44.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। भोपाल में यह सीजन का सबसे गर्म दिन रहा। एयरपोर्ट ऑब्जर्वेटरी में तापमान 44.2 डिग्री रिकॉर्ड हुआ, जबकि अरेरा हिल्स स्थित ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन में पारा 46 डिग्री तक पहुंच गया। नए भोपाल में सीजन की पहली लू भी चली और रात का तापमान पहली बार 30 डिग्री दर्ज हुआ।

    मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिन प्रदेश में तीखी गर्मी बनी रहेगी। पूरे राज्य में लू का असर देखने को मिलेगा। मंगलवार को सतना और टीकमगढ़ में तेज गर्मी के बीच दो लोगों की मौत हो गई। आशंका जताई जा रही है कि दोनों की मौत हीट स्ट्रोक यानी लू लगने से हुई।

    बुधवार के लिए मौसम विभाग ने भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, सागर, दमोह, रायसेन और रतलाम जिलों में तेज लू का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

    वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, श्योपुर, मुरैना, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, आगर-मालवा, खरगोन, शाजापुर, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, सीहोर, विदिशा, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, मंडला, शहडोल और मैहर में लू चलने की संभावना जताई गई है।

    इसके अलावा राजगढ़, रायसेन, कटनी, उमरिया, डिंडौरी, बालाघाट और छिंदवाड़ा में वॉर्म नाइट की चेतावनी जारी की गई है, यानी रात का तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। बैतूल, पांढुर्णा, सिवनी और अनूपपुर में भी गर्मी का असर बना रहेगा।

    मौसम विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच गर्मी और लू का प्रभाव सबसे ज्यादा रहेगा। जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी गई है।

  • कांग्रेस और भीम आर्मी का विरोध: शिवपुरी में नशे के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

    कांग्रेस और भीम आर्मी का विरोध: शिवपुरी में नशे के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग


    मध्य प्रदेश। शिवपुरी में मंगलवार को IPL सट्टा और स्मैक जैसे नशे के बढ़ते कारोबार के खिलाफ बड़ा जनआंदोलन देखने को मिला। कांग्रेस नेताओं, भीम आर्मी, सामाजिक संगठनों और रावत समाज के लोगों ने संयुक्त रूप से रैली निकालकर पुलिस कंट्रोल रूम का घेराव किया और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा।

    प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जिले में IPL मैचों के दौरान सट्टेबाजी का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है, जिससे कई परिवार आर्थिक संकट में फंस चुके हैं। वहीं स्मैक जैसे नशीले पदार्थों का कारोबार युवाओं को बर्बादी की ओर धकेल रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति अब सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तर पर गंभीर संकट बन चुकी है।

    ज्ञापन में कई मामलों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि सट्टा कारोबार के दबाव और कर्ज के कारण कुछ लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत या आत्महत्या तक की घटनाएं सामने आई हैं। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि IPL सट्टा रैकेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और स्मैक कारोबारियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाए।

    कांग्रेस विधायक कैलाश कुशवाह ने इस दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कार्रवाई अक्सर छोटे स्तर के लोगों तक सीमित रह जाती है, जबकि असली संचालक नेटवर्क के बड़े खिलाड़ी खुलेआम बच जाते हैं। उन्होंने पुलिस से अपील की कि चेन सिस्टम के जरिए मुख्य आरोपियों तक पहुंचा जाए।

    रावत समाज की ओर से यशपाल रावत ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि समाज के कुछ युवा नशे के कारोबार में शामिल पाए जा रहे हैं, जिनका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। साथ ही ऐसे लोगों की सूची बनाकर पुलिस को सौंपी जाएगी ताकि कार्रवाई तेज की जा सके।

    वहीं पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि जिले में सट्टा और नशे के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान में पुलिस के साथ-साथ आम जनता और सामाजिक संगठनों का सहयोग भी जरूरी होगा।

    कुल मिलाकर शिवपुरी में बढ़ते नशे और सट्टे के खिलाफ यह प्रदर्शन प्रशासन पर सख्त कार्रवाई का दबाव बढ़ाता है, जबकि पुलिस ने जल्द बड़े अभियान की बात कहकर स्थिति को नियंत्रित करने का भरोसा दिया है।